होली पे मनाई दिवाली

दोस्तों में होली के शुभ मौके पर एक और शानदार कहानी लेकर आया हूँ। यह कहानी मेरी एक कल्पना है और किरदार असली …….. तो मजा लीजिये एक और लंड खड़ा कर देने वाली कहानी का।

किरदार

1) रिक्की – यानि के मैं खुद। एक आम लड़का जो दिखने में बहुत खुबसूरत तो नहीं पर गुड लूकिंग है। कद काठी से आम सा दिखने वाला 20 वर्षीय युवक

2) प्रियंका – रिक्की की पड़ोसन। शक्ल तो कुछ ख़ास नहीं पर रंग दूध से भी ज्यादा गोरा और रिक्की को जो सबसे ज्यादा पसंद है वो उसकी पतली सी कमर और कमर के ख़त्म होते ही एकदम परफेक्ट गांड। उम्र -24 साल शादी हो चुकी है अभी कोई तीन महीने पहले ही

3) दिव्या – प्रियंका की छोटी बहन और रिक्की की पड़ोसन। दिखने में नार्मल पर हलकी सी सांवली और एकदम परफेक्ट बूब्स ……36 साइज़ और फिर भी गोल सख्त और हमेशा सीधे तने हुए

4) आनंद – प्रियंका का पति। दिखने में ढीला डाला सा इंसान जो कभी भी एक्टिव नहीं हो सकता (बिस्तर पे भी नहीं इतनी हॉट बीवी होने के बाद भी नहीं )

5) मयंका – प्रियंका और दिव्या की बड़ी बहन। दिखने में एकदम आंटी, मोटी और दो बच्चो की माँ

6) शेखर – मयंका का पति। दिखने में ठीक ठाक पर बड़ा दिलफेंक इंसान।

7) शर्मा अंकल और शर्मा आंटी – मयंका, प्रियंका और दिव्या के माँ बाप।

8) कनिका – इसके बारे में बाद में बात करेगे

तो कहानी शुरू करते है मार्च का महिना चल रहा था और होली आने वाली थी। मेरे मोहल्ले के लोगो ने इस बार होली पर मथुरा जाने का प्रोग्राम बनाया। मैं बहुत खुश था की वह पर विदेशी भी होगे मैं होली के बहाने उन पर हाथ फेर लुगा। घर पर शाम को खाना खाने के बाद हम बैठे हुए थे तभी शर्मा अंकल और आंटी घर पर आये। शर्मा अंकल ने पापा को बोला – ये प्रोग्राम भी इस बार ही बनाना था सबको?
मैं – क्यों अंकल क्या हुआ ?
अंकल – बेटा, आनंद जी और प्रियंका आ रहे है पहली होली मानाने अब हम जा भी नहीं सकते और होली पर आप सब लोग चले जायेगे तो सुना सुना सा रहेगा। मजा ही नहीं आएगा।
पापा- अगर ऐसा है तो भाई साहब हम भी नहीं जायेगे।
पापा की बात सुनकर मुझे मेरे सारे अरमान ख़त्म होते नजर आये। पर फिर एक ख्याल आया जो होता है अच्छे के लिए होता है पापा मम्मी नहीं जायेगे तो मैं खुले सांड सा घूम सकुगा।

मैं – पापा आप लोग नहीं जा रहे तो मैं चला जाता हु।
अंकल- बेटा तुम किधर जाने की बात कर रहे हो, कही नहीं जा रहे तुम भी। तुम्हारे दीदी जीजाजी आ रहे है और तुम …….. (मैं मन ही मन में – मादरचोद पहले तो अपनी हॉट बेटी चूतिये से ब्याह दी फिर ये चाह रहा है चूतिये का स्वागत करने के लिए मेरे खड़े लंड पर हथोडा मार लू )
मैं – पर अंकल ….
पापा – बेटा शर्मा जी सही कह रहे है हम सब यही रुकेगे।
मैं मुह लटका कर अपने रूम में चला गया। मैं उदास हो गया था और ये भी जनता था की शर्मा अंकल की बात पापा नहीं टालने वाले ……

मेने कंप्यूटर पर गेम खेलने का सोचा पर दिमाग अभी भी मथुरा के हसीन सपनो में उलझा था …. मेने सोचा था उधर इतनी भीड़ होगी किसी भी विदेशी महिला के साथ होली खेलने शुरू कर दुगा उसके बाद पहले तो उसके चहरे पर फिर गर्दन पर और फिर उसके बूब्स पर हाथ फेर लेता पर ये सब अब सपना ही रहने वाला था
मेने कंप्यूटर बंद किया और खिड़की पर जा कर बैठ गया। मेरे कमरे की लाइट बंद थी मैं खिड़की से आसमान में देख रहा था। थोड़ी देर बाद मुझे बगल वाली छत पर से कुछ खुसफुसाहट सुनाई दी मेने जब ध्यान दिया तो समझ आया की वो दिव्या है। पहले तो मेने ध्यान नहीं दिया पर जब मेने घडी देखी तो 11 बज रहे थे मुझे पता ही नहीं चला था की मैं 2 घंटे से ऐसे ही गम मना रहा हूँ
फिर मेने सोचा ये दिव्या इतनी रात में किस्से बात कर रही है नीचे से कुछ सुनाई नहीं दे रहा था इसलिए मैं छत पर चला गया। मैं चुपचाप गेट खोल कर बिना लाइट जलाये छत पर गया और खड़ा होने की जगह नीचे बैठ कर दीवार तक गया अब मेरे और दिव्या में बस दो कदम की दूरी थी। मैं उसकी बाते सुनने लगा वो अपने बॉयफ्रेंड से बात कर रही थी। मैं लड़के का नाम तो नहीं जान पाया क्युकी वो उसे जानू बुला रही थी। (आगे की बाते दिव्या की जुबानी)
दिव्या – जानू तुम होली पर नहीं आ सकते तुमको बताया ना दीदी और जीजाजी लोग आ रहे है। अगर वो नहीं आते तो कुछ होता पर अब कोई चांस नहीं है …………………………. चलो होली के लिए तो तुम्हे मेने नाराज कर दिया पर अभी तो तुम्हे खुश कर सकती हु ना चलो अभी तुम्हारा फेवरेट काम करते है फ़ोन सेक्स …….. मैं अपना मोबाइल हैंड्स फ्री मोड में कर देती हु फिर तुमको फुल मजे देती हु। यह कह कर उसने फ़ोन का लाउड स्पीकर चालू कर दिया –
जानू – तुमने क्या पहना है
दिव्या – टी शर्ट और पजामा
जानू – और अन्दर
दिव्या – ब्रा और पेंटी
जानू – कौनसे
दिव्या – लाल नेट वाली ब्रा और सफ़ेद पेंटी जिस पर फूल बने हुए है
जानू- लाल ब्रा क्यों पहना
दिव्या – आज लाल सूट पहना था ना इसलिए
जानू- अच्छा अब अपना पजामा और टी शर्ट उतारो
दिव्या – मैं छत पर हु तुम पागल तो नहीं हो
जानू- रात को कौन देखने वाला है तुम्हे और घर वाले सो गए होगे प्लीज
दिव्या – ठीक है रुको मुझे चेक करने दो ( यह कह कर दिव्या निचे चली गयी )
मेने झट से मोबाइल निकला उसका कैमरा ओन किया और उसे ऐसे रख दिया की ज्यादा से ज्यादा शर्मा अंकल की छत दिखे
मैं अभी फिर से झुक ही था की दिव्या आ गयी और छत का गेट बंद कर दिया
दिव्या- हाँ जान मैं आ गई
जानू- कपडे उतारो
दिव्या – तुम नहीं मानोगे
जानू- तुमको बोला था की कमरे से ही बात कर लों
दिव्या – नहीं मम्मी पापा को शक हो जायेगा की रोज रात को किस्से बात करती हु
जानू- कपडे उतारो ना देखो मैं तो पूरा नंगा हो गया हु
दिव्या- ठीक है बाबा ( और उसने अपने कपडे उतार दिए )
मैं जो अभी तक छुपा हुआ था अब मुझसे रहा नहीं गया मेने देखने की कोशिश करी पर कुछ नजर नहीं आया मैं वापिस छुप गया
जानू- उतार दिये
दिव्या- हाँ अब सिर्फ ब्रा पेंटी में हु
जानू- अब ब्रा के ऊपर से ही राईट बूब को दबाओ
दिव्या- सीईइ जानू मुझे कुछ हो रहा है
जानू- बहनचोद अभी हाथ लगते ही कुछ हो गया और सुबह जब मेने चूसा था तब भी तुझे दुनिया का ख्याल था
दिव्या- जान तुम पागल हो पार्किंग में कोई आ जाता तो
जानू- क्या होता तेरे मस्त बूब देख कर पागल हो जाता और क्या
दिव्या- तुम मेरी तरफ से अपना लंड पकड़ो और उसे धीरे धीरे सहलाओ
जानू- तेरी यही अदा तो जानलेवा है
दिव्या – और तुम …
जानू- अच्छा अब अपनी ब्रा खोल दो और अपने निप्पल के चारो और उंगली फिराओ
दिव्या- जान मैं पागल हो रही हु
जानू- फिर अपनी पेंटी खोलों
दिव्या- वो तो मेने पहले ही खोल दी
जानू- जान अपने दुसरे हाथ से चूत में उंगली करो ना
दिव्या- आह्ह्ह मैं पागल हो रही हु
जानू- मैं आने वाला हु
दिव्या- आह्ह सीईईईईईइ आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्क
जानू- मैं तो हो गया
दिव्या- मैं भी होने वाली हु आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सीईईईईईईइ ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह्ह और दिव्या भी झड गई
दिव्या- ये हलकी हलकी हवा तो मुझे हॉर्नी बना रही है अगली बार हम भी खुले में ही करेगे
जानू- क्या करेगे
दिव्या- चुदाई, मुझे खुली हवा मैं इतना मजा आ रहा है की अभी तुम होते तो मैं तुम्हारा लंड खा जाती … तभी नीचे से कुछ आवाज आई।
दिव्या – जान कोई आ रहा है मैं कल बात करती हु और फ़ोन काट दिया
मैं भी अब तक उनकी रास लीला सुन कर मुठ मार चूका था मेने झट से देखा मुझे दिव्या की ब्रा पेंटी में एक झलक दिखी और उसके प्यारे बूब मेरी आँखों में कैद हो गए।
मैं भी निचे आ कर सो गया।

अगले दिन सभी लोग मथुरा के लिए निकल गए बस अब गली में हम, शर्मा जी का परिवार और कनिका का परिवार बच गया था। अब आप सबको कनिका के बारे में बता दू

कनिका मोदी :- बेहद खुबसूरत पतली पर तराशा हुआ जिस्म और कातिल मुस्कान ये खूबी थी उसकी। उम्र :- 21 साल।

उनके परिवार के नहीं जाने की दो वजह थी 1 उसका भाई अस्पताल में था उसे मलेरिया हो गया था और उसकी हालत कुछ ज्यादा ख़राब थी 2 कनिका के पति की मौत हुए अभी 10 महीने ही हुए थे ( कनिका ने लव मेरिज कर ली थी पर एक हादसे में उसका पति मर गया था)

अब फिर से कहानी पे आते है
अब मैं रात का इंतजार करने लगा क्युकी मुझे लग रहा था की आज तो दिव्या नंगी मिल ही जाएगी आज तो उसको किसी के देखने का डर नहीं होगा तो मेने एक प्लान बनाया और पहले तो एक लकड़ी की सीडी को लगा दिया ताकि मैं बिना गेट खोले ही छत पर जा सकू फिर घर पर बोल दिया की मैं दोस्त के जा रहा हु लेट हो सकता हु . शाम को 7 बजे मैं निकल गया और ऐसे ही टाइम पास करने लगा और रात को करीबन 10 बजे गली में घुसा मेने देखा की गली सुनसान है पर शर्मा जी की छत भी तभी मुझे ध्यान आया की शर्मा जी और मोदी अंकल दोनों के बिच वाला घर जो जैन अंकल का था अगर मैं उसमे चला गया तो मजे आ जायेगे क्युकी उनका घर थोडा सा ऊँचा है इससे मैं आराम से दिव्या को देख सकुगा और वो नहीं। यह सोच कर मैं उनके घर में घुस गया रात हो गयी थी और गली में ज्यादा लोग थे नहीं इसलिए मुझे कोई डर नहीं था। मैं पहले डोली से खिड़की पर गया फिर पाइप के सहारे छज्जे पर और फिर छत पर चला गया बड़े ही मजे से हो गया। मैं दिव्या का इंतजार कर रहा था पर कोई नहीं आ रहा था तभी मुझे मोदी अंकल की आवाज आई :- बीटा हम जा रहे है गेट अच्छे से बंद कर लो और हम फ़ोन नहीं करे तब तक खोलना नहीं आज गली सुनी है। मैं झट से उस तरफ गया तो देखा मोदी अंकल और आंटी कार से अस्पताल जा रहे थे और गेट पर कनिका थी जिसने एक पतला सा क्रीम कलर का टॉप पहना था और काली मिनी स्कर्ट पहनी थी। उनके घर पर मेन गेट पर रोड लाइट थी इसलिए सब नजर आ रहा था उसका टॉप इतना पतला था की उसका ब्रा भी दिख रहा था। मेरा लंड खड़ा हो गया पर कनिका अंकल आंटी के जाते ही अन्दर चली गयी अब मैं बेचैन हो गया था मेने फिर से शर्मा जी के घर में देखा तो मुझे उनके घर पर शेखर की कार दिखी और मेने सर पीट लिया की इतनी गांड मरवाई और ये याद ही नहीं रहा की ये मादरचोद भी आ रहे है। मेरे खड़े लंड पे चोट हो गयी वो भी हथोरे से। मैं घर जाने के लिए निचे उतरने लगा मैं जैसे ही छज्जे पर उतरा मुझे कनिका की रोने की आवाज आई मेने देखा वो आवाज सामने के रोशनदान से आ रही है मेने उसमे से देखने की कोशिश की पर मुझे कनिका नहीं दिखी क्युकी मुझे सिर्फ कमरे का एक कोना ही दिख रहा था तो मेने ध्यान से सुनाने की कोशिश की।

कनिका :- अहह्ह्ह्ह्ह्ह (सिसकिया) तुम मुझे छोड़ कर क्यों चले गए देखो मैं कैसे घुट रही हु कल होली है तुम मुझे होली पर कैसे रगड़ देते थेअहह्ह्ह्ह्ह्ह (सिसकिया) मेरे सारे कपडे फाड़ कर पुरे बदन पर रंग लगते थे अहह्ह्ह्ह्ह्ह (सिसकिया)फिर मुझे छोड़ते थे और फिर खुद रगड़ रगड़ कर नहलाते थे फिर छोड़ते थेअहह्ह्ह्ह्ह्ह (सिसकिया) अब कल तुम्हारी याद आएगी तो मैं क्या करू ये केला भी मेरी प्यास नहीं भुझा पायेगा।
मैं यह सुन कर चौंक गया और ये समझ गया की कनिका क्या कर रही है मैं उधर ही लटके हुए उसे देखने की कोशिश करने लगा पर मेरी किस्मत ख़राब थी मुझे कुछ नहीं दिखा। मैं उतर गया और घर में जाने लगा तभी मुझे एक शरारत सूझी। मेने अपना मोबाइल निकालने के लिए जेब में हाथ दिया तो याद आया मोबाइल तो रात से ही छत पर है मैं भाग कर घर में गया और सीडी से छत पर गया मोबाइल उठाया वो बंद हो गया था मेने उसे जेब में रखा और जैसे ही मिचे उतरा मुझे शर्मा जी के गार्डन में दो लोग दिखे मैं छिप कर देखने लगा वो प्रियंका और शेखर थे।
शेखर प्रियंका के के होठ चूस रहा था और उसका टॉप उठाने की कोशिश कर रहा था
प्रियंका – क्या कर रहे हो कोई आ जायेगा
शेखर – पहले भी तो यही करता था तब तो मजे लेती थी अब पति ज्यादा प्यारा हो गया देखू तो सही जिन निम्बू को खरबूजा बने उनका क्या हाल है और उसने टॉप ऊँचा कर दिया और ब्रा में से एक बूब निकाल कर चाटना शुरू कर दिया प्रियंका शेखर के सर को सहलाने लगी और सिस्कारिया भरने लगी। शेखर ने जैसे ही दूसरा बूब बहार निकाला प्रियंका उसे धक्का दे कर भाग गयी। शेखर भी उसके पीछे गया पर वो अन्दर चली गयी मैं थोड़ी देर इंतजार करता रहा फिर घर में चला गया।
अन्दर जाते ही पापा ने मोबाइल के बारे में पूछा मेने कहा वो ख़राब हो गया है शायद चालू नहीं हो रहा।
मम्मी ने खाना दिया और दोनों सोने चले गए मेने घडी देखि तो पता चला पोने बारह बज गए थे मैं खाना खाते टाइम सोच रहा था ये सब क्या हुआ था आज मेरी नजरो के सामने .

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