Aunty Ne Dilayi Neela Ki chut

एक बार मैं किसी काम से अपने एक दोस्त के फ्लैट पर गया और हम उसकी बालकनी में खड़े होकर बात कर रहे थे। तभी सामने वाली बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर पर एक प्यारी सी लड़की दिखाई दी। वो अपने घर में झाड़ू लगा रही थी। उसने गहरे गले वाला सूट पहना था।
आहा, क्या नज़ारा था वो !
वो पूरी पसीने में भीगी हुई थी, जिसके कारण उसका सूट उसकी कमर से चिपक गया था। जिससे उसकी शेप पूरी तरह से नज़र आ रही थी। मैं उसके हुस्न के लिए पागल हो चला था।
मेरा दोस्त मुझे देख रहा था। वो थोड़ा शर्मीले स्वाभाव का था। उस लड़की के अन्दर जाने के बाद हम भी अन्दर आ गए।
उसने मुझसे पूछा- तुझे भी ‘नीला’ अच्छी लगी क्या !
मैंने कहा- अच्छी नहीं साले, गाण्ड-फाड़ माल है।
फिर वो बोला- साले, वो ऐसी लड़की नहीं है।
मैंने कहा- मगर साले, देखने से तो गज़ब क़यामत लग रही थी और बदन ऐसा लग रहा था कि उसने अपने आपको बहुत सहेज कर रखा हो। साले नंबर दिला दे इसका।
उसने मुझे फट से निकाल कर उसका नंबर दे दिया। मैंने वहीं से उसे फ़ोन किया और उससे बात करने की कोशिश की, मगर साली ने बात ही नहीं की। फिर मैंने अपने दोस्त से कोई और रास्ता पूछा।
उसने मेरे को बोला- उसकी एक आंटी है, जिनके साथ वो रहती है, उनके ज़रिए कुछ हो सकता है तो देख ले।
मैंने सोचा चलो यह भी करके देख लेते हैं। मैंने फिर उसके घर पर जाने का बहाना ढूंढा। कई दिन बाद उस एरिया का केबल वाला मेरा जानकार निकला और बस मैं पहुँच गया उन आंटी के घर। मैंने डोर-बेल बजाई तो दरवाज़ा उस लड़की ने ही खोला।
ओये होए !
मन तो ऐसा किया बस अभी पकड़ कर चबा ही डालूँ। मगर मैंने अपनी भावनाओं को जैसे-तैसे दबाया और उससे कहा- केबल के पैसे दे दीजिए।
उसने अपनी आंटी को आवाज़ लगाई, तभी अन्दर से एक मोटी सी आंटी निकल कर आई। आंटी थी तो मोटी, मगर आंटी के साजो-सामान में एक अलग ही बात थी, इतनी गोरी कि जहाँ हाथ रखो वहाँ से गन्दा हो जाए। मेरी आँखें उनके सामान पर ही टिक गई और आंटी ने शायद मेरी आँखों को पढ़ लिया।
खैर मैंने कहा- आंटी, केबल के पैसे दे दीजिए।
तो उसने मुझसे पूछा- सोनू (केबल वाला) कहाँ गया।
मैंने कहा- अब मैं ही आऊँगा, वो अब दूसरे एरिया में जाता है।
आंटी के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आई। मैं समझा नहीं और आंटी ने फट मेरे सामने अपने ब्लाऊज के अन्दर हाथ डाला और मुझे पैसे निकाल के दिए।
सच में जब उन्होंने हाथ अन्दर डाला तो हाथ कहाँ तक गया पता चल रहा था… शायद नोट वाले बाबा जी भी अन्दर मुँह खोले बैठे थे। मेरा ध्यान नीला पर से तो हट ही गया, बस आंटी को ही देखता रहा।
खैर मैं पैसे लेकर आ गया और मज़े की बात तो यह कि अगले ही दिन आंटी का फ़ोन सोनू के यहाँ आया और उन्होंने बोला- राजन (मेरा नाम) को भेज देना, केबल में कुछ खराबी आ गई है।
मेरे पास सोनू का फ़ोन आया। मैं बस नहा कर आया था और ऐसे ही निक्कर में ही घर से निकल गया और मैंने घर के दरवाज़े पर जाकर घंटी बजाई तो आंटी बाहर आई।
उस औरत ने तो हद कर दी… ब्लाऊज और पेटीकोट में ही दरवाज़ा खोल दिया और मुझे अन्दर बुला लिया। मैं अन्दर गया, मैंने इधर-उधर देखा कि नीला वहाँ नहीं थी पर आंटी को ऐसी हालत में देख कर मेरी हालत खराब हो गई।
मगर ‘मोटी’ कहाँ मानने वाली थी, मुझे बोली- केबल खराब हो गया है, ज़रा चेक कर दो।
तो उनके कमरे में सेट-टॉप बॉक्स ऊपर स्लैब पर रखा था। उसे देखने के लिए मैंने आंटी से स्टूल माँगा। आंटी स्टूल ले आई। मैं स्टूल पर चढ़ा और आंटी स्टूल पकड़ कर खड़ी हो गईं। मैंने जब नीचे देखा तो आंटी के वो भारी-भारी मुम्मे मुझे पुकार पुकार कर कह रहे थे, हमें खा लो। हमें मत छोड़ना।
मैं जब उन ‘तबाही के यंत्रों’ की तरफ देख रहा था तो मेरे लंड भाईसाहब खड़े हो गए और मेरे बॉक्सर में से उनकी प्रतिमा का अक्स दिखने लगा। आंटी ने मुझे उनके मम्मों की तरफ देखते हुए देख लिया और मुझे बड़े अजीब तरीके से देखा।
मैंने ऐसे ही सेट-टॉप बॉक्स पर हाथ मारा और देखा कि वो तो साला सही है। आंटी ने बेकार ही बुला लिया। चलो कुछ तो भला होगा मेरे जैसे गरीब का।
खैर मैं नीचे आ गया और आंटी रसोई में पानी लाने चले गई। तभी मैंने देखा कि आंटी रसोई के अन्दर से मुझे देख रही थी और उन्होंने एक कपड़ा उठाया और अपने मम्मे पोंछने लगी जो पसीने में भीग गए थे।
मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और रसोई के अन्दर चला गया और आंटी को पीछे से जाकर सीधे मम्मों से पकड़ लिया।
आंटी ने जोर से झटका मार कर मुझे अलग कर दिया। उस झटके के कारण आंटी का ब्लाउज मेरे हाथ में आ गया और चिर गया, और आंटी का थन झन्न से लटक बाहर आ गया। साले ने कम से कम 4 झटके खाए और आंटी की टुंडी तक लटक आया।
आंटी ने एकदम से उसे ढक लिया और बोली- यह क्या बदतमीज़ी है?
मैंने बोला- यह बदतमीज़ी नहीं बल्कि वो काम है जिसके लिए तूने मुझे यहाँ बुलाया है, अब बिना और कपड़े फटवाए मान जा, नहीं तो मैं आऊँ अपनी औकात पे, मुझे इतनी देर से जलवा दिखा रही है।
यह कह कर मैंने आंटी को कस कर दबोच लिया और बोला- अब तो आ ही जा मेरी जान !
मैंने आंटी की गोची भर ली। आंटी ने छूटने की कोशिश की, मगर मेरे हाथों से निकल ही नहीं पाई। खैर फिर आंटी ने भी तो मुझे इसीलिए बुलाया था, मगर वो बोली- मैं जाकर दरवाज़ा तो बंद करूँ।
मैंने दरवाज़ा बंद किया और इतने में आंटी अपने कपड़ों से निजात पा चुकी थी, बस वो ब्रा-पैन्टी में थी और अपने कमरे की तरफ चल दी। मैं भी पीछे गया और मोटी को ले जाकर सीधा दीवार के सहारे लगा दिया। मैं समझ तो गया था इस औरत ने ये सब बहुत किया है। इसे कुछ नया चाहिए, यहाँ मेरा ब्लू-फिल्म वाला अनुभव काम आया।
मैंने मोटी दीवार से लगाया और उसके दोनों मुम्मों को कस के पकड़ लिया और उन्हें कस कर मसलने लगा। कभी उन्हें दबाया, कभी सहलाया, कभी उसके निप्पल पकड़ के घुमाए, कभी उसकी कमर में कस के चिकोटी भर ली। उस औरत को इन सब में मज़ा आ रहा था और मुझे भी उन्हें चूसने में मज़ा आ रहा था।
उसके मम्मे इतने नर्म थे कि मेरे मुँह के बहुत अन्दर तक आ गए। वो प्यार से गन्दी वाली ‘आँहें’ भर रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने उस औरत को स्टूल पर बिठाया और उसकी दोनों बगलें हवा में उठवा दीं। फिर मैंने अपने होंठों से उसकी बगलों को चूसना चालू किया, उसके लिए यह नया कारनामा था, मगर गुदगुदी और ठरक की वजह से उसे मज़ा आ रहा था। मैंने उसकी बगल को ढंग से चूसा, कसम से बड़ा नमकीन मज़ा आया। फिर बगल में अपना लंड लगाया और उससे भी उसकी बगल को सहलाया। फिर मैंने उस मोटी को उठाया और ले जाकर बिस्तर पर पटक दिया।
ओये होए… !! मोटी भी क्या माल थी !
उसके पूरे शरीर को वैसे देखने का मज़ा तो मैं बता भी नहीं सकता। मुझे कहीं उसमें नीला नज़र आई। मैंने उसकी टाँगें खींची और उसको अपनी ओर खींचा और फिर उसकी दोनों टाँगें अपने कंधे पे रखीं और उसकी चूत में अपनी दो उंगलियाँ डालीं और प्यार से हिलाईं। उसकी चूत में उंगली डालते ही मुझे पता चल गया कि यह तो पैसेन्ज़र गाड़ी है, इस पर खूब लण्ड सवार हो चुके हैं।
मगर तब भी उसने कहा- आह, मैं मर गई।
मैंने अपनी उंगलियों को अन्दर-बाहर करना चालू रखा। वो प्यार से कसमसाती रही। फिर मैंने उसकी चूत पर अपना मुँह लगाया और उसकी चूत को चूसना चालू किया। मोटी की चूत ने बहुत पानी छोड़ा जिसने मेरे मुँह का स्वाद बदल डाला। खैर मैंने मोटी को उठाया और प्यार से किस करना चालू किया। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मगर उस मोटी ने मेरे होंठों को काटना चालू कर दिया। उसने मेरे नीचे वाले होंठ को अपने दांतों से पकड़ लिया, और छोड़ा ही नहीं। मैंने जैसे-तैसे अपने को छुड़ाया और फिर अपने होंठ को कटा हुआ पाया। मोटी पागल औरत थी, मुझे लगा तो था कि ये आज मेरा हाल खराब कर देगी।
खैर मैंने मोटी को लिटाया और दोनों टाँगें अपनी जाँघों से निकालीं और अपना लंड उसकी चूत पे रखा और उसके छेद के आस-पास लगा कर हिलाने लगा। मोटी कभी मुझे देखती और कभी झट से अपना मुँह पीछे कर लेती।
मैंने आहिस्ता से अपना लंड उसकी चूत के अन्दर घुसाना चालू किया। इतने में मोटी ने मुझे मेरे पिछवाड़े से पकड़ा और झट से मुझे अपनी ओर खींचा, जिससे मेरा लंड उसकी चूत के गहराई तक चला गया।
उसकी चूत की गहराई इतनी थी कि मैं उसकी तली छू भी नहीं पाया, मगर मोटी ने बस एक ‘आह’ भरी, और मैंने फिर उसे धक्के मारने चालू किए। मैं आज तक नहीं भूला हूँ आंटी के वो झटके खाते मम्मे जो मेरे धक्कों की वजह से हिल रहे थे।
“ओफ्फो, क्या वाईब्रेशन था उन पके पपीतों में !!”
मैं कभी उसके मम्मे चूसता, कभी उसके होंठ, कभी उसके गले लग कर धक्के मारता। मुझे आधा घंटा हो गया था, मगर मोटी हार ही नहीं मान रही थी। मैंने कोशिश की कि वो थक जाए, मगर वो तो प्लयेर थी, लगातार बज रही थी।
आंटी ने मुझे थकता देख कर मुझे नीचे किया और खुद ऊपर अपना शरीर लेकर मेरे ऊपर बैठ गई और मेरा लंड अपनी चूत के अन्दर डाल लिया और अपने आप ही उछलने लगी। गज़ब हरकतें कर रही थी वो औरत, कभी अपने बालों को झटके, कभी उन पर अपने हाथ फिराए, कभी मेरी छाती के बाल नोचे, कभी मेरे मुँह से अपना मुँह लगा लेती।
मैं मदहोश होता जा रहा था, मगर साथ ही मेरे लंड भाईसाहब भी लाल हो चुके थे। इतना हाई प्रोफाइल काम उन्होंने कम ही किया था।
कुछ देर बाद शायद आंटी थोड़ा थकीं, तो मेरे ऊपर से उतर कर मेरी जाँघों के पास गईं और मेरे लंड को चूसना चालू किया। उसके होंठ बड़े अच्छे लग रहे थे, मगर साथ ही पता लग रहा था, कि आंटी ने सैंकड़ों लंडों को ठंडक पहुचाई है।
हमने अपना काम ख़त्म किया और मैंने आंटी को अपने बगल में लिटा लिया। इतने सब करवाने के बाद भी आंटी मान ही नहीं रही थी, कभी अपने मम्मों पर मेरा मुँह लगा ले, कभी चूमाचाटी, फिर मेरे ऊपर वाले होंठ पर भी मोटी ने निशान बना दिए। ऐसा लग रहा था कि मैं आंटी की नहीं, वो मेरी ले रही थी।
मगर जो भी हो, आंटी ने मज़ा पूरा दिया, बहुत टाइम बाद कायदे का ‘गोश्त’ चखा था।
चलो अब बताता हूँ। आंटी ने उस दिन के बाद कई बार मुझे घर पर बुलाया और अपने साथ सारे मज़े कराए। मैंने आंटी के मुम्मों पर बहुत सारे लव बाइट्स दिए, पूरे मम्मे उन्हीं से लाल हुए पड़े थे। जब भी आंटी के यहाँ जाता, नीला को ढूँढता रहता था। आंटी मुझसे अपनी ठरक मिटवाती रहतीं और मैं बस नीला के बारे में ही सोचता रहता। आंटी को तो मैं ढंग से खा चुका था, मगर नीला से तो अभी कोई बात ही नहीं हुई थी।
एक दिन मैंने आंटी से कहा- आंटी वो आपकी भतीजी है न नीला, वो इस सबके बारे में जानती है?
आंटी बोलीं- हाँ शायद, मगर समझदार है, कुछ नहीं बोलती।
मैंने कहा- है तो वो भी एकदम मस्त वाला पटाखा।
आंटी बोलीं- आखिर भतीजी किसकी है।
मैंने आंटी से अपनी इच्छा ज़ाहिर की कि मुझे एक बार नीला की भी लेनी है।

मैंने आंटी से अपनी इच्छा ज़ाहिर की कि मुझे एक बार नीला की भी लेनी है।
आंटी बोलीं- वो ऐसे नहीं मानेगी। मन किसका नहीं होता, मगर ऐसे कैसे मानेगी?
मैंने कहा- कुछ तो करवाओ आंटी, या अपनी सेवायें बंद करूँ आपके यहाँ से भी !
आंटी ने कहा- रुक ना, मैं कुछ करती हूँ, मगर सुन, वो अभी बच्ची है और तू जानवर जैसा हो गया है। उसे मेरी तरह चबा मत जाइओ, आराम से हैंडल करियो, कहीं बात बिगड़ न जाए, मैं चुपके से तेरा काम करवाऊँगी।
मैंने कहा- ठीक है।
और मैंने मन में सोचा पहले साली को नीचे तो आने दो, तब देखते हैं।
खैर कुछ दिन बाद आंटी का मेरे पास फ़ोन आया- आज मौका है, नीला से मैं अपने शरीर की मालिश करवाऊँगी, तू उस वक्त से पहले आ जाना।
मैंने कहा- ठीक है।
मैं तैयार होकर आंटी के यहाँ पहुँचा, नीला कहीं बाहर गई हुई थी, आंटी ने मुझे अपनी अलमारी के पीछे छुपने के लिए बोल दिया और खुद बाहर चली गईं।
इतने में नीला आ गई और आंटी उससे बोलीं- आज वो उनके शरीर की मालिश कर दे।
नीला ने कहा- ठीक है आप अपने कमरे में लेट जाओ, मैं वहीं आती हूँ।
आंटी आईं और अपने कपड़े उतार कर लेट गईं और नीला भी एक सिर्फ टी-शर्ट और बॉक्सर में आंटी के कमरे में हाथ में तेल लेकर आ गई। उसने शायद अन्दर कुछ नहीं पहना था।
वो आंटी से बोली- आंटी कुछ तो पहन लो।
मगर आंटी ने कहा- नहीं ऐसे ही सारे में लगा दे, सारे बदन में दर्द होता है।
नीला इस बात से अनजान थी कि मैं उसी कमरे में हूँ और उन दोनों को देख रहा हूँ। आंटी उससे तेल लगवाने लगीं। आंटी इतनी कमीनी निकली उस लड़की से भी मज़े ले रही थी।
वो लड़की जब उनके मम्मों पे हाथ लगा रही थी, तब उन्होंने उसका हाथ पकड़ कर, अपने मम्मों पर कस के मसल लिया। नीला ने आंटी के मम्मों पर मेरे दांतों के निशान देखे, तो उसने पूछा- ये क्या है आंटी?
आंटी ने बोल दिया- एक मकड़ी मसली गई थी।
मेरी हँसी छूटते-छूटते रह गई।
नीला समझ तो रही थी, मगर वो कुछ नहीं बोली। करीब आधे घंटे बाद उस औरत ने बोला- अब बस।
फिर आंटी नीला से बोलीं- आ जा, तुझे भी तेल लगा दूँ।
उसने झेंप कर मना किया, मगर आंटी ने कहा- कोई नहीं… लगवा ले !
वो मान गई।
वो बिस्तर पर लेट गई और अपनी टी-शर्ट ऊपर कर ली।
मगर आंटी ने कहा- ये सब तो उतारना पड़ेगा।
खैर उसने अपनी टी-शर्ट ऊपर कि कसम से लाजवाब नज़ारा था वो, एकदम कसा हुआ बदन, प्यारे से मगर भरे हुए चूचे, सॉरी… ‘टिट्स’ जैसा माल वैसा नाम।
आंटी ने उसके शरीर पर तेल मलना चालू किया और आंटी ने धीरे-धीरे उसके गुप्त अंगों को मसलना चालू किया। नीला ने प्यार से मीठी आहें भरनी चालू कीं। यहाँ आंटी मज़े ले रही थीं और वहाँ मैं अलमारी के पीछे खड़ा अपने लंड का गला घोंटे जा रहा था। मुझसे रुका नहीं जा रहा था, मगर आंटी नीला को शायद और गर्म कर रही थीं।
आखिरकार नीला गर्म हो चुकी थी और पूरे मज़े ले रही थी। आंटी ने उसे उल्टा लिटाया और उसकी गाण्ड के आस-पास तेल लगाना चालू किया और धीरे से उसके दोनों छेदों में उंगली देनी चालू की।
मैं महसूस कर सकता था नीला की वो ‘आहें’ जो मुझे चीख चीख कर कह रही थीं कि वहाँ क्या खड़ा है चूतिये !
इतने में आंटी ने मुझे हाथ से इशारा किया, मैं धीरे से गया और अपना लंड हाथ में पकड़ा, चुपके से बिस्तर के ऊपर अपने घुटने टिकाए और पीछे से जाकर नीला के ऊपर झटके से चढ़ गया, नीला एकदम हड़बड़ा गई और छटपटाने लगी। मगर मैं उसके शरीर पर पूरी तरह से कब्ज़ा पा चुका था।
नीला चिल्लाने लगी- मुझे छोड़ दो।
मगर मैं उस वक़्त हब्शी हो चुका था, मैंने उससे कहा- बहुत दिन हो गए तुझे देखते हुए, बहुत तड़पाया है तूने ! आज मौका मिला है, आज नहीं छोड़ूंगा तुझे !
वहीं नीला अपनी आंटी की तरफ देख कर कह रही थी- आंटी, प्लीज मुझे बचा लो।
मगर आंटी तो प्यार से उसका शरीर ही सहला रही थीं, आंटी बोलीं- एक बार करवा ले, कुछ नहीं होगा।
मगर वो कहे जा रही थी- आपने मुझे कहाँ फंसा दिया।
मैं नीला से बोला- देखो, अब तुम आराम से मेरा साथ दो, तो तुम्हें ज्यादा तकलीफ नहीं होगी !
नीला एकदम से चुप सी पड़ गई।
मैंने कहा- नीला सब करते है ये, तुम भी कर लो, और मैं वैसे भी तुम्हें बहुत पसंद करता हूँ, तुमसे ज़बरदस्ती नहीं होगी मुझ से।
नीला बोली- मैंने सुना है कि इसमें ज्यादा दर्द होता है !
तभी आंटी बोली- पगली वो तो पहली बार हल्का सा दर्द होगा, मगर फिर मज़ा आने लगेगा।
वो बोली- आंटी पक्का न, देखो प्लीज़ आराम से करना, और वो आंटी से बोली- कहाँ फंसा दिया मुझे।
आंटी बोलीं- आगे-आगे देख क्या होता है।
मैंने नीला को आहिस्ते से अपनी तरफ खींचा, और उसकी दोनों टाँगे अपनी जाँघों के ऊपर से निकालीं, नीला ने डर के मारे आंटी के मम्मे को जकड़ लिया था और बार-बार कह रही थी- आराम से करना !
मैंने उसकी चूत के छेद पर अपना लंड रखा और नीला की तरफ देखा, वो पसीना-पसीना हो रही थी। मैं उससे लिपटने-चिपटने को बेताब हो रहा था, मैंने धीरे से अपना लंड अन्दर डाला और जैसे ही मेरा लंड थोड़ा अन्दर गया, नीला ने झटके से मुझे पीछे धकेल दिया और चीखी- मुझे नहीं करना यह सब !
तब आंटी ने समझाया- नीला समझ न, यह लड़का अब तुझे वैसे भी नहीं छोड़ेगा, तो तू आराम से करवा ले, वरना बेकार में तेरी बुरी हालत हो जाएगी, तू चिंता मत कर ज्यादा दर्द नहीं होगा।
नीला बेचारगी सा मुँह बनती हुई मान गई। मैंने फिर नीला को पकड़ा और फिर उसकी चूत में लंड डाला। इस बार मैंने और प्यार से अन्दर प्रवेश कराया, मेरा लंड अन्दर जा रहा था और नीला के हाथ का दबाव आंटी के मम्मों पर बढ़ता जा रहा था।
वो हल्का-हल्का काँप रही थी। मैंने फिर अपना लंड बाहर निकाला और फिर हचक कर पूरा अन्दर तक डाल दिया।
“आई माँ.. मार दिया !!” और कस कर आंटी के मम्मों को नोंच लिया।
आंटी प्यार से उसकी छाती सहला रही थीं। वो चीख रही थी, शायद उसकी झिल्ली फटी थी और थोड़ा खून भी आया था। वो डर गई, मगर आंटी ने उसे समझा दिया। खैर दर्द तो उसे हो ही रहा था। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसे एक कपड़े से पोंछा, फिर नीला की चूत को पोंछा। इतने में आंटी बर्फ़ लेने चली गईं।
आंटी के जाते ही मैं नीला पर दोबारा चढ़ा और उसकी चूत में लंड डाला और इस बार मैंने कतई रहम नहीं किया क्योंकि मैं जानता था कि अगर आंटी वापस आ गईं, तो मुझे मेरी मर्ज़ी नहीं करने देगी। मैंने नीला की चूत में अपना लंड पूरा अन्दर तक बाड़ दिया था। नीला जोर से चिल्लाई, मैंने झपट कर उसका मुँह बंद कर दिया।
इतने में आंटी भाग कर वापस आईं, तब तक मेरी मशीन चालू हो चुकी थी। मैंने नीला को धक्के मारने चालू कर दिए थे, वो चीख रही थी।
आंटी मुझ से बोलीं- मैंने तुझे मना किया था न कि इसका पहली बार है !! छोड़ कमीने।
आंटी ने मुझे धक्का दिया।
मैंने कहा- हट जाओ आंटी, अब तुम्हारी बच्ची को मैंने औरत बना ही दिया है।
वहाँ नीला मेरे नीचे पड़ी-पड़ी धक्के खा रही थी और चिल्ला भी रही थी। उसने मुझे अपने ऊपर से हटाने की पूरी कोशिश की, कभी मेरा मुँह को नोंचा और कभी मेरे मुँह पर थप्पड़ मारे, मगर मैं डटा रहा और मैंने अपनी मशीन चालू रखी। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
धीरे-धीरे नीला की चीखें आहों में बदलती जा रही थीं, वो समझ तो गई थी कि अब वो छूट तो पाएगी ही नहीं, तो वो थोड़ी ढीली पड़ गई। शायद उसे मज़ा भी आने लगा था। अब नीला के अन्दर भी भावनायें जागने लगी थीं। वो भी इन सब चीजों को एन्जॉय कर रही थी। उसने अपने होंठों को एक-दूसरे के नीचे दबा लिया था।
नीला को मैंने थोड़ी देर के लिए छोड़ा, तो नीला उठ कर बाथरूम में चली गई और मैं उसके आने का इंतज़ार करने लगा क्योंकि अभी तो उसकी बस नथ ही उतरी थी, अभी उसकी शर्म खोलना तो बाकी था।
नीला बाथरूम में गई थी, और मैं बिस्तर पर लेटा था। आंटी मेरे बगल में ही बैठी थीं।
आंटी मुझ से बोलीं- जानवर कहीं के ! नीला के साथ ये क्या किया तूने ! ज़ल्दी क्यों करी, मान तो रही थी वो धीरे धीरे, मेरी ही गलती थी, तुझे उस पर चढ़ने दिया। अब कहीं उसने किसी से कुछ कह दिया तो मैं तो बदनाम हो जाऊँगी।
मैं बोला- आंटी वो बच्ची नहीं है, मेरी बात मानो मैंने उसकी आँखों में देखा है, तुमसे भी बड़ी वाली निकलेगी वो, देख लेना। अभी आने तो दो।
आंटी ने बोला- नहीं वो ऐसी लड़की नहीं है।
मगर मैंने कहा- आंटी फालतू बकवास मत करो, और लो ज़रा मेरा लंड साफ़ करो।
आंटी ने एक कपड़ा उठाया और मेरा लंड साफ़ कर दिया। इतने में नीला अन्दर से आ गई, वो अपने आप को धोकर आई थी। मैं बिस्तर पर बैठा था, नीला सीधा आई और आकर मेरे को धक्का मारा और मेरे ऊपर सवार हो गई। मैं बस आश्चर्य से उसे देख रहा था।
उसने आते ही कहा- अब इतना हो गया तो इसे पूरा करो वरना सबको बोल दूंगी कि तुमने और इन आंटी ने मेरे साथ ज़बरदस्ती की है।
मैं और आंटी बस उसे देख ही रहे थे।
आंटी बोलीं- नीला, यह क्या हुआ तुझे?
नीला बोली- चुप कर मोटी, सारे मज़े खुद ही लेती रही और यहाँ मैं तुझे देख-देख कर तड़पती रहती थी। अपने हाथ से अपनी ही चूत सुजा दी, हालत खराब हो गई खुजली करते-करते। इतने दिन हो गए, अब मुझे अपनी मर्ज़ी करने दे। मैं जानती थी कि यह मुश्टण्डा अलमारी के पीछे खड़ा है, मगर देखना चाहती थी कि यह क्या करता है?
मैंने आंटी के मुम्मों के निशानों पर हाथ रख कर कहा- नीला जी, आप मुझे हल्का सा इशारा पहले ही कर देतीं तो आंटी को इतनी तकलीफें नहीं झेलनी पड़तीं। कोई नहीं, अब आ गई हो कोई कसर बाकी नहीं छोडूंगा।
मैंने नीला को उसके बालों से पकड़ा और उसको चूमना चालू किया। उसके होंठों में गज़ब का रस सा था, बहुत ही मीठे लग रहे थे। मन कर रहा था कि बस उन्हें चूसते ही जाओ। वहीं आंटी साइड में कुर्सी लगा कर बैठ गई थीं।
नीला ने मुझसे पूछा- तुम्हारे ये होंठ इतने फटे क्यों है?
मैंने कहा- अपनी आंटी से पूछ लो, बता देगी।
उसने आंटी की तरफ से देखा, आंटी ने भी बस मुस्करा दिया।
खैर मैंने नीला को बेतहाशा चूमा, फिर नीला को अपने से चिपका कर, उसकी चूत में अपना लंड डाला। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
वो कसमसाई और मैंने उससे पूछा- अब बताओ आराम से या….!!
नीला बोली- जैसे तुम आंटी के साथ करते हो।
आंटी बोलीं- पागल है क्या ! मार देगा तुझे ये।
वो बोली- आंटी तुम बाहर जाओ, अब मेरी बारी है।
आंटी चली गई बोलते हुए- ठीक है तेरी मर्ज़ी है।
मैंने नीला से कहा- तुम झेल नहीं पाओगी।
वो बोली- कभी तो शुरू करना ही पड़ेगा, मैं भी तो देखूँ कि मैं कितना झेल पाऊँगी…!
मैं नीला के ऊपर से उठा और फ्रिज में से एक पानी की बोतल निकाली, पूरी एक सांस में गटक गया।
उसके बाद मैं नीला के पास गया और उससे बोला- इसके आगे जो होगा, वो तुम्हारी मर्ज़ी है।
बस फिर क्या था, मैंने अपना मुँह पोंछा और नीला के ऊपर चढ़ गया और बस उसके बाद मैं नहीं रुका। नीला शुरू में बहुत चिल्लाई, वो चिल्लाती रही, मैंने उस पर बिल्कुल भी रहम नहीं बरता। कमबख्त ने मेरे हाथों पर जहाँ से मुझे पकड़ा था, अपने नाख़ून गड़ा दिए।
मैंने ऐसे में गलती से उसके मुँह को चूमना चाहा। मैंने उसक नीचे वाला होंठ पकड़ा, अपने होंठों से, मगर गलती से मेरा नीचे वाला होंठ उसके दांतों में फस गया। उसने काट दिया पूरा, बहुत दर्द हुआ, मैंने उसमे एक थप्पड़ जड़ दिया, उसका मुँह लाल हो गया।
मुझे बुरा लगा, मैंने कहा- सॉरी जान, अब नहीं करूँगा।
तो उसने प्यार से मेरे मुँह को पकड़ा और मेरे नीचे वाले होंठ को जिसमें से खून निकल रहा था, उसे चूसना चालू किया। फिर मैंने भी उसके दोनों होंठों को किस करना चालू किया। मज़ा आ रहा था कसम से, बहुत ही रसीले थे उसके वो दो होंठ।
खैर उसके होंठों को ढंग से चूस के सुजा देने के बाद, मैंने उसके मम्मों को पकड़ा। सोचने लगा कि क्या दिन थे वो, जब इन मस्त नारंगियों को आँख से ही पकड़ते थे और आज हाथ में लिए था।
मैंने उसके एक अंगूर को अपने मुँह से पकड़ा और जोर से खींचा। उसे थोड़ा दर्द हुआ, मगर मैंने उसके मम्मों को चूसना चालू रखा। वो मज़े ले रही थी और मुझे भी करवा रही थी। मज़े करते-करते फिर मैंने उसे अपनी गोदी में बिठाया, उसकी छाती को अपने सीने से लगाया और अपना लंड उसकी चूत में घुसाया। उसको कमर से जकड़ लिया, फिर मैंने उसकी चुदाई चालू की।
मज़ा तो इस बार आया, उसका वो प्यारा सा बदन जब मेरी बांहों में आहें भर रहा था। बड़ा सुखद एहसास हो रहा था। मैंने नीला को पूरी रात जी भरने तक चोदा, मगर उसका मैंने आंटी वाला हाल नहीं किया। प्यारी सी बंदी थी वो, वो कोई जुगाड़ थोड़े ही थी। जो भी था मज़ा आया उसके साथ।
मैं और नीला रात को आंटी के कमरे में ही सो गए। सुबह मेरी आँख खुली तो नीला नहीं थी। मैंने अपना बॉक्सर पहना और कमरे से बाहर आया। आंटी सामने ही थी।
मैंने पूछा- नीला कहाँ है?
आंटी बोलीं- ओहो क्या बात है हीरो, बड़ी चिंता हो रही है नीला की ! वो नहाने गई है, अभी आ जाएगी। क्या बात तूने उसका हाल-बेहाल नहीं किया, सही सलामत बाहर आई है वो।
मैं आंटी के पास गया और उनके ब्लाऊज में हाथ डाला और उनका मम्मा पकड़ लिया और उनसे बोला- आंटी, यह मत सोचो कि मैं तुम्हारे इस जिस्म की खुशबू को भूल जाऊँगा, हमेशा याद रखूँगा और तुम्हें भी भूलने नहीं दूंगा।
यह कह कर मैंने उनकी चूत को पकड़ लिया।
आंटी बोलीं- मैं भी यही चाह रही थी, अभी तू नीला से मज़े ले और मैं और तू मिलेंगे ही।
उसके बाद मैं नीला से मिल कर चला गया। मगर उसके बाद नीला ने तो हद ही कर दी, वो हर दूसरे-तीसरे दिन मुझे फ़ोन करती और मुझे अपने घर बुलाती। पहले तो वो आंटी के पीछे से बुलाती थी, मगर फिर उसने आंटी के सामने ही बुलाना चालू कर दिया।
आंटी के कमरे से नीला के कमरे का सब दिखता था। नीला खुले कमरे में से ही मुझ से काम करवाती थी, जो आंटी दूसरे कमरे से देखती रहती थीं। मगर नीला को कोई फर्क नहीं पड़ता था। वो तो नई-नवेली चुद्ल्ली थी। वो तो बस मेरे साथ सारी हरकतों को अंजाम देना चाहती थी।
एक दिन तो मैं उसके घर पहुँचा, तो उसने लॉबी में रखी टेबल पर अपने पैर पसार दिए और हमने वहीं काम चालू कर दिया। आंटी दरवाज़े पर खड़ी देख रही थी, मगर कुछ कर नहीं पा रही थी।

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