फ़ोन सेक्स – मोबाइल फ़ोन सेक्स part 7

मैंने अपने हाथ उसकी फेली हुई गांड पर टिकाये और उन्हें मसलने लगा, जींस में कैद उसके चुतड बड़े गजब के लग रहे थे..मैंने हाथ अन्दर करके अपनी उँगलियाँ उसके नंगे नितम्बो पर टिका दी और उन्हें मसलने लगा..

अंशिका मेरे मुंह को किसी भूखी शेरनी की तरह से चूसने में लगी थी, उसे भी मालुम था की ऐसे मौके बार-२ नहीं मिलेंगे.
मैंने हाथ नीचे करके उसकी जींस के बटन खोले, और उसे नीचे खिसका दिया, शर्ट के बटन उसने खुद ही खोल दिए, मैंने उसे टेबल पर बिठाया और उसकी जींस उसके घुटनों तक नीचे उतार दी, नीचे उसने ब्लेक कलर की पेंटी पहनी हुई थी, मैंने उसपर हाथ लगाया, वो पूरी गीली थी..

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह विशाल…..मैं जल रही हूँ….प्लीस कुछ करो..

मैंने उसकी पेंटी भी उतार दी, और फिर धीमी रौशनी में उसकी चिकनी चूत उजागर हो गयी, उसने कल ही अपने बाल साफ़ किये थे, इसलिए उसकी चूत से निकलते रस की वजह से उसकी चिकनी चूत बड़ी ही कमाल की लग रही थी..

मैंने उसकी पेंटी भी घुटनों से नीचे कर दी, पुरे कपडे उतरना वहां मुश्किल था, किसी के आने का भी डर था,

उसकी ब्रा से झांकते हुए उसके मुम्मे देखकर तो मैं पागल ही हो गया, मैंने उसकी ब्रा को ऊपर किया और उसके खरबूजे नीचे से निकल कर मेरी आँखों के सामने आ गए, अब मैंने उसे मुम्मो से लेकर चूत तक देखा, मलाई जैसी त्वचा देखकर मैंने अपनी जीभ निकली और उसके मुम्मो से लेकर नीचे तक उसे चाटना शुरू कर दिया.

उसके निप्पल, पेट , नाभि और फिर जैसे ही उसकी चूत मेरे मुंह के सामने आई, उसने मेरे सर को पकड़कर अपनी चूत पर दबा सा दिया..

अह्ह्हह्ह्ह्ह विशाल….चाटो न…प्लीस….सक मी …सक मी….विशाल…सक्क माय कंट…विशाल….इट्स बर्निंग …प्लीस….

मैंने उसे तद्पाने के लिए, अपनी जीभ निकली और उसकी चूत के चारों तरफ फेले गीलेपन पर फिराने लगा, उसकी चूत से बड़ी तीखी सी स्मेल आ रही थी, जो मुझे मदहोश सा कर रही थी, ये मेरा पहला अवसर था की मैं किसी की चूत चाट रहा था, पर मुझे बड़ा मजा आ रहा था, मैंने अपनी जीभ निकाली और उसे अंशिका की चूत के बीचो बिच लगा दिया..

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह विशाल…..स्स्स्सस्स्स्स….

उसने मेरे सर को अपनी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया, उसे भी काफी मजा आ रहा था, मैंने हाथ उसकी जांघो के नीचे रखे और उसकी चूत को थोडा और ऊपर किया, वो टेडी होकर लेट सी गयी टेबल पर, अब मैंने अपने हाथो से उसकी चूत के फेलाया और उसपर दांतों से, होंठो से और जीभ से हमले करने शुरू कर दिए…वो मेरे हर हमले से सिसकारी मारती और मेरे बालों को पकड़कर उन्हें अपनी चूत पर घिसने लगती.

जल्दी ही उसकी चूत के अन्दर से लावा निकलने का टाइम आ गया, वो चिल्लाने लगी..

ओह्ह्ह विशाल…ओम्म्म्म …ओह्ह्ह मायय,…..गाद…अह्ह्ह्ह आई एम् कमिंग……अह्ह्हह्ह या…..अह्ह्हह्ह्ह्ह

और अगले ही पल उसकी चूत में से हलकी सी गर्म पानी की बाड़ आई और मेरे मुंह से आ टकराई , मेरा पूरा मुंह भीग गया, मैंने सपद-२ करके उसका सारा पानी पी डाला..

मैं अब जल्दी से उठा और अपनी पेंट से पर्स में से कंडोम निकाला, वो समझ गयी की मैं क्या करने वाला हूँ, उसने मुझे कहा
अंशिका :सुनो…विशाल…प्लीस मेरी बात मानो, मैं भी ये सब करना चाहती हूँ, पर मैं चाहती हूँ की जब पहली बार तुम मुझे प्यार करो तो ऐसी जगह नहीं, प्रोपर बिस्तर पर, आराम से, बिना किसी डर के..

मैंने उसकी बात सुनी, बात तो वो सही कह रही थी, मैं ही था जो अपना उतावलापन दिखाकर उसकी चूत मारने के चक्कर में ये भी नहीं देख पा रहा था की हम एक बिजली घर की पार्किंग में खड़े हैं, और मैं उसे एक टूटे हुए से टेबल पर चोदने की सच रहा हूँ..मैंने उसकी बात मान ली और अपना कंडोम वापिस पर्स में रख लिया..

मैं :पर इसका क्या करूँ…
मैंने लंड की तरफ इशारा किया.

अंशिका :ये तुम मुझपर छोड़ दो…

उसने लेटे हुए ही मेरे लंड को पकड़ा और अपनी तरफ खींच कर अपनी चूत के ऊपर लगाया, उसकी चूत का एहसास मेरे लंड पर होते ही मेरे लंड ने एक दो बार जर्क किया…उसकी चूत से निकलता रस उसने मेरे लंड पर अच्छी तरह से मल दिया,और फिर वो उठी और मुझे टेबल पर बैठने को कहा, और खुद मेरे सामने खड़ी होकर , अपने मुम्मो को मेरे लंड पर रगड़ने लगी, उसका तरीका पड़ा ही कामुक था, उसके निप्पल खड़े होकर मेरे लंड पर तीर की तरह चुभ रहे थे, मैंने उसके चेहरे पर आते बालों को हटाया और उसने मेरी आँखों में देखते हुए नीचे झुककर मेरे लंड को निगल लिया, और जोरों से चूसने लगी..

अह्ह्हह्ह अंशिका…..अह्ह्हह्ह क्या चुस्ती हो यार…..अह्ह्ह्हह्ह हां और जोर से चुसो….म्मम्मम्म

मेरी बातें सुनकर उसने मेरे लंड पर चूसने की गति थोड़ी बड़ा दी, और जल्दी ही मेरे लंड से निकलने वाली पिचकारियाँ उसके गले को गीला करने में लग गयी, और हर बार की तरह उसने सारा रस पी लिया

उसके बाद वो ऊपर आई और पिछली बार की तरह ही इस बार भी मेरे मुंह पर अपने होंठ लगा कर मुझे फ्रेंच किस किया और अपने शरीर को मेरे शरीर से रगड़ने लगी.

अब रात काफी हो चुकी थी, मैंने घडी देखि तो साड़े दस बज रहे थे, वो भी जल्दी से उठी, कपडे ठीक किये, लिपस्टिक लगायी और फिर हम वापिस चल दिए, मैंने उसके घर पर उसे ड्रॉप किया, उसकी मम्मी ने दरवाजा खोला, मुझे अन्दर आने को कहा, पर मैंने ये कहकर की अभी रात काफी हो चुकी है, फिर कभी आऊंगा, और मैं अपने घर वापिस आ गया.

वापिस आकर मैंने अपने मोबाइल पर उसका मेसेज देखा..

गुड नाईट स्वीट हार्ट .थेंक्स फॉर टुडे..

अब रात काफी हो चुकी थी, मैंने घडी देखि तो साड़े दस बज रहे थे, वो भी जल्दी से उठी, कपडे ठीक किये, लिपस्टिक लगायी और फिर हम वापिस चल दिए, मैंने उसके घर पर उसे ड्रॉप किया, उसकी मम्मी ने दरवाजा खोला, मुझे अन्दर आने को कहा, पर मैंने ये कहकर की अभी रात काफी हो चुकी है, फिर कभी आऊंगा, और मैं अपने घर वापिस आ गया.

वापिस आकर मैंने अपने मोबाइल पर उसका मेसेज देखा..

गुड नाईट स्वीट हार्ट .थेंक्स फॉर टुडे..

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मैं रात को सोते समय शाम को हुई सारी बातों को सोचता रहा, एक एक करके सभी चीजे दोबारा से मेरी आँखों के सामने आने लगी, कैसे मैंने जाते हुए अंशिका को चूमा, उसने मेरा लंड चूसा, और फिर वापिस आते हुए भी उसने मेरा लंड चूसा और मैंने पहली बार उसकी चूत भी चाटी …कितने मजे आये, काश आज कोई अच्छी सी जगह होती तो मैं जरुर अंशिका की चूत मार लेता, अब मुझे जल्दी ही किसी जगह का इंतजाम करना होगा..

और आज किटी मेडम भी कितनी धांसू लग रही थी, और ख़ास कर उनका वो लाल निशान, वैसे निशान तो मैंने भी बनाया था अंशिका की ब्रेस्ट पर, कल उससे पूछुंगा की कैसा है वो निशान, और स्नेहा की बात को याद करके मेरे लंड ने एक-दो बार जोर से जर्क किया, कैसे वो सफ़ेद ड्रेस में किसी परी जैसी लग रही थी, और उसके छोटे-२ नागपुरी संतरे कितने मजेदार लग रहे थे, वैसे थी तो वो चालु ही, क्योंकि वो अपने दोस्त के साथ अपने ही टेरिस पर चूमा चाटी जो कर रही थी और कैसे उसने सबके सामने मेरा नंबर मांग लिया, काश मैं भी उसका नंबर ले पाता, उससे बात करके ये जानने की कोशिश करता की मेरा गिफ्ट उसे कैसा लगा..पर मुझे विशवास था की जल्दी ही उसका फ़ोन आएगा.

मैं ये सब बातें सोचते हुए कब सो गया, मुझे पता ही नहीं चला..

सुबह सात बजे मेरा फ़ोन बजने लगा, मैं समझ गया की ये अंशिका का फ़ोन है, मैंने सोते-२ फ़ोन उठाया और अपने कानो से लगाया

मैं :हेल्लो…जान…गुड मोर्निंग..
“जान…?? क्या बात है…किसी और के फ़ोन का इन्तजार कर रहे हो क्या…मैं स्नेहा बोल रही हूँ…”

धत्त तेरे की…मैंने बिना ये देखे की किसका फ़ोन है, उठा लिया, और “जान” भी बोल दिया, मैंने जल्दी से सितुअशन को संभाला और कहा

मैं :ओह्ह…स्नेहा…मैं तुम्हारे फोन का ही इन्तजार कर रहा था..
स्नेहा :और ये “जान” कोन है..तुम्हारी

उसकी आवाज में बचपना और शरारत साफ़ झलक रही थी..

मैं :ये तो मैंने तुम्हे ही कहा, तुम्हे बुरा लगा क्या..
स्नेहा :नहीं…बुरा तो नहीं..पर पहली बार में ही तुम मुझे ऐसे…
मैं :मैं तो अपने सभी फ्रेंड्स को जान कहता हूँ…
स्नेहा (हँसते हुए) :फिर ठीक है…तुम्हे पता था की मेरा फोन होगा इतनी सुबह
मैं : हाँ, दरअसल मैं तो कल रात को घर आने के बाद ही तुम्हारे फ़ोन का इन्तजार कर रहा था, कल नहीं आया तो मुझे पूरा यकीन था की आज सुबह तो जरुर आएगा..
स्नेहा : ओके….वैसे मैंने तुम्हे थेंक्स कहने को फोन किया है, मुझे तुम्हारा गिफ्ट बहुत पसंद आया, थेंक्स अ लोट..
मैं : यु आर वेल्कम
स्नेहा : अच्छा, तुम ये मेरा नंबर सेव कर लो, बाद में बात करुँगी, अभी तो स्कूल जा रही हूँ…तुमने भी तो कॉलेज जाना होगा न..
मैं :हाँ, मैं सेव कर लूँगा, पर मेरे अभी एक्साम्स ख़त्म हुए हैं, इसलिए छुट्टी है आजकल, अगले महीने से जाऊंगा..तुम किस समय फ्री हो जाओगी, तब फ़ोन करूँगा.
स्नेहा : मैं तो २ बजे वापिस आउंगी, स्कूल से, वहां फ़ोन ले जाना मना है, इसलिए फ़ोन तो घर पर ही रहेगा..दोपहर को बात करुँगी..जैसे ही आउंगी, मैं ही कर लुंगी तुम्हे..

मैं :ठीक है…बाय जान…
स्नेहा (हँसते हुए) या..बाय..

और उसने फोन रख दिया..

ओ तेरे की….ये तो खुद ही फंसने को तैयार है…वैसे मैंने उसी दिन, जब अंशिका के कॉलेज में जब फेस्ट था, देख लिया था की वो मुझे बड़ी अजीब से नजरों से देख रही है, पर तब मैंने सोचा की बच्ची है , इसलिए ज्यादा ध्यान नहीं दिया उस दिन, पर जब से उसे छत्त पर किस्स करते हुए देखा और अब मुझे सुबह-२ थेंक्स के बहाने से फ़ोन करा तो मैं समझ गया की उसके टीनएज दिल में मेरे लिए कुछ -२ होने लगा है…

फ़ोन रखने के बाद मैंने देखा की मेरे मोबाइल पर दो मिस काल थी, अंशिका की, मैंने जल्दी से उसे नंबर मिलाया ही था की दोबारा उसका फ़ोन आ गया

अंशिका :हाय…गुड मोर्निंग…
मैं :हाय…

अंशिका :किससे बात कर रहे थे इतनी सुबह…
उसकी आवाज में थोड़ी जलन की भावना साफ़ झलक रही थी..

मैं :वो..मेरे एक फ्रेंड का फोन था, आज मूवी देखने का प्रोग्राम है, इसलिए इतनी सुबह फोने करके कन्फर्म कर रहा था..

अंशिका :और वो तुम्हारी दोस्त, पारुल भी जा रही है क्या ?

मैंने मजे लेने के लिए कहा :हाँ…वो भी जा रही है..मैंने कहा था न की हमारे ग्रुप में ही है वो..

अंशिका :तुम नहीं जाओगे वहां..

मैं :क्यों भाई>>>तुम तो मुझपर ऐसे हुक्म चला रही हो जैसे तुम मेरी बीबी हो…
अंशिका :बीबी नहीं हूँ तो क्या, उससे कम भी नहीं हूँ…
मुझे उसकी बात सुनकर काफी अच्छा लगा..

मैं :अरे बाबा, मैं तो मजाक कर रहा था, वो नहीं जा रही, सिर्फ मेरा दोस्त, निशांत और मैं ही जा रहे हैं..
अंशिका (रुआंसी सी होकर) तो तुम मुझे सुबह-२ सता रहे थे…हूँ..

वो शायद रो रही थी…मुझे बड़ा बुरा फील हुआ उसे सुबह-२ रुला कर..

मैं :सॉरी जान…मैं तो मजाक कर रहा था…अच्छा मुझे माफ़ कर दो, बोलो मैं क्या करूँ अपनी इस भूल को सुधारने के लिए..
अंशिका :मुहे किस्स करो.
मैं :मुआअह…ये लिप्स पर ….मुआः .ये तुम्हारी ब्रेस्ट पर .ठीक है..और वैसे ये तो बताओ, वो निशान अभी भी है क्या वहां…

अंशिका (हँसते हुए) हाँ है…और बड़ा क्यूट सा लग रहा है…आज नहाते हुए मैंने देखा शीशे में, व्हाईट कलर की ब्रेस्ट पर लाल सुर्ख निशान… है भगवान्…मुझे तुमसे ये बाते करते हुए फिर से कुछ होने लगा है……ओके…बाय, मैं चलती हूँ, मुझे देर हो रही है..
और फिर उसने फ़ोन रख दिया..

ओ गोड…आज तो बाल बाल बचा…वो कितनी पोसेसिव है मेरे लिए, अगर उसे पता भी चल गया की मैं स्नेहा के साथ बात कर रहा हूँ तो मेरा उसकी चूत मारने का सपना सिर्फ सपना ही रह जाएगा, मैंने जल्दी से स्नेहा के नंबर को निकाला और उसे “संजय” के नाम से सेव कर दिया, जो की मेरा एक और दोस्त है, .अगर कभी उसके सामने ही स्नेहा का फ़ोन आ गया तो कम से कम मैं बच तो जाऊंगा न..

मैं फिर सो गया, नो बजे मम्मी ने आकर उठाया और मैं नहाने गया, फिर अपने दोस्त निशांत को फ़ोन किया, उसे मूवी चलने को कहा पर उसने मना कर दिया..वो अपने पापा के साथ कहीं जा रहा था..मैं फिर घर के एक – दो काम करने के बाद कंप्यूटर पर बैठा और फेसबुक खोला, थोडा अपडेट किया और फिर एक दो पोर्न साईट देखि, स्टोरी पड़ी और फिर टीवी चला कर मूवी देखने लगा..

तब तक दो बज गए, मैंने लंच किया ही था की मेरा फ़ोन बज उठा, देखा तो उसपर “संजय” लिखा था..यानी स्नेहा का फ़ोन था, मैं उसी का इन्तजार कर रहा था..

मैं :हाय..जान…कैसी हो..
स्नेहा (मंद ही मंद मुस्कुराते हुए) :ठीक हूँ…डिस्टर्ब तो नहीं किया न मैंने..
मैं : नहीं रे..मैं तो वैसे ही बोर हो रहा था…
स्नेहा : तब ठीक है, जानते हो, आज मेरी सारी सहेलियां मुझसे कल के मिले गिफ्ट्स के बारे में पूछ रही थी, और जब मैंने उन्हें तुम्हारे बारे में और तुम्हारे दिए गिफ्ट के बारे में बताया तो वो मुझे टीस करने लगी…और ना जाने क्या क्या कहने लगी..

मैं :अच्छा, क्या बोल रही थी वो..मेरे बारे में..बोलो न..

स्नेहा : नहीं…वो तो वैसे ही, उन्हें तो कोई टोपिक मिलना चाहिए…छोड़ो उसे..

मैं :नहीं मैं सुनना चाहता हूँ…क्या कह रही थी वो मेरे बारे में

स्नेहा (शर्माते हुए) वो…वो…कह रही थी…की…पूछ रही थी…की…तुम कैसे दीखते हो…क्या करते हो…वगेरह -२
मैं :तो तुमने क्या कहा..?

स्नेहा :मैंने कह दिया, स्मार्ट है..गुड लूकिंग..कॉलेज में है…वोही सब जो मैं जानती हूँ तुम्हारे बारे में..
मैं : बस इतना ही…
स्नेहा :और क्या..तुमने मुझे अपने बारे में और कुछ बताया ही कहाँ है..

मैं :तुमने कभी मौका ही नहीं दिया..
स्नेहा :ठीक है, अब बता दो..
मैं :ऐसे नहीं…फ़ोन पर ये सब नहीं बताया जाता…
स्नेहा : पर मैं बाहर नहीं मिल सकती तुमसे..शाम तक मम्मी पापा आ जाते हैं, उसके बाद मेरे एक सर हैं, उनके घर जाना होता है, टूशन के लिए..पापा ही मुझे लेने और छोड़ने आते हैं, और फिर खाना वगेरह, बाद में होमवर्क और फिर सोना..बस इसी में सारा दिन निकल जाता है,

मैं :टूशन के लिए तुम बाहर क्यों जाती हो, घर पर ही किसी को बुला लिया करो..
स्नेहा : अरे …बहुत ट्राई किया…पर सभी बहुत पैसे मांगते हैं…
मैं :अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हे पड़ा सकता हूँ, घर आकर…
स्नेहा (खुश होते हुए) :क्या सच…वाव…तुम क्या प्रायवेट टूशन देते हो..
मैं :हाँ (मैंने झूट बोला)
स्नेहा : फिर तो बड़ा अच्छा होगा…हम रोज मिल भी सकते हैं और खूब बातें भी कर सकते हैं..
मैं (शरारती लहजे में) :सिर्फ बातें ही करोगी क्या
स्नेहा (सहमते हुए) :क्या मतलब…?
मैं :मतलब, तुम इतनी नासमझ भी नहीं हो की मुझे तुम्हे हर बात बतानी पड़े..तुम क्या -२ करती हो, वो तो मैंने उस दिन छत्त पर देख ही लिया था…
स्नेहा : वो….वो तो बस ऐसे ही…अंकित मेरा अच्छा फ्रेंड है, मेरी क्लास में ही है वो, हमारी क्लास में सभी ने कोई न कोई बॉय फ्रेंड बना रखा है, जिसका नहीं है, उसे सब चिड़ाते हैं…तुम समझ रहे हो न…पर मैंने उसे कभी भी किस्स के आलावा कुछ और नहीं करने दिया..अगर तुम्हे ये सब पसंद नहीं है तो मैं उसे छोड़ दूंगी…ठीक है..

मैं उसकी सितुएशन समझ रहा था…और मुझे उसके बचपने पर हंसी भी आ रही थी..मैं तो बस उससे मजे ले रहा था..

मैं :वो तुम जानो…मुझे कोनसा तुम्हारा बॉय फ्रेंड बनना है…और तुम्हे किस्स करना है..

वो मेरी बात सुनकर कुछ न बोली

मैं : पर सच बोलू तो अभी तुम्हारी उम्र नहीं है ये सब करने की…
स्नेहा :तुम मेरे पापा की तरह ना बात करो, यु नो…वो मैंने जब अपने बर्थडे पर फ़ोन माँगा तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया, और कहा की अभी मेरी फ़ोन रखने की उम्र नहीं है, वो तो मम्मी, जो मेरी सारी बात मानती है और मुझे सबसे ज्यादा प्यार करती है, उन्होंने ही पापा की बात ना मानते हुए, मुझे फ़ोन लाकर दिया..

मैं :यानी, तुम मामा’स बेबी हो…
हाँ :और मेरी मोम सबसे ज्यादा प्यारी है, इस दुनिया की बेस्ट मोम है वो…
मैं :तो तुम अपनी बेस्ट मोम से कहो की तुम्हे टूशन जाने में परेशानी होती है, घर पर ही टीचर का इंतजाम करो..
स्नेहा :वो तो मैं रोज कहती हूँ…पर मैं अब अपने मुंह से तो तुम्हारे बारे में उनसे नहीं कह सकती न..
मैं :उसकी फ़िक्र तुम ना करो…मैं कुछ करता हूँ…
स्नेहा :ठीक है…अच्छा अब मैं रखती हूँ…मुझे कपडे भी चेंज करने हैं…
मैं :ओह…अभी तक कपडे भी नहीं बदले…बड़ी जल्दी थी तुम्हे मुझसे बात करने की…हूँ…वैसे क्या पहना हुआ है तुमने…जिसे उतारने की इतनी जल्दी है..
स्नेहा :बदमाश…चुप करो…ऐसी बाते नहीं करते…ओके..बाय…मैं रखती हूँ..
और उसने हँसते हुए फोन रख दिया..

मैं :यानी, तुम मामा’स बेबी हो…
हाँ :और मेरी मोम सबसे ज्यादा प्यारी है, इस दुनिया की बेस्ट मोम है वो…
मैं :तो तुम अपनी बेस्ट मोम से कहो की तुम्हे टूशन जाने में परेशानी होती है, घर पर ही टीचर का इंतजाम करो..
स्नेहा :वो तो मैं रोज कहती हूँ…पर मैं अब अपने मुंह से तो तुम्हारे बारे में उनसे नहीं कह सकती न..
मैं :उसकी फ़िक्र तुम ना करो…मैं कुछ करता हूँ…
स्नेहा :ठीक है…अच्छा अब मैं रखती हूँ…मुझे कपडे भी चेंज करने हैं…
मैं :ओह…अभी तक कपडे भी नहीं बदले…बड़ी जल्दी थी तुम्हे मुझसे बात करने की…हूँ…वैसे क्या पहना हुआ है तुमने…जिसे उतारने की इतनी जल्दी है..
स्नेहा :बदमाश…चुप करो…ऐसी बाते नहीं करते…ओके..बाय…मैं रखती हूँ..
और उसने हँसते हुए फोन रख दिया..

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मैं सोच रहा था की अभी तो अंशिका की चूत मिली नहीं है और मैं स्नेहा के चक्कर में पड़ गया, कहीं ऐसा ना हो की मैं न यहाँ का रहूँ और न वहां का..पर यारों ये उम्र ही ऐसी है, वैसे भी अंशिका के साथ अपनी सेटिंग ऐसी है की मैं अगर बाद में स्नेहा के साथ भी चक्कर चला लूं तो वो मुझे मना नहीं करेगी…पर जैसा की वो चाहती है की पहली बार मैं सेक्स उसके साथ ही करूँ फिर किसी और के साथ, यानी अंशिका की चूत मारने के बाद मैं आराम से स्नेहा की भी मार सकता हूँ..पर अभी उसके बारे में मुझे अपनी तरफ से बताने की कोई जरुरत नहीं है, क्योंकि वैसे भी वो मेरे बारे में काफी पोसेसिव है..ये तो पारुल वाले मामले में मैं देख ही चूका था..मुझे हर कदम सोच समझ कर रखना होगा..

पर सबसे पहले तो मेरे सामने ये सवाल था की मैं स्नेहा को उसके घर पर टयूशन पड़ाने के लिए कैसे जाऊ . मेरे दिमाग में एक आईडिया आया. मैंने झट से अंशिका को फोन मिलाया.

अंशिका :हाय…कैसे हो…इस समय कैसे फोन किया
मैं :हाय..मैं ठीक हूँ..दरअसल तुम्हे एक न्यूज़ देनी थी..मैंने टयूशन देना शुरू कर दिया है, सुबह के टाइम , मैंने सोचा की इससे मेरी पॉकेट मनी भी निकल जायेगी और कुछ टाइम भी कट जाएगा..
अंशिका :वाव..आई एम् इम्प्रेस ..तुम ऐसा सोचते हो, मुझे अच्छा लगा, वैसे भी तुम्हे अब अपने घर वालो पर ज्यादा भार नहीं डालना चाहिए..इस तरह से पार्ट टाइम जॉब करके या टयूशन देकर तुम अपनी पॉकेट मनी निकाल सको तो उन्हें भी अच्छा लगेगा..
मैं :थेंक्स..मुझे मालुम था तुम्हे ये सुनकर अच्छा लगेगा, इसलिए मैंने तुम्हे फोन किया..
अंशिका :कोन सी क्लास के स्टुडेंट है..
मैं : 10 th और 12 th के..दो भाई बहन है, उनके घर जाकर पढाना है, सुबह सात बजे, राज नगर में..
अंशिका :राज नगर, वो तो मेरे कॉलेज के बिलकुल पीछे ही है..
मैं :हाँ मैं जानता हूँ.. ..वैसे तब तो हम एक काम कर सकते हैं,तुम रोज कॉलेज बस से सात बजे ही जाती हो, मैं रोज सुबह तुम्हे कॉलेज छोड़ता हुआ टयूशन पड़ाने चला जाऊंगा..ठीक है न..
अंशिका :हाँ…ठीक तो है..पर तुम्हे ज्यादा मुश्किल न हो..
मैं :अरे..मुश्किल कैसी, तुम्हे रोज छोड़ने के लिए तो मैं वैसे भी आ सकता हूँ, और अब तो ये बहाना भी है..
अंशिका :चलो ठीक है, तुम कल सुबह आ जाना, मेरे घर.
मैं :ठीक है..और सुनाओ, अभी क्या कर रही हो.
अंशिका :कुछ ख़ास नहीं, स्टुडेंट्स को पड़ा रही थी..मालुम है आज क्या हुआ, मैं जब अपनी क्लास में गयी तो ब्लेक बोर्ड पर किसी ने पेनिस जैसी चीज बना रखी थी, मुझे तो बड़ी शर्म आई
मैं :तुमने पूछा नहीं की किसने किया वो..
अंशिका :हाँ..मैंने पूछा तो एक स्टुडेंट ने कहा की पिछली क्लास में हयूमन सायेंस के टीचर ने बनायीं होगी..
मैं :फिर ठीक है..
अंशिका :नहीं ठीक नहीं है, वो पिक्चर जिस तरह से बनी हुई थी, साफ़ पता चल रहा था की किसी स्टुडेंट ने ही बनायीं है, मुझे परेशां करने के लिए, वो बिलकुल खड़ा हुआ पेनिस था, और उसके दोनों तरफ गोल गोल….

वो आगे न बोल पायी, उसे शायद शर्म आ रही थी , बताने में..

मैं :ओहो…तो कोई स्टुडेंट है जो तुम्हे शर्माते हुए देखकर मजे ले रहा है…तुम भी मजे लो फिर..प्रोब्लम क्या है..
अंशिका :तुम भी न…मैं वहां टीचर हूँ..मैं ये सब नहीं कर सकती कॉलेज में…मैंने ब्लेक बोर्ड साफ़ किया और फिर अपनी क्लास ली और जल्दी से स्टाफ रूम में आ गयी..बस तभी से बैठी हूँ, अगली क्लास दस मिनट बाद है…
मैं :अच्छा ..तुम ज्यादा परेशान मत हो..
अंशिका :ठीक है…अच्छा मैं रखती हूँ, कोई और टीचर भी हैं यहाँ..रात को बात करुँगी..

उसके बाद उसने रात को बात की, थोड़ी बहुत किस्सेस और नोर्मल बात हुई फोन पर, और फिर अगले दिन सुबह टाइम से आने का वादा लेकर उसने फोन रख दिया.

मैं सुबह 7 बजे उसके घर आ गया, वो थोड़ी देर में बाहर आई और मेरे पीछे बैठ गयी, मैं उसे लेकर चल दिया, वो हमेशा की तरह मुझसे लिपट कर बैठी थी

मैंने उसे कॉलेज के पास उतारा और चल दिया, वापिस घर…उसे क्या मालुम था की मैं तो अपनी भूमिका बाँध रहा हूँ…

अगले दिन भी मैंने उसे कॉलेज छोड़ा..और इस तरह से लगातार तीन दिन हो गए…पर जो मैं चाहता था वो अभी तक नहीं हुआ था..और आखिर चोथे दिन वही हुआ जो मैं चाहता था.

मैं अंशिका को लेकर जैसे ही कॉलेज पहुंचा, किटी मेम की कार हमारे पास आकर रुकी, मैंने और अंशिका ने उन्हें देखा और उन्हें विश किया

किटी :गुड मोर्निंग…और विशाल, कैसे हो…कैसी चल रही है तुम्हारी जॉब..
मैं :मेरी जॉब…? कोन सी..
किटी मेम :येही, अंशिका को अपनी बाईक पर छोड़ने की…तुम तो इसके ड्राईवर ही बन गए हो…हा हा…
अंशिका :नहीं मेम ऐसा कुछ नहीं है….वो तो आजकल ये रोज सुबह यहीं राज नगर में टयूशन पड़ाने आता हूँ, और मैं भी इसके साथ आ जाती हूँ…वर्ना ये इतनी सुबह उठने वालों में से नहीं है..

किटी मेम अंशिका की बात सुनकर कुछ सोचने लगी..और फिर मुझसे बोली

किटी : तुम टयूशन भी पदाते हो, कोन सी क्लास को..
मैं :जी..वो..कोई भी हो..वैसे अभी तो 10 th और 12th के बच्चो को पड़ा रहा हूँ..
किटी मेम : अच्छा…मैं भी स्नेहा के लिए कोई होम टयूटर ढूंढ रही थी…अगर तुम उसे भी पड़ा सको तो बड़ा अच्छा होगा, अभी तो उसे काफी दूर जाना पड़ता है और आजकल आना जाना कितना मुश्किल है,वो तो तुम जानते ही हो…प्लीस विशाल…पड़ा दोगे क्या उसे ..

मैंने अंशिका की तरफ देखा, वो भी कुछ सोच रही थी, जैसे उसे मेरा ये सब करना अच्छा नहीं लगेगा, पर बात किटी मेम की बेटी की थी, वो बीच में पड़कर बुरी भी नहीं बनना चाहती थी..उसने मुझे आँखों ही आँखों में हाँ कहा..

मैं :ठीक है मेम…मुझे कोई प्रोब्लम नहीं है…क्या टाइम सूट करेगा स्नेहा को
किटी :देखो…वो स्कूल से दो ढाई बजे के आस पास आती है, और फिर थोड़ी देर खाना और सोना..शाम को पांच बजे ठीक रहेगा..
मैं :ठीक है मेम…मैं आ जाऊंगा..कल से.
किटी मेम :कल से क्यों..आज से क्यों नहीं..मुझे आज कॉलेज में मीटिंग अटेंड करनी है, इसलिए मैं तो लेट हो जाउंगी..तुम चले जाना, घर तो तुमने देख ही रखा है.मैं स्नेहा को फ़ोन कर दूंगी..ठीक है न.
मैं :ठीक है मेम…मैं आज ही चला जाऊंगा.

और फिर उन दोनों को बाय करने के बाद मैं वापिस चल दिया..अपने प्लान को कामयाब होते देखकर मुझे काफी ख़ुशी हो रही थी.

शाम को ठीक पांच बजे मैं स्नेहा के घर पहुँच गया, और बेल बजायी, दरवाजा स्नेहा ने ही खोला, वो मंद ही मंद मुस्कुरा रही थी, उसकी कातिल मुस्कान देखकर मेरा मन करा की अभी उसे दबोच लूं और उसके पिंक लिप्स को चबा जाऊ ..

उसने सफ़ेद चेक वाला पायजामा और पिंक टी शर्ट पहनी हुई थी, बड़ी ही क्यूट सी लग रही थी वो , उसने मुझे अन्दर आने को कहा, मैं उसके पीछे चल दिया, आगे चलते हुए उसके मांसल चूतड़ों की उठा पटक देखकर मैं मन ही मन सोच रहा था की इतनी कितने सेक्सी हो गए हैं उसके हिप्स इतनी छोटी सी उम्र में..

उसने मुझे सोफे पर लेजाकर बिठाया और पानी लेकर आई, पानी देते हुए जब वो नीचे झुकी तो उसकी टी शर्ट का गला नीचे लटक गया, जिसके अन्दर उसके सफ़ेद ब्रा में कैद छोटे-२ कबूतर देखकर मेरा लंड टन से खड़ा हो गया, मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी टांगो को इधर उधर करके उसे एडजस्ट किया..

वो मेरे सामने आकर बैठ गयी.

स्नेहा :मुझे तो विशवास ही नहीं हो रहा है की तुमने ये कर दिया..आई एम् सो हेप्पी..
मैं :अच्छा…तुम्हे मेरा यहाँ आना ज्यादा अच्छा लगा या मुझसे पडोगी, वो ज्यादा अच्छा है..
स्नेहा शरमाते हुए ) दोनों..अच्छा, यहीं पदाओगे या अन्दर…मेरे कमरे में..
मैं :बेडरूम में ही चलते हैं तुम्हारे..वहीँ ठीक रहेगा..

मेरी बात सुनकर उसका चेहरा एकदम से लाल सुर्ख हो गया..जैसे मैं उसे चोदने की बात कर रहा हूँ..

मैं : तुम्हारा भाई कहाँ है..
स्नेहा : वो…वो तो क्रिकेट खेलने जाता है, चार से छे बजे तक…आज तो मम्मी भी लेट ही आएँगी, और पापा शाम को कभी 6 बजे आ जाते हैं और कभी ज्यादा काम हो तो 8 बजे तक..

मैं :यानी अभी हम तुम अकेले हैं..

स्नेहा मेरी बात का मतलब समझ कर फिर से उसी कातिलाना अंदाज में मुस्कुराने लगी..पर कुछ बोली नहीं..

वो उठकर अन्दर की और चल दी.

मैं भी उसके पीछे-२ उसके बेडरूम में आ गया.

उसका कमरा बिलकुल साफ़ सुथरा सा था, अटेच बाथरूम और बालकोनी..कंप्यूटर टेबल और कोने में सुन्दर सा बेड..

मैं उसकी बालकोनी में जाकर खड़ा हो गया, वो भी मेरे साथ सटकर खड़ी हो गयी, उनका फ्लेट टॉप फ्लोर पर था, इसलिए वहां से नीचे का नजारा बहुत सुन्दर दिखाई दे रहा था..

स्नेहा :यहाँ से रात के समय पूरा शहर दिखाई देता है..
मैं :जानता हूँ, उस दिन मैंने देखा था ऊपर..तुम्हारे टेरेस से..मैं वहां से पुरे शहर को ही देखने गया था…पर कुछ और ही दिखाई दे गया..
स्नेहा (झेंपते हुए) विशाल….मैंने तुमसे कहा न..वो बात मत करो…वैसे भी मैंने अंकित से बात करनी छोड़ दी है चार दिनों से..
मैं :क्यों ? कोई और बॉय फ्रेंड मिल गया है क्या…
स्नेहा : नहीं!!! फ्रेंड मिल गया है….तुम…अब खुश हो…यही सुनना चाहते थे न..

उसने ये बात इतने भोलेपन से की थी की मैंने आगे बड़ कर उसके गाल पर चूम लिया..

वो मेरी इस हरकत से हैरान रह गयी..

मैं :क्या हुआ…वो तुम्हारा बॉय फ्रेंड तुम्हे लिप्स पर किस कर सकता है तो मैं तुम्हारा फ्रेंड होने के नाते तुम्हारे गाल तो चूम ही सकता हूँ न..

मेरी बात सुनकर वो दूसरी तरफ मुंह करके मुस्कुराने लगी..और बोली :बहुत बदमाश हो तुम, बचकर रहना पड़ेगा तुमसे तो..वैसे जैसे दीखते हो, वैसे हो नहीं..

मैं :मतलब ??

स्नेहा :उस दिन , मम्मी के कॉलेज में, तुम चार घंटे तक मेरे साथ रहे, पर तुमने मुझे नोटिस ही नहीं किया..मैं बार-२ तुम्हारी तरफ देख रही थी..पर तुम कहीं और ही खोये हुए थे, तब मुझे लगा था की शायद तुम और लडको की तरह नहीं हो..पर अब लगता है की शायद हो..
मैं :मैं जैसा हूँ, वेसा ही दिखाई देता हूँ…आज और उस दिन में काफी फर्क है, वो पहली बार था जब मैं तुमसे मिला था, और पहले दिन ही किसी लड़की पर बुरा इम्प्रेशन नहीं डालना चाहिए..

स्नेहा (मेरी आँखों में आँखें डालकर) : अच्छा जी…

मैं :हाँ जी.

और हम दोनों हंसने लगे..हँसते-२ उसका हाथ कब मेरे हाथ के ऊपर आ गया, शायद उसे भी पता नहीं चला.

स्नेहा :उस दिन , मम्मी के कॉलेज में, तुम चार घंटे तक मेरे साथ रहे, पर तुमने मुझे नोटिस ही नहीं किया..मैं बार-२ तुम्हारी तरफ देख रही थी..पर तुम कहीं और ही खोये हुए थे, तब मुझे लगा था की शायद तुम और लडको की तरह नहीं हो..पर अब लगता है की शायद हो..
मैं :मैं जैसा हूँ, वेसा ही दिखाई देता हूँ…आज और उस दिन में काफी फर्क है, वो पहली बार था जब मैं तुमसे मिला था, और पहले दिन ही किसी लड़की पर बुरा इम्प्रेशन नहीं डालना चाहिए..

स्नेहा (मेरी आँखों में आँखें डालकर) : अच्छा जी…

मैं :हाँ जी.

और हम दोनों हंसने लगे..हँसते-२ उसका हाथ कब मेरे हाथ के ऊपर आ गया, शायद उसे भी पता नहीं चला.

************

स्नेह : वैसे एक बात बोलू, तुम्हारी वो कजन है न…अंशिका, तुम उसके साथ कुछ ज्यादा ही चिपके रहते हो..कहीं दिल तो नहीं आ गया तुम्हारा अपनी कजन पर…हूँ…

मैं तो एकदम से सकपका गया उसकी बात सुनकर, साली ये लड़कियां कितनी चालू होती है, झट से ताड़ लेती है की कोन किसके साथ कैसे पेश आ रहा है, जरुर इसने मुझे और अंशिका को एक दुसरे के साथ कुछ ख़ास करते देख लिया होगा, तभी ये ऐसा कह रही है..

मैं : ये कैसी बात कर रही हो…तुमने मुझे अभी तक हमेशा उसके ही साथ देखा है शायद इसलिए ऐसा कह रही हो, मैं तो बस उसे अपनी बाईक पर लिफ्ट दे देता हूँ, जब भी उसे मेरी जरुरत होती है…तुम बेकार का सोच रही हो..वो मेरी कजन है, मैं उसके बारे में ऐसा कुछ नहीं सोच सकता..अब अगर तुम्हारी एन्कुयारी ख़त्म हो गयी हो तो थोड़ी सी पढाई कर ले…अपनी मम्मी को क्या बोलोगी की आज क्या पढ़ा मैंने..

मैंने उसका ध्यान बांटने के लिए पढाई की बात कही थी, वर्ना इस खुबसूरत कबूतरी से गुटर गू करने में काफी मजा आ रहा था.

उसने भी बुरा सा मुंह बनाते हुए अन्दर चलने को कहा, जैसे उसे मेरी ये बात बिलकुल भी अच्छी नहीं लगी, वो बेड के ऊपर एक टांग करके बैठ गयी और उसने अपना बेग खोलकर बुक्स निकाल ली और मुझे दिखने लगी..

पर मेरा सारा ध्यान तो उसकी नंगी टांगो पर था , वो अपनी एक टांग को बेड पर लेकर बैठी थी और दूसरी नीचे लटक रही थी, ऊपर वाली टांग की नंगी पिंडलियाँ देखकर मेरा मन कर रहा था की उसे वहीँ से चाटना शुरू कर दूं…और मेरा मन ना जाने क्यों ऐसा कह रहा था की वो भी मुझे नहीं रोकेगी…

पर इन लड़कियों के मन में क्या है ये तो वोही जाने, अगर मेरा अंदाजा गलत हुआ तो लेने के देने पढ़ जायेंगे, पहले इसके दिल की बात जान लू या फिर वो ही अपनी तरफ से पहल करे, तभी सही रहेगा..

मैंने बुक्स को उठाया और इंग्लिश की बुक लेकर उसे पढ़ाना शुरू कर दिया..

अगले आधे घंटे तक मैं पुरे मन से उसे पढाता रहा..मैंने उसे लिखने के लिए एक एक्स्सर्सयीज़ दी, वो नीचे झुक कर लिखने लगी तो उसका गला लटक गया, और मैंने पहली बार उसके अन्दर का नजारा देखा, वहां उसने स्पोर्ट्स ब्रा पहनी हुई थी, जो सफ़ेद रंग की थी, और उसके छोटे-२ चूजे उनमे कैद थे, छोटे होने की वजह से सिर्फ उनकी बनावट ही दिख पा रही थी, कुछ ख़ास तो नहीं था पर मुझे बड़ी उत्तेजना फील हो रही थी..

मेरा ध्यान एकदम से बुक्स के ऊपर से हट गया, स्नेहा ने जब काम करके मुझे दिखाया तो मुझे ये तक पता नहीं चल रहा था की मैंने उसे क्या करने को कहा था…मैं तो बस उसकी छाती को एकटक देखे जा रहा था..मेरा लंड बिलकुल टाईट हो चूका था जिसे एडजस्ट करने में बड़ी मुश्किल हो रही थी..

मेरी हालत देखकर वो भी शायद समझ गयी थी की मेरा ध्यान किधर है, वो मेरी हालत देखकर मंद-मंद मुस्कुराने लगी.

स्नेहा : क्या हुआ विशाल…”सर”…आपका ध्यान किधर है..
मैं : वो…वो..दरअसल…मैं सोच रहा था की थोड़ी देर का ब्रेक लेना चाहिए..

और ये कहकर मैं बाथरूम में चला गया. अपना लंड निकाला, जो स्टील जैसा हुआ खड़ा था, पेशाब की लम्बी धार मारी, और फिर मैंने स्नेहा के बारे में और उसके चूजों के बारे में सोचते हुए मुठ मारना शुरू कर दिया..

मैंने दरवाजे के पीछे लटके कपड़ों में पेंटी देखि, जिसे झट से मैंने उठाया, वो स्नेहा की थी, क्रीम कलर की, जिसपर ब्लेक धारियां थी, मैंने उसे अपने मुंह से लगाकर सुंघा, बड़ी मादक सी महक आ रही थी, और फिर उसे अपने लंड पर लपेटा और फिर से मुठ मारना शुरू कर दिया..अपनी आँखें बंद की और जल्दी ही मेरे लंड से गाड़े रस की फुहारे निकलने लगी..जिसे मैंने उसकी कच्छी में समेट लिया, और फिर कुछ सोचकर मैंने उसे वहीँ कोने में फेंक दिया, वो पूरी तरह से मेरे रस से भीग चुकी थी, और फिर मैं बाहर आया, थोड़ी देर तक उसे पढाया और तभी उसकी माँ आ गयी..

किटी मेम : और विशाल, कैसा रहा पहला दिन , स्नेहा ने तंग तो नहीं किया न…
मैं : अरे नहीं मेम, ये तो मन लगाकर पढाई कर रही थी, बड़ी ही होशियार है ये तो..
किटी मेम : अरे रहने दो, इतनी ही होशियार होती तो टयूशन न लगानी पड़ती इसकी…चलो छोड़ो ..तुम बैठो मैं चेंज करके आती हूँ..

और फिर वो अपने कमरे में चली गयी..मैंने भी उसे थोडा देर और पढाया और वापिस आ गया, स्नेहा ने आते हुए कहा की वो रात को फोन करेगी

मैं वापिस सात बजे पहुंचा, और मैंने अंशिका को फ़ोन किया..

अंशिका :तो टाइम मिल गया जनाब को…कैसा रहा पहला दिन.
मैं : ठीक था, तुम सुनाओ कैसी हो.
अंशिका : मैं तो ठीक हूँ..क्या तुम अभी फ्री हो.
मैं : हाँ…बोलो
अंशिका : दरअसल ,मैं मार्केट जा रही थी, तुम भी वहीँ आ जाओ, साथ में शोपिंग करेंगे.
मैं : कोई ख़ास बात, एकदम से मार्केट जाने की क्या सूझी
अंशिका : यार, मुझे एक जींस लेनी है, बड़े दिनों से सोच रही थी, और आज जब सेलेरी आ गयी है तो मुझसे रहा नहीं जा रहा..
मैं : ठीक है, मैं आधे घंटे में तुम्हे एम् ब्लाक मार्केट में मिलता हूँ.

और फिर मैं बाईक लेकर चल दिया अपनी अंशिका से मिलने. बाईक चलाते हुए मैं सोच रहा था की शाम को स्नेहा और रात को अंशिका, पर दोनों को एक दुसरे के बारे में पता नहीं चलना चाहिए, मतलब एक के साथ रहते हुए दूसरी को पता न चले..ये मुझे देखना होगा.

मैं मार्केट पहुंचा, वो मेरा ही इन्तजार कर रही थी, उसने टी शर्ट और कार्गो पहनी हुई थी, बड़ी स्वीट लग रही थी वो, हम एक दूकान में चले गए, वहां कस्टमर काफी कम थे, अंशिका ने एक दो जींस देखि और उन्हें ट्रायल रूम में लेकर चली गयी..मैं वहीँ खड़ा होकर उसका वेट करने लगा.

तभी अंशिका की आवाज आई : सुनो विशाल, एक मिनट यहाँ आओ..

मैंने सेल्स गर्ल की तरफ देखा, वो मुस्कुरा रही थी, मैं ट्रायल रूम की तरफ गया, पर्दा हटाकर गेलरी सी थी वहां जिसमे दो केबिन बने हुए थे, उसने दरवाजा खोला और अन्दर खड़े होकर चारों तरफ से मुझे अपनी जींस की फिटिंग दिखाने लगी..वो घूमी और पीछे से दिखाया, उसकी बेक बड़ी सोलिड लग रही थी …मैंने आगे बढ़ कर उनपर हाथ रख दिया..वो एकदम से घबरा गयी और बोली :ये क्या कर रहे हो…कोई आ जाएगा..

मैं : कोई नहीं आएगा..

और ये कहते हुए मैं अन्दर घुस गया और दरवाजा बंद कर दिया

वो मेरी आँखों में देखती रही और एकदम से मेरे गले लग गयी.

अंशिका :तुम्हारी यही बातें तो मुझे अच्छी लगती है, तुम दबंग हो एकदम…आई लाईक इट..

मैंने उसे अपनी तरफ किया और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए, मुझे मालुम था की ये जगह इन सबके लिए ठीक नहीं है, बाहर सेल्स गर्ल हमारे निकलने का वेट कर रही होगी..

अंशिका : सुनो…तुम्हे कोई याद कर रहा है..

मैं : कोन ??

अंशिका : ये…

और उसने अपनी टी शर्ट को एकदम से ऊपर उठाया और साथ ही साथ अपनी ब्रा को भी, और उसके दोनों मुम्मे उछल कर बाहर निकल आये…मैं उसकी हिम्मत देखकर दंग रह गया

मैं : दबंग तो तुम हो, तुममे इतनी हिम्मत कैसे आ गयी…ये सब ऐसी जगह करने की..

अंशिका : तुम्हारे साथ रहते हुए ही ऐसा हुआ है…अब देख क्या रहे हो…जल्दी प्यार करो इन्हें…

मुझे कुछ और कहने की जरुरत नहीं थी..मैंने झट से उसके दोनों कबूतर पकडे और उनके गले दबा दिए…मतलब उन्हें मसलने लगा और उसके निप्पल पकड़कर अपने मुंह में डाले और उन्हें चूसने लगा…

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह विशाल……स्स्स्सस्स्स्स मैं मर्र्र जाउंगी…..अह्ह्हह्ह्ह्ह

उसने मेरे लंड पर हाथ रख दिया..मुझे लगा पूरी दुनिया वहीँ रुक गयी है, मैंने अपना सर ऊपर उठाया और उसने अगले ही पल अपने गीले होंठो से मुझे फिर से चूमना और चुसना शुरू कर दिया, वो बड़ी बेकरार सी लग रही थी, मैंने उसके लटकते हुए फलों के ऊपर अपने मुंह से बनाये निशान को देखा वो थोडा हल्का हो गया था, मैंने अपना मुंह वहीँ पर लगाया और फिर से अपने दांतों और जीभ से उस जगह को चुसना शुरू कर दिया…

अह्ह्हह्ह्ह्ह विशाल……म्मम्मम ह्ह्ह्हह्ह दर्द हो रहा है…..धीरे….अह्ह्हह्ह

मुझे लगा की शायद उसकी आवाज बाहर न चली जाए इसलिए मैंने उसे छोड़ दिया, और उसकी छाती पर फिर से वही लाल निशान अपने पुरे शबाब पर चमकने लगा..

उसने मुझे एक बार और किस किया और बोली :चलो अब बाहर, कहीं वो शॉप वाले अन्दर ही न आ जाए…

और उसने मेरे लंड पर एक बार और हाथ फेरा और कहा : इसे फिर कभी देखेंगे….

और फिर मैं जल्दी से बाहर निकल आया, वहां गेलरी में कोई नहीं था, मैं बेकार में निकल आया, पर तब तक अंशिका भी निकली और उसने वहीँ जींस पहने हुए ही सेल्स गर्ल को कहा…आई विल टेक दिस..

सेल्स गर्ल भी हलके से मुस्कुराते हुए उसका बिल बनाने लगी, जैसे उसे मालुम था की हम क्या करके आये हैं अन्दर से..
अंशिका ने अपनी कार्गो पेक करवाई और हम बाहर निकल आये.

रास्ते में वो मुझसे चिपक कर बैठी रही और अपनी गोलाइयों से मेरी पीठ की मालिश करती रही.

मैंने उसके घर के पास उसे छोड़ा और वापिस चला आया.

घर पहुँचते ही मेरा मोबाइल बजने लगा, मैं जानता था की अंशिका ने मुझसे स्टोर में हुई घटना के बारे में बात करने के लिए फोन किया है..पर ये तो स्नेहा का था..

मैंने फोन उठाया.

स्नेहा : हाय…क्या कर रहे हो.
मैं : बस तुम्हारे ही फोन का इन्तजार कर रहा था.
स्नेहा : अच्छा जी..मेरे फोन का इन्तजार कर रहे थे तो तुम ही फोन कर लेते..

मैं चुप रहा.

स्नेहा : वैसे मैंने तुमसे शिकायत करने के लिए फोन किया है ..पता है तुम्हारी वजह से मेरा काम बढ़ गया आज..

मैं : मेरी वजह से…कैसे ?

स्नेहा : वो तुमने बाथरूम में मेरी….पेंटी के साथ….क्या किया..बोलो..मुझे कितना टाइम लगा दुसे धोने में…पता है..

मैं कुछ ना बोल पाया, मुझे लगा था की शायद वो शर्म के मारे मुझे कुछ नहीं बोल पाएगी…पर शायद ये उसका बचपना था की वो मुझसे अपनी पेंटी की हालत के बारे में बात कर रही थी…या फिर वो जरुरत से ज्यादा चालू थी…मुझे इसका पता लगाना ही था.

घर पहुँचते ही मेरा मोबाइल बजने लगा, मैं जानता था की अंशिका ने मुझसे स्टोर में हुई घटना के बारे में बात करने के लिए फोन किया है..पर ये तो स्नेहा का था..

मैंने फोन उठाया.

स्नेहा : हाय…क्या कर रहे हो.
मैं : बस तुम्हारे ही फोन का इन्तजार कर रहा था.
स्नेहा : अच्छा जी..मेरे फोन का इन्तजार कर रहे थे तो तुम ही फोन कर लेते..

मैं चुप रहा.

स्नेहा : वैसे मैंने तुमसे शिकायत करने के लिए फोन किया है ..पता है तुम्हारी वजह से मेरा काम बढ़ गया आज..

मैं : मेरी वजह से…कैसे ?

स्नेहा : वो तुमने बाथरूम में मेरी….पेंटी के साथ….क्या किया..बोलो..मुझे कितना टाइम लगा उसे धोने में…पता है..

मैं कुछ ना बोल पाया, मुझे लगा था की शायद वो शर्म के मारे मुझे कुछ नहीं बोल पाएगी…पर शायद ये उसका बचपना था की वो मुझसे अपनी पेंटी की हालत के बारे में बात कर रही थी…या फिर वो जरुरत से ज्यादा चालू थी…मुझे इसका पता लगाना ही था.

*******
अब आगे :
*******

मैंने अनजान बनने का नाटक किया

मैं : तुम क्या कह रही हो, मुझे कुछ नहीं मालुम…

स्नेहा : अच्छा जी..मैं सब जानती हूँ , तुम मेरे मुंह से साफ़ -२ सुनना चाहते हो, इसलिए ये सब कह रहे हो..

मैं : तो ठीक है न..साफ़ साफ़ बोलो, बात को क्यों घुमा रही हो.

स्नेहा (थोड़ी देर तक चुप रही, फिर धीमी आवाज में बोली): तुमने मेरी पेंटी के साथ मास्टरबेट किया था न..?

मैं : हाँ…

स्नेहा : मैं पूछ सकती हूँ क्यों ?

मैं : सच बोलू या झूठ.

स्नेहा : सच बोलो..
उसने तीखी आवाज में कहा..

मैं : तो सुनो, मैंने जब से तुम्हे देखा है,मुझे अजीब सा एहसास होता है, सच कहूँ तो तुम मुझे काफी सेक्सी लगती हो, और अब जब मैं तुम्हारे इतने पास हूँ, जहाँ से तुम्हारे जिस्म की खुशबू और तुम्हारा सुन्दर सा चेहरा और तुम्हारी बॉडी खासकर तुम्हारे बूब्स जो मुझे बड़े क्यूट से लगे, जब तुम नीचे झुक कर मुझे पानी दे रही थी..और मैं जब तक तुम्हारे पास रहा, मैं वही सोचता रहा..और जब मुझसे कण्ट्रोल नहीं हुआ तो मैंने बाथरूम में जाकर मास्टरबेट करने की सोची और जब मैं कर रहा था तो मुझे तुम्हारी पेंटी नजर आई , मैं और भी ज्यादा एक्स्कायटिड हो गया और मैंने उसे अपने पेनिस पर लपेट कर मास्टरबेट किया.

मैंने उसे साफ़ साफ़ बोल दिया, यही एक तरीका था उसके मन की बात जानने का, मैं जानता था की वो ये सब किसी और से नहीं कहेगी, क्योंकि मेरे पास भी उसका एक राज (छत्त पर अंकित को किस्स करने वाला) था.

स्नेहा कुछ न बोली, पर मुझे उसकी तेज साँसों की आवाज साफ़ सुने दे रही थी फोन पर..

मैं समझ गया की मेरे मुंह से मुठ मारने की बात सुनकर और शायद पेनिस वर्ड सुनकर उसकी चूत में से भी पानी निकलने लगा होगा..

उसके जिस्म में जो आग सुलग रही थी मुझे वो और भड्कानी होगी..

मैं : और जानती हो, मैंने तो तुम्हारी पेंटी को अपने मुंह पर रगडा और उसे चूमा भी था…

ऊऊ ह्म्म्मम्म ….. दूसरी तरफ से उसके मोन की आवाज आई..

मैं : उसमे से अजीब तरह की स्मेल आ रही थी, पर मुझे वो बहुत अच्छी लगी, मैंने अपनी जीभ से तुम्हारी पेंटी के अन्दर वाला हिस्सा चाटा तो मुझसे रहा नहीं गया, मैंने उसे अपने लंड पर लपेटा और तुम्हारी चूत और ब्रेस्ट को इमेजिन करके मैंने मुठ मारनी शरू कर दी…

स्नेहा : ……. ओह्ह्ह्हह्ह विशाल्ल्ल…….

अब उसकी नशे में डूबी आवाजें निकलने लगी थी..शायद वो फिंगरिंग कर रही थी, मुझसे बात करते हुए..

मैं : मेरी आँखों के सामने तुम्हारा क्यूट सा चेहरा था और उतने ही क्यूट तुम्हारे बूब्स भी हैं, जिन्हें मैं आँखें बंद करे चूस रहा था, तुम मेरा सर अपने बूब्स पर दबा रही थी…बस यही सोचकर मैं तुम्हारी पेंटी को अपने लंड पर लपेट कर मुठ मार रहा था …और फिर मेरे लंड से निकला सारा रस मैंने तुम्हारी पेंटी में छोड़ दिया…मैंने सोचा की शायद तुम्हे अच्छा लगे…पर तुम तो नाराज हो रही हो…”

दूसरी तरफ से आवाज आनी बंद हो गयी थी..मैंने दो तीन बार हेलो हेलो किया…पर फोन कट चूका था.

अब उसकी नशे में डूबी आवाजें निकलने लगी थी..शायद वो फिंगरिंग कर रही थी, मुझसे बात करते हुए..

मैं : मेरी आँखों के सामने तुम्हारा क्यूट सा चेहरा था और उतने ही क्यूट तुम्हारे बूब्स भी हैं, जिन्हें मैं आँखें बंद करे चूस रहा था, तुम मेरा सर अपने बूब्स पर दबा रही थी…बस यही सोचकर मैं तुम्हारी पेंटी को अपने लंड पर लपेट कर मुठ मार रहा था …और फिर मेरे लंड से निकला सारा रस मैंने तुम्हारी पेंटी में छोड़ दिया…मैंने सोचा की शायद तुम्हे अच्छा लगे…पर तुम तो नाराज हो रही हो…”

दूसरी तरफ से आवाज आनी बंद हो गयी थी..मैंने दो तीन बार हेलो हेलो किया…पर फोन कट चूका था.

******
अब आगे
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मैं सोच रहा था की उसकी क्या हालत हो रही होगी, ये तो पक्की बात थी की वो अपनी चूत में उँगलियाँ डाल कर मास्टरबेट कर रही होगी अभी..काश मैं भी उसके पास होता, मैं भी देख सकता उसे..

यही सोचते हुए मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया, अब अंशिका के रोकने पर मैं कब तक रुकूँ..उसकी चूत पता नहीं कब मिले या वो अगली बार पता नहीं कब और कहाँ मिलेगी, और अब इन दोनों यानी स्नेहा और अंशिका के चक्कर में मेरा लंड दिन में दस बार खड़ा होता है,इसकी हवा तो निकालनी ही पड़ेगी ना…

मैंने लंड निकला और पास ही पड़ी क्रीम को उसपर लगाया और मुठ मारने लगा, क्रीम की चिकनाई की वजह से मुझे तो ऐसा लग रहा था की मेरा लंड अंशिका के मुंह में है…पर अभी तो मैं स्नेहा के नाम की मुठ मार रहा था, इसलिए मैंने उसे अपने दिमाग से निकाला और आँखे बंद करके स्नेहा को सोचने लगा, की वो मेरे सामने बैठी है और उसने अपना मुंह खोलकर मेरा लंड अपने मुंह में भर लिया है…और तेजी से उसे निगलते हुए, मेरी आँखों में देखकर, उसे चूस रही है…मेरा निकलने वाला था, मैंने उसे कहा…स्नेहा …मैं आया…और ये सुनकर वो और तेजी से उसे चूसने लगी….

तभी मेरे फोन की घंटी बज उठी..अब की बार अंशिका का फोन था..पर मैं झड़ने के काफी करीब था, फिर भी मैंने फोन उठाया और अपने लंड को आगे पीछे करते हुए, स्नेहा को याद करते हुए, मुठ मारना जारी रखा

मैं : हेल्लो….स्नेहा ..बोलो..
अंशिका : स्नेहा ?????? अरे मैं अंशिका हूँ…

ओ तेरी माँ की…साली गड़बड़ हो ही गयी….मुठ मारने के चक्कर में , मैंने फोन उठा कर अंशिका को स्नेहा बोल दिया…अब तो तू गया विशाल…और तभी मेरे लंड ने पिचकारियाँ मारनी शुरू कर दी…

मैं : अह्ह्हह्ह ….अह्ह्ह्ह….

अंशिका : क्या कर रहे हो…..विशाल….मैं तुम से पूछ रही हूँ….क्या कर रहे हो….और ये स्नेहा का क्या चक्कर है….तुम उसे पड़ाने जाते हो …और उससे फोन पर भी बात करते हो…मेरी तरह…है न…तुम कहीं उसके चक्कर में तो नहीं हो…बोलो विशाल….मैं कुछ पूछ रही हूँ..

मेरे लंड से पिचकारियाँ निकलती जा रही थी और दूसरी तरफ से अंशिका के मुंह से आग…उसकी हालत मैं समझ सकता था..मुझे जल्दी ही कुछ करना होगा…

मैं : अरे अंशिका…तुम भी न…मैंने ही स्नेहा को बोला था की वो मुझे फोन करे, आज मैं जब उसे पड़ा रहा था तो एक कुएस्चन पर अटक गए थे…और उसके सब्जेक्ट की एक गाईड मेरे पास भी है, मैंने उसे कहा था की शाम को फोन करके मुझसे उसका जवाब पूछ लेना….बस मैंने सोचा की उसी का फोन है..

अंशिका : पर तुमने बिना देखे फोन कैसे उठा लिया…तुम क्या कर रहे थे…और कैसी आवाजें निकाल रहे थे…तुम मास्टरबेट कर रहे थे न… बोलो ?

मैं : सच कहूँ …हाँ…मैं आज तुमसे दोपहर को बात नहीं कर पाया, इसलिए मैं तुम्हारे बारे में सोचकर मुठ मार रहा था, मेरी आँखें बंद थी, इसलिए मैं फोन किसका है , ये भी नहीं देख पाया, मुझे लगा, स्नेहा ही होगी, क्योंकि इस समय तुम तो फोन करती नहीं हो..और तुम मुझपर शक करना छोड़ दो, मेरा और स्नेहा का कोई चक्कर नहीं चल रहा है…तुम बेकार में सोचती रहती हो..मैंने कहा था न की पहले तुम, फिर कोई और.

अन्शिअक : हाँ हाँ ठीक है..पर जब तुमने उसका नाम लिया तो मुझे बड़ा बुरा लगा..और ये टयूशन की बातें वहीँ छोड़ कर आया करो…कोई जरुरत नहीं है फ़ोन वोन करने की एक दुसरे को…वैसे भी वो काफी छोटी है तुमसे.समझे.

मैं : हाँ मेडम…समझ गया…कुछ और..

अंशिका (हँसते हुए) नहीं जी..कुछ नहीं..

मैं :तुम्हारा दिन कैसा रहा आज ?

अंशिका :ठीक था..फॅमिली डे आने वाला है, उसी के लिए मुझे सब सँभालने के लिए दिया है…पता है, मेरा डीन मुझे कहता है की मैं इस तरह के फंक्शन ज्यादा अच्छी तरह से मेनेज कर कर सकती हूँ…जैसे मैंने पहले किया था.

मैं :वो तो है…चलो अच्छा है, तुम्हारी कदर बढेगी तभी तो तुम्हारी सेलेरी भी बढेगी.

अंशिका : हाँ सही कह रहे हो…

मैं : अच्छा , मैं तुम्हे एक बात बताना तो भूल ही गया, वो मेरी सुबह वाली टयूशन अब नहीं होगी, वो लोग कहीं और शिफ्ट कर रहे हैं, जो काफी दूर है, मैं वहां नहीं जा पाउँगा उन्हें पढाने, पर तुम फिकर मत करो, मैं तुम्हे रोज छोड़ने आ जाया करूँगा.

ये सब तो करना ही था…आप समझ ही सकते हैं.

अंशिका : नहीं , सिर्फ मेरी वजह से इतनी सुबह उठने की कोई जरुरत नहीं है, मैंने तो सिर्फ इसलिए की तुम वहीँ जाते हो, तुम्हारे साथ जाना शुरू किया था, पर अब अगर तुम ही नहीं जा रहे तो मैं पहले की तरह मेनेज कर लुंगी..और रही बात मिलने की तो उसके बारे में भी सोचते हैं..

मैं (खुश होते हुए) : अच्छा, कब मिल रही हो फिर..तुम्हारी चूत मारने का बड़ा मन कर रहा है..

अंशिका : अभी मास्टरबेट किया , उसके बावजूद भी..?

मैं : तुम अगर मेरे सामने आ जाओ न, फिर देखना, एक घंटे में तीन बार तो चोद ही दूंगा तुम्हे..

अंशिका :वो तो जब होगा, तब देखेंगे..अच्छा सुनो, मेरी बहन कनिष्का आ रही है कल,उसके 12th तो पूरी हो ही चुकी है, अब वो यही कॉलेज में पड़ेगी..

मैं : तुम्हारे कॉलेज में ?

अंशिका : नहीं, वो नहीं चाहती मेरे कॉलेज में आना, मैंने भी उसे जोर नहीं दिया..उसका एडमिशन जीसस एंड मेरी कॉलेज में हुआ है..

मैं : अब तो तुम मुझसे रात को बात भी नहीं कर पाया करोगी..

अंशिका :नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है…वो मेरी प्रायवेसी का पूरा ध्यान रखती है, और मैं किस से बात कर रही हूँ, कभी नहीं पूछती..

मैं : फिर तो मैं भी अगर तुम्हारे कमरे में आ गया तो तुम्हे उसके सामने चूम भी सकता हूँ और चोद भी…वो कुछ नहीं कहेगी ना..

अंशिका : ऐसा भी नहीं है…वो इतनी नासमझ भी नहीं है.

मैं : ओहो…यानी ये जवानी के खेल वो भी समझती है.

अंशिका (थोडा गुस्से में) : मैंने तुमसे कहा था न की उसके बारे में मैं इस तरह की बातें नहीं सुनना चाहती..

मैं : ओह्ह..सॉरी..मैं तो बस ऐसे ही.मैं तो बस ये कह रहा था की अब रहा नहीं जाता, जल्दी ही कुछ करो, वर्ना मैं किसी दिन, सबके सामने ही तुम्हे चोदना शुरू कर दूंगा.

अंशिका : ठीक है…चोद लेना.

मैं (हैरानी से) : मतलब, तुम्हे कोई फर्क नहीं पड़ता.

अंशिका : जब से तुमसे मिली हूँ, मेरे दिल से इस तरह का डर ख़त्म सा हो गया है, और सच कहूँ तो अब मुझे बड़ी एक्साय्मेंट होती है, तुम्हारे साथ उस दिन पार्क में, फिर मेरे कमरे में, रात को उस दिन बिजली घर में और फिर आज चेंजिंग रूम में.. जहाँ कभी भी कोई भी आ सकता था, मैंने खुल कर चूमा चाटी, सकिंग और ना जाने क्या क्या कर दिया..ये सब करने में जो रोमांच मिलता है, वो मैं तुम्हे बता नहीं सकती…इसलिए तो कह रही हूँ, ऐसे पब्लिक प्लेस में या जहाँ किसी के आने का डर हो, वहां करने में जो मजा है, वो बंद कमरे में कहाँ..

मैं : समझ गया…तुमपर अब सेक्स का भूत चढ़ गया है…और वो भूत तुम्हे पब्लिक प्लेस में अपना जलवा दिखाने को कहता है…है न..

अंशिका (हँसते हुए) हाँ…ऐसा ही समझ लो.

मैं :तो ठीक है, कल ही तुम्हे एक ऐसी जगह ले जाता हूँ, जहाँ जाकर प्यार करने में तुम्हे मजा आएगा..

अंशिका : कोन सी जगह ?

मैं :वो तो मैं कल ही बताऊंगा..तुम घर पर बोल देना की तुम लेट आओगी..मैं तुम्हे कॉलेज से पिक कर लूँगा..

अंशिका : देखो…कोई मुसीबत ना आ जाए, मेरा मतलब वो भी नहीं था…जैसा तुम समझे….

मैं : अब तो मैंने सोच लिया है…तुम्हे उस जगह लेकर ही जाऊंगा..कोई अगर मगर नहीं..समझी.

अंशिका : ठीक है…तुम दो बजे आ जाना कॉलेज.वहीँ से चलेंगे..

मैं :ठीक है..अब एक पप्पी तो दे दो..

अंशिका (इठलाते हुए) : कल ही दे दूंगी…जहाँ कहोगे..

मैं : वो तो मैं ले ही लूँगा..पर अभी के लिए तो कुछ करो..मेरे लंड पर एक किस करो ना..

अंशिका : आज मैं तुम्हे लंड पर नहीं, उसके नीचे वाली जगह यानी तुम्हारी बाल्स पर किस दूंगी..ऊऊउम्म्म्माअ …और उसपर किस …कल ही मिलेगी..हे हे…

मैं : ठीक है…हंस लो…कल देख लूँगा.

अंशिका : देख लेना..जो चाहे..जैसे चाहे.

साली बड़ी दिलदार बन रही है…कल बताऊंगा इसे तो.

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