फ़ोन सेक्स – मोबाइल फ़ोन सेक्स part 6

अंशिका : कैसा लगा
मैं : क्या
अंशिका : मेरा जूस और क्या…कैसा लगा
मैं :टेस्टी है, खट्टा मीठा सा, तुम्हारी तरह
अंशिका : मैं खट्टी मीठी हूँ, कैसे
मैं :कब मना कर दो, कब मान लो, तुम्हारा पता नहीं चलता, तुम्हारा जूस भी तुमपर गया है
अंशिका : हेहे ..
मैं : तुम भी चखोगी..अपना जूस
अंशिका : मैंने चखा है, मुझे मालुम है मेरे जूस का स्वाद कैसा है
मैं : तो तुम्हे मेरा जूस ज्यादा अच्छा लगा या अपना
अंशिका :तुम्हारा.
मैं : और मुझे तुम्हारा..
ये कहते हुए मैंने उसकी पेंटी को नीचे की तरफ खिसका दिया..

उसकी चूत पर बालों की हलकी सी परत थी, चूत पूरी फूली हुई और बीच से रस की धरा ऐसे बह रही थी मानो गर्म पानी का झरना हो, जो उसकी चूत के बीच से होता हुआ नीचे की और जा रहा था..मैं तो एकटक उसे देखता ही रह गया

तभी नीचे से उसकी मम्मी की आवाज आई “अन्नू….ओ अन्नू….तेरे मोबाइल पर फ़ोन आ रहा है…नीचे आ..”

धत्त तेरे की, साला जब खजाना खुला तो पुलिस आ गयी, मैं तो उसे सही तरह से देख भी नहीं पाया था.

अंशिका ने जल्दी से अपनी पेंटी ऊपर की और नाईटी को ठीक करके, अपने मुम्मे अन्दर ठूंस के, नीचे की और भागी, मैं भी बाहर जाकर उसके ऊपर आने का वेट करने लगा, उसने थोड़ी देर फ़ोन पर बात की और फिर उसकी मम्मी ने उससे पुचा “और कितनी देर लगेगी तुम्हे, वो कब तक रहेगा ऊपर..” उसकी माँ को अपनी जवान बेटी की फ़िक्र हो रही थी, पर वो ये नहीं जानती थी की उसकी जवान बेटी की चूत को अभी पुरे मजे नहीं मिले हैं

अंशिका : बस हो गया मम्मी, दस मिनट में चला जाएगा.

और ये कहकर वो ऊपर आ गयी.

ऊपर आते ही मैंने उसे पकड़ा और गले से लगा लिया. उसकी आँखों में गुलाबी डोरे तेर रहे थे, वो मुझसे चिपक सी गयी और

बोली : आज के लिए इतना ही, फिर कभी करेंगे बाकी..

मैं : ठीक है जान, जैसा तुम कहो, मैं समझता हूँ, तुम्हारी सिचुएशन
अंशिका : मुझे तो विशवास ही नहीं हो रहा है, तुम मेरी चूत देखने के बाद भी ऐसी बात कह रहे हो, बड़ा कण्ट्रोल है तुम्हे अपने ऊपर
मैं : ये कंट्रोल हर बार नहीं रहेगा..सिर्फ आज छोड़ रहा हूँ, अगली बार नहीं छोड़उंगा
अंशिका (हँसते हुए) : तब की तब देखि जायेगी. पर एक बात कहूँ, आज मैं कुछ भी कर सकती थी, पर तुमने जो समझदारी दिखाई है, उसके लिए थेंक्स.
मैं : अरे थेंक्स कैसा, मैं तुम्हारी फ़िक्र नहीं करूँगा तो और कोन करेगा, और अगर आज मैं अपनी मन मर्जी करके कुछ और देर रुका तो तुम्हारी मम्मी को शक हो जाएगा और मैं नहीं चाहता की तुम्हारे घर पर मेरा आना आगे के लिए रुक जाए.
अंशिका : थेंक्स फॉर अंडरस्टेंडिंग माय सिचुएशन
मैं :यु आर वेल्कम
अंशिका :चलो अब जल्दी से नीचे चलो, मैं तुम्हे चाय पिलाती हूँ फिर तुम जाना
मैं :ठीक है, पर पहले एक पारी तो दे दो जाने से पहले.

और वो हंसती हुई मेरे सीने से लग गयी और मैंने उसके गुलाबी होंठ चूसने शुरू कर दिए.मेरे हाथ अपने आप ही उसके उभारों पर जा चिपके, लगभग पांच मिनट तक हमने एक दुसरे को चूसा और फिर हम अलग हुए. नीचे आकर मैं डायनिंग टेबल पर बैठ गया और वो चाय बना कर लायी, उसकी मम्मी भी बाहर आई और हमने एक साथ चाय पी और फिर मैं उन दोनों को बाय बोल कर चल दिया.

घर पहुंचकर मैं सीधा अपने कमरे में गया और सो गया, शाम को उठा तो उसके 2 मेसेज आये हुए थे.

1 : “फ्री हो क्या”
2 : “कैन वी टॉक ”

मैंने उसे जल्दी से फ़ोन किया

अंशिका :हाय…कहाँ थे, मैं कितनी देर से तुम्हारे फ़ोन का इन्तजार कर रही थी
मैं : मैं आकर सो गया था, सुबह जल्दी उठा था न इसलिए, सॉरी..
अंशिका :कोई बात नहीं, मैं तो बस ऐसे ही..
मैं :किसका फ़ोन आया था उस समय, जिसने मेरी के एल पी डी पर दी थी..
अंशिका : के एल पी डी ? ये क्या होता है
मैं :मतलब, खड़े लंड पर धोखा ..
अंशिका : हे हे….क्या बात है, कहाँ से सीखा ये सब.
मैं : ये सब तो बचपन की बातें हैं, अब तो कुछ नया सिखने का मन है
अंशिका :अच्छा जी, क्या सीखना चाहते हो.
मैं :फकिंग…चुदाई…करना सीखना चाहता हूँ..
अंशिका (हँसते हुए ) : तुम्हे क्या सिखने की जरुरत है, तुम तो सब जानते हो.
मैं :मैंने तुम्हे बताया था न की मैं वर्जिन हूँ..इस मामले में तो तुम मेरी उस्ताद हो, जो एक बार तो फकिंग कर ही चुकी हो..
अंशिका (गंभीर होते हुए) : तुम मुझे ताना दे रहे हो…जो भी था, मैंने तुम्हे सच सच बता दिया था..
मैं :अरे स्वीटी, तुम सीरिअस क्यों हो गयी, मैं तो बस ये कह रहा था की तुम मुझे सिखाओ की फकिंग कैसे की जाती है, मेम. बी माय टीचर
अंशिका :देखेंगे…

मैं समझ गया की उसे मेरा ये कहना बुरा लगा है, इसलिए मैंने फिर से बात बदली और उससे पूछा

मैं :तुमने ये तो बताया नहीं की किसका फ़ोन था.
अंशिका : वो किटी मेम का था, उनकी बेटी का बर्थडे है सन्डे को, बुलाया है मुझे अपने घर पर.

किटी मेम और उसकी बेटी के बारे में सुनते ही मेरा लंड टन से ऊपर उठ गया, मैंने उससे पुचा : क्या मैं भी चल सकता हूँ वहां

अंशिका : तुम, तुम क्या करोगे वहां
मैं :वोही, तुम्हे घर से वहां और वहां से घर तक ड्रॉप कर दूंगा, और बीच में बर्थडे पार्टी अटेंड कर लूँगा.
अंशिका :पता नहीं, मैं एक बार किटी मेम से पुचुगी , फिर तुम्हे बताती हूँ.
मैं : ठीक है, एक और बात बताऊँ तुम्हे
अंशिका : क्या ?
मैं :तुम्हारी चूत सच में बड़ी मस्त है..
अंशिका (इठलाते हुए) : अच्छा, तुम्हे पसंद आई.
मैं : हाँ, खाने को या मारने को भी मिल जाती तो मजा आ जाता , पर वो तुम्हारे किटी मेम के फ़ोन ने सब गड़बड़ कर दिया.
अंशिका : थेंक्स…पर मुझे काफी अच्छा लगा की तुमने मेरी बात मानकर आज कुछ ज्यादा नहीं किया.

अब उस चुतिया की पट्ठी को कोन समझाए की मैंने वो किस वजह से किया था, वर्ना आज तो चाहे उसकी माँ ऊपर ही आ जाती, मैं उसकी चूत मारकर ही रहता.

अंशिका : मुझे समय नहीं मिल पाया था कुछ दिनों से, वर्ना मैं हमेशा वहां की शेव करके रखती हूँ.
मैं :वाव…क्लीन शेव …मुझे भी चूसने में बड़ा मजा आएगा, बिना बालों वाली चूत को…
अंशिका : अब बस करो, तुम ऐसी बातें करते हो तो मुझे कुछ होता है..
मैं : क्या होता है ?
अंशिका : जैसे तुम कुछ समझते नहीं हो..बड़े गंदे हो तुम,ऐसी बातें करते हो की…आई एम् फीलिंग वेट डाउन देयर..
मैं :वाव..कहो तो आ जाऊ वापिस वहां..मुझे भी बड़ी प्यास लगी हुई है.

अंशिका कुछ ना बोली, उसकी साँसे तेजी से चल रही थी, मैं जानता था की वो अपनी चूत को मसल रही होगी इस समय.

मैं :डार्लिंग..पिलाओगी न तुम मुझे अपनी चूत का रस…बोलो…बोलो न प्लीस…
अंशिका (गहरी साँसे लेते हुए)..ओह्ह्ह्ह विशाल….तुम कितने गंदे हो…मेरी हालत कितनी खराब है इस समय…तुम यहाँ होते तो पता चलता..
मैं : तुम कहाँ हो इस समय
अंशिका :अपने बेड पर लेटी हूँ…. और मैंने अपना हाथ वहां….डाला हुआ है..
मैं :कहाँ…कहाँ डाला हुआ है
अंशिका : अपनी…च..चू…चूत में…

मेरा अंदाजा सही था, एक तो बेचारी झड़ी नहीं थी उस समय और ऊपर से मैंने उसकी चूत को देखकर आगे कुछ नहीं किया था..

मैं : अपने दोनों मुम्मो को भी बाहर निकालो और उनपर मेरी तरफ से एक एक पप्पी दो.

उसके कपड़ो की आवाजें आई और फिर दो लम्बी सी किस की आवाजें…पुच…पुच…

अंशिका : काश तुम अभी यहाँ होते विशाल….मेरी हालत बड़ी खराब है इस समय…
मैं : तुम अपनी उँगलियों को मेरे होंठ समझो और उन्हें अपनी चूत के ऊपर रगडो…मैं वहां का सारा रस पी जाना चाहता हूँ, तुम्हारा खट्टा मीठा रस, जो तुम्हारी चूत के अंदर से निकल रहा है, और बेड के ऊपर गिर रहा है, मैं वो सारा रस पीकर अपनी प्यार बुझाना चाहता हूँ…क्या तुम पिलाओगी मुझे अपना रस….बोलो…बोलो न….

पर दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आई, मेरी बातें सुनकर उसने अपनी चूत पर तेजी से अपनी उँगलियाँ घिसनी शुरू कर दी और जल्दी ही उसके अंदर से ढेर सारा पानी बाहर आने लगा..वो गहरी साँसे लेति हुई बडबडा रही थी…ओह्ह्ह विशाल….मम्म ओ माय डार्लिंग…..

फिर फ़ोन कट हो गया.
मैं समझ गया की वहां उसके बेड पर जो गीलापन बरसा होगा, वो अब उसे साफ़ करने में लगी होगी. रात ने 9 बज चुके थे, मैंने खाना खाया और वापिस आकर एक घंटा कंप्यूटर पर बैठा, कुछ पोर्न साईट देखि और फिर सो गया.

उस रात उसका और कोई फ़ोन नहीं आया.

अंशिका : काश तुम अभी यहाँ होते विशाल….मेरी हालत बड़ी खराब है इस समय…
मैं : तुम अपनी उँगलियों को मेरे होंठ समझो और उन्हें अपनी चूत के ऊपर रगडो…मैं वहां का सारा रस पी जाना चाहता हूँ, तुम्हारा खट्टा मीठा रस, जो तुम्हारी चूत के अंदर से निकल रहा है, और बेड के ऊपर गिर रहा है, मैं वो सारा रस पीकर अपनी प्यार बुझाना चाहता हूँ…क्या तुम पिलाओगी मुझे अपना रस….बोलो…बोलो न….

पर दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आई, मेरी बातें सुनकर उसने अपनी चूत पर तेजी से अपनी उँगलियाँ घिसनी शुरू कर दी और जल्दी ही उसके अंदर से ढेर सारा पानी बाहर आने लगा..वो गहरी साँसे लेति हुई बडबडा रही थी…ओह्ह्ह विशाल….मम्म ओ माय डार्लिंग…..

फिर फ़ोन कट हो गया.
मैं समझ गया की वहां उसके बेड पर जो गीलापन बरसा होगा, वो अब उसे साफ़ करने में लगी होगी. रात ने 9 बज चुके थे, मैंने खाना खाया और वापिस आकर एक घंटा कंप्यूटर पर बैठा, कुछ पोर्न साईट देखि और फिर सो गया.

उस रात उसका और कोई फ़ोन नहीं आया.

*****

सुबह 6 बजे मेरा फ़ोन बजा, इतनी सुबह कोन परेशान कर रहा है, मैंने फ़ोन उठाया तो अंशिका का था, मैं हैरान था क्योंकि उसने इतनी सुबह कभी फ़ोन नहीं किया था.

मैं : हेल्लो…गुड मोर्निंग
अंशिका : (हँसते हुए) गुड मोर्निंग मेरी जान, उठ गए
मैं : तुम्हारे फ़ोन ने उठाया है, वर्ना तुम जानती हो की मैं किस समय उठता हूँ.
अंशिका : हाँ…मुझे मालुम है..पर क्या करूँ , तुम्हारी याद ही ऐसे टाइम पर आई की मैंने सोचा फ़ोन कर ही लेना चाहिए
मैं : क्यों …ऐसा क्या हुआ सुबह-२, की मेरी याद आ गयी
अंशिका : मैं बाथरूम में हूँ, और नहा रही हूँ…और मैंने सोचा की मैं नीचे की शेव कर लूं..तुम्हे पसंद है न…क्लीन शेव..

मेरा तो लंड खड़ा हो गया उसकी बात सुनकर…साली कितना तडपाती है, इस तरह की बाते सुनाकर..

मैं :वाव…मतलब तुम अपनी चूत के बाल साफ़ कर रही हो….
अंशिका (शरारती हंसी में) : हाँ बाबा हाँ…सिर्फ तुम्हारे लिए.
मैं : काश मैं भी वहां होता…अच्छा सुनो क्या पहना हुआ है तुमने इस समय..
अंशिका (हलके गुस्से में) :क्या पहना है का क्या मतलब…अभी बोला न, नहा रही हूँ, तो क्या कुछ पहनकर नहाउंगी.
मैं :ओ तेरी…मतलब पूरी नंगी हो..

अंशिका कुछ न बोली

मैं :अच्छा तो काट लिए क्या…तुमने अपनी चूत के बाल
अंशिका : नहीं, पहले ट्रिमिंग करी और अब हेयर रेमोविंग क्रीम लगायी है वहां…पांच मिनट बाद अपने आप साफ़ हो जायेंगे.
मैं :म्मम्मम मेरे तो मुंह में पानी आ रहा है तुम्हारी चिकनी चूत के बारे में सोचकर
अंशिका :ज्यादा पानी लाने की जरुरत नहीं है, तुम अपने घर हो और मैं अपने, कुछ होने वाला तो है नहीं..
मैं :तो फिर फ़ोन क्यों किया, मेरी सुलगाने के लिए क्या?
अंशिका : अरे तुम तो बुरा मान गए..मैंने सोचा तुम्हे अच्छा लगेगा ये जानकार..इसलिए किया इतनी सुबह फ़ोन, जानते हो, जब मैंने क्रीम लगा ली तो मैंने सोचा की तुम्हे फ़ोन करा जाए, और मैं बिना कपड़ो के बाहर गयी अपने कमरे में और फ़ोन उठा कर वापिस आई.
मैं : अच्छा, बड़ा बहादुरी का काम किया है तुमने तो..
अंशिका :अच्छा चलो, अब मैं रखती हूँ, पांच मिनट हो चुके हैं, मुझे नहाना भी है और कॉलेज भी जाना है, तुम सो जाओ.
मैं :नहीं..पहले नीचे साफ़ करो और मुझे बताओ की कैसी लग रही है तुम्हारी चूत इस समय.
अंशिका : तुम सुबह -२ अपनी जिद करनी शुरू कर देते हो..रुको, अभी बताती हूँ.

थोड़ी देर तक सिर्फ पानी की आवाज आई और उसके बाद अंशिका की

अंशिका :हाँ हो गयी, एकदम साफ़, अब कोई भी बाल नहीं है, लाल हो रही है अभी तो, क्रीम लगाने की वजह से.
मैं :यानी मेरे चूसने के लिए बिलकुल तैयार है तुम्हारी चूत, कब आऊ मैं.
अंशिका :ज्यादा उड़ने की जरुरत नहीं है. जब मौका मिलेगा तब देखेंगे. अब मैं रखु क्या
मैं : नहीं, अब तुमने सुबह-२ मेरा लंड खड़ा कर दिया है, मुझे मास्टरबेट करना होगा और तुम भी करो मेरे साथ
अंशिका :क्या….इतनी सुबह, मुझे कॉलेज में जाने में देर हो जायेगी.
मैं :तुम उसकी फिकर मत करो, अब तुमने मुझे उठा ही दिया है तो मैं ही तुम्हे कॉलेज छोड़ आऊंगा, बाईक पर, जितनी देर में तुम तैयार होगी, मैं वहां आ जाऊंगा.
अंशिका :तुम न…अच्छा बोलो, क्या करूँ मैं..
मैं :एक मिनट, मैं अपने लंड को तो बाहर निकाल लूँ..हाँ…अब मेरे लंड पर एक किस्स करो..
अंशिका :लो..पुच..
मैं :गुस्से में नहीं मेरी जान…प्यार से..
अंशिका : ओके बाबा…पुच पुच..अब ठीक है
मैं :हाँ, अब शावर चलाओ नहाना शुरू करो, अपना सर बचाकर और मोबाइल भी, ताकि मुझसे बात भी करती रहो साथ ही साथ..
शावर चलने की आवाज आई
अंशिका :ठीक है, अब बोलो..
मैं :अब साबुन उठाओ और अपने शारीर पर लगाओ..और ये समझो की मैं लगा रहा हूँ, और खासकर अपनी ब्रेस्ट को अच्छी तरह से साबुन लगाना, वो मुझे सबसे प्यारी लगती हैं..तुम्हे मालुम है न..
अंशिका :हाँ बाबा..मालुम है, मेरी तो कोई वेल्यु ही नहीं है.
मैं :अब अपनी चूत पर भी काफी सारा झाग लगाओ और उसे अच्छी तरह से साफ़ करो..
अंशिका :ये तो मैं रोज ही करती हूँ, इसमें नया क्या है.
मैं :आज मैं ये सब कर रहा हूँ, भूल गयी क्या..
अंशिका :ओह..हाँ..लो कर लिया, अब..
मैं :अब अपनी दो उँगलियाँ अन्दर डालो..
अंशिका : डाल ली..अब..
मैं :अब धीरे -२ अपनी क्लिट की मसाज करो..
अंशिका :उफ्फ्फ्फ़ …. क्या करवा रहे हो सुबह-२
मैं :अब एक और ऊँगली डालो अन्दर
अंशिका :नहीं जायेगी…दर्द होगा..
मैं :डालो न…कुछ नहीं होगा..

उसने ऊँगली अन्दर डाली.

अंशिका :अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह …थोडा दर्द हो रहा है..
मैं :तीन उँगलियाँ नहीं डाली जा रही, जब मेरा लंड जाएगा अन्दर तो क्या करोगी.
अंशिका : मुझे उसका ही डर लग रहा है..पता नहीं तब क्या होगा.
मैं :अच्छा वहां कोई हेयर ब्रुश रखा है क्या.
अंशिका :हाँ…है, क्यों.
मैं :उसे उठाओ और उसके पीछे वाले हिस्से को अपनी चूत के अन्दर डालो.
अंशिका :तुम न मुझे मरवाओगे..वो कहाँ जाएगा अन्दर, काफी मोटा है..
मैं :अरे बाबा , पूरा मत डालना, सिर्फ आगे का हिस्सा डालो.
अंशिका :रुको…हाँ..डाल लिया..ओह्ह्ह्ह ये तो बड़ा हो मोटा है.
मैं : अब उसे धीरे -२ अन्दर बाहर करो, और सोचो की ये मेरा लंड है जो तुम्हारी चूत के अन्दर जा रहा है, अन्दर का गीलापन समेट कर बाहर निकाल रहा है..और अपने अन्दर से ढेर सारा रस जब ये तुम्हारी चिकनी चूत के अन्दर निकलेगा तो वो अन्दर जाकर तुम्हे प्रेग्नेंट कर देगा…
अंशिका :ओफ्फ्फ्फ़ विशाल्ल्ल…..क्या कर रहे हो…अह्ह्हह्ह ….मुझे कुछ हो रहा है…अह्ह्ह्हह्ह ….ओह्ह्ह विशाल्ल्ल…आई एम् कमिंग…अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

उसके ये कहते ही मेरे लंड ने भी पिचकारियाँ मारनी शुरू कर दी, हम दोनों कुछ देर तक हाँफते रहे और फिर अंशिका की आवाज आई

अंशिका :सात बजे स्टेंड पर आ जाना.

और उसने फ़ोन कट कर दिया.

मैंने थोड़ी देर लेटा रहा, और फिर उठा और नहाने चल दिया, नहाकर आया तो देखा की सात बजने में दस मिनट है, मैंने बाईक उठाई और सीधा स्टेंड पर पहुंचा, अंशिका आई और मैंने उसे कॉलेज के पास उतारा.पुरे रास्ते वो मुझे कस कर पकडे रही और कुछ न बोली.

वो उतरी और अन्दर चली गयी, उसके जाते ही मेरे पास एक कार आकर रुकी.वो किटी मेम थी.

किटी :हेल्लो विशाल, कैसे हो.
मैं :आई एम् फाईन मेम..थेंक्स.
किटी : तो आज भी तुम अंशिका को छोड़ने आये हो, हूँ..
मैं :हाँ मेम..वो दरअसल उसे लेट हो रहा था, इसलिए..
किटी : मैं देख रही हूँ की वो तुम्हे कितना परेशान करती है, अच्छा सुनो, मेरी बेटी का बर्थडे है कल सन्डे को, तुम भी आ जाना अंशिका के साथ..मुझे अच्छा लगेगा.
मैं :स्योर मेम…मैं आ जाऊंगा..पर वो अंशिका को…
किटी : उसे मैं बोल दूंगी, वैसे भी वो तुम्हे ही बोलेगी मेरे घर पर छोड़ने के लिए और वापिस ले जाने के लिए, तो क्यों न तुम भी पार्टी के मजे लो..ठीक है..आना जरुर.

और ये कहकर वो चली गयी कॉलेज के अन्दर

मेरी तो मन मांगी मुराद पूरी हो गयी.

दोपहर को अंशिका का फ़ोन आया

मैं :हाय…क्या कर रही हो..
अंशिका :वाल्क..खाना खाने के बाद वाली…अच्छा सुनो, आज तुम्हे किटी मेम मिली थी क्या सुबह.
मैं :हाँ…और उन्होंने मुझे अपने घर पर भी बुलाया है…बर्थडे पर.
अंशिका :और तुमने हां कर दी..
मैं :और क्या करता, इतने प्यार से जो बुला रही थी वो..तुम्हे क्यों जलन हो रही है. तुमने भी तो कहा था की तुम बात करोगी उनसे, मेरे वहां आने के लिए, और अब जब उन्होंने सीधा मुझे कह दिया है तो ये तो और भी अच्छी बात है..है न..
अंशिका :नहीं मेरा मतलब वो नहीं था…खेर..अब उन्होंने बोल ही दिया है तो..ठीक है..कल आ जाना मेरे घर, वहीँ से चलेंगे एक साथ.
मैं :ठीक है, और सुनाओ, आज सुबह मजा आया के नहीं..
अंशिका :तुम न उसके बारे में मुझसे बात न ही करो तो अच्छा है, सुबह-२ मुझसे पता नहीं क्या-२ करवा दिया, मैंने इतनी सुबह आज तक फिंगरिंग नहीं की अपनी लाईफ में..और तुमने तो नाजाने क्या क्या…वो ब्रुश भी…कहाँ से आते हैं ये सब खयालात तुम्हारे दिमाग में..
मैं :अरे, मेरा दिमाग तो तरह-२ से सेक्स करने के लिए तरीके बनाने वाली फेक्टरी है, तुम देखना अभी और क्या -२ निकलता है इस सेक्स के कारखाने से..
अंशिका :हाँ, और कुछ तो आता है नहीं तुम्हे, इतना ध्यान पढाई में भी लगा लिया करो…
मैं :तुम फिर टीचर की तरह शुरू हो गयी..
अंशिका :टीचर हूँ , तभी ऐसा कह रही हूँ..अच्छा रखती हूँ अभी, लंच टाइम ओवर , शाम को बात करती हूँ. बाय..
मैं :बाय..
अब तो मैं कल का इन्तजार कर रहा था, कल उसने मुझे अपने घर पर दोबारा बुलाया है, और फिर किटी मेम के घर जाना और वापिस आना, यानि इस सबमे कुछ तो मौका मिलेगा ही, क्या पता चूत मारने को भी मिल जाए और मेरी जेब में पड़े हुए कंडोम की बारी भी आ जाए…मैं फिर से अपने ख्याली पुलाव बनाने लगा.

अब तो मैं कल का इन्तजार कर रहा था, कल उसने मुझे अपने घर पर दोबारा बुलाया है, और फिर किटी मेम के घर जाना और वापिस आना, यानि इस सबमे कुछ तो मौका मिलेगा ही, क्या पता चूत मारने को भी मिल जाए और मेरी जेब में पड़े हुए कंडोम की बारी भी आ जाए…मैं फिर से अपने ख्याली पुलाव बनाने लगा.

*****

रात को अंशिका का फ़ोन आया

अंशिका : हाय..क्या कर रहे हो.
मैं : मुठ मार रहा हूँ
अंशिका (गुस्से में) : तुम फिर शुरू हो गए..मैंने कहा था न की ये काम सिर्फ मेरे साथ करना, या सिर्फ मेरे सामने
मैं : यार, तुम्हारे सामने जो किया था उसे ही याद करके मेरा लंड तो अब पूरा दिन खड़ा रहता है, वो तुम्हारे फ़ोन ने सब गड़बड़ कर दिया
अंशिका : जो होता है अच्छे के लिए ही होता है
मैं : अच्छा सच बताना, उस दिन मैं अगर तुम्हे चोदने की जिद्द करता तो क्या तुम मुझे अपनी चूत मारने देती ?
अंशिका :ओहो…तुम्हारी सुई उसी दिन पर अटकी पड़ी है..मैंने तुमसे कल भी कहा था की सही समय और जगह मिलते ही मैं तुम्हे खुश कर दूंगी. और वो दिन और समय सही नहीं था

मैं : पर मैंने जो तुम्हारी आँखों में देखा था और जैसा तुम बीहेव कर रही थी मुझे लगा शायद तुम पूरी तैयार थी चुदने के लिए
अंशिका : तुम अपने ताने बुनते रहा करो..अच्छा सुनो, कल मैं क्या पहनू बर्थडे पार्टी में ?
मैं : कुछ नहीं..
अंशिका :बताओ न..प्लीस..तुम जानते हो जब से तुम मिले हो, मैंने तुमसे पूछे बिना कुछ नहीं पहना है बाहर ..

मैं ये सुनकर खुश हो गया, बात तो सही कह रही थी वो, हमेशा मुझसे पूछती है और वोही पहनती भी है.

मैं : अच्छा, तुम्हारे पास कोई वेस्टर्न ड्रेस है क्या
अंशिका :है तो पर मेरी ब्रेस्ट काफी हेवी है न, इसलिए मैं वेस्टर्न ड्रेस अवोइड करती हूँ..वैसे मेरे पास टी शर्ट और जींस है, और दो शर्ट भी हैं..
मैं : वंडरफुल ..तो एक काम करो, तुम शर्ट और जींस पहनो, साथ में हाई हील्स के सेंडिल ..
अंशिका : ये कोई ऑफिस पार्टी नहीं है, जिसमे इतने फोर्मल से होकर जाओ..प्लीस कुछ और बोलो न..
मैं : नहीं..मैंने जो कह दिया, वर्ना तुम्हारी मर्जी.
अंशिका :तुम न हमेशा अपनी जिद्द मनवाते हो..ठीक है..मेरे पास दो शर्ट हैं, सफ़ेद और दूसरी प्रिंट वाली..कोनसी पहनू,
मैं :सफ़ेद पहनो, ब्लेक जींस के ऊपर और नीचे व्हाईट सेंडल
अंशिका : ओके बॉस….और कुछ
मैं : और नीचे, ब्लेक ब्रा..
अंशिका : पागल हो क्या, व्हाईट शर्ट के नीचे ब्लेक कलर की ब्रा साफ़ दिखेगी.
मैं :हाँ, तभी कह रहा हूँ..सेक्सी भी तो लगोगी न..
अंशिका :मेरी मम्मी नहीं पहनने देगी, ऐसे कपडे.
मैं : तुम ऊपर जेकेट पहन लेना, बाद में उतार देना वहां जाकर.
अंशिका :उस्ताद हो तुम पुरे..ठीक है..जैसा आप कहो.
मैं : अच्छा , अब इस पप्पू का क्या करूँ, ये तो कब से खड़ा है तुम्हारे नाम की मुठ मारने के लिए.
अंशिका :उसे कहो की कल तक का वेट करे, मैं उसे संभाल लुंगी.
मैं :पक्का..
अंशिका :हाँ, बाबा हाँ..पक्का., अच्छा अब तुम सो जाओ, मुझे भी नींद आ रही है, पुच..बाय..
मैं : पुच..पुच…बाय जान…

और फिर मैं सो गया.

अगले दिन, हमेशा की तरह उसने सुबह मेसेज किया, दोपहर को लंच के समय बात की और शाम को सात बजे घर आने को कहा.

मैं, सफ़ेद शर्ट और ब्लेक जींस पहन कर उसके घर गया, मैंने जान बुझकर उसके जैसे कपडे पहने थे.

मैंने बेल बजायी और उसकी नौकरानी ने दरवाजा खोला , मैं अन्दर जाकर सोफे पर बैठ गया.

उसकी माँ अन्दर से आई, मैंने उठकर उनके पाँव छुए ..वो खुश हो गयी मेरे संस्कार देखकर, और नौकरानी को चाय बनाने को कहा

मम्मी : वो ऊपर तैयार हो रही है, अच्छा किया बेटा जो तुम अंशिका के साथ जा रहे हो, वर्ना मैं तो इसे रात को बाहर भेजने में हमेशा डरती रहती हूँ, पता नहीं कैसे जायेगी और वापिस आएगी, जब इसने कहा की किटी मेडम ने तुम्हे भी बुलाया है और तुम इसे लेकर और वापिस छोड़कर जाओगे तो मुझे थोड़ी राहत मिली..

मैंने मन ही मन सोचा , अरे आंटी, आप फिकर मत करो, मेरे साथ ही रहेगी ये, इसकी और इसके शरीर की पूरी रक्षा करूँगा मैं..

मैं :अरे आंटी, आप तो मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं, मुझे भी मेम की चिंता रहती है, आप फिकर मत करो.

उसके बाद वो मेरे घर के बारे में, कोन -२ है, क्या करते है, वगेरह-२ पूछने लगी, जैसे मुझे अपना जंवाई बनाएगी…

मैंने चाय पी, और तब तक ऊपर से अंशिका भी आ गयी, यार…क्या माल लग रही थी साली. ब्लेक जींस के ऊपर क्रीम कलर की जेकेट, नीचे उसकी शर्ट के कोलोर भी दिख रहे थे. उसने मेरे कपडे देखे और मुस्कुरा दी, पर कुछ न बोली, मैंने भी आँखों ही आँखों में उसकी तारीफ की.

और फिर हम चल दिए.

बाहर आते ही उसने अपनी जेकेट उतारी और मुझे दे दी, मैंने उसे डिक्की में दाल दिया, मैंने बाईक स्टार्ट की और वो मेरे पीछे बैठ गयी, दोनों तरफ टाँगे करके और थोडा दूर जाने पर उसने अपने दोनों हाथ मेरी बगलों में डाले और अपने पंजो से मेरे कंधे पकड़ लिए, आगे की तरफ से, और इसकी वजह से उसके दोनों गद्देदार मुम्मे, मेरी पीठ पर पिस कर आमलेट जैसी हालत में हो गए, उसने मेरी गर्दन पर पीछे से किस किया..और बोली :

अंशिका :आज मैं बहुत खुश हूँ, मैंने सुबह मम्मी को जब कहा की मैं तुम्हारे साथ जा रही हूँ, जो बताने में मुझे बड़ा डर लग रहा था, पर उनके रीअक्शन से मुझे बड़ा ताज्जुब हुआ, वो बड़ी खुश हो गयी थी, उन्होंने ये भी कहा था की ये लड़का भले घर का है..
मैं :देखा, मेरा इम्प्रेशन…अब तो मैं कभी भी तुम्हारे घर पर आ सकता हूँ, और ऊपर तुम्हारे कमरे में भी, मम्मी ने तो पास कर दिया है मुझे..
अंशिका :ज्यादा खुश मत हो..जितनी छूट मिली है, उतने में ही रहो

मैंने उससे ज्यादा बहस करना उचित नहीं समझा उस समय, वैसे भी उसके मुम्मे जो मेरी कमर में चुभ रहे थे, उसकी वजह से मेरी जींस में फंसा हुआ मेरा लंड ठीक से सांस भी नहीं ले पा रहा था, मुझे उसका कुछ करना होगा, मैं सोचने लगा, फिर आगे जाकर मैंने देखा की हमारे इलाके का बिजली घर आया है , जिसके पीछे की तरफ काफी बड़े-२ ट्रांसफार्मर लगे हैं, रात के समय वो बिजली घर बिलकुल सुनसान सा था, मैं कई बार बिल जमा करने यहाँ आया था, यहाँ की पार्किंग ऑफिस और उस ट्रांसफार्मर वाली जगह के बीच है, और अन्दर जाने के लिए कोई गेट भी नहीं है, मैंने बाईक अन्दर की तरफ मोड़ ली, वो समझ तो गयी थी की मैं वहां क्यों जा रहा हूँ, पर उसने कुछ कहा नहीं, शायद वो भी मेरी तरह जल सी रही थी , मैंने वहां पीछे पार्किंग वाली जगह पर जाकर बाईक रोकी, ऑफिस तो बंद था, वहां घुप्प अन्शेरा था, और पीछे वाली जगह, जहाँ ट्रांसफार्मर लगे थे, वहां थोड़ी रौशनी थी, वहां अन्दर जाने के लिए जाली का दरवाजा था जिसपर ताला लगा था , ऑफिस वाली दिवार की तरफ एक टेबल और कुर्सी रखी थी, जो शायद पार्किंग वाले के लिए थी, वहां भी हल्का सा अँधेरा था.

अंशिका : ये कहाँ ले आये, कोई आ ना जाए यहाँ, चलो न, पार्टी के लिए देर हो रही है..
मैं : ये बिजली घर है, यहाँ रात को कोई नहीं आएगा, तुम इसकी चिंता मत करो..आओ वहां उस कोने में चलते हैं,

मैं उसे लेकर कोने में गया, और उसे टेबल के पास लेजाकर खड़ा कर दिया.

जैसे ही मैं उसकी तरफ मुदा उसने मुझे एक दम से गले से लगा लिया..

उसका उतावलापन देखकर मुझे भी ताज्जुब हुआ, जो काम मुझे करना था वो आज खुद कर रही थी.

मैं :क्या बात है, बड़ा प्यार आ रहा है आज..
अंशिका :मैंने कहा था न की मैं आज बड़ी खुश हूँ, और तुमने आज मेरे जैसे कपडे भी पहने हैं, मुझे अच्छा लगा.
मैं :अच्छा लगने से क्या होता है, इनाम भी तो मिलना चाहिए न..

मेरे कहने की देर थी, उसके लरजते हुए होंठ मेरे होंठों से आ टकराए..वो इतने गीले थे की मुझे उसके मुंह से निकलती लार को अपने मुंह में भरकर अन्दर तक ले जाने में काफी मुश्किल हुई, उसकी लिप्स्तिच्क का स्वाद बड़ा मीठा सा था शायद किसी फ्रूट जैसा, मैंने उसके दोनों मुम्मे पकडे और उन्हें दबाना शुरू कर दिया, शर्ट के ऊपर से दबाने में उसकी छातियाँ बड़ी कड़क सी लग रही थी, मैंने उसके बटन खोलने शुरू किये, मुझे लगा की वो मना करेगी, पर उसने कोई विरोध नहीं किया, मैंने उसकी शर्ट को जींस से बाहर निकल दिया और उसके सारे बटन भी खोल दिए, नीचे उसकी ब्लेक कलर की ब्रा देखकर मेरे मुंह में और भी ज्यादा पानी आ गया, मैंने अपना मुंह उसकी दोनों छातियों के बीच झोंक दिया और उसके शरीर से निकलने वाली भीनी सी खुशबू को सूंघते हुए वह पर अपनी जीभ से चाटने लगा.

अंशिका के मुंह से आआआह्ह ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फ की आवाजें निकल रही थी..

मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके मुम्मे दबाने और काटने शुरू कर दिए, उसने अपनी शर्ट को उतारा और मेरी बाईक के ऊपर टांग दिया और
बोली :ये ख़राब न हो जाए

मैंने उसकी ब्रा के हूक भी खोल दिए और उसे भी उतार दिया और कहा :ये भी उतारो, इसके भी खराब होने का डर है.
उसने मुस्कुराते हुए अपनी ब्रा भी उतार दी.

मैंने ये नोट किया की आज वो कुछ कम डर रही है उस दिन पार्क वाली जगह के मुकाबले.

उसकी ब्रा के उतरते ही उसका हुस्न जब बेपर्दा हुआ तो मैं उसकी सुन्दरता देखता रह गया, ऊपर से नंगी, टोपलेस, वो सिर्फ अपनी जींस और हाई हील में खड़ी हुई बड़ी ही सेक्सी लग रही थी, उसने अपने बाल खुले रखे हुए थे, उसके बालों का स्टाईल बिलकुल आयेशा टाकिया जैसा है, स्ट्रेट बाल है उसके नीचे की और आते हुए और लम्बे भी..वो खड़ी हुई मुस्कुरा रही थी,
अंशिका :अब देखते ही रहोगे क्या…
मैंने जल्दी से अपने होंठ लगा दिए उसकी मदर डायरी के बूथ पर और दूध पीने लगा.वो मेरे सर पर हाथ फेरती हुई हलके-२ से बुदबुदाने लगी

अह्ह्ह्हह्ह मेरा बच्चा….पी ले…सारा तेरा…सारा तेरा…अह्ह्हह्ह्ह्ह म्मम्मम्म ओह्ह्ह्हह्ह धीरे काटो न प्लीस…

मैंने आँखें खोलकर उसकी तरफ देखा, उसका दांया निप्पल मेरे मुंह में था, वो बड़े प्यार से मेरी आँखों में देख रही थी..उसने मुझे कहा
अंशिका :क्या मेरी बात मानोगे..
मैं :क्या ?
अंशिका :वो…क्या तुम मेरे यहाँ एक निशान बना सकते हो अपने दांतों से..

उसने अपने निप्पल के थोडा ऊपर ऊँगली लगा कर कहा.

मैं :या..श्योर..

और मैंने अपने दांतों से उसके निप्पल के ऊपर का हिस्सा अन्दर की तरफ भींचा और उसे जोर से सक करते हुए , अपनी जीभ से उस जगह को कुदेरते हुए,अपने प्यार का “टाटू” बनाने में जूट गया..

अह्ह्हह्ह्ह्ह विशाल्ल्ल….अह्ह्ह्हह्ह दर्द हो रहा है….अह्ह्ह्हह्ह धीरे बाबा…ओह्ह्हह्ह……

मुझे मालुम था की उसे दर्द हो रहा होगा, पर दर्द के बिना तो वो मार्क नहीं बन सकता था, इसलिए मैंने उसे सक करना चालु रखा..और थोड़ी देर बाद जब मैंने उसे छोड़ा तो उसकी आँखों में हलके से आंसू थे, मैंने उसके मुम्मे को पकड़ कर ऊपर उठाया और उसे दिखाया

मैं :ये लो, बना दिया..ठीक बना है..नहीं तो दूसरा बनाऊ.
अंशिका :अरे…नहीं..ये बिलकुल ठीक है…दरअसल, आज सुबह जब मैं और किटी मेम बाथरूम में थे और वो साडी ठीक कर रही थी तब मैंने उनके ब्लाउस के ऊपर वाले हिस्से में एक निशान देखा, और तब उन्होंने मुस्कुरा कर कहा की ये तो उनके शरारती पति की मेहरबानी है..लव बाईट .. और भी हैं, जो वो दिखा नहीं सकती उसे..बस, तभी से मुझे भी वैसा ही निशान बनवाना था, वो कह रही थी की जब भी वो नहाते हुए या कपडे पहनते हुए वो निशान देखती है तो उन्हें अपनी पति की शरारते याद आती है, मन भी येही चाहती हूँ की मैं जब भी ये निशान देखूं तो तुम मुझे याद आओ और ये पल जो मैं तुम्हारे साथ बिता रही हूँ…

उसकी बात सुनकर मुझे उसपर बड़ा प्यार आया

मैं :अगर कहो तो तुम्हारे पुरे शरीर पर ऐसे ही निशान बना दूं, फिर उन्हें देखकर खुश होती रहना और मुझे याद करती रहना.

अंशिका :नहीं बाबा…ये ही ठीक है, पता है कितना दर्द हुआ , पर जो भी था, मीठा दर्द था.

मैंने हँसते हुए उसके दोनों मुम्मो को थामा और उसके होंठो को चुसना शुरू कर दिया.

उसने मेरी जींस की जिप पर हाथ लगाया और मेरे लंड को ऊपर से ही मसलना शुरू कर दिया.

मैंने घडी देखि, साड़े सात बज चुके थे, आठ बजे का टाइम था केक काटने का, अभी थोडा टाइम था हमारे पास.

वो मेरे सामने नीचे जमीं पर बैठ गयी और मेरी जिप खोलने लगी.

उसने मेरी जींस नीचे करी और अब मेरा लंड, जो फ्रेंची में फंसा हुआ फुंफकार रहा था, उसके सामने था..

उसने दोनों तरफ हाथ फंसा कर मेरी फ्रेंची नीचे करनी शुरू की, धीरे-२ उसे नीचे किया और मेरा लंड उछल कर उसकी आँखों के सामने आ गया.

अंशिका : म्मम्मम….कितना गुस्से में है ये आज…

मैं :तुम जानती हो की मेरा पप्पू गुस्से में क्यों है, तुमने इसे अभी तक अपनी पिंकी से नहीं मिलवाया न इसलिए…

अंशिका (हँसते हुए) :ओले ओले…मेरा बच्चा…पिंकी से मिलना है…जल्दी ही मिलेगी पप्पू को उसकी पिंकी…

और फिर उसने मेरे लंड के सिरे से निकलते प्रीकम को अपनी जीभ से चाट लिया..और चटखारा लेकर अगले ही पल मेरे पुरे लंड को निगल लिया अपने गरमा गरम मुंह में..

अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्हह्ह अंशु….अह्ह्ह्हह्ह मेरी जान…….क्या चुस्ती हो….अह्ह्ह्हह्ह ……तभी तो कहता हूँ…तू मेरी रंडी है….मेरी पर्सनल रंडी….अह्ह्ह्हह्ह…..चूस इसे….और जोर से…..

और उसने आवाजें निकलते हुए मेरे लंड को चुसना और निगलना शुरू कर दिया..

उसे नीचे जमीन पर अपने सेंडल के बल पर बैठने में बड़ी तकलीफ हो रही थी, वो ऊपर उठी और घोड़ी बनकर नीचे झुककर, मेरे लंड को चूसने लगी..मैं समझ गया, मैंने उसे कुर्सी पर बैठने को कहा और खुद उसके सामने पड़े टेबल के ऊपर बैठ गया,अब वो बड़े आराम से मेरे लंड को सामने पड़े खाने की तरह, खाने में मशगुल हो गयी, अपने एक हाथ से वो मेरी गोटियाँ मसल रही थी और दुसरे हाथ से अपने माथे पर आये बालों को ठीक कर रही थी..

मैंने अपने हाथ पीछे लेजाकर, टेबल पर टिका दिए और अपने लंड को चुस्वाने के मजे लेने लगा.

तभी उसका मोबाइल बजने लगा..

उसने अपनी जींस की पॉकेट से मोबाइल निकला और मुझे दिखाया, वो किटी मेम का था, फिर उसने मेरा लंड अपने मुंह से बाहर निकाला और फ़ोन उठाया
अंशिका :येस मेम…कहिये..

किटी : अरे भाई..कहाँ रह गयी, सब तुम्हारा ही इन्तजार कर रहे हैं.

अंशिका, मेरा लंड अब अपने हाथ से ऊपर नीचे कर रही थी और फ़ोन पर बात भी कर रही थी.

अंशिका :वो मेम..दरअसल..रास्ते में, मैं और विशाल रुक गए और आइसक्रीम खाने लगे, बस आ रहे हैं..

और फिर उसने जीभ निकाल कर मेरे लंड पर ऐसे फेराई जैसे वो उसकी आइसक्रीम हो.

मैं उसकी बात सुनकर और हरकत देखकर मुस्कुराने लगा.

किटी :तुम भी न, बच्चो जैसी हरकत करती हो, आइसक्रीम तो यहाँ भी खा सकती थी न, चलो अब जल्दी आओ, आई एम् वेटिंग.

अंशिका :ओ मेम…वी आर कमिंग…

और फिर उसने फ़ोन वापिस अपनी जेब में ठूस लिया और मेरे लंड को अपने मुंह में ठूस कर उसे फिर से आइसक्रीम की तरह चूसने लगी..

मुझे मालुम था की यहाँ अभी चुदाई संभव नहीं है, इसलिए मैंने उसे कुछ नहीं कहा और जो कुछ मिल रहा था, उसी में संतुष्ट रहना ही उचित समझा.

वो जिस तरह से अपने दांतों और जीभ का इस्तेमाल करते हुए मेरा लंड चूस रही थी, और दुसरे हाथ से मेरी बाल्स को भी मसल हलके से सहला रही थी, मुझे बड़ा मजा आ रहा था..जल्दी ही मेरे अन्दर ओर्गास्म बनने लगा, मैंने उसके सर को पकड़ा और अपनी तरफ से भी धक्के मारने शुरू कर दिए, मैं अब नीचे खड़ा होकर उसके मुंह में धक्के मार रहा था..मेरे हर झटके से उसके खुले हुए मुम्मे बुरी तरह से हिल रहे थे..और मेरी जांघो से टकरा रहे थे..जल्दी ही मेरे लंड ने झाड़ना शुरू कर दिया.

अह्ह्हह्ह्ह्ह अंशी….अह्ह्हह्ह मैं आया…..आयी एम् कमिंग…..अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह ओह्ह्हह्ह उफ्फ्फ्फ़ …….

और उसके मुंह में जैसे कोई मशीन लगी थी, सारा रस उसने जल्दी से अपने गले के नीचे उतार लिया, और अंत में एक लम्बा सा चुपा मारकर मेरे लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला और फिर अपनी उँगलियों से , होंठों के चारों तरफ जमा हुए, रस की कुछ बूंदों को भी इकठ्ठा किया और उन्हें भी चाट लिया..और एक चटखारा मारकर बोली “टेस्टी…..म्मम्मम ”

मैंने नीचे मुंह करके उसके होंठो को चूम लिया, उसके मुंह से मेरे रस की खुशबू आ रही थी..मैं पीछे होने लगा तो उसने एक दम से मुझे फ्रेंच किस करना शुरू कर दिया, मुझे मजबूरन उसका साथ देते हुए, उसके मुंह से निकलता , अपने रस का स्वाद चखना पड़ा..

थोड़ी देर बाद हम अलग हुए और मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर लगाया, वो जगह बिलकुल गीली सी थी, पर ब्लेक जींस की वजह से गीलापन दिखाई नहीं दे रहा था. उसने मेरा हाथ हटाया और बोली

अंशिका :अभी और टाइम नहीं है, हमें जल्दी वहां जाना चाहिए..वो लोग हमारा ही वेट कर रहे हैं..

मैंने भी ज्यादा जोर नहीं दिया, और अपने कपडे ठीक करने लगा

उसने भी जल्दी से अपनी ब्लेक ब्रा पहनी और फिर मेरी तरफ मुड़ी
अंशिका :एंड …थेंक्स फॉर दिस…..
और उसने अपनी ब्रा को हटा कर नीचे से वो निशान दिखाया.अब वो बिलकुल लाल सुर्ख हो चूका था.शायद अगले एक हफ्ते तक वो वहां रहे…

मैं :यु आर वेल्कम , वैसे जब ये मिट जाए तो बता देना, एक और बना दूंगा..और वैसे भी तुमने ये थोडा नीचे बनवाया है, अगली बार ऊपर बनाऊंगा ताकि सूट या ब्लाउस के गले से भी दिखाई देता रहे..
अंशिका :वेरी फन्नी..और मैं लोगो को क्या बोलूंगी, की ये किसने बनाया है,मेरी शादी थोडा न हुई है, किटी मेम की तरह, यहीं ठीक है, जो सिर्फ मैं देख सकू..ना की कोई और.

और फिर उसने अपनी शर्ट पहनी, कपडे ठीक किये, और अपनी जींस की जेब से लिपस्टिक निकाल कर लगाने लगी मेरी बाईक के शीशे में देखकर, पूरी तय्यारी के साथ आई थी, जैसे उसे मालुम था की मैं उसे चूमुंगा जरुर..

फिर हम चल दिए, लगभग दस मिनट में हम किटी मेम के घर पहुँच गए, वो एक सोसाइटी फ्लेट में रहती थी, उनके फ्लेट के बाहर काफी चहलकदमी थी, हम अन्दर गए.

अन्दर जाकर मैंने और अंशिका ने किटी मेम को विश किया, उन्होंने गोल्डन कलर की साडी पहनी हुई थी, जो नेट वाली थी, जिसके अन्दर से उनका सिल्वर कलर का लो कट ब्लाउस साफ़ दिखाई दे रहा था और उसमे कैद मोटे -२ मुम्मे, और जैसा अंशिका ने कहा था, उनके ऊपर चमकता हुआ लाल निशान भी साफ़ दिखाई दे रहा था, वैसे वो बताती ना तो मैं ज्यादा ध्यान नहीं देता, पर उसके बताने के बाद उसे देखने में बड़ी उत्तेजना फील हो रही थी, खेर उन्होंने अपने पति से मिलवाया , जो किसी सरकारी ऑफिस में काम करते थे, वो बिलकुल बुड्ढे थे, मुझे लगा की शायद वो किटी मेम के ससुर हैं, क्योंकि उनके बाल बिलकुल सफ़ेद थे..घर पर सभी लोग एक दुसरे से बाते करने में लगे थे. उनके कई करीबी रिश्तेदार और उनके बच्चे ही थे पार्टी में, किटी मेम ने अंशिका के कपड़ो की तारीफ की और फिर वो उसे लेकर किचन में चली गयी.

मैंने किटी मेम से स्नेहा, जिसका बर्थडे था, के बारे में पूछा, उन्होंने कहा की शायद ऊपर टेरिस पर गयी है, अपने दोस्तों के साथ, मैं भी ऊपर चल दिया, इतनी दोस्ती तो हो ही चुकी थी उसके साथ, कॉलेज फेस्ट के दोरान, इसलिए मैं भी उसके लिए अपनी पॉकेट में एक छोटा सा गिफ्ट लाया था, ईअर रिंग , पर ये बात मैंने अंशिका को नहीं बताई थी, वो मेरे बारे में बड़ी पोसेसिव है, ये मैं जानता था, इसलिए..

मैं सीडियों से ऊपर गया, ऊपर से दो तीन दोस्त नीचे आते दिखाई दिए, पर स्नेह उनमे नहीं थी, मैं ऊपर गया, पर वहां कोई नहीं था, घुप्प अँधेरा था, पर वहां की ऊँचाई से पूरा शहर साफ़ दिखाई दे रहा था, बड़ा ही सुन्दर दृश्य था, मैंने सोचा चलो एक चक्कर मार लेता हूँ, मैं आगे गया तो मुझे लगा की कोने में कोई खड़ा हुआ है..मैं झट से एक बड़ी सी टंकी के पीछे छुप गया और धीरे-२ उस तरफ गया, मेरा अंदाजा सही निकला, वहां स्नेहा खड़ी थी शायद अपने बॉय फ्रेंड के साथ, और वो दोनों किस कर रहे थे

स्नेहा :अह्ह्ह्ह पुच पुच…बस करो अंकित…नीचे सब इन्तजार कर रहे होंगे…चलो न..

अंकित :पुच पुच…बस थोड़ी देर और…आज तुम कितनी सुन्दर लग रही हो…बर्थडे किस तो करने दो, पुच पुच…मेरा तो मन ही नहीं कर रहा तुम्हे छोड़ने का…पुच पुच..

स्नेहा : अह्ह्ह्ह मन तो मेरा भी नहीं कर रहा….पर जाना पड़ेगा न नीचे, मम्मी इन्तजार कर रही होनी, केक भी काटना है…चलो न…

अंकित :अच्छा, एक बार इन्हें बाहर निकालो न, प्लीस…मुझे इनपर भी किस करनी है..

स्नेहा : पागल हो क्या, ये पोसिबल नहीं है.. तुम नीचे चलो न…प्लीस…

अंकित :ओके बाबा…जैसा तुम कहो…

स्नेहा :तुम पहले जाओ, मैं बाद में आती हूँ, कोई हमें एक साथ नीचे जाते ना देख ले..

हे भगवान्, इन स्कूल जाने वाले बच्चो को भी पर लगे है, किस करने में लगे हैं..

और फिर अंकित उसे एक बार और जोर से चूम कर नीचे की और चल दिया, स्नेहा ने जल्दी से अपने बाल और कपडे ठीक किये और नीचे जाने लगी, मैंने पीछे से उसे आवाज लगायी

मैं :हे स्नेहा, हैप्पी बर्थडे…

स्नेहा मेरी आवाज सुनकर एकदम से पीछे मुड़ी और मुझे देखकर चोंक गयी,

स्नेहा :तुम्म….विशाल, तुम कब ऊपर आये….

मैं :जब अंकित तुम्हे बर्थडे विश कर रहा था..

स्नेहा मेरी बात सुनकर डर गयी, और मेरे पास आकर बोली : प्लीस विशाल, किसी को कुछ मत बताना, मेरी मम्मी मेरा घर से निकलना बंद करा देगी…प्लीस…

मैं :ओह्ह..चिल्ल यार, परेशान मत हो, ये सब तो होता है, सभी करते हैं, मैंने भी किया है और करता हूँ, टेक ईट इसी …डोंट वोरी ..मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगा..वो तो तुम्हारी मम्मी ने कहा की तुम शायद ऊपर हो, इसलिए मैं आया और तुम्हे देखा, और मैं तुम्हे ये गिफ्ट भी देना चाहता था, सभी से छुपा कर, इसलिए..

और फिर मैंने उसे अपनी जेब से उसका गिफ्ट निकल कर दिया, उसने मुस्कुराते हुए वो लिया और मेरे से हाथ मिला कर थेंक यू कहा.

मैंने भी मौके का फायदा उठा कर उसके हाथ को पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींच लिया और गले से लगा लिया,…बॉस….क्या नरम शरीर था उसका, और उसके छोटे-२ बूब्स जो मेरी छाती से टकराए तो मेरा लंड फिर से अंगडाई लेने लगा, मैंने उसे थोड़ी देर तक गले से लगाये रखा और फिर उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए उसे अलग किया, उसका चेहरा देखने लायक था, उसने शायद सोचा नहीं होगा की मैं उसे गले लगा लूँगा..

मैं :चले नीचे…

स्नेहा : हनन…हाँ…चलो…चलो नीचे चलते हैं, केक भी काटना है.

और वो नीचे की तरफ चल दी.

मैं और स्नेहा जब वापिस अन्दर गए तो उसकी मम्मी केक को फ्रिज में से निकाल कर टेबल पर लगा रही थी, अंशिका ने मुझे स्नेहा के साथ अन्दर आते देखा तो मुझे एक कोने में लेजाकर बोली : कहाँ थे तुम, और क्या कर रहे थे स्नेहा के साथ..

मैं :अरे , तुम तो ऐसे नाराज हो रही हो, जैसे मैं उसके साथ डेट पर गया था, उसकी मम्मी ने बताया की वो ऊपर है तो मैं उसे बुला लाया और उसे विश भी तो करना था न..

अंशिका [Image: frown.gif]आँखे निकलते हुए) :शर्म नहीं आती, उस छोटी सी बच्ची के साथ डेट पर जाने की बात करते हो,

मैं :वो बच्ची अब उतनी छोटी भी नहीं रही..

अंशिका :क्या मतलब..?

मैं :मतलब, आज उसका बर्थडे है न, यानी वो एक साल और बड़ी हो गयी..

अंशिका :हाँ ठीक है, पर तुमसे कई साल छोटी है, उसपर नजरे मत लगाओ..

मैं :वैसे, मैं भी तो तुमसे कई साल छोटा हूँ, फिर तुम क्यों मुझपर नजर रखती हो..

अंशिका :हमारी बात कुछ और है,…खेर मैं तुमसे इस बारे में ज्यादा बहस नहीं करना चाहती, चलो वहां केक कट रहा है..

उसके बाद स्नेहा ने केक काटा, अपने मम्मी और पापा को खिलाया, फिर एक दो रिश्तेदारों को भी और फिर अपने बॉय फ्रेंड अंकित को भी, वो दोनों मंद मंद मुस्कुरा रहे थे, और फिर वो मेरे और अंशिका के पास आई और एक ही टुकड़े से दोनों को खिलाया, मुहे खिलते हुए भी वो मंद ही मंद मुस्कुरा रही थी, मैंने गोर से देखा तो पता चला की उसने मेरे दिए हुए इअर रिंग पहने हुए हैं, नीचे आकर उसने ये कब किया, मुझे भी नहीं मालुम, उसके बाद सभी ने उसे गिफ्ट दिए और अंत में उसकी मम्मी ने एक डब्बा, जिसे उसने जल्दी से खोला, उसमे मोबाइल था, वो ख़ुशी से चिल्लाई और किटी मेम के गले लग गयी.

बाद में थोडा बहुत डांस हुआ , मैं एक बहुत अच्छा डांसर हूँ, मैंने जब एक गाने पर डांस करना शुरू किया तो सबने ताड़ी मारकर खूब तारीफ की, मैंने नाचते हुए, बर्थडे गर्ल को भी अपने साथ नचाया , वो भी झूम कर नाची मेरे साथ, बाद में सबने खाना खाया और हम वापिस जाने लगे.

किटी में :थेंक यू अंशिका एंड विशाल, तुम दोनों आये मुझे बड़ा अच्छा लगा
वो दोनों कुछ बातें करने लगे, मैंने पीछे देखा तो पाया की स्नेहा बार -२ मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही है, मैं उसके पास गया और उसे बाय बोला, उसने धीरे से कहा :प्लीस अपना नंबर दो..
मैंने बिना कोई सवाल पूछे उसे अपना नंबर बता दिया, उसने उसे अपने मोबाइल में सेव करा और फिर मैं वापिस नीचे चल दिया.

वापसी में काफी ठण्ड हो रही थी, अंशिका मुझसे चिपक कर बैठी थी, उसे जैसे घर पहुँचने की कोई जल्दी नहीं थी आज..

मैं :क्या सोच रही हो..
अंशिका : कुछ नहीं, पता है, किटी मेम तुम्हारे बारे में पूछ रही थी आज, मुझे तो लगा की शायद उन्हें शक हो गया है की तुम मेरे कसन हो या नहीं..पर मैंने बात संभाल ली..

फिर हमने इधर उधर की बाते की और मैंने उसे पुचा : जल्दी तो नहीं है ना आज..
अंशिका :क्यों ?
मैं :तुम्हे आइसक्रीम खिलानी है…और मुझे भी कुल्फी खाने का मन है.
अंशिका मेरा इशारा समझ गयी, वो कुछ न बोली..दरअसल आज उसे जल्दी जाने की कोई चिंता नहीं थी, अभी दस बजे थे, और उसकी मम्मी भी जानती थी की मैं उसे वापिस घर छोड़कर जाऊंगा, इसलिए मम्मी के फ़ोन आने का भी सवाल नहीं था, चिंता थी तो सिर्फ, जगह की, मैंने सोचा की उसी जगह पर जाकर दोबारा ट्राई करना चाहिए..मैंने बाईक वहीँ मोड़ दी,
अंशिका : इतनी रात को वहां कोई और ना आ जाए, चोकीदार भी हो सकता है न..
मैं :नहीं होगा..देखते हैं.

मैं बाईक अन्दर ले गया. वहां कोई भी नहीं था, मैंने चैन की सांस ली.

बाईक वहीँ खड़ी की और फिर उसे लेकर उसी कोने में जाकर खड़ा हो गया.

मेरा लंड फिर से टाईट हो चूका था, पर मैं अब पहले अंशिका को मजे देना चाहता था.

मैंने उसे अपनी तरफ खींचा और उसे गले लगाकर उसे चूमने लगा.

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