Sikh Gaya Bhai Chudai Karni

मेरा नाम आशा है और यह मेंरी पहली स्टोरी है. मेरा छोटा भाई दसवीं मैं पढ़ता है. वो गोरा और करीब मेंरे ही बराबर लंबा भी है. मुझे भईया के गुलाबी होंठ बहुत प्यारे लगते हैं. दिल करता है की बस चबा दूँ. पापा आर्मी में है और माँ गवर्नमेंट जॉब मैं. माँ जब जॉब की वजह
से कहीं बाहर जाती तो घर में बस हम दो भाई बहन ही रह जाते थे. मेंरे भाई का नाम अमित है और वो मुझे दीदी कहता है।

एक बार माँ कुछ दिनों के लिए बाहर गयी थी. उनकी चुनाव में ड्यूटी लग गयी थी. माँ को एक हफ्ते बाद आना था. रात मैं डिनर के बाद कुछ देर टीवी देखा फिर अपने-अपने कमरे मैं सोने के लिए चले गये. करीब एक आध घंटे बाद प्यास लगने की वजह से मेंरी नींद खुल गयी. अपनी साइड टेबल पर बोतल देखी तो वो खाली थी. मैं उठकर किचन मैं पानी पीने गयी तो लौटते समय देखा की अमित के कमरे की लाइट ऑन थी और दरवाज़ा भी थोडा सा खुला था. मुझे लगा की शायद वो लाइट ऑफ करना भूल गया है मैं ही बंद कर देती हूँ. मैं चुपके से उसके कमरे मैं गयी लेकिन अंदर का नज़ारा देखकर मैं हैरान हो गयी।

अमित एक हाथ मैं कोई किताब पकड़कर उसे पढ़ रहा था और दूसरे हाथ से अपने तने हुए लंड को पकड़कर मुठ मार रहा था. मैं कभी सोच भी नही सकती थी की इतना मासूम लगने वाला दसवी का यह छोकरा ऐसा भी कर सकता है. मैं चुपचाप खड़ी उसकी हरकत देखती रही, लेकिन शायद उसे मेंरी उपस्थिति का आभास हो गया. उसने मेंरी तरफ मुँह फेरा और दरवाज़े पर मुझे खड़ा देखकर चौंक गया. वो बस मुझे देखता रहा और कुछ भी ना बोल पाया. फिर उसने मुँह फेरकर किताब तकिये के नीचे छुपा दी. मुझे भी समझ नही आया की क्या करूँ. मेंरे दिल मैं यह ख्याल आया की कल से यह लड़का मुझसे शर्मायेगा और बात करने से भी कतराएगा. घर मैं इसके अलावा और कोई है भी नही जिससे मेरा मन बहलता. मुझे अपने दिन याद आए.मैं और मेरा एक कज़ीन इसी उमर के थे जबसे हमने मज़ा लेना शुरू किया था तो इसमें कौन सी बड़ी बात थी अगर यह मुठ मार रहा था. मैं धीरे-धीरे उसके पास गयी और उसके कंधे पर हाथ रखकर उसके पास ही बैठ गयी. वो चुपचाप लेटा रहा।

मैनें उसके कंधों को दबाते हुए कहा, “अरे यार अगर यही करना था तो कम से कम दरवाज़ा तो बंद कर लिया होता…” वो कुछ नही बोला, बस मुँह दूसरी तरफ किए लेटा रहा. मैने अपने हाथों से उसका मुँह अपनी तरफ किया और बोली “अभी से ये मज़ा लेना शुरू कर दिया… कोई बात नही मैं जानती हूँ तू अपना मज़ा पूरा कर ले… लेकिन ज़रा यह किताब तो दिखा…” मैने तकिये के नीचे से किताब निकाल ली. यह हिन्दी में लिखे शब्द की किताब थी. मेरा कज़ीन भी बहुत सी किताबे लाता था और हम दोनो ही मज़े लेने के लिए साथ-साथ पढ़ते थे. चुदाई के समय किताब के बोल बोलकर एक दूसरे का जोश बढ़ाते थे. जब में किताब उसे देकर बाहर जाने के लिए उठी तो वो पहली बार बोला, “दीदी सारा मज़ा तो आपने खराब कर दिया… अब क्या मज़ा करूँगा…” “अरे अगर तुमने दरवाज़ा बंद किया होता तो में आती ही नही…” “अगर आपने देख लिया था तो चुपचाप चली जाती…” अगर में बहस मैं जीतना चाहती तो आसानी से जीत जाती लेकिन मेरा वो कज़ीन करीब 6 महीने से नहीं आया था इसलिए में भी किसी से मज़ा लेना चाहती ही थी।
अमित मेरा छोटा भाई था और बहुत ही सेक्सी लगता था इसलिए मैने सोचा की अगर घर में ही मज़ा मिल जाए तो बाहर जाने की क्या ज़रूरत. फिर अमित का लंड अभी कुँवारा था. में कुंवारे लंड का मज़ा पहली बार लेती इसलिए मैने कहा, “चल अगर मैनें तेरा मज़ा खराब किया है तो में ही तेरा मज़ा वापस कर देती हूँ…” फिर में पलंग पर बैठ गयी और उसे लिटाया और उसके मुरझाए लंड को अपनी मुट्टी में लिया. उसने बचने की कोशिश की पर मैनें लंड को पकड़ लिया था. अब मेंरे भाई को यकीन हो चुका था की मैं उसका राज़ नही खोलूँगी इसलिए उसने अपनी टांगे खोल दी ताकि मैं उसका लंड ठीक से पकड़ सकूँ. मैने उसके लंड को बहुत हिलाया डुलाया लेकिन वो खड़ा ही नही हुवा. वो बड़ी मायूसी के साथ बोला “देखा दीदी अब खड़ा ही नही हो रहा है…””अरे क्या बात करते हो… अभी तुमने अपनी बहन का कमाल कहा देखा है… में अभी अपने प्यारे भाई का लंड खड़ा कर दूँगी…” ऐसा कह में भी उसकी बगल में ही लेट गयी. मैं उसका लंड सहलाने लगी और उससे किताब पढने को कहा. “दीदी मुझे शर्म आती है… ” “साले अपना लंड बहन के हाथ मैं देते शर्म नही आई…” मैने ताना मारते हुवे कहा “ला मैं पढती हूँ…” और मैने उसके हाथ से किताब ले ली।
मैनें एक स्टोरी निकाली जिसमें भाई बहन के बोल थे. और उस से कहा, “में लड़की वाला बोलूँगी और तुम लड़के वाला… मैने पहले पढ़ा, “अरे राजा मेंरी चूचियों का रस तो बहुत पी लिया अब अपना बनाना शेक भी तो टेस्ट करवा…” “अभी लो रानी पर में डरता हूँ इसलिए की मेरा लंड बहुत बड़ा है, तुम्हारी नाज़ुक कसी चूत में कैसे जाएगा…” और इतना पढ़कर हम दोनो ही मुस्कुरा दिए क्योंकि यहा हालत बिल्कुल उल्टे थे. मैं उसकी बड़ी बहन थी और मेंरी चूत बड़ी थी और उसका लंड छोटा था. वो शर्मा गया लेकिन थोड़ी सी पढाई के बाद ही उसके लंड में जान आ गयी और वो तनकर करीब 6 इंच का लंबा और 1.5 का मोटा हो गया. मैनें उसके हाथ से किताब लेकर कहा, “अब इस किताब की कोई ज़रूरत नही… देख अब तेरा खड़ा हो गया है… तू बस दिल में सोच ले की तू किसी की चोद रहा है और मैं तेरी मुठ मार देती हूँ…” में अब उसके लंड की मुठ मार रही थी और वो मज़ा ले रहा था. बीच बीच मैं सिसकारियाँ भी भरता था. एकाएक उसने लंड उठाकर और बोला, “बस दीदी” और उसके लंड ने गाढ़ा पानी फैंक दिया जो मेंरी हथेली पर गिरा. में उसके लंड के रस को उसके लंड पर लगाती उसी तरह सहलाती रही और कहा, “क्यों भईया मज़ा आया?” “सच दीदी बहुत मज़ा आया..”
“अच्छा यह बता की ख्यालों में किसकी ले रहे थे?” “दीदी शर्म आती है… बाद में बताऊंगा…” इतना कह उसने तकिये में मुँह छुपा लिया. “अच्छा चल अब सो जा नींद अच्छी आएगी… और आगे से जब ये करना हो तो दरवाज़ा बंद कर लिया करना…” “अब क्या करना दरवाज़ा बंद करके दीदी तुमने तो सब देख ही लिया है…” “चल शैतान कही के…” मैने उसके गाल पर हल्की सी छपत मारी और उसके होंठो को चूमा. में और किस करना चाहती थी पर आगे के लिए छोड़ कर वापस अपने कमरे मैं आई. अपनी सलवार कमीज़ उतार कर नाईटी पहनने लगी तो देखा की मेंरी पेंटी बुरी तरह भीगी हुई है. अमित के लंड का पानी निकालते-निकालते मेंरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया था. अपना हाथ पेंटी में डालकर अपनी चूत सहलाने लगी. उंगलियों का स्पर्श पाकर मेंरी चूत फिर से रिसकने लगी और मेरा पूरा हाथ गीला हो गया. चूत की आग बुझाने का कोई रास्ता नही था सिवाए अपनी उंगली के. में बेड पर लेट गयी. अमित के लंड के साथ खेलने से में बहुत उत्तेजित थी और अपनी प्यास बुझाने के लिए अपनी बीच वाली उंगली जड़ तक चूत मैं डाल दी. तकिये को सीने से कसकर भींचा और जांघो के बीच दूसरा तकिया दबा आँखे बंद की और अमित के लंड को याद करके उंगली अंदर बाहर करने लगी।

इतनी मस्ती चडी थी की क्या बताए, मन कर रहा था की अभी जाकर अमित का लंड अपनी चूत में डलवा ले. उंगली से चूत की प्यास और बड गयी इसलिए उंगली निकाल तकिये को चूत के ऊपर दबा औंधे मुँह लेटकर धक्के लगाने लगी. बहुत देर बाद चूत ने पानी छोड़ा और में वैसे ही सो गयी. सुबह उठी तो पूरा बदन प्यास की वजह से सुलग रहा था. लाख रगड लो तकिये पर लेकिन चूत में लंड घुसवाकर जो मज़ा देता है उसका कहना ही क्या. बेड पर लेटे हुये में सोचती रही की अमित के कुंवारे लंड को कैसे अपनी चूत का रास्ता दिखाया जाये. फिर उठकर तैयार हुई. अमित भी स्कूल जाने को तैयार था. नाश्ते की टेबल हम दोनो आमने-सामने थे. नज़रे मिलते ही रात की याद ताज़ा हो गयी और हम दोनो मुस्कुरा दिऐ. अमित मुझसे कुछ शर्मा रहा था की कहीं मैं उसे छेड़ ना दू. मुझे लगा की अगर अभी कुछ बोलूँगी तू वो भीचक जाएगा इसलिए चाहते हुए भी ना बोली. चलते समय मैनें कहा, “चलो आज तुम्हे अपने स्कूटर पर स्कूल छोड़ दू…” वो फ़ौरन तैयार हो गया और मेंरे पीछे बैठ गया।
वो तोड़ा शर्मा रहा था और मुझसे अलग बैठा था. वो पीछे की स्टेपनी पकड़े था. मैनें स्पीड से स्कूटर चलाया तो उसका बेलेंसबिगड़ गया और संभालने के लिए उसने मेंरी कमर पकड़ ली. में बोली, “कसकर पकड़ लो शरमा क्यों रहे हो?” “अच्छा दीदी” और उसने मुझे कसकर कमर में पकड़ लिया और मुझसे चिपक सा गया. उसका लंड खड़ा हो गया था और वो अपनी जांघो के बीच मेंरे कुल्लो को जकड़े था. “क्या रात वाली बात याद आ रही है अमित?” “दीदी रात की तो बात ही मत करो… कहीं ऐसा ना हो की में स्कूल मैं भी शुरू हो जाऊ..” “अच्छा तो बहुत मज़ा आया रात मैं?” “हां दीदी इतना मज़ा ज़िंदगी में कभी नही आया… काश कल की रात कभी खत्म ना होती… आपके जाने के बाद मेरा फिर खड़ा हो गया था पर आपके हाथ में जो बात थी वो कहाँ… ऐसे ही सो गया…””तो मुझे बुला लिया होता… अब तो हम तुम दोस्त हैं… एक दूसरे के काम आ सकते हैं…” “तो फिर दीदी आज रात का प्रोग्राम पक्का…” “चल हट केवल अपने बारे में ही सोचता है… ये नही पूछता की मेरी हालत कैसी है… मुझे तो किसी चीज़ की ज़रूरत नही है… चल में आज नही आती तेरे पास…” “अरे आप तो नाराज़ हो गयी दीदी… आप जैसा कहेंगी वैसा ही करूँगा… मुझे तो कुछ भी पता नही अब आप ही को मुझे सब सीखाना होगा…” तब तक उसका स्कूल आ गया था. मैनें स्कूटर रोका और वो उतरने के बाद मुझे देखने लगा लेकिन में उस पर नज़र डाले बगैर आगे चल दी।

स्कूटर के शीशे में देखा की वो मायूस सा स्कूल में जा रहा है. में मन ही मन बहुत खुश हुई की चलो अपने दिल की बात का इशारा तो उसे दे ही दिया. शाम को में अपने कॉलेज से जल्दी ही वापस आ गयी थी. अमित 2 बजे वापस आया तो मुझे घर पर देखकर हैरान रह गया. मुझे लेटा देखकर बोला, “दीदी आपकी तबीयत तो ठीक है?” “ठीक ही समझो, तुम बताओ कुछ होमवर्क मिला है क्या?” “दीदी कल रविवार है ही… वैसे कल रात का काफ़ी होमवर्क बचा हुआ है…” मैनें हँसी दबाते हुये कहा, “क्यो पूरा तो करवा दिया था… वैसे भी तुमको यह सब नही करना चाहिए… सेहत पर असर पड़ता है… कोई लड़की पटा लो, आजकल की लड़किया भी इस काम में काफ़ी इंट्रेस्टेड रहती हैं…” “दीदी आप तो ऐसे कह रही हैं जैसे लड़कियाँ मेंरे लिए सलवार नीचे और कमीज़ ऊपर किए तैयार है की आओ पेंट खोलकर मेंरी ले लो..” “नही ऐसी बात नही है… लड़की पटानी आनी चाहिए…
“फिर में उठकर नाश्ता बनाने लगी. मन में सोच रही थी की कैसे इस कुंवारे लंड को लड़की पटाकर चोदना सिखाऊं… लंच टेबल पर उस से पूछा, “अच्छा यह बता तेरी किसी लड़की से दोस्ती है?” “हां दीदी सुधा से..” “कहाँ तक?” “बस बातें करते हैं और स्कूल में साथ ही बैठते हैं..” मैने सीधी बात करने के लिए कहा, “कभी उसकी लेने का मन करता है?” “दीदी आप कैसी बात करती हैं..” वो शर्मा गया तो में बोली, “इसमें शर्माने की क्या बात है… मुट्ठी तो रोज़ मारता है.. ख्यालो में कभी सुधा की ली है या नही सच बता…” “लेकिन दीदी ख्यालो में लेने से क्या होता है…” “तो इसका मतलब है की तू उसकी असल में लेना चाहता है…” मैने कहा. “उससे ज़्यादा तो और एक है जिसकी में लेना चाहता हूँ, जो मुझे बहुत ही अच्छी लगती है…” “जिसकी कल रात ख्यालो में ली थी?” उसने सर हिलाकर हां कर दिया पर मेंरे बार-बार पूछने पर भी उसने नाम नही बताया।

इतना ज़रूर कहा की उसकी चुदाई कर लेने के बाद ही उसका नाम सबसे पहले मुझे बताऐगा. मैनें ज़्यादा नही पूछा क्योंकि मेंरी चूत फिर से गीली होने लगी थी. में चाहती थी की इससे पहले की मेरी चूत लंड के लिए बेचैन हो वो खुद मेरी चूत में अपना लंड डालने के लिए गिड़गिडाए. मैं चाहती थी की वो लंड हाथ में लेकर मेरी मिन्नत करे की दीदी बस एक बार चोदने दो. मेरा दिमाग़ ठीक से काम नही कर रहा था इसलिए बोली, “अच्छा चल कपड़े बदल कर आ में भी बदलती हूँ…”वो अपनी यूनिफॉर्म चेंज करने गया और मैनें भी प्लान के मुताबिक अपनी सलवार कमीज़ उतार दी।
फिर ब्रा और पेंटी भी उतार दी क्योंकि चुदने के मदमस्त मौके पर ये दिक्कत करते. अपना देशी पेटिकोट और ढीला ब्लाउस ही ऐसे मौके पर सही रहते हैं. जब बिस्तर पर लेटो तो पेटिकोट अपने आप आसानी से घुटनो तक आ जाता है और थोड़ी कोशिश से ही और ऊपर आ जाता है. जहाँ तक ढीले ब्लाउस का सवाल है तो थोड़ा सा झुको तो सारा माल छलक कर बाहर आ जाता है. बस यही सोचकर मैने पेटिकोट और ब्लाउस पहना था. वो सिर्फ़ पजामा और बनियान पहनकर आ गया. उसका गोरा चिकना बदन मदमस्त करने वाला लग रहा था. एकाएक मुझे एक आईडिया आया।

में बोली, “मेरी कमर में थोड़ा दर्द हो रहा है ज़रा बाम लगा दे..” यह बेड पर लेटने का अच्छा बहाना था और में बिस्तर पर पेट के बल लेट गयी. मैनें पेटिकोट थोडा ढीला बाँधा था इसलिए लेटते ही वो नीचे खिसक गया और मेरे कूल्हों के
बीच की दरार दिखाए देने लगी. लेटते ही मैनें हाथ भी ऊपर कर लिए जिससे ब्लाउस भी ऊपर हो गया और उसे मालिश करने के लिए ज़्यादा जगह मिल गयी. वो मेरे पास बैठकर मेरी कमर पर बाम लगाकर धीरे धीरे मालिश करने लगा. उसका स्पर्श(टच) बड़ा ही सेक्सी था और मेरे पुरे बदन में सिहरन सी दौड़ गयी. थोड़ी देर बाद मैनें करवट लेकर अमित की तरफ ऊपर मुँह कर लिया और उसकी जांघ पर हाथ रखकर ठीक से बैठने को कहा. करवट लेने से मेंरी चूचियाँ ब्लाउस के ऊपर से आधी से ज़्यादा बाहर निकल आई थी. उसकी जांघ पर हाथ रखे रखे ही मैनें पहले की बात आगे बडाई, “तुझे पता है की लड़की कैसे पटाया जाता है?” “अरे दीदी अभी तो में बच्चा हूँ… ये सब आप बताएँगी तब मालूम होगा मुझे…” बाम लगाने के दौरान मेरा ब्लाउस ऊपर खींच गया था जिसकी वजह से मेंरी गोलाइयाँ नीचे से भी झाँक रही थी।

मैनें देखा की वो एकटक मेंरी चूचियों को घूर रहा है. उसके कहने के अंदाज़ से भी मालूम हो गया की वो इस सिलसिले में ज़्यादा बात करना चाह रहा है। अरे यार लड़की पटाने के लिए पहले ऊपर ऊपर से हाथ फेरना पड़ता है, ये मालूम करने के लिए की वो बुरा तो नही मानेगी…” “पर कैसे दीदी…” उसने पूछा और अपने पैर ऊपर किये. मैनें तोड़ा खिसक कर उसके लिए जगह बनाई और कहा, “देख जब लड़की से हाथ मिलाओ तो उसको ज़्यादा देर तक पकड़ कर रखो, देखो कब तक नही छुड़ाती है… और जब पीछे से उसकी आँख बंद कर के पूछो की में कौन हूँ तो अपना केला धीरे से उसके पीछे लगा दो..

जब कान में कुछ बोलो तो अपना गाल उसके गाल पर रगड़ दो… वो अगर इन सब बातों का बुरा नही मानती तो आगे की सोचो…”अमित बड़े ध्यान से सुन रहा था. वो बोला, “दीदी सुधा तो इन सब का कोई बुरा नही मानती जबकि मैनें कभी ये सोचकर नही किया था… कभी कभी तो उसकी कमर में हाथ डाल देता हूँ पर वो कुछ नही कहती…” “तब तो यार छोकरी तैयार है और अब तो उसके साथ दूसरा खेल शुरू कर…” “कौन सा दीदी?” “बातों वाला… यानी कभी उसके संतरो की तारीफ करके देख क्या कहती है… अगर मुस्कुराकार बुरा मानती है तो समझ ले की पटने में ज़्यादा देर नही लगेगी..” “पर दीदी उसके तो बहुत छोटे-छोटे संतरे हैं… तारीफ के काबिल तो आपके है…” वो बोला और शर्माकर मुहँ छुपा लिया. मुझे तो इसी घड़ी का इंतज़ार था।

मैनें उसका चेहरा पकड़कर अपनी ऊपर घूमाते हुये कहा, “में तुझे लड़की पटाना सीखा रही हूँ और तू मुझी पर नज़रे जमाए है…” “नही दीदी सच में आपकी चूचियाँ बहुत प्यारी है… बहुत दिल करता है…..” और उसने मेंरी कमर में एक हाथ डाल दिया. “अरे क्या करने को दिल करता है ये तो बता…” मैनें इठलाकर पूछा. इनको सहलाने का और इनका रस पीने का…” अब उसके हौसले बुलंद हो चुके थे और उसे यकीन था की अब में उसकी बात का बुरा नही मानूँगी. “तू कल रात बोलता… तेरी मुठ मारते हुये इनको तेरे मुहँ में लगा देती… मेरा कुछ घिस तो नही जाता… चल आज जब तेरी मुठ मारूंगी तो उस वक़्त अपनी मुराद पूरी कर लेना…” इतना कह उसके पजामा में हाथ डालकर उसका लंड पकड़ लिया जो पूरी तरह से तन गया था।

“अरे ये तो अभी से तैयार है…” तभी वो आगे को झुका और अपना चेहरा मेरे सीने मैं छुपा लिया. मैनें उसको बाँहो में भरकर अपने करीब लिटा लिया और कस के दबा लिया. ऐसा करने से मेरी चूत उसके लंड पर दबने लगी. उसने भी मेरी गर्दन में हाथ डाल मुझे दबा लिया. तभी मुझे लगा की वो ब्लाउस के ऊपर से ही मेरी लेफ्ट चूची को चूस रहा है. मैनें उससे कहा “अरे ये क्या कर रहा है… मेरा ब्लाउस खराब हो जाएगा…” उसने झट से मेरा ब्लाउस ऊपर किया और निप्पल मुहँ में लेकर चूसना शुरू कर दिया. में उसकी हिम्मत की दाद दिए बगैर नही रह सकी. वो मेरे साथ पूरी तरह से आज़ाद हो गया था. अब यह मेरे ऊपर था की में उसको कितनी आज़ादी देती हूँ. अगर में उसे आगे कुछ करने देती तो इसका मतलब था की में ज़्यादा बेकरार हूँ चुदवाने के लिए और अगर उसे मना करती तो उसका मूड खराब हो जाता और शायद फिर वो मुझसे बात भी ना करे।
इसलिए मैनें बीच का रास्ता लिया और बनावटी गुस्से से बोली, “अरे ये क्या तू तो ज़बरदस्ती करने लगा… तुझे शर्म नही आती…” “दीदी आपने तो कहा था की मेरा ब्लाउज मत खराब कर… रस पीने को तो मना नही किया था इसलिए मैनें ब्लाउस को ऊपर उठा दिया…” उसकी नज़र मेरी लेफ्ट चूची पर ही थी जो की ब्लाउस से बाहर थी. वो अपने को और नही रोक सका और फिर से मेरी चूची को मुहँ मे ले ली और चूसने लगा. मुझे भी मज़ा आ रहा था और मेरी प्यास बड रही थी. कुछ देर बाद मैनें ज़बरदस्ती उसका मुहँ लेफ्ट चूची से हटाया और राईट चूची की तरफ लाते हुये बोली, “अरे ये दो होती हैं और दोनो में बराबर का मज़ा होता है…” उसने राईट बोब्स को भी ब्लाउस से बाहर किया और उसका निप्पल मुहँ में लेकर चूसने लगा और साथ ही एक हाथ से वो मेरी लेफ्ट चूची को सहलाने लगा. कुछ देर बाद मेरा मन उसके गुलाबी होंठो को चूमने को करने लगा तो मैनें उसे कहा, “कभी किसी को किस किया है?” “नही दीदी पर सुना है की इसमें बहुत मज़ा आता है…” “बिल्कुल ठीक सुना है पर किस ठीक से करना आना चाहिए…” “कैसे?” उसने पूछा और मेरी चूची से मुहँ हटा लिया. अब मेरी दोनो चूचिया ब्लाउस से आज़ाद खुली हवा में तनी थी लेकिन मैनें उन्हे छुपाया नही बल्कि अपना मुहँ उसके मुहँ के पास ले जाकर अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए फिर धीरे से अपने होंठ से उसके होंठ खोलकर उन्हे प्यार से चूसने लगी. करीब दो मिनिट तक उसके होंठ चूसती रही फिर बोली. “ऐसे…”
वो बहुत उत्तेजित हो गया था. इससे पहले की में उसे बोलूं की वो भी एक बार किस करने की प्रेक्टिस कर ले, वो खुद ही बोला, “दीदी में भी करूँ आपको एक बार?” “कर ले…” मैने मुस्कराते हुवे कहा. अमित ने मेरी ही स्टाइल में मुझे किस किया. मेरे होंठो को चूसते समय उसका सीना मेरे सीने पर आकर दबाव डाल रहा था. जिससे मेरी मस्ती दोगुनी हो गयी थी. उसका किस खत्म करने के बाद मैनें उसे अपने ऊपर से हटाया और बाँहो में लेकर फिर से उसके होंठ चूसने लगी. इस बार में थोड़ा ज़्यादा जोश से उसे चूस रही थी. उसने मेरी एक चूची पकड़ ली थी और उसे कस कसकर दबा रहा था. मैनें अपनी कमर आगे करके चूत उसके लंड पर दबाई. लंड तो एकदम तनकर आइरन रोड हो गया था. चुदवाने का एकदम सही मौका था पर में चाहती थी की वो मुझसे चोदने के लिए भीख माँगे और में उस पर एहसान करके उसे चोदने की इज़ाज़त दूँ।
में बोली, “चल अब बहुत हो गया, ला अब तेरी मुठ मार दूँ…” “दीदी एक रिक्वेस्ट करूँ?” “क्या?” मैनें पूछा. “लेकिन रिक्वेस्ट ऐसी होनी चाहिए की मुझे बुरा ना लगे…” ऐसा लग रहा था की वो मेरी बात ही नही सुन रहा है बस अपनी कहे जा रहा है. वो बोला, “दीदी मैनें सुना है की अंदर डालने में बहुत मज़ा आता है… डालने वाले को भी और डलवाने वाले को भी… में भी एक बार अंदर डालना चाहता हूँ…” “नहीं अमित तुम मेंरे छोटे भाई हो और में तुम्हारी बड़ी बहन…” “दीदी में आपकी लूँगा नही बस अंदर डालने दीजिए…” “अरे यार तो फिर लेने में क्या बचा…” “दीदी बस अंदर डालकर देखूँगा की कैसा लगता है, चोदुंगा नही प्लीज़ दीदी…” मैनें उस पर एहसान करते हुये कहा, “तुम मेरे भाई हो इसलिए में तुम्हारी बात को मना नही कर सकती पर मेरी एक शर्त है… तुमको बताना होगा की अक्सर ख्यालो में किसकी चोदते हो?” और में बेड पर पैर फैलाकर चित लेट गयी और उसे घुटने के बल अपने ऊपर बैठने को कहा. वो बैठा तो उसके पजामा को खोलकर पजामा नीचे कर दिया।

उसका लंड तनकर खड़ा था. मैनें उसकी बाँह पकड़ कर उसे अपने ऊपर कोहनी के बल लेटा लिया जिससे उसका पूरा वज़न उसके घुटनो और कोहनी पर आ गया. वो अब और नही रुक सकता था. उसने मेरी एक चूची को मुहँ में भर लिया जो की ब्लाउस से बाहर थी. में उसे अभी और छेड़ना चाहती थी. “सुन अमित ब्लाउस ऊपर होने से चुभ रहा है.. ऐसा कर इसको नीचे करके मेरे संतरे ढक दे..” “नही दीदी में इसे खोल देता हूँ.” और उसने ब्लाउस के बटन खोल दिया. अब मेरी दोनो चूचिया पूरी नंगी थी. उसने लपककर दोनो को क़ब्ज़े में कर लिया. अब एक चूची उसके मुह में थी और दूसरी को वो मसल रहा था. वो मेंरी चूचियों का मज़ा लेने लगा और मैनें अपना पेटिकोट ऊपर करके उसके लंड को हाथ से पकड़ कर अपनी गीली चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया।
कुछ देर बाद लंड को चूत के मुहँ पर रखकर बोली, “ले अब तेरे चाकू को अपने खरबूजे पर रख दिया है पर अंदर आने से पहले उसका नाम बता जिसकी तू बहुत दिन से चोदना चाहता है और जिसे याद करके मुठ मारता है…” वो मेरी चूचियों को पकड़कर मेरे ऊपर झुक गया और अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिए. में भी अपना मुहँ खोलकर उसके होंठ चूसने लगी. कुछ देर बाद मैनें कहा, ”हां तो मेरे प्यारे भाई अब बता तेरे सपनो की रानी कौन है…” “दीदी आप बुरा मत मानीऐगा पर मैनें आज तक जितनी भी मुठ मारी है सिर्फ़ आपको ख्यालो में रखकर…” “ हे भईया तू कितना बेशर्म है…

अपनी बड़ी बहन के बारे में ऐसा सोचता था..” “ दीदी में क्या करूँ आप बहुत खूबसूरत और सेक्सी है… में तो कब से आपकी चूचियों का रस पीना चाहता था और आपकी चूत में लंड डालना चाहता था… आज दिल की आरज़ू पूरी हुई..” और फिर उसने शर्माकर आँखे बंद करके धीरे से अपना लंड मेरी चूत में डाला और वादे के मुताबिक चुपचाप लेट गया. ”अरे तू मुझे इतना चाहता है… मैनें तो कभी सोचा भी नही था की घर में ही एक लंड मेरे लिए तड़प रहा है.. पहले बोला होता तो पहले ही तुझे मोका दे देती…” और मैने धीरे-धीरे उसकी पीठ सहलानी शुरू कर दी।

बीच-बीच में उसकी गांड भी दबा देती. “दीदी मेरी किस्मत देखिए कितनी गांडू है… जिस चूत के लिए तड़प रहा था उसी चूत में लंड पड़ा है पर चोद नही सकता… पर फिर भी लग रहा है की स्वर्ग मैं हूँ..” वो खुल कर लंड चूत बोल रहा था पर मैनें बुरा नही माना. “अच्छा दीदी अब वादे के मुताबिक बाहर निकालता हूँ…” और वो लंड बाहर निकालने को तैयार हुआ. में तो सोच रही थी की वो अब चूत में लंड का धक्का लगाना शुरू करेगा लेकिन यह तो ठीक उल्टा कर रहा था. मुझे उस पर बड़ी दया आई. साथ ही अच्छा भी लगा की वादे का पक्का है. अब मेरा फ़र्ज़ बनता था की में उसकी वफ़ादारी का ईनाम अपनी चूत चुद्वाकर दूँ. इसलिए उससे बोली, “अरे यार तूने मेरी चूत की अपने ख्यालो में इतनी पूजा की है.. और तुमने अपना वादा भी निभाया इसलिए में अपने प्यारे भाई का दिल नही तोडूंगी.. चल अगर तू अपनी बहन को चोदकर बहनचोद बनना ही चाहता है तो चोद ले अपनी जवान बड़ी बहन की चूत..” मैने जानकर इतने गंदे शब्द का प्रयोग किए थे पर वो बुरा ना मानकर खुश होता हुआ बोला, “सच दीदी..” और फ़ौरन मेरी चूत में अपना लंड डालने लगा की कहीं में अपना इरादा ना बदल दूँ।

“तू बहुत किस्मत वाला है अमित..” में उसके कुंवारे लंड की चुदाई का मज़ा लेते हुये बोली. ”क्यों दीदी?” “अरे यार तू अपनी ज़िंदगी की पहली चुदाई अपनी ही बहन की कर रहा है… और उसी बहन की जिसकी तू जाने कब से चोदना चाहता था..” “हां दीदी मुझे तू अब भी यकीन नही आ रहा है, लगता है सपने में चोद रहा हूँ जैसे रोज़ आपको चोदता था..” फिर वो मेरी एक चूची को मुहँ में दबा कर चूसने लगा. उसके धक्को की रफ़्तार अभी भी कम नही हुई थी. में भी काफ़ी दिनो के बाद चुद रही थी इसलिए में भी चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी. वो एक पल रुका फिर लंड को गहराई तक ठीक से डालकर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा. वो अब झड़ने वाला था।

में भी सातवें आसमान पर पहुचं गयी थी और नीचे से कमर उठा-उठाकर उसके धक्को का जवाब दे रही थी. उसने मेरी चूची छोड़कर मेरे होंठो की मुहँ में ले लिया जो की मुझे हमेशा अच्छा लगता था. मुझे चूमते हुए कसकस कर दो चार धक्के दिये और “हाय आशा मेरी जान” कहते हुये झड़कर मेरे ऊपर चिपक गया. मैनें भी नीचे से दो चार धक्के दिये और “हाए मेंरे राजा कहते हुये झड़ गयी. चुदाई के जोश ने हम दोनो को निढाल कर दिया था. हम दोनो कुछ देर तक यू ही एक दूसरे से चिपके रहे. कुछ देर बाद मैनें उससे पूछा, “क्यों मज़ा आया मेंरे बहनचोद भाई को अपनी बहन की चूत चोदने मैं?” उसका लंड अभी भी मेरी चूत में था. उसने मुझे कसकर अपनी बाँहो में जकड़कर अपने लंड को मेरी चूत पर कसकर दबाया और बोला, “बहुत मज़ा आया दीदी.. यकीन नही होता की मैनें अपनी बहन को चोदा है और बहनचोद बन गया हूँ…” “तो क्या मैनें तेरी मुठ मारी है..” “नही दीदी यह बात नही है…” “तो क्या तुझे अब अफ़सोस लग रहा है अपनी बहन को चोदकर बहनचोद बनने का..” “नही दीदी ये बात भी नही है.. मुझे तो बड़ा ही मज़ा आया बहनचोद बनने में.. मन तो कर रहा की बस अब सिर्फ़ अपनी दीदी की जवानी का रस ही पीता रहू.. दीदी बल्कि में तो सोच रहा हूँ की भगवान ने मुझे सिर्फ़ एक बहन क्यों दी.. अगर एक दो और होती तो सबको चोदता… दीदी में तो यह सोच रहा हूँ की यह कैसे चुदाई हुई की पूरी तरह से चोद लिया लेकिन चूत देखी भी नही..” “कोई बात नही मज़ा तो पूरा लिया ना?” “हां दीदी मज़ा तो खूब आया…” “तो घबराता क्यों है? अब तो तूने अपनी बहन चोद ही ली है.. अब सब कुछ तुझे दिखाओँगी… जब तक माँ नही आती में घर पर नंगी ही रहूंगी और तुझे अपनी चूत भी चटवाऊ और तेरा लंड भी चूसू गी.. बहुत मज़ा आता है..” “सच दीदी?” “हां.. अच्छा एक बात है तू इस बात का अफ़सोस ना कर की तेरे सिर्फ़ एक ही बहन है में तेरे लिए और चूत का जुगाड़ कर दूँगी..” “नही दीदी अपनी बहन को चोदने में मज़ा ही अनोखा है.. बाहर क्या मज़ा आएगा?” “अच्छा चल एक काम कर तू माँ को चोद ले और मादरचोद भी बन जा..” “ओह दीदी ये कैसे होगा?” घबरा मत पूरा इंतेज़ांम में कर दूंगी.. माँ अभी 38 साल की है, तुझे मादरचोद बनने में भी बड़ा मज़ा आएगा..” “दीदी आप कितनी अच्छी हैं.. दीदी एक बार अभी और चोदने दो इस बार पूरी नंगी करके चोदुंगा..” “जी नही आप मुझे अब माफ़ करिए..” “दीदी प्लीज़ सिर्फ़ एक बार..” और लंड को चूत पर दबा दिया।
“सिर्फ़ एक बार..” मैनें ज़ोर देकर पूछा. “सिर्फ़ एक बार दीदी पक्का वादा..” “सिर्फ़ एक बार करना है तो बिल्कुल नही..” “क्यों दीदी?” अब तक उसका लंड मेरी चूत में अपना पूरा रस निचोड़कर बाहर आ गया था. मैनें उसे झटके देते हुये कहा, “अगर एक बार बोलूँगी तब तुम अभी ही मुझे एक बार और चोद लोगे?” “हां दीदी..” “ठीक है बाकी दिन क्या होगा.. बस मेरी देखकर मुठ मारा करेगा क्या.. और में क्या बाहर से कोई लाऊंगी अपने लिए.. अगर सिर्फ़ एक बार मेरी लेनी है तो बिल्कुल नही..” उसे कुछ देर बाद जब मेरी बात समझ में आई तो उसके लंड में थोड़ी जान आई और उसे मेरी चूत पर रगड़ते हुवे बोला, “ओह दीदी तुम बहुत अच्छी हो…”

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