बित्चवंती – डॉटर ऑफ़ ए बित्च

बिचवंती… मेरे आशिक मुझे इसी नाम से जानते हैं!

उम्म…. कहा से शुरू करूँ, समझ नहीं आ रहा. चलिए पहले अपने बारे में बता देती हूँ!
मैं मानसी! उम्र 23 साल…. गोरी हू… 5’6 हाईट, शरारती मुस्कान, और फिगर 34b 26 36.इन शोर्ट बोलू तो लड़के मुझे प्रॉपर पटोला बोलते हैं!
अब आप सोच रहे होंगे कि 23 साल की उम्र में 34b बूब्स और 36 गांड…… उम्म्ह….. मेरी आपसे रिक्वेस्ट है जादा दिमाग मत लगाइए… कहानी में
आपको पता चल जाएगा मेरे इस फिगर का राज!
ये कहानी मेरे और मेरी माँ के बारे में है! ओह… मम्मी के बारे में तो बताना ही भूल गई मैं. मेरी मा का नाम मालती है! माँ की ऐज तो मुझे भी नहीं
पता, पर वो 40-42 की होंगी! पर आज भी किसी भी मर्द को अपनी एक अदा से अपना दीवाना बना लेंती है! माँ मेरी माँ होने के साथ साथ किसी की रांड भी हैं.. और किसी की रखैल भी!
माँ के कई किस्से हैं! आपको धीरे धीरे स्टोरी पढने पर पता चलेंगे!
घर में मैं, मेरी माँ के अलावा एक छोटा भाई भी है! वरून! वरून २ साल छोटा है मुझसे! शरारती होने के साथ साथ सीधा भी है! वो अभी एक प्राइवेट कॉलेज से इंजीनियरिंग कर रहा है!
जब मैं ** साल की थी… पापा हमें एक रोड एक्सीडेंट के बाद छोड़ के चले गए! पापा के जाने के बाद हमारी सारी जिम्मेदारी माँ ने ही उठाई!

खैर ये तो हुआ इंट्रोडक्शन पार्ट! कहानी अभी बाकी है फ्रेंड्स!

(डिअर रीडर्स, आप मुझे अपने सुझाव देंगे तो मुझे अच्छा लगेगा! और हाँ… प्रोमिस करती हूँ की अपडेट के लिए जादा तडपाउंगी नहीं trick)

“पापा की डेथ के बाद सब कुछ बिखर सा गया था! पापा शेयर ब्रोकर थे, शेयर ब्रोकिंग के साथ साथ उनका रियल स्टेट का भी बिजनेस था! हम लोग हंसी खुशी आराम की जिन्दगी जी रहे थे! मैं पापा की दुलारी, उनसे जो मांगती, जब मांगती मुझे ला कर देते थे! पर अब वो हमारे साथ नहीं थे! हमारे साथ कुछ था तो उनकी यादें! उन पलों की यादें जो हमने साथ बिताए थे! मैं उस समय ** साल की थी और मेरा भाई… वो ** साल का! पापा के जाने का जितना दुःख मुझे और मेरे भाई को था… उतना शायद मेरी माँ को नहीं था!”
उम्म्म्ह….. माँ को होगा भी कैसे! आखिर जैसा मालती ने अपने आशिक के साथ मिलकर प्लान किया था, सब कुछ बिलकुल वैसा ही हुआ था! मालती कॉलेज टाइम से ही इस तरह की खुराफात में सबसे आगे रही है! कॉलेज के समय अपने काम के लिए लड़कों को चूतिया बनाने में सबसे आगे थी! डीयू की बेशरम-बेहया- सुंदरियों में से एक! कॉलेज का इलेक्शन हो या फिर किसी इवेंट के लिए फण्ड रेजिंग, मालती सब जानती थी, कौन सा काम किससे और कैसे करवाना है! इस सबके साथ पढ़ाई में भी सबसे अव्वल रहती थी! कॉलेज में अपनी जवानी के खूब जलवे बिखेरने के बावजूद उसे अरेंज मर्रिज ही करनी पड़ी! मालती ने इस शादी के लिए हाँ बोली थी तो सिर्फ दौलत के लिए, वो भी अपनी माँ के हज़ार बार समझाने के बाद! मर्दों की पहचान थी मालती को! मर्द की नज़र से उसे पता चल जाता था की ये बिस्तर पे कितनी देर साथ देगा! पति से पहली मुलाकात में ही उसे पता चल गया की उसे शादी के बाद वो मजा नहीं मिल पायेगा जो मजा उसने शादी के पहले लिया है! खैर उसे और चाहिए भी क्या था… शादी तो एक लाइसेंस है , चुदवाने का! शादी के एक साल बाद ही मालती ने एक्स्ट्रा मैरिटल अफैर्स बनाने शुरू कर दिए,और अपने पति को इसकी भनक तक न लगने दी! पति की गैर मौजूदगी में दिल खोल के मजे लेती और जब मन भर जाता तो दूसरा अफेयर! शादी के 3 साल में ही उसे दो बच्चे हुए, मानसी और वरून!
चुदाई और बेवफाई का सिलसिला यूं ही चलता रहा….या यूँ कहें कि बच्चों के बाद थोडा कम हो गया! इस सबके साथ ही पति का बिजनेस भी काफी तरक्की कर गया था! बिजनेस के मामले में रंजन का दिमाग उसके लंड से काफी तेज़ चलता था!इस तरक्की के बीच उसने काफी दोस्त और दुश्मन बनाए! ऐसे ही दुश्मनों में एक था रमीज़! रमीज़, शराब के कारोबारी के रूप में जाना जाता था, शराब के साथ साथ कुछ और इल्लीगल धंधे भी करता था, जिसकी भनक सिर्फ उन्हें होती थी, जो उन काले धंधों से जुदा होता था! रियल स्टेट का बिजनेस रमीज की हेल्प के बिना नामुमकिन ही था! और यही कारण बना रमीज और रंजन की मुलाकात का! रंजन ने अनजाने में एक दो सौदे ऐसे किये थे जिससे रमीज़ के मामलो में दखल हुआ था! पर रमीज़ हर काम टेढ़ी ऊँगली से ही करता था! इसलिए उसने रंजन से दुश्मनी कभी जाहिर नहीं की! रमीज, पूरा नाम मो. रमीज़ खान,उम्र 35साल, 6 फुट का गठीला बदन! भूरी आँखे, जो किसी को घूर दें तो उसकी पैंट गीली हो जाए! 24 में से 2 घंटे जिम में बीतते थे उसके! सिटी के क्लब्स और पब्स में दारु की सप्लाई का ठेका उसी के पास था! ये सब उसने अपनी दबंगई से हासिल किया था! रियल स्टेट में किसी को कब्ज़ा लेना हो, या जमीन खाली करानी हो, सबको रमीज़ ही याद आता था! रमीज को पोलिटिकल सपोर्ट भी मिला हुआ था! इन सबके अलावा उसे एक और नशा था… चूत का नशा! हो भी क्यों न…. EDITED ने उसे इतना तगड़ा हथियार जो दिया था!

[अपनी दबंगई से हासिल किया था! रियल स्टेट में किसी को कब्ज़ा लेना हो, या जमीन खाली करानी हो, सबको रमीज़ ही याद आता था! रमीज को पोलिटिकल सपोर्ट भी मिला हुआ था! इन सबके अलावा उसे एक और नशा था… चूत का नशा! हो भी क्यों न…. EDITED ने उसे इतना तगड़ा हथियार जो दिया था! ]
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ये मौका था न्यू इयर का…. और न्यू इयर पार्टी कही और नहीं, रमीज के गुड़गाओं वाले फार्महाउस पे थी! रमीज ने अपने सभी दोस्तों और दुश्मनों(रंजन टाइप्स) को इनवाईट किया था! रंजन किसी भी पार्टी में अपनी वाइफ के बिना नहीं जाता था! उसे अपनी बीवी के साथ पार्टी करने में मजा आता था! और मालती भी एन्जॉय करती थी पार्टीज! आज मालती ने मैरून साड़ी पहनी हुई थी, हमेशा की तरह, साड़ी बेल्ली बटन से 2 इंच नीचे ही बंधी थी! ऊपर स्लीवलेस, डीपनेक और बेकलेस ब्लाउज! उफ्फ….मानो ऊपर वाले ने मालती को पार्टी में मर्दों का सामान खड़ा करने के लिए ही पैदा किया हो! गजब की माल लग रही थी आज वो! एक बार नज़रें लग जाएँ तो हटाने का दिल न करे! रंजन अपनी ब्लैक मर्सिडीज पार्क कर रहा था… और मालती अपने आप को अभी भी सजाने सवारने में लगी थी, कार के रियर व्यू मिरर में बार बार खुद को देख रही थी… जुल्फों को संवार रही थी…. रंजन बोला: ओह मालती, अब बस भी करो…. तुम अच्छी लग रही हो! मालती ने मुस्कुराते हुए कार का दरवाजा खोला, और रंजन की बाह में अपनी बांह डाल कर पार्टी की ओर चल दी! चूंकि पार्टी रमीज़ ने दी थी, इसलिए शहर के बड़े-बड़े लोगों का जमावड़ा लगा हुआ था, पार्टी फार्महाउस के लॉन में थी! लॉन के एक ओर जहाँ गजलों से माहौल बन रहा था वही दूसरी ओर फ़िल्मी गानों की बहार आई हुई थी! पर अब ये सब जैसे रमीज को सुनाई नहीं दे रहा था, वो तो अब देख रहा था…. आँखे फाड़ के पार्टी में अभी अभी आई रंजन की बीवी को ताड़ रहा था वो! रंजन ने जैसे ही रमीज को देखा वो अपनी बीवी के साथ उससे मिलने पंहुचा! रमीज का तो बस ईमान डोल गया मालती के ऊपर! रंजन ने रमीज से आकर हाथ मिलाया, पर रमीज ने उसे गले लगा लिया! गले लगाने की पुरानी आदत थी रमीज की! रंजन को अच्छा लगा जब रमीज ने उसे गले लगाया! “दिल मिलें न मिलें पर गले मिलते रहना चाहिए” रमीज का कुछ यही उसूल था!
रंजन: रमीज, ये मेरी वाइफ, मेरी साउल मेट “मालती”, मालती ये हैं रमीज, जिनके बारे में मैंने बताया था तुम्हे!
मालती: ओह हाई रमीज, नाईस टू मीट यू. एंड हैप्पी न्यू इयर इन एडवांस(अभी 12 नहीं बजे थे)
रमीज: हेल्लो मालती जी… पार्टी में शिरकत करने के लिए आपका शुक्रिया, आपने तो पार्टी की रौनक बढ़ा दी! (मालती से हाथ मिलाते हुए बोला)
मालती ब्लश करती हुई बोली: अरे आपने पार्टी दी थी तो आना तो था ही! (और स्माइल करने लगी)
रंजन: हाहा… रमीज मालती को पार्टी का बोहोत शौक है, और मुझे भी अच्छा लगता है पार्टी करना!
रमीज मुस्कुराया और “एक्सक्यूज मी” बोल के अपने कुछ ख़ास दोस्तों से मिलने चला गया! पर रमीज की नजरों में अभी भी मालती ही थी, नो मैटर वो किससे मिल रहा था और किससे बात कर रहा था! अब तक रमीज ने इतना तो डिसाइड कर ही लिया था की कुछ भी हो जाये एक बार तो मालती के मजे लेगा ही!
पार्टी का माहौल काफी अच्छा चल रहा था, सब मस्त थे, रंजन ने आदत से मजबूर होकर एक पेग आज फिर से जादा पी लिया, आँखे चढ़ी हुई थीं और मालती का टेम्पर भी थोडा हाई हो रहा था! किसी तरह रंजन बैठा हुआ था, और पार्टी में इधर उधर देख रहा था! मालती बोर हो रही थी और रंजन को वो सब सुना रही थी जो एक बीवी पति के शराब पीने पे सुनाती है! ऐसा नहीं था की मालती शराब नहीं पीती या अपने पति को शराब पीने से मन करती थी! दो टकीला अभी भी डाउन थी वो! पर अपनी लिमिट जानती थी! जाने भी कैसे न, इसी का फायदा तो कई बार कॉलेज में लड़कों ने उठाया था!
रमीज अभी भी मालती को ही देख रहा था! जब उसे एहसास हुआ की ये सही मौका है और उसे अब चौका मार देना चाहिए, वो मुस्कुराता हुआ मालती के पास पंहुचा!
रमीज़: एन्जोयिंग पार्टी?
मालती: हम्म….. या…. एन्जोयिंग! (फीकी सी स्माइल दी)
रमीज: आप दोनों यही बैठे बैठे एन्जॉय करेंगे या फिर आगे आके एन्जॉय भी करेंगे!
मालती: (रंजन की तरफ देखती हुई बोली) नहीं इनका मूड नहीं है, मैं यही ठीक हूँ!
पर रमीज ये मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहता था!
वो मुस्कुराते हुए बोला, “अरे इनके मूड के चक्कर में अपना न्यू इयर क्यों बर्बाद कर रही हैं आप, आइये 12बजने वाले हैं, और मैंने आपको चूज किया है न्यू इयर केक काटने के लिए!”
मालती के लिए ये किसी सरप्राइज़ से कम नहीं था…. वो रमीज को केक काटने से मन नहीं कर पाई! रमीज ने बिना देर किये अपना दायाँ हाथ आगे बढाया! जिसे मालती ने बिना देर लगाए थाम लिया! और उठ खड़ी हुई! मालती के चेहरे पे स्माइल थी! वो अपने ड्रंक हस्बैंड को वहीँ उसी टेबल पर छोड़ कर रमीज के साथ केक की ओर चली गई….
रमीज ने मालती के लिए अनाउंसमेंट किया, मालती के हाथ में वेट्रेस से लेकर नाइफ थमाई! पूरी पार्टी की नजरें मालती पर थीं! और मालती खुद को सेलेब्रिटी फील कर रही थी!
12 बज चुके थे, फार्महाउस के पीछे आतिशबाजी शुरू हो गई थी! और मालती ने भी केक काट दिया! केक का एक पीस काट कर उसने रमीज को खिलाने की फॉर्मेलिटी की…. पर रमीज मियां तो रमीज मियां थे, उन्हें तो कोई और केक ही दिख रहा था अपने सामने! रमीज ने अपना केक के साथ साथ मालती की उँगलियों को भी चांट लिया! जिसे मालती ने भी फील किया , और रमीज की नजरों से झलक रही हवस को डिटेक्ट करने में उसे पल भर का समय भी नहीं लगा! मर्दों की फीलिंग्स से खेलना मालती की पुरानी आदत थी! केक खिलने के बाद उसने रमीज को तिरछी नजरों से देखा और स्माइल दी! केक खिलाने की बारी अब रमीज की थी! रमीज ने एक बड़ा सा स्लाइस लिया और मालती के मुह की ओर अपना हाथ बढ़ाया मालती ने जैसे ही मुह खोला, रमीज ने सारा केक उसके मुह में भर दिया, जिससे केक मालती के गुलाबी होंटो पर भी लग गया! मालती ने रमीज की ओर देखते हुए अपने होंटो को अपनी जीभ से साफ़ किया! सभी लोग ताली बजा रहे थे, केक काटने की ख़ुशी मना रहे थे, पर मालती और रमीज तो जैसे किसी दूसरी दुनिया में खोये हुए थे! फिर मालती होश में आई और खुद को संभाला! पर उसके दिल में रमीज के लिए नॉटी कार्नर बन चुका था! रमीज ने भी अपनी नई रांड की पहचान कर ली थी, बस अब उसे कुछ संभले हुए क़दमों से आगे बढ़ना था, और अपना केक काटना था!

12 बजे के बाद मस्ती का शबाब जोरो पर था! मालती अब रमीज के साथ ही थी, वो पार्टी की अब चीफ गेस्ट जो बन गई थी! मालती की मुस्कान रमीज के लंड को बार बार खड़ा कर दे रही थी, जिसे रमीज किसी तरह से संभाले हुए था! रमीज भी अब बस मालती के साथ ही था! उसने मालती से कहा “डिअर हैप्पी न्यू इयर”…. हाँ दोनों एक दूसरे में इतना खो गए थे की एक दुसरे को न्यू इयर भी विश नहीं किया था! मालती ने मुस्कुराते हुए रमीज की ओर देखा और बोली “सेम टू यू रमीज जी, एंड थैंक यू सो मच फॉर गिविंग मी सच अ सरप्राइज़, आई वाज नोट एक्सपेक्टिंग दिस”
रमीज ने चालाकी से जवाब दिया “वैसे जिंदगी में कुछ चीजें अनएक्सपेक्टेड ही हों तो अच्छा रहता है… अब अगर आप ये सब पहले से एक्स्पेक्ट कर रही होतीं तो उसमे इतना मजा थोड़े आता, बस रंजन नहीं था साथ में, वरना और अच्छा होता”
“ओह… रंजन… उन्हें तो मैं भूल ही गई थी, कितनी बार बोला है मैंने इनसे, इतना न पिया करें, पर मानते ही नहीं, आई थिंक अब हमें चलना चाहिए…. रंजन को आराम की जरूरत होगी.. पार्टी का सारा मजा खराब कर दिया” मालती थोड़ी परेशान होती हुई बोली!
“ओह मालती जी.. अभी तो पार्टी शुरू हुई है और आप हैं की जाने की बात कर रही हैं, आप परेशान मत होइए, रंजन को अन्दर रूम में छोड़ दीजिये, और आप पार्टी के मजे लीजिये, वैसे भी आप ही तो आज की पार्टी की रौनक हैं” ये कहते हुए रंजन ने अपने एक नौकर को बुलाया और उसे रंजन को अन्दर ले जाने के इंस्ट्रक्शन दिए! और वो नौकर रंजन को अन्दर लेके चला गया!
मालती को इस खेल में मजा रा रही थी, वो नहीं जानती थी की वो आज किसी आशिक से नहीं, भेड़िये से खेल रही थी! रमीज उन लोगों में से है जिनका लंड उनके दिल से जादा तेज धड़कता है!
रंजन के अन्दर जाने के बाद मालती के अन्दर की मादकता बहार आने लगी, अब वो रमीज से खुल के बाते कर रही थी, और रमीज भी दिल खोल के मालती के हुस्न की तारीफों के पुल बाँध रहा था!
दोनों अब उसी कार्नर टेबल पर थे जिसमे पहले मालती रंजन को ताने मार रही थी, पर अब माहौल वो नहीं था! एक तरफ थी पार्टी की रौनक, रमीज के दोस्त कम दुश्मन की बीवी मालती, तो दूसरी तरफ था शहर का सबसे ताकतवर गुंडा, हवसी दरिंदा, चूत का पुजारी रमीज! जिस पर न जाने कितने बलात्कार के केस दर्ज होने से पहले ही दफन हो गए थे!
पर मालती को ये सब रंजन ने बताया कहाँ था, उसके सामने तो एक 6 फीट का हैण्डसैम-जवान मर्द था जो पिछले एक घंटे से उससे लगातार फ़्लर्ट किये जा रहा था! मालती भी खेल रही थी उससे!
रंजन की भारी कड़क आवाज का रुतबा उसे भा रहा था, उसे पता भी नहीं चला की कब उसके कोमल मखमली हाथों को रमीज ने अपने हाथों में थाम लिया और उसकी कोमलता को महसूस कर रहा था!
मालती एक टकीला और मार चुकी थी! रमीज ने मालती को डांस के लिए पूछा, मालती ने मुस्कुराते हुए रमीज के हाथों में अपना हाथ दे दिया…. अब दोनों डांस फ्लोर पर थे, म्यूजिक भी बदल गया था… कोई स्लो इंग्लिश जैज़ गाना माहौल को गरम कर रहा था! रमीज़ के दोनों हाथ मालती की नंगी कमर पर थे…. और मालती का एक हाथ रमीज के कंधे पर और एक उसकी चौड़ी छाती पर! मालती रमीज की गरम सांसों को अपने माथे पर महसूस कर रही थी! रमीज के हाथ मालती की मखमली कमर पे मालती को एक अलग एहसास दे रहे थे, मालती म्यूजिक के साथ अपनी कमर और पैरों को मूव करती, और रमीज अपने शरारती हाथों को! मालती को रमीज की शरारत में मजा आ रहा था, और आये भी क्यों न… इस तरह की शरारत उसके साथ एक लम्बे अरसे के बाद हो रही थी! म्यूजिक बदलते ही रमीज ने मालती को और करीब खींच लिया! अब रमीज का एक हाथ मालती के बैकलेस ब्लाउज की सिलाई पे था और एक हाथ से अब भी वो उसकी कमर को रगड़ रहा था! डिस्को लाईट में ये सब काफी रोमांटिक लग रहा था! पिछले 20 मिनट में रमीज ने मालती के जिस्म का काफी निरिक्षण कर लिया था! उसकी कोमलता, उसकी मादकता को भांप लिया था! मालती भी रमीज के कड़क मर्दानगी भरे अंदाज की कायल हो गई थी! रमीज ने उसे डांस में ही गरम कर दिया था! पर उसे अभी भी ऐसा लग रहा था की वो रमीज के साथ खेल रही है, वो कमर मटका मटका कर…. अपने कातिल डांस मूव्स से रमीज को टीज़ भी कर रही थी! रमीज के अन्दर का जानवर जग चुका था, अब उससे और सब्र नहीं हो रहा था…. उसने अपने दोनों हाथ मलती के चुत्तड़ो पर रखे और अपनी ओर खींच कर अपने लंड से चिपका लिया! मालती के लिए ये अन एक्सपेक्टेड था! उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या करे! रमीज के दोनों हाथ उसके चुत्तड़ो को भींच रहे थे…. मसल रहे थे वो भी भरी पार्टी में! उसने अलग होने की कोशिश की पर रमीज की पकड़ से निकलना किसी तितली के बस की बात नहीं थी! रमीज के हाथ मानो जैसे भैंस के थान से दूध निकाल रहे हों! रमीज धीरे से मालती के कान में फुसफुसाया “मालती जी… अन्दर चलें?”
एनकाउंटर तो बहुत बार हुआ था मालती का, पर इस तरह, इतनी बेशर्मी से, इतना डायरेक्ट आज तक किसी ने नहीं बोला था! पर वो भी बेचारी क्या करती रमीज मियां थे ही ऐसे! रमीज ने मालती के जवाब का इंतज़ार किये बिना, अपने बायें हाथ से मालती की कमर को थामा और उसे अपने साथ अपने मास्टरबेडरूम में ले गया! अन्दर पहुचते ही उसने मालती को पीछे से अपनी बाहों में ले लिया और अपने होंटो को उसके गले से लगा दिया! ऊपर रमीज के होंठ और जीभ मालती के गले और गालों को चूम और चाट रहे थे, तो नीचे रमीज का लंड मालती की गांड के साथ शरारत में बिजी था! मालती की साँसे उखड़ रही थी. अजब सी एक्सईटमेंट थी उसके अन्दर! वो बस रमीज के मजे ले रही थी! और रमीज उसके जिस्म का! रमीज ने उसके पल्लू को गिरा दिया और दुसरे ही पल ब्लाउज की डोरी भी खींच दी….. मालती का ब्लाउज अब नीचे पड़ा था! रमीज के एक हाथ में मालती की साड़ी का पल्लू था और दुसरे हाथ में मालती के बूब्स! बेकलेस और डीप नैक ब्लाउज की वजह से आज ब्रा नहीं पहनी थी उसने!
एक हाथ अब कमर से नीचे साड़ी के अन्दर पहुच चुका था! मालती की बेचैनी बढ़ रही थी… सांसे तेज़ हो चुकी थीं! उससे अब रहा नहीं जा रहा था… वो मुड़ी और रमीज के होंठो को चूम लिया…. उफ्फ्फ….. रमीज उसकी इस हरकत से पागल हो गया…..दोनों एक दुसरे को चूम रहे थे! मालती रमीज की शर्ट के बटन खोल रही थी, और अब उसके हाथ रमीज की पैंट पर थे! रमीज ने जल्दी से अपना पैंट खोला…. और मालती को नीचे घुटनों पे बैठा दिया….
मालती के सामने अब रमीज का तगड़ा लंड था…. (हम्म…. उसके लंड के लिए तगड़ा शब्द ही सही है….)
“आह…. मालती…. सिर्फ देखोगी या चूसोगी भी…..” और रमीज ने उसके मुह में अपना लंड ठांस दिया…. “औउ…. स्ल्र्रर्र्र…… स्रर्र्प… उम्म्म्ह… औऊऊऊऊऊउ….. गल्प….” मालती रमीज के लंड को पूरी सिद्धत के साथ चूस रही थी! लगभग 5 मिनट तक मालती का मुह छोड़ने के बाद रमीज ने अपने लंड से मालती को अलग किया और उसे उठने को बोला…. मालती के उठते ही…. उसकी झटके में साड़ी खींच दी…. मालती घूमती हुई बिस्तर तक पहुच गई… पेटीकोट का नारा रमीज ने पहले ही खीच दिया था…. तो साड़ी उतारते ही पेटीकोट भी नीचे सरक गया! मालती के जिस्म पे अब कुछ बचा था तो वो थी उसकी पैंटी! रेड कलर की पैंटी… मानो सांड को इनवाईट कर रही हो! रमीज को अपनी ओर आता देख मालती बिस्तर पे आ गई…..रमीज ने कूद के मालती को अपने नीचे दबा लिया….. रमीज का लंड मालती की जांघो के बीच था और दोनों हाथ मलती के दोनों हाथो को पकडे हुए थे! अपनी जीभ से मालती के जिस्म को चांट रहा था वो! कमरे में मालती की पायल और चूड़ियों की आवाज थी! मालती तड़प रही थी चुदवाने को…. रमीज तडपा रहा था… “उफ्फ….. कहा थी आज तक…. पहले क्यों नहीं मिली…..आह…… चूस रहा था…. चाट रहा था….. रमीज!”
“उफ्फ्फ…. आह…. और कितना तडपाओगे…. उम्म्ह…. अब कर भी दो न….. आह….” मालती रमीज से रिक्वेस्ट कर रही थी….. पर रमीज तो बस जिस्म के एक एक अंग का मजा लेना चाहता था… 1 घंटे तक चले इस फोरप्ले के बाद रमीज ने मालती की चड्ढी खींच कर उतार फेंकी…. और अपना लंड मालती की चूत में सेट किया….. “आआआअह…….मालती जोर से चिल्लाई…… और अपने हिप्स ऊपर उठा लिए…..” एक ही बार में पूरा का पूरा लंड रमीज ने ठांस दिया था…. .इतना तगड़ा लंड पहली बार गया था मालती की चूत में… धक्के धीरे धीरे तेज हो गए….. बेड हिल रहा था….. रमीज के धक्कों की गहराई इतनी थी कि मालती सातवें आसमान में थी! रमीज ने मालती को आधे घंटे तक चोदा…. इन आधे घंटों में मालती 3 बार झड़ी थी! रमीज ने अपना पूरा माल अपनी नै रांड की चूत में ही डाल दिया! और फिर मालती के ऊपर ही गहरी साँसे लेता हुआ गिर गया!

(02-22-2014 07:20 PM)  Penis Fire
रमीज ने अपना पूरा माल अपनी नै रांड की चूत में ही डाल दिया! और फिर मालती के ऊपर ही गहरी साँसे लेता हुआ गिर गया!

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मालती को आज जितना मजा आया था, उतना पहले कभी नहीं आया था! चुदी तो वो बहुतों से थी, पर चुदाई क्या होती है आज पता चला था उसे! हा कॉलेज में उसका एक ऐसा कमीना बॉयफ्रेंड हुआ करता था, पर जादा दिन तक मालती को उसका सुख नहीं मिल पाया था! शादी के बाद पहली सुहागरात मानो आज ही मनी थी मालती की! उस न्यू इयर की रात ही रमीज ने मालती को चार बार चोदा, और अपने लंड का दीवाना बना लिया! केक तो कट चुका था, पर बटना अभी बांकी था! रमीज के लिए मालती , रंजन मिश्रा की बीवी से जादा और कुछ नहीं थी! अब हर दूसरे-चौथे दिन मालती रमीज का बिस्तर गरम करती और रमीज उसे जैम के चोदता था! रंजन का ध्यान बस बिजनेस और पैसे पे था, दिन- रात मेहनत से धंधा काफी तरक्की कर रहा था! काफी प्रॉपर्टी बना ली थी रंजन ने अपनी मेहनत से! मालती के सर पर अब बस रमीज मियां का जादू था…. रमीज उसे रांड की तरह ट्रीट करता था… जिसमे मालती को बहुत मजा आती थी! प्यार में पागल थी….. उसके लंड के प्यार में….इस सबके चलते रंजन और मालती के रिश्तों में भी अब दरार आ गई थी, मालती रंजन से सीधे मुह बात नहीं करती थी, और रंजन के लिए अपनी बीवी के लिए टाइम नहीं होता था! रंजन की एक दो और डील से रमीज के काले धंधो को नुक्सान हुआ था इस बीच! अब केवल उसकी बीवी को चोदने से काम नहीं चलने वाला था! रमीज के शातिर दिमाग में कुछ और ही चल रहा था… जिसका बीज उसने मालती के दिमाग में भी डाल दिया! पहले मालती मर्दों को नचाती थी… ये पहला मर्द था जो उसे नचा रहा था… उसकी जिन्दगी को नचा रहा था! मालती अब अपने पति से छुटकारा पाना चाहती थी… दोनों बच्चे तो पहले से ही हॉस्टल में भेज रखे थे, मालती और रमीज के खुराफाती दिमाग ने रंजन को ख़तम करने का प्लान बनाया…. और प्लान के मुताबित रंजन की एक सड़क हादसे में मौत हो गई!
आह….. रमीज आज बहुत खुश था…. पर मालती? क्या वो खुश थी? नहीं… वो अभी अभी अपने पति के दाह संस्कार से लौटी थी! अपने कमरे में सुबक रही थी… रो रही थी… सोच रही थी कि ये क्या किया उसने! दोनों बच्चे भी रो रहे थे…. खैर ये सब जादा दिन तक नहीं चला! बच्चे वापस हॉस्टल लौट चुके थे! और मालती ने खुद को संभाल लिया था! उसे ये खुशी थी की ये हादसा हादसा ही रहा वरना अगर किसी को साजिश की भनक भी लग जाती तो वो कहीं की नहीं बचती!
नॉक-नॉक! दरवाजे पर किसी ने खटखटाया!
ये और कोई नहीं…. रमीज था…. रमीज आज पूरे 15 दिन बाद मिला था अपनी मालती से! वैसे तो मालती जाया करती थी रमीज के घर उसका बिस्तर गरम करने…. पर आज रमीज आया था उसके घर पे…. पहली बार…. सफ़ेद कुरते पैजामे में, आज शुक्रवार का दिन था, नमाज के बाद मस्जिद से सीधा मालती के घर आया!
रमीज को देख कर मालती ने तुरंत गले से लगा लिया! और 5 मिनट तक वो दरवाजे पर ही उसके गले लगी रही…. रमीज ने उसे अलग किया और दरवाजा अन्दर से बंद किया! उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी, उसकी ख़ुशी उसके चेहरे से साफ़ झलक रही थी… और आज वो उसी ख़ुशी को मनाने आया था!
उम्म्ह….. अगले ही पल उसने मालती का ब्लाउज खीच के फाड़ दिया और अपना कुरता भी उतार फेंका! “आह मेरी रानी…. अब बस तू मेरी है, सिर्फ मेरी” साड़ी उतारते भी रमीज को देर नहीं लगी…. आज रमीज उसे रंडी की तरह ट्रीट कर रहा था…. पैंटी भी इतनी तेजी से उतारी की वो भी फट गई….. वहीँ उसी जगह…. ड्राइंग रूम में….. खड़े खड़े….. अपना लंड मालती की चूत में डाल दिया और…. जानवरों की तरह चोदने लगा…..मालती ने न नुकुर करने की लाख कोशिश की पर वो नहीं माना…. मालती के चुत्तड रमीज के चांटो से लाल पड़ गए थे! ऐसे… इतनी बुरी तरह रमीज ने मालती को कभी नहीं चोदा था… मालती ड्राइंग रूम की फर्श पर पड़ी थी… और रमीज उसे वही छोड़ रहा था… रमीज का ये रूप आज तक नहीं देखा था मालती ने! “आह…. रमीज….. क्या कर रहे हो… आह…. छोड़ो न… आह……”
“चुप कर हरामजादी…. रंडी… रखैल है टू मेरी आज से…. जैसे दिल करेगा वैसे चोदुंगा तुझे, जब मन होगा तब चोदुंगा… समझी…..” रमीज का लंड मालती की बच्चेदानी तक जा रहा था!अआह्ह… उफ्फ्फ्फ़….. ऊओह्ह्ह…. आईई हयी माँ… मर गई….. मालती चुद रही थी!
रमीज ने अपना लंड निकाला….. और मालती को एक झटके में पलट दिया….. बारी अब गांड की थी! रमीज को अब इसकी चूत में मजा आना बंद हो गया था…. आज पहली बार उसने मालती की गांड पे लंड रखा था अपना…. जैसे जैसे लंड अन्दर जा रहा था.. मालती की आँखों से आंसू बहार आ रहे थे! आँखे और मुह खुला हुआ था…… वो रो रही थी… तड़प रही थी…… 20 मिनट तक रमीज ने उसकी गांड मारी….. और झड गया….. गांड से लंड निकाला और बोला… “आह मेरी रांड…. मजा आ गया तेरी गांड मरने में…… चल अब साफ़ कर मेरे लंड को….” मालती ने कोई रेस्पोंस नहीं दिया वैसे ही पड़ी रही जमीन पर…. रमीज उठा और उसे उसके बालों से पकड़ कर उठाया और अपने लंड तक उसका मुह ले गया “सुना नहीं… क्या बोला मैंने … साफ़ कर इसे….” और मालती ने न चाहते हुए भी उसका लंड साफ़ किया अपनी जीभ से….

रमीज ने अपना ये रूप आज तक मालती से छुपा कर रखा था….. मालती के पास अब रमीज की बात मानने और उसका बिस्तर गरम करने के अलावा और कोई रास्ता था भी नहीं!

मालती ने रमीज से शादी करने की इक्षा भी जाहिर की…. जिसे रमीज ने ये कहते हुए इनकार कर दिया की “तू मेरी रखैल ही सही है…”! मालती को अपनी रंडी बनाने में उसे अलग ही मजा आ रहा था!
रमीज ने धोके से सारी प्रॉपर्टी भी अपने नाम करा ली…मालती के पास अब केवल बैंक में लगभग 10करोड़ रुपये बचे थे… जिसका जिक्र उसने रमीज से कभी नहीं किया था…. वरना वो भी वो किसी तरह निकलवा ही लेता!
रमीज मालती को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करने लगा था…उनका लेग्पीस अब मालती हुआ करती थी…. रात में रमीज अपने दोस्तों के साथ मस्ती करने मालती के घर आता… मालती सबको दारु परोसती… वो सब ताश-जुआ खेलते और….. बारी बारी मालती को चोदते! मालती चुदवाने के अलावा और कर भी क्या सकती थी! धीरे धीरे उसे भी इसमें मजा आने लगी और वो उन्हें हसी ख़ुशी मजे देती…. उनके लिए मुजरा करती, स्ट्रिप डांस करती और फिर रंडी की तरह चुद्वाती!

रमीज का मन अब मालती से पूरी तरह भर चुका था… उसने अपने लिए दूसरा माल तलाश लिया था! मालती भी अब अपनी इस जिन्दगी से छुटकारा पाना चाहती थी!

मालती पे निशाना रमीज के अलावा एक और शख्स का भी था! ठाकुर रघुवीर सिंह! ठाकुर रघुवीर सिंह शहर के हवाला माफिया थे! काले कामो का बादशाह! पोलिटिकल पार्टीज का फण्ड स्विस बैंकों में ट्रान्सफर करना हो या फिर पैसा इधर से उधर पहुचना हो! रघुवीर की अन्दर तक पहुच थी! 48 साल का हट्टा-कट्टा इंसान! चेहरे पर तनी हुई मुच्छे! चौड़ा सीना! गठीला बदन! गले में मोटी सोने की चैन! पर्सनालिटी ऐसी कि उसे देख कर ही कोई बता दे कि कोई बड़ा आदमी है! हवाला का बिजनेस वो अपने टूरिज्म के बिजनेस के पीछे से चलाता था! उसके 8-10 5-स्टार होटल थे! अब होटल थे तो जिस्मफरोशी के धंधे में भी वो अपने पैर जमा चुका था!
ठाकुर और मालती की मुलाकात होली मिलन समारोह में हुई थी! जब मालती रमीज के साथ उसके घर होली मिलने पहुची थी! रमीज मालती को ऐसी जगह अपने साथ जरूर ले जाता था! मालती सफ़ेद साड़ी में किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी! रमीज की मेहनत अब मालती के जिस्म पर साफ़ साफ़ झलकती थी! बूब्स और गांड का साइज़ कब बड़ा हो गया इसका एहसास मालती को भी नहीं हुआ! वो आज भी साड़ी अपनी नाभि से 2 अंगुल नीचे से ही बंधती थी! रमीज का हाथ हमेशा उसकी कमर पर ही होता था! ठाकुर रघुवीर सिंह ने जब मालती को देखा तो वो उसकी तारीफ़ किये बिना रह नहीं पाए! नज़रें मालती के हुस्न का मुआइना कर रही थीं! रमीज को इस सब से कोई दिक्कत नहीं होती थी! आखिर मालती रांड ही तो थी उसकी, बीवी होती तो वो वहीँ आँखे नोच लेता! ठाकुर ने दोनों के गालो पर गुलाल लगाया और होली की मुबारकबाद दी! मालती ने भी अपने रंगीन अंदाज से ठाकुर को रंग लगाया, मालती के स्पर्श मात्र से ही ठाकुर का लंड हरकत में आ गया!
दोनों एक दुसरे को देखकर मुस्कुराए!

होली मिलन के बाद ठाकुर से रहा न गया और उसने रमीज से पूछ ही लिया!
“रमीज मियां माल अच्छा फसाया है आपने!” ठाकुर मुस्कुराते हुए बोला!
“रखैल है अपनी, वो रंजन था था…. उसकी बीवी है” रमीज बोला!
ठाकुर:“क्या बात कर रहे हो? वो रंजन की बीवी है?”
रमीज: “क्यों क्या हुआ? कोई ख़ास बात?”
ठाकुर: “नहीं नहीं….. वैसे अब रंजन की कमी खलती नहीं होगी बेचारी को” (मुस्कुराते हुए बोला)
रमीज: “हाहा…. सही फरमाया आपने… चिनाल है साली…. इतनी बड़ी रांड मैंने आज तक नहीं देखी, पति की मौत के 15 दिन बाद ही मेरा बिस्तर गरम करने चली आई थी”

ठाकुर: अरे मैंने सुना है तुम दुबई जा रहे हो?
रमीज: हाँ ठीक सुना है आपने, साला यहाँ बोर हो गया हूँ, सोच रहा हूँ एक दो महीने दुबई, मामू जान के साथ रह कर आऊँ!

(ठाकुर के मन में लड्डू फूटने लगे! मालती को चोदने का इससे अच्छा मौका और क्या हो सकता है)

ठाकुर: हाहा… सही है…. अच्छी जगह है दुबई! मालती को भी साथ ले जाओ!

रमीज: ना ना…. उस रांड की इतनी औकात नहीं की मेरे साथ दुबई जाए! वैसे मैंने सुना है की आपके होटल में एक नया माल आया है?
ठाकुर: हां… पर कीमत तगड़ी है उसकी… एकदम फ्रेश माल है…. **** एयरलाइन्स में एयर होस्टेस है साली… पार्टटाइम यहाँ बिस्तर गरम करती है!
रमीज: अरे आप कीमत की फिकर छोड़ो.. बस उसे आज मेरे हवाले कर दो… हमें भी तो अपनी होली थोड़ी रंगीन करने का हक है!

ठाकुर: हांहाँ क्यों नहीं… बस आधे घंटे में उसकी फ्लाइट आती ही होगी….. आप चाहो तो एअरपोर्ट से ही ले लो!
रमीज मुस्कुराते हुए बोला: आपकी यही बात तो मुझे अच्छी लगती है ठाकुर जी.. आप मना नहीं करते! अच्छा अब मैं चलता हूँ… अंग्रेजन लैंड करने वाली होगी!
मालती रमीज के दोस्तों के साथ बैठी थी! रमीज को पता था की अगर वो मालती को यहाँ छोड़ गया
तो उसके दोस्त उसके साथ रात रंगीन करने का मौका छोड़ेंगे नहीं! रमीज के दिमाग में एक खुराफात सूझी…. वो आज की रात मालती को ठाकुर के साथ छोड़कर जाने के बारे में सोच रहा था! रमीज ठाकुर के होटलों में कई बार रंडियां छोड़ चूका था, दोस्ती की वहज से ठाकुर कभी पैसे नहीं लेता था! एअरपोर्ट के रस्ते से ही उसने ठाकुर को फ़ोन मिलाया और मालती का ख्याल रखने के लिए बोला!

समझदार के लिए इशारा ही काफी होता है! ठाकुर को ये समझने में देर नहीं लगी कि रमीज क्या कहना चाहता है! और फिर ठाकुर भी तो यही चाहता था! उसने मालती को तुरंत इशारा करके अपने पास बुलाया! मालती रमीज के दोस्तों के पास से उठती हुई ठाकुर के पास आई! कमर मटकाते हुए, हलकी सी मुस्कान लिए मालती को अपनी और आता देख ठाकुर तो जैसे घायल ही हो गया! मालती का गुदार मांसल जिस्म जैसे ठाकुर के लंड के लिए वियाग्रा का काम कर रहा था! ठाकुर ने मालती के सामने ही अपने लंड को गंजी के अन्दर अडजस्ट किया! ठाकुर की इस हरकत पे मालती मुस्कुरा दी! ठाकुर की ठसक भी रमीज से कुछ कम नहीं थी! ठाकुर ने मालती को देखा और वो भी मुस्कुराया और मुड़ के अन्दर जाने लगा! मालती ठाकुर के पीछे पीछे आ रही थी! ठाकुर मुड़ा और मालती को अपने पीछे आता देख मुस्कुराया और सीधे अपने बेडरूम की ओर चला गया! मालती भी ठाकुर के पीछे पीछे ठाकुर के बेडरूम में पहुच चुकी थी, या यूँ कहें की शेर के पिंजड़े में हिरनी खुद चल के आई थी! दोनों अब बेडरूम में थे, ठाकुर बेड के बगल में पड़े काउच पे बैठा था… और मालती खड़ी थी! मालती ठाकुर को देख रही थी, और ठाकुर मालती को! 2 मिनट तक शांत रहने के बाद मालती बोली “ऐसे क्या देख रहे हैं आप मुझे….” ठाकुर के चेहरे पे शैतानी मुश्कान थी…. “सोच रहा हूँ… कहाँ से शुरू करूँ…”…. मालती शर्मा गई…. अपनी नजरें उसने नजाकत के साथ झुका लीं! ठाकुर फिर मुस्कुराते हुए बोला…. “आय-हाय… क्या अदा है…. जरा अपना पल्लू तो गिरा…”
मालती मुस्कुरा रही थी… नजरें नीचे थी उसकी…. “बेहेन की लौड़ी… सुनाई नहीं दिया तुझे…. पल्लू गिरा अपना….” ठाकुर ने अपनी मर्दानगी भरी आवाज में कहा….. मालती ने फट से अपना पल्लू सरका दिया.. “साली नीचे क्या देख रही है…. ऊपर देख….. यहाँ… मेरे लंड पे…..” ठाकुर का लंड हवा में लहरा रहा था…. मालती की नजरें अब ठाकुर के लंड पे थीं… ठाकुर ने इशारा किया और मालती अगले ही पल उसके पास थी….. ठाकुर ने साड़ी की पट्टियों को अपनी मुट्ठी में थामा और एक ही झटके में पूरी साड़ी नीचे जमीन में आ गई…. पेटीकोट का नारा ठाकुर ने अपने दांतों में दबा के खीचा…. उफ्फ्फ…. ऊपर से जितनी ब्लैक एंड वाइट थी… अन्दर से उतनी ही रंगीन थी आज वो… आज भी उसने लाल चड्ढी पहनी हुई थी….. ऊपर मैचिंग लाल ब्रा…. मालती का एक पैर अब ठाकुर की जान्घो के बीच रखा था…. ठाकुर उसके गोरी टांगो पे अपने हाथ फिरा रहा था! मालती भी गरम हो रही थी… उसने अपना ये पैर पीछे किया और दूसरा पैर ऊपर रख दिया…. ठाकुर उसके गोरे पैरों को चांट रहा था… ठाकुर अब पीछे हटा और अपने दोनों हाथो से मालती की कमर को थमा और उसे घुमा दिया…. मालती की गांड अब ठाकुर के सामने थी….. लाल पैंटी मालती की गांड को और भी सेक्सी बना रही थी! ठाकुर ने पैंटी की आउटलाइन पर अपनी उंगलियाँ फेरीं और फिर उसने उसकी पैंटी की इलास्टिक पकड़ कर खींच दी…… मालती ने अपनी टांगो से पैंटी को नीचे सरका दिया! मालती अब ठाकुर की गोद में थी! ठाकुर ने अपने लंड को मालती की गांड से दबा लिया था….. वो उसकी पीठ चूम रहा था…. दोनों हाथ मालती की कोमल चूचियों पे थे…. मालती की हालत खराब हो रही थी… वो बेचैन हो रही थी…. ठाकुर पूरी सिद्धत से मालती के जिस्म का मजा ले रहा था! “आह मालती…. मेरी जान….” ठाकुर अब बूब्स चूस रहा था… मालती की चूत पे अब ठाकुर का लंड था……
ठाकुर ने मालती को गोद में उठाया और सामने पड़े बेड पे पटक दिया…. और खुद मालती के ऊपर चढ़ गया….. दोनों हाथ मालती की गांड को मसल रहे थे…. और लंड, चूत के अन्दर जाने को तैयार था! ठाकुर ने तीन झटकों में पूरा लंड मालती के अन्दर कर दिया! बिना कंडोम के चुदवाने की मालती की आदत हो गई थी…. क्योंकि रमीज कभी कोंडोम नहीं लगाता था! ठाकुर का पूरा लंड मालती के अन्दर था…. मालती हलके हलके से अपनी गांड को उठा कर लंड के मजे ले रही थी…. फिर ठाकुर ने भी धक्के लगाने शुरू किये….. मिशनरी पोजीशन में मालती को इतना मजा कभी नहीं आया था जितना ठाकुर के साथ आ रहा था…. ठाकुर का बालों से भरा सीना, मालती के बूब्स को रगड़ रहा था….. मालती का बायाँ कान ठाकुर के मुह में था….. मालती के दोनों हाथ ठाकुर की पीठ पर! और ठाकुर के दोनों हाथ मालती के चुत्तडों को मसल रहे थे! “उफ्फ्फ…… आःह ऊऊउ….. उई मा….. मर गेई आआह्ह्ह…. हाँ आः…….” पूरे कमरे में बस यही आवाजे गूँज रही थी! ठाकुर झड़ने वाला था….. मालती अब तक 2 बार झड चुकी थी…. थाकुर ने अपना वीर्य मालती की चूत में ही रिलीज़ कर दिया…. ठाकुर हांफता हुआ मालती के ऊपर गिर गया…. मालती भी ठाकुर को अपनी बाहों में जकड़े जकड़े सो गई!

उधर रमीज ने भी अंग्रेजन एयर होस्टेस को जम के हर पोज़ में रात भर चोदा! आज उसे काफी दिनों के बाद ऐसी कड़क चूत और चुदवाने वाली मिली थी! जाहिर था कि अब वो मालती के पास दुबारा जाना नहीं चाहता था! उसे मलती को खुद से दूर करने का एक बहाना चाहिए था! और फिर अब मालती का क्या काम था उसकी जिन्दगी में! अपने दुश्मन, मालती के पति रंजन को तो उसने 6 महीने पहले ही हटा दिया था! और मालती को चोदने में उसे वो मजा भी नहीं आता था!
“आह…. छोडिये न…. उफ्फ्फ…. कल रात से 6 बार ले चुके हैं आप मेरी…” मालती कामुक अंदाज में ठाकुर से बोल रही थी…. “चुप कर…. अभी तक तो तेरे पति की पुरानी करतूतों का हिसाब ले रहा था तुझसे… अभी और भी हिसाब लेना है तुझसे….” ऐसा बोलते हुए एक बार फिर से लंड मालती की चूत में था… और धक्के तेज़ हो गए थे…. मालती भी चूतड़ उठा उठा के चुदवा रही थी…
ठाकुर एक रात में ही मालती का दीवाना हो गया था… वो अब उसे अपने पास से जाने नहीं देना चाहता था… पर रमीज से दुश्मनी लेना भी कोई समझदारी नहीं थी!
सुबह फिर से दो बार चोदने के बाद उसने मालती को उसके घर भेज दिया! ठाकुर की चुदाई की मालती भी कायल हो गई थी! रमीज दोपहर में अपने चार दोस्तों के साथ सीधे मालती के घर जा धमका! दरअसल हुआ ऐसा कि रमीज के दोस्तों ने मालती की ठाकुर के साथ रात रंगीन करने की बात मिर्च मसाला डाल के रमीज को सुनाई! अब रमीज अपने दोस्तों से ये तो नहीं बता सकता था कि उसने खुद मालती को ठाकुर के हवाले किया था! इससे दोस्तों पर गलत इम्प्रैशन!
“हां भाई जान… ये हमें अकेला छोड़ के उस भडवे ठाकुर का बिस्तर गरम कर रही थी” अफजल बोला…
“क्यों रांड… चूत में इतनी खुजली हो रही थी?” “मेरे बाद तुझपे केवल और केवल मेरे दोस्तों का हक है….” रमीज ने मालती के बाल पकडे और धक्का देकर अफजल के पैरों पे गिरा दिया!
“आह….. क्या कर रहे हैं आप…. आप भी तो कही गए थे मुह मारने…. मैंने तो कभी नहीं कहा आपसे की आप पर केवल मेरा हक है” मालती फर्श पर आधी लेती हुई बोली….
“जवान लड़ाती है रमीज भाई से…..” “चटाक…..” “चट्ट” दो थप्पड़ अफजल ने मालती के गालों पर जड़ दिए…..
“हाँ…. क्या गलत कहा मैंने….” मालती चिल्लाती हुई बोली… उसकी आँखों से आंसू निकल रहे थे….
“चुप होजा साली रांड…. वरना…..” रमीज बोला
“वरना… वरना क्या?? क्या वरना? मालती चिला रही थी!
रमीज का गुस्सा सातवे आसमान पे था…….वो मलती को घसीटता हुआ अन्दर बेडरूम तक ले गया…. और जाकर बेड पर पटक दिया…. अगले ही पल मालती पूरी नंगी थी….. रमीज ने भी अपना अंडरवियर उतारा और फेंक दिया! रमीज का अंडरवियर बीएड के बगल में टेबल पर मालती और रंजन की शादी को फोटो के ऊपर जा गिरा! दोनों हाथ बेरहमी से मालती के बूब्स मसल रहे थे…. लंड चूत में था…… मालती के गाल पर बीच बीच में चांटे भी पड़ रहे थे! आखिर गलती तो मालती ने की थी! ठाकुर से चुदवाने की नहीं… पर रमीज के दोस्तों को अकेला छोड़कर जाने की! और उसके बाद रमीज से जवान लड़ाने की! और इसकी सजा भी उसे मिल रही थी! रात भर अंग्रेजन को चोदने के बाद रमीज के लंड में वो ताकत नहीं बची थी! 10 मिनट में ही झड़ गया और मालती के मुह पे थूकते हुए कमरे के बाहर निकल गया! मालती बिस्तर पर वैसे ही पड़ी रही!
रमीज के बहार जाते ही बेडरूम के बाहर उसके दोस्तों के चेहरे पर मुस्कान आ गई… क्योंकि बारी अब उनकी थी…. चार के चारो अब बेडरूम में थे और रमीज घर से निकल गया था! मालती अब रमीज के जालिम दोस्तों के हवाले थी! आज उसकी हालत जीबी रोड की कुतिया से भी बुरी होने वाली थी! रमीज के जाने के बाद वहां का बॉस अफजल था! अफजल और बाकी के तीनो कमीनो ने मालती की गांड और चूत जम कर मारी! 4 घंटे तक मालती कभी मुह में लेती तो कभी गांड में…. कभी तिरछी होके चुद रही थी तो कभी कुतिया बनाई जा रही थी! कल रात से अब तक वो कितनी बार चुदी थी ये उसे भी याद नहीं था! रमीज के दोस्त शाम सात बजे उसे बेहाल करके उसके घर से निकल लिए!

सोमवार का दिन था , मालती आज भी हर सोमवार की तरह सुबह पार्क आई हुई थी! पर आज ठाकुर भी आया हुआ था! मालती सीढ़ियों से उतर रही थी और ठाकुर चढ़ रहा था! मालती ने ठाकुर को नहीं देखा , पर ठाकुर की नजर से खूबसूरती बाख कर नहीं जा सकती थी! ठाकुर ने मालती का हाथ अपने हाथ में थाम लिया ! मालती ठाकुर को देख लगभग लड़खड़ा गई…. उसके घुटने कमजोर पड़ने लगे! उसे पिछली बार की सजा याद आ गई जो रमीज ने उसे उस रात के बाद दी थी…. मालती ने हाथ छुड़ाने की नाकाम कोशिश की….! ठाकुर मुस्कुराता हुआ बोला…. “प्रसाद नहीं खिलाओगी?” “छोडिये मुझे… रमीज को पता चल गया तो छोड़ेंगे नहीं वो मुझे”
“अजी हम कौन सा छोड़ देंगे आपको… अब प्रसाद खाए बिना तो जाने नहीं देंगे हम” शैतानी अंदाज में ठाकुर अपना मुह मालती के कान के पास लता हुआ बोला!
“वैसे भी रमीज मियां तो आज की रात दुबई जा रहे हैं… फिर फिकर किस बात की?” “हमारी मर्दानगी में कोई लचक है क्या?”
मालती की चूत गीली हो रही थी….. ठाकुर मालती को लेकर सीधे अपने बंगले पंहुचा… पूरे 8 महीने बाद मिली थी वो उससे…. इन आठ महीनो में मालती के लिए ठाकुर की प्यास और भी बढ़ गई! ऐसा नहीं है की ठाकुर ने मालती से मिलने की कोशिश नहीं की थी इन आठ महीनो में…. पर मुलाकात हो नहीं पाई….. मालती ने आज अपनी जिन्दगी की सारी किताब ठाकुर के सामने खोल कर रख दी! ठाकुर कुतिया पालने का शौक़ीन था! और नई कुतिया उसके बिस्तर पर थी! ठाकुर के आंड मालती के मुह में थे! मालती आज ठाकुर को खुश कर देना चाहती थी! क्योंकि एक ठाकुर ही था… जो अब उसे रमीज और उसके दोस्तों से दूर भागने में मदद कर सकता था! ठाकुर चोदता था, मगर प्यार से…. ठाकुर बिस्तर के बाहर औरत की बहुत इज्ज़त करता था! चाहे वो उसकी कुतिया ही क्यों न हो! वैसे तो वो मालती को धंधे पे भी लगा सकता था.. पर उसके दिमाग में कुछ और था! हीरे की पहचान थी ठाकुर को! रंजन मिश्रा की बीवी को वो सारी जिन्दगी अपने अन्डो के नीचे ही रखना चाहता था! दो बार चुदने के बाद मालती ठाकुर के जिस्म तले दबी लेती थी…. ठाकुर की पीठ को सहला रही थी! ठाकुर अलग हटा और सीधा टाँगे पसार के लेट गया! मालती अब ठाकुर की छाती के बालो को सहला रही थी! ठाकुर के कंधे पर मालती का सर था! “आप कितने अच्छे हो” मालती ने मस्का लगाना शुरू किया! “ उम्म्ह… अच्छा तो मैं हू ही…. पर क्या तुम अच्छी नहीं बनना चाहती?” मालती सुन रही थी… ठाकुर के छाती के बालो से खेल रही थी…. उसकी एक टांग ठाकुर के लंड पे थी! “कब तक उस रमीज का बिस्तर गरम करती रहोगी? सारी जिन्दगी है तुम्हारे सामने… अपने बच्चो के बारे में सोचो”!
“और कर भी क्या सकती हूँ मैं…. कैसे निकलूं इस जाल से…..” मालती फुसफुसाई.. और अपनी टांग से ठाकुर के लंड को दबा दिया!
“मैं निकालूँगा तुझे…. चिंता क्यों करती है…. रंजन मेरा दोस्त था…. और तुम उसकी बीबी हो… तो मेरा भी कुछ फर्ज बनता है या नहीं?”
“पर रमीज… वो भी तो दोस्त ही था रंजन का” मालती बोली!
“हाहा…. किसने बोला तुमसे… सारा शहर जानता है…. कि तेरे पति और रामीज की कभी नहीं बनी… और तो और लोग तो यहाँ तक बोलते हैं की रंजन का एक्सीडेंट रमीज ने ही करवाया था”
मालती शांत थी… अब वो कैसे बताती कि इस काली करतूत में उसका भी हाथ था!
“मालती.. देख तेरे दो बच्चे है… वो भी अब बड़े हो रहे हैं… तेरी बेटी…. जो दिल्ली में है… पढ़ रही है… अगले साल कॉलेज में दाखिला लेगी… तेरा बेटा.. कभी तो लौट के आएगा हॉस्टल से…
कैसा लगेगा उन्हें… जब वो तुझे रमीज और उसके दोस्तों का बिस्तर गरम करते देखेंगे…”
मालती सुन रही थी…. और ठाकुर बोल रहा था…. ठाकुर की बीवी मइके गई हुई थी… इसलिए आज मालती ठाकुर के बिस्तर पर ही चुदी थी!

“और रमीज का दिल तो कब का तुझसे भर गया है…. इधर उधर मुह मरता घूमता है”
ठाकुर की बातें मालती के दिल में बैठ रही थीं….. मालती ने अपने बाकी दुखड़े भी दिल खिल कर ठाकुर को बता दिए! मालती को पता भी नहीं चला कब वो रमीज की रांड से ठाकुर की पालतू कुतिया बन गई थी!

“और आज रात रमीज तुझे अपने दोस्तों के हवाले करके दुबई जाने वाला है…. क्या तू उसके उन दो कौड़ी के दोस्तों का बिस्तर गरम करेगी अब? अरे रंजन की कुछ तो लाज रख”

“अब आप ही बताओ क्या करू मैं” मालती बोली…
“आह… ये हुई न बात.. चल पहले तो मेरा लौड़ा चूस… फिर बताता हूँ तुझे क्या करना है!”
मालती मुस्कुराई और उठते हुए ठाकुर का लौड़ा चूसने लगी….. पर मालती का ध्यान आज ठाकुर के अन्डूओं पर जादा था…. वो जानती थी… की उसके अन्डू चूसने पर ठाकुर को अलग मजा आएगा…..
“तो आज रात तू मेरे होटल अपना सामन लेकर आ जाना…., तुझे अब उस घर में रहने की कूई जरूरत नहीं है…. मैं उस घर को बिकवा दूंगा….. वहां रहेगी तो रमीज के दोस्त तुझे परेशान करते रहेंगे!”
मालती सुन रही थी और ब्लोजॉब दे रही थी…..
“जॉब करेगी.. होटल में?”
मालती लौड़ा चूसती रही!
“नया होटल खोला है मैंने देहरादून में… एक मैनेजर की जरूरत है”
मालती ठाकुर को अपने मुह से खुश करने में लगी थी…… वो बस सुन रही थी..

“चल अब ऊपर आ….” ठाकुर बोला…
मालती मुड़ी और ठाकुर के लंड पे बैठ गई…. और झुक के ठाकुर को चूम लिया…. ठाकुर ने अपने हाथ से मालती के बालों को पीछे किया…. और फिर लंड को मालती की चूत पे सेट किया….

ठाकुर आराम से पैर पसार के लेता था…. लंड मालती की चूत में था… मालती कूद रही थी…..
चूतड़ हिला हिला के ठाकुर के लौड़े का मजा ले रही थी…. ठाकुर दोनों हाथो से मालती के बूबों की मसल रहा था!
मालती अपनी चूत में ठाकुर की के लौड़े की एक एक नस को महसूस कर सकती थी…
जन्नत क्या होती है कोई इस वक्त ठाकुर से पूछता…. उफ्फ… वो बस बेड की बाई दीवार पर लगे फुल साइज़ मिरर में अपनी और मालती की कामलीला देख रहा था……
मालती कामसुख में कोई कमी नहीं रहने देना चाहती थी…. मालती अपनी गांड ऐसे हिला रही थी जैसे ठाकुर के फौलादी लंड से मालती अपनी चूत की दीवारों को खुजा रही हो….
“आह… मेरी जान…. इरादा क्या है?” ठाकुर मस्ती में बोला….
“ओह…ठाकुर जी….. उम्म्ह….. उफ्फ्फ…. अआह…..” कुछ बोलना चाहते हुए भी मालती कुछ नहीं बोली…. और लंड पे और तेज़ी से उछलने लगी….
ठाकुर भी मालती की इस हरकत से मस्ती में आ गया और दोनों हाथो से मालती से चुत्तडों को पकड़कर नीचे से धक्के लगाने लगा…..
कुछ देर यूँ ही ड्रिलिंग करने के बाद……
“उफ्फ्फ…. मेरी जान….. अह….” जोश में ठाकुर ने मालती को अपने नीचे दबा लिया…. अब मालती नीचे थी… ठाकुर ऊपर था…
“आउउह…….. उम्म्ह…..” मालती कसमसाती हुई ठाकुर के जिस्म तले दबी हुई थी…. ठाकुर का लंड अभी भी उसकी चूत में ही था….
ठाकुर कभी मालती के दायें कान को चबाता तो कभी बाएं कान को…. मालती ने भी दो चार लव बाईट ठाकुर के सीने और गले पर बना दिए थे….
ठाकुर मालती को अपनी फेवरेट मिशनरी स्टाइल में चोद रहा था…. मालती के दोनों हाथ ठाकुर की पीठ पर थे… और ठाकुर के दोनों हाथ मालती की पीठ पर….. ठाकुर ने मालती को अपने जिस्म में जकड रखा था… और नीचे कूल्हे हिला हिला के चोद रहा था…..
कमरे में मालती की आंहे गूँज रही थीं….. “आह… ऊह… उफ्फ…. ठाकुर जी….. आह….”
लगभग 20 मिनट तक धक्के लगाने के बाद अब ठाकुर का लंड मालती की चूत के अन्दर वाईब्रेट कर रहा था…ठाकुर का पानी निकलने वाला था….. दोनों ने एक दुसरे को और जोर से जकड लिया…. चूत के अन्दर ही धीरे धीरे लंड हिलाते हुए ठाकुर झड़ गया….. ठाकुर के वीर्य को महसूस करते हुए मालती एक बार फिर झड़ गई….
दोनों पिछले 10 मिनट से उसी पोजीशन में लेते थे जिसमे वो झड़े थे…

“ओह…. ठाकुर जी… हटिये न….” मालती सेक्सी आवाज में फुसफुसाई…..
ठाकुर अब मालती के बगल में लेता था…. और उसकी खूबसूरती को निहार रहा था!
“अब आप मुझे इज़ाज़त देंगे? खा लिया प्रसाद आपने?” मालती ठाकुर की आँखों में झांकते हुए प्यार से बोली….
“अरे EDITED…. अभी कहाँ….. अभी तो सिर्फ पूजा की है”
“ओहो आप भी न…. रमीज को आज दुबई जाना है… सी ऑफ़ तो कर लेने दीजिये”
“हां जाओ जाओ….रमीज मियां को सी ऑफ करना तो बनता है… पर ध्यान रखना कहीं रमीज के दोस्त तुम्हे सी न करने लगें” ठाकुर ने मालती की चुटकी लेते हुए कहा!
मालती मुस्कुराई… ठाकुर के सीने पर किस किया और उठ कर अटैच्ड बाथरूम में घुस गई,
बाहर आकर साड़ी पहनी और ठाकुर को किस करके चली गई!
ठाकुर आज बहुत खुश था… रंजन की बीवी को दूसरी बार चोदा था आज उसने वो भी दिन के उजाले में….. उससे भी जादा ख़ुशी उसे इस बात की थी की चिड़िया अब उसके जाल में थी….
ठाकुर बिस्तर पर तो औरत को अपने अन्डू के नीचे रखता था… पर बिस्तर के बाहर, एक सभ्य इंसान की तराह औरत की इज्ज़त भी करता था… अपनी इसी काबिलियत के चलते उसकी चाहने वालियों की कमी नहीं थी!

मालती सीधे रमीज के घर ही पहुची…. साथ में प्रसाद भी था… ये हर सोमवार का नियम होता था… मालती सुबह सुबह पार्क जाती, वहाँ से सीधे रमीज के घर जाती, रमीज को प्रसाद देने…. अब रमीज को किस प्रसाद में जादा दिलचस्पी थी… आप लोग अब तक समझ ही चुके होंगे…
आज भी मालती सीधे उसके घर पहुची… पर आज वो पूरे 4 घंटे लेट थी… रमीज आज जी भर के मालती को चोदना चाहता था… पर 4 घंटे का वेट उससे हो नहीं पाया… तो उसने अपनी सेक्रेटरी चांदनी को ही चोद लिया था! अब वो घर से निकल रहा था…. एअरपोर्ट के लिए…. मालती को देखा तो उसके चेहरे पर गुस्से के साथ मुस्कान भी आ गई…. मालती को उसने अपने साथ गाड़ी में बैठाल लिया! अफजल ड्राइव कर रहा था…. मालती और रमीज पीछे की सीट पर थे… मालती रमीज से चिपक कर बैठी हुई थी…
“कहाँ थी अब तक हरामजादी?”
“जी वो मंदिर में भीड़ बहुत थी आज…. और आते समय रस्ते में जाम भी मिल गया था”
“सजा तो तुझे मिलेगी इसकी…”
“उम्म्म….. आपकी हर सजा मंजूर है आपकी इस रांड को”
“आह… ये हुई न बात.. चल फिर देर किस बात की… हो जा चालू…”
मालती मुस्कुराई और रमीज के पैंट से लंड निकाल कर चूसने लगी….
रमीज ने कार के अन्दर ही मालती के बाल पकड़ के उसके मुह को चोदा…. और फिर मालती ने रमीज के लंड को अपनी जीभ से साफ करके वापस पैंट में दाल दिया!
“मैं 2 महीने में वापस आ जाऊंगा….तब तक तेरा ख्याल अफजल रखेगा…”
“मैं अपना ख्याल खुद रख सकती हूँ”
“चुप कर हरामन…. बोला न अफजल रखेगा तेरा ख्याल…”

एअरपोर्ट आ गया…. रमीज ने आखिरी बार मालती के चूतडों को मसला…. और उसके गाल में जोर का थप्पड़ मारा…. “अफजल… समझी….. सिर्फ और सिर्फ अफजल…. वही रखेगा तेरा ख्याल…. तू यही बैठ और अफजल के वापस आने का वेट कर… ”अफजल और रमीज एअरपोर्ट के अन्दर चले गए….
अफजल जब बाहर वापस आया तो मालती गायब थी!

मालती ने जैसा एक्स्पेक्ट किया था वैसा ही हुआ… मालती मौका पाते ही तुरंत गाड़ी से निकली और सीधे ठाकुर के घर पहुच गई… ठाकुर मालती तो देख कर मुस्कुराया…. और मालती ठाकुर के गले लग गई!

मालती ने ठाकुर को सब कुछ बता दिया….
“तुम्हे अब वह जाने की कोई जरूरत नहीं है….”
पर तुम यहाँ भी नहीं रह सकती…. आज रात में मेरी फैमली वापस आ जाएगी!

ठाकुर ने मालती को अपने एक होटल के कमरे में ठहरा दिया!
अफजल ने मालती को ढूँढने की बहुत कोशिश की.. पर वो उसे नहीं मिली!

“जानेमन…. अब तू मेरी है… सिर्फ मेरी”
रूम नंबर 21669 में ठाकुर अपनी नई रांड, मालती को चूमता हुआ बोल रहा था!
रूम नंबर 21669, यही था मालती का नया पता! पिछले 15 दिनों से मालती इसी सूट में थी! ठाकुर दिन में कम से कम एक बार मालती से मिलने जरूर आता था!
“हाँ ठाकुर जी….. अब मैं सिर्फ आपकी हूँ….” कामुक अंदाज में मालती ठाकुर के गले में हाथ डालती हुई बोली!
इन 15 दिनों में ठाकुर ने मालती को बहुत से सपने दिखाए थे!

“और कितने दिन मुझे यहाँ रहना होगा?”
“तुझे यहाँ कोई परेशानी है क्या?
“नहीं मैंने ऐसा कब कहा… पर फिर भी… कब तक रहूंगी मैं यहाँ…”
“हाँ…. सही कह रही है… कब तक रहेगी तू यहाँ!”
“वो आप कुछ देहरादून वाले होटल की बात कर रहे थे…..”
“हाँ मेरी EDITED….. तू ही है उसकी मनेजेर! कल हम वही चल रहे है….”
“सच्ची….” मालती खुश थी…. वो फिर से अपनी जिन्दगी जीने जा रही थी… एक आजाद तितली की तरह
“हाँ मेरी जान सच्ची”
मालती ने ठाकुरके चेहरे पे 4-5 किस जड़ दिए…. ठाकुर मालती को देख रहा था…
किसी ने सच ही कहा है…. सेक्स औरत को और अधिक ख़ूबसूरत बना देता है! मालती भी दिन ब दिन माल होती जा रही थी! चुदक्कड माल! रमीज ने उसके जिस्म पे खूब मेहनत की थी! रमीज के बाद अब ठाकुर भी कुछ कम वर्कआउट नहीं कर रहा था EDITED पर!
इन 15 दिनों में ठाकुर ने मालती को अपनी ठकुरई का दीवाना बना दिया था….. मालती ने ठाकुर के लिए वो सब कुछ किया जो एक औरत मर्द को खुश करने के लिए कर सकती है! और फिर ठाकुर ये सब डिजर्व भी तो करता था… मालती को नइ जिन्दगी देने वाला वो ही तो था!
ठाकुर भी खुद पे गर्व महसूस कर रहा था…. रंजन मिश्रा की बीबी अब उसका बिस्तर जो गरम करती थी… (रंजन दिमाग का तेजा था… इन सब के सर पे पैर रख कर तरक्की की थी उसने…. शहर में दोस्त से जादा दुश्मन बनाये थे उसने, अब उसे नहीं चोद सके तो उसकी बीबी ही सही)

ठाकुर और मालती चुदाई ख़तम करके एक दुसरे की बाहों में लेटे थे!
“कल देहरादून चल रहे हैं हम… सुबह जल्दी तैयार रहना…”
“जैसी आपकी आज्ञा ठाकुर जी”
ठाकुर मुस्कुराया और मालती की गांड पे धीरे से चपेट मारी, “बड़ी मस्ती सूझ रही है आज कल तुझे”
अच्छा सुन…. “देहरादून का होटल अभी मेरे पापा देख रहे हैं… उनकी उम्र हो गई है… तो मैं चाहता हूँ की अब तू वहाँ मनेजर बन जा… कोई अपना देखने वाला होना चाहिए….. अब तू तो जानती ही है… इतने सारे होटल हैं… मैं नहीं चाहता की बिजनेस लोस में जाए! वहां सारा स्टाफ पहले से है… बस तू वहाँ ऑफिस में ज्वाइन कर ले….एज बॉस! पापा हरिद्वार जाने का बोल रहे है… अब तू ही वहां की मालकिन है! देहरादून में एक सरकारी बंगला भी लीज़ पे मिला हुआ है हमें… तो तू वहां आराम से रह सकती है!”
मालती सुन रही थी….
“समझ रही है न…. मुझे पता है तू संभाल लेगी”
“पर ध्यान रखियो… गलती बर्दाश्त नहीं है मुझे”
मालती: “उम्म ठाकुर जी… पर मैं आपके बिना….”
ठाकुर: “हाँ भोसड़ी की… तूने अभी तक की जिन्दगी मेरे साथ ही तो गुजारी है जैसे…”
“अरे परेशान मत हो… मैं तुझसे मिलने आ जाया करूँगा”
ठाकुर ने मालती का सर पकड़ के अपने लंड के सामने कर दिया….. मालती ने ठाकुर के अन्डू मुह में भर लिए….. ठाकुर नीचे शेव नहीं करता था!
एक बार फिर से चुदाई हुई!
और फिर ठाकुर मालती को कमरे में छोड़ कर घर चला गया!

आज सोमवार का दिन था…. अफजल आज भी पार्क के सामने इस आस में खड़ा था की मालती आएगी! हाहा… पर उस बेचारे को क्या पता था कि मालती अब कभी नहीं आने वाली!

टोयोटा फोर्चुनर की ड्राइविंग सीट पर ठाकुर था… और बगल वाली सीट पर मालती! दोनों देहरादून जा रहे थे! मालती एक्साइटेड थी! ठाकुर को मलाल था मालती को अपने से दूर करने का…. पर ठाकुर कब तक उसके और अपने रिश्ते को दुनिया से बचाता…. वो बात नहीं थी कि ठाकुर के किस्से लोगों को पता नहीं थे… पर फिर भी वो खुद को एक इज्ज़त दार हरामी मानता था, और वो था भी!
लगभग 5 घंटे के सफ़र के बाद गाड़ी होटल के गेट पर घुस रही थी! गार्ड ने गेट पर सल्यूट ठोंका!
गाडी से उतरते ही होटल की हॉस्पिटैलिटी टीम की मेनेजर प्रिया ने दोनों क ग्रीट किया! प्रिया ही अभी यहाँ का काम देख रही थी! (ठाकुर का बाप एक न. का नशेड़ी और आलसी था… वो कभी कभी थी होटल आता था! अपने दोस्तों के साथ मस्ती करना उसका टाइमपास था!)
अन्दर जाते ही ठाकुर ने मालती को उसका ऑफिस दिखाया… और बाकी स्टाफ को बुलाकर सबको ये बताया की आज से मालती ही यहाँ की मनेजर है!
फिर यहाँ से निकल कर ठाकुर मालती को उसके नए घर पे ले गया! और मालती को घर पर छोड़ कर् वापस घर को निकल लिया, जाते जाते जल्दी वापस आने का वादा जरूर कर गया! इस घरमें मालती के साथ प्रिया भी रहेगी!

उम्म्ह… जानती हूँ आप लोगों से मानसी की कहानी के लिए सब्र नहीं हो रहा…. मुझे बहोत से प्राइवेट मैसेज भेजे आप लोगों ने इस बारे में….. तो आपकी रिक्वेस्ट को टाल नहीं पाई…. मम्मी की कहानी मैं आपको बीच बीच में बताती रहूंगी… तो ये लीजिये पेश है…..

मानसी… अब तक 19 साल की हो चुकी थी, इसी साल उसने XXXX यूनिवर्सिटी के एक कॉलेज में पोलिटिकल साइंस में एडमिशन लिया था! अपनी निजी जिन्दगी के चलते मालती ने उसे हमेशा अपने से दूर ही रखा! हैदराबाद में मानसी को अब अच्छा लगने लगा था!
मानसी… कॉलेज के लड़कों में उसके कॉलेज के पहले दिन से ही चर्चे हो गए थे! अब उन बेचारों का भी क्या कसूर वो थी ही इतनी माल… 5’6 की हाईट… जो की आम लड़कियों से उसे अलग करती थी… अपनी माँ पर गई थी बिलकुल….. जब वो चलती तो नजरें उसकी मटकती गांड पर होती…. चाल ऐसी कि उफ्फ…. क्या बताऊँ…. 32b 26 34 फिगर… उसे कॉलेज की मोस्ट एलीजिबल रांड बनता था! बॉयज हॉस्टल में न जाने कितने लड़कों के लैपटॉप और मोबाइल के वॉलपेपर पे उसकी फोटो होती थी! अभी कॉलेज में आये 2 महीने ही हुए थे! अपनी क्लास के लड़के उसे बिलकुल मग्घू लगते थे! दिव्या और तनीषा….. इन दो महीनो में दो सहेलियां बनी थीं उसकी… वो भी मानसी की तरह ही माल थीं…. दिव्या… जो कि नासिक से थी…उसका नासिक में ही एक बॉयफ्रेंड था! और तनीषा… वो मस्त लड़की थी…. आजतक रिलेशनशिप के चक्कर में कभी नहीं पड़ी…. ! तीनो एक साथ पीजी में रहती थीं…! मानसी को स्कूल टाइम से ही बहोत से लड़कों ने प्रपोज़ किया था… पर ऑफिशियली उसने किसी का भी प्रोपोजल एक्सेप्ट नहीं किया था! उसका एक क्लोज फ्रेंड था स्कूल में…. पर किस्सी के आगे उसने उसे कभी बढ़ने नहीं दिया था!
तीनो एक नंबर की चालू लड़कियां थी…. कॉलेज आते ही पहले हफ्ते में… एक-एक पिल्ला तीनो ने बुक कर लिया था….क्लास के ही तीन चूतिये… उनके पैसों से कैन्टीन-ब्यूटीपार्लर का खर्चा निकाल लेती थी तीनो… वो भी बिना एक किस दिए! किस तो दूर- हाथ तक नहीं लगाने दिया था उन चूतियों को! बस पिज़्ज़ा डिलीवरी बॉय बना रखा था! वो बेचारे भी क्या करते- हुस्न है ही ऐसी चीज़- जो न कराये वो कम है! लड़कों के मामले में तीनो की अपनी पसंद थी! हो भी क्यों न… डिमांड जो इतनी थी! किसी ने ठीक ही कहा है- डिमांड भाव बढ़ा ही देती है! दिन में कॉलेज में मस्ती करना…. फिर पीजी में आके दिव्या अपने बॉयफ्रेंड के साथ फ़ोन पर लग जाती थी! और तनीषा और मानसी- दोनों फेसबुक में! डेली की 20-30 फ्रेंड रिक्वेस्ट! चम्पू से लेकर डैशिंग ड्यूड तक सब रिक्वेस्ट एक्सेप्ट होने का इंतज़ार करते रहते! और तनीषा और मानसी…. किसकी एक्सेप्ट करें किसकी न करें.. इसी में कन्फ्यूज रहती थीं! एक दो चूतियों ने डायरेक्ट अप्रोच भी किया था… पर उन्हें वो लड़के नहीं चाहिए थे! जादा डिमांड वाली लड़की को जादा डिमांड वाला लड़का ही पसंद आता है! एक दो लड़कों को स्पॉट किया था दोनों ने… पर उन्होंने तो जैसे उन्हें भाव ही नहीं दिया! कॉलेज में होके बॉय-फ्रेंड नहीं बना तो कॉलेज में पढना ही वेस्ट है! डेली का यही रुटीन होता था दोनों का… एक दो नमूनों से चैट भी होती थी… अब टाइमपास के लिए कोई तो चाहिए न! अगले महीने कॉलेज में फेस्ट है… और फेस्ट का जनरल-सेक्रेटरी कौन होगा… इसका डिसीजन अभी तक नहीं हुआ है… फाइनल इयर का हर भौकाली लड़का जनरल-सेक्रेटरी बनना चाहता है! इस रेस में कई घोड़े दौड़ रहे थे! पिछले 2-4 हफ़्तों में दो चार बार हॉकी चल चुकी थी.. 5-6 के सर भी फुट चुके थे! आप सोच रहे होंगे की जेन सेक के लिए इतना सब कुछ? वो इसलिए क्योंकि जेन-सेक(जनरल सेक्रेटरी) बनने के कई फायदे थे, कॉलेज फण्ड से पैसे कमाने का ये एक मात्र तरीका था… जेन-सेक आराम से 4-5 लाख रुपये तो निकाल ही लेता था! उसके अलावा जेन सेक का जो भौकाल होता था वो अलग! दूसरे कॉलेज की माल बंदियों से इंटरेक्शन होता था वो अलग! कोई भी इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहता था! राजन प्रताप सिंह… जिसे पूरा कॉलेज “राका” के नाम से जनता है…उसने आखिर इस रेस को जीत ही लिया! राका… कॉलेज की स्टूडेंट काउन्सिल का हेड भी है! राका- कॉलेज की वन ऑफ़ द फेमस पर्सनालिटी… आल राउंडर था वो! फुटबॉल और स्विमिंग में पूरे कॉलेज में उसका मुकाबला करने वाला कोई नहीं था! 5’11 इंच हाईट… और जॉन अब्राहम टाइप बॉडी! लड़कियां जान छिड़कती थी उसपे, और वो भी कोई मौका हाथ से जाने नहीं देता था 😛 ! माल सेट करने के मामले में राका का कोई मुकाबला नहीं था! राका डीन के ऑफिस से निकला ही था… की उसके दोस्तों ने सवालों की झड़ी लगा दी… क्या हुआ? क्या हुआ? पास हुआ प्रोपोज़ल? बोल न…. राका के मुस्कुराते ही सारा माहौल ख़ुशी में बदल गया! उसके दोस्तों ने उसे कंधे पे उठा लिया! सब नाच रहे थे! ख़ुशी मन रहे थे.. राका के जेन सेक बनने की! राका और उसके ख़ास दोस्त… अफाक, हर्षित और दीपाली स्टूडेंट एक्टिविटी सेंटर में बैठे थे! दीपाली टेबल पर बैठी थी…. और राका उसके सामने कुर्सी में….. दीपाली की जाँघों को अपने हनथो से सहला रहा था…. दीपाली ने आज मिनी स्कर्ट पहनी हुई थी…. हरर्षित और अफाक भी पास में भी बैठे थे… और आगे की प्लानिंग कर रहे थे! नहीं नहीं….. गलत मत समझिये…. दीपाली राका की गर्लफ्रेंड नहीं है…. ! हाँ वो राका के पीछे जरूर पड़ी है….. जिसका फायदा राका उठा रहा है….!

अफाक- राका.. आगे क्या प्लानिंग करनी है?
राका- (दीपाली की जांघ पर हाथ फिराते हुए..) अबे यार हो जाएगी प्लानिंग… मैं तो ये सोच रहा हूँ… की फर्स्ट इयर से कौन कौन सी माल लौंडियों को अपनी कोर टीम में लूं! हर्षित- हाहा…. मैं भी तब से यही सोंच रहा था….
राका- साले तू क्या सोच रहा था? जेन सेक मैं हूँ या तू…?
हर्षित- अरे मेरा मतलब वही था यार…
अफाक- भाई देख… कोई हो न हो… दो लड़कियां तो होनी ही चाहिए कोर टीम में…
हर्षित- कौन दो बे?
अफाक- अबे वही दो बे…. जिनके पास अभी भी भाई की फ्रेंड रिक्वेस्ट पेंडिंग है… और हर्षित अफाक और दीपाली तीनो जोर जोर से हसने लगे…… राका- चल बे… बहोत ले ली तुम लोगो ने मेरी… अब बस भी करो! (दरअसल हुआ ये था… की जब राका को तनीषा और मानसी के हुस्न का दीदार हुआ तो उसने भी रिक्वेस्ट भेजी थी…. जो कि अभी तक दोनों ने एक्सेप्ट नहीं की थी) राका- हर्षित तुम स्पोंसोर्स का काम देखोगे… 4 लोगों की टीम बनाओ और जिसे भी अपनी टीम में रखना है रख लो…. और अफाक … तुम प्रमोशन का काम देखोगे… तुम भी 4 लोगों की टीम बनाओ, और हाँ उन दोनों को मेरी टीम के लिए छोड़ देना…. फिर चारो हसने लगे….. दीपाली- मैं भी कुछ करना चाहती हूँ… राका- हाँ दीपा डार्लिंग….. मेरा भी करने का बहोत मन कर रहा है राका, हर्षित और अफाक जोर से हँसे…. दीपाली- क्या राका …. तुम मेको कभी तो सीरियसली ले लिया करो…. राका- यार जब भी लेता हूँ सीरियसली ही लेता हूँ… तू भी न दीपाली- राका…. मैं उसकी बात नहीं कर रही… राका- ओह दीपा…. अब दिमाग मत खा मेरा… बहोत काम है मेरे पास.. कुछ करना ही है तो अभी यहाँ से चली जा… दीपाली- ठीक है जा री हूँ… राका- ओहो…. जानेमन… अभी कहाँ जा रही है… जा तो हर्षित और अफाक रहे हैं! हर्षित और अफाक राका का इशारा समझ गए, और राका के मजे लेते हुए निकल लिए! अब SAC(स्टूडेंट एक्टिविटी सेंटर) में केवल राका था… और उसके साथ थी दीपाली…. कम समय का सही उपयोग करते हुए…. राका ने दीपाली को 15 मिनट में ही रगड़ डाला! और फिर दीपाली SAC में राका को अकेला छोड़ कर चली गई! दीपाली के जाते ही, हर्षित और अफाक अन्दर आ गए! हर्षित- भाई मैंने नोटिस लगवा दिया है कि जो भी फेस्ट में वालंटियर करना चाहता है तेरे से कांटेक्ट करे, साथ में तेरा ईमेल एंड नंबर भी दे दिया है! राका- नाईस जॉब! बाकी प्लानिंग डिस्कस करने के बाद तीनो हॉस्टल चले गए!

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