मुझे ड्रींक और उसके खुले व्यवहार ने थोडा साहसी बना दिया था, लेकिन मैने डरने और शरमाने का नाटक किया और हल्के से बडबडाते हुए हां…हुं बोल कर चुप हो गया। वह मुझेसे लगातार पुछ रही थी,
“बताओ मुझे, क्या तुम्हे जरा भी शरम नही महसूस नही हुई, या पाप का एहसास नही हुआ, अपनी बहन को चोदते हुए ?”

मैने अपना सिर निचे झुक लिया और कोई जवाब नही दिया। तब उसने मुझे अपने पास खींच लिया और मेरे चेहरे को कोमलता से अपने हाथो में लेकर, मेरी आंखो में झांखते हुए कहा,
“बेटे, मुझे विस्तार से बताओ, तुम दोनो के बिच ये सब कैसे हुआ ?”

मैने बडे ही मासूमियत के साथ उससे माफि मांगी और उसकी आंखो में झंखते हुए, उससे वादा लिया कि वो नाराज नही होगी। उसके बाद मैने उसे पुरी कहानी सुनाई।“मम्मी, यह लगभग ३ महिने पहले की बात है। एक दिन जब अचानक, मेरी नींद रात के करिब १२ या १२:३० के आस पास खुली। मैं बाथरूम जाने के लिये उठा। बाथरूम करने के बाद जब मैं वापस लौट रहा था, तब मैने देखा कि आपके कमरे की लाईट जल रही थी और दरवाजा थोडा-सा खुला हुआ था। मैं अपने कमरे में घुस कर परदे के पिछे छिप गया और देखने लगा। मैने देखा कि तुम केवल पेटीकोट में ही कमरे के बाहर आ गई थी और तुम्हारी छातियां पुरी तरह से नंगी थी। फिर तुम अपने बालो का जुडा बनाते बनाते हुए सीधा बाथरूम के अंदर घुस गई थी। तुम्हारे खूबसुरत और नग्न बदन को देखा कर मेरे पैर जैसे जमिन से गड गये थे। मेरा मुंह सुख गया और मेरी रीड कि हड्डीयों में एक कंपन दौड गई। तुम्हारी छातियां बडे ही कामुक अंदाज में हिल रही थी। दम साधे मैं तुम्हे देखता रहा, तुम बिना बाथरूम का दरवाजा बंध किये, अपने पेटीकोट को उपर उठा कर पेशाब करने बैठ गई।,,,,,,,,”

“,,,,,,,,पेशाब करने के बाद तुम सीधा अपने कमरे में गई और दरवाजा बंध कर दिया। मैं हिम्मत करके तुम्हारे कमरे कि खिडकी के पास चला गया। पिताजी बिस्तर पर तकिये के सहारे नंगे लेटे हुए थे और सिगरेट पी रहे थे। उनका डण्डा लटका हुआ और भीगा हुआ लग रहा था। तुमने पिताजी के पास पहुंच कर उनसे कुछ कहा और उनके हाथ से सिगरेट ले ली। फिर तुमने अपने पेटीकोट को खोल कर फेंक दिया और अपने एक पैर को उनके चेहरे की दुसरी तरफ डाल दिया। तुम्हारा एक पैर अभी भी जमिन पर ही था, ऐसा करके तुमने अपनी फुद्दी को पिताजी के मुंह से लगा दिया। उन्होने तुम्हारे खूबसुरत चुतडों को अपने हाथो में भर लिया और तुम्हारी फुद्दी को चाटने लगे। तुम बहुत खुश लग रही थी, और अपने एक हाथ से अपनी छातियों को मलते हुए सिगरेट भी पी रही थी। कुछ देर बाद तुमने सिगरेट फेंक दी और निचे झुक कर पिताजी के डण्डे को अपने मुंह में लेकर चुसने लगी। कुछ ही देर में उनका डण्डा खडा हो गया।,,,,,,,,”

“,,,,,,,,तुमने डण्डे को चुसना बंध कर दिया और अपने दोनो पैर को फैला कर पिताजी के उपर बैठ गई। उनके डण्डे को अपने हाथो से पकड कर तुमने उसे अपनी फुद्दी में घुसा लिया और उनके उपर उछलने लगी। तुम्हारे दोनो गोरे मुलायम चुतड मुझे स्पष्ट दिख रहे थे और उनके बिच का भूरा छिद्र भी अच्छी तरह से नजर आ रहा था। पापा का डण्डा बहुत तेजी के साथ तुम्हारी फुद्दी में अंदर बाहर हो रहा था और पिछे से तुम्हारी खूबसुरत चूत में घुसता हुआ, पिताजी का डण्डा मुझे दिख रहा था। मैने ब्लू फिल्मो के बाद पहली बार ऐसा द्रश्य देखा था। मेरे जिवन का यह अदभुत अनुभव था। यह इतना रोमांचित कर देने वाला, और वासना भडका देने वाला द्रिश्य था कि मैं बता नही सकता। यह सबकुछ देख कर मेरे पैर कांपने लगे थे, और मेरा डण्डा एकदम से खडा हो गया था। मेरे लिये बरदाश्त कर पाना संभव नही था। एक ओर पिताजी तुम्हारी खूबसुरत चुचियों को मसल रहे थे और दुसरी तरफ मैं भी अपने लंड को मसलने लगा।,,,,,,,,”

(कहानी सुनाते-सुनाते मैं पुरी तरह से गरम हो चुका था, इसलिये मैने नंगे शब्दो का इस्तमाल शुरु कर दिया था।)

“,,,,,,,,कुछ ही देर में मेरे लंड से पानी निकल गया। पर तुम दोनो काफि जोश में आ चुके थे और एक दुसरे के साथ खुल कर गंदे शब्दो का प्रयोग करते हुए चुदाई कर रहे थे। धीरे धीरे मेरा लंड फिर से खडा हो गया। कुछ देर के बाद तुम शायद झड गई और पिताजी के उपर गीर पडी, वो भी शायद झड चुके थे और हांफ रहे थे। इतना सब कुछ देखा कर, मैं अपने खडे लंड को हाथ में पकडे हुए वापस अपने कमरे में लौट आया।”“ये तो तुमने मेरी कहानी ही मुझे सुना दी। मैने तुमसे पुछा था कि तुम्हारी बहन और तुम्हारे बिच, कैसे नाजायज संबंध बना, बेटे ? मुझे उसके बारे में बताओ, मैं बहुत उत्सुक हुं।”

“ओह मम्मी, आगे की कहानी बताने में, मुझे कुछ अच्छा नही लग रहा। मैं थोडी शरम भी महसूस कर रहा हुं।”

“लडके, तुम बहुत शैतान हो। तुम्हे अपने मम्मी-पापा की चुदाई की कहानी बताने में कोई शरम नही आई, मगर अपनी बहन के साथ की गई बेशरमी की कहानी सुनाने में तुम्हे शरम आ रही है। तुम एक दुष्ट पापी लडके हो।”

“नही मम्मी, ऐसा नही है। चलो, मैं शोर्ट में तुम्हे बता दुं कि,,,,,,,”

“नही, मुझे सारी कहानी विस्तार से बताओ। और पुरी तरह से खुल कर बताओ कि कैसे तुमने अपनी बहन के साथ इतना बडा पाप किया। तुम्हे जब ऐसा करने में कोई शरम नही आई, तो फिर मुझे उस पाप की कहानी बताने में, क्यों शरम आ रही है ?”

मेरे पास अब कोई रास्ता नही था, और मैने उसे सब कुछ बता दिया।”“उस रात, जब मैं लौट कर कमरे में आया तो, मैने देखा कि दीदी शायद गहरी नींद में सोई हुई थी। उसका नाईट-गाउन अस्त-व्यस्त हो गया था और उसकी खूबसुरत मांसल जांघे और पेन्टी में ढकी हुई, उसकी चूत दिख रही थी। मैं उसके पास आ कर, उसकी जांघो पर हाथ फेरते हुए, उसकी पेन्टी को ध्यान से देखने लगा। उसकी पेन्टी उसकी चूत पर कसी हुई थी और ध्यान से देखने पर, उसकी चूत की फांके स्पष्ट दिख रही थी। मेरा दिल कर रहा था कि, मैं हाथ बढा कर उसकी चूत को छू लुं। मैने उसके चेहरे की ओर एक बार ध्यान से देखा कि हो सकता है, वो जांघो पर हाथ फेरने से जाग गई हो। मगर दीदी अब भी गहरी नींद में सो रही थी। उसकी चुचियां, जोकि इस समय बहुत उभरी हुई, सीधी तनी हुई दिख रही थी और उसकी सांसो के साथ उपर-निचे हो रही थी। उसके नाईट-गाउन के उपर के दो बटन खुले हुए थे। उसकी गोरी मुलायम चुचियों का उपरी भाग, फ्लोरोसन्ट लाईट की रोशनी में चमक रहा था और मुझे अपनी ओर आमंत्रित कर रहा था। वासना की आग में, मैं अब अंधा हो चुका था। दीदी की उभरी हुई चुचियों को देखा कर, मेरे हाथ बेकाबू होने लगे। मैं हाथ बढा कर उन्हे हल्के-हल्के दबाने लगा। फिर मैने धीरे से नाईट-गाउन के सारे बटन खोल दिये और उसकी ब्रा के उपर से उसकी चुचियों को दबाने और चुमने लगा। मुझे अब जरा भी होश नही था, ना ही मैं डर रहा था कि दीदी जाग जायेगी। तभी बहन ने अपनी आंखे खोल दी। मैं थोडा सा डरा, मगर मैने अपने हाथो को उसकी चुचियों पर से नही हटाया था। दीदी ने अपनी आंखे खोल कर मुझे देखा और मुस्कुराते हुए, मेरे सिर के पिछे अपने हाथो को रख कर मेरे होंठो को चुम लिया। मुझे थोडा आश्चर्य तो हुआ, पर तभी सिस्टर ने कहा,
“ओह भाई, क्या तुम मम्मी-पापा की चुदाई देख कर आ रहे हो ?”

दीदी के ऐसे पुछने पर, मैं चौंक गया और मैने पुछा,
“तुम्हे ऐसा क्यों लग रहा है, दीदी ?”

“वो इसलिये भाई, क्योंकि तुम इतने ज्यादा उत्तेजित पहली बार लग रहे हो। मैं भी इतना ही उत्तेजित हो जाती थी, जब मैं मम्मी-पापा की चुदाई देखा कर आती थी।”“ओह सिस्टर, इसक मतलब है कि, तुमने भी मम्मी और पापा की चुदाई देखी,,,,,,”

“येस ब्रधर, मैने कई बार मम्मी-पापा का खेल देखा है। और हर बार मैं उतना ही उत्तेजित हो जाती थी, जितना आज तुम महसूस कर रहे हो। मगर मेरे पास बाथरूम में जाकर, उन्गली या बैगन से करने के अलावा कोई रास्ता नही होता था। पापा जब भी यहां होते है, वो दोनो हमेशा आपस में प्यार करते है और खुल कर चुदाई करते है। मैने उन दोनो का खेल बहुत बार देखा है। इसलिये मैं अब तभी देखने जाती हुं, जब पापा कुछ दिनो की छुट्टी के बाद घर वापस आते है। उस समय पापा बहुत भूखे होते है और वो और मम्मी दोनो मिल कर बहुत जबरदस्त चुदाई करते है।”

“ओह दीदी, इसका मतलब बहुत दिनो से मम्मी-पापा की चुदाई देख रही हो। तुम ये भी जानती हो कि, किस दिन सबसे अच्छी चुदाई देखने को मिल सकती है ? मगर सिस्टर, उसके बाद तुम बैगन का इस्तमाल क्यों करती हो ? क्या तुम्हारे मन में, किसी आदमी के डण्डे का उपयोग करने की इच्छा नही हुई ?”

“भाई, मेरा तो बहुत मन करता था, मगर मेरे पास कोई रास्ता नही था। क्योंकि, मेरी सहेली कनिका ने मुझे पहले ही बता दिया था कि, बाहर के लडको के साथ बहुत सारे खतरे होते है। फिर हमारा गर्ल्स-स्कूल होने के कारण, कोई बोयफ्रेन्ड बनाना बहुत ही मुश्किल हो गया था।”

“ओह दीदी, आज से पहले मैने ऐसा मजेदार खेल केवल ब्लू फिल्मो में ही देखा था। यह मेरे जिवन की पहली घटना है। इसने मुझे बहुत ही रोमांचित और उत्तेजित कर दिया है। इसलिये कमरे में आते ही, जब मैने तुम्हारी नंगी जांघे और पेन्टी देखी तो, मैं बेकाबू हो गया और तुम्हारी छातियां दबाने लगा।”“ओह भाई, मैं समझ सकती हुं कि तुम बहुत गरम हो गये होगे, तभी तुमने ऐसी हरकत की है। मैं तुम्हे अब तक एक छोटा लडका ही समझती रही हुं। मुझे नही पाता था कि तुम बडे हो गये हो। मैं देखना चाहुन्गी कि तुम कितने बडे हो गये हो।”
कह कर मेरी बहन उठ कर बैठ गई। उसने मेरे पजामे को खोल दिया और मेरा लंड, जैसा कि तुम देख ही चुकी हो, ७ इंच का है और उस समय पुरी तरह से खडा था, को नंगा कर दिया। लंड फनफनाते हुए बाहर निकल आया। इसको देख कर सिस्टर के मुंह से एक किलकारी निकल गई। फिर वो मुस्कुराते हुए बोली,
“बहुत प्यारा है भाई, तुम्हारा लंड और काफि बडा भी है। मैं तो अभी तक तुम्हे बच्चा ही समझती थी, मगर तुम्हारे लंड को देख कर मुझे लग रहा है कि तुम बहुत बडे हो गये हो।”

फिर दीदी निचे झुक कर, मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चुसने लगी। मेरे लिये यह पहला और अनोखा अनुभव था। मुझे बहुत उत्तेजना हो रही थी और गुदगुदी भी हो रही थी। मैने उसके मुंह से लंड को बाहर खींचने की कोशिश की। मगर बहन ने लंड के सुपाडे को मुंह में भर कर चुसना जारी रखा हुआ था। यह बडा ही अनंददायक क्षण था मेरे लिये। पहली बार मैं अपने लंड को चुसवा रहा था, और वो भी मेरी प्यारी गुडिया-सी बहन द्वारा।

“ओह दीदी, मुझे बहुत मजा आ रहा है, और मैने ऐसा पहले कभी महसूस नही किया है।”

“ब्रधर, तुम्हारा लंड सच में बहुत ही मजेदार है और मुझे चूसने में बहुत अच्छा लग रहा है। तुम्हारे इस खडे लंड को देखने और चूसने से मेरी पेन्टी गीली महसूस हो रही है।”;
मेरी प्यारी बहन ने अपना मुंह, मेरे लंड पर से हटाते हुए कहा।

मुझे बहुत मजा आ रहा था, ऐसा लग रहा था कि मेरा फिर दुबारा से निकल जायेगा। इसलिये मैने दीदी के बालों को पकड कर, उसके मुंह को अपने लंड पर से हटा कर उपर उठा दिया और उसके होंठो को चुम लिया। बेहना ने भी बहुत प्यार से मेरे होंठो को अपने होंठो के बिच दबा लिया, और अपनी जीभ को मेरे मुंह में डाल दी। हम दोनो करिब पांच-सात मिनट तक दुसरे के होंठो को चुसते रहे। कुछ देर बाद दीदी ने अपने चेहरे को मुझसे अलग किया और बोली,
“ओह भाई, ये बहुत आश्चर्यजनक है कि हम दोनो को इस तरह का मौका मिला है। तुम अब बडे हो गये हो। ओह ब्रधर, आओ हम दोनो जल्दी से चुदाई का खेल शुरु करे।”,
कह कर बहन बेड पर पीठ के बल लेट गई।उसके नाईट-गाउन के सारे बटन तो, पहले से ही खुले हुए थे। अब उसने अपनी ब्रा भी उतार दी। उसकी गोल-गोल, भारी चुचियों को मैने अपने हाथो में ले लिया और एक चुंची को मुंह में भर कर, दुसरी चुंची को जोर से दबाते हुए चूसने लगा। दीदी के मुंह से सिसकारियां निकल रही थी। मैं धीरे-धीरे निचे की ओर सरकता गया, और मैने अपने चेहरे को उसकी मोटी जांघो के बिच छुपा दिया। उसकी झीनी पेन्टी के उपर से मैने उसकी चूत को अपने मुंह में कैद कर लिया। मुझे ऐसा लगा, जैसे उसकी चूत के उपर बाल उगे हुए है। फिर मैने जल्दी से उसकी पेन्टी को खींचा। दीदी ने भी अपने चुतड उठा कर, इस काम में मेरी सहायता की और मेरे सामने मेरी प्यारी बहन की खूबसुरत, हल्के झांठो वाली चूत नुमाया हो गई।

मेरे अंदर जजबात का एक तूफान उमड पडा था। मैं अपने आप को, इतनी खूबसुरत और प्यारी चूत से, अब अलग नही रख सकता था। अपनी इस उत्तेजित अवस्था में मुझे, अपने चेहरे को उसकी बुर में गाड देने में कोई हर्ज नजर नही आ रहा था। मैने ऐसा ही किया और उसकी चूत को चाटने लगा, साथे में उनकी फांको को अपनी जीभ से सहलाने लगा। बेहना ने अपने दोनो हाथो को मेरे सिर पर रख दिया और मेरे बालो में हाथ फेरते हुए, मेरे चेहरे को अपनी चूत पर दबाते हुए, अपनी गांड को नचाते हुए, अपनी बुर मेरे चेहरे पर रगड ने लगी।

“,,,,,,,उसकी चूत बहुत पानी फेंक रही थी। मुझे उसकी चूत का नमकीन पानी बहुत स्वादिष्ट लग रहा था। सिस्टर के मुंह से सिसकारियां निकलने लगी थी। वो अपने दोनो हाथो से, अपनी दोनो चुचियों को दबोच कर मसल रही थी। मैं इस समय बहुत ही उत्तेजित अवस्था में था। मैने अपनी जीभ को उसकी चूत में पेल दिया और जीभ को चूत की दिवारों पर रगडते हुए, अंदर घुमाने लगा। सिस्टर उत्तेजना के मारे अपनी गांड हवा में उछाल रही थी। मेरे लिये उस पर काबु पाना मुश्किल हो रहा था। इसलिये मैने अपने दोनो हाथो से उसके चुतडों को पकड लिया, जिसकि वजह वो ज्यादा उछल नही पाये। फिर मैं उसकी बुर की टीट (क्लिट) को अपने होंठो के बिच दबा कर चुसने लगा।

“ओह प्यारे, जानु मेरे, ओह,,,, अब चढ जाओ मेरे उपर, उफ्फ्फ्फ्फ्फ,,,,,,, श्श्श्शशीशीशीईशीईईईई,,,,,, अब मेरे लिये,,,,,,,,, ओह, सनम, मेरे प्यारे भाई, जल्दी करो, अब मुझसे ये खुजली बरदाश्त नही हो रही है, तुम्हे मेरी चूत का रस पीने और भी मौके मिलेन्गे। आज हमारा पहला मिलन होने वाला है। देर मत करो ब्रधर, अपने मोटे फनफनाते हुए लौडे को जल्दी से मेरी चूत में पेल दो।”

मैं भी अब उसको चोदने की जुरूरत महसूस कर रहा था। मैने जल्दी से अपने चेहरे को उसकी जांघो के बिच से हटाया और अपने आप को उसकी जांघो के बिच ले आया। फिर एक हाथ से अपने खडे लंड को पकड कर, उसकी चूत के गुलाबी छेद पर लगाके एक जोरदार झटका दिया। मेरा लंड दनदनाता हुआ सीधा उसकी चूत में घुसता चला गया। दीदी के मुंह से एक चीख निकल गई। शायद मेरे इतनी तेजी के साथ लंड घुसाने के कारण उसे दर्द होने लगा था, मगर उसने अपने आप को संभाल लिया और मुझे कस कर अपनी बांहो में चिपटा लिया। ये सच है कि मैने अपने दोस्तो से चुदाई संबंधी बहुत सारी बाते की हुई थी, और मैने कुछ किताबे और फोटो अल्बम भी देखे हुए थे। लेकिन तुम्हारी और पापा की चुदाई देखने के बाद मैं एकदम पागल हो गया था। मेरे अंदर वासना का तूफान खडा हो गया था। मैं बहन की सिसकारियों और चीखों की तरफ बिना कोई ध्यान दिये, बहुत जोरदार धक्के लगा रहा था। कुछ देर बाद ही मेरे जानदार धक्को का जवाब, दीदी भी अपनी गांड उछाल-उछाल कर देने लगी थी। शायद अब उसे भी मजा आने लगा था। उसकी चूत एकदम गीली हो चुकी थी और मेरा लंड सटासट अंदर-बाहर हो रहा था। उसकी गोल, कठोर चुचियां मेरे हाथो में आसानी से फिट हो रही थी और उनको दबाते और सहलाते हुए मैं, अपने लौडे को बहन की चूत में पेल रहा था। मैने उसके होंठो को चूस रहा था और चोद रहा था।,,,,,,,,”

“,,,,,,,बेहना अपनी सिसकारियों और किलकारियों के द्वारा मेरा उत्साह बढाते हुए, अपनी गांड उछाल-उछाल कर चुदवा रही थी। हम दोनो की सांसे धौकनी की तरह चलने लगी। तभी दीदी ने मुझे कस कर अपने चिपटा लिया, और अपनी बुर से मेरे लौडे को कस लिया। मेरे लंड से भी विर्य का एक तेज फौव्वारा, बहन की चूत के अंदर निकल पडा। हम दोनो कुछ देर तक ऐसे ही पडे रहे, फिर थोडी देर बाद हम एक-दुसरे से अलग हुए और बाथरूम में जाकर अपने अंगो को साफ किया। फिर हम दोनो बेड पर बैठ गये और दीदी ने मेरे होंठो का एक चुंबन लिया। मुझे उसकी चुदाई करने के लिये धन्यवाद दिया और कहा कि, वो बहुत दिनो से किसी के साथ चुदाई करवाना चाहती थी, मगर मौका नही मिलने के कारण अपनी दोस्तो के साथ बैगन का इस्तेमाल करती रहती थी। मैने दीदी से कहा कि, आज के बाद उसे बैगन के इस्तेमाल की जुरूरत नही महसूस होगी। ये हमारी पहली चुदाई थी, इसके बाद हम लगभग रोज चुदाई करते थे और कई कई बार करते थे।इतना कहा कर मैं चुप हो गया। मम्मी बडे गौर से मेरी कहानी सुन रही थी। कहानी सुनते-सुनते उसके चेहरे का रंग भी लाल हो गया था। मुझे ऐसा लग रहा था कि मम्मी को ये कहानी सुनने में बहुत मजा आया था। वो अपने एक हाथ को अपनी जांघो के बिच रखे हुए थी और वहां बार-बार दबा रही थी। फिर वो अपनी जांघो को भींचते हुए बोली,
“ओह लडके, सच कह रहे हो तुम। मुझे लगता है, मैं ही इन सबका कारण हुं। तुम्हारी कहानी सुन कर, मैं बहुत गरम और उत्तेजित हो गई हुं।”,
इतना कहते हुए, वो बेड की पुश्त पर पीठ टीका कर अधलेटी-सी हो गई।

उसने मेरा हाथ पकड कर अपने हाथो में ले लिया और अपनी छाती पर रख दिया। मेरे पुरे बदन में सिहरन दौड गई।

“ओह बेटे, तुमने मुझे बहुत गरमा दिया है। तुम और तुम्हारी बहन दोपहर में बहुत जबरदस्त तरिके से चुदाई कर रहे थे। जैसाकि मैं समझती हुं, सामाजिक परंपराओं के अनुसार ये पाप है। मगर मेरा दिल, जोकि मेरे दिमाग से अलग सोच रहा है और कह रहा है कि ये बहुत ही प्यारा पाप है। ओह पापी लडके, क्या तुम एक और पाप करना चाहोगे ? क्या तुम अपनी मम्मी के साथ भी ये पाप करना चाहोगे ?”

“ओह मम्मी, ये तुम क्या कह रही हो ? क्या तुम सच में ऐसा कुछ सोचती हो ?”

“मेरे प्यारे, क्या तुम्हे अब भी कोई शक हो रहा है ? ओह माय डार्लिंग सन, जरा अपनी मम्मी की चुचियों को दबाओ और उसके होंठो को चूमो।”

“ओह, ये बहुत ही आश्चर्यजनक बात है, मेरे लिये। मुझे समझ नही आ रहा, मैं आपको क्या जवाब दुं और कैसे आगे बढुं ? ओह मम्मी, मुझे आपके साथ ये सब करने में बहुत शरम आ रही है, क्या आआआप्प्प,,,,,,?”

“हरामी लडके, तुम्हे अपनी प्यारी बहना को चोदने में कोई शरम नही आई। और तुमने बेशरमी से मुझे सारी कहानी भी सुना दी। अब तुम शरमाने का नाटक कर रहे हो ? ओह बेटे, क्या मैं तुम्हे सुंदर नही लगती ?”

“नहीं मम्मी, तुम ऐसा कभी ना सोचना। तुम बहुत ही सुंदर हो, और कोई भी मेरी उमर का लडका तुम्हे प्यार करना चाहेगा। मैं हंमेशा से सोचता रहता था कि मेरी मम्मी और बहन से ज्यादा खूबसुरत कोई भी नही है। दीदी के साथ प्यार करने के बाद, मेरे मन में कै बार यह इच्छा उठी कि मैं तुमसे भी प्यार करुं, पर आज अचानक,,,,,,,,,,,,,”

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