बित्चवंती – डॉटर ऑफ़ ए बित्च part 2

राका अभी जिम से लौटा था… आज वो अपना फोन जिम ले जाना भूल गया था….
12 मिस काल्स…. अरे यार रिषभ…. इसे तो मैं बताना ही भूल गया….

राका तुरंत कालबैक करता है-

रिषभ- ओये कांग्रेट्स यार…. कहा था?

राका- थैंक्स भाई…. वो जिम में था… सेल रूम पे ही रह गया था….

रिषभ- अच्छा सुन…. आज पार्टी है… मेरे फ्लैट पे..

राका- पार्टी किस बात की? और तू दे रहा है पार्टी?

रिषभ- हाहाहा… दे नहीं ले रहा हूँ… और हाँ…. ब्लैक डॉग साथ लेके अइयो….

राका- यार ब्लैक डॉग तो मैं ले आऊंगा, पर तू कही से एक बिच का इंतजाम और कर देता तो मजा आ जाता…

रिषभ- हाहा… भाई हूँ तेरा….. वो लॉ कॉलेज वाली बंदी आ रही है…. बस पेमेंट आज तू ही करियो पूरी!

राका- ओये होए…. तू तो सच में मेरा भाई निकला….

राका शावर लेके सीधे रिषभ के फ्लैट पंहुचा……

टिंग टोंग….

टिंग टोंग….

टिंग टोंग….

टिंग टोंग….

टिंग टोंग….

रिषभ ने दरवाजा खोला….

दोनों ऐसे गले मिले कैसे बरसों बाद मिले हों…. वो दोनों हमेशा ऐसे ही मिलते थे….!

राका- कहा है बे? जसप्रीत कहा है?

रिषभ- अरे मेरे चोदू भगत…. आ रही है… अभी एक घंटे लगेंगे उसे यहाँ तक आने में….. वो आज उसका बॉयफ्रेंड आया हुआ था न मुंबई से… इसलिए देर लग जाएगी उसे आने में!

राका- हाहा…उस रंडी का भी बॉयफ्रेंड है?

रिषभ- हाहा…. अब है तो है…. क्या फर्क पड़ता है….

राका- साले आज कॉलेज क्यों नहीं आया था? बड़ा मजा आया आज…

रिषभ- हाँ पता चला मुझे…. कल से आऊंगा डेली

राका- हाहा… पता है… तू नहीं आने वाला….. दिन भर तो सोता है तू

रिषभ- अब क्या करें लोग रात में तो सोने नहीं देते…

राका- चल पेग बना….

रिषभ- अरे मेरे दोस्त इन्नी जल्दी क्या है…. अपनी रांड को तो आ जाने दो…. उसी से बन्वावेंगे पटियाला पेग!

राका- भेन्चो साले, क्या माल है वो… साली रंडी न होती तो उसे गर्लफ्रेंड बना लेता मैं!

रिषभ- हाहा… कमिटेड है साली…

राका और रिषभ दोनों हँसे!

राका का फ़ोन बजा…….

राका- हेलो…

उधर से कोई लड़की बोली- जी आप राजन सर बोल रहे है?

राका- हाँ…. आप कौन?

उधर से- सर मैं मानसी…. पोलिटिकल साइंस 1st इयर से……

राका- मानसी…. उम्म्म….. मानसी ?

मानसी- हाँ मानसी , कांग्रेचुलेशन सर….

राका- ओह थैंक यू थेंक्यू डिअर…

मानसी- सर वो मैंने नोटिस देखा… I am interested for volunteering… सो आई कॉल्ड यू!

राका- ओह… नाईस… अच्छा किया तुमने फोन करके…. मानसी… अभी मैं बिजी हूँ… कल कॉलेज में तुम मुझे SAC में मिलो… सुबह 11बजे… We will talk there…

मानसी- ओके सर…. थैंक यू वैरी मच…. ब-बाय!

राका ने फ़ोन डिसकनेक्ट कर दिया!

मानसी से बात करने भर से राका का लंड तन गया था…..

राका- अबे वो मानसी का फ़ोन था….. 1st इयर वाली

रिषभ- क्या बात कर रहा है?

राका- आये हाय… क्या सेक्सी आवाज थी….. जितना सेक्सी उसका फिगर है उतनी सेक्सी उसकी आवाज…. उफ्फ

रिषभ- चल बे…. तेरी फ्रेंड रिक्वेस्ट तक तो उसने एक्सेप्ट नहीं की थी….. हाहा

राका- अब मेरा लंड भी एक्सेप्ट करेगी भाई….. उसे तो मैं बॉयज हॉस्टल में चोदुंगा…..

रिषभ- यार माल तो मस्त है साली…. एक बार मिल जाए तो माँ कसम…. कच्चा चबा जाऊं साली को!

राका- कंट्रोल कंट्रोल…. अभी तो जसप्रीत को चोदना है….. आगे की आगे देखेंगे….. (राका के मन में लाड्डो फूट रहे थे…. अभी भी अपनी जेब में हाथ डाल के लंड सहला रहा था)

टिंग टोंग… डोरबेल बजी…

डोरबेल के साथ दोनों के लंड की घंटी भी बजी….. राका जल्दी से दरवाजे की और भगा…. और दरवाजा खोला….

दरवाजा खोलते ही राका की आँखे खुली की खुली रह गई….

सामने जसप्रीत खड़ी थी… हॉट पैन्ट्स और ऊपर स्लीवलेस टॉप…. उफ्फ… बला की खूबसूरत लग रही थी… होंटों पे चेरी रेड लिपिस्टिक…. गालों पे नेचुरल लाली…. आये हाय….

जसप्रीत- ओह राका…. यू…? व्हाट एन सरप्राइज़….. रिषभ ने मुझे बताया ही नहीं…

राका… अब तक जसप्रीत के पीछे आ चूका था….. अरे जस्सो डार्लिंग…. डोंट यू लाइक सर्प्रिज़ेस? और पीछे से जसप्रीत की गांड में अपना खड़ा लंड मसलने लगा…

जसप्रीत- ओह मेरे पहले कोई और भी थी क्या यहाँ?

राका- अरे जस्सो ये तो तेरे स्वागत में खड़ा हो गया….

रिषभ- अरे मेरे भाई… अब सब दरवज्जे पे ही कर लेगा क्या? आजा मेरी जस्सो रानी…

जसप्रीत- ह्म्म्म…. आ गई रिशू… आ गई….

रिषभ- अब आ ही गई है तो पटियाला पेग भी बना दे हमारे लिए….

जसप्रीत किचेन से ग्लासेज एंड आइस क्यूब ले आई….. और राका और रिषभ के बीच में बैठ के पेग बना रही है!

राका ने एक आइस क्यूब लिया और जस्सो के टॉप पे दाल दिया…. जस्सो दोनों हाथो से उसे अपने टॉप से निकालने की कोशीश करने लगी…… तभी राका ने दारू की बोतल ली और जसप्रीत को दारू से नहला दिया….. पूरे दो खम्भे जसप्रीत के ऊपर….

जब तक जसप्रीत कुछ समझ पाती…. दोनों…. उसपे टूट पड़े….

राका की हवस आज कुछ जादा ही हाई थी…. मानसी से बात करके…. और रिषभ तो था ही हवसी!

खींचतान में जस्सी के सारे कपडे फट गए… और वो अब सैंडविच बनी हुई थी….. राका और रिषभ उसे चोद रहे थे….. बारी बरी से दोनों ने उसकी गांड भी मारी….. EDITED की गांड मारे बिना कोई कैसे रह सकता है…. दोनों ने उसे सुबह के तीन बजे तक चोदा… फिर तीनो उसी बिस्तरपे सो गए!

सुबह जस्सी ने उठ के दोनों को जगाया…..

जस्सी- मोबाइल को देखते हुए पेमेन्ट अभी तक मेरे अकाउंट में नहीं पहुची है….

रिषभ- अभी हमने भी कोण सा तेरी चूत जी भर के चोदी है…

और जस्सी फिर से रिषभ की बाहों और जाँघों के कब्जे में थी!

राका को कॉलेज जाना जरूरी था इसलिए वो निकल लिया……

(जस्सी के बारे में मैं थोडा आपको बता दूं…. जस्सी रिषभ के दोस्त की बहन है…. जो लॉ कर रही है…. सच तो यह है… की रंडापा कर रही है… शहर की टॉप रेटेड कॉल गर्ल कब बन गई उसे भी नहीं पता चला…. रिषभ और राका उसे अक्सर चोदते है…. वो भी आधे दाम पे…. भाई के दोस्त का डिस्काउंट )

उधर मानसी और तनीषा की रात बेचैनी में ही गुजरी…. दोनों एक दुसरे को राका के लिए टीज़ कर रही थीं… और आज रात दोनों ने फ्रेंड रिक्वेस्ट भी एक्सेप्ट कर ली थी….. सुबह दोनों डेली से जल्दी उठ गई थी!
मानसी ने आज रेड कलर का टॉप पहना है और नीचे ब्लू कलर का जांघ के ऊपर तक का हॉट पैंट! खुले बालों में जबरजस्त लग रही थी आज! उसकी गोरी टाँगे किसी के भी लंड में अकड़ पैदा करने के लिए काफी थीं! और ये बात वो भी जानती थी! वो राका को कॉलेज के पहले दिन से ही जानती थी! पर वो राका को जानती थी…. राजन प्रताप सिंह को नहीं…. यही कारण था कि उसने राका की FB रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नहीं की थी! राका का असली नाम कम लोग ही जानते थे….. !
ठीक 11 बजे दोनों लडकियां सैक में पहुच गईं… अन्दर राका मानसी के इंतज़ार में ही बैठा था…. पर उसे ये नहीं पता था… कि मानसी, तनीषा को भी साथ लेके आएगी…. दोनों ने अन्दर आके स्माइल के साथ राका को हाय बोला…..
राका ने उन दोनों को हाय बोलकर सामने चेयर्स पे बैठने को बोला…

राका- सो तुम हो तनीषा एंड तुम हो मानसी….
दोनों चहकती हुई बोली….. हाँ सर
राका- ओह प्लीज़… देखो पहले तो ये सर बोलना बंद करो… वे अरे गोइंग टू बी इन सेम टीम…. राका बोलोगी तो अच्छा लगेगा मुझे….
मानसी- हाँ वैसे भी “राका” किसी “सर” से कम थोड़े है…. आपका तो नाम ही काफी है कॉलेज में!
तनीषा- एग्जेक्ट्ली…
राका- हाँ…. तो तनीषा और मानसी… मुझे अपनी कोर टीम में 1st इयर से केवल एक लड़की चाहिए…
दोनों के चेहरे पे मायूसी छा गई…..
राका- ओह डोंट बी सैड गर्ल्स…. तनीषा….. तुम कॉमन रूम जाओ और अफाक से मिलो… बोलो मैंने तुम्हे भेजा है..
तनीषा थोड़ी मायूसी के साथ उठी… और ओके बोल के कॉमन रूम चली गई…
अब कमरे में सिर्फ मानसी और राका बचे थे…
राका- सो मानसी… अपने बारे में बताओ कुछ.
मानसी- उमम्म….. आ…. और एक सांस में अपना पूरा फॉर्मल इंट्रो अंग्रेजी में बता डाला!
राका- (थोड़ा इम्प्प्रेस्सेड) ओह…. नाईस…. अपनी होबीज़ बताओ…
मानसी- मुझे गाना अच्छा लगता है…. मैं डांस भी करती हूँ….. स्पोर्ट्स में बास्केटबाल खेलती हूँ… और बेस्ट हॉबी…. दोस्तों के साथ मस्ती करना
राका- ओह… डांसिंग एंड सिंगिंग….. अभी कर सकती हो डांस?
मानसी- व्हाई नॉट… लेकिन मुझे यहाँ कहीं म्यूजिक सिस्टम नहीं दिख रहा…
राका- अरे यार…. तम्हे गाना आता तो है… फिर म्यूजिक सिस्टम की क्या जरूरत?
मानसी- मुस्कुराती हुई बोली….. स्मार्ट हाँ
राका- वेट किसका कर री है यार….. शुरू होजा…
मानसी धीरे से उठी…. और अपनी परफॉरमेंस शुरू की….
“जरा जरा टच मी…. टच मी… टच मी….. जरा जरा….”
राका की आँखों में हवस साफ़ टपक रही थी…. और फिर रेड टॉप और हॉट पैंट में मानसी लग भी तो माल रही थी! और ऊपर से जरा जरा टच मी टच मी…..
राका के लिए कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था…..
मानसी ने जब परफॉर्म करना बंद किया तो राका वापस होश में आया…. और ताली बजा कर मानसी की तारीफ़ की!
मानसी- हाउ वाज़ इट?
राका- मजा आ गया….. यू अरे अ गुड डांसर मानसी….
मानसी…. देखो…. अब तुम मेरी टीम में हो…. फेस्ट की कोर टीम में….! तो तुम्हे मेरे टच में रहना होगा…. फेस्ट की तैयारियां यहीं इसी सैक में होंगी…. तुम्हे इसके बारे में इन्फोर्मेशन मिल जाएगी! एंड हाँ…. तनीषा …. मैंने उसे मार्केटिंग टीम में अफाक के साथ रखा है…!
मानसी- इट्स ओके सर…. वैसे भी वो दिन भर मेरे पीछे पीछे लगी रहती है… बोर हो गई हूँ उससे मैं
राका- ओहो… फिर सर…. बोला ना…. मुझे पसंद नहीं है…. तू मुझे अपना दोस्त मान सकती है!
मानसी- ब्लश करती हुई! ओके…. तो फ्रेंड्स…. और अपना कोमल हाथ राका से मिलाने को आगे बढ़ा दिया….
राका ने उसके कोमल हाथ हो थामने में एक सेकेंड भी नहीं लगाया…..
राका- हाँ तो आज से हम फ्रेंड्स है…. अब अगर तूने मुझे सर बोला तो सजा मिलेगी… समझी…. (मजाक करते हुए राका ने कहा)
मानसी- ओके सर…..
राका के ने मानसी के सर बोलते ही मानसी का हाथ अपनी हथेली से दबा दिया…

“आआऊच……. ऊउईईइ….” मानसी चिल्ला उठी…..
राका ने हसते हुए अपनी पकड़ ढीली की….. “बोला था न… सजा मिलेगी”
मानसी- अच्छा जी… अब नहीं बोलूंगी…..
राका- गुड गर्ल….
मानसी स्माइल कर रही थी….
उसका हाथ अभी भी राका के हाथ में ही था…. और वो उसके कोमल हाथ को सहला रहा था… महसूस कर रहा था….
राका- कहाँ रहती हो? हॉस्टल में तो दिखी नहीं कभी?
मानसी- वो मैं पीजी में रहती हूँ…. हॉस्टल में वो रैगिंग वैग्गिंग का….
राका- चल पगली….. अब नहीं होती रैगिंग-शैगिंग….
मानसी- झूठ बोल रे हो… मेको पता है… होती है
राका- हाँ जानेमन… होती है… होती है… पर अब तू मेरी फ्रेंड है…. अब भूल के भी नहीं लेगा कोई तेरी….
(इतनी जल्दी जानेमन? मानसी को मजा आ रहा था)
मानसी- ओहो…. अब क्या… अब तो मैं पीजी में ही रहूंगी ना…. बीच में हॉस्टल थोड़े न आ जाउंगी
राका- हाँ…. ये बात तो है… काफी पीयेगी?
मानसी- नहीं…….. मैं कॉफ़ी नहीं पीती…. आइस टी पी लूंगी….
राका- लेट्स गो कैंटीन….
मानसी ने अब राका का हाथ पकड़ा हुआ था…. और वो राका के साथ उससे सट के चल रही थी, जैसे कि उसकी गर्लफ्रेंड हो…
राका के साथ अक्सर ऐसा होता था…. लड़कियां पहली मुलाक़ात में ही करीब आ जाती थीं….
आज भी ऐसा ही हुआ था…. मानसी खुद को चाहकर भी रोक नहीं पाई…. जैसे उसके अन्दर की मादकता ने राका के अन्दर का मर्द पहचान लिया हो! राका भी मौके का पूरा मजा ले रहा था… उसका एक हाथ मानसी की कमर पर था….
खबर फैलते देर नहीं लगी….. मानसी और राका के चर्चे पूरे कॉलेज में फ़ैल गए…..
“ओये वो 1st इयर वाली माल है न… मानसी…. आज साली राका के साथ घूम रही थी”
“ अरे चुद गई होगी अब तक साली…. जैम के ठोका होगा राका ने उसे”
“गांड देखी थी साली की… राका का हाथ सारा टाइम उसकी गांड पे ही था…”
और भी न जाने क्या क्या…..
पर मानसी तो मानसी थी….वो दुनिया वालो की बातों पर कभी ध्यान नहीं देती थी….. अपने में मस्त!
और राका को इस सबकी आदत थी….
दोनों ने आज सिर्फ आइस-टी पी थी…. और न जाने क्या क्या चर्चे हो गए थे!
आइस टी के बाद राका मानसी को उसके पीजी तक अपनी स्विफ्ट से छोड़ने आया….मानसी ने भी जाते जाते हुए एक सॉफ्ट हग दे ही दिया….

आज मानसी बहुत खुश थी…. कॉलेज के सबसे डैशिंग बन्दे के साथ फ्रेंडशिप जो हुई थी….. वो वो सब पल याद कर रही थी.. जो आज उसने राका के साथ बिताए थे…. तनीषा का रूम से बाहर जाना… फिर राका से बातचीत …. और फिर वो डांस….. उफ्फ्फ….. उसके बारे में सोच के तो वो शर्मा ही गई….. उसने तुरंत म्यूजिक सिस्टम ऑन किया… फुल वॉल्यूम में…
“जरा जरा टच मी – टच मी ….. टच मी…..”
आह….. वो स्ट्रिप कर रही थी…… पता नहीं किसके लिए…. शायद राका के लिए? ये तो वो ही जाने क्या चल रहा था उसके दिमाग में….. ब्रा और पैंटी पहने… पूरे सुरूर से नाच रही थी….
तभी डोरबेल बजी…. तनीषा आई हुई थी…
मानसी ने जल्दी से कपड़े पहने…. और गेट खोला….
गेट खोलते ही तनीषा ने मानसी को जोर से गले लगा लिया….
ओह… मानसी … म सो हैप्पी टुडे….. मजा आ गया…
“अफाक इज ओस्सम… इसे तो पटा के रहूंगी मैं”
मानसी- “हाहा…. पटा पटा….तू भी पटा… मैं तो अपने राजन को पताउंगी….”
तनीषा- ओये होए….. राजन्न्न्न….हाँ…. तो राका ने तुझे इन्ना इम्प्रेस कर दिया…
मानसी- हाँ यार…. पर साला थोड़ा अकडू टाइप है… बट यू नो न…. मुझे टफ लड़के पसंद है
तनीषा- हाँ पता है…. तुझे टफ… पसंद है…
मानसी- अच्छा तेरा क्या हुआ? बता न…
तनीषा- मेरा बलात्कार हुआ…. हहहाहा…..
मानसी- व्हाट?? क्या बकवास कर री है?
तनीषा- हाहा…. रियल में नहीं पगली ड्रामा में… मैं फेस्ट के मेन इवेंट में होने वाले ड्रामा में द्रौपदी का रोल कर रही हूँ…
मानसी- हीही…. द्रौपदी….. हाहा…. पांडव कहा हैं तेरे अब तो मजे हैं तेरे…. 5-5?
तनीषा- चल पगली… तू भी न…पांडव गए तेल लेने….. मेरा दिल तो अफाक पे आ गया है…. और मैं अब चीरहरण भी उसी से करवाउंगी!
मानसी- ओये होए… चीरहरण….कलमुही साली…. कुत्ती..
तनीषा- चल चल…. तू कुत्ती…
और इस तरह से एक दूसरे की टांग काफी देर तक खींचती रहीं दोनों!

मनीषा का दिल न चाहते हुए भी बेईमान हो रहा था… उसके मन में बस अब राका था… राका से वो पूरी तरह इम्प्रेस थी…. आखिर राका था ही ऐसा…अब उसे राका जैसा ही बॉयफ्रेंड चाहिए बस… राका जैसा क्यों? राका…. हाँ राका ही चाहिए… मानसी ख्यालों में डूबी हुई थी.. तभी उसे शरारत सूझी….. उसके पास एक दूसरा सिम पड़ा हुआ था… वो उसने अपने फ़ोन में डाला … और राका को मिसकाल मारी…. राका ने अननोन नंबर देखा….
“ओये रिषभ यार ये अननॉन नंबर से मिसकाल कौन मार रहा है इतनी रात को…” (राका आज भी रिषभ के फ्लैट पे ही था)
“अबे तू नंबर बता… मैं अभी पता लगता हूँ किसका नंबर है….”
राका ने रिषभ को नंबर बताया…. रिषभ ने एक मोबाइल एप की मदद से २ सेकण्ड में पता लगा लिया….
“ओ भेन्चोद… ये तो वो तेरी 1st इयर वाली मनीषा का नंबर है”
“क्या बात कर रहा है? उसका नंबर सेव है मेरे सेल में…”
“ले खुद देख ले….” रिषभ ने राका को फ़ोन दिखाया…..
“ओ तेरी…. मतलब…..”
“अबे साले….. इतना वेट कराएगा तो सो जाएगी….काल बैक कर..”
राका ने तुरंत काल बैक किया…..
“हेल्लो जानेमन….”
“उम्…. कौन?” (राका ने भी फ़ोन रिषभ के फोन से किया था… )
(मानसी की सेक्सी आवाज सुन के राका का लंड तुरंत हरकत में आ गया…)
“वही जानेमन….. जिसे अभी तुमने मिस्काल दी थी”
“राका ….?”
“हाँ…. राका बोल रहा हूँ….”
“तो अपने फोन से क्यों नि किया अपने फोन?”
“तूने कोण सा अपने फोन से मिस्काल दी थी मुझे”
“उम्म्म….. वो तो बस ….”
“वो तो क्या… चल ठीक है… सेव कर लिया मैंने ये नम्बर भी तेरा…नम्बर देने के लिए ही दी थी न तूने मिस्काल?”
“उम्म्म….. याद आ री थी आपकी…”
“उफ़…. याद तो हमें भी बहोत आ रही थी…. पर…”
“पर क्या..?”
“कुछ नहीं…. तू सोई नहीं अभी तक?”
“उम्म्म.. बोला न याद आ री थी आपकी… इसलिए नींद नि आरही”
(बेचारी मानसी को क्या पता की वो अनजाने में क्या करने जा रही है…. अनजाने में या जानबूझ कर.. ये तो मानसी ही जाने..)
“ओह… नींद नइ आ रही तुझे…”
“ह्म्म्म”
“कही तुझे किसी से प्यार तो नहीं हो गया…?”
“उम्म्म…..” (मानसी ने कुछ जवाब नहीं दिया)
“आपकी कोई गल्फ्रेंड है?”
“थी पहले एक… अब नई ढून्ढ रहा हूँ”
“क्यों? ब्रेकअप हो गयाक्या?”
“अरे मेरी जान, मैं सिंगल हूँ…. तुझे यही पता करना है न?”
“हीही.. आप भी न….”
“अच्छा तू बता… तेरा कोई बॉयफ्रेंड है?”
“नोप…”
“तो बनाया क्यों नहीं? सीधे शादी करेगी क्या?”
“कोई मिला ही नहीं आप जैसा?”
“ओह.. क्या बोली तू ? जरा एक बार फिर से बोलना”
मानसी शर्मा गई…..
“उम्म्म… कुछ नहीं जी…. वो तो मैं बस….”
“चल अब सोने दे…. पका मत…” राका ने कहा
“पका री हूँ मैं?.. जाइये नहीं पकाऊंगी… गुड नाईट….”
“गुड नाईट… टेक केयर…. कल मोर्निंग 9.30…. पार्किंग में मिलना…” और राका ने फोन काट दिया…

ये क्या हुआ…. राका ने तो भाव ही नहीं दिया मानसी को…. पर राका का ये अंदाज भी मानसी को बहुत पसंद आया….. राका के बारे में सोंचती हुई अपने दोनों हाथो को अपनी जांघो के बीच दबा कर वो कब सो गई उसे पता भी नहीं चला…
सुबह मानसी की नींद 9 बजे खुली…..
“ओह मईगॉड…..तनीशा….. लेट हो गई….. राका ने मेको 9.30 पे मिलने को बोला था…..” मानसी चिल्लाई….. और सीधे बाथरूम में घुस गई….. 9.30 तो उसे बाथरूम से निकलते निकलते ही बज गए…. बाथरूम से निकलते ही मानसी ने राका को काल किया….
“हेलो….. कहाँ है तू? पार्किंग में मिलने को बोला था तुझे..”
“म सो सॉरी राका…. लेट हो गई…. मैं अभी घर पे ही हूँ… अभी मेको आधा घंटा लगेगा कॉलेज आने में”
“चल आ…. एंड मेरे को फुटबॉल ग्राउंड के पास मिलना…”
“ओके सर…”
“फिर सर? बोला था न..सजा मिलेगी… अब जल्दी आ…”
और राका ने फोन काट दिया!

मानसी अब अल्मिरा के सामने खड़ी थी और वो ये डिसाइड नहीं कर पा रही है कि कौन सी ड्रेस पहने…. फाइनली उसने एक सफ़ेद टॉप पहना.. जिसके ऊपर से उसकी लाल ब्रा दिख रही थी…. और नीचे रेड जींस….. बाल गीले होने की वजह से खुले ही रखे….
तनीषा और मानसी दोनों कॉलेज पहुचे….. तनीषा क्लास की तरफ और मानसी…. हाँ सही पहचाना आपने…. वो सीधे फुटबाल ग्राउंड की ओर चली गई…..
राका मानसी को देखते ही मानसी के पास आया…और हाय बोला…
मानसी ने भी स्माइल के साथ हाथ वेव करते हुए हाई बोला…
“यहाँ क्यों बुलाया मुझे?”
“अरे आज हमारा मैच है….”
(ये राका का मानसी को इम्प्रेस करने का जाल था…. क्योंकि वो जनता था… की एक बार अगर मानसी ने उसका मैच देख लिया तो वो उस पर फ़िदा हो जाएगी… उसे क्या पता था… कि मानसी बेचारी तो पहले से ही उसपे फ़िदा है)
“ओह रियली? मैंने बोहोत सुना है तुम्हारे बारे में….”
“इसीलिए तो बुलाया है तुम्हे…. आज देख भी लो ”
“तो कब से है?”
“अरे पगली यहाँ नहीं है… हम बाहर जा रहे है…. एंड अब तुझे डिसाइड करना है कि तू चल रही है हमारे साथ या नहीं….”
“उम्म्म… बाहर…. मतलब दूसरे कॉलेज में….”
“हाँ डिअर…एंड डोंट वरी शाम तक हम लौट भी आएंगे…”
मानसी न बोल नहीं सकती थी…..ये बात राका को भी पता थी!

मैच शुरू हो गया था…. और राका का जलवा भी…. पूरे ग्राउंड में बस राका ही छाया हुआ था…. मेजबान टीम पसीना पसीना हो गई थी….
राका से बाल को निकालना… हर किसी के बस की बात नहीं थी…
टीम के बाकी मेम्बेर्स राका को बाल पास करते… और राका बाल को ठिकाने लगा देता…. जी हाँ गोल मार देता….
मानसी तो बस….. वैसे तो उसे फुटबाल में कोई इंटरेस्ट नहीं था… पर आज उसे गेम देखने में अलग ही मजा आ रहा था…उसकी नजरें बस राका पे टिकी थीं…. शॉर्ट्स और स्लीवलेस में राका को दौड़ते हुए देख कर कोई भी लड़की खुद को रोक नहीं सकती थी…. राका आज पूरी फार्म में था… राका ने 4 गोल मारे… वो भी विरोधी टीम को नचा नचा कर… 4-0 का स्कोर विरोधी टीम को और भी परेशान कर रहा था
मैच ख़तम होने की सीटी बजते ही सभी ने राका को अपने कन्धों पर उठा लिया… राका भी पूरे रंग में मस्ती कर रहा था….
इस सबके बाद राका मानसी के पास आया….
“ओह… यू प्लेड माइंड ब्लोविंग…राका……. राका यू रॉक…. आई लव यू…..” और मानसी ने ख़ुशी से राका को गले लगा लिया….
“लव यू टू डार्लिंग……” और राका ने मानसी को अपनी बाहों में जकड लिया…. मानसी के बूब्स राका के सीने से दब गए….. राका पसीने से पूरा नहाया हुआ था…. पर मानसी को उसके पसीने बी महक भी अच्छी लग रही थी…. दो मिनट तक मानसी राका की बाहों के जकड़ में थी…. राका के शरारती हाथ उसकी पीठ पे शरारत कर रहे थे…..
फिर राका ने मानसी को अपनी गिरफ्त से आजाद किया…. और फिर से फुसफुसाया…. “लव यू डार्लिंग…. आज की जीत मैं तुम्हे डेडीकेट करता हूँ….”
मानसी ने मुस्कुराते हुए थैंक्स बोला…..
“केवल थैंक्स से काम नहीं चलेगा डिअर… इतने स्पेशल डेडिकेशन के लिए सिर्फ थैंक यू”
मानसी मुस्कुराई… और बोली…. “अब आगे का क्या प्लान है? मैच तो ख़तम हो गया?
“अरे हमारा मैच तो अब शुरू हुआ है.. ” राका ने आँख मरते हुए कहा… और मानसी की कमर को अपने दायें हाथ से पकड़ा और अपनी सफारी की ओर चल दिया…..
मानसी ने राका को एक्साइटमेंट में कब प्रोपोज कर दिया था उसे खुद भी पता नहीं चला… और वो रह रह कर अपनी इस हरकत पे मचल रही थी…
राका ने मानसी के प्रोपोज़ल को एक्सेप्ट भी कर लिया था…राका का हाथ अपनी कमर पे उसे और भी अच्छा लग रहा था… वो कॉलेज के रोनाल्डो- राका की गर्लफ्रेंड थी अब!

राका ने गाडी का गेट मानसी के लिए खोला…. मानसी थैंक्यू बोलती हुई अन्दर बैठ गई…
“कहाँ चल रहे है अब हम?”
“तुम बोलो… कहाँ चलना है….?”
“वैसे मैं ये कह री थी… की…. तुम्हे शावर ले लेना चाहिए… पूरे पसीने पसीने हो रखे हो….”
राका ने मानसी को देखा… और मुस्कुराया…..
“वैसे पसीना पसीना तो ये हसीना भी हो रखी है…. ”
मानसी कब एक्साईटमेंट में पसीना पसीना हो गई उसे खुद पता नहीं चला
मानसी को जब ये रेअलाइज़ हुआ की वो भी पसीना पसीना है….तो वो शर्मा गई… उसकी लाल ब्रा अब और भी साफ़ दिख रही थी….

“तो चलें? शावर लेने?” राका मानसी को टीज़ करते हुए बोला…
“तुम भी ना….. कुछ भी बोलते हो….”
“क्या गलत कह दिया मैंने? मैं तुझे तेरे पीजी में छोड़ दूंगा…. और मैं अपने हॉस्टल!”
मानसी तो साथ में शावर का सोच रही थी….. हेहे…. वो भी न बेचारी….
राका ने गाड़ी सीधे मानसी के पीजी की ओर बढ़ा दी…. और मानसी को उसके पीजी ड्राप करते हुए वो अपने हॉस्टल चला गया…. वो कोई जल्दबाजी करना नहीं चाहता था…

मानसी सीधे बाथरूम में घुस गई… उसकी चूत गीली हो चुकी थी…. शावर के नीचे वो आज राका के साथ बिताये पलों को याद कर रही थी….उसके दिल में हलचल मची हुई थी… राका ने उसके अन्दर की आग को भड़का दिया था… आज उसे नहाने में डेली से जादा समय लगा….
उधर राका ने जल्दी से शावर लेके चेंज किया और मानसी को कॉल किया … मानसी अभी ही नहा के निकली थी… खुद को पिंक टॉवल में लपेट रखा था…
“हेल्लो..” मानसी ने फोन उठाया
“हेल्लो…जानेमन…”
“हाँ जी बोलिए….”
“ओये होए…. क्या बात है… बीवी जैसे बात कर री है…”
“शाट आप… राका….”
“हाहाहा…. ओकेओके… डार्लिंग मजाक कर रहा था… अच्छा सुन…. अभी मैं आ रहा हूँ 30 मिनट में…. लंच के लिए…”
“व्हाट? यहाँ मेरे पीजी? मेको खाना बनाना नी आता..”
“अरे पगली… तू रेडी हो जा… पिक करने आ रहा हूँ…””
“ओह… मैं भी ना….” मानसी खुद की बेवकूफी पे हंसी… “अच्छा ठीक है… डिअर…. मैं तैयार हो री हूँ बस…. बाय…. सी यू”
राका ने फोन काट दिया!
उफ्फ्फ…. अब क्या पहने…. आज दूसरी बार उसे ये डिसाइड करना पड़ रहा था….
उम्म्म…. लंच के लिए जा रहे हैं… राका पक्का किसी अच्छी जगह ले जायेगा….. ये वाली ड्रेस ठीक रहेगी….. मानसी ने एक ब्लैक मिडी सिलेक्ट की… स्लीवलेस और शोल्डर लेस ड्रेस में मनसी का हुस्न निखर कर बाहर आ रहा था…. कंधे पर केवल पतले ब्लैक स्ट्रैप थे…. और नीचे….. नीचे मिडी उसकी गोरी जांघो को और भी गोरा कर रही थी…. घुटनों से 6इंच ऊपर थी उसकी ड्रेस…. अन्दर रेड जी-स्ट्रिंग पहनी हुई थी… ऊपर ब्लैक टीशर्ट-ब्रा जो कि मिडी का ही एक पार्ट लग रही थी!
तैयार होने में कब 45 मिनट बीत गए पता ही नहीं चला…. जी हाँ राका को पता था की लडकियां कम से कम 45 मिनट तो लेती ही हैं तैयार होने में… नीचे से राका हॉर्न बजाये जा रहा था…. मानसी ने जब हॉर्न सुना… तो उसके चेहरे पे अलग सी मुस्कान आ गई… उसने फिर से खुद को मिरर पे देखा और फिर वो बहार निकली!
मानसी को देख के राका की आँखे खुली की खुली रह गई….. मानसी भी राका को देख के कुछ इसी हालत में थी…. राका अपनी सफारी पे टेक लगाए एक पैर पे खड़ा था…. उसने सफ़ेद शर्ट पहनी हुई थी… और नीला जींस…. गजब का लग रहा था आज वो भी…. जेल से गीले बाल उसे और भी सेक्सी बना रहे थे…. और उसके हाथ में थी एक “रोज़ स्टिक”!
मानसी जैसे ही राका के पास पहुची…. राका ने गुलाब मानसी को दिया…. और एक बार फिर से “आई लव यू” बोला…. मानसी ने गुलाब कबूल किया और राका के गले लग गई….. गले लग कर वो भी धीरे से बोली…. “लव यू टू राका….” राका ने मानसी का माथा चूम लिया और फिर उसके लिए गाडी का गेट खोला…
मानसी राका की आँखों में देखती हुई गाडी में बैठ गई…. राका उसे शहर के सबसे अच्छे रेस्टोरेंट में ले गया…. और दोनों ने लंच किया और ढेर सारी बातें की…!
पूरे वक्त मानसी का हाथ राका के हाथों में था… राका ने मानसी की कोमलता को अच्छे से महसूस कर लिया था इतनी देर में…. लंच के समय राका का लंड न जाने कितनी बार खड़ा हुआ… और मानसी के लिए अपनी प्यास को जाहिर किया … मानसी के दिल में भी कई बार हलचल हुई…. मानसी तो मानो राका के प्यार में पागल ही हो गई थी… हम लड़कियों की यही एक कमी है…. भावनाओं पे काबू नहीं रहता…
“डेज़र्ट में क्या लोगी….” राका ने मानसी की आँखों में झाँक के पूछा…
मानसी के जवाब देने से पहले ही राका ने रेस्टोरेंट का स्पेशल डेज़र्ट आर्डर कर दिया….
लंच ख़तम होने के बाद दोनों फिर अब गाड़ी में थे…
“राका… कही ड्राइव पे चलें…”
“तूने तो मेरे मन की बात छीन ली…ओल्ड फोर्ट चलें?”
मानसी के कुछ कहने से पहले ही राका ने 5वें गियर पे गाड़ी आगे बढ़ा दी…
पुराना किला शहर से 20किलोमीटर दूर था… बगल से नदी गुजरती थी… किला कोई तीन सौ साल पुराना था…राका ने इस किले में
“उईइ माँ ….. थोड़ा धीरे चलाओ न…”
“क्यों डर लगता है क्या?”
“जी नहीं… ऐसा नहीं है”
“तो फिर कैसा है…”
“ओहो राका… तुम नहीं मानोगे…”
राका ने स्पीड कम कर दी….
गियर बदलने के बहाने राका ने 5-6 बार मानसी की जांघ की कोमलता को महसूस कर ही लिया और मानसी को भी राका की इस शरारत में मजा आ रहा था… राका ने गाडी पार्क की… और मानसी को लेके किले के अन्दर की ओर चल दिया… राका को किले का कोना कोना पता था… पहले तो उसने मानसी को पूरा किला घुमाया… और फिर किले की दूसरी मंजिल पे मानसी के साथ बैठ गया…. यहाँ से नदी का खूबसूरत नजारा साफ़ दिख रहा था…. “वाव… कितनी ब्यूटीफुल जगह है…” मानसी बोली…
मानसी की जुल्फों को हटाते हुए राका रोमांटिक अंदाज में: “जान तुमसे जादा नहीं…. मुझे तो बस तुम दिख रही हो…”
मानसी ने मुस्कुराते हुए अपना सर राका के कंधे पे रख दिया…. उसका एक हाथ राका के हाथ पे था और दूसरा हाथ राका के दूसरे हाथ के ऊपर था… जो कि राका ने उसकी जांघ पे रखा हुआ था…. राका मानसी को टीज़ कर रहा था…. जिसमे मानसी को मजा आ रहा था….
राका ने अपने जादू से मानसी को अपना दीवाना बना दिया था… राकाके हर स्पर्श से मानसी के निप्पल्स और तन जाते…. धड़कन और तेज़ हो जाती….
मानसी भी राका को टीज़ करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही थी…. उसे इस खेल में मजा आ रहा था…. मौके को भांपते हुए राका ने अपना एक हाथ मानसी की ड्रेस के अन्दर डाल दिया…. राका की इस हरकत से मानसी चौंक गई…. मानसी के चौंकते ही राका ने उसे एक झटके में अपनी तरफ मोड़ा.. और उसे चूम लिया… मानसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था ये सब इतनी जल्दी कैसे हो गया… पर उसे मजा आ रहा था…
राका मानसी के कोमल लिप्स को आहिस्ता आहिस्ता अपने लिप्स से चबा रहा था…मानसी भी उसका पूरा साथ दे रही थी…राका के दोनों हाथ मानसी की कमर पर थे… और मानसी के दोनों हाथ राका के सर पे…. वो राका को अपनी ओर खींच रही थी.. और राका उसकी कमर को अपनी ओर खींच रहा था…. दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे…. मानसी के रसीले होंठो को चूम कर राका जन्नत में था… दोनों की जीभ एक दूसरे के साथ सर्पसम्भोग कर रही थी… कभी मानसी की जीभ को राका अपने मुह में लेके जोर से चूसता.. तो कभी अपनी जीभ को मानसी के मुह में ऐसे अन्दर बहार करता जैसे जीभ से ही मानसी का मुह चोद रहा हो… मानसी की हालत खराब हो रही थी…उसे इतनी बेचैनी कभी नहीं हुई थी….
वो राका के प्यार में डूब सी गई थी… वो बस राका को चूमते रहना चाहती थी… दिन रात…. हर समय!
राका ने किस तोड़ा और अब वो मानसी के गले और कंधे को चूम रहा था…. और अपनी जीभ से चांट रहा था…. “उफ्फ्फ” “…मानसी आह…..” “उई…. ओह राका…. आह….” मानसी के दोनों हाथ राका की पीठ पे थे…..

राका जब और नीचे आया तो उसे महसूस हुआ कि मानसी की ड्रेस में साइड से चेन है… मानसी के बायीं बगल के नीचे से राका ने एक झटके में चेन नीचे खींच दी…. “उम्म्ह… राका …. यहाँ नहीं….” मानसी फुस्फुसाई…
“यहाँ नहीं” सुनते ही राका के दिल की घंटी बजी और उसने मानसी को तुरंत छोड़ दिया… और बोला… “लगा ले चेन वापस….”
मानसी को ये थोडा अजीब लगा….उसने चेन ऊपर चढ़ा ली….
राका ने मानसी की कमर में हाथ डाला…. और बोला.. “चल फिर कहीं और चलें”
राका मानसी को लेके सीधा हर्षित के फ्लैट पंहुचा…. मानसी राका के इरादों को समझ रही थी.. पर आज वो भी हद से गुजर जाना चाहती थी…
फ्लैट के अन्दर पहुचते ही… राका ने एक झटके में चेन फिर से नीचे खींच दी…. और मुस्कुराते हुए बोला… “यहाँ ठीक है?…” और मानसी को आँख मारी
“कितने नॉटी हो तुम…” मानसी बोली!
राका ने मानसी को फिर से चूम लिया… चूमते हुए ही उसकी ड्रेस उतार दी…
मानसी अब ब्लैक ब्रा और रेड पैंटी में राका की बाहों में थी… राका के हाथ अब दोनों साइड से मानसी की पैंटी के अन्दर दस्तक दे रहे थे….
वो मानसी को टीज़ कर रहा था…
मानसी ने भी राका की शर्ट के बटन खोल दिए…. राका ने शर्ट उतार फेंकी…
राका मानसी को चांट रहा था… उसके कोमल जिस्म को अपने होंटों से काट रहा था… ये सब करते हए ही वो मानसी को बेडरूम तक ले पंहुचा….
“जानू मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ है…”
“क्या है”
“मेरा पैंट खोल जानू….”
“उम्म्म… नॉटी यू… राका…”
“अरे मेरी जान…. खोल न….”
मानसी खुद को रोक नहीं पाई…. उसने राका के जींस का बटन खोल दिया…. और ज़िप भी नीचे कर दी…. बाकी काम राका ने खुद कर लिया… जींस उतार दी… अब वो ब्लैक फ्रेंची पे था…. जो केवल उसके साढ़े सात इंच के तगड़े लंड को ढके हुए थी…. मानसी शर्मा गई….
“जान नीचे देखो न…. इट्स फॉर यूं… अब से ये सिर्फ तुम्हारा है” और राका ने मानसी का हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख दिया….
मानसी उसके लंड को फ्रेंची के ऊपर से ही फील कर रही थी…. राका ने धीरे से मानसी के चुत्तड पे चपाट मारी…. “ओह मेरी जान…. गेट ओं योर नीज़… एंड फील आईटी विद योर माउथ”
मानसी तो मानो राका के वश में थी…. उसने देर नहीं लगाई… अब वो घुटनों पे थी… और सामने था राका का प्रेम-हथियार! राका ने खुद ही अपनी फ्रेंची नीचे सरका दी! और अपने ताने हुए लंड को मानसी के चेहरे पे टच कराया…
“अरे जानू….करो न….” राका ने रिक्वेस्ट की…
मानसी का ये फ़स्ट टाइम था… इसलिए वो थोडा सा झिझक रही थी…. पर राका की रिक्वेस्ट को ठुकरा नहीं पाई वो….
उसने राका के लंड को थोड़ा झिझकते हुए चूमा…
“यूज़ योर टंग बेबी… टेक इट इन योर माउथ” राका मानसी को सिखा रहा था…
मानसी ने जैसे ही अपना मुह खोला… राका ने अपना लंड मानसी के मुह में ठांस दिया… आगे का काम मानसी के लिए आसान हो गया… अब वो राका के लंड को लोलीपोप की तरह चूस रही थी…. उसके लंड की नसों को महसूस कर रही थी…

राका के लिए अब सब्र करना थोड़ा मुश्किल हो रहा था…. उसने मानसी के मुह से अपना लंड निकाला और मानसी को उठा के बिस्तर पे पटक दिया…. और खुद भी मानसी के ऊपर आ गया…
मानसी का जिस्म राका ने अपने जिस्म में जकड़ा हुआ था.. उसकी दायें हाथ की उंगलिया मानसी की चूत में हरकत कर रही थी…. मानसी की बेचैनी को महसूस करते हुए राका ने अपना लंड मानसी की चूत में रखा… और धीरे धीरे हौले हौले अन्दर डालने के लिए धक्के लगाए…. राका को ये जानने में देर नहीं लगी की मानसी की चूत एकदम फ्रेश है…. मानसी जैसी माल कुवारी होगी , ये उसने नहीं सोचा था…. उसने दो झटकों में मानसी का कौमार्य ले लिया…. अब मानसी कुवारी नहीं थी… राका का पूरा लंड मानसी की चूत के अन्दर था…. मानसी की चीख पूरी सोसाइटी में गूंजी होगी…इतना तेज़ चिल्लाई थी वो….इस दर्द से उसकी आँखों में आन्सू आ गए थे… राका अपना लंड पूरा अन्दर डाल के थोड़ा रिलैक्स हुआ और मानसी को चूमने चाटने लगा…. उसने मानसी की आँखों में देखा…. और फिर उसे चूम लिया…. लिप्स लॉक होते ही… राका ने स्ट्रोक्स मरने शुरू किये…. लंड जब पूरा अन्दर जाता तो मानसी की आँखे पूरी खुल जाती…. उसकी चीख दोनों के चुम्बन में कही खो जाती…. राका दोनों हाथो से मानसी को जकड़ लेता जब लंड पूरा अन्दर डालता….
“आह….. उह…. उई माँ….. आह…. ऊऊ…. आह…. उम्म्मम्ममम्म म्मम्मआःह्ह” चुम्बन तोड़ते ही मानसी की आवाजों से कमरा गूँज उठा….
राका किसी घोड़े की तरह से चोद रहा था…. मानसी को भी अब चुदवाने में मजा आ रहा था…. ये उसके लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं था…
“उह… आह..उफ्फ्फ…” मानसी की आवाजों से राका के स्टैमिना का पता कोई भी लगा सकता था… पिछले 20 मिनट से राका लगातार धक्के मार रहा था… मानसी का पानी अब तक दो बार निकल चुका था…
वो भी अब गांड उचका उचका के चुदवा रही थी….
राका इतनी कसी हुई चूत के पूरे मजे ले रहा था…. राका भी अब बस झड़ने वाला ही था….
उसने धक्के और तेज़ कर दिए…. कमरे में दोनों की आवाजे गूँज रही थी…. फ़प… फ़प… करके राका के अन्डू मानसी की चूत के नीचे के हिस्से पे टकरा रहे थे…
आह…. ऊऊ… ओह… आह….. उम्म्ह….. और राका ने मानसी की चूत को अपने प्रेम रस से भर दिया… और मानसी के ऊपर निढाल होक गिर गया….
मानसी भी एक बार और झड़ी…. और राका को अपने ऊपर दबा लिया…
दोनों एक दूसरे की बाहों में इसी तरह निढाल होके सो गए!

“आह… उफ्फ्फ ऊईइ मा… ठाकुर जी…. आह…” मालती ठाकुर के नीचे दबी कामक्रीडा का आनंद ले रही थी… आज वो पूरे 20 दिन बाद चुद रही थी… और आज ठाकुर उसे चोदने ही आया था…. नए शहर में मालती को अभी तक कोई नया लंड नसीब नहीं हुआ था…
“पता है मैंने आपको कितना मिस किया…”
“जानता हूँ मेरी रांड…तभी तो आ गया आज तेरे पास”
और फिर से धक्के लगाने शुरू कर दिए….
ठाकुर ने 20 दिन की कसर आज एक दिन में ही पूरी कर दी…. वो मालती को चौथी बार चोद रहा था…
रात रंगीन करने के बाद ठाकुर फिर वापस चला गया…
आज होटल की हॉस्पिटैलिटी मैनेजर प्रिया का शक यकीन में बदल गया…. उसे पहले से ही अंदाजा था कि ठाकुर और मालती के बीच में कुछ तो है… आज उसने देख भी लिया था…
सुबह के नौ बज रहे थे… तभी होटल में करीब 40 साल का एक हट्टा-कट्टा आदमी आया, उसने कुरता पैजामा पहन रखा था… कुरते के बगल से उसकी रिवाल्वर झाँक रही थी… वो आके सीधे प्रिया के केबिन में जाके बैठ गया….
ये अफरोज था… शहर के बाहुबली विधायक का खास आदमी… हर महीने वो अपना हिस्सा लेने होटल आता था… और आज भी वो पैसे लेने ही आया था…
उसके आते ही प्रिया मालती के केबिन गई और चेक साइन करने को बोली…
मालती के लिए ये नया था…. उसने साइन करने से मना कर दिया…. प्रिया ने मालती को समझाने की काफी कोशिश की पर वो नहीं मानी… और सीधे अफरोज के सामने जा पहुची,,,
मालती: कुछ नहीं मिलेगा आपको यहाँ…
अफरोज: अरे पगला गई है क्या… जानती है तू क्या बोल रही है?
मालती: हाँ… जानती हूँ क्या बोल रही हूँ…. अब यहाँ की मालिक मैं हूँ …. और आज से कोई हिस्सा विस्सा नहीं मिलेगा इधर, दुबारा शकल मत दिखाना अपनी
अफरोज: (गुस्से में…) साली…. नइ है तू यहाँ… जितना जल्दी हो समझ जा इधर के कायदे… वरना हम लेने पे आ गये तो तेरी भी न छोड़ेंगे.. समझी…
मालती: शाट अप… एंड गेट आउट… अभी इसी वक्त
अफरोज तमतमाता हुआ होटल से निकल गया….
करीब आधे घंटे बाद एक दर्जन गुंडे होटल में आके तोड़ फोड़ करने लगे.. और होटल स्टाफ के साथ भी मारपीट की…
मालती ने पुलिस को इस बारे में इन्फॉर्म किया… पर उसे नहीं पता था की यहाँ पुलिस तो विधायक के इशारे के बिना कोई एक्शन नहीं लेती…
होटल की बिजली सप्लाई भी काट दी गई….
फिर मालती ने ठाकुर को फोन किया और पूरी कहानी सुनाई… मालती का साथ देने की बजाय ठाकुर मालती पे चिल्लाने लगा…
ठाकुर: तू नौकरानी है वहा…. मालकिन नहीं समझी…. कौन भरेगा इतना नुक्सान? और पैसे देने न देने का डिसाइड मैं करूंगा…. तू होती कौन है?
मालती : अरे आप तो उल्टा मेरे पे चिल्ला रहे हैं…
ठाकुर: और क्या पूजा करूँ तेरी…. रांड साली… जा पैसे ले…. अगले महीने के भी ले लेना… और विधायक जी के घर पे खुद जाके पैसे दे और माफ़ी मांग! समझी! और ठाकुर ने फोन काट दिया!
मालती को ठाकुर पे बहुत गुस्सा आया… पर बेचारी कर भी क्या सकती थी… जो गलती उसने की थी उसे सुधारना तो पड़ेगा ही….

शाम को मालती रंगदारी लेके खुद विधायक जी के ऑफिस पहुची…
हमेशा की तरह आज भी मालती पलंगतोड़ लग रही थी, काली साड़ी, ऊपर हमेशा की तरह आज भी स्लीवलेस ब्लाउज ही पहना हुआ था… बला की खूबसूरत लग रही थी… बगल में काला पर्स… दो इंच हील सैंडल!
विधायक लल्लन सिंह अन्दर अपने ऑफिस में कुछ अधिकारियों के साथ मीटिंग कर रहे थे… ओह आपको लल्लन सिंह के बारे में बताना भूल गई…
लल्लन सिंह पिछले 20 साल से इलाके के बाहुबली विधायक हैं… आस पास के 5-6 विधायकों का समर्थन रहता है उनके साथ! स्वाभाव से अक्खड़ बकैत और दबंग! शहर में उनकी परमीशन के बिना एक परिंदा भी पर नहीं मार सकता है! शहर के हर धंधे से रंगदारी आती है उनके पास! जिस समय मालती लल्लन सिंह के ऑफिस पहुची उस समय, डीएम और एसपी हाजिरी लगाने आये हुए थे लल्लन जी के पास!
मालती के ऑफिस पहुचते ही सब उसे आँखे फाड़ फाड़ के घूरने लगे… विधायक जी के ऑफिस में एक औरत, वो भी शाम को सात बजे… पक्का आज कोई नई आइटम बुलाई है लल्लन ने… वहां मौजूद लोगों की आँखों से हवस टपक रही थी!
“हाँ मैडम , क्या चाहिए? किससे मिलना है?” एक आदमी ने पूछा…
मालती उसके पास पहुची और बोली… “जी मुझे विधायक जी से मिलना है… जरूरी काम है मुझे उनसे”
उस आदमी ने मालती को ऊपर से नीचे तक देखा… और मुस्कुराया…
“ओह… जरूरी काम है… वैसे विधायक जी ने तो हमें नहीं बताया कि उन्होंने आज के लिए किसी को ऑफिस बुलाया है… और तुम्हे नहीं पता, विधायक जी “जरूरी काम” ऑफिस में नहीं करते… फार्महाउस में करते हैं!
“जी?? उन्होंने मुझे नहीं बुलाया है, मैं मिलने आई हूँ उनसे… आप प्लीज बताएँगे मुझे कहाँ है वो” मालती ने अपनी झल्लाहट को काबू में रखते हुए कहा!
“अच्छा अच्छा ठीक है… वो अभी मीटिंग में हैं…. तुम वेट करो यही बाहर…” आदमी ने मालती के क्लीवेज को घूरते हुए कहा!
मालती कुछ नहीं बोली… और सामने पड़े सोफे पर बैठ कर इंतज़ार करने लगी!
अफरोज़ अन्दर आता है और मालती को देखके खुश होता है….
“ओह… तो आ गई तू…देख लिया न अपनी एक गलती का अंजाम” अफरोज़ ने मालती को देखते हुए कहा…
“जी मुझे विधायक जी से मिलना है…” मालती खुद को संभालते हुए बोली!
“अरे मिल लीजियेगा… विधायक जी से भी मिल लीजियेगा… पहले हमसे तो मिल लीजिये” अफरोज़ ने शरारती मुस्कान के साथ कहा और मालती के साथ पड़े सोफे पे बैठ गया…
मालती: “जी सुबह के लिए मैं आपसे माफ़ी मांगती हूँ… वो मैं भावनाओं में कुछ जादा ही बोल गई थी”
अफरोज़: “लेन-देन के मामले में हमें कोई गुस्ताखी बर्दास्त नहीं है”
मालती: “जी इस बार हुई गुस्ताखी को माफ़ कर दीजिये.. आगे से मैं आपको विश्वास दिलाती हूँ… शिकायत का कोई मौका नहीं दूँगी” (मालती मुस्कुरा के बोली)
अफरोज: “देखो माफ़ी और सजा का डिपार्टमेंट तो विधायक जी का है… अब वो ही देखेंगे”
मालती: “जी कब तक चलेगी मीटिंग” थोड़ी थकी हुई आवाज में मालती ने पुछा…
अफरोज़: “रुको मैं देखता हूँ…”
अफरोज़ उठ के विधायक जी के केबिन में गया…
और लल्लन सिंह के कान में जाके बोला- “सरकार वो होटल की मैनेजर आई है… माफ़ी मांगने… क्या करना है उसका”
लल्लन: “अरे वो तो पता था हमें आयेगी वो… अब उसके पापों का प्रायश्चित तो उसे ही करना पड़ेगा न… डीएम साहब आप निकलिए फिर, और एसपी साहब आप रुकिए जरा… और हाँ अफरोज़ .. तू भेज उसे अन्दर”
अफरोज और डीएम बाहर गए और अफरोज़ ने मालती को अंदर भेज दिया!
कमरे में विधायक लल्लन सिंह और एसपी बैठे हुए थे…
मालती अन्दर घुसी….
मालती: “जी नमस्ते…..”(दोनों हाथ जोड़ के)
विधायक: “अरे नमस्ते नमस्ते…. आइये मैडम…. तशरीफ़ रखिये”
विधायक और एसपी दोनों की आँखे खुली की खुली रह गई मालती को देख के…
मालती हलके से मुस्कुराती हुई एसपी के बगल वाली कुर्सी में बैठ गई…
एसपी ने अपनी कुर्सी मालती की ओर घुमा ली…
विधायक: “आप जानती है न कौन हैं हम”
मालती: “जी आपको कौन नहीं जानता…”
विधायक: “नहीं जानती तो जान ले…वरना अच्छा नहीं होगा…”
“अब एसपी साहब क्या बताएं, इन औरतों को समझना मुश्किल है…. मोहतरमा ने सुबह जितने पैसे देने से मन कर दिए थे, अब उसके दोगुने पैसे होटल के रेनोवेशन में खर्च होंगे…”
एसपी: “हाहा… ये बात तो सही कही आपने…. औरतों को समझना मुश्किल ही है, पर सरकार आपको समझाना अच्छी तरह आता है”
विधायक: “अरे तभी तो गई ये मोहतरमा दौड़ते हुए” हाहा “तो क्या डिसाइड किया? (मालती की ओर देख कर)
मालती: “जी वो… डिसाइड क्या करना है… ये आपके पैसे…. और प्लीज़ मुझे माफ़ कर दीजिये… वो मैं भावनाओं में बह के कुछ जादा ही बोल गई थी अफरोज़ से!”
विधायक: “हाहा… अब आप जैसी खूबसूरत औरत से पैसे…”
एसपी: “अरे इनके जैसियों को तो पैसे देने की आदत होगी आपको”
विधायक: “हाहा…. क्या बात कहे एसपी साहब” “अरे अफरोज़….(जोर से चिल्लाते हुए)”
अफरोज भागता हुआ आया: “जी सरकार”
विधायक: “अरे मुद्रा ले जाओ…. मैनेजर साहिबा खुद देने आई हैं”
मालती: “जी अगले महीने का भी है”
विधायक: “अरे अगले महीने का काहे…. अगले महीने का अगले महीने देने आना… इसी बहाने आपसे मुलाक़ात तो हो जाएगी”
मालती: “जी मुलाकात के लिए बहाने की क्या जरूरत है, वो तो ऐसे भी हो सकती है”
विधायक: “अफरोज लेजा पैसे….”
“हाँ तो मोहतरमा…. ठाकुर का फोन आया था हमारे पास, हमने तो उसे बता दिया है कि गलती किसकी है”
मालती: “जी मेरी उनसे बात हुई… मैं अपनी गलती मान रही हूँ… मुझे ऐसे नहीं बोलना चाहिए था….”
विधायक: “एसपी साहब आप निकलिए अब…”
विधायक के इशारा करते ही एसपी उठा और विधायक के पैर छूए…. “जब सरकार सेवा चाहिए हो तो याद कर लीजियेगा” और वो चला गया!
अब कमरे में मालती थी और उसके सामने दबंग विधायक लल्लन सिंह जी!
विधायक: “अब बताइये मोहतरमा … क्या किया जाय आपका…”
मालती: “जी मैं अपनी करनी की हाथ जोड़कर माफ़ी मांगती हूँ आपसे… आगे से आपको कोई शिकायत का मौका नहीं दूँगी”
विधायक ने मालती के दोनों जुड़े हुए हाथों को अपने हाथो के बीच पकड़ लिया….
विधायक: “अरे नहीं नहीं.. ये क्या कर रही हैं आप….. अब देखिये हम माफ़ी देना तो जानते नहीं…. पर हम आपको एक मौका जरूर देंगे…”
मालती: “मुस्कुराते हुए…जी मैं आपकी शुक्रगुजार हूँ…”
विधायक: “अरे… आप बातें बड़ी मीठी मीठी करती हैं….” (ठाकुर मालती के हाथो को अपने हाथो के बीच दबाये मसल रहा था…)
मालती थोड़ा शर्मा गई….
विधायक: “शादी नहीं हुई तुम्हारी अभी….” (मालती की मांग में सिन्दूर और गले में मंगलसूत्र न देख विधायक के मन में काफी देर से ये सवाल था…)
मालती: “जी.. वो नहीं रहे…”
विधायक: “अरे…. ओह… सॉरी …सॉरी….पर तू ठाकुर से कैसे मिली”
मालती: “जी ठाकुर जी मेरे पति के दोस्त थे… तो उनकी डेथ के बाद…. ठाकुर जी ने ही सहारा दिया हमें”

“ठरकी साला” विधायक ने मन में सोचा….
विधायक: “बच्चे? बच्चे नहीं हैं तेरे?” (इतना जानने के बाद ‘आप और मोहतरमा’ से ‘तू’ पर आने में विधायक को देर नहीं लगी)
मालती: “जी हैं… दो बच्चे हैं मेरे…. एक बेटी है 19 साल की…. और एक छोटा बेटा है, वो 12वी में पढता है”
विधायक: “वैसे तुझे देख के लगता नहीं कि तेरे इतने बड़े बड़े बच्चे होंगे…”

मालती विधायक की बात सुन कर मुस्कुराई….

वो मालती के हाथो को मसल रहा था….
विधायक: “वैसे तुझे यहाँ कोई परेशानी तो नहीं है न…. कोई भी परेशानी हो… तो इस नाचीज़ को बस याद कर लीजियेगा””

मालती: “अरे नहीं नहीं… वो तो बस आज ही थोड़ा….”
विधायक मालती की खूबसूरती में आज की बात भूल ही गया था….

विधायक: “अरे आज जो हुआ… उसकी जिम्मेदार तो तू खुद है….यहाँ रहना है तो देनी तो पड़ेगी ही…. और अगर ख़ुशी खुशी नहीं देगी, तो लेना हमें अच्छी तरह आता है… अब देखो आ गई न तू खुद देने…” (मालती का हाथ दबाते हुए बोला)
(वो मालती के जिस्म का पूरा मुआइना कर रहा था…. उसकी नज़रें बार बार मालती की क्लीवेज पर टिक जातीं)
मालती: “जी वो उसके लिए मैं आपसे एक बार फिर से माफ़ी मांगती हूँ… और आगे से ऐसा नहीं होगा… ये भी वादा करती हू आपको” (मालती ने मुस्कुराते हुए कहा…)
मालती की मुस्कान पर विधायक जी फिर से लट्टू हो गए….
विधायक: “अरे माफ़ किया…. माफ़ किया…. पर हमारी भी कुछ शर्तें हैं…” (मालती के जिस्म पर नजर ऊपर नीचे की)

मालती: “जी क्या शर्तें?”
विधायक: “बड़ी जल्दी है शर्तें जानने की” हँसते हुए ठाकुर ने कहा….

मालती ठाकुर की इस बात पर शर्मा गई…. और लल्लन विधायक ने एक बार फिर उसके दोनों कोमल हाथों को अपने हाथो से दबा दिया….
नजारा ऐसा था मानो दोनों के हाथ सम्भोग कर रहे हों….
या विधायक बार बार मालती को इशारा कर रहा था… कि जो हाल अभी उसके हाथों का है, भविष्य में वाही हाल उसके पूरे जिस्म का होने वाला है…
और मालती भी मुस्कुरा कर और अपनी मनमोहनी अदाओं से मानो इस इशारे को समझने का इशारा कर रही हो!
विधायक: “वैसे ठाकुर कितना देता है तुम्हे? महीने का?”
मालती: “जी???” मालती ने सवालिया नजरों से विधायक को देखा…
विधायक: “अरे मैं भी क्या पूछ रहा हू…. देती तो तू होगी ठाकुर को…” “हाहाहा” “क्यों कुछ गलत कहा मैंने?”
मालती: “जी आप भी न…. कुछ भी बोलते हैं…. मैं क्या दूँगी उन्हें…. काश कुछ दे सकती… वो तो ठाकुर जी ही हैं, उन्होंने सहारा दिया इनकी डेथ के बाद…. वरना मैं तो अकेली ही पड़ गई थी”

मालती की बात सुनकर विधायक इम्प्रेस हो गया… वो अभी तक उसने अभी तक केवल उसके जिस्म की खूबसूरती देखि थी,,,, मालती का दिमाग भी इतनी तेज़ चलता होगा .. ये नहीं सोचा था उसने…
विधायक: “हाहा…. वैसे तू पॉलिटिक्स में क्यों नहीं ट्राई करती… पूरे हुनर हैं तुझमे…”

मालती: “जी हम जैसों के लिए पॉलिटिक्स में जगह कहाँ… और अब फिर से मैं पॉलिटिक्स में नहीं जाना चाहती..”
विधायक: “फिर से? तू पहले कब पॉलिटिक्स में थी?”
मालती: “जी…. वो… मैं युनिवर्सिटी पॉलिटिक्स में काफी एक्टिव थी…. दो बार प्रेसिडेंट चुनी गई थी मैं”
मालती की कॉलेज की यादें आज फिर से ताजा हो गइ…वो रंगीन पल… वो पॉवर की भूख… जिसके लिए किसी के साथ सोने से भी परहेज नहीं होता था उसे…
विधायक: ”ओह…. प्रेसिडेंट साहिबा… हेहे… फिर छोड़ क्यों दी….पॉलिटिक्स? घर वालों ने शादी करवा दी? हाहा….”
मालती: “जी… वो कॉलेज ख़तम होते ही… शादी हो गई मेरी…”
विधायक: “अरे तो अब आजा… अभी देर कहाँ हुई है… और फिर कब तक किसी के एहसानों पे गुजर करेगी? पॉलिटिक्स में आके जनता की सेवा कर… स्वर्गीय मिश्रा जी को भी अच्छा लगेगा, कि उसके मरने के बाद उसकी बीवी जनता की सेवा कर रही है… और फिर तेरे बच्चे भी अब बड़े ही हो गए हैं…”
मालती: “हाहा… सपने दिखाना तो कोई आप लोगों से सीखे…”
विधायक: “अरे ये लल्लन सिंह फिजूल सपने नहीं दिखाता…” मालती के हाथो को दबाते हुए बोला- “परख है हमें…”
मालती: “अच्छा जी…”
विधायक: “जी हाँ…” और मालती के हाथों को अपने चंगुल से आजाद कर दिया और कुर्सी पे पीछे सहारा लेके आराम से बैठ गया…
मालती: “जी शुक्रिया… पर मैं अभी जहां हूँ वहाँ खुश हूँ….” अपने हाथ पीछे लेती हुई बोली….
“अरे कोई जल्दबाजी नहीं… पर हाँ सोचना जरूर इस बारे में…”
“अच्छा जी अब इजाजत दीजिये मुझे…अच्छा लगा आपसे मिल कर…” मालती कुर्सी ने उठते हुए बोली….
“हाँ हाँ….काफी समय हो गया है…निकलो अब तुम और उस बारे में जरा सोचना…अपने लिए नहीं तो स्वर्गीय मिश्रा जी की आत्मा के लिए…” लल्लन ने कहा
“जी जी…. सोचूंगी…” मालती मुस्कुराते हुए बोली…
“ये… मेरा पर्सनल नंबर रख लो… बेझिझक याद कर लेना” विधायक ने अपना कार्ड मालती की ओर बढ़ाया…
“ओह…. शुक्रिया….” और मालती ने कार्ड को अपनी पर्स में रखा… और अपना कार्ड निकाल कर विधायक को दिया…. “ये मेरा कार्ड… होटल में कभी किसी चीज की जरूरत हो… रूम, सूट,हाल,कैटरर्स,लॉन बुक कराना हो… पर्सनली मुझे फोन कीजियेगा…” मुस्कुराती हुई बोली….
“हाहा…. जरूर….सेवा का मौका तो जरुर देंगे हम” हँसते हुए विधायक ने कहा
और फिर मालती वहां से निकल ली…. विधायक दूर तक मालती की मटकती गांड को निहारता रहा… और फिर वो सीधे अपने अय्याश के अड्डे की ओर निकल लिया…अय्याश का अड्डा…. यानी उसका फार्म हॉउस…!
……………………………………………………………

विधायक लल्लन सिंह ने मालती की दबी हुई आकान्च्छाओ को आज फिर से जगा दिया था… बचपन से वो पॉलिटिक्स में कुछ करना चाहती थी… कुछ बनना चाहती थी! बचपन से ही क्लास की मॉनिटर.. फिर स्कूल की हेड गर्ल और फिर कॉलेज की पॉलिटिक्स! सत्ता का नशा उसने चख रखा था… कॉलेज में अपने इसी नशे की वजह से न जाने कितनी बार चुदी थी वो… और हासिल ब्बहोत कुछ किया था उसने, सब अपने दिमाग और हुस्न से… कब दिमाग का प्रयोग करना है और कब अपने हुस्न का… ये मालती अच्छी तरह जानती थी!
अभी अभी संभली हुई जिन्दगी में वो अभी कोई रिस्क लेना नहीं चाहती थी… कोई भी डिसीजन लेने से पहले उसने ठाकुर की सलाह लेना ठीक समझा… इसी लिए उसने रात में 11.30 बजे ठाकुर को फोन मिलाया…
ठाकुर ने फोन उठाया….
“हाँ बोल मेरी जान….”
“उम्म्म…. कैसे हैं आप….” मालती ने सेक्सी आवाज में रिप्लाई किया
“इतनी रात में फोन करके पूछ रही है कैसा हूँ…जान लंड तड़प रहा है तेरे होंठो की नरम मसाज के लिए…”
“ओहो… आपको तो हमेशा बस…..” मालती ने शिकायती अंदाज में कहा
“और वहां मामला शांत हुआ या नहीं? विधायक जी जादा नाराज तो नहीं हो रहे थे?” ठाकुर ने प्यार से पूछा…
“अरे नहीं नहीं…. वो तो उनका वो आदमी जो आया था क्या नाम था उसका… हाँ अफरोज़.. वो अकडू था… विधायक जी तो आराम से बात कर रहे थे… और फिर मैंने माफ़ी भी तो मांग ली उनसे….”
“फिर ठीक है… वरना साली आज तो तूने फालतू का नुक्सान करा दिया… सजा तो मिलेगी तुझे… मिल तू अगली बार..”
“ओह ठाकुर जी…. मैं भी कब से तड़प रही हू मिलने को…बिस्तर पे बहोत मिस करती हूँ आपको”
“अच्छा……”
“जी हाँ …”
“वैसे तू साली बिना लंड के ज़िंदा कैसे रहती होगी… कहीं…. मेरी पीठ पीछे….??”
“छी-छी… मर जावां मै…. आप ऐसा सोच भी कैसे सकते हैं…आपकी हूँ मैं सिर्फ… और मेरी फुद्दी पे भी सिर्फ आपका हक है…”
“हाँ मेरी रांड…. सोचना भी मत ऐसा करने का… वरना साली भरे बाजार में चुद्वाऊंगा जंगली सांड से…”
“हीही…. सजा देने की बात कर रहे हैं या मजा….”
“हाहा… रांड साली…. कित्ती बड़ी वाली है तू…”
“चलिए न… बड़ा तो आपका है… मैं तो बस…”
“हाहाहा…. साली….. वैसे कोई दिक्कत तो नहीं है न तुझे वहाँ?”
“नहीं नहीं…. और फिर आप हैं न दिक्कत से बचाने के लिए…”
“हा..जानेमन… मैं तो हूँ ही… वैसे तू होटल के काम में अपना फिजूल का दिमाग मत लगाया कर… वहां स्टाफ सब संभाल लेगा… ख़ास ट्रेंड लोग हैं काम के लिए…तू बस ओफ्फिस में बैठा कर और आराम करा कर.”
“जी समझ गई… वो अकाउंटेंट ने मुझे बोला था आज सुबह पैसो के लिए… वो तो मैं भी बेवजह उलझ गई..”
“हाँ हाँ… अब ठीक है… वैसे दुबारा ऐसी गलती मत करना…”
“जी नहीं होगी… पिंकी प्रोमिस”
“हाहा… पिंकी प्रोमिस… साली…. तेरी पिंकी जब मेरा कालू चोदेगा न… तब पता चलेगा तुझे”
“आग मत लगाइए ….”
“हाहा….” ठाकुर हंसा
“वैसे कितना अच्छा होता अगर आप विधायक होते…”
“अरे मेरी जान… मैं क्या किसी विधायक से कम हूँ”…” ठाकुर ने धमक के साथ कहा!
“उम्म्म…. वैसे मैं सोच रही थी कि पॉलिटिक्स ज्वाइन कर लूं… थोड़ी सोशल सर्विस ही हो जायेगी इसी बहाने..”
“हाहा.. वैसे आइडिया बुरा नहीं है… पर साली… अगर तू पॉलिटिक्स ज्वाइन कर ली तो मेरा होटल कौन संभालेगा?”
“ओहो… ठाकुर जी… वैसे भी मैं दिन भर यहाँ बैठी बैठी बोर होती रहती हूँ… और फिर आपका होटल संभालने के लिए आपके वो.. ट्रेंड एम्प्लोयी हैं न…” मालती ने शिकायत करते हुए कहा…
“अरे तू सीरियस है क्या…?”
“और क्या मजाक कर रही हूँ ?”
“साली…. रांड… वैसे तू परफेक्ट है पॉलिटिक्स के लिए… बेबस विधवा नारी…. हाहा..”
“ओहो… आप भी न… आपको तो हर समय मजाक सूझता है..”
“साली मजाक नहीं… तेरी औकात बता रहा हूँ…औकात! दो टके की है नइ है… पॉलिटिक्स में जायेगी… साली तेरा काला चिट्ठा जनता को पता चलेगा तो पता है न… क्या होगा…. साली कहीं की नहीं रहेगी…” ठाकुर ने हनक के साथ एक सांस में मालती को हड़काते हुए कहा…
“उम्म्म…. किसे पता है मेरा काला चिठा? आपको… और वो क्या केवल मेरा काला चिट्ठा है? आपका नहीं? हाँ सारा दोष औरत का ही तो होता है… मैंने ही आपको नहीं रोका था… अपने पेटीकोट का नारा खीचते वक्त!”
“जवान लड़ा रही है साली…. दो टके की रांड…. भूल गई… तू… साली… भूल गई? अगर मैं न होता तो चुद रही होती अभी किसी रंडी खाने में…. रमीज के दोस्तों से…”
मालती को अपनी औकात और मजबूरियां याद आने में जादा देर नहीं लगी…. और उसने अपना बर्ताव थोड़ा नरम किया…
“उम्म्म… श……” मालती सुबकने लगी….. आँख से आंसू आ गए उसके….
“रो क्यों रही है…. मार खाएगी क्या? भेजूं अभी चोदने के लिए किसी को? साली रोना बंद कर…. रांड है तू मेरी… और मेरी रंडियां रोती नहीं..”
“उम्म्म…. अच्छा जी नहीं रो रही….”
“साली…”
“वो मैं तो ये बोल रही थी… कि अगर मैं पोलिटिक्स ज्वाइन करती हूँ तो उससे आपका ही फायदा होगा… और फिर विधायक जी ने खुद मुझे इनवाईट किया है पॉलिटिक्स ज्वाइन करने के लिए”
“ठरकी है वो एक नंबर का…”
“आप भी तो हो”
“हाहा… साली…. चल ठीक है… सोजा अब… कल बताता हूँ मैं तुझे!”
और फिर ठाकुर ने फोन काट दिया…
मालती के पॉलिटिक्स में जाने से ठाकुर को अपने फायदे साफ़ दिख रहे थे… बस उसे डर था कि कहीं चिड़िया पिंजड़े से निकल न जाए… पर वो भी पक्का खिलाड़ी था… मालती जैसी 2-4 और पाल रखीं थी उसने… और फिर ठाकुर जानता था कि चिड़िया भी पिंजड़े से निकलने के पहले 10 बार सोंचेगी!

आज सुबह से ही मालती को ठाकुर के फोन का इंतज़ार था…. उसे इंतज़ार था ठाकुर के निर्णय का… ठाकुर को पता था कि हुनर और हुस्न.. दोनों मामलों में मालती का कोई जवाब नहीं… और अब मालती खुद को ठाकुर की रखैल मान ही चुकी थी तो उसे भी उसके पॉलिटिक्स के प्रति झुकाव से कोई दिक्कत नहीं थी… और फिर मालती के पॉलिटिक्स ज्वाइन करने से फायदा भी तो ठाकुर का ही था…
और फिर परमीशन मांग के मालती ने ठाकुर का दिल और विश्वास दोनों जीत लिए थे…
ठाकुर ने मालती को फोन किया और समझाते हुए उसे इजाज़त दे दी… और साथ में एक दो मर्दानगी भरे वादे भी! मालती बहोत खुश थी… मानो उसे उसकी जिन्दगी मिल गई हो… चेहरे की चमक देखते ही बन रही थी! उसे समझ नहीं आ रहा था कि ठाकुर का कैसे शुक्रिया करे!
उधर दूसरी ओर उसकी बेटी मानसी, उसकी जवानी का ताला भी राका ने तोड़ दिया था… वो राका की बाहों में कब सो गई उसे खुद पता नहीं चला…. सुबह उसने फुटबाल मैच में राका का स्टैमिना देखा था… और अब वो स्टेमिना उसने अपनी चूत में महसूस किया था… अपने मुह में महसूस किया था… उसके लंड की नसों को उसने अपने कोमल लिप्स से महसूस किया था…. राका तो मानो जन्नत में था… एक पैर उसने मानसी की जांघो के बीच डाल रखा था और उसकी एक बांह मानसी को अपने सीने से जकड़े हुए थी…. दोनों बेसुध एक दूसरे की गर्मी का आनंद लेते हुए सो रहे थे… बीच में मानसी की आँख खुली भी… पर खुद को राका के जिस्म से लिपटा पा कर फिर से उसी पोजीशन में कोज़ी हो गई… दोनों जब सांस लेते तो मानसी के बूब्स दब जाते…. और फिर दोनों एक दूसरे पे अपनी गरम साँसे छोड़ देते… मानसी पहली बार किसी मर्द के साथ सो रही थी…
रिषभ शाम को वापस आया… उसने अपनी चाबी से फ्लैट का लॉक खोला और अन्दर आ गया….. ड्राइंग रूम में लड़की के कपड़े बिखरे देख कर उसकी आँखे चमक उठीं… उसने वहां पड़ी मानसी की ड्रेस को उठाया और अपनी नाक के पास ले जा कर उसे सूंघा… जसप्रीत… ओह… तो आज जस्सो रानी के अकेले अकेले मजे ले रहा है साला…(मानसी ने भी वही परफ्यूम लगा रखा था जो जस्सो लगाती थी)! वो भी कम हरामी नहीं था… तुरंत बेडरूम में जा घुसा.. और बेड पर कूद गया… और राका को मानसी के ऊपर से हटाया…. मानसी तो पहले से जग रही थी…. वो रिषभ को बेड पे देख के चीख पड़ी…… “आआआआआआउ…… heeyyyyyyyyy……whoo are yoo…… …” और चिल्लाते हुए राका के पीछे हो गई और चादर अपने ऊपर खींच ली!
“साले तू….. नॉक नहीं कर सकता था…. बाहर निकल अभी….. यार…” राका थोड़ा गुस्से में बोला…
“चिल्ल यार… मेरे को लगा कि….”
“साले रिषभ…. तू भी न….”
मानसी ने अपना चेहरा राका के पीछे छुपा रखा था…. रिषभ ने इशारों में राका से पूछा…”कौन है”… और राका ने भी उसे इशारों में ही समझा दिया…. और फिर रिषभ “सॉरी” बोलता हुआ रूम से निकल गया… और रूम का डोर भी लगा गया…!
रिषभ के जाते ही मानसी ने अपना सर राका के सीने में छुपा लिया…..
“इट्स ओके डार्लिंग… बेस्ट फ्रेंड है मेरा वो…. आई होप तुम्हे बुरा नहीं लगा होगा…” राका ने प्यार से मानसी की नंगी पीठ पर हाथ फिराते हुए कहा…
“बुरा???….. अरे डर गई थी मैं तो…. डरा दिया था तुम्हारे इस ‘बेस्टफ्रेंड’ ने मुझे…” मानसी थोड़ा नाटक करती हुई बोली…
“अरे मेरी जान… मेरे होते हुए डरने की बात…? अरे जान ले लूँगा तुझे डराने वाले की..” राका ने मानसी को अपनी ओर खींचते हुए कहा…
इस समय राका का लंड मानसी की बाईं जांघ से दब रहा था… और अब उसमे फिर से जान आने लगी थी…मानसी को उसकी चुभन महसूस होते ही शरम आ गई और उसने अपनी नज़रे नीचे झुका ली…राका के तुरंत पोजीशन बदली… अब मानसी अब उसके नीचे थी… वो उसके कंधो को… गले को… कान… चेहरा..हर जजः चूम रहा था… और मानसी किसी कमसिन कलि की तरह बिस्तर पर लेटी अपने आशिक को सब करने दे रही थी…
“लोलीपॉप खाएगी….?” राका मानसी के कान में फुसफुसाया…
मानसी शर्मा गई… और हलके से मुस्कुराई…. और राका के गाल पर एक चुम्मी दे दी…
राका ने फिर पोजीशन बदली…. अब वो नीचे था और मानसी ऊपर… मानसी का मुह उसने दोनों हाथो से पकड़ कर अपने लंड के पास झुका दिया…. मानसी ने उसके लंड को अपनी जीभ बाहर निकाल कर चाटा… मानसी की इस हरकत ने राका के लंड की हालत खराब कर दी…. काला कोबरा अब फनफना रहा था… पूरे साढ़े सात इंच मानसी बार बार अपनी जीभ से नाप रही थी…. नीचे अन्डू तक जीभ फिराती हुई ले जाती और फिर ऊपर लंड के मुकुट तक आती… राका के लंड की फोरस्किन सरक चुकी थी… उसके लंड का अगला भाग छिली हुई लीची जैसे चमक रहा था… और बाकी लंड काला कठोर! राका की हालत खराब हो रही थी… और मानसी की जुल्फें…. जो राका के पेट और जांघ पर बार बार आ रही थीं… वो उसकी हालत और खराब कर रही थी… अबकी बार मानसी के कोमल होंटों ने राका की लीची को अपने चंगुल में लिया तो उसके मुह से आह निकल गई… राका की आह ने मानसी के चेहरे पे मुस्कान बिखेर दी… उसकी जीभ अब फिर से राका के अन्डुओं को टीज़ कर रही थी… राका की बेचैनी उसे जवाब दे रही थी…
राका ने फिर पोजीशन बदली… अब वो मानसी के पीछे था… दोनों बेड पे लेटे थे…. मानसी राका के आगे थी…राका के बदन की गिरफ्त में…. राका दोनों हाथो से उसके बूब्स दबा रहा था… और अपना लंड उसकी गांड की दरार में फंसा कर हौले हौले से धक्के लगा रहा था…. “उम्म्म…. प्लीज्ज़… पीछे नहीं….” मानसी ने विनती की… राका मुस्कुराया और थोड़ा नीचे सरकटे हुए पीछे से ही लंड मानसी की चूत पे सटा दिया…. “जानू… आगे कर लूं??” राका मानसी को टीज़ करते हुए बोला… मानसी ने जैसे ही कुछ बोलने के लिए अपना मुह खोला…राका ने अपना राजकुमार मानसी की राजकुमारी के अन्दर ठांस दिया…. मानसी का मुह खुला का खुला रह गया… जैसे ही मानसी ने सांस ली… राका ने दूसरा झटका लगाया… राका ने मानसी को दबा रखा था अपने जिस्म से…. पूरा लंड अब अन्दर था..राका हौले हौले… प्यार से स्ट्रोक मार रहा था… मानसी भी प्यार भरी आंहे भर रही थी… मानसी को मस्ती में देख कर राका ने अपने स्ट्रोक्स की रफ़्तार बढ़ा दी…. अब वो मानसी की डीपली घुसेड़ के ले रहा था… और मानसी भी अपनी कमर हिला हिला के उसका ले रही थी…. सारे कमरे में मानसी की सिसकियाँ गूँज रही थी… और हिलते बेड की आवाज माहौल को और भी रंगीन कर रही थी!
राका ने उसे इसी पोजीशन में 20 मिनट तक चोदा… और फिर मानसी के अन्दर ही अपना प्रेमरस छोड़ दिया… मानसी भी झड गई…!
दोनों एक बार फिर निढाल होकर एक दूसरे की बाहों में पड़े थे…

ये मानसी का पहला एक्सपीरियंस था… और पहले एक्सपीरियंस में ही राका ने उसे जन्नत का एहसास दिला दिया था… दोनों एक दूसरे में इतने मस्त हो गए थे कि समय का पता ही नहीं चला… रात के नौ बज रहे थे… राका और मानसी अभी भी एक दूसरे की बाहों में पड़े मस्ती कर रहे थे… एक दूसरे के जिस्म की गर्मी का मजा ले रहे थे….
“साले डिनर नहीं करना?” रिषभ चिल्लाते हुए बोला….
राका थोड़ा होश में आया और फोन में टाइम देखा… “ओ तेरी.. 9.30 हो गया…”
“व्हाट??? 9.30.. ओ माय गॉड… मैं तो गई काम से…” मानसी परेशान होती हुई उठी…
“क्या हुआ जान…” राका ने मानसी के चेहरे से जुल्फें हटाते हुए प्यार से पूछा
“पीजी में 9 बजे तक एंट्री होती है यार… अब मैं क्या करू… और अगर मैं अनहि पहुची तो वो कमीनी वार्डन घर में मम्मी को फोन कर देगी” मानसी परेशान होती हुई बोली…
“ओह मेरी जान… अभी चल मैं छोड़ देता हूँ चलके… बोल देना ट्रैफिक में फंस गई थी…” राका ने कूल वे में कहा…
“पागल हो गए हो क्या… जानते नइ हो तुम मेरी वार्डन को… एक नंबर की चुड़ैल है… इस समय तुम्हारे साथ देखा उसने मुझे तो पक्का घर फोन करके उल्टा सीधा बोलेगी मम्मी को…”
“फिर तू मम्मी को ही फोन करके क्यों नहीं बोल देती कि तू आज पीजी वापस नहीं जायेगी… फ्रेंड के यहाँ रुकी है…” राका आईडिया देता है…
“वाव..राका… ये आईडिया मेरे दिमाग में क्यों नहीं आया… योर सो जीनियस….” राका के गाल को एक्साइटमेंट में किस करती हुई बोली…
“अब फोन कर और प्रॉब्लम सोल्व कर जल्दी.. वरना तेरी वो चुड़ैल वार्डन तेरी माँ चोद देगी..” राका मानसी का एक बूब दबाता हुआ मस्ती में बोला…
“शट अप..राका..” मानसी राका से थोड़ी नाराजगी जताती है…. जिसे राका मजाक में टाल देता है..
फिर मानसी फोन उठाती है और पहले वार्डन को फोन करती है… और उसे बताती है कि वो आज रात नहीं आ पायेगी.. और फिर अपनी माँ को फोन करती है.. और उन्हें भी बता देती है…कि वो एक फ्रेंड के यहाँ रुकी हुई है!
“ओह डार्लिंग… भूख लगी है मेको….” मानसी राका की आँखों में झांकते हुए प्यार से बोली…
“उम्म्म…. भूख तो मुझे भी लगी है मेरी जान…” राका आँख मरते हुए बोला… और मानसी को अपने पास खींच कर दबोच लिया…
“ओहो… प्लीज़…. अभी नहीं…” मानसी रिक्वेस्ट करती है….
राका अपनी पकड़ थोड़ी ढीली करता है… और प्यार से पूछता है….
”क्या खाएगी? कहीं बाहर चलें? या आर्डर करना है?”
“उम्म्म…. पिज़्ज़ा? पिज़्ज़ा आर्डर करें”
“एनीथिंग बेबी….” राका बोला…
“उम्म्म… तो फिर पिज़्ज़ा ही आर्डर कर दो… 1 लार्ज… फार्महाउस चीज़बर्स्ट” मानसी बोली
“एक लार्ज… चीज़ बर्स्ट…. ओय.. वैसे आज तो दिन में दो बार खा चुकी है तू ये…. अब फिर से??” मानसी को टीज़ करता हुआ राका बोला… और उसका हाथ अपने लंड पे रख देता है…
“कितने नॉटी हो तुम…” मानसी आँखे मटकाते हुए बोली… और उसके लंड से हाथ हटा लिया…
दोनों की मस्ती ख़तम होने का नाम ही नहीं ले रही थी…
इतने में रिषभ फिर से बाहर से चिल्लाते हुए बोला…
“BC.. डिनर नहीं करना क्या तुम दोनों को? फिर रात में मेरे अंडे मत खा जाना…”
“चल साले… मैं क्यों खाऊंगा तेरे अंडे? और ये.. ये तो मेरे खाएगी… तेरे क्यों खाएगी?” राका चिल्लाते हुए बोला.. और बिस्तर से उठ के शॉर्ट्स पहने…
“पिज़्ज़ा खायेगा?” राका ने बहार आके रिषभ से पूछा…
“एक लार्ज.. फार्महाउस… चीज़ बर्स्ट…” रिषभ राका को चिढ़ाते हुए बोला..
“साले BC.. तू नहीं सुधरेगा…” राका पानी पीते हुए बोला…
“वैसे कांग्रेट्स यार…”
“थैंक यू थैंक यू.. और चल आर्डर कर दे पिज़्ज़ा…”
“कौन सा?… लार्ज… चीज़ बर्स्……….” रिषभ फिर से राका को टीज़ करता है
“साले…..”
इतने में मानसी बाहर आ जाती है…
उसने राका की टी शर्ट और शॉर्ट्स पहन लिए थे… जो कि काफी लूज़ हो रहे थे उसे.. पर हमेशा की तरह माल लग रही थी.. बालों की हालत और उसकी चाल को देखकर कोई भी बता सकता था कि अभी कुछ देर पहले वो क्या गुल खिला रही थी…
“ओह… हाय मानसी….” रिषभ आगे आके मानसी से हाथ मिलाता है और उसकी कोमलता को महसूस करता है!
“मानसी… ये रिषभ.. मेरा बेस्ट फ्रेंड… या यूं कहो तो मेरा भाई…” राका इंट्रोड्यूस कराते हुए बोला..
“ओह… हेलो रिषभ…” स्माइल करती हुई बोलती है…
“आई होप यू बोथ हैड वंडरफुल डे टुडे….” राका दोनों को टीज़ करता हुआ बोला…
मानसी शर्मा गई.. और राका मानसी के बगल में आके बोला “ऑफ़कोर्स वी हैड”

फिर रिषभ ने फोन उठाया और पिज़्ज़ा आर्डर कर दिया- “2 लार्ज फार्महाउस… चीज़ बर्स्ट”. आर्डर देते समय उसने “2” पर कुछ जादा ही जोर लगाया… और उस समय वो मानसी को ही देख रहा था… मानसी को समझने में देर नहीं लगी कि रिषभ क्या कहना चाहता है..उसने भी एक हलकी सी स्माइल दी और राका के बगल में आके बैठ गई!

20 मिनट में पिज़्ज़ा आ गया…
फर्जी बकचोदी करते हुए तीनो ने डिनर किया… और फिर राका मानसी को लेकर वापस बेडरूम में आ गया…
“आल द बेस्ट मेरे दोस्त…” रिषभ बाहर से चिल्लाया!
राका ने स्माइल करते हुए दरवाजा अन्दर से लॉक कर लिया!
“कमीना है साला.. माइंड मत करना इसकी बातों को…” राका मुस्कुराते हुए मानसी से बोला
“ओहो.. डार्लिंग… फ्रेंड्स तो होते ही कमीने हैं… और जो कमीने नहीं होते वो फ्रेंड्स नहीं होते” स्माइल करती हुई मानसी बोली
“ओये होए…. क्या बात है…लव यू जान… लव यू लाइक एनीथिंग” मानसी के बगल में आते हुए राका ने कहा…
“लव यू टू राकू…डार्लिंग….”
“राइड पे चलें?” राका आँख मारते हुए बोला..
“लॉन्ग राइड पे?” मासूमियत के साथ मानसी ने पूछा…
“हां मेरी जान…. लॉन्ग….लॉन्ग राइड पे….”
राका का लंड तन चुका था… और मानसी अपनी जांघ पर उसकी कड़कता को महसूस भी कर रही थी…
अपनी जांघ को हटाते हुए बोली- “पर एक शर्त है… राइड मैं करूंगी….”
राका मुस्कुराया… और बेड पे चित होके टाँगे पसार के लेट गया….
हाथ बढ़ाके बेड के गद्दे के नीचे से एक कंडोम का पैकेट निकाला…. और मानसी को थमा दिया…
“ये क्या है?” मानसी पहली बार कंडोम देख रही थी…
“जानू… ये हेलमेट है तेरे केले का… ये मेरी चीज़ को तेरी चूत में बर्स्ट होने से बचाता है…”
मानसी शर्मा गई…. उसे वो पिज़्ज़ा वाली बात फिर से याद आ गई…
इसी बीच राका ने अपने शॉर्ट्स उतार कर फेंक दिए…
“ओ माई गॉड…. पहले क्यों नी लगाया था इसे..” परेशान होती हुई बोली
“अरे मेरी जान… कल मोर्निंग में पिल्स ले लेना… टेंशन की कोई बात नहीं है..”
“पर…..”
“अरे पर वर छोड़ न अब…” और राका ने उसे अपने ऊपर खींच लिया और अपनी जीभ उसके मुह में घुसा दी…
अगले ही पल दोनों एक दूसरे को मगन हो कर चूम रहे थे…. मानसी को गरम होते देर नहीं लगी… फिर से दोनों एक दूसरे में खो चुके थे…. चूमते हुए ही राका ने मानसी के शॉर्ट्स भी नीचे सरका दिए और टी शर्ट के अन्दर हाथ डाल कर उसके कोमल बूब्स को मसल रहा था….
मानसी की चूत अब उसे जवाब दे रही थी… उससे और सब्र नहीं हुआ… और उसने चुम्बन तोड़ा और नीचे अपने खिलौने के पास आ गई… उसे अपने हाथो से थोड़ा टीज़ किया… और किस किया…
राका ने कंडोम का पैकेट खोल कर कंडोम मानसी को थमा दिया….
मानसी कंडोम को हाथ में लेकर देख रही थी…. उसे नहीं पता था कि इसे कैसे लगाना है…. राका ने फट से उसके हाथ से कंडोम लिया और अपने लंड की टिप पर रख कर उसे नीचे तक रोल ऑफ किया…
“इट्स रेडी मेरी जान…. राइड ओवर इट!!!…”
मानसी की बेचैनी और चूत की प्यास ने उसे तुरंत लंड पर बैठा दिया….
लंड पूरा उसकी चूत में सरक चुका था… वो वैसे ही बैठ कर हौले हौले अपनी गांड हिला रही थी… उसके चुत्तड जब राका के जिस्म से रगड़ खाते तो उसे और भी मजा आता… मानसी जब उछल उछल कर चुदती तो राका के अन्डू उसके गांड के छेद में लगते…. इसी पोज़ में मानसी ने राका के लंड को अपनी चूत के कोने कोने से रगड़ाया… पंद्रह मिनट तक राइड करती रही… फिर राका ने उसे अपने नीचे ले लिया… और मिशनरी में उसे चोदा और झड़ गया… मानसी तीसरी बार चुदी थी… पर उसका मन नहीं भरा था… पर वो अपने मन को खुल कर बताने में शर्मा भी रही थी…राका भी अपनी नइ माल को जादा तंग करना नहीं चाह रहा था… वैसे भी कौन सा कहीं भागी जा रही थी वो… सुबह का फुटबाल मैच.. और फिर तीन बार की चुदाई…इन सबने उसे आज थोड़ा थका भी दिया था… दोनों बारी बारी बाथरूम गए… खुद को थोड़ा फ्रेश किया… और वापस एक दूसरे की बाहों में सो गए!

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