मेरा यौन शोषण part 4

में विक्की के घर दोपहर बाद गयी। उसके मम्मी पापा हमेशा की तरह घर पे नही थे। एक नोकर था रमेश जो ज्यादा कुछ बोलता नही था, मेने उस से पुछा विक्की कहाँ हे तो वह बोला बाबा बेडरूम में हैं। में सीधा बेडरूम की और चल दी, पर नजर के कोने से रमेश को मुस्कुराते देख में थोड़ी सचेत हो गयी। बेडरूम पुहंच के मेने दरवाजा खटखटाया तो अंदर से विक्की ने आवाज़ दे के बुला लिया। मेने दरवाजा खोल के देखा तो विक्की अपने मोसेरे भाई के साथ बेठ के ब्लू फिल्म देख रहा था।
मुझे देख उनको कोई हेरानी नही हुई, विक्की ने कहा की हमने तुझे आते देख लिया था खिड़की से। में सोफे पे बेठ गयी ओर विक्की से अकेले में बात करने की रिक्वेस्ट की। बॉबी चुप चाप कमरे से निकल गया ओर अब हम दो रह गये थे। मेने विक्की से पुछा की मेरी बदनामी क्यों कर रहे हो तुम दोनों। इस्पे विक्की आग बबूला हो गया और खड़ा हो के मेरे पास आया और मेरी गुत पकड़ के मुझे नीचे फर्श पे गिरा के बोला …
विक्की : तू समझती क्या हे खुद को
में : विक्की प्लीज़ मेरे बाल छोड़ो दर्द हो रहा हे
विक्की : साली तू मुझ पे इलज़ाम केसे लगा रही हे, मेरा जो मन आये वो करूंगा। तू क्या उखाड़ लेगी
में : विक्की प्लीज़ ऐसे ना बोलो। में तुमसे प्यार करती थी पर तुमने मुझे योगी से चुदवा के खराब कर दिया।
विक्की : मेने कहा था उसका लंड लेने को ??? तू खुद ऐसी हे, अब मुझ पे इल्जाम न दे साली
में : विक्की देख में अभी भी तुझे चाहती हूँ ओर तेरे लिए कुछ भी कर सकती हूँ।
विक्की : तभी अब तू मुझसे कन्नी काट रही हे, साली बकवास बंद कर वरना नंगी करके घर भेजूंगा।
में : प्लीज़ विक्की मुझे माफ़ कर दे, में तुझे शिकायत का कोई मोका नही देने वाली आज के बाद। बस एक मोका दे विक्की
इस पे विक्की चुप हुआ, और कुछ पल सोच के उसने मुझे मेरी गुत से पकड़ के उठाया और पेंट उतार के लंड चूसने को कहा। में मजबूर थी और अपनी हालत पे तरस आ गया। पर अब मेरे सामने कोई चारा नही था, सो मेने विक्की के लंड को मुह में ले लिया और चूसने लगी

विक्की और योगी से चुद चुद के मेने अपनी खूब बदनामी करवा ली थी मोहल्ले में। कहीं से उडती उडती बात मम्मी के कानो तक पोहंची तो वो मुझपे बोहोत ग़ुस्से हुए। पहली बार मम्मी का ऐसा रूप देख क में घबरा गयी। पापा को बता देने की धमकी दे के मम्मी ने मुझसे सब सच उगलवा लिया। मेरी करतूतें सुन के मम्मी के चेहरे का रंग उड़ गया। उस रात मम्मी ने पापा से किसी और नये घर में शिफ्ट होने की बात की, बहाना था बाज़ार और बच्चों के स्कूल दूर हैं। पापा ने नया घर किराये पे देखने का भरोसा दिलाया।
कुछ ही दिनों में हम नये घर में शिफ्ट हो गये। यह शेहेर के दूसरे कोने में था, यहाँ रोनक ज्यादा थी और भीड़ भाड़ भी थी। फ्लैट टाइप के अपार्टमेंट थे यह, 3 मंजिलें थी और हर अपार्टमेंट में 24 फ्लैट थे। यह इलाका मुस्लिम बहुल था, पहले वाले मोहल्ले में मिली जुली आबादी थी। मुझे जल्दी ही महसूस हो गया की मैं ज्यादा देर बच के नही रह सकती यहाँ, आते जाते हवस से भरी नज़रें मेरे जिस्म को नंगा कर देती। में कपडों में भी नंगी महसूस किया करती, और हर समय मर्दों की नज़रे हमारे फ्लैट की खिड़की पे टिक्की रहती। मम्मी ने भी आस पास का माहोल देख के मुझे स्कर्ट्स जीन्स शॉर्ट्स इत्यादी पेहेन के घर से निकलने से मना कर दिया था। अब हर वक़्त सलवार कमीज और सर पे चुन्नी रखनी पढ़ रही थी। पर मेरे मन को आज़ादी और खुलेपन की आदत थी, यह घुट घुट के जीना मुझे पसंद नही आ रहा था। अब में भी कुछ exciting करने को तड़पने लगी, और जल्दी ही कुछ खिलाडी टाइप के मर्दों ने मेरी नज़रे भांप ली ओर मुझपे दिन रात डोरे डालने लगे।

एक दिन मैं अपने टॉप फ्लोर वाले फ्लैट से निकल के सीढियों से उतर रही थी। 2nd फ्लोर पे पोहंची थी की सामने एक ऊँचा लम्बा मर्द मेरा रास्ता रोके खड़ा था। मैं घबरा गयी ओर उस से बच के साइड से निकलने लगी। वह वहीँ खड़ा रहा, बिलकुल नही हिला। उसकी दाईं बाज़ू मेरे दायें उरोज से रगड़ खाते हुए निकली। मैं जेसे ही उस से दूर हुई तो तेजी से सीढियां उतर के स्कूल को भागी।
मेरा दिल जोर से धधक रहा था, सांसें तेज ओर पैर कांप रहे थे। मैं पब्लिक ट्रांसपोर्ट से स्कूल जाया करती थी। अब मैं बस स्टॉप पे खड़ी थी की 3-4 मजनू रोमियो टाइप लड़के मुझे लाइन देने लगे। मैं अंदर से खुश हो रही थी पर बाहर से नाक चढ़ा दिया उनको दिखाने के लिए। इतने में बस आई और वो सब भी मेरे पीछे चढ़ गये। बस में भीड़ थी इसलिए खड़े खड़े जाना पड़ता था अक्सर स्कूल। उन लडकों में से एक मेरे मोहल्ले का था, वह मेरे पीछे से पास आया ओर मेरे पिछवाड़े से चिपक के खड़ा हो गया। मेने मुड़ के देखा तो वह मुस्कुराया ओर बोला,”हई डिअर,आप मोहल्ले में नई आये हो ना?” मेने सर हिला के हाँ कहा, तो उसने झट से हाथ आगे बढ़ा दिया और बोला,”मेरे साथ फ्रंड बनोगी, आप मुझे पसंद हो”। में उसके बोल्ड अंदाज से इमप्रेस हुए बिना नही रह पाई और सर झुका के मुस्कुराती हुई नज़रे चुराने लगी। उसने हाथ अभी भी बढ़ा रखा था, और सीट पे बेठे कुछ लोग मुझे देख रहे थे। मेने जान छुड़ाने के लिए उसका हाथ थम लिया।
वह बड़ा खुश हुआ और अब पीछे से मुझे ज्यादा दबाव महसूस होने लगा। मेने फील किया कि उसका लंड खड़ा हे ओर मेरे पिछवाड़े की दरार में सेट हो के सटा हुआ हे। बड़े दिनों बाद लंड के एहसास से में रोमांचित हो उठी और उसका साथ देने लगी। वह भी समझ गया की मुझे बुरा नही लग रहा, और अब एक हाथ मेरी पतली कमर पे रख के रुक रुक के हिलते हिलते लंड का मज़ा देने लगा। कुछ देर में मुझे लगा जेसे मेरी सलवार पे कुछ गीला गीला सा हे, मेने एक हाथ पीछे लिया तो हैरान हो गयी की उसने लंड ज़िप से निकला हुआ था और उसका वीर्य मेरे पिछवाड़े पे लगा हुआ था। में शर्म से लाल हो गयी, समझ नही ई क्या करू। तभी मेने फील किया उसने रुमाल से मेरा पिछवाडा साफ़ किया, ओर सॉरी बोल के पीछे हट गया। में अब परेशान सी स्कूल के आने का वेट करने लगी

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