हमारी नौकरानी सरीना part 2

रूचि बोली- बाप रे ! आठ इंची? नहीं बाबा नहीं ! मेरी तो फट जाएगी ! दर्द भी खूब होगा और बदनाम हो जाऊँगी। 
मैं बोला- आप एक बार दें तो ! इतने प्यार से मारूँगा कि आप खुद ही कहेंगी कि एक बार और मारो ना ! 
रूचि बोली- सच? तो कब आप मेरी मार रहे हैं? सच बताऊँ, यह साली तो मुझे बहुत परेशान करे हुए है दो महीने से लण्ड-लण्ड चिल्ला रही है, आपकी बातों से पूरी गीली हो गई है। 
मैं अपना लण्ड निकाल कर हाथ में पकड़े हुआ था, लण्ड रूचि की बातें सुनकर टनक रहा था। सरीना उधर खड़ी हमारी बातें सुन रही थी, बोली- रूचि जी, आपकी सुरंग मैं गीली करा दूँगी ! 
और उसने अपनी पूरी योजना रूचि को बता दी। 
रूचि ऊहं भरती हुई बोली- राजीव जी, दो दिन तक इंतजार करना पड़ेगा ! प्यार से मारना आप ! सच में आज तो सो ही नहीं पाऊँगी ! अब डार्लिग, फ़ोन बंद कर दूँ? 
मैं बोला- एक पप्पी तो दे दो ! 
उधर से एक पुच की आवाज़ आई और फ़ोन बंद हो गया। मैंने भी अपना फ़ोन बंद कर दिया। 
मेरा लण्ड इस समय आसमान छू रहा था पर सरीना ने मुझे मुठ मारने के लिए मना किया था इसलिए बात करने के बाद मैं बाहर टहलने निकल गया। 
सरीना अगले दिन सुबह सात बजे काम पर आई, मैंने उसे पकड़ लिया और उसके गालों को चूमने लगा और बोला- सरीना, तूने तो कमाल कर दिया? 
सरीना बोली- देखते जाओ ! आज शाम को अतुल की पड़ोसन अतुल के साथ-साथ आप से भी चुदेगी। 
मैं बोला- लेकिन अतुल बुरा तो नहीं मानेगा? 
सरीना मेरे लण्ड को सहलाते हुए मुस्कुराई और बोली- इस खेल में सब जायज़ है ! अब यह सेक्स तेल लो और हर एक घंटे बाद इसकी मालिश करो ! दो बजे से आपका भी मैच है, मैं नहीं चाहती कि आप उसमें फेल हों ! 
सरीना ने अपनी चूचियों के बीच से निकाल कर सेक्स के तेल की शीशी मुझे दे दी। सरीना तेल निकाल कर मेरे लण्ड की मालिश करने लगी। उसके बाद लण्ड अपने मुँह में घुसाने से पहले बोली- आज चुदवाऊँगी नहीं ! शाम को टनटनाए रहना ! रेखा की चूत का बाजा बजाना है। 
सरीना ने बताया- अतुल की पड़ोसन रेखा अतुल से पिछले कई महीने से चुदवा रही है अतुल का लण्ड 5 इंच लम्बा है लेकिन दोनों को एक दूसरे से करवाने में मज़ा आता है। आज अतुल उसकी गाण्ड मारना चाहता है जिसके लिए मुझे उसकी मदद करनी पड़ेगी। तुम भी देखना कैसे उसकी गाण्ड मरवाती हूँ और तुम्हारा लण्ड उसकी चूत में भी डलवाऊँगी ! बस तुम जल्दबाजी मत करना ! 
सरीना ने मुझे एक पप्पी दी और बोली- मैं अतुल के साथ गाड़ी में आऊँगी, सोच-सोच कर मुठ मत मारना और इतना कह कर सरीना चली गई। 
मैं दो बजने का इंतजार करने लगा। 
कहानी का अगला भाग “रेखा- अतुल का माल” जल्दी ही आपको पढ़ने के लिए मिलेगा।

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