मेरा यौन शोषण part 3

सामने मुश्ताक अंकल को देख मेरी हवाइयां उड़ गयी। वह सीधे अंदर आ गये और पूछा की मम्मी पापा कहाँ हैं, जब की उनको पता था की इस वक़्त घर पे कोई नही होता। मेने कहा बाहर हैं बस आते ही होंगे। पर मुश्ताक जनता था कि कोई नही आने वाला अगले कई घंटो तक सो वह अंदर आ के लॉबी में बैठ गया।
मेने उनके लिए पानी पुछा पर उन्होंने चॉकलेट निकाल के मुझे पास आने का इशारा किया। में अकेली थी घर पे इसलिए थोडा घबराई हुई थी, सो मेने चॉकलेट नही ली। मुश्ताक ने जब देखा की में पास नही आ रही तो वह खुद खड़े हो के मेरे पास आने लगे। में झट से लॉबी के बाहर निकल गयी ओर अपने आप को उनसे दूर करने लगी। पर वो मेरा नाम लेते हुए पीछे आ रहे थे। “सोनी बेबी कहाँ जा रही हो…. अंकल के पास आओ … में आपके लिए गिफ्ट लाया हूँ…”
गिफ्ट का नाम सुनते ही में खड़ी हो गयी, मुश्ताक भी पास पोहंच गये ओर मुझे पकड़ने के लिए हाथ आगे बढाया पर में भी कच्ची गोलियां नही खेली थी सो झट से दूर हो गयी। अंकल ने अब अपना अगला दाव चला, और जेब में हाथ दाल के मुझसे कहा की गिफ्ट यहाँ हे आ के लेलो। मेरी नजर उनकी पेंट की जेब पे पड़ी परन्तु मेरा ध्यान उनके गुप्तांग वाली जगह पे बने टेंट पे गयी । कितना बड़ा लग रहा था अंकल का लिंग, विक्की ओर योगी तो बच्चे थे उनके सामने। मेरे अंदर एक अजीब सी लहर पैदा हुई जिसने मेरे पक्के इरादों को कमजोर कर दिया, में अंकल से दूरी बना के रखना चाहती थी पर उनका खड़ा लंड मुझे उनके पास जाने को मजबूर करने लगा।
में इसी कशमकश में खड़ी थी की तभी मुश्ताक ने एक झपटे में मेरी नाज़ुक कलाई पकड़ ली ओर हस्ते हुए एकदम पास आ गया। उनकी आँखों में जीत की चमक थी, वेसी ही जेसी किसी योधा को जंग जीत की होती होगी। मुश्ताक ने जंग तकरीबन जीत ली थी, बस अब सरदारनी के किले में झंडा गाड़ने की देर थी। उन्होंने मेरा हाथ अपनी पेंट की जेब में डाला और कहा की गिफ्ट लेलो। मेने हाथ अंदर टटोला तो गिफ्ट नही था, पर वो चीज हाथ में आ गयी जो दुनिया की सबसे अच्छी गिफ्ट हो सकती हे किसी भी सेक्सी सिखनी के लिए।

मुश्ताक मुझे पीछे करते हुए बेडरूम की तरफ ले गये। मैं घबराई हुई उनकी और देखती हुई रह गयी ओर वह मुझे बिस्तर पे फेंक के मेरे उपर सवार हो गये, ऐसा लग रहा था जेसे एक भैंसा किसी बकरी पे चढ़ गया हो। मैं उनके अगले कदम के बारे में सोच रही थी कि उन्होंने मेरी दोनों कलाइयाँ थाम के सर के उपर कर दी ओर अब मेरे गले गरदन ओर गालों को चूमने लगे। उनकी आँखों में हवस का अशलील साया साफ़ दिखाई दे रहा था, पर में बेसहारा लाचार सी उनके निचे पड़ी हुई उनकी हवस का शिकार बन रही थी।
फिर धीरे धीरे उन्होंने अपने कूल्हों को हिलाना चालू किया, मेरी योनी पेट ओर झांघों पे उनके मोटे औजार की रगड़ साफ़ महसूस होने लगी। बीच बीच में वह मेरी चूत में हमला करने की कोशिश करते जिस से मुझे उनका लंड चुभन का एहसास देता, कपडों के उपर से ही। मेने हरे रंग की फ्रॉक पहनी थी जो की अब काफी उपर तक उठ चुकी थी ओर मेरी गोरी चिट्टी झंघें मुश्ताक को दीवाना बना रही थी। वह मेरी झांघों को जोर जोर से मस्सल के लाल करने में जुट गये, में भी एक वयस्क मर्द के हाथों की कलाकारी का आनंद लेना शुरू कर चुकी थी। विक्की ओर योगी तो नोसिखिये थे, पर मुश्ताक अंकल एक परिष्कृत खिलाडी जिसने न जाने कितने किले फ़तेह किये हुए थे। एक कमसिन सिखनी को जीत के उसे अपनी हवस मिटाना उनके लिए कोई मुश्किल काम नही था ।
अब 10 मिनट हो गये थे मुश्ताक को मेरे उपर चढ़े हुए, ओर अब तक मेरी प्रतिरोध करने की क्षमता ख़त्म हो चुकी थी, उलटे अब में भी अंकल का खुल के साथ देने लगी थी। मेरी सिस्कारियां बेडरूम में गूँज रही थी, मेरा तन्ना हुआ जिस्म उनके नीचे मछली की तरह मचल रहा था, ओर मेरे हाथ उनके बालों को सहला रहा थे। अंकल को शायद अंदाजा नही होगा की यह कमसिन सी दिखने वाली सरदारनी कितने बड़े कारनामे कर चुकी थी, इसलिए जब मेने खुल के उनका साथ देना चालू किया तो वो थोडा हैरान जरुर हुए, पर फिर दोगुना जोश के साथ मुझ पे टूट पड़े ओर मेरे योवन रस का सवाद लूटने लगे

मुश्ताक मेरे उपर चढ़ के मुझे रगड़ रहे थे। उनके मरदाना स्पर्श से में एकदम मस्त हो गयी थी ओर खुल के उनका साथ दे रही थी। अब वह थोडा सीधे हुए ओर अपनी ज़िप खोल के अपने विशालकाय लंड को बाहर निकाल लिए। विक्की योगी के लंड ले ले के मुझे चुदने का चस्का लग गया था, पर अंकल के 8इंची लम्बे ओर मेरी कलाई जितने मोटे लंड को देख के चुदवाने की इच्छा गायब हो गयी।
अंकल ने मेरी फ्रॉक उपर उठा दी ओर फिर पेंटी नीचे खीँच के मुझे नंगी कर दिया। मेने कुछ दिनों से सफाई नही की थी इसलिए योनी पे बाल उग आये थे, अंकल ने मेरी योनी अपनी हथेली में ले के मस्सल डाली जिस कारण मेरी चीख निकल गयी।

मुश्ताक ने पुछा तुम सफाई नही करती हो क्या, टी मेने कहा हाँ करती हूँ पर पिछले हफ्ते नही कर पायी अब इस एतवार को करूंगी

यह सुन के मुश्ताक जोश से भर गये और मेरे होंठों गालों को मुंह में भर के पीने लगे। में भी मस्ती में उनका साथ दे के अपने योवन रस को लुटवाने लगी। अब उन्होंने मेरी गोरी चूत को फैलाया और घप से एक ऊँगली अंदर घुसा दी। में इस अचानक हुए हमले के लिए तयार नही थी, मेरी चीख निकल गयी
में : हायो रब्बा ओऊह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह ऊईईईईई
मुश्ताक : क्या हुआ बेबी?
में : अंकल प्लीज़ बाहर निकालो ना ….. मुझे दर्द हो रहा हे
मुश्ताक : बेबी तुम तो गीली हो गयी हो, देखो कितने आराम से ऊँगली खा रही हे तुमारी चूत
यह बोल के अंकल ने ऊँगली अंदर बाहर करना चालू करदी। सही में बड़े आराम से अंदर बाहर ही रही थी।
मुश्ताक: बेबी तुमारी चूत अंदर से बड़ी गरम भी हे; एकदम तंदूर जेसी
में : हायो रब्बा ऊई आह ओह ओह उह्ह उह्ह उह्ह
मुश्ताक : बेबी मेरा लंड चूसोगी ?
में : अंकल यह भी कोई चूसने की चीज हे … छी छी
पर मुश्ताक पे हवस का भूत सर चढ़ के बोल रहा था, वह मेरी चूत से ऊँगली निकाल के मेरी छाती पे चढ़ गये और अपने विशाल कड़क लिंग को मेरे मूंह पे मरने लगे।
में : अंकल आपका बोहोत बड़ा हे
मुश्ताक (सवालिया आँखों से) : नही बेबी यह तो नार्मल साइज़ हे
में : नहीं अंकल यह बोहत बड़ा हे, इतना बड़ा मेने कभी नही देखा।
मुश्ताक (मुस्कुराते हुए) : सोनी बेबी तुमने कितने लंड देखे हैं?
में अपनी गलती देर से समझी पर तब तक देर हो गयी थी। मेरा राज़ खुल गया था ओर अब मुश्ताक अंकल मुझ पे हावी होते चले गये
मुश्ताक मेरे जिस्म को नोच नोच के निशान डाल रहे थे, ख़ास करके झांघ चुतड उरोज ओर टांगों पे। में घबरा रही थी कहीं कोई आ गया तो क्या होगा। मेरे अंदर डर और उतेजना का मिला जुला भाव उफान भर रहा था। फिर तभी मुश्ताक ने मेरी टांगें ओर चोड़ी करके खोली अपनी एक ओर ऊँगली घप से घुसेड दी, मेरी चीख निकल गयी पर मुश्ताक ने कोई रहम नही दिखाया ओर अब उनकी दो ऊँगलीयां मेरी टाइट चूत की गहराई ओर चोडाई नापने में जुट गयी।
धीरे धीरे हवस का मज़ा मेरे डर पे हावी होने लगा था, मुश्ताक भी एक कलाकार की भांति मेरे अंदर की चालू कुड़ी को बाहर निकाल रहा था।
मुश्ताक : बेबी बोलो ना तुमने कितने लंड देखें हैं
में : अंकल वो वो एह वो एह एह ह्म्म्म ….
( मेरी बोलती बंद हो गयी थी, मेरा राज़ खुल चूका था ओर इसीलिए मुश्ताक मुझ पे जोश से सराबोर होके टूट पड़े थे।)
में : अंकल वो एह वो बस एक ही देखा हे।
मुश्ताक : किसका ?
में : है कोई स्कूल का सीनियर।
मुश्ताक : उसी ने तुमारी चूत मारी हैं क्या ?
में शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी। पर में जितना शरमाती मुश्ताक उतना ही हावी हो के मेरी चूत में ऊँगली करते। अब तो उनकी 2 उँगलियाँ भी सटासट अंदर बाहर हो रही थी जिस कारण में अपने चरम के करीब पुहंच गयी थी। में अपने चूतड उठा उठा के उनकी उँगलियाँ लेने लगी। यह देख के मुश्ताक के चेहरे की हैरानी ओर उनकी आँखों में हवस की चमक साफ़ नजर आ रही थी। उन्होंने मेरे होंठों को अपने मूह में भर दिया ओर रस चूस चूस के मेरे होंठ पीने लगे, साथ ही निचे उनकी उंगलियों ने अपनी करामात दिखाते हुए मेरा काम कर दिया। में तेज़ तेज़ झटके खाती हुई झड़ने लगी ओर अपना योनी-रस मुश्ताक की उंगलियों ओर हाथो पे फेंकने लगी

में बिस्तर पे निढाल पड़ी हुई थी। मेरी योनी ओर झंघें भीग चुकी थी मेरे कामरस से। मेरी आंखें बंद थी ओर में मंद मंद मुस्कुराते हुए ओरगास्म का मज़ा ले रही थी की तभी एक कठोर झटके ने मेरे होश उड़ा दिए। मुश्ताक ने अपने तन से सारे कपडे जुदा करके साइड को रख दिए थे ओर उनका मूसल समान लंड मेरे अंदर था। मेरी चीख निकली पर उन्होंने मेरा मूह बंद करके एक करारा शॉट मारा जिस से उनका मशरुम जेसा सुपाडा मेरी टाइट चूत में घुस गया। मैं दर्द से तड़प रही थी, ओर मुश्ताक को धक्के दे के पीछे हटाने की कोशिश करने लगी।
मुश्ताक पक्का खिलाडी था, उसने भी आव देखा ना ताव और लंड को अंदर घुसेड के ही रुका । पूरा लंड मेरी कमसिन चूत में ठेल लेने के बाद वो रुका और अपनी सांसें सँभालने लगा। मेरी हालत बोहत खराब थी, ऐसा लग रहा जेसे कोई छुरी कलेजे में उतार दी हो, जेसे कील ठोक दी हो दिल की गहराई में। कुछ देर यूँही पड़े रहने के बाद मुश्ताक ने लंड बाहर खिंचा, मेरे अंदर फिरसे दर्द की लहरें पैदा होने लगी और मेने मुश्ताक से लंड बाहर न निकालने की गुज़ारिश की पर उसने मेरी एक न सुनी। पूरा लंड बाहर निकाल के वह मेरी चूत को निहारने लगे, फिर मुस्कुरा के पुछा…
मुश्ताक : बेबी तुम अब लडकी से औरत बन गयी हो, केसा लगा मेरा लंड ले के?
में : स्स्स्स्स्स्स्स्स उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ अंकल मुझे बोहत तेज़ जलन हो रही हे, लगता मेरी फट गयी हे
मुश्ताक : बेबी तुमारी तो पहले से थोड़ी फट्टी हुई थी, आज पूरी फाड़ के तुम्हे औरत बना दिया हैं। अब तुम किसी भी मर्द को खुश कर सकोगी
में : ऊ ऊ ऊ ऊह्ह जलन हो रही हे अंकल , कुछ करो भी अब

मुश्ताक ने मेरी हालत को समझा और मेरी टांगों के बीच झुक गये, फिर अपना मूह मेरी योनी पे ले जा के अपनी लम्बी जीभ निकाली ओर मेरी जलती हुई चूत पे रख दी

मेरी चूत को जलन से आराम मिला जब मुश्ताक अंकल ने अपनी जीभ से मेरी चूत को चाटना शुरू किया। मेरे लिए एक नया एहसास था यह, ओर कुछ ही पलों में मेरी जलन खत्म हो चुकी थी। अब में अंकल की इस अत्यंत रोमांचित हरकत से मंत्रमुग्ध हो गयी , मेरे अंदर फिर से एक नये चरम तक पहुँचने की लालसा जाग गयी। अंकल मेरी चूत के सुराख में जीभ घुसेड के दाएं बाएँ घुमा के मुझे पागलपन की हद तक मज़ा दे रहा थे, फिर जीभ को चूत से बाहर निकाल के मेरे क्लाइटोरिस की सेवा करने में जुट गये।
में : ऊफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ अंकल अह्ह्ह्ह आह ऊफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मर गयी हाय रब्बा
मुश्ताक : ऊम्म्म्म्म्म बेबी तुम तो जन्नत हो, खुदा की कसम तुम ने मेरा दिल जीत लिया है। मुझे उम्मीद नही थी की इतनी नादान सी दिखने वाली सिखनी इतना मज़्ज़ा देगी
में : अंकल आप ने मुझे जितना मज़ा दिया आजतक किसी ने नही दिया था। में हर वक़्त तरसती थी कोई मुझे ऐसा प्यार करे जेसा अभी आप कर रहे हो

मुश्ताक अंकल ने फिर मेरी आँखों में देखा, और दोबारा जीभ से मेरी चूत के हर हिस्से को चाटने में जुट गये। में भी खुल के सिस्कारियां भरती हुई जीभ ओर योनी के मिलन से उठने वाली तरंगों में झूमने लगी। में अब चरम के पास पहुँच गयी थी, मेरी सांसें गहरी ओर तेज़ हो गयी, पेट की गहराई में ज्वारभाटा बढ़ने लगा, आँखों के सामने सतरंगी सितारे चमकने लगे, ओर फिर बाँध टूट गया । में झड़ रही थी, मेरा जिस्म ऐसे झटके खा रहा था मानो 440 वोल्ट की करंट लगी हो। मेरी योनी से कामरस बहने लगा जिसे मुश्ताक ख़ुशी ख़ुशी चाटने लगे।

मेरी योनी से बहते कामरस की आखरी बूँद चाट लेने के बाद मुश्ताक सीधे हुए और अपना पत्थर जेसा सख्त लंड मेरी लिसलिसी चूत के मुंह पे लगा के बोले
मुश्ताक : बेबी अब तुमको इतना मज़ा आयेगा कि मानो जन्नत की सैर कर रही हो।
में : अंकल मैं झूम रही हूँ, ऐसा लगता हे जेसे हवा में उड़ रही हूँ।
मुश्ताक ने लम्बी सांस भरी और मरदाना लंड को कमसिन चूत में उतारने लगा, और तब तक उतारता रहा जब तक पूरा लंड जड़ तक अंदर ना समा गया । मुझे पहली बार के मुकाबले कम दर्द हुआ, ओर इस बार मस्ती से लंड लेके मुश्ताक के पेट और छाती से खुद को चिपका ली मानो छिपकली छत से चिपक गयी हो। मेरी टांगें मुश्ताक की कमर के आसपास लिपटी हुई थी और बाहों का हार उनके गले में था, मेने अपने हलके जिस्म को मुश्ताक के कठोर बदन से ऐसे चिपका लिया कि सिर्फ मेरे पैर ओर सिर बिस्तर से लगे हुए थे, बाकी का नंगा जिस्म मुश्ताक से चिपका हुआ था।
मुश्ताक मेरी हरकत देख परेशान हुए, पर जल्दी खुद को सँभालते हुए पूरे जोश से लंड बाहर खींच के जबरदस्त धक्का मारते हुए मुझे बिस्तर में धंसा दिया और लंड फिर से जड तक मुझ में समा गया। फिर से एक बार दोबारा लंड बाहर खींचते हुए मुश्ताक ने जबरदस्त तरीके से मेरी रसीली चूत में प्रहार किया जिस से उनका मशरुम जेसा सुपाडा मेरी कमसिन कोख से जा टकराया। मेरी चीख निकल गयी, और आँखों के सामने अँधेरा छा गया।
में बेहोश हो गयी, पर जब होश आया तो मुश्ताक मुझे बुरी तरह रौंद रहे थे । में चुदती रही ,मुश्ताक चोदते रहे। मुझे अब एहसास होने लगा की में जल्दी अपने चरम तक पहुँच जाउंगी, सो मेने भी मुश्ताक की ताल से ताल मिलाते हुए नीचे से कुल्हे उचका उचका के अपनी चूत में लंड लेना प्रारम्भ किया। जल्दी वो घडी आ गयी जब मुश्ताक अपने अंडाशय में उबलते हुए ज्वालामुखी को रोक नही पाए और जल्दी से लिंग बाहर खींच के मुझे अपने गाढे सफ़ेद गरम वीर्य से नहलाने लगे। में भी आंखें बंद करके अपने नंगे जिस्म पे गिरती वीर्य की बूँदों को महसूस करती अपने चरम को प्राप्त हुई

मुश्ताक से अपना योंन उत्पीडन करवाने के बाद मुझे मर्दों में ख़ास रूची पैदा हो गयी, ओर विक्की-योगी से मिलना जुलना कम होता गया। अब मैं अक्सर घर बेठी रहती, बाहर खेलना बंद करके घर में मुश्ताक के साथ खेल खेलने में ज्यादा खुश रहती। मुश्ताक भी किस्मत से मिले इस मोके का भरपूर फायदा उठा रहे थे। वो हफ्ते में कम से कम 3 बार जरुर मुझसे मिलने आते, वह भी तब जब कोई न हो घर पे। चूँकि वह पापाजी के दोस्त थे और ओर अक्सर आना जाना तगा, सो किसी ने शक भी नही किया।
मैं भी मुश्ताक के आने की राह देखा करती, ओर जबसे बाहर जाना बंद किया था तबसे मेरा सारा ध्यान उनमे ही चला गया था। पर जेसे ही वह घर में घुसते, मैं उनसे दूर भागने की कोशिश करती। यह हर बार की रूटीन बन गयी थी अब, वह मुझे देख के मुझपे झपटते, ओर में हस के भाग निकलती। फिर वह हस्ते हस्ते मेरा पीछा करते, ओर में हस्ते हस्ते उनसे दूर भागती। पूरे घर में वह मेरा पीछा करते, लॉबी से बेडरूम, किचन से कॉरिडोर ओर फिर लॉबी। पर अंत में वो जहाँ कहीं भी मुझे पकड़ लेते वहीँ हमारा योंन कार्यक्रम शुरू हो जाता। अक्सर वो मुझे सीढियों में दबोच लिया करते, और फिर वहीँ मुझे झुका के पेंटी नीचे खिसका के अपने फड़कते हुए लंड को मेरी करारी चूत में ठूस के मेरा योनी-मर्दन किया करते। मैं तो पहले हमले में ही झड जाया करती पर वह 10-20 मिनट लगा के पूरी कसर निकलते अपनी हवस की। झड़ने से पहले वो लंड बाहर खींच लेते ओर मेरे केश पकड़ के मुझे सामने बिठा के मेरा मूंह में ओर चेहरे पे अपना सफ़ेद माल की पिचकारी छोड़ दिया करते।
यूँही काफी हफ्ते तक चलता रहा, ओर किसी को शक भी नही हुआ। पर यह मेरी गलतफ़हमी थी, क्यूकी विक्की योगी ने नजर रखी हुई थी की मुश्ताक अंकल का घर पे आना जाना जब से बढ़ गया तब से उनकी सोनी घर से बाहर निकलती ही नही थी।

एक दिन मैं घर पे अकेली थी की तभी किसी ने दरवाजा खट खट्टाया। में ये सोच के दौड़ के दरवाजा खोलने गयी की मुश्ताक होंगे, पर सामने कोई और थे। विक्की ओर योगी दोनों मुझे घूर रहे थे, कि विक्की ने चुप्पी तोड़ते हुए पुछा, आजकल आती नही बाहर? में थोडा सा घबराई हुई थी पर खुद को सँभालते हुए बोली कि तबीयत ठीक नही रहती इसलिए। यह सुन के वो दोनों अंदर घुस आये और बोले कि इसलिए शायद वो अंकल आजकल ज्यादा आ जा रहा हे, तेरा ईलाज करता होगा न? में परेशान हो गयी उनकी बातें सुन के, और मेने उनसे कहा की ऐसा वैसा कुछ नही हे जो तुम सोच रहे हो। इसपे योगी ने मुझसे ग़ुस्से में कहा कि अंकल तब क्यों आता हे जब घर पे कोई नही होता? तू क्या सोचती हे मोहल्ले वाले अँधे हैं, उनको कुछ दिखता नही क्या?
में शर्म के मारे लाल हो गयी, मेरे कानों में सीटी बजने लगी ओर आँखों के सामने अँधेरा सा आने लगा। पेट में अजीब सी चुभन का एहसास होने लगा, ओर मेरी टांगे कांपने लगी। विक्की ने मेरी कमजोर हालत को भांप के अगली चाल चली, उसने बोला कि पूरे मोहल्ले में येही चर्चा हे के सोनल अपनी बड़ी बेहेन की राह पे चल दी है।
( मेरी 2 बड़ी बहने हैं जिनमे सबसे बड़ी का डाइवोर्स हो चूका हे और उनसे छोटी घर से भाग गयी थी किसी असलम नाम के ड्राईवर के साथ )

में समझ गयी कि विक्की ओर योगी को क्या चाहिए। हम तीनों अंदर बेडरूम में आ गये, ओर बिना ज्यादा बातें किये मेने उन्के कपडे उतारे। वह भी मुझे नंगी करने में व्यस्त हो गये ओर कुछ पलों बाद मैं अपने घुटनों के बल जमीन पे बेठी विक्की और योगी के लिंग चूस चूस के उनको निहाल कर रही थी। पर वह दोनों आज बदले बदले से लग रहे थे। उनकी हरकतों में प्यार नही घुस्सा था, ईर्षा थी, जलन थी। तभी विक्की ने मेरे मुंह से लंड खींचा ओर पूछा, वो अंकल तेरी लेने आता हे न? में बात को टालने के लिए उसके लंड के नीचे लटक रही गोटियों को मुंह में भर के चूसने चाटने लगी। यह देख के योगी से रहा नही गया, उसने मुझे कमर से पकड़ा ओर पैरों पे खड़ी करते हुए अब घोड़ी बना दिया। मुंह में विक्की का लंड था, और फिर अगले ही पल योनी में योगी का समा गया एक ही झटके में। मुश्ताक के मरदाना लंड से लगातार चुदवाने का नतीजा सामने था, योगी का लंड फुल स्पीड अंदर बाहर हो रहा था पर मुझे जरा भी तकलीफ नही हुई। में समझ गयी योगी को पता चल जायगा की यह चूत बड़ा लंड ले ले के खुल गयी हे, इसलिए बड़े सेक्सी अंदाज से मेने योगी से कहा, डार्लिंग आज मेरी गांड नही मारोगे?
यह कहने की देर थी कि विक्की ने लंड चुस्वाना बंद किया ओर खुद पीछे आ के योगी को मेरे मुंह की ओर जाने का इशारा किया। योगी भी मन को मारता हुआ सामने आ गया, मेने झट से उसका लंड मुंह में लेते हुए चूसना शुरू कर दिया। पीछे विक्की ने लंड को मेरी करारी गांड से सटा के थूक लगाई ओर फिर कमर थाम के गांड में लंड घुसाने लगा। मेरी हलकी चीख निकली, हाययय रब्बा ऊऊ ह ह ह ह ह ह ह, पर विक्की ने बेदर्दी से पूरा लंड मेरी गोरी चिट्टी करारी गांड में ठेल दिया । अब योगी भी जोश में आ गया था और उसने मेरे केश पकड़ के लंड को मेरे मुंह में पेलने लगा, मेरा मुँह चोदने लगा तेज तेज धक्कों से। उधर विक्की ने भी टॉप स्पीड पकड़ ली थी, मेरी गांड को रगड़ते हुए उसके लंड ने चप चप चप चप ओर फरच फरच फरच फरच की आवाज़ें निकलवाना शुरू करदी मेरी मस्त गांड से।
ऐसे ही मेरी मस्त गांड को रौंदते रौंदते और मूँह चोदते चोदते विक्की ओर योगी दोनों का एकसाथ सखलन होने लगा। में योगी का वीर्य मुँह में ले रही थी और विक्की का अपनी गांड में। इस तरह दोनों ने अपनी टंकी खाली की और पीछे हट गये, मेने भी अपने कपडे उठाये और बाथरूम में चली गयी

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