मम्मी बनी मेरे दोस्त के पापा की रखैल part 2

मम्मी ने अंकल के गाल पर बड़े प्यार से मुस्कुराते हुए, एक हल्का सा थप्पड़ मारा।।

अंकल ने भी मम्मी के बालों को पकड़ा और उनके होंठों को अपने मुंह में लेकर किस किया।।

फिर उन्होंने अपनी अंडर वियर पहन ली और वहां से चले गये।।

जाते वक़्त, अंकल ने बाहर से दरवाज़े सटा दिया।।

अब मैं बाहर के कमरे की तरफ गया और देखने लगा।।

अंकल के दोस्त, वहीं सोफे पर बैठे हुए थे।।

उन्होंने अंकल को आते देखा और कहा – आइए, शिकारी जी.. ! कर लिया, अपना शिकार.. !

अंकल ने ताली बजाते हुए, कहा – हाँ भाई, हो गया काम.. ! गजब की माल है, कुतिया.. ! “लण्ड फोड़, बिस्तर तोड़ छमिया” है, माँ की लौड़ी.. ! यार, चूत इतनी टाइट है की खून रिस आया.. ! मुझे तो विश्वास ही नहीं हुआ.. ! जी ही नहीं चाह रहा था भाई, उसकी फुददी से लण्ड बाहर निकालूँ.. !

फिर, अंकल ने कहा – यार, पर एक ग़लती हो गई.. ! कॉन्डम भूल गया था.. ! मूत अंदर गिर गया.. !

उनके दोस्त ने कहा – तो क्या हुआ, भाई.. ! डर क्यों रहा है.. ! गिरवा देना.. ! कौन है यहाँ, उससे सवाल जवाब करने के लिए.. ! और फिर कौन सी ये पहली औरत होगी, जिसके पेट में तेरा बच्चा ठहर गया हो.. ! साले, कितनों का गिरवाया हुआ है तूने, जिनके तो पति भी यहाँ हैं.. ! इसका भी गिरवा देंगें.. ! चिंता मत कर.. !

फिर कुछ देर बाद, उनके दोस्त ने कहा – ये बता, अब क्या प्लान है.. ! मुझे भी निकलना है, कहीं.. !

अंकल ने कहा – क्या बोल रहा है, यार.. ! अभी कहाँ जा रहा है, भाई.. ! मैंने तो सोचा था, आज रात भर इसकी तबीयत से लूँगा.. ! कल सुबह छोड़ूँगा, उसको घर.. !

अंकल का दोस्त हंस पड़ा और कहा – बहन चोद, साले.. ! एक ही दिन में फाड़ देगा, क्या.. ! रुला मत दियो, भाई.. ! जैसे उस दिन, उस शर्मा की बीवी को रुला दिया था.. !

अब अंकल भी हंसने लगे और बोले – नहीं यार.. ! इसको, रुलाऊँगा नहीं.. ! इसको प्यार से चोदूंगा.. ! ताकि रोज़ तरसे, मेरे बिस्तर पर आने के लिए.. ! बहुत दिन लगाए हैं, इसने बिस्तर पर आने के लिए.. ! अब ये तडपेगी.. ! पति आ भी गया तो भी, मेरी पास आकर रोज़ यही कहेगी – चोदो ना जान, मेरी चूत.. !

अंकल के दोस्त ने अब हंसते हुए कहा – फिर हमें कब मौका मिलेगा, ऐसी “प्यारी और प्यासी फुददी” मारने का.. !

अंकल ने कहा – अभी नहीं, यार.. ! अभी ये पूरी तरह सेट हो जाए.. ! फिर, तुम सब ले जाना पर अभी नहीं.. ! पता चला की मैं भी आगे, कभी ना ले सकूँ और फिर कहीं चिल्लाने विल्लाने ना लगे.. ! पहला दिन है, भाई रंडी का.. ! पहले दिन, एक ही “ग्राहक” बहुत है.. ! सब्र करो.. ! कद्दू काट तो गया ही है, अब सब में बँट भी जल्द ही जाएगा.. !

मेरे दोस्त के पापा, मेरी मम्मी के बारे में ऐसी बातें कर रहे थे और मैं चुपचाप सुन रहा था।।

वैसे मुझे अब कोई ताजूब नहीं होता, अगर मम्मी उनके दोस्त से भी अपनी चूत मरवा लेती।।

सोचा तो मैंने पहले ये था की अंकल मम्मी की इज़्ज़त लूटेगें पर मम्मी ने तो अपनी इज़्ज़त अंकल को तोहफे में दे दी थी, उनके दोस्त को भी शायद दे दें।।

खैर.. !

अब उनके दोस्त ने कहा – चल भाई, ठीक है.. ! सब्र कर लेता हूँ.. ! अब मैं जा रहा हूँ और तू ये रख, घर की चाभी.. !

और, वो निकल गये।।

मैं फ़ौरन आड़ में हो गया।।

उनके दोस्त कार में बैठे और मुझे ज़रा भी देखे बिना, निकल गये।।

अंकल ने वहां से शराब की बोतल उठाई और दो ग्लास लेकर, अंदर चले गये और दरवाज़े बंद कर दिया।।

उनके जाने के बाद, मैं वापस से बैडरूम की खिड़की के पास चला गया।।

मेरी मम्मी कंबल के नीचे थीं, उन्हें ठंड लग रही थी।।

अंकल आए और बिस्तर पर बैठ गये और दो ग्लास में दारू निकाल के, एक ग्लास मम्मी को दिया।।

मम्मी उठ के बैठ गईं।।

अभी भी उनके शरीर पर, एक भी कपड़ा नहीं था।।

अंकल ने मम्मी से कहा – ये लीजिए दवाई पी लीजिए.. ! फिर, हम रात भर मज़े करेंगे.. !

वो मम्मी के पास आ गये और दोनों बिस्तर के सहारे लेट के दारू पीने लगे।।

इस बार तो मम्मी ने “फॉर्मेलिटी” के लिए भी, उनको मना नहीं किया।।

अब अंकल ने मम्मी के गालों पर हाथ रखते हुए कहा – महक जी, आपने मुझे बहुत सताया है.. ! कब से आपको चोदने की हसरत लिए, घूम रहा था.. ! चलिए देर से ही सही, पर आपने आज मेरे दिल की बात पूरी कर दी.. ! अब मैं आपको कभी अकेला फील नहीं होने दूँगा और ना ही आपको आपके पति की कमी महसूस होने दूँगा.. !

उन्होंने मम्मी को एक एक, करके 4-5 पैग पीला दिए।।

मम्मी के ऊपर, धीरे धीरे “नशा” छाता जा रहा था।।

इधर, धीरे धीरे मेरी माँ की “असली तस्वीर” मेरे सामने आती जा रही थी।।

इसी बीच अंकल ने अपनी अंडर वियर निकाल दी और मम्मी के हाथ से ग्लास ले लिया।।

फिर उन्होंने दारू की बोतल और दोनों ग्लास ले जाके टेबल पर रख दिया।।

अब वो बिस्तर पर आकर घुटनों के बल बैठ गये और मम्मी के बालों को पकड़ते हुए, अपना लण्ड मेरी मम्मी के मुंह में दे दिया।।

मम्मी ने भी लण्ड को अपने हाथ से रगड़ते हुए, उनके लण्ड को चूसना शुरू कर दिया।।

अंकल – आअहह अहह अहह अहह अहह और ज़ोर से महक जी.. ! आ आ आ आ आ पूरा अंदर लीजिए.. ! उफ़फ्फ़.. ! – कहते हुए, मेरी मम्मी के मुंह मे अपना लण्ड आगे पीछे करने लगे।।

अंकल बीच बीच में, अपना हाथ पीछे करते हुए मम्मी की पीठ सहला रहे थे।।

फिर थोड़ी देर बाद, अंकल ने अपना लण्ड बाहर कर दिया।।

उनके लण्ड पर मम्मी का पूरा थूक लगा हुआ था और चमक रहा था।।

अंकल ने मम्मी को घुटनों के बल बैठा दिया और मम्मी के पीछे खुद घुटनों के बल बैठ गये और मम्मी की फुददी में लण्ड रगड़ने लगे।।

मम्मी – आ आ आहह आह आह आ ह ह आ ह ह ह आअ ह ह आ आ आ आ आ आ आ.. ! करने लगीं।।

एकदम से उन्होंने मम्मी की कमर पकड़ते हुए, एक ज़ोर का धक्का दिया।।

मम्मी बहुत ज़ोर से चीख पड़ी – आ आ ह ह आ ह आह आअ माह ह ह ह ह ह.. ! मर र र र र र गई स स स स स स स स.. ! नही ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई.. ! आइया आ ह आहह आह आ.. !

अंकल का पूरा लण्ड, एक ही बार में मेरी मम्मी की फुददी के अंदर चला गया था।।

अंकल ने लण्ड को बाहर निकाला और फिर से धक्का मारा।।

फिर वो धीरे धीरे लण्ड अंदर बाहर करने लगे और अपने “9 इंच के लण्ड” को मेरी मम्मी की “कसी हुई चूत” में पेलने लगे।।

अंदर बाहर, अंदर बाहर करने लगे।।

मम्मी – आ अहह आ अहह अ ह अहह औह ह ओई ई ईई ई ई ह माआ अ ए या या माआ आ औहह ओफफ फफ फफ्फ़ ओफ फफ फफ्फ़ मा आआ।। करने लगीं।।

अंकल ने धक्का मारते हुए, मम्मी से कहा – महक जी, मज़ा आ रहा है ना.. !

मम्मी ने कहा – हाँ स स स स.. ! बहुत मज़ाआआ आ रहा है स स स.. ! पर दर्द, बहुत हो रहा है.. ! आ ह हह आ आ.. !

अंकल ने कहा – कुछ नहीं, महक जी.. ! सब ठीक हो जाएगा.. ! तुम बहुत टाइम से चुदी नहीं हो, इसी लिए तुम्हारी फुददी बहुत टाइट हो गई है.. ! पर चिंता मत करो, मैं आज तुम्हारा पूरा रास्ता साफ कर दूँगा.. ! फिर ये आज के बाद, बंद नहीं होगा.. ! मेरी जान, आज के बाद तेरी हर रात मेरे बिस्तर पर गुज़रेगी.. ! तेरी हर रात को मैं, तेरी चूत को मस्त कर दूँगा.. !

फिर वो रफ़्तार बड़ा कर, मेरी मम्मी को ज़ोर ज़ोर से चोदने लगे।।

बीच बीच में वो, एक दो थप्पड़ मेरी मम्मी के चूतड़ पर मार दे रहे थे।।

उनके चूतड़ पर, अंकल के हाथ का निशान छप गया था।।

मम्मी की गाण्ड, एक दम “लाल” हो चुकी थी।।

इधर, अंकल के हर धक्के से मम्मी का चुचे आगे पीछे हुए जा रहे थे।।

अंकल ने लगभग, मम्मी को 5-7 मिनट तक ऐसे ही चोदा और उसके बाद, मम्मी के फुददी से अपना लण्ड बाहर निकाल लिया।।

फिर वो झुक कर, मम्मी के गाण्ड के पास आ गये और उनके छेद को फैला दिया।।

अब वो उसमें, अपनी नाक डाल के उसे सूंघने लगे।।

फिर उन्होंने अपनी दो उंगली अंदर घुसा दी और धीरे धीरे, मम्मी की गाण्ड के छेद को चौड़ा करने लगे।।

मैं समझ गया की अंकल, आज मम्मी की “गाण्ड” भी मारेंगें।।

कुछ देर के बाद, वो पीछे आ गये और झुक गये और अपना लण्ड मम्मी की गाण्ड के छेद पर रख दिया।।

अब उन्होंने मम्मी से पूछा – महक जी, गाण्ड मरवाई है, आपने कभी.. !

मम्मी ने कहा – नहीं.. !

अंकल हंस पड़े और कहा – किसी से भी नहीं.. ! आपके पति ने भी नहीं मारी.. !

मम्मी ने कहा – नहीं.. ! मैंने उनको नहीं मारने दी.. !

अंकल ने कहा – जिस मर्द ने तेरी गाण्ड नहीं मारी, उस पर धिक्कार है.. ! जब मैं तुझे जीन्स में देखता था, तब जी चाहता था, तेरी जीन्स को वहीं फाड़ के तेरी पैंटी निकाल के, तेरी गाण्ड मार दूँ.. ! आज तुझे इसका एहसास करता हूँ.. !

मम्मी से कहा – भाई साब.. ! रहम कीजिए.. ! गाण्ड मत मारिए, प्लीज़.. !

अंकल ने कहा – वो तो मैं, ज़रूर मारूँगा.. ! बेहतर है, आप साथ दें तो दर्द कम होगा.. ! एक काम कीजिए, हाथ पीछे करके अपने चूतड़ को फैला लीजिए.. !

मम्मी कुछ देर रुकीं, फिर उन्होंने वैसा ही किया।।

उन्होंने, अपने दोनों हाथ पीछे कर दिए और चूतड़ को फैला लिया।।

उनकी गाण्ड का छेद, पूरा खुल गया।।

अब अंकल ने बोला – छेद को ढीला छोड़ दो, जैसे सुबह टाय्लेट के टाइम छोड़ती हो.. !

फिर अंकल ने मम्मी के गाण्ड के छेद पर लण्ड सेट करके, हल्का झटका दिया और उनका टोपा मम्मी की गाण्ड के छेद में “भच” से चला गया।।

मम्मी बहुत ज़ोर से चीख पड़ीं – नही स स स स स स स स स स स.. ! इयाः ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह.. ! आ आ आआ आहह.. ! प्लीज़ नही स स स स स स स स स.. ! निकाल बाहर.. !

अंकल ने कहा – महक जी, दर्द पल भर का है.. ! इसकी खुशी जिंदगी भर रहेगी.. !

और उन्होंने फिर से, एक और धक्का मारा।।

मम्मी की चीख के साथ इस बार उनके मुँह से गाली निकल गई – मा दर चोद स स स स स स स स स स.. !

मैंने सोचा बस यही बचा था तो मम्मी को “गलियाँ निकालना” भी आता है।।

इधर, अंकल हंस पड़े और बोले – चुदती हुई औरत के मुँह से गालियाँ खाना भी, कितना हसीन एहसास देता है.. !

अब तक अंकल का आधा लण्ड, मेरी मम्मी की गाण्ड के छेद के अंदर चला गया था।।

मम्मी की आँखों से अब, आँसू निकल रहे थे।।

अंकल को इस बात का, कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था।।

बल्कि उन्होंने कस के एक और धक्का मारा और उनका पूरा लण्ड, मम्मी की गाण्ड में चला गया।।

अंकल ने अब मम्मी से कहा – कितनी टाइट गाण्ड है, आपकी महक जी.. ! अंदर ही नहीं जा रहा था.. ! एक दम “फ्रेश माल” हैं, आप.. ! साला लग ही नहीं रहा, दो बच्चों की अम्मा है तू.. ! अब तू, बस मेरी है.. ! और ये कहते हुए, उनकी गाण्ड के अंदर बाहर लण्ड करने लगे।।

मम्मी – अहह माँह ह ह ह ह ह ह ह ह ह मार डाला, तूने.. ! हरामी.. ! आ आ अहह अहहा अ माआ आ अम्म्म्म ममा आ आ आअ औहह.. ! करने लगीं।।

ठप ठप ठप ठप ठप.. ! पट पट पट पट पट पट.. ! से पूरा कमरा गूँज रहा था।।

अंकल ज़ोर ज़ोर से बड़ी बेरहमी से, मेरी मम्मी की गाण्ड मारे जा रहे थे।।

मम्मी बीच बीच में, उन्हें लण्ड बाहर निकालने को कह रही थीं पर अंकल में जैसे “जानवर” घुस गया था।।

वो मम्मी की बात तक नहीं सुन रहे थे।।

लगातार, उनकी गाण्ड मार रहे थे।।

कुछ आधे घंटे के बाद, उन्होंने अपना लण्ड बाहर निकाला और – आ आ आ आ आ आ आ अहह.. ! करते हुए, मम्मी की गाण्ड के छेद के अंदर ही अपना सारा मूठ निकाल दिया।।

फिर वो, मम्मी के बगल में लेट गये।।

मम्मी ने बगल में पड़ी चादर से अपनी गाण्ड की छेद पर लगा वीर्य साफ किया और वही लेट गईं।।

अंकल ने मम्मी को अपने सीने से चिपका लिया और मम्मी के गालों पर हाथ फिराते हुए कहा – महक जी.. ! आप बहुत अच्छी “सेक्स पाटनर” हैं.. ! कसम से कहता हूँ, आज तक इतना मज़ा मुझे किसी लड़की या औरत के साथ नहीं आया.. ! सच में आप बड़ी कोआपरेटिव हैं.. !

फिर उन्होंने मम्मी को किस किया और मम्मी से कहा – महक, मैं जानता हूँ की आपके पति के बाहर रहने की वजह से, आप बहुत तनाव में रहती हैं.. ! आप आज से मेरे साथ ही रहेंगी और मैं आपको, किसी चीज़ की कमी नहीं महसूस होने दूँगा.. !

अब अंकल ने मम्मी को अपने सीने से चिपका लिया और अपने ऊपर कंबल डाल लिया और दोनों एक ही कंबल में नंगे ही लेट गये।।

अंकल ने हाथ ऊपर करते हुए, लाइट ऑफ कर दी।।

मुझे लगा शायद मम्मी और अंकल, अब आख़िरकार सोएंगे।।

तो, मैं भी घर के लिए जाने लगा पर जैसे ही मैं दरवाज़े के पास पहुँचा, बारिश तेज़ हो गई।।

मैंने सोचा की कुछ देर तक रुकता हूँ।।

अंकल और मम्मी तो सो ही गये हैं और कुछ देर में, थोड़ी सी रोशनी भी हो जाएगी।।

मैं वही दरवाज़े की सीढ़ी के पास बैठा गया और बारिश ख़तम होने और सुबह होने का इंतेज़ार करने लगा।।

पर, बारिश तो पर बंद होने का नाम ही नहीं ले रही थी।।

कुछ देर यूँही बैठे रहने के बाद, मैं बोर होकर वापस खिड़की के पास आ गया।।

लाइट ऑफ होने के कारण, कुछ दिख नहीं रहा था।।

बस धीरे धीरे, बात करने की आवाज़ आ रही थी और बीच बीच में पुक्क पक फट फट पुक्क पक फट फट पुक्क पक फट फट पुक्क पक फट फट की आवाज़ आ रही थी।।

बिस्तर से भी “चू चू” की हिलने की आवाज़ आ रही थी।।

इतना तो मैं फ़ौरन समझ गया था की वो लोग अभी भी नहीं सोए हैं।।

मुझे लगा, पता नहीं कहीं मम्मी को सुबह अस्पताल ही ना ले जाना पड़े।।

तभी मम्मी की आवाज़ आई – आ आ आहह आ आ अहह मा आआ मा आ आ आ आ मा आआ अ मा आअ माआअ नाह हिई ई ओउू ऊहह ओई ई ईई ई ई.. ! प्लीज़, अब छोड़ दे.. ! तू इंसान है या जनवार.. ! इतना तो कोई रंडी को भी नहीं चोदता.. ! आ आ आ आ अहह अहह अहहा अ माआ आ अम्म्म्म ममा आ आ आअ.. !

इधर, कमरे में ठप ठप ठप की आवाज़ गूँज रही थीं।।

अचानक अंकल की आवाज़ आई – आ आ अहह महक.. ! आ आ आहह महक.. ! बस कुछ देर और साथ दे दे मेरा.. ! आ आ आ बहुत तड़पाया है, तूने.. ! उंह हा आ आ आ आ आ आ आ.. ! तुझे पाने के लिए, मैंने बहुत जतन किए हैं छीनाल.. !

मम्मी ने कहा – जब मैं जिंदा ही नहीं बचूंगी तो किस के साथ करोगे.. !

अब मम्मी की आवाज़ से कमज़ोरी, साफ साफ झलक रही थी।।

अंकल ने कहा – जानू, बस कुछ देर और अपनी फुददी से मेरे लण्ड की गरमी को शांत कर दो.. ! और वो फिर से, पट पट पट पट पट पट करके मम्मी को चोदने लगे।।

मम्मी कुछ देर – आ आहह आ आ अहह आ अहह.. ! करती रहीं।। फिर, एकदम शांत हो गयीं।।

एक पल को मुझे ऐसा लगा, कहीं मम्मी निकल तो नहीं लीं।।

पर तभी अंकल की आवाज़ आई – रो मत, मेरी रानी.. ! एक बार शांत कर दे मुझे, फिर छोड़ दूँगा.. !

मम्मी की चूडी और पायल की “छन छन” की आवाज़ गूँज रही थीं पर उनकी कोई आवाज़ नहीं आ रही थी।।

हल्की हल्की रोने की सिसकी, कभी कभी सुनाई दे जाती थी।।

पर अंकल लगातार, मेरी मम्मी को चोदे जा रहे थे।।

मुझे लग रहा था की अंकल आज, मम्मी को मार डालेंगें।।

अब सच में ऐसा ही लग रहा था की मम्मी की इज़्ज़त लूट रही थी।।

पराया मर्द, औरत पर रहम तो ख़ाता नहीं सो अंकल को भी मम्मी की हालत पर तरस नहीं आ रहा था।।

कुछ देर बाद, अंकल ने कहा – महक ग़लती मेरी नहीं है.. ! तेरे जैसी औरत जिसके पास भी होगी, वो रात भर सो नहीं पाएगा.. ! तेरे पति ने कभी नहीं चोदा क्या रात भर.. !

मम्मी की कोई आवाज़ नहीं सुनाई दी।।

अंकल, फिर उन्हें फट फट करके चोदने लगे।।

लगभग 10 मिनिट तक अंकल ने मेरी निढाल पड़ी मम्मी को चोदा और उसके बाद – आ आ आ आ आ आआ आआ आअहह करते हुए, थोड़े शांत से हो गये और बस फुच फच फुच फच फुच फच फुच फच फुच फच की आवाज़ आने लगीं।।

अंकल ने मम्मी से कहा – बस हो गया, महक.. ! अब, रोना बंद करो.. ! सच में अब नहीं करूँगा.. !

उसके बाद, उन्होंने हाथ उठा कर लाइट जला दी।।

मैंने देखा, अंकल मम्मी से लिपटे हुए थे और दोनों पसीने में लथपथ थे।।

उनके ऊपर कंबल नहीं था, वो नीचे गिरा हुआ था।।

मम्मी ऐसे पड़ीं थीं, जैसे उनके अंदर जान ही ना हो।।

अंकल के लण्ड पर मूठ लगा हुआ था।।

फिर अंकल ने मम्मी की पैंटी से उनका लण्ड साफ किया और फिर मम्मी की फुददी पर लगा, उनका वीर्य साफ किया।।

कुछ देर बाद मम्मी लड़खड़ाती हुई उठीं और बोलीं – मैं आती हूँ.. ! और वो, बाथरूम करने चली गईं।।

अंकल ने अपनी पैंट की जेब से सिगरेट निकाली और पीने लगे।।

सिगरेट पीते पीते, उन्होंने अपनी ग्लास मे दारू डाल ली और बिस्तर पर नंगे लेट गये।।

कुछ देर बाद, मम्मी निकल के आईं और बिस्तर पर लेट गईं।।

अंकल ने मम्मी को अपने पास खींच लिया और अपने से चिपका लिया और पूछा – जानू, नींद आ रही है.. !

मम्मी ने बड़े धीरे से कहा – हाँ.. !

अंकल ने कहा – ठीक है, अब कुछ नहीं करूँगा.. ! और, उनके लिप्स पर हल्का सा किस किया।।

अंकल ने कहा – महक, आज से पहले मुझे इतनी शांति किसी औरत ने नहीं दी.. ! तू एक “संपूर्ण औरत” है, जो हर मर्द चाहता है.. !

मैंने देखा, मम्मी अंकल की छाती पर कभी किस कर रही थीं तो कभी अपने गाल, वहां रख के प्यार दिखा रही थीं।।

मम्मी ने उनसे पूछा – क्या उनकी वाइफ जानती है की अंकल मम्मी के साथ हैं.. !

अंकल ने कहा – मेरी वाइफ की चिंता, तुम मत करो.. ! उसको कुछ पता नहीं चलेगा.. ! और, अंकल ने अपनी सिगरेट बुझा दी।।

ग्लास में फिर से दारू ली और ग्लास टेबल पर रख दिया।।

फिर वो बिस्तर से नीचे उतर कर, बाथरूम चले गये।।

मम्मी वहीं, चुपचाप लेटी हुई थीं।।

अंकल आए और उनके बगल में लेट गये और मम्मी को लिप पर किस करने लगे।।

थोड़ी देर पहले, बिल्कुल निढाल पड़ी मम्मी भी उनका साथ देने लगीं।।

अब अंकल ने नीचे से कंबल उठाया और दोनों के ऊपर डाल दिया।।

फिर मम्मी को अपने सीने से चिपका के चूमने लगे।।

अंकल ने मम्मी से पूछा – अब नींद तो आ नहीं रही है.. !

मम्मी ने कहा – आ रही है पर लग नहीं रही.. ! शायद, थकान के कारण.. !

इधर, मैं अंकल के हाथ का हिलना साफ देख रहा था।।

साफ पता चल रहा था की वो कंबल के नीचे, मेरी मम्मी की फुददी रगड़ रहे हैं।।

कुछ देर बाद, मम्मी ने कहा – अब सोने दीजिए.. ! वैसे भी अब कुछ महसूस ही नहीं हो रहा है.. ! अभी सो जाइए, आप जब भी बुलाएँगे, मैं आ जाया करूँगी, आपके पास.. ! मैं बहुत थक गई हूँ.. ! महसूस ही नहीं हो रहा की मेरी चूत और मम्मे हैं भी की नहीं.. !

अंकल ने कहा – बस महक, एक बार और करने दे.. ! उसके बाद, तू जैसा बोलेगी, मैं जिंदगी भर वैसा ही करूँगा.. !

मम्मी ने कहा – प्लीज़, भाई साब.. ! इस बार सच में, मेरी जान निकल जाएगी.. !

अंकल को कोई फ़र्क नहीं पड़ा और धीरे धीरे करके, वो मम्मी के ऊपर आ गये।।

फिर उन्होने, कंबल को अच्छे से लपेट लिया।।

मुझे बस अंकल और मम्मी का चेहरा दिख रहा था।।

अंकल लगातार, मेरी मम्मी के होंठों को चूस रहे थे।।

मम्मी किसी “मोम की गुड़िया” की तरह पड़ी थीं।।

अब कंबल के नीचे से, अंकल ने अपना लण्ड सही किया और एक धक्का मारा।।

मम्मी थोड़ी सी हिलीं और छत की तरफ देखती हुई, वैसे ही पड़ी रहीं।।

अंकल ने कहा – बस महक.. ! हो गया.. ! आ आ आ अहह.. !

मम्मी ने अब भी कुछ नहीं कहा और छत की तरफ टकटकी लगाए, देखती रहीं।।

अंकल ने कहा – कुछ देर और महक.. ! और, एक और धक्का मारा और धीरे धीरे, मम्मी की फुददी मे लण्ड ठुसने लगे।।

मैंने देखा, अब मम्मी की आँखों से आँसू निकल रहे थे पर वो वैसी ही पड़ी हुई थीं।।

अंकल बड़ी बेशरमी से मेरी मम्मी के आँसू चाटते हुए, उन्हें चोदने लगे और ठप ठप ठप ठप ठप की आवाज़ आने लगी।।

मम्मी के चेहरे पर कोई “भाव” नहीं था।।

ना दर्द का।। ना चुदाई का।।

बस उनकी आँखों से आँसू टपक रहे थे और वो एक टक छत की तरफ देख रहीं थीं।।

उन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था की अंकल उन्हें चोद रहे हैं या क्या कर रहे हैं।।

असल में, अंकल को भी मम्मी की हालत से कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था।।

वो अपनी मस्ती में ही कहते जा रहे थे – महक, तेरी फुददी में एक अलग मज़ा है.. ! सुकून है.. ! ठंडा कर दे, मुझे रानी.. ! आ आ आ अहह.. !

अंकल, अब मेरी “जिंदा लाश मम्मी” को ज़ोर ज़ोर से चोदने लगे।।

मम्मी की तरफ से, बस उनकी चूडी और पायल की छन छन की आवाज़ आ रही थी और किसी भी तरह से नहीं लग रहा था की वो जिंदा हैं.. !

बस बस हो गया.. ! आ आ आहह.. ! की आवाज़ के साथ, अंकल शांत हो गये और धीरे धीरे, कमर हिलाने लगे।।

उन्होंने अपना वीर्य मेरी मम्मी की फुददी में गिरा दिया और अब वो उन के ऊपर लेट गये।।

बस, हो गया.. ! अब सच में नहीं करूँगा.. ! आँसू पोछ लो.. ! अब नहीं करूँगा, तुम्हारी कसम.. ! ये बोलते बोलते, अंकल ने लाइट ऑफ कर दी।।

कुछ देर तक, अंकल कुछ कुछ बोलते रहे पर मम्मी की तरफ से कोई जवाब नहीं आ रहा था।।

मुझे डर था की कहीं मम्मी को सुबह तक कुछ हो ना जाए पर मैं कुछ नहीं कर सकता था।।

रात के, नहीं नहीं सुबह के लगभग 5 बज गये थे और बारिश भी धीमी थी।।

मैं घर के लिए निकल गया और अपने बिस्तर पर आने के बाद, कुछ देर तक मेरे दिमाग़ में वही सब चल रहा था।।

मेरे बेस्ट फ्रेंड के पापा ने, मम्मी को चोदा है।।

मैं कुछ नहीं कर सकता था क्यूंकि अंकल ने मेरी मम्मी के साथ कोई ज़बरदस्ती नहीं की थी और उन्होंने मम्मी को उनकी मर्ज़ी से चोदा है।।

पापा को बताने का मतलब था, दोनों का “तलाक़”।।

मैं श्लोक को भी बता नहीं सकता था क्यूंकि वो कभी नहीं मानेगा।।

अगर आँखों से नहीं देखा होता तो मैं भी नहीं मानता की मेरी मम्मी उसके पापा से चुद कर आई हैं।। फिर, वो कैसे मानता।।

मैं ये भी नहीं समझ पा रहा था मम्मी पर गुस्सा आना चाहिए या आख़िर में जो उनकी हालत थी, उस पर तरस।।

ऐसे ही ये सब सोचते सोचते, मेरी आँख लग गई।।

सुबह 9 बजे के करीब, जब मैं जागा तब भी मम्मी घर नहीं आई थीं।।

लगभग एक घंटे बाद, कॉल बेल बजी।।

मैंने दरवाज़े खोला।।

मम्मी ही थीं।।

उनकी आँखों में नींद भरी हुई थीं और अभी भी वो बहुत थकी हुई लग रही थीं।।

उन्हें अभी भी खड़े होने के लिए, दरवाज़े का सहारा लेना पड़ रहा था।।

मैंने मम्मी से पूछा – मम्मी, आप कहाँ थीं, रात भर.. ! ??

मम्मी ने मेरी आँखों में आँखें डाल कर, मुझसे साफ साफ झूठ बोल दिया और कहा की वो एक आंटी की तबीयत खराब होने पर, उनके के साथ चली गई थीं उनको घर छोड़ने और बारिश की वजह से, आंटी ने उन्हें घर पर ही रोक लिया।।

मैंने भी उनसे, कुछ नहीं कहा।।

मैं उन्हें ये नहीं जानने देना चाहता था की मैंने सब देखा है।।

फिर उन्होंने कहा – बेटा, मैं बहुत थक गई हूँ.. ! मैं सोने जा रही हूँ.. !

अंदर जाकर, उन्होंने अपने रूम को अंदर से बंद कर दिया और सो गईं।।

उनकी नींद, रात के 9 बजे खुली।।

मैंने मम्मी के लिए चाय बनाई और फिर वो नहाने चली गयीं।।

नहा के आने के बाद, मम्मी एकदम सामान्य हो गईं।।

उन्हें देख कर लग ही नहीं रहा था की कल पूरी रात, वो एक गैर मर्द के साथ थीं।।

जैसा की मैंने अपनी पिछले अपडेट में बताया था की मेरे दोस्त श्लोक के पापा ने उस नाइट को सारी रात, मेरी मम्मी को चोदा और अगले दिन मम्मी घर आई और सो गईं।।

3 बजे के करीब, मैं बाथरूम गया।।

मेरी मम्मी की “पैंटी और ब्रा” रोड पर, टंगी हुई थी।।

मैंने सबसे पहले बाथरूम का दरवाज़ा बंद किया और मम्मी की पैंटी, रोड पर से उतारी क्यूंकि मैंने उसमें सफेद दाग देखा नॉर्मली मेरी मम्मी के पास पुरानी पैंटी ब्रा नहीं होते।।

वो कुछ दिन उसे पहनने करने के बाद, नये खरीद लेती हैं।।

इसी लिए, मैं देखना चाहता था मम्मी की पैंटी के गाण्ड वाले हिस्से पर दाग लगा हुआ था और उनकी पैंटी सुखी हुई थी।। शायद, मम्मी ने उन्हें धोया नहीं था।।

तब मुझे याद आया, मम्मी ने रात में कई बार अंकल के लण्ड से निकला वीर्य साफ किया था।।

ये उसी का, दाग था।।

मैंने मम्मी की पैंटी, वहीं रोड पर रख दी।।

शाम को, मम्मी सो के उठीं।।

मैंने उनको, चाय बना के दी।।

मम्मी ने चाय पी, उसके बाद वो खाना बनाने चली गईं।।

मैं भी, अपने रूम में पढ़ने चला गया।।

मेरे दिमाग़ में, कल रात की बात घूम रही थी।।

मैं सोच रहा था, श्लोक को सारी बात बताने का लेकिन, वो कभी नहीं मानता ये मैं और आप भी जानते हैं।।

थोड़ी देर के बाद, मैं कमरे से बाहर निकला।।

मम्मी, किचन में नहीं थीं।।

सब्ज़ी “सिम आँच” पर चड़ी हुई थी और मम्मी, अपने कमरे में थीं।।

मैं, बालकनी के तरफ गया।।

मम्मी, फोन पर बात कर रही थीं।।

चुकीं लाइट बंद थी बालकनी की, इस लिए मम्मी ने मुझे देखा नहीं।।

मैं रूम में ही, दीवार के दूसरे साइड खड़े हो गया।।

मम्मी की, धीरे धीरे बात करने की आवाज़ आ रही थी।।

जैसे – मुझे बहुत डर लग रहा है.. !! किसी को मालूम चल गया तो.. !! – फिर वो चुप हो गईं।।

थोड़ी देर बाद, मम्मी की आवाज़ आई – नहीं.. !! अब दर्द कम है.. !!

अब वो फिर से, चुप हो गईं।।

फिर, आवाज़ आई – नहीं नहीं.. !! कल नहीं.. !! प्लीज़.. !! कोई देख लेगा.. !!

फिर, एक अंतराल।।

फिर उन्होंने कहा – नहीं प्लीज़.. !! कल नहीं.. !! मेरा बेटा देख लेगा.. !!

इस बार, वो कुछ लंबे समय के लिए चुप थीं।।

इस बार, उन्होंने कहा – मुझे बहुत डर लग रहा है.. !! आप, समझ क्यूँ नहीं रहे हैं.. !!

फिर, एक लंबी खामोशी।।

उसके बाद, मम्मी की आवाज़ आई – मैं रात में मैसेज करती हूँ.. !! बाइ.. !!

मैं फटाफट, अपने कमरे में चला गया।।

मम्मी, कुछ देर वहीं बालकनी में थीं।।

उसके बाद, वो किचन में गईं और जाकर सब्ज़ी उतारी और रोटी बना के टीवी देखने लगीं।।

रात को 10 बजे, हमने खाना खाया।।

मम्मी, बहुत ही “चिंतित” दिख रही थीं।।

ऐसा लग रहा था, उनका ध्यान यहाँ नहीं है।।

कहीं, खोई हुई हैं।।

बीच बीच में, उनका फोन बज रहा था जो वो काट दे रही थीं।।

खाना खाने के बाद, मैं अपने कमरे में सोने चला गया और मम्मी अपने कमरे मे चली गईं।।

सुबह उठ के मम्मी ने मेरा लंच बॉक्स तैयार किया और मैं 6:30 को अपने स्कूल की बस पकड़ के चला गया और 3 बजे, घर लौट के आया।।

मैंने जब कॉल बेल बजाया, तब मम्मी सो रही थीं।।

आम तौर पर, मम्मी दिन में सोती नहीं थीं क्यूंकि मेरे आने के बाद वो मुझे लंच देती थीं।।

आज, मम्मी सो रही थीं।।

खैर, कुछ देर कॉल बेल बजाने के बाद मम्मी उठ गईं।।

मैंने पूछा – मम्मी आप ठीक हैं ना.. !! क्या हुआ.. !!

मम्मी ने कहा – कुछ नहीं हुआ है.. !! सब ठीक है.. !! बस, आँख लग गई.. !! और, मेरे लिए लंच लाकर दिया।।

मैंने खाना खाया और मम्मी का फोन लिया, गेम खेलने के लिए क्यूंकि उस समय, मेरे पास अपना फोन था नहीं।।

मम्मी, टीवी देख रही थीं।।

मैं गेम खेल रहा था तभी “टू टू” करके आवाज़ आई।।

मैंने देखा, मोबाइल पर मैसेज था।।

मैंने जैसे ही क्लिक किया, जिस नंबर से ये मैसेज था उस पर श्लोक के पापा का नाम लिखा था।।

मैंने खोल लिया और देखा, उस पर लिखा था – फिर, क्या इरादा है.. !! ??

मैंने स्क्रोल किया और सारे मैसेज, पढ़ लिए।।

11:30 से लेकर 2 बजे तक का मैसेज था।।

अंकल – दर्द तो नहीं हो रहा.. !!

मम्मी – कम है, थोड़ा.. !! सूजन (स्वेल) हो गया है.. !!

अंकल – हाँ.. !! मैं थोड़ा, बेकाबू हो गया था.. !!

थोड़ी देर बाद…

अंकल – सो गई.. !! ??

मम्मी – नहीं.. !!

अंकल – कुछ बोल ना.. !!

मम्मी – आपकी, वाइफ कहाँ हैं.. !!

अंकल – सो रही हैं.. !!

मम्मी – अब, आप भी सो जाइए.. !!

अंकल – नींद नहीं आ रही है.. !!

मम्मी – क्यों.. !! ??

अंकल – बोलो ना.. !! कल, आ जाऊं ना.. !!

मम्मी – नहीं.. !! प्लीज़ कल नहीं.. !!

अंकल – क्यों.. !! तुम्हारे लाल के स्कूल जाने के बाद, आऊंगा.. !! प्लीज़, एक बार.. !! धीरे करूँगा.. !! प्लीज़.. !!

मम्मी – बात को समझिए.. !! प्लीज़, अभी तो दर्द भी गया नहीं है.. !! कम हो जाए थोड़ा, फिर.. !! प्लीज़.. !! मना तो नहीं कर रही.. !!

अंकल – महक, प्लीज़ यार.. !! तुम भी तो ना जाने, कब से तड़फ़ रही हो.. !! अब मौका मिला तो पीछे हट रही हो.. !! मैं बिल्कुल धीरे धीरे करूँगा.. !! प्लीज़.. !!

मम्मी – ठीक है.. !! बस, एक बार लेकिन.. !!

अंकल – ठीक है, जानू.. !! कितने बजे.. !!

मम्मी – 9 बजे के बाद.. !!

अंकल – आइ लव यू, जान.. !!

उसके बाद का मैसेज, अभी का मैसेज था।।

थोड़ी देर बाद, फिर एक मैसेज आया।।

अब मैंने फोन जाके, मम्मी को दे दिया।।

अपना दिमाग़ खराब करने का क्या मतलब।।

फिर कुछ देर बाद, श्लोक आया और हम लोग क्रिकेट खेलने चले गये।।

लेकिन वो कहते हैं ना “गाण्ड में कीड़ा” इसलिए, कुछ दिन तक रोज़ लगभग मैं मम्मी के मैसेज पढ़ता था।।

मुझे आज भी याद है, 26 जनवरी का दिन था और सोसाइटी के सब लोगों को बुलाया गया था।।

श्लोक ने कहा – चल यार, निकल चलते हैं.. !! बोर होंगे.. !!

थोड़ी देर बैठने के बाद, हमने ऐसा ही किया और हम वहां से निकल के अपने घर के लिए आ गये।।

श्लोक ने कहा – चल, मैं चलता हूँ तेरे घर.. !! लेकिन, मैं आज खुद नहीं चाहता था की श्लोक आए, मेरे साथ.. !! क्यूंकि मेरे मन में जो शक था की अंकल मेरे स्कूल या कहीं जाने के बाद आते हैं.. !! वो, मैं दूर करना चाहता था.. !! इसी लिए.. !!

मैंने उसे कहा – यार, शाम को मिलते हैं.. !! मेरी कुछ तबीयत ठीक सी नहीं है.. !!

उसने कहा – ठीक है, यार.. !! तू आराम कर.. !! और, मैं अपने घर के लिए चल पड़ा।।

दरवाजा बंद था।।

मैंने पहले से ही दूसरी चाबी छुपा के रखी थी, जिससे मैंने दरवाज़ा धीरे से खोला और चुपके से अंदर आ गया।।

हमारा, घर कुछ ऐसा है।।

घुसते ही, हॉल है।।

हॉल में ही टीवी और सोफा है।।

सीधे हाथ पर मेरा कमरा है और उल्टे हाथ में मम्मी और पापा का कमरा है।।

हॉल के बालकनी में परदा लगा हुआ था और पूरा अंधेरा हो रहा था और मम्मी के कमरे से आवाज़ आ रही थी।।

मैं धीरे धीरे, दरवाज़े के पास गया।।

मैं उस वक़्त, कांप रहा था।।

मम्मी के रूम का दरवाज़ा, आधा खुला हुआ था।।

सबसे पहले मुझे ज़मीन पर पड़ी, मेरी मम्मी की नाइटी और पैंटी, ब्रा दिखी और जैसे मैंने नज़र उठाई, मैं देखता रह गया।।

मेरी मम्मी और अंकल, एक ही पलंग में थे।।

अंकल ने अपने दोनों हाथों से, मेरी मम्मी के हाथ पकड़े हुए थे और मेरी मम्मी अपने सिर को इधर उधर करते हुए – आ आ अहह आ आ आ आ आ आहह आ आ आ आहह माआ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ अहह औहह ओई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई ई मा आ आ आ आ आ आअ आ आ आ सस्स्स्स्स् सस्स ओफ फ फ फफ्फ़ ओफ फफ्फ़.. !! बस कीजिए.. !! आ आ आ अहह.. !! मा आआ.. !!

अंकल ने कहा – बस हो गया, जानू.. !! हो गया.. !!

इधर, मम्मी “आ आ आहह” कर रही थीं।।

मैं वहां 2 मिनट, निस्तेज खड़ा रहा।।

अंकल, उसी तरह से मेरी मम्मी को मेरी आँखों से सामने चोद रहे थे।।

आँखों के सामने, मेरी माँ चुद रही थी।।

लगातार, मेरी मम्मी की सिसकारियों की आवाज़ मेरे कानों में आ रही थी।।

मैं चुप चाप खड़ा था और “अपनी माँ चुदते” देख रहा था।।

कुछ देर बाद, उसी तरह जैसे मैं आया था, वैसे मैंने दरवाज़ा बंद किया और घर से निकल के, श्लोक के यहाँ चला गया।।

श्लोक ने पूछा – क्या हुआ, भाई.. !!

मैंने कहा – कुछ नहीं, यार.. !! मैं कुछ देर, तेरे यहाँ रहता हूँ.. !!

उसने कहा – पर तेरी तो तबीयत खराब थी.. !!

मैं अब कुछ, रुआंसा सा हो गया।।

उसे, कुछ मालूम नहीं था।।

तभी आंटी ने कहा – बेटा, क्या हुआ.. !! तुम ठीक हो ना.. !!

मैंने अपने आप को संभालते हुए कहा – जी आंटी.. !!

आंटी ने खाने को, नाश्ता दिया।।

मैंने खाया और लगभग एक घंटे के बाद, मैं अपने घर के लिए निकला।।

अभी मैं रोड पर ही था की मैंने दरवाज़े से अंकल को निकलते हुए देखा।।

मैं चुप चाप, अपने घर के लिए चला गया।।

मैंने, कॉल बेल बजाया।।

मम्मी ने दरवाज़ा खोला।।

उन्होंने, अभी नाइटी पहन रखी थीं और शायद पैंटी और ब्रा नहीं पहना हुआ था इस लिए की उनकी चुचि साफ शेप मे दिख रही थी।।

पूरी “तनी” हुई थी।।

मैं अंदर गया और मम्मी ने कहा – मैं नहा के आती हूँ.. !! उसके बाद, खाना खाते हैं.. !!

मैं चुप चाप अपने कमरे में चला गया और अपने कपड़े बदल के, घर के कपड़ों में आ गया।।

मम्मी, बाथरूम में थीं।।

मैं उनके कमरे में गया।।

चादर, उसी तरह बिखरा हुआ था और बिस्तर पर मम्मी की एक टूटी चुडी का टुकड़ा, गिरा हुआ था।।

मुझे पैर के नीचे थोड़ा लगा, जैसे कुछ फिसल रहा है।।

मैंने झट से, अपना पाँव हटाया।।

नीचे कॉन्डम था और उसमें, अंकल का “वीर्य” भरा हुआ था।।

मेरे पाँव रखने से, फैल गया था।।

मैंने सबसे पहले जाके, अपना पाँव धोया और अपने बिस्तर पर चुप चाप बैठ गया।।

पढ़ने वालों में से शायद ही कोई हो, जो मेरी स्थिति समझे।।

मम्मी नहा के आईं और अपना स्कर्ट और टॉप पहन के, कमरे से बाहर आ गईं।।

मेरी मम्मी ने सफेद स्कर्ट पहन रखी थी और नीले रंग की टॉप।।

मम्मी की स्कर्ट, बहुत छोटी सी थी और जैसे ही वो थोड़ा इधर उधर होतीं, उनकी नीली पैंटी साफ झलक रही थीं।।

मम्मी ने खाना निकाला और हमने, खाना खाया।।

उसके बाद, मम्मी अपने कमरे में चली गईं और सो गईं।।

मैं अपने ही कमरे में था।।

अब मेरी मम्मी अपनी मर्ज़ी से, अंकल को घर पर बुलाती हैं।।

पिछले कुछ दिनों मे अंकल ने ना जाने कितने बार, मेरी मम्मी को चोदा होगा।।

पटक पटक कर, अपनी कुतिया बना कर।।

और मेरी, दो कौड़ी की, रंडी माँ ना जाने कितनी बार, टाँगें उठा कर उससे चुदी होगी।।

हर बार एक पति के, एक बेटे के भरोसे को, प्यार को, विश्वास को, उसने अपने नंगे बदन के नीचे, रोन्द डाला था।।

अगर सच में नर्क होता है तो शायद, इससे बुरा नहीं होता होगा।।

खैर.. !!

ऐसा नहीं था की, मैं कमजोर था।।

सोचिए, क्या होता अगर मैं उनकी चुदाई के वक़्त, उनके सामने पहुँच जाता और उन्हें रंगे हाथों पकड़ लेता।।

एक माँ बेटे का रिश्ता, वहीं ख़तम हो जाता।।

हो सकता था, मुँह बंद रखने के लिए या पकड़े जाने के डर से अंकल मुझे या मम्मी को कुछ नुकसान भी पहुँचा देते।।

भले ही ये बात इतनी ख़ास ना हो, पर पूरी जिंदगी में मेरी मम्मी मुझसे कभी नज़र नहीं मिला पाती।।

अगर सच में नर्क होता है तो शायद, इससे बुरा नहीं होता होगा।।

खैर.. !!

ऐसा नहीं था की, मैं कमजोर था।।

सोचिए, क्या होता अगर मैं उनकी चुदाई के वक़्त, उनके सामने पहुँच जाता और उन्हें रंगे हाथों पकड़ लेता।।

एक माँ बेटे का रिश्ता, वहीं ख़तम हो जाता।।

हो सकता था, मुँह बंद रखने के लिए या पकड़े जाने के डर से अंकल मुझे या मम्मी को कुछ नुकसान भी पहुँचा देते।।

भले ही ये बात इतनी ख़ास ना हो, पर पूरी जिंदगी में मेरी मम्मी मुझसे कभी नज़र नहीं मिला पाती।।

और, एक मिनट के लिए ये भी सोचिए अगर मुझे, उनके बेटे को, अपनी जिंदगी “नर्क सी” लग रही थी तो मेरे पापा का क्या हाल होता, सुनने पर।।

मैं सच में कमजोर नहीं था, दोस्तो।।

बस एक परिवार को, एक घर को, बिखरने से रोक रहा था।।

आप में से कई लोग क्राइम पेट्रोल, सावधान इंडिया, जैसे सीरियल देखते होंगें।।

ज़्यादातर क्राइम, “औरत की बेवफ़ाई” और “पैसे” के लिए होते हैं।।

मैं नहीं चाहता था की मेरे घर में, ऐसा कुछ हो।।

मैं आज कल दिन रात, सोचता रहता था।।

इन सारी परिस्थिति को जानने के बाद भी आख़िर कार, मैंने फ़ैसला किया और मैंने तय कर लिया की अब मैं मम्मी पर नज़र रखूँगा और पापा से ये बात कह दूँगा।।

बात ये थी की खोजबीन करने और श्लोक के घर जाकर, अंकल के कमरे के बाहर छुप कर उनकी बातें सुनने और पहले ही दिन अंकल और उनके दोस्तों की बातें सुनने से, मुझे ये तो पता चल गया था की मेरी मम्मी पहली औरत नहीं थीं जिनको अंकल ने चोदा है या चोद रहे हैं, बल्कि उनकी और उनके दोस्तों की फ़ितरत ही ये थी।।

शायद आपको याद हो उनका दोस्त, वो पार्टी वाला, जो मम्मी को चोदना चाहता था और अंकल ने भी थोडा इंतेज़ार करने को कहा था।।

मैं नहीं चाहता था की मेरी मम्मी, उन सब की “रखैल” बने।।

मम्मी, पूरी तरह से अंकल के जाल में फँस चुकी थीं।।

हमेशा फोन पर उनके साथ रहना, मैसेज पर देर रात तक चैटिंग करना।।

मुझे याद है, आज जो घटना मैंने देखी थी उसके दो दिन पहले, मैंने मम्मी का मोबाइल चेक किया था।।

3 बजे सुबह तक, दोनों की बातचीत थी।।

मेरी मम्मी जिस सड़क पर चल रही थीं, वो सिर्फ़ “वैश्यालय” पर, ख़तम होती थी।।

कभी कभी तो मैं मम्मी का अंजाम सोच कर ही, काँप जाता था।।

अंकल मम्मी के सामने तो किसी “देव मूरत” के कम नहीं थे पर उनका असली चेहरा, कितना “घिनोना” था, ये सिर्फ़ मैं ही जानता था।।

अगर, मेरे पापा पूरब थे तो अंकल पश्चिम।।

और ऐसे बहरूपीए के लिए, मेरी माँ ने मेरे पापा की पीठ में खंजर घुसा दिया था।।

खैर.. !!

शाम को 5 बजे, मम्मी सो के उठीं और चाय बना कर लेके आईं।।

मैं उस समय, पढ़ रहा था।।

मैं चुप था।।

मम्मी ने पूछा – क्या हुआ.. !! आज जब से आया है, चुप है.. !! खोया खोया भी रहता है, आज कल.. !! बात क्या है.. !!

मैंने कहा – कुछ नहीं.. !!

मम्मी ने कहा – क्या हुआ बोल ना, बेटा.. !!

उनके मुँह से बेटा सुनते ही, ना जाने क्यूँ मेरा खून खोल उठा।।

मैंने अपने उपर संयम रखते हुए कहा – कुछ नहीं हुआ, मम्मी.. !! पढ़ने दो, बस.. !!

मम्मी 10 मिनट, बैठीं रहीं।।

मैं बीच बीच में, तिरछी नज़र से देख रहा था।।

वो, मेरी ही तरफ देख रही थीं।।

कुछ देर बाद उन्होंने खड़ी होके, मेरे सिर पर हाथ फेरा और कमरे से निकल के उन्होंने जाते जाते, मेरे कमरे का दरवाज़े चिपका दिया।।

मैं पढ़ने लगा या कहिए, कोशिश करने लगा।।

मम्मी ने, टीवी चला ली।।

मैं आधे घंटे तक, अपने कमरे में था।।

उसके बाद, बाहर आया।।

मम्मी, सोफे पर नहीं थीं।।

टीवी, चल रहा था।।

मम्मी हॉल वाले, बालकनी में थीं और फोन पर बात कर रही थीं।।

मुझे लगा, अंकल का फोन है।।

मैं उधर जाने लगा, बात सुनने के लिए।।

मैं कुछ दूर गया था की मम्मी ने बालकनी का दरवाज़े खोल दिया और कहा – प्रणव, पापा से बात करो.. !!

चलो, आज मेरा शक ग़लत था।।

उस समय, फोन पर पापा थे।।

पापा ने पूछा – क्या हुआ, मेरे बच्चे.. !! मम्मी कह रही हैं, तुम कुछ बोल नहीं रहे हो.. !!

मैंने कहा – कुछ नहीं हुआ है, पापा.. !! बस, थोड़ा थका हुआ हूँ.. !! और फिर मैंने, फोन मम्मी को दे दिया।।

पता नहीं क्यों, मैंने पापा से कुछ नहीं कहा।।

ये बात, मुझे आज तक समझ में नहीं आई।।

अगले दिन, मैं सुबह उठ के स्कूल चला गया।।

मैं जानता था की मेरे दोस्त के पापा, मेरी मम्मी को चोद रहे होंगे लेकिन मैं क्या कर सकता था।।

वो मेरी मम्मी की इज़्ज़त नहीं लूट रहे थे, मम्मी अपनी मर्ज़ी से उनके नीचे लेट रही थीं।।

उस दिन मैं घर पहुँचा, शाम के समय।।

स्कूल के बाद, ना जाने कहाँ कहाँ घूमता रहा।।

मेरी मम्मी, बगल वाली आंटी के यहाँ गई थीं।।

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