मामी की गदराई गांड की चुदाई part 3

महेश जब उठ गया तो मामीजी भी खड़ी होगयी. खड़े होते वक़्त उनका पल्लू पूरा गिर गया, और उनकी साड़ी भी ढीली होगयी थी. वो नजारा देखकर तो महेश का लंड दस गुना होगया.
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मन ही मन महेश ने उनका पेटीकोट निकाल कर उनके च्युत को चाटना भी शुरू कर दिया था. लेकिन एक संस्कारी लड़के की तरह उसने अपना मुंह मोड़ लिया जब मामी अपनी साड़ी पेहेनने लगी. मन ही मन वो खुदको कोसता रहा अपने इस अच्छे बर्ताव के लिए पर अभीभी वो कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था. क्या पता मामीको सिर्फ उस्सको सताने में ही मजा आता हो? और सेक्स जैसी भावना उनके मन में न हो?
साड़ी पेहेनके मामी तैयार हो गयी. उनको तैयार देखकर महेश आगे चलने लगा. लेकिन मामी ने उसे रोक लिया.

“अरे बेटा २ मिनिट ठहरो मुझे “बाथरूम” लग गयी है.”

“ठीक है चाचीजी, में आगे जाके रूकता हूँ’

“नहीं नहीं, इधर ही मुंह मोडलो, अकेले आने में डर लगेगा मुझे इस घने गन्ने में.”

महेशने अपना मुंह मोड़ लिया. कुछ चन्द पलोमे उसको इस दुनिया की सबसे मधुर सिटी सुनाई दी. मामीजी की मूतते वक़्त बहोत ही मधुर सिटी बज रही थी. महेश को वो मधुर आवाज जहा से आ रहा था उधर देखे बिना रहा नहीं गया. उस्सने मूड के अपनी सासे थमायेमामीजी की तरफ देखा. लेकिन उसके किस्मत में अभीभी इंतज़ार लिखा था. मामीजी ने एक पवित्र भारतीय नारी की तरह अपने कुल्लोंको अपनी साड़ी दोनों हाथ में लेकर उस्से फैलाके ढक लिया था. उसको तो सिर्फ मामीके सिटी से ही काम चलाना पड़ा. पूरा आधा मिनट मुतने के बाद मामीजी खड़ी हुयी. महेश ने झट से अपना मुंह फेर लिया, और मामीजी को आगे चलने के लिए कह दिया. जैसे ही मामीजी आगे हुयी उसने पीछे मुड़कर मामीजी जहा मुतने बेठी थी वहा देखा. वहा अंडे के आकार इतनी आधे फूट की जमीन गीली होगयी थी मामीजी के मूत से. सौ मीटर आगे जाने के बाद उसने बड़ी चालाखी से मामीको रोककर अपनी बाइक की चाबी ढूँढने का नाटक किया और चाबी भूल जाने के बहाने से वो मामीको वही छोड़कर वो दोनों जहा बेठे थे उधर आगया. उधर आते ही उसने पहले अपने घुटनों के बल बैठकर मामीजी ने जहा अपना मूत डाला था उस मिट्टी की खुशबु ली. इतनी मादक खुशबू उस्सने आज पहली बार ली थी. मिट्टी सुखी थी इस्सलिये मामीजी का मूत जल्दी से सोख लिया गया था. लेकिन वहा गन्नों के कुछ सूखे पत्ते भी गिरे थे जिसपर मामीजी के मूत के कुछ बुँदे गिरी थी. उस बूंदों को देखकर उसके सिने में अजीब सी हलचल मच गयी. उसका दिल जोर जोर से धड़कने लगा. और उसने वैसे ही झुककर अपने जुबान से वो बुँदे चाट ली. उन बूंदों की वो चटपटी से स्वाद से उसकी धड़कन और तेज होने लगी. मामीजी के आने की आहत सुनकर उसने जल्दी से अपने आप पर काबू पा लिया और उठकर चल दिया.

मामीजी के आने की आहट सुनकर उसने जल्दी से अपने आप पर काबू पा लिया और उठकर चल दिया.

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मामीजी रास्ते में ही मिली उसे. उन्होंने चाबी मिली क्या पूछा तो उसने बता दिया की मिल गयी. दोनों गन्नोंके बीच से बाहर आगए और बाइक के पास आगये. तभी मामीजी को याद आगया की उन्होंने जो चड्डी महेश ने तैरते वक़्त पेहेनी थी वो सुखोने के लिए कुवे के पास रखी है. महेश को उन्होंने वो चड्डी जाकर लाने केलिए कह दिया. महेश ने वो चड्डी लायी. मामीने उसे पूछा,
“सुख गयी है क्या?”
“नहीं चाचीजी थोड़ी गीली है अभीभी”
“अब क्या करे, ये रखने के लिए कुछ भी नहीं है हमारे पास ऐसे थोडेही ले जा सकते है हाथ में?”
“तो क्या करे?”
“ठहर इधर ही, में झट से इसे पहेनकर आती हूँ.” मामीने बोला.
“लेकिन चाचीजी गीली कैसे पहनोगी?”
“थोडेही देर की बात है, घर जाते ही निकाल दूंगी ना.. तू ठहर यही. देख कोई आता है क्या. नहीं तो में चड्डी पेहेन रही हुंगी और कोई मजदूर आजायेगा. में पेड़ के पीछे जाती हूँ”
मामीजी ने पेड़ भी बहोत बड़ा ढूंढ लिया चड्डी पेहेनते वक़्त छुपने केलिए. महेश को एक झलक भी दिख नहीं पायी. अब तो उस्से घर जाने की बहोत ही आस लगी थी. उसका उसका लंड फुरफुराकर बहोत ही मोटा होगया था. हाथ लगाने की देरी थी बस की उसका गाढ़ा पानी कमसे कम 5 फूट दुरी तक उछल जाता.

“थोडेही देर की बात है, घर जाते ही निकाल दूंगी ना.. तू ठहर यही. देख कोई आता है क्या. नहीं तो में चड्डी पेहेन रही हुंगी और कोई मजदूर आजायेगा. में पेड़ के पीछे जाती हूँ”
मामीजी ने पेड़ भी बहोत बड़ा ढूंढ लिया चड्डी पेहेनते वक़्त छुपने केलिए. महेश को एक झलक भी दिख नहीं पायी. अब तो उस्से घर जाने की बहोत ही आस लगी थी. उसका उसका लंड फुरफुराकर बहोत ही मोटा होगया था. हाथ लगाने की देरी थी बस की उसका गाढ़ा पानी कमसे कम 5 फूट दुरी तक उछल जाता.

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घर पोहोचते हि उसने पेहले बाथरूम में जाके मूठ मारी. मामीजी ने उसे खाने के लिये उनके घर हि बुलाया था, इसीलिये वो जल्दी से तयार होकर मामीजी के यः गया. मामीजी खाना बना रही थी. उधर महेश उनके पीछे बेठ गया. जैसे हि मामीजी रोटी बेलने लगती उनकी गांड डोलने लगती. महेश आराम से मामीजी को एन्जोय कर था. कर इधर उधर की बाते कर रहा. महेश को एक कामवाली बाई चाहिये थी झाडू पोछा लगाने , बर्तन मांजने, खाना बनाने के लिये. इसीलिये उसने मामीजी को कोई बाई है क्या पूछा.
“ अरे बेटा, इस छोटे गाव मे मुश्कील से हि बाई मिलती है. तुम देख रहे हो, हमारी बाई ही कितनी बार नहीं आती. फिर भी में पूछती हूँ. लेकिन वो पैसे ज्यादा लेगी.”
“कितना लेगी वो?”
“सभी काम करने है तो हजार तो लेगी.”
“बाप रे इतना? इतना तो मेरा बजेट नहीं है. देखो पाचसो में तयार हुयी तो.”
“नहीं बेटा, इतने कम दाम में वो नहीं काम करेगी”
“ठीक है चाची, कोई मिली तो देख लेना, परीक्षा नजदीक आ रही है न, इसीलिए चाहिए थी कामवाली बाई, नहीं तो उन्ही कामो में टाइम जाया होता है.”
“ऐसी बात है क्या, तो बेटा में ही सारे काम करदिया करुँगी तुम्हारा.”
“नहीं नहीं चाचीजी, रहने दीजिये. उतना भी ज्यादा काम नहीं होता.”
“अरे बेटा, ऐसे ही थोडा काम करुँगी, कामके पैसे लुंगी तुमसे ठीक है.”
“मजाक कर रही हो क्या चाचीजी”
“अरे बेटा मजाक नहीं कर रही ही, सच में बोल रही हूँ”
“आपके घर के सारे काम कामवाली करती है, और आप सच में सारे काम कर देगी मेरा?”
“हाँ बेटा, जो भी कामवाली बाई करती है, वो सब करवा लेना मुझसे. मुझे ही कामवाली बाई समझ, ठीक है, लेकिन मुझे तनखा कितनी दोगे ? मामीने ने हसकर पूछा.
“में तो पाचसो ही दे सकता हूँ”
“ठीक है बेटा. रोज सुबह आ जाया करुँगी में.”
“थैंक यू , चाचीजी आपने मेरा बड़ा काम करदिया”
“हाँ बेटा , लेकिन किसी को पता नहीं चलने देना के में तुम्हारे यहाँ कामवाली बनी हुयी हूँ. नहीं तो प्रॉब्लम हो जाएगी”
“ठीक है चाचीजी. ये बात मेरे और आपके बिच ही रहेगी.”
महेश को तो अभी क्या हुआ उसपर यकीन ही नहीं आ रहा था. उस्सकी घर मालकीन उस्सके घर कामवाली बनने वाली थी कलसे.

महेश को तो अभी क्या हुआ उसपर यकीन ही नहीं आ रहा था. उस्सकी घर मालकीन उस्सके घर कामवाली बनने वाली थी कलसे.

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अगले दिन सुबह ११ बजे अपना काम निपटाकर मामीजी महेश के रूम गयी. महेश वही xossip पे नंगी मोटी आंटिया देख रहा था. उस्सका लंड तना था, मामीजी ने जब दरवाजा खटखटाया जो की उन्हीके घर खुलता था तो उस्सने लैपटॉप बंद करके दरवाजा खोला. मामीजी अन्दर आके बोली..
“लो बेटा आगयी में , बताओ क्या काम करना है?”
“कपडे धोने है चाचीजी , बहोत दिनसे मैंने धोये ही नहीं है.”
“ओहो अभी मैंने हमारे घर पे कपडे धोये वाशिंग मशीन पे तेरे भी धो देती”
महेश के प्लान पे तो ये बात सुनकर पानी ही फिर गया, उसे लगा था की ज्यादातर औरते जैसे साड़ी घुतानोंतक उठाके हाथसे कपडे धोती है वैसे ही मामीजी धोएंगी लेकिन वाशिंग मशीन की बात उस्सने ध्यान में ही नहीं ली थी. रातभर वो मामीजीकी गदराये जान्घोंके देखने मिलेंगे ये सोचकर सोया ही नहीं था. लेकिन उस्सने बात सँभालने के लिए कहा..
“ मशीन पे हाथ जैसी सफाई कहा मिलती है लेकिन चाचीजी.”
“बिलकुल मिलती है बेटा. बहोत अच्छी मशीन है हमारी. मैं तो नए कपडे भी उसीमे धोती हूँ.”
धत तेरी की.. अब महेश कुछ बहाना ढूंढ रहा था तभी उस्सकी खुशकिस्मती से लाइट ही चली गयी.
“हाय राम, लाइट को भी अभी जाना था” मामीने नाराजीसे कहा.
“लोड शेडिंग है न चाचीजी मंगलवार को ११ बजेही जाती है, अब तो ४ घंटे नहीं आएगी” महेश ने मन ही मन मुस्कुराकर कहा. रोज तो वो लोड शेडिंग के नाम से हजारो गलिया देता था लेकिन आज तो बहोत ही खुश होगया लोड शेडिंग की बजह से.
“हाँ वो तो है, दिखाओ कपडे किधर है.”
महेश ने पुरा कपड़ोंका ढेर लगा दिया मामीजीके सामने..
“उफ्फ .. इतने सारे कपडे ? मेरी कमर तोडके रखेगा तू”
“रहने दीजिये चाचीजी.. कोई कामवाली देख लूँगा में.. आप कहा करेंगी ये सब”
“ वैसी बात नहीं है.. चलो धो देती हूँ में. वैसे भी लाइट भी नहीं है. घर पे बेठे बेठे बोर हो जाउंगी.”
“ठीक है, आप कपडे भिगो दीजिये, भीगने तक झाड़ू-पोछा लगा दीजियेगा.”
“हाँ:” कहके मामीजी सारे कपडे उठाके बाथरूम में चली गयी. महेश भी उनके पीछे ही दरवाजे पे खड़ा था. मामीजीने अपनी सारी सिर्फ दो पैरों में थमा ली और वाशिंग पावडर बकेट में लिए पानी में डाला और कपडे भिगोने वो झुक गयी. महेश ममिजीके पीछे ही खड़ा था. मामीजी की फैली हुयी गांड देखकर उस्सकी मानो सास ही रुक गयी. xossip पे माल आंटिया देखकर पहलेसे ही वो मूड में था.. उसपर ये नजारा.. किसी बहाने अन्दर जाके उसे मामीजी की गांड सहलाने की बहोत इच्छा हो रही थी.. लेकिन उसने खुद को रोक लिया. अब तो ये रोज का नजारा था. पहले दिन ही वो कुछ गलत हरकत करके काम बिगड़ना नहीं चाहता था..
मामीजी कपडे भिगोके बाहर आगयी और झाड़ू मारने लगी. महेश बेड पे बेठ गया और अपना लैपटॉप गोद में लेकर फिरसे आंटिया देखने लगा. मामीजी झुक कर झाड़ू लगा रही थी. महेश के सामने उस्सकी गांड थी. उसी पोज़ में मामीजी की नंगी फोटो अगर xossip पे पोस्ट की तो उसे पता था उस्सका थ्रेड खुप धमाका मचाता ऐसे मन में सोच रहा था. और उस्समे कोई दोहराय नहीं था. मामीजी तो सभी आंटी प्रेमियोकेलिये अप्सरा ही थी. बिलकुल मोटी गांड, बड़े बड़े चुचे, पीठ की गहराई.. उफ्फ.. क़यामत थी मामीजी..
“ बेटा पैर ऊपर लो , बेड के निचे झाड़ू लगाती हूँ”
मामीजी की बात सुनकर महेश ने पैर तो ऊपर लिए लेकिन वही बेड के किनारे पे बेठा रहा वो. मामीजी उसीके सामने बेठ गयी और बेड के निचे से झाड़ू लगाने लगी. हैरत की बात तो ये थी उन्होंने सहारे क लिए महेश के पैर पे ही हाथ रख दिए..आह.. उस्सके हाथ तो मुलायम नहीं थे लेकिन बहोत मजा आया महेश को. झाड़ू लगाने के बाद मामीजी बाथरूम की तरफ निकल पड़ी कपडे धोने के लिए. लेकिन महेश ने उनसे पोछा भी लगाने को कहा..
“ चाचीजी पोछा भी मारिये .. बहोत दिनोंसे नहीं मारा है. बहोत गन्दी होगई है फर्श.”
“हाँ लगाती हूँ.. पहले कपडे धोती हूँ”
ऐसा कहके मामीजी बाथरूम में चली गयी. महेश को पता नहीं चल रहा था की वो मामीजी कपडे धोते वक़्त उनके सामने खड़ा कैसे रहे. उस्सको पता था मामीजी घुटनोंतक पैर दिखाती है कपडे धोते वक़्त. लेकिन मामीजी ही ने उसे आवाज लगायी, ब्रश और साबुन कहा है पूछने के लिए. ब्रश और साबुन दोनों ही बहार थे इसीलिए उसे मोका मिल गया बाथरूम में जाने के लिए. जैसे ही उस्सने ब्रश और साबुन दिया मामीजने अपनी साड़ी ऊपर उठा ली और बेठ गयी. मामीजीके गोरे गोरे पैर देखकर तो वो तिलमला रहा था. उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था इसीलिए वो जाने लगा था लेकिन मामीजीने उसी वक़्त अपनी सारी और ऊपर ली, अब मामीजी की थोड़ी जांघे और जब घुटने मोड़ने के बाद जो दरार दिखती है वो दरार दिखने लगी. बहोत ही मुलायम थी मामीजी की जांघे, और ऊपर से उसे रुकने के लिए कह दिया..
“रुको न महेश, बाते करो मुझसे, जल्दी काम होजायेगा मेरा.”
महेशने सोचा होगा की शायद आज ही काम बन जाये और ये हसीन आंटी आज ही बिस्तर में लेने के लिए मिल जाये. लेकिन अब भी उसे यकीन नहीं था. और पराये गाव में, परायी औरत के साथ वो भी शादीशुदा कुछ करने में उसे डर लग रहा था. लेकिन मामीजी के flirting को अब वो भी एन्जॉय कर रहा था. हालत लेकिन उस्सकी बहोत बुरी होगई थी. मामीजी ने पटापट २० मिनिट में ही कपडे धो दिए. मामीजी को उठते देख वो भी बेड पे आके बेठ गया. लेकिन मामीजीने बाहर आने के बजह दरवाजा बंद कर लिया. नल से आते पानी की आवाज सुनकर से अंदाजा होगया की मामीजी मुतने बेठी है.

मामीजी को उठते देख वो भी बेड पे आके बेठ गया. लेकिन मामीजीने बाहर आने के बजह दरवाजा बंद कर लिया. नल से आते पानी की आवाज सुनकर से अंदाजा होगया की मामीजी मुतने बेठी है.
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मुतने के बाद मामीजी जब बाहर आयी तभीभी उनकी साड़ी घुटनों तक ही थी. कपडे धोने के कारन पसीना आ रहा था उनको बहोत. उस पसीने में उनका चेहरा बहोत ही मादक दिख रहा था. पोछा और बकेट लेके वो कमरे में आगयी. बकेट पानी से भरा होने के कारन मामीजीकी गांड एक तरफ आगयी थी. बहोत ही सेक्सी लग रही थो वो. बकेट कमरे के कोने में रखके वो पोछा लगाने लगी. महेश की तरफ उनका साईड था. मूतते वक़्त जैसे औरते बैठती है, वैसेही मामीजी बेठी थी और पोछा लगाते हुए पीछे पीछे आ रही थी. जैसे ही वो महेश के सामने आयी उन्होंने अपना मुंह उस्सके सामने कर दिया. उनका पल्लू इकट्ठा होके उनके दोनों मम्मोंके गहरायी से गया था. उसीकारन उनके दोनों साइड से मम्मे दिख रहे थे और बिच की गहरायी भी देख सकता था वो. क्या नजारा था वो. ऐसे ही पोछा लगाते हुए मामीजी की गांड अब महेश की तरफ होगई थी. वैसे ही बेठे बेठे वो आगे जा रही थी दो पैरोंपे. जैसे ही आगे जाती उनके गांड की जो भी हलचल होती वो देख के महेश तो बिलकुल घायल होगया था. एक जगह फर्श पे बहोत सारे दाग पड़े थे. वहा मामीजी जोर जोर से घिस रही थी पोछा. महेश को पता था वो दाग कैसे है. मामीजी के ही नाम से वो जब रोज वो मूठ मारता था तो कभी कभी जोशमे वो रूम में ही झड जाता था. उसीके पानी के वो दाग थे.

“कितने जिद्दी दाग है ये महेश. मिटाए नहीं मिट रहे. क्या गिराया था?” वैसे तो मामीजी को अंदाजा होगया था.

“क्या पता चाचीजी, कुछ खाने वक़्त गिरा होगा.” महेश ने भोला बनकर जवाब दिया.

सारी फर्श पोछने के बाद मामीजी ने एक लम्बी सास ली और पंखेके निचे खडी होगई. अभीभी उनके मम्मे और बिच की गहरायी साफ़ दिख रही थी. उनकी साड़ी भी कमर में खोचने की बजह से उनका साड़ी के अन्दर का बड़ा पेट और भी बड़ा देख रहा था. साड़ी और ब्लोउज के बिच का नंगा पेट भी घायल कर रहा था महेश को. और ऐसे में उन्होंने अपना पल्लू निचे करके हवा लेनी शुरू कर दी. उफ्फ….

“चाचीजी आप तो थक गयी बहोत. पानी लाऊ क्या आपके लिए.”

“नहीं रहने दो.. घर जाती हूँ अब वहा ही पि लुंगी.” ऐसे कहके वो अपने घर चली गयी.

महेश का तो लंड बहोत देर से उंस उंस कर पानी छोड़ रहा था. मामीजी के जाने के बाद झट से उस्सने अन्दर से लॉक किया और अपनी पेंट उतार कर वही मूठ मारने लग गया. १० सेकण्ड भी नहीं लगे उसके पानी गिरने. पानी गिरने के पहले कुछ ही पलोंमे उस्सको एक आईडिया आया. उस्सने अपना सारा गाढ़ा वीर्य अपने हाथोंमें जमा किया और एक गिलास में ले लिया. उसमे उसने पानी मिलाया. अपना लंड भी उसने उसी गिलास में डुबो दिया. लंड पे जो भी वीर्य की बुँदे लटक रही थी वो उस्सने गिलास में धो दिये. और उसी वीर्य भरे पानी में शक्कर नमक और निम्बू डालके निम्बू का शरबत बना दिया. वो छान कर लिया उसमे ताकि जो वीर्य पानी में घुला न हो वो निकल जाये. निम्बू शरबत का और एक गिलास बनाके वो मामीजीके यहाँ गया. मामीजीने उनके यहाँ से लॉक नहीं किया था दरवाजा इसीलिए वो ऐसे ही चला गया. मामीजी हॉल में कुछ रही थी. उसने उनको वो उस्सके वीर्य से बना हुआ शरबत दे दिया.

“अरे वा महेश. बहोत जरूरत थी इस्सकी अभी. बहोत बहोत शुक्रिया” मामीजी बहोत खुश होगयी महेश के ऊपर.

“शुक्रिया किस बात का चाचीजी. आप बहोत थकी हुयी थी इसीलिए बना दिया. पि लीजिये ना. मामीजी ने झट से दो-तिन घूँट पि ले शरबत के..

“वाह महेश, एकदम मस्त बना है शरबत.” ऐसा कहके सारा शरबत मामीजी ने पि लिया. ये देखके महेश मन ही मन सोच रहा था कब इसे अपना कच्चा वीर्य पिला सकूँगा.

“वाह महेश, एकदम मस्त बना है शरबत.” ऐसा कहके सारा शरबत मामीजी ने पि लिया. ये देखके महेश मन ही मन सोच रहा था कब इसे अपना कच्चा वीर्य पिला सकूँगा.

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“थैंक यू चाचीजी. चाचीजी आप से पूछना था, कल मेरे फ्रेंड का बर्थ डे है, इसीलिए मेरे रूम में हम आज रात पार्टी करे क्या?”

“करो ना महेश, आज तुम्हारे चाचा भी नहीं है. कोई प्रॉब्लम नहीं. लेकिन ज्यादा शोर मचाओगे क्या.?”

“नहीं चाचीजी.”

“बियर वैगरा लाने वाले हो क्या?” मामीजी मुस्कुराकर बोली.

“हाँ, आपको दिक्कत तो नहीं?” महेश ने हौसला पाकर बोला.

“ठीक है मजे करो”

“चाचाजी कहा गए है?”

“उनके दोस्त की बेटी की शादी है कल. वो आजही गए है. में कल सीधा शादी में जाउंगी.”

“ठीक है फिर, बहोत शुक्रिया आपका,”
उस रात को महेशने के २-३ दोस्त बुलाकर बहोत बियर पी ली. चिकन वैगरा भी मंगवाया था. लेकिन सुबह जब उठा तो दोस्त जाने के बाद देखा तो सारा कचरा हो गया था. वो साफसफाई के लिए मामीजी को बुलाने के लिए दरवाजा खटखटाने वाला था की, मामीने ही दरवाजा खोला. मामीजी सजधज के तैयार थी शादी में जाने के लिए.

“अरे महेश, में जा रही हूँ शादी में यही बोलने के लिए आयी थी,”

“पर चाचीजी आज झाड़ू-पोछा नहीं लगाओगी क्या?”

“वापिस आने के बाद कर दूंगी न”

“प्लीज चाचीजी अभी थोडा साफसफाई कर दो , आपके आने तक बदबू मारने लगेगी.”

“अरे बेटा, मुझे फिर से साड़ी बदलने लगेगी”

“प्लीज चाचीजी, इस हालत में पढाई नहीं कर सकूँगा”

“ठीक है महेश, लेकिन तुम हमारे घर जाकर बेठो. में कहती हूँ तब तक अन्दर मत आना.”

“क्यूँ?”
अरे बेटा, मुझे भी जल्दी है, और इस सिल्क सारी में ही पोछा मारू क्या?”
महेश को पता चला, मामीजी सारी उतार कर वैसे ही काम करने वाली थी.

“ठीक है, में जाता हूँ, लेकिन जल्दी करना.” ऐसा कहके महेश उनके घर जाकर बेठा. लेकिन थोड़ी देर बाद उसे याद आया उस्सका मोबाइल वही उस्सके कमरे में रह गया. उस्सने दरवाजा ठकठकाया लेकिन वो खुला ही था. उस्सने बाहर से ही आवाज लगायी.

“चाचीजी मेरा मोबाइल रह गया अन्दर. और आपका भी बज रहा है.”

“ठीक है लेलो. मेरा रहने दो बाद में देखती हूँ.

महेश दरवाजेसे अन्दर गया. दरवाजे के पास में ही उस्सका बाथरूम था . जोकि अभी बंद था. वो धीरे से अन्दर आया. उसने देखा वही बेड पे मामीजी की सिल्क सारी पड़ी थी. साड़ी उठाकर देखा उस्सने तो वही पेटीकोट और ब्लाउज भी था. चड्डी नहीं थी लेकिन और ब्रा भी. इस्सका मतलब मामीजी सिर्फ चड्डी और ब्रा में अन्दर बर्तन धो रही थी. महेश मोबाइल लेकर वही बेठ गया. १० मिनिट बाद बाथरूम का दरवाजा खुला. दरवाजे के बायीं तरफ महेश बेठा था. लेकिन मामीजी बाथरूम से बाहर आकर दाई तरफ देखने लग गयी. उनके घर में जाने वाला दरवाजा खुला देखकर वो उसे बंद करने के लिए उधर मूड गयी. महेश की तरफ उनकी पीठ थी. और वो सिर्फ चड्डी और ब्रा में थी. पिंक कलर की फूल पत्ती वाली कॉटन की चड्डी थी वो. उस्सका साइज़ उसे पता था ११० cm. चड्डी भी थोड़ी निचे खिसक जाने के कारन उनके गांड की दरार ऊपर से दिख रही थी. क्या नजारा था वो. महेश तो पग्लोंकी तरह वो नजारा अपने आंखोमें समां रहा था. साड़ी में जो भी शरीर का भाग खुला रहता है वो काला पड़ गया था मामीजी का. उनके हाथ और पीठ का भाग. बाकी सब गोरा और मुलायम था. बहोत ही खुबसूरत दिख रही थी मामीजी. उनकी वो मोटी गांड, चौड़ी और उभरी हुयी समां नहीं रही थी उनके चड्डी में.
मामीजी दरवाजा बंद करके जैसे ही मुड़ी वो महेश को देखकर चौक गयी.

“अरे महेश, तुम गए नहीं.” ऐसा कहके उन्होंने वही पड़ा टॉवल उठा लिया उर सिर्फ अपने मम्मोंको ढक लिया. उनकी गदरायी जांघे, मोटा पेट, गहरी और गोल नाभी अभीभी महेश को दिख रही थी. वो पागलों की तरह मामीजी को देख रहा था.

“सॉरी चाचीजी, मोबाइल मिल नहीं रहा था, अभी मिला, जा ही रहा था की …”

“ठीक है बदमाश, चल जा उधर जाके बेठ” मामीजी मुस्कुराकर बोली. बोलते बोलते वो महेश को पास करके बेड की तरफ आगयी. महेशने जाते जाते पीछे मुड़ा तो देखा चाचीजी अपनी चड्डी ऊपर ओढ़ रही थी..
उफ्फ..

“चाचीजी बाथरूम और टॉयलेट भी साफ़ कर देना.”

“ठीक है” मामीजी वैसेही मुड़कर बोली. उनको भी मजा आ रहा था अब.
महेश उनके घर गया तो लेकिन उसने दरवाजा बंद नहीं किया. मामिजिने भी उसे बंद नहीं किया. २ ही मिनट में चाची की पुकार सुनकर वो फिरसे उस्सके रूम में आया. मामीजी अपनी नाक बंद कर बोली..

“अरे कितनी बदबू आ रही है.. कितनी बियर पी रात में? और फिनाईल ख़त्म होगई है. जा हमारे घर से ला.” महेश ने झट से जाकर फिनाइल लाया और मामीजी को दे दिया. मामीजी फिनाईल लेकर टॉयलेट में डाला. इंडियन सिटींग का टॉयलेट था वो, इसीलिए उनको झुकना पड़ा. महेश अभीभी पीछे खड़ा था. जैसी ही मामीजी झुकी महेश आंखे फाड़ फाड़ कर उनकी गांड देखने लग गया. उस्सको अब कुछ सूझ नहीं रहा था. उस्सके हाथ पैर गरम होकर कापने लगे थे. मामीजी की चौड़ी गांड झुकने की बजह से और चौड़ी होगई थी. टॉयलेट ब्रश से साफ़ करने बाद वो मुड़कर बाहर आयी..

“उफ्फ, थक गयी.. में तो , जरा पानी तो दो बेटा.”

महेश ने लाया पानी मामीने पी लिया..

“हाय राम, देखो में तुम्हारे सामने वैसे ही बिना कपडोंकी नंगी बेठी हूँ. और तू भी बदमाश इधर ही खड़ा है. चल झाड़ू लगाती हूँ में.”

मामीजी झुक कर झाड़ू लगाने लग गयी. लेकिन इस बार उन्होंने महेश को जाने के लिए नहीं बोला. मामीजी का मुंह झाड़ू लगाते वक़्त उसीके तरफ था.. उनका नेकलेस, मंगलसूत्र और ब्रा में लिपटे मम्मे सारे, लटक रहे थे.

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