मुन्नार का सफर

ट्रैन से रास्ता बड़ा शांतिपूर्वक कटा, माँ और संगीता लोअर birth पे थे| पिताजी middle birth पे थे और मैं top birth पे था| नेहा और आयुष मेरे पास ही लेटे हुए थे, हालाँकि मुझे थोड़ा डर था की कहीं वो गिर न जाएं इसलिए मैं निचे आ गया और दोनों को अपने साथ नीचे ले आया| अभी कोई सोया नहीं था …बातों में समय कट रहा था| मैं माँ के पास बैठा था और आयुष संगीता के गोद में सर रख के लेट गया| बातों-बातों में सोने का समय हो गया| पिताजी तो ट्रैन के झटके सहते हुए सो गए थे| माँ की भी आँख लग चुकी थी आयुष भी संगीता के पास ही सो चूका था| नेहा मेरी गोद में सर रख के सो चुकी थी…पर मुझे और संगीता को नींद नहीं आ रही थी| पर ये ओपन कम्पार्टमेंट था…तो कुछ भी करना नामुमकिन था| कुछ भी करने से मेरा मतलब है …. बात करना …या साथ बैठना….!!!

संगीता ने मुझे इशारे से कहा की मैं आयुष को middle birth पे लिटा दूँ| मैंने बड़ी सावधानी से आयुष को उठा के middle birth पे लिटा दिया और एक बार चेक किया की पिताजी सो रहे हैं या नहीं| मुझे उनके खरांटें सुनाई दिए…मतलब वो सो रहे हैं| उन्होंने दूसरी तरफ करवट ले राखी थी, बस माँ थीं जो हमारी तरफ करवट लेके लेटीं थीं| संगीता उठ के बैठीं और मैंने नेहा को भी middle birth पे, आयसुह के साथ ही लिटा दिया| मैं आके संगीता की बगल में बैठ गया और ऊपर से हमने जयपुरी रजाई ले ली ,अंदर गर्माहट बानी हुई थी| माँ-पिताजी भी जयपुरी रजाई लेके लेटे हुए थे, बच्चों ने कम्बल ले रखा था| संगीता को बहुत हँसी आ रही थी…

मैं: क्या हुआ?

संगीता: कुछ भी तो नहीं….!!! ही..ही…ही…

अब एक तो मिडिल बिरथ खुले होने से ठीक से बैठा नहीं जा रहा था ऊपर से उनकी हँसी ….

संगीता: आप ऐसा करो अपना सर मेरी गोद में रख लो|

मैं: माँ-पिताजी ने देख लिया तो?

संगीता: Hwwwwwww ….. तो मैं रख लेती हूँ?

मैं: Cool

और संगीता ने मेरी गोद में सर रख लिया…अब मुझसे बैठा तो नहीं जा रहा था पर किसी तरह मुड़ी हुई गर्दन का दर्द बर्दाश्त करते हुए बैठा रहा| माँ की आँख खुली तो उन्होंने हमें ऐसे बैठे और लेटे देखा तो मुस्कुराईं और दूसरी तरफ करवट कर के लेट गईं| आधी रात को एक-एक करके नेहा और आयुष को बाथरूम ले गया और वापस आके संगीता के सिरहाने बैठ गया|

संगीता: आप भी ऊपर जाके सो जाओ|.

मैं: बाबू अगर ऊपर ही सोना होता तो आपके पास क्यों बैठता?

संगीता: I like it when you call me बाबू!!!

मैं: I know ….इसीलिए तो बाबू कहता हूँ आपको!

इतने में पिताजी उठे और मुझे कहा;

पिताजी: बेटा सो जा….कल का दिन भी इसी ट्रैन में गुजारना है|

मैं: जी

पिताजी बाथरूम चले गए और मैं बेमन से ऊपर जा के सोने लगा तो आयुष उठ गया और मेरे साथ सोने की जिद्द करने लगा| आखिर मैं उसे अपने साथ ले के सो गया| अगले दिन भी उसी ट्रैन में…उसी जगह बैठे-बैठे ऊब गए! Maybe I should have booke an airplane ticket! Danm!!!! Thank God I had my Laptop through which I was connected to you guys. उसी पे हम फिल्म वगेरह देख लिया करते थे…पर बच्चे थे की शैतानी करने से बाज नहीं आ रहे थे| अगले दिन दोपहर की बात है…पिताजी दरवाजे पे खड़े थे और सिगरेट पी रहे थे, माँ और संगीता अपनी-अपनी खिड़की पे बैठे थे| मैं जान बुझ के संगीता के पास बैठा था, आयुष Middle वाली birth पे था और लैपटॉप पे गेम खेल रहा था, नेहा माँ के पास बैठी थी और उसने माँ के साथ कंबल ले रखा था| तभी एक आदमी चिप्स वगेरह बेचने आया| मैंने उस आदमी को रोका;

मैं: भाई चार चिप्स के पैकेट और दो चॉकलेट और हाँ एक कोका कोला और एक thumbsup|

मैंने एक पैकेट नेहा को दिया दिया, एक माको एक संगीता को और एक आयुष को| करीब पांच मिनट बाद नेहा बोली;

नेहा: पापा आपको अब भी याद है की मुझे चिप्स पसंद हैं? आप कभी नहीं भूले?

मैं: इधर आओ…

मैंने नेहा को अपनी गोद में बिठाया और उसे कहा;

मैं: बेटा मैं आपको कैसे भूल सकता हूँ? आपकी हर एक पसंद न पसंद मुझे याद है|

आयुष: (ऊपर से झँकते हुए) और मेरी?

मैं: आपकी भी बेटा… अब आप भी नीचे आ जाओ..बहुत हो गई gaming ….वरना चॉकलेट नहीं मिलेगी|

आयुष नीचे आ गया और हम चारों एक ही सीट पे बैठे थे| पिताजी भी आ गए और चिप्स खाने लगे| संगीता अब पहले की तरह डेढ़ हाथ का घूँघट नहीं करती थी| डेढ़ हाथ का घूँघट मुझे गंवारों की निशानी लगती थी इसलिए मैंने उन्हीने मन किया था| पर शर्म और लाज के चलते वो सर पे पल्ला रखती थीं| पिताजी से कभी भी नजर मिलके कुछ नहीं कहती थी, हाँ माँ के साथ उसकी chemistry बिलकुल वैसी थी जैसी मैं चाहता था| खेर आयुष ने बड़ा Naughty टॉपिक छेड़ दिया;

आयुष: पापा मेरा छोटा भाई आएगा या छोटी बहन?

मैं संगीता की तरफ देखने लगा और वो इस कदर झेंप गई की पूछो मत! पर मुझे इसमें भी रास लेना आता था और मैंने संगीता को सताने के लिए बात लम्बी खींच दी;

मैं: बेटा ऐसा करते हैं vote कर लेते हैं? ठीक है पिताजी?

पिताजी कुछ नहीं बोले! मैंने उनकी चुप्पी को हाँ समझा;

मैं: जो लड़के के support में हैं वो हाथ उठाओ?

नेहा ने सबसे पहले हाथ उठाया बस और किसी ने हाथ नहीं उठाया|

मैं: तो सिर्फ एक वोट? तो जो लड़की चाहते हैं वो हाथ उठाओ?

इस बार मेरा हाथ उठा और आयुष ने भी हाथ उठाया …पर सबसे ज्यादा जोश में वही था| माँ-पिताजी ने दोनों बारी हाथ नहीं उठाया!

मैं: माँ…पिताजी…आप लोग किसकी तरफ हैं?

पिताजी: किसी की भी तरफ नहीं….बच्चे भगवान की देन होते हैं| जो किस्मत में होता है वही मिलता है…लड़का या लड़की से कोई फरक नहीं पड़ता|

माँ: हाँ पर ये (आयुष) ये तो अपनी छोटी बहन को बहुत तंग करेगा…है ना?

आयुष ने हाँ में सर हिलाया और सब हंसने लगे;

नेहा: ऐसे कैसे करेगा तंग? मैं हूँ ना….मैं अपनी छोटी बहन को इससे बचाऊँगी!

नेहा की बात सुन के सब हंसने लगे …सामने वाली सीट पे एक आंटी बैठी थीं..वो भी हंसने लगी|

नेहा उन्हें देख के शर्मा गई;

मैं: Awww …. come here my little savior!

नेहा मेरे गले लग के खुद को छुपाने लगी और मुझसे लिपटे हुए ही सो गई| तो दोस्तों इस तरह से हँसते-खेलते समय निकला और हम आधी रात को त्रिवेंद्रम पहुँचे| रात में सफर करना ठीक नहीं ता सो हम Retiring room में ही ठहर गए और सुबह-सुबह बस से मुन्नार के लिए निकले|

मुन्नार पहुँचने के बाद तो बस …मैं बता नहीं सकता की क्या हुआ! पूरे रास्ते बच्चे मेरे से ही लिपटे हुए थे, वहां पहुँचने के बाद भी बच्चों के लिए खाना…कपडे…घूमने जाने के लिए होटल मैनेजर से बात करना….. rooms के लिए…oh GOD ….ये सब करते समय Kids were on to me …. they were like, we’ll accompany you everywhere. अब “संगीता जी” को इससे चिढ़ होने लगी, जो सही भी था| After all यार it was our HONEYMOON! मैं घूमने का अरेंजमेंट कर के कमरे में लौटा| ओह ..मैं तो आपको बताना ही भूल गया, दरअसल मैंने होटल में दो रूम बुक कराये थे …एक मेरे और संगीता के लिए और एक माँ-पिताजी और बच्चों के लिए| बहरहाल जब मैं कमरे में पहुँचा तो “संगीता जी” बोलीं;

संगीता: अरे..आ गए आप? बच्चों ने अकेला छोड़ दिया आपको? जाइए..उन्हीं के पास जाइए…हमें कौन पूछता है? आप तो यहाँ Family Vacation के लिए आये हो…Honeymoon पे थोड़े ही? बच्चों के पास ही रहो आप….wait a minute …हम कमरा एक्सचेंज कर लेते हैं| मैं और माँ इस कमरे में रूक जाते हैं…और आप और पिताजी “बच्चों” के साथ रहो| जाइए!

मैं: Oh My GOD! यार एक बार मेरी बात तो सुन लो?

संगीता: मुझे कुछ नहीं सुन्ना|

वो पलंग से उठीं और माँ-पिताजी वाले कमरे में चली गईं| मैं सर पे हाथ रखे बैठा हुआ था….इतने में पिताजी ने दरवाजा knock किया और अंदर आये;

पिताजी: क्या हुआ भई?

मैं: कुछ नहीं पिताजी…(मैंने गहरी साँस छोड़ते हुए कहा)

पिताजी: बेटा…बहु ने तुम्हारी माँ से शिकायत की है! मैंने मना किया था ना…की बच्चों को यहीं छोड़ दो..हम संभाल लेंगे. अब देखो कर दिया न तुमने बहु को उदास?

मैं: अब मैंने उदास किया है तो मैं ही मनाऊँगा…चलिए आपके कमरे में चलते हैं|

हम दोनों जब माँ-पिताजी के कमरे में पहुँचे तो हमारे घुसते ही “संगीता जी” कमरे से बाहर निकल गईं|

माँ: बहु…सुन तो…

मैं: माँ…रहने दो…मैं बात करता हूँ|

संगीता होटल के रेस्टुरेंट में बैठी थीं| मैं आके उनके पास बैठ गया और उन्हें समझाने लगा;

मैं: बाबू….एक बार मेरी बात तो सुन लो|

उन्होंने मेरी आँखों में देखा और मैंने अपनी बात पूरी की;

मैं: बाबू…. मैं समझ सकता हूँ की आपको कैसा महसूस हो रहा है और उसके लिए मैं आपका कसूरवार हूँ| मैं….मैं आपसे ADJUST करने को कतई नहीं कहूँगा…. सारी जिंदगी आप adjust ही तो करते आये हो| पर आप ये भी तो सोचो की बच्चे मेरे साथ सिर्फ समय बिताना चाहते हैं| वो मुझे आपसे छीन नहीं रहे …. नेहा ….जिसे चन्दर से कभी प्यार नहीं मिला …कभी…कभी कोई दुलार नहीं मिला ….. आयुष…उसे तो आपने चन्दर की छाया से भी दूर रखा है..क्या-क्या उसे हक़ नहीं….की मेरे साथ ..अपने पिता के साथ समय गुजारे? मैं तो बस उन्हें वो प्यार दे रहा हूँ जो उन्हें इतने सालों से नहीं मिला…. वो प्यार जो एक बाप को देना चाहिए….बस! मैं मानता हूँ की मुझे आपको भी समय देना चाहिए …पर Hey…. मुझे पापा बने अभी महीना नहीं हुआ…I’m just a rookie!1 धीरे-धीरे सब संभाल लूँगा! तब तक प्लीज….प्लीज मेरी बेवकूफियों को माफ़ कर दिया करो? (मैंने उनके हाथ थाम के घुटनों पे आते हुए कहा)

संगीता ने मेरी सारी बात मेरी आँखों में आँखें डाले सुनी …और मेरी नया-नया पापा बनने की बात वो मुस्कुराई भी पर अभी तक उनके मुख से कोई शब्द नहीं निकले थे|

अब मेरा मन उनके मुख से शब्द सुनने को तड़पने लगा था;

मैं: प्लीज…प्लीज…कुछ बोलो…. I….I … .. don’t want to upset you…please…..

पर वो कुछ नहीं बोलीं…इतने में माँ हमें ढूंढती हुई आ गईं;

माँ: बहु तू चल मेरे साथ….

मैं: माँ…

माँ: बस! अब बहुत तंग कर लिया तूने बहु को!

मैं सर झुकाये खड़ा था और इतने में पिताजी और बच्चे भी आ गए और बच्चे भागते हुए मेरे पास आ गए| पिताजी ने उन्हें सारी बात कहना चाहा पर मैंने मना कर दिया| बच्चे बहुत खुश थे ….आज पहलीबार बच्चे शहर से बाहर आये थे और मैं उसने उनकी ये ख़ुशी छीनना नहीं चाहता था|

पिताजी: बेटा …तू किस मिटटी का बना है…. अपनी पत्नी को नाराज कर दिया …सिर्फ बच्चों की ख़ुशी के लिए? पत्नी को समझा सकता है बच्चों को नहीं?

मैं: पिताजी….. संगीता बच्चों से बड़ी है…उसमें इनसे समझ ज्यादा है ….सोचा था की समझ जाएगी…पर ये तो बच्चे हैं…समझाने से समझेंगे नहीं| फिर इसी तरह मुझसे लिपटे रहेंगे…और कहीं उन्हें गुस्सा आ गया तो …बच्चे सहम जायेंगे! रही बात उनकी तो…वो भी समझा जाएँगी|

मैंने बच्चों को Ice-cream खरीद के दी और वो ख़ुशी-ख़ुशी खाने लगे| आयुष मेरी दाहिने तरफ था और मेरा दाहिना हाथ पकडे हुए था और नेहा मेरी बायीं तरफ खड़ी थी और मेरा दाहिना हाथ थामे हुए थी| दोनों Ice-Cream खा रहे थे और बड़े भोलेपन से अपनी-अपनी बातें कर रहे थे| मैं दोनों क हाथ पकडे हुए उनकी प्यार-प्यारी बातों में खो गया था! पिताजी,माँ और संगीता …तीनों मेरे ही कमरे में बैठे थे और मैं बच्चों के साथ चलते हुए होटल के गार्डन में आ गया| नेहा और आयुष घूमने का प्लान बना रहे थे और मैं उनकी हाँ में हाँ मिला रहा था| करीब आधे घंटे बाद हम तीनों गार्डन से निकले …..सामने संगीता खड़ी थी| काफी गंभीर लग रही थीं…. वो चल के मेरे पास आई और मेरे गले लग गईं|

संगीता: I’m SORRY!

मैं: Hey….Hey…..Hey….. its okay, and I’m Sorry too… अब छोडो इन बातों को….. Come on lets have lunch.

मैं जान गया था की उन्हें मेरी बात समझ आ चुकी है…और हम दोनों की Sorry ने दोनों को दिल की व्यथा को एक दूसरे के सामने रख दिया था| खेर माँ-पिताजी, बच्चे और हम दोनों सब ने मिल के लंच किया और अपने-अपने कमरों में आराम करने जाने लगे| पर as usual बच्चे फिर से मुझसे चिपक गए! पर इस बार संगीता ने कुछ नहीं कहा बल्कि आयुष को गोद में उठा लिया और हमारे वाले कमरे में घुस गई, उनके पीछे-पीछे नेहा भी कमरे में घुस गई|

अब galery में बस मैं, माँ और पिताजी रह गए थे;

माँ: बेटा…बहु ने हमें सब बताया…जो भी तुम-दोनों की बात हुई! बेटा…वो गलत नहीं है…पत्नी को भी अपने पति से प्यार की उम्मीद होती है..और तुम दोनों तो पहले से ही एक दूसरे को इतना चाहते हो| ऐसे में अचानक तुम्हारा प्यार सिर्फ और सिर्फ बच्चों को मिले ….इससे वो बेचारी तुम्हारे प्यार से वंचित यह जाएगी| मैं जानती हूँ की ये बस शुरुआत है..और धीरे-धीरे तुम सब संभाल लोगे| पर बेटा…इतना याद रखना की वो माँ बनने वाली है…. तुम्हें उसे वो साड़ी खुशियां देनी चाहिए जिसपर उसका हक़ है!

मैंने हाँ में सर हिलाया और माँ ने सर पे हाथ फेरा और अपने कमरे में दाखिल हो गईं, इस वार्तालाप के दौरान पिताजी बिलकुल खामोश खड़े थे …उन्होंने मुझे कुछ भी नहीं कहा| शायद वो जानते थे की मैं सब संभाल लूंगा…अपने पिता और पति होने कर दायित्व को Blance कर लूंगा| वो मुझे देख के मुस्कुराये जैसे कह रहे हों, “बेटा…मुझे तुम पे पूरा भरोसा है”| खेर मैं भी अपने कमरे में आ गया| अंदर घुस के देखा तो आयुष संगीता से चिपक के बैठा था और नेहा टी.वि. के सामने बैठी थी और Ben 10 कार्टून देख रही थी|

मैं भी आके बिस्तर में बैठ गया;

मैं: तो Guys क्या हो रहा है?

नेहा: पापा…देखो….देखो अभी Ben कैसे एलियन बनेगा!

आयुष: दीदी ..हटो ना…आप बीच में आ रहे हो!

संगीता: सुन लिया ? ही…ही…ही….

मैं: हाँ ….

मैं मुस्कुराया क्योंकि नेहा और आयुष दोनों टी.वी. देखने में इतना मग्न थे की मेरी बात सुन ही नहीं रहे थे!

मैं: ओके Guys …. चलो सो जाओ…दो दिन से सोये नहीं आ प लोग…चलो…चलो…..!

आयुष: नहीं पापा….Ben 10 देखना है!

मैं: बेटा…शाम को नया एपिसोड देखना…अभी सो जाओ…

मैं उठा और जिस तरफ मैं लेता था उस तरफ मैंने कुछ कुर्सियां पलंग से सटा के लगा दिन…जिससे थोड़ा extra space बन गया| मैंने बच्चों को बायीं तरफ लिटाया और उनपर कंबल डाल दिया| कुर्सी सटी होने के कारण बच्चे पलंग से गिरते नहीं| संगीता मेरी दायीं तरफ थी…करीब आधे घंटे बाद बच्चे सो गए…तब मैं संगीता की तरफ करवट लेके लेट गया;

मैं: ह्म्म्म्म्म…तो बेगम कहिये क्या हुक्म है?

संगीता: कोई हुक्म नहीं….शिकायत जर्रूर है? आप तो कहते थे की मेरे बिना आपको नींद नहीं आती…तो फिर परसों जब पिताजी ने आपको सोने को कहा तो आप ऊपर वाली birth पे जाके क्यों सो गए?

मैं: जान ….पिताजी का हुक्म था…कैसे ठुकरा देता! वैसे नींद तो फिर भी नहीं आई थी…पर धीरे-धीरे आपके प्यार के एहसास ने सुला दिया|

संगीता: मेरा प्यार का एहसास? वो कैसे? मैं तो नीचे सोई थी?

मैं: जान…आपने अकबर-बीरबल की कहानी नहीं सुनी? एक गरीब आदमी, यमुना के ठन्डे पानी में साड़ी रात सिर्फ महल से आ रहे प्रकाश की गर्मी के बारे में सोच के खड़ा रह सकता है तो …आप तो बस एक birth नीचे सो रहे थे?

संगीता: आप ना…… आपसे तर्क में कोई नहीं जीत सकता! खेर….अब बताइये की आज का प्लान क्या है?

मैं: सिंपल है …बच्चों को डिनर के बाद पिताजी और माँ के कमरे में सुला दूँगा| फिर आप और मैं रात को walk पे निकलेंगे| वापस आके….हम्म्म्म….

मुझे आगे कुछ बोलना नहीं पड़ा…संगीता सब समझ गई थी!

रेलगाड़ी के सफर से हम थके हुए थे…तो इसलिए पांच बजे तक सब आराम करते रहे| इधर मेरे कमरे में संगीता और मैं एक दूसरे की तरफ करवट लेके लेते थे और उनका हाथ मेरे कंधे पे और मेरा हाथ उनकी कमर पे था| कुछ देर में आयुष उठा और एकदम से मुझ पे कूदा…इस वजह से हम दोनों की आँखें खुलीं;

आयुष: पापा …भूख लगी है?

मैं: हम्म्म…चलो अपनी दीदी को उठाओ फिर आपके दादा-दादी के कमरे में चलते हैं और कुछ खाने को आर्डर करते हैं|

मुँह-हाथ धो के हम चारों माँ-पिताजी के कमरे में आ गए| हमने कमरे में ही बैठ के चाय-नाश्ता किया … घूमने का प्लान कल ही था….तो आज हम सब आराम करने वाले थे| चाय पीने के बाद मैंने सोचा की आस-पास की मार्किट में घुमा-फिरा जाए! पर माँ ने कहा की वो आराम करेंगी…अब जाहिर था की पिताजी भी उनके साथ ही रूकेंगे| शायद वो हम दोनों को कुछ अकेल समय देना चाहते थे…पर बच्चे! वो तो घूमने की बात से ही कूदने लगे! अब मैं उन्हें मन तो कर नहीं सकता था| पिताजी और माँ ने बहुत कोशिश की पर दोनों नहीं माने, और मेरे दोनों हाथ पकड़ के बाहर जाने की जिद्द करने लगे| खेर हम चारों बाहर आ गए और मार्किट में घूमने लगे| एक artificial jewellery की दूकान पे हम रुके….संगीता तो कुिच ज्वेलरी देखने लगी और इधर आयुष चॉकलेट के लिए जिद्द करने लगा|

मैं: बेटा एक बार मम्मी jewellery देख लें फिर हम सब मिलके चलते हैं|

आयुष: प्लीज पापा…प्लीज…प्लीज…प्लीज ….

संगीता: आप जाओ मैं और नेहा यहीं हैं…!

मैं आयुष को लेके चॉकलेट दिलाने लगा और फिर हम दोनों उसी दूकान पे आ गए|

मैं: क्या लिया आपने?

संगीता: माँ के लिए ये Bangles ली हैं|

मैं: और अपने लिए?

संगीता: अभी कुछ पसंद नहीं आ रहा|

मैं: तो चलो कहीं और चलते हैं?

संगीता: नहीं…देर हो रही है|

मैं: क्यों आपने जा के रोटियाँ पकानी हैं? हम छूटियों पे आये हैं….चलो…वहाँ चलते हैं|

पास ही एक Jewellery store था…तो हम वहां पहुँच गए|

संगीता: पर यहाँ क्या लेंगे?

मैं: कुछ सोचा है मैंने!

हम अंदर घुसे …और एक लेडी हमारे पास आई और पूछने लगी की हम क्या लेना चाहेंगे?

मैं: उम्म्म.. please show us some design for करधनी!

ये सुनते ही संगीता आँखें बड़ी करके मेरी तरफ देखने लगी|

संगीता: पर मैं…..मैंने कभी नहीं पहनी?

मैं: तो अब पहन लेना?

संगीता: मुझे शर्म आती है!

मैं: यार मेरे लिए पहन लेना? प्लीज!

संगीता: ठीक है…पर पसंद आप करोगे?

मैं: Done!

उस लेडी ने हमें काफी डिज़ाइन दिखाए …. पर मुझे कुछ जच नहीं रहा था| दरअसल उनका साडी पहनने का ढंग बिलकुल भारतीय नारी जैसा था ….100% Traditional !!! उनका नैवेल…वो तो कभी दिखा ही नहीं! इसलिए मुझे डिज़ाइन चुनने में बड़ी दिक्कत आई| वैसे नैवेल दिखाना मुझे भी पसंद नहीं..पर atleast मुझे दिखे? पर नहीं….खेर डेसिग्न्स को दोबार देखने पे आखिर एक डिज़ाइन कुछ ठीक लगा| मैंने वो डिज़ाइन संगीता को पहन के दिखाने को कहा तो वो मुझे घूरने लगी…जैसे की मैं उन्हें Public में Kiss करने को कहा हो?

मैं; ओके…ओके…. आप इसे ही पैक कर दो!

हम billing counter तक आ रहे थे;

संगीता: आपने मुझे उस औरत के सामने try करने को क्यों कहा?

मैं: तो क्या हुआ…वो भी तो औरत ही थी…और कौन सा आपको वहीँ try करना था…अंदर जा के कर लेते!

संगीता: मुझे शर्म आती है! और इसे भी मैं सिर्फ तभी पहनूंगी जब हम दोनों अकेले होंगे!

मैं: ठीक है बाबा…I won’t force you ….

बिल pay करके हम होटल वापस आ गए| पर संगीता ने करधनी की बात किसी को नहीं बताई! माँ ने जब चूड़ियाँ देखीं तो बोलीं;

माँ: बहु…. तू अपने लिए कुछ नहीं लाइ?

संगीता ने शर्म से सर झुकाया और ना में सर हिलाया|

माँ: क्यों? तो मेरे लिए चड्डियाँ क्यों लाई? बेटा हम यहाँ तुम दोनों के लिए आये हैं…खरीदारी तुम लोगों करनी चाहिए अपने लिए ना की हमारे लिए| हम तो बूढ़े हो गए हैं!

संगीता: माँ…. साड़ी उम्र आप ने बच्चों के लिए कुछ न कुछ खरीदा है…तो क्या बच्चों का फ़र्ज़ नहीं बनता की वो अपने माँ-बाप के लिए कुछ खरीदें? जब से मैं आई हूँ आप को अपने लिए कुछ भी खरीदते हुए नहीं देखा? हमेशा तो ये (मैं) ही आप सब के लिए कुछ न कुछ ले आते हैं| तो मैंने सोचा की इस बार मैं आपके लिए कुछ लाऊँ|

माँ ने उन्हें गले लगा लिया….और उनका माथा चूमते हुए बोलीं;

माँ: बेटी….तू बहु नहीं मेरी बेटी है! और तू (मैं) सुन ले…अगर तूने इसे कभी दुखी किया ना तो तेरी खेर नहीं|

पिताजी: हाँ बेटा… अगर बहु कभी उदास दिखी ना तो गिर तेरी सुताई पक्की है!!!

ये सुन के सारे हँस पड़े!

मैं: यार ये सही है……सब के सब आपकी तरफ हो गए? मैं अकेला रह गया?

आयुष: नहीं पापा मैं आपकी तरफ हूँ|

नेहा: और मैं भी हूँ!

पिताजी: ले भाई तेरी टीम भी तैयार है! हा..हा…हा….

मैं: काहे की टीम….जब पिटाई होगी तो सब से पहले ये ही भाग जायेंगे!!!! हा..हा…हा…

ये सुन के सब जोरों से हँस पड़े!!! खेर खाने का समय हो गया था, अब ठण्ड में कौन बाहर जाए तो मैंने खाना कमरे में ही मंगा लिया| खाने के बाद, माँ और संगीता तो सोफे पे बैठे सीरियल देखने लगे| पिताजी संतोष को फोन करने के लिए बाहर चले गए|

मैंने मौके का फायदा उठाने के लिए बच्चों को पिताजी के बेड पे लिटा दिया;

मैं: किसे कहानी सुन्नी है?

दोनों तैयार हो गए और आके मेरी अगल बगल लेट गए| मैं दोनों का सर थप-थापा के सुलाने लगा और कहानी सुनाने लगा| संगीता मुझे देख-देख के हँस रही थी…. मैं भी मुस्कुरा रहा था| दस बजे पिताजी फोन पे बात खत्म कर के आये;

मैं: कैसा चल रहा है काम?

पिताजी: ठीक ठाक चल रहा है…. पर overtime नहीं हो रहा है| Deadline 4 जनवरी की है …मुझे तो लगता है की काम खतम होने से रहा|

मैं: आप चिंता ना करो…. हम तो दो को ही घर पहुँच जायेंगे …उसी दिन रात से ओवरटाइम करवा के मैं काम खतम करवा दूँगा|

मैंने बच्चों की तरफ देखा तो दोनों सो गए थे…या कम से कम मुझे तो लगा की वो सो गए हैं! मैं धीरे से उठा और पिताजी को good night कह के अपने कमरे में जाने लगा की इतने में नेहा उठ के बैठ गई;

नेहा: पापा…प्लीज…मुझे आपके बिना नींद नहीं आती!

पिताजी: बेटा तू यहाँ सो जा…मैं तुझे एक बहुत अच्छी कहानी सुनाऊंगा! (पिताजी ने उसे प्रलोभन दिया)

नेहा: नहीं दादा जी…मैं पापा के पास सोऊँगी!

पिताजी: देख बेटा फिर मैं तुझसे कभी बात नहीं करूँगा? कट्टी!

नेहा उनके पास गई और उनके पाँव छू के बोली;

नेहा: sorry दादा जी….. मुझे माफ़ कर दो! पर मुझे पापा के बिना नींद नहीं आती|

पिताजी: अच्छा ये बता …जब तेरा बाप रात-रात भर घर नहीं आता और काम में व्यस्त होता है तब तू कैसे सोती है?

संगीता: पिताजी…ये बड़ी शैतान है…ये तब भी नहीं सोती| मुझसे फोन करवाएगी इनको (मुझे) और आधा-आधा घंटा फोन पे बात करती है…कहानियां सुनती है…तब जाके सोती है| और तो और अगर सुबह 3 – 4 बजे अगर ये आ जाएं और बिस्तर में लेते तो पता नहीं कैसे इसे पता चल जाता है और अपने आप इन्हें झप्पी डाल के सो जाती है|

पिताजी: ह्म्म्म्म्म…बहु तुम्हें पता नहीं…पर ये (मैं) भी ऐसा ही था| कहते है ना की बाप और बेटी का रिश्ता और माँ और बेटे का रिश्ता बड़ा करीबी होता है| पर जब ये छोटा था तो मुझसे लिप्त रहता था….माँ के पास तो ये सिर्फ खाने-पीने जाता था| बाकी घूमना-फिरना, सोना, खेलना…सब मेरे साथ| बिलकुल मानु जैसी आदतें हैं नेहा की… (और पिताजी मुस्कुराने लगे)

मैं: चलो बेटा|

मैं, नेहा और संगीता अपने कमरे में आ गए| नेहा तो कमरे में घुसते ही पलंग पे जा चढ़ी और बीच में लेट गई| मैं और संगीता अभी दरवाजे के पास ही खड़े थे| उसकी ये हरकत देख के संगीता खिल-खिला के हँस पड़ी!

मैं अपना सर पकडे दरवाजे पे खड़ा था….अब मैं कैसे नेहा को समझाऊँ?

मैं:अच्छा नेहा बेटा…एक बात बताओ?

नेहा: जी

मैं: आप मुझे प्यार हो और मेरे साथ चिपक के सोना चाहते हो ………आपकी मम्मी भी मुझे प्यार करती हैं और मेरे साथ सोना चाहती हैं………… और मैं तो आप दोनों से प्यार करता हूँ……….. तो मैं कैसे मैनेज करूँ? अगर आपके साथ सोया तो आपकी मम्मी नाराज हो जाएँगी….और उनके साथ सोऊँ तो आप नाराज हो जाओगे? तो मैं यहाँ इस सोफे पे सो जाता हूँ|

नेहा कुछ सोचने लगी और फिर तपाक से बोली;

नेहा: नहीं पापा…एक आईडिया है…आप बीच में सो जाओ और हम दोनों आपसे लिपट के सो जाते हैं!

उसके भोलेपन पर मुझे बहुत प्यार आ रहा था और संगीता उसके पास जा पहुंची और उसके माथे को चूमते हुए बोली;

संगीता: Awwwwwwww …… देखा? बिलकुल आप पे गई है! हर समस्या का हल कितनी आसानी से निकाल लेती है|

मैं: आखिर बेटी किस की है?

संगीता: तो आ जाओ …बीच में…..ही…ही…ही…ही….

I had no choice…except to sleep in between them. मैं बीच में लेट गया…बड़ी अजीब सी feeling हो रही थी! मेरे लेटते ही संगीता ने मेरी दाहिनी बाजू को अपना तकिया बना लिया और नेहा ने मेरी बायीं बाजू को अपना तकिया बना लिया, फिर दोनों मुझे झप्पी डाल के सो गए| हम दोनों जानते थे की नेहा ऐसे सोने वाली नहीं है, और बिना उसके सोये हमें अकेले में बात करने का समय नहीं मिलेगा| तो मैंने संगीता की गर्दन के नीचे से अपना हाथ निकला और मैं नेहा की तरफ करवट ले के लेट गया ताकि उसका सर थप-थापा के उसे जल्दी सुला दूँ| जैसे ही मैंने नेहा की तरफ करवट ली, संगीता बोली;

संगीता: ठीक है भई….हो जाओ बाप-बेटी एक तरफ! (वो नाराज नहीं थीं पर चुटकी ले रही थीं|)

मैं: यार बरी-बारी सुला रहा हूँ…पहले नेहा…और फिर आप!

पर संगीता को मस्ती सूझ रही थी| उन्होंने पीछे से मेरी कमर में झप्पी डाली और मेरी गर्दन के पीछे अपने ठन्डे होंठ रख दिए और मुझे Kiss किया!

मैं: आप ना….

पर वो नहीं मानी और kiss करती रही! करीब आधे घंटे बाद नेहा सो गई और मैं ने नेहा को कम्बल ओढ़ा दिया और फिर संगीता की तरफ करवट ले के लेट गया|

मैं: अच्छा जान….वो करधनी तो पहन के दिखाओ?

संगीता: हम्म्म….

फिर वो उठीं और पर्स से करधनी निकालने लगीं;

मैं: Hey ….साडी थोड़ा ढंग से बांधना|

संगीता: मतलब?

मैं: साडी नैवेल से नीचे बांधना…तब करधनी पहनना ….sexy लगोगे!

संगीता: ठीक है… अभी आई|

वो बाथरूम में घुस गेन और साडी वैसे ही बाँधी जैसे मैंने कहा और जब वो करधनी पहन के आइन तो मैं उन्हें देख के उठ के बैठ गया!

(09-30-2016 06:11 AM)  Le Lee 0
मैं: WOW !!! You’re looking beautiful!

संगीता: Seriously Jaanu?

मैं: जान… आपने तो मेरी जान ले ली| Killer!

संगीता: आपकी पसंद है…..

संगीता धीरे-धीरे चलती हुई मेरे पास आई, उनकी नंगी कमर छूने को मारा जा रहा था| आज तो वो मुझे full तड़पाने के मूड में थी|

मैं: Hey …यार क्यों जान ले रहे हो मेरी?

संगीता: Awwwwwwww ….. इतनी आसानी से नहीं!

आखिर वो मेरे पास आ ही गईं…. जैसे ही मैंने उन्हें छूने के लिए अपना दाहिना हाथ बढ़ाया उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया|

मैं: Hey क्या हुआ? मेरा छूना आपको अच्छा नहीं लगा?

संगीता: कैसी बात करते हो? आपके छूना मुझे कभी बुरा लग सकता है! मैं तो आपके लिए कुछ लाई हूँ!

मैंने गौर किया तो पाया की उन्होंने अपने हाथों में कुछ छुपा रखा है|

संगीता: आप आँखें बंद करो?

मैंने बिना कुछ कहे झट से आँखें बंद कर ली| मुझे एहसास हुआ की वो मेरी कलाई पे कुछ बाँध रही हैं|

मैं: यार राखी बांध के भैया बना रहे हो? हा..हा..हा..हा..

संगीता: धत्त! सैंयां को भैया थोड़े ही बनाते हैं| अब आँखें खोल के देखो|

मैंने आँखें खोल के देखा तो वो एक bracelet था!

मैं: WOW ! Where did you get that?

संगीता: जब आप आयुष को Chocolte खिलाने ले गए थे तब|

मैं उठा और उन्हें गले लगा लिया| वो bracelet वाकई में बहुत खूबसूरत था! (पिक्टर देखें)

संगीता: आप इसे हमेशा पहनना|

मैं: ये भी कोई कहने की बात है!

We both knew what’s next so, मैंने बिना समय गवाएं नेहा को गोद में उठाया और उसे सोफे पे लिटा दिया और कम्बल ठीक से ओढ़ा दिया| मेरी ये प्रतिक्रिया उन्हें बहुत अजीब लगी;

संगीता: सोने दो न उसे?

मैं: यार वो अब भी सो रही है| बस I don’t want to wake her up when we’re ….you know! Besides…. I don’t like to make love when she’s sleeping next to us. ये तो मजबूरी है की नेहा मेरे बिना नहीं सोती वरना मैं उसे पिताजी वाले कमरे में ही सुला देता|

And so the Love Session started…and when we were both satisfied, मैंने नेहा को फिर से गोद में उठाया और बीच में सुला दिया| मैं और संगीता नेहा की तरफ करवट ले के लेते थे और हमारा हाथ नेहा की छाती पे था| अचानक से नेहा को मेरी मौजूदगी का जैसे एहसास हुआ और वो मेरी तरफ करवट लेके लेट गई और झप्पी डाल ली|

संगीता: देखा कितना प्यार करती है आप से? नींद में भी इसे आपका एहसास हो जाता है!

मैं: बिलकुल आप पे गई है!

संगीता: जानू….सही कहा| मैंने आप को कभी बताया नहीं…पर जब ये मेरी कोख में थी ना….तो उस समय मैं आपके प्रति बहुत आकर्षित थी, शायद इसी कारन ये आपसे इतना प्यार करती है|

मैं: ह्म्म्म्म्म….तो माँ के गुण बच्चे में आ ही जाते हैं! चलो अब सो जाते हैं…its 01:30 AM now. और कल सुबह घूमने भी तो जाना है?

हम दोनों नींद के आगोश में कुछ इस तरह समा गए की पता ही नहीं चला की कब घडी में सुबह के आठ बज गए? दरवाजे पे हुई दस्तक से में उठ बैठा, नेहा को संगीता के पास छोड़ मैं दरवाजे पे आया तो देखा माँ थी,

माँ: बेटा कब निकलना है? तुम लोग तैयार नहीं हुए अभी तक?

मैं: हाँ ..माँ….वो रात में देर से सोये थे| आप लोग तैयार हो जाइये हम पंद्रह मिनट में आ रहे हैं|

माँ: बेटा ऐसा कर घूमने का प्रोग्राम कल रखते हैं…बहु को सोने दे|

मैं: जी…पर नाश्ता तो करना है?

माँ: अगर बहु नहीं उठती तो आराम करने दिओ|

मैं: जी!

माँ कमरे में चली गईं और मैं दरवाजा बंद कर के मुड़ा| देखा तो दोनों माँ-बेटी सो रहे थे| मैं दबे पाँव संगीता के सिराहने पहुँच गया और और झुक के उनके माथे को चूमा, फिर उनके गालों को चूमते हुए कहा;

मैं: Good Morning Jaan!

संगीता थोड़ा कुनमुनािन और बोलीं;

संगीता: Good Morning जानू! उम्म्म्म….टाइम क्या हुआ है?

मैं: सवा आठ!

संगीता: हाय राम! आपने मुझे पहले क्यों नहीं उठाया| (और वो एक दम से उठ के बैठ गईं|

मैं: मैं तो खुद अभी उठा हूँ…माँ आई थीं|

संगीता: हाय राम…

वो हड़बड़ी में उठने लगी तो मैंने उन्हें रोक दिया;

मैं: माँ का आदेश है की आप को आराम ही करना है!

संगीता: मैं माँ से डाँट खा लुंगी …पर मैं और आराम नहीं कर सकती| वो उठ के बाथरूम में गईं और फ्रेश हो के आ गईं| कपडे पहने, पर करधनी उतार दी| अब मेरा मुंह बन गया था, क्योंकि मैं चाहता था की वो करधनी पहने|

संगीता: Awwwwwww ….. मेरा बच्चा! मुझे सब के सामने ये पहनने में शर्म आती है| अकेले में मैं इसे हरदम पहने रहूंगी!

पर मैं मैंने वाला नहीं था, मैं अब भी मुंह फुलाये हुए था| मैंने नेहा को गोद में लिया और हम माँ-पिताजी के कमरे में आ गये| वहाँ आके मैंने चाय आर्डर की, नेहा अब भी मेरी गोद में थी और आयुष अभी तक सो रहा था| मैंने नेहा को आयुष के बगल में लिटाना चाहा पर नेहा ने मुझे नींद में भी जकड रक था| ये देख के पिताजी हँस पड़े!

पिताजी: 100% तुझी पे गई है तेरी बेटी! खेर बहु…तुम क्यों उठ गई?

माँ: जर्रूर इसी (मैंने) ने उठाया होगा|

पिताजी: क्यों परेशान करता है बहु को?

मैं चुप-चाप था|

संगीता: माँ….पिताजी….वो इन्होने तो मुझे आराम करने को कहा था…पर मुझे थकावट थोड़े ही है| और अगर सोते हुए ही दिन बिताना था तो हम यहाँ क्यों आते?

माँ: बहुत समझदार है हमारी बहु|

पिताजी: हाँ हमने पिछले जन्म में जर्रूर पुण्य किये थे की हमें ऐसी बहु मिली|

संगीता: सौभाग्य तो मेरा है पिताजी की मुझे आप जैसे माता-पिता मिले!

जो बात मुझे सबसे अच्छी लगी वो ये थी की संगीता माँ-पिताजी को सास-सासुर नहीं बल्कि अपने माता-पिता ही मानती थी| पर खेर मैं तो अब भी नाराज था…..!!! चाय नाश्ता करते-करते बच्चे भी उठ गए थे और हम सब तैयार हो के Mattupetty Dam देखने के लिए निकले| मुन्नार के खुशनुमा मौसम में बहुत मजा आ रहा था और Dam देखते ही बच्चे खुश हो गए थे| ये पहलीबार था की उन्होंने Dam देखा हो| माँ ने तो एक बार अपने बचपन में Dam देखा था, पर पिताजी, मैं और संगीता आज पहली बार इतना विशाल Dam देख रहे थे| दोपहर के lunch के बाद बारी थी Eravikulam National Park देखने की! सब से मजेदार बात ये थी की होटल से बाहर निकलते ही मेरी नाराजगी काफूर हो गई थी| घूमते समय संगीता और मैं साथ-साथ ही चल रहे थे and we were enjoying as we should. मैं इन छुटियों को अपनी नारजगी से बर्बाद नहीं करना चाहता था| इसलिए मैं संगीता को जितना हो सके उतनी ख़ुशी देना चाहता था, और माता-पिता वो तो तो हमारी खुशियाँ देख के ही खुश थे|

National Park में हमें एक हिरन दिखा…ये शायद वो बकरी थी…पता नहीं…क्योंकि वो जानवर बहुत दूर था| हमारे ग्रुप के साथ कुछ Teenagers थे जिन्होंने उस जानवर को देखते ही शोर मचाना शुरू कर दिया और वो जानवर भाग गया| खेर हम लोग dinner ले के होटल पहुंचे और आज तो हम सारे थक चुके थे| इसलिए बच्चे होटल पहुँचते ही सो गए, हालाँकि घडी में अभी नौ ही बजे थे| मैंने सोचा की इस मौके का फायदा उठाना चाहिए;

मैं: माँ…हम दोनों walk लेके आते हैं?

माँ: बेटा बहु थकी हुई है, उसे आराम करने दे|

संगीता: नहीं माँ….इसी बहाने थोड़ी सेर हो जाएगी और खाना भी हजम हो जायेगा| आप भी चलो ना?

मैं मन ही मन सोचने लगा की यार सब को ले चलते हैं!

माँ: नहीं बहु…मुझसे अब और चलना नहीं होगा| मैं तो टी.वी. देखूंगी…तुम लोग जाओ|

इतने में पिताजी बाहर से आये, दरअसल वो बाहर संतोष को फोन कर के काम की खबर ले रहे थे|

पिताजी: कहाँ जा रहे हो तुम दोनों?

मैं: जी walk पे!

पिताजी: अच्छा…अच्छा …जाओ!

जब हम बाहर आय तो मैंने जानबूझ के फिर से मुंह फुला लिया|

संगीता: Sorry जानू!

मैं: ह्म्म्म्म्म्म…..

संगीता: आप मुझ से नाराज हो? (उन्होंने तुतलाते हुए कहा)

मैं कुछ नहीं बोला| तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया जैसे शादी-शुदा जोड़े बाहों में बाहें डाले चलते हैं|

संगीता: जानू….. अच्छा नहीं लगता की हम दोनों यहाँ अकेले घूमें और माँ-पिताजी अकेले रहे?

मैं: मैं उस वजह से नाराज नहीं हूँ|

संगीता: ओह्ह! पर मैंने तो आपको पहले ही कहा था की मैं करधनी सब के सामने नहीं पहन सकती| अकेले में आपके सामने पहनूँगी ना!

मैं: आज पहलीबार आपने मेरे Gift की कदर नहीं की है| कोई बात नहीं….मैं याद रखूँगा इसे! (मैंने उन्हें छेड़ते हुए कहा)

संगीता: Sorry Again!

मैं: चलो…

संगीता जानती थी की मेरी नाराजगी काम नहीं हुई है| पर चूँकि हम पब्लिक प्लेस में थे तो वो ज्यादा कुछ कर नहीं सकती थी| हाँ अगर हम कमरे में होते तो मुझे पता है की वो मुझे कैसे न कैसे मन ही लेती| पर मैंने सोच लिया था की आज मैं उन्हें इतना तड़पाऊँगा की वो तो देखें की मेरी नाराजगी ऐसी ही कम नहीं होती| खेर अब हम walk पे निकले थे तो हम पार्क में घूम रहे थे, की तभी वहाँ पे हमें एक जोड़ा दिखा जो पेड़ के पास खड़ा था और एक दूसरे को Kiss कर रहा था|

अब इसे देख के मुझे चुटकी लेने की सूझी;

मैं: Look at them.

संगीता: हाँ…हाँ…देख रही हूँ| और आप क्या सोच रहे हो वो भी जानती हूँ| But you’re not gonna get …what you’re expecting here!!!

मैं: Oooooooo is that so? Okay मैं वापस तब तक नहींजाऊंगा जब तक आप मुझे Kiss नहीं करते!

संगीता: आप मजाक कर रहे हो ना?

मैं: Does it look like I’m joking?

संगीता: But I can’t?

मैं: Okay! मैं ठण्ड में यहाँ ठिठुरता रहूँगा?

संगीता: ठीक है …फिर मैं भी यहीं आपके पास खड़ी रहूंगी!

मैं जानता था की मेरी चालाकी यहाँ नहीं चलने वाली….तो मैंने अपनी हार मान ली| I knew from the beginbing that she’s not an exbitionist …then why the hell I was pushing her? Maybe I was testing her…. But for what? यही सोचते-सोचते हम होटल की तरफ वापस आने लगे| मैं चुप-चाप चल रहा था और संगीता भी समझ चुकी थी की बात क्या है? पर कहा कुछ नहीं…हम होटल के अंदर आ गए और माँ-पिताजी वाले कमरे में प्रवेश किया| बच्चे सो रहे थे …मैं जानता था की नेहा जब भी उठेगी मुझे ढूंढेगी इसलिए मैंने उसे गोद में उठाना चाहा ताकि उसे अपने साथ लेके कमरे में आ जाएं;

पिताजी: सोने दे बेटा? जाग गई तो फिर तेरा पीछा नहीं छोड़ेगी|

मैं: वो तो वैसे भी नहीं छोड़ेगी| आधी रात को आपको परेशान करेगी!

माँ: नहीं करेगी…मैं हूँ ना!

मैं: आपसे handle नहीं होगी!

पिताजी: कुछ नहीं होगा बेटा? मैं इसे प्यारी-प्यारी कहानी सुना दूँगा और ये सो जाएगी|

संगीता: क्यों जिद्द करते हो? (उन्होंने खुसफुसाते हुए कहा)

माँ: तुम जा के आराम करो|

अब हम दोनों कमरे में आ गए और संगीता बाथरूम में चली गईं और मैं आके बिस्तर पे औंधा हो के लेट गया| संगीता ने बाथरूम से बाहर निकल के मुझे आवाज दी;

संगीता: सुनिए? जानू………………………………….सो गए क्या?

मैं कुछ नहीं बोला बस सोने का नाटक करने लगा| दरअसल उन्होंने करधनी पहनी थी जिसे वो मुझे दिखाना चाहती थीं| पर आज मैं उनके किसी भी जाल में फंसने वाला नहीं था| वो जानती थी की मैं सोया नहीं हूँ और अपनी नारजगी व्यक्त कर रहा हूँ| मैं जब भी उसने नाराज हुआ हूँ…मैं गुम-सुम हो जाता हूँ, यही मेर अतरीका है अपनी नारजगी व्यक्त करने का| वो मेरे पास आईं;

संगीता: (अपने कान पकड़ते हुए) Sorry जानू! मुझे माफ़ कर दो! आपने मुझे प्रॉमिस किया था की आप मुझसे कभी गुस्सा नहीं होगे?

मैं: मैंने प्रॉमिस ये किया था की मैं आपसे गुस्सा कभी नहीं हूँगा…पर मैं इस वक़्त नाराज हूँ| तो I don’t think I’m breaking any promise I made!

संगीता: Sorry बाबा! मैं…मैं…..

मैं: Hey …no need to say sorry. I can understand!

संगीता: तो आप मुझसे नाराज नहीं हैं?

मैं: नहीं

संगीता: तो मेरी तरफ देख के कहो?

मैं ने उनकी तरफ गर्दन घुमाई और कहा;

मैं: मैं आपसे नाराज नहीं हूँ!

संगीता: I knew आप मुझसे ज्यादा देर नाराज नहीं रह सकते| तो?

मैं: Just gimme sometime so I can recollect myself!

संगीता जानती थी की सुबह तक मैं जोरमल हो जाऊँगा और इस समय जोर देना सही नहीं है पर वो फिर भी मेरे चेहरे पे मुस्कान लाने की पूरी कोशिश कर रही थी| तभी दरवाजे पे दस्तक हुई, स्नगीता फ़ौरन बाथरूम में भाग गई ताकि करधनी उतार के दरवाजा खोले पर मैं उठा और दरवाजा खोला;

पिताजी: ले बेटा..संभाल अपनी बेटी को! (नेहा रो रही थी)

मैं: क्या हुआ बेटा?

पिताजी: पता नहीं बेटा अचानक नींद से उठ बैठी और रोने लगी|

मैं:ओह्ह्ह…इसने बुरा सपना देखा होगा|

पिताजी: sorry बेटा तुम्हें disturb किया!

मैं: नहीं पिताजी…हम अभी सोये नहीं थे|

पिताजी: Good Night बेटा| कल सुबह आराम से उठना, तुम्हारी माँ भी थक गई है और मैं भी|

मैं: जी गुड नाईट!

पिताजी के अपने कमरे में घुसने के बाद मैंने दरवजा बंद किया और नेहा को पुचकार के चुप कराया|

मैं: Awww ….. मेरा बच्चा…बेटा वो बस बुरा सपना था| भूल जाओ …अब आप पापा के साथ हो ना|

मैं उसकी पीठ थप-थापा के सुलाने लगा| दरअसल नेहा को मेरे बिना सोने में डर लगता है…पता नहीं क्यों पर वो अचानक चौंक के उठ जाती है| शायद इसका कारन उसके बचपन से जुडा हुआ है| मैं कमरे में एक कोने से दूरसे कोने तक उसे गोद में ले के घूम रहा था, इतने में संगीता ने बाथरूम से झाँक के पूछा;

संगीता: पताजी चले गए?

मैं: हाँ

मेरी गोद में नेहा को देख के वो बोलीं;

संगीता: तो इस शैतान ने उन्हें तंग किया होगा?

मैं: हाँ..फिर से डर गई थी|

संगीता: Maybe we should consult a doctor?

मैं: हाँ… once we are back in Delhi.

नेहा की आँखें भारी हो चुकी थीं, मैं उसे अपनी छाती से ही लिपटाये सो गया| नेहा का सर मेरी छाती पे था, संगीता ने हम दोनों पे कम्बल डाल दिया और खुद भी उसी कम्बल में लेट गईं और नेहा की पीठ थप-थपाने लगीं|

दरअसल मेरा हाथ नेहा की पीठ पर ही था और वो मेरे हाथ के ऊपर ही थप-थपा रहीं थीं| वो मुझे मानाने की कोशिश कर रहीं थीं और इधर मैं अपने मन और दिमाग को शांत करने में लगा था की मैं वो Gift वाली बात और Kiss वाली बात भूल जाऊँ| खेर रात भर जब तक मुझे नींद नहीं ऐ मैं उसी बात को सोचता अहा और मैंने realize किया की I was being PUSHY! I mean if she doesn’t want to waer something in public or if she is too shy to Kiss me in public, who I’m to Push her for? She’s my wife and I respect her for that, and yesterday I was asking a lot from her. I decided that the first thing I’m gonna do the next morning is APPOLOGISE for my behaviour!

So the next morning, मेरे उठने से पहले ही वो उठ चुकी थीं| नेहा अब भी मेरे ऊपर ही सो रही थी| घडी में साढ़े आठ बज रहे थे| मैंने नेहा के सर पे Kiss किया और उसे प्यार से उठाया| उसने भी पलट के मुझे Kiss किया और बाथरूम में चली गई| आसपास संगीता नहीं थी…मैं थोड़ा परेशान हुआ की कहीं वो मेरे रात के बर्ताव से रूठ तो नहीं गईं| मैं उठ के बैठा और उन्हें ढूंढने के लिए जाने ही वाला था की दरवाजे पे दस्तक हुई, देखा तो संगीता ही थी|

मैं: Oh My God ….you scared the hell out of me! Look….I wanna appologise for what I did last night. Okay? I mean I’m sorry for being too pushy. I shouldn’t have done that….from now on I promise that I’ll respect whatever you say, wish or ask for. PROMISE!

संगीता: Really?

मैं: Yup!

संगीता: Okay!

आगे कुछ बात होने से पहले ही माँ आ गईं;

माँ; अरे बहु….ओह्ह तो लाड साहब उठे नहीं?

मैं: Sorry माँ….. वो रात को नींद नहीं आ रही थी|

माँ: कोई बात नहीं…मैं तो यहाँ बताने आई थी की तेरे पिताजी ने डॉक्टर सरिता से नेहा के लिए बात की है| तो वापस जा के सब से पहले नेहा को उनसे मिलवाना है|

मैं: जी बेहतर!

माँ: अरे बहु…मैंने गौर नहीं किया…पर तूने करधनी पहनी है?

मेरी नजर उनकी कमर पे पड़ी और मैं दंग रह गया की वाकई में संगीता ने करधनी पहनी थी!!!

माँ: कौन लाया?

संगीता ने शर्माते हुए मेरी तरफ इशारा किया…..

माँ: ह्म्म्म्म्म….. दिन पर दिन समझदार होता जा रहा है| शाबाश!

माँ ने मेरे सर पे हाथ फेरा, मैं तुरंत उठ के खड़ा हुआ और बोला;

मैं: माँ ये भी तो देखो? (मैंने उन्हें ब्रेसलेट दिखाया)

माँ: वाह…ये जर्रूर बहु लाई होगी?

मैं: आपको कैसे पता?

माँ: पसंद से पता चल जाता है बेटा!

उन्होंने दोनों के सर पे हार रखा और आशीर्वाद देते हुए बोलीं;

माँ: जुग-जुग जियो मेरे बच्चों….हमेशा ऐसे ही हँसते-खेलते रहो!!

माँ के जाने के बाद मुझे ऐसा लगा की संगीता ने सिर्फ मेरी ख़ुशी के लिए ही करधनी पहनी है और मैं नहीं चाहता था की वो जबरदस्ती कुछ भी करें;

मैं: aaaa … look … आपको जबरदस्ती ये पहनने की जर्रूरत नहीं है okay?

संगीता: किसने कहा ये मैंने जबरदस्ती पहना है? गलती मेरी थी…. मैं आपकी भावनाओं को समझ नहीं पाई| कोई भी पति अपनी पत्नी को तोहफा देता है क्योंकि उसमें उसका प्यार छुपा होता है| मैं आपके प्यार को ठीक से समझ नहीं पाई और अपनी लाज के आगे उसे दर-गुजर किया! आपने मुझे ये इसलिए दिया ताकि मैं और खूबसूरत लगूँ….. और मैं पागल इसे अपनी लाज से जोड़ने लगी| आपने भी तो मेरा दिया हुआ gift बड़े शौक से पहन लिया|

मैं: तो यार its not necessary की आप इसे हरदम पहने रहो?

संगीता: आप मेरी ख़ुशी के लिए कुछ भी कर सकते हो तो क्या मैं आपके लिए एक करधनी भी नहीं पहन सकती|

मैं: पर आपके ना पहनने से भी मैं खुश हूँ|

संगीता: तो मेरे पहनने से तो आप डबल खुश हो जाओगे?

मैं: यार……

संगीता: Hey….. All I want is you to be happy… और मुझे अब इसकी आदत हो गई है| So आप मुझे मना नहीं करोगे| Okay?

मैं: ठीक है बाबा! and Thanks !!!

इस ख़ुशी के पल के बाद हम दोनों जल्दी से तैयार हुए क्योंकि आज के दिन हमारा Attukal waterfall घूमने का प्रोग्राम था| हम सारे तैयार हो के वॉटरफॉल के लिए निकले| रास्ते में माँ-पिताजी आगे बैठे थे और उनकी गोद में आयुष था और पीछे मैं और संगीता बैठ थे और बगल में नेहा बैठी थी, मौसम का जादू हम पे पूरे जोश में था| दोनों रोमांटिक हो रखे थे…पर पीछे बैठे-बैठे कुछ कर नहीं सकते थे| संगीता ने अपना सर मेरे कंधे पे रखा हुआ था और मेरे बाएं हाथ में उनका हाथ था| मैं उनका हाथ प्यार से मसल रहा था और वो मौका पाते ही मेरी गर्दन पे Kiss करती रहती| I was aroused with this feeling and hardly control myself. खेर हम जब waterfall पहुंचे तो वो नजारा देख के दिल खुश हो गया| वो कल-कल करता हुआ बहता पानी…. झरने का शोर….. ठंडा-ठंडा पानी….. अब बच्चे पानी में खेलने की जिद्द करने लगे और पानी इतना ठंडा था की माँ-पिताजी ने सख्त हिदायत दी की अगर भीग गए तो बीमार पद जाओगे| बच्चे उदास हो गए, माँ-पिताजी तो आगे एक पत्थर के पास बैठे थे और मैं-संगीता और बचे पानी के किनारे बैठ थे| अपने दादा-दादी के दर से बच्चे पानी देख रहे थे…पर मुझे लगा की उनका मन खेलने का है| मैं उठा और एक मिनट में आया बोल के पिताजी के पास आया| पिताजी हमेशा अपने साथ अखबार ले के जाया करते थे क्योंकि सफर में बोर होने से अच्छा वो ताजा खबरें पढ़ लिया करते थे| मैंने उनसे अखबार लिया और वापस आ गया| मैंने अखबार से आयुष और नेहा के लिए कागज़ की नाव बनाई और उसपे दोनों का नाम लिख दिया| नाव देख के दोनों खुश थे अब मैंने उन्हें थोड़ा प्रोत्साहन दिया ताकि वो नाव को पानी में छोड़ें पर किनारे में पानी काम था और किनारे से दूर पानी में जाते तो वो भीग जाते, तो मैंने दोनों को बारी-बारी गोद में लिया और उन्हें लेके पानी में उतर गया| मैंने पेंट को घुटनों तक चढ़ा लिया था, पर जब पानी का एहसास मुझे अपने शरीर पे हुआ तो मेरी कंपकंपी छूट गई| मैं जल्दी से पानी से बाहर आ गया, चूँकि माँ-पिताजी कुछ आगे बैठे थे और बातों में व्यस्त थे तो उनका ध्यान मेरी तरफ नहीं था|

संगीता: जानू…पानी बहुत ठंडा है…मत जाओ? बीमार पड़ जाओगे?

मैं: कुछ नहीं होगा|

मैंने हिम्मत जुताई और आयुष को गोद में ले के पानी में उतर गया, ठन्डे पानी ने टांगें सुन्न कर दी थीं पर आयुष की ख़ुशी के आगे सब बर्दाश्त था| मैं थोड़ा सा झुका और आयुष ने अपनी नाव पानी में छोड़ी, नाव ज्यादा आगे नहीं गई और डूब गई पर मैं हैरान था की वो कुछ पलों की ख़ुशी उसे इतनी अच्छी लगी! फिर नेहा को ले के पानी में आया…उसकी नाव आयुष के मुकाबले थोड़ा आगे गई और फिर डूब गई| वो भी खुश थी पर आयुष से थोड़ा ज्यादा…और बार-बार उसे जीभ चिढ़ा के हंस रही थी|

आयुष: पापा…cheating …Cheating …. मैं दुबारा नाव चलाऊंगा!!!

उसका शोर सुन के पिताजी और माँ का ध्यान मेरी तरफ हुआ, और मुझे पिंडली तक पानी में खड़ा देख पिताजी और माँ दौड़े-दौड़े आये| मैं भी नेहा को गोद में लिए हुए पानी से बाहर अ गया|

पिताजी: पागल हो गया है क्या? कितना ठंडा है पानी? बीमार पड़ गया तो?

माँ: बहु तू तो रोक लेती?

संगीता चुप थी तो मुझे ही सच बोलना पड़ा;

मैं: माँ….उन्होंने रोक था पर मैं नहीं माना| बच्चे उदास हो गए थे!

माँ: देखा? आप (पिताजी) पे गया है?

पिताजी: अरे मैंने क्या किया?

माँ: जब छोटा था तो इसकी हर जिद्द पूरा किया करते थे, मेरे से चोरी-चोरी इसे खिलोने ला के दिया करते थे| यहाँ तक की मैं रोटी बना रही होती थी और ये उतनी देर में इसे गोद में लिए ऑटोरिक्क्षाव किया और घुमा-फ़िर के ले आते थे!

पिताजी हंसने लगे|

पिताजी: बहुत लाड किया है इसने (मैंने)! पर बीटा बीमार पड़ जाओगे?

मैं: कुछ नहीं होगा पिताजी!

मैंने कह तो दिया पर जैसा की आप जानते हैं की ठंडा पानी मुझ पे देर सवेर असर दिखा ही देता है| तो हम होटल आ गए, शाम को डिनर के बाद बच्चे और माँ टी.वी. देखने लगे और पिताजी संतोष से काम की रिपोर्ट लेने के लिए बाहर आ गए| मौके का फायदा उठा के मैं और संगीता भी टहलने के बहाने बाहर आगये| हम टहलते-टहलते उसी जगह आ गए जहाँ हमने कल एक couple को kiss करते हुए देखा| पर मैं आज शांत था…एक तो शरीर में थकावट असर दिखाने लगी थी और दूसरा मैंने सुबह ही प्रॉमिस किया थे की I won’t push her again for anything she doesn’t like! उस समय रात के नौ बज रहे थे और पार्क लघभग खाली ही था|

संगीता: जानू?

मैं: हम्म्म…..

संगीता: I got a surprise for you!

मैं: okay? (मैंने बड़े उत्साह से पूछा)

संगीता: पहले अपनी आँखें बंद करो|

मैंने आँखें बंद की और मन ही मन सोचने लगा की आखिर gift होगा क्या? क्योंकि उनके हाथ में तो कुछ नहीं था? उन्होंने ने अपनी बाहों को मेरी गर्दन के इर्द-गिर्द लॉक किया और अपने पंजों पे उठते हुए मुझे KISS किया| मैंने इसका कोई विरोध नहीं किया और पूरा आनंद लिय| कुछ देर बाद,

मैं: Okay …तो ये kiss किस लिए था?

संगीता: कल का उधार था|

मैं: तो……..

संगीता ने मेरी बात काट दी;

संगीता: और ये मैंने अपनी मर्जी से किया| No Questions?

मैंने एक गहरी सांस छोड़ी पर हम बाहों में बहोें डाले होटल लौटे| अब बारी थी सोने की,

आयुष: मैं तो दादाजी के पास सोऊँगा? दीदी तुम भी सो जाओ…दादा जी बहुत अच्छी कहानियाँ सुनाते हैं|

मैं हैरान था…पर खुश भी था की चलो आयुष को वो प्यार मिल रहा है जो उसे मिलना चाहिए| और नेहा…वो भी पिताजी से उतना ही प्यार करती थी और पिताजी भी उसे उतना ही चाहते थे पर नेहा हमेशा मेरे पास रहना ज्यादा पसंद करती थी, कारन तो मैं आपको बता ही चूका हूँ|

नेहा: नहीं..मुझे पापा के पास ही नींद आती है| (और नेहा आयुष को जीभ चिढ़ाने लगी)

मैं: okay बाबा..अब चलो सोने|

सब को goodnight बोल के हम तीनों अपने कमरे में आ गए पर संगीता जी के ऊपर से romance का भूत नहीं उतरा था| उन्होंने नेहा को अपने पास बुलाया और उससे बी आत करने लॉगिन, तब तक मैं भी अपना लैपटॉप on कर के आप लोगों के कमेंट्स पढ़ने लगा|

संगीता: नेहा…बेटा अगर मैं आपसे कुछ मांगू तो आप मुझे दोगे?

नेहा: हाँ (उसने बड़े तपाक से जवाब दिया)

संगीता: बेटा आज रात आप अपने दादा-दादी के पास सो जाओगे?

नेहा: पर क्यों मम्मी? (नेहा के सवाल पे मुझे हंसी आ रही थी और मैं जानने को व्याकुल था की वो क्या जवाब देती हैं|)

संगीता: उम्म्म्म्म्म… बेटा मुझे आपके पापा से कुछ बात करनी है?

नेहा: तो करो…मैंने कब रोका है?

ये सुन के तो मेरी हंसी छूट गई! संगीता के होठों पे भी मुस्कान आ गई थी;

संगीता: बेटा….उम्म्म….. आपके सामने वो बात नहीं हो सकती| वो बस अकेले में ही होती है? आप बड़े हो गए हो…आपको अब अकेले सोने की आदत डालनी चाहिए! कबतक आप पापा की गोद में चढ़े रहोगे?

नेहा खामोश हो गई और उसका मुंह उतर गया| वो दरवाजे की ओर जाने लगी ओर मुझे उस पर बहुत तरस आया, इससे पहले मैं कुछ कहता वो रूक गई ओर मेरी तरफ बढ़ी ओर बोली;

नेहा: पापा आप भी चाहते हो मैं यहाँ से चली जाऊँ?

सच कहूँ तो मैं कतई नहीं चाहता था की वो चली जाए पर मैं संगीता को भी उदास नहीं करना चाहता था| पर मैं जानता था की अगर अमीने “हाँ” कहा तो नेहा का दिल टूट जायेगा ओर शायद वो फिर कभी मेरे पास नहीं आएगी …मरते क्या न करते मुझे संगीता को for granted लेना पड़ा;

मैं: नहीं बेटा…. बिलकुल नहीं| आप मेरे पास ही सोओगे|

नेहा: Thank You पापा!

उसकी ख़ुशी के आगे मैं झुक गया ओर अपना लैप-टॉप बंद कर दिया| मुझे लगा था की संगीता नाराज होंगी पर वो हम दोनों को देख के मुस्कुरा रहीं थीं|

संगीता: आप इससे बहुत प्यार करते हो! जानती थी की आप इसका दिल कभी नहीं तोड़ोगे…Thank You!

फिर हम तीनों एक साथ सो गए| रात के दो बजे मुझे सांस लेने में दिक्का थुई| मेरी नाक बंद हो चुकी थी और गाला choke हो चूका था| कुछ भी बोलने में बड़ी दिक्कत हो रही थी| साफ़ था ठण्ड अपना असर दिखा रही थी| मैं नहीं चाहता था की मेरी वजह से संगीता और नेहा बीमार पढ़ें तो मैं उठ के सोफे पे जाके सो गया और कम्बल से खुद को ढक लिया| सुबह कब हुई इसका होश नहीं था….जब संगीता ने कम्बल हटा के मेरा माथा छुआ तो उनके ठन्डे हाथ ने मेरी नींद भगाई|

संगीता: आपको तो बुखार है? (वो बहुत डरी हुई थी)

मैं: हाँ…रात …..

गला choke होने के कारण बोलने में दिक्कत हो रही थी| वो भाग के गईं और माँ और पिताजी को बुला लाईं|

माँ: मैंने कहा था न की बीमार पड़ जायेगा? देख…हो गया ना बीमार?

मैं चुप-चाप दांत सुनता रहा| सबसे पहले तो मुझे अदरक वाली चाय पिलाई गई उसके आधे घंटे बाद कुछ शब्द फूटने लगे फिर डॉक्टर को बुलाया गया|

डॉक्टर: आपको इस तरह ठण्ड में …. गीला नहीं चाहिए था? Hypothermia हो जाता तो? आप ये दवाई लो और आराम करो|

पिताजी: डॉक्टर साहब दरअसल 1 तरीक को हमारी वापसी की flight है| तो तब तक तो ये?

डॉक्टर: हाँ-हाँ… दवाई समय पे लें तो ठीक हो आजायेंगे|

डॉक्टर के जाने के बाद सारे जाने मुझे घेर के बैठ गए….

संगीता: आपने मुझे रात को उठाया क्यों नहीं?

माँ: हाँ…. नहीं तो हमें उठा देता?

मैं: मैंने सोचा…कोण आपको तंग करूँ| हल्का सा बुखार है…ये तो डॉक्टर बढ़ा-चढ़ा के कह रहा था| मैं अब बेहतर महसूस कर रहा हूँ|

पिताजी: चुप-चाप आराम कर| हम भी आराम ही करते हैं…चलो जी

तो माँ और पिताजी अपने कमरे में चले गए|

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