फ़ोन सेक्स – मोबाइल फ़ोन सेक्स part 19

मैं : अच्छा जी…कोई बुराई तो नहीं की न मेरी…
रीना : बुराई ही कर रही थी…अच्छा तो किया नहीं तुमने मेरे साथ..

वो इतनी बेबाकी से मुझसे कल रात की बात कर रही थी..और वो भी सिमरन के सामने..

मैंने रीना को देखा और फिर सिमरन को..

रीना : मैंने इसे सब बता दिया है…और तुम्हे फोन करने का आईडिया भी इसने ही दिया था मुझे कल सुबह…हम दोनों काफी अच्छे दोस्त बन चुके हैं…

मैं समझ गया की ये दोनों दोस्त बनकर मेरी इज्जत लूटने के मूड में हैं…

पर मेरा नाम भी विशाल है…पिछले दो महीनो में मैंने इतनी बार लडकियों को चोदा है जितनी इनकी उम्र भी नहीं होगी…

मैं : कोई बात नहीं…मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है….वैसे भी एक से भले दो….और दो से भले तीन…है न..

मैंने सिमरन की तरफ देखकर आँख मार दी..

वो शर्मा गयी…
यार …क्या स्माईल थी उसकी…उसके होंठ इतने मोटे थे…जैसे वो है न…प्रियंका चोपड़ा ….उसकी तरह…मन कर रहा था, ओम्लेट छोड़कर उसके होंठ खा जाऊ…

रीना ने मुझे उसकी तरफ घूरते पाकर कहा : वैसे ….तुमने काम अधूरा मेरे साथ छोडा था…न की इसके साथ…

वो शायद सोच रही थी की उसकी जैसी साधारण लड़की को छोड़कर मैं अब सिमरन जैसी सेक्सी लड़की के पीछे पड़ गया हु, और उसका पत्ता कट गया.

मैं : अरे रीना तुम क्यों परेशान हो…हम वहीँ से शुरू करेंगे..जहाँ छोडा था…

मैंने एक हाथ बढाकर उसकी जांघ पर रख दिया और धीरे से दबा दिया…वो मुस्कुरा उठी..

चुदाई की बात सुनकर हर लड़की मुस्कुराने क्यों लग जाती है…मैं सोचने लगा.

और सामने बैठी हुई सिमरन भी शायद मेरे लंड के बारे में सुनकर अपने सपनो में खोयी हुई थी.

तभी किट्टी मेम की आवाज आई की सभी लोग बस में जाकर बैठे…हम बस निकलने ही वाले है…

अन्दर जाकर अंशिका इस बार भी किट्टी मेम के साथ आगे जाकर बैठी…और मैं सबसे पीछे वाली लम्बी सीट पर रीना और सिमरन के साथ.

अंशिका ने बीच में खड़े होकर आज के स्केडुल के बारे में बताया.

सब उसकी बाते सुन रहे थे…पर रीना के हाथ मेरे लंड के ऊपर थिरक रहे थे…लगता है आज ये बस के अन्दर ही कुछ करके रहेगी…

मैंने जेकेट पहनी हुई थी, बस के अन्दर ठण्ड कम थी और रीना भी मेरे लंड के ऊपर हाथ फेरा रही थी, इसलिए मैंने जेकेट को उतारा, और अपनी गोद में रख दिया ताकि रीना का हाथ क्या कर रहा है, वो सब छुप जाए और दुसरे कोने में बैठी हुई दो लडकिय न देख पाए की हम क्या कर रहे हैं…

वैसे तो सिमरन भी अपने आपको आगे करके बैठी थी ताकि उन दोनों लडकियों को इस कोने में होता हुआ कुछ न दिखाई दे, पर फिर भी डर तो लगता ही है न..

मेरे जेकेट के डालने से तो रीना और भी बेशर्मी पर उतर आई, उसने मेरी पेंट की जिप खोली और अपने नन्हे हाथ अन्दर डाल कर मेरे मोटे लंड को पकड़ कर मसलने लगी…

और जल्दी ही उसे बाहर निकाल कर पूरी तरह से उसकी सेवा करने लगी.

मुझे पता नहीं था की उसने पहले कभी लंड हाथ में लिया है या नहीं पर उसके चेहरे को देखकर तो लगता था की वो काफी अचरज में है…शायद मेरे लंड के साईज को देखकर..

वो अपनी गांड को सीट पर बैठे हुए हिला रही थी, शायद नीचे की तरफ से आते हुए घिस्से उसे मजा दे रहे थे..

तभी मैंने अंशिका को पीछे की तरफ आते हुए देखा, मैंने जल्दी से रीना का हाथ अपने लंड से हटाया और जेकेट से अपने नंगे लंड को छुपा लिया.

अंशिका पीछे तक आई और मुझे रीना और सिमरन के साथ बैठा हुआ पाकर वो मुस्कुराने लगी..

अंशिका : अरे विशाल…तुम पीछे बोर तो नहीं हो रहे न..
मैं : नहीं अंशिका…मुझे यहाँ नए दोस्त मिल गए हैं…बस टाईम पास हो ही जाएगा आज का.

अंशिका ने आँखे निकाल कर मुझे देखा, मानो कोई बीबी अपने पति को बाहर की औरतों को देखने के लिए मना कर रही हो.

तभी रीना बीच में बोल पड़ी : अरे मेम …आप फिकर मत करो…हम विशाल का अच्छी तरह से ध्यान रखेंगे..

शायद अंशिका सोच रही होगी, इसी बात का तो डर है…

मैं उसकी मनोदशा भांपकर हंस दिया.

अंशिका आगे चली गयी…और रीना का हाथ फिर से मेरे बिल में घुस गया और सो चुके लंड महाराज को उठाने का काम करने लगा…और वो जल्दी उठ भी गया..और इस बार दुगने जोश के साथ..

रीना ने साईड में होकर दोनों लडकियों को देखा, रास्ता घुमावदार था, शायद उन्हें चक्कर आ रहे थे.इसलिए कोने में बैठी लड़की ने अपनी आँखे बंद कर रखी थी, शायद सो रही थी वो और उसके साथ बैठी हुई लड़की ने उसकी गोद में सर रखा हुआ था और वो भी सोने की कोशिश कर रही थी.

रीना ने जैसे ही ये देखा, उसके दिमाग में भी आईडिया आया, उसने सिमरन के कान में कुछ कहा और फिर मेरी तरफ मुड़कर अपने सर को मेरी गोद में रख दिया..और मेरी जेकेट को उठा कर अपने सर के ऊपर ओढ़ लिया.

मेरी तो हालत ही खराब हो गयी.

उसने मेरे मोटे सांप को अपने मुंह के अन्दर निगल लिया..पूरा का पूरा..

देखने में तो उसका चेहरा काफी छोटा था, पर अन्दर से उसका मुंह काफी बड़ा था.

मेरे लंड को वो किसी लोलीपोप की तरह से चूस रही थी, मानो उसकी सारी मिठास आज वो निकाल कर रहेगी.

मैंने उसकी पीठ पर हाथ रखा और उसके गुदाज जिस्म को सहलाने लगा…और सहलाते हुए मेरा हाथ उसकी गांड की तरफ चला गया.

उसने लॉन्ग स्कर्ट पहनी हुई थी और उसके ऊपर स्वेटर..

मैंने एक हाथ उसके स्वेटर के अन्दर दाल दिया, नीचे उसने कुछ भी नहीं पहना हुआ था..सिर्फ ब्रा के स्ट्रेप हाथ में आ रहे थे..

मैंने उसकी गांड के चीरे पर अपनी ऊँगली रखकर नीचे खिसकानी शुरू कर दी.

उसकी गांड काफी दमदार थी, उसकी घाटी के अन्दर मेरी ऊँगली फिसलती चली गयी…

पूरी बस में हमारी तरफ ध्यान देने वाला कोई नहीं था.

रीना अपने मुंह से मेरे लंड को चूस चूसकर मजा दे रही थी..

और सिमरन…

उसकी तरफ तो मेरा ध्यान गया ही नहीं…

मैंने सिमरन को देखा..उसकी आँखे गुलाबी हो चुकी थी..और उसकी नजरे रीना के ऊपर थी, जो मेरी जेकेट के नीचे घुसकर मेरे लंड को नोच खा रही थी..

मैंने सिमरन को भी अपने लंड का गुलाम बनाने की सोची…और मैंने एक झटके से अपनी जेकेट को रीना के सर के ऊपर से हटा दिया..

जैसे ही जेकेट हटी, रीना हडबडा कर मेरे लंड को छोड़कर उठ बैठी…और जैसे ही उसने मेरे लंड को अपने मुंह से निकला, वो अपनी सुन्दरता बिखेरता हुआ सिमरन की नंगी आँखों के सामने लहराने लगा…

रीना ने जब देखा की कोई नहीं है तो वो जल्दी से वापिस नीचे झुकी और मेरे गीले लंड को अपने मुंह में डालकर फिर से चूसने लगी…

और इतनी देर तक सिमरन की हालत बुरी हो चुकी थी…उसने मेरे लंड की एक एक नस देख ली थी इतनी देर में…

और उसकी साँसे तेजी से चलने लगी थी.

और तब उसने अपनी लाल आँखे उठा कर मेरी तरफ देखा…जैसे ही उसकी नजरे मुझसे मिली…मैंने उसे आँख मार दी..वो शर्मा गयी…

मैंने रीना के सर के ऊपर जेकेट फिर से डाल दी.

सिमरन समझ चुकी थी की मैंने ये सब उसे अपना लंड दिखाने के लिए ही किया है.

मेरा एक हाथ अभी भी रीना की गांड कुरेदने में लगा हुआ था…

सिमरन का हाल बुरा हो चला था.उसकी टी शर्ट में से मुझे उसके निप्पल साफ़ दिखाई देने लगे थे.

और उसके मोटे-२ होंठ दांतों के नीचे दबने से लाल सुर्ख हो चुके थे.

मैंने रीना की गांड से हाथ निकाला और सिमरन की तरफ बड़ा दिया…सिमरन वैसे भी रीना को छुपाने के लिए लगभग उससे सट कर बैठी हुई थी…मेरा हाथ सीधा उसके पेट पर गया..ठीक उसके मोटे और झूलते हुए मुम्मो के नीचे…

उसके बदन में करंट सा लगा..मैंने अपने हाथो को उसके नर्म पेट पर फेरना शुरू कर दिया…और थोडा ऊपर किया और उसके लटकते हुए मुम्मे के नीचे वाली हिस्से पर अपनी उंगलियों को छुआ दिया..

उसके मुंह से एक मादक सी आवाज निकल गयी.

अह्ह्हह्ह्ह्ह……

पर बस की तेज आवाज की वजह से वो दब कर रह गयी.

पर उसकी आवाज सुन कर मुझे डर लगने लगा…अगर किसी ने नोट कर लिया की मैं बस के पीछे बैठ कर दो-दो लडकियों से मजे ले रहा हु तो अंशिका की कितनी बदनामी होगी, यहाँ तो सभी को यही मालुम है की मैं उसका कजन हु..

मैंने अपना हाथ वापिस रीना की गांड की तरफ कर दिया..

मेरी बेरुखी देखकर सिमरन मेरी तरफ देखने लगी, उसे शायद मजा आ रहा था और वो भी अपने जिस्म के ऊपर मेरे हाथो को महसूस करके खुश थी..

मैंने उसे इशारा किया की बाद में उसका ही नंबर है…तो वो बुरा सा मुंह बनाकर फिर से रीना और मेरी पहरेदारी करने लगी…

अब मेरे लंड का पारा भी गर्म हो चला था…वो कभी भी फट सकता था…

मैंने अपने हाथ को रीना की गांड से हटा कर उसकी स्वेटर के अन्दर डाल दिया और ब्रा के ऊपर से ही उसके सुदोल सी बेस्ट को दबाकर उनका मर्दन करने लगा…

और जल्दी ही वो लम्हा आ गया जिसके लिए रीना इतनी मेहनत कर रही थी…और जैसे ही मेरे लंड की पहली पिचकारी उसके मुंह में गयी, उसने मेरे लंड को अपने गले तक लेजाकर वहीं छोड़ इया, ताकि उसके बाद निकलने वाली सारी पिचकारिया सीधा उसके पेट के अन्दर तक जाए…

इतनी अन्दर तक मैंने आज तक अपना लंड नहीं घुसाया था…किसी के मुंह में.

और चलती बस में अपने लंड को किसी अनजान लड़की से चुस्वाने का ये रोमांच भी बड़ा ही सुखद था.

मेरे लंड को चूसने के बाद रीना ऊपर उठी, उसका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था, और होंठो पर अभी भी मेरे लंड से निकला सफ़ेद रस लगा हुआ था. जिसे वो अपनी जीभ से इकठ्ठा करके चूसने में लगी हुई थी.

उठने के बाद वो बोली : विशाल….इतना स्वादिष्ट रस तो मैंने आज तक नहीं पिया…

और फिर उसने जो किया मैं और सिमरन दोनों हेरान रह गए..

उसने अपने मुंह के कोने में जमा किया हुआ मेरा वीर्य अपनी ऊँगली के सिरे पर इकठ्ठा किया और सिमरन के मुंह के अन्दर वो ऊँगली डाल दी…

सिमरन अपनी फटी हुई आँखों से रीना को देखती रही…पर रस पीने से मना न कर पायी…और जैसे ही उसने वो रस अपने गले से नीचे उतारा उसे और भी ज्यादा पीने की इच्छा होने लगी…रीना ने उसे कहा की आते हुए तुम विशाल के पास बैठना और जी भरकर इसका जूस पीना.

खेर…

हमारा पहला स्टॉप आ गया था…एक बड़ी सी झील थी, पहाड़ो से घिरी हुई, और हलकी बारिश होने की वजह से माहोल काफी रोमांटिक सा हो रहा था.

एक तरफ एक बड़ा सा रेस्टोरेंट बना हुआ था, जिसमे ज्यादातर लोग जाकर बैठ गए और बारिश के बंद होने का इन्तजार करने लगे.

अंशिका ने कहा की हम यहाँ एक घंटा रुकेंगे…जिसे भी भूख लगी है वो खा सकता है…या किसी को घूमना है तो वो घूम सकता है..

अंशिका की बात सुनकर सभी ने अपने ग्रुप बना लिए…मेरे साथ रीना , सिमरन और वो दोनों लडकिया, जो हमारे साथ पीछे बैठी हुई थी, चल पड़ी…

रीना के पास छाता था, उसने खोला और मुझे और सिमरन को अन्दर ले लिया…

हम सब आगे की तरफ चल दिए..

थोडा आगे चले थे की बारिश और भी तेज हो गयी…

वो दोनों लडकिया, भीगने के डर से वहीँ से वापिस भाग ली, और वापिस रेस्टोरेंट में जाकर बैठ गयी.

हम तीनो भी थोडा बहुत भीग रहे थे..एक छाते के अन्दर तीन लोग सही तरह से आ नहीं पा रहे थे.

सिमरन मुझसे बिलकुल सट कर चल रही थी …उसकी टाईट गांड के उभार देखकर मेरे लंड ने फिर से अपना सर उठाना शुरू कर दिया..

काफी आगे जाकर रीना को पहाड़ का एक ऐसा हिस्सा दिखाई दिया, जिसके नीचे छिपकर ऊपर से आती हुई तेज बारिश से बचा जा सकता था..

हम तीनो वहां जाकर खड़े हो गए..और छाता एक तरफ रख दिया.

मौसम काफी ठंडा हो चूका था, सामने की तरफ बड़ी सी झील थी…और हमारे पीछे की तरफ पहाड़…हमारे दांयी तरफ , जहाँ से हम आये थे, पूरा सुनसान था, क्योंकि सिवाए हमारे, किसी के पास भी छाता नहीं था, इसलिए तेज बारिश में कोई भी पीछे नहीं आ पाया…

और रीना इस मौके को अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहती थी…

उसने एक ही झटके में अपनी स्वेटर को अपने गले से उतार कर साईड में रख दिया…और अपनी छोटी ब्रेस्ट, जो की काले रंग की ब्रा में कैद होकर उफान पर थी, मेरे और सिमरन के सामने परोस दी.

उसकी हिम्मत देखकर मैं भी हेरान रह गया…पर सिमरन नोर्मल थी…शायद उसे मालुम था की रीना ऐसा करने वाली है…

और फिर रीना ने सिमरन को इशारा किया….और उसने भी हिचकिचाते हुए अपनी टी शर्ट को पकड़ा और अपने सर से घुमा कर वो भी सिर्फ ब्रा और जींस में मेरे सामने खड़ी हो गयी…इतने मोटे और सफ़ेद मुम्मे मैंने आज तक नहीं देखे थे…सिमरन ने पर्पल कलर की ब्रा पहनी हुई थी…और उसके मोटे निप्पल ब्रा में से भी साफ़ दिखाई दे रहे थे..

वाव….

मेरे मुंह से उन दोनों के लिए एक ही शब्द निकला…

वाव…

अब वो दोनों प्यासी नजरो से मुझे ही देख रही थी..मैं समझ गया की मुझे भी अपने कपडे उतारने होंगे.

मैंने अपनी जेकेट और टी शर्ट उतार दी.

ठंडी हवा के झोंके ने मुहे सहला दिया..तेज बारिश की बोछार हमारे ऊपर भी आ रही थी, सिर्फ महीन बूंदों के रूप में..

अन्दर की तरफ एक ऊँची चट्टान के ऊपर एक सुखी हुई सी डाल थी, जिसपर मैंने अपने और उन दोनों के कपडे टांग दिए, ताकि वो भीगे न.

और फिर मैंने अपनी जींस उतारी..और उसके अन्दर मेरे लंड का टेंट देखकर वो दोनों बाराती मेरे फंक्शन में आने को कुलबुलाने लगे..

रीना ने सबसे पहले अपनी जींस को उतारा और उसे मेरी तरफ उछाल दिया..और फिर अपनी पेंटी और ब्रा को भी उतार कर एक कोने में रख दिया..

अब वो मेरे और सिमरन के सामने नंगी खड़ी थी..मैं रीना के नंगे जिस्म को देख रहा था और सिमरन मेरे लंड वाले हिस्से को…वो तो रीना की तरफ देख भी नहीं रही थी..

रीना ने सिमरन को देखा तो बोली : अब जल्दी कर…कोई आ गया तो सारा प्लान फेल हो जाएगा..

ओहो….यानी इन दोनों ने पहले से ही प्लान बनाया हुआ था, मुझसे चुदने का…वैसे मुझे अंदाजा तो था, पर ये बात मुझे बता देगी, ये नहीं पता था.

रीना का छोटा सा शरीर और उसकी छोटी ब्रेस्ट, और मखमली गांड को देखकर तो मेरे लंड ने अंडरवीयर को भी फाड़ डालने की सोच ली.

सिमरन ने एक बार फिर से बाहर देखा की कोई आ तो नहीं रहा, अब बारिश और भी तेज हो चुकी थी, किसी के आने का तो सवाल ही नहीं था.

उसने अपनी जींस को उतारा, नीचे उसने मेचिंग पर्पल कलर की जाली वाली पेंटी पहनी थी…उसने हाथ पीछे इए और अपनी ब्रा को उतार दिया, ऐसा करते हुए उसने मेरी तरफ पीठ कर ली, साली शरमा रही थी मुझसे…और फिर झुककर उसने अपनी पेंटी को भी नीचे गिरा दिया…और ऐसा करते हुए उसकी गोरी और फेली हुई गांड को देखकर मेरा मन डोळ उठा…मैंने आगे बढकर अपने अंडर वीयर को नीचे किया और अपने लंड को सीधा उसकी मखमली गांड के बीच रख कर उसे अपनी तरफ खींच लिया.

अह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह …… स्सस्सस्स

उसके मुंह से एक लम्बी और ठण्ड से भीगी हुई सी सिसकारी निकल गयी…

क्या जिस्म था यार उसका…एक दम मक्खन…और इतनी सोफ्ट स्किन थी उसकी मानो हलवे के अंदर उंगलिया डाल रहे हैं…

मेरे दोनों हाथो ने उसके मोटे-२ मुम्मे पकड़ लिए और उन्हें जोर से दबा दिया…

तभी पीछे से मुझे रीना ने अपने हाथो में जकड लिया..

उसने जब देखा की उसके नंगे बदन को छोड़कर मैं सिमरन की तरफ चला गया हु तो शायद उसने खाली खड़े होना उचित नहीं समझा…

हम तीनो नंगे थे, उस छोटी सी गुफा नुमा जगह पर…

मैं रीना की तरफ घुमा तो उसने मेरे गले में अपनी बाहे डाली और मुझे अपने मुंह की तरफ खींचा, उसके मुंह तक जाने के लिए मुझे नीचे झुकना पड़ा…और मैंने अपने हाथ उसकी गांड पर रखकर उसके दहकते हुए होंठो पर अपने अंगार रख दिए….

उम्म्मम्म्म्म ….मूऊचस्स्सस्स्स्सस्स्स……..अह्ह्हह्ह ….

और फिर मैंने उसे अपनी गोद में उठा लिया…बड़ी ही हलकी सी थी वो…

और मैंने उसके मुंह से अपनी होंठ छुड़ा कर नीचे किये और उसके छोटे-२ अमरूदो पर रख कर उनका स्वाद लेने लगा..

सिमरन दूसरी तरफ खड़ी होकर मुझे और रीना को चूमा चाटी करते हुए देख रही थी.

रीना ने अपनी चूत को मेरे पेट वाले हिस्से पर रखकर घिसना शुरू कर दिया…उसकी चूत से निकल रहा घी मेरे लंड का अभिषेक कर रहा था…और उसे चुदाई के लिए तय्यारी में मदद कर रहा था अपनी चिकनाई देकर..

और फिर ….रीना से जब सहन नहीं हुआ तो उसने अपनी गांड को थोडा और ऊपर उठाया ….और मेरे खड़े हुए लंड के ऊपर लेजाकर छोड़ दिया…वो पहले चुद चुकी थी…पर मेरे लंड का सुपाड़ा थोडा मोटा है..जो उसके लिए बड़ा था, इसलिए वो वहीँ अटक सी गयी….उसने मेरी तरफ देखा…और आँखों ही आँखों में विनती की…मैंने उसकी विनती स्वीकार की और उसकी कमर में हाथ डालकर उसे नीचे की तरफ धकेल दिया…

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ……..ओह्ह्हह्ह्ह्ह गोड…….

उसकी चूत की परते खुलती चली गयी….और मेरे लंड ने उसकी चूत को चीरते हुए अंदर तक अपना अधिकार जमा लिया..

वो मेरे लंड के ऊपर लटक सी गयी थी…

मैंने उसकी ब्रेस्ट को फिर से चूसा और नीचे से धक्के मारकर उसकी चूत का मजा लेना शुरू किया..

साली की चूत इतनी टाईट थी की मुझे गोद में लेकर चोदना मुश्किल हो रहा था…मैंने उसे नीचे उतारा…और दीवार की तरफ घुमा कर खड़ा कर दिया…उसने दीवार पर हाथ रखे और मैंने उसकी चूत के ऊपर अपना लंड..और एक ही झटके में मैं फिर से उसकी चूत के कारखाने में था…और फिर दे दना दन मैंने एक साथ लगभग दस पंद्रह धक्के मारे उसकी चूत में…जो उसके लिए बहुत थे…और वो भरभरा कर झड़ने लगी…

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह …….विशाल…….म्मम्म….क्या चोदता है यार……म्मम्म….मैं तो तुझे देखते ही समझ गयी थी की तू पुराना खिलाडी है…..अह्ह्ह……मजा आ गया….ऐसी चुदाई तो मेरे बॉय फ्रेंड ने आज तक नहीं की…..सच में…..

मेरा लंड उसकी चूत से फिसल कर बाहर आ गया…वो अभी भी तना हुआ था…

मैंने सिमरन को देखा…वो समझ गयी की अब उसका नंबर है…

वो मेरे पास आई और मेरे गले में अपनी बाहे डालकर मुझसे लिपट गयी….और नीचे हाथ करके उसने मेरा लंड हाथ में पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया….रीना की चूत से निकला रस उसकी हथेली पर लग गया…उसने अपने हाथ को ऊपर किया और चाटने लगी..

वो ज्यादा गर्म हो चुकी थी…मेरी और रीना की चुदाई देखकर..

वैसे मैं उसे चुसना और चाटना तो चाहता था पर आज समय नहीं था, बारिश कभी भी बंद हो सकती थी और कोई भी यहाँ आ सकता था…इसलिए सीधा चुदाई करना ही उचित था.

मैंने उसे भी घोड़ी बनाया और वो भी दिवार की तरफ मुंह करके खड़ी हो गयी…मैंने अपना लंड उसकी चूत के ऊपर रखा ही था की वो घूमी और थोडा बाहर निकल कर खड़ी हो गयी….यानी बारिश में.

वो बुरी तरह से भीगने लगी थी…मैं समझ नहीं पाया की वो क्या चाहती है…फिर वो बाहर की तरफ वाली दिवार के ऊपर हाथ रखकर खड़ी हो गयी…यानी वो चाहती थी की मैं उसके पीछे जाकर उसे चोदु…और वो भी बारिश में…

वैसे कोई फर्क तो नहीं पड़ता…क्योंकि हम सभी नंगे थे वहां…कपडे तो सभी के अंदर थे..पुरे सूखे हुए…

मैंने भी मजे लेने के लिए उसका साथ देना सही समझा और बाहर निकल आया…तेज बारिश की बूंदे मेरे नंगे जिस्म पर चुभ रही थी…मैं उसके पास गया और पहले उसे अपने गले से लगाकर बुरी तरह से चूमने लगा…चूसने लगा….और फिर उसका दीवार की तरफ मुंह करके मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर धकेलने लगा..

उसकी गोरी गांड के ऊपर पड़ रही बारिश की बूंदे फिसल कर नीचे गिर रही थी…मैंने भी उसी बारिश के पानी के गीलेपन का फायेदा उठाया और अपने लंड को एक ही झटके में उसकी चूत की झील के अंदर उतार दिया….

उह्ह्ह्हह्ह्ह्ह म्म्म्मम्म्मास्स्सस्स्स्सस्स्स….

वो भी काफी टाईट थी….चुदी तो हुई थी…पर ज्यादा नहीं….और ऐसी चुते चुदने में ज्यादा मजा देती है….

मैंने बारिश में भीगते हुए, उसकी चूत के अंदर अपने लंड को जोरो से पेलना शुरू कर दिया…

अह्ह्हह्ह ….अह्ह्हह्ह …ओह्ह्ह्हह्ह …म्मम्मम्म….

उसकी आँहे तेज बारिश में भी साफ़ सुनाई दे रही थी…

मेरे लंड के सामने ये दूसरी चूत थी, इसलिए वो जल्दी ही झड़ने के करीब आ गया….मैंने अपने हाथ आगे किये , एक हाथ से मैंने उसके मुंह को पकड़ कर अपनी तरफ किया और जोरो से स्मूच करने लगा…और दुसरे हाथ से उसकी मोटी ब्रेस्ट को दबाने लग गया…

येही काफी था उसकी चूत के अंदर का गुबार निकालने के लिए…

अह्ह्ह्हह्ह ……..विष……..आआअल………..अह्ह्ह्हह्ह…

मेरे लंड ने भी अपने रस को उसकी चूत के अंदर खाली कर दिया….ऐसा लग रहा था की उसकी चूत में कोई सक्शन पावर है, जो मेरे लंड का पानी निचोड़ रही है…

जल्दी ही मैं झड कर एक तरफ हुआ, अपने लंड को बारिश के पानी से धोया और अंदर आ गया..

रीना तो कपडे पहन भी चुकी थी..उसने अपनी पॉकेट से एक बड़ा सा हैण्ड टॉवेल निकाला और मुझे दे दिया, अपना बदन सुखाने के लिए…वो छोटा था पर इस समय काफी काम आ रहा था…

मैंने किसी तरह से अपने शरीर का पानी सुखाया और रिकॉर्ड तेजी से अपने कपडे पहन लिए…

उधर सिमरन ने भी थोडा बहुत गीलापन साफ़ करके अपनी कपडे पहन लिए थे…

पर अभी भी मुझे और शायद सिमरन को भी अंदर से काफी गीलापन महसूस हो रहा था..पर बारिश में चुदाई करने के लिए इतना सहन करना तो बनता ही है…

हम तीनो वहीँ बैठकर बाते करते रहे, थोड़ी देर में ही बारिश बंद हो गयी…

हम हलकी बोछारों में वापिस रेस्टोरेंट की तरफ चल दिए…

रास्ते में हमें अंशिका हमारी तरफ आती हुई दिखाई दी…वो काफी परेशान लग रही थी.

पास आते ही अंशिका ने मुझपर प्रश्नों की झड़ी लगा दी…

क्यों गए थे …कहाँ थे….कितना परेशान थी मैं….वगेरह वगेरह…

और फिर वो आगे हुई और मेरे गले से लगकर रोने लगी…

मैं समझ गया की वो सच में परेशान थी मेरे लिए…

और वो दोनों उसे कजन का प्यार समझ कर बस मुस्कुरा कर रह गए.

अब बारिश बंद हो चुकी थी..

हम सभी आगे तक घुमने गए…काफी फोटो भी खींचे…अंशिका अब मेरे साथ ही थी…

रीना और सिमरन अब मुझसे दूर थी, उनका काम तो हो ही चूका था…

रात को हम सब वापिस अपने होटल में आ गए.

और अंदर आते ही अंशिका मेरे ऊपर आ चड़ी.

अंशिका ने मेरे हाथ अपने हाथो के नीचे दबा दिए, और मेरे पेट के ऊपर बैठ कर मुझे बेतहाशा चूमने चाटने लगी..

उसके बूब्स मेरे सामने थे पर मेरे हाथ दबे होने की वजह से मैं उन फलों को अपने हाथों से पकड़ नहीं पा रहा था.

अंशिका : अब बोलो…सुबह से मुझे तरसा के रखा हुआ है…नयी लडकियों के साथ ज्यादा मजा आ रहा था…बोलो…क्या किया उनके साथ…

मैं जानता था की अगर मैंने अंशिका को अभी उनके बारे में कुछ भी बताया तो उसे बुरा लगेगा…

मैं : अरे कुछ भी नहीं यार…वो तो बारिश इतनी तेज थी इसलिए हमें एक जगह पर रूककर खड़े होना पड़ा…वैसे भी वहां पर इस तरह की कोई भी बात पोसिबल ही नहीं थी..

अंशिका : मैं जानती हु तुम्हे…तुम्हारे लिए सब पोसिबल है…तुमने मुझे कहाँ-२ पर लेजाकर….चो…मतलब प्यार किया है….मुझे सब पता है…

कितनी अच्छी तरह से जानने लग गयी थी वो मुझे..

मैंने उसकी आँखों में झाँका ….उसमे मेरे लिए प्यार था…और शायद थोडा इश्र्यापन उन दोनों की वजह से…

मेरा दिल धक् से रह गया…

उसकी आँखों में आंसू थे. मैं उसके साथ यहाँ आया था, और मैंने कहा भी था की ये चार दिन हमारे हनीमून की तरह होंगे..और मैंने उसके विशवास को ठेस पहुंचाई थी…अच्छा हुआ मैंने रीना और सिमरन के साथ चुदाई वाली बात उसे नहीं बताई अभी तक…वर्ना वो टूट जाती..

मैंने उसे नीचे पटक दिया…और उसके ऊपर खुद आ चड़ा.

उसकी आँखों से दो आंसू निकल कर नीचे लुडक गए.

मैं : हे….ये क्या…मेरे होते हुए तुम रो क्यों रही हो…सुनो…मेरा विशवास करो…मैं तुम्हारे अलावा किसी और की तरफ अब आँख उठा कर नहीं देखूंगा…प्रोमिस…

मेरा ऐसा कहते ही उसने मेरे चेहरे को अपनी तरफ खींचा और मेरे लबो के ऊपर अपने थरकते हुए होंठ रख दिए….

आज उसके होंठो में एक अजीब सी प्यास थी…जो वो मुझे पीकर बुझाना चाहती थी..

मैंने अपने आप को उसके हवाले कर दिया..

कभी -२ इस तरह की सिचुएशन में कुछ भी न करो तो दूसरी तरफ से आने वाला मजा अच्छा लगता है…और मैंने आज तक अंशिका को इतना उत्तेजित नहीं देखा था…आज तो वो मुझे खा जाने वाले मूड में थी..मुझे उसके दांतों से बचकर रहना होगा बस.

उसने मेरी टी शर्ट को ऊपर किया और अपनी लम्बी जीभ से मेरे पेट को चाटते हुए ऊपर तक आई और मेरे निप्पल को मुंह में भरकर चूसने लगी…

मेरे पुरे शरीर में सिहरन सी दौड़ गयी….आज पता चला की लडकियों के निप्पलस को चुसो तो क्या होता है उनके शरीर में..

मैंने उसके चेहरे को अपनी छाती पर दबा सा दिया…ताकि वो अपनी जीभ से मुझे ज्यादा गुदगुदी न कर पाए…पर ऐसा करने से उसके तेज दांत मेरे उस हिस्से पर कस से गए…उसने अपना मुंह पूरा खोलकर मेरे निप्पल वाले हिस्से को मुंह में भर लिया और चूसने और काटने लगी…

अह्ह्हह्ह……अंश……इईका……….म्मम्म…ओह माय डार्लिंग……धीरे…..अह्ह्ह..

आज वो जंगली बिल्ली जैसे बिहेव कर रही थी.

मेरा लंड तो पूरा खड़ा हो चूका था, और किसी रोकेट की तरह उसकी चूत की तरफ मुंह किये हुए अपनी लौन्चिंग की तय्यारी कर रहा था.

उसने मेरी टी शर्ट को ऊपर करके निकलना चाहा पर वो गले में अटक गयी…और अपने जंगलीपन में अंशिका ने मेरी टी शर्ट को फाड़ डाला…और दो हिस्सों में करके एक कोने में उछाल दिया..

मैंने भी अपने दोनों हाथो से उसकी टी शर्ट को पकड़ा और पूरा जोर लगा कर उसे फाड़ दिया..

नीचे उसकी ब्लेक कलर की ब्रा थी…मैंने उसे भी एक झटके में दो टुकडो में फाड़कर ऊपर की तरफ उछाल दिया…

अपने इस गर्म खेल में अंशिका को भी मजा आ रहा था…उसे अपने कपड़ो के फटने की कोई चिंता नहीं थी..

अंशिका के होंठ मेरे होंठो से फिर से आ मिले…और इस बार वो ज्यादा गीले थे…और नर्म भी….

और फिर तेज आवाज निकालते हुए उसके होंठ मेरी गर्दन, सीने और पेट से होते हुए….मेरी जींस के ऊपर जाकर अटक गए…

वैसे तो जींस काफी मोटी होती है…पर खड़े हुए लंड की शेप उसमे से भी साफ़ दिखाई दे रही थी…और अंशिका ने अपने दांत मेरे खड़े हुए लंड के ऊपर जमा दिए….मैं कराह उठा..

मैं : अह्ह्हह्ह धीरे जान……येही तो काम आएगा बाद में…..

मेरी बात सुनकर वो मुस्कुरा दी….और जल्दी से मेरी जींस के बटन खोलने लगी.

मैंने अपने हाथ सर के नीचे रख दिए…और उसे उसका “काम” करते हुए देखने लगा.

उसके हाथो में इतनी तेजी थी की मेरी बेल्ट और बटन खोलने में उसे सिर्फ दस सेकेण्ड लगे..और एक ही झटके में मेरी जींस के साथ-२ मेरा अंडरवीयर भी नीचे था…और उसके सामने लहरा रहा था..मेरा मोटा लंड.

अंशिका आज मेरे लंड को ऐसे देख रही थी…मानो पहली बार देखा हो…इससे पहले भी वो ना जाने कितनी बार इसे देख चुकी थी, चूस चुकी थी और अपनी चूत में भी ले चुकी थी…पर आज उसके इरादे ज्यादा खतरनाक थे इसके लिए…

उसके लटकते हुए मुम्मे मेरे लंड को छु रहे थे….उसने मेरे लंड के ऊपर थूक फेंकी और उसे अपने हाथो से लंड पर फेला दी …

और फिर उसने अपने दोनों मुम्मो को पकड़ा और मेरे लंड को उनके बीच में फंसा कर भींच लिया….थूक के गीलेपन और अंशिका के शरीर से निकल रही गर्मी से मेरा लंड उसकी खायी में फिसलने लगा….

अह्ह्ह्हह्ह ……..म्मम्म……

अंशिका के मुंह से अजीब तरह की आवाजे निकल रही थी…सच में वो आज कुछ ज्यादा ही उत्तेजित थी…और इस उत्तेजना में वो आज मुझे हर तरह के मजे देना चाहती थी..और शायद इस तरह से वो अपनी इम्पोर्टेंस दिखाना चाहती थी की मैं उसके अलावा किसी और के बारे में ना सोचु…

मैं : ओह्ह्ह…..अंशिका…..यु आर किलिंग मीई………….अह्ह्ह्ह…..

अंशिका : किल्ल अभी किया कहाँ है मेरी जान…..अभी देखना…

और ये कहते-२ उसने मेरे गीले लंड को अपने मुंह में भरा और उसे गाजर की तरह से चूसने लगी…

आज उसके मुंह की गर्मी मेरे लंड को झुलसा रही थी.

मैं फिर से बोला…..अह्ह्हह्ह अंशु……धीरे ….यार….

अंशिका पर तो मानो कोई भूत सवार था…

उसकी स्पीड में कोई कमी नहीं आई…

अह्ह्ह्हह्ह……आज इरादे क्या है….

अंशिका : इरादे तो तुम्हे खाने के है….और खिलाने के भी..

मैं : खिलाने के …मतलब…

वो धीरे से बेड के ऊपर खड़ी हुई और अपनी जींस और पेंटी को उतार कर वो भी नंगी खड़ी हो गयी….

और चलते हुए वो मेरे मुंह के ऊपर आई, मेरे सर के दोनों तरफ पैर किये और मेरी आँखों में देखते हुए बोली…: नो हेंड टचिंग…ओके…

और ये कहते हुए वो मेरे मुंह के ऊपर अपनी शहद निकाल रही चूत के बल पर बैठ गयी…

मुझे तो उसने हाथ लगाने को मना कर दिया था…मेरे हाथ मेरे सर के ऊपर थे और असहाए से होकर वहीँ पड़े थे…और अंशिका ने मेरे बालो को बुरी तरह से पकड़ा…और अपनी चूत को मेरे मुंह के ऊपर घिसना शुरू कर दिया…मानो गाजर का हलवा बना रही हो..

उसके मुंह से मादक सिसकिया और चूत से गर्म चिंगारियां निकलने लगी…

अह्ह्हह्ह्ह्ह …..विशाल…..उम्म्म्मम्म……..यु आर ओनली माईन…..तुम सिर्फ मुझे चोदोगे……अपनी बीबी…अंशिका को…..समझे….अह्ह्ह्हह्ह…..

वो चीख उठी…क्योंकि उसकी क्लिट जो मेरे मुंह में आ गयी थी….जिसे मैंने जब चुसना शुरू किया तो ना जाने कितना पानी निकल कर फेलने लगा उसकी चूत से…

अह्ह्ह्ह……जोर से….चूस…..न……अह्ह्ह्ह……म्मम्म….

और इतना कहने की देर थी की उसकी चूत से रस का दरिया बहने लगा…..और मेरे मुंह और चेहरे को भीगोते हुए बेड पर गिरने लगा…

अंशिका का चेहरा पीछे की तरफ झुक गया…और पूरा शरीर अकड़ सा गया….शायद इतना ज्यादा वो आज तक नहीं झड़ी थी…

पर उसे मेरे खड़े हुए लंड की भी फिकर थी…

अपने सेंस में लोटने के बाद वो सीधी हुई और पीछे होते हुए मेरी आँखों में देखते हुए, अपनी गीली चूत में मेरे अकड़े हुए लंड को समां कर अपनी फेली हुई गांड को ऊपर नीचे करने लगी….

और फिर उसने अपनी चूत से लंड निकाला…और अपनी गांड के छेद पर टिका दिया…

अंशिका : तुम्हे मेरी एस काफी पसंद है न…आज यहीं पर करो…

मुझे पता था की हर बार की तरह शुरू में उसे अपनी गांड के छेद में लंड डलवाने में फिर से तकलीफ होगी…पर वो आज पुरे मजे देने और लेने के मूड में थी…और शायद इसलिए मुझे अपनी गांड खुद ऑफर कर रही थी.

मैंने भी ज्यादा नखरे नहीं किये…लड़की की गांड अगर खुद ब खुद मिल जाए तो और क्या चाहिए…मेरा लंड उसकी गांड के छेद में अंदर बाहर होने लगा…और अब उसने मेरे हाथो को खुद अपने मुम्मो पर रखकर उन्हें युस करने की इजाजत दे दी थी….मैंने उसके मुम्मे पकडे और नीचे से जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए….और जल्दी ही मेरे लंड का पारा अपने चरम स्तर पर आ गया..और मैंने अपने लंड का सारा रस उसकी गांड नुमा गुफा में समर्पित कर दिया.

हम दोनों को पंद्रह मिनट लगे अपनी साँसों को कंट्रोल करने में….और अगले पंद्रह मिनट लगे फिर से एक और चुदाई करने में…

उस रात हम सोये नहीं….अंशिका अपने “हनीमून” में पूरी तरह से तृप्त होकर वापिस जाना चाहती थी..

और अगले दो दिनों तक मैंने अंशिका के प्यार की खातिर उसका साथ नहीं छोड़ा…और न ही किट्टी मेम और स्नेहा और न ही रीना और सिमरन के बुलाने पर उनकी प्यास बुझाने उनके पास गया…

जब हम वापिस आ गए तो अंशिका को उसके घर पर छोड़कर…मैं अपने बिस्तर पर बैठा हुआ इन चार दिनों के बारे में सोच रहा था.

तभी मेरा सेल बज उठा…वो अंशिका का फ़ोन था..

मैंने फ़ोन उठाया..

अंशिका : उम्मम्म्म्मः…..

उसने मुझे फ़ोन उठाते ही एक जोरदार चुम्मा दिया.

मैंने भी उसका रिप्लाई दिया.

अंशिका : क्या कर रहे हो
मैं : बस तुम्हारे बारे में ही सोच रहा था..

अंशिका : अच्छा…
और ये कहकर वो चुप हो गयी..

मैं : क्या हुआ…कुछ बात है …बोलो न..

अंशिका : मैंने तुम्हे एक बात बतानी थी…
मैं : हाँ बोलो…
अंशिका : वो…वो…मेरी शादी पक्की हो गयी है…

मेरा दिल धक् से रह गया…मेरे मुंह से कुछ न निकला.

अंशिका : दरअसल…नेनीताल जाने से पहले वो लोग आये थे घर पर..और मुझे देखकर गए थे….मैंने तुम्हे जान बुझकर बताया नहीं था….और वापिस आकर मम्मी ने कहा की उन्हें मैं पसंद आ गयी हु…और तुम तो जानते हो….मम्मी कितने समय से मेरी शादी करवाना चाहती थी…उम्र निकल रही है…लड़का एक सोफ्टवेयर कम्पनी में है…अगले दो महीने में शादी भी हो जायेगी…

मैं अब भी चुप था…मुझे शुरू से पता था की अंशिका के साथ मेरी शादी नहीं हो सकती…सिर्फ मजे लेने के लिए थी वो मेरे लिए…पर आज जब उसकी शादी की बात हुई तो मेरे दिल में उसके लिए दबा हुआ प्यार बाहर निकल आया…

अंशिका : मैं जानती हु…इन दिनों में हम अपने शरीर से ही नहीं…दिल से भी काफी करीब आ गए हैं…एक बात कहू…मैं अपना पहला बच्चा तुमसे ही चाहती हु…तुम हमेशा से येही चाहते थे न…की मुझे प्रेग्नेंट करो…शादी के बाद मुझे तुम ही प्रेग्नेंट करना…समझे…

उसकी बात सुनकर मेरी आँखों से आंसू निकल आये..

मेरी हर बात का कितना ख्याल रखती है अंशिका…

मैं कुछ बोलने लगा तो अंशिका ने मुझे चुप करा दिया..

अंशिका : नहीं विशाल…कुछ मत बोलो अभी…मैं जो कह रही हु वो सुनो तुम….अपनी पढाई पूरी करो….और एक अच्छी सी नौकरी भी…और फिर तुम्हारी शादी मैं करवाउंगी….कनिष्का के साथ…

उसकी बात सुनकर मैं हेरान रह गया…पर मैं मना भी नहीं कर पाया…उसकी बात में कोई बुराई भी नहीं थी…कनिष्का जैसी पत्नी मुझे नहीं मिल पाएगी…वो मुझे अच्छी भी लगती है….

मैं उसकी बात सुनता रहा..

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