मामी की गदराई गांड की चुदाई part 2

मामीजी की वो गोरी,गोल और गदरायी गांड देखकर चाचा की आंखे चमक रही थी।
“ला इल्लाह इल्लल्लाह!!!!!!!!! माशाल्लाह भाभिजान क्या तराशी हुयी है गांड आपकी। मानो संगमरमर में ही बनायीं हुयी हो। हाथो और घुटनों के बल हो जाओ भाभिजान, डॉगी पोजीशन में थोड़ी फैलाओ अपनी गांड को”
मामी डॉगी पोजीशन में होकर चाचा के सामने उन्होंने अपना खजाना खोल दिया। मामी की गांड बहोत ही टाइट थी,थोड़ी भी ढीली नहीं पड़ी थी। चाचाने ने अपनी नाक मामीजी के फैली हुयी गांड के दरार डाल कर सूंघ ली।
“क्या कर रहे हो भाईसाब, गन्दी होती है वो जगह”
“प्यार में कुछ गन्दा नहीं होता मेरी जान, और ये तो जन्नत है, कितनी खुशबूदार है आपकी गांड, वाह”
चाचाने मामीकी गांड सूंघकर अपनी जबान से वो उसे चाटने भी लग गए।
अब चाचाने अंदर से शहद की बोतल लायी और थोडा शहद मामीजी के गांड के दरार में डाल दिया। और मामीजी के गांड के गालोंपर भी शहद से मसाज कर दी। और धीरे धीरे सारा शहद चाट चाट कर ख़त्म कर दिया।
मामीजी को अब डर लग रहा था कही चाचा उनकी गांड न मार दे। चाचा भी उसी मूड में थे। मामीजी का होल बड़ा ही टाइट था, मजा आ जाता मामीजी की गांड मारने चाचाको।
“भाभिजान बहोत दिल कर रहा है आपकी गांड में घुस जाने का , देखो कैसा फुरफुरा रहा है मेरा लंड तुम्हारी गांड में घुसने के लिए।’
“नहीं नहीं भाईजान, ऐसा मत करो, फट जाएगी मेरी”
“थोडा धीरज रखना भाभिजान, थोडा दर्द होगा लेकिन बाद में मजे लोगी”
“बाद में, आज नहीं, फाड़ डालोगे क्या मेरी?’
चाचा भी अब मान गए, और मामीजी चिल्लाने लगती तो बड़ा प्रॉब्लम हो जाता ये सोचकर
“ठीक है भाभिजान अब थोडा चूस लो मेरे लैंड को”
मामीने चाचा के लंड के उपरसे कंडोम निकल दिया, चाचा का लंड कंडोम के चिकनाई युक्त फ्लूइड से गिला होगया था। उसका स्वाद स्ट्रोबेरी का था, मामीने पूरा चाट कर उसे साफ़ कर दिया। चाचाने अब थोडा शहद उसपर दाल दिया और थोडा अपने छाती पे भी। मामीजी ने उसे भी चाटकर साफ़ कर दिया।

“भाईजान जल्दी से मेरी मुनिया की प्यास बुझा दो, अब रहा नहीं जाता, और बहोत देर भी हो रही है”
“हाँ हाँ भाभिजान, लेकिन गांड नहीं मारने दी आपने आपकी, तो इस्सकी सजा मिलेगी आपको”
“क्या सजा देनेवाले हो?”
चाचा एक खुर्ची पे बैठ गए, “पेट के बल मेरी जांघोपे सो जाओ, बताता हूँ”
मामीने वैसा ही किया जैसा अस्लम चाचा ने कहा था.. जैसे ही मामीजी चाचा के जांघो पे सो गयी, चाचा ने मामीजी की गांड को सहलाते सहलाते अपने हाथोंसे जोरसे एक थप्पड़ मार दिया.. चाचा मामीजी को spank करने वाले थे..
“क्या कर रहे हो? कितना जोर से मारा” मामीजी शिकायत तो कर रही थी लेकिन मुस्कुराते हुए.. उनको भी मजा आ रहा था.. ऐसे ही थोड़ी देर तक मार मार के चाचा ने मामी की गांड पूरी लाल कर दी. जैसे ही मामी चिल्लाती चाचा और जोर से मारने लगते. मामीको दर्द तो हो रहा था लेकिन उसका मजा भी आ रहा था उनको.
“अब बस भी करो भाईजान , बेठने लायक तो छोड़ दो मेरे चुतड”
“है ही इतने मस्त तुम्हारे चुतड, बहोत स्प्यांक करने का दिल करता है. जब तुम वहा सामने झुकती हो रंगोली बनाने के लिए, हाय अल्लाह, वहिपे तुम्हारे इन चूतडोंपे एक जोरसे मारने का दिल करता है. आज तो मेरे सामने नंगी खड़ी हो, थोड़ी ही ऐसे छोडूंगा?”
“ठीक है, लेकिन जरा धीरे से मारना”
“हाँ मेरी रंडी धीरे से मारता हूँ”
“ये क्या बात हुयी, गाली दे रहे हो क्या?”
“गाली किस बात की, तुमने ही कहा था रंडी बनोगी मेरी, इस्सलिये प्यार से कहा,अब आ जाओ रानी,मेरे ऊपर
चढ़ जाओ तुम्हारी प्यास बुझाते है ”
चाचा निचे लेटने की ही देरी थी के मामी झट से लेटे हुए चाचा के पेट पे बैठ गयी और पीछे सरक कर उनका मोटा लंड ठीक से अपने च्युत में डाल दिया, उससे पहले उन्होंने उनके लंड का अपने हाथोंसे मसाज करके उसके ऊपर नया कंडोम चढ़ा दिया, और जोर जोर से ऊपर निचे करने लग गयी. चाचा कभी उनके बड़े बड़े चुचोंको मसल रहे थे तो कभी उनके चूतडों को.. झड़ने से पहले चाचा ने अपना लंड बाहर निकाला और उसके उपरसे कंडोम निकालकर, मामी को निचे लिटाके उन्होंने अपने कम से मामी को नहा डाला.. मामीजी के च्युत की प्यास भी अब बुझ गयी थी. दोनों अब एक दुसरे के पास लेटे लेटे सास भरने लगे. मामीजी को सिर्फ चाचा से चुदने का मतलब था. उनका बड़ा लंड देखते ही वो पागल हो गयी थी.उनसे किस करने में जरा भी दिलचस्पी नहीं थी उनको, लेकिन चाचा को ऐसा माल थोड़े ही मिलने वाला था. वो पुरे मजा ले रहे थे मामी के गदराये बदन का. लेटे लेटे ही चाचाने अपना मुंह मामीके पास ले लिया और अपने “मावा और गुटखा” की बू आने वाले मुंह से मामी को किस करने लगे.. मामीजी कुछ कर भी नहीं सकती थी.. चाचा ने तो मामी का खाना ही नहीं उनके पुरे बदन को झूठा करके छोड़ा था..
अब बहोत देर हो गयी थी, बाहर गली में भी आवाजाही बढ़ने कगी थी लोगोंकी, इसीलिए मामी जब जाने लगी तो चाचा ने छोड़ दिया उनको.
मामीजी साडी पहनके दरवाजे से निकल ही रही थी के चाचा ने उन्हें रोक लिया..
“भाभिजान आपकी निकर निकालके दे जाओ मुझे ”
“अरे लेकिन निकर लेके क्या करोगे?”
“मुझे नहीं पता आप मुझे कब फिरसे मिलोगी इस तरह,आपकी निशानी होगी वो निकर ”
मामीने शरमाकर अपनी साड़ी ऊपर करके निकर उतर के चाचा को देदी..
“ये लेलो,लेकिन मुझे दूसरी लाकर देनि पड़ेगी, ठीक है ?”
“हाँ भाभी, आपके लिए बहोत बढ़िया निकर लाऊंगा लेकिन मेरे हाथोंसे पेहेननी पड़ेगी आपको, मंजूर है?”
जवाब देने से पहले ही मामीजी मुस्कुराकर वह से निकल गयी..

आगे भी एक दो बार अस्लम चाचा से चुदी थी मामी लेकिन बाद में बाहर घर होने के बाद उनका मिलना कम
होगया और अस्लम चाचा भी दुसरे गाव चले गए रहने के लिए..

ये कहानी यहाँ ख़त्म होती है… आगे के कहानी में जानिए मामी अपने दामाद से कैसे चुदती
है और भांजा भी है ही अपना चोदने के लिए

मामी की गदराई गांड 2

“हेलो मामी, आज कैसे याद किया आपने ?”

“तुम्हारीही तो याद आती है बेटा सुबह शाम. मुझे नहीं आयी तो मेरी ये मुनिया याद दिलाती है.. आजाओ जल्दी यहाँ और मेरी इस मुनिया की प्यास बुझा जाओ..”

“हाँ मामीजी, मुझे भी आपकी रसभरी मुनिया और गदरायी गांड सोने नहीं देती. क्या करे अब काम छोडके तो आ नहीं सकते..”

“बहोत आग हो रही है बेटा, देखो आ सको तो”

“में समझ सकता हूँ मामी, मेरे हाथ भी आपके मोटे मोटे चुतड सहलाने केलिए बेकाबू हो जा रहे है, लेकिन थोड़े दिन आ नहीं सकता, तब तक मामाजी से ही अपनी मुनिया आग बुझवालो”

“उनसे होता तो क्या परेशानी थी.. साड़ी ऊपर कर के दो-चार बार आगे पीछे किया नहीं की झड जाते है.. वो क्या बुझाएँगे मेरी प्यास. अस्लम चाचा जाने के बाद बुरा हाल हो गया है..”

“कोई और पकड्लो अब, में तो हर वक़्त आ नहीं सकता इतने दूर.., आपने नए घर में रहने जाने के बाद किरायेदार रखे थे ना कॉलेज के लड़के? उनमे से कोई पकड्लो, या सभी को ही 😉 क्यूँ मामीजी?”

“छट बदमाश, अभी एक ही लड़का रहता है.. और वो भी अभी बच्चा है.. उसे थोड़ी ही पसंद आएगी मोटी, 44 साल की तेरी मामी?”

“क्या बात कर रही हो मामी? अपना गुनगान सुनना चाहती हो क्या मुझसे, जो ऐसे बात कर रही हो? मुझे पूरा यकीन है वो लड़का आपकी गांड को मन ही मन सामने लाकर दिन में बहोत बार मूठ मारता होगा.. आपकी गांड है ही ऐसी.. देखके ही हालत ख़राब हो जाती है, और अभी वो 22 साल का होगा.. इस उम्र में तो आप जैसी ही औरते पसंद होती है लड्कोंको.”

“देखती हूँ, अब किसीसे तो प्यास बुझानी पड़ेगी”

“देखो, मुझे पक्का यकीन है वो लड़का आपके चूतडों के पीछे पागल होगा”

“ठीक है, देखते है..”

“हाँ. और मुझे बताना मत भूलना क्या क्या हुआ वो. और बताओ क्या चल रहा है? क्या कर रही हो आप?”

“तुम बताओ तुम क्या कर रहे हो?”

“में तो आपका फ़ोन आया देखकर ही नंगा होकर मूठ मारने लगता हूँ आपसे बात करते करते”

“हाय मेरा भांजा.. में भी अभी बिना कपडोंके हूँ” मामीजी शरमाकर बोली.

“सच्ची? निकर भी नहीं पेहेनी आपने?”

“नहीं”

“आह, मामी आपने तो मेरा तना हुआ लंड और तना कर दिया”

“आजाओ मेरे पास, तुम्हारे लंड को खाली करने में तुम्हारी मदत करतो हूँ”

“बहोत दिल करता है मामी, लेकिन फिर कभी.”

“अच्छा”

“अच्छा , तो फिर रात को बात करेंगे, उस लडके के साथ बात बनी तो बता देना. बाय”

“बाय बेटा, रात को करती हूँ कॉल”

मन हि मन अपने तक़दीर को कोसते मैने फोन रख दिया. इतने साल जिसके नाम पे मूठ मारी वो मेरी मामी जब चाहे तब अपनी मोटी टांगे फैलाने केलीये तैय्यार थी, लेकीन हम अलग अलग शहर में रहते थे इसलिये रोज रोज ये मुमकिन नही था.. मुझे उस किरायेदार लडके (जिसका नाम महेश है.) पे बहोत जलन हो रही थी.. साले से मेरी मामी खुद हि अपनी च्युत चुसवाने के लिये बेताब थी. साले कि किस्मत में आज सुनेहरा पान जुडने वाला था..पर में भी मामी से उनकी चुदाई कि कहानी सुनने के लिये बेताब था.

रात को मामीने कॉल करके दोपेहर क्या हुआ वो बताया…

मेरे मामाने हाल में हि नया घर बनाया था. वैसे तो घर में वो और मामीजी हि रहते थे लेकीन उन्होने घर तो बडा बनाया था. घर में कुल छः कमरे थे, उसमे से दो उन्होने किराये पे दिये थे. अभी वहा सिर्फ महेश ही रेहता था. मामाजीने घर बनाते वक़्त वो दो कमरे किराये पे देने है ये नही सोचा था. वो दो कमरे भी मुख्य घर का हि हिस्सा थे. इसीलिये दोनो कमरो में कभीभी आ जा सकते थे जब वो दो कमरे किराये पे नही होते. उस दो कमरे में से एक लिविंग रूम थी जिसका दरवाजा मामिजीके घर के लिविंग रूम में खुलता था और दुसरा कमरा किचेन था जिसका दरवाजा ठीक मामीजी के बेडरूम के सामने खुलता था.

जबसे महेश किरायेदार बनके आया था उस दोनो कमरे के दरवाजे जो मामीजी के घर में खुलते थे वो सिर्फ सिटकनी लगाकर बंद किये हुये थे. महेश इंजिनीअरिंग कॉलेज का छात्र था. एक महिने पेहले हि वो किरायेदार बनके आया था मामीजी के घर. सुबह कॉलेज कर के दोपहर २ बजे तक वो घर आ जाता था. मामीजी भी दिनभर अकेली हि होती थी. जब पिने का पानी भरना हो या इसी किसी कारन से मामीजी और महेश कि मुलाकात होती थी. लेकिन अब तो साले की किस्मत ही खुलनेवाली थी. साले की मुलाकात तो अब रोज मामीजी के मुनिया और गांड से ही होनेवाली थी.

उस दोपहेर जब महेश कॉलेज से वापस आया तो मामीजी उसका इंतेजारही कर रही थी. थोडी देर बाद उन्होने दरवाजा खटखटाया..

“क्या बात है चाचीजी?”

“बेटा तुम्हारे बाथरूम में पानी आ रहा है क्या?, न जाने हमारे बाथरूम के नल को क्या होगया है. टंकी में तो पानी है ऊपर , लेकिन नल से नहीं आ रहा है.”

“क्या पता क्या हुआ है चाचीजी, मेरे यहाँ तो है पानी.”

“थोड़े बर्तन मांजने थे मुझे, यहाँ ही मांजने आ जाती हूँ फिर ”

“ठीक है चाची, लेकिन आप क्यूँ कर रही ये सब, बाई नहीं आयी क्या?”

“आयी तो थी, लेकिन पानी नहीं था इस्सलिये वापस गयी, अब क्या करे मुझे ही करना पड़ेगा सब. आती हूँ में बर्तन लेकर. लेकिन बेटा तुम्हे कुछ डिस्टर्ब नहीं होगा ना पढाई में?”

वैसे तो मामीजीने ही उपर का वाल्व बंद किया था जिससे उनके बाथरूम में पानी आता था.

“नहीं नहीं चाची, अभी कहा पढाई करूँगा में, आप आजाइए.”

मामीजी फिर बर्तन लेकर आगयी महेश के बाथरूम में.. और जैसे हर एक भारतीय आंटी बर्तन या कपडे धोने से पहले अपनी साड़ी घुटनोंके ऊपर लेकर दोनों टांगो के बीच लेकर बेठती है वैसे बेठ गयी.. महेश अभीभी उधर ही था. पेहली बार वो मामीजी की गोरी गोरी टांगे देख रहा था. लेकिन शायद उसे ऐसे उधर खड़ा रहना ठीक नहीं लगा इस्सिलिये वो जाने लगा. तभी मामीने अपनी साड़ी थोड़ी और ऊपर ली और जो वो दरवाजे तरफ अपनी साइड कर के बैठी थी वो उस तरफ मुंह कर के बेठ गयी. और महेश को कहा,

“कुछ काम नहीं है तो ठहरो ना महेश, मेरा भी काम जल्दी होगा बाते करते करते.”

मामीजी सिर्फ टटोल रही थी महेश को. अगर उसके मन में मामीजी को चोदना होता तो वो रूक जाता.
मामीजी जब अपनी साड़ी थोड़ी और ऊपर करके घूम रही थी तभी महेश को और “अन्दर” तक दिख गया था. मामीजी की फूल-पत्ती वाली चड्डी गुलाबी चड्डी देखकर महेश भी उधर ही रूक कर यहा-वहा की बाते करने लगा. मामीजी काम करते वक़्त महेश की तरफ नहीं देख रही थी. बीच में सिर्फ एक ही बार देखा था. उसीमे ही उनको पता चल गया था की महेश उनकी मोटी टांगो पर ही नजर जुटाके देख रहा है. महेश की हालत भी बुरी होगयी थी. मामीजी की वो गदरायी टांगे देखकर उसके बर्म्युडा का तो तम्बू बन चूका था. लेकिन वो कुछ कर भी नहीं सकता था. उसे तो मामीजी के मन में क्या चल रहा है पता नहीं था. मामीजी काम होने के बाद बर्तन किचन में रख कर वापस आकर फिर महेश के बाथरूम में चली गयी और दरवाजा बंद कर दिया. महेश बाहर ही खड़ा था अभी तक. एक-दो सेकंड्स में ही पानी छोड़ने की आवाज आगयी उस्सको. उस्से झट से पता चल गया ये तो मामीजी के मुतने की आवाज है. वैसे तो मामीजी मूतते वक़्त पानी का नल खुला रखती ताकि उनके मुतने की आवाज बाहर तक ना जाये. लेकिन आज तो मामीने एक ही दिन में महेश को सिड्यूस करने की ठान ली थी शायद.

“थैंक यू मेरे राजा बेटा, बहोत बड़ा काम होगया मेरा तुम्हारे बजह से” मामीजी बाहर आकर बोली.

“कोई बात नहीं चाचीजी”

“ये क्या नया लैपटॉप ले लिया क्या?”

“हाँ चाचीजी, इन्टरनेट के सिवा काम चलता नहीं ना अब इस्सलिये लेना पड़ा.”

“बेटा, मुझे भी सिखादो इन्टरनेट क्या होता है वो..”

“जरूर चाचीजी एक-दो दिन में ही कनेक्शन मिल जायेगा, आपको भी बता दूंगा तब”

“ठीक है बेटा, में अब जाकर आराम करती हूँ, तुम आजाना चाय पिने मेरे यहाँ ही.”

“नहीं नहीं चाचीजी, आप क्यूँ तक्कल्लुफ़ कर रही है.”

“बड़ोंका का केहना मानते है, आजाना श्याम को”

“ठीक है चाचीजी.”

साला मन ही मन मामीजी की मोटी गांड सूंघ रहा था और ऊपर से बहोत ही संस्कारी होने का ढोंग कर रहा था.
जैसे ही मामीजी वहा से चली गयी महेश झट से दरवाजा बंद कर के बाथरूम में घुस गया मूठ मारने के लिए. मामीजी भी अपने डाइनिंग रूम में खडी रह के वो क्या कर रहा है इस्सका अंदाजा ले रही थी. जैसे ही उन्हें बाथरूम के दरवाजा बंद होने की आवाज आयी वो मुस्कुराके अपने काम में जुट गयी. मामीजी ने उसकेलिए एक सरप्राइज रखा था बाथरूम में.

मामीजी की गदरायी टांगे और मोटी मोटी जांघे देखके महेश का सामान तो तन गया था. उसे मूठ मारके खाली करने वो बाथरूम में घुस गया..sms करने के बहाने उसने छुप छुप के मामीजी नंगे पैरों की तस्वीरे ली थी मोबाइल पे. उनको देखके वो अपने लंड को हिलाने ही लगा था की उसकी नजर बाथरूम में जो खिड़की थी उधर चली गयी. मामीजीने मूतते वक़्त अपनी निकर उतारी थी और जाते वक़्त पेहनी ही नहीं थी. उधर ही बाथरूम खिड़की पे फोल्ड करके रखी थी. महेश को अपनी आँखोंपे भरोसाही नहीं हो रहा था. वो मामीजी की निकर देखके उसका लंड अब और भी ज्यादा फूल गया. इतनी उत्तेजना उसने अपने लंड में कभीभी महसूस नहीं की थी. उसने उस निकर का टैग देखा. ११० cm की थी वो निकर. क्रोच पे कोई दाग नहीं देखकर थोड़ी नाराजी हुयी उसको. बहोत ही साफसुतरी थी मामीजी की निकर. बहोत मन हो गया था उसे अपना माल मामीजीके निकर में छोड़ने का,लेकिन उसने अपने आपको रोक लिया. मूठ मारके जब बाहर आया महेश तो वो सोच में पड गया. अभी १ घंटे में जो कुछ भी हुआ वो देखकर उस्से हैरानी हो रही थी. और मन ही मन वो मामीजी को चोदने के सपने भी देखने लग गया था. मामीजी की पिछेसे उस्सने कुछ तस्वीरे ली थी. साड़ी में लिपटी उनकी गांड देखकर उसका लंड फिरसे फुद्फुदाने लग गया था. एक घंटे में उस्सने फिरसे दो-तिन बार मामीजी को मन ही मन नंगा कर उनके नाम पे मूठ मारी. पाच बजे उसने मामीजी के घर में खुलने वाला दरवाजा खोला. मामीजीने उनके तरफ से सिटकनी नहीं लगायी थी दरवाजे को इस्सलिये वो खुल गया. मामीजी सामने ही झाड़ू लगा रही थी. महेशकी तरफ पीठ थी उनकी और वो पूरी ९० डिग्री में झुकी थी. मामीजी की फैली हुयी गांड का नजारा देखकर महेश का लंड फिरसे नाचने लग गया. महेश की आहट सुनकर मामीजी ने पलट के देखा उसे,

“आओ महेश बेटा, तुम्हे ही बुलानेवाली थी झाड़ू लगाके में.”

“अच्छा.. चाचाजी नहीं आते क्या चाय पिने शाम को?”

“नहीं आते. सुबह जो जाते है वो दुकान पर तो रात में ८ बजे ही आते घर. दोपहर सिर्फ खाना खाने आजाते है. दिनभर में अकेली ही होती हूँ. हमे भी २-३ महीने ही होगये है यहाँ रहने आकर. मेरे भी ज्यादा पहेचान नहि है किसीसे यहाँ. इस्सलिये तुम्हे बुला लिया चाय पे. रोज आजाया करो, क्या?”

महेश को तो क्या चाहिए था. रोज मामीजी की साड़ी में लिपटी ही सही गांड देखने के लिए वो तो कुछ भी कर सकता था. चाय पिने आना तो मामूली बात थी.

“ठीक है चाचीजी. मुझे भी रोज घर की चाय पिने मिल जाएगी आप की बजह से”

“वो भी है. आओ किचन में बेठो. झट से में झाड़ू लगाती हूँ और गरमा गरम चाय बनती हूँ. किचन में ही झाड़ू लगाना रह गया है मेरा.”

मामीजी के गांड के तस्वीरे निकालने के लिए महेशने अपना मोबाइल निकाला और किचेन में जो खुर्ची रखी थी उसपे बेठ गया. मामीजी भी किचेन में झाड़ू लगाने आगयी. महेश की तरफ मुंह करके झाड़ू लगाना छोडके मामीजी ने जान बुझकर अपनी मोटी गांड की थी उसके तरफ. मामीजीके फैली हुयी गांड को देखकर अब महेश से रहा नहीं जा रहा था..

महेश को अपनी साडी में लीपटी गांड दिखाकर मामीजी चाय बनाने लगी. पानी उबालने रखकर वो चाय पत्ती और शक्कर लेने, जहा महेश बैठा था वहा आयी. महेश के पीछे हि शेल्फ था उसमे मामीजीने जान बुझकर शक्कर और चाय पत्ती रखी थी. वो लेते हुये वो बिलकुल चीपकी हुयी थी महेशसे. उनकी उभरी हुयी गांड सिर्फ 3-4 इंच हि दूर थी महेश के हाथोंसे. उसे तो उन मोटे मोटे चुतडोंको सहलाने का बहोत मन कर रहा था. उसका लंड तो बहोत हि तडप रहा था अब. चाय पत्ती , शक्कर डालकर मामीजी महेश कि तरफ गांड करके किचन टेबल साफ करने लगी. जैसे हि मामीजी के हाथ चलते मामीजी के मोटे चुतड पीछे से डोलने लगते. महेश का तो बहोत बुरा हाल हो रहा था. कब इस कुतीया कि कुतीया बनाकर गांड चोदने मिलेगी यही सोच रहा होगा वो मनमे. मामीजी को भी उसके हालत का पता उसका का बीच में हि उभरा हुआ तंबू देखकर लग गया था. मामीजी भी नंगा होकर महेश के जैसे जवान लडके के बाहोमे समा जाने के लिये बेताब थी. महेश का उभरा हुआ तना लंड देखने के लिये बेसब्र हो रही थी.

चाय पीकर महेश अपने रूम में चला गया. रूम में जाते हि पेहले उसने मामीजी के फोटो देखकर मूठ मारना शुरू कर दिया. इस बार उसने अपना सारा पानी गिर जाने के बाद अपना लंड मामीजी की निकर से साफ़ कर दिया. मामीजी की निकर अभीभी उधर ही थी. थोड़ी देर बाद मामीजी फिर से महेश के रूम का दरवाजा खटखटाया.

“बेटा जबतक हमारे बाथरूम में पानी नहीं आता तुम्हारा दरवाजा खुला ही रखो, ठीक है?” जैसे ही महेशने दरवाजा खोला, मामीने उसे पूछा.

“कोई बात नहीं चाचीजी. खुला ही रखता हूँ दरवाजा.”

“थैंक यू बेटा. में फ्रेश होकर आती हूँ फिर” ऐसा कहके मामीजी महेश के बाथरूम में चली गयी और दरवाजा बंद कर लिया.

अंदर जाते पहले मामीजीने अपने निकर का मुआयना किया और उनको झट से पता चल गया महेश ने अपना पानी उनके निकर में छोड़ा था. मामीजीने खुश होकर वो निकर पेहेन ली, उससे पहले दोपहर की तरह नल बिना खोले ही उन्होंने मूत लिया.
महेश बाहर ही खड़ा रह के मामीजी मूती तो उसकी आवाज सुनने के लिए बेताब हुए जा रहा था. मामीजी ने भी उसे नाराज नहीं किया था.

अगले दिन सन्डे था और मामाजी काम के सिलसिले में शहर जाने वाले थे. इसीलिए उन्होंने मामीजी को खेत में जाके आने के लिए कह दिया. मामीजी को ये अच्छा मोका था महेश से नजदिकिया बढ़ाने के लिए. वैसे तो मामीजी बहोत स्वीट है लेकिन उनका दिमाग पानी से भी तेज चलता था. वो ये मोका हाथ से नहीं निकल देना चाहती थी. अगले दिन सुबह मामाजी चले जाने के बाद मामीजी महेश के बाथरूम में ही नहाने चली गयी. और कल की तरह अपनी निकर महेश को तडपाने के लिए उधर ही रख दी.

नहाने के बाद उन्होंने महेश को पूछा. “ बेटा, आज चाचाजी शहर गए हुए है, इसीलिए मुझे खेत में जाना पड़ेगा. गन्ना लगाया है ना, पानी छोड़ने जाना पड़ता है. मेरे साथ आओगे क्या? आधे घंटे में वापिस आ जायेंगे.” महेश थोड़े ही मना करने वाला था. वो झट से तैय्यार हो गया.

“जरूर चाचीजी , झट से नहा लेता हूँ में और फिर चलेंगे”

बाथरूम में आज फिर से मामीजी की चड्डी देखके महेश को मामीजी के इरादों का थोडा बहुत अंदाजा होने लगा, लेकिन उसने ‘अपना इतना नसीब कहा के इस कुतिया को चोदने मिल जाये’ ये सोचकर उसने अपने आप पर यकीन नहीं किया. लेकिन अब बहोत ही तड़प रहा था वो मामीजी की गांड को याद करके. उसी चक्कर में मामीजी की निकर की बहोत बार सूंघ ली उसने. एकदम से उसके मन में एक कामोत्तेजक खयाल आया. नहाने के बाद उसने मामीजी की ही चड्डी पेहेन ली. मामीजी की ही चड्डी पहेन के उनके साथ ही रहने का खयाल उसे बहोत उत्तेजना दे रहा था. घर आने के बाद जल्दी निकालकर रख दूंगा ये सोचकर उसने मामीजी की ही चड्डी पहेनली और तौलिया लपेटकर बाहर आगया.थोड़ी ढीली हो रही थी लेकिन कुछ प्रॉब्लम नहीं था.मामीजी बाहर ही उसके रूम में बेठी थी उसकी राह देखे. वो जल्दी से दुसरे कमरे में जाके कपडे पहनने के लिए. जैसे ही उसने तोलिया निकाला मामीजी “जल्दी करो बेटा, जल्दी जाकर जल्दी वापिस आते है” ऐसा कहते कहते उसके पीछे आगयी. और क्या महेश तो सास लेना ही जैसे भूल गया. सिर्फ चड्डी पे वो मामीजी के सामने खड़ा था और वो चड्डी भी मामीजी की ही थी. मामीजी ये देखके हसने लग गयी. “बेटा ये क्या, ये तुम्हारी अंडरवियर नहीं है, गलती से मेरी पहेनली क्या?” महेश तो शर्मसार हो गया. “हाँ चाचीजी, शायद दूसरी पेहेन ली मेने. में जल्दी से मेरी पेहेन के आता हूँ.”

“अब कहा चले, पहले ही देर हो गयी है, अब रहने दो पहेन ली है तो, कोई बात नहीं”

महेश को तो खुद पे यकीं नहीं हो रहा था मामीजी की बात को सुनके. वो वैसा ही खड़ा रहा वह पर..

“अब क्या सोच रहे हो, जल्दी से पेंट पहनो नहीं तो अंडरवियर फिसल जाएगी.” मामीजी मुस्कुराकर बोली.

महेश भी मुस्कुराकर तय्यार होगया.

महेश ने अपनी ‘अपाचे RTR’ बाइक निकाली, बाइक की सिट वैसे ही छोटी थी और मामीजी के गांड के सामने वो और भी छोटी लग रही थी. मामीजी महेश के कंधोंका सहारा लेकर उसके पीछे बैठ गयी. जैसे ही मामीजी बैठी उनकी गदरायी गांड का स्पर्श महेश के पीठ को हो रहा था. महेश तो मन ही मन मामीजी को नंगा कर उनके मोटी गांड के साथ खेलने भी लग गया होगा. रास्ता भी बहोत पथरीला था खेत जाने वाला उसी बजह से मामीजी के चुचे भी उछल उछल कर महेश के पीठ पर रगड़ रहे the. मामीजी भी चालाकी से उसी एंगल में बेठी थी जिससे उनके चुचे महेश के पीठ पर रगड़ सके. खेत में पहोचने के बाद मामीजी ने मोटर शुरू कर दी, गन्ने को पानी छोड़ने के लिए. खेत में ज्यादा काम नहीं था. इसीलिए मामीजी महेश को खेत दिखाने लग गयी. खेत के बीचोबीच कुवा था. कुवे को देखकर महेश बोला,

“चाचीजी आपने बताया नहीं आपके खेत में कुवा भी है , बताया होता तो में कपडे लाता, इस गर्मी में कूवे में तेरने में मजा आ जाता.”

“तो क्या हुआ, तेर लो ना, तेरने के बाद थोड़ी देर धुप में खड़े रहो अपने आप सुख जाओगे , तोलिया भी नहीं लगेगा अंग पोछने के लिए, जाओ तेर लो”

सिर्फ अंडरवियर में वो भी मामीजीकेही अंडरवियर में मामीजीकेही सामने तेरने का सोचकर महेश का लंड तो चौड़ा होगया. झट से उसने अपने कपडे उतारे और सिर्फ मामीजी की पैंटी में मामीजी के सामने खड़ा होगया. लेडीज पैंटी होने के बजह से उसका लंड समा नहीं रहा था उसमे. इसीलिए झट से उसने अपनी पीठ मामीजी की तरफ कर कुवेकी सीडिया उतर कर पानी में उतर गया. मामीजी भी उसका जवान बदन देखकर कामोत्तेजक हो रही थी. मामीजी ऊपर बैठके उसे ही देख रही थी. महेश आराम से तेर रहा था, लेकिन मामीजी की पैंटी थोड़ी बड़ी साइज़ की होने की बजह से तेरते तेरते पानी के बहाव से निकल गयी. उस वक़्त महेश मामीजी को इम्प्रेस करने के लिए उल्टा तेर रहा था. पैंटी निकल ने की बजह से उसका लंड खुला पड़ गया. ६” का ही था उसका लंड लेकिन बहोत मोटा था. उसका लंड देखकर तो मामीजी का पानी ही निकल गया. महेश ने झट से पैंटी ऊपर खीच कर अपने लंड ढक लिया और मामीजी की तरफ देखा. मामीजी उसे ही देखकर मुस्कुरा रही थी. महेश भी शरमाकर हंसने लग गया. जो कुछ हुआ वो सोचकर उसका लंड और भी फुरफुराकर पैंटी के बाहर आने की कोशिश करने लग गया. इसीलिए उसने तेरना निपटाकर ऊपर आकर धुप में खड़ा होगया. लेकिन १०-१५ मिनिट बाद उसका बदन तो सुख गया लेकिन पैंटी तो गीली ही थी. इसीलिए वो उसपर ही पैंट पहनने लग गया. लेकिन मामीजी ने उसे मना कर दिया.

“अरे कहा गीली पैंटी पे कपडे पहें रहे हो”

“क्या करे फिर चाचीजी, पहले ही देर हो गयी है, और भूक भी लग गयी है”

“लेकिन गीली पैंटी मत पहेनो, में देती हूँ तुम्हे और एक पैंटी मेरी “

“कहा से दोगी?”

“उधर देखो, में अपनी पहेनी हुयी उतार कर देती हूँ” मामीजी ने आराम से कह दिया. लेकिन ये सुनकर महेश का मुंह खुला का खुला ही रह गया.

“ठीक है”

महेश ने अपना मुंह पलटा भी नहीं था तब तक मामीजी ने ही पलटकर अपनी पैंटी निकाल दी. मामीजी की गोरी गोरी जांघे देखकर महेश तो पागल हो गया. मामीने अपनी पैंटी निकाल तो दी लेकिन निकालने के बाद उनको पता चला उनका पानी निकलने की बजह से वो गीली हो गयी है.

महेश ने अपना मुंह पलटा भी नहीं था तब तक मामीजी ने ही पलटकर अपनी पैंटी निकाल दी. मामीजी की गोरी गोरी जांघे देखकर महेश तो पागल हो गया. मामीने अपनी पैंटी निकाल तो दी लेकिन निकालने के बाद उनको पता चला उनका पानी निकलने की बजह से वो गीली हो गयी है.
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वो गीली चड्डी देखके मामीजी शर्मा गयी लेकिन बिना कुछ कहे उन्होंने वो चड्डी महेश को सोप दी. महेश ने भी भोला बनकर उनसे कह दिया की चाचीजी ये इतनी गीली कैसे होगयी है.. मामीजी तो गोरी चिट्टी होगयी और उसे डाट के वैसे ही पेहेनेने के लिए कह दिया..
“ऐसे कैसे पेहनू? तौलिया भी नहीं ये ढकने केलिए.. चाचीजी आप जरा मुडिये और देखिये कोई आ तो नहीं रहा में यहाँ पेड़ के पीछे जाके चड्डी पहनता हूँ..”
“हाँ हाँ जल्दी कर, कोई नहीं आता इधर, और गिली पेंटी मिट्टी में मत रख मुझे दे सुखाने के लिये रख देती हुं”
मामी जैसे हि मुडी उसने गिली चड्डी उतार के मामी को देदी और दुसरी पेहेन ली और कपडे पेहेन के वो तय्यार होगया.
“चाचीजी अब क्या करे, चले क्या घर?”
“ठेहरो थोडी देर इतनी भी क्या जल्दी है. घर जाके भी क्या करना है, अंदर चलके देखते है गन्ने में पानी उधर आता है क्या नही?” मामी ने बोला.
महेश ने भी हा बोला. मन हि मन उसे गन्ने के खेत में चुदाई कि कथाये जो उसने नेट पे पढी थी याद आने लगी. लेकीन मामी जैसी इतनी मोटी गांड वाली मादक औरत चोदने मिलेगी इसका यकीन नही था.
मामी आगे आगे चल रही थी गन्ने में. बहोत हि कम जगह थी जाने के लिये. महेश उनके पीछे उनकी गदरायी गांड घुरते हुये पीछे आ रहा था. महेश को अब कंट्रोल नही हो रहा था और जगह भी कम होने के कारन वो मामी से सटे हुये हि चल रहा था.

मामी आगे आगे चल रही थी गन्ने में. बहोत हि कम जगह थी जाने के लिये. महेश उनके पीछे उनकी गदरायी गांड घुरते हुये पीछे आ रहा था. महेश को अब कंट्रोल नही हो रहा था और जगह भी कम होने के कारन वो मामी से सटे हुये हि चल रहा था.
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जैसे हि चान्स मिलता मामी के गांड को वो टच करता था. थोडा अंदर जाने बाद उधर थोडी जगह थी जहा गन्ना नही लगाया हुआ था. वहा दोनो बेठ गये.
बहोत गर्मी थी उस दिन और इतना चलने के बजह से मामी को पसीना आ रहा था, मामी के चेहरे पे पसीने के बुंद चमक रही थी. बहोत हि मादक दिख रही थी मामीजी. महेश का जि करता तो वो वही मामीको दबोच सकता था. लेकीन वो डर रहा था. और मामी के मन में क्या चल रहा है ये भी देखना चाहता था.
मामी ने साड़ी अपने घुटनों तक ली थी और पैर फैलाके बेठी थी और अपने पल्लू से वो हवा लेकर गर्मी हटाने की कोशिश कर रही थी. उनके गोरे गोरे पैर बहोत ही सुंदर दिख रहे थे. पल्लू आगे पीछे करने की बजह से उनके मम्मों के बीच की गहराई पागल कर देने वाली थी..
“कितनी गर्मी है आज. बहोत धुप भी है. मेरे बजह से तुम्हे इस धुप में आना पड़ा न मेरे राजा बेटा?”
मामी बहोत ही प्यार से बाते करती थी सबसे. इतना मीठा बोलती की सबको उनसे बहोत लगाव था. और ऊपर से उनकी वो गांड उफ्फ, सब लोग उनकी बहोत ही इज्जत करते थे. अपनी मीठी बोली से सबका मन जित लेती थी मामीजी.
“नहीं नहीं चाचीजी, उसमे तकलीफ कैसी. घर में पड़े पड़े भी क्या करने वाला था? सो ही जाता.”
“तो इधर सो जाओ थोड़ी देर. आजा रे मेरा राजा बेटा सो जाओ मेरे पैरों पे सर रखो “
ऐसा कह के मामीने उसका सर अपने जांघो पे रख दिया.
हाए.. महेश को तो उसके नसीब पे यकीन ही नहीं आ रहा था.. इतनी उनके मुलायम सॉफ्ट तो उसकी गद्दी भी नहीं थी जितनी मामीजी की जांघे थी.

हाए.. महेश को तो उसके नसीब पे यकीन ही नहीं आ रहा था.. इतनी उनके मुलायम सॉफ्ट तो उसकी गद्दी भी नहीं थी जितनी मामीजी की जांघे थी.
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महेश थोडा सा शर्मा रहा था , लेकिन मामीजी के गद्देदार जान्घोका मजा भी ले रहा था.
“बेटा मुझे वो लैपटॉप कब सिखाओगे. दिन भर तो उसपे ही बेठे रहते हो. मुझे भी सिखाओ. और बताओ इतना क्या करते हो लैपटॉप पर?”
“कुछ नहीं चाचीजी, ऐसे प्रोजेक्ट का काम होता है वही करता रहता हूँ”
“कोनसा प्रोजेक्ट, लडकिया देखने का?” मामी ने उसके सर पे प्यार से टपली मारकर पूछा.
“नहीं नहीं चाचीजी, कुछ भी क्या”
बाते करते करते महेश एक साइड पे होगया. अब उसका मुंह मामीजी के गोल मटोल पेट की तरफ था. उसके गाल को मामीजी के चूत की गर्मी साड़ी के ऊपर से भी महसूस हो रही थी.
“तो क्या तेरे उमर के बेटे तो वही करते है. सुना है इन्टरनेट क्या जो होता है उसपे “वैसे” फिल्मे भी होती है” सच है क्या?”
“पता नहीं चाचीजी, क्यूँ?”
“अब भोला मत बात. तुम्हे नहीं पता क्या? तुम्हारे पास है न इन्टरनेट?”
“हाँ”
“ऐसे ही मजाक कर रही थी. तुम नहीं देखोगे तो क्या इस उमर में देखूंगी क्या?”
“आप की कहा उमर हुयी है चाचीजी?”
“तो क्या में भी देखू क्या? दिखाओगे मुझे?”
“आप चाहती है तो दिखाऊंगा, उसमे क्या बड़ी बात है”
“मतलब तुम्हे पता है, “वैसी” फिल्मे होती है” ऐसा कहके मामीजी हसने लगी और महेश के कंधो पर हाथ रखकर उसे उठने के लिए कह दिया.
“चलो चलो अब चलते है.”
महेश जब उठ गया तो मामीजी भी खड़ी होगयी. खड़े होते वक़्त उनका पल्लू पूरा गिर गया, और उनकी साड़ी भी ढीली होगयी थी. वो नजारा देखकर तो महेश का लंड दस गुना होगया.

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