हमारी नौकरानी सरीना

मुंबई में मेरी पोस्टिंग तीन महीने पहले ही हुई थी, मैं और मेरी बीवी उर्मी एक फ्लैट में रहते थे। मेरी नौकरी ऐसी थी कि रोज़ मुझे 8-10 हज़ार की रिश्वत मिल जाती थी। उर्मी मुझे ठीक से सेक्स नहीं करने देती थी।
हमारी नौकरानी का नाम सरीना था, उसकी उम्र 35 साल के करीब होगी, वह हमारे यहाँ 3 महीने से काम कर रही थी, चूचियाँ उसकी तनी हुई और थोड़ी बड़ी-बड़ी संतरे जैसी थीं। अक्सर मैं अपनी बीवी से नज़र बचाकर, जब वो मेरे कमरे में पौंछा लगाती थी तो उसके ब्लाउज से झांकती हुई चूचियों का मज़ा लेता था। एक दो बार उसने मुझे मुस्कुरा कर देखा भी था और हल्की सी मुस्कुराहट भी दी थी।

एक दिन मेरी बीवी उर्मी नीचे बाज़ार से कुछ सामान लेने गई वो मेरे कमरे में पौंछा लगाने आई और अंगड़ाई लेकर बोली- बाबूजी, आज गर्मी बहुत हो रही है !
और उसने अपने ब्लाउज के तीन बटन खोल लिए। नीचे ब्रा वो नहीं पहने थी पूरी चूचियाँ एकदम से बाहर आ गईं। चुचूक आधे से ज्यादा बाहर थे। पौंछा लगाते लगाते वो मुस्कुरा रही थी। सरीना मुस्कुरा कर बोली- बाबू, आप मुझे 200 रुपए दे दो !
मेरा लौड़ा पूरा टनटना रहा था, मैं बोला- ठीक है, लो !
और मैं उसे रुपए देने लगा तो उसने जानबूझ कर अपना पल्लू नीचे गिरा दिया। पूरी नंगी होती चूचियाँ मेरी आँखों के सामने थी।
सरीना कामुक मुस्कान दे रही थी, मेरे से रहा नहीं गया, मैंने उसकी चूचियाँ दोनों हाथों से दबा दीं। इतने से उसका आखिरी बटन भी खुल गया। अब पूरी नंगी चूचियां मेरे सामने थी। मैंने कस कर दो तीन बार उन्हें मसल दिया।
सरीना मुझे हटाती हुई बोली- बीबी जी आने वाली हैं, जब मायके जाएँ तब पूरे मज़े ले लेना ! आप मुझे बहुत अच्छे लगते हो।
इतना कह कर उसने हल्के से मेरा लण्ड सहला दिया और मेरे होंटों पर एक पप्पी दे दी।
दो हफ़्ते बाद ही मेरी पत्नी को दस दिन के लिए अपने घर जाना पड़ा। अब मैं घर में इतने दिन अकेला था। मेरे मन में सरीना को चोदने का ख्याल पलने लगा।
सुबह सात बजे वो आती थी। बड़ी मुश्किल से मुझे रात में नींद आई।
सुबह छः बजे दरवाजे की घंटी बजी। मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने सरीना मुस्कुरा रही थी।
मैंने उसके अन्दर घुसते ही दरवाज़ा बंद कर दिया और पीछे से उसकी चूचियाँ पकड़ लीं।
सरीना हँसते हुए बोली- बाबूजी, क्यों परेशान होते हो, आज तो पूरा मज़ा ले लो ! भाभीजी बाहर हैं इसलिए ही जल्दी आई हूँ।
हम दोनों कमरे में आ गए हँसते हुए उसने अपना ब्लाउज उतार दिया ब्रा में बंद दोनों चूचियाँ मेरा लण्ड खड़ा कर चुकी थीं।
उसने कामुक अंगड़ाई ली और बोली- ब्रा का हुक खोलो ना !

मैं पगला रहा था, मैंने उसे बाँहों में भरा और उसकी ब्रा का हुक खोल कर पलंग गिरा दिया। उसकी दोनों बड़ी बड़ी संतरे जैसी चूचियाँ बाहर आ गई थीं जिन्हें मैं पागल की तरह दबाने लगा।
सरीना रोकते हुए बोली- इतने उतावले क्यों हो रहे हो? लो, पहले मेरे चुचूकों को चूसो !
और उसने मेरी शर्ट और बनियान उतारकर मेरा सर अपनी गोदी में रख लिया और मेरे मुँह में अपनी चूची की घुण्डी घुसा दी। एक बच्चे की तरह मैं उसकी चूची चूसने लगा। उसकी चूची चूसने में मुझे मज़ा आ रहा था।
सरीना का एक हाथ मेरे पजामे के ऊपर लण्ड पर था, एक तरह से वो मेरे लण्ड को सहला रही थी।
थोड़ी देर में उसने मेरा पजामा उतार दिया तो मेरा नंगा लण्ड उसके हाथों में था जिसे वो हल्का हल्का अपनी मुट्ठी में दबा कर मसल रही थी। मैं गर्म हो रहा था और उसकी चूची पीते पीते उसके चुचूक पर काट रहा था।
मेरा मन सरीना को चोदने का कर रहा था, सरीना इस बात को समझ गई थी। उसने मुझे उठा कर अपना पेटीकोट उतार दिया। उसकी नंगी चिकनी चूत पूरी चमचमा रही थी।
सरीना मुस्कुराते हुए बोली- आज सुबह पाँच बजे उठकर तुम्हारे लिए चिकनी की है ! अब मस्त चोदना !
उसने अपनी दोनों टाँगे चौड़ी कर दीं और बोली- अब अपना लण्ड इसमें घुसा दो ! सच, बहुत दिनों से तुमसे मरवाने का मन कर रहा है, अब रहा नहीं जा रहा है, इस सुसरी को फाड़ दो !
तीन महीने से मेरी बीवी ने चूत नहीं दी थी, मुझसे रहा नहीं गया, बिना कंडोम पहने मैंने अपना आठ इंची लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया। चूत चुदी हुई थी तो लण्ड आराम से अन्दर घुस गया। मैंने सरीना की चुदाई शुरू कर दी थी, सरीना की चूत में लण्ड घुसा हुआ था, अपने दोनों हाथ उसकी चूचियों पर टिका दिए और उन्हें की तरह बजाने लगा साथ ही उसके सुन्दर काले चुचूक नोच और मसल रहा था। उसकी चूत मेरे लण्ड के झटके खा रही थी, सरीना मज़े लेते हुए मेरे बाल सहला रही थी।
करीब दो मिनट ही मैंने उसको चोदा होगा कि लण्ड ने वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया।
हाँफते हुए मैं उठ गया, जल्दी झड़ने के कारण मैं शरमा रहा था।
सरीना उठी और उसने मुझे एक ग्लास पानी लाकर दिया और बोली- साहब शरमाएँ नहीं ! सात दिन में मैं आपको चूत का खिलाडी बना दूँगी, एक-एक घंटे तक यह औरतों की चूत फाड़े रखेगा और एक बार बुढ़िया या जवान जिसको आपने चोद दिया वो आपकी दीवानी हो जाएगी और बार बार चुदवाएगी, आपके लण्ड में अभी बहुत जान है, लाओ मैं इसे चूसती हूँ।
सरीना मेरा लण्ड चूसने लगी, मैं आराम से लेटा हुआ था, अब मुझमें इतनी उत्तेजना नहीं थी लेकिन मुझे मस्ती बहुत आ रही थी, पहली बार किसी ने मेरा लण्ड चूसा था।

लेकिन यह क्या एक मिनट से कम में ही मेरा लण्ड फिर झड़ गया। सरीना मेरा लण्ड-रस मुँह में पी गई, मैं आँखें नीचे किये था।
सरीना मुझे समझाते हुए बोली- आप शरमाएँ नहीं। आप में कोई कमी नहीं है, आप ने शराफत के कारण चूत का असली मज़ा नहीं लिया है। अगर आप रोज़ बीबी जी की चूत मारते तो यह इतनी जल्दी खाली नहीं होता। मुझे पता है शरीफ लोग बीवी की रोज़ मार नहीं पाते और बीवी भी उनको खुलकर चूत नहीं देती है और एसे पतियों का ख्याल भी नहीं रखती है। अब आप देखना, मैं आपको दस दिन में चूत का खिलाड़ी बना दूँगी।
सरीना आगे बोली- अब आपका लण्ड पूरा खाली है। आपको मैं दो ग्लास दूध देती हूँ। उसके बाद नहाते समय सरसों के तेल से लण्ड की मालिश करुँगी। शाम तक यह टनटनाने लगेगा। शाम को एक बार मैं आपका लण्ड फिर चूसूंगी, कल फिर आप देखना कैसे यह चूत में हल्ला मचाता है, 15 मिनट से पहले खाली नहीं होगा और दस दिन बाद यह आठ इंची लण्ड औरतों की 2-2 घंटे फाड़े रखेगा और उनकी चूत 4-4 बार झड़वा देगा।
सरीना ने मेरा सर अपनी चूचियों में छिपा लिया और मेरे बाल सहलाने लगी। पाँच मिनट बाद सरीना उठी, उसने मुझे दो ग्लास दूध दिया और बोली- आप अब तली हुई चीज़ मत खाना।
मुझे लग रहा था कि सरीना मुझे अब चोदना सिखा देगी।
मैंने आधा ग्लास दूध सरीना को भी पिलाया। हम दोनों नंगे बाथरूम में गए, वहाँ सरीना ने मेरे लण्ड की तेल मालिश की और मुझसे चिपक कर शावर में नहाने का मज़ा लिया।
मैंने ऐसे मज़े की कभी उम्मीद भी नहीं की थी।
शाम को सरीना पाँच बजे आई और काम करने के बाद उसने मुझसे कहा- चलो अब अपना लण्ड चुसवाओ !
मैं पैंट उतारने लगा तो मुझे बाँहों में भरती हुई बोली- मेरे शरीफ साहब पैंट उतरने की जरुरत नहीं है, चेन खोलो और लण्ड बाहर निकालो, उसे मैं चूसूंगी ! कभी पार्क में किसी लड़की के साथ जाओ तो उसे ऐसे ही लण्ड चुसवाया जाता है।
मैंने चेन खोल कर लण्ड निकाल लिया। लण्ड धीरे धीरे टनक रहा था, सरीना ने उसे मुँह में ले लिया और 5-6 बार चूसने के बाद सुपाड़ा चाटने लगी।
मैंने कहा- सरीना, चोदने का मन कर रहा है, एक बार चूत मारने दो !
सरीना ने अपने मुख से लण्ड निकाला और उँगलियाँ सुपाड़े पर फिराती हुई बोली- चूत कल मिलेगी ! अभी मैं चूस कर इसे खाली करुँगी !

और उसने अपने हाथों से लण्ड पकड़ कर मुँह में चूसना शुरू कर दिया। मैं उसकी चूचियाँ धीरे धीरे मसल रहा था। करीब 5 मिनट तक मेरे लण्ड से खेलने के बाद बोली- अब इसका रस निकलने वाला है उसे मेरे मुँह में डाल दो !
मैंने उसके कहे अनुसार लण्ड-रस उसके मुँह में डाल दिया।
इसके बाद उसने मुझसे कहा- रात को आप दो ग्लास दूध लेना और सुबह लण्ड मालिश करके रखना। कल सुबह एक बार फिर आप मेरी चूत मारना।
अगले दिन सरीना सुबह 6 बजे आई मैंने लण्ड पर उसके कहे अनुसार तेल मालिश कर रखी थी और रात से मेरा लण्ड बुरी तरह से उसकी चूत मारने को फड़फड़ा रहा था। मैंने सिर्फ लूंगी और बनियान पहन रखी थी। सरीना के घुसते ही मैंने दरवाज़ा बंद किया और उसे गोद में उठा कर पलंग पर पटक दिया मेरी लूंगी खुल गई थी और मेरा 8 इंची लण्ड उसके सामने था।
उसने अपने हाथ से मेरा लण्ड पकड़ा और बोली- बाबूजी, लण्ड तो आपका बहुत मस्त हो रहा है, मेरी चूत भी इसे खाने के लिए पागल हो रही है लेकिन थोड़ा सब्र करो, इतने उतावले क्यों हो रहे हो? पहले मुझे नंगी तो कर दो।
मैं सरीना का गुलाम हो गया था, मैंने एक एक करके उसकी धोती, ब्लाउज और पेटीकोट उतार दिया। ब्रा आज वो नहीं पहने थी। नंगी सरीना मेरे लण्ड में आग लगाए हुआ थी। लण्ड पूरा टनटना रहा था, ऐसे में तो बुढ़िया भी सुंदरी लगती है फिर सुन्दर औरत तो अप्सरा लगनी ही थी।
सरीना ने मुझे पलंग पर बैठाया और अपना मुँह मेरे लण्ड पर लगा दिया। मेरे दोनों हाथों में उसने अपने संतरे पकड़ा दिए। सरीना ने बड़े प्यार से धीरे धीरे 3-4 बार मेरा लण्ड चूसा और मेरे लण्ड के अग्र भाग पर जीभ फिराने लगी। मेरी उत्तेजना चरमसीमा पर थी, मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मैं बोला- सरीना अब चूत मारने दो ! अब रहा नहीं जा रहा है।
सरीना मुँह से लण्ड निकालते हुए बोली- बाबूजी, चूत तो आपकी गुलाम है लेकिन कुछ इनाम तो दे दो इस नाचीज़ को।
मैंने अपनी जेब से निकाल कर पाँच हजार रुपए दे दिए। मेरे से चिपकती हुई सरीना बोली- आपने मुझे खुश कर दिया, मैं आपको 2-3 दिन में सरप्राइज़ दूँगी।
मैं बोला- रानी पहले अपनी चूत मारने दो, अब सब्र नहीं होता। बाद में जो देना हो, दे देना !
सरीना ने मेरी बनियान उतार दी और अंगड़ाई लेती हुई बोली- लो राजा मार लो !
मैंने उसे सीधा लेटा दिया और उसकी चूत में लण्ड घुसा दिया। अब मैं सरीना के ऊपर चढ़ा हुआ था। आज सच में लण्ड में एक अजीब सी ताकत दिख रही थी। चूची दबाते हुए मैंने उसकी चूत चोदना शुरू कर दी। 2-3 मिनट चोदने के बाद सरीना ने मुझे हटा दिया और बोली- राजा, अब 5 मिनट आराम करो, फिर नई ताकत से चोदना !

उसने मुझे सीधा लेटा दिया और धीरे धीरे मेरी छाती की घुन्डियाँ काटने लगी और बीच बीच में मेरा लण्ड सहला देती।
मुझसे बात करते हुए बोली- आपकी बीवी आपको ठीक से चूत मारने नहीं देती अगर औरत की चूत रोज चोदोगे तो तीन महीने बाद एक घंटे तक चूत बीच बीच मैं 4-5 बार 2-3 मिनट का आराम लेते हुए चोद सकते हो। आपने मैडम की कभी गाण्ड मारी है या नहीं?
मैं मुस्कुराते हुए बोला- तू मजाक बहुत करती है ! मैंने आज तक पीछे से चूत नहीं चोदी, तू गाण्ड की बात करती है। तीन महीने में एक बार चोदता हूँ वो भी लाइट बंद करने के बाद और 5 मिनट से कम में ही खेल ख़त्म हो जाता है।
सरीना बोली- आपको चूत चोदने में तो माहिर करूँगी ही, साथ में गाण्ड का भी मज़ा दिलाऊँगी। आप जितना गोरा और लम्बा लण्ड कम ही लोगों का होता है !
उसने मेरा लण्ड एक बार और सहला दिया जो अब सीधा छत को छूने की कोशिश कर रहा था।
सरीना उठी, उसने मेरे लण्ड के सुपाड़े पर अपनी चूत छुलाई और टाँगें चौड़ी करके पूरा लण्ड अपनी चूत में घुसा लिया। अब सरीना मेरे लण्ड पर बैठी थी। उसने मेरे हाथ उठाकर अपनी चूचियों पर रख दिए और बोली- लो राजा, इन्हें दबाओ जितनी जोर से दबाओगे उतना ही उछल उछल कर चुदूँगी।
मैं कभी धीरे, कभी तेज उसकी संतरे जैसे चूचियाँ दबाने लगा। वाकई वो भी कभी धीरे कभी तेज मेरे लण्ड पर उछल कर मुझे मजा दे रही थी, ओह आह से कमरा गूंजने लगा। दो मिनट के बाद शांत होकर सरीना मेरे लण्ड पर बैठ गई और बोली- राजा थक गई ! अब तुम जरा अपने चूतड़ हिला हिला कर मेरी भोंसड़ी को चोद दो।
मैं लेटे लेटे ही अपने लण्ड को उसकी चूत में गाण्ड उठा के पेलने लगा। सरीना चिल्ला रही थी- वाह कुत्ते ! क्या चोद रहा है, मज़ा आ गया ! फाड़ इसे फाड़ हरामजादे ! बहुत मजा आ रहा है ! चोद दे, बना दे इसकी महा भोंसड़ी !
सरीना चुदने में पूरा साथ दे रही थी। थोड़ी देर में मेरे लण्ड की पिचकारी छूट गई और वो मुझ पर झुक कर चिपक गई मेरा लण्ड उसकी चूत में ख़ाली हो गया था।
अब हम दोनों चिपके हुए थे।
सरीना आठ बजे तक काम करके चली जाती थी, आज नौ बज रहे थे। तभी फ़ोन की घंटी बजी !
कहानी जारी रहेगी।

सरीना आठ बजे तक काम करके चली जाती थी, आज नौ बज रहे थे। तभी फ़ोन की घंटी बजी, उधर से एक सुरीली सी आवाज़ आई- भाई साहब, मैं रूचि बोल रही हूँ आपकी पुरानी पड़ोसन !
मैंने अपना नंगा लण्ड सहलाते हुए कहा- रूचि जी, आप कैसी हैं? कहाँ से बोल रही हैं?
रूचि हँसते हुए बोली- अब हम नालंदा अपार्टमेन्ट में रहते हैं आपके यहाँ से थोड़ी दूर ही हैं, भाभीजी नहीं हैं क्या?
मैंने कहा- नहीं वो तो नहीं है !
रूचि बोली- मैं भी अकेली हूँ ! अच्छा, सरीना आपके यहाँ हो तो भाईसाहब बात करा दीजिए न ! कुछ बड़ा काम तो नहीं कर रही है क्या ?
मैं झेंपता हुआ बोला- अभो कराता हूँ !
सरीना पीछे आकर मुझसे चिपक गई थी, मैंने सरीना को फ़ोन दे दिया। सरीना की आवाज़ मुझे सुनाई दी, सरीना बोल रही थी- अच्छा मेमसाहब तो आज नहीं आना है? ठीक है, शाम को दे दूँगी !
फ़ोन रखने के बाद सरीना मुस्कुरा रही थी। मैं बोला- यह रूचि जी वही हैं न जो हमारे सामने रहती थीं और आशा की दोस्त भी थी?
सरीना आँखे मटका कर बोली- हाँ जी, यह वही हैं, जब यह अपनी बालकनी में कुछ उठाने आती थीं तो आप छुपकर देखा करते थे और जब कभी आपके घर आती थीं तो आप इनकी चूचियाँ घूर घूर कर देखते थे। आजकल सामने वाली बिल्डिंग में रहती हैं। शाम को इनकी झांटे साफ़ करने वाली क्रीम वापस करनी है।
मेरा लण्ड झुका हुआ था, सरीना ने उसे हिलाया और बोली- आपकी वो किताब कहाँ है जिसमें सुन्दर सुन्दर नंगी लड़कियों की चुदती हुई फोटो लगा रखी हैं?

मैं चौंकते हुए बोला- तुझे कैसे पता? यह बात तो मेरी बीवी को भी नहीं पता !
बाबूजी, आपकी बीवी को तो यह भी नहीं पता कि आप मेरी चूत का रस चख रहे हैं, आप एक दिन बस स्टैंड के पास फ़ुटपाथ की जिस दुकान से नंगी फोटो खरीद रहे थे वो मेरे पड़ोसी की दुकान है, उसी ने बताया था कि आपको नंगी जवान लड़कियों की सेक्सी फोटो खरीदने का शौक है, अब नखरे न करो, मुझे दिखा दो, नहीं तो मैं नाराज हो जाऊँगी।
मैंने कहा- ठीक है, मैं दिखाता हूँ।
“यह हुई न बात !” सरीना बोली और उसने मेरे ठन्डे पड़े लण्ड को मुँह में लेकर दो तीन बार चूस लिया, बोली- आप किताब लाओ तब तक मैं आपके लिए गरम दूध बनाकर लाती हूँ।
मैं अपनी दो सौ पन्नों की फाइल ले आया जिसमें नंगी लड़कियों की हसीन फोटो थीं। उन्हें मैं एक बार देखने लगा जिससे मेरे लण्ड में थोड़ा सा उफान आ गया। सरीना दो ग्लास दूध ले आई थी। मेरी तरफ ग्लास बढ़ाकर बोली- लो साहब दूध पियो !
मैं बोला- मैं ठंडा दूध पीता हूँ !
उसने मेरा दूध मेज पर रख दिया और अपना ग्लास खाली कर दिया, मेरा लौड़ा सहलाते हुए बोली- राजा, अभी तो एक पारी और हो जाएगी, यह मियां तो फुदकी मार रहें हैं।
मैं बोला- तू ग्लास दे।
उसने ग्लास मेरी ओर बढ़ा दिया। ग्लास में बहुत मलाई थी, मैं उसे निकालने लगा तो सरीना बोली- यह क्या कर रहे हो?
मैं बोला- रानी, मैं मलाई नहीं खाता !
सरीना बोली- लाओ, मलाई मुझे दो ! आप कोई अच्छा काम करते भी हो?
मैंने मलाई उसके हाथ में दे दी उसने मलाई लेकर मेरे लण्ड पर गिरा दी।
मैं बोला- अरे, यह क्या कर रही हो सरीना?वह मेरे गाल पर चुटकी काटते हुए बोली- आप अब दूध पियो और मुझे मलाई खाने दो !
उसने दूध की मलाई से मेरे लण्ड की मालिश की और लण्ड अपने मुँह में डाल लिया और उसे चूसने लगी। थोड़ी देर में लण्ड पूरा तन गया, मैं मस्त हो गया।

पूरा लण्ड तनते ही मेरा मन दुबारा चोदने को करने लगा।
सरीना बोली- राजा, पहले जाकर दूध के ग्लास रख कर आओ फिर तुम्हें चुदाई का दूसरा पाठ पढ़ाती हूँ।
मैं ग्लास रखने गया, तभी मेरे ऑफिस से फ़ोन आ गया। मैंने फ़ोन पर बता दिया- आज नहीं आऊँगा।
जब मैं कमरे में घुसा तो सरीना उलटी घुटनों के बल लेटकर नंगी लड़कियों की फोटो देख रही थी, मैं उसकी गाण्ड से चिपक कर चूची दबाने लगा तो सरीना बोली- लड़कियां तो बहुत सुन्दर हैं ! दो-दो लण्डों से भी चुदवा रही हैं।
मैं बोला- सरीना जान, मेरा लण्ड तुम्हारी चूत के लिए पागल हो रहा है, जरा सीधी हो जा, एक बार चूत की सैर और करा दे !
सरीना बोली- चोद दो ! पीछे से चोद दो ! लो मैं चूत ढीली छोड़ती हूँ ! तुम घुसाओ !
सरीना थोड़ी उचक गई और उसने टाँगे फ़ैला दीं, बोली- चूत दिख रही है?
मैंने कहा- दिख तो रही है !
“तो घुसाओ ना ! चूतिया क्यों बने हुए हो?”
मैं लण्ड उसकी चूत में लगाने लगा लेकिन लण्ड घुस ही नहीं रहा था। सरीना बनावटी गुस्से से बोली- मादरचोद, भगवान अगले जन्म में लण्ड बिना पैदा करेगा। आठ इंच का रख कर भी चूत में नहीं घुसा पा रहा गाण्डू ? कमर पकड़ !
मैंने सरीना की कमर पकड़ ली, सरीना ने हाथ से लण्ड अपनी चूत के मुँह पर लगा लिया और बोली- अब तेजी से धक्का मार !
मैंने बिना देर किये उसकी कमर पकड़ कर उठाया और एक तेज झटके में लण्ड को चूत में मारा, सफलता मिली और लण्ड चूत में था। वाकई एक अनोखा मज़ा था ! उसकी चूचियां मैंने पकड़ ली।
सरीना बोली- ज्यादा शरीफ मत बनो, गालियाँ बकते हुए चोदो, वर्ना मेरे आलावा किसी की चोद भी नहीं पाओगे।
मैंने सरीना को गुरु मान लिया था, लण्ड को पेलते हुए मैंने गालियाँ बकनी शुरू कर दीं। थोड़ी देर में हम दोनों पूरे मज़े ले रहे थे, सरीना चिल्ला रही थी- ऊह आह ! मज़ा आ गया ! क्या मारी है बहन चोद ! तू तो आज से चूत का राजा बन गया है ! मार साली की भोंसड़ी बना ! सच अब तुझसे चुदने का मज़ा आ रहा है ! कुत्ते मार इस हरामिन चूत को ! साली बहुत तंग करती है।
मैं भी कुतिया, रंडी, साली, रंडी की औलाद, तेरी भोंसरी की मारूँ, लोंडी बकता हुआ सरीना को चोदने में लगा हुआ था। 5 मिनट की चुदाई के बाद मैं निढाल होकर लेट गया, सरीना भी मुझसे चिपक गई। चिपके चिपके हम एक दूसरे की चूची, चूत चुचकों और लण्ड से खेल रहे थे।
करीब एक घंटे बाद उठे तो मैं चौंकते हुए बोला- अरे बारह बज गए? कोई क्या सोचेगा?
सरीना मेरे गालों की पप्पी लेते हुए बोली- कोई कुछ नहीं सोचेगा ! सुबह वाले गार्ड की ड्यूटी नौ बजे बदल जाती है और किसी के पास इस मुंबई में इतना समय नहीं है कि हमारे बारे में सोचेगा।

मैं सरीना को चिपकाते हुए बोला- रानी, तुमने मस्त कर दिया ! अब यह बताओ कि क्या सरप्राइज़ दे रही हो?
सरीना बोली- इतनी मारी है मेरी ! कुछ इनाम तो दो !
मैंने बिना देखे हुए कल शाम को एक ठेकेदार जो लिफाफा दे गया था, वो पूरा उसे दे दिया।
उसने खोल कर देखा तो उसमें दस हजार थे, वो बोली- राजा, आपने मुझे खुश कर दिया ! सच राजा, मज़ा आ गया !
और उसने मेरे गालों पर 5-6 पप्पी दे डाली।
मैं बोला- सरप्राइज़ तो बता दो?
वो मेरे कान के पास मुँह लाकर बोली- दो दिन बाद मैं आपके लण्ड राजा को रूचि जी की चूत में घुमा कर लाऊँगी।
“सच रानी? मुझे विश्वास नहीं हो रहा है !”
सरीना बोली- दो दिन बाद हो जायेगा ! लेकिन मर्द बनकर चोदना, शरीफ बनकर नहीं ! कल मैं तुम्हें पूरा प्रोग्राम बताऊँगी।
उसके बाद सरीना चली गई। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि जिस रूचि की सोच सोच कर मैंने कई बार मुठ मार दी और जिसकी चूची तक मैंने नहीं दबाई, उसकी चूत में मेरा लण्ड दो दिन बाद सैर करेगा।
मैं सोचते सोचते नहाने चला गया और नहाते हुए सरसों के तेल से सरीना के कहे अनुसार लण्ड पर मालिश करने लगा।
अगले दिन सरीना फिर छः बजे आ गई। मैंने उससे प्रोग्राम पूछा, लेकिन उसने कहा- पहले आप मुझे आठ बजे तक चोदो बिना लण्ड झड़े ! तब मैं रूचि जी की चूत दिलवाऊँगी। मैंने रूचिजी को बता दिया है कि तुम दो घंटे तक चूत चोदोगे उनकी। उनके पति उन्हें दस मिनट से ज्यादा चोद नहीं पाते और चार महीने में एक बार मारते हैं, महीने में बीस दिन बाहर रहते हैं। मेरी चाल में तो 9-10 इंच लम्बे लण्ड वाले लोंडे हैं जो 6-6 घंटे तक चूत फाड़े रखते हैं लेकिन रूचि जी तुम्हें पसंद करती हैं और तुमसे ही चुदना चाहती हैं। अब तुम उन्हें एक घंटा भी नहीं चोद पाए तो मेरी इज्ज़त मिटटी में मिल जाएगी।
मैंने उसकी बात मान ली और चुदाई शुरू कर दी। सरीना ने मुझे पूरा सहयोग किया और 5-6 आसनों से मेरा लण्ड चूत में डलवाया। डेढ़ घंटे बाद मेरा लण्ड पहली बार झड़ा, इतनी देर तक मैं सरीना को इसलिए चोद पाया क्योंकि सरीना ने हर आसन के बाद मेरे लण्ड को 2-3 मिनट का आराम दिया और इस समय मैं मुझसे अपने संतरे और होंटों को चुसवाया।
इसके बाद सरीना ने लण्ड चूसा और उसे दुबारा खड़ा किया। एक बार फिर एक घंटे तक मेरे लण्ड ने उसकी चूत को बजाया।
सरीना मुस्कुराते हुए बोली- साहब, वाकई अब आप चोदना सीख गए हो ! अब दो दिन बाद रूचि जी की चूत पर आपका राज रहेगा और आप उनकी चूत जम कर बजाना।

सरीना ने अपना प्रोग्राम बताया। उसने बताया कि कल शाम दो बजे को अतुल नाम के एक सज्जन अपनी पड़ोसन रेखा के साथ आपके घर आयेंगे। जिसे वो 2 से 5 बजे आपके यहाँ चोदेंगे। .मैं भी 2बजे काम करने आऊँगी और आपके साथ रहूँगी। दो दिन बाद अँधेरी में उनके फ्लैट में आप रूचि जी के साथ अपनी कार से जायेंगे, जहाँ रूचि जी को आप चोदेंगे। रूचि जी अँधेरी के बाहर आपको मिल जाएँगी। लोकल स्टेशन से अपनी कार में रूचि को लेकर आप अतुल जी के यहाँ जायेंगे, वहाँ आपको मेरी सहेली उमा मिलेगी जो अतुल के यहाँ काम करती है। उमा ने ही अतुल को उनकी पड़ोसन की चूत दिलाई है। कोई दिक्कत होगी तो उमा मदद कर देगी। अब मैं रूचि जी के यहाँ काम करने जा रही हूँ, वहाँ फ़ोन से आपकी बात रूचि से कराऊँगी। जरा रंगीन बनकर बात करना, बड़ा मज़ा आएगा।
सरीना के जाने के थोड़ी देर बाद मेरे मोबाइल पर घंटी आई, सरीना बोल रही थी- लो रूचि जी से बात करो !
मेरे दिल की धड़कन जोरों पर थी, उधर से रूचि बोली- नमस्ते राजीव जी, सरीना बता रही थी आप मुझे बहुत पसंद करते हैं?
मैं बोला- सच रूचि जी, आप बहुत सुन्दर हैं और आपकी आवाज़ भी बहुत मधुर है।
“सच? और क्या क्या अच्छा लगता है?”
मैं बोला- सब कुछ !
“आप ठीक से बताइए न ! अब तो हम दोस्त हैं ना?”
मैंने कहा- सच बता दूँ?
रूचि सेक्सी ऊहं भरती हुई बोली- जल्दी बताइए न?
मैं बोला- मुझे सबसे अच्छे आपके संतरे लगते हैं ! सच, रस पीने का बड़ा मन करता है।
रूचि बोली- पी लीजिये ! लो, मैंने दोनों बाहर निकाल लिए हैं, पीजिये ना। आप पी रहे हैं ना?
“आह, बहुत मज़ा आ रहा है !” फ़ोन पर मैं सेक्सी आवाज़ निकलने लगा और बोला- रूचि जी। फ़ोन पर जब इतने रसीले लग रहे है तो सामने पीने पर कितने अच्छे लगेंगे !
रूचि बोली- आहा, सच, बहुत मज़ा आएगा जब आप असली में पीयेंगे ! अच्छा और क्या मन कर रहा है?
मैं बोला- मेरा घोड़ा आपकी सुरंग में घूमना चाह रहा है !
रूचि बोली- हो हो ! मतलब कि आप मेरी मारना चाहते हैं? आपका कितना लम्बा है?
मैं बोला- आठ इंच का है !

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