भाभी ने कराई मेरी चुदाई

रात के 2 बज रहे हैं और मैं कंप्यूटर टेबल के सामने कुर्सी पर नंगीबैठ कर, ये कहानी आप लोगों के लिए लिख रही हूँ।
कमरे के, सब लाइट्स बंद हैं।
क्या कर रही है,  डॉलीमेरे भाई जय ने, अपने लण्ड से कंडोम निकालते हुए पूछा..
अपनी कहानी लिख रही हूँ, मेरी सेक्स स्टोरी की कामिनी को भेजने के लिएमैंने टाइप करते हुए, जवाब दिया..

जय मेरे पीछे आ गया और मेरे दोनों कंधों पर हाथ रख के, धीरे धीरेसहलाने लगा और कंप्यूटर स्क्रीन पर देखते हुए बोला बढ़िया हैबस,अपने शहर के बारे में मत लिखना
मैंने, हाँ में जवाब दिया।
मैं सोने जा रहा हूँदरवाज़ा बंद कर लेभाई ने अपने कमरे में जाते हुए कहा..
ये दरवाज़ा, मेरे और भाई के कमरे के बीच का दरवाज़ा है.. जिसकी कुण्डी,मेरे कमरे में है और दोनों कमरे का मुख्य दरवाजा अलग है..
मम्मी पापा के ख़याल में, ये दरवाजा कभी नहीं खुलता।
परंतु असल में, ये दरवाजा किसी किसी रात में कुछ घंटे के लिए खुलता हैऔर कभी मैं भाई के बिस्तर में चली जाती हूँ तो कभी भाई, मेरे बिस्तर में आ जाता है!! !!
उसके बाद का वक़्त, हम नंगेएक दूसरे के साथ बिताते है!! !!
इस वक़्त, मैं 22 साल की हूँ और एक इंटरनेशनल कॉल सेंटर में काम करती हूँ।
ये मेरी नौकरी का, पहला साल है।
मैं एक स्लिम फिगर की गोरी लड़की हूँ.. लंबाई लगभग 55.. बाल और आँखें काली और जिसे जानने में मेल रीडर्स को सबसे ज़्यादा दिलचस्पी होगी, यानी मेरा फिगर, वो है लगभग – 32-26-34..
जय, मेरा भाई मुझसे एक साल बड़ा है और एक बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी में इंजिनियर है।
उसकी लम्बाई है, लगभग 59 और बदन सामान्य है।
मेरे पापा सरकारी नौकरी में हैं और मम्मी, हाउसवाइफ हैं।
यानी कुल मिला कर, एक सामान्य भारतीय परिवार।
हम एक डुप्लेक्स में रहते हैं।
ग्राउंड फ्लोर पर, मम्मी पापा का कमरा है और ऊपर मेरा और भाई का.. जो अंदर से, एक दरवाज़े से मिला हुआ है..
आम तौर पर, घर में 10:30 तक सब खाना खा के अपने अपने कमरे में चले जाते हैं।
आज रात भी सब नॉर्मल टाइम पर, अपने अपने कमरे में जा चुके थे।
मैं आधी नींद में थी की लगभग 11:45 को, मेरे फोन की मैसेज टोन बजी।
मूड हैये, जय का मैसेज था..

मैंने मैसेज डिलीट किया और अपनी नाईटी उतार दी।
अब मैं ब्रा पैंटी (सफेद रंग की) में थी!! !!
फिर, मैंने दरवाजा खोला तो भाई पूरा नंगा था..
वो मेरे कमरे में आ गया और आते ही, भाई ने मेरे हाथ में कंडोम पकड़ा दिया और मुझसे लिपट गया।
मेरे गर्दन पर चुम्मियों की बारिश करने लगा और मैं तुरंत ही, गरम होने लगी।
चुम्मियों के साथ साथ ही, उसने ब्रा का हुक खोल दिया और मैंने अपनी पैंटी उतार दी।
अपने सगे भाई के सामने पूरी नंगी होकर, मैंने कंडोम का पाउच दाँत से फाडा और कंडोम निकाल के टेबल पर रख दिया।
अब जय, मुझे लीप किस करने लगा और मैं भी उतेज्जना में उसका बराबर साथ दे रही थी!! !!
जय के दोनों हाथ, मेरी नंगी गाण्ड पर थे और उसने मुझे अपनी तरफ दबाया हुआ था।
मेरे दोनों हाथ, जय की पीठ पर थे और मेरे मम्मे उसके सिने पर।
उसका लण्ड, मेरी चूत पर टच हो रहा था, जिससे मैं पागल हो रही थी..
फिर थोड़ी देर, मुझे यूँही होंठों पर चूमने के बाद, उसने मुझे उल्टा कर के खुद से चिपका लिया।
अब उसका खड़ा हुआ एकदम कड़क लण्ड, मेरी नरम गाण्ड पर टच हो रहा था और उसका एक हाथ, मेरे एक दूध पर था और दूसरा चूत के मुहाने पर।
उसने मेरे कान के पास किस करना शुरू किया और चूत को सहलाने लगा।
थोड़ी देर मेरी चूत सहलाने के बाद, उसने मेरा एक पैर पलंग के किनारे पर रख दिया और मुझे आगे की तरफ झुका दिया।

मैंने टेबल पर हाथ रख, सहारा लिया और टेबल से कंडोम उठा के उसके लण्ड पर चढ़ाया।
वो तुरंत अपने लण्ड को, मेरी चूत के होंठों में ऊपर नीचे रगड़ने लगा।
फिर एक झटके में अंदर डाल दिया!! !!
उमहहस्समेरे मुंह से आवाज़ निकल गई..
फिर उसने दोनों हाथों से, मेरी कमर को पकड़ा और ज़ोर ज़ोर से मेरी चूतचोदने लगा और मैं उतेज्जना में, सिसकारियाँ लेने लगी उम्ह अंह अंह इस्स स्स्स्स्स फूः ह ह ह ह ह ह ह याह आ अ अअअ आआहहह
थोड़ी देर बाद, मैंने अपना दूसरा पैर भी बिस्तर पर ले लिया और डॉगी स्टाइलमें आ गई।
भाई ने चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी और मैंने बिस्तर पर बिछे चादर को, पूरी ताक़त से पकड़ लिया..
कुछ ही पलों में फिसस इनमह इनयन्हकी आवाज़, उसके मुंह से आई और वो मेरी चूत में झटके मारता हुआ झड़ गया।
मैं तो अब तक, 2-3 बार झड़ चुकी थी..
हम दोनों बिस्तर पर लेट गये और मैंने घड़ी देखी तो 12:15 बज रहे थे।

हम गहरी गहरी साँसों के साथ, बिस्तर पर चुपचाप नंगे लेटे हुए थे।
अचानक पड़े पड़े, मैं अपने पुराने दिनों के ख़यालो में चली गई और उन दिनों को याद करने लगी, जब मैं एक सीधी साधी, शरीफ लड़की थी।
उन दिनों को याद करके, मेरी आँखों में आँसू आ गये।
मैंने अपना चेहरा अपने भाई से छुपाया और आँसू पोंछ के, कंप्यूटर चालू करने के लिए उठी।
अब तक, 1 बज गये थे और नींद भी अब पता नहीं कहा चली गई थी।
मैं पिछले कुछ महीनों से, मेरी सेक्स स्टोरी पर कहानियाँ पढ़ रही थी औरमजबूरी या मज़ा, चूत का इंटरव्यू और आँखों के सामने चुदी मेरी माँ, जैसीकहानियाँ पढ़ कर, मेरा मन भी अपनी कहानी लिखने का होने लगा था।
एक सीधी सादी, शरीफ लड़की से अपने भाई से चुदने वाली एक रांड़ तक की मेरी आप बीती… …
अगस्त, 2008…
मैं बारहवीं में थी, 17 साल की और जय 18 का था.. पहले साल,इंजिनियरिंग में..
हम दोनों का रिश्ता भाई बहन के साथ साथ, एक अच्छे दोस्त का भी था।
बचपन से ही, हम सारी बातें शेयर किया करते थे (अब भी करते हैं) और काफ़ी हँसी मज़ाक भी करते थे।
उन दिनों, भाई का अफेयर उसी की क्लास की एक लड़की के साथ शुरू हुआ शब्दिता..
18 साल की, बहुत सुंदर लड़की थी..
उसने मुझसे, उसकी सारी बातें शेयर की तो मैंने उससे पूछा सीरीयस है या बस एवइयन
उसने कहा यार, अभी तक कुछ नहीं पता है
धीरे धीरे, वो दोनों कॉलेज के बाहर भी मिलने लगे और घूमने फिरने लगे।
जब भी जय तैयार हो के बाहर जाता तो मैं समझ जाती थी कि वो कहाँ जा रहा है।
फिर, उसके आने के बाद मैं उसे चिढ़ाती और पूछती आज क्या क्या किया, अपनी माशुका के साथ
अक्सर, वो मुझे एवइयन टाल देता था।
नवंबर, 2008…
एक शाम को जय लौटा तो मैंने उससे चिढ़ाने के अंदाज़ में पूछा कहाँ से आ रहा है
और हमेशा की तरह, वो टाल गया।
उसी रात, वो मेरे कमरे में आया (मुख्य दरवाज़े से) और मुझसे कहने लगारूप, एक घंटे के लिए तू मेरे रूम में चली जामुझे कंप्यूटर पर कुछ काम है
मैंने बोला ऐसा क्या काम है, तुझे जो मेरे सामने नहीं कर सकता
उसने कहा बाद में बता दूँगाअभी जापर, मैं कहाँ मानने वाली थी..
मैं, फिर बोली पहले बता
उसने टालने की कोशिश की, पर मैं ज़िद पर अड़ी रही।
फाइनली, उसने कहा देख तू जाएगी तो मैं तुझे बताऊंगा, आज मैंने शब्दिता के साथ क्या क्या किया
मैं उतेज्जित हो गई और उससे पूछने लगी बता ना, प्लीज़

वो बोला आज, मैंने उसको होंठों पर चूमी ली
मुझे सुन कर, बहुत मज़ा आया और मैं पूछने लगी और बता ना
लेकिन, पर अब वो नहीं बता रहा था और फिर झला कर बोला मत जा तूमैं अपने रूम में ही जाता हूँ
मैंने उसे रोका और उसके रूम में चली गई।
एक घंटे बाद, वो वापस आया तो मैंने पूछा अब तो बता दे, ऐसा कौन सा काम कर रहा था
उसने कहा बोला ना रूप, कुछ नहीं
मैं अपने रूम की तरफ चली पर जैसे ही, दरवाज़े से बाहर निकली तो मुझे कुछ रखने की आवाज़ आई।
जब मैंने पलट के देखा तो जय ने एक सीडी (एक प्लास्टिक कवर में) अपने शर्ट के अंदर से निकाल कर, टेबल पर रखी थी।
मैं दौड़ के गई और तुरंत, वो सीडी उठा के देखने लगी।
सीडी के ऊपर, नंगी लड़कियों की तस्वीर थी।
मैं उसकी तरफ पलटी और बोली जय, तू ब्लू फिल्म देख रहा था
उसने, हाँ में सिर हिलाया।
फिर, मैं बोली आज ज़रूर चुम्मी से कुछ ज़्यादा ही कर के आया हैतभी उतावला है, इतना
मम्मी पापा को बता देने की धमकी देने पर, उसने बताया की वो लोग एक पार्क में गये थे.. जहाँ, उसने शब्दिता के मम्मे खोल के दबाए और उसके निप्पल चूसे..
मैंने हैरानी से पूछा और वो मान गई, इसके लिए

तो उसने कहा इसमें क्या हैहो तो और भी बहुत कुछ सकता था, पर जगह ठीक नहीं थी

ये उसका फर्स्ट टाइम था और उस दिन क बाद से चुम्मियाँ और दूध दबाना और निप्पल चूसना, उनका रोज़ का काम हो गया।
बीच बीच में, जय मुझसे ये सब शेयर किया करता था।
अब, वो ब्लू फिल्म भी रेग्युलर बेसिस पर देखने लगा था।
उसने, हाँ में सिर हिलाया।
फिर, मैं बोली आज ज़रूर चुम्मी से कुछ ज़्यादा ही कर के आया हैतभी उतावला है, इतना
मम्मी पापा को बता देने की धमकी देने पर, उसने बताया की वो लोग एक पार्क में गये थे.. जहाँ, उसने शब्दिता के मम्मे खोल के दबाए और उसके निप्पल चूसे..
मैंने हैरानी से पूछा और वो मान गई, इसके लिए
तो उसने कहा इसमें क्या हैहो तो और भी बहुत कुछ सकता था, पर जगह ठीक नहीं थी
ये उसका फर्स्ट टाइम था और उस दिन क बाद से चुम्मियाँ और दूध दबाना और निप्पल चूसना, उनका रोज़ का काम हो गया।
बीच बीच में, जय मुझसे ये सब शेयर किया करता था।
अब, वो ब्लू फिल्म भी रेग्युलर बेसिस पर देखने लगा था।

जनवरी, 2009…
एक रात, जय मेरे रूम में आया और कहने लगा की उसे मेरी मदद चाहिए।
मेरे पूछने पर, उसने बताया की मैं शब्दिता को अपनी सहेली बना कर, घर में ले आऊँ और पढ़ाई के बहाने से, उसे रात भर घर में रखूं।
मैं उसकी नियत समझ गई और बोली ब्लू फिल्म देख देख के, तेरा दिमाग़ खराब हो गया हैकुछ भी सोचने लगा हैमैं ये काम नहीं करूँगी
पर उसके सिर पर तो भूत सवार था।
उसने बताया शब्दिता, तैयार हैवो अपने घर से बहाना बना के आ जाएगीसिर्फ़, तू मान जाए तो काम बन जाएगा, हमारा
पर, मैं नहीं मानी।
महीने के आख़िर में, उनके कॉलेज की ट्रिप जा रही थी।
जय का तो जैकपोट लग गया था।
दोनों ने अपने अपने घर से ट्रिप की पर्मिशन ले ली पर ट्रिप पर ना जा कर,कहीं और चले गये और 4 रात, 5 दिन दोनों ने जी भर के चुदाई की।

ट्रिप से आने के बाद, जय बहुत खुश था और उसने मुझे बताया भी की उसने मैदान मार लिया।
मुझे ये पसंद नहीं आया पर मेरे हाथ में था भी क्या।
मार्च में, मेरे बारहवीं के बोर्ड के पेपर थे तो मैंने पढ़ाई पर धयान देना ज़रूरी समझा..
मार्च, 2009…
मेरे पेपर ख़त्म हो चुके थे और मैं घर में ही रहती थी।
ज़्यादा कहीं, आना जाना नहीं होता था।
जय और शब्दिता का अफेयर ज़ोरो में चल रहा था और दोनों के बीच चुदाई भी।
एक बार, मम्मी ने बताया के वो और पापा आउट ऑफ टाउन जा रहे हैं,किसी रिश्तेदार के यहाँ।
जब वो चले गये, तब जय ने मुझे बताया शब्दिता, आज रात यहाँ आने वाली है
मैंने उससे कुछ भी नहीं कहा, क्यूंकि मैं जानती थी के वो यहाँ क्यों आ रही है।
करीब 8 बजे, वो आई।
जय ने, हमारा परिचय करवाया।
फिर, हम हॉल में बैठ के बातें करते रहे।
थोड़ी देर में, मुझे एहसास होने लगा की मैं दोनों के बीच काँटा बनी हुई हूँ तो मैंने उनसे कहा मुझे नींद आ रही है और मैं सोने जा रही हूँ
मैं अपने कमरे में आ गई और दरवाजा बंद कर लिया, पर मुझे नींद नहीं आ रही थी और बुरा भी नहीं लग रहा था, बल्कि मैं उतेज्जित फील कर रही थी।
कुछ देर बाद, मैंने जय के कमरे का दरवाजा बंद होने की आवाज़ सुनी।

मेरा दिल, उनके बारे में सोच सोच के ज़ोरो से धड़कने लगा।
मैंने ऐसा इससे पहले, कभी महसूस नहीं किया था।
मैं ये देखना चाहती थी के वो दोनों क्या कर रहे हैं पर हमारे बीच के दरवाजा में कोई होल नहीं था और कोई और रास्ता भी नहीं था।
दरवाजा खोलने की मेरी हिम्मत नहीं हुई।
बस दरवाज़े पर कान लगाने पर, शब्दिता की सिसकारियों की आवाज़ धीरे धीरे मुझ तक आ रही थी।
मैं बिस्तर पर लेट के, उनके बारे में सोचने लगी।
मेरा हाथ अपने आप मेरी पैंटी क अंदर चला गया और मैं धीरे धीरे, अपनी चूत सहलाने लगी।
आज पहली बार, मुझे लग रहा था चूत का काम सिर्फ़ पेशाब निकालना नहीं है।
एक अजीब सा भारीपन था मेरी चूत में.. एक अलग सा, खिचाव था और ऐसा लग रहा था जैसे कुछ मेरी चूत के अंदर चला जाए..
मेरी चूत से पानी सा निकल रहा था पर मैं जानती थी, ये मेरा पेशाब नहीं है।
मुझे एक नशा सा छाने लगा और इसी नशे में कब मेरी आँख लग गई, मुझे पता भी नहीं चला।
अप्रैल, 2009…
शब्दिता के बड़े भाई को, उसके और जय के अफेयर के बारे में पता चल गया। उन्हीं के एक क्लासमेट के ज़रिए।
वो ये भी जान गया के शब्दिता, जय के साथ कई बार चुद चुकी है।
उसके भाई और उसके दोस्तो में और जय और उसके दोस्तो में, मार पीट भी हुई।
जिसका परिणाम, ये निकला के जय और शब्दिता का ब्रेकअप हो गया!! !!

जुलाई, 2008…
मैं एक कॉलेज में बी कॉम में, दाखिला ले चुकी थी।
क्लास में, नये दोस्त बन चुके थे।
सब कुछ अच्छा चल रहा था।
माही नाम की एक लड़की, मेरी बहुत अच्छी दोस्त बन गई थी।
उसका अफेयर, फाइनल ईयर के एक लड़के, राहुल के साथ चल रहा था।
राहुल देखने में अच्छा स्मार्ट था और उसकी लम्बाई लगभग 6 फीट थी।
मैं कॉलेज में, ज़्यादातर माही के साथ ही रहती थी।
जब वो अपने बाय्फ्रेंड से मिलने जाती तो मैं भी उसके साथ जाती।
वो पढ़ने में भी अच्छा था और हम दोनों को स्टडी रिलेटेड टिप्स भी दियाकरता था और वक़्त बेवक़्त, हम दोनों को रेस्टोरेंट में ले जाता और खिलतापिलाता था।
कुल मिला कर, लाइफ अच्छी चल रही थी।
ऐसे ही दिन, मस्ती में गुज़र रहे थे।

हमारे कॉलेज का वक़्त, सुबह 7 से दोपहर 1 बजे तक था।
उसके बाद, हम दो तीन घंटे कॉलेज में ही मटरगस्ती करते या कभी कभी कहीं बाहर चले जाते, घूमने फिरने या मूवी देखने।
शाम होने से पहले, मैं घर वापस चली जाती।
माही, मेरे घर आया जाया करती थी और मेरी मम्मी उसे पसंद भी करती थीं।
पापा, कभी कभी यूँही पढ़ाई को लेकर डांट दिया करते थे पर मम्मी उन्हें संभाल लेती थीं।
जय तो हर सही ग़लत में मेरे साथ, बचपन से ही था।
सितम्बर, 2009…
एक दिन कॉलेज ख़त्म होने के बाद, राहुल ने माही और मुझे रेस्टोरेंट में बुलाया।
हमेशा की तरह, हम दोनों वहाँ पहुँचे और देखा के आज राहुल के साथ एक और लड़का है।
हम दोनों, टेबल के पास पहुँचे।
राहुल ने हमारा परिचय करवाया ये मेरा दोस्त है, राज
हाय राजमाही ने कह के, उससे हाथ मिलाया और खुद का परिचय दिया।
बदले में, उसने हेलोकहा।
फिर, मैंने राज से हाथ मिलाया और खुद का परिचय दिया।
फिर, हम टेबल पर बैठ गये और हँसी मज़ाक करने लगे।
ऑर्डर भी दे दिया।
ऑर्डर आने के बाद, हम खाते रहे और हँसी मज़ाक चलती रही।
राज, मुझे एक अच्छा लड़का लगा.. उसकी लम्बाई 59 थी और दिखने में काफ़ी स्मार्ट था..
उसका सेन्स ऑफ ह्यूमरभी बहुत अच्छा था।
किसी भी बात में, वो एक मज़ाकिया एंगल निकाल लेता और हम सब हँसने लगते।
कुछ दिनों में, राज भी हमारे ग्रूप का हिस्सा बन गया।
राहुल, माही से ज़्यादा बातें किया करता था और राज, मुझसे।
मेरे अंदर राज के लिए, फीलिंग्स डेवलप होने लगी।
वो फीलिंग, जो मुझे महसूस हुई थी जब शब्दिता और जय, एक ही कमरे में थे!! !!

14 अक्टूबर, 2009…
मैं और माही, कॉलेज के बाद फिर उसी रेस्टोरेंट में गये.. जहाँ, अक्सर जाया करते थे.. मगर, आज कुछ अलग था..
राहुल, अलग टेबल पर बैठा और राज अलग टेबल पर।
माही, राहुल के सामने बैठ गई और मुझे राज के टेबल पर बैठने को कहा।
मैंने कारण पूछा तो उसने बोला अभी पता चल जाएगा, मेरी बिलो रानीतू जा तो
मैं राज के सामने बैठ गई।
राज मुझे आज, प्यार भरी नज़रों से देख रहा था।
उसकी नज़र से, मैं नज़र नहीं मिला पा रही थी।
मेरी नज़रें शरम से झुक गई।
आई लव युराज ने, धीरे से कहा..
मेरा दिल, ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था।
ऐसा लग रहा था, जैसे मेरा दिल, सीना चीर के बाहर आ जाएगा।
मैं कुछ ना बोल पाई।
मेरी तरफ तो देखोराज ने फिर, धीरे से कहा..
पर, मैं नज़रें नहीं उठा पा रही थी।
मेरा चेहरा, लाल हो चुका था।
मैं अपनी शरम को कंट्रोल करना चाहती थी, पर नहीं कर पाई।
राज ने एक बड़ा चॉकलेट पैक और एक लाल गुलाब टेबल पर रख दिया और बोला अगर, तुम्हारा जवाब हाँ है तो इसे चुप चाप उठा लो
मैं वो भी नहीं कर पा रही थी और काफ़ी देर तक खामोशी से बैठी रही।
जब जाने के लिए माही उठी तो मैंने धीरे से वो चॉकलेट पैक और गुलाब उठा लिया और बिना राज को देखे, वहाँ से चली गई।

22 अक्टूबर, 2008…
(लवरस पार्क)
अब तक हमारी, चार पाँच मुलाक़ाते हो चुकी थीं और आज कॉलेज के बाद, राज ने मुझे अकेले एक पार्क में बुलाया था।
ये एक बहुत फेमस गार्डेन था।
पेड़ और पौधे इतने थे के इसमें सीक्रेट प्लेससबहुत थे।
जिसका आनंद कपल्स किया करते थे और इसी लिए इसे लवरस पार्ककहा जाता था।
मैं पार्क में पहुँची तो राज, मेरा इंतेज़ार कर रहा था।
मुझे याद है, उस दिन मैंने लाल टी-शर्ट और नीली जीन्स पहनी थी।
अंदर मैंने काली ब्रा और काली ही थोंग (जीन्स के नीचे पहने जाने वाली,पैंटी) पहनी थी.. हालाकी, मुझे मालूम था की कम से कम आज तो वो राज को नहीं दिखने वाली थी।
खैर, राज मुझे ले के पार्क के कोने में गया और हम एक पेड़ के नीचे बैठ गये।
ये हिस्सा इतना घना था के आस पास का कुछ भी नज़र नहीं आ रहा था।
राज, मेरी गोद में सिर रख के लेट गया और हम बातें करने लगे।
मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा थे।
ना जाने क्यूँ, मेरी चूत में उस दिन जैसा ही भारीपन था और निप्पल भी बेहद संवेदनशील हो गये थे।
बात करते करते, राज ने एक हाथ मेरे पीछे से कमर में लपेट लिया।
मैं उसके बालों में, हाथ घुमा रही थी।
थोड़ी देर बाद, वो उठ के बैठा और प्यार भरी नज़रों से मुझे देखने लगा।
मैं फिर शरमाने लगी और सन्नाटे में, मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा।
मेरी चूत पे, दबाब सा महसूस होने लगा और निप्पल इतने कड़े हो गये की मैं अपनी ब्रा में उन्हें महसूस करने लगी!! !!
धीरे धीरे, राज मेरी तरफ बढ़ा।
जैसे ही, वो मेरे एक दम करीब आ गया, मैंने अपनी आँखे बंद कर लीं।
कुछ देर बाद, उसके होंठ मैं अपने होठों पर महसूस कर रही थी।
मैं अपनी लाइफ की पहली किसकर रही थी!! !!
ये किस बहुत लंबी थी..
उसने किस करते करते ही, मुझे ज़मीन पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर आ गया।
अब उसने एक हाथ से मेरी टी-शर्ट ऊपर कर दी और पेट सहलाने लगा।
जैसे ही उसका हाथ, मेरे नंगे पेट और नाभि के पास पड़ा उसी दिन की तरह मेरी चूत से एक हल्की सी धार सी निकलती महसूस हुई..
मुझ पर, अब नशा पूरी तरह छा चुका था।

मेरे निप्पल और चूत कुलबुला रहे थे और राज को मेरी तरफ से कोई रुकावट नहीं थी।
फिर, राज धीरे धीरे टी-शर्ट के अंदर से हाथ ऊपर सरकाने लगा।
कुछ ही देर में, उसका हाथ मेरी ब्रा के अंदर था।
जैसे ही उसका हाथ मेरे नंगे दूध पर पड़ा और मेरी निप्पल उसकी उंगलियों से टकराई, एक बार फिर मेरी चूत से हल्की सी धार निकलती हुई महसूस हुई।
मुझे महसूस हुआ, मेरी थोंग गीली हो चुकी है और मेरी चूत के होंठों के बीच घुस गई है..
इधर, अब वो मेरे दूध दबा रहा था, सहला रहा था और मुझे चूमे जा रहा था।
कुछ 10-12 मिनट बाद, ये सब बंद हुआ।
सच कहूँ, जब राज उठा तो मुझे बहुत गुस्सा आया।
खैर, राज और मैं उठे और मैंने अपने कपड़े ठीक किए।
फिर, मैं घर चली गई पर पार्क का नशा मुझ पर छाया हुआ था।
मेरी चूत कुलबुला सी रही थी.. बस कुछ भी लेकर, अपनी चूत में घुसेड लेने का मन कर रहा था..
उस रात, मैं पहली बार रात को पूरी नंगी होकर सोई।
रात भर, मेरा एक हाथ मेरी चूत के आस पास ही था।
सुबह चादर पर, हल्के हल्के सफेद निशान थे.. ..
अभी तक, मैंने जय को अपने अफेयर के बारे में कुछ भी नहीं बताया था।
मैं चाहती थी के जो पार्क में हुआ, उससे कुछ ज़्यादा होना चाहिए था पर पार्क जैसी जगह में, इससे ज़्यादा हो भी क्या सकता था।

उस दिन के बाद से, मेरा और राज का मिलना और बढ़ गया।
हम ज़्यादातर पार्क में मिलते और कभी कभी, मूवी भी देखने जाया करते थे।
अब हमारे बीच में चुदाई और ब्लू फिल्म्स की बातें भी होने लगी थी, जिसे मैं बहुत एंजाय करती थी।
मैं अब ज़्यादातर, नंगी ही सोने लगी थी!! !!
चूत का सहलाना, अब रगड़ने में बदल गया था!! !!
मैं अक्सर पेन या पेन्सिल, अपने चूत के होंठों पर रगड़ने लगी थी।
नहाते वक़्त, कभी नल के ऊपर अपनी चूत रगड़ती तो कभी टूथ ब्रश अपनी चूत पर रगड़ती।
कुछ दिन तक, ऐसे ही चलता रहा।
जवानी का नशाक्या होता है और ये कैसे चढ़ता है, मुझे समझ आ गया था।
राज ने अब तक मेरी चूत एक बार भी नहीं देखी थी पर जब भी मैं उससे मिलती, “लो वेस्ट जीन्सपहनती।
ज़्यादातर, अंदर थोंग या पैंटी नहीं पहनती थी और अंदर नंगी रहती थी।
और एक दिन, राज ने फिर से मुझे उसी पार्क में बुलाया.. ..

24 नवंबर, 2008…
आज मैंने एक शर्ट पहनी, जिस पर चेक्स बने हुए थे और लो वेस्ट जीन्स पहनी।
शर्ट के अंदर, सिर्फ़ स्लिप पहनी।
ब्रा नहीं पहनी ताकि राज को हाथ अंदर डालने में आसानी हो।
थोंग या पैंटी भी नहीं पहनी.. जिससे, मेरी गाण्ड पर जीन्स की फिटिंग देख कर राज को मज़ा आए।
फिर, मैं कॉलेज के बाद पार्क में पहुँच गई जहाँ राज मेरा पहले से इंतेज़ार कर रहा था।
हम अपनी जगह पर जा कर, बैठ गये।
कुछ देर बातें करने के बाद, राज ने मुझे लीप किस किया और फिर राज पैर लंबे कर के बैठ गया।
मैं उसकी जांगों पर, सिर रख के लेट गई।
अरे वाह!! आज ब्रा नहीं पहनीराज ने मेरे शर्ट के ऊपर से, दूध पर हाथ रखा और बोला..
बोलो तो अगली बार से, पहन कर आऊँगीमैंने चिढ़ाते हुए, उसे जवाब दिया..
अरे नहीं, ऐसे ही आया कर यारराज, अब अपना हाथ मेरे मम्मे पर गोल गोल घुमा रहा था..
अच्छा पैंटी पहनी है या नहींउसने अब मेरी शर्ट के दो बटन खोल दिए।
हाँमैंने झूठ बोल दिया..
वो भी नहीं पहनती नामेरी स्लिप की स्लीव को, मेरे कंधे से हटाते हुए उसने बोला..
क्योंअब जीन्स भी उतारोगे क्या यहाँ परमैंने उसे देखते हुए पूछा..
क्योंनहीं उतारने देगीउसने कहा..

मेरी स्लिप की स्लीव कंधे से नीचे हो गई थी और राज ने मेरे नंगे दूध पर हाथ रख दिया।
उसका पंजा, मेरे पूरे मम्मे को कवर कर रहा था।
मेरे निपल्स, उसकी दो उंगलियों के बीच में थी।
उसने दूध को हल्का दबाया हुआ था और गोल गोल घुमा रहा था।
नहीं उतारने दूँगीजीन्स टाइट हैउतारुँगी और कोई आ गया तो,पहनने में तकलीफ़ होगीऔर मैंने अपनी स्लिप को और थोडा नीचे किया..
अरे, यहाँ सब कपल्स आते हैंकोई आया भी तो दूर से देख के दूसरी जगह चला जाएगाराज, अब तीसरा बटन खोल रहा था..
बस, पूरा मत खोलोमैंने उसका हाथ पकड़ लिया और बोली..
फिर राज ने मुझे बिठाया और नज़दीक आ के, होंठ पर किस करना लगा।
उसका हाथ, अभी भी मेरे दूध पर था।
अब वो किस करते करते, नीचे उतरने लगा।
कुछ देर तक गर्दन पर किस किया फिर दूध तक आ गया।
फिर निपल्स पर, ज़बान लगाने लगा।
अब मेरी चूत इतनी आसानी से धार नहीं छोड़ती थी.. लेकिन, मैं उसे पूरा सपोर्ट कर रही थी..
उसका सिर पकड़ के, अपनी तरफ खींच रही थी।
जब वो हटा तो मेरी स्लिप के स्लीव्स, दोनों कंधों से उतरे हुए थे और मेरी शर्ट भी कंधो से नीचे थी।
मैं पब्लिक पार्क में आधी नंगीथी!! !!
मैंने झट से अपने कपड़े और बाल ठीक किए, फिर नॉर्मल हो के बैठ गई।
फिर राज ने मुझे जीन्स खोलने के लिए कहा।
पागल हो क्यायहाँ नहीं खोलूँगीमैं थोड़ा गुस्से भरी आवाज़ में बोली।
मेरे फ्रेंड का एक घर है खाली, वहां चलेगी

ये सुनते ही, मेरा दिल धड़क गया और मन ही मन, मैं खुश हो गई पर ऊपर से दिखावे का नाटक करने लगी वहां क्या करने वाले हो, मेरे साथ
मैंने थोड़ी स्माइल के साथ, पूछा पर राज ने इसका जवाब नहीं दिया और बोला कल चलें
इस बार, मैंने कोई जवाब नहीं दिया और वो समझ गया।
फिर उसने मुझे जाने का रास्ता समझा दिया और मैं घर आ गई।
रात में, मैं अपने कमरे में पूरी नंगी लेटी थी और अपनी चूत सहलाते हुए आने वाले कल के बारे में, सोच रही थी।
तभी दरवाजे पर, खटखटाने की आवाज़ हुई।
मैंने झट से नाइटी पहनी और दरवाजा खोला।
क्या कर रही हैजय की आवाज़ आई।
मुझे थोड़ा सा गुस्सा आ गया।
क्या हुआ… – मैंने पूछा..
एक घंटा, मेरे रूम में लेट ना जा कर
उसने, कंप्यूटर चालू किया।
फिर ब्लू फिल्म ले के आया है
उसने इशारे में, हाँ कहा।
नाइटी के अंदर, मेरे पूरे नंगे बदन में आग लग गई और चूत मचल उठी..
एक शर्त पर जाउंगी… – मैंने जय से कहा..
वो मेरी तरफ पलटा क्याउसने झट से पूछा..
देखने के बाद पीसी में कॉपी कर देगा तो जाउंगीवो हैरत से, मेरी तरफ देखने लगा।
ऐसे क्या देख रहा हैसिर्फ़ तू ही देख सकता हैमैं नहीं देख सकती
थोड़ी देर सोचने के बाद, उसने भी हाँ कह दिया..
फिर मैं, जय के कमरे में चली गई।
जब जय वापस आया तो मैंने चिढ़ाते हुए पूछा कैसी थी, फिल्म
उसने कहा खुद ही देख लेऔर मुस्कुराते हुए, बाथरूम में घुस गया।
मैं भी हंसते हुए, अपने कमरे में आ गई और फिल्म देखने लगी।

फिल्म में, पाँच लड़के एक लड़की को चोदते हैं..
लड़की बड़ी आसानी से, एक लण्ड अपनी चूत में एक गाण्ड में और एक मुँह में लिए हुई थी।
बाकी दोनों लण्ड को वो अपने दोनों हाथों में लेकर, जोर जोर से मूठ मार रही थी और वो दोनों लड़की के एक एक चुचे को चूस रहे थे।
मुँह में लण्ड देने वाला लड़का, लड़की के मुँह को उसकी चूत और गाण्ड की ही तरह चोद रहा था।
मैंने अभी तक सेक्स स्टोरी तो बहुत पढ़ीं थीं पर ब्लू फिल्म पहली बार देख रही थी।
जब इतने बड़े बड़े लण्ड उस लड़की की चूत और गाण्ड में जा रहे थे तो वो ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ ले रही थी।
देखते देखते, मैं काफ़ी उतेज्जित होने लगी और डरने भी लगी क्यूंकी लण्ड इतना बड़ा होता है, मुझे नहीं मालूम था।
मैं सोच रही थी, जब लण्ड मेरी चूत में जाएगा तो मेरी छोटी सी चूत का क्या होगा।
मैंने तो अभी तक, पेन्सिल या पेन भी चूत में घुसाने की हिम्मत नहीं की थी।
पर इस डर के बाद भी, मुझे फिल्म देखने में मज़ा आ रहा था।
मेरी चूत फटने पर आ गई थी!! !!
मैं बहुत ज़ोर ज़ोर से अपनी चूत रगड़ने लगी और इस बार हल्की की जगह, बहुत ज़ोर से धार मेरी चूत से निकली और मेरी नंगी जांघों पर बहने लगी।

मेरे हाथ पैरों में अकड़न होने लगी और मुझे थोड़ी कमज़ोरी सी आने लगी तो मैंने फिल्म बंद कर दी और सोने चली गई।
रात भर, मुझे चुदाई के सपने आते रहे।
एक सपने में तो तीन लोग मिल कर, मुझे ब्लू फिल्म वाली लड़की की तरह चोद रहे थे।
25 नवंबर, 2009…
मैं अपने रोज़ के टाइम (6 बजे) पर उठ गई और फ्रेश होके और नाश्ता करके घर से निकल गई, कॉलेज जाने के लिए।
कॉलेज के बजाय, मैं सीधा बस स्टैंड पहुँची और जैसा राज ने बताया था मैं उस बस में बैठ गई।
मैंने अपनी क्लास की दोस्त माही को बता दिया था के आज मैं कॉलेज नहीं आउंगीतू संभाल लेना
राज ने मुझे स्टॉप का नाम, बता दिया था।
कुछ आधे घंटे के बाद, बस उस स्टॉप पर रुकी और मैं उतर गई।
मैंने आस पास देखा तो एक दम सुन सान एरिया लग रहा था।
रोड पर भी बस कुछ ही गाड़ियाँ चल रही थीं।
रोड के आस पास घने खेत थे दूर दूर तक।
वहीं साइड में राज बाइक ले कर, मेरा इंतेज़ार कर रहा था।
हमने एक दूसरे को हायकिया और फिर राज ने बाइक शुरू की और मैं पीछे बैठ गई।
मेन रोड से एक कच्चा रास्ता गया हुआ था।
राज ने बाइक, उसी रोड पर मोड़ ली।
मैंने लाल टी-शर्ट और काली जीन्स पहनी थी और अंदर काली ब्रा और काली थोंग।
बाइक खेतों के बीच से, कच्चे रास्ते पर चल रही थी।
करीब 20 मिनट के बाद, रास्ता ख़त्म हुआ और हम एक छोटे से फार्म हाउस टाइप घर के सामने खड़े थे।

उस घर में दो ही फ्लोर थे और घर के बाहर छोटा सा बगीचा था।
मेरे पूछने पर राज ने बताया के ये उसके एक दोस्त का घर है जहाँ वो लोगकभी कभार ही आते हैंज़्यादा टाइम, ये घर खाली रहता हैउसके पापा ने खेतों की रखवाली के लिए बनाया था और जो आदमी खेतों की रखवाली करता है वो यहाँ से आधे घंटे की दूरी पर, अपने परिवार के साथ रहता है
मैंने चारों तरफ देखा तो इसी टाइप के घर, बहुत दूर दूर पर बने हुए थे।
उसमें कोई था भी या नहीं, पता नहीं।
घर की चाबी, राज के पास थी।
उसने दरवाज़ा खोला और हम अंदर चले गये।
राज ने दरवाज़ा, अंदर से बंद कर दिया।
ग्राउंड फ्लोर पर किचन, हॉल और एक बेड रूम था और फर्स्ट फ्लोर पर 3बेड रूम थे।
हॉल में एक बड़ा सा टीवी लगा हुआ था।
अंदर आते ही, मैंने अपना कॉलेज बैग सोफे पर रख दिया।
राज अब तक, अपना शर्ट उतार चुका था।
उसने अपनी जीन्स के जेब से कंडोम का पैक निकाला और बेड रूम में चला गया।
फिर, उसने मुझे भी अंदर बुलाया।
मैं अंदर गई।
बेड रूम में एक डबल बेड था और दीवार पर, एक बड़ा सा आईना लगा हुआ था।
जिसमें, मैं पूरी नज़र आ रही थी।
मुझे समझ नहीं आ रहा था के ये खेतों की रखवाली के लिए बनाया गया था या उस काम के लिए, जिसके लिए आज मैं यहाँ आई हूँ..
अब राज, मेरे करीब आ गया और उसने दोनों हाथों से मेरी कमर पकड़ ली और अपनी तरफ खींचा।
मैं उसके गले लग गई।
उसने मेरी टी-शर्ट को ऊपर सरकाया और फिर हट गया।
फिर उसने अपने जीन्स की जेब से अपना मोबाइल निकाला और मेरी वीडियो रिकॉर्डिंग करने लगा।
मैं ये देख कर हैरान हुई और फ़ौरन, उसे बंद करने के लिए बोलने लगी।
वो रिक्वेस्ट करने लगा और कहने लगा प्लीज़, रूपसिर्फ़ मेरे देखने के लिए, कर रहा हूँ
मैं अपनी बात पर अड़ी रही और बोली अगर, तुम ये सब करने वाले हो तो मैं यहाँ से जा रही हूँ
फिर उसने मोबाइल बंद किया और सॉरी बोलने लगा।
मैं भी थोड़ी देर के बाद मान गई।
अब एक बार फिर से, राज मेरे नज़दीक आया और मेरे पीछे आ गया।
उसने दोनों हाथों से, मेरी कमर पकड़ी।
मैं आईने के बिल्कुल सामने खड़ी थी और अपने आप को देख रही थी।
वो मेरी टी-शर्ट ऊपर करने लगा और कमर और पेट पर हाथ घुमाने लगा।
साथ ही, वो मेरी गर्दन पर चुम्मियाँ ले रहा था।
उसकी गर्म गर्म साँसों से, मैं मदहोश हो रही थी।
अब उसने मेरा टी-शर्ट निकाल दिया।
फिर वो मेरी जीन्स की बटन खोलने लगा और थोड़ी ही देर में, मैं सिर्फ़ ब्रा पैंटी में थी।
मैंने अपने आप को इससे पहले, इस तरह कभी नहीं देखा था।
मुझे अजीब सी शरम आने लगी।
मैंने अपनी आँखे बंद कर लीं और राज को महसूस करने लगी।

वो मुझे पीछे से, किस किए जा रहा था।
थोड़ी देर बाद, उसने मेरी ब्रा खोल दी और कुछ ही देर में पैंटी भी उतार दी।
मैं बिल्कुल नंगी हो गई!! !!
अपनी जिंदगी में पहली बार, किसी और के सामने.. खास तौर से, किसी लड़के के सामने..
आज तो मेरी चूत से, लगातार हल्की हल्की धार बह रही थी।
मेरी जांघें गीली और चिपचिपी महसूस हो रही थीं।

राज ने अब मुझे गोद में उठा लिया और ले जा कर बिस्तर पर पटक दिया।
मेरी आँखे अभी भी बंद थीं।
कुछ देर बाद, वो मेरे ऊपर आया तो उसका लण्ड मुझे अपनी चूत के ऊपर महसूस हुआ।
वो अपना लण्ड मेरी चूत पर दबा के, मेरे ऊपर लेट गया।
इस्सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स… …
मैं बस, मचल के रह गई!! !!
उसने मुझे किस करना शुरू किया।
वो मेरे होठों को चूस रहा था और दोनों हाथों से दूध ज़ोर ज़ोर से मसल रहा था।
मेरे निप्पल इतने कड़क हो चुके थे की उनमें दर्द हो रहा था।
फिर उसने मुझे उल्टा लिटाया और मेरी गाण्ड पर चूमने लगा।
थोड़ी देर मेरी गाण्ड चूमने के बाद, उसने मेरे दोनों पैर फैला दिए और पीछे से मेरी चूत पर अपना लण्ड रगड़ने लगा।
वो ना जाने कब, कंडोम पहन चुका था।
अब उसने मुझे सीधा लिटाया और मेरे ऊपर आ गया।
पहली बार, मेरी आँखों के सामने नंगा लण्डथा!! !!
पूरा खड़ा हुआ और साँप की तरह फ़ुफ़कारता हुआ।
ये देख कर मुझे थोड़ी तसल्ली हुई की राज का लण्ड, ब्लू फिल्म वाले लड़कों से छोटा था।
अब मैं बुरी तरह से मचल उठी थी और मेरी चूत इतना पानी निकाल चुकी थी की पूछो मत।
मैंने तड़प कर, अपने पैर खुद ही फैला दिए।
राज ने फिर अपना लण्ड मेरी चूत पर रख के रगड़ना शुरू किया।
उफ़फ्फ़!!
मैं चाहती थी की बस उसका लण्ड किसी भी तरह, मेरी चूत में घुस जाए।
ना जाने वासना में मेरी सारी शरम कहाँ गई और मैंने उसका लण्ड खुद ही अपनी चूत के छेद पर अड्जस्ट किया और उसने एक धक्का दिया।
मैं बहुत ज़ोर से चीख पड़ी!! !!
इयाः याआः माहआआअ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आहहहह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह हईयाआः
सारी वासना उड़न छू हो गई और मैं दर्द से बिलबिला उठी।
मुझसे दर्द बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था।
मैं राज को धक्का देकर, पीछे करने की कोशिश करने लगी पर उसने मेरे दोनों हाथ ज़ोर से पकड़ लिए और कुछ देर ऐसे ही रुका रहा।
जब मैं थोड़ी शांत हुई तो उसने फिर एक झटका दिया और पूरा लण्ड, मेरी चूत में डाल दिया।
नहीं हह यन्ह माह स स स स स स स स स स स s s s ss sss sssss… मैं बहुत ज़ोर से चीख पड़ी..
वो फिर थोड़ी देर रुका रहा और फिर मुझे शांत देख कर, उसने धीरे धीरे अपना लण्ड अंदर बाहर करना शुरू किया।
मैं पूरी चुदाई में तकलीफ़ में रही और मुझे ज़रा भी मज़ा नहीं आया।

मेरी झिल्ली टूट चुकी थी और चादर पर काफ़ी सारा खून लग गया था।
मेरी चूत में काफ़ी सूजन आ गई थी और छेद थोड़ा सा छिल गया था।
राज ने वो चादर जाते वक़्त, बाहर कचरे के डिब्बे में फेंक दिया।
अगले कुछ दिनों में गरम पानी से सेकने और पैन किलर खाने से, मेरी चूत ठीक हो गई।
उसके बाद, मैं और राज यहाँ 4 बार आए।
अगली बार, मुझे फिर तकलीफ़ रही पर तीसरी बार से मेरी चूत को चुदने में मज़ा आने लगा।
उसके बाद, मेरी चूत राज के लण्ड के लिए फ्री हो गई।
इस दौरान, पीरियड्स को छोड़ कर मैं रोज़ नंगी ही सो रही थी..
रात को सोने से पहले, उंगली से अपनी चूत चोदना मेरी दिनचर्या बन चुकी थी..
जनवरी, 2010…
मेरे सेमेंस्टर एग्ज़ॅम्स ख़त्म हो चुके थे और इस बीच लगभग एक महीने तक मेरे और राज के बीच सेक्स नहीं हुआ था।
पहली चुदाई के बाद, अगले दो हफ़्तो में मैं राज से 4 बार उसी घर में मिल चुकी थी!! !!
परीक्षा ख़त्म होने के बाद, वो मुझे फिर से उसी घर में बुलाने लगा औरकभी कभी, कुछ दिन उसी के साथ रहने के लिए कहता.. पर मैंने, उससे बोला यार, खुद सोच मैं घर पर क्या बताउंगीपर फिर भी, वो ज़िद पकड़े हुए था..
इस बीच, मैं बहुत बार उसी घर में गई..
मैं अक्सर, आख़िर के 2 या 3 लेक्चर्स बंक कर के वहाँ जाने लगी और 3 4घंटे, उसी के साथ रहती थी।
राज, चुदाई में काफ़ी मस्तथा..
महीना ख़त्म होते होते, उसने लगभग सारे पोज़िशन मुझ पर ट्राइ कर लिए थे और मैं भी उसे पूरा सपोर्ट करती थी।
हमारे घर में आते ही, हमेशा बिना टाइम गवाय वो मेरे और अपने कपड़े निकाल देता और फिर सारा टाइम, हम दोनों नंगे ही रहते।
राज ने सब से ज़्यादा मुझे डॉगी पोज़िशनमें चोदा.. जो बाद में, मेरा भी पसंदीदा पोज़िशन हो गया..
डॉगी के अलावा मिशनरी, साइड बाइ साइड, लण्ड की राइडिंग, खड़े होकर, शावर के नीचे, और ना जाने कौन कौन सी पोज़िशन्स में भी मेरी चुदाई हुई..
कभी कभी, वो मुझसे उसके सामने मूठ भी मरवाता था।
मैं उसके सामने चूत मसलती, फिंगरिंग करती, मोमबति या पेन्सिल डालती!! !!
वो मेरे चेहरे के एक्सप्रेशन्स से, उतेज्जित हो जाता और फिर मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदता..
वो मुझसे घर पर अकेले में, मूठ मारने को कहता और मुझसे उसके बारे में सुनकर एंजाय करता था।
अक्सर रात को, हम फोन-सेक्सभी किया करते थे।
फिर, मेरी गाण्ड में भी चुदाई हुई!! !!

मेरी लाइफ अब घर, कॉलेज और चुदाई के बीच चल रही थी।
अब, मैं ज़्यादा दिन बिना चुदाई के नहीं रह पाती थी।
मूठ तो मैं रोज़ ही, मारती थी और नंगी ही सोती थी।
इसी बीच, मेरे कॉलेज में ट्रिप की घोषणा हुई.. फरवरी के आख़िर में..
जब मैंने राज को यह बात बताई तो उसे प्लान मिल गया, मुझे अपने साथ कुछ दिन रखने का।
मैं भी अब चुड़दकड़ हो चुकी थी और पूरी तरह से तैयार थी।
सच कहूँ तो मचल रही थी, पूरा दिन चुदवाने के लिए!! !!
ट्रिप 4 दिन की थी और 2 दिन आने जाने के लिए.. यानी पूरे 6 दिन, मैं राज के साथ रहने वाली थी..
मैंने घर से, ट्रिप की पर्मिशन ले ली।
ट्रिप 23 फरवरी को सुबह निकल रही थी और 28 की शाम में, वापस आने वाली थी।
23 फरवरी, 2010…
मैं सुबह 10 बजे के आस पास राज के साथ, उस घर में पहुँच गई।
राज ने घर में, हर चीज़ का अरेंज्मेंट कर दिया था।
ढेर सारे फ्रूट्स और खाने पीने का समान फ्रिड्ज में था।
कुकिंग का अरेंज्मेंट और हर चीज़ का, पूरा अरेंज्मेंट था।
ढेर सारे ब्लू फिल्म्स की सीडी भी थी.. लगभग, सब ग्रूप सेक्सकी..
आपको तो पता ही है, मैंने पहले ब्लू फिल्म ग्रूपकी ही देखी थी और उस रात, मैंने सपना भी ग्रूप सेक्स का ही देखा था..
सच पूछिए तो मुझे ग्रूप सेक्स वाली ब्लू फिल्म देखने में ही मज़ा आता था.. सो, मैं बहुत खुश थी..
आते ही, राज ने एक सीडी लगाई.. जिसमें, 3 लड़के और एक लड़की थी..
पहले तीनों लड़कों ने, एक एक करके लड़की को चोदा!! !!
फिर, तीनों एक साथ उस पर आ गये।
एक सीन में तीनों ने लड़की की चूत, गाण्ड और मुंह में लण्ड डाल रखा था।
राज और मैं, नंगे हो गये।
मेरी चूत, अब तक बिना चुदवाये ही पानी छोड़ चुकी थी।
फिर उसने, मुझे डॉगी पोज़िशनमें ताबड़ तोड़ चोदा..
उसे ये पोज़िशन इसलिए पसंद थी.. क्यूंकी, मेरी नरम गाण्ड उसके लण्ड केआस पास टकराती और मुझे इसलिए क्यूंकी, उसका लण्ड मेरी चूत की गहराइयों में उतर जाता..
मैंने भी अपनी गाण्ड को खूब हिला हिला कर, उसके लण्ड पर मारा।
दोपहर में हमने खाना खाया, फिर से एक चुदाई का दौर चला और फिर एक रात में..
चुदाई के बाद, रात में हमने डिन्नर लिया फिर, राज ने मुझे एक सॉफ्ट ड्रिंक पिलाया।
कुछ देर बाद, मैं बिस्तर पर गई और मुझे कब नींद आ गई मुझे पता भी नहीं चला।

24 फरबरी, 2010…
सुबह लगभग 7 बजे, मेरी आँख खुली।
मेरे साइड में, राज लेटा हुआ था।
हम दोनों, नंगे ही थे..
उठने के बाद, मैं फ्रेश हुई फिर ब्रेकफास्ट बनाने लगी।
नाश्ता बनाने के बाद, मैंने राज को उठाया।
लगभग, 10 बज रहे थे।
फिर, राज भी फ्रेश हुआ और हम दोनों ने ब्रेकफास्ट किया।
इस दिन राज ने, मुझे दो बार ही चोदा।
पहली बार दोपहर के खाने से, पहले बेड रूम में और दूसरी बार, शाम में सीढ़ियों पर..
मैं थोड़ी मायूस थी क्यूंकी मुझे ज़्यादा की अपेक्षा थी, पर मज़ा आया!! !!
खैर, शाम में मैंने डिन्नर बनाया और डिन्नर से पहले, उसने मेरी चूत बहुत देर तक चाटी और अपना लण्ड भी खूब चुसवाया।
फिर, हमने डिन्नर किया और कल रात की तरह, वो दोनों के लिए एक एक सॉफ्ट ड्रिंक लाया, जिसे मैं पी गई।
फिर कुछ देर बाद, मुझे नींद आने लगी और मैं बेडरूम में जा कर सो गई।
25 फरबरी, 2010…
आज भी मैं, लगभग 7 बजे उठी।
मेरे सिर में, हल्का हल्का दर्द था।
फिर मैं नहाने चली गई तो मुझे थोड़ा अच्छा फील हुआ।
मैंने कपड़े पहन लिए और फिर ब्रेकफास्ट बनाया।
फिर राज को उठाया।
राज भी फ्रेश हुआ और हमने ब्रेकफास्ट लिया।
राज, आज नंगा ही था।
जब मैं किचन में प्लेट्स रखने गई तो राज ने मुझे पीछे से आ कर पकड़ लिया और मेरे दूध दबाने लगा।
मैंने राज से कहा आज कुछ नहींमेरे सिर में बहुत दर्द हो रहा है
राज भी तुरंत मान गया और पूरा दिन, हमने बातें करते और हँसी मज़ाक करते हुए बिताया।
बीच बीच में, मैं घर पर फोन करती रहती थी ताकि उन्हें शक ना हो।
रात में, फिर से हमने डिन्नर किया और आज फिर दो ग्लास सॉफ्ट ड्रिंक की आई और आज भी, मैं उस में से एक पी गई जो राज ने मुझे दी थी।
पर आज साथ में, उसने मुझे क्रोसिन भी दी।
उसके बाद, पिछले दो दिनों की तरह मैं सो गई।

26 फरबरी, 2010…
रोज़ की तरह, मैं आज भी उठी फ्रेश हुई और ब्रेकफास्ट बनाया।
फिर, राज भी उठा फ्रेश हुआ और हम ब्रेकफास्ट के लिए टेबल पर बैठ गये।
अभी ब्रेकफास्ट ख़त्म भी नहीं हुआ था के दरवाजा की बेल बजी।
यहाँ, कौन आ सकता हैमैंने घबराते हुए पूछा..
मेरे दोस्त आने वाले थेवोही होंगेराज वहाँ से उठा और दरवाजा की तरफ बढ़ा..
थोड़ी देर में, दो लड़के अंदर आ गये।
ये विक्की है और ये अकरमराज ने, मेरी तरफ बढ़ते हुए बोला..
मैंने उन दोनों को हल्की स्माइल दी और हायबोला..
फिर मैंने उन्हें ब्रेकफास्ट के लिए इन्वाइट किया पर उन्होंने मना कर दिया..
हम, ब्रेकफास्ट कर के आए हैंविक्की ने जवाब दिया..
मैंने ब्रेकफास्ट किया और किचन में प्लेट्स रखने गई और राज को भी बुलाया।
ये लोग यहाँ क्यों आए हैंमैंने राज से पूछा..
मेरी जान, तेरे साथ चुदाई करने आए हैंऔर क्या… – राज ने बहुत बेशर्मी से, बिना झिझके जवाब दिया..
तुम… … मेरी बात पूरी भी नहीं हुई थी के राज हॉल में चला गया।
मैं वहीं खड़ी रही।
मुझे पसीने आने लगे, बदन में कपकपी होने लगी।
मैं डरने लगीबहुत ज़्यादा, डरने लगी… …
 डॉली… … – राज ने, ज़ोर से आवाज़ दी..
मैं हॉल में आई, धीरे धीरे क़दमों से..
मेरे दिल में, बहुत से सवाल उठ रहे थे।
मैंने देखा के विक्की ने अपने शर्ट के अंदर से, एक सीडी बॉक्स निकाला और उस में से एक सीडी प्लेयर में डाली।
आ!! यहाँ बैठ, रंडी… – राज ने, सोफे की तरफ इशारा करते हुए कहा..
रंडीसुनके, मैं थोड़ा सदमे में आ गई..
लेकिन, मैं जा के बैठ गई।
सीडी शुरू हुई तो मेरे तो होश ही उड़ गये।
मैं बिस्तर पर, नंगी सोई हुई थी!! !! !! !!
विक्की और अकरम भी नंगे थे और राज शूट कर रहा था।
विक्की और अकरम, मेरे एक एक साइड में आ के लेट गये।
दोनों का हाथ, मेरे एक एक दूध पर था।
दोनों दूध दबा रहे थे और बीच बीच में, निपल्स चूस रहे थे।
यही चीज़, काफ़ी देर तक चलती रही।
फिर मेरे चेहरे का क्लोज अप था और फिर निपल्स का क्लोज अप और फिर मेरी चूत का।
अकरम ने मेरी चूत को, अपनी उंगलियो से फैलाया हुआ था।
पूरे टीवी स्क्रीन पर, मेरी चूत दिख रही थी।
और तो और, चूत फैला के छेद का भी क्लोज अप था।
मेरी चूत के ऊपर के तिल और शरीर के बाकी तिल पर भी क्लोज अप किया था।
दोनों ने मिल के, मुझे उल्टा किया और गाण्ड पर यहाँ तक की मेरी गाण्ड के छेद को चौड़ा करके, उसका क्लोज अप तक लिया।
यही सब, करीब एक घंटे तक चलता रहा।
मैं अब तक, सोफे पर जम चुकी थी.. टीवी को एकटक देखे जा रही थी और रोते जा रही थी..
क्यों कर रहे हो, मेरे साथ ये सब… – मैंने राज को देखते हुए पूछा..
मेरी आवाज़ भी ठीक से नहीं निकल रही थी।
राज ने टीवी बंद कर दिया।
मैं विक्की और शब्दिता का कज़िन हूँविक्की, शब्दिता का सगा भाई है और ये प्रॉपर्टी अकरम की है… – राज, बोले जा रहा था..
मुझे विक्की ने तेरे भाई और शब्दिता के अफेयर के बारे में बताया के तेरेभाई ने शब्दिता के साथ बहुत मज़े किएये बात मोहल्ले में और रिश्तेदारों में भी फैला दी और हमारे परिवार की बहुत बदनामी हुईइतनी की इन्हें मकान बेच कर, दूसरी जगह जाना पड़ाहर कोई हमारी बहन को रंडी की तरह देखने लगा और उसे अपनी पर्सनल प्रॉपर्टी समझने लगामैंने विक्की और अकरम के साथ मिलके तुझे तेरे भाई के सामने ही चोदने का प्लान बनाया और तू मेरे प्लान में पूरी तरह आ गईअब अगले तीन दिन, हम तीनों तेरे साथ रहेंगे और तुझे किसी सड़क की कुतिया की तरह चोदेंगेंसमझी, मेरी जान
लेकिन, इसमें मेरी क्या ग़लती है… – मैंने राज से पूछा..
ग़लती तो मेरी बहन की भी नहीं थीचल माना, ग़लती तेरी नहीं है पर तेरे भाई के सामने, तुझे चोद के उसको उसकी औकात दिखाएँगे, हम लोग… – राज काफ़ी गुस्से में बोल रहा था..
प्लीज़ऐसा मत करो, मेरे साथ… – मैं गिड़गिड़ाने लगी..
इससे पहले तो तुझे सेक्स में, बहुत मज़ा आ रहा थाअब क्या हुआगाण्ड हिला हिला कर, चुद रही थी, मुझसेराज ने ताना मरते हुए कहा..
मैं प्यार करती हूँ, तुमसेइसलिए, तुम्हारे साथ खुश थीसमझेमगर, मेरे गिड़गिड़ाने का, गुस्से का या किसी चीज़ का, कोई फायदा मुझे नहीं दिख रहा था।
मैं काफ़ी देर तक रिक्वेस्ट करती रही पर मुझे लगने लगा, जैसे मुझे कोई नहीं सुन रहा है।
अकरम, ऊपर के कमरे में गया और एक डिजिटल कैमरा ले आया और राज को दे दिया..

राज, तुरंत कैमरा चालू करके शूट करने लगा।
विक्की ने मुझे सोफे पर से उठ के, खड़े होने के लिए कहा।
मैं खड़ी हो गई।
मैंने राज की एक वाइट शर्ट पहनी हुई थी और नीचे एक लोअर.. मैंने अंदर कुछ भी नहीं पहना था..
अकरम, मेरे पीछे आ के खड़ा हो गया और विक्की, मेरे सामने खड़ा था।
आज 3 लोगों से, तू पूरे होश में चुदने वाली हैये सोच के, कैसा लग रहा है तुझे… – विक्की ने कहा..
मैं चुप रही..
अकरम ने पीछे से, मेरी जीन्स नीचे खींच दी।
मैंने अपना हाथ, तुरन्त अपनी चूत के आगे रख दिया।
क्या यार, दो दिनों से मज़े ले ले के चुदवा रही हैआज देखो, कैसी शरम आ रही है, रांड़ को… – विक्की ने फिर बोला..
मैंने उसकी तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रहा था।
अकरम ने पीछे से मेरा हाथ पकड़ के, मेरी चूत पर से हटाया।
राज और नज़दीक आ गया और घुटने पर बैठ गया और कैमरा, मेरी चूत के एकदम नज़दीक ला के शूट करने लगा।
फिर अकरम ने मुझसे शर्ट निकालने के लिए कहा, पर मैं ऐसे ही खड़ी रही।
उसने पीछे से मेरी गाण्ड पर, एक ज़ोरदार तमाचा मार दिया।
मैं समझ गई थी के मेरे पास उनकी बात मानने के सिवा और दूसरा कोई रास्ता नहीं है।
मैं अपना, शर्ट निकालने लगी।
कुछ ही देर में, मैं 3 लड़कों के सामने नंगी थी!! !!
पहले, कौन इसको चोदेगा… – राज ने पूछा दोनों से..
अकरम बोला बारी बारी से, तीनों इसे चोदते हैंऔर क्या
फिर विक्की मेरे पास आया और मेरी कमर पर, दोनों हाथ रख दिए।
उसने मुझे खींच के, अपनी तरफ किया।
मैं उससे चिपक गई।
फिर वो मेरी गर्दन के पास आ के, मुझे चूमने लगा और अपना हाथ मेरे पीछे डाल के, मेरी पीठ और गाण्ड सहलाने लगा।
फिर उसने मुझे उल्टा किया और डॉगी स्टाइल में कर दिया और वो भी नंगा हो गया।
अब राज ने उसे कंडोम दिया।
उसने तुरंत, अपने लण्ड पर लगा लिया और मेरे पीछे घुटने पर आ गया।
कुछ देर तक वो अपना लण्ड मेरी चूत पर रगड़ता रहा.. जिससे, मैं भी अब गरम हो रही थी..
मेरी चूत में, अब पानी भर गया था।
फिर उसने अपना लण्ड, मेरी चूत में डाल दिया।
लण्ड आसानी से, चूत में चला गया..
आख़िर अब तक राज ने चोद चोद कर, मेरी चूत का तियापांचा कर दिया था।
अब मुझे भी, मज़ा आने लगा!! !!

उसका लण्ड तो राज से छोटा था और वो मुझे चोद भी धीरे धीरे रहा था।
अब तक, अकरम भी नंगा हो चुका था और राज भी..
तीनों में सबसे बड़ा लण्ड, राज का ही था।
फिर अकरम का और सबसे छोटा और पतला लण्ड, विक्की का था।
ब्लू फिल्म जैसा लण्ड, अभी तक मैं नहीं देख पाई थी!! !!
थोड़ी देर में, विक्की ने चोदने की स्पीड बढ़ा दी..
कुछ देर तक, उसने बहुत तेज़ और ज़ोरदार झटके दिए.. फिर, अचानक से उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया..
मैं तो जैसे, तड़प के रह गई।
उसके ज़ोर ज़ोर के झटको से, मुझे बहुत आनंद आ रहा था।
मुझे लगा, उसका पानी निकल गया पर उसका पानी नहीं निकला था।
मैं उसी पोज़िशन में थी।
फिर अकरम, मेरे पीछे आ गया और अपना लण्ड मेरी चूत में डाल दिया।
वो मुझे चोदते हुए, मेरी गाण्ड पर तमाचे भी मार रहा था।
सच बात तो ये है, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
पर, अकरम मुझे धीरे धीरे चोद रहा था।
कुछ देर के बाद, मेरा संयम टूट गया और मैं बोल पड़ी अब कर ही रहा है तो ज़ोर से कर ना
क्या ज़ोर से करूँअकरम ने जवाब दिया..
ज़ोर से अपनी छड़ी को अंदर-बाहर कर नामेरी ये बात सुन के तीनों हंस पड़े।
राज बोला अंदर बाहर करने को चुदाई कहते हैं, मेरी जानछड़ी को लण्ड
विक्की बोला साली, ये तो बड़ी कुत्ती चीज़ है, भाई लोगऐसे मचल रही है, जैसे तीन से चुदने को, ना जाने कब से बेताब थीमैं तो सोच रहा था की हम इसके साथ ज़बरदस्ती करनी पड़ेगीक्या भाई, मैं तो कहता हूँ, इसको अपनी रखेल बना लोसाली है तो वैसे भी, रांड़जब जिसका मन करे, इसको चोदे जी भर के
सब ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे और फिर, अकरम ने मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदना शुरू किया।
उसने कुछ तेज़ झटके दिए, फिर हट गया।
चल, राज अब तेरी बारी
मैं समझ गई थी के वो लोग, क्या कर रहे हैं
अब कैमरा अकरम के हाथ में था और राज, मुझे चोदने लगा।
पहले धीरे धीरे, फिर ज़ोर ज़ोर से फिर वो भी हट गया।
अब विक्की वापस से आया और मुझे सोफे पर, साइड करवट लिटा दिया।
उसने मेरी एक टाँग पकड़ के ऊपर की और लण्ड, मेरी चूत में डालने लगा।
मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसके लण्ड को अपनी चूत में पकड़ कर,घुसा लिया।
उस पल, मुझे समझ आया की मैं सच में रांड़ बन चुकी हूँ और अपनी चूत पर, मेरा कोई काबू नहीं रह गया है..

वो भी मुझे, मस्ती से चोदने लगा!! !!
उसने मुझे कुछ देर तक चोदा और हट गया।
फिर अकरम ने मेरी एक टाँग पकड़ के ऊपर की और अपने लण्ड को मेरी चूत में डाल के, मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा।
कुछ देर तक उसने मुझे चोदा, फिर वो भी हट गया।
अब मेरी कमर दर्द करने लगी थी..
मैं पिछले आधे घंटे से, लगातार चुद रही थी।
अरे, कुछ तो रहम करोसब अभी ही कर लोगे के, कुछ बाद के लिए भी बचाओगे… – मैं खड़ी हो गई और बोलने लगी..
हमारा पानी तो निकालने दे… – अकरम ने बोला..
तीनों सोफे पर बैठोमैं सब का चूस के निकाल दूँगी… – मैंने विक्की को सोफे की तरफ, धक्का दे दिया..
वो बैठ गया, फिर बाकी दोनों भी बैठ गये।
सबसे पहले, मैं विक्की के पास गई और उसका लण्ड चूसने लगी।
मेरे इस बोल्ड और चुदक्कड़ व्यव्हारसे, वो तीनों अब मुझे अच्छी तरह से ट्रीट कर रहे थे और मेरी हर बात भी मान रहे थे।
अब चोदना तो उन्हें मुझे था ही, मैंने भी सोचा था ऐसा मौका जिंदगी में बार बार थोड़ी ना मिलेगा, जब तीन-तीन लण्ड मुझे चोदगें
खैर, जैसे ही विक्की के पानी की एक बूँद मेरे मुंह में गिरी, मैंने उसका लण्ड अपने मुंह से बाहर निकाल दिया और हाथ से हिलाने लगी।
उसका पानी, बहुत तेज़ी में निकला।
मैंने उसका सारा पानी, अपनी मम्मों पर ले लिया।
फिर, मैं राज के पास गई.. वो विक्की के बाजू में बैठा था..
पहले मैंने उसका लण्ड से अपनी चुचियाँ जी भर के चोदीं, फिर मुंह में ले के, चूसने लगी।
कुछ देर बाद ही, उसका भी पानी निकल गया और वो सारा भी मैंने अपने मम्मों पर ले लिया।
उन्हम: क्या गरम गरम लग रहा था, मुझे अपने मम्मों पर!! !!
फिर, मैं अकरम के पास गई.. जो राज के साइड में बैठा था और फ़ौरन,उसका लण्ड मुंह में ले के चूसने लगी..
जब उसका पानी निकलने को आया तो उसने मेरे सिर को ज़ोर से पकड़ लिया और मेरा मुँह अपने लण्ड पर दबा कर, सारा पानी मेरे मुंह में डाल दिया।
अब तक ये पहली बार था, जब मैंने वीर्य मुँह में लिया था।
मैंने उसका सारा पानी, मुंह से थूक कर बाहर निकाला..
मेरे मुंह से गले तक वीर्य ही वीर्य था और मुझे उबके आ रहे थे।
अब, हम चारों उठे और नहाने चले गये।
मैं तीन लड़कों के साथ, पूरी नंगी नहाई।

मन ही मन, मैं अपने भाई के लण्ड की कल्पना कर रही थी!! !!
उस दिन मेरी समझ में आया की साली, “चूत की आग और लण्ड की भूख”,हर रिश्ते से बड़ी होती है।
मेरी सेक्स स्टोरी पर रिश्तों में चुदाईया भाई बहन चुदाईकी केटेगरी में ज़्यादातर कहानियाँ, सच ही होगीं।
चूत को चुदवाने से मतलब है और लण्ड को चोदने से!! !!
खैर, सब नहा धो के फ्रेश हुए।
फिर, हम सब ने लंच किया और सब रूम में आ गये, लेटने के लिए और तुरंत सब की ही, आँख लग गई।
हम सब एक एक कर के, लगभग 7 बजे शाम में उठे।
सब नंगे ही थे..
उठते ही, अकरम का लण्ड टाइट हो गया था।
मैं लेटी ही थी और वो मेरे ऊपर आ के मुझे चूमने लगा।
मैंने उसे रोका और बोली ज़रा तो, सब्र कर ना
कैसे करूँ जान, तेरे साथ देने से कितना मज़ा आ रहा हैतू सोच भी नहीं सकती… – वो बोला..
अगर साथ नहीं दूँगी तो कौन सा तुम लोग मुझ पर रहम कर दोगेतुम भी मज़े लो और मुझे भी लेने दोपर अभी नहींमुझे बहुत कमज़ोरी आ रही हैतुम लोगों का तो एक बार निकला है, मेरा तो पता नहीं,कितनी बार निकला होगारात में करना, खाना खाने के बादअभी हट
वो भी मान गया और हट गया।
फिर हम सब बिस्तर से उठे और सब मिल कर, डिन्नर बनाने लगे।
सब मिल खाना बना रहे थे, मैंने नाइटी पहन ली थी और बाकी सब ने भी लोवर और शॉर्ट्स पहन लिए थे।
मुझे लगा, एक चूत का छेद कितने हरामी मर्दों को अपने काबू में रख सकता है!! !!
अगर मैंने भागने की, बचने की कोशिश की होती तो तीनों ने पटक-पटक कर मुझे ज़बरदस्ती चोदा होता.. चूत तो खैर, फट ही गई होती.. ना जाने कहाँ कहाँ, चोट अलग लगी होती..
अब देखो, मेरी चूत तीनों को कैसे नचा रही है.. भोसड़ी के, खाना तक बना रहे हैं, मेरे साथ..
खैर खाना बनाते बनाते, 9:30 हो गया था।

फिर, हम सब ने डिन्नर किया।
कुछ देर के बाद, अकरम दरवाज़ा खोल के बाहर गया।
बाहर, एकदम घना अंधेरा था।
वो वहीं से चिल्लाया राज, विक्की
राज भी चिल्लाया क्या हुआ, मादार चोद
अकरम बोला चल भाई,  डॉली को बाहर चोदते हैं
ये सुनके, मैं भी चिल्लाई पागल हो गया है, क्या… ?? बाहर, कोई देखेगा नहीं… ??
उसने बोला यहाँ कोई नहीं आता, रेदेख, कितना अंधेरा है
फिर, विक्की और राज भी बोले अच्छा आइडिया है
अकरम ने बाहर ही अपना जीन्स खोल दिया और राज और विक्की भी तुरंत नंगे हो गये।
मैंने बाहर आ के देखा तो सच में बहुत अंधेरा था।
फिर अकरम ने मुझे नाइटी उतारने को कहा।
मैंने उतार दी और नंगी घर से बाहर आ गई।
हम चारों नंगे बाहर थे।
मैं बाहर सुनसान अंधेरे में, बिल्कुल नंगी खड़ी थी।
विक्की और अकरम, मेरे एक एक साइड में आ गये और दोनों मेरे एक एक चुचे को हाथ में ले के दबाने लगे।
राज भी सामने खड़ा था।
वो मेरी चूत पर हल्के हल्के, हाथ घुमा रहा था।
फिर राज ने मेरे हाथ में 3 कंडोम दिए, जो उसके हाथ में थे और मुझे तीनों के लण्ड पर पहनने को कहा।
मैंने तीनों के लण्ड पर, कंडोम पहनाए।
अब अकरम और विक्की मेरे एक एक साइड में आ के मेरे एक एक निपल्स चूसने लगे।
अकरम पीछे से, मेरी गाण्ड भी सहला रहा था।
दोनों ने मेरा एक एक पैर, अपने हाथ में फँसा के मुझे उठाया।
मैं अपने दोनों हाथ, सपोर्ट के लिए उन दोनों के कंधे पर रखी हुई थी।
मैं सिर्फ़ उन दोनों के सपोर्ट पर थी..
उन्होंने, मेरे पैर फोल्ड किए हुए थे।
मेरे घुटने मेरे चुचों को टच हो रहे थे।
फिर राज आगे आया और अपना लण्ड, मेरी चूत पर रगड़ने लगा।
फिर कुछ देर में उसने लण्ड मेरी चूत में डाल दिया और मुझे कमर से पकड़ के चोदने लगा।
वो धीरे धीरे, मुझे चोद रहा था।
फिर उसने मुझे उसी पोज़िशन में बहुत देर तक चोदा।
उसका होने के बाद, अकरम आया और अब अकरम की जगह, राज ने ले ली।
उसने मुझे बहुत देर तक चोदा।
राज और विक्की भी जल्दी करने के लिए कह रहे थे क्यों के मुझे उठाते हुए उनका भी हाथ दर्द करने लगा था।
फिर विक्की के टाइम, सबने थोड़ा ब्रेक लिया।

विक्की ने भी मुझे इसी तरह चोदा..
काफ़ी रात हो गई थी और सबको नींद भी आ रही थी।
खुलंखुल्ला चुदाई करने के बाद, हम सब सोने चले गये।
आज राज की तरफ से कोई सॉफ्ट ड्रिंक नहीं मिली, मुझे पीने के लिए।

27 फरबरी, 2010…
अगले दिन, सब लेट उठे और सब नंगे ही थे।
सब नहा धोके, फ्रेश हुए।
आधा दिन ऐसे ही, सुस्ती में निकल गया।
लंच के बाद, विक्की और अकरम मुझे चोदने आए पर मैंने मना कर दिया और कहा की रात में करना।
वो लोग भी मान गये।
रात में डिन्नर के वक़्त, बातों ही बातों में मैंने उनसे कहा मेरे वीडियोस का क्या करने वाले हो, तुम लोग… ??
तो विक्की ने कहा तुझे तेरे भाई के सामने चोदने के लिए, उसे उपयोग करेंगे
अब तो मुझे तुम लोग, अपनी रखेल बना चुके होमुझे मेरे भाई के सामनेचोदने का आइडिया, ड्रॉप नहीं कर सकते… ?? – मैंने उनसे रिक्वेस्ट करते हुए कहा।
फिर जब वो लोग नहीं माने तो मैंने उनसे कहा मेरे वीडियोस मिटा दोमैं खुद जय को मना लूँगी
इस पर विक्की ने कहा मैं बाकी सब वीडियोस डेस्ट्राय कर देता हूँ, सिर्फ़ कल वाला रखूँगाजब तू तेरे भाई के सामने हमें चोदने देगी, उसके बादवो वाली सीडी भी तोड़ दूँगा
मैंने कहा ठीक है
फिर विक्की ने एक के सिवा, बाकी सारे सीडीज़ तोड़ दिए।
उस रात भी तीनों ने मुझे अलग अलग पोज़िशन में चोदा।
28 फरबरी, 2010…
आज मेरी ट्रिप वापस आने वाली थी।
मैंने अपना समान अच्छी तरह पैक किया।
सब ने मेरी हेल्प भी की और आज मेरी चुदाई नहीं हुई।
जाते जाते, मैंने कुछ कंडोम अपने साथ रख लिए।
शाम में मैं, अपने घर वापस गई।
मैं घर आ गई और सामान्य व्यव्हार कर रही थी।
मैंने मम्मी को ट्रिप की कुछ झूठी कहानियाँ सुनाईं।
जय भी खुश दिख रहा था।
उस दिन रात में, मैंने जल्दी खाना खा लिया और सबसे कह दिया के बहुत थक गई हूँ और सोने चली गई।
रूम में मैंने देखा की कंप्यूटर टेबल के नीचे, बहुत सी ब्लू फिल्म्स की सीडीज़ रखीं हैं।
मैं समझ गई के जय ने इन दिनों, बहुत ब्लू फिल्म्स देखी हैं।
मैंने उन सीडीज़ को ऐसे ही रहने दिया।
बिस्तर पर जा कर लेट गई और सोचने लगी के जय को अपनी तरफ आकर्षित, कैसे करूँ।
उसकी सारी गतिविधियों के बारे में तो मैं जानती थी पर ये नहीं जानती थी के वो मेरे बारे में क्या सोचता है।
मैं उसे अपनी चुदाई की कहानी कैसे सुना सकती हूँ…?? और उसके सामने3 लड़कों से कैसे चुदवा सकती हूँ… ??
मैं यही काफ़ी देर तक सोचती रही।
फिर, मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया।
मैंने अपने सब कपड़े उतारे और सिर्फ़ कुर्ता और सलवार पहन लिया और सलवार में बहुत गहरी गाँठ बाँध ली।
कुर्ता हल्का पारदर्शी था, जिससे मेरे बूब्स की झलक दिख रही थी।
फिर, मैं जय के आने का इंतेज़ार करने लगी।

करीब 11 बजे, मैंने सीढ़ियो पर जय के कदमो की आहट सुनी।
मैं दरवाज़े के पास आई और उसे अपने कमरे में बुलाया।
मुझे लगा तू सो गई होगी… – जय ने आते ही, कहा।
मैंने जवाब दिया सोने ही जा रही थी, पर एक प्राब्लम हो गई हैथोड़ी हेल्प कर दे ना
मैंने देखा के उसकी नज़र मेरे सीने पर जा रही है बार बार।
हाँ बोल ना क्या… – उसने अंदर आते हुए, कहा।
मैं कमरे के अंदर आई और बोली मेरी सलवार टाइट हो गई हैखुल नहीं रही हैतू खोल देगा, प्लीज़… ??
एक मिनट के लिए तो वो शॉक सा हो गया।
फिर धीरे से बोला ठीक हैऔर वो बिस्तर पर बैठ गया और मैं उसके सामने खड़ी हो गई।
मैंने अपना कुर्ता ऊपर उठा लिया, जिससे वो मेरा पेट और कमर देख सकता था।
मैं अब उसे नोटीस करने लगी।
उसके हाथ, हल्के हल्के काँप रहे थे और जीन्स में भी टेंट सा बन गया था।
अब वो मेरी सलवार की गाँठ खोलने लगा पर मैंने गाँठ को बहुत टाइट बाँधी थी।
जय खोल नहीं पा रहा था।
उसने कहा चाकू से काट दें
पर मैंने कहा यार, फिर इसका नाडा मार्केट से लाना पड़ेगा और तब तक मैं ये पहन नहीं सकती नाऔर ट्रिप के सारे कपड़े तो अभी धुलने हैं और पुराने कपड़े भी इधर उधर हो चुके हैंतू प्लीज़ खोल ना… – मैंने बहाना बनाया।
5 मिनिट हो चुके थे।
जय कोशिश कर रहा था।
फिर मैंने, उससे कहा दाँत से ट्राइ कर नातो वो दाँत से खोलने की कोशिश करने लगा।
अब उसने दोनों हाथ, मेरी कमर पर रख दिए थे।
मैंने अपना कुर्ता हाथ से पकड़ रखा था।
मैंने उससे कहा जल्दी कर ना, मेरा हाथ दुखने लगा है
उसने कहा जल्दी है तो काटना पड़ेगा
मैंने उसे थोड़ी देर और ट्राइ करने को कहा।
वो दाँत से ही खोल रहा था।
फिर अचानक, थोड़ी सी गाँठ खुली।
मैं भी तैयार हो गई।
मैंने अपना हाथ कुर्ते से हटा के साइड से सलवार में डाल लिया।
जैसे ही मुझे गाँठ ढीली लगी, मैंने अपने कमर से सलवार को ढीला कर दिया और सलवार ज़मीन पर गिर गई।
मेरी चूत मेरे भाई के सामने थी
बिल्कुल नंगी… …

वो कुछ देर तक देखता रहा।
मैं भी ऐसे ही खड़ी रही, बिना शरमाये और बिना कुछ बोले।
फिर जय ने अपनी नज़र हटा ली और शरमा सा गया।
उसने मुझसे सॉरी कहा और जाने लगा।
मैंने भी उसे नहीं रोका और वो चला गया पर मैं उसकी नियत समझ गई थी।
अगले दिन, रात में मैंने अपने कपड़े उतार दिए और ब्रा पैंटी में बिस्तर पर लेट गई और एक चादर ले ली और अपने ऊपर पूरी तरह से डाल ली।
मैं अपनी आँखे बंद कर के, बहुत देर तक लेटी रही।
मेरे रूम का दरवाज़ा तो खुला ही रहता था।
करीब 11 बजे, जय मेरे रूम में आया और मुझे आवाज़ दी पर मैंने कोई रिप्लाइ नहीं दिया।
वो समझा के मैं सो रही हूँ।
फिर वो कंप्यूटर पर बैठा और कुछ करने लगा।
उसकी पीठ, मेरी तरफ थी।

मैं हल्की आँखों से उसे देख रही थी।
फिर मैंने सोचा के मौका अच्छा है, जय को अपनी तरफ आकर्षित करने का।
मैंने अपना एक पैर चादर से बाहर निकाल लिया और फोल्ड करके घुटना ऊपर उठा दिया।
कुछ देर बाद, जय ने अपना सिर पीछे किया।
वो कुछ देर तक मेरे गोरे चिकने पैर को देखता रहा।
फिर वो उठा और उसने चादर मेरे पैर पर वापस डाल दिया।
फिर वो कुर्सी पर बैठ गया और कंप्यूटर पर कुछ करने लगा।
पर अब वो, बार बार पलट रहा था।
मैं हल्की आँखों से उसे देख रही थी।

कुछ देर बाद, मैं करवट ले कर दूसरी तरफ हुई जिससे मेरी पूरी पीठ चादर से बाहर हो गई पर अब मैं जय को देख नहीं कर पा रही थी।
मैं चुप चाप लेटी रही।
जय ने भी समझा की मैं सो रही हूँ।
कुछ देर बाद, मैंने अपने पैरों पर हाथ का टच महसूस किया।
जय शायद अब कंट्रोल नहीं कर पा रहा था।
वो मेरे पैरों को सहलाता रहा और कभी कभी मेरी गाण्ड पर भी हाथ घुमा रहा था।
फिर वो मेरी पीठ और कमर सहलाने लगा।
मैं चुप चाप लेटे लेटे मज़े ले रही थी।
कुछ देर बाद, सहलाना बंद हो गया।
मैं ऐसे ही लेटी रही और जय के फिर से छूने का इंतेज़ार करने लगी।
पर काफ़ी देर तक, उसने मुझे नहीं छुआ तो मैं नींद की हालात में ही पलटी और सीधी हो गई।
अब मैंने चादर भी पूरी ले ली थी।
जय कंप्यूटर पर बैठ के कुछ कर रहा था।
उसका एक हाथ उसके लण्ड पर था और वो मुझे बार बार मुझे देख रहा था।
मैंने मौका पा कर, अपनी पैंटी चादर में ही निकाल दी।
कुछ ही देर में, मैंने फिर से करवट बदल ली।
अब चादर, मेरे जाँघ तक थी।
जाँघ से नीचे, मेरे पैर खुले थे।
कुछ देर बाद फिर मैंने जय के हाथ का टच महसूस किया, अपने पैरों पर।

वो मेरी जाँघ पर धीरे धीरे, हाथ घुमा रहा था।
धीरे धीरे, वो अपना हाथ ऊपर सरकाने लगा।
फिर उसका हाथ, मेरी नंगी गाण्ड तक पहुँच गया।
उसका हाथ कुछ देर तक मेरी गाण्ड पर ही रहा।
 डॉली डॉली… – उसने मुझे धीरे से आवाज़ दी पर मैंने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया।
वो समझ चुका था के मैं जाग रही हूँ।
अब उसकी हिम्मत जैसे, एकदम खुल गई और उसने मेरे बदन पर से चादर हटा दिया।
मैं वैसे ही, करवट पर लेटी रही।
फिर उसने मेरी ब्रा का हुक खोला और मुझे सीधा किया।
उसने मेरे होंठ अपने मुंह में ले लिए और चूसने लगा।
उसकी इस हरकत से तो जैसे मैं पागल सी हो गई।
मैंने अपना हाथ, उसके कंधे में डाल दिए और अपनी तरफ दबाने लगी।
अब जय में पूरी तरह से काम भावना आ चुकी थी और अब वो किसी पागल कुत्ते की तरह मुझे चाट रहा था।
अब मैंने भी अपनी आँखें खोल दी और जय को पूरा सपोर्ट देने लगी।
मैं उसका लण्ड पकड़ के अपनी चूत पर रगड़ने लगी।
मेरे बाजू के टेबल पर ही मैंने अपना पर्स रखा था।
मैंने हाथ बढ़ा के उसमें में से कंडोम निकाला और जय को दे दिया।
जय ने बिना कुछ पूछे मुझसे वो कंडोम ले लिया और अपने लण्ड पर लगा लिया।
फिर, उसने मेरी चूत में अपना लण्ड डाला और ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदने लगा।
करीब 5 मिनट के बाद वो झड़ा और फिर हम दोनों अलग हुए।
मुझसे अलग होते ही उसने पूछा तू वर्जिन (कुँवारी) नहीं थी… ??
मैंने कहा नहीं

किसने ली है, तेरी… – उसने फिर पूछा।
उसके बाद, मैंने जय को सारा किस्सा कह सुनाया।
जय बहुत गुस्सा होने लगा।
उससे ये बात, बर्दाश्त नहीं हो रही थी के 3 लड़कों ने मुझे ज़बरदस्ती चोदा।
फिर मैंने उससे कहा अभी थोड़ी देर पहले तू भी तो मुझे कितने मज़े सेचोद रहा थामैं तो तेरी सग़ी बहन हूँफिर अब, ये ढकोसला क्यूँ
ये सुन के वो शांत हुआ।
फिर उसने मुझसे कहा अगर तू मुझे ये सब पहले बता देती तो वो लोग तेरे साथ ज़बरदस्ती कुछ नहीं कर पाते
वो कैसे… ?? उनके पास मेरी नंगी वीडियो क्लिप्स थीं… – मैंने कहा।
तो वो उठ के अपने कमरे में गया और एक सीडी ला कर कंप्यूटर में प्ले किया।
उसमें उसके और शब्दिता की रेकॉर्डिंग थी।
अब मैं उन्हें तेरे साथ कुछ भी नहीं करने दूँगाअगर उनके पास हमारीकमज़ोरी है तो हमारे पास भी उनकी कमज़ोरी हैमैं उनसे सीडी के बदले सीडी का सौदा करूँगा… – जय बोले जा रहा था पर मेरे दिमाग़ में कुछ और चल रहा था।
मैंने जय से कहा सौदा करने के बजाए, कोम्प्रोमाईज़ कर लें तो… ??
जय मतलब… ??
मैं इस सीडी के ज़रिए शब्दिता को भी शामिल कर लेते है। फिर हम दोलड़कियाँ और तुम 4 लड़के हो जाओगेमज़े करेंगेतू भी शब्दिता को पटक पटक कर चोदना
जय (चौंकते हुए) तू तो रांड़ बनती जा रही है
मैं – 6 दिन से लगातार चुद रही हूँअब मैं चुदाई के बिना नहीं रह सकती
जय (कुछ देर सोचने के बाद) ठीक हैतू जैसा कहती है, वैसा ही करेंगे
फिर, मैंने जय को कस के हग किया।
उसका लण्ड, फिर से खड़ा हो गया।
मैं हटी और उससे पूछी एक बात बता, तूने शब्दिता की गाण्ड ली थी… ??
नहीं… – उसने कहा।
मैं मेरी गाण्ड मारेगा..
जय चल घूम जा..
फिर जय ने मेरी गाण्ड मारी और भाई बहन नंगे एक दूसरे की गांद में सो गये..
आधी रंडी मैं बन चुकी थी और पूरी का सफ़र, शुरू हो गया था।
… …

loading...

Leave a Reply