हाई क्लास सारिका की चुदाई part 2

इसके बाद सुधाकर की हिम्मत बढ गयी थी। मैं जब भी उसके सामने आती तो वो मेरे सामने ही अपने लंड को दबा देता और अपने होठों पर जीभ फिराकर मुझे इशारे करता। वो मुझे मिठाई की भी याद दिलाता। मैंने उसको एक दिन कह दिया कि तुम्हें तो मैं स्पेशल मिठाई खिलाउंगी। इस बीच मैने सोचा कि मैं अमित को इस सब के बारे में बता दुं। वैसे तो अमित और मेरे बीच कुछ भी छिपा नहीं था। पर ये सोचकर कि अमित वॉचमैन के बारे में न जाने क्या रिएक्ट करे, मैं चुप ही रही।
इस तरफ मेरी आग भी भडक रही थी। फिर एक दिन हमारे नेटिव प्लेस जोधपुर से कुछ मेहमान आयेतो वो वहां से मशहूर गुलाब जामुन लाये। उनके जाने के बाद मुझे सुधाकर की मिठाई के बारे में याद आया। उस दिन अमित के आने से पहले मैं वो गुलाब जामुन लेकर नीचे गयी। सुधाकर अकेले ही बैठा था। मैंने उसे कहा कि ये लो तुम्हारी मिठाई, खास जोधपुर से मंगाई है। उसने गुलाब जामुन मुहं में डाला। जब मैंने पूछा कि कैसा लगा तो वो एकदम मेरे बुब्स पर घूरते हुए बोला कि भाभी आपके ये गुलाब जामुन तो बहुत सोफ्ट हैं। उस दिन मैने काफी लो कट ब्लाउज पहना था और अपना पल्लू भी एक तरफ कर रखा था। मैने उसको कह कि और लो ना और उसके सामने अपने बुब्स पर हल्के से हथ दबाया। वो टेबल के उस तरफ कुर्सी पर बैठा हुआ था। मै उसके सामने झुक कर खड़ी थी। उसने और एक गुलाब जामुन उठाया और बर्तन में उसको नीचोडते हुए कहा कि भाभी बहुत सोफ्ट है आपके गुलाब जामुन और मेरे बुब्स को घूरने लगा। मैं थोड़ा और झुक गई। वो अपनी जीभ को होंठों पर फिराते हुए बोला कि भाभी हमारे गांव में ऐसी मिठी और मुलायम मिठाई नहीं मिलती। पर हमारे कोंकण में फ्रुट अच्छे मिलते हैं, अबकी बार आयेंगे तोआपके लिए जरूर लाउंगा। मैंने कह कोनसा फ्रुट लाओगे? तो वो बोला बताइये आपको क्या पसंद है। मैंने कह मुझे क्या पता तुम्हारे गांव में क्या अच्छा मिलता है। तो वो बोला कि भाभी आपको केला पसंद है? तो मैने कह हां क्यों नहीं पर मुझे तो वो बडे वाले केले पसंद है। इसपर वोएकदम से उठ खड़ा हुआ और अपने लंड पर हाथ दबाते हुए मेरी आँखों में आँखें डालकर बोला कि जरूर भाभी आपको एकदम बड़े वाला केला खिलाउंगा। मैंने कहा देखते हैं कब लाते हो बडेवाला केला।और मैं ऊपर आ गई।
फिर एक दिन करीब चार बजे में कुछ सामान लेकर वापस आयी तो सुधाकर लोबी के बाहर खडा था। जैसे ही मैं गाड़ी से उतरी तो वो सामने आ गया। वो उस समय ड्यूटी पर नहीं था। उस हफ्ते उसकी नाइट शिफ्ट थी। वो मेरे हाथ से सामान लेने लगा तो मैने कहा रहने दो, तोवो बोला कि मैं पहुंचा देता हूं और भाभी आपके लिए मैं गांव से बडे वाले केले भी लाया हूं। आप चलिए मैं सामान और केले लेकर आता हूँ। मैं कुछ बोलने जा रही थी कि वो मेरी आँखों में देखकर बोला कि भाभी अभी आ जाऊं ना आपको केला खिलाने। मैं कुछ भी बोल नहीं सकी और सिर्फ हां में सर हिलाकर लिफ्ट की तरफ बढ गई। वो लिफ्ट में नहीं आया था। मैं घर पहुंच कर जल्दी से बाथरूम गयी और बाथरूम से निकलकर बाहर सोफे पर बैठ कर सुधाकर का इंतजार करने लगी।

मैं सोफे पर बैठकर सुधाकर का इंतजार करने लगी। करीब 8- 10 मिनट बाद डोर बेल बजी। मैंने उठकर दरवाजा खोला तो सामने सुधाकर खड़ा था। मैंने उसे कहा अंदर आ जाओ। उसके एक हाथ में मेरे सामान की थैली थी और दुसरे हाध में वाकई केले थे। मैंने वो अंदर आकर एक तरफ खड़ा हो गया। मैंने दरवाजा बंद कर दिया। मैने उससे बैठने के लिए कहा। वो थोड़ा घबरा रहा था। मैंने कहा घबराओ मत यहां पर बैठ जाओ और सोफे की तरफ इशारा किया। और कहा कि तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए चाय लाती हूं। मैं किचन मै गयी और गैस जलाकर चाय रख दी। हमारे किचन से हॉल का सोफा दिखता है। वो मेरी ओर ही देख रहा था। मै उसको देखकर मुस्कराई। तभी वो बोला कि भाभी आपके लिये ये केले लाया हूं। और उठकर किचन की ओर आ गया। किचन के दरवाजे पर खड़े होकर वो मुझे बोला कि भाभी ये लिजिए केला और एक केला निकाल कर उसका पूरा छिलका निकाल दिया और बोला लिजिए खाइए। मैंने केला लिया और उसकी आँखों में देखते हुए केले पर अपनी जीभ फिराई और उसको होंठों के बीच में रखकर चुसने लगी। वो बोला कैसा है भाभी? तब मैंने कहा कि तुम सच कहते थे ये तो वाकई में बहुत बड़ा है। इसपर वो बोला कि भाभी मेरे पास इससे भी बड़ा और मोटा केला है, खायेंगी? मैने कहा इससे बड़ा तो हो ही नहीं सकता। तो वो बोला – भाभी देखेंगी क्या? और अपने पेंट के ऊपर से अपने लंड पर हाथ फिराने लगा। मैने कहा कहाँ है तो वो बोला कि एक शर्त पर दिखाऊंगा और उसने गैस बंद करके कहा कि भाभी चाय रहने दो। मैं भी उसकी बातों से गगर्म हो गई थी। मैंने पूछा कोनसी शर्त? तो उसने कहा आपको खुद निकाल कर देखना पड़ेगा। मैंने कहा कहाँ से। तो उसने एकदम से मेरा हाथ पकडकर अपने पेंट के ऊपर अपने लंड पर दबाया और बोला यहां से। मैंने अपना हाथ खींच लिया और कहा – ये क्या कर रहे हो सुधाकर। उसनेवापस मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रखा और बोला प्लीज भाभी इसे बाहर निकालिए ना। देखिये आपके कारण इसका क्या हाल हो गया है और मेरा हाथ अपने लंड पर जोर से दबाया। मैंने कहा सुधाकर ये गलत है तुम जाओ यहां से। तो वो बोला कि भाभी इसमें गलत क्या है। मै तो आपका नौकर हूँ और आपकी सेवा करना चाहता हूँ। प्लीज़ भाभी मुझे एक मौका दिजिये और देखिए मैं आपको खुश कर दूंगा। उसकी आवाज़ लड़खड़ा रही थी। मैंने अपना हाथ उसके पेंट पर ही रखा और बोली कैसे खुश करोगे? तो वो बोला पहले मेरे इस केले को बाहर निकालिए फिर बताता हूं। और ये कहकर उसने मेरे कंधों पर दबाव डाला। मै समझ गयी और उसके सामने घुटनों के बल बैठ गई। फिर मैंने धीरे से उसके पेंट के बटन खोले और जिप नीचे की। और उसके पेंट को नीचे सरकाया। अब सुधाकर का अंडरवियर मेबंद लंड मेरी आँखों के सामने था। मैंने उसके अंडरवियर में अपन नाजुक हाथ डाला। और उसका लंड पकड लिया। ओ माय गोड येकितना कडक था और कितना गर्म भी। मैंने अंडरवियर नीचे सरकाई और उसके लंड को बाहर निकाला। सच कहती हूँ ये तो मेरे लिए एक अजुबा था। सुधाकर का लंड मेरे अब तक देखे हुए सभी लंडों से बड़ा था पर जो बात मुझे सबसे अच्छी लगी वोथी इसकी मोटाई। उसका लंड मेरी हथेली में जैसे तैसे समा रहा था। शायद मेरी कलाई की टक्कर का। और हां सुधाकर के लंड की खास बात थी उसका रंग। एकदम काला और आगे से लाल सुपाडा। आप कहेंगे कि मै कुछ ज्यादा ही कह रही हुं पर सच्ची मुझे उसके लंड से प्यार हो गया।
जैसे ही लंड मेरे सामने आया मैने उसको कसकर पकड लिया और सुधाकर की आंखों में देखते हुए उसे जोर से दबाया। उसकी आह निकल गयी। और जैसे ही मैने उसके लंड के सुपाडे पर अपने होंठों से चुम, उसने मेरी आँखों मै देखते हुए कहा कि भाभी पहले इसको सुंघिये। मैंने अपनी नाक लंड के सुपाडे के पास लाकर एक गहरी साँस ली। उसके लंड की खुशबु मुझे मदहोश सी कर गयी। मैंने अपनी जीभ निकाली और सुधाकर के लंड के सुपाडे पर फिराई और उसके लंड पर आये पानी को चाटा। इतने में सुधाकर ने मुझे कंधों से पकडकर उठाया और मेरे होंठों पर होंठ रखकर मुझे बेतहाशा चुमने लगा। अब उसने मेरा मुँह पकडा हुआ था और उसके होंठ जैसे मेरे होंठों को निचोडकर उसका रस पी रहे थे। मैभी उसका साथ देने लगी और उसको कसकर पकड लिया। उसकी जीभ मेरे मुँह के अंदर जाना चाहती थी। मैंने अपना मुहं खोल दिया और हम दोनों एक दुसरे को मानो खाने ही लगे। इस चमाचाटी के दौरान सुधाकर के हाथ मेरी पीठ को सहलाते हुए मेरी गांड पर पहुंच गये। एक तरफ उसके होठ और जीभ मेरे मुहं को चुम रहे थे और मेरा एक हाथ उसके सिर को पकडकर अपनी तरफ खीच रहा था। तो सुधाकर के हाथ मेरी गांड को जोर जोर से दबारहे थे। इस तरह करीब दो तीन मिनट तक किसिंग और एक दुसरे के शरीर को टटोलने के बाद जैसे ही हम अलग हुए सुधाकर ने मुझे अपनी बांहों में उठा लिया। मैने भी अपनी बांहें उसके गले में डाल दी और वो मुझे चुमते हुए बाहर हॉल में ले आया। वो नीचे से नंगा था और वैसे ही सोफे पर बैठ गया। और मुझे अपने सामने खडा करके मेरी साड़ी निकाल दी। मैं शरमा रही थी। पर उसने एकदम से मेरे पेटीकोट का नाडा खीचकर मेरा पेटीकोट नीचे गिरा दिया। अब मैं उसके सामने सिर्फ़ ब्लाउज और पेंटी में खडी थी। उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे खींचकर अपनी गोद में बिठा दिया।

जैसे ही सुधाकर ने मुझे खींचकर अपनी गोदी में बिठाया, उसका लंड मेरी गांड पर चुभने लगा। वो मुझे पागलों की तरह चुम रहा था। मैं भी मस्त होकर उसकी किस का जवाब दे रही थी। अब उसके हाथ मेरे ब्लाउज पर पहुंच गए थे। वो मेरे बुब्स दबाने लगा। उसने मेरे ब्लाउज के बटन खोल दिए और मेरा ब्लाउज खींचने लगा। मैंने उसको ब्लाउज निकालने में मदद की और अपने हाथ ऊपर करके ब्लाउज निकाल दिया। अब मैं सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में मेरी सोसाइटी के वॉचमैन सुधाकर की गोद में बैठी थी। और वो नीचे से पूरा नंगा था। उसने मेरी ब्रा का हुक खोलकर मेरे दोनों स्तनों को आजाद कर दिया। वो मेरे बुब्स को देखकर बोला – भाभी क्या मस्त है आपके बॉल्स। भाभी मैं हमेशा इनको बाहर से देखकर सोचता था कि कितने मस्त होंगे ये। पर ये तो मेरी सोच से भी ज्यादा मस्त है। और वो मेरेबुब्स और निप्पल दबाने लगा। मेरे कोमल और मुलायम बुब्स पर उसके खुरदरे हाथ मुझे बहुत मजा दे रहे थे। मैंने कहा – सुधाकर लो और मसल डालो इनको। और मैंने उसके हाथो पर अपने हाथ से दबाया। उसने मेरे बुब्स जोर से दबाये और मेरी निप्पल को उंगलियों के बीच लेकर दबाया। मैंने उसके मुँह को अपने बुब्स पर लाकर कहा – सुधाकर चुसो इनको, ये बहुत दिनों से तरस रहे हैं। अब वो मेरे बुब्स चुसने लगा। कभी इस बुब को चुसता तो दुसरे को हाथ में लेकर दबाता और कभी दुसरे को चुसता तो इस वाले को दबाता। मेरे हाथ उसके सिर को बुब्स पर दबा रहे थे। मेरे मुंह से सी सी की आवाज निकलने लगी। कुछ देर बुब्स को चुसने और दबाने के बाद वो फिर से मेरे होंठों को चुमने लगा। मैंने उसकी टी शर्ट ऊपर की और निकाल दी। उसकी छाती पर थोड़े बाल थे और वो एकदम चौडी और कसरती थी। उसका लंड मेरी गांड में चुभ रहा था। अब उसका एक हाथ मेरे पेट और नाभि कोटटोलते हुए नीचे जाने लगा और मेरी पेंटी पर पहुंच गया। उसने पेंटी के ऊपर से मेरी चुत दबायी। मेरी पेंटी गीली हो गयी थी। उसने अपनी उंगलियों को अपने नाक पर लाकर सूंघा और बोला – वाह भाभी क्या मस्त सुगंध है आपकी चुत की।
उसके इस तरह के शब्दों से मैं शर्मा रही थी और चकित भी थी। वो फिर बोला – भाभी आप तो एकदम तैयार हैं अब मुझे भी थोड़ा तैयार कर दिजिये। मै बोली कैसी तैयारी? तो वो बोला- आपकी चुदाई की। मै एकदम शर्मा गई। वो बोला कि भाभी शर्माइए मत और बताइए कि मुझसे चुदवाओगी ना? मैंने उसकी आँखों में देखते हुए अपना सिर हां में हिलाया। तो उसने मेरा हाथ मेंअपना लंड पकडा दिया और वो बोला कि फिर इसे तैयार किजिए। मैं बोली वो कैसे? तो उसने मुझे अपनी गोदी से उठाकर सोफे के सामने जमीन पर पैरो के बल बिठाया और थोड़ा आगे होकर अपने लंड को मेरे मुँह के पास लाकर बोला इसको थोड़ा प्यार किजिए। ये आपका प्यार पाकर अपने आप तैयार होजाएगा।
मैने उसका लंड पकडकर उसके सुपाडे पर अपनी जीभ से चाटा ओर फिर लंड को चुमते हुए जीभ से चाटने लगी। सुधाकर का लंड था ही इतना खुबसूरत कि मैं अपने आपको रोक ही नहीं पा रही थी। उसने अपने लंड को एकदम साफ रखा हुआ था। मैंने उसके लंड पर ऊपर से नीचे तक अपनी जीभ से चाटा और फिर उसके लंड के बॉल को चाटने लगी। वो काफी उत्तेजित हो गया था। मैने उसके लंड के बॉल्स को चुसना शुरू किया और फिर पूरे लंड को चाटते हुए उसका लंड मुंह में ले लिया और जोर जोर से चुसने लगी। वो तो एकदम पागल सा हो गया और बोला कि भाभी आप तो सचमुच सेक्स की देवी हैं।
करीब डेढ़ दो मिनट लंड चुसवाने के बाद उसने लंड को बाहर निकाल दिया और मुझे उठाकर सोफे पर बिठाया और मेरे सामने बैठकर मेरी पेंटी उतार दी। मेरी सफाचट मुलायम चुत देखकर बोला वाह भाभी मजा आ गया और मेरी चुत पर नाक लगाकर जोर से सुंघने लगा और खुश होते हुए मेरी चुत पर अपने होंठों और जीभ से चुमने लगा। उसकी जीभ अपनी करामात दिखाने लगी और तभी उसने अपने हाथ से मेरी चुत के दाने को सहलाना शुरू किया। मुझे लगा कि मैं अब अपने आपको ज्यादा रोक नहीं पाउंगी। मै स्खलन के बेहद करीब थी पर वो शायद समझ गया था। उसने एकाएक मेरी चुत से हाथ और मुंह हटा लिए। और मेरे सामने देखने लगा। मैंने कहा रुक क्यों गये, और करो ना। तो वो बोला क्या करूं भाभी? मैने कहा अब मत रुको प्लीज डाल दो ना। वो फिर बोला क्या डालुं भाभी। मैंने कहा सुधाकर सताओ मत और जल्दी से डाल दो प्लीज़। तो वो बोला भाभी आपको बोलना तो पडेगा ही। बोलो क्या डालना है? तब मैंने कहा सुधाकर तुम्हारा लंड डालो। तो वो बोला भाभी हम मराठी में इसको लवडा बोलते हैं तो बताइए क्या डालना है। वो ये सब जानबूझकर कर रहा था ताकि मुझसे चुदवाने की रिक्वेस्ट करा सके। उसै इसमें मजा आ रहा था। मै बोली सुधाकर अपना लौडा डालो मेरी चुत मे और मुझे चोदो। इतना सुनते ही उसने अपने लंड को मेरी चुत के मुहाने पर रखा और एक धक्का लगाया। मैं सोफे के रेस्ट का सहारा लेकर बैठी थी और मैनै अपने पैर फैला रखे थे। वो मुझपर झुका हुआ था। मेरी चुत काफी गीली हो चुकी थी फिर भी उसके लंड की मोटाई के कारण थोड़ा दर्द हो रहा था। उसने फिर से दो धक्के लगाये और मेरी चुत ने उसके पूरे लंड को अपने में समा लिया। उसका लंबा और मोटा लंड मेरी चुत में रगड खाता महसूस हो रहा था। कुछ ही धक्कों के बाद मैं चरम तक पहुंच गयी। इस तरह स्खलित होने का मेरा ये पहला अनुभव था। सुधाकर फिर भी रूका नहीं और मेरी चुत को और 2 से 3 मिनट चोदने के बाद वो भी छुटने वाला था कि उसने जल्दी से अपना लंड बाहर निकाल लिया और सीधे मेरे बुब्स और पेट पर पिचकारी छोड दी। उसका बहुत सारा वीर्य मेरे बुब्स पर गिरा और इससे मेरा मंगलसूत्र भी उसके वीर्य से भीग गया। कुछ बूंदें मेरे चेहरे पर भी गिरी। दो मिनट पडे रहने के बाद हम उठे और मै बाथरूम जाने लगी तो वो बोला कि भाभी आपसे एक रिक्वेस्ट कर सकता हूं? मैने कहा बोलो तो उसने कहा कि क्या आप मेरे लवडे को चाटकर साफ करेंगीं? पता नहीं क्यों याशायद उसके लंड पर इतना प्यार आने की वजह सै मैंने बिना कुछ बोले उसके लंड को पकडा और अपने होंठों और जीभ से चाटकर पूरा साफ कर दिया। वो बहुत खुश हुआ। और फिर मै बाथरूम में जाकर अपने आपको साफ करके टॉवेल लपेटकर बाहर आयी। सुधाकर सोफे पर ही बैठा था। जब बाहर आकर मैनै अपना मंगलसूत्र निकालना चाहा तो सुधाकर ने ये कहते हुए मुझे रोक लिया कि भाभी रहने दीजिए इसे। अभी तो इसके साथ बहुत मजे करने हैं।

सुधाकर नंगा ही बैठा था। उसने मुझे खींचकर अपनी गोदी में बिठाया। और वोफिर से मुझे किस करने लगा। मैं भी उसकी किस का जवाब देने लगी। मैंने अपनी जीभ सुधाकर के मुंह में डाल दी और फिर हम एक दूसरे को जोर जोर से चुमने लगे। उसने मेरा टॉवल हटा दिया। उसके हाथ मेरे बुब्स से खेलने लगे। वो बोला – भाभी मैं हमेशा से आपको चोदने के सपने देखता था और कई बार आपके बारे में सोचते हुए मुठ मारता हूं। मुझे उसकी बातों से मजा आ रहा था पर मैं ऊपर से शर्मा रही थी। अब मैने उसका लंड पकड लिया और उसे सहलाने लगी। मैंने कहा अब तुमको ये मुठ वुठ की जरूरत नहीं पड़ेगी। मेरे पास आ जाना मैं इसको ठंडा कर दूंगी और ये कहकर मैंने उसके लंड को जोर से दबा दिया। उसकी आह निकल गयी और वो बोला कैसे ठंडा करेंगी? तो मैं बोली इसको मेरे अंदर लेकर। मैं समझ चुकी थी कि उसको फोरप्ले करते हुए गंदे शब्द बोलना अच्छा लगता है। वो बोला अंदर कहाँ? तो मैने कहा मेरी चुत के अंदर। इसपर वो बोला भाभी पूरा बोलिए ना क्या क्या करेंगी। मुझे भी मजा आ रहा था। मैने कहा तुम्हारे इस लंड को अपनी चुत के अंदर डलवाकर तुमसे चुदवाउंगी। ईसपर वो बोला भाभी अभी चुदवाओगी? उसका लंड अब एकदम कडक हो गया था। मैंने कहा हां तो वो बोला कि बेडरूम में चलते हैं। मैं आपको आपके बेड पर चोदुंगा। मैंने कहा ओके।
उसने मुझे अपनी बांहों में उठा लिया और बेडरूम में लेआया। मैंने अपनी बांहें उसके गले में डाल रखी थी। हम दोनों एक-दूसरे को चुम रहे थे। उसने मुझे बेड पर लिटाया और मेरी जांघों पर बैठ गया। उसने मेरे मंगलसूत्र को ठीक से मेरे गले और छाती पर मेरे दोंनो बुब्स के बीच रखा और बोला कि भाभी मैं आपके बुब्स को चोदुंगा। और उसने मुझे मेरे दोनों हाथों से मेरे बुब्स को पकडकर बीच मे एक खाई सी बनवाई। मेरा मंगलसूत्र उस खाई के बीच से होता हूआ मेरी छाती पर पड़ा था। सुधाकर मेरे पेट के दोनों और पैर रखकर मेरे ऊपर बैठ गया और पहले उसने अपना लंडमेरी नाभि पर घिसकर मेरे दोनों बुब्स पर रगडने लगा। मेरे लिए ये नया अनुभव था। इसके पहले मैं जरूर कभी-कभी अपने बुब्स अमित के लंड पर रगडती थी पर ये पहली बार था कि बाकायदा मेरी बुब्स चुदाई हो रही थी। थोड़ी देर एक एक कर मेरे दोनों बुब्स की अपने लंड से घिसाई करने के बाद सुधाकर ने अपना लंड मेरे बुब्स के बीच की खाई में डाल दिया मैंने अपने बुब्स कोदोनो तरफ से दबा रखा था किजिससे मेरे बुब्स की खाई सिकुड जाये। उसका लंड मेरे मंगलसूत्र से रगड खा रहा था और शायद वो जान बुझकर मेरे मंगलसूत्र पर अपना लंड रगड रहा था। मेरी आँखें बंद हो गयी थीं और मैं अपनी बुब्स और मंगलसूत्र की चुदाई का भरपूर आनंद ले रही थी। कि अचानक मेरे मोबाइल की बेल बजी।

अचानक बजे मोबाइल से मेरी तंद्रा टुटी और जैसे ही मैने मोबाइल लेकर देखा तो वो अमित का फोन था। मैने सुधाकर की तरफ देखा तो उसने पूछा कौन है? मैने कहा अमित, तो वो बोला बात किजिए साहब से। और हाँ आपको प्राब्लम न हो तो स्पीकर ओन कर दिजिये। मेरे पास सोचने का ज्यादा वक्त नहीं था। मैंने जल्दी से फोन उठाया स्औपीकर ओन किया और बोली – हां बोलिए अमित।
अमित-क्या कर रही हो, कहाँ हो।
इधर सुधाकर मेरे बुब्स के बीच अपना लंड जोर जोर से आगे पीछे करने लगा। उसका लंड मेरी ठोड़ी से टकरा रहा था।
मैने कह अमित मैं बेडरूम में हूं। और जैसे ही सुधाकर का लंड मेरी ठोड़ी से टकराया मेरी आह निकल गयी।
अमित बोला क्या हुआ और तुम हांफ क्यो रही हो?
मैं अब थोड़ा संभल चुकी थी और मैने सुधाकर की ओर देखते हुए कहा कि कुछ नहीं अमित वो मैं लंड से खेल रही थी जो तुम लाये थे।
अमित मेरे लिए एक डिल्डो लाये थे पर मुझे डिल्डो युज करना बिल्कुल पसंद नहीं था।
अमित – अरे तुम्हे तो ये पसंद नहीं ना।
मै-जब तुम कुछ करते नहीं तो क्या करुं
इधर सुधाकर ने हमारी बातें सुनकर मुझे मंगलसूत्र को पकडकर उसको अपने लंड पर लपेट लिया और मेरी बुब्स चुदाई करना चालु रखा।
यहां मैं अपने पति से फोन पर बात कर रही थी और मेरी सोसायटी का वॉचमैन मेरे पति की निशानी मेरे मंगलसूत्र को अपने लंड पर लपेट कर मेरी आँखों में देखते हुए मेरी बुब्स ठुकाई कर रहा था।
अमित बोला कि बहुत गर्म हो रही हो क्या बात है, कहो तो रात को आशिष बोस को ले आऊं।
मै- नही नहीं उनकी जरूरत नहीं
अमित- क्या बात है, कोई और मिल गया क्या और वो हंसने लगे।
मैने कहा मिला तो नहीं पर तुम कहो तो ढूंढ लूंगी। और मैने सुधाकर का लंड हाथ में पकड लिया और उसको उठने का इशारा किया और जैसे ही वो उठा मै बेड पर बैठ गयी और एक हाथ में फोन पकडकर सुधाकर को पास बुलाया और अपना मंगलसूत्र पकडकर उसे उसके लंड पर लपेटने का इशारा किया। और फिर उसका मंगलसूत्र से लिपटा लंड मुंह में लेकर चुनने लगी और जान बुझकर पुच पुच की आवाज़ निकालने लगी।
अमित-क्या बात है जानु ये कैसी आवाज है। मैने लंड को मुंह से निकाला और बोली वो लंड चुस रही हूं। अमित-जानू ये आर्टिफिशल क्यों रात को रियल वाला चुस लेना। मैंने कहा ये बहुत मस्त है और कितना मोटा है मुझे चुसने दो। और अब फोन रख दो। और ये कहकर वापस सुधाकर का अपने मंगलसूत्र में लिपटा लंड चुसने लगी और मोबाइल को और पास लाकर अमित को लंड चुसाई की आवाज सुनाते हुए मैने फोन काट दिया।
सुधाकर मुझे बोला कि भाभी आप तो बिल्कुल रंडी हैं। सच में आप जैसी सेक्सी औरत मैने नहीं देखी। और वो जोर जोर से मेरामुँह चोदने लगा। मै बहुत गर्म हो गयी थी, मैंने सुधाकर का हाथ पकडकर अपनी दहकती चुत पर रखकर दबाया। वो समझ गया और उसने अपनी दो उंगलियां मेरी एकदम गीली चुत मे डालकर अंदर बाहर करने लगा। अब मुझसे सहन नहीं हो रहा था। मैने कहा सुधाकर अब डाल दो। तो वो बोला कि मेरी रंडी भाभी जरा अच्छी तरह से बोलिए क्य डालूं। तो मैने कहा सुधाकर अपना ये मस्त लंड मेरी चुत में डालो और अपनी रंडी भाभी को चोदो। तो वो बोला कि भाभी लंड को और क्या कहा था मैने? मैने फिर उसकी आँखों मे देखते हुए कहा कि सुधाकर अपना ये मस्त लौडा अपनी भाभी की चुत में डालो और मुझे चोदो। वो एकदम तैश में आ गया और मुझे लिटाकर मेरी टांगों को फैलाकर अपना लंड मेरी चुत के मुहाने पर रखकर धक्का दिया। पहले धक्के में मेरी चुत ने उसका आधा लंड अपने अंदर ले लिया और फिर दो और धक्कों मे उसका पूरा लंड मेरी चुत में समा गया। जब बाहर सोफे पर उसने मुझे चोदा था उससे कहीं ज्यादा अब उसका लंड मैं अपनी चुत के अंदर तक फील कर रही थी। एक बात तो थी सुधाकर में कि उसका लंड इतनी देर से एकदम कडक था। अब वो मुझे जंगली की तरह जोर जोर से चोदने लगा। वो साथ साथ बोल भी रहा था – ले मेरी रंडी भाभी ले मेरा लौडा। ले और ले अपनी प्यासी चुत में मेरा मोटा लौडा। करीब एकाध मिनट मेरी चुत को चोदने के बाद उसने अपना लौडा बाहर निकाल लिया। मैं उसको देखने लगी तो वो बोला फिक्र मत करो भाभी मै अपनी रंडी भाभी को कुतिया बनाकर चोदुंगा। ये सब वो जान बुझकर कर रहा था। कि जिससे हमारा स्खलन और लंबित हो जाये।
अब उसने मुझे बेडपर ही खडा करके और मेरे दोनों हाथों को सामने दिवार पर टिकाया और मुझे घोडी बनाकर पीछे से अपना लंड मेरी चुत में डाल दिया। वो मुझे जोर जोर से चोदने लगा। मैं बता नही सकती मुझे कितना मजा आ रहा था। उसने दोनों हाथों से मेरी कमर पकड रखी थी। और गंदी बातें बोलते हुए लंड से चुत में धक्के लगा रहा था। वो बोल रहा था-आह मेरी भाभी तेरी चुत में मेरा लंड। बोल मेरी रंडी भाभी कैसा लगा मेरा लौडा? मै भी उसका साथ दे रही थी। हां सुधाकर चोदो मुझे। मस्त है तुम्हारा लौडा। अपनी रंडी भाभी की चुत फाड डालो। वगैरह।
पता नहीं मैं कब स्खलित हुई और कितनी बार हुई। पर शायद सुथाकर समझ रहा था और जैसै ही मेरा शरीर अकडता वो अपनी स्पीड कम कर देता। करीब चार पाँच मिनट अपने लंड के धक्के लगाने के बाद वो अपने स्खलन के नजदीक आ गया और जोर से बोला कि भाभी मै आने वाला हूं मैने कहा कोई बात नहीं अंदर ही छोड दो। पर वो बोला नहीं भाभी और अपना लंड बाहर निकाल कर मुझे सीधा करते हुए अपने लंड की पिचकारी मेरे बुब्स और खासकर मेरै मंगलसूत्र पर छोड दी। उसने अपने वीर्य से मेरा मंगलसूत्र भिगो दिया था। मै बेडपर लेट गयी थी और अपनी सांसों पर काबू कर रही थी। वो मेरे पास ही लेट गया और मेरी ओर देखने लगा। मैने उसके होठों पर एक चुंबन देकर जैसे उसका शुक्रिया अदा किया। मैं उठने लगी तो वो बोला कि भाभी पहले इसे साफ कर दीजिए और अपना लंड मेरे मुँह के सामने किया। मैंनें उसके रस से भीगे लंड को मुंह में लिखा और उसे पूरा ऊपर से नीचे तक अपनी जीभ से चाट चाटकर साफ कर दिया। और फिर जैसे ही मैने एक कपडा उठाकर अपने बुब्स और मंगलसूत्र को उसके वीर्य से साफ करना चाहा उसने मुझे ये कहकर रोक लिया कि रहने दो ना भाभी। थोडी देर आपके इस मंगलसूत्र को भी मेरे लौडे की खुशबु और स्वाद लेने दो।
इसके बाद हम दोनों साथ में बाथरूम में गयेऔर एकदूसरे को साबुन और पानी से साफ किया। फिर बाथरूम से बाहर आकर सुधाकर ने कपडे पहन लिए और मैने एक नाइटी पहनी ही थी कि मेरे फ्लैट की घंटी बजी। मुझे लगा कोई सेल्समैन होगा। मैने सुधाकर को सोफे पर बैठने को कहा और जाकर दरवाजा खोला। अरे ये क्या दरवाजे पर मेरे सामने के फ्लैट में रहने वाली नीता भाभी खडी थी। वो भौचक्की सी कभी मुझे देख रही थी, कभी मेरी शोर्ट नाइटी को तो कभी सोफे पर बैठे सुधाकर को। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैंने सुधाकर से कहा अच्छा सुधाकर तुम जाओ और अब कभी कुछ प्लंबिंग का काम होगा तो तुम्हें ही बुलाउंगी। सुधाकर उठकर नीता भाभी को देखते हुए चला गया। मैने नीता भाभी को कहा भाभी अंदर आइए ना। नीता भाभी अंदर आ गयी। मैने दरवाजा बंद कर दिया और बोली कहिए भाभी…..

उस दिन जब नीता भाभी आयी तब सुधाकर को मेरे घर में देखकर चौंक सी गयी। मैं भी थोड़ा घबरा गयी थी। नीता भाभी हमारे सामने वाले फ्लैट में रहती है। वो मुझसे एकाध साल बड़ी हैं। मैं उन्हें भाभी ही कहती हूँ और वो मुझे सारिका कहती हैं। नीत भाभी के पति विनोदजी का ज्वेलरी का बिजनेस है। वो भाभी से उम्र में काफी बड़े दिखते हैं। नो हमारी सोसायटी के अध्यक्ष भी हैं। नीता भाभी उस समय 39 या 40 की होंगी। वो मुझसे पतली हैं और उनके नाक नक्श बहुत अच्छे हैं। जो एक चीज उनको सेक्सी और होट बनाती है वो है उनकी गांड। पीछे से उभरी हुई और मोटी। शायद ही कोई ऐसा मर्द हो जो एकबार उनकी गांड देख ले और आहें न भरे। वो हमेशा साड़ी ही पहनती है। उनके कोई बच्चे नहीं है। मुझे लगता थाकि शायद भाभी इसी वजह से उदास सी रहती हैं।
उस दिन जब सुधाकर चला गया तो मैने भाभी को अंदर बुलाया और कहा – कहिए भाभी। उन्होंने मुझे ऊपर से नीचे तक देखते हुए कहा कि सारिका ये सुधाकर यहां क्या कर रहा था? मैंने जल्द बाजी में जो नाइटी पहनी थी वो एक तो घुटनों तक ही थी और थोड़ी पारदर्शी भी। अंदर न ब्रा थी न पेंटी। अब भाभी इतनी भी भोली नहीं थी कि कुछ समझ न सकें। जब मैंने कहा कि भाभी मेरे बाथरूम का टैप खराब हो गया था, वही ठीक करने आया था। तो भाभी बोली कि पर उसको कहां प्लम्बिंग आती है, जब मेरे घर में कुछ काम था तो सुधाकर ही किसी प्लम्बर को लाया था। जब मैंने कहा कि सुधाकर ने ही कहा कि वो खुद ठीक कर देगा, तो भाभी हंसने लगी और बोली कि क्या सुधाकर को प्लम्बिंग के काम के लिए तुम्हारी ब्रा की जरूरत होती है ओर सोफे पर पड़ी मेरी ब्रा उठाकर दिखाने लगी। मेरे तो होश उड गये। तब मेरी समझ में आया कि जल्दबाजी में कपड़े उठाते वक्त मेरी ब्रा सोफे पर ही रह गयी थी और सुथाकर शायद मेरी ब्रा पर बैठ गया था। मैंने कहना चाहा कि भाभी वो क्या है कि, पर भाभी ने यै कहते हुए मेरी बात काट दी कि कोई बात नहीं सारिका, मुझे कोई सफाई नहीं चाहिए। वो बोली कि मैं समझ सकती हूं सारिका। मै भी एक औरत हु और एक बिजनेसमैन की बीबी भी। इन हमारे पतियों को हमारे लिए समय कहां होता है। और ये सुधाकर है ही ऐसा कि किसी का भी मन डोल जाए। जब मैंने कहा कि भाभी आप सोच रहीं हैं वैसा कुछ नहीं है तो वो बोली कि सारिका मुझ मालूम है कि तुम्हारे और सुथाकर के बीच कई दिनों से काफी कुछ चल रहा है। और वो कई बार तुम्हारे साथ सामान वगैरह छोडने आता रहता था। और एक दिन तो मैने तुम्हें लिफ्ट में भी उसके साथ मस्ती करते देखा था। मुझे तो जैसे काटो तो खुन नहीं। फिर मैंने थोडा आश्वस्त होकर कहा कि भाभी अब आप सब जान गयीं हैं तो प्लीज़ किसी को भी बताइएगा नहीं। तो इस पर भाभी मुझे आंख मारकर बोली कि ठीक है किसीसे कुछ नहीं कहूंगी पर मेरी एक शर्त है। जब मैंने पूछा क्या? तो नीता भाभी हंसते हुए बोली कि मैं तुमसे जो भी पुंछु उसका एकदम सही जवाब देना। मैंने कहा ठीक है भाभी पुछिए क्या पूछना है।

इसपर भाभी बोली- सारिका ये सुधाकर तो अभी महीने पहले ही आया है और उसने तुम्हें पटा भी लिया। और हाँ ये कबसे चल रहा है तुम लोगों के बीच? मैंने कहा भाभी आज पहलबार ही वो घर में आया था। तो वो बोली हां हो सकता है क्योंकि मैं कुछ दिनों ल
से तुम पर नजर रख रही थी और मैंने भी उसको इतने समय के लिए तुम्हारे साथ पहली बार ही देखा। जब मैंने कहा भाभी आप मुझपर नजर रखती हो तो वो बोली सारिका बुरा मत मानना जबसे मैंने तुमको उसके साथ हंस हंसकर बातें करते और उसको हमेशा तुम्हारी हेल्प करते देखा और फिर एकदिन लिफ्ट में तुम दोनों को मस्ती करते हुए देखा तो मुझे लगा कि एकदिन तुम दोनों जरूर कुछ करोगे और आखिर मैं भी इन्सान हूँ। मेरी भी जरूरतें हैं और वो हंसने लगी। इतनी देर से मैं शर्मा रही थी पर उनकी बातें सुनने के बाद थोड़ी इजी हो गई। मैंने कहा हां भाभी आप सच कह रही हैं मेरी जरूरतें ही तो मुझसे ये करवा रही हैं। हम दोनों पास पास ही बैठीं थीं। फिर उन्होंने शरारत भरी मुस्कान के साथ कहा सच बताओ सारिका तुम्हें कैसा लगा? मैं क्या कहती, सिर्फ कहा कि अच्छा लगा भाभी। उन्होंने पूछा कि क्या सुधाकर वो पहल मर्द है जिसके साथ मैं छिपकर ये सब कर रही हूं तो मैने झूठ बोला कि भाभी हां ये पहली बार है मेरे पति के अलावा। उन्होंने कहा कि सारिका क्या तुम अपने पति से खुश नहीं हो तो मैने कहा कि वैसे तो बहुत खुश हूं पर वो मुझे पुरा संतोष नहीं दे पाते। तब भाभी एकदम से बोली कि मेरा भी यही हाल है और मैं तुम्हारी तरह हिम्मत नहीं कर पाती। सोचती तो बहुत हूं पर डर लगता है। मैने कहा कि इसमें हिम्मत की बात नहीं भाभी, ये तो अपने आप होता चला गया। तभी उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और कहा सच बताओ सुधाकर ने तुम्हें पुरा सेटिस्फाय किया ना। मैने कहा हां भाभी वो बहुत अच्छे से करता है। भाभी बोली कैसे करता है बता ना। जब नीता भाभी इतनी खुली बातें कर रही थी तो मैने भी शर्म छोड दी। मैंने कहा भाभी वो तो एक्सपर्ट है और एकदम जंगली की तरह करता है। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मै नीता भाभी से ऐसी बाते कर रही थी। पर शायद थोडी देर पहले की चुदाई और भाभी के बिंदास सवालों ने मेरी शर्म को बिल्कुल तोड़ दिया था।
फिर भाभी ने पुछा कि कैसे हम दोनों ने एक-दूसरे को पटाया तो मैने उनको संक्षिप्त में वो केले वाली बात बताई। इसके बाद भाभी ने मुझसे पूछा कि उसका केला कैसा है। मैने कहा कि क्या वो देखना चाहती हैं? इसपर वो आंखे नीची करके बोली कि सारिका अगर तुम मदद करो और तुम्हें बुरा न लगे तो मैं देखना भी चाहूंगी और खाना भी। मैने कहा क्या बात है भाभी विनोदजी भी? तो वो बोली कि क्या बताऊँ वे तो एकदम फुस्स हैं और मुझे हमेशा उंगलियों से काम चलाना पडता है। तब मुझे समझ में आया कि भाभी क्यो ज्यादातर उदास रहती थीं। मैने उनका हाथ हाथमें लेकर कहा भाभी मै जरूर आपकी मदद करूंगी और कोशीश करूंगी कि आपको खुशी मिलै। फिर थोडी यहां वहां की बातें करके जब भाभी जाने लगी तो फिर से मुझे कहा कि देखना सारिका मेरा काम याद रखना। मैने उनको आंख मारते हुए कहा कि अब तो आपको एक बडावाला केला जरूर खिलवाउंगी।
इसके बाद दुसरे दिन सुधाकर की दिन में ड्यूटी आ गयी थी मतलब अब वो छह दिनों के लिए दिन में ड्यूटी पर रहने वाला था। दोपहर में जब मैं नीचे गयी तो वो टेबल के दुसरी ओर कुर्सी पर अकेला बैठा था। जैसे ही मैं उसके टेबल के पास जाकर खडी हूई उसने अपना हाथ टेबल के साइड मे रखा । मैं थोडा खिसक कर अपनी जांघों को उसके हाथ से सटाकर खडी हो गयी। उसकी उंगलियों ने अपनी करामात दिखानी शुरू कर दी। अब उसका हाथ टेबल कि किनारी और मेरी जांघों के बीच था। मैंने अपनी जांघों को उसके हाथ पर दबाया। वो मेरी जांच पर हाथ फिराते हुए धीरे से बोला कैसी हो मेरी रंडी भाभी। मैने कहा अच्छी हूंतो वो अपना दूसरा हाथ टेबल के नीचे अपने लंड के उभार पर फिराते हुए बोला कि मेरे केले की याद आती थी क्या रात को। मैंने कहा हां बहुत याद आयी तुम्हारी। हम दोनों बहुत धीरे से फुसफुसा रहे थे। उसकी उंगलियां मेरी जांघों पर घुमते हुए मेरी चुत पर पहुंचना चाहती थी। मैने जरा सा सरक कर अपनी चूत उसके हाथ पर रखकर उसका हाथ दबाया। अब उसकी उंगलियां मेरी चुत से खेलने लगी। लोबी में सेअगर कोई लिफ्ट की तरफ आता या जाता तो उसको मेरी पीठ ही दिखाई देती। और ऐसा लगता कि मै वहां खड़ी वॉचमैन से कुछ बातें कर रही हूं। पर यहाँ मैं अपनी सोसायटी के वॉचमैन के हाथ पर अपनी चूत दबा रही थी। और वो एकहाथ अपने लंड पर फिराते हुए मुझे उसे खाने का निमंत्रण दे रहा था। मेरी दहकती चुत ने गीला होना शुरू कर दिया था और मैने देखा कि सुधाकर का लंड भी खडा होने लगा था। मेरा मन कर रहा था कि वहीं उसके पेंट की जिप खोलकर उसका लंड बाहर निकाल लुं और उससे खेलूं। पर मैने अपने आप पर कंट्रोल किया। सुधाकर मेरी चुत पल अपना हाथ दबाते हुए बोला कि भाभी देखो ये चुदना चाहती है इसको चोदने आ जाऊं? मैने कहा अभी तो तुम ड्यूटी पर हो कैसे आओगे? वो बोला मेरी रंडी भाभी जब भी हुक्म करेगी मै आ जाउंगा। उस समय दोपहर के चार बज रहे थे। थोडी देर ऐसे ही चुत में उंगली करने कै बाद वो बोला कि भाभी कल आपको नीता भाभी ने कुछ कहा तो नहीं? मैं उसको एकदम सब बताना नही चाहती थी और उस सबके लिए ये जगह भी ठीक नहीं थी तो मैने कहा कि उन्होंने सिर्फ इतना पूछा कि तुम वहां क्वोक्यों आये थे तो मैने बहाना बना दिया। इसके बाद वो बोला कि मैं कल रात वाले वॉचमैन को अपनी जगह बुलाकर हाफ डे कर सकता हूं। तो मैने भी उसको कहा कि ठीक है कल तुम दोपहर तीन बजे आ जाना। वो एकदम खुश हो गया और बोला आप इंतजार करना मैं इसको लेने आ जाऊंगा और ये कहकर जोर से मेरी चुत दबा दी। मेरे मुँह से आह निकल गयी। वो तो अच्छा है कि उस वक्त वहांकोई नहीं था। इसके बाद घर आकर मैने अपनी उंगलियों से अपने आप को सेटिस्फाय करना चाहा पर इसमे वो लंड वाला मजा कहां था? खैर फिर मैं इस बारे मे सोचने लगी कि कल मैं सुधाकर के लंड से कैसे खेलुंगी और कैसे नीता भाभी को किया वादा पूरा करूंगी? और क्या सुधाकर इसके लिए तैयार होगा?

तब मैंने नीताभाभी से बात करनी चाही। मुझे फोन पर उनसे इस बारे में बात करना सही नहीं लगा। अभी शाम के 6 ही बजे थे। मैं जानती थी कि भाभी इस वक्त अकेली होंगी। मैं उनके घर पहुंच गई। नीताभाभी अकेली थीं। उन्होंने मेरा अभिवादन किया और पुछा कि इस वक्त मैं वहाँ कैसे? मैंने कहा-भाभी आपके लिये खुशखबरी है। वो समझ तो गयी कि मैं सुधाकर के बारे मे कुछ बताना चाहती हूं। पर बोली – बताओ क्या है? मैंने कहा – भाभी मैने सुधाकर को कल दोपहर अपने घर बुलाया है और आप 2 – 2.30 बजे तक आ जाइएगा। मजे करेंगे। पर वो थोड़ी नर्वस सी हो गयी और बोली क्या तुमने उसे मेरे बारे में बता दिया। मैंने कहा – नहीं भाभी, मुझे उसको कुछ बताने का मौका ही नहीं मिला। आप आ जाइए फिर सोचेंगे कि क्या करना है। तो वो बोली – सारिका कुछ प्राब्लम तो नहीं होगी ना। और वो सुधाकर कुछ कहेगा तो नहीं। तब मैंने उन्हें आश्वस्त किया और कहा भाभी सुधाकर की चिंता मत किजिए। वो भले ही वो एक वॉचमैन हो पर समझदार और अच्छे वर्ताव वाला है और फिर आप जैसी माल देखकर वो तो फ्लेट हो जायेगा। भाभी हंस पडी और बोली कि सारिका तुम अब मुझे माल कह रही हो तो मैने कहा भाभी माल तो आप हैं ही और कल मेरे घर आइए आपको पता चल जाएगा। भाभी थोड़ा शर्माकर बोली ठीक है मैं भी देखती हूँ तुम्हें और तुम्हारे सुधाकर को। कुछ इस तरह की बातें करते करते मैने वहां से घर आने के पहले भाभी को बोला कि वो कल साडी पहन कर आये, क्योंकि मेरे हिसाब से साड़ी एक ऐसा परिधान है जिसका आप मर्दों को रिझाने में बहुत अच्छा इस्तेमाल कर सकतीं हैं।
दुसरे दिन सुबह जब मैं नीचे गयी तो सुधाकर वही वॉचमैन वाले टेबल पर बैठा था। मैने दूर से ही उसे स्माइल दी। उस समय बिल्डिंग में आने जाने वाले कुछ ज्यादा ही होते थे। उसने मुझे इशारे से बताया कि वो तीन बजे आयेगा। और जब उसने देखा कि वहाँ कोई नहीं है तो अपनी मुठ्ठी के बीच अंगुठा भींचकर मेरी तरफ चुदाई का इशारा किया और फिर से तीन बजे आने का इशारा किया। मैने गर्दन हिलाकर हां कहा और ऊपर चली आयी।
करीब 2.30 बजे नीताभाभी भी आ गई। उन्होंने एक लाल साडी पहन रखी थी जिसमें काले रंग की किनारी लगी हुई थी और साथ में काला लो कट ब्लाउज पहना था। वो सचमुच सुंदर लग रही थी। मैंने भाभी से कहा कि आप मैं जैसा कहूँ या करूँ उसमें मेरा साथ देते जाना। और मैने भाभी से उस समय क्या क्या बोलना है ये भी समझा दिया।
बराबर तीन बजे घंटी बजी और मैने दरवाजा खोलकर सुधाकर को अंदर आने को कहा। भाभी वहीं सोफे पर बैठी थी। सुधाकल ने जैसे ही उन्हें देखा तो मेरी ओर देखकर ऐसा मूंह बनाया कि इस सयय ये यहां क्या कल रही हैं। मैनेआंख के इशारे से उसे शांत रहने को कहा। और बोली आओ सुधाकर बैठो। और भाभी से बोली कि भाभी मुझे बाजार से कुछ सामान मंगाना था और सुधाकर उस तयफ जा रहा था तो मैंने इसे पैसे लेने बुलाया है। और सुधाकर से कहा कि तुम बैठो मै चाय लाती हूं। सुधाकर बोला ठीक है, शायद वो सोच रहा था कि चाय पीकर नीता भाभी चली जायेंगी। नीता भाभी जहां बैठी थी उसके सामने एक सिगल चेयर थी सुधाकर उस पर बैठ गया। मै चाय लेने किचन में गयी जो मैंने पहले से बना रखी थी। इस बीच मेरे कहे अनुसार नीता भाभी ने अपने बालों की क्लीप को ठीक करने के बहाने अपनी साडी का पल्लू थोडा सा सरका दिया। एक तरफ से उनका क्लीवेज और ब्लाउज मे उभरा बुब दिख रहा था। मै सुधाकर को चाय देकर नीता भाभी के पास आकर सोफे पर बैठ गयी। जब मैने नीता भाभी को चाय पीने को कहा तो वो बोली कि सारिका सिर्फ चाय पिलाओगी या कुछ खिलाओगी भी। मैने कहा क्या खाओगी भाभी तो वो बोली कुछ फ्रुट ही खिला दो। तो मैने कहा भाभी सोरी आज घर मे कोई फ्रूट नहीं है। और फिर सुधाकर के सामने देखते हुए बोली कि भाभी सुधाकर अपने गांव से केले लाया है आप चाहें तो वो आपको केला खिला सकता है और मैने सुधाकर को आंख मार दी। तब नीता भाभी बोली कि मुझे भी केला बहुत पसंद है और गांव का है तो जरूर खाऊंगी। सुधाकर हम दोनों को देख रहा था और कुछ समझने की कोशिश कर रहा था कि तभी मैने भाभी की साडी का पल्लू पूरा गिरा दिया और सुधाकर से बोली – सुधाकर क्या भाभी को अपना केला नहीं खिलाओगे? और थोडा सा एक तरफ हटते हुए उसे हमारे पास आने का इशारा किया। सुधाकर सब समझ चुका था। चाय का कप एक बाजु में रखकर वो उठा और आकर हम दोनों के बीच बैठ गया और बोला कि भाभी को ही क्यूँ आप दोनों को खिलाउंगा अपना केला। भाभी नजरे नीची करके बैठी थी। सुधाकर बोला कि भाभी केले के बदले आपको मुझे आम खिलाने पड़ेंगे। तो मैने ये कहते हुए कि लो पहले भाभी के आम को खाने के लिए तैयार करो उसका हाथ पकडकर भाभी के ब्लाउज पर रख दिया। सुथाकर के हाथ जैसे ही भाभी का बुब आया उसने उसे जोर से दबा दिया भाभी की आह निकल गयी। उनकी सांसे तेज चल रही थीं। सुधाकर ने उनकी ठोंडी पकडकर उनका चेहरा ऊपर किया और जैसे ही भाभी की नजरें ऊपर हुई सुधाकर ने अपने होंठ भाभी के होंठों पर रख दिये। उनके होंठो को चुमकर उसने एक एककर उनके माथे, गालों कान और नाक पर चुमते हुए फिर से उनके होंठों पर एक लंबा चुंबन दिया । भाभी भी उसका साथ देने लगी और फिर उनका ये चुंबन वाइल्ड होता गया। वो दोनों जोर जोर से एक दुसरे को चुमने लगे। उन दोनों के हाथ एक दूसरे के चेहरे और सिर को पकडे हुए थे। करीब 2 – 3 मिनट एक दुसरे को चुमने के बाद जब दोनों अलग हुए तो उन्हें मेरे वहां होने का एहसास हुआ भाभी की नजरें अब भी नीची थीं और सुधाकर ने मेरे सामने देखा तो मैने पूछा कैसी लगी हमारी भाभी? तो वो बोला एकदम मीठी और अपने होंठ पर जीभ फिराने लगा। मैने भाभी की ओर देखकर कहा – भाभी शर्माइए नहीं और खुलकर मजा लिजिए। और फिर मैने उठकर भाभी को सोफे से उठाया और उनको एक हल्का सा धक्का देकर सुधाकर की गोद में बिठा दिया।

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