यादों के झरोखे से part 5

तभी भाभी ने सभी बच्चों को आवाज़ लगाई कि खाना लग चुका है सो हम सब ने चुपचाप खाना खाया और फिर चूंकि मैं पूरी रात के जागने और मेहनत करने से बहुत थक गया था सो मैं अन्दर वाले कमरे में जाकर लेट गया और थोड़ी ही देर में सो गया।

अचानक मेरी आँख खुली तो मैंने देखा की शबनम दीदी मेरे पास ही सो रहीं है। मैंने घडी की तरफ निगाह डाली तो साढ़े चार बज चुके थे यानी कि मैं लगभग तीन घंटे तक सोता रहा था। शबनम दीदी की चूचियां उनकी हर सांस के साथ ऊपर नीचे होतीं देख मेरा चुदक्कड लंड सिर उठाने लगा,मैंने दीदी के कुरते में हाथ डाल कर उनकी ब्रा के ऊपर से उनकी चूचियां पकड़ लीं और उन्हें मसलने लगा लेकिन दीदी ने ‘अभी दिन है कोई भी आ सकता है’ कह कर मेरा हाथ हटा दिया साथ ही रात का वायदा भी किया।

तभी कमरे में अचानक शमां दीदी आ गयीं और मैं फिर से सोने का नाटक करने लगा लेकिन शायद उन्होंने मुझे दीदी की चूचियां मसलते देख लिया था ऊपर से मेरा लंड मेरे हाफ पेंट में टाइट खडा अलग से पता चल रहा था। शमां दीदी हमारे पास धीरे से आयीं और मेरे गाल खींच कर अपने पीछे आने का इशारा करके बाहर निकल गयीं। मरता क्या न करता,मन में बुरे बुरे ख्याल लाते हुए मैं डरते डरते रूम से बाहर आया तो देखा कि वो घर के पीछे वाले अहाते की तरफ जा रहीं थी।

उस अहाते में चार पांच आम नीम व अमरुद के पेड़ लगे थे तथा वहां दो बकरे,सात बकरी,एक भैस व चार पांच उनके बच्चे बंधे रहते थे। हमने देखा कि बकरा मेरे लंड के सुपाड़े जैसा लाल लाल अपना लंड निकाले बकरियों के पीछे लगा था लेकिन कोई भी बकरी उसे अपनी चूत में पेलने नहीं दे रही थी,झट से अपनी कमर हटा कर उसके लंड की ठोकर को बेकार कर दे रहीं थीं।

( दोस्तों ! अक्सर बलात्कार की घटनाएं सुनने में आतीं है जिन्हें पढ़ या सुन कर मुझे समझ ही नहीं आता कि यह कैसे संभव हो सकता है। जब तक सुई वाले हाथ को आप स्थिर नहीं रखेंगे , आप उसके छेद में किसी भी तरह धागा डाल ही नहीं सकते हाँ एक बार धागे की नोक छेद में पहुँच जाए फिर अगर हाथ हिलता भी है तो कोई फरक नहीं पड़ता क्योंकि फिर तो दूसरा हाथ धागा घुसेड ही देगा। )

अचानक उन में से एक छोटी से बकरी पर ज़ब वो बकरा चढ़ा तो वो चुपचाप खड़ी रही। दो चार बार इधर उधर गलत जगह लंड रगड़ने पर बकरी ने थोडा सा कमर एडजस्ट कर दी और वैसे ही बकरे ने अपना पूरा लंड उसकी चूत में ठांस दिया। में s s हे s s s करके बकरी बुरी तरह से चिल्ला पड़ी शायद बकरा बहुत देर से अपना टन्नाया हुआ लंड लिए चूत के लिए तड़प रहा था इसीलिए जब इस छोटी बकरी ने उसे थोडा सा मौका दिया तो उसने बिना देर किये एक झटके में पूरा ठांस दिया था और शायद उस झटके को उसकी नाज़ुक चूत झेल नहीं पाई थी यही कारण था कि वह मिमिया कर तिलमिला उठी थी लेकिन बकरा भी पुराना खिलाडी था सो उसने बकरी की कमर को अपनी दोनों आगे की टांगों से कस कर जकड रखा था और वह बकरी की कमर के साथ ही साथ खुद भी अपना लंड फंसाये पीछे पीछे,जब तक उसका पानी नहीं निकला,चलता रहा। थोड़ी देर बाद उसने अपना लंड बकरी की चूत से बाहर निकाल लिया व बकरी की पूँछ के नीचे जो पहले उसकी सिर्फ गांड ही नुमाया हो रही थी उसके साथ साथ अब उसकी चौड़ी होके चूत भी क्लिअरली दिखाई देने लगी थी।

बकरी की चुदाई देख के मेरा लंड बुरी तरह से तन कर मेरे हाफ पेंट में रह रह कर झटके खा रहा था। तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया कि इमेरजेंसी में जब कहीं चूत न मिले तो बकरी की चूत ही क्या बुरी है। मैंने दीदी की तरफ देखा,वो एक हाथ से अपनी चूत सहलातीं हुईं अपनी उँगली मुंह में डाले चूस रहीं थीं। मुझे देख कर वह मुस्करा के बोलीं,”साली पता नहीं कितनी चुदासी थी अभी अभी पैदा हुई और चूत में खुजली शुरू हो गयी,फिर चुदते पे क्यूं मिमिया रही थी। ठीक किया साले बकरे ने,रख के पूरा ठांस दिया चोदी के ”

यह कह कर दीदी अहाते के साइड में बने भूसे वाले कमरे में घुस गयीं और मुझे इशारा करके अन्दर बुलाया। अब मेरी समझ में कुछ कुछ बात आने लगी थी सो मैं लपक के अपने लंड को सहलाता उनके पीछे कमरे में घुस गया। अन्दर थोडा अँधेरा सा था और ज़ब तक मेरी आँखे कुछ देखने लायक होतीं तब तक दीदी ने मुझे अपनी तरफ खींच कर चिपका लिया।

“क्या रे,रात को बड़ा जोश दिखा रहा था ” दीदी ने मेरे हाथ में अपनी चूची थमाते हुए कहा

( दोस्तों चूचियां चार प्रकार की होतीं हैं – 1. लटकन झब्बू 2. मस्ती का चाका 3. मुठ्ठा बंद 4. सूखा चंड

लटकन झब्बू मतलब जिस चूची के नाप की ब्रा मार्केट में न मिले और जिसे मसलने के लिए हमें एक चूची पर ही दोनों हाथ लगाने पड़ें।

मस्ती का चाका यानी मस्त खरबूजे के साइज़ की चूची जिसे देख कर ही लंड फनफना जाये।

मुठ्ठा बंद वो चूची जिसे हम अपनी मुठ्ठी में लेकर कस के मसल सकें।

और दोस्तों सूखा चंड वो चूची होती है जिसे हम सिर्फ अपनी उँगलियों से ही मसल सकते है। )

दोनों दीदियों की चूचियां उस वक़्त मुठ्ठा बंद थीं।

मैं इस वक़्त असीम आनंद का अनुभव कर रहा था। दीदी ने मेरे नेकर को नीचे खिसका कर मेरा लंड बाहर निकाल लिया था और वह बड़े हौले हौले उसे सहला रहीं थीं।मैंने अपनी आदत के अनुसार दीदी की चूचियां छोड़ कर सलवार के ऊपर से ही उनकी चूत सहलानी शुरू कर दी।

“बदमाश,साला हर वक़्त चूत के लिए लंड खड़ा लिए घूमता रहता है। अभी ढंग से लंड ने खडा होना भी नहीं सीखा और बहनचोद चूतों को चोदना शुरू कर दिया। अब सच सच बता,कल रात तूने दीदी को चोदा था ना” दीदी टाँगे चौड़ी करके अपनी चूत सहलवाते हुए बोली

“हाँ दीदी,अभी तक मुझे पता ही नहीं था की किसी चूत को चोदने में इतना मज़ा आता है।” मैं दीदी के हाथ में ही कमर हिला हिला के अपना लंड आगे पीछे करता हुआ बोला

“तो तूने दीदी को ही पहली बार चोदा था,हाय हाय तो दीदी ने तेरे कुंवारे लंड का मज़ा ले लिया” दीदी पूरी मस्ती में आते हुए बोलीं

“बडा मज़ा आया था,मैंने पूरे दो बार उन्हें कल चोदा। दीदी,प्लीज़ आप भी मुझे चोदने दो ना” मैं दीदी से चिपकता हुआ बोला

“हूँ s s s s ठीक है चोद लेना लेकिन अभी नहीं रात में मैं तुझे बुला लूंगी,यहाँ कभी भी कोई भी आ सकता है। साले तेरा लंड आगे ज़वानी में मूसल जैसा हो जायेगा। तब तो हर चूत एक बार चुदने के बाद तेरे लंड की मुरीद हो जाया करेगी।” दीदी मेरे लंड को उसी तरह सहलाते बोलीं

फिर दीदी अपने घुटनों के बल बैठ गयीं और मेरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। अब कूपे में उनके चूसने से धीमी धीमी चुकर चुकर की आवाजें आ रहीं थीं। मेरी मस्ती के कारण आँखें बंद हो चुकीं थीं,मैं दीदी के सिर को कस कर पकड़े उनके चूसने के साथ साथ अपनी कमर हिला हिला के जैसे दीदी के मुंह को ही चोद रहा था। दीदी ने भी अपने होठ गोल करके मेरे लंड पर कस दिए जिससे मुझे बिलकुल किसी चूत की चुदाई जैसा मज़ा मिल रहा था। मैं पूरी स्पीड से दीदी के मुंह को चोद रहा था अचानक मेरे शरीर ने झटका सा लिया और लंड ने दीदी की चूत में पच्च पच्च दो तीन बार पिचकारी सी चला दी। मेरी साँसे बुरी तरह से उखड़ रहीं थीं लेकिन दीदी मेरे वीर्य को बड़े मज़े के साथ चाट चाट कर लंड साफ़ कर रहीं थीं। थोड़ी देर यूं ही लंड चाटने के बाद दीदी खड़ी हो गयीं और अपनी कुर्ती व ब्रा ऊपर उठा कर मेरे मुंह में अपनी चूची घुसेड दी।

“ले बहनचोद चूस,साले दुकान में आँखे फाड़ फाड़ के ऐसे देख रहा था जैसे आँखों से ही सारा दूध पी जायेगा,ले चूस कस कस के चूस और ज़रा कस के मसल इन्हें ”

दीदी पूरी मस्ती में आ चुकी थी। वह मेरे बालों को पकड़ कर मेरे मुंह में पूरी चूची ही घुसेड देना चाह रही थी। मेरी हालत यह थी कि मेरे मुंह में तो दीदी की चूची थी और मेरा एक हाथ दूसरी चूची को इतने कस के मसल रहा था कि जैसे मैं उसे उखाड़ने के चक्कर में हूँ,दूसरे हाथ से मैं अपनी आदत से मजबूर उनकी सलवार के नाड़े को खोलने में लगा था।

अचानक नाडा खुल गया और दीदी की सलवार सरसरा के पेरों में गिर पड़ी। अपनी सलवार को उतरता देख दीदी ने अपनी टाँगे फैला दीं,मैंने उनकी पेंटी की इलास्टिक में हाथ घुसाया तो मेरा हाथ भी उनकी पेंटी की तरह पूरा चिपचिपा हो गया। दीदी की चूत बुरी तरह पानी छोड़ रही थी,मैंने उनकी चूत पर हाथ घुमाते हुए उनकी चूत में गप्प से अपनी उंगली घुसा दी।

“सी s s s s स्सी s s s हां हां ऐसे ही …… ऐसे ही करे जा” दीदी मस्ती में आँख बंद करके चुतड आगे पीछे हिलातीं बोली। मैंने उनकी एक टांग में से सलवार व पेन्टी दोनों निकाल दीं क्योंकि पेन्टी की इलास्टिक की वजह से उनकी टाँगे पूरी तौर से फ़ैल नहीं पा रहीं थीं। मेरा लंड फिर से खडा होकर बार बार झटके ले रहा था। मैंने थोड़ी देर और दीदी की चूत में उंगली आगे पीछे करके उनकी एक जांघ को पकड़ कर अपनी कमर से ऊँची करके दीदी की चूत में अपना लंड पेल दिया।

“हाय हाय नाशपीटे मेरी चूत कहीं भागी जा रही थी क्या जो इतना हडबडी दिखा रहा है, साले हंड्रेड परसेंट तू पैदा होते ही अपनी माँ को चोदने लगा होगा,चल अब धीरे धीरे क्यूं चोद रहा है पूरा पूरा लंड ठांस के जल्दी जल्दी चोद”

मैं अब पूरी ताक़त से दीदी को चोदने लगा,चोदते चोदते अचानक मुझे कमरे के दरवाजे पे आहट सी महसूस हुई लेकिन चुदाई के इस पड़ाव पर मैंने उसे अनदेखा कर दिया। दीदी की पीठ वैसे भी दरवाजे की तरफ थी सो उन्हें पता चलने का कोई मतलब ही नहीं था। चूँकि अभी अभी दीदी के मुंह को चोद के मेरे लंड ने पानी निकाला था इसलिए बहुत देर तक चोदने पर भी जब मेरा पानी नहीं निकला तो दीदी ने मुझे अलग करते कहा,”चल मेरे पीछे से चोद,साला झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा …… मेरा तो दो बार पानी निकल गया”

और उन्होंने भूसे वाली डलिया को उलटा करके उस पर अपने हाथ टिका दिए। मैंने उनकी टाँगे फैला कर कुत्ते की तरह पीछे से उनकी चूत को उनकी पेन्टी से पोंछ कर फिर से चोदना शुरू कर दिया।

दोस्तों इस पोजीशन में चोदने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था,चाचा की चुदासी लौंडियों ने वाकई मुझे पूरी तौर से काम कला में पारंगत करने की ठान ली थी और मैं भी पूरे जोश खरोश से सौ में पूरे सौ नंबर लेता हुआ हर सेमेस्टर पास कर रहा था।

मज़े से मेरी आँखे बंद हो चुकीं थीं,मैं इस पोजीशन में चुदाई का पूरा पूरा मज़ा लेते हुए दीदी को भकाभक चोद रहा था। कमरे में चुदाई के कारण कच्च कच्च की आवाज़ फ़ैल रही थी। मेरे फ़ोते लंड की तरह दीदी की चूत का मज़ा लेने हर ठोकर के साथ पीछे पीछे जाते लेकिन लंड उन बेचारों को अंगूठा दिखा कर अकेला ही गप्प से चूत में घुस जाता था और फ़ोते बेचारे बाहर ही दीदी की झांटो की चुम्मी लेकर मन मसोस कर रह जाते। थोड़ी देर और इसी तरह चोदते हुए मेरे लंड ने शायद चूत से बिछडने के गम में चंद गाढ़ी गाढ़ी बूंदें रुपी आंसू दीदी की चूत में गिरा दिए। मैं भी दीदी की पीठ पर अपना सिर टिका कर हांफने लगा।

“जल्दी कर मुन्ना,कोई आ सकता है …. फटाफट कपडे पहन” दीदी सीधी होकर अपनी पेन्टी व सलवार पहनते बोलीं

मेरी समझ में बात आ गयी सो मैंने तुरंत अपना नेकर ऊपर चढ़ा लिया। हम दोनों ने तुरंत ही एक दूसरे के कपडे साफ़ किये और हाथ झाड़ते हुए बाहर निकल आये। बाहर आते ही दोनों एक दम सकपका गए,बाहर मुश्ताक़ चचा बैठे उसी चुदी बकरी को गोद में लिए पुचकार रहे थे।
( मुश्ताक चचा घर के बाहर ही चबूतरे पर एक छोटी सी दुकान चलाते थे व रात को यहीं अहाते में सो जाते थे। वो छोटी चाची के रिलेशन में चचा लगते थे।उनकी उमर साठ के आसपास थी। चूंकि उनकी शादी नहीं हुई थी और वो चाची को ही अपनी बेटी मानते थे सो वह चाचा के बहुत ज़िद करने पर यहीं रहने लगे थे और टाइम पास करने को दुकान कर ली थी जिसमे गुटखा,सिगरेट,बच्चों की टाफियां व लोकल नमकीन वगैरह था। उन्हें चाची के साथ साथ सभी चचा बुलाते थे। )

“शमां बिटिया,ज़रा सरसों का तेल एक कटोरी में ले आ,उस नामाकूल बकरे ने इस बेचारी नन्हीं सी जान की दशा खराब कर दी और मेरे भी हाथ पैरों पर ज़रा लगा देना,बहुत खुश्की हो रही है” मुश्ताक चचा ने दीदी को बोला

“ठीक है चचा,अभी लाई” कह कर दीदी हंसतीं हुई मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर को चल दीं
चुदाई में इतना मस्त हो गया कि तुझे मुश्ताक चचा के आने का भी पता नहीं चला , वो तो शुकर मना कि वो जानवरों के लिए भूसा लेने कमरे में अन्दर नहीं आये वरना आज खैर नहीं थी ” दीदी मेरे साथ घर के अन्दर आतीं बोली
हूँ , कौन सी मालिश करती हूँ लेकिन बुड्ढा है बड़ा ठरकी साला इधर उधर हाथ ज़रूर चलाता है , तू तब तक अन्दर चल पता नहीं क्यों मुझे यह सब कुछ अजीब लग रहा था क्योंकि दीदी ने उस बुड्ढे दुकानदार से भी कुछ नहीं कहा था जबकि वह उनकी आँखों के सामने ही अपनी लुंगी में लंड मसल रहा था और अब वो चचा के हाथ पैरों में तेल लगाने को भी तैयार हो गयीं थीं जबकि वो जानतीं थी कि चचा ठरकी है सो मैंने छुप के देखने की सोची कि आखिर माज़रा क्या है , वैसे भी उनकी चूत शब्बो दीदी की चूत से ढीली ही लगी थी। शायद ये उंगली के अलावा कुछ और भी पिलावातीं थीं या हो सकता है किसी और लंड से चुदतीं हो। चूंकि चाचा की लौंडियों को मैं अपनी जागीर समझाने लगा था इसलिए उनकी चूतों के किसी और लंड से सम्बन्ध के बारे में मुझे सोच के भी जलन होती थी।
थोड़ी देर के बाद मैंने देखा दीदी तेल की शीशी लेकर मुश्ताक चचा की तरफ अहाते में चलीं गयीं , मैं भी उनके पीछे पीछे अपने को छुपाता अहाते में चला आया। मुश्ताक चचा का एक तखत भूसे वाले कमरे के बाजू में बरामदे में पडा था। उस बरामदे में वैसे तो कोई दरवाजा नहीं था लेकिन बाहर की

अब हल्का सा झुटपुटा होने लगा था सो दीदी ने चचा के बरामदे में रखी लैंप जला दी और चचा से बोलीं ,” आओ चचा , तेल लगा दूं ”
मैं भूसे वाले कमरे की तरफ अपने को छिपाए खडा सब देख रहा था। चचा दरवाजे की तरफ सिर करके अपनी लुंगी कमर की तरफ उठा कर तखत पर लेट गए। दीदी ने अपने हाथों में तेल लेकर पहले उनकी बांहों पर एक एक करके लगाया फिर उनकी टांगो पर लगाने के लिए चचा की लुंगी जांघो तक समेट दी और दोनों टांगो पर अच्छी तरह तेल लगाने लगीं।
तुम तेल बहुत अच्छे तरीके से लगाती हो बिटिया , इसीलिए तो मैं तुम्ही को बुलाता हूँ , ज़रा जाँघों पर भी ढंग से लगा देना ” कहकर चचा ने अपनी लुंगी जाँघों से भी थोडा ऊपर उठा दी

उन्होंने लुंगी के अन्दर कुछ नहीं पहन रखा था। उनका लंड अब दिखाई देने लगा था जिसे देख कर मेरा मुंह खुला रह गया। वह जबकि बिलकुल सिकुड़ा पडा था उस वक़्त चार पांच इंच लंबा और उस छोटी बकरी की टांग जैसा मोटा और काला था। दीदी बिना किसी शरम के उनकी जाँघों पर तेल लगाने लगीं।
ज़रा ऊपर भी ढंग से तेल लगा देना ” चचा ने अपनी कमर और जांघो की तरफ इशारा किया
रहा था लेकिन जब मेरी चुदासी बहन को ही कोई दिक्कत नहीं थी तो मैं कर भी क्या सकता था शायद उसे चचा के लंड से खेलने में मज़ा आता था।
मुझसे क्या छुपाना , अरे ज़ब ऊपर वाले ने चूत दी है तो वो तो चुदेगी ही ना लेकिन बिटिया इन नौसिखियों से ज़रा सावधान रहना … इन लोगों को बिना सोचे समझे चूत पे लंड रख के बस ठांसने की जल्दी रहती है जिससे चूत का भोसड़ा बनते देर नहीं लगती। हाँ हाँ ……. ऐसे ही तेल लगा के ज़रा मालिश कर दे ………. तो समझी मैं क्या कह रहा था “सुन कर कि चचा ने दीदी को चुदते देख लिया है , दीदी अब सकपका चुकीं और उन्हें इस कन्डीशन में देख चचा के हौसले भी बढ़ चुके उनका लंड अब अपना पूरा आकार ले चुका था। इस बुढ़ापे में उनका एकदम सख्त और खडा लंड देख कर मैं तो भौचक्का रह गया था। बहुत मोटा और लंबा लंड था उनका और उसका सुपाडा नोकदार एकदम फूला हुआ था। उनके खड़े खीरे से लंड को देख कर दीदी की भी गांड शायद फट गयी थी सो वह अब वहां से खिसकने का मौका ढूंढ रहीं थीं। मुश्ताक चचा अब हाथ बढ़ा कर दीदी के चूतडों को सहलाते हुए उनकी गांड में उंगली कर रहे थे। अचानक उन्होंने दीदी को अपनी तरफ खींचकर अपने से चिपका लिया।

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