मेरा यौन शोषण

मैं श्रीनगर कश्मीर से सोनिया कौर अपने तजुर्बे आप लोगों से शेयर करना चाहती हूँ । कश्मीर को धरती पे स्वर्ग कहा जाता है । यहाँ कुदरती खूबसूरती की भरमार है और यह बात यहाँ की लडकियों मैं भी है । कश्मीरी लडकियों की खूबसूरती के चर्चे बोहुत दूर तक हैं और वोही चर्चे मेरे भी हैं । मैं कॉलेज ख़तम कर चुकी हूँ और नोकरी करती हूँ । सेक्स की आदत छोटी उम्र से लग गयी और उसका कारण था यहाँ के मर्दों की भूख ।
मेरी याद में सबसे पहली बार मेरा योंन-शोषण तब हुआ जब मैं # साल की थी । एक 18 साल का लड़का आकाश कुमार हमारे पड़ोस मैं रहता था और जब भी मैं बाकी बच्चो के साथ खेल रही होती तो वो मुजे साइड पे बुला के मेरे जिस्म पे हाथ फेरा करता और मेरे होंठों को चूसा करता । 10 मिनट ऐसा करने के बाद वह मुझे टॉफी दे देता और बोलता किसी को न सुनाना वरना टॉफी नही मिलेगी। ऐसा काफी दिनों तक चलता रहा और फिर एक दिन वो मुझे अपने घर ले गया। वहां सोफ़ा पे लिटा के उसने पहले 5 मिनट मुजे चूम चूम के बेहाल कर दिया। फिर अपनी पेंट उतार के मुझे अपना लिंग पकड़ा दिया। मैं हैरान थी क्युकी पह्की बार खड़ा लिंग देख रही थी। उसने मुझे पुछा की टॉफी पसंद है या चोकलेट तोह मेने कहा चाकलेट। उसने मुझसे कहा की अगर चाकलेट चाहिए तो उसका लिंग मसलना पड़ेगा। मैं भोली भाली कमसिन बच्ची थी मुझे क्या पता यह सब क्या होता हे। मैं उसका लिंग हिलाने और मसलने लगी और वोह भी मेरे जिस्म पे हाथ फेरने लगा । फिर उसने मुजे चुम्बन दे के लिटाया और मेरी frock उठा के* पेंटी उतार दी और मेरी टांगो के बीच अपना लिंग रख के आगे पीछे झटके देने लगा । साथ ही वोह हमारे मोहल्ले की सबसे सेक्सी सरदारनी जिसका नाम रोमा कौर था और जो मेरी दूर की cousin बेहेन थी उसका नाम ले ले के मुजे चोदने लगा । मैं हैरान परेशान सी सोफा पे लेटी हुई उसका यह कुकर्म झेलती रही । फिर उसने मुझे उलटी लिटा दिया पेट के बल और पीछे से मेरी टांगो में लिंग सटा के धक्कम रेल चलाता रहा। 5 मिनट बाद उसका सफ़ेद घाड़ा पानी निकला और मुझे सीधी करके मेरे पेट और झांघो पे गिरा दिया । मैं हैरान हो गयी क्युकी पहली बार वीर्य देखा था । मेने पुछा यह दही कहाँ से आया तोह वोह कमीना हस के बोला हाँ यह दही है स्वाद ले के देख । मेने ऊँगली से उठा के जीब पे रखा तो अजीव सा नमकीन स्वाद आया । फिर उसने अपनी ऊँगली पे लगा के सारा वीर्य पिला दिया । उसके बाद आकाश ने मुझे चोकलेट दी और बोल किसी से ना कहना । मुझे चोकलेट पसंद थी और फिर यह सिलसिला चल पड़ा। वह तक़रीबन हर दुसरे या तीसरे दिन मेरा योंन शोषण करता और बदले में चोकलेट या चिप्स दे देता । पर एक बात थी उसने कभी भी मेरे सुराख़ में लिंग डालने की कोशिश नही की ।
यह था मेरा पहले योंन सम्बन्ध जो 6 महीने चला । फिर आकाश के पापा का तबादला किसी और शेहर हो गया ।

आकाश के चले जाने के बाद अगले कई साल मेरी जिंदगी में कोई नया लड़का नही आया। मैं अब बड़ी हो रही थी और मेरे अंदर नई नई उमंगें जवान होने लगी थी। टीवी पे फिल्मो में दिखने वाले सीन्स मुझे मस्त कर देते। रोमांटिक सीन्स देख देख के मैं भी अपने हीरो की राह देखने लगी थी। कोई भी लड़का मुझे देखता तोह मैं अंदर ही अंदर उम्मीद लगा बैठती की क्या येही हे मेरा राजकुमार।
फिर वोह पल आ ही गया जब मेरा राजकुमार मेरे सपनो को पूरा करने चला आया। मैं अपनी उम्र नही बता सकती क्युकी ad
एक शाम को हम पार्क में खेल रहे थे की तभी सोना दीदी कहीं गायब हो गयी। उनको ढूँढने के लिए मैं पार्क के पिछले कोने में गयी तोह वहां झाड़ियों से मुजे सोना दीदी के हस्सने की आवाज़ आई। मैं चोकन्नी हो गयी और बड़े ध्यान से करीब गयी। वहां जो हो रहा था उस से मेरे होश उड़ गये। सोना दीदी को दो लडको ने अपने बीच दबोच रखा था और उनकी स्कर्ट उठी हुई थी कमर तक। मेरे दिमाग में आकाश के साथ बिताये पल याद आने लगे और मेरा जिस्म मस्ती के सैलाब में बहने लगा।

मैं सोना दीदी की हरकतों को देख के हैरान भी थी और उनकी हिम्मत की दाद भी दे रही थी। तभी वह दोनों लडको पे मेरी नजर पड़ी तोह देखा की यह वही दोनों हैं जो मुझे घूरते थे। मैने ध्यान से उनकी बातों को सुना तोह पता चला की वह मेरे ही बारे में बातें कर रहे थे। सोना दीदी ने उनको मेरा नाम बताया और कहा की वह दोनों सबर रखें तोह मेरी उनसे दोस्ती करवा देंगी। यह बात सुन के मेरा दिल मस्ती से कूदने लगा और मैं वहां से चली आई। 15 मिनट बाद वह तीनो भी आ गये और सोना दीदी ने मुझे बुला के अपने दोनों दोस्तों से परिचय करवाया। उनके नाम विक्की और योगी था। विक्की ऊँचा लम्बा हट्टा कट्टा लड़का था। रंग सांवला और चेहरे पे शेव बनाई हुई थी जिस से अंदाजा हो गया की वह व्यस्क हो चूका था। मोहल्ले के सभी लड़ों पे उसका दबदबा था क्युकी वह बॉडी बिल्डिंग करता था gym में और अमीर माँ बाप का इकलोता बेटा था। उसके पापा पंजाबी ब्राह्मण और माँ कश्मीरी पंडित थी। योगी कश्मीरी पंडित लड़का था। एकदम गोरा चिट्टा और चिकना पर बातों का उतना ही तेज़ और चिकनी चुपड़ी बातें करने वाला। विक्की ने दोस्ती का हाथ मेरी और बढाया और मैंने भी बिना देरी के अपना हाथ उसके हाथ में दे दिया योगी भी मेरे पास आया और हाथ आगे बढाया पर विक्की मेरा हाथ छोड़ने को तयार ही नही था। सोना दीदी हस्स्ते हुए बोली सोनी कौर विक्की का हाथ छोड़ेगी या बेचारा योगी खड़ा रहे। मैं शर्म से लाल हो गयी पर विक्की ने बेशर्मो की तरह मेरा हाथ पकडे रखा। मुझे मजबूरी में अपने बायें हाथ से योगी का हाथ थामना पड़ा। यह देख के सोना दीदी बोली की तुम दोनों नई सरदारनी के चक्कर में पुरानी को भूल तोह नही जाओगे। इस्पे विक्की ने हस के कहा की चिकनी सिखनियो का साथ नसीब वालों को मिलता है। इस बात पे हम सब खूब खिलखिला के हस दिए और हमारी दोस्ती का सफ़र शुरू हो गया

नये माहोल में आ के एज नये खुल्लेपन का एहसास होने लगा था। विक्की और योगी से दोस्ती करके नई उमंगे परवान चड़ने लगी थी। सोना दीदी भी खूब बढ़ावा देती थी मुझे। एक दिन शाम को हम सारे छुप्पा छुपी खेल रहे थे। मैं विक्की के साथ एक दीवार के पीछे छुप गये। योगी सोना दीदी के साथ उनके घर के टॉयलेट में छुप गये जो बाहर बना हुआ था लॉन में। विक्की ने मुझे अपने सामने कर लिया और चुप रहने को कहा। तभी राजू जो हम सबको ढूंड रहा था वहां आया पर हम विक्की ने मोका देखते मेरा हाथ पकड़ा और योगी के टॉयलेट की और दौड़ पड़ा। मैं भी विक्की का साथ देती हुई वहां पोहंच गयी। विक्की ने योगी से दरवाजा खोलने को कहा और फिर हम दोनों भी अंदर घुस गये। अब जो हुआ उसके लिए मैं बिलकुल तयार नही थी।
विक्की मेरे पीछे खड़ा हो गया और योगी सोना दीदी के। फिर योगी ने अपने कूल्हे को सोना के नितम्बों पे रगड़ना शुरू कर दिया। मैं आंखें खोल के सोना को देख रही थी पर उसने मुझसे कहा ऐसा करने में बोहोत मज्जा आता हे। मैं कुछ समझ पाती उससे पहले विक्की ने अपने कूल्हे को मेरे नितंबो से लगा दिया। मेरी सिस्कारियां निकल गयी पर सोना ने मेरा हाथ थाम के मुझे चुप रहने का इशारा किया। बाहिर राजू हमें ढूंड रहा था और अंदर हम रासलीला मन रहे थे। विक्की ने अपना मोटा लम्बा लिंग मेरे नितंबो के बिच की दरार में फस्सा दिया था और अब हलके हलके धक्के दे के वोह मुझे आकाश की याद दिला रहा था। मेने घुटनों जितनी फ्रॉक पहनी थी और वोह भी अब विक्की ने हाथ से उठानी शुरू कर दी। मेरी गरम सांसें तेज़ी से चलने लगी और विक्की भी अब अपनी साँसों को मेरी गर्दन गले और पीठ पे छोड़ने लगा जिस से मेरी मस्ती दोगुनी होती गयी। सामने योगी ने सोना की स्कर्ट कमर तक उठा ली हुई थी और अपने कूल्हों को बड़ी तेज़ी से उसके नितंबो पे रगड़ रहा था। हम चारों की तेज़ सांसें उस छोटी सी जगह पे कोहराम मचा रही थी।

योगी ने सोना की पेंटी उतार दी थी और घुटनों तक खिसका दी थी। सोना की हालत बदहवासी से भरी हुई थी और वह योगी को उकसा रही थी । इधर विक्की बड़े ध्यान से मेरी हालत पतली करने मैं लगा हुआ था। मेरी फ्रॉक अब कमर तक उठ चुकी थी; मेरी पेंटी भी घुटनों तक खिस्सक गयी हुई थी और विक्की का लिंग भी बाहिर आ गया था। मेने अपने नग्न नितम्बों पर उसका गरम नंगा लिंग महसूस किया और बिजली के झटके से महसूस करते हुए विक्की के अगले कदम का इंतजार करने लगी। विक्की ने भी देर नहीं की और सीधे अपने लिंग को मेरी झांघो के बीच फस्सा दिया। मेरी उमंगें तरोताजा हो गयी और मैं हवस के खेल का खुल के मज्जा लेने लगी।
अब मेरी नज़र सोना पे पड़ी जो की घोड़ी की तरह झुकी हुई थी और तक़रीबन नंगी हो चुकी थी पूरी तरह। योगी ने अपने लिंग पे थूक लगा के सोना के नितंबो के बीच गुदा सुराख में ल फसा के तेज़ धक्का मारा । सोना की हलकी चीख निकली और फिर उसने अपने होंठो को दांतों तल्ले दबा दिया। उफ्फ्फ क्या नज़ारा था …. योगी का लिंग सोना के अंदर बाहर हो रहा था और सोना झुक्की हुई मज्जे ले ले के मरवा रही थी। मेरा मन किया की काश सोना की जगह मैं होती। तभी विक्की ने अपने लिंग पे थूक लगा दी और फिर मुझे झुकने को कहा। मैं भी बिना सोचे समझे झुक गयी और आने वाले तूफ़ान की तयारी करने लगी। फिर विक्की ने भी मेरी गुदा सुराख में थूक लगा के ऊँगली अन्दर घुस्सा दी। मेरी सांस उपर की उपर और नुचे की निचे रुक गयी। पर कुछ ही पलों बाद सब सामान्य हो गया और अब विक्की की ऊँगली पूरी तेज़ी से मेरी गांड में अंदर बाहिर होने लगी।
इसके बाद विक्की ने मेरी गांड में और थूक लगा के अपने लंड को लगा दिया। फिर मेरी पतली कमर को थाम के एक कर्ररा शॉट मारा। मेरी जोर से चीख निकल गयी और मैंने विक्की को धक्केल के पीछे हटा दिया। विक्की ने मुझसे पुछा क्या हुआ तोह मैं बोली की बोहोत दर्द हुआ। इस्पे विक्की ने सोना की और इशारा करके कहा की यह भी तो पूरा लंड ले रही हे। मैं घबरा गयी थी और गांड मरवाने का शोक मेरे दिमाग से उतर चुक्का था । विक्की ने भी मोके की नजाकत को समझते हुए मुझे छोड़ दिया। मैं उस टॉयलेट से बाहेर निकली और अपने घर चली गयी। पर सारी रात विक्की की अशलील हरकतें बार बार याद आती रही और सोना के कारनामे भी नींद उड़ाते रहे

उस रात मुझे नींद नही आई। सारी रात करवट बदल बदल क निकली। सुबह हुई तोह मैं स्कूल को तयार हो के चल दी। दोपहर लंच ब्रेक में विक्की मेरे पास आया और हस्स्ते हुए पुछा कल दर्द हुआ था क्या। मेने सर हिला के इशारे से हाँ कहा। वोह बोला शुरू में दर्द होता हे फिर बाद में सिर्फ मज्जा आयेगा जेसे सोनलप्रीत लेती हे। मैंने सर हिल के हाँ कहा और फिर पुछा कि सोना दीदी को भी पहली बार दर्द हुआ था। इस्पे विक्की हस के बोला की सोनल प्रीत की जिसने फर्स्ट टाइम ली होगी उसको पता होगा हम तोह उसके शिष्य हैं और उस्सी ने हमें यह सब सिखाया। मैं इस बात पे हस दी और विक्की भी मेरे साथ खूब हस्सा ।
फिर विक्की मुझे स्कूल कैन्टीन ले गया और चिप्स पेप्सी वगेरा मंगवा दी। मैं घर से सूखे ठन्डे फुल्के और गोबी की सब्जी लायी थी जो मुझे बिलकुल पसंद ना थी। विक्की भी यह बात भांप गया और उसने मुझसे आगे से लंच लाने से मना कर दिया। आज से मेरा लंच विक्की के साथ कैन्टीन में होगा। तभी वहां योगी और सोना भी आ गये। विक्की ने उठ के पहले योगी फिर सोना को हग किया ओर हम चारो बेठ गये। विक्की बोला चलो आज बंक मार के फिल्म देखने चलते हैं। मैंने मना किया तो विक्की ने कहा सोनल प्रीत और योगी तुम दोनों चलोगे क्या। वह तयार हो गये। फिर तीनो स्कूल के पिछले गेट पे गये और विक्की ने वहां खड़े दरबान को 50 रूपए दिए तोह उसने गेट खोल दिया। तभी सोना ने मुझे आने का इशारा किया। मेरी कुछ समज में आये उससे पहले विक्की मेरे पास आया और हाथ पकड़ के साथ चल पड़ा। मैं कोई विरोध नहीं कर पाई और हम चारो स्कूल से बाहर आ गये।

हम सब सिनेमा पोहंच गये और विक्की ने 4 टिकेट खरीदे। हम अंदर पोहंचे तोह फिल्म स्टार्ट हो गयी थी। इमरान हाश्मी और उदिता गोस्वामी की अक्सर में खूब गरमा गरम सीन थे और जब तक हम सीट पे बेठें तब तक इमरान ने उदिता को चूमना चाटना शुरू कर दिया था। मैं और सोना बीच में बेठे और योगी विक्की हमारे साइड पे। विक्की मेरी और था इसलिए मैं उसकी शरारतों के लिए मन ही मन तैयार थी।
और उसने भी समय बर्बाद नही किया, सीधे अपने हाथ को मेरी झांघ पे रख के हलके हलके मसलने दबाने लगा। मैं उस समय उतेजना से भर गयी और अपने सर को उसके कंधे पे टिक्का के उसको ग्रीन सिग्नल देदी। वोह बायें हाथ से झांघों को मसलने में लगा था और दायें हाथ को मेरे कंधो से होते हुए मेरे उरोजों को मसलने लगा। पहली बार मुझे अपने मम्मों पे किसी मर्द के स्पर्श का असर महसूस होने लगा । इतना मज़्ज़ा आता होगा मम्मे दबवाने में तो कब की शुरू हो गयी होती।
उधर योगी ने सोनल प्रीत की स्कर्ट के अंदर हाथ दाल के उसकी हालत खराब कर दी थी। साथ ही वोह उसके मम्मों को बारी बारी से निचोड़ रहा था। मैं उसकी हरकतों को देख रही थी की तभी योगी ने मेरी और देख के गन्दा इशारा किया, मैं नाक मरोड़ के उसके इशारे को अनदेखा कर दिया। तभी उसने सोनल की शर्ट के उपर वाले 2 बटन खोल के उसमे अपना हाथ घुसा दिया। मेरी तो आंखें फटी की फटी रह गयी पर सोनल प्रीत उसका पूरा साथ देती हुई मुस्कुराती हुई मम्मे पुटवाती रही।
यहाँ विक्की ने भी अपनी हरकत तेज़ करते हुए मेरी शर्ट के 2 बटन खोल दिए और हाथ अंदर दाल दिया। मेरी चीख निकल गयी पर उसने दुसरे हाथ से मेरा मुह दबा दिया। योगी सोना और विक्की तीनो मुझे घूर के देखने लग्गे, मैं भी शर्मिंदा महसूस करती हुई सोरी सोरी कहने लगी। सोनल प्रीत ने मुझे डांट लगाते हुए कहा की अब मैं बच्ची नही रह गयी हूँ। मैं भी शर्म से लाल हो गयी थी और उसको भरोसा देते हुए बोली की आगे से ऐसा नही होगा।

मैं शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी। विक्की का हाथ मेरी शर्ट के अंदर था और मेरे नग्न उरोजों के साथ जी भर के खेल रहा था। मैं अपनी कक्षा की उन गिनी चुनी लड़कियों में से थी जो ब्रा पेहेन के आती थी। हाला की सोनल प्रीत मुझसे 2 कक्षा आगे थी परन्तु मेरे उरोज उसके उरोजो को अभी से टक्कर दे रहे थे।
विक्की ने मेरी ब्रा में हाथ डाला हुआ था और मेरे चिकने मम्मे कस कस से निचोड़ने में लगा हुआ था। मेरी हालत खराब होती जा रही थी, योनी से रस बह बह के पेंटी को गीली कर चूका था। सांसें उखाड़ने लगी थी हवस के सैलाब में। उधर मेरी दाएँ ओर बेठी सोनल प्रीत की हालत मुझसे भी खराब थी। योगी कभी सोना के होंठ चूसता तो कभी अपना मूंह उसके मम्मों पे रख देता जिन्हें वोह ब्रा से बाहेर निकाल चूका था। सोनल के निप्पल मूंह में लेके वोह चूसे जा रहा था और सोनल प्रीत के चेहरे पे हवस के रंग साफ़ झलक रहे थे।
हमारे आस पास भी येही सब चल रहा था। जवान जोड़े अपनी रंग रलियों में बेखबर योंन सुख का आनंद ले रहे थे । अब योगी ने अपनी अगली चाल चलते हुए ज़िप खोल के अपने लिंग को बाहर निकाल लिया। सोनल प्रीत ने भी झट से उसके 4इंची लिंग को थाम के मसलना शुरू कर दिया। उनको देख विक्की केसे पीछे रहता, उसने भी ज़िप खोली और अपना विशाल लंड बाहर निकाल लिया। उफ्फ्फ में उसका लंड देखते ही परेशान हो गई क्युकी वह योगी के लिंग से 2 इंच लम्बा ओर दोगुना मोटा था। उसका लंड अभी से कॉलेज के लडको के साइज़ का हो गया था। मैंने अपने कांपते हुए हाथ उसके लंड पे रख के महसूस किया की उसके लंड में आग जेसी गर्मी और दिल जेसी धड़कन थी। मेरे हाथ का स्पर्श पाते ही विक्की का लंड उछल उछल के हिलने लगा।

विक्की अपने हाथो से मेरे जिस्म को गरमा रहा था और मैं भी जोश में आ के तेजी से उसके लिंग पे अपने हाथ फिसला फिसला के योंन सुख ले रही थी। उधर सोना के हाथ तेजी से योगी का हस्त मैथुन कर रहे थे कि तभी योगी के लिंग से सफ़ेद घाढा दही जेसा माल पिचकारी मारता हुआ छूट गया और सोनल प्रीत के हाथों को भर गया। इधर मैं जोश से भर गयी और तेजी से विज्क्य के लंड की सेवा करने लगी। कुछ पलों में विक्की ने भी अपनी पिचकारी छोड़ दी पर उसने मेरे सर को थाम के अपने लंड पे झुका लिया जिस कारण उसका माल मेरे हाथों से साथ साथ ठोड़ी और होंठो पे भी गिरा। पूरानी यादें ताज़ा हो गयी जब मेने अपने होंठो पे जीभ फेरी। वोही नमकीन सा स्वाद और चिपचिपा एहसास।
हमने अपने आप को संभाला और साफ़ सफाई करके बैठ गये। फिल्म ख़त्म हुई और हम सब बाहिर आ गये। मैं शर्म से सर झुका के चल रही थी पर सोना के चेहरे पे कोई शर्म नही थी। वह उन दोनों लड़कों से हस हस के बातें करती चलती रही। तभी विक्की ने मेरा हाथ थाम लिया और पुछा क्या बात है चुप क्यूँ हो। इसपे मेने विक्की की आँखों में आंखें ड़ाल के कहा कि यह सब ठीक नही जो हम कर रहे हैं। विक्की मुस्कुराया और बोला तुम मेरी गर्ल फ्रेंड बनोगी ? मैं ख़ुशी से फूले नही समा रही थी और मेने झट से सर हिला के हामी भर दी। शायद मुझे विकी से प्यार हो गया था

सिनेमा के अंदर हुए अनुभव ने मुझे बोल्ड बना दिया था और अब मैं काफी खुल गयी थी। स्कूल और घर दोनों जगह विक्की मेरे साथ मस्ती करने का कोई मोका नही छोड़ता। विक्की के लिंग का हस्त-मैथुन करते करते और उस से निकले वीर्य का स्वाद लेते लेते 2 हफ्ते हो गये थे ।फिर एक दिन शनिवार को हाफ-डे स्कूल छुट्टी के बाद विक्की मुझे अपने घर ले गया।
वहां उसने मुझे अपना आलिशान 2 मंजिला बंगला दिखाया । उस समय वहां उसके नोकर के सिवा कोई ओर नही था। फिर अंत मैं जब पूरा बंगला अन्दर बाहर से देख लिया तो वह मुझे अपने मम्मी-पापा के बेडरूम ले गया । वहां उसने एक अलमारी खोली और किताबों के निचे से एक मैगज़ीन निकाली। मैं तब तक बिस्तर पे बेठ चुकी थी। विक्की ने वो रंगीन मैगज़ीन मेरे सामने रख के कहा यह ब्लू-मैगज़ीन हे।
मेने पहले कभी ब्लू-मैगज़ीन नही देखी थी पर देखने की इच्छा जरुर थी। मेने पहला पन्ना खोला तो दंग रह गयी। उसपे ढेर सारी तसवीरें थी जिन में अंग्रेज युगल जोड़े सम्भोग की अलग अलग क्रिया में दिख रहे थे। मेने विक्की की और देखा और मुस्कुराते हुए पुछा कि ये गन्दी मैगज़ीन कहा से लायी तो उसने बिलकुल बेबाकी से कह दिया की मम्मी पापा की हे। मैं हैरान हो गयी और 2 पल के लिए यह सोचने लगी कहीं मेरे मम्मी पापा भी तो ऐसी गन्दी मैगज़ीन नही देखते ? खैर मैं वापिस मैगज़ीन में खो गयी और पन्ने पलटा पलटा के सेक्स को नये तरीके से जानने लगी।
उसमे हस्त-मैथुन तो था ही, पर पहली बार गुदा-मैथुन, मुख-मैथुन और योनी-मैथुन के नज़ारे देखने को मिल रगे थे । ओर साथ ही साथ एक मर्द-दो लडकियां या एक लड़की-दो मर्द एकसाथ सेक्स करते देखने को मिले। यह सब देख देख के मेरी हालत का अंदाज़ा आप सब लगा ही सकते हो, एक तो कच्ची उम्र उपर से बॉय-फ्रेंड का साथ । मेरी योनी गीली हो चुकी थी और जिस्म हवस की गर्मी से लाल हो गया था। विक्की भी शायद इसी मकसद से मुझे अपने घर लाया था और अब मेरी हालत से उसको मेरे किले में अपना झंडा गाड़ के जीत का जशन मानाने का आसान मोका दिख रहा था।

मैगज़ीन देखते देखते मेरा मन बोहत विचिलित हो चूका था। मेरे हाथ पैर थरथरा रहे थे ओर सर भारी हो गया था। जेसे जेसे पन्ने पलट रही थी वेसे वेसे हवस की दासी बनती जा रही थी । अब विक्की ने अपनी चाल चली और मुझे पकड़ के पेट के बल लिटा दिया और खुद मेरे उपर चढ़ गया । मैं कुछ कहती उस से पहले मैगज़ीन मेरे सामने रख दी और बोला ऐसे देख । उसका 6इंची लंड मेरे पिछवाड़े की दरार में सटा हुआ महसूस हो रहा था।
अब विक्की मैगज़ीन के पेज पलटा रहा था और मुझे समझा भी रहा था की यह पोज केसे लेते हैं । पर मेरा ध्यान अब उसके लिंग पे था जो मेरे पिछवाड़े को निहाल कर रहा था । मेने स्कूल ड्रेस पहनी हुई थी, स्कर्ट और शर्ट । विक्की ने अब मुझसे कहा की वो मुझे मैगज़ीन वाला मज्जा देना चाहता हे, मेने भी व्याकुल मन से हामी भर दी ओर उसको ग्रीन सिग्नल दिया । विक्की ने मेरी स्कर्ट उठाना शुरू की, मेरी चिकनी जवानी नंगी होती जा रही थी। स्कर्ट कमर तक उठा देने के बाद विक्की ने मेरी पेंटी झटके से निचे खींच दी, और पेरों से बाहर करके मुझे कमर के निचे पूरी नंगी करके मेरे चिकने शरीर पे अपनी हाथ फेरने लगा।
अब मैं बिलकुल से हवस की गिरिफ्त में थी ओर विक्की की अगली चाल का इंतजार करने लगी। तभी विक्की ने मैगज़ीन को वोह पन्ना खोला जिस पे गुदा-मैथुन की तस्वीर थी । मैं विक्की का इशारा समज गयी और मन ही मन से खुद को तयार करने लगी । विक्की ने अब मेरे चिकने मांसल और गुदाज चुतड की दो फांको को अपने दो हाथो से चीर के अलग किया और फिर पुछा की थूक लगा लू या तेल ? मेने कोई जवाब नही दिया तोह उसने थूक लगा के मेरी गांड को चिकनी करना शुरू कर दिया। अच्छी तरह से थूक लगाने के बाद उसने ऊँगली मेरी गांड में घुस्सा दी। मेरी हलकी सी चीख निकली पर ऊँगली अंदर घुस चुकी थी और अब विक्की उसको अंदर बाहर करने लगा।
मेरे अंदर हवस का तूफ़ान तेज होता जा रहा था । विक्की ने अब ऊँगली निकाल ली और फिरसे थूक लगा के गांड को चिकनाई से भरने लगा। फिर उसने अपनी पेंट खोली और लिंग पे थूक लगा के मेरे गुदा-द्वार पे टिका के बोल, सरदारनी तयार हो जा थोडा दर्द होगा पहले फिर मज़ा ही मज़ा । मेने लम्बी सांस ली और शरीर ढीला छोड़ दिया । विक्की ने मेरे चुतड खोल के लंड को एक झटका देते हुए मेरी गांड में घुसेड़ना चाहा पर सुराख तंग होने के कारण लंड फिसल गया। विक्की ने मुझे अपने दोनों हाथ पीछे लाने को कहा और बोला कि में अपने चुतड हाथो से फैला लू । मेने वेसा ही किया ओर अब विक्की को आराम से लंड अंदर डालने का अवसर मिल गया । अगले ही पल विक्की के लिंग-मुंड ने मेरी गांड के तंग सुराख को चीरते हुए जगह बना के अंदर प्रवेश पा लिया।
मेरी तेज़ चीख निकली पर विक्की ने मेरा मूंह बंद कर दिया और अब तेज़ी से धक्के मार मार के अपने लंड को मेरी तंग गांड में घुसाता गया । मैं पीड़ा से कराह रही थी पर विक्की ने मेरा मूंह बंद कर रखा था। 8-10 धक्कों के बाद वोह रुक गया और मेरे मूंह से हाथ हटा के मेरे ऊपर लेट गया। मैंने विक्की से रोते हुए कहा कि मुझे छोड़ दे यह सब मुझसे नही होगा । उसपे विक्की ने कहा की अब रोती क्यों हे लंड पूरा अंदर हे । मुझे यह जान के थोड़ी राहत मिली की लंड पूरा अंदर था, अब मेने अपने शरीर को ढीला कर दिया जो कि अब तक अकड़ा हुआ था दर्द से । विक्की ने भी अब हलके हलके धक्के देने शुरू किये ओर कुछ देर में ही मेरा दर्द काफी कम हो चूका था । विक्की ने लंड पूरा बाहर खिंच के फिर से मेरी गांड और अपने लंड पे थूक लगा के फिरसे पोजीशन बनाई ओर अब की बार आराम से लंड अंदर घुसाने लगा। इस बार दर्द कम हुआ ओर मज़ा ज्यादा आया, मेने भी शरीर ढीला छोड़ दिया ओर विक्की को आराम से चोदने को कहा ।
विक्की अब स्पीड बढ़ा के तेज़ी से मेरी ले रहा था । साथ ही बोल रहा था की सोनल प्रीत से ज्यादा मज़ा तेरे साथ आ रहा हे, तुम सरदारनी कुडियां मस्त होती हो ओर मज्जे से गांड मरवाती हो । मैं यह जान के खुश हुई की सोनल प्रीत से ज्यादा मज़ा मुझ में था और अब में भी गांड उठा उठा के लंड लेने लगी। यह देख के विक्की का जोश दोगुना हो गया ओर उसने मेरी कमर थाम के ताबड़ तोड़ लंड को मेरी गांड में मारना शुरू कर दिया। मैं भी जोर जोर से सिस्कारियां मारती हुई गांड मरवा रही थी कि तभी विक्की मेरे उपर निढाल सा गिर गया ओर उसके लंड से वीर्य की धार मेरे अंदर बहने लगी। 2 मिनट वेसे ही मेरे उपर पढ़ा रहने के बाद वोह उठा ओर तोलिये से अपना लंड साफ़ करके मेरी गांड पे रख दिया। में सीधी हुई ओर अपनी गांड को तोलिये से साफ़ करके पेंटी पहन ली।

loading...

Leave a Reply