रेखा थी अतुल का माल

आपने मेरी लिखी कहानी “हमारी नौकरानी सरीना “पढ़ी।
उसी को आगे बढ़ाते हुए अब अगला भाग “रेखा- अतुल का माल” पढ़िए।
दो बजने से 5 मिनट पहले ही घंटी बजी। सामने अतुल, उनकी पड़ोसन रेखा और सरीना खड़ी थीं। सरीना के हाथ मैं एक बैग था जिसमें कुछ कपड़े थे।
हम लोग अन्दर आ गए, सरीना ने मेरा परिचय अतुल और रेखा से कराया। रेखा एक सांवले बदन की 28-29 साल की छोटी-छोटी चूचियों वाली पतली दुबली महिला थी।
हमने कोल्ड ड्रिंक और चिप्स का नाश्ता किया।
फ़िर सरीना बोली- आप लोग कपड़े बदल लो !
बैग में से दो लुंगी निकाल कर उसने हमें दे दीं। सरीना ने दोनों के कान में कहा- आप अंदर जाकर सिर्फ लुंगी पहन लो !
हम लोग अंदर अपने सारे कपड़े उतार कर सिर्फ लुंगी पहन कर आ गए।
सरीना बोली- रेखा जी, आप थोड़ी शरमा रही हैं, आप साड़ी उतार दें और मैं आपको पेटीकोट ब्लाउज देती हूँ ! उन्हें पहन लें नहीं तो आपके कपड़े ख़राब हो जाएँगे, थोड़ी देर पेटीकोट-ब्लाउज में रहेंगी तो शर्म भी छूट जाएगी।
थोड़ा न-नुकुर के बाद रेखा ने अंदर जाकर कपड़े बदल लिए। अब वह गहरे गले के ब्लाउज और पेटीकोट में थी। पेटीकोट नाभि के नीचे बंधा था, रेखा का बदन चिकना और जवान था जिसने मेरा लण्ड खड़ा कर दिया था। हम लोग बेडरूम में आ गए थे। इसके बाद अतुल और मुझे सरीना ने एक एक हॉट ड्रिंक दे दी, थोड़ी सी उसने रेखा को दी थी। हम सब लोगों ने ड्रिंक पीना शुरू कर दी थी।
रेखा ब्लाउज के नीचे ब्रा नहीं पहने थी। अतुल रेखा के ब्लाउज में हाथ डाल कर उसकी छोटी छोटी चूचियाँ 5-5 बार दबा चुका था। रेखा उसका हाथ बार बार हटा देती थी।
सरीना रेखा के पास गई और बोली- इतना शरमाओगी तो रात का मज़ा कैसे लोगी? ब्लाउज उतार लो और इन छोटी छोटी संतरियों का जूस अतुल जी को पिलाओ तभी तो रात का पूरा मज़ा मिलेगा। सरीना ने पीछे जाकर उसके ब्लाउज के बटन खोल दिए और उसका ब्लाउज उतार दिया। रेखा की नरम नरम चिकनी और छोटी छोटी दूधिया चूचियाँ बाहर निकल आई थीं, मेरा और अतुल दोनों का लण्ड उछालें मार रहा था।

अतुल लुंगी ठीक से नहीं पहने थे, उनका लण्ड खड़ा हुआ था जो 5 इंच के करीब होगा, मेरा भी ८ इंची तना हुआ लण्ड लुंगी से बाहर निकलने को उतावला हो रहा था। अतुल रेखा से चिपक कर उसके गुलाबी होंठ चूमने लगा और साथ ही साथ उसके नंगे दूध कस कस कर मसल रहा था। अतुल की लुंगी खुलकर हट गई थी अब उसका नंगा लण्ड हम सब देख सकते थे।
सरीना ने आगे बढ़कर रेखा का हाथ अतुल के लण्ड पर रख दिया और रेखा से बोली- अब शर्म छोड़ दे और रंडी बन जा ! मजे कर ! शरमा नहीं ! आज दो-दो लण्डों से खेल सकती है ! ऐसा मौका शरीफ औरतों को रोज रोज नहीं मिलता है, तुझे चूत और गाण्ड का ऐसा मज़ा दिलवाऊँगी कि तू जिन्दगी भर याद रखेगी ! बस अब शराफत छोड़ दे और एक रात के लिए वेश्या बन जा।
अतुल ने रेखा की एक चूची मुँह में पूरी भर ली और दूसरी का चुचूक दबाने लगा। उसका छोटा सा 5 इंची लौड़ा रेखा मसल रही थी, मेरा लौड़ा तना हुआ था और मैं उसे लुंगी के ऊपर से सहला रहा था। सरीना ने मेरी लुंगी हटा दी थी मेरा ८ इंच लम्बा लण्ड अब सरीना के हाथों में था। सरीना उसे रेखा को दिखाती हुई सहला रही थी। रेखा चोर आँखों से मेरा लण्ड देख रही थी।
सरीना रेखा को गर्म करने के लिए मेरा लौड़ा चूसने लगी। मैं सरीना का पेटीकोट ऊपर उठाकर उसके नंगे चूतड़ों को मलने लगा। कुछ देर लण्ड चूसने के बाद सरीना उठी उसने अपना पेटीकोट और ब्लाउज उतार दिया अब वो पूरी नंगी थी। उसने आगे बढ़कर पलंग पर बेठी हुई रेखा के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और उसे हाथों से खींचकर उतार दिया। रेखा की नंगी चूत मेरी आँखों के सामने थी। मेरा लण्ड उसकी चूत देखकर कड़ा हुए जा रहा था। अतुल उसकी चूचियों से अब भी खेल रहा था। रेखा की नंगी खुली चूत मेरे लण्ड को चोदने का आमंत्रण दे रही थी।
सरीना ने मुस्कुरा कर मुझे देखा और धीरे से बोली- अभी पूरी रात बाकी है ! तुम भी जमकर इसकी चोदना लेकिन अभी थोड़ा सब्र करो !

और सरीना ने अतुल को आँख मारते हुए मेरा लौड़ा दुबारा मुँह में घुसा लिया।
अतुल उठा और उसने अपना लौड़ा भी रेखा के मुँह पर रख दिया। रेखा अतुल की गोद में लेटकर सरीना की देखादेखी उसे लबालब चूसने लगी। अतुल मेरे पास बैठा हुआ था, हम दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुराए। मैंने अतुल से कहा- यार, थोड़ा अपना माल मुझे भी चखा देना।
अतुल बोला- साली की गाण्ड मार लूँ, फिर साथ साथ दोनों कुतियाओं को बजाएँगे।
मैंने कहा- सरीना को अपना लौड़ा चुसवाओ ! बहुत मस्त चूसती है।
अतुल ने लौड़ा रेखा के मुँह से निकल लिया सरीना ने भी मेरे मुँह से लण्ड निकाल दिया और रेखा को हटाकर अतुल का लण्ड अपने मुँह में ले लिया। मैंने रेखा को अपनी तरफ खींच लिया और उसके मुँह पर अपना लण्ड रख दिया, रेखा बोली- आपका तो बहुत बड़ा है?
मैंने उसके कान में कहा- मुँह में रखो मज़ा भी बड़ा देगा।
रेखा गर्म हो चुकी थी, उसने मेरा लण्ड अपने मुँह में ठूंस लिया। अब दोनों औरतें अतुल और मेरा लण्ड मस्त होकर चूस रहीं थीं। रेखा की चूचियाँ भी अब मेरे हाथों में खेल रही थीं।
थोड़ी देर बाद सरीना ने अतुल का लण्ड अपने मुँह से निकाल दिया और रेखा के मुँह से भी मेरा लण्ड हटा दिया। अतुल रेखा की चूत पर हाथ फेरते हुए बोला- राजीव, वाकई सरीना जी ने तो आज सच लौड़ा चूसने का असली मज़ा दिया। यह मेरी कुतिया तो चूसना जानती ही नहीं, सिर्फ मुँह आगे पीछे करती है।
सरीना मुस्कुराते हुए बोली- आपकी माल को आज सब सिखा दूंगी। अब इसकी थोड़ी चूत की सेवा कर दीजिये, हरामिन की चुदने को कुलबुला रही है।
अतुल उठा और उसने रेखा की टांगें चौड़ी करके उसमें अपना लण्ड घुसा दिया। रेखा की चूत बजने लगी, सरीना ने भी मेरा लण्ड अपनी चूत में डलवा लिया था।

अब पलंग पर दोनों औरतों की चुदाई चल रही थी, कमरा ऊहाह ऊहाह की आवाज़ों से गूँज रहा था। थोड़ी देर बाद दोनों की चूतें गाढ़े वीर्य से नहाई हुई थीं।
सरीना रेखा से बोली- अपने यार का लौड़ा चाट ले ! बहुत स्वादिष्ट लगता है वीर्य चोदने के बाद !
रेखा को दिखाते हुए सरीना ने मेरे सुपाड़े पर अपनी जीभ फिरा दी। रेखा ने भी अतुल का लण्ड थोड़ी देर चाटा। इसके बाद 5 मिनट तक हम चारों बिस्तर पर पस्त हो गए।
थोड़ी देर के लिए मैं और सरीना बाहर आ गए थे। दस मिनट बाद सरीना ने दो हॉट ड्रिंक बना ली एक उसने अतुल को दी और एक रेखा को। अतुल का लण्ड ठंडा हो रहा था। मैंने लुंगी बाँध ली थी। सरीना बोली- यह लीजिये अतुल जी, आज आपकी पीछे से सवारी की इच्छा भी पूरी हो जाएगी।
अतुल ने पूरी ड्रिंक ली। थोड़ी सी सरीना ने रेखा को भी पिलाई। इसके बाद एक पतली मोमबत्ती पर सरीना ने कंडोम चढ़ाया और अतुल से बोली- अतुल जी थोडा घोड़े को रेखा जी के मुँह में डालिए। इसके बाद सरीना ने एक पतली ट्यूब रेखा की गाण्ड में घुसा दी, रेखा ऊई करती हुई बोली- निकालो दर्द हो रहा है।
सरीना ने ट्यूब पिचका कर पूरी निकाल ली और बोली- दर्द तो जब अतुल तेरी मारेंगे तब पता चलेगा ! और राजीव जी ने घुसा दिया तो दो दिन तक ठीक से नहीं चल पाएगी तू।
सरीना के इशारे पर अतुल ने दो उँगलियाँ रेखा की गाण्ड में घुसा दीं।
सरीना बोली- पूरी अंदर तक गाण्ड में घुसा कर अच्छी मालिश कर दीजिये मेमसाहब की ! नहीं तो गाण्ड नहीं मार पायेंगे।
अतुल की उँगलियाँ रेखा की गाण्ड में आगे-पीछे होने लगीं। दो मिनट तक अतुल ने उँगलियाँ आगे-पीछे की, उसके बाद सरीना ने मोमबत्ती अतुल के हाथ में दे दी और बोली- अब मोमबत्ती से इसकी गाण्ड चोदिये।
2-3 मिनट तक रेखा लेटी हुई चुपचाप लण्ड चूसती रही और अतुल मोमबत्ती उसकी गाण्ड में आगे पीछे करता रहा। 5 मिनट के बाद अतुल ने लण्ड निकाल लिया अब रेखा की गाण्ड लण्ड से गुदनी थी।

सरीना ने पलंग पर एक मोटा गद्दा बिछा दिया और रेखा से बोली- अपनी गाण्ड एक बार मरवा ली तो चूत का मज़ा भूल जाएगी ! प्यार से मरवाना ! शुरू में दर्द होगा, बाद में तो मज़ा आना है। अतुल जी का लण्ड तो छोटा है, झेल लेगी, जिनकी गाण्ड बड़े लण्ड से फटती है वो तो कई बार बेहोश हो जाती हैं। चल अब जरा घोड़ी बन !
और रेखा के बाल सहलाते हुए सरीना ने उसे घोड़ी बना दिया।
रेखा घोड़ी बन गई थी और अपनी कोहनी बिस्तर पर लगा ली थी। अतुल ने उसकी कमर पकड़ के लण्ड उसकी गाण्ड में छुला दिया। सरीना ने अपने हाथ से अतुल का एक इंच लण्ड उसकी गाण्ड में घुसवा दिया।
सरीना मुस्कुराते हुआ बोली- अतुल जी, बचा हुआ लण्ड प्यार से इसकी गाण्ड में डालना और रेखा जी की प्यार से मारिएगा।
अतुल इसे मजाक समझा, उसने गाण्ड को चूत समझते हुआ एक तेज झटका मार दिया। लण्ड रेखा की गाण्ड में तेजी से घुसा तो रेखा बुरी तरह से चीख उठी और उसने तेज झटका गाण्ड को दिया, इस बीच लण्ड गाण्ड से निकल गया।
रेखा की आँखों में पानी आ गया था।
सरीना अतुल पर चिल्लाती हुई बोली- आप से मैंने कहा था न कि प्यार से मारिएगा।
रेखा बोली- न बाबा न ! मुझे गाण्ड नहीं मरवानी !

सरीना बोली- रेखा जी, आप थोडा आराम करें ! मैं अतुल जी को समझाती हूँ ! अबकी वो आपकी प्यार से मारेंगे। एक बार आपने गाण्ड मरवा ली तो बार बार मरवाना चाहेंगी। अतुल जी, आप रेखा जी को सॉरी बोलिए और मेरे साथ आइये, मैं आपको कुछ समझाती हूँ।अतुल ने रेखा से सॉरी बोली और अतुल को बाहर ले आई, मैं भी बाहर आ गया।
सरीना अतुल से बोली- अतुल जी, रेखा गाण्ड मरवाने को तैयार है। आप उसकी गाण्ड प्यार से मारिएगा। अकेले आप गाण्ड नहीं मार पाएंगे। रेखा आपकी बीबी तो है नहीं, इसलिए अपने माल का मज़ा राजीव जी को देंगे तभी आप गाण्ड मारने में सफल हो पाएंगे और एक बार आपने औरतों की गाण्ड मारना सीख ली तो आप कई औरतों को खुश कर सकते हैं।
अतुल सरीना से धीरे से बोला- कुतिया को कोई भी चोद दे, मुझे कोई दिक्कत नहीं ! लेकिन मुझे आज गाण्ड मारना सीखना है क्योंकि मैंने अपने दो दोस्तों की बीवियों को बताया हुआ है कि मैं गाण्ड मारने का खिलाड़ी हूँ और उनमें से एक की दो दिन बाद मुझे गाण्ड मारनी है, दूसरी अगले महीने जब मेरा दोस्त सिंगापुर जाएगा, तब मरवाएगी। अगर मैं उनकी गाण्ड नहीं मार पाया तो मैं किसी को मुँह नहीं दिखा पाऊँगा।
सरीना बोली- मैं आपको गाण्ड का खिलाड़ी बना कर भेजूँगी। आप जब रेखा की गाण्ड मारें तब राजीव जी उसे लौड़ा चुसवाएंगे।
सरीना ने हमें कुछ बातें सिखाईं, अब रास्ता साफ़ था, अतुल के माल रेखा को अब मैं बजा सकता था।
कहानी का अगला भाग जल्दी आपको पढ़ने को मिलेगा।

सरीना अतुल से बोली- अतुल जी, रेखा गाण्ड मरवाने को तैयार है। आप उसकी गाण्ड प्यार से मारिएगा। अकेले आप गाण्ड नहीं मार पाएंगे। रेखा आपकी बीवी तो है नहीं, इसलिए अपने माल का मज़ा राजीव जी को देंगे तभी आप गाण्ड मारने में सफल हो पाएंगे और एक बार आपने औरतों की गाण्ड मारना सीख ली तो आप कई औरतों को खुश कर सकते हैं।
अतुल सरीना से धीरे से बोला- कुतिया को कोई भी चोद दे, मुझे कोई दिक्कत नहीं ! लेकिन मुझे आज गाण्ड मारना सीखना है क्योंकि मैंने अपने दो दोस्तों की बीवियों को बताया हुआ है कि मैं गाण्ड मारने का खिलाड़ी हूँ और उनमें से एक की दो दिन बाद मुझे गाण्ड मारनी है, दूसरी अगले महीने जब मेरा दोस्त सिंगापुर जाएगा, तब मरवाएगी। अगर मैं उनकी गाण्ड नहीं मार पाया तो मैं किसी को मुँह नहीं दिखा पाऊँगा।
सरीना बोली- मैं आपको गाण्ड का खिलाड़ी बना कर भेजूँगी। आप जब रेखा की गाण्ड मारें तब राजीव जी उसे लौड़ा चुसवाएंगे।
सरीना ने हमें कुछ बातें सिखाईं, अब रास्ता साफ़ था, अतुल के माल रेखा को अब मैं बजा सकता था।
हम सब लोग कमरे में आ गए।
सरीना रेखा से बोली- आप अतुल का लण्ड धीरे धीरे चूसें, साथ ही साथ राजीव आपकी चूत को चोदेगा। दो-दो लण्डों का मज़ा जब आप लेंगी तो गाण्ड मरवाने में दिक्कत नहीं आएगी।
अतुल ने अपना लण्ड रेखा के मुँह में डाल दिया। मैंने रेखा की चूत अपनी 3-4 उँगलियों से सहलानी शुरू कर दी, उसकी चूत के दाने पर मेरी रगड़ तेज होती जा रही थी। हम तीनों सेक्स का आनन्द ले रहे थे।
एक मिनट के बाद रेखा लण्ड मुँह से बाहर निकालते हुए बोली- चोदिये ना ! बहुत खुजली हो रही है।
सरीना इसी का इंतजार कर रही थी, बोली- राजीव जी, अब इसकी चूत फाड़ दीजिए।

मैंने बिना देर किये रेखा की गीली चूत में अपना लण्ड घुसा दिया। सरीना के कहे अनुसार चूचियाँ दबाते हुए तेज धक्कों के साथ मैंने रेखा को चोदना शुरू कर दिया था। अतुल ने सरीना के इशारे पर अपना लण्ड निकाल लिया था।
रेखा की चूत में आज पहली बार आठ इंची मोटा लण्ड घुसा था, वो ऊई आह ! मर गई ! फट गई ! की आवाज़ करती हुई मुझसे चुद रही थी।
सरीना अतुल से बोली- अब इसकी चुदाई के बाद आप इसकी गाण्ड में अपना लण्ड पेलना। मोटे लण्ड से चुद रही है अब इसे गाण्ड में दर्द भी कम लगेगा।
रेखा को कुछ देर चोदने के बाद मैंने सरीना के इशारे पर लण्ड बाहर निकाल लिया सरीना ने मेरा लण्ड रेखा की गाण्ड पर छुला दिया और बोली- राजीव जी थोडा सा इसकी गाण्ड में ठोक कर अपने वीर्य से इसकी गाण्ड भर दो !
मैंने रेखा की गाण्ड में लण्ड घुसा दिया। मैं प्यार से उसकी गाण्ड ठोंक रहा था रेखा दर्द से चिल्लाने लगी थी बड़ी मुश्किल से एक इंच मेरा मोटा लण्ड घुसा होगा। उसके बाद मेरे 2-3 छोटे धक्कों के बाद रेखा की गाण्ड वीर्य से नहा गई। इसके बाद एक गीले कपड़े से मैंने अपना लण्ड पौंछा और सरीना के पास बैठ गया। रेखा बिस्तर पर उल्टी लेट गई थी। उसके चेहरे से चुदाई की ख़ुशी दिख रही थी। उसकी गाण्ड में अंदर तक मेरा वीर्ये घुसा हुआ था।
पाँच मिनट के आराम के बाद सरीना ने रेखा के बालों पर हाथ फिराया और बोली- चलो उठो और अब अपनी गाण्ड अपने यार से फटवाओ ! आज रात मज़े की रात है !
रेखा को कोहनी के बल सरीना ने लिटाया और उसके मुँह में पहले मेरा लण्ड डलवा दिया और रेखा को धीरे धीरे लण्ड के आगे के हिस्से को चूसने को कहा। कुछ देर बाद सरीना के इशारे पर मेरा लण्ड अंदर तक उसके मुँह में चलने लगा। अतुल ने रेखा की गाण्ड पर लण्ड छुला दिया था। २ इंच के करीब रेखा की गाण्ड पहले ही फाड़ दी गई थी और मेरे वीर्ये से रेखा की गाण्ड चिकनी भी हो रही थी इसलिए अतुल का पाँच इंची लण्ड आधे से ज्यादा घुस गया था। मैंने थोड़ी देर के लिए लण्ड निकाल लिया और उसकी चूचियाँ दबाते हुए उसे कस कर पकड़ लिया अतुल धीरे धीरे रेखा की गाण्ड ठोक रहा था, रेखा चिल्ला रही थी, उसकी आँखों से पानी गिर रहा था, मेरी पकड़ मजबूत थी इसलिए वो लण्ड निकाल नहीं पा रही थी।
सरीना चिल्ला रही थी- साली रंडी ! अंदर लेने की कोशिश कर ! बाहर क्यों निकाल रही है?

सरीना ने उसके बाल कस कर खींचना शुरू कर दिए और अतुल पर चिल्लाते हुए बोली- थोड़ा सा बच रहा है, जल्दी घुसा दे।
अतुल पूरी ताकत से लण्ड अंदर पेलने लगा थोड़ी देर में अतुल का पाँच इंची लण्ड पूरा गाण्ड में घुसा हुआ था। सरीना ने रेखा के बाल अब सहलाने शुरू कर दिए और बोली- अब तेरी गाण्ड में पूरा घुसा हुआ है, आराम से गाण्ड मरवा और मज़े कर ! शुरू में सबके दर्द होता है। राजीव जी का लण्ड तेरे मुँह के आगे है मन करे तो चूस लियो, दुगना मज़ा आएगा।
अतुल ने धीरे धीरे उसकी गाण्ड गोदनी शुरू कर दी थी। रेखा हूँ हूँ की सिसकारी भर रही थी। थोड़ी देर में अतुल ने गाण्ड बजाना शुरू कर दिया अब रेखा की गाण्ड अच्छी तरह बज रही थी, रेखा की चिल्लाने की आवाजें गूँज रही थी। रेखा मस्ती से गाण्ड मरवा रही थी और चिल्ला रही थी। मेरा लण्ड रेखा के मुँह के आगे उछालें मार रहा था।
सरीना ने मुझे इशारा किया और बोली- अब साली को मसल दो।
मैंने आगे बढ़कर लण्ड मुँह में डाल दिया और उसकी चूचियों को कस कस कर हाथों से दबाने लगा। अब रेखा की गाण्ड गुद रही थी और मुँह में मेरा लण्ड चल रहा था। चूचियों की मालिश और चुचूक नोचते हुए मैं उसको अपना लण्ड चुसवा रहा था, रेखा को बहुत मज़ा आ रहा था।
मैंने थोड़ी देर के लिए लण्ड बाहर निकाल लिया और उसके मुँह के आगे खड़ा कर दिया तो रेखा बोली- ऊह ऊहं ! मत निकालो !
और उसने आगे बढ़कर फिर मुँह में लण्ड डाल लिया। सरीना दूर से रेखा की गुदती गाण्ड और लण्ड चुसाई का मज़ा ले रही थी।
सरीना बोली- राजीव जी, इसने लण्ड चूस तो बहुत लिया अब इसके मुँह में प्यार से लण्ड ठोक दो, बेचारी चूस चूस कर थक थक गई होगी।
मैंने रेखा के बाल पकड़े और धीरे धीरे उसके मुँह में लण्ड पेलना शुरू कर दिया। इधर अतुल प्यार से धीरे धीरे उसकी गाण्ड ठोके जा रहा था। बीच में अतुल बोला- सरीना जी मज़ा आ गया। रेखा की गाण्ड और मुँह दोनों में चुदाई चल रही थी, सरीना ने मेरी गाण्ड में ऊँगली की, मैंने लण्ड बाहर निकाल लिया।
रेखा पगला रही थी, बोली- और करो, मत निकालो ! ऊई ऊई मारो ! बड़ा मज़ा आ रहा है।
सरीना ने अतुल से कहा- अब साली की फाड़ दो ! पूरी गरम है !
सरीना ने टीवी चला दिया था, अतुल ने सरीना जी के इशारे पर लण्ड पूरी ताकत से रेखा की गाण्ड में ठोंक दिया रेखा पागलों की तरह चिल्ला रही थी- ऊह, आह ! मर गई ! फट गई ! निकालो निकालो !
लेकिन गाण्ड रेखा की अतुल ने गोदनी जारी रखी। रेखा पलंग पर फिसल गई अतुल उसकी कमर कस के पकड़ा हुआ था उसने रेखा की गाण्ड मारने की स्पीड तेज कर दी। रेखा चिल्लाए जा रही थी- छोड़ो मर गई ! अब नहीं ! फट गई ! मादरचोद ! निकाल कुत्ते ! मर जाऊँगी।
सरीना बोली- अब कुतिया की गुदी है !
अतुल की गाण्ड पर चोट जारी थीं, कुछ देर बाद सरीना ने अतुल से कहा- अतुल जी। प्यार से !
अब अतुल धीरे हो गया था, रेखा के बाल सहलाते हुआ सरीना ने कहा- रेखा, तुम एक बार फिर राजीव जी का लण्ड चूसो !
मैंने रेखा के मुँह में लण्ड घुसा दिया। उधर अतुल रेखा की गाण्ड चोद रहा था और रेखा मेरा लौड़ा लोलीपोप की तरह चूस रही थी। दो मिनट बाद अतुल ने अपने वीर्य की पिचकारी रेखा की गाण्ड में छोड़ दी और अपना लण्ड कुछ ही देर बाद बाहर निकाल लिया। रेखा की गाण्ड लण्ड से फट चुकी थी। यह सब देखकर मैं पूरा उत्तेजित था, मैंने भी अपनी पिचकारी रेखा के मुँह में छोड़ दी, रेखा का पूरा मुँह वीर्य से भर गया, उसने मेरा लण्ड रस पलंग पर उलट दिया और सीधी होकर पलंग पर बेसुध होकर लेट गई। अतुल भी बेसुध हो रहा था, मेरा लण्ड खाली हो गया था लेकिन मुझे लग रहा था कि मुझे रेखा की गाण्ड और चोदनी चाहिए।
मेरा लण्ड चुदी हुई रेखा को देखकर दुबारा खड़ा हो रहा था।
सरीना बोली- रेखा और अतुल, आप आराम करिए मैं और राजीव आपके लिए अनार का जूस लाते हैं।
मैं और सरीना जूस लेने बाहर आ गए।

रेखा सीधी होकर पलंग पर बेसुध होकर लेट गई। अतुल भी बेसुध हो रहा था, मेरा लण्ड खाली हो गया था लेकिन मुझे लग रहा था कि मुझे रेखा की गाण्ड और चोदनी चाहिए।
मेरा लण्ड चुदी हुई रेखा को देखकर दुबारा खड़ा हो रहा था।
सरीना बोली- रेखा और अतुल, आप आराम करिए मैं और राजीव आपके लिए अनार का जूस लाते हैं।
मैं और सरीना जूस लेने बाहर आ गए।
सरीना और मैं नंगे थे। सरीना ने रसोई में आते ही मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और चूसते हुए बोली- पहले तुम मुझे चोद दो ! मेरी चूत चुदाई देख देख कर बहुत खुजला रही है।
किचन के पत्थर पर टाँगे चौड़ी करके सरीना इस तरह झुक गई कि उसकी चूत में आराम से घुसाया जा सकता था। मेरी चोदने की इच्छा तो रेखा की थी पर सरीना को मैं नाराज नहीं कर सकता था। मैंने अपना आठ इंची लण्ड सरीना की चूत में डाल दिया और सरीना को चोदने लगा। चुदते चुदते सरीना अनार के दाने निकालने लगी और जूस बनाने लगी। सरीना को पता था कि कैसे चुदा जाता है। किसी भी मर्द को इस तरह चुदाई की गुरु औरत चोदने में दुगना मज़ा देती है। मुझे भी उसे चोदने में मस्त मज़ा आ रहा था। जूस तयार होने के पाँच मिनट बाद मेरा लण्ड उसकी चूत में खाली हो गया।
सरीना और मैं चार ग्लास जूस बना कर कमरे में आ गए। हम सब नंगे थे, शर्म सबकी छूट गई थी, सबने साथ साथ जूस पिया।
रेखा ने उठकर सरीना को बाँहों में भरा और बोली- सरीना, सच बहुत मज़ा आया, आप नहीं होतीं तो यह अतुल कुत्ता गाण्ड का मज़ा न खुद लेता और न मुझे दे पाता। सच आज जन्नत का मज़ा आया जब अतुल ने मेरी गाण्ड में शताब्दी दौड़ाई तो मुझे ऐसा लगा कि गाण्ड मरवाते मरवाते मर ही न जाऊँ ! सच, बता नहीं सकती कि कितना मज़ा आ रहा था। सरीना, सच मेरी प्यारी सरीना, आज तुम न होतीं तो इतना मज़ा नहीं आता।

loading...

Leave a Reply