ससुरजी का प्यार – कंचन part 7

“बहु ये फच….फच…. की आवाज़ें कहां से आ रही हैं?” रामलाल बहु को चिढ़ाता हुआ बोला।

“इस्स….अआह….पिताजी ये तो अपने मूसल से पूछिये।”

“उस बेचारे को क्या पता बहु?”

“उसे नहीं तो किसे पता होगा पिताजी। इस्स्स….ज़ालिम कितनी बेरहमी से हमारी चूत को मार रहा है।”

“तुम्हारी चूत भी तो बहुत ज़ालिम है बहु। कितने दिनों से हमारी नींद हराम कर रखी थी। ऐसी चूत को चोदने में रहम कैसा? सच इसे तो आज हम फाड़ डालेंगे।” रामलाल ज़ोर ज़ोर से धक्के मारता हुआ बोला।

“हाय ! पिताजी, हमने कब कहा रहम कीजिये। औरत की चूत के साथ ज़िन्दगी में सिर्फ़ एक ही बार रहम किया जाता है और वो भी अगर चूत कुंवारी हो। उसके बाद अगर रहम किया तो फिर चूत दूसरा लंड ढुंढने लगती है। औरत की चूत तो बेरहमी से ही चोदी जाती है। अगर हमारी चूत ने आपको इतना तंग किया है तो फाड़ डालिये ना इसे। कौन रोक रहा है?”

कन्चन तो अब बिल्कुल रंडिओं की तरह बातें कर रही थी और हर धक्के का जबाब अपने चूतड़ ऊपर उचका के दे रही थी। अब तो ससुर और बहु के अंगों का मिलन हवा में हो रहा था। ससुर जी के धक्के से आधा लंड बहु की चूत में जाता और बहु के धक्के से बाकी बचा हुआ लंड जड़ तक बहु की प्यासी चूत में घुस जाता। कन्चन ने शर्म हया बिल्कुल छोड़ दी थी और खुल के चुदवा रही थी। फच…. फच….फच…. फच…. अआ….आआह। ..इइइइस्स्स्स………ऊऊइइइमआं …फच…फच……. बहु की चूत से इतना रस निकल रहा था कि उसकी घनी झांटें भी चूत के रस से चिपचिपा गयी थी। ससुर जी का मूसल जब जड़ तक बहु रानी की चूत में जाता और जब बहु और ससुर की झांटों का मिलन हो जाता तो ससुर जी की झांटें भी बहु की चूत के रस में गीली हो जाती। अब रामलाल पूरा ११ इन्च का लंड बाहर निकाल कर जड़ तक बहु की चूत में पेल रहा था। कन्चन ने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि इस उम्र में भी ससुर जी का लंड अपने दोनों बेटों से ज़्यादा तगड़ा और सख्त होगा और उसकी जवान चूत की ये हालत कर देगा। उसकी चूत के चारों तरफ़ चूत के रस में सनी झांटों का जंगल तो मानो एक दलदल बन गया था। कन्चन समझ गयी की ससुर जी चुदाई की कला में बहुत माहिर थे। हों भी क्यों ना। ना जाने कितनी लड़किओं को चोद चुके थे। अब कन्चन से रहा नहीं गया और उसने ससुर जी से पूछ ही लिया,

“आआहह……इस्स्स……आ….पिता जी, सच सच बताइये, आज तक आपने कितनी लड़किओं को चोदा है?”

“क्यों बहु तुम ये क्यों पूछ रही हो?” रामलाल बहु के विशाल चूतड़ों को सहलाता हुआ बोला।

“आप जिस तरह हमें चोद रहे हैं वैसे तो कोई काम कला में माहिर आदमी ही चोद सकता है। और अगर आपने ज़िन्दगी में सिर्फ़ सासु मां को ही चोदा होता तो आप काम कला में इतने माहिर नहीं हो सकते थे।”

“क्यों बहुत मज़ा आ रहा है बहु?”

“जी बहुत! आज तक किसी मर्द ने हमें ऐसे नहीं चोदा।”

“कितने मर्दों से चुदवा चुकी हो बहु?”

“धत! आप तो बड़े वो हैं पिताजी। बताइये ना प्लीज़। कितनी औरतों को चोद चुके हैं?”

रामलाल बहु के रसीले होंठों को चूमता हुआ बोला, “देखो बहु, तुम्हारी सासु मां तो अपनी चूत देती नहीं थी। हमारी जवानी भी वैसे ही बर्बाद हो रही थी जैसे तुम्हारी जवानी बर्बाद हो रही है। हमें लाचार हो कर अपने बदन की प्यास बुझाने के लिये खेतों में काम करने वाली औरतों का सहारा लेना पड़ा।”

“हाय….तो आपने खेतों में काम करने वाली औरतों को चोदा? कितनों को चोदा?” कन्चन ज़ोर से चूतड़ उचका के ससुर जी का लंड अपनी चूत में पेलते हुए बोली।

“ये ही कोई बीस औरतों को।”

“हाय राम! बीस को! उनमें से कुन्वारी कितनी थी?”

“बहु लड़की कुन्वारी हो तो इसका मतलब ये नहीं की उसकी चूत भी कुन्वारी है।”

“जी हमारा मतलब है उनमे से कितनों की चूत कुन्वारी थी।”

“तीन की।”

“सच, फाड़ ही डाली होगी आपके इस मूसल ने।”

“नहीं बहु ऐसा नहीं है। तुम्हारी सासु मां की जो हालत हुई थी उसके बाद से हम बहुत सम्भल गये थे। लेकिन फिर भी बहुत खून खराबा हो गया था। बेचारी थी भी १७ या १८ साल की। इतना ध्यान से चोदने के बाद भी तीनों ही बेहोश हो गयी थी।”

“उसके बाद से तो उन्होनें आपसे कभी नहीं चुदवायी होगी।”

“नहीं बहु उनमें से एक ही ऐसी थी जिसे हमने अगले चार साल तक खूब चोदा।”

“कौन थी वो पिताजी?” कन्चन जानते हुए भी अन्जान बन रही थी।

“देखो बहु ये राज़ हम आज सिर्फ़ तुम ही को बता रहे हैं। वो हमारी साली यानी तुम्हारी सासु मां की सगी बहन थी।”

“हाय राम! पिताजी आपने अपनी साली तक को नहीं छोड़ा? चार साल में तो चौड़ी हो गयी होगी उसकी चूत।” कन्चन अपनी चूत से रामलाल का लंड दबाते हुए बोली।

“उसे तो सिर्फ़ चार साल चोदा था बहु, लेकिन अगर तुम चाहोगी तो हम तुम्हें ज़िन्दगी भर चोद सकते हैं। अपनी जवानी बर्बाद ना करो”

“बर्बाद क्यों होगी हमारी जवानी। अब आपके हवाले जो कर दी है। ज़िन्दगी भर चोद के तो आप का ये गधे जैसा मूसल हमारी चूत को कुआं बना देगा।” कन्चन बेशर्मी से चूतड़ उचकती हुई बोली। ससुर जी को बहु को चोदते अब करीब एक घन्टा हो चला था। कन्चन के पसीने छूत गये थे लेकिन रामलाल झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।

अचानक रामलाल बहु की चूत से लंड बाहर निकालता हुआ बोला, “बहु अब हम तुम्हें एक दूसरी मुद्रा में चोदेंगे।”

“वो कैसे पिताजी?”कन्चन रामलाल के मोटे, काले, चूत के रस में चमकते हुए लंड का भयन्कर रूप देख के कांप उठी।

“तुमने कुत्ते और कुतिआ को तो चुदाई करते देखा है?”

“जी…”

“बुस कुतिआ बन जाओ। हम तुम्हारी चूत कुत्ते की तरह पीछे से चोदेंगे।”

“हाय राम! पिता जी…! अपनी बहु को पहले रंडी और अब कुतिआ भी बन डाला।”

“कभी कुतिआ बन के चुदवाई हो बहु?”

“इन्होनें तो हमें औरत की तरह भी नहीं चोदा, कुतिआ बनाना तो दूर की बात है। लेकिन आज हम आपकी कुतिआ ज़रूर बनेंगे।” ये कह कर कन्चन कुतिआ बन गयी। उसने अपनी छाती बिस्तर पे टिका दी और घुटनों के बल हो कर टांगें चौड़ी कर ली और बड़े ही मादक ढंग से अपने विशाल चूतड़ों को ऊपर की ओर उचका दिया। इस मुद्रा में बहु के विशाल चूतड़ों और मांसल जांघों के बीच में से घनी झांटों के बीच बहु की फूली हुई चूत साफ़ नज़र आ रही थी। रामलाल के मोटे लंड की चुदाई के कारण चूत का मुंह खुल गया था और बहुत ही सूजी हुई सी लग रही थी। बहु के गोरे गोरे मोटे मोटे चूतड़ और उनके बीच से झांकता गुलाबी छेद देख कर तो रामलाल के मुंह में पानी आ गया। रामलाल से ना रहा गया। उसने अपने मूसल का सुपाड़ा बहु की चूत के खुले हुए मुंह पे टिका दिया और एक ज़बर्दस्त धक्का लगा दिया। चूत इतनी गीली थी कि एक ही धक्के में ११ इन्च लम्बा लंड जड़ तक बहु की चूत में समा गया।

“आआआआह्ह्ह्ह्ह…..उइइइइइइई माआआआआ…… हाय राम..पिता जी….. मार डाला। इस्स्स्स्स्स्स…………कुत्ते भी इतने ही बेरहम होते हैं क्या?”

“हां मेरी जान, तभी तो कुतिआ को मज़ा आता है।”

रामलाल ने अब बहु के चूतड़ पकड़ के ज़ोर ज़ोर से धक्के मारना शुरु कर दिया था। बहु भी चूतड़ उचका उचका के ससुरजी के धक्कों का जबाब दे रही थी। इस मुद्रा में बहु के मुहं और चूत दोनों ही और भी ज़्यादा आवाज़ कर रहे थे। बहु अपने चूतड़ पीछे की ओर उचका उचका के ससुर जी के लंड का स्वागत कर रही थी। बहु की चूत का रस अब रामलाल के सांड की तरह लटकते टट्टों को पूरी तरह गीला कर चुका था। कन्चन अब तक दो बार झड़ चुकी थी लेकिन रामलाल झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।

कन्चन ने अपने चूतड़ ज़ोर से पीछे की ओर उचका के रामलाल का मूसल जड़ तक अपनी चूत में पेलते हुए पूछा, “पिताजी आप हमें कुतिआ बना के चोद रहे हैं, कहीं चुदाई के बाद कुत्ते की तरह आपका लंड हमारी चूत में तो नहीं फंसा रह जाएगा?”

“फंसा रह भी गया तो क्या हो जाएगा बहु?”

“हमें तो कुछ नहीं पिताजी, लेकिन जब सासु मां शाम को वापस आके आपको हमारे ऊपर कुत्ते की तरह चढ़ा हुआ देखेंगी और आपका मूसल हमारी चूत में फंसा हुआ देखेंगी तो आपके पास क्या जवाब होगा?”

“कह देंगे की एक कुत्ता तुम्हारी बहु को चोदने की कोशिश कर रहा था। इससे पहले की वो तुम्हारी बहु की चूत में अपना लंड पेलता, उस कुत्ते से बचाने के लिये हमें अपना लंड बहु की चूत में पेलना पड़ा। आखिर जो कुछ किया बहु को बचाने के लिये ही तो किया।”

“अच्छा जी! और अगर वो पूछें की बहु नंगी कैसे हो गयी तो?”

“तो क्या? कह देंगे बहु नहाने जा रही थी कि एक बहुत बड़ा कुत्ता बहु को नंगी देख के खिड़की से खूद के अन्दर आ गया और उसे गिरा के उसके ऊपर चढ़ कर चोदने की कोशिश करने लगा।”

“और वो पूछें की आपको अपना लंड हमारी चूत में पेलने की क्या ज़रूरत थी, तो?”

“अरे भई ये तो बहुत सिम्पल बात है। अगर बहु की चूत में लंड पेल के हमने बहु का छेद बन्द ना किया होता तो वो कुत्ता उस छेद में अपना लंड पेल देता। हमने तो सिर्फ़ अपने घर की इज़्ज़त बचा ली।”

“हां… आपके पास तो सब चीज़ों का जबाब है।” कन्चन अपने चूतड़ उचका के रामलाल का पूरा लंड अपनी चूत में लेती हुई बोली।

अब रामलाल ने कन्चन के चूतड़ पकड़ के ज़ोर ज़ोर से धक्के मारना शुरु कर दिया। उसने बहु के गोरे गोरे चूतड़ों को दोनों हाथों में पकड़ के फैला दिया था ताकि उनके बीच में गुलाबी रंग के छोटे से छेद के दर्शन कर सके। आखिर बहु के इन विशाल चूतड़ों ने ही तो उसकी नींद हराम कर रखी थी। बहु का गुलाबी छेद देख कर उसके मुहं में पानी आ रहा था। उसका मन कर रहा था की नीचे झुक के उस गुलाबी छेद को चूम ले। रामलाल जानता था कि यहां बहु की गांड मारना खतरे से खाली नहीं था। बहु का चिल्लाना सुन के पूरा मुहल्ला जमा हो सकता था। अगर उसका मूसल नहीं झेल पायी और बेहोश हो गयी तुब तो और भी मुसीबत हो जाएगी। लेकिन उसने सोच लिया था कि वो बहु को खेतों में ले जा के उसकी गांड ज़रूर मारेगा।

उधर कन्चन बड़ी अच्छी तरह समझ रही थी कि जिस तरह ससुर जी ने उसके चूतड़ों को फैला रखा था, उन्हें उसकी गांड के दर्शन हो रहे होंगे। उसके सेक्सी चूतड़ों को देख के मर्द के दिल में क्या होता है वो भी वो अच्छी तरह जानती थी। वो मन ही मन सोच रही थी कि ससुर जी कभी ना कभी तो उसकी गांड ज़रूर मारेंगे। इतना मोटा और लम्बा मूसल तो उसकी गांड फाड़ ही डालेगा। रामलाल से अब और नहीं रहा गया। उसने अपना ११ इन्च का लंड बहु की चूत से बाहर खींच लिया और नीचे झुक के अपना मुंह बहु के फैले हुए विशाल चूतड़ों के बीच में दे दिया। रामलाल पागलों की तरह बहु की गांड के गुलाबी छेद को चाटने लगा और अपनी जीभ कभी कभी छेद के अन्दर घुसेड़ देता।

“इस्स्स्स………आआआह…….आआअहहहह………इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स पिता जी ये आप क्या कर रहे हैं? वहां तो गंदा होता है।”

“चुदाई के खेल में कुछ गंदा नहीं होता । तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा बहु?”

“जी अच्छा तो बहुत लग रहा है, लेकिन….”

“लेकिन क्या? मज़ा तो आ रहा है ना? सच तुम्हारी गांड बहुत ही स्वादिष्ट है।”

“हटिये भी पिताजी, वो कैसे स्वादिष्ट हो सकती है? वहां से तो…”

“हमें पता है बहु वहां से तुम क्या करती हो। आज तक इस छेद से तुमने सिर्फ़ बाहर निकालने का काम किया है, कुछ अन्दर नहीं लिया।”

“हाय राम! उस छेद से अन्दर क्या लिया जाता है?”

“बहु जब ये लंड तुम्हारे पीछे वाले छेद में जाएगा तुब देखना कितना मज़ा आएगा।”

“हाय राम! पीछे वाले छेद में भी लंड डाला जाता है क्या?” कन्चन बनती हुई बोली।

“हां बहु, औरत के तीन छेद होते हैं और तीनों ही चोदे जाते हैं। औरत की सिर्फ़ चूत ही नहीं गांड भी मारी जाती है। औरत को मर्द का लंड भी चूसना चहिये। जिस औरत के तीनों छेदों में मर्द का लंड ना गया हो वो अपनी जवानी का सिर्फ़ आधा ही मज़ा ले पाती है।”

“बाप रे ! ये गधे जैसा लंड उस छोटे से छेद में कैसे जा सकता है? सच ये तो हमारे छेद को फाड़ ही डालेगा। ना बाबा ना हमें नहीं लेना ऐसा मज़ा।”

“अरे बहु इतना घबराती क्यों हो? हम तो सिर्फ़ तुम्हारे इस गुलाबी छेद को प्यार कर रहे हैं, तुम्हारी गांड तो नहीं मार रहे।”

“आअहह बहुत मज़ा आ रहा है। आअह…आआइइइइई… जीभ अन्दर डाल दीजिये, प्लीज़…..”

रामलाल बड़ी तेज़ी से अपनी जीभ बहु की गांड के अन्दर बाहर कर रहा था और उस गुलाबी छेद के चारों ओर चाट रहा था। कन्चन अब और नहीं सह पायी और एक बार फिर झड़ गयी।

“पिता जी हम तो अब तक तीन बार झड़ चुके हैं और आप हैं की झड़ने का नाम ही नहीं ले रहे। अब प्लीज़ हमें चोदिये और हमारी प्यासी चूत को अपने वीर्य से भर दीजिये।”

“ठीक है बहु जैसा तुम चाहो। आज पहले तुम्हारी प्यासी चूत को तृप्त कर दें। बाद में तो तुम्हें काम कला के कई गुर सिखाने हैं।”

“ठीक है गुरु जी! अब तो प्लीज़ हमारी चूत चोदिये और इसकी बरसों की प्यास बुझा दीजिये। हम कहीं भाग तो रहे नहीं, रोज़ आप से चुदाई के नये नये तरीके सीखेंगे।”

रामलाल ने बहु की गांड में से अपनी जीभ निकाली और फिर से अपने लंड का सुपाड़ा कुतिआ बनी बहु की फूली हुई चूत पे टिका दिया और एक ही धक्के में फच की आवाज़ के साथ जड़ तक पेल दिया। अब रामलाल बहु के दोनों चूतड़ों को पकड़ के ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा। करीब बीस मिनट तक बहु की चूत की अपने मूसल से पिटाई करने के बाद बरसों से अपने बाल्स में इकट्ठा किया हुआ वीर्य बहु की चूत में उड़ेल दिया। बहु को तो जैसे नशा सा आ रहा था। उसकी चूत ससुर जी के गरमा गरम वीर्य से लबालब भरी गयी थी और अब तो वीर्य चूत में से निकल कर बिस्तर पे भी टपक रहा था। रामलाल ने बहु की चूत में से अपना मूसल बाहर खींचा और बहु के बगल में लेट गया। बहु भी निढाल हो के बिस्तर पे लुढ़क गयी थी। तीन घन्टे से चल रही इस भयन्कर चुदाई से उसके अंग अंग में मीठा मीठा दर्द हो रहा था।

रामलाल ने बहु से पूछा, “बहु, कुछ शान्ति मिली?”

“जी, आज तो तृप्त हो गयी।”

“चलो उठो, तुम्हारी सासु मां के आने का टाईम हो रहा है। नहा धो लो, कहीं उन्हें शक ना हो जाए।”

“जी ठीक है।”

कन्चन बिस्तर से उठी और गिरते गिरते बची। वीर्य उसकी चूत से निकल के जांघों पे बह रहा था। उसकी टांगें कांप रही थी। रामलाल ने जल्दी से उठ के बहु को सहारा दिया। बहु तो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। रामलाल बहु को ले के बाथरूम में गया और उसे एक स्टूल पे बैठा दिया। उसके बाद उसने बहु की टांगें फैला दी और पानी से चूत की सफ़ाई करने लगा। बहु की घनी झांटें ससुर के वीर्य में सनी हुई थी। कन्चन को अपनी सुहाग रात याद आ गयी जब इसी तरह उसके पति ने उसकी चूत की सफ़ाई की थी। आज वही काम ससुर जी कर रहे थे। फर्क सिर्फ़ इतना था कि सुहाग रात को उसकी कुंवारी चूत की दुर्दशा हुई थी और आज ससुर जी के मूसल ने उसकी कई बार चुदी हुई चूत की भी वैसी ही दुर्दशा कर दी जैसी सुहाग रात को हुई थी। चूत साफ़ करने के बाद ससुरजी ने कन्चन के ऊपर पानी डाल के उसे नहलाना शुरु कर दिया। ठन्डा ठन्डा पानी पड़ने से कन्चन के शरीर में जान आई। कन्चन ने भी ससुर जी के लंड को पानी से साफ़ किया जो उसकी चूत के रस में बुरी तरह सना हुआ था। इस तरह बहु और ससुर ने एक दूसरे को नहलाया।

रामलाल ने उसके बाद कन्चन को कहा, “बहु जाओ सासु मां के आने से पहले थोड़ा आराम कर लो।”

“ठीक है पिता जी।” कन्चन अपने कमरे में चली गयी। बिस्तर में लेटते ही उसकी आंख लग गयी। तीन घन्टे की चुदाई से वो बहुत थक गयी थी। सासु मां के आने से पहले वो करीब एक घंटा घोड़े बेच के सोयी।

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