हरामी फैमिली part 2

दरवाजे के पास भीड़ कम होने पर मैं अपना समान उठा कर इठलाती हुई दुपट्टा संभालते…दरवाजे के पास आई….सामने भाई खड़ा था मगर वो आगे नही बढ़ा फिर अचानक चौंक कर आगे आया….मेरे हाथ से बैग ले लिया…मैं धीरे से इठलाती हुई नीचे उतरी और भाई को सलाम किया….और मुस्कुराते हुए कहा….ही भाई आप तो मुझे अंजानो की तरह से देख रहे थे…इतनी जल्दी अपनी बहन को भूल गये….भाई ने मुस्कुराते हुए कहा….अर्रे नही घर में तो तू ऐसे ही घरेलू कपड़ों में रहती है…..एक दम बदली हुई लग रही हो…मैं थोड़ा शरमाई फिर अदा के साथ बोली….आप भी तो भाई बदले बदले से लग रहे हो….बड़े शहर के स्टाइल …. सारे मज़े ले लिए क्या….भाई इस पर थोड़ा झेप गया और दाँत दिखाते हुए बोला….अर्रे ये सब करना पड़ता है…

मैं भी हस्ती हुई बोली….हा बड़ा शहर बड़ा कॉलेज…फिर अगर स्टाइल से ना रहे तो सब मेरे भाई को जाहिल समझेंगे….भाई भी हँसने लगा. स्टेशन से बाहर आकर हमने टॅक्सी पकड़ी और फ्लॅट के तरफ चल दिए. फ्लॅट छ्होटा सा था एक मास्टर बेडरूम एक किचन एक ड्रॉयिंग रूम कम डाइनिंग हॉल था उसी में एक तरफ बेड लगा हुआ था. भाई ने दिखाते हुए कहा….यही हमारा घर है…तू अपना समान बेडरूम में डाल दे….अब से वो तेरा कमरा हो गया…..मैं यहा बाहर वाले बेड पर सो जाऊँगा ….तुझे पूरी प्राइवसी रहेगी….मैने मन ही मन मे कहा प्राइवसी की किसको फ़िकर है….तुम भी इसी कमरे में आ जाओ पब्लिक प्रॉपर्टी बना दो….

फिर अपने रण्डीपना पर खुद ही हसी आ गई….मैं भी कैसे कैसे ख्याल रखती हूँ…थोड़ी देर बाद भाई कॉलेज के लिए निकल गया…..मैं घर के काम में मसरूफ़ हो गई….अकेला लड़का घर को जंगल बना देता है……खैर मैने पूरे घर की सॉफ सफाई कर दी….सारा समान अपने ठिकाने पर जमा दिया……खाना बना कर भाई का इंतेज़ार करने लगी…..देर रात वो घर आया और उसने मुझे अपने कॉलेज के कंप्यूटर साइन्स की डिग्री कोर्सस का अप्लिकेशन फार्म दिखाए…..बोले ले इसे भर लेना…कल तेरा अड्मिशन हो जाएगा….और कल से ही क्लास भी शुरू हो जाएगी….मैने कहा…..इतनी जल्दी भाई….मैं तो सोच रही थी अड्मिशन के कुछ दिन बाद क्लास शुरू होगी….
भाई इस पर हँसते हुए बोले….अर्रे अड्मिशन्स तो क्लोज़ हो गये थे….मैने प्रोफेसर से बात कर ज़बरदस्ती अड्मिशन कराया है तेरा….मैने उठ कर भाई को गले लगा लिया…ओह थॅंक यो भाई…..भाई ने हँसते हुए कहा…..मुझे भी खाना बनाने वाली की ज़रूरत थी…अड्मिशन तो मैं कैसे भी करवा लेता….हम दोनो हँसने लगे…मैने उसकी छाती पर प्यार से एक मुक्का मारा और कहा….जाओ मैं नही बोलती तुमसे…मैं कोई खाना बनाने आई हूँ….फिर भाई ने प्यारा से मेरा माथा चूम लिया और बोले…ही बन्नो मेरी गुड़िया….तेरा अगर दिल नही है तो मत बना खाना….मेरी गुड़िया सिर्फ़ आराम करेगी…भाई के इस प्यार भरे चुंबन से पूरे जिस्म में सनसनी दौर गई….मुझे नही पता था की उसने क्या सोच कर मेरा माथा चूमा था….मैं तो मर्द के बदन की प्यासी थी….हाथ लगते ही लहरा गई…मगर भाई ने फिर छोड़ दिया….आसमान से ज़मीन पर आ गई.

खाना खाने के बाद मैं सोने चली गई. ट्रेन का सफ़र और दिन भर काम करने के कारण थकान थी….जल्दी ही आँख लग गई….सुबह आँख खुली तो जल्दी जल्दी तैय्यर होने लगी…कपड़े पहनते वक़्त पेशोपस में थी…नक़ाब पहनु या नही….फिर सोचा चलो भाई से….पूछ लेती हूँ…….उसने कहा….यहा इसकी कोई पाबंदी नही है….कोई नही पहनता…..फिर यहाँ कौन सी अम्मी की सहेलियाँ तेरी जासूसी करने वाली है…..जो मर्ज़ी आए वो पहन ले….फिर मैने सलवार कमीज़ पहन ली……काले रंग की….जिसमे मेरा गोरा हुस्न और निखार गया…भाई भी मुझे देख कर मुस्कुरा दिए और कहा….ताबीज़ बाँध ले नज़र लग जाएगी…बहुत प्यारी लग रही है…मैं हँसते हुए उनके बाइक पर पीछे बैठ गई और उसकी पीठ पर एक मुक्का हल्के से जमा दिया. कॉलेज में अड्मिशन लेने के बाद क्लास शुरू हो गये. बिज़ी रहने के कारण ज़यादा कुछ नोटीस करने का मौका ही नही मिला….

फिर हम लोगो का यही रूटीन बन गया कॉलेज जाना 3 बजे के आस पास घर वापस आना….धीरे धीरे मैं सेट्ल हो गई….नई नई सहेलियाँ मिल गई….को-एजुकेशन वाले कॉलेज में लड़को की नज़रो की दहक भी मुझे महसूस होने लगी…पैसे वालो का कॉलेज था…. अपनी निगहों की तपिश से जलाने वालो की कमी नही थी….जायदातर की नज़रे मेरी चूचियों और चूतड़ों के उपर ही जमी रहती थी….क्लास नही होने पर…..दोस्तो के साथ गॅप सॅप करते हुए वक़्त गुजर जाता था. कुच्छेक के बॉय फ्रेंड भी थे…..मैं भी एक बॉय फ्रेंड बनाने की ख्वाहिशमंद थी……

जब से इस बड़े शहर में आई थी…..बिज़ी होने के वज़ह से…..चूत और लंड के बारे में सोचने का मौका ही नही मिला था….घर पर तो अम्मी अब्बू और मामू की हरकतों की जासूसी करने की वज़ह से हर वक़्त दिल में अपनी प्यारी सि चूत को चुदवाने के ख़याल मे डूबी रहती थी……वही जिन्न एक दफ़ा फिर मेरे अंदर कुलबुलाने लगा….जब सेट्ल हो गई तो फिर से चूत में कीड़ों ने रेंगना शुरू कर दिया…..शहर की आज़ादी ने सुलगते जज़्बातो को हवा दी….किसी मर्द के बाहों में समा जाने की ज़रूरत बड़ी शिद्दत के साथ महसूस होने लगी…..कॉलेज के लड़को को देख-देख कर जिस्म की आग और ज़यादा भड़क जाती थी….

उनके अंडरवेर में कसे लंड के बारे में सोच सोच चूत पानी छोड़ने लगती ….ख्वाब में एक आध लड़को का लंड भी अपनी नीचे की सहेली में पायबस्त करवा लिया…पर कहते है थूक चाटने से प्यास नही भुजती….ख्वाब में पिलवाने से फुद्दी की आग तो भुजने से रही….कई दफ़ा रातो को फ्रिड्ज में से बरफ का टुकड़ा निकल कर नीचे की गुलाबी छेद में डाल लेती थी….मगर इस से आग और भड़क जाती थी…..निगोरी बुर में ऐसी खुजली मची थी की बिना सख़्त लंड के अब शायद सकूँ नही मिलने वाला था.

कॉलेज में मेरी सबसे प्यारी सहेली फ़रज़ाना और तबस्सुम थी…दोनो वैसे तो मेरे से उमर में दो साल बड़ी थी मगर हम तीनो में खूब बनती थी….वो भी मेरी ही तरह मस्त….जवानी के गुरूर में उपर से नीचे तक सारॉबार थी….हम तीनो आपस में हर तरह की बाते करते थे…मैं उनको प्यार से फर्रू और तब्बू कह कर बुलाती थी…..हम तीनो आपस में लड़को के बारे में बहुत सारी बाते करते थे…तब्बू बड़ा खुल कर बताती थी….उसे चुदाई और चुदवाने के बारे में बहुत कुछ पता था…..मैं भी जानती थी….अम्मी की जासूसी करने की वजह से तजुर्बेकार हो गई थी….मगर फ़रज़ाना जायदातर इन बातो के बीच में चुप रहती…..हमारी बातो पर हस्ती और मज़ा लेती…..मगर कभी खुद से उसने कोई गंदी बात नही की…..

मगर तब्बू कुछ ऐसी बाते बतलती जो वही बता सकता है जिसने लंड ले लिया हो…..वैसे तो हमे पता था की उसकी दो तीन लड़को के साथ दोस्ती है मगर…..फिर धीरे-धीरे उसने खुद ही बता दिया की कैसे और किस किस के साथ उसने चुदाई का मज़ा लिया है….फिर क्या था हम हर रोज उसके साथ उसकी रंगीनियों की नये नये किससे सुनती थी….. कुछ दिनों बाद अचानक से तब्बासुम का कॉलेज आना बंद हो गया……किसी को कुछ पता नही था…..उसके घरवालो के साथ हमारी कोई जान पहचान तो थी नही……फिर एक लड़की ने बताया की…..उसके अब्बा का कही दूसरी जगह ट्रान्स्फर हो गया है……

रंगीन सहेली के जाने के बाद दो बेरंग सहेलियों की बीच क्या बाते होती…..मज़े की बाते धीरे धीरे कम हो गई थी….. मैं एक बार फर्रू से पुछा की उसका कोई बाय्फ्रेंड है क्या……तब उसने मुँह बिचकाया और कहा….बाय्फ्रेंड का झंझट मैं नही पालती….वो साले तो जी का जंजाल होते है….मुझे बड़ा ताज्जुब हुआ….मैने उसका हाथ पकड़ कर कहा…ही क्या बात कर रही है फर्रू जान….तूने तो मेरा दिल तोड़ दिया…मैं तो सोच रही थी काश मेरे भी दो तीन बॉय फ्रेंड होते तब्बू के जैसे….फ़रज़ाना ने मेरे गाल पर प्यार भरी चपत लगते हुए कहा….रंडी बनेगी क्या…..मैने उसकी कमर में चिकोटी काट ली और कहा….है मेरी जान…. बातो में तो हम रंडियों को भी मॅट कर देगी….और हम दोनो हँसने लगे….

फिर फर्रू ने बताया की वो इन सब चक्करो में नही पड़ती….और मुझे शराफ़त और खानदानी लड़की होने का लेक्चर पीला दिया….मैने मन ही मन गली दी साली कुतिया …..शरिफजदी बनती है….चूत में ढक्कन लगा कर घूमती रह जाएगी हरामखोर ……. फिर बातो का रुख़ दूसरी तरफ मुड़ गया.

कुछ दिन के बाद एक दिन हम इंटरनेट की प्रॅक्टिकल कर रहे थे….क्लास ख़तम हो चुका था पर मैं और मेरी एक क्लास मेट शबनम वैसे ही बैठे बाते कर रहे थे…..बात घूम फिर कर लड़को और फिर बाय्फरेंड्स पर आई तो….शबनम ने कहा….रुक मैं तुझे कुछ दिखती हू….फिर उसने एक वेबसाइट खोली उस पर बहुत सारी गंदी गंदी….तस्वीरे थी….लड़के और लड़कियों की….फिर उसने कुछ क्लिक किया और फिर एक वीडियो चालू हो गया….उसमे एक लड़की एक लड़के का लंड चूस रही थी….मेरा तो शर्म से बुरा हाल हो रहा था….दर लग रहा था कही कोई आ ना जाए….पर धड़कते दिल से मैं वो वीडियो भी देख रही थी….लड़का लड़की क्या बाते कर रहे थे ये तो नही पता….मगर लड़की का चेहरा कुछ जाना पहचाना सा लगा….
आँखे नचा नचा कर खूब प्यार से लंड चूस रही थी…..लगभग दो मिनिट का वीडियो था….जब फिल्म ख़तम हो गया तो शबनम ने पुछा क्यों समझ में आया….मैं सन्न रह गई थी… बेशखता मेरे मुँह से गलिया निकालने लगी…..ही अल्लाह कामिनी….तब्बासुम इतनी बेशरम होगी मुझे पता नही था….हरामजादी ने ऐसा क्यों किया….. अल्लाह कसम जिस दिन मिल गई कुतिया से पुच्हूँगी ज़रूर की….अपनी तस्वीर क्यों बनवाई…साली को बदनामी का दर नही लगा….इतनी गंदी वीडियो बनवा कर इंटरनेट पर डाल दी…..किसी को पता चल गया की मैं ऐसी बेशरम की सहेली थी……मैं अभी और कुछ बोलती इसके पहले ही शबनम ने मुझे रोकते हुए कहा…..मेरी जान, उसने नही बनाई ये तस्वीर…. उसके बाय्फ्रेंड ने बनाई…..

है मारजवा! मुए ने ऐसे क्यों किया…. शबनम ने समझाया ये दुनिया बड़ी हरामी…..ये जो बाय्फ्रेंड का चक्कर है बड़ा ख़तरनाक है….अगर दिलो-जान से मुहाबत करने वाला मिल जाए तो ठीक….कमीना और बेमूर्रोवत निकला तो फिर लड़की बर्बाद….तब्बासुम बेचारी ज़ज्बात और जिस्म की आग की रौ में हरमियों के चक्कर में पर गई….साले ने अपने मोबाइल से तस्वीर बना कर अपने दोस्तो के बीच बाँट दी….उन्ही में से किसी ने इंटरनेट पर डाल दिया….तभी तो शहर छोड़ कर जाना पड़ा बेचारी को….मैने तो ख्वाब में भी नही सोचा था की लड़के इतने हरामी होते है की जिसके साथ मज़ा करे….उसी को बर्बाद कर दे….लंड का नशा एक पल में ही उतार गया….मैने सुना था की लड़के तो चूत के पिस्सू होते है…..बुर के लिए गुलामी करने लगते है…..पर अब समझ में आ गया की मज़ा ख़तम होने के बाद साले हरामीपाने पर भी उतार आते है…..

मैने सब कुछ फर्रू बतलाया तो उसने मुँह बिचका कर कहा…..मैने तो पहले से कहती थी ये सब चक्कर बेकार है…..कौन कब धोखा दे जाए इसका कोई भरोसा नही…. फिर प्रेग्नेंट हो जाने का ख़तरा भी होता है…..तो यूँ कहिए की बाय्फ्रेंड बनाने का सरूर मेरे सिर से उतार गया……फर्रू की तरह अब मैं भी शरीफ बन गई थी…..एक जमाना था जब मैं और तब्बू मिल कर…..लौंडों को लंड की लंबाई चौरई का डिस्कशन करते थे…..कैसे सुपाड़े वाला लंड कितनी देर तक चोद सकता है…..कुछ लड़को का लंड टेढ़ा होता है…..वो कितना मज़ा देता है….मोटे सुपाड़े वाला कितना मज़ा देता होगा…..

रह चलते कुत्ते को कुतिया को चोदते हुए देखने की कोशिश करते….दीवार और पेड़ की ऊट में खड़े मर्दो को पेशाब करते हुए देखने की कोशिश करते……अगर किसी का लंड दिख जाता फिर चूत साला सहला कर याद करते…..वगिरह वगैरह….पर वो सब अब बंद हो चुका था….मैने भी इस तरह बाते करना अब छोड़ दिया….निकाह के बाद जैसा नसीब में होगा वो मिलेगा……..सेक्सी बातो से तो और आग भड़क जाती है….रात में उंगली डाल डाल कर अब कुछ होता जाता नही….

फिर एक दिन मैं फर्रू के घर गई…..फर्रू अपनी अम्मी और अपने बड़े भाई के साथ रहती थी….उसका भाई एंटी करप्षन यूनिट में किसी उची जगह पर था…..फर्रू ने बताया की उसका भाई उस से उमर में करीब सात साल बड़ा था….वैसे फर्रू भी मेरे से दो साल बड़ी थी मेरे भाई की उमर की थी….मैं ड्रॉयिंग रूम में बैठी थी तभी एक लड़का दाखिल हुआ…..मुझे देख एक पल के लिए चौंका….फिर अंदर चला गया….थोड़ी देर बाद फर्रू के खिलखिलती हुई हसी सुनाई दी….ही भाई छ्चोड़ो बाहर मेरी दोस्त है….बेचारी बोर हो रही होगी…..

ही अल्लाह बड़ी खूबसूरत पायल है….कब खरीदी आपने….उई छ्चोड़िए ना….ठीक है….कसम से….हा…पहन कर….ठीक है भाई….फिर एक दम खामोशी च्छा गई….थोड़ी देर बाद फर्रू आई तो उसके बॉल थोड़े से बिखरे हुए लग रहे थे….आँखो में अजीब सी चमक थी…..होंठो पर हल्की मुस्कुराहट तैर रही थी…..मैने सोचा क्या माजरा है….कितने मज़े से बाते कर रहे थे दोनो भाई बहन…जैसे की….मैने फर्रू से पुछा …..क्यों मुस्कुरा रही हो….वो जो लड़का अंदर गया क्या तेरा भाई था….फर्रू ने अपने चेहरे को उपर उठा कर जवाब दिया….हा….भाई जान थे….वो आज जल्दी ऑफीस से आ गये…

उसके गाल गुलाबी से सुर्ख लाल हो चुके थे….वो थोड़ा घबराई सी लग रही थी….मैने कहा….तो इसमे इतना घबराने की कौन सी बात है….अरे नही यार वो बहुत गुस्से वाले है….मैने कहा…अर्रे अभी तो तू उनसे हंस हंस कर बाते कर रही थी….बाहर तक आवाज़ आ रही थी…..शायद तेरे लिए कोई गिफ्ट लाए है…..मेरे ऐसा बोलने से फर्रू सकपका गई…..बात को इधर उधर घुमाने लगी….फिर मैं भी उठ कर चली गई ….ये सब बाते यही पर ख़तम हो गई….इसी तरह मैं एक दो दफ़ा और फर्रू के घर गई….

एक दफ़ा मैं सुबह के करीब आठ बजे उसके घर गई….उस रोज भाई को कही जाना था…. भाई ने फर्रू के घर तक छोड़ दिया…..दरवाजा थोड़ा सा लगा हुआ था….मैने धक्का दे कर हल्के से खोला और अंदर दाखिल हो गई….. मैने सोचा आवाज़ डू मगर….मुझे आई….उईईइ…..इश्स की आवाज़ सुनाई दी….जैसे अम्मी अपनी चूंची मसळवते या चुदवाते वक़्त आवाज़ निकलती थी….मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा….ये क्या चक्कर है….जासूस राबिया ने ड्रॉयिंग रूम का परदा हल्का सा हटाया…..अंदर झाँका….है अल्लाह मेरे होश फाख्ता हो गये…..फर्रू का भाई पीछे से उसको अपनी आगोश में दबोचे खड़ा था…दोनो की पीठ दरवाजे की तरफ थी…. पुच पुच की आवाज़ के साथ स…इसस्स…की आवाज़…उसके भाई के दोनो हाथ उसकी छाती के नज़दीक….मेरे तो पैर काँपने लगे….दिल धड़ धड़ कर बजने लगा….वाहा खड़ा होना मेरे लिए मुस्किल हो गया….अपने आप को संभालती जल्दी से बाहर आ गई….कुछ देर तक वही खड़े रह कर अपने जज़्बातो को संभाला फिर…कॉल बेल दबा दिया….

थोड़ी देर के बाद फर्रू बाहर आई….अपने बालो को संभालते हुए….होंठो का रंग थोड़ा उड़ा हुआ लग रहा था….पर चेहरे का रंग सुर्ख लाल हो रखा था….अपनी छाती पर दुपट्टा संभालते हुए अपने बैग को कंधे पर लटकाए….थोड़ी घबराई सी बोली…..ज़यादा देर तो नही हुई….मैने उसको उपर से नीचे देखते हुए कहा…..नही यार….उसकी समीज़ की इस्त्री उसके छाती के पास खराब हो चुकी थी….सलवते पर चुकी थी…..जाहिर था की उसके भाई जान ने वाहा हाथ लगा कर मसला है….अल्लाह क्या क्या तमाशे दिखा रहा था मुझे….मेरी प्यारी सहेली फर्रू जिसको मैं सीधा समझती थी अपने सगे बड़े भाई से अपनी चूंची मसलवा रही थी…..मेरे पैर अभी भी काँप रहे थे….साली अपने भाई से फंसी है….तभी कहती है बाय्फ्रेंड की ज़रूरत नही….

जब घर में ही लंड का मज़ा मिल रहा है तो फिर बाहर….ही कसम से मैने खवाब में भी नही सोचा था….रंडी….शराफ़त का कितना जबरदस्त ढोंग करती थी…..हम दोनो कॉलेज के लिए पैदल ही चल दिया, वाहा से जयदा दूर नही था….पर मेरा दिल जितनी देर तक कॉलेज में रही धाड़ धाड़ कर बजता रहा…..

दो बजे दिन में वापस घर आई फ्रेश होकर आराम करने के लिए बिस्तर पर लेती तो…..आज सुबह हुआ वाक़या मेरे दिलो दिमाग़ में फिर से चक्कर लगाने लगा…..ही मेरी फर्रू जान अपनी बुर फड़वा चुकी है…..साली कितनी चालक है…..सब कुछ निकाह के बाद….साली ने फड़वा या भी किस से अपने सगे भाईजान से…..बाहर किसी को पता ही नही की शरिफजादी कितनी बड़ी हरामजादी और चुदक्कड़ है…..भाई का लंड बुर में लेकर सिर पर दुपट्टा डाल कर घूमती है……जैसे नीचे के छेद में कौन हलचल मचा रहा है पता ही नही……कुछ भी हो मेरे जासूसी मिज़ाज को भी थोड़ा करार आ गया था….मैं हमेशा सोचती थी की क्या साली की चूत नही खुजलाती…..उंगली करती होगी या नही…..हमेशा मेरी बातो को ताल देती थी….इधर उधर कर देती…..जैसे कितनी पाकदामन है…..

जैसे इन सब चीज़ो की उसे कोई मतलब ही नही…..खैर मज़े है साली के ….चूत की खुजली आराम से मिट रही है……भाई गिफ्ट ला कर भी दे रहा है…..मज़े कर रही है……फर्रू ने अपने भाई से कैसे अपनी फड़वाई ये राज भी किसी ना किसी तरह उगलवा लूँगी….फिलहाल तो मुझे अपनी फ़िक्र करनी चाहिए…..तब्बसुम के किस्से के बाद से तो लड़को के बारे में सोचना बंद ही हो गया था….मगर फ़रज़ाना ने नई राह दिखला दी थी.

आख़िर थी तो अपनी रंडी अम्मी की बेटी….उसका कीड़ा तो मेरे अंदर भी था…..फिर फर्रू ने आज एक ऐसी राह दिखला दी थी जिसकी मुझे शिद्दत से तलाश थी…..अपनी कुँवारी अनचुदी गुलाबी रानी का सील तोड़ने के लिए एक ऐसे बंदे की तलाश थी जो प्यार से मज़ा दे…..मेरी इज़्ज़त का ख्याल रखे…..और मुसीबतो से भी बचाए…इस सब के लिए मेरी निगाहो में आज तक कोई मर्द नही था…..पर सुबह के सबक ने मेरी निगाह को अपने भाई की तरफ मोड़ दिया……हू भी तो एक जवान मर्द है….तंदुरुस्त है…..अल्लाह ने उसे भी लंड से नवाज़ा है……उसका लंड भी तो किसी ना किसी चूत को चोदने के लिए ही तो है….पता नही मेरी निगहों पर अब तक परदा क्यों कर परा था…..भाई था तो क्या हुआ….. जिसकी चूत में वो अपना लंड पेलेगा वो भी तो किसी ना किसी की बहन ही होगी….किसी और की बहन को चोदेगा…..तो फिर अपनी बहन की चूत क्यों नहीं…..
कहानी की सुरुआत शुरू से ही करती हूँ. मैं रुखसाना हूँ, मेरी उमर अभी 22 साल की है. प्यार से मुझे सब राबिया कहते है. मेरी शादी हो चुकी है और मेरे हज़्बेंड एक प्राइवेट फर्म में मॅनेजर हैं. माएके में मेरी अम्मी और अब्बा हैं. शहर में हमारे खानदान की बहुत ही अच्छी इज़्ज़त है. इज़्ज़तदार घराना होने के कारण पर्दे की पाबंदी है…लेकिन पर्दे के पीछे…

चूत पर कहा लिखा होता है की बहन की चूत है….और मैने आज तक कभी नही सुना की लंड पर लिखा होता है की भाई का लंड है……चूत चूत है, लंड, लंड…..चूत होती है लंड से चुदवाने के लिए…..चूत वाली कौन है और लंड वाला कौन इस से चूत और लंड को क्या लेना-देना…..इस तरह अपने दिल को समझाते हुए…. मैने सोच लिया की अब वक़्त बर्बाद करने से कोई फायदा नही…… भाई को ही अपनी मस्त जवानी सौंप जवानी का मज़ा लूटा जाए……आख़िर जिसकी निगाह के सामने जवान हुई उसका हक़ क्यों ना हो इस जवानी पर…..फिर ये कोई ग़लत रह या गुनाह भी नही होगा…..मैं तो अपनी अम्मी और सहेली के दिखाए रास्ते पर ही चलूंगी….वो दोनो तो ना जाने कब्से अपने अपने भाइयों का लंड अपनी बुर में पेल्वा रही है…..ये सब उपरवाले की मर्ज़ी है जो उसने मुझे ऐसा मंज़र दिखला कर रह दिखाई है……अब इस से पीछे हटना ठीक नही…..

ये सब सोच कर मैने फ़ैसला कर लिया की किसी भी तरह भाई को फसा लेना है……घर का काम करते हुए मेरा दिमाग़ तेज़ी से काम कर रहा था……मैं सोच रही थी की भाई को कैसे कर फसाया जाए…..कही वो बिदक तो नही जाएगा….कही उल्टा तो नही सोच लेगा की मैं कैसी रंडी हूँ….मुझे समझदारी के साथ धीरे धीरे कदम बढ़ाना होगा….. अपना सागा भाई होने की वजह से उसको फसाने का खेल ख़तरनाक हो सकता था….वो अम्मी को बतला सकता था…..पर एक बार भाई अगर फस जाता तो फिर ऐश ही ऐश थी……. मैं ने भाई पर ही डोरे डालने का पक्का इरादा कर लिया…..पर शुरुआत कैसे करू यही मेरी समझ में नही आ रहा था…..वैसे भी आज तक ना तो किसी लड़के को फसाया है ना खुद किसी के साथ फंसी थी….

अब सीधे सीधे जा कर बोल तो नही सकती थी की भाई मुझे चोदो ….मेरी जवानी का रस चूस लो…..मेरी चूत में अपना लंड पेल दो….मैं इसी उलझन में डूबी सोचती रही की जिस राह पर चलने की मैने ठनी है….उस राह पर कदम बढ़ने के सही तरीका क्या है…..

शाम में भाई ने मुझे सोच में डूबा देखा तो बोला….क्या सोच रही है राबिया….कॉलेज में कुछ हुआ है क्या….मैने कहा नही भाई…..कुछ नही….फिर क्या हुआ….उदास है….अम्मी की याद आ रही है क्या…..मैने कहा नही भाई बस ऐसे ही फिर उठ कर किचन में चली गई….अब कैसे बताऊँ की मैं नही मेरी चूत उदास है……साले को कुछ समझ में भी तो नही आता….इतना तो समझना चाहिए की बेहन जवान हो गई है उसको लंड चाहिए….

पूछ रहा है क्यों उदास हो…..अर्रे गमगीन ना रहूँ तो और क्या करू….सारी जहाँ की लड़कियाँ चुद रही है….यहाँ मेरी चूत की खुजली मिटाने वाला कोई नही….किसी दिन सलवार खोल के चूत दिखा दूँगी…..

सुबह कॉलेज में शबनम मिली तो बड़ी खुश दिख रही थी….मैने उसके चूतड़ पर चिकोटी कटी….और जानी बहुत चहक रही हो…. माजरा क्या है….ये नये पायल…अंगूठी….नई ड्रेस…..बदले बदले से नज़र आ रहे है सरकार…..शबनम एकदम से शर्मा गई…. गाल गुलाबी हो गये फिर हँसते हुए बोली….. कुछ भी नही बस ऐसे ही काफ़ी दिनों से ये ड्रेस नही पहनी थी इसलिए….चल साली किसको बना रही है….कुछ तो बात है….कल कॉलेज क्यों नही आई थी…..फिर उसने थोड़ा शरमाते थोड़ा जीझकते हुए बताया…..अर्रे यार मेरी सगाई हो गई है….मैं एकदम से चोंक गई….कब….किसके के साथ….कैसे….एकसाथ कई सवाल मैने दाग दिए….शबनम मेरा हाथ पकड़ घसीट ती हुई बोली….कितने सवाल करती है….सब कुछ एक बार में ही जान लेगी क्या….

फिर हम दोनो कॉलेज की कैंटीन के पीछे जहाँ एक दम सन्नाटा होता है वाहा चले गये….पत्थर पर बैठने के बाद उसने कहा…हा पूछ क्या पूछ ना है….पहले तो ये बता कब हुई तेरी सगाई…..कल…..ही….तूने बताया भी नही पहले….किसके साथ…पहले से चक्कर था तेरा….शबनम झल्ला उठी….धत ! बकवास किए जा रही है….तुझे पता है मेरा किसी के साथ कोई चक्कर नही…..फिर इतनी जल्दी कैसे….जल्दी तो नही है….बस तुझे पता नही था इसलिए….अच्छा चल अब तो बता दे कौन है वो खुशकिस्मत जो मेरी शब्बो रानी के रानों के बीच की सहेली का रस चखेगा….शबनम का चेहरा लाल हो गया…..धत ! साली हर समय यही सोचती है क्या…..

ज़रा भी लिहाज़ नही है तेरे से दो साल बड़ी हूँ मैं…मैने शबनम की जाँघो पर हाथ मारते हुए कहा….तो फिर बता ना मेरी शाब्बो बाजी कौन है वो….शबनम हंस दी फिर मस्कुराते हुए शरमाते हुए बोली….खालिद नाम है उनका….खालिद अच्छा यही के है या….यही के है….मेरी खाला के लड़के….मतलब तेरे खलजाद भाई….हा….अर्रे वा तब तो पहले से देख रखा होगा तूने….हा हमारे घर से जयदा दूर नही है उनका घर…..हम जब छोटे थे साथ में खेलते भी थे…..जब बड़े हो गये तो थोड़ी दूरी आ गई…मतलब…. शबनम बोली अर्रे कामिनी मतलब क्या समझोउ….जब लड़का-लड़की जवानी की दहलीज़ पर कदम रख देते है तो फिर दूरी तो आ ही जाती है, है ना…..

मैने और छेड़ने के इरादे से पुछा ….ही मतलब बचपन का प्यार है….धत !…क्या बोलती है…अरे मैने क्या बोला….तूने ही तो कहा…बचपन में साथ खेलते थे और जब तेरी चूची बड़ी हो गई तो दूरी आ गई….इसका तो यही मतलब निकला की बचपन से अम्मी अब्बा वाला खेल चल रहा था…..धत ! साली ….मुझे खुद नही पता था की खालिद भाई…है खालिद मुझे चाहते है….मैं बीच में बोल पड़ी ….पर तू उन्हे चाहती थी….अरी नही रे….मैं उन्हे खालिद भाई कह कर बुलाती थी….जब भी कभी घर आते थे तो घर का महॉल बरा खुशनूमा हो जाता था….हम साथ में वीडियो गेम्स खेलते और हसी मज़ाक करते थे…मैं बीच में बोल पड़ी ….ही बस तुम दोनो साथ में….अरे नही रे मेरी बाकी दोनो बहनें भी…हम चारों जाने ….खालिद भाई….ओह तौबा तौबा….

खालिद के कोई भाई या बहन नही है ना…. उनका मान हमारे यहाँ बहल जाता था….ही! ये मान बहलाते बहलाते लगता है कुछ ज़यादा ही बहल गये तेरे खालिद भाई……चुप्प कर साली अब वो मेरे खाविंद है…..मैने कमर में चिकोटी काट कर कहा…..ही रब्बा….अभी से इतनी वफ़ादारी…. तू बाज आएगी या फिर तेरा कुछ और इलाज़ करना परेगा…ही! इलाज़ क्या करोगी….बस मिठाई खिला दो….खाली हाथ आ गई…बड़ी बाजी बनती हो इतना तो शरम लिहाज़ रखो की अपनी सगाई पर मुँह मीठा करा दो….भले ही अपने मियाँ से नही मिलवाना…शबनम मुस्कुराने लगी….बोली क्लास छोड़ चल मेरे साथ…मैने पुछा क्यों कर भला….अर्रे चल ना बस….घर चलते है वही तेरा मुँह भी मीठा करा दूँगी….घर पर अभी कोई नही होगा फिर आराम से बाते करेंगे….मैं भी उस से उसके खालिद भाई के बारे में खोद खोद कर पूछ ना चाह रही थी….. इसलिए थोड़ा सोचने के बाद हामी भर दी……

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