सबूत

घना अंधेरा और उपरसे उसमें जोरोसे बरसती बारीश. सारा आसमंत झिंगुरोंकी ‘किर्र’ आवाजसे गुंज रहा था. एक बंगलेके बगलमें खडे एक विशालकाय वृक्षपर एक बारीशसे भिगा हूवा उल्लू बैठा हूवा था. उसकी इधर उधर दौडती नजर आखीर सामने बंगलेके एक खिडकीपर जाकर रुकी. वह बंगलेकी ऐकलौती ऐसी खिडकी थी की जिससे अंदरसे बाहर रोशनी आ रही थी. घरमें उस खिडकीसे दिख रहा वह जलता हुवा लाईट छोडकर सारे लाईट्स बंद थे. अचानक वहा उस खिडकीके पास आसरेके लिए बैठा कबुतरोंका एक झुंड वहांसे फडफडाता हूवा उड गया. शायद वहां उन कबुतरोंको कोई अदृष्य शक्तीका अस्तीत्व महसुस हूवा होगा. खिडकीके कांच सफेद रंगके होनेसे बाहरसे अंदरका कुछ नही दिख रहा था. सचमुछ वहा कोई अदृष्य शक्ती पहूंच गई थी ? और अगर पहूंची थी तो क्या उसे अंदर जाना था? लेकिन खिडकी तो अंदर से बंद थी.

बेडरुममें बेडपर कोई सोया हूवा था. उस बेडवर सोए सायेने अपनी करवट बदली और उसका चेहरा उस तरफ हो गया. इसलिए वह कौन था यह पहचानना मुश्कील था. बेडके बगलमें एक ऐनक रखी हूई थी. शायद जो भी कोई सोया हूवा था उसने सोनेसे पहले अपनी ऐनक निकालकर बगलमें रख दी थी. बेडरुममे सब तरफ दारुकी बोतलें, दारुके ग्लास, न्यूज पेपर्स, मासिक पत्रिकाएं इत्यादी सामान इधर उधर फैला हूवा था. बेडरुमका दरवाजा अंदरसे बंद था और उसे अंदरसे कुंडी लगाई हूई थी. बेडरुमको सिर्फ एकही खिडकी थी और वहभी अंदरसे बंद थी – क्योंकी वह एक एसी रुम थी. जो साया बेडपर सोया था उसने फिरसे एकबार अपनी करवट बदली और अब उस सोए हुए साएका चेहरा दिखने लगा. स्टीव्हन स्मीथ, उम्र लगभग पच्चीस छब्बीस, पतला शरीर, चेहरेपर कहीं कहीं छोटे छोटे दाढीके बाल उगे हूए, आंखोके आसपास ऐनककी वजहसे बने काले गोल गोल धब्बे. वह कुछतो था जो धीरे धीर स्टीव्हनके पास जाने लगा. अचानक निंदमेंभी स्टीव्हनको आहट हूई और वह हडबडाकर जग गया. उसके सामने जो भी था वह उसपर हमला करनेके लिए तैयार होनेसे उसके चेहरेपर डर झलक रहा था, पुरा बदन पसिना पसिना हुवा था. वह अपना बचाव करनेके लिए उठने लगा. लेकिन वह कुछ करे इसके पहलेही उसने उसपर, अपने शिकारपर हमला बोल दिया था. पुरे आसमंतमें स्टीव्हनकी एक बडी, दर्दनाक, असहाय चिख गुंजी. और फिर सब तरफ फिरसे सन्नाटा छा गया … एकदम पहले जैसा…

सुबह सुबह रास्तेपर लोगोंकी अपने अपने कामपर जानेकी जल्दी चल रही थी. इसलिए रास्तेपर काफी चहलपहल थी. ऐसेमें अचानक एक पुलिसकी गाडी उस भिडसे दौडने लगी. आसपासका माहौल पुलिसके गाडीके सायरनकी वजहसे गंभीर हो गया. रास्तेपर चलरहे लोक तुरंत उस गाडीको रस्ता दे रहे थे. जो पैदल चल रहे थे वे उत्सुकतासे और अपने डरे हूए चेहरेसे उस जाती हूई गाडीकी तरफ मुड मुडकर देख रहे थे. वह गाडी निकल जानेके बाद थोडी देर माहौल तंग रहा और फिर फिरसे पहले जैसा नॉर्मल होगया.

एक पुलिसका फोरेन्सीक टीम मेंबर बेडरुमके खुले दरवाजेके पास कुछ इन्वेस्टीगेशन कर रहा था. वह उसके पास जो बडा जाडा लेन्स था उसमेंसे जमीनपर कुछ मिलता है क्या यह ढुंढ रहा था. उतनेमें एक अनुशासनमे चल रहे जुतोंका ‘टाक टाक’ ऐसा आवाज आगया. वह इन्व्हेस्टीगेशन करनेवाला पलटकर देखनेके पहलेही उसे कडे स्वरमें पुछा हूवा सवाल सुनाई दिया ” बॉडी किधर है ? ”

” सर इधर अंदर ..” वह टीम मेंबर अदबके साथ खडा होता हूवा बोला.

डिटेक्टीव सॅम व्हाईट, उम्र साधारण पैंतिस के आसपास, कडा अनुशासन, लंबा कद, कसा हूवा शरीर , उस टीममेंबरने दिखाए रास्तेसे अंदर गया.

डिटेक्टीव सॅम जब बेडरुममें घुस गया तब उसे स्टीवनका शव बेडपर पडा हूवा मिल गया. उसकी आखें बाहर आयी हूई और गर्दन एक तरफ ढूलक गई हूई थी. बेडपर सबतरफ खुन ही खुन फैला हूवा था. उसका गला काटा हूवा था. बेडकी स्थीतीसे ऐसा लग रहा था की मरनेके पहले स्टीव्हन काफी तडपा होगा. डिटेक्टीव सॅमने बेडरुममें चारो तरफ अपनी नजर दौडाई. फोरेन्सीक टीम बेडरुममेंभी तफ्तीश कर रही थी. उनमेंसे एक कोनेमें ब्रशसे कुछ साफ करने जैसा कुछ कर रहा था तो दुसरा कमरेंमे अपने कॅमेरेसे तस्वीरें लेनेमें व्यस्त था.

एक फोरेन्सीक टीम मेंबरने डीटेक्टीव सॅमको जानकारी दी –

” सर मरनेवालेका नाम स्टीव्हन स्मीथ’

‘ फिंगरप्रींटस वैगेरे कुछ मिला क्या?”

‘ नही कमसे कम अबतक तो कुछ नही मिला ‘

डिटेक्टीव सॅमने फोटोग्राफरकी तरफ देखते हूए कहा, ” कुछ छुटना नही चाहिए इसका खयाल रखो”

” यस सर ” फोटोग्राफर अदबके साथ बोला.

अचानक सॅमका ध्यान एक अजीब अप्रत्याशीत बात की तरफ आकर्षीत हूवा .

वह बेडरुमके दरवाजेके पास गया. दरवाजेका लॅच और आसपासकी जगह टूटी हूई थी.

” इसका मतलब खुनी शायद यह दरवाजा तोडकर अंदर आया है ” सॅमने कहा.

जेफ, लगभग पैतीसके आसपास, छोटा कद, मोटा, उसका टीम मेंबर आगे आया, ” नही सर, असलमें यह दरवाजा मैने तोडा… क्योंकी हम जब यहां पहूंचे तब दरवाजा अंदरसे बंद था. ”

” तुमने तोडा ?” सॅमने आश्चर्यसे कहा.

” यस सर”

” क्या फिरसे अपने पहलेके धंदे शुरु तो नही किये ?” सॅमने मजाकमें लेकिन चेहरेपर वैसा कुछ ना दिखाते हूए कहा.

” हां सर … मतलब नही सर”

सॅमने पलटकर एकबार फिरसे कमरेमें अपनी पैनी नजर दौडाई, खासकर खिडकीयोंकी तरफ देखा. बेडरुमको एकही खिडकी थी और वहभी अंदरसे बंद थी. वह बंद रहना लाजमी था क्योंकी रुम एसी थी.

” अगर दरवाजा अंदरसे बंद था … और खिडकीभी अंदरसे बंद थी … तो फिर कातिल कमरेमें कैसे आया… ”

सब लोग आश्चर्यसे एकदुसरेकी तरफ देखने लगे.

” और सबसे महत्वपुर्ण बात की वह अंदर आनेके बाद बाहर कैसे गया?” जेफने कहा.

डिटेक्टीव्हने उसकी तरफ सिर्फ घुरकर देखा.

अचानक सबका खयाल एक इन्वेस्टीगेटींग ऑफिसरने अपनी तरफ खिंचा. उसको बेडके आसपास कुछ बालोंके टूकडे मिले थे.

” बाल? … उनको ठिकसे सिल कर आगेके इन्व्हेस्टीगेशनके लिए लॅबमें भेजो ‘ सॅमने आदेश दिया.

” बाल? … उनको ठिकसे सिल कर आगेके इन्व्हेस्टीगेशनके लिए लॅबमें भेजो ‘ सॅमने आदेश दिया.
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डिटेक्टीव्ह सॅम अपने पुलिस स्टेशनमें अपने ऑफीसमें बैठा था. उतनेमें एक ऑफीसर वहा आ गया. उसने पोस्टमार्टमके कागजात सॅमके हाथमें थमा दीये. जब सॅम वह कागजात उलट पुलटकर देख रहा था वह ऑफिसर उसके बगलमें बैठकर सॅमको इन्वेस्टीगेशनके बारेमें और पोस्टमार्टमके बारेमें जानकारी देने लगा.

” मौत गला कटनेसे हूई है, और गला जब काटा गया तब स्टीव्हन शायद निंदमें होगा ऐसा इसमें लिखा है लेकिन कातिलने कौनसा हथीयार इस्तेमाल किया गया होगा इसका कोई पता नही चल रहा है. ” वह ऑफिसर जानकारी देने लगा. .

” ऍ़मॅझींग ?” डिटेक्टीव सॅम मानो खुदसेही बोला.

” और वहा मीले बालोंका क्या ?”

” सर हमने उसकी जांच की … लेकिन वे बाल आदमीके नही है ”

” क्या आदमीके नही ? …”

” फिर शायद किसी भूतके होंगे… .” वहां आकर उनके बातचीतमें घुसते हूए एक ऑफिसरने मजाकमें कहा.

भलेही उसने वह बात मजाकमें कही हो लेकिन वे एकदुसरेके मुंहको ताकते हूए दोतीन पल कुछभी नही बोले . कमरेमे एक अजीब अनैसर्गीक सन्नाटा छाया हूवा था.

” मतलब वह कातिलके कोट के या जर्कीनके हो सकते है…” सॅमके बगलमें बैठा ऑफिसर बात को संभालते हूए बोला.

” और उसके मोटीव्हके बारेमें कुछ जानकारी ?”

” घरकी सारी चिजे तो अपने जगह पर थी… कुछ भी किमती सामान चोरी नही गया है … और घरमें कहीभी स्टीव्हनके हाथके और उंगलीयोंके निशानके अलावा और किसीकेभी हाथके या उंगलीयोंके निशान नही मिले… ” ऑफिसरने जानकारी दी.

” अगर कातील भूत हो तो उसे किसी मोटीव्हकी क्या जरुरत?” फिरसे वहां खडे अफसरने मजाकमें कहा.

फिर दो तीन पल सन्नाटेमें गए.

” देखो ऑफिसर … यहा सिरीयस मॅटर चल रहा है… आप कृपा करके ऐसी फालतू बाते मत करो…” सॅमने उस अफसरको ताकीद दी.

” मैने स्टीव्हनकी फाईल देखी है … उसका पहलेका रेकॉर्ड कुछ उतना अच्छा नही… उसके खिलाफ पहलेसेही बहुत सारे गुनाहोके लिए मुकदमें दर्ज है… कुछ गुनाह साबीतभी हूए है और कुछपर अबभी केसेस जारी है… इससे ऐसा लगता है की हम जो केस हॅन्डल कर रहे है वह कोई आपसी दुष्मनी या रंजीशकी हो सकती है….” सॅम फिरसे असली बात पर आकर बोला.

” कातिलने अगर किसी गुनाहगारकोही मारा हो तो… ” बगलमें खडे उस ऑफिसरने फिरसे मजाक करनेके लिए अपना मुंह खोला तो सॅमने उसके तरफ एक गुस्सेसे भरा कटाक्ष डाला.

” नही मतलब अगर वैसा है तो… अच्छाही है ना… एक तरहसे वह अपनाही काम कर रहा है… शायद जो काम हमभी नही कर पाते वह काम वह कर रहा है ” वह मजाक करनेवाला ऑफिसर अपने शब्द तोलमोलकर बोला.

” देखो ऑफिसर … हमारा काम लोगोंकी सेवा करना और उनकी हिफाजत करना है…”

” गुनाहगारोंकीभी ?” उस ऑफिसरने व्यंगात्मक ढंगसे कडवे शब्दोमें पुछा.

इसपर सॅम कुछ नही बोला. या फिर उसपर बोलनेके लिए उसके पास कुछ लब्ज नही थे. .

पॉल रॉबर्टस, काला रंग, उम्र पच्चीसके आसपास , लंबाई पौने छे फुट, घुंगराले बाल, अपने बेडरुममें सोया था. उसकी बेडरुम मतलब एक कबाडखाना था जिसमें इधर उधर फैला हूवा सामान, न्यूज पेपर्स, मॅगेझीन्स, व्हिस्कीकी खाली बोतले वह भी इधर उधर फैली हूई. मॅगेझीनके कव्हरपर जादातर लडकियोंकी नग्न तस्वीरें दिख रही थी. और बेडरुमकी सारी दिवारे उसके चहती हिरोइन्स की नग्न, अर्धनग्न तस्वीरोसे भरी हूई थी. स्टीव्हनके और पॉलके बेडरुममे काफी समानता थी. फर्क सिर्फ इतनाही था की पॉलके बेडरुमको दो खिडकियां थी और वह भी अंदरसे बंद. और बंद रुम एसी थी इसलिए नही तो शायद सावधानीके तौर थी. वह अपने जाडे, मुलायम, रेशमी गद्दीपर वैसाही जाडा, मुलायम, रेशमी तकीया सिनेसे लिपटाकर बारबार करवट बदल रहा था. शायद वह डिस्टर्ब्ड होगा. काफी समयतक उसने सोनेका प्रयास किया लेकिन उसे निंद नही आ रही थी. आखिर करवट बदल बदलकरभी निंद नही आ रही थी इसलिए वह बेडके निचे उतर गया. पैरमें स्लिपर चढाई.

क्या किया जाए ? …

ऐसा सोचकर पॉल किचनकी तरफ चला गया. किचनमें जाकर किचनचा लाईट जलाया. फ्रीजसे पाणीकी बोतल निकाली. बडे बडे घुंट लेकर उसने एकही झटकेमें पुरी बोतल खाली कर दी. फिर वह बोतल वैसीही हाथमें लेकर वह किचनसे सिधा हॉलमें आया. हॉलमें पुरा अंधेरा छाया हूवा था. पॉल अंधारेमेही एक कुर्सीपर बैठ गया.

चलो थोडी देर टिव्ही देखते है …

ऐसा सोचकर उसने बगलमें रखा हूवा रिमोट लेकर टिव्ही शुरु किया. जैसेही उसने टीव्ही शुरु किया डरके मारे उसके चेहरेका रंग उड गया, सारे बदनमें पसिने छुटने लगे, और उसके हाथपैर कांपने लगे. उसके सामने अभी अभी शुरु हूए टिव्हीके स्क्रिनपर एक खुनकी लकीर बहते हूए उपरसे निचेतक आयी थी. गडबडाकर वहं एकदम खडाही हूवा, और वैसेही घबराये हूये हालतमें उसने कमरका बल्ब जलाया.

कमरेंमे तो कोई नही है….

उसने टीव्हीकी तरफ देखा. टिव्हीके उपर एक मांस का टूटा हूवा टूकडा था और उसमेंसे अभीभी खुन बह रहा था.

चलते, लडखडाते हूए वह टेलीफोनके पास गया और अपने कपकपाते हाथसे उसने एक फोन नंबर डायल किया.

बाहर एक कॉलनीके प्लेग्राऊंडपर छोटे बच्चे खेल रहे थे. इतनेमें कर्कश आवाजमें सायरन बजाती हूई एक पुलिसकी गाडी वहांसे, बगलके रास्तेसे तेजीसे गुजरने लगी. सायरनका कर्कश आवाज सुनतेही कुछ खेल रहे छोटे बच्चे घबराकर अपने अपने मां बापकी तरफ दौड पडे. पुलिसकी गाडी आयी उसी गतिमें वहांसे गुजर गई और सामने एक मोड पर दाई तरफ मुड गई.
पुलिसकी गाडी सायरन बजाती हूई एक मकानके सामने आकर रुक गई. गाडी रुके बराबर डिटेक्टीव्ह सॅमके नेतृत्वमें एक पुलिसका दल गाडीसे उतरकर मकानकी तरफ दौड पडा.
” तुम लोग जरा मकानके आसपास देखो…” सॅमने उनमेंके अपने दो साथीयोंको हिदायत दी. वे दोनो बाकी साथीयोंको वही छोडकर एक दाई तरफसे और दुसरा बाई तरफसे इधर उधर देखते हूए मकानके पिछवाडे दौडने लगे. बाकीके पुलिस और सॅम दौडकर आकर मकानके मुख्य द्वारके सामने इकठ्ठा होगए. उसमेंके एकने , जेफने बेलका बटन दबाया. बेल तो बज रही थी लेकिन अंदर कुछ भी आहट नही सुनाई दे रही थी. थोडी देर राह देखकर जेफने फिरसे बेल दबाई. , इसबार दरवाजा भी खटखटाया.
” हॅलो … दरवाजा खोलो.. ” किसीने दरवाजा खटखटाते हूए अंदर आवाज दी.
लेकिन अंदर कोई हलचल या आहट नही थी. आखिर चिढकर सॅमने आदेश दिया , ” दरवाजा तोडो ”
जेफ और और एक दो साथी मिलकर दरवाजा जोर जोरसे ठोक रहे थे.
” अरे इधर धक्का मारो”
” नही अंदरकी कुंडी यहा होनी चाहिए… यहां जोरसे धक्का मारो ”
” और जोरसे ”
” सब लोग सिर्फ दरवाजा तोडनेमें मत लगे रहो … कुछ लोग हमें गार्ड भी करो ”
सब गडबडमें आखिर दरवाजा धक्के मार मारकर उन्होने दरवाजा तोड दिया.
दरवाजा तोडकर दलके सब लोग घरमें घुस गए. डिटेक्टीव्ह सॅम हाथमें बंदूक लेकर सावधानीसे अंदर जाने लगा. उसके पिछे पिछे हाथमें बंदूक लेकर बाकी लोग एकदुसरेको गार्ड करते हूए अंदर घुसने लगे. अपनी अपनी बंदूक तानकर वे सब लोग तुरंत घरमें फैलने लगे. लेकिन हॉलमेंही एक विदारक दृष्य उनका इंतजार कर रहा था. जैसेही उन्होने वह दृष्य देखा, उनके चेहरेका रंग उड गया था. उनके सामने सोफेपर पॉल गीरा हूवा था, गर्दन कटी हूई, सब चिजे इधर उधर फैली हूई, उसकी आंखे बाहर आई हूई थी, और सर एक तरफ ढूलका हूवा था. उसकाभी खुन उसी तरहसे हूवा था जिस तरहसे स्टिव्हनका. सारी चिजे इधर उधर फैली हूई थी इससे यह प्रतित हो रहा था की यह भी मरने के पहले बहुत तडपा होगा.
” घरमें बाकी जगह ढुंढो ” सॅमने आदेश दिया.
टीमके तिनचार मेंबर्स मकानमें कातिलको ढूंढनेके लिए इधर उधर फैल गए.
” बेडरुममेंभी ढूंढो ” सॅमने ने जाने वालोंको हिदायद दी.
डिटेक्टीव्ह सॅमने कमरेंमे चारो तरफ एक नजर दौडाई. सॅमको टिव्हीके स्क्रिनपर बहकर निचेकी ओर गई खुनकी लकीर और उपर रखा हूवा मांसका टूकडा दिख गया. सॅमने इन्व्हेस्टीगेशन टीमके एक मेंबर को इशारा किया. वह तुरंत टिव्हीके पास जाकर वहा सबूत इकठ्ठा करनेमें जूट गया. बादमें सॅमने हॉलकी खिडकीयोंकी तरफ देखा. इसबार भी सारी खिडकीयां अंदरसे बंद थी. अचानक सोफेपर गीरे किसी चिजने सॅमका ध्यान खिंच लिया. वह वहा चला गया, जो था वह उठाकर देखा. वह एक बालोंका गुच्छा था, सोफेपर बॉडीके बगलमें पडा हूवा. वे सब लोग आश्चर्यसे कभी उस बालोंके गुच्छेकी तरफ देखते तो कभी एक दुसरेकी तरफ देखते. इन्व्हेस्टीगेशन टीमके एक मेंबरने वह बालोंका गुच्छा लेकर प्लास्टीकके बॅगमें आगेकी तफ्तीशके लिए सिलबंद किया. जेफ गडबडाया हूवा कभी उस बालोंके गुच्छेको देखता तो कभी टिव्हीपर रखे उस मांसके टूकडेकी तरफ. उसके दिमागमें… उसकेही क्यों बाकी लोगोंके दिमागमेंभी एक ही समय काफी सारे सवाल मंडरा रहे थे. लेकिन पुछे तो किसको पुछे?

डिटेक्टीव्ह सॅम और उसका एक साथी कॅफेमें बैठे थे. उनमें कुछतो गहन चर्चा चल रही थी. उनके हावभावसे लग रहा था की शायद वे हालहीमें हूए दो खुनके बारेमे चर्चा कर रहे होंगे. बिच बिचमें दोनोभी कॉफीके छोटे छोटे घुंट ले रहे थे. अचानक कॅफेमें रखे टिव्हीपर चल रही खबरोंने उनका ध्यान आकर्षीत किया.
डिटेक्टीवने जितोड कोशीश की थी की प्रेस हालहीमें चल रहे खुनको जादा ना उछाले. लेकिन उनके लाख कोशीशके बादभी मेडीयाने जानकारी हासिल की थी. आखिर डिटेक्टीव्ह सॅमकोभी कुछ मर्यादाए थी. वे एक हद तक ही बातें मिडीयासे छुपा सकते है. और कभी कभी जिस बातको हम छुपाना चाहते है उसीकोही जादा उछाला जाता है.
टीव्ही न्यूज रिडर बोल रहा था – ” कातिलने कत्ल किए और एक शक्स की लाश आज तडके पुलिसको मिली. जिस तरहसे और जिस बर्बरतासे पहला खुन हुवा था उसी बर्बरतासे या यूं कहीए उससेभी जादा बर्बतासे .. इस शक्सकोभी मारा गया. इससे कोईभी इसी नतीजेपर पहूंचेगा की इस शहरमें एक खुला सिरीयल किलर घुम रहा है…. हमारी सुत्रोंने दिए जानकारीके हिसाबसे दोनोभी शव ऐसे कमरेंमे मिले की जो जब पुलिस पहुंची तब अंदरसे बंद थे. पुलिसको जब इस बारेंमे पुछा गया तो उन्होने इस मसलेपर कुछभी टिप्पनी करनेसे इनकार किया है. जिस इलाकेमें खुन हुवा वहा आसपासके लोग अब भी इस भारी सदमेंसे उभर नही पाये है. और शहरमेंतो सब तरफ दहशतका मौहोल बन चूका है. कुछ लोगोंके कहे अनुसार जिन दो शक्स का खुन हूवा है उनके नामपर गंभीर गुनाह दाखिल है. इससे एक ऐसा निष्कर्ष निकाला जा सकता है की जो भी खुनी हो वह गुनाहगारोंकोही सजा देना चाहता है. इसकी वजहसे कुछ आम लोग तो कातिलकी वाहवा कर रहे है…”
” अगर खुनीको मिडीया अटेंशन चाहिए था तो वह उसमें कामयाब हो चूका है .. हमने लाख कोशीश की लेकिन आखिर कबतक हमभी प्रेससे बाते छुपा पाएंगे” डिटेक्टीव्ह सॅमने अपने साथीसे कहा. लेकिन सामने बैठा ऑफिसर कुछभी बोला नही. क्योंकी अबभी वह खबरें सुननेंमे व्यस्त था.
जोभी हो यह सब जानकारी अपने डिपार्टमेंटके लोगोंनेही लिक की है…
लेकिन अब कुछभी नही किया जा सकता है…
एक बार धनुष्यसे छूटा तिर वापस नही लाया जा सकता है..
सॅम सोच रहा था. फिर और एक विचार सॅमके दिमागमें चमका –
कही ये अपने सामने बैठेवाला ऑफिसर तो नही… जो सब जानकारीयां लिक कर रहा हो…
सॅम एक अजिब नजरसे उसकी तरफ देख रहा था. लेकिन वह अबभी टिव्हीकी खबरें सुननेमें व्यस्त था.
शहरमें सब तरफ सारी दशहत फैल चूकी थी.
एक सिरीयल किलर शहरमें खुला घुम रहा है….
पुलिस अबभी उसको पकडनेमे नाकामयाब …
वह और कितने कत्ल करनेवाला है? …
उसका अगला शिकार कौन होगा?..
और वह लोगोंको क्यो मार रहा है ?…
कुछ कारणवश या युंही ?…
इन सारे सवालोंके जवाब किसीके पासभी नही थे.
रोनाल्ड पार्कर, उम्र पच्चीस के आसपास, स्टायलीस्ट, रुबाबदार, अपने बेडरुमें सोया था. वह रह रहकर बेचैनीसे अपनी करवट बदल रहा था. इससे ऐसा लग रहा था की आज उसका दिमाग कुछ जगहपर नही था. थोडी देर करवट बदलकर सोनेकी कोशीश करनेके बादभी उसे निंद नही आ रही थी यह देखकर वह बेडसे उठकर बाहर आ गया, इधर उधर एक नजर दौडाई, और फिरसे बेडपर जाकर बैठ गया. उसने बेडके बगलमें रखा एक मॅगझीन उठाया और उसे खोलकर पढते हूए फिरसे बेडपर लेट गया. वह उस मॅगझीनके पन्ने, जिसपर लडकियोंकी नग्न तस्वीरे छपी थी, पलटने लगा.

सेक्स इज द बेस्ट वे टू डायव्हर्ट यूवर माईंन्ड …

उसने सोचा. अचानक दुसरे कमरेसे ‘धप्प’ ऐसा कुछ आवाज उसे सुनाई दिया. वह चौंककर उठ बैठा , मॅगॅझीन बगलमें रख दिया और वैसीही डरे सहमे हालमें वह बेडसे निचे उतर गया.

यह कैसी आवाज …..

पहले तो कभी नही आई थी ऐसी आवाज… .

लेकिन आवाज आनेके बाद मै इतना क्यो चौक गया…

या हो सकता है आज अपनी मनकी स्थीती पहलेसेही अच्छी ना होनेसे ऐसा हूवा होगा…

धीरे धीरे इधर उधर देखते हूए वह बेडरुमके दरवाजेके पास गया. दरवाजेकी कुंडी खोली और धीरेसे थोडासा दरवाजा खोलकर अंदर झांककर देखा.

सब घरमें ढुंढनेके बाद रोनाल्डने हॉलमें प्रवेश किया. हॉलमें घना अंधेरा था. हॉलमेंका लाईट जलाकर उसने डरते हूएही चारो तरफ एक नजर दौडाई.

लेकिन कुछभीतो नही…

सबकुछ वहीका वही रखा हूवा …

उसने फिरसे लाईट बंद किया और किचनकी तरफ निकल पडा.

किचनमेंभी अंधेरा था. वहांका लाईट जलाकर उसने चारोतरफ एक नजर दौडाई. अब उसका डर काफी कम हो चूका था. .

कहा कुछ तो नही …

इतना डरनेकी कुछ जरुरत नही थी… .

वह पलटनेके लिए मुडनेही वाला था की किचनमें सिंकमें रखे किसी चिजने उसका ध्यान आकर्षीत किया. उसकी आंखे आश्चर्य और डर की वजहसे बडी हूई थी. एक पलमें इतने ठंडमेंभी उसे पसिना आया था. हाथपैर कांपनए लगे थे. उसके सामने सिंकमें खुनसे सना एक मांसका टूकडा रखा हूवा था. एक पलकाभी समय ना गंवाते हूए वह वहा से भाग खडा हूवा. क्या किया जाए उसे कुछ सुझ नही रहा था. गडबडाये और घबराये हूए हालमें वह सिधा बेडरुममे भाग गया और उसने अंदरसे कुंडी बंद कर ली थी.

डिटेक्टीव सॅम गोल्फ खेल रहा था. रोजमर्राके तनाव से मुक्तीके लिए यह एक अच्छा खासा उपाय उसने ढूंडा था. उसने एक जोरका शॉट मारनेके बाद बॉल आकाशसे होकर होल की तरफ लपक गया. बॉलने दो तिन बार गिरकर उछला और आखीर होलसे लगभग छे फिटकी दुरीपर लूढकते हूए रुका. सॅम बॉलके पास गया. जमीनके चढाई और ढलानका उसने अंदाजा लिया. बॉलके उपरसे टी घुमाकर उसे कितने जोरसे मारना पडेगा ईसका अनुमान लगाया. और बडी सावधानीसे, सही दिशामें, सही जोर लगाकर उसने हलकेही एक शॉट लगाया और बॉल लूढकते हूए बराबर होलमें जाकर समा गया. डिटेक्टीवके चेहरेपर एक जित की खुशी झलकने लगी. इतनेमें अचानक सॅमका मोबाईल बजा. डिटेक्टीव्हने डिस्प्ले देखा. लेकिन फोन नंबर तो पहचानका नही लग रहा था. उसने एक बटन दबाकर फोन अटेंड किया, ”यस”

” डिटेक्टीव बेकर हियर” उधरसे आवाज आया.

” हा बोलो” सॅम दुसरे गेमकी तैयारी करते हुए बोला.

” मेरे जानकारीके हिसाबसे आप हालहीमें चल रहे सिरियल केसके इंचार्च हो … बराबर?” उधरसे बेकरने पुछा. .

” जी हां ” सॅमने सिरीयल किलरका जिक्र होतेही अगला गेम खेलने का विचार त्याग दिया और वह आगे क्या बोलता है यह ध्यानसे सुनने लगा.

” अगर आपको कोई ऐतराज ना हो … मतलब अगर आज आप फ्री हो तो… क्या आप इधर मेरे पुलिस स्टेशनमें आ सकते हो?… मेरे पास इस केसके बारेमें कुछ महत्वपुर्ण जानकारी है… शायद आपके काम आयेगी..”

” ठिक है … कोई बात नही .. ” कहते हूए बगल से गुजर रहे लडकेको सामान उठानेका इशारा करते हूए सॅमने कहा.

सॅमने बेकरसे फोनपर मिलनेका वक्त वगैरे सब तय किया और वह सामान उठाकर ले जा रहे लडकेके साथ वापस हो लिया.
पोलिस स्टेशनमें डिटेक्टीव सॅम डिटेक्टीव बेकरके सामने बैठा हूवा था. डिटेक्टीव बेकर इस पुलिस स्टेशनका इंचार्ज था. डिटेक्टीव्ह बेकरका फोन आनेके पश्चात गोल्फका अगला गेम खेलनेकी सॅमकी इच्छाही खत्म हो चूकी थी. अपना सामान इकठ्ठा कर वह ताबडतोड तैयारी कर अपने पुलिस स्टेशनमें जानेके बजाय सिधा इधर निकल आया था. उनका ‘हाय हॅलो’ – सब फॉर्म्यालिटीज होनेके बाद अब डिटेक्टीव बेकरके पास उसके केसके बारेमें क्या जानकारी है यह सुननेके लिए वह उसके सामने बैठ गया. डिटेक्टीव बेकरने सब जानकारी बतानेके पहले एक बडा पॉज लिया. डिटेक्टीव सॅम भलेही अपने चेहरेपर नही आने दे रहा था फिरभी सब जानकारी सुननेके लिए वह बेताब हो चूका था और उसकी उत्सुकता सातवें आसमानपर पहूंच चूकी थी.

डिटेक्टीव्ह बेकर जानकारी देने लगा –

” कुछ दिन पहले मेरे पास एक केस आयी थी ……..

…. एक सुंदर शांत टाऊन. टाऊनमें हरा भरी घास और हरेभरे पेढ चारो तरफ फैले हूए थे. और उस हरीयालीमें रातमें तारे जैसे आकाशमें समुह-समुहसे चमकते है वैसे छोटे छोटे समुहमें घर इधर उधर फैले हूए थे. उसी हरीयालीमें गावके बिचोबिच एक पुरानी कॉलेजकी बिल्डींग थी.

कॉलजमें गलियारेमें स्टूडंट्स की भिड जमी हूई थी. शायद ब्रेक टाईम होगा. कुछ स्टूडंट्स समुहमें गप्पे मार रहे थे तो कुछ इधर उधर घुम रहे थे. जॉन कार्टर लगभग इक्कीस – बाईस सालका, स्मार्ट हॅंन्डसम कॉलेजका स्टूडंट और उसका दोस्त ऍथोनी क्लार्क – दोनो साथ साथ बाकी स्टूडंट्स के भिडसे रास्ता निकालते हूए चल रहे थे. .

” ऍंथोनी चलो डॉक्टर अल्बर्टके क्लासमें जाकर बैठते है . बहुत दिन हुए है हमने उसका क्लास अटेंन्ड नही किया है. ” जॉनने कहा.

” किसके ? डॉक्टर अल्बर्टके क्लासमें ? … तुम्हारी तबियत तो ठिक है ना ?..” ऍन्थोनीने आश्चर्यसे पुछा.

” अरे नही … मतलब अबतक वह जमा हूवा है या छोडकर गया यह देखकर आते है ” जॉनने कहा.

दोनो एकदूसरेको ताली देते हूए, शायद पहलेका कोई किस्सा याद कर जोरसे हंसने लगे.

चलते हूए अचानक जॉनने ऍन्थोनीको अपनी कोहनी मारते हूए बगलसे जा रहे एक लडके की तरफ उसका ध्यान आकर्षीत करनेका प्रयास किया. ऍन्थोनीने प्रश्नार्थक मुर्दामें जॉनकी तरफ देखा.

जॉन धीमे आवाजमें उसके कानके पास बुदबुदाया ” यही वह लडका… जो आजकल अपने होस्टेलमें चोरीयां कर रहा है ”

तबतक वह लडका उनको क्रॉस होकर आगे निकल गया था. ऍन्थोनीने पिछे मुडकर देखा. होस्टेलमें ऐन्थोनीकीभी कुछ चिजेभी गायब हो चूकी थी.

” तुम्हे कैसे पता ?” ऍन्थोनीने पुछा. .

” उसके तरफ देखतो जरा… कैसा कैसा कसे हूए चोरोंकी खानदानसे लगता है साला.. ‘ जॉनने कहा.

” अरे सिर्फ लगनेसे क्या होगा… हमें कुछ सबुतभीतो लगेगा. ” ऍन्थोनीने कहा.

” मुझे ऍलेक्सभी कह रहा था. … देर राततक वह भूतोंकी तरह होस्टेलमें सिर्फ घूमता रहता है ”

” अच्छा ऐसी बात है … तो फिर चल.. सालेको सिधा करते है.”

” ऐसा सिधा करेंगे की साला जिंदगी भर याद रखेगा. ”

” सिर्फ याद ही नही… सालेको बरबादभी करेंगे”

फिरसे दोनोंने कुछ फैसला किये जैसे एकदूसरेकी जोरसे ताली बजाई और फिरसे जोरसे हंसने लगे.

रातको होस्टेलके गलियारेमें घना अंधेरा था. गलियारेके लाईट्स या तो किसीने चोरी किये होंगे या लडकोने तोड दिए होंगे. एक काला साया धीरे धीरे उस गलियारेमे चल रहा था. और वहासे थोडीही दुरीपर जॉन, ऍन्थोनी और उसके दो दोस्त एक खंबेके पिछे छुपकर बैठे थे. उन्होने पक्का फैसला किया था की आज किसीभी हालमें इस चोरको पकडकर होस्टेलकी लगभग रोज होनेवाली चोरीयां रोकनी है. काफी समयसे वे वहां छिपकर चोरकी राह देख रहे थे. आखिर वह साया उन्हे दिखतेही उनके चेहरेपर खुशी की लहर दौड गई.

चलो इतने देरसे रुके… आखिर मेहनत रंग लाई…

खुशीके मारे उनमें खुसुर फुसुर होने लगी.

” ए चूप रहो… यही अच्छा मौका है … सालेको रंगे हाथ पकडनेका ” जॉनने सबको चूप रहनेकी हिदायत दी.

वे वहांसे छिपते हूए सामने जाकर एक दुसरे खंबेके पिछे छूप गए.

उन्होने चोरको पकडनेकी पुरी प्लॅनींग और तैयारी कर रखी थी. चारोंने आपसमें काम बांट लिया था. उन चारोंमें एक लडका अपने कंधेपर एक काला ब्लॅंकेट संभाल रहा था.

” देखो… वह रुक गया … सालेकी घोंगड रपेटही करेंगे” जॉन धीरेसे बोला.

वह साया गलियारेमे चलते हूए एक रुमके सामने रुक गया.

” अरे किसकी रुम है वह ?” किसीने पुछा.

” मेरीकी ..” ऍन्थोनीने धीमे स्वरमे जवाब दिया.

वह काला साया मेरीके दरवाजेके सामने रुका और मेरीके दरवाजेके कीहोलमें अपने पासकी चाबी डालकर घुमाने लगा.

” देखो उसके पास चाबीभी है ” कोई फुसफुसाया.

” मास्टर की होगी ” किसीने कहा.

” या डूप्लीकेट बनाकर ली होगी सालेने ”

” अब तो वह बिलकुल मुकर नही पाएगा … हम उसे अब रेड हॅंन्डेड पकड सकते है. ” जॉनने कहा.

जॉन और ऍन्थोनीने पिछे मुडकर उनके दो साथीयोंको इशारा किया.

” चलो … यह एकदम सही वक्त है ” ऍन्थोनीने कहा.

वह साया अब ताला खोलनेकी कोशीश करने लगा.

सब लोगोंने एकदम उस काले सायेपर हल्ला बोल दिया. ऍन्थोनीने उस सायेके शरीरपर उसके दोस्तके कंधेपर जो था वह ब्लॅंकेट डालकर लपेट दिया और जॉनने उस सायेको ब्लॅकेटके साथ कसकर पकड लिया.

” पहले साले को मारो… ” कोई चिल्लाया.

सबलोग मिलकर अब उस चोरकी धुलाई करने लगे.

” कैसा हाथ आया रे साले … ”

” ए साले … दिखा अब कहां छुपाकर रखा है तुने होस्टेलका सारा चोरी किया हूवा माल”

ब्लॅंकेटके अंदरसे ‘आं ऊं’ ऐसा दबा हूवा स्वर आने लगा.

अचानक सामनेका दरवाजा खुला और मेरी गडबडाई हूई दरवाजेसे बाहर आगई. शायद उसे उसके रुमके सामने चल रहे धांदलीकी आहट हुई होगी. कमरेमें जल रहे लाईटकी रोशनी अब उस ब्लॅंकेटमें लिपटे चोरके शरीर पर पड गई.

” क्या चल रहा है यहां ” मेरी घाबराये हूए हालमें हिम्मत बटोरती हूई बोली.

” हमने चोरको पकडा है ” ऍन्थोनीने कहा.

” ये तुम्हारा कमरा डूप्लीकेट चाबीसे खोल रहा था. ” जॉनने कहा.

उस चोरको ब्लॅंकेटके साथ पकडे हूए हालमें जॉनको उस चोरके शरीरपर कुछ अजीबसा लगा. धांदलीमें उसने क्या है यह टटोलनेके लिए ब्लॅंकेटके अंदरसे अपने हाथ डाले. जॉनने हाथ अंदर डालनेसे उसकी उस सायेपरकी पकड ढीली हो गई और वह साया ब्लॅंकेटसे बाहर आगया.

” ओ माय गॉड नॅन्सी! ” मेरी चिल्लाई.

नॅन्सी कोलीन उनकेही क्लासमेंकी एक सुंदर स्टूडंट थी. वह ब्लॅकेटसे बाहर आई और अभीभी असंमजसके स्थितीमें जॉन उसके दोनो उरोज अपने हाथमें कसकर पकडा हूवा था. उसने खुदको छुडा लिया और एक जोर का तमाचा जॉनके कानके निचे जड दिया.

जॉनको क्या बोले कुछ समझमें नही रहा था वह बोला, ” आय ऍम सॉरी .. आय ऍम रियली सॉरी ”

” वुई आर सॉरी …” ऍन्थोनीनेभी कहा.

” लेकिन इतने रात गए तुम यहां क्या कर रही हो?” मेरी नॅन्सीके पास जाते हूए बोली.

” इडीयट … आय वॉज ट्राईंग टू सरप्राईज यू… तूम्हे जनमदिनकी शुभकामनाएं देने आई थी मै..” नॅन्सी उसपर चिढते हूए बोली.

” ओह … थॅंक यू … आय मीन सॉरी … आय मीन आर यू ओके?” मेरीको क्या बोले कुछ समझ नही आ रहा था.

मेरी नॅन्सीको रुममें ले गई. और जॉन फिरसे माफी मांगनेके लिए रुममे जानेलगा तो दरवाजा उसके मुंहपर धडामसे बंद होगया.

क्लास चल रहा था. क्लासमें जॉन और उसके दो दोस्त पास-पास बैठे थे. जॉनका खयाल बिलकुल क्लासमें नही था. वह बेचैन लग रहा था और अस्वस्थतासे क्लास खतम होने की राह देख रहा था. उसने एकबार पुरे क्लासपर अपनी नजर घुमाई, खासकर नॅन्सीकी तरफ देखा. लेकिन उसका कहा उसकी तरफ ध्यान था? वह तो अपनी नोट्स लेनेमे व्यस्त थी. कल रातका वाक्या याद कर जॉनको फिरसे अपराधी जैसा लगने लगा.

उस बेचारीको क्या लगा होगा ? …

इतने सारे लोगोंके सामने और मेरीके सामने मैने …

नही मैने ऐसा नही करना चाहिए था…

लेकिन जोभी हूवा वह गलतीसे हूवा…

मुझे क्या मालूम था की वह चोर ना होकर नॅन्सी थी…

नही मुझे उसकी माफी मांगना चाहिए…

लेकिन कल तो मैने उसकी माफी मांगनेका प्रयास किया था ..

तो उसने धडामसे गुस्सेसे दरवाजा बंद किया था…

नही मुझे वह जबतक माफ नही करती तबतक माफी मांगतेही रहना चाहिए…

उसके दिमागमें विचारोंका तुफान उमड पडा था. इतनेमें पिरियड बेल बजी. शायद ब्रेक हो गया था.

चलो यह अच्छा मौका है …

उसे माफी मांगनेका …

वह उठकर उसके पास जानेही वाला था इतनेमें वह लडकियोंकी भिडमें कही गुम होगई थी.

ब्रेककी वजहसे कॉलेजके गलियारेमें स्टूडंट्स की भिड जमा हो गई थी. छोटे छोटे समूह बनाकर गप्पे मारते हूए स्टूडंट्स सब तरफ फैल गए थे. और उस भिडसे रास्ता निकालते हूए जॉन और उसके दो दोस्त उस भिडमें नॅन्सीको ढूंढ रहे थे.

कहा गई?…

अभी तो लडकियोंकी भिडमें क्लाससे बाहर जाते हूए दिखी थी… .

वे तिनो इधर उधर देखते हूए उसे ढूंढनेकी कोशीश करने लगे. आखिर एक जगह कोनेमें उन्हे अपने दोस्तोंके साथ बाते करती हूइ नॅन्सी दिख गई.

”चलो मेरे साथ… ” जॉनने अपने दोस्तो से कहा.

” हम किसलिए … हम यही रुकते है … तुम ही जावो.. ” उसके दोस्तोमेंसे एक बोला.

” अबे… साथ तो चलो ” जॉन उनको लगभग पकडकर नॅन्सीके पास ले गया.

जब जॉन और उसके दोस्त उसके पास गए तब उसका खयाल इन लोगोंकी तरफ नही था. वह अपनी गप्पे मारनेमें मशगुल थी. नॅन्सीने गप्पे मारते हूए एक नजर उनपर डाली और उनकी तरफ ध्यान ना देते हूए अपनी बातोंमेही व्यस्त रही. जॉनने उसके और पास जाकर उसका ध्यान अपनी तरफ आकर्षीत करनेका प्रयास किया. लेकिन बार बार वह उनकी तरफ ध्यान ना देते हूए उन्हे टालनेका प्रयास कर रही थी. उधर उनसे काफी दूर ऍन्थोनी गलियारेसे जारहा था वह जॉनकी तरफ देखकर मुस्कुराया और उसने अपना अंगूठा दिखाकर उसे बेस्ट लक विश किया.

” नॅन्सी … आय ऍम सॉरी” जॉनको इतने लडको लडकियोंकी भिडमें शर्मभी आ रही थी. फिरभी ढांढस बांधते हूए उसने कहा.

नॅन्सीने एक कॅजूअल नजर उसपर डाली.

जॉनकी गडबडी हूइ दशा देखकर उसके दोस्तोने अब सिच्यूएशन अपने हाथमे ली.

” ऍक्च्यूअली हम एक चोरको पकडनेकी कोशीश कर रहे थे. ” एक दोस्तने कहा.

” हां ना … वह रोज होस्टेलमें चोरी कर रहा था. ” दुसरे दोस्त ने कहा.

जॉन अब अपनी गडबडीभरी दशासे काफी उभर गया था. उसने फिरसे हिम्मत कर अपनी रट जारी रखी, , ” नॅन्सी … आय ऍम सॉरी … आय रियली डीडन्ट मीन इट… मै तो उस चोरको पकडनेकी … .”

जॉन हाथोके अलग अलग इशारोंसे अपने भाव व्यक्त करनेकी कोशीश कर रहा था. वह क्या बोल रहा था और क्या इशारे कर रहा था उसका उसकोही समझ नही आ रहा था. आखिर वह एक हाव-भावके पोजीशनमें रुका. जब वह रुका तब उसके खयालमें आया की, भलेही स्पर्ष ना कर रहे हो, लेकिन उसके दोनो हाथ फिरसे नॅन्सीके उरोजोंके आसपास थे. वह नॅन्सीकेभी खयालमें आया. उसने झटसे अपने हाथ पिछे खिंच लिए. उसने गुस्सेसे भरा एक कटाक्ष उसके उपर डाला और फिरसे एक जोरका चांटा उसके गालपर जडकर चिढकर बोली, ” बद्तमीज”

इसके पहलेकी जॉन फिरसे संभलकर कुछ बोले वह गुस्सेसे पैर पटकाती हूई वहांसे चली गई थी. जब वह होशमें आया वह दूर जा चूकी थी और जॉन अपना गाल सहलाते हूए वहां खडा था.

शामका समय था. अपनी शॉपींगसे लदी हूई बॅग संभालती हूई नॅन्सी फुटपाथसे जा रही थी. वैसे अब खरीदनेका कुछ खास नही बचा था. सिर्फ एक-दो चिजे खरीदनेकी बची थी.

वह चिजे खरीद ली की फिर घरही वापस जाना है…

वह बची हूई एक-दो चिजे लेकर जब वापस जानेके लिए निकली तब लगभग अंधेरा होनेको आया था और रास्तेपरभी बहुत कम लोग बचे थे. चलते चलते नॅन्सीके अचानक खयालमें आया की बहुत देरसे कोई उसका पिछा कर रहा है. उसकी पिछे मुडकर देखनेकी हिम्मत नही बन रही थी. वह वैसेही चलती रही. फिरभी उसका पिछा जारी है इसका उसे एहसास हूवा. अब वह घबरा गई. पिछे मुडकर ना देखते हूए वह वैसेही जोरसे आगे चलने लगी.

इतनेमे उसे पिछेसे आवाज आया , ” नॅन्सी ”

वह एक पल रुकी और फिर चलने लगी.

पिछेसे फिरसे आवाज आया, ” नॅन्सी …”.

आवाजके लहजेसे नही लग रहा था की पिछा करने वाले का कोई गलत इरादा हो. नॅन्सीने चलते चलतेही पिछे मुडकर देखा. पिछे जॉनको देखतेही वह रुक गई. उसके चेहरेपर परेशानीके भाव भाव दिखने लगे.

यह इधरभी ..

अबतो सर पटकनेकी नौबत आई है…

वह एक बडा फुलोंका गुलदस्ता लेकर उसके पास आ रहा था. वह देखकर तो उसे एक क्षण लगाभी की सचमुछ अपना सर पटक ले. वह जॉन उसके नजदिक आनेतक रुक गई.

” क्यो तुम मेरा लगातार पिछा कर रहे हो ?” नॅन्सी नाराजगी जताते हूए गुस्सेसे बोली.

” मुझपर एक एहसान करदो और भगवानके लिए मेरा पिछा करना छोड दो ” वह गुस्सेसे हाथ जोडते हूए, उसका पिछा छूडा लेनेके अविर्भावमें बोली.

गुस्सेसे वह पलट गई और फिरसे आगे पैर पटकती हूई चलने लगी. जॉनभी बिचमें थोडा फासला रखते हूए उसके पिछे पिछे चलने लगा.

जॉन फिरसे पिछा कर रहा है यह पता चलतेही वह गुस्सेसे रुक गई.

जॉनने अपनी हिम्मत बटोरकर वह फुलोंका गुलदस्ता उसके सामने पकडा और कहा, ” आय ऍम सॉरी…”

नॅन्सी गुस्सेसे तिलमिलाई. उसे क्या बोले कुछ सुझ नही रहा था. जॉनकोभी आगे क्या बोले कुछ समझ नही रहा था.

” आय स्वीअर, आय मीन इट” वह अपने गलेको हाथ लगाकर बोला.

नॅन्सी गुस्सेमेतो थी ही, उसने झटकेसे अपने चेहरेपर आ रही बालोंकी लटे एक तरफ हटाई. जॉनको लगा की वह फिरसे एक जोरदार तमाचा अपने गालपर जडने वाली है. डरके मारे अपनी आंखे बंद कर उसने झटसे अपना चेहरा पिछे हटाया.

उसकेभी यह खयालमें आया और वह अपनी हंसी रोक नही सकी. उसका वह डरा हूवा सहमा हूवा बच्चोके जैसा मासूम चेहरा देखकर वह खिलखिलाकर हंस पडी. उसका गुस्सा कबका रफ्फु चक्कर हो गया था. जॉनने आंखे खोलकर देखा. तबतक वह फिरसे रास्तेपर आगे चल पडी थी. थोडी देर चलनेके बाद एक मोडपर मुडनेसे पहले नॅन्सी रुक गई, उसने पिछे मुडकर जॉनकी तरफ देखा. एक नटखट मुस्कुराहटसे उसका चेहरा खिल गया था. गडबडाए हूए हालमें, संभ्रममे खडा जॉनभी उसकी तरफ देखकर मंद मंद मुस्कुराया. वह फिरसे आगे चलते हूए उस मोडपर मुडकर उसके नजरोंसे ओझल हो गई. भले ही वह उसके नजरोंसे ओझल हूई थी, फिरभी जॉन खडा होकर उधर मंत्रमुग्ध होकर देख रहा था. उसे रह रहकर उसकी वह नटखट मुस्कुराहट याद आ रही थी.

वह सचमुछ मुस्कुराई थी या मुझे वैसा आभास हूवा ….

नही नही आभास कैसे होगा …

यह सच है की वहं मुस्कुराई थी …

वह मुस्कुराई इसका मतलब उसने मुझे माफ किया ऐसा समझना चाहिए क्या? …

हां वैसा समझनेमें कोई दिक्कत नही…

लेकिन उसका वह मुस्कुराना कोई मामूली मुस्कुराना नही था…

उसके उस मुस्कुराहटमें औरभी कुछ गुढ अर्थ छिपा हूवा था…

क्या था वह अर्थ?…

जॉन वह अर्थ समझनेकी कोशीश करने लगा. और जैसे जैसे वह अर्थ उसके समझमें आ रहा था उसकेभी चेहरेपर वही, वैसीही मुस्कुराहट फैलने लगी.

धीरे धीरे जॉन और नॅन्सी एकदूसरेके नजदीक खिंचते चले गए. उनके दिलमें कब प्रेमका बिज पनपना शुरु होगया उन्हे पता ही नही चला. झगडेसेभी प्रेमकी भावना पनप सकती है यह वे खुद अनुभव कर रहे थे. कॉलेजमे कोई पिरियड खाली होने पर वे मिलते. कॉलेज खत्म होनेपर मिलते. लायब्रीमें पढाईके बहानेसे मिलते थे. मिलनेका एक भी मौका वे छोडना नही चाहते थे. लेकिन सब छिप छिपकर चल रहा था. उन्हेने उनका प्रेम अभीतक किसीके खयालमें आने नही दिया था. लेकिन जो किसीके खयालमें नही आये उसे प्रेम कैसे कहे? या फिर एक वक्त ऐसा आता है की प्रेमी इतने बिन्दास हो जाते है की उनका प्रेम किसीके खयालमें आयेगा या किसीको पता चलेगा इस बातकी फिक्र करना वे छोड देते है. लोगोको अपना प्रेम पता चले ऐसी सुप्त भावनाभी शायद उनके मनमे आती हो.

काफी रात हो चूकी थी. अपनी बेटी अभीतक कैसे घर वापस नही आई यह चिंता नॅन्सीके पिता को खाये जा रही थी. वे बेचैन होकर हॉलमें चहलकदमी कर रहे थे. वैसी उन्होने नॅन्सीको पुरी छूट दे रखी थी. लेकिन ऐसी गैर जिम्मेदाराना वह कभी नही लगी थी. कभी देर होती तो वह घर फोन कर बताती थी. लेकिन आज उसने फोन करनेकीभी जहमत नही उठाई थी. इतने सालका उसके पिताका अनुभव कह रहा था की मामला कुछ गंभीर है.

नॅन्सी किसी गलत संगतमें तो नही फंस गई?…

या फिर ड्रग्ज वैगेरेकी लत तो नही लगी उसे ?…

अलग अलग प्रकारके अलग अलग विचार उनके दिमागमें घुम रहे थे. इतनेमें उन्हे बाहर कोई आहट हूई.

एक बाईक आकर घरके कंपाऊंडके गेटके सामने रुकी. बाईकके पिछेकी सिटसे नॅन्सी उतर गई. उसने सामने बैठे जॉनके गालका चूंबन लिया और वह गेटके तरफ निकल दी.

घरके अंदरसे, खिडकीसे नॅन्सीके पिता वह सब नजारा देख रहे थे. उनके चेहरेसे ऐसा लग रहा था की वे गुस्सेसे आगबबुला हो रहे थे. अपनी बेटीको कोई बॉय फ्रेंड है यह उनको गुस्सा आनेका कारण नही था. कारण कुछ अलग ही था.

हॉलमे सोफेपर नॅन्सीके पिता बैठे हूए थे और उनके सामने गर्दन झुकाकर नॅन्सी खडी थी.

” इन ब्लडी एशीयन लोगोंके अलावा तुम्हे दूसरा कोई नही मिला क्या? ” उनका गुस्सेसे भरा गंभीर स्वर गुंजा.

नॅन्सीके मुंहसे शब्द नही निकल पा रहा था. वह अपने पितासे बात करनेके लिए हिंम्मत जुटानेका प्रयास कर रही थी. उतनेमे नॅन्सीका भाई जॉर्ज कोलीन्स, उम्र लगभग तिस के आसपास, गंभीर व्यक्तीमत्व, हमेशा किसी सोचमें खोया हूवा, ढीला ढीलासा रहनसहन, घरमेंसे वहा आ गया. वह नॅन्सीके बगलमें जाकर खडा हो गया. नॅन्सीकी गर्दन अभीभी झूकी हूई थी. उसका भाई बगलमें आकर खडा होनेसे उसमें थोडा ढांढस बंध गया. वह गर्दन निचेही रखकर अपनी हिम्मत जुटाकर एक एक शब्द तोलमोलकर बोली, ” वह एक अच्छा लडका है … आप उसे एक बार मिल तो लो ”

” चूप बैठो … मुरख .. मुझे उससे मिलनेकी बिलकूल इच्छा नही. .. अगर तुम्हे इस घरमें रहना है तो तुम मुझे दुबारा उसके साथ दिखनी नही चाहिए… समझी ” उसके पिताने अपना अंतिम फैसला सुना दिया.

नॅन्सीके आंखोमें आंसू आगए और वहा से अपने आंसू छिपाते हूए वह घरके अंदर दौड पडी. जॉर्ज सहानुभूतीसे उसे अंदर जाते हूए देखता रहा.

घरमें किसीकीभी पिताजीसे बहस करनेकी हिम्मत नही थी.

जॉर्ज हिम्मत जुटाकर उसके पिताजीसे बोला, , ” पप्पा… आपको ऐसा नही लगता की आप थोडे जादाही कठोर हो रहे हो …. आपने कमसे कम नॅन्सी क्या बोलना चाहती है यह तो सुनना चाहिए… और एक बार वक्त निकालकर उस लडकेसे मिलनेमे क्या हर्ज है.?”

” मै उसका बाप हूं… उसका भला बूरा मेरे सिवा और कौन जान सकता है?.. और तुम्हारी नसिहत तुम्हारे पास ही रखो… मुझे उसके तुम्हारे जैसे हूए हाल देखनेकी बिलकुल इच्छा नही है… तुमनेभी एक एशीयन लडकीसे शादी की थी… आखिर क्या हूवा?… तुम्हारी सब प्रॉपर्टी हडप कर उसने तुम्हे भगवान भरोसे छोड दिया..” उसके पिताजी तेजीसे कदम बढाते हूए गुस्सेसे कमरेसे बाहर जाने लगे.

” पप्पा आदमीका स्वभाव आदमी-आदमीमें फर्क लाता है… ना की उसका रंग, या उसका राष्ट्रीयत्व…” जॉर्ज उसके पिताजीको बाहर जाते हूए उनकी पिठकी तरफ देखकर बोला.

उसके पिताजी जाते जाते अचानक दरवाजेमें रुक गए और उधर ही मुंह रखते हूए कठोर लहजेमें बोले, ”

” और तुम्हे उसकी पैरवी करनेकी बिलकुल जरुरत नही… और ना ही उसे सपोर्ट करनेकी ”

जॉर्ज कुछ बोले इसके पहलेही उसके पिताजी वहांसे जा चूके थे.

इधर नॅन्सीके घरके बाहर अंधेरेमें खिडकीके पास छिपकर एक काला साया अंदर चल रहा यह सारा नजारा देख और सुन रहा था.

क्लासमें एक लेडी टीचर पढा रही थी. क्लासमें कॉलेजके छात्र ध्यान देकर उन्हे सुन रहे थे. उन्ही छात्रोमें जॉन और नॅन्सी बैठे हूए थे.

” सो द मॉरल ऑफ द स्टोरी इज… कुछभी फैसला न लेते हूए बिचमेंही लटकनेसे अच्छा है कुछतो एक फैसला लेना …” टीचरने अबतक पढाए पाठका निष्कर्ष संक्षेपमें बताया.

नॅन्सीने छूपकर एक कटाक्ष जॉनकी तरफ डाला. दोनोंकी आखें मिल गई. दोनोंभी एक दुसरेकी तरफ देख मुस्कुराए. नॅन्सीने एक नोटबुकका पन्ना जॉनको दिखाया. उस नोटबुकके पन्नेपर बडे अक्षरोंमे लिखा था ‘लायब्ररी’. जॉनने हां मे अपना सर हिलाया. उतनेमें पिरीयड बेल बजी. पहले टिचर और बादमें छात्र धीरे धीरे क्लाससे बाहर जाने लगे.

जॉन हमेशा की तरह जब लायब्ररीमें गया तब ब्रेक टाईम होनेसे वहां कोईभी छात्र नही थे. उसने नॅन्सीको ढूंढनेके लिए इधर उधर नजर दौडाई. नॅन्सी एक कोनेमे बैठकर किताब पढ रही थी. या कमसेकम वैसा दिखावा करनेकी चेष्टा कर रही थी. नॅन्सीने आहट होतेही किताबसे सर उपर उठाकर उधर देखा.

दोनोंकी नजरे मिलतेही वह वहांसे उठकर किताबोंके रॅकके पिछे जाने लगी. जॉनभी उसके पिछे पिछे जाने लगा. एकदुसरेसे कुछभी ना बोलते हूए या कुछभी इशारा ना करते हूए सबकुछ हो रहा था. उनका यह शायद रोजका दिनक्रम होगा. नॅन्सी कुछ ना बोलते हूए भलेही रॅकके पिछे जा रही थी लेकिन उसके दिमागमें विचारोंका तुफान उमड पडा था.

जो भी हो आज कुछ तो आखरी फैसला लेनाही है…

ऐसे कितने दिन तक ना इधर ना उधर इस हालमें रहेंगे…

टीचरने जो पढाए पाठका संक्षेपमें निष्कर्ष बताया था.. वह सही था…

हमें कुछ तो ठोस निर्णय लेनाही होगा…

आर या पार …

बस अब बहुत हो गया …

उसके पिछे पिछे जॉन रॅकके पिछे कुछ ना बोलते हूए जा रहा था. लेकिन उसके दिमागमेंभी विचारोंका सैलाब उमड पडा था.

हमेशा नॅन्सी पिरियड होनेके बाद लायब्रीमें मिलनेके लिए इशारा करती थी. …

लेकिन आज उसने पिरियड शुरु था तबही इशारा किया..

उसके घरमें कुछ अघटीत तो नही घटा…

उसके चेहरेसे वह किसी दूविधामें लग रही थी …

अपने घरके दबावमें आकर वह मुझे छोड तो नही देगी…

अलग अगल प्रकारके विचार उसके दिमागमें घुम रहे थे.

रॅकके पिछे कोनेमें किसीके नजरमें नही आये ऐसे जगहपर नॅन्सी पहूंच गई और पिछेसे दिवारको अपना एक पैर लगाकर वह जॉनकी राह देखने लगी.

जॉन उसके पास जाकर पहूंचा और उसके चेहरेके भाव पढनेकी कोशीश करते हूए उसके सामने खडा हो गया.

” तो फिर तय हूवा … आज रात ग्यारह बजे तैयार रहो ..” नॅन्सीने कहा.

चलो मतलब अबभी नॅन्सी अपने घरके लोगोंके दबावमें नही आयी थी…

जॉनको सुकूनसा महसुस हूवा.

लेकिन उसने सुझाया हूवा यह दुसरा रास्ता कहां तक सही है? …

यह एकदम चरम भूमीकातो नही हो रही है ? …

” नॅन्सी तुम्हे नही लगता की हम जरा जल्दीही कर रहे है… हम कुछ दिन रुकेंगे… और देखते है कुछ बदलता है क्या … ” जॉनने कहा.

” जॉन चिजे अपने आप नही बदलती… हमें उन्हे बदलना पडता है… ” नॅन्सीने दृढतासे कहा.

उनकी बहूत देर तक चर्चा चलती रही. जॉनको अभीभी उसकी भूमीका सही नही लग रही थी. लेकिने एक तरहसे उसका सहीभी था. कभी कभी ताबडतोड निर्णय लेनाही अच्छा होता है. जॉन सोच रहा था.

लेकिन इस फैसलेके लिए मै अबभी पूरी तरहसे तैयार नही हूं…

मुझे मेरे घरके लोगोंके बारेंमेंभी सोचना चाहिए…

लेकिन नही हम कितने दिन तक इस तरह बिचमें लटके रहेंगे…

हमें कुछतो ठोस कदम उठाना जरुरी है…

जॉन अपना एक फैसलेपर पहूंचकर दृढतासे उसपर कायम रहनेका प्रयास कर रहा था.

उधर रॅकके पिछे उन दोनोंकी चर्चा चल रही थी और इधर दो रॅक छोडकर एक साया छूपकर उन दोनोंकी सब बातें सुन रहा था.

जॉनके दिमागमें विचारोकी कश्मकश चल रही थी. अब वह जो फैसला लेनेवाला था उसकी वजहसे होनेवाले सब परिणामोंके बारेमें वह सोच रहा था. नॅन्सीके साथ लायब्ररीमें किए चर्चासे दो-तीन बाते एकदम साफ हो गई थी –

एक तो नॅन्सी भलेही उपरसे ना लगे लेकिन अंदरसे वह बहुत खंबीर और जबान की पक्की है…

वह किसीभी हालमें मुझे नही छोडेगी…

या फिर वैसा सोचेगीभी नही …..

लेकिन अब उसे अपने आपकाही भरोसा नही लग रहा था.

मैभी उसकी तरह अंदरसे खंबीर और पक्का हू क्या ?…

बुरे वक्तमें मेरा उसके प्रती प्रेम वैसाही कायम रहेगा क्या ?…

या बुरे वक्तमें वह बदल सकता है ?..

वह अब खुदकोही आजमा रहा था. वक्तही वैसा आया था की उसे खुदकाही विश्वास नही लग रहा था.

परंतू नही …

मुझे ऐसा ढिला ढाला रहकर नही चलेगा…

मुझेभी कुछ ठोस फैसला लेना होगा..

और एक बार निर्णय लिया तो फिर बादमें उसके कुछ भी परिणाम हो, मुझे उसपर कायम रहना होगा…

जॉनने आखीर मनही मन एक ठोस फैसला लिया.

अपने कमरेका दरवाजा अंदरसे बंद कर वह उसे जिसकी जरुरत पडेगी वह सारी चिजे अपने बॅगमें भरने लगा.

सबकुछ ठिक तो होगा ना ?…

मुझे मेरे घरवालोंको सब बताना चाहिए क्या ?…

सोचते सोचते उसने अपनी सारी चिजें बॅगमें भर दी.

कपडे वैगेरा बदलकर उसने कुछ बचातो नही इसकी तसल्ली की. आखरी बची हूई एक चिज डालकर उसने बॅककी चैन लगाई. चेनका एक विशीष्ट ऐसा आवाज हूवा. उसने वह बॅग उठाकर सामने टेबलपर रख दी और टेबलके सामने रखे कुर्सीपर थोडा सुस्तानेके लिए बैठ गया. वह एक-दो पलही बैठा होगा की इतनेमें उसका मोबाईल व्हायब्रेट हो गया. उसने जेबसे मोबाईल निकालकर उसका डीस्प्ले देखा. डिस्प्लेपर उसे ‘नॅन्सी’ ऐसे डिजीटल शब्द दिखाई दिए. वह तुरंत कुर्सीसे उठ खडा हूवा. मोबाईल बंद किया, बॅग उठाई और धीरेसे कमरेसे बाहर निकल गया.

इधर उधर देखते हूए सावधानीसे जॉन मुख्य दरवाजेसे बाहर आ गया और उसने दरवाजा बाहरसे खिंचकर बंद कर लिया. फिर जॉगींग कियेजैसा वह कंधेपर बॅग लेकर कंपाऊंडके गेटके पास गया. बाहर रास्तेपर उसे एक टॅक्सी रुकी हूई दिखाई दी. कंपाऊंड के गेटसे बाहर निकलकर उसने गेटभी खिंचकर बंद कर लिया. टॅक्सीके पास पहूंचतेही उसे टॅक्सीमें पिछली सिटपर बैठकर उसकी राह देख रही नॅन्सी दिखाई दी. दोनोंकी नजरे मिली. दोनो एकदुसरेकी तरफ देखकर मुस्कुराए. झटसे जाकर वह बॅगके साथ नॅन्सीके बगलमें टॅक्सीमें घुस गया. टॅक्सीके दरवाजेका बडा आवाज ना हो इसका खयाल रखते हूए उसने सावधानीसे दरवाजा धीरेसे खिंच लिया. दोनो एकदुसरेकी बाहोंमे घुस गए. उनके चेहरेपर एक विजयी हास्य फैल गया था.

अब उनकी टॅक्सी घरसे बहुत दुर तेजीसे दौड रही थी. वे दोनो तेजीसे दौडती टॅक्सीके खिडकीसे आरहे तेज हवाके झोकेंका आनंद ले रहे थे. लेकिन उन्हे क्या पता था की एक काला साया पिछे एक दुसरी टॅक्सीमें बैठकर उनका पिछा कर रहा था…..

…. डिटेक्टीव्ह बेकर हकिकत बयान करते हूए रुक गया. डिटक्टीव सॅमने वह क्यों रुका यह जाननेके लिए उसके तरफ देखा. डिटेक्टीव्ह बेकरने सामने रखा ग्लास उठाकर पाणीका एक घूंट लिया. तबतक ऑफिसबॉयने चाय पाणी लाया था. डिटेक्टीव्हने वह उसके सामने बैठे डिटेक्टीव सॅम और उसके साथ आये एक ऑफिसरको परोसनेके लिए ऑफिसबायको इशारा किया.

ऑफिसबॉय चाय पाणी लेकर आनेसे बेकर जो हकिकत बता रहा था उसमें खंड पड गया. सॅमको और उसके साथीदारको आगेकी कहानी सुननेकी बडी उत्सुकता हो रही थी. सब लोगोंका चायपाणी होनेके बाद डिटेक्टीव्ह बेकर फिरसे आगेकी कहानी बताने लगा ….

… जॉनकी और नॅन्सीकी टॅक्सी रेल्वे स्टेशनपर पहूंच गई. दोनो टॅक्सीसे उतर गए. टॅक्सीवालेका किराया चूकाकर वे अपना सामान लेकर टिकीटकी खिडकीके पास चले गए. कहां जाना है यह उन्होने अबतक तय नही किया था. बस यहांसे निकल जाना है इतनाही उन्होने तय किया था. एक ट्रेन प्लॅटफॉर्मपर खडीही थी. जॉनने जल्दीसे उसी ट्रेनका टिकट निकाला.

प्लॅटफॉर्मपर वे अपना टिकट लेकर अपना रेल्वेका डिब्बा ढूंढने लगे. डिब्बा ढूंढनेके लिए उन्हे जादा मशक्कत नही करनी पडी. मुख्य दरवाजेसे उनका डिब्बा नजदिकही था. ट्रेन निकलनेका समय होगया था इसलिए वे तुरंत डिब्बेमें चढ गए. डिब्बेमें चढनेके बाद उन्होने अपनी सिट्स ढूंढ ली. अपने सिट के पास अपना सारा सामान रख दिया. उतनेमें गाडी हिलने लगी. गाडी निकलनेका वक्त हो चूका था. जैसेही गाडी निकलने लगी वैसे नॅन्सी जॉनको लेकर डिब्बेके दरवाजेके पास गई. उसे वहांसे जानेसे पहले अपने शहरको एक बार जी भरके देख लेना था. .

ट्रेनमें नॅन्सी और जॉन एकदम पास पास बैठे थे. उन्हे दोनोंको एकदुसरेका सहारा चाहिए था. आखिर उन्होने जो फैसला किया था उसके बाद उन्हे बस एकदुसरेकाही तो सहारा था. अपने घरसे सारे रिश्ते , सारे बंध तोडकर वे बहुत दुर जा रहे थे. नॅन्सीने अपना सर जॉनके कंधेपर रख दिया.

” फिर … अब कैसा लग रहा है ” जॉनने माहौल थोडा हलका करनेके उद्देशशे पुछा.

” ग्रेट” नॅन्सीभी झूटमुठ हंसते हूए बोली.

जॉन समझ सकता था की भलेही वह उपरसे दिखा रही हो लेकिन घर छोडने का दुख उसको होना लाजमी था. उसे सहारा देनेके उद्देशसे उसने उसे कसकर पकड लिया.

” तुम्हे कुछ याद आ रहा है ?” जॉनने उसे औरभी कसकर पकडते हूए पुछा.

नॅन्सीने प्रश्नार्थक मुद्रामें उसकी तरफ देखा.

” नही मतलब कोई घटना कोई प्रसंग… जब मैने तुम्हे ऐसेही कसकर पकडा था. ”

” मै कैसे भूल सकती हू उस घटना को… ” नॅन्सी उसने जब ब्लॅंकेटसे लपेटकर उसे कसकर पकडा था वह प्रसंग याद कर बोली.

” और तुमभी … ” नॅन्सी उसके गालपर हाथ मलते हूए उसे मारे हूए चाटेंकी याद देते हूए बोली.

दोनो खिलखिलाकर हंस पडे.

जब दोनोंका हसना थम गया नॅन्सी इतराते हूए उसे बोली , ” आय लव्ह यू”

” आय लव्ह यू टू” उसने उसे और नजदीक खिंचते हूए कहा.

दोनोभी कसकर एकदूसरेके आलिंगणमें बद्ध हो गए.

नॅन्सीने ट्रेनकी खिडकीसे झांककर देखा. बाहर सब अंधेरा छाया हूवा था. जॉनने नॅन्सीकी तरफ देखा.

” तुम्हे पता है … तुम्हे माफी मांगते वक्त वह फुलोंका गुलदस्ता मैने क्यों लाया था. ?” जॉन फिरसे उसे वह माफी मांगनेका प्रसंग याद दिलाते हूए बोला. वह प्रसंग वह कैसे भूल सकता था ? उसी पलमेंतो उनके प्रेमके बिज बोए गए थे.

” जाहिर है माफी जादा इफेक्टीव होना चाहिए इसलिए…” नॅन्सीने कहा.

” नही …. अगर मै सच कहूं तो तुम्हे विश्वास नही होगा.” जॉनने कहा.

” फिर … क्यों लाया था?”

” मेरे हाथ फिरसे कोई अजीब इशारे कर गडबड ना करदे इसलिए … नहीतो फिरसे शायद और एक चांटा मिला होता. ” जॉनने कहा.

नॅन्सी और जॉन फिरसे खिलखिलाकर हंस पडे.

धीरे धीरे उनकी हंसी थम गई. फिर थोडी देर सब सन्नाटा छाया रहा. सिर्फ रेल्वेका आवाज आता रहा. उस सन्नाटेमें न जाने क्यूं नॅन्सीको लगा की कोई इस ट्रेनमें बैठकर अपना पिछा तो नही कर रहा है..

नही … कैसे मुमकीन है…

हम भाग जानेवाले है यह सिर्फ जॉन और उसके सिवा और किसीकोभीतो पता नही था…

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