ससुरजी का प्यार – कंचन part 6

“लेकिन पिता जी वो तो ऐसा कुछ भी नहीं करते।”

“तुम्हारा मतलब वो तुम्हें नंगी तक नहीं करता?”

“जी नहीं।” कन्चन शर्माते हुए बोली।

“तो फिर?”

“फिर क्या?”

“तो फिर कैसे चोदता है वो हमारी प्यारी बहुरानी को?”

“बस पेटिकोट ऊपर उठा के….”

“बहुत ही नालायक है। लेकिन उसका लंड बड़ा तो है न?”

“जी वो तो खासा लम्बा और मोटा है।”

“उस गधे के लंड जैसा? तब तो हमारी बहु की तृप्ति कर देता होगा।”

“हाय…! उस गधे के जितना तो किसी का भी नहीं हो सकता, और फिर सिर्फ़ बड़ा होने से कुछ नहीं होता। मर्द को भी तो औरत को तृप्त करने की कला आनी चाहिये। वो तो अक्सर पैंटी भी नहीं उतारते, बस साईड में करके ही कर लेते हैं।”

“ये तो गलत बात है। ऐसे तो हमारी बहु की प्यास शान्त नहीं हो सकती। लेकिन बहु तुम्हें ही कुछ करना चाहिये। अगर औरत काम कला में माहिर ना हो तो मर्द दूसरी औरतों की ओर भागने लगता है। बीवी को बिस्तर में बिल्कुल रंडी बन जाना चाहिये तभी वो अपने पति का दिल जीत सकती है।”

“आपकी बात सही है पिताजी, हम तो सब कुछ करने के लिये तयार हैं। लेकिन मर्द अपनी बीवी के साथ जो कुछ भी करना चाहता है उसके लिये पहल तो उसे ही करनी होती है ना। वो जो भी करना चाहें हम तो हमेशा उनका साथ देने के लिये तैयार हैं।”

“हमें लगता है की हमारी बहु प्यासी ही रह जाती है। क्यों सही बात है?”

“जी।”

“कहो तो हम उसे समझाने की कोशिश करें? ऐसा कब तक चलेगा ?”

“नही नहीं पिताजी, उनसे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है।”

“तो फिर ऐसे ही तड़पती रहोगी बहु?”

“और कर भी क्या सकते हैं?”

रामलाल को अब विश्वास हो गया था कि उसका बेटा बहु के जिस्म की प्यास को नहीं बुझा पता है। इतनी खूबसूरत जवानी को इस तरह बर्बाद करना तो पाप है। अब तो उसे ही कुछ करना होगा। कन्चन फिर से रामलाल की टांगों की मालिश करने लगी। कन्चन का मुंह अब रामलाल की ओर था। बार बार इस तरह से झुकती की उसकी बड़ी बड़ी चूचिआं और ब्रा रामलाल को नज़र आने लगते। रामलाल अच्छी तरह जानता था कि आज सुनेहरा मौका था। लोहा भी गरम था। आज अगर बहु की जवानी लूटने में कामयाब हो गया तो ज़िन्दगी बन जाएगी। रामलाल का लंड बुरी तरह फनफनाया हुआ था, और टाईट लंगोट की साईड में से आधा बाहर निकल आया था और उसकी जांघ के साथ सटा हुआ था।

रामलाल बोला, “देखो बहु तुम चाहती हो तुम्हारी जवानी की आग ठंडी हो?”

“जी कौन औरत नहीं चाहती?”

“हम तुम्हारे ससुर हैं। तुम्हारी जवानी की आग को ठंडा करना हमारा धर्म है। हमें ही कुछ करना होगा।”

“आप क्या कर सकते हैं पिताजी? हमारी किस्मत ही ऐसी है।” कन्चन एक ठंडी सांस लेते हुए रामलाल की जांघ पे तेल लगती हुई बोली।

“ऐसा ना कहो बहु। अपनी किस्मत तो अपने हाथ में होती है। अरे बहु, तुमने हमारी कमर से ले के टांगों तक तो मालिश कर दी लेकिन एक जगह तो छोड़ ही दी।”

“कौन सी ?”

“अरे धोती के नीचे भी बहुत कुछ है। वहां भी मालिश कर दो।”

“जी वहां…?”

“भई नहीं करना चाहती हो तो कोई बात नहीं हम वहां कमला से मालिश करवा लेंगे।”

“नहीं नहीं पिताजी कमला से क्यों? हम हैं ना।” कन्चन ने शर्माते हुए रामलाल की धोती ऊपर कर दी। नीचे का नज़ारा देख के उसका दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा। कसे हुए लंगोट का उभार देखने लायक था। कन्चन ने लंगोट वाले इलाके को छोड़ के लंगोट के चारों ओर मालिश कर दी।

“लीजिये पिताजी वहां भी मालिश कर दी।”

“बहु वहां तो अभी और भी बहुत कुछ है।”

“और तो कुछ भी नहीं है।”

“ज़रा लंगोट के नीचे तो देखो बहुत कुछ मिलेगा।”

“हाय…..! लंगोट के नीचे! वहां तो आपका वो है। हमें तो बहुत शरम आ रही है।”

“शरम कैसी बहु? तुम तो ऐसे शर्मा रही हो जैसे कभी मर्द का लंड नहीं देखा।”

“जी किसी पराए मर्द का तो नहीं देखा ना।”

“अच्छा तो तुम हमें पराया समझती हो?”

“नहीं नहीं पिता जी ऐसी बात नहीं है।”

“अगर ऐसी बात नहीं है तो इतना शर्मा क्यों रही हो? वो तुम्हें काटेगा नहीं। चलो लंगोट खोल दो ओर वहां की भी मालिश कर दो।”

“जी हम तो आपकी बहु हैं। हम आपके उसको कैसे हाथ लगा सकते हैं?”

“ठीक है बहु कोई बात नहीं, वहां की मालिश हम कमला से करवा लेंगे।”

“नहीं नहीं पिताजी ये आप क्या कह रहे हैं? किसी परायी औरत से तो अच्छा है हम ही वहां की मालिश कर दें।”

“तो फिर शर्मा क्यों रही हो बहु?” ये कहते हुए रामलाल ने बहु का हाथ पकड़ के लंगोट पे रख दिया। लंगोट के ऊपर से ससुर जी के मोटे लंड की गर्माहट से कन्चन कांप गयी। कांपते हुए हाथों से कन्चन ससुर जी का लंगोट खोलने की कोशिश कर रही थी। आखिर आज ससुर जी का लंड देखने की मुराद पूरी हो ही जाएगी। जैसे ही लंगोट खुला रामलाल का लंड लंगोट से अज़ाद होके एक झटके के साथ तन के खड़ा हो गया। ११ इन्च के लम्बे मोटे काले लंड को देख के कन्चन के मुंह से चीख निकल गयी।

“ऊइई माआआआ….ये क्या है..?”

“क्या हुआ बहु…?”

“जी..इतना लम्बा…”

“नहीं पसन्द आया?”

“जी वो बात नहीं है। मर्द का इतना बड़ा भी हो सकता है? सच पिताजी ये तो बिकुल उस गधे के जैसा है। अब समझी सासु मां आपको क्यों गधा कहती हैं।”

“घबराओ नहीं बहु हाथ लगा के देख लो। काटेगा नहीं।” कन्चन मन ही मन सोचने लगी काटेगा तो नहीं लेकिन मेरी चूत ज़रूर फाड़ देगा। बाप का लंड तो बेटों के लंड से कहीं ज़्यादा तगड़ा निकला कन्चन उस फौलादी लौड़े को सहलाने के लिये बेचैन तो थी ही। उसने ढेर सारा तेल अपने हाथ में ले के रामलाल के तने हुए लौड़े पे मलना शुरु कर दिया। ना जाने कितनी चूतों का रस पी के इतना मोटा हो गया था। क्या भयन्कर सुपाड़ा था। मोटा लाल हथोड़े जैसा। कुन्वारी चूत के लिये तो बहुत खतरनाक हो सकता था। कन्चन को दोनों हाथों का इस्तेमाल करना पड़ रहा था, फिर भी रामलाल का लौड़ा उसके हाथों में नहीं समा रहा था। इतना मोटा था कि दोनों हाथों से उसकी मोटाई नापनी पड़ी। जब जब कन्चन का हाथ लंड पे मालिश करते हुए नीचे की ओर जाता, लंड का मोटा लाल सुपाड़ा और भी ज़्यादा भयन्कर लगने लगता।

“पिता जी एक बात पूछुं? बुरा तो नहीं मानेंगे?”

“नहीं बहु ज़रूर पुछो।”

“जी सासु मां तो आपसे बहुत खुश होंगी?”

“वो क्यों?” रामलाल अन्जान बनता हुआ बोला।

“इतना लम्बा और मोटा लौड़ा पा कर के कौन औरत खुश नहीं होगी?”

“अरे नहीं बहु ये ही तो हमारी बदकिस्मती है। बस एक गलती कर बैठे, उसका फल अभी तक भुगत रहे हैं।”

“कैसी गलती पिताजी?”

“अरे बहु सुहाग रात को जोश जोश में कुछ ज़्यादा ज़ोर से धक्के मार दिये और पूरा लंड तुम्हारी सासु मां की चूत में पेल दिया। तुम्हारी सासु मां तो कुन्वारी थी। झेल नहीं सकी। बहुत खून खराबा हो गया था। बेचारी बेहोश हो गयी थी। बस उसके बाद से मन में इतना डर बैठ गया की आज तक चुदवाने से डरती है। बड़ी मिन्नत करके ६ महीने में एक बार चोद पाते हैं, उसके बाद भी आधे से ज़्यादा लंड नहीं डालने देती।”

“ये तो गलत बात है। पति की ज़रूरत पूरी करना तो औरत का धर्म होता है। कोशिश करती तो कुछ दिनों में सासु मां की आदत पड़ जाती।”

“क्या करें हमारी दास्तान भी कुछ तुम्हारे जैसी है।”

“ओह ! फिर तो आप भी हमारी तरह प्यासे हैं।”

“हां बहु। सासु मां को तो हमारा पसन्द नहीं आया लेकिन तुम्हें हमरा लंड पसन्द आया या नहीं?”

“जी ये तो बहुत प्यारा है। इतना बड़ा तो औरत को बड़े नसीब से मिलता है। सच, हमें तो सासु मां से जलन हो रही है।” कन्चन बड़े प्यार से रामलाल के लौड़े को सहलाते हुए बोली। उसने फिर से अपना मुंह रामलाल की टांगों की ओर और चूतड़ रामलाल के मुंह की ओर कर रखे थे। लंड और टांगों की मालिश करने के बहाने वो आगे की ओर झुकी हुई थी और चूतड़ रामलाल की ओर उचका रखे थे।

“अरे इसमें जलन की क्या बात है? आज से ये तुम्हारा हुआ।” रामलाल बहु के चूतड़ों पे हाथ फेरता हुआ बोला।

“जी मैं आपका मतलब समझी नहीं।”

“देखो बहु, हमसे तुम्हारी बर्बाद होती ये जवानी देखी नहीं जाती। हमारे रहते हमारी प्यारी बहु तड़पती रहे ये तो हमारे लिये शर्म की बात है। आखिर हम भी तो मर्द हैं। हमारे पास भी वो सब है जो तुम्हारे उस नालायक पति के पास है। अब हमें ही अपनी बहु की प्यास बुझानी पड़ेगी।” रामलाल का हाथ पेटिकोट के ऊपर से ही बहु के विशाल चूतड़ों की दरार में से होता हुआ उसकी चूत पे आ गया।

“हाय….! पिता जी ये आप क्या कह रहे हैं? आपका मतलब आप हमें….अपनी बहु को..?”

“हां बहु हम अपनी बहु को चोदेंगे। तुम्हारी इस जवानी को एक मोटे तगड़े लौड़े की ज़रूरत है। हमारी टांगों के बीच में अब भी बहुत दम है।” रामलाल का हाथ अब धीरे धीरे बहु की टांगों के बीच उसकी फुली हुई चूत को पेटिकोट और पैंटी के ऊपर से ही सहला रहा था।

“पिता जी..! प्लीज़..! ऐसा नहीं कहिये। हम आपके जज्बात समझते हैं लेकिन आखिर हम आपकी बहु हैं। आपके बेटे की पत्नी हैं। आपकी बेटी के समान हैं।” कन्चन रामलाल के बड़े बड़े टट्टों को सहलाती हुई बोली।

“ये सब सही है। तुम हमारी बहु हो, हमारी बेटी के समान हो। तभी तो हमारा फर्ज़ है कि हम तुम्हें खुश रखें। कोई गैर औरत होती तो हमें चिन्ता करने की कोई ज़रूरत नहीं थी। लेकिन अपनी ही बहु के साथ ऐसा अत्याचार हो ये हमें मन्ज़ूर नहीं।” रामलाल ने ये कहते हुए बहु की चूत को अपनी मुट्ठी में भर के दबा दिया।

“इस्स्स्स्स…… अआह..छोड़िये ना पिताजी, आपने तो फिर पकड़ ली हमारी। सोचिये बेटी के समान बहु के साथ ऐसा करना पाप नहीं होगा?” कन्चन ने अपनी चूत छुड़ाने की कोई कोशिश नहीं की। बल्कि टांगें इस प्रकार चौड़ी कर ली की रामलाल अच्छी तरह उसकी चूत पकड़ सके।

रामलाल बहु की चूत को और भी ज़ोर से मसलता हुआ बोला, “तो क्या ये जानते हुए भी की बेटी के समान बहु की चूत प्यासी है हम चुप बैठे रहें? जब बहु मायका छोड़ के ससुराल आती है तो ससुराल वालों का फर्ज़ बनता है की वो अपनी बहु की सब ज़रूरतों का ख्याल रखें।”

“लेकिन हमने तो आपको पिता के समान माना है, अब आपके साथ ये सब कैसे कर सकते हैं।”

“ठीक है बहु, अगर हमारे साथ नहीं कर सकती तो कोई बात नहीं हम गावं में एक ऐसा तगड़ा मर्द ढूंढ लेंगे जिसका लंड हमारी तरह लम्बा हो और जो हमारी बहु को अच्छी तरह चोद के उसके जिस्म की प्यास बुझा सके। बोलो ये मन्ज़ूर है?”

“हाय राम!…..ये क्या कह रहे हैं? किसी दूसरे से तो अच्छा है कि आप ही…” कन्चन दोनों हाथों से अपना मुंह छुपाती हुई बोली।

“इसमे शर्माने की क्या बात है? बोलो क्या कहना चाहती हो बहु?” रामलाल ने अब अपना हाथ बहु के पेटिकोट के अन्दर डाल दिया था और उसकी जांघें सहला रहा था।

“जी। हमारा मतलब था की अगर इतनी ही मजबूरी हो जाए तो घर की इज़्ज़त तो घर में रहनी चाहिये। किसी गैर मर्द को हम अपनी जवानी कैसे दे सकते हैं? हमारी इज़्ज़त घर वालों के पास ही रहेगी।”

“तो तुम हमें तो गैर नहीं समझती हो?”

“नहीं नहीं, पिताजी आप गैर कैसे हो सकते है?”

“सच बहु तुम जितनी खूबसूरत हो उतनी ही समझदार भी हो। घर की इज़्ज़त घर में ही रहनी चाहिये। तुम्हारी सब ज़रूरतें घर में ही पूरी की जा सकती हैं। हम इस बात का पूरा ध्यान रखेंगे कि तुम्हें किसी गैर मर्द के लंड की ज़रूरत ना महसूस हो।” रामलाल समझ गया था की बहु भी वासना की आग में जल रही है क्युंकि उसकी कच्छी उसकी चूत के रस से बिल्कुल भीग चुकी थी। लेकिन अपने ससुर से चुदवाने में झिझक रही थी। बहु की झिझक दूर करने के लिये उसे शुरु में थोड़ी ज़ोर ज़बर्दस्ती करानी पड़ेगी। लोहा गरम है, अगर अभी इस सुनहरे मौके का फयदा नहीं उठाया तो फिर बहु को नहीं चोद पायेगा। लेटे लेटे तो कुछ कर पाना मुश्किल था। रामलाल उठ के खड़ा हो गया।

“क्या हुआ पिता जी आप कहां जा रहे हैं?”

“कहीं नहीं बहु, अब तुम ठीक से सब जगह तेल लगा दो।”

रामलाल के खड़े होते ही उसकी धोती और लंगोट नीचे गिर गये। अब वो बिल्कुल नंगा बहु के सामने खड़ा था। उसका तना हुआ ११ इन्च का मोटा काला लंड बहुत भयन्कर लग रहा था। ये नज़ारा देख के कन्चन की तो सांस ही गले में अटक गयी। उसने खड़े हुए ससुर जी की टांगों में तेल लगाना शुरु किया। ससुर जी का तना हुआ लौड़ा उसके मुंह से सिर्फ़ कुछ इन्च ही दूर था। कन्चन का मन कर रहा था की उस मोटे मूसल को चूम ले।

“बहु थोड़ा हमारी छाती पे भी मालिश कर दो।”

ससुर जी की छाती पे मालिश करने के लिये कन्चन को भी खड़ा होना पड़ा। लेकिन ससुर जी का तना हुआ लंड उसे नज़दीक नहीं आने दे रहा था।

वो ससुर जी को छेड़ते हुए हंसती हुई बोली, “पिता जी, आपका गधे जैसा वो तो हमें नज़दीक आने ही नहीं दे रहा, आपकी छाती पे कैसे मालिश करें?”

“तुम कहो तो काट दें इसे बहु?”

“हाय राम! ये तो इतना प्यारा है। इसे नहीं काटने देंगे हम।” कन्चन ससुरजी के लौड़े को बड़े प्यार से सहलाती हुई बोली।

“तो फिर हमें कुछ और सोचना पड़ेगा।”

“हां पिताजी कुछ करिये ना। आपका ये तो बहुत परेशान कर रहा है।”

“ठीक है बहु, हम ही कुछ करते हैं।” ये कहते हुए रामलाल ने बहु के पेटिकोट का नाड़ा खींच दिया। नाड़ा खुलते ही पेटिकोट बहु की टांगों में गिर गया। दूसरे ही पल रामलाल ने बहु की बगलों में हाथ डाल के उसे ऊपर उठा लिया और खींच के अपनी बाहों में जकड़ लिया। इससे पहले की कन्चन की कुछ समझ में आता, उसने अपने आप को ससुर जी की छाती से चिपका पाया। वो सिर्फ़ ब्लाउज और पैंटी में थी। उसका पेटिकोट पीछे ज़मीन पे पड़ा हुआ था। ससुर जी का विशाल लंड उसकी टांगों के बीच ऐसे फंसा हुआ था जैसे वो उसकी सवारी कर रही हो।

“ऊई माआआ… पिताजीईईई….. ये आपने क्या किया? छोड़िये ना हमें।” कन्चन अपने आप को छुड़ाने का नाटक करती हुई बोली।

“तुम ही ने तो कहा था की हमारा लंड तुम्हें नज़दीक नहीं आने दे रहा है। देखो ना अब प्रोब्लम दूर हो गयी।”

“सच आप तो बड़े खराब हैं। अपनी बहु का पेटिकोट कोई ऐसे उतारता है?”

“मजबूरी थी बहु उतारना पड़ा। तुम्हारा पेटिकोट तुम्हें नज़दीक नहीं आने देता। लेकिन अब देखो ना तुम हमारे कितनी नज़दीक आ गयी हो।” रामलाल दोनों हाथों से बहु के विशाल चूतड़ों को दबा रहा था। बेचारी छोटी सी कच्छी मोटे मोटे चूतड़ों की दरार में घुसी जा रही थी। रामलाल के मोटे लौड़े ने बहु की कच्छी के कपड़े को सामने से भी उसकी चूत की दोनों फांकों के बीच में घुसेड़ दिया था। कन्चन को रामलाल के लंड की गर्माहट बेचैन कर रही थी। इतने दिनों से जिस लंड के सपने ले रही थी वो आज उसकी जांघों के बीच फंसा हुआ उसकी चूत से रगड़ खा रहा था।

“आय हाय! कितने मजबूर हैं आप जो आपको अपनी बहु का पेटिकोट उतारना पड़ा। लेकिन ऐसे चिपके हुए हम आपकी छाती की मालिश कैसे कर सकते हैं? छोड़िये ना हमें प्लीज़।”

“कोई बात नहीं बहु छाती पे नहीं तो पीठ पे तो मालिश कर सकती हो।” कन्चन ससुर जी के बदन से बेल लता की तरह लिपटी हुई थी। उसका सिर ससुर जी की छाती पे टिका हुआ था। उसने दोनों हाथों से पीठ की मालिश शुरु कर दी। रामलाल भी बहु की पीठ और चुतड़ों पे हाथ फेर रहा था। रामलाल के लौड़े से रगड़ खा के कन्चन की चूत बुरी तरह गीली हो गयी थी और पैंटी भी बिल्कुल उसके रस में भीग गयी थी। रामलाल के लंड का ऊपरी भाग बहु की चूत के रस में भीगा हुआ था। कन्चन का सारा बदन वासना की आग में जल रहा था।

“बहु तुम हमारी पीठ की मालिश करो, हम भी तुम्हारी पीठ की मालिश कर देते हैं।” रामलाल ने अपने हाथों में तेल ले कर बहु की पीठ पे मलना शुरु कर दिया। धीरे धीरे उसने बहु के विशाल नितम्बों पे से उसकी पैंटी को उनके बीच की दरार में सरका दिया और दोनों नितम्बों की दबा दबा के मालिश करने लगा। कन्चन के मुंह से हल्की हल्की सिसकियां निकल रही थी। पीठ पे मालिश करने के बहाने धीरे धीरे रामलाल ने बहु के ब्लाऊज के हुक खोल के ब्रा का हुक भी खोल दिया। कन्चन को महसूस तो हो रहा था की शायद ससुर जी उसके ब्लाउज और ब्रा का हुक खोल रहे हैं लेकिन वो अन्जान बनी रही।

जब ससुर जी ने उसका ब्लाउज और ब्रा को उतारना शुरु किया तो वो हड़बड़ा के बोली, “हाय राम!… पिताजी.. ये क्या कर रहे हैं? हमारा ब्लाउज क्यों उतार रहे हैं?” लेकिन कन्चन ने रामलाल से अलग होने की कोई कोशिश नहीं की।

“कहो तो बहु तुम्हारे ब्लाउज के ऊपर ही तेल लगा दें? बिना ब्लाउज उतारे तुम्हारी पीठ की कैसे मालिश होगी?” और इससे पहले की कन्चन कुछ बोलती रामलाल ने एक हाथ से बहु को अपने चिपका के रखा और दूसरे हाथ को ढीले हुए ब्रा के अन्दर डाल कर बहु की बड़ी बड़ी चूचिओं को मसलने लगा। कन्चन की चूचिओं पे मर्द का हाथ लगे दो महीने हो चुके थे। वो तो अब वासना आग में पागल हुई जा रही थी।

“इस्स्स….आआआआह…पिताजी……इस्स्स्स्स्स्स…ऐइइई…अआ..छोड़िये ना..अआह…धीरे…अब छोड़ दीजिये हमें…प्लीज़…आअआ…इआआह….इस्स्स्स्स धीरे….क्या कर रहे हैं?”

“कुछ नहीं बहु, तुम तो हमारी छाती पे मालिश कर नहीं सकी, हमनें सोचा हम ही अपनी बहु की छाती पे मालिश कर देते हैं।” बातों बातों में रामलाल ने बहु का ब्लाउज और ब्रा उसके बदन से अलग कर दिया। अब बहु के बदन पे सिर्फ़ एक छोटी सी कच्छी थी। रामलाल ने एक हाथ नीचे की ओर ले जा के बहु के चूत पे से उसकी कच्छी को साईड में कर दिया। अब रामलाल का लंड बहु की नंगी चूत से रगड़ रहा था।

“इस्स्स्स…हटिये भी पिताजी। आप तो सच मुच बहुत खराब हैं। अपनी जवान बहु को इस तरह कोई नंगी करता है? अब हमें कपड़े पहनने दीजिये।”

“बहु इसे कोई नंगी करना थोड़े ही कहते हैं। तुम्हें किसी मर्द ने नंगी करके चोदा जो नहीं है, इसीलिये नंगी होने का मतलब नहीं समझती हो। अभी तो तुम कच्छी पहने हुए हो।”

“हाय राम! तो अभी हमारी कच्छी भी उतारेंगे क्या?”

“हां बहु।”

“नहीं ना पिताजी…प्लीज़.. आप ऐसा क्यों कर रहे हैं?”

“बहु, एक मर्द, औरत की कच्छी क्यों उतारता है?”

“जी वो… हमारा मतलब है…म्म्म्म…आआह”

“शर्माओ नहीं, बताओ तुम्हारा पति तुम्हारी कच्छी क्यों उतारता है?”

रामलाल बहु की चूचिआं मसल रहा था और उसका मोटा लम्बा लंड बहु की चूत की दोनों फांकों के बीच से होता हुआ पीछे की ओर दोनों नितम्बों के बीच में से झांक रहा था। कन्चन से अब और सहन नहीं हो रहा था। वो चाहती थी की ससुर जी अब जल्दी से जल्दी अपना गधे जैसा लौड़ा उसकी चूत में पेल दें। लेकिन एक तो औरत जात थी ऊपर से रिश्ता भी कुछ ऐसा था।

“बोलती क्यों नहीं बहु?”

“जी, वो तो हमें.. हमारा मतलब है.. वो तो हमें चोदने के लिये हमारी कच्छी उतारते हैं।” कन्चन दोनों हाथों से अपना मुंह छुपाते हुए बोली। पहली बार उसने ससुर जी के सामने चोदने जैसे शब्द का इस्तेमाल किया।

“लेकिन उस नालयक ने तुम्हें कभी नंगी करके नहीं चोदा ना?”

“नहीं पिताजी। लेकिन ये सब आप क्यों पूछ रहे हैं?”

“इसलिये बहु कि अब हम तुम्हारी कच्छी उतारके और तुम्हें पूरी तरह नंगी करके चोदेंगे। अब तुम्हें पता चलेगा की जब मर्द औरत को नंगी करके चोदता है तो औरत को कितना मज़ा आता है।”

“हाय राम! पिता जी.. हमें चोद के आपको पाप लगेगा।”

“इस लाजवाब जवानी को चोदने से अगर पाप लगता है तो लगे। अरे बहु अपने जिस्म की आवाज़ सुनो। अपनी चूत की आवाज़ सुनो। बताओ अगर तुम्हारी चूत को इस लंड की ज़रूरत नहीं है तो उसने हमारे लंड को गीला क्यों कर दिया है?”

“आप अपने गधे जैसे उसको हमारे वहां रगड़ेंगे तो हमारी चूत गीली नहीं होगी क्या?”

“अब इतना गीला कर ही दिया है तो उसे अपनी प्यारी खूबसूरत सी चूत का रस भी पी लेने दो।”

लोहा गरम था। रामलाल ने अब देर करना ठीक नहीं समझा। बस एक बार किसी तरह बहु की चूत में लंड फंसा ले, फिर सब ठीक हो जाएगा। उसने एक झटके में बहु की चूत के रस में सनी हुई पैंटी पकड़ के नीचे खिसका दी। अब कन्चन बिल्कुल नंगी थी।

रामलाल ने बहु को अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपने होंठ बहु के रसीले होंठों पे रख दिये। कन्चन भी ससुर जी से लिपटी हुई थी। उसकी चूत बुरी तरह गिली थी। चूत के रस में सनी पैंटी उसके पैरों में पड़ी हुई थी। कन्चन ने पैरों पे उचक के रामलाल के तने हुए लंड को अपनी टांगों के बीच में इस तरह स्थापित किया कि वो उसकी चूत पे ठीक से रगड़ सके। रामलाल बहु की चूत की गर्मी अपने लौड़े पर और कन्चन ससुर जी के विशाल लंड की गर्मी अपनी चूत पे महसूस कर रही थी। काफ़ी देर बहु के होंठों का रसपान करने के बाद रामलाल कन्चन से अलग हो गया और थोड़ी दूर से उसकी मस्त जवानी को निहारने लगा। क्या बला की खूबसूरत थी बहु। गोरी गोरी मांसल चूचिआं। पतली कमर और उसके नीचे फैलते हुए विशाल चूतड़। तराशी हुई मांसल जांघों के बीच में घने काले बाल। रामलाल ने आज तक किसी औरत की चूत पे इतने घने और लम्बे बाल नहीं देखे थे। ऐसी जवानी देख के रामलाल मदहोश हो गया।

“ऊफ.. पिता जी अपनी बहु को नंगी करते आपको ज़रा भी शरम नहीं आई। अब ऐसे घूर घूर के क्या देख रहे हैं?”कन्चन शर्मा कर एक हाथ से अपनी चूत और एक हाथ से अपनी चूचिओं को ढकने की नाकामयाब कोशिश करती हुई बोली।

“सच बहु आज तक हमनें इतनी मस्त जवानी नहीं देखी। इस बेचारे लंड को निराश ना करो, थोड़ा सा तो अपनी चूत का रस पिला दो। चलो अगर तुम हमें नहीं देना चाहती हो तो कोई बात नहीं, हम सिर्फ़ लंड का सुपाड़ा तुम्हारी चूत में डाल के निकाल लेंगे। बेचारा थोड़ा सा पानी पी लेगा। अब तो ठीक है ना?”

“ठीक है पिताजी। हमें चोदेंगे तो नहीं ना?” कन्चन जान के चोदने जैसे शब्द का इस्तेमाल कर रही थी। उसके मुंह से ये सुन के रामलाल और भी पागल हुआ जा रहा था।

“नहीं चोदेंगे बहु। तुम्हारी इज़ाज़त के बिना तुम्हें कैसे चोद सकते हैं।”

ये कहते हुए रामलाल ने नंगी कन्चन को अपनी बलिश्ठ बाहों में उठा लिया और बिस्तर पे पटक दिया। अब वो पागलों की तरह बहु के पूरे बदन को चूमने लगा। फिर उसने बहु की मोटी जांघें फैला दी। बहु के जांघों के बीच का नज़ारा देख के उसका कलेजा मुंह को आ गया। घनी लम्बी झांटों के बीच में से बहु की चूत के खुले हुए होंठ झांक रहे थे मानों बर्सों से प्यासे हों। नंगी कन्चन अपने ससुर के सामने टांगें फैलाये पड़ी हुई थी। शर्म के मारे उसने दोनों हाथों से अपना मुंह ढक लिया।

“ऐसे क्या देख रहे हैं पिताजी…?”

“हमें भी तो इस जन्नत का नज़ारा देखने दो बहु। बहु तुमने तो टांगों के बीच में पूरा जंगल उगा रखा है। कभी साफ़ नहीं किया? इतनी खूबसूरत चूत को यों घने बालों के पीछे क्यों छुपा रखा है?”

“इसलिये कि कहीं आपकी नज़र ना लग जाए।”

“आए हाय! बहु तुम्हारी इसी अदा ने तो हमें मार डाला है।”

अब रामलाल से ना रहा गया। उसने बहु की मादक चूत को आगे झुक के चूम लिया। धीरे धीरे वो उसकी चूत चाटने लगा। कन्चन के मुंह से अब सिसकारियां निकल रही थी।

इस्स्स..आअआआआअह….इइइइइस्स्स्स्स….उउंहह। रामलाल की जीभ बहु की चूत के अन्दर बाहर हो रही थी। ऊऊप्फ….आआआह….पिताआआजी…आह…आइइइइई। बहु की चूत बुरी तरह रस छोड़ रही थी। उसकी लम्बी लम्बी झांटें भी भीग गयी थी। बहु वासना की आग में उत्तेजित हो के, चूतड़ उचका उचका के अपनी चूत ससुर जी के मुंह पे रगड़ रही थी। रामलाल का पूरा मुंह बहु की चूत के रस में सन गया। चूत के बाल रामलाल के मुंह में जा रहे थे। अब बहु को चोदने का टाईम आ गया था। रामलाल ने बहु के टांगें मोड़ के उसकी छाती से लगा दी। बहु की चूत उभर आयी थी और मुंह फाड़े लंड का इन्तज़ार कर रही थी। रामलाल ने अपने फौलादी लंड का सुपाड़ा बहु की खुली हुई चूत के मुंह पे टिका दिया और धीरे धीरे दोनों फांकों के बीच में रगड़ने लगा। कन्चन से अब और सहन नहीं हो रहा था।

“इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स…. पिताजी क्यों तंग कर रहे हैं? आपका वो तो हमारी उसका रस पीना चाहता है ना। अब डाल भी दीजिये अन्दर”। कन्चन का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा था। जिस लंड के वो रात दिन सपने देखती थी अब उसका मोटा सुपाड़ा कन्चन की चूत के दरवाज़े पे दस्तक दे रहा था।

“बहु तुम्हारी चूत तो बिल्कुल डबल रोटी की तरह फूली हुई है।”

“आपको अच्छी लगी?”

“बहुत।”

“तो फिर ले लीजिये ना..अब डालिये ना प्लीज़…” कन्चन अपने चूतड़ उचका के लंड अपनी चूत में लेने की कोशिश करते हुए बोली। रामलाल ने लंड के सुपाड़े को बहु की चूत की दोनों फांकों के बीच के कटाव में थोड़ा और रगड़ा और फिर हल्का सा धक्का लगा दिया। चूत इतनी गीली थी कि लंड का मोटा सुपाड़ा गुप्प से अन्दर घुस गया।

“आऐइइइई…….आआह पिता जी…..आआह……आअआपका तो बहुत…..आआ मोटाआआआआ है। मैं मर जाउंगी।”

“कुछ नही होगा बहु।” रामलाल ने बहु की चूचिआं मसलते हुए इस बार एक करारा सा धक्का लगा के एक चौथाई लंड अन्दर कर दिया।

“ऊई…माआं…आआअह….आआआइइइइइइई इइइइइइइइइइइइइई…….. आआहहहह। पिताजी आप तो आह… हमें चोद रहे हैं। इस्स्स्स…”

“अच्छा नहीं लग रहा तो निकाल लें बहु।”

“बहुत अच्छा लग रहा है…आअआह…….ऊऊह….आपने तो कहा था की आप चोदेंगे नहीं।”

“कहां चोद रहें हैं बहु? इसे सिर्फ़ तुम्हारी चूत का रस पिला दें। बिना चूत में जाए ये रस कैसे पियेगा?”

रामलाल ने लंड को सुपाड़े तक बाहर खींचा और फिर एक ज़बर्दस्त धक्का लगा दिया। इस बार करीब ८ इन्च लंड बहु की चूत में समा गया। कन्चन का दर्द के मारे बुरा हाल था।

“आआआआआआआआआ……………..प्लीईईईईईईईईईईज….आआआह. आह.आह…आह ।आह आपका तो बहुत लम्बा है पिताजी। आइइअआह….. हम नहीं झेल पाएंगे। अआ…..आह…..अभी और कितना बाकी है? आह।”

“बस बहु अब तो बहुत थोड़ा सा ही बाहर है।”

“जी हमारी तो फट जाएगी।”

“नहीं फटेगी बहु। तुम तो ऐसे कर रही हो जैसे ज़िन्दगी में पहली बार लंड तुम्हारी चूत में गया हो।”

“जी मर्द का तो कई बार गया है…आआआह……… लेकिन गधे का तो आज पहली बार जा रहा है….मम्मी…आआआआह”

“बस बहु थोड़ा सा और झेल लो। उसके बाद तो हम निकाल ही लेंगे।”

यह कह कर रामलाल ने बहु की चूत के रस में सना हुआ लंड पूरा बाहर खींच लिया और उसकी मोटी मोटी चूचिआं पकड़ के एक बहुत ही ज़ोर का धक्का लगा दिया। इस बार रामलाल का ११ इन्च का मूसल बहु की चूत को बड़ी बेरहमी से चीरता हुआ पूरा जड़ तक अन्दर समा गया। रामलाल के सांड जैसे बड़े बड़े टट्टे बहु के ऊपर की ओर उठे हुए विशाल चूतड़ों से चिपक गये और गांड के छेद में गुद गुदी करने लगे।

“आआआइइइइइइइई……आअह…आअह… पिताजीईईईई……..इस्स्स्स्स……मर गयी मैं.. ऊह, सचमुच फट जाएगी हमारी। प्लीज़ हमें छोड़ दीजिये। आपका तो किसी गधी के लिये ही ठीक है।”

“मेरी जान, अब इतना क्यों चिल्ला रही हो? तुम्हारी चूत ने तो हमारा पूरा लंड खा लिया है।”

“जी इतनी बेरहमी से आपने अन्दर जो पेल दिया। इइइस्स्स्स्स्स्स्स….”

रामलाल ने हल्के हल्के धक्के लगाने शुरु कर दिये। कन्चन बिल्कुल मस्त हो गयी थी।

“आआअह्ह्ह… इस्स्स्स्स…..उआआआह….पिताजी…आअह आप तो हमें सचमुच ही चोदने लग गये।”

“कहो तो ना चोदें बहु।”

“सच आप बहुत ही खराब हैं। औरत को फुसला के चोदना तो कोई आपसे सीखे। अपना गधे जैसा वो पूरा हमारे अन्दर पेल दिया, और अब कह रहे हैं, कहो तो ना चोदें। इसे चोदना नहीं तो और क्या कहते हैं?”

“तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा बहु?” रामलाल आधा लंड बाहर निकाल के फिर जड़ तक पेलता हुआ बोला।
“आआई…इस्स्स्स। जी बहुत अच्छा लग रहा है। काश आप हमारे ससुर ना होते ! तो हम आज जी भर के आपसे चुदवाते॥”

“देखो बहु तुम्हें मज़ा आ रहा है और हमने भी ऐसी जवान और खूबसूरत औरत को कभी नहीं चोदा। सिर्फ़ आज चोद लेने दो।”

“सच आप बहुत चालाक हैं। अभी थोड़ी देर पहले आपने हमें बेटी कहा था, औरा अब अपनी बेटी को ही चोद रहे हैं? बोलिये अब भी हम आपकी बेटी हैं ? ”

“हां बेटी , तुम अब भी हमारी बेटी हो और हमेशा हमारी बेटी रहोगी।” रामलाल एक ज़ोर का धक्का मारता हुआ बोला।

“आआआह। ।अच्छाआआआ जी! अपनी बेटी को चोदते हुए आपको ज़रा भी शरम नही आ रही? लेकिन पिताजी आपका बहुत मोटा है। हमारी उसको चौड़ी कर देगा। चौड़ी हो गयी तो इन्हें पता लग जाएगा। हम कहीं के नहीं रहेंगे।”

“किसको चौड़ी कर देगा बहु?”

“हटिये भी आपको पता तो है। हमारी जिस चीज़ में ये मूसल घुसा हुआ है उसी को तो चौड़ी करेगा ना।” कन्चन रामलाल के लौड़े को अपनी चूत से दबाती हुई बोली।

“कितनी नादान हो बहु, इतनी जल्दी थोड़े ही चौड़ी हो जाती है। अगर हम तुम्हें दो तीन साल चोदें तो शायद चौड़ी हो जाए।”

“फिर ठीक है, अब तो आपने चोदना शुरु कर ही दिया है तो आज चोद लीजिये। लेकिन आज के बाद फिर कभी नहीं चोदने देंगे। ये पाप है। इन्होनें पूछा चौड़ी कैसे हो गयी तो कह देंगे खेत में जाते वक्त एक गधे ने हमें ज़बर्दस्ती चोद दिया। वैसे ये बात झूठ तो है नहीं। इस वक्त हमें एक गधा ही तो चोद रहा है। ”

“सच बहु तुम बातें बहुत मीठी मीठी करती हो॥ आज तो जी भर के चोद लेने दो। ऐसी चूत चोद के तो हम धन्य हो जाएंगे। लेकिन बहु तुम्हें चुदाई सिखाना भी हमारा धर्म है। बोलो सीखोगी न?”

“जी, आप सिखाइये, हम ज़रूर सिखेंगे।”

“देखो बहु चुदवाते वक्त औरत को कोई शरम नहीं करानी चाहिये। बस खुल के रंडी की तरह चुदवाओ।”

“हुमें क्या पता रंडिआं कैसे चुदवाती हैं।”

“बहु रंडिआं चुदवाते वक्त कोई शरम नहीं करती और ना ही अपनी जुबान पे काबू रखती हैं। रंडी सिर्फ़ एक औरत की तरह चुदवाती हई, मर्द से पूरा मज़ा लेती है और मर्द को पूरा मज़ा देती है। बोलो बहु चोदें तुम्हें रंडी की तरह?”

“आअआ…जी, चोदिये हमें बिल्कुल रंडी बना के चोदिये। इइइइइस्स्स्स्स…. आज ये चूत आपकी है।” कन्चन ने अब शर्माने का नाटक बन्द कर दिया और बेशर्मी के साथ चोदने की बातें करने लगी।

“शबाश बहु! ये हुई ना बात, आज हम तुम्हारी चूत की प्यास बुझा के ही दम लेंगे। तब तक चोदेंगे जब तक तुम्हारा दिल नहीं भर जाता।”

“जी हम कब मना कर रहे हैं। चोदिये ना।”कन्चन चूतड़ उचकाती हुई बोली अब रामलाल बहु के नंगे बदन को और मांसल जांघों को सहलाने लगा। धीरे धीरे कन्चन का दर्द दूर होता जा रहा था और उसकी चूत ने फिर से पानी छोड़ना शुरु कर दिया था। रामलाल बहु के रसीले होंठों को चूसने लगा और धीरे धीरे अपना लंड बहु की चूत के अन्दर बाहर करने लगा। कन्चन को अब बहुत मज़ा आ रहा था। गधे जैसे लंड से चुदवाने में औरत को कैसा आनंद मिलता है आज उसे पता चला। रामलाल के मोटे लौड़े ने कन्चन की चूत बुरी तरह चौड़ी कर रखी थी।

“दर्द हो रहा हो तो बाहर निकाल लें बहु?”

“नहीं नहीं पिता जी हमारी चिन्ता ना किजिये बस हमें इतना चोदिये कि आपके लंड की बर्सों की प्यास शान्त हो जाए। आपके लंड की प्यास शान्त हो जाए तो हमें बहुत खुशी होगी।” कन्चन चूतड़ उचका के रामलाल का लौड़ा गुप्प से अपनी चूत में लेती हुई बोली। रामलाल ने बहु की टांगों को और चौड़ा किया और हल्के हल्के धक्के लगने लगा। वो नहीं चाहता था की उसका मूसल बहु की नाज़ुक चूत को फाड़ दे। एक बार बहु की चूत को उसके लम्बे मोटे लौड़े को झेलने की आदत पर जाए फिर तो वो खूब जम के चोदेगा। कन्चन ने ससुरजी की कमर में टांगें लपेट ली और अपने पैर की एड़िओं से उनके चूतड़ को धक्का देने लगी। रामलाल समझ गया की बहु की चूत अब चुदाई के लिये पूरी तरह तैयार है। अब उसने बहु की चूचिआं पकड़ के लंड को सुपाड़े तक बाहर निकाल के जड़ तक अन्दर पेलना शुरु कर दिया। बहु की चूत इतनी ज़्यादा गीली थी की पूरे कमरे में बहु की चूत से फच…फच…फच…फच…फच…फच…फच….फच…..और मुंह से आअआह… इइस्स्स्स….. आऐइइई…. आआह्ह्ह्ह…. आआआअआ…. उइइइइइइई.. आह्ह्ह…. आह…. आह…. आह…. आह का मादक संगीत निकल रहा था।

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