मैं कुंवारी पापा की प्यारी, चुद गयी सारी की सारी part 3

सपना जी के बुर का पानी
बहुतों के लिए सच में सपना होगा
मुझे मेरी बहन ने न्योता दिया है
मेरे लिए तो बुर और उसका पानी
दोनों ही मेरा अपना होगा
मस्ती से चुसुंगी
रसीली चूत का रस पीउंगी
चूत से चूत मिला कर जब घिसुंगी
सपना दी की चूत पनियाएगी
दोनों ही चूतें एक दूजे को नह्लाएंगी
क्या मस्त नजारा होगा
जब दो चुतवालियाँ बिना लौंडे के
झडेंगी और झाड़ेंगी |

मैं सुजाता
भोली भाली
सोचती थी
चूत और लंड
मूतने के लिए है
क्या पता था
कि ये गढ़
जीतने के लिए हैं.
एक दिन सरेराह
राजा मिला
सर पर पेचा बांधे
घोड़े पे
अकड़ा था खड़ा
अचानक मैंने देखा
घोड़े का लंड
हाथ भर लम्बा
मेरे बाजूबंद कि गोलाई से
कुछ ज्यादा ही बड़ा
मैं खोई खोई से
बस देखे जा रही थी
पता ही नहीं चला
कब राजा उतरा
मेरी घघरी उठाई
और चूत सहलाने लगा
मैं पगलाने लगी
घोड़े सी
हिनहिनाने लगी
वोंही खेत में
राजा ने लिटा दिया
मुझे मादरजात
नंगी कर
मेरी अनचुदी चूत में
लौंडा घुसा दिया..
फिर क्या हुआ
नहीं बताउंगी
शर्म आती है
बताते बताते
अगर गर्मी चढ़ी
तो घघरी उठा
यही पसर जाउंगी

सीने पे दहकते दो सितारों को सजाये
अपने सीने पे दो अमृत कलश उठाये
ये सितारे दोनों जैसे जलते अंगार हैं
जिस्म में एक अजीब सी अगन जगाते हैं
जब भी कोई अनजाने ही सही, छू लेता है
दहकते तंदूर सा पूरा बदन जलने लगता है |

सपना दी, एक नजर मेरी बुर पर भी
प्लीज़ घुसा के जीभ करदो भीगी भीगी सी
तुम मेरी चाटो मैं पिउन रस तुम्हारी चूत का
भागो इन्हें, फिर क्या काम इन लंडदारों का
बहुत बड़ी बड़ी हांकते हैं की चूत फाड़ देंगे
क्या हाल होगा, जब चूत की चक्की से पिस के निकलेंगे
पर एक बात है दी, कभी कभी जब गर्मी चढ़ती है
लंड का पानी से ही चूत की प्यास बुझती है
आने दो इनको भी, क्या बिगाड़ लेंगे चूत का
जब भी चोदेंगे माल झाड के ही जाएंगे लंड का

मैं सुजाता,
बिकी बेदाम
लिख दी चूत,
बस तेरे नाम
तेरी रंडी
खड़ी नंगी
तुम्हारा हुक्म
हिला के दूम
कुतिया बनी
चूतड ऊपर
गांड तनी
खड़ा लंड
चूत पर निशाना
इन्तजार में
मालिक
एक धक्के में घुसना
चोदना
जैसे जी चाहे
इतना गुस्सा
निकाल लो
जैसे जी चाहे
ये क्या
मूत दिया
मुझ नंगी को
सारा का सारा
भिगो दिया
अच्छा होता
पहले माल गिराते
मलाईदार उबटन
मेरे बदन पर लगाते
फिर गरमा गरम
सुनहरे फव्वारे में
इस रंडी सुजाता को नहलाते

क्या मेरी जान, सिर्फ बाते बनाते हो
रिया, सपना, सोनी – कब की खड़ी हैं
कपडे उतारे मादरजात नंगी पड़ी हैं
उघाड़ी चूत है, चूचियां तनी हुई
चुदने को बेताब, आपस में खेलती हैं
कोई तो हो, लंडदार चोदू मुस्टंड
जो बाते कम बनाए चढ़ जाए कस कमरबंद
चोदे हुमच हुमच कर, चूत में रस निचोड़े
चूचियां मसले, चुचुक दांतों से चिन्चोड़े

होरी आई गयी.. अबहीं तलक पिचकारी की कौनो व्यवस्था नाही भई .. कैसे होई होरी…

आपन गगरी मा सब रंग बोर लिहेली बानी – अब आव राज्जा पिचकारिया डार तानी कास कास के हेंडल चलाव … हम गैहें -‘पिचकारिया हाले तो बड़ा मजा होय’…एगो कविता लिखली हईं – सुन

***

पाँव दबाये आ घुसा
घर में सजन बसंत
छू कर मुझको कर गया
हाय कतई बदरंग

चुरा ले गया लाली गालों की
अधरों से मकरंद
धड़कन धीमी छुई मुई सी
बिंदिया से पूनो चंद

हरियाली चोली लाल चुनरिया
मेरा बाजूबंद
माला, नथनी, मांगतिलक भी
सांसों की भीनी गंध

कुछ भी नहीं बचा है प्रियतम
होली में क्या दूं तुमको
आ जाओ घर फाग से पहले
फगुआ दे दो मुझको

फगुआ के रंग मांग रही हूँ
साथ तुम्हारा संग
अधरों से अधरों पर लिख दो
कोई रसवंती अनुबंध
कोई रसवंती अनुबंध.

आपकी हर विश हो पूरी
सेक्स से न हो दूरी
लंड आपका खड़ा हैं
चूत मैं मेरी तना रहे
मैं आपका लंड चुसू
बूब्स आपके मुंह मैं ठुसू
करते रहे हम चुदाई
येही हैं होली की बधाई

कल हमने होली और फाग दोनों मनाये.. यहाँ US में weekend में ही tyohar मानाने का रिवाज है… एक लोकल क्लब में सब इकट्ठे थे – तकरीबन ३५ से ४० भारतीय परिवार.. होली जलाई गयी.. सब खूब नाचे – दारु पी – भांग और ठंडाई खुल कर बही – सबने जम कर पी – खूब रंग खेला – सब लाल भुत बने हुए थे – पापा ने क्लब के मैनेजर से ऊपर के एक कमरे की चाबी चुप चाप ले रखी थी… मम्मी अपनी सहेलियों के साथ मगन थी – भैया अपने दोस्तों के साथ –

पापा ने इशारा किया और मैं नजर बचाकर उनके साथ होली – ऊपर कमरे में पहुँचते ही पापा ने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और बेदर्दी से मेरे होठ चूसने लगे – मैं उनका पूरा साथ दे रही थी – पापा ने जब छोड़ा तब तक मैं गरम हो चुकी थी – पापा ने फटाफट अपने कपडे उतारे और मेरे सामने थे उनका मोटा लम्बा लंड – पापा का पूरा बदन रंग में रंग था सिवाय लंड के – उनका गोरा चिट्टा लंड मचल मचल कर उछल उछल कर मुझे इशारे कर रहा था – अपने पास बुला रहा था – रोक नहीं पाई खुद को और दौड़ कर मुह में ले लिया – बेतहाशा चूसने लगी – पापा मेरे बालों को कस कर पकडे हुए थे और बीच बीच में इतनी जोरों से खींचते की लंड मुह से बहार आ जाता और पापा उसी तरह बाल पकडे हुए ही मेरे मुह लौंडा घुसा कर चोदने लगते – अचानक उन्होंने पूरा का पूरा लंड मुह में ठांस दिया – समझ गयी की अब उनका गिरने वाला है – और फिर जैसे मेरे मुह में बाढ़ आ गयी हो – पापा की मलाईदार ठंडाई का कोई मुकाबला नहीं था – जो नशा लंड के इस गाढे गाढे माल में था वो दुनिया के किसी भी नशे में नहीं हो सकता….

पापा ने मुझे खड़ा किया और अपने हाथों से नंगा कर पलंग पर धकेल दिया और मेरी चूत को मुह लगा चूसने लगे – थोड़ी ही देर में मैं पागलों की तरह मचलने लगी और पापा को गन्दी गन्दी गलियां देते हुए चोदने के लिए कहने लगी – अब नहीं बर्दास्त हो रहा था – मैंने पापा को अपने ऊपर खिंच लिया और उन्हें बिस्तर पर पलट उनके लंड पर चढ़ बैठी… कुछ देर मर्दों की तरह पापा को चोदती रही की अचानक पापा ने मुझे पटक कर मेरे ऊपर आ गए और मुझे चोदने लगे – हर धक्का चूत की गहराइयों तक लंड को पहुंचा रहा था – भांग के नशे ने उनके ठहरने की ताकत को और भी बढ़ा दिया था साथ ही एक बार मुह में झड चुके थे – इसलिए बिना रुके चोदे ही जा रहे थे – पता नहीं कितनी देर तक चोदते रहे और जब झडे तो लगा पूरी चूत उनके रस से भर गयी है… थोड़ी देर बाद उठे और कपडे पहन कर बोले कि मैं जा रहा हूँ तुम थोड़ी देर बाद नीचे आ जाना… मगर मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया…

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