फ़ोन सेक्स – मोबाइल फ़ोन सेक्स part 9

मैं अंशिका को अपने सामने देखकर हैरान रह गया..मैंने सिर्फ एक बार ही उसे अपना घर बाहर से ही दिखाया था, और वो आज मेरे घर आ भी गयी और मेरे कमरे में भी…मम्मी ने उसे अन्दर कैसे आने दिया..

मैं : अंशिका……!!!! तुम..तुम यहाँ कैसे..?

अंशिका (कातिल मुस्कान फेंककर से मेरी तरफ आते हुए) : पहले मुझे ये बताओ, तुमने मेरा फ़ोन क्यों नहीं उठाया…मेरी कल वाली बात से इतने नाराज हो गए क्या..हूँ…बोलो…बोलो न..

वो कहती हुई बिलकुल मेरे पास आकर खड़ी हो गयी, मैं तो सिर्फ टावल लपेट कर खड़ा हुआ अपनी शर्ट प्रेस कर रहा था, मुझे क्या मालुम था की वो इस तरह से मेरे कमरे में आ जायेगी, मेरे कमरे में आने के लिए तो मम्मी भी बाहर से आवाज लगा कर अन्दर आती है, ये तो धड़ल्ले से अंदर चली आई…

वो मेरे बिलकुल सामने आकर खड़ी हो गयी, उसकी साँसे मेरी साँसों से टकरा रही थी, उसके शरीर से निकलती गर्मी मुझे साफ़ महसूस हो रही थी, और मेरे पीछे खड़ी हुई प्रेस से निकलती गर्मी मुझे अपनी पीठ के ऊपर महसूस होने लगी…मैंने झट से पलट कर प्रेस को बंद कर दिया..

मैं : वो…वो. तुमने बात ही ऐसी करी थी की मुझे बुरा लगा…और उसके बाद मैंने सेल को सायलेंट मोड पर कर दिया..

अंशिका (मेरी गर्दन के दोनों तरफ अपने पंजे जमाते हुए , मेरी आँखों में देखते हुए) : लव मी…हेट मी….बट नेवर इग्नोर मी…अंडरस्टेंड …

मुझे उसकी आवाज में एक तरह कठोरता थी…पर अगले ही पल उसके होंठो पर मुस्कान तेर गयी…और बोली ” आई एम् सॉरी फॉर येस्टरडे ..प्लीस मुझे माफ़ कर दो…और ये कहते हुए उसने अपने होंठ मुझपर जमा दिए और उन्हें किसी पागल बिल्ली की तरह से चूसने लगी…

मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था…मुझे सबसे ज्यादा चिंता तो मम्मी की हो रही थी, जो बाहर थी, अगर उन्होंने अंशिका को अंदर आने दिया है तो वो भी कभी भी अंदर आ सकती है…मैंने उसकी किस को तोड़ते हुए उसे पीछे किया…उसकी आँखों में हेरत के भाव थे, मैंने पहली बार ऐसा किया था..

मैं : अंशिका….अंशिका…प्लीस..ये क्या कर रही हो…मम्मी बाहर ही है…वो अंदर आ जाएँगी..क्यों मुझे मरवाने के काम कर रही हो…

अंशिका के चूमने की वजह से मेरा लंड तन कर खड़ा हो चूका था, मैंने टावल के नीचे कुछ नहीं पहना हुआ था..इसलिए मेरे टावल के सामने की तरफ एक टेंट सा बना हुआ था, जिसे देखकर अंशिका होले -२ मुस्कुराने लगी..

मैंने भी उसकी नजरों का पीछा करते हुए जब नीचे देखा तो तब मुझे पता चला की कमीना लंड खड़ा हो चूका है…

अंशिका : तुम अपनी मम्मी की चिंता मत करो, वो बाहर बैठकर मेरी बहन कनिष्का के साथ गप्पे मार रही है.

मैं उसकी बात सुनकर हैरान रह गया, वो अपनी बहन को लेकर आई थी मेरे घर..

मैं : क्या !! तुम्हारी बहन भी आई है…तुमने क्या कहा उससे.

अंशिका : मैंने उसे तुम्हारे बारे में तो कल ही बता दिया था, और जब उसने मेरा मायूस चेहरा देखा तो वो मुझसे बोली की चलो पहले तुम्हारे घर ही चलते हैं..तुमसे मिलने, और जब हम यहाँ आये तो तुम्हारी मम्मी ने कहा की तुम अभी अंदर ही हो, मैंने उनसे पूछा की क्या मैं अंदर जाकर तुमसे मिल सकती हूँ तो उन्होंने मना नहीं किया, मैंने कनिष्का को इशारा करके कहा की तुम्हारी मम्मी को बातों में लगाये रखे..तो इसलिए तुम अपनी मम्मी की चिंता मत करो…सिर्फ अपने नीचे खड़े इस लंड की चिंता करो..जो तुम्हारे बस में नहीं है, और मुझे देखते ही खड़ा हो गया है..

मैं उसकी बात सुनकर हैरान रह गया, वो बड़े आराम से ये सब बोले जा रही थी, और उसे मेरी मम्मी के अंदर आने का भी डर नहीं था, उसे पक्का विशवास था की उसकी बहन बाहर सब संभाल लेगी, पर ये करना क्या चाहती है..वो पिछले कई दिनों से पब्लिक प्लेसेस में आधे अधूरे सेक्स कर रही थी, जिसकी वजह से उसकी झिझक ख़त्म सी हो गयी थी, पर ये कोई पब्लिक प्लेस नहीं है, ये मेरा घर है, बाहर ये सब करने में मुझे कोई डर नहीं लगता था, पर अपने ही घर में मेरी गांड फट रही थी…और दूसरी तरफ अंशिका को तो जैसे इन सबमे एक अनोखा मजा आ रहा था. मैं आज उसकी ये हिम्मत देखकर सच में उसकी जवानी की आग का कायल हो गया.

मैं : तुम समझा करो अंशिका..ये सब यहाँ करना ठीक नहीं है..मैं अब तुमसे गुस्सा नहीं हूँ…चलो बाहर चलते हैं..

ये कहकर मैंने अपनी शर्ट उठाई और पहनने लगा..पर अंशिका ने झपटकर उसे छीन लिया..

अंशिका : तुम डर क्यों रहे हो, तुमने भी तो मेरे साथ कई बार ऐसी सिचुअशन में मजे लिए हैं…आज मैं भी तो वोही कर रही हूँ..

और ये कहते हुए उसने आगे बढकर मेरे टावल के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ लिया..

अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह अंशिका……म्मम्म…..

अंशिका : और मैंने सोचा की अगर मैं पर्सनली आकर तुमसे “सॉरी” बोलूंगी तो तुम मुझे जरुर माफ़ कर दोगे…बोलो..करोगे न..

और उसने मेरे लंड को धीरे-२ दबाना शुरू कर दिया..

मेरी तो हालत ही खराब हो गयी, गीले टावल के ऊपर से उसके हाथ मेरे लंड को पकडे हुए थे, और मेरा लंड एकदम स्टील जैसा कठोर हो चूका था, मुझमे सोचने समझने की हिम्मत ही नहीं थी…एक मन तो कर रहा था की इसे अपने बिस्तर पर पटकू और नंगा करके यहीं पेल दूँ, पर अगले ही पल बाहर बैठी उसकी बहन और अपनी मम्मी के बारे में सोचकर मुझे पसीना आने लगा..

मैं : रुको…एक मिनट…मुझे बाहर तो देखने दो की वो दोनों क्या कर रहे हैं..

अंशिका ने मुस्कुराते हुए मुझे जाने का रास्ता दे दिया..

मैं लगभग भागते हुए दरवाजे के पास गया और उसे थोडा सा खोलकर बाहर की और देखा..मेरे कमरे और ड्राईंग रूम के बीच एक स्टोर रूम और बाथरूम है, और उसके बाड़ बीच में में सोफे के ऊपर बैठी हुई कनिष्का को जब मैंने देखा तो देखता ही रह गया..एकदम परी जैसी थी वो, पिंक कलर के सूट में वो बार्बी की गुडिया जैसी लग रही थी…एकदम गोरी, छाती भी पूरी भरी हुई, और बाल कंधे से थोडा नीचे तक थे..मैं उसे निहार रहा था की तभी मेरे पीछे से अंशिका के हाथ आगे की तरफ आकर मुझसे लिपट गए और उसके सोफ्ट सी ब्रेस्ट मेरी नंगी कमर के ऊपर रगड़ खाने लगी..अंशिका ने मेरे दोनों निप्पल पकड़कर उन्हें मसलना शुरू कर दिया, मुझे थोड़ी गुदगुदी सी हो रही थी, और साथ ही साथ उसने अपने गीले होंठो से मेरी पीठ पर अनगिनत किस्सेस करनी शुरू कर दी.

ड्राईंग रूम के दूसरी तरफ किचन थी..मम्मी वहां खड़ी हुई चाय बना रही थी..और साथ ही साथ कनिष्का से कुछ बाते भी कर रही थी, कनिष्का का ध्यान मेरे कमरे की तरफ ही था, उसकी बहन जो अंदर थी, पर वो अपना काम अच्छी तरह से कर रही थी, मम्मी से गप्पे लगाकर उन्हें उलझाये रखने का..वो क्या बात कर रहे थे, मुझे सुनाई तो नहीं दे रहा था, पर बीच-२ में दोनों के हंसने की आवाजें जरुर सुनाई दे रही थी..कनिष्का जब भी मेरे कमरे की तरफ देखती तो मुझे डर लगने लगता की कहीं उसे मैं खड़ा हुआ तो दिखाई नहीं दे रहा, पर वो काफी दूर थी, और इतनी दुरी से दरवाजें में थोड़ी सी दरार को देखना लगभग नामुमकिन था..मुझे भी अब इस नए अड्वेंचर में मजा आने लगा था..खासकर अंशिका के “सॉरी” बोलने के तरीके पर

अब अंशिका का हाथ मेरी छाती से फिसलता हुआ नीचे की और आने लगा..और उसने फिर से मेरा लंड पकड़ लिया..और अगले ही पल दुसरे हाथ से उसने मेरा टावल खोल दिया..टावल मेरी टांगो के बीच आकर गिर गया और मेरा लंड अंशिका के हाथ में आ गया..

मैं अपने कमरे के दरवाजे में अब नंगा खड़ा हुआ था, और बाहर मेरी मम्मी और उसकी बहन थी, पर उसे इन बातों से जैसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था…वो तो बस “सॉरी” बोलने में लगी हुई थी..मैं तो नंगा था पर मुझे मालुम था की वो यहाँ नंगी नहीं हो सकती थी..पर अब मेरे जिस्म में भी अजीब सी तरंगे उठने लगी थी, मैं एकदम से उसकी तरफ घुमा और उसके होंठों को अपने होंठों से जकड कर जोरों से चूसने लगा…उसके गीले मुंह से निकलता सारा रस मेरे मुंह में जाने लगा, उसके होंठों का नमपन आज कुछ ज्यादा ही मीठा लग रहा था..मेरे दोनों हाथ उसकी छाती पर जम गए और उन्हें मसलने लगे, सूट और ब्रा पहनने के बावजूद उसके खड़े हुए निप्पल मुझे साफ़ महसूस हो रहे थे.

अंशिका भी हलकी -२ आवाजें निकलती हुई अपने शरीर को मेरे नंगे बदन से रगड़ रही थी..उसके दोनों हाथ मेरे लंड के ऊपर जमे हुए थे..और वो उन्हें काफी तेजी से आगे-पीछे कर रही थी..

मुझे लगा की अगर उसने एक-दो और झटके दिए तो मैं तो गया काम से…मैंने झट से उसके कंधे पर दबाव डाला और उसे नीचे बिठा दिया…और अगले ही पल मेरा पूरा लंड उसके मुंह के अंदर था..

अह्ह्ह्हह्ह …. यस बेबी …सक मी….सक मी….हार्ड…..

मैंने दिवार से टेक लगाकर नीचे पंजो के बल बैठी अंशिका के मुंह में अपना लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया..और सर घुमाकर बाहर की और देखा कहीं कोई आ तो नहीं रहा..

मम्मी चाय बनाकर ले आई थी..और उन्होंने मुझे बाहर से ही आवाज लगायी…”विशाल्ल्ल….ओ विशाल…बेटा बाहर आओ, चाय बन चुकी है..”

मेरे लंड से एकदम से में ऐसा प्रेशर बन गया की किसी भी पल बाड़ आ सकती थी…..मैं वहीँ दरवाजे में खड़ा हुआ चिल्लाया…”कमिंग…आई एम् कमिंग…..” और अगले ही पल मेरे लंड से पिचकारियाँ निकल-२ कर अंशिका के मुंह में जाने लगी…

अब बेचारी कनिष्का और मम्मी को थोड़े ही मालुम था की मैंने “कमिंग” किसलिए बोला था…

अंशिका ने मेरा सारा माल चूस-चूसकर पी लिया..और ऊपर की तरफ देखकर अपने उसी अंदाज में बोली…यम्मी…

मैंने उसे जल्दी से बाहर जाने को कहा, वो अपने रुमाल से चेहरा साफ़ करती हुई बाहर की और चली गयी..

बाहर जाकर उसकी आवाज मुझे सुनाई दी “आंटी…विशाल आ रहा है बस…”

और वो बैठकर अपनी बहन से खुसर फुसर करने लगी.

मैंने बिजली की तेजी से कपडे पहने और एक मिनट के अंदर ही मैं भी बाहर आ गया..

कनिष्का ने जब मुझे देखा तो वो मंत्रमुग्ध सी मुझे देखती हुई उठ खड़ी हुई..

अंशिका : विशाल, ये है मेरी सिस्टर..कनिष्का, इसी के एडमिशन के लिए मैंने तुमसे बात करी थी..

मैं भी कनिष्का की सुन्दरता देखकर अपनी सुध बुध खो सा बैठा..अंशिका की बात सुनकर मैं थोडा मुस्कुराया और कनिष्का की तरफ हाथ बढाकर कहा “हाय..कनिष्का, हाव आर यु…”

कनिष्का ने भी अपना हाथ मुझे थमा दिया, बिलकुल रुई जैसा था उसका एहसास…..मैंने उसे छुआ तो मेरे पुरे बदन में करंट सा लग गया, जिसे शायद कनिष्का ने भी महसूस किया होगा.

मैंने उन दोनों को चाय ऑफर की और मैं किचन में खड़ी हुई मम्मी के पास गया, जो अजीब सी नजरों से मुझे घूरे जा रही थी..

मम्मी : तेरी फ्रेंड्स भी है, तुने तो कभी बताया भी नहीं..

मैं : मम्मी, ये क्या बताने की बातें होती हैं…ये तो बस ऐसे ही..

मम्मी से मेरी काफी अच्छी बनती है, वो अक्सर मुझसे मेरे कॉलेज के बारे में और मेरी गर्ल फ्रेंड्स के बारे में पूछती रहती है..पर मैं उनसे शर्म की वजह से कुछ नहीं बोल पाता..और वैसे भी आजकल के हर माँ बाप जानते है की उनके बच्चे अब ये सब नहीं करेंगे तो क्या उनकी उम्र में जाकर करेंगे..

मम्मी : वैसे दोनों बहने हैं काफी सुन्दर..तुझे कोनसी पसंद है..

मैं : मोम…आप भी ना…ऐसा कुछ नहीं है..

मम्मी : कुछ तो है बेटा, मैंने भी पूरी दुनिया देखि है, कोई लड़की पहली ही बार में लड़के के बेडरूम में नहीं चली जाती…खासकर जब उसकी मम्मी बैठि हो..

मैं : मोम..आजकल ये सब चलता है, आपके ज़माने में ऐसा नहीं होता होगा, और आपको ये सब अच्छा नहीं लगता इसलिए मेरी फ्रेंड्स घर नहीं आती, और ये आई तो अंदर भी चली गयी, इसमें कोनसी बड़ी बात है…वैसे भी ये अंशिका अपनी बहन के एडमिशन को लेकर काफी परेशान है, और मेरी एक-दो कॉलेज में अच्छी पहचान है, बस तभी ये उसे लेकर आई है, और आप है की पाता नहीं क्या-२ सोच रही हो..

मम्मी : ठीक है..ठीक है, नाराज क्यों होता है, मैं तो बस तेरी टांग खींच रही थी..हा हा .. चल बाहर चल, नहीं तो वो दोनों समझेंगी की मैं उन दोनों में से किसी को अपनी बहु बनाने के लिए तुझसे लडाई कर रही हूँ..

मैं और मम्मी हँसते हुए बाहर आ गए..

फिर सबने चाय पी, मैंने हल्का सा नाश्ता किया और मैं उन दोनों के साथ बाहर आ गया.

अंशिका आज अपने पापा की कार लेकर आई थी, मारुती स्विफ्ट. उसने चाभी मेरी तरफ फेंकी और खुद आगे जाकर बैठ गयी, कनिष्का पीछे जाकर बेठी और मैंने कार चलानी शुरू कर दी.

कार के चलते ही पीछे बैठी हुई कनिष्का की चंचल अकाज गूंजी : “वाव दीदी…आपने तो कमाल कर दिया..आई एम् इम्प्रेस…”

मैं कुछ समझा नहीं की वो क्या बोल रही है.

और फिर कनिष्का मेरी तरफ सर घुमा कर बोली : यु नो विशाल, दीदी ने मुझे चेलेंज किया था की वो आज तुम्हारे कमरे में जाकर दिखाएगी…और वो भी पहली बार में ही..और इन्होने वो कर दिया..

ओहो..अब समझा, तो ये सब पहले से तय था और इसलिए वो इतनी दिलेरी दिखा रही थी..

मैं (कनिष्का की तरफ देखते हुए) : तो इसमें कोनसी बड़ी बात है..किसी के कमरे में जाना तो बहुत आसान है..कोई भी कर सकता है.

कनिष्का : नहीं, मेरी दीदी नहीं कर सकती ये सब, ये ऐसी है ही नहीं, तभी तो मैंने इन्हें ये चेलेंज दिया था, यहाँ आते वक़्त…

मैं (अंशिका की आँखों में देखकर मुस्कुराते हुए) : मुझे मालुम है की तुम्हारी दीदी ऐसी नहीं है, पर अब हो गयी है, मेरी संगत में आकर..

अंशिका ने शरमाकर अपना चहरा दूसरी तरफ घुमा लिया और बाहर की और देखने लगी..

कनिष्का थोडा आगे खिसक आई और हम दोनों के बीच अपनी गर्दन लाकर बोली : वैसे क्या मैं पूछ सकती हूँ की आप दोनों इतनी देर तक कर क्या रहे थे अन्दर..??

उसकी बात सुनकर अंशिका के चेहरे की लालिमा और गहरी हो गयी..

मैं : तुम्हे इतनी फिकर हो रही थी अपनी दीदी की तो अन्दर ही आकर देख लेती की हम क्या कर रहे थे..

अब शर्माने की बारी कनिष्का की थी, मैंने इतने करीब से उसके चेहरे पर आते शर्म के भाव देखे की मेरा तो मन किया की उसे वहीँ चूम लू..उसमे से आती भीनी खुशबू पूरी कार में भरी हुई थी..और बड़ी मदहोश सी करने वाली थी..

अंशिका (अपनी बहन से) : तू अपने काम से काम रख कन्नू…अभी इतनी बड़ी नहीं हुई है तू जो इन सबमे इतना इन्तरस्त ले रही है तू..

कनिका : ओहो दीदी..आप भी न, मुझे तो आप बच्ची ही समझते रहना, आई एम् यंग नाव..कॉलेज में आ गयी हूँ अब तो..

मैं उन दोनों बहनों की बातें सुनता रहा और मजे लेता रहा.

मैं : अच्छा अब मुझे ये बताओ की मुझे क्यों साथ लेकर आई हो तुम, और चलना कहाँ है..

अंशिका : वो तुम कल नाराज हो गए थे न, इसलिए मैंने सोचा की तुम्हे भी आज साथ ले चलू और तुम थोड़ी हेल्प भी करा देना हमारी , ठीक है न..

मैं क्या कहता, बस मुस्कुरा दिया और हम पहले कॉलेज में जा पहुंचे.

वहां बड़ी भीड़ थी,लम्बी-२ लाईन लगी हुई थी फार्म लेने के लिए.. पर मेरा एक दोस्त था उसी कॉलेज में, मैंने उसे फोन किया और सब बताया, उसने सिर्फ पांच मिनट में ही मुझे अन्दर जाकर फॉर्म लाकर दे दिया..इतनी जल्दी काम होते देखकर वो दोनों बहने बड़ी खुश हुई..

उसके बाद हम दो -तीन कॉलेज में और गए और हर बार मैंने किसी न किसी तरह की तिकड़म लगा कर उनका काम जल्दी करवा दिया..ये सब देखकर कनिष्का बड़ी खुश हुई..

कनिष्का : वाव विशाल, तुमने हमारा ये दो दिनों का काम एक ही दिन में करवा दिया, मुझे तो लगा था की इन पांच कॉलेजेस के फार्म लेने में ही दो दिन लग जायेंगे..

अंशिका : आखिर दोस्त किसका है..

कनिष्का : सिर्फ दोस्त..या..

अंशिका :सिर्फ दोस्त..और तू अपना दिमाग बेकार की बातों में मत चला..समझी.

उन दोनों बहनों की नोक-झोंक देखने में बड़ा मजा आ रहा था..

उसके बाद हम सभी खाना खाने के लिए एक अच्छे से रेस्तरो में गए, और फिर वापिस चल दिए..

रास्ते में कनिष्का अपनी आदत के अनुसार चबर चबर बोलती रही..और हम दोनों मजे ले लेकर उसकी बातें सुनते रहे..मैंने नोट किया की अंशिका कुछ चुप-चाप सी बैठी है..

मैं : क्या हुआ अंशिका..कोई प्रोब्लम है क्या..

अंशिका (धीरे से) : वो..वो..मुझे प्रेशर आया है..काफी तेज..

मैं समझ गया की उसे मूतना है..पर यहाँ कैसे, हम उस वक़्त हाईवे पर थे..दूर-२ तक कुछ भी नहीं था..

मैं : अभी थोडा आगे जाकर देखते हैं, कोई पेट्रोल पम्प या ढाभा हुआ तो वहां कर लेना..

अंशिका (बुरा सा मुंह बनाते हुए) : वहां तक के लिए रोक पाना मुश्किल है…प्लीस..कुछ करो.

कनिष्का : दीदी आप भी न, अभी जहाँ खाना खाया था वहीँ कर लेती..

अंशिका कुछ न बोली, वो बोलने की हालत में लग ही नहीं रही थी..

मैंने कार एक तरफ रोक दी, रोड के थोड़ी दुरी पर एक पेड़ था..

मैं : जाओ जल्दी से, वहां कर लो.

अंशिका मेरी तरफ देखकर बोली : यहाँ, खुले में..?

मैं : फिर बैठी रहो, आगे कोई होटल आएगा न तब आप कर लेना..

कनिष्का मेरी बात सुनकर हंसने लगी..

अंशिका : ठीक है ..ठीक है..जाती हूँ..

और वो कार से उतर गयी कर पेड़ की तरफ चल दी.

उसके उतरते ही कनिष्का फिर से अपना चेहरा आगे करके मेरे पास आकर बोली : वैसे विशाल, दीदी तो मना कर रही है, पर मुझे मालुम है की तुम दोनों में कुछ न कुछ खिचड़ी तो बन ही रही थी अन्दर कमरे में..

मैंने भी मजे लेने के मूड में उससे कहा : अच्छा जी, तब तो बता ही दो की क्या चल रहा था मेरे कमरे में.

कनिष्का : तुम ही क्यों नहीं बता देते..

मैं : तो सुनो, जब अंशिका मेरे कमरे में आई तो मैं टावल में खड़ा हुआ था, और वो आकर मुझसे लिपट गयी और फिर उसने मुझे चूमा और मैंने भी उसके होंठो को अच्छी तरह से किस किया..और फिर मेरा टावल खुल गया…और उसके बाद…

कनिष्का : बस बस…मुझे और नहीं सुनना

उसका चेहरा देखने लायक था..शर्म से लाल सुर्ख..

मैं मुडकर उसे शर्माते हुए देखने लगा की तभी मेरी नजर पेड़ के पीछे छुप कर सुसु करती हुई अंशिका पर गयी..उसके मोटे कुल्हे दूर से साफ़ दिखाई दे रहे थे, उसका चेहरा दूसरी तरफ था और वो पेड़ के पीछे थी पर पूरी तरह से छुप नहीं पा रही थी..उसकी गांड देखकर तो मेरे मुंह में पानी आ गया..

तभी कनिष्का की आवाज आई : विशाल, क्या तुम मुझे अपना नंबर दे सकते हो..

मैं : क्यों ?

कनिष्का : वो..वो..अगर कोई प्रोब्लम हुई तो तुम्हारी हेल्प ले लिया करुँगी..

मैं : ठीक है, लिख लो.

और मैंने उसे अपना मोबाइल नंबर दे दिया.

तभी अंशिका उठ कड़ी हुई और अपने कपडे ठीक करने के बाद वापिस आने लगी.

मैं : वैसे हमारे बीच ऐसा कुछ नहीं हुआ था जैसा मैंने कहा या फिर जैसा तुमने सोचा..

कनिष्का हैरानी से मेरी तरफ देखने लगी..

वो कुछ कहना चाहती थी पर तभी उसकी बहन अन्दर आ गयी.

अंशिका : अब ठीक है..चलो अब.

कनिष्का :नहीं ..अभी नहीं…वो क्या है की…मुझे भी..जाना है.

अंशिका : अब क्या हुआ…तू तो मुझे लेक्चर दे रही थी अभी..चल जा जल्दी से..

वो उतर कर चल दी उसी पेड़ के पीछे…

मुझे नहीं मालुम की उसे भी सुसु आया था या नहीं..कहीं वो जान बुझकर , मुझे अपनी गांड के जलवे दिखने के लिए तो वहां नहीं उतरी थी..

मैंने अपना चेहरा घुमा कर दूसरी तरफ कर लिया..ताकि अंशिका को ना लगे की मैं उसकी बहन को सुसु करते हुए देख रहा हूँ.

अंशिका : क्या बोल रही थी कन्नू…कुछ बताया तो नहीं तुमना..

मैंने सर घुमा कर उसकी तरफ देखा : तुम भी बच्चो जैसी बात करती हो..मैं कैसे उसे बता देता की तुमने आज सुबह मेरा लंड चूसकर मेरा सारा रस पी लिया..

मेरी बात सुनते ही उसने अपना सर शर्म से झुका लिया, बस इतना ही समय काफी था मुझे कनिष्का की तरफ देखने के लिए. जो अपने जींस उतार कर बैठी हुई आराम से अपनी गांड दर्शन मुझे करवा रही थी..पहले अंशिका और अब कनिष्का..दोनों बहनों की नंगी गांड देखकर तो मेरा बुरा हाल हो चूका था..वो उठी और अपनी जींस को ऊपर किया और अपने ग्लोबस को वापिस अन्दर छुपा लिया..और फिर हमारी तरफ आ गयी..

अन्दर आते ही कनिष्का बोली : दीदी, आपने कभी सोचा भी था की हम दोनों इस तरह से खुले में जाकर सुसु करेंगी..हे हे ..पर टाईम कुछ भी करा सकता है…है न..

अंशिका : हाँ मेरी माँ…अब चुप हो जा..

और उसके बाद हम तीनो हँसते हुए वापिस चल दिए..

शाम काफी हो चुकी थी ,मुझे स्नेहा के पास भी जाना था. पुरे दिन बाहर रहने की वजह से मेरे सेल की बेटरी भी ख़तम हो चुकी थी..मैं आधा घंटा देर से पोहचुंगा वहां…

मैंने अंशिका को कहा की वो मुझे किटी मेम के घर छोड़ दे, ताकि मैं स्नेहा को पड़ा सकूँ..

उसने कहा ठीक है और मुझे किटी में के घर के बाहर छोड़कर वो दोनों वापिस चली गयी..

मैं ऊपर गया और बेल बजायी…किटी में ने दरवाजा खोला : अरे विशाल तुम, आओ अन्दर आओ…

अन्दर आकर मैं सोफे पर बैठ गया, उसी जगह जहाँ कल शाम को स्नेहा मेरी बाँहों में नंगी थी और मैंने स्नेहा की चूत चाटी थी..मैं हाथ लगा कर सोफे पर लगे स्नेहा की चूत से निकले रस के निशान को रगड़ने लगा..

मैं : वो स्नेहा ..स्नेहा कहाँ है मेम..

किटी मेम : उसने तुम्हे बताया नहीं, मैंने कहा था की फोन कर दे तुम्हे, वो तो आज अपनी सहेली के घर गयी है, उसका बर्थडे है..स्कूल से सीधा चली गयी थी वो, साथ में अपनी ड्रेस भी ले गयी.

मैं : ओहो…एक्चुयल्ली मेरा फ़ोन डेड हो गया था आज, शायद इसलिए …बात नहीं हो पायी उससे..ठीक है , कोई बात नहीं, मैं चलता हूँ..

किटी मेम : रुको..बैठो थोड़ी देर..मुझे तुमसे बात करनी है..

मैं उनकी बात सुनकर डर सा गया..कहीं उन्हें मेरे और स्नेहा के बारे में तो कुछ मालुम नहीं हो गया है..

किटी मेम अन्दर चली गयी, और मेरे लिए पानी लेकर आई.

मेरी नजर तो उनके तरबूजों पर ही थी..आज बिना चुन्नी के उनकी छाती पर लटके उन रसीले फलों को देखकर तो मेरा लंड जींस में से टाईट होने लगा..

पानी देने के बाद वो मेरे सामने बैठ गयी. वो मुझे घूरे जा रही थी..मानो मन में सोच रही हो की बात कहाँ से शुरू की जाए..

किटी मेम : तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड है क्या..?

मैं उनकी बात सुनकर घबरा गया..आज इनको क्या हो गया है जो मुझसे मेरी गर्ल फ्रेंड के बारे में पूछ रही है..अगर कोई और होता तो उसे शायद आज मैं अंशिका या स्नेहा के बारे में बता भी देता पर इनको तो येही मालुम है की अंशिका मेरी कजन है और स्नेहा तो इनकी सगी बेटी है..

मैं : जी…जी नहीं…

किटी मेम (हँसते हुए) : घबराओ मत…मैं किसी से नहीं कहूँगी..

मैं : नहीं मेम, ऐसी कोई बात नहीं है…मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है.

किटी मेम (मेरी आँखों में देखकर बोलते हुए) : तभी..तभी तुम ऐसे हो..

मैं फिर से घबरा गया, ये क्या कह रही है..

मैं : जी..मैं..मैं कुछ समझा नहीं..

किटी मेम : मेरे कॉलेज में मेरा पाला हर रोज तुम्हारी उम्र के लडको से पड़ता है..और उनकी नजरे देखकर ही मुझे पता चल जाता है की उनके दिमाग में क्या चल रहा है..

मेरा तो सर भन्ना गया..साली मेरे दिमाग का तो एक्सरे करने में नहीं लगी हुई…मेरे माथे पर पसीना आने लगा, मैंने दोबारा से पानी का गिलास उठाया और पूरा खाली कर दिया..

मेरी हालत देखकर वो मुस्कुराने लगी..

किटी : तुम क्यों घबरा रहे हो..मैंने तो अभी कुछ कहा भी नहीं..

मैं नजरे इधर उधर करके उन्हें अवोइड करने की कोशिश करने लगा.

मैं : आप क्या कह रही हैं, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा मेम..

किटी : अच्छा तो फिर सुनो, मैंने तुम्हे कई बार अपने यहाँ घूर कर देखते हुए पाया है…इसका क्या मतलब है.

उन्होंने अपनी भरी पूरी छातियों की तरफ इशारा किया..

मैं : जी..जी…मैं..मैं…नहीं.तो..मैंने तो…नहीं…

मेरी हालत देखकर वो फिर से हंसने लगी..

किटी : हे हे…घबराओ मत…मैं समझ सकती हूँ, मैं कॉलेज में हयूमन साईंस पढ़ाती हूँ…और आज कल के लडको की साईकोलोजी मैं अच्छी तरह से समझती हूँ..जो चीज तुम्हे मिल नहीं सकती उसे देखकर ही मन भर लेते हो…है न..!!

मेरी समझ में नहीं आ रहा था की आज इन्हें हो क्या गया है…चाहता तो मैं भी कब से था की मैं उनके साथ इस तरह की बाते करूँ पर मुझे नहीं मालुम था की वो भी शायद ऐसा ही चाहती हैं..मैंने मन में सोचा की बेटा विशाल, आज ही मोका है, चांस लेकर देख ले..क्या पता किटी मेम की खीर खाने को मिल जाए..

मैंने अब घबराना छोड़ दिया था..मैंने भी हँसते हुए उनकी बातों का जवाब देना शुरू कर दिया.

मैं : वो..वो क्या है न मेम…मेरी कोई गर्ल फ्रेंड तो है नहीं..और मेरे सभी दोस्त मुझे हमेशा चिड़ाते रहते हैं…और अपने किस्से सुना सुनाकर मुझे जलाते हैं..इसलिए मेरी नजर अक्सर हर सुन्दर लड़की या औरत पर चली जाती है…इसलिए…इसलिए शायद आपको भी बुरा लगा होगा…मेरे ऐसे देखने से..

मेरे मुंह से सुन्दर औरत वाली बात सुनकर वो थोडा और चोडी हो गयी..

किटी : तो क्या मैं तुम्हे सुन्दर लगती हूँ..

मैं :जी…जी .आप बुरा तो नहीं मानेगी..

किटी : नहीं विशाल…बोलो..जो तुम्हारे मन मैं है बोलो..

मैं (शर्माते हुए) : मेम…सुन्दर तो आप है ही…और आपकी ये …ये …ब्रेस्ट..और भी शानदार है…इसे कोई भी देख ले तो उसकी नजर ही न हटे इसपर से..प्लीस आप बुरा मत मानना …और ये सब अंशिका को मत बताना…प्लीस…

किटी : नहीं…मैं बुरा नहीं मान रही…और न ही मैं ये सब अंशिका को बताउंगी…मुझे मालुम है की वो तुम्हारे ऊपर कैसा रोब चलाती है…पर एक बात बताओ…क्या तुमने आज तक किसी भी लड़की या औरत की ब्रेस्ट को हाथ में लेकर या उन्हें…उन्हें..नंगा नहीं देखा..

उनकी आखिरी बात सुनकर जो हरकत मेरे लंड में हुई, मैं बता नहीं सकता…साली मेरे सामने अपने दोनों बर्तनों को भरकर बैठी हुई मुझसे इस तरह की बात करेगी तो मेरा तो क्या…आप पड़ने वालो का भी लंड पेंट फाड़ कर बाहर आ जाएगा…

मैं : जी…जी नहीं मेम…ऐसा कोई मौका ही नहीं आया आजतक..

मेरी बात सुनकर वो फिर से मुझे घूरने लगी..मानो कुछ तय करने की कोशिश कर रही हो…

किटी : देखो…तुम अगर किसी से कुछ न कहो..तो मैं..तुम्हे आज अपने ब्रेस्ट दिखा सकती हूँ..

मैं (चोंकते हुए) : क्या…आप..आप अपनी…अपनी ब्रेस्ट मुझे….वाव…आई मीन…कैसे…और मुझे क्यों…आप दिखाएगी..

किटी : देखो विशाल…तुमने स्नेहा के पापा को तो देखा ही है….उनकी उम्र नहीं रही अब ये सब करने की…मेरी भी कुछ तमन्नाये है…जो उनकी ढलती उम्र की वजह से अधूरी रह गयी है…और इसलिए मुझे जब भी मौका मिलता है…मैं तुम जैसे लडको के साथ कुछ मजे लेकर अपने अरमान पुरे कर लेती हूँ…बस इसलिए…और वैसे भी तुम मेरी बेटी की पढाई में मदद कर रहे हो…इसलिए मुझे भी तो तुम्हे थेंक्स कहने का मौका मिलना चाहिए न..

और वो उठकर मेरी बगल में आकर बैठ गयी…ठीक उसी जगह पर जहाँ उनकी बेटी कल नंगी मेरे साथ बैठी थी..

किटी मेम के शरीर से निकलती आग को मैं साफ़ महसूस कर पा रहा था…पर बात वहीँ पर आकर अटक जानी थी जहाँ कल अटकी थी…मैं अंशिका की चूत मारे बिना इनकी भी नहीं मार पाउँगा…जब मेरे इस फेसले को वो कुंवारी स्नेहा की चूत ना बदल सकी तो ये चालीस साल की आंटी क्या बदल पाएगी…पर मजे लेने में तो कोई पाबंदी नहीं है ना..और वैसे भी इनके रसीले फलों का तो मैं शुरू से दीवाना रहा हूँ..इसलिए मैंने भी सोच लिया की उनके साथ किस हद तक मुझे मजे लेने है या….देने है.

मैं : तो क्या आप..आप अपने स्टुडेंट्स के साथ भी…ये सब करती है…

किटी : नहीं…सभी के साथ नहीं..सिर्फ उनके साथ जो कॉलेज में नहीं है अब..और जो मुझे पसंद होते हैं..मैं हमेशा थर्ड ईयर स्टुडेंट्स को चूस करती हूँ…क्योंकि कॉलेज में पड़ने वाले अपने दोस्तों से कुछ ना कुछ बोल ही देते हैं…और फिर उसी कॉलेज में पढाना काफी मुश्किल हो जाता है..यु नो..

मैं उनकी बात समझ गया..पर हमारे कॉलेज में ऐसी कोई टीचर क्यों नहीं है…मैं भी तो अब थर्ड ईयर में हूँ…मुझे तो किसी टीचर ने आजतक कभी भी ऐसा प्रोपोसल नहीं दिया..

किटी मेम आज मुझे अपने सारे राज बताती जा रही थी, थर्ड इयर के कई स्टुडेंट्स से चुदवा चुकी थी वो..तभी तो उनके एवरेस्ट इतने ऊँचे थे..और गांड भी क्या क़यामत ढाने वाली थी…मेरा तो लंड ना जाने कितनी बार खड़ा हो चूका था उनकी मचलती हुई गांड देखकर..

किटी : तुम्हारी तो कोई गर्ल फ्रेंड भी नहीं है ना…यानी तुम अभी तक वर्जिन हो…

मेरी दुखती रग पर हाथ रख दिया था किटी मेम ने अब..

अब मैं उन्हें क्या बताऊँ, कल इसी सोफे पर उनकी लाडली बेटी स्नेहा की चूत मारने का अच्छा मौका था, पर अंशिका को दिए वाडे की वजह से वो नहीं कर पाया, वर्ना आज ये उनकी वर्जिन वाली बात मेरे दिल पर तीर की तरह नहीं लगती…और अंशिका के साथ भी मैंने लगभग सब कुछ कर लिया था..पर सही जगह की कमी की वजह से उसकी चूत को मारने का मौका भी नहीं मिल पा रहा था..

मुझे सोचते हुए देखकर किटी मेम ने अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया..मेरे लंड से कुछ ही दुरी पर..

मेरे तो पुरे शरीर में उनके हाथ से निकलती गर्मी की वजह से सुरसुराहट सी होने लगी..

उन्होंने अपने हाथ को वहां धीरे-२ मलते हुए कहा : तो क्या सोचा तुमने…तैयार हो..पहली बार किसी औरत की ब्रेस्ट देखने के लिए..बोलो.

अब इतना भी मैं मारा नहीं जा रहा उनकी ब्रेस्ट देखने के लिए…उनकी चाहे जितनी बड़ी और भरी हुई क्यों ना हो..पर अंशिका की ब्रेस्ट से उनका कोई मुकाबला नहीं है…और दुसरे नंबर पर मैं स्नेहा को रखूँगा…क्योंकि उसके छोटे-२ संतरे और उनपर लगे अंगूर जैसे निप्पल मुझे काफी पसंद आये थे…अब इन्हें कोन समझाए की मैं लंड से कुंवारा हूँ …चूत मारने के अलावा मैं सब कुछ कर चूका हूँ..पर इनसे ये सब छुपा कर रखना पड़ेगा..तभी तो वो मुझे अच्छी टीचर की तरह से ये सेक्स का चेप्टर पढ़ाएंगी ..

मैं :जी…हां…क्यों नहीं…

मेरा इतना कहने की देर थी की उन्होंने अपने ब्लाउस के हूक खोलने शुरू कर दिए…मैं फटी आँखों से उन बड़े- २ देत्यकार तरबूजों को बेपर्दा होते हुए देख रहा था..

सारे हूक खुलने के बाद उन्होंने गहरी सांस ली..और अब उनकी व्हाईट कलर की लेंस वाली ब्रा में केद दो बड़े से जानवर मुझे हिलते हुए नजर आने लगे..ब्लाउस में होने की वजह से वो काफी तंग महसूस कर रहे थे..खुली जगह मिलते ही उन्होंने अपने आप को थोडा और फेला लिया..पर अभी भी एक और बाधा थी जो उन्हें पूरी तरह से सांस नहीं लेने दे रही थी..और वो थी उनकी सेक्सी ब्रा..

अपना ब्लाउस उतार कर उन्होंने मेरी तरफ उछाल दिया..मैं उसमे से आती उनके पसीने की महक को सूंघकर मदहोश सा होने लगा.

किटी : केसे लगे..ये तुम्हे..?

मैं इतने करीब से पहली बार इतने बड़े मुम्मे देख रहा था..मेरी आँखों के सामने सिर्फ वोही थे, और कुछ भी मेरी आँखों के एंगल में आ ही नहीं पा रहा था..

मैं : वाव..मेम…दे आर बियुटिफुल…कैन ..कैन आई टच देम..

किटी : या या…श्योर..

और वो आगे होकर मुझसे सट कर बैठ गयी…

मैंने कांपते हाथों से अपने हाथ ऊपर करके उनके दोनों मुम्मो पर रख दिए…ऊऊओ कितने सोफ्ट थे…वो दोनों…

अह्ह्ह्हह्ह , किटी मेम ने एक जोरदार सिसकारी मारी और मेरा मुंह पकड़कर अपने मुम्मो पर दबा दिया…

ऊओह्ह्ह्ह विशाल्ल्ल्ल …..म्मम्मम……येस्स्स्स…..म्मम्म…..

मेरा तो दम हो घुटने लगा उनकी दोनों ब्रेस्ट के बीच में फंसकर..

पर मजा भी बड़ा आ रहा था…इतने गद्देदार मुम्मे तो मैंने पहली बार देखे थे, और किटी मेम पर तो जैसे कोई भूतनी चढ़ गयी थी…मुझे किसी बच्चे की तरह से अपने शरीर से दबा कर ऐसे रगड़ रही थी की मुझे उनकी ब्रा के कपडे की रगड़ की वजह से मेरे चेहरे पर जलन सी होने लगी थी..
मैं पीछे हो गया..

किटी :क्या हुआ…आओ ना…

मैं : वो मेम…ये ..आपकी ब्रा ..मेरे चेहरे पर..चुभ रही है..

किटी मेम : ओह…ये..

और इस बार उन्होंने हूक खोलने की जेहमत भी नहीं उठाई और खींच कर अपनी ब्रा को अपने शरीर से अलग कर दिया और अपनी दिसायीनर ब्रा को बर्बाद कर दिया…पर इसकी उन्हें कोई फिकर नहीं थी..क्योंकि सेक्स की आग जो उनके शरीर में जल रही थी उसके सामने ऐसी ब्रा की कोई कीमत नहीं होती..

और उनकी ब्रा के हटते ही उनके दोनों मस्ताने, रसीले, मोटे-ताजे, तरबूज मेरी आँखों के सामने झूल गए…

मैं : वाव…आई कांट बिलीव ईट …दे आर सो लोव्ली…

किटी (गहरी सांस लेते हुए) : देन…सक देम…

और उन्होंने फिर से मेरे सर को पकड़ कर अपनी छाती पर दे पारा और मेरा मुंह सीधा उनके दांये मुम्मे के निप्पल पर जा लगा …और मैं उसे चूसने लगा…

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह……विशाल्ल्ल्ल….यु आर सकिंग वैरी वेल्ल….या…..कीप ईट….लाईक दिस….या…..ऊऊऊ माय गोड…म्मम्मम

उन्होंने मेरे मुंह को खींचकर अपने स्तन से अलग किया…मेरा उन्हें छोड़ने का मन भी नहीं था…क्योंकि वो बड़े टेस्टी से लग रहे थे…खींचने की वजह से उनका निप्पल मेरे दांतों के बीच फंसकर रह गया…और उनके एक तेज झटके की वजह से वो पक की आवाज के साथ बाहर निकल गया…

अह्ह्ह्ह……शायद उन्हें दर्द हुआ होगा..

उन्होंने मेरे चेहरे को अलग किया और मेरी तरफ ऐसी भूखी नजरों से देखा तो मुझे लगा की कहीं मैंने उन्हें ज्यादा तेज तो नहीं चूस लिया…पर मेरा अंदाजा गलत निकला, मेरे चूसने की वजह से उनके अन्दर की आग और भड़क गयी थी…और अगले ही पल कुछ देर तक घूरने के बाद, उन्होंने मेरे होंठों को किसी भूखी लोमड़ी की तरह से चुसना शुरू कर दिया…

अह्ह्हह्ह ….पुच….पुच…..ऊऊओ विशाल…..म्मम्मम…..यु….आर वैरी टेस्टी…..अह्ह्हह्ह…..पुच …पुच…..

वो अपने गीले मुंह से मुझे चूमती जा रही थी और मेरी सकिंग की तारीफ करती जा रही थी…

मैंने भी उनके रसीले और गीले होंठों को चुसना और चबाना शुरू कर दिया..और मेरे दोनों हाथ अब उनके दोनों मुम्मो पर थे…उनके दोनों चोकलेट कलर के निप्पल मेरे हाथों में किसी शूल की तरह से चुभ रहे थे..मैंने उन्हें अपनी दोनों हाथों की उँगलियों से मसलना शुरू कर दिया..जिसकी वजह से होने वाली सुरसुराहट की वजह से किटी मेम ने मुझे और तेजी से चुसना चालू कर दिया…

अब उनका एक हाथ सीधा मेरे लंड के ऊपर आकर टिक गया…मेरी तो जान ही निकल गयी जब उन्होंने उसे अपनी मुट्ठी में दबाकर भींच दिया…क्योंकि साथ में मेरी बाल्स भी आ गयी थी उनके हाथ में..

अह्ह्ह्हह्ह….धीरे मेम….

किटी : निकालो…इसे निकालो विशाल…जल्दी…मैं इसे देखना चाहती हूँ…..जल्दी करो…

मैं किसी आज्ञाकारी स्टुडेंट की तरह से उठ खड़ा हुआ …और उन्होंने मेरी जींस की बेल्ट खोल कर उसे नीचे कर दिया…मेरे जोक्की के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाने लगी…और अगले ही पल उसे भी नीचे कर दिया..

मेरा लंड उन्हें सलामी देने लगा..

किटी : इट्स लवली….एंड बिग्ग…

उसे देखकर उन्होंने अपने होंठों पर जीभ फेरी और फिर मेरे लंड के सिरे से निकलते रस को चाटकर चटखारा मारा और फिर पूरा अन्दर डाल लिया…

मैंने उनके मुंह को पकड़कर धक्के मारना शुरू कर दिया…उनके चूसने में और अंशिका और स्नेहा के चूसने में जमीन आसमान का अंतर था…वो अपने पुरे एक्सपेरिएंस से चूस रही थी…जिसकी वजह से मैं जल्दी ही झड़ने के करीब पहुँच गया…और अगले ही पल मेरा रस निकल कर उनके मुंह में जाने लगा….

आआआआअह्ह ऊऊऊओ ,…….म्मम्म……ऊऊऊ….मेम…….आआअह्ह्ह………..

वो पूरा रस पी गयी..

मेरी टाँगे कमजोरी के कारण कांपने लगी और मैं वहीँ सोफे पर लुडक गया…

तभी बाहर दरवाजे की घंटी बज उठी

हम दोनों के चेहरे पर भय के भाव आ गए..

किटी : इस समय कोन आ गया…

उन्होंने जल्दी से अपने कपडे पहने और बाहर की और गयी….”आई बाबा…कोन है…”

बाहर उनके पति थे…

वो अन्दर आये और मुझे घूर कर देखने लगे..

किटी :ये स्नेहा का इन्तजार कर रहा है…

वो बिना कुछ बोले अन्दर चले गए…वो जानते तो थे की मैं स्नेहा को पड़ाने आता हूँ..पर पता नहीं क्यों, मुझे लगा की शायद उन्हें कुछ शक सा हो गया है…

जो भी हो…मैंने जल्दी से किटी मेम को बाय बोला और बाहर की और चल दिया…
भगवान् का शुक्र किया की आज उनके पति की वजह से मेरी वर्जिनिटी बच गयी…वर्ना आज मेरा ये किटी मेम क्या हाल करती…पता नहीं ..

बाहर निकलकर मेरे दिमाग में बस एक ही बात घूम रही थी की अब किसी भी तरह से मुझे अंशिका की चूत मारनी ही पड़ेगी…क्योंकि मैं हर बार तो अपने पर कण्ट्रोल नहीं कर सकता न..आखिर हूँ तो मैं एक इंसान ही न..

एक तरफ अंशिका है और दूसरी तरफ स्नेहा, किटी मेम और अगर मैं कुछ कोशिश करूँ तो कनिष्का भी शायद कुछ करवाने को तैयार हो जाए..मुझे जल्दी ही कुछ करना होगा..

मैंने जल्दी से अंशिका को फ़ोन मिलाया पर उसका फ़ोन भी बंद था…शायद उसने अभी तक चार्ज नहीं किया होगा..

मैं सोच ही रहा था की क्या करूँ की तभी स्नेह का फोन आया मेरे सेल पर..मैं कुछ देर तक सोचता रहा और फिर फोन उठा लिया..

मैं : हाय…डार्लिंग … कैसी हो..

उधर से स्नेहा का गुस्से से भरा स्वर आया : भाड़ में गयी डार्लिंग…तुम्हारा फोन दोपहर से बंद आ रहा था..पता है, मैंने कितनी बार ट्राई किया..तुम्हे बताना था की मैं आज घर पर नहीं हूँ…

मैं : मालुम है…मैं अभी तुम्हारे घर से ही बाहर आ रहा हूँ…दरअसल मेरे सेल की बेटरी ख़त्म हो गयी थी…इसलिए तुमसे बात नहीं हो पायी…तुम्हारे घर गया तो किटी मेम से पता चला की तुम तो आज स्कूल से ही अपनी फ्रेंड के घर चली गयी हो…उसके बर्थडे पर..और किटी मेम ने ही बताया की तुम मेरा फोन शायद काफी देर तक ट्राई कर रही थी..

स्नेहा मेरी बात सुनकर कुछ शांत हुई..

स्नेहा : और नहीं तो क्या…पता है, मुझे कितनी फ़िक्र हो रही थी तुम्हारी…तुम चाहे एक और सेल ले लो पर आगे से तुम्हारा सेल बंद नहीं होना चाहिए…समझे न..

उसकी प्यार से भरी बात सुनकर मैं भी मुस्कुरा दिया..

मैं : ठीक है जी…जैसा आप कहो …तुम कहाँ पर हो..कैसी चल रही है पार्टी…

स्नेहा : यार क्या बताऊँ…मेरी बेस्ट फ्रेंड के पापा दुबई में काम करते हैं, और कल ही वो आये और अपनी बेटी के लिए आज पार्टी अर्रंज कर दी..फार्म हॉउस पर…अभी तो मैं उसके ही घर पर हूँ, थोड़ी ही देर में निकलेंगे वहां..पर दोपहर से मेरा ध्यान तुम्हारी तरफ ही था…जानते हो..मुझे बार-२ वही सब बातें याद आने लग गयी थी…कल वाली…आज स्कूल में भी, पढाई करते हुए भी..बुक्स में भी मुझे वोही तस्वीरे दिखाई दे रही थी…और मैंने फिर स्कूल की टॉयलेट में जाकर…पहली बार…वहां…मास्टरबेट किया…यु नो…

उसकी बातें सुनते हुए मेरे लंड महाराज ने भी उठना शुरू कर दिया था….जिसे अभी कुछ देर पहले ही उसकी मम्मी ने ही शांत किया था…

मैं : वाव….फिर..अब क्या…

स्नेहा (बड़े ही धीमे स्वर में..) : अब सबर नहीं होता विशाल…आई एम् डाईंग टु फक बाय यु…प्लीस…कुछ करो…मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा…

उसकी तेज साँसों की आवाज मुझे साफ़ सुनाई पड़ रही थी…

हाल तो मेरा भी बुरा हो चला था..आज तक अंशिका ने भी इतनी रिकुएस्त नहीं की थी अपनी मरवाने के लिए..उसकी हालत देखकर मुझे अपने आप पर ही गुस्सा आ रहा था..अगर मैंने अंशिका की चूत मार ली होती तो कल ये भी चुद चुकी होती…पर अंशिका को दिए वादे की वजह से मैं स्नेहा की चूत नहीं मार पाया…और अब आलम ये है की उसकी चूत की आग काफी भड़क चुकी थी…इसे अगर मैंने शांत नहीं किया तो वो किसी और से करवा लेगी….नहीं..नहीं..मुझे जल्दी ही कुछ सोचना होगा..जब तक उसकी चूत ना मार लूँ मुझे उसकी आग को थोडा बहुत शांत तो करना ही होगा..

मैं : ऊओह स्नेहा…मैं भी तो यही चाहता हूँ…बस सही समय का वेट करो..फिर देखना मैं तुम्हारी चूत के अन्दर अपना लंड डालकर तुम्हे ऐसे मजे दूंगा की तुम पूरी जिन्दगी अपनी पहली चुदाई को भूल नहीं पाओगी..

स्नेहा : ऊओह्ह्ह विशाल्ल्ल….तुम ऐसी बातें न करो प्लीस…मुझे कुछ हो रहा है….

मैं : तुम कहाँ हो अभी..

स्नेहा : मैं अभी तैयार हो रही हूँ…बाथरूम में हूँ…अभी नहाकर हटी हूँ.

मैं (शरारती लहजे में) : मतलब..तुम पूरी नंगी हो…

स्नेहा : हाँ..हूँ…आ जाओ फिर..हुंह..बात करते हो…

मैं : सच बताना…अभी मुझसे बात करते हुए तुम फिंगरिंग कर रही थी न…

स्नेहा : तुम्हे…तुम्हे कैसे पता चला..

अब मैं उसे क्या बताता..अंशिका से फ़ोन पर इतनी बार सेक्स भरी बातें हो चुकी हैं की दूसरी तरफ वो क्या कर रही है या क्या फील कर रही है..इन सबमे तो मैं पूरा उस्ताद हो चूका हूँ..

मैं : वो…वो तुम्हारी आवाज सुनकर मुझे लगा…

स्नेहा : ओह्ह्ह विशाल…मैं मर जाउंगी…काश तुम अभी यहाँ होते तो मैं यहीं तुमसे..तुमसे…

मैं : हाँ ..हाँ…बोलो..मुझसे क्या ?

स्नेहा : तुमसे चूत मरवा लेती…

मैं :अरे वाह..तुम भी लडको वाली भाषा बोलने लगी हो…

स्नेहा : ये सब तो हमारी क्लास में आम बात है…सभी लड़के-लड़कियां ऐसे वर्ड्स युस करते हैं…

मैं : तो ठीक है..तुम मेरे साथ भी ऐसे ही बात किया करो…

स्नेहा : वो तो ठीक है…पर अब मैं क्या करूँ…तुमने मेरा बुरा हाल कर दिया है..जानते हो मेरा कितना डिस्चार्ज हो रहा है नीचे से…तुम्हारी बातें सुनकर..

मैं : मेरा भी यही हाल है…पर तुम फिकर मत करो..मैं जल्दी ही कुछ करता हूँ…अच्छा सुनो..तुम्हारी ये पार्टी तो फार्म हॉउस पर है न…

स्नेहा : हाँ…तो..

मैं : क्या मैं भी वहां आ सकता हूँ…तुम्हारा फ्रेंड बनकर..

स्नेहा ख़ुशी के मारे चिल्ला उठी..

स्नेहा : वाव..ये तो मेरे दिमाग में आया ही नहीं था…क्या तुम यहाँ आ सकते हो..आई मीन…तुम्हे बुरा तो नहीं लगेगा न…मैं अपनी फ्रेंड को समझा दूंगी…और वैसे भी उसको मैंने तुम्हारे बारे में कुछ-कुछ बताया भी है…वाव….तुम यहाँ आओगे और पूरी शाम मेरे साथ रहोगे…मजा आएगा…प्लीस..प्लीस…आ जाओ न…मेरे लिए…प्लीस…

वो बाथरूम में नंगी खड़ी हुई चिल्लाती जा रही थी…

मैं : ओके ..ओके…मैं आ सकता हूँ, तभी तुमसे ये पूछा…कुछ कर न पाए तो क्या..थोडा टाइम साथ तो रह ही लेंगे न…

स्नेहा : तुम आओ तो सही..कुछ करने का जुगाड़ मैं कर लुंगी…

उसकी बात सुनते ही मेरे लंड ने एक और तेज झटका मारा ..

मैं : मतलब…

स्नेहा : वो तुम मुझपर छोड़ दो…तुम बस जल्दी से यहाँ आ जाओ..

और उसने मुझे वहां का एड्रेस समझा दिया..

अभी 6 :45 बजे थे..मैंने उसे कह दिया की मैं 7 :30 तक सीधा वहां पहुँच जाऊंगा…

मैंने जल्दी से घर गया और एक पार्टी ड्रेस निकाल कर पहन ली…और घर पर मम्मी को बोल दिया की एक दोस्त की बर्थडे पार्टी में जा रहा हूँ..

मैं पुरे 7 :25 पर फार्म हॉउस में पहुँच गया..बड़े ही शानदार तरीके से सजाया गया था पूरा फार्म हॉउस ..अभी ज्यादा लोग आये नहीं थे..मैं एक कोने में जाकर बैठ गया और कोल्ड ड्रिंक पीने लगा…

लगभर 8 बजे तक ज्यादातर लोग आ चुके थे…..मैं स्नेहा को तीन-चार बार फ़ोन कर चूका था…वो अपनी फ्रेंड के साथ ब्यूटी पार्लर में बैठी हुई थी..ये आजकल की लड़कियां भी न…अभी जवानी की देहलीज पर पैर रखा नहीं की ब्यूटी पार्लर में जाकर तैयार होने लगती है..किसी भी फंक्शन के लिए…अरे भाई इनको जरा बताओ की इस उम्र में जवानी को सादगी में देखने में जो मजा है वो ऊपर की तड़क भड़क में नहीं…उनका हुस्न ही काफी है हम जैसो का होश उड़ाने के लिए…

उसके मम्मी पापा सभी मेहमानों का ध्यान रख रहे थे…मैंने उसके फ्रेंड अंकित को भी देखा, जो उस दिन छत्त पर स्नेहा के साथ किस्सिंग कर रहा था.., वो भी आया था अपने कुछ और दोस्तों के साथ पार्टी में…शायद स्नेहा की क्लास के ही होंगे वो भी..

और कुछ ही देर में स्नेहा अपनी फ्रेंड के साथ अन्दर आई…अन्दर आते ही उसकी फ्रेंड को सभी ने विश करना शुरू कर दिया…स्नेहा भाग कर मेरी तरफ आई..और मुझसे लगभग लिपट सी गयी आकर..उसके पुरे शरीर से भीनी सी खुशबू आ रही थी…उसने बड़ा ही सुन्दर सा फ्रोक्क स्टाईल का सूट पहना हुआ था..

मैंने भी उसे गले से लगाकर भींच सा लिया..मेरी नजर सामने गयी तो उसकी क्लास का वो फ्रेंड अंकित हमें ही घूर रहा था…मैं उसकी हालत देखकर हंस दिया.

स्नेहा :आई एम् सो हैप्पी ….अगर तुम नहीं आते तो मैं आज पूरी शाम बोर हो जाती यहाँ पर…

मैं : अब तो मैं आ गया हूँ न…अब तुम्हे बोर नहीं होने दूंगा.

तभी मेरा फोन बज उठा..ये अंशिका का फोन था..

मैंने स्नेहा को एक्स्कुस मी कहा और एक कोने में जाकर उससे बात करने लगा.

अंशिका : हाय…कहाँ हो…बड़ा शोर आ रहा है…

मैं : वो..वो एक पार्टी में आया था…एक दोस्त के बर्थडे पर ..

अंशिका : अच्छा जी..पहले तो तुमने ये बात बताई ही नहीं मुझे…अब एकदम से पार्टी में पहुँच गए..कहीं ये वैसी पार्टी तो नहीं है न..जैसी पार्टी में जाना बोलकर तुम मेरे साथ गए थे..

ये लडकिया भी न..कई बार मजाक में ही सही..पर सही बात कह जाती है..जिससे हम जैसो की गांड फट जाती है..

मैं :अरे नहीं बाबा…तुम भी न..

अंशिका (हँसते हुए) : अरे मैं तो मजाक कर रही थी…वैसे मैंने फ़ोन इसलिए किया था की तुम्हे थेंक्स बोलना था…आज पूरा दिन तुमने हमारे साथ कॉलेजेस में जाकर जो हेल्प की है ..उसके लिए थेंक्स..कन्नू भी बड़ा इम्प्रेस हुई तुमसे…ये लो..वो भी तुमसे बात करना चाहती है..

मैं कुछ कह पाता इससे पहले ही अंशिका ने फोन अपनी बहन कनिष्का को दे दिया…

कनिष्का :हाय….कैसे हो..

मैं : मैं ठीक हूँ…बस अभी एक पार्टी में आया था..

कनिष्का : ओह्ह..तब तो तुम्हे ज्यादा परेशान नहीं करना चाहिए…तुम एन्जॉय करो..और मेरी और दीदी की तरफ से बहुत-बहुत थेंक्स..आज के लिए..और..और.

मैं : और क्या ?

कनिष्का (बड़ी ही धीमी आवाज में) : कभी मौका मिला तो मिलकर थेंक्स बोल दूंगी..

मैं उसकी बात का मतलब समझ कर मस्ती में अपने लंड को रगड़ने लगा..

अंशिका (फिर से तेज आवाज में) :अच्छा लो…दीदी से बात करो…

अंशिका शायद थोडा दूर खड़ी थी उससे..उसने फोन जाकर अंशिका को दे दिया..

अंशिका : हाँ जी…अब बोलो…तो ये किसकी पार्टी है…

मैं : वो..मेरा एक फ्रेंड है..निखिल, उसकी बर्थडे पार्टी है…

अंशिका : चलो फिर ..तुम एन्जॉय करो…मैं रात को फोन करुँगी..

मैं : ठीक है.

और मैं फोन रखकर वापिस स्नेहा के पास आ गया.

स्नेहा : कोन थी…

मैं : वो..वो ..मेरी मम्मी..

स्नेहा : ओहो..मुझे लगा ..तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है…जिससे बात करने के लिए तुम कोने में जा रहे हो..

मैं : तुम भी न…मैंने तुम्हे कहा था न की मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है…

स्नेहा (मेरे होंठों पर अपनी नर्म ऊँगली रखते हुए) : अब ये बात मत बोलो…अब है..

वो अपनी बात कर रही थी..

मैं भी उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दिया और उसकी ऊँगली को चूम लिया..उसने शर्माते हुए अपना हाथ खींच लिया.

तभी माईक पर उसकी फ्रेंड के पापा ने सभी मेहमानों को वहां आने के लिए थेंक्स कहा और फिर उन्होंने केक मंगवाया ..वेटर एक बड़ा सा केक ट्रोली में लेकर आये और फिर उन सभी ने मिलकर केक काटा…स्नेहा मेरा हाथ पकड़कर मुझे सबसे आगे ले गयी…उसकी फ्रेंड ने केक काटा और अपने मम्मी पापा को खिलाने के बाद उसने एक बड़ा सा टुकड़ा स्नेहा को दिया..स्नेहा ने थोडा सा केक खाकर वही टुकड़ा मेरी तरफ बड़ा दिया…अब वहां के लोगो को क्या मालुम की मैं स्नेहा का क्या लगता हूँ…वो शायद मुझे उसका भाई या कोई करीबी समझ रहे होंगे…पर उसकी फ्रेंड ने जब स्नेहा को मुझे केक खिलते देखा तो उसने स्नेहा से आँखों ही आँखों में मेरी तारीफ कर दी…

उसके बाद सभी लोग खाना खाने लगे..

मैं और स्नेहा एक कोने में जाकर टेबल पर बैठ गए और कुछ स्नेक्स खाने लगे..

तभी उसकी फ्रेंड वहां आई : हाय…आई एम् हिनल…स्नेहा ने बताया था कल तुम्हारे बारे में…

मैं : हाय हिनल..एंड हैप्पी बर्थडे…यु आरे लूकिंग रेअल्ली गुड एंड सॉरी मैं बिन बुलाये यहाँ आ गया…

हिनल :अरे कोई बात नहीं. ..तुम मेरी सबसे अच्छी फ्रेंड के फ्रेंड हो…और इसने बुलाया या मैंने बुलाया एक ही बात है..एंड थैंक्स फॉर यूर विश एंड कॉम्प्लीमेंट…

हिनल अब मेरे सामने खड़ी थी, इसलिए उसका पूरा ढांचा मैं अच्छी तरह से देख पा रहा था..

उसने लम्बी गाउन वाली व्हाईट कलर की ड्रेस पहनी हुई थी..जिसपर चमकीले सितारे लगे थे…और ऊपर से उसने लम्बा सा जुड़ा पार्लर से बनवाया था…और कुछ मेकअप भी करवाया था..उसकी ब्रेस्ट का साईज काफी बड़ा था…अंशिका के जितना होगा शायद…ये मुझे क्या हो गया है..आजकल हर लड़की को अपनी आँखों से तोलकर देखने लगा हूँ…

मैंने अंशिका की तरफ देखा, वो मुझे ही घूर रही थी,

स्नेहा : ये ज्यादा पसंद आ रही है…बात करवा दूँ इसके साथ तुम्हारी…बोलो..

उसकी बात सुनकर हिनल हंस पड़ी…

मैं :क्या…क्या कह रही हो…

स्नेहा : घूर तो ऐसे रहे हो इसे…वैसे हमारी क्लास में भी उसके बड़े दीवाने है…और कुछ तो यहीं घूम रहे हैं..हे हे..

ये कहते हुए स्नेहा और हिनल ने अपने हाथ एक दुसरे की तरफ बड़ा दिए…और ताड़ी मारी..

हिनल : और स्नेहा के पीछे भी काफी भँवरे हैं…पर आज तुम्हे यहाँ देखकर ना जाने कितनो के दिल टूट गए होंगे…हा हा…

और फिर से उन दोनों ने एक दुसरे की तरफ हाई फाईव वाले स्टाईल में ताड़ी मारी…

उन दोनों की दोस्ती देखकर मैं भी मजे लेने लगा.

तभी हिनल हो उसकी मम्मी ने बुलाया..और वो चली गयी..

स्नेहा : वैसे..तुम हो तो बड़े चालु…

मैं :कैसे…

स्नेहा : हर लड़की का एक्स्सरे करने लग जाते हो तुम तो…वैसे एक बात बताऊँ…ये हिनल ने आज ब्रा नहीं पहनी हुई अन्दर…हे हे..

मैं उसकी बात सुनकर चोंक गया.

स्नेहा : वो इसकी ड्रेस ही ऐसी थी…पीछे से स्ट्रेप्स दिखाई दे रहे थे..तुमने उसका गला नहीं देखा क्या..पीछे से..

मैंने नजर घुमा कर हिनल की तरफ देखा…माय गोड…उसके पीछे का गला पीठ तक जा रहा था…और उसके साथ ब्रा पहनने का तो कोई सवाल ही नहीं था…

काश इसने ये बात पहले बताई होती जब वो मेरे सामने खड़ी थी…तो शायद मैं उसकी ड्रेस में से उसके निप्पल ढूँढने की कोशिश करता..

मैं : और तुमने पहनी हुई है क्या ब्रा…?

स्नेहा (मेरी आँखों में देखते हुए) : तुम ही बताओ…

मैंने उसकी छाती पर नजरें जमा दी…वो हलके से मुस्कुरा कर मेरी तरफ देखती रही…मुझे सच में पता नहीं चल पा रहा था की उसने अन्दर ब्रा पहनी है या नहीं…

मैं : मुझे इस तरह से पाता नहीं चल पायेगा…हाथ से चेक करना पड़ेगा…

स्नेहा (उसी अंदाज में ) : तो कर लो…मैंने कहाँ मना किया है..

मैं : चेक कर लूँ….पर कैसे..

स्नेहा :वो तो तुम जानो…एक काम करो तुम जरा सोचो, तब तक मैं अपनी दूसरी फ्रेंड्स से मिलकर आती हूँ..

वो चली गयी और मैं सोचने लगा…

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