शादी से पहले प्यार

इसी तरह रात हंसी-मजाक करते-करते रात हो गई. और मैं अनिल को लेने स्टेशन पहुँच गया| जब वो डीबी से निकला तो उसके साथ सुमन भी थी| उसे डेक्क के मैं हैरान हुआ…..की ये? मतलब अनिल ने तो बताया नहीं की सुमन भी आ रही है, वरना उसके ठहरने का इन्तेजाम मैं कर देता| खेर मैं दोनों को टैक्सी से घर ले आया| आज संगीता ने पहली बार सुमन को देखा …ये तो नहीं कह सकता की दोनों दोस्त बन गईं पर हाँ ऐसा लगा की शायद उन्हें लड़की पसंद नहीं आई! रात के खाने के बाद सोने की बारी आई;

मैं: पिताजी…आप और माँ तो अपने कमरे में ही सोओगे!

आयुष: (जिद्द करते हुए) मैं दादी जी के पास सोऊंगा!

मैं: ठीक है मेरे बाप तू माँ के पास सो जाना!

आयुष: माँ नहीं दादी!

मैं: हाँ भई हाँ…मेरी माँ तेरी दादी जी ही हैं| चलो भाई इनका तो प्रोग्राम सेट…सुमन और संगीता अपने कमरे में…और मैं और तू (अनिल) एक कमरे में|

अनिल: जीजू, मैं यहीं सो जाऊँगा हॉल में|

माँ: नहीं बेटा ठण्ड का मौसम है|

अब सब फाइनल हो चूका था, सुमन तो संगीता के कमरे में चली गई, माँ-पिताजी भी अपने कमरे में चले गए, अनिल नेहा को मेरे कमरे में ले गया और गेम खेलने लगा|अब बस मैं और संगीता बचे थे, मैंने उन्हें इशारे से छत पे आने को कहा| आखिर मैं भी तो जानना चाहता था की वजह क्या है? पांच मिनट बाद वो भी छत पे आ गईं| मौसम ठंडा था पर वो सर्दी नहीं थी जो हाल ही के दिनों में पड़ने लगी है|

मैं: तो बताओ क्यों मुँह बना हुआ है आपका?

संगीता: वो लड़की…मुझे कुछ जचि नहीं!

मैं: क्या मतलब?

संगीता: पता नहीं …पर ऐसा लगता है की वो लड़की अनिल के लिए सही नहीं है|

मैं: यार देखो…पहले अनिल से बात करो| ऐसे ही अपना मन मत बनाओ!

संगीता: ठीक है… तो बस इसीलिए आपने मुझे बुलाया है?

मैं: नहीं…

मैं आगे बढ़ा और उन्हें दिवार से सटा के खड़ा कर दिया| उनका बदन मेरे दोनों हाथों के बीच था| मैं उनकी आँखों में दखते हुए उनके ऊपर झुका और उन्हें Kiss करने ही वाला था की इतने में मुझे cigarette की बू आई और सुमन हमारे सामने थी| मेरी पीठ उसकी तरफ थी पर संगीता का मुँह उसी की तरफ था| उसे देखा तो संगीता ने मुझे इशारे से कहा की कोई है| हमने मुड़ के देखा तो वो कड़ी cigarette पि रही थी| उसे cigarette पीता देख हम हैरान थे| मतलब मुझे भी नहीं पता था की वो cigarette पीती है|

सुमन: अरे जीजू…दीदी…आप लोग यहाँ क्या कर रहे हो? (उसने cigarette फेंक दी और वो बुरी तरह से हड़बड़ा गई|)

मैं: वो …हम…. (इतने में संगीता गुस्से में नीचे चली गई|) तुम cigarette पीती हो?

सुमन: जी कभी-कभी!

मैं: कभी-कभी का कोई सवाल नहीं होता! खेर तुम्हारी जिंदगी है जैसे मर्जी जिओ! वैसे अनिल जानता है?

सुमना: जी हाँ!

मैं आगे कुछ नहीं बोला और नीचे आ गया| मैं अपने कमरे में आया और अनिल से बात करने लगा| इतने में ही नेहा जिद्द करने लगी की उसे कहानी सुन्नी है| तो मैंने अनिल से कहा की तुम गेम खेलो मुझे तुम से कुछ बात करनी है| नेहा कहानी सुनते-सुनते उझे से लिपट के रजाई ओढ़ के सो गई|

मैं: अनिल….PC बंद कर और यहाँ बैठ, कुछ पूछना है तुझ से?

अनिल: जी अभी आया| (उसने PC बंद किया और दूसरी रजाई ओढ़के बगल में लेट गया|)

मैं: सुमना… cigarette पीती है? (ये सुन के उसका चेहरा फीका पड़ गया|)

अनिल: जी…वो… हाँ!

मैं: हम्म्म्म ….

अनिल: पर आपको कैसे पता?

मैं: हम अभी छत पे थे और वो cigarette पीते हुए आ गई|

अनिल: मतलब दीदी ने भी देख लिया? सत्यानाश!

मैं: Dude …. कल अपनी दीदी का सामना करने के लिए तैयार रहना|

अनिल: जीजू… please help me!

मैं: I can’t ….. until you tell me everything.

इतने में दरवाजे पे दस्तक हुई और संगीता एक दम से अंदर आई और बोली;

संगीता: अनिल…तुझे मालूम है ना वो लड़की cigarette पीती है? और तू…तू भी cigarette पीता है ना?

अनिल: नहीं दीदी…नहीं…मैं नहीं पीता|

संगीता: (मुझ से) देखा…कहाँ था न मुझे वो लड़की अजीब लगी| उस समय मुझे उसके मुँह से ऐसी ई बू आई थी| मुझे नहीं पता था की ये cigarette की बू है|

मैं: बाबू calm down! अगर वो सिगरेट पीती भी है तो…क्या प्रॉब्लम है?

संगीता: क्यों पीती है? ऐसी कौन सी बिमारी है?

मैं: यार अनिल उसे कहेगा तो वो छोड़ देगी|

अनिल: हाँ दीदी..वो पक्का छोड़ देगी?

संगीता: तूने मुझे बवकूफ समझा है? cigarette और शराब कभी छूटती है? तू उससे शादी नहीं कर सकता!

मैं: Hey …Hey …Hey ….. Don’t jump to a conclusion …okay! कल हम उससे बात करते हैं| अभी आप सो जाओ..और उसे कुछ मत कहना…promise me! अगर वो कुछ कहे तो कहना कल बात करते हैं!

संगीता: ठीक है…पर शादी से पहले ये मामला सुलझना चाहिए! (उन्होंने अनिल से कहा|)

अनिल: जी दीदी!

मैं: अच्छा बाबू..अब आप जाओ और सो जाओ|

वो चलीं गईं|

अनिल: thanks जीजू आपने वर्ल्ड वॉर रुकवा दी| वरना दीदी आज उसे घर से बाहर ही सुलाती| You really know how to control her anger!

मैं: Atleast for now she’s quite… पर बेटा…कल की तैयारी कर| उनकी मर्जी के आगे मेरी भी नहीं चलती…और अभी तो माँ-पिताजी ने भी तुझ से कल बहुत सवाल पूछने हैं?

अनिल: मर गया|

सुबह हुई और बच्चों के स्कूल जाने के बाद मैं चाय पी रहा था, सुमन Kitchen में मदद करना चाहती थी पर संगगता मदद नहं करने दे रही थी|

चूँकि पिताजी और माँ डाइनिंग टेबल पर ही बैठे थे इसलिए संगीता के होंठों पे चुप्पी थी| अगले पल गुस्से में संगीता नादर अपने कमरे में चली गई| अनिल और सुमन माँ-पिताजी के सामने बैठे थे…मैं उन्हें मानाने के लिए अंदर चला गया| वो बिस्तर के सामने कड़ी हो के रजाई तह लगा रही थीं की मैंने उन्हें पीछे से गले लगा लिया|

संगीता: छोड़िये! माँ-पिताजी देख लेंगे!

मैं: अच्छा पर पहले बताओ की मूड क्यों ऑफ है?

संगीता: वो मुझे वो लड़की नहीं जचि! रात भर मुझसे बात करने की कोशिश करती रहे पर मैं ने कुछ नहीं कहा|

मैं: Awwwww बाबू!

संगीता: आप ना… बहुत तरफदारी कर रहे हो उसकी! बार-बार बाबू कह के मुझे मना लेते हो! (और वो आके मेरे गले लग गईं|)

मैं: यार…चलो बाहर ..माँ-पिताजी बाहर बैठे हैं…चाय पीते हैं|

मैं उन्हें किसी तरह बाहर बुला लाया और सब चाय पी रहे थे|

पिताजी: तो अनिल…बेटा आगे क्या इरादा है! (उनका ये सवाल दोनों के लिए था, पर इससे पहले की सुमन कुछ बोलती..अनिल ही बोल पड़ा|)

अनिल: जी शादी! (वो रात से इतना हड़-बढ़ाया हुआ था की उसे समझ नहीं आ रहा था की वो क्या कह रहा है|)

मैं: O महान आत्मा…पिताजी पूछ रहे हैं की कोर्स के बाद क्या करना है? (ये सुन के सभी हँस पड़े|)

अनिल: Oh sorry …जी..वो….Job!

पिताजी: बेटा…अगर चाहो तो हमारे साथ काम join कर सकते हो! पर शायद समधीजी को ये पसंद ना आय?

अनिल: जी…शायद उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा…

मैं: क्यों? (मैंने गंभीर होते हुए पूछा|)

अनिल: जीजू..आपने उस दिन मासे बात की थी…तो पिताजी बहुत गुस्से में थे…उन्होंने आपके बारे में सब बोलना शुरू कर दिया| मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने उन्हें सब बता दिया| उन्हें कोई हक़ नहीं है आपको इस तरह जलील करने का|

पिताजी: ये तुमने ठीक नहीं किया बेटा| तुमने उन्हें ये तो नहीं बताया की तुम शादी attend करने आ रहे हो?

अनिल: क्षमा करें पिताजी…पर मैंने उन्हें सब बता दिया पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया!

पिताजी: बेटा….भगवान से दुआ करता हूँ की कोई नै परेशानी न कड़ी हो जाये तुम दोनों (मैं और संगीता) के जीवन में|

मैं: पिताजी…शादी के बाद मैं और संगीता जाके उनसे मिल लेंगे| वैसे शादी की तैयारी कैसी है?

माँ: तू तो ऐसे पूछ अहा है जैसे घर का बड़ा-बूढ़ा तू ही है? हमें पता है की क्या तैयारी करनी है और कैसे करनी है| तू बस खुद को काबू में रख!

माँ ने मेरे ऊपर कटाक्ष किया, क्योंकि कल से मैं कुछ ज्यादा ही रोमांटिक हो गया था| ये सुन के संगीता के गाल भी शर्म से लाल हो गए| खेर नाश्ते के बाद माँ-पिताजी खरीदारी के लिए निकल गए और अनिल को कुछ नंबर दे गए और उसे काम समझा दिया| शादी की तैयारी से मुझे और संगीता को बिलकुल दूर रखा गया था…ये पिताजी का प्लान था| मुझे तो ये भी नहीं बताया गया था की Venue कहाँ है| इसीलिए कार्ड जब हमें दिखाया गया तो उसे भी दूर से दिखाया गया| contents तो पढ़ने को ही नहीं मिले|

(09-30-2016 06:05 AM)  Le Lee 0
खेर अब संगीता ने अपने सवालों को शब्दों की बन्दूक में load कर लिया था और बस मेरे fire कहने की देरी थी और आज अनिल को सवालों की गोली से छलनी कर दिया जाना था| बातों का सिलसिला शुरू हुआ;

मैं: Guys … Lets start this Q and A round! Sangeeta shoot!

संगीता: My first question to you Suman, are you an alcoholic?

सुमन: No दीदी!

संगीता: Is this true Anil? And don’t you dare lie!

अनिल: She’s right …she doesn’t drink …and so do I.

संगीता: I’m not talking about you! (उन्होंने अकड़ और गुस्सा दिखाते हुए कहा|) Okay, why do you smoke?

सुमन: Because of my roomie… उसकी गलत संगत में… वो depression में थी…

संगीता: And instead of sstoppinh her…you started smoking right?

अनिल: नहीं दीदी…. she had a broke up…she was in depression…then we met …she found a soft spot inside my heart and ….

संगीता: Shut Up! क्यों झूठ बोला?

सुमन: दीदी…मैं अपने Past को याद नहीं करना चाहती|

संगीता: Its my brother’s life on the line, you have to dig your past and answer my every danm question!

अनिल: प्लीज दीदी…

संगीता: Shut up ! You? why did the two of you had a break up?

सुमन: I was fool to trust that he loves me. (वो रोने लगी| इधर अनिल मेरी तरफ देख रहा था की मैं इस Q and A को रोकूँ|)

मैं: Okay enough!

संगीता मेरा इशारा समझ गईं और उन्होंने सुमन के Past के बारे में कोई सवाल नहीं किया बस एक आखरी सवाल पूछा;

संगीता: तुम अनिल के लिए खुद को बदल सकती हो? तुम्हारा ये cigarette पीना…. ये नए-नए कपडे पहनना …. क्योंकि मेरे माँ-पिताजी बिलकुल ही Hardcore Indians हैं… उनहीं ये ने जमाने की लड़कियां बिलकुल नहीं पसंद? उन्हें वही गाँव की लड़की पसंद है जो आज भी मिटटी के चूल्हे पे खाना पका सके| और सब से जर्रुरी सवाल …क्या तुम अनिल के लिए अपने माँ-बाप को छोड़ सकती हो?

सुमन: दीदी आपके सारे सवालों का जवाब है हाँ! (उसकी आवाज में वही confidence था जो उस दिन संगीता की आवाज में था, जब उन्होंने अपने पिताजी की जगह मुझे चुना था|)

संगीता: No More Questions Dear! (उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा) I’m Sorry for being so rude!

सुमन: नहीं दीदी…मैं समझ सकती हूँ … आप अनिल की बड़ी बहन हो …. और आपको पूरा हक़ है|

संगीता ने उसके सर पे हाथ फेरा और finally ये मामला settle हुआ|

दिन बीतते गए और सात दिसंबर आ गया…सुबह-सुबह मैं साइट से लौटा तो अनिल डाइनिंग टेबल पे बैठा मेरा इन्तेजार कर रहा था|

अनिल: जीजू…बैठो! कुछ बात करनी थी|

मैं: हाँ बोल!

अनिल: जीजू…कल शादी है… मैं सोच अहा था की How about a Bachelor’s Party?

मैं: What? (मैंने इधर-उधर देखा तो माँ-पिताजी कमरे में थे..और संगीता और सुमन बाहर सब्जी खरीदने गए थे|)

अनिल: क्यों जीजू? आप drink नहीं करते?

मैं: मेरी छोड़…और तू अपनी बता! तू Drink करता है?

अनिल: हाँ कभी-कभी rommie के साथ!

मैं: पहली बात मैं तुम्हारी दीदी और माँ-पिताजी से वादा कर चूका हूँ की मैं कभी ड्रिंक नहीं करूँगा… और दूसरी बात आगर तुम्हारी दीदी और सुमन को ये पता चला की तूने पी है तो बेटा स्त्री शक्ति का सामना करने के लिए तैयार रहिओ|

अनिल: Oh Come on जीजू! सुमन कुछ नहीं कहेगी…

मैं: Dude … NO Bachelor’s party for me!

अनिल: ठीक है तो मैं दिषु भैया से कह देता हूँ की आप नहीं आ रहे|

मैं: दिषु? Oh God!

इतने में दिषु का फोन बज उठा, क्योंकि अनिल ने उसे sms कर दिया की “Jiju isn’t coming”|

मैं: Hi Bro !

दिषु: तो तू नहीं आ रहा?

मैं: ना यार…seriously … पिछली बार याद है ना?

दिषु: हाँ यार…तेरे से जयदा बड़ा काण्ड मेरे घर पे हुआ था|

मैं: यार..मैंने promise किया है….!

दिषु: अच्छा ठीक है….तू ड्रिंक मत करिओ पर हमारे साथ तो चल|

मैं: ठीक है…but promise me you won’t pressure me for drinks!

दिषु: I Promise!

रात का प्लान सेट हो गया|

हमने XXXXX PUB जाने का प्लान बनाया| घर से मैं ये बोल के निकल गया की मैं अनिल को साइट पे काम दिखा के आ रहा हूँ| जाते-जाते मैं पिताजी को बता गया की मैं अनिल और दिषु पार्टी करने जा रहे हैं| उन्होंने अपना वादा याद दिलाया और मैंने भी उनका पैर छू के हामी भरी की मैं अपना वादा नहीं भूलूँगा| दिषु ने हमें घर के बाहर से pick किया और हम loud music सुनते हुए Pub पहुँचे! दिषु हम दोनों के लिए टी-शर्ट्स और जीन्स ले आया था, जो हमने गाडी में ही बदल लिए थे| Pub पहुँचते ही दोनों आपे से बाहर हो गए| अनिल और दिषु तो पार्टी में खो गए| मैं बस PUB में बारटेंडर के पास बैठा हुआ था और “पानी” पी रहा था! I mean can you imagine guys … खेर as usual Music की धुन और शराब से दोनों टुन हो चुके थे! हाँ मैंने उन्हें कोई drug नहीं लेने दिया| वापसी में गाडी में ही ड्राइव कर रहा था| पहले दिषु को उसके घर छोड़ा| दरवाजा उसकी नौकरानी ने खोला और मैं उसे उसके कमरे में लिटा आया| वापसी में उसके पापा दिखे और बोले;

दिषु के पापा: आज फिर पी?

मैं: Sorry अंकल|

दिषु के पापा: पर तुम तो पिए हुए नहीं लग रहे?

मैं: जी…मैंने अपने पिताजी से वादा किया था|

दिषु के पापा: तो ये कैसी Bachelor’s party थी? दूल्हे को छोड़ के सबने पी! (वो मुस्कुराने लगे|) वैसे Good बेटा…काश ये पागल भी तुम्हारी तरह होता| तुम चाहो तो यहीं रुक जाओ|

मैं: अंकल…वो मेरा साला गाडी में है..उसे घर छोड़ के गाडी यहीं छोड़ जाता हूँ|

दिषु के पापा: नहीं..नहीं…बेटा…गाडी लेने कल इस पागल को भेज दूँगा|

मैं: Thanks अंकल and Good Night!

दिषु के पापा: Good Night बेटा!

मैं घर पहुँचा..शुक्र था की मेरे पास डुप्लीकेट चाभियां थीं तो मैं बिना किसी को उठाये अंदर aaya और दिषु को अपने कमरे में लेजाने लगा तो देखा वहाँ संगीता और सुमन सो रहे थे| मैं चुप-चाप पीछे हटा और उनके (संगीता) कमरे में उसे लिटा दिया और ऊपर रजाई डाल दी| आयुष तो अपनी दादी जी के पास सो रहा था और नेहा संगीता के पास| मेरे दरवाजा खोलने से शायद वो जाग गई थी| इसलिए जब मैं बैठक में लौटा, की चलो सोफे पर सो जाता हूँ तो नेहा कमरे का दरवाजा खोल के बाहर आई;

नेहा: पापा…आप तो सुबह आने वाले थे?

मैं: Awwww मेरा बच्चा सोया नहीं? आओ इधर! (नेहा आके मुझसे लिपट गई|)

नेहा: पापा आपके बिना नींद नहीं आती|

मैं: Awwwww मेरा बच्चा!

मैं चाहता तो अनिल के साथ उसी कमरे में सो जाता पर अब नेहा साथ थी… और अनिल से शराब की बू आ रही थी, और ऐसे हाल में मुझे ये सही नहीं लगा| अब सोफ़ा छोटा था तो दो लोग उसमें सो नहीं सकते थे| मैंने नेहा को गोद में उठाया और मैं पीठ के बल लेट गया और नेहा मेरे सीने पर सर रख के लेट गई| ऊपर से मैंने रजाई ले ली| नींद कब आई पता नहीं चला| सुबह तक मैं ऐसे ही पड़ा रहा| सुबह संगीता ने नेहा और मेरे ऊपर से रजाई उठाई तब मेरी नींद खुली| घडी में साढ़े पाँच बजे थे;

संगीता: What are you doing here?

मैं: Good Morning Dear!

संगीता: You didn’t answer me?

मैं: (मैंने अपनी एक आँख बंद की) रात को जल्दी लौट आया था!

संगीता: Seriously?

मैं: Yeah !

संगीता: तो यहाँ क्यों सोये हुए हो? और अनिल कहाँ है?

मैं: अंदर है! (मैंने उनके कमरे की तरफ इशारा किया| मैं समझ गया था की आज तो दोनों की शामत है!)

इतने में शोर सुन के पिताजी और माँ भी बाहर आ गए|

पिताजी: क्या हुआ भई? मानु…तू यहाँ क्यों सो रहा है?

मैं: जी वो…

संगीता: पिताजी….पता नहीं दोनों कहाँ गए थे? कपडे देखो इनके? कब आये कुछ पता नहीं? नेहा यहाँ कैसे पहुंची कुछ पता नहीं? अनिल कहाँ है, कुछ पता नहीं?

पिताजी: बेटा बात ये है की ये तीनों…. मतलब ये, अनिल और दिषु Party करने गए थे! मुझे बता के गए थे!

संगीता: Party? मतलब आपने शराब पी?

मैं: No Baby! Remember I promised you and dad!

संगीता: अनिल कहाँ है?

इतने में अनिल अपना सर पकडे बाहर आ गया|

अनिल: मैं इधर हूँ दीदी! आह! सर दर्द से फट रहा है!

संगीता समझ चुकी थी की अनिल ने शराब पी रखी है|

दीदी: तूने शराब पी?

अनिल: Sorry दीदी…ये मेरा और दिषु भैया का प्लान था| जीजू ने मन किया था पर हमारे जोर देने पे वो हमारे साथ Bachelor’s पार्टी के लिए गए थे| पर उन्होंने एक बूँद भी शराब नहीं पी! उनकी कोई गलती नहीं!

संगीता: तूने शराब कब से पीनी शुरू की?

अनिल: वो roomies के साथ कभी-कभी पी लेता था!

संगीता: देखा पिताजी…!

पिताजी: बेटा आज की young Generation ऐसी ही है| खेर छोडो इस बात को ..आज तुम दोनों की शादी है! मानु की माँ …अनिल को चाय दो…इसका सर दर्द बंद हो तो …आगे का काम संभाले|

अनिल: पिताजी…बस एक कप चाय और मेरा इंजन स्टार्ट हो जाएगा|

सुमन: पिताजी: मैं चाय बनाती हूँ|

मैं उठा और अपने कमरे में जाके चेंज करने लगा और फ्रेश होने लगा| तभी पीछे से संगीता आ गईं;

संगीता: Sorry

मैं: Its ओके जानू! Now gimme a kiss and smile!

संगीता: कोई Kiss Wiss नहीं …जो मिलेगी सब रात को?

मैं: यार… that’s not fair! कम से कम सुबह के गुस्से के हर्जाने के लिए एक Kiss दे दो!

उन्होंने ना में गर्दन हिलाई| और मैं बाथरूम जाने को मुदा की तभी उन्होंने अचानक से मुझे अपनी तरफ घुमाया और अपने पंजों पे खड़े हो के मुझे Kiss किया| मेरे दोनों हाथ उनके पीठ पे लॉक हो गए थे और उनके हाथ मेरी पीठ पे लॉक थे| मैं उनके होठों को चूसने में लगा था और उनके बदन की महक मुझे पागल कर रही थी| इतने में सुमन चाय ले के आ गई, हम ये भूल ही गए की दरवाजा खुला है|

सुमना: (खांसते हुए) ahem ! चाय for the love birds!

हम अलग हुए, और सुमन को मुस्कुराता हुआ देख संगीता ने मेरे सीने में अपना मुँह छुपा लिया| सुमन ने चाय टेबल पे रख दी और हमें देखने के लिए खड़ी हो गई| मैंने सुमन को जाने का इशारा किया..पर वो मस्ती में जानबूझ के खड़ी रही और मुस्कुराती रही| इतने में अनिल वहाँ आ गया और संगीता और मुझे इस तरह गले लगे हुए देख वो समझ गया और उसने सुमन का हाथ पकड़ा और खींच के बाहर ले गया|

मैं: Hey …they’re gone!

संगीता: They?

मैं: हाँ अनिल और सुमन|

संगीता: हे राम!

मैं: चलो जल्दी से Kiss निपटाओ और ….

संगीता: न बाबा ना …बस अब नहीं…अगर माँ आ गईं तो डाँट पड़ेगी!

खेर मुहूर्त नौ बजे का था … हमें यहाँ से बरात लेके छतरपुर जाना था| वहीँ का एक फार्महाउस पिताजी ने बुक किया था| संगीता, सुमन, अनिल, दिषु के माता-पीता और हमारे कुछ जानने वाले भौजी की तरफ थे| बरात लेके हम समय से पहुसंह गए और जो भी रस्में निभाईं जाती हैं वो निभाई गईं| अब बारी थी कन्यादान की! जब पंडित जी ने कन्यादान के लिए कहा तो पिताजी स्वयं आगे आये और पूरे आशीर्वाद के साथ उन्होंने कन्यादान पूरा किया| संगीता की आँखों से आंसूं की एक बूँद गिरी| मैंने देख लिया था पर उस समय रस्म चल रही थी तो मैं कुछ नहीं बोला| जैसे ही कन्यादान की रस्म समाप्त हुई मैंने उनके आंसूं पोछे और मेरे ऐसा करने से सब को पता चल गया की वो रो रहीं हैं| माँ उनके पीछे ही बैठी थीं, उन्होंने संगीता को थोड़ा प्यार से पुचकारा और उन्हें शांत किया| खेर इस तरह सारी रस्में पूरी हुईं और हम रात एक बजे के आस-पास घर पहुँचे|

ग्रह प्रवेश की रस्म हुई … उसके बाद सब बैठक में बैठे थे…मैं और संगीता भी| बच्चे हँस-खेल रहे थे; मैंने उन्हें अपने पास बुलाया और बोला;

मैं: नेहा…आयुष….बेटा अब से आप मुझे सब के सामने पापा “कह” सकते हो!

दोनों ने मुझे सब के सामने पापा कहा और मेरे गले लग गए| दोस्तों मैं बता नहीं सकता मेरी हालत उस समय क्या थी? गाला भर आया था और मैं रो पड़ा| पिताजी उठे और मेरे कंधे पे हाथ रख के मुझे शांत करने लगे|

मैं: पिताजी……मुझे….सात साल लगे….सात साल से मैं आज के दिन का इन्तेजार कर रहा था|

पिताजी: बस बेटा…शांत हो जा…अब सब ठीक हो गया ना! अब तुम दोनों पति-पत्नी हो! बस-बस!

माँ: (मेरे आंसूं पोंछते हुए) बेटा…. तू बड़े surprise प्लान करता है ना? आज मैं तुझे पहला सरप्राइज देती हूँ? ये ले… (उन्होंने एक envolope दिया)

मैं: ये क्या है?

माँ: खोल के तो देख?

मैंने उस envelope को लिया तो वो भारी लगा…उसे खोला तो उसमें से चाभी निकली! इससे पहले मैं कुछ कहता माँ बोलीं;

माँ: तेरी नई गाडी! क्या नाम है उसका?

पिताजी: Hyundai i10!

मैं: Awwwwwwww thanks माँ! मैं उठ के माँ के गले लग गया| Thank You Thank You Thank You Thank You Thank You Thank You !!!

पिताजी: O बस कर thank you …अब मेरी बारी ये ले… (उन्होंने भी मुझे एक चाभी का गुच्छा दिया|)

मैं: अब ये किस लिए? एक साथ कितनी गाड़ियाँ दे रहे हो आप?

पिताजी: ये तेरे फ्लैट की चाभी है!

मैं: मेरा फ्लैट? पर किस लिए? और मैं क्या करूँ इसका? Wait …wait ….Wait …. आप मुझे अलग settle कर रहे हो! Sorry पिताजी…. मैं ये नहीं लेने वाला|

पिताजी: बेटा…तुम लोग अपनी अलग जिंदगी शुरू करो| कब तक हमसे यूँ बंधे रहोगे|

संगीता उठी और मेरे हाथ से चाभी ली और पिताजी को वापस देते हुए बोली;

संगीता: Sorry पिताजी! हम आपके साथ ही रहेंगे…एक ही शहर में होते हुए आपसे अलग नहीं रह सकते| मुझे भी तो माँ-बाप का प्यार चाहिए! और आप मुझे इस सुख से वंचिंत करना चाहते हो?

माँ: देख लिया जी…मैंने कहा था न दोनों कभी नहीं मानेंगे| मुझे अपने खून पे पूरा भरोसा है| अच्छा बहु ये चाभी तू अपने पास ही रख|

मैं: (संगीता से चाभी लेते हुए) ये आप ही रखो… हमें नहीं चाहिए|

पिताजी: अच्छा भई…ये बाद में decide करेंगे| अभी बच्चों को सुहागरात तो मनाने दो|

अनिल और सुमन जो अभी तक चुप-चाप बैठे थे और हमारा पारिवारिक प्यार देख रहे थे वो आखिर बोले;

अनिल: जीजू…आप का कमरा तैयार है? चलिए !

हम कमरे में घुसे तो अनिल और सुमन दोनों ने कमरे को सजा रखा था| सुहाग की सेज सजी हुई थी और मैं देख के हैरान था…की wow ….!!! इतने मैं आयुष और नेहा भागते हुए आये और जगह बनाते हुए मेरी टांगों में लिपट गए|

आयुष: मैं तो यहीं सोऊँगा|

नेहा: मैं भी पापा के पास सोऊँगी|

अनिल: ओ हेल्लो… ये तुम दोनों के लिए नहीं है| आपके मम्मी-पापा के लिए है| आप आज सुमन जी के साथ सो जाओ|

बच्चे जिद्द करने लगे….

मैं: कोई बात नहीं यार… सोने दे|

इतने में पिताजी बोले;

पिताजी: बच्चों …आप में से किस को कल Special वाली Treat चाहिए?

दोनों एक साथ बोले; “मुझे”

पिताजी: तो फिर आज आप दोनों दादी और सुमन “मामी” के साथ सोओगे|

मैं: मामी? (अनिल के और सुमन के गाल लाल हो गए|)

पिताजी: हाँ भाई… अब सिर्फ शादी अटेंड करने के लिए तो कोई नहीं आता ना?

पिताजी की बात बिलकुल सही थी और सब समझ चुके थे की अनिल का इरादा क्या है? खेर सब बाहर गए और मैंने कमरा लॉक किया और उनकी तरफ मुड़ा;

मैं: FINALLY !!!! WE’RE TOGETHER !!!

संगीता: नहीं अभी नहीं…अब भी पाँच फुट का गैप है! ही…ही…ही…ही…

खेर वो रात मेरे लिए कभी न भूलने वाली रात थी! उस रात मैंने जो चाहा वो सब मिल गया| Thanks भगवान…and Thanks to you guys! सुहागरात के बारे में मैं कुछ नहीं लिख सकता क्योंकि NOW Its PERSONAL! Hope You’ll understand !!!

परसों ससुर जी और सासु माँ आये थे जिनके बारे में मैंने आपको बहुत Brief में बताया था, तो उस बारे में भी आपको बता दूँ की आखिर बात क्या हुई| सुबह उठ के हम चाय पि रहे थे और बच्चे भी अभी नहीं उठे थे| दरवाजे पे दस्तक हुई, संगीता ठ के दरवाजा खोलने जा रही थी की मैंने उसे रोका और खुद ही दरवाजा खोलने चला गया| दरवाजा खोलते ही सामने देखा तो ससुर जी और सासु माँ खड़े थे| मैं एक दम से झुक के उनके पाँव हाथ लगाने लगा तो उन्होंने मुझे आधे में ही रोक लिया और ससुर जी ने मुझे अपने गले लगा लिया| इतने में पिताजी भी पीछे से आ गए;

पिताजी: समधी जी आप?

तब ससुर जी ने मुझे छोड़ा और मैं सासु माँ के पाँव चुने लगा| पिताजी की आवाज सुन के माँ और संगीता भी उठ के आ गए और अपने माता-पिता को देख संगीता की आँखें भर आईं पर वो अपनी जगह से हिली नहीं| पिताजी और ससुर जी गले मिले और इधर माँ और सासु माँ गले मिले| इस मिलनी का फायदा उठा के मैं संगीता के पास पहुँचा;

मैं: जान…आप खड़े क्यों हो? मम्मी-डैडी से गले नहीं मिलोगे?

संगीता रो पड़ी और मेरे कंधे पे सर रख के बोली;

संगीता: पिताजी ने आपकी इतनी बेइज्जती की और आप….

मैं: (मैंने उनकी बात काट दी) Hey …वो बड़े हैं..गुस्से में थे..कुछ कह दिया तो क्या हुआ? और आपने आज देखा ना…उन्होंने मुझे गले लगा लिया, अब इससे ज्यादा और क्या चाहिए आपको?

संगीता अब भी हिचक रही थी|

मैं: okay बाबा..माँ से तो मिलो? उन्होंने ने तो कुछ नहीं कहा था ना?

मैं उन्हें अपने साथ ले के मम्मी जी के पास लाया और वो उनसे गले मिली| मम्मी ने उनका माथा चूमा और तभी डैडी ने उनसे कहा;

ससुर जी: बेटी मुझसे गले नहीं लगेगी? अब तक नाराज है मुझ से?

संगीता उनके पास नहीं गई;

मैं: Hey? Come on ..

ससुर जी: बेटा (मैं) मुझ से गलती हो गई (उन्होंने हाथ जोड़े)…

पिताजी: (उनकी बात काटते हुए) नहीं ..नहीं समधी जी… आप ये क्या कर रहे हैं? कोई बात नहीं है…ये आपका भी उतना ही बेटा है जितना मेरा है| गुस्से में हो गया सो ओ गया..आप आइये और बैठिये|

ससुर जी: नहीं समधी जी…मैंने अपने सारे अधिकार खो दिए| मैं गुस्से से अँधा हो गया था| मुझे सब कुछ बाद में पता चला.. मानु ने जो हमारे परिवार के लिए किया …वो सब जानने के बाद सच कहूँ तो …मेरी हिम्मत नहीं होती की मैं आपके सामने भी खड़ा रह सकूँ| (वो झुक के पिताजी के आंव छूने लगे तो पिताजी ने उन्हें रोक दिया|) मैंने उसे इतना गलत समझा…उसे इतना भला-बुरा कहा और आज उसने मुझे देखते ही पाँव छुए…. मैं शर्मसार हूँ!

पिताजी: नहीं समधी जी… जो हुआ सो हुआ… मिटटी डालिये उन बातों पर| मानु की माँ…चाय रखो!

ससुर जी: अरे नहीं समधी जी…बेटी के घर का तो पानी भी नहीं पी सकते|

पिताजी: अरे समधी जी..वो सब पुरानी बातें हैं|

मैं: डैडी ..प्लीज ….

पिताजी: बस समधी जी… अब आप मना नहीं करेंगे|

ससुर जी ने मुझे अपने बॉस बिठा लिया और ये देख के संगीता अंदर अपने कमरे में आ गई थी| मैं उठा और अपने कमरे में आ गया| बच्चे अभी भी नहीं उठे थे, और संगीता बेड के किनारे खड़ी थी|

मैं: Hey … listen to me … आप मुझसे प्यार करते हो ना?

संगीता ने हाँ में सर हिलाया|

मैं: तो मेरे लिए प्लीज मेरे लिए…डैडी जी से मिल लो!

संगीता आ के मेरे गले लग गई| फिर वो मेरा हाथ पकड़ के बाहर आईं और अपने पिताजी से गले मिलीं और रो पड़ीं| डैडी जी ने बहुत कोशिश की पर वो चुप नहीं हुईं और अब तो डैडी जी की आँखें भी छलक आईं| आखिर वो मेरे गले लगीं और फिर मैंने उनके सर पे और बालों में हाथ फेरा तब जाके वो चुप हो गईं|

ससुर जी: समधी जी …आज दोनों को ये प्यार देख के मुझे यकीन हो गया की मेरी बेटी ने सही वर चुना है|

अब शर्म से मेरे गाल लाल हो गए थे!

मैं: डैडी जी…मैं आप को और मम्मी जी को …एक खुशखबरी देना चाहता हूँ! संगीता प्रेग्नेंट है…उसे डेढ़ महीना हो गया है!

सासु माँ: बधाई हो समधन जी!

ससुर जी: बधाई हो समधी जी..और तुम दोनों को भी बधाई हो! ये बड़ी जबरदस्त खुशखबरी है! इसे मैं ऐसे नहीं जाने दूँगा… मैं अभी आया|

मैं: डैडी जी..आप कहाँ जा रहे हो?

ससुर जी: मिठाई लेने

माँ: अरे समधी जी ये लीजिये मुँह मीठा कीजिये|

माँ ने मिठाई का एक डिब्बा फ्रिज से निकाल के पिताजी को दिया और पिताजी ने मिठाई का एक पीस अपने हाथ से डैडी जी को खिलाया और इस तरह सब को मिठाई खाने-खिलाने का दौर चल पड़ा| सब बहुत खुश थे तभी डैडी जी बोले;

ससुर जी: बेटा तब तो कुछ दिन बाद मैं दुबारा तुम्हें लेने आऊँगा?

संगीता: जी पर क्यों?

ससुर जी: बेटा..तुम माँ बनने वाली हो ….मायके तो आना ही होगा? फिर नेहा और आयुष भी तो….

मैं: (उनकी बात काटते हुए) Sorry डैडी जी, पर मैं संगीता का पूरा ख्याल रखूँगा!

ससुर जी: पर बेटा … तुम काम में बिजी रहोगे और फिर समधन जी को अकेले सब सम्भालना पड़ेगा|

मैं: नहीं.. डैडी जी… मैं काम पे जाना छोड़ दूँगा…पिताजी संभाल लेंगे!

पिताजी: समधी जी, बात ये है की ये दोनों एक दूसरे के बिना एक पल भी नहीं रह सकते! इसने तो अभी से इसकी देखबाल शुरू कर दी है| एक नौकरानी आती है जो कपडे, झाड़ू और बर्तन कर के जाती है और पिछले तीन दिनों से तो ये लाड-साहब खाना भी बना रहे हैं|

ये सुन के सारे हँस पड़े और मेरी भी हँसी छूट गई|

घर में हँसी-ख़ुशी का माहोल था और ये हँसी ठहाका सुन बच्चे भी बाहर आ गए और नाना-नानी को देख मेरे पास खड़े हो गए|

मैं: बच्चों …नाना-नानी के पाँव छुओ!

मेरी बात सुन के दोनों ने जाके उनके पाँव छुए और डैडी जी और मम्मी जी उन्हें दुलार करने लगे|

ससुर जी: बेटा…तुमहरा दिल बहुत बड़ा है…तुमने दोनों को इस तरह अपना लिया जैसे ये दोनों तुम्हारा ही खून हैं|

मैं: Actually ..डैडी जी…आयुष …मेरा ही खून है और रही नेहा की बात तो…मैंने उसे उसके असल बाप से भी ज्यादा प्यार किया है| मैंने कभी दोनों में फर्क नहीं किया और ना ही उस नए मेहमान के आने के बाद करूँगा|

ससुर जी और सासु माँ हैरान हुए, होना भी था पर अगले पल दोनों के मुख पे मुस्कान आ गई|

सासु माँ: बेटा…तो क्या जब तुम गाँव आये थे तब….(उन्होंने बात आधी छोड़ दी|)

मैं: जी… उन दिनों में हम बहुत नजदीक आ गए और ….

फिर मैंने उन्हें सारी कहानी शुरू से आखिर तक सुना दी|

ससुर जी: बेटा..कुछ भी कहो…हमने तुम-दोनों जैसा प्यार नहीं देखा!!! तुम दोनों एक दूसरे के लिए ही बने हो..और भगवान तुम्हारी जोड़ी बनाये रखे|

शाम को जाते-जाते उन्होंने हमें आशीर्वाद दिया और आने वाले मेहमान को भी अपना प्यार भरा आशीर्वाद देके जाने लगे| हाँ उन्होंने मुझे शगुन में कुछ पैसे दिए जिनहिं मेरे लाख मना करने पर भी वो नहीं माने|

15 दिसंबर को सतीश जी से मुझे हमारा Marriage Certificate मिल गया और मैं आयुष और नेहा के स्कूल पहुँच गया| Admin में जाके मैंने अपना marriage certificate की कॉपी और ओरिजिनल दिखा के दोनोंके Father’s Name को change करा दिया| So now officially I’m their father!

So guys, here’s a turn of events!

My Honeymoon just got canceled! क्योंकि आयुष और नेहा ने जिद्द पकड़ ली की हम भी जायेंगे|
सामान पैक था, tickets तैयार थीं और होटल booked था!

आयुष: पापा हम भी जायेंगे!

नेहा: पापा आप हमें छोड़ के चले जाओगे?

मैं: बेटा किसने कहा की हम आपको छोड़के जा रहे हैं? Come here …

मैंने दोनों को गले लगा लिया अपना फोन निकला और होटल फोन करके एक एक्स्ट्रा कमरा बुक करने वाला था की संगीता नाराज हो गई;

संगीता: तुम दोनों बड़े हो गए हो! Just act like a grownup!

मैं: Hey … Hey … Hey …. मैं एक एक्स्ट्रा कमरा बुक कर रहा हूँ|

संगीता: Oh yeah … और इन दोनों शैतानों का ध्यान कौन रखेगा?

मैं: okay … बाबू calm down …. I’ll figure out something! नेहा … आयसुह …बेटा आपका स्कूल है ना? तो आप हमारे साथ कैसे आ सकते हो?

आयुष: तो पापा आप हमें Winters holidays में हमें साथ ले चलो?

मैं दोनों के reason को सुन के हँस पड़ा|

मैं: clever हाँ…

संगीता: आपने देखा इन्हें?

मैं: okay done!

संगीता: Really? कभी-कभी लगता है मैं आपको कभी नहीं समझ पाऊँगी! बच्चों की ख़ुशी के लिए आप कुछ भी करते हो! हमारा Honeymoon तक cancel कर दिया?

मैं: बाबू cancel नहीं postpone. आप बताओ बच्चों का दिल तोड़के हम कैसे जा सकते हैं? उनका भी मन है घूमने का…

संगीता: और पिताजी से क्या कहोगे?

मैं: (लम्बी सांस छोड़ते हुए) देखते हैं…!

हम चारों बैठक में आये … गाडी रात की थी …या ये कहूँ की है ….. पर change of plans!

पिताजी: सारी तैयारी हो गई?

मैं: अ…….

संगीता: पिताजी हम नहीं जा रहे|

माँ: क्या? पर क्यों? मानु..क्या किया तूने?

मैं: नेहा और आयुष साथ आने की जिद्द कर रहे हैं| अब इनका दिल तोड़के कैसे जाउँ?

पिताजी: इधर आओ बेटा (उन्होंने नेहा और आयुष को अपने पास बुलाया और उन्हें समझाने लगे|) देखो बेटा ..आपके मम्मी-पापा को जाने दो…मैं और आपकी दादी जी आपको घुमाने इनसे अच्छी जगह ले जायेंगे| ये तो ठण्ड में अकड़ जायेंगे…हम आपको ताजमहल दिखाने ले जायेंगे|

आयुष: नहीं दादा जी… मैं पापा के साथ रहूँगा| (और वो आके मेरी कमर से हाथ लपेट के खड़ा हो गया|)

नेहा: हाँ दादा जी… मैं भी आयुष के साथ पापा के साथ ही जाऊँगी| (नेहा ने पिताजी को गले लगा लिया और सुबकने लगी|)

पिताजी: बेटा देखो जिद्द नहीं करते|

माँ: आप सब की कोशिश हो गई तो मैं कुछ कहूँ| बच्चों आप में से किस को गाजर का हलवा खाना है?

आयुष: मुझे! दीदी चलो …. (आयुष उठ के नेहा को चुप कराते हुए उसे माँ के पास ले जाने लगा|)

माँ: ऐसे नहीं…पहले मम्मी-पापा को जाने दो उसके बाद मैं रोज तुम्हें गाजर का हलवा खिलाऊँगी…!

आयुष: दादी जी ऐसा करते है की हम वापस आ के खाएंगे| (अब दोनों वापस मेरे पास आ गए|)

मैं: पिताजी …कोई फायदा नहीं ये नहीं मानने वाले| मैं हम सब की टिकट्स बुक कराता हूँ| वैसे भी साल हो गए हमें Family Holiday पे गए हुए… आप लोग साथ होगे तो इन दोनों का भी ध्यान रख पाओगे!

पिताजी: बेटा तुझे पता है ना काम कितना फैला हुआ है? हम कैसे जा सकते हैं? तू ऐसा कर अपनी माँ को साथ ले जा|

माँ: वाह! तो यहाँ आपका ख्याल कौन रखेगा?

संगीता: पिताजी जायेंगे तो सारे नहीं तो कोई भी नहीं|

मैं: Agreed!

संगीता: आप कल से काम संभाल लो ..और जल्दी से काम निपटा लो…या कम से कम काम तो कम हो जायेगा तो संतोष भैया भी संभाल लेंगे|

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