फ़ोन सेक्स – मोबाइल फ़ोन सेक्स part 18

स्नेहा का रस से भीगा हुआ मुंह मेरे मुंह के बिलकुल सामने था….जैसे ही मेरे होंठ वहां पहुंचे स्नेहा ने मुझे थोड़ी जगह देकर अपनी माँ की चूत को मुझे चूसने के लिए दे दिया, पर काफी देर तक भी जब मैंने मुंह नहीं हटाया तो वो अपनी जीभ से मेरे होंठो को हटाने का असफल प्रयास करने लगी….पर मुझे इतना मजा आ रहा था की मैंने उसे वापिस वहां पर मुंह पगाने का कोई मौका नहीं दिया…

पर वो भी कहाँ मानने वाली थी, उसने अपने होंठो को सीधा मेरे होंठो पर लगा दिया और उन्हें किसी पागल कुतिया की तरह से चूसने लगी….इतना मीठापन था उसके होंठो में और इतनी तड़प थी उसकी सकिंग में की थोड़ी देर तक तो मैं उसकी माँ की चूत को भी भूल गया….और इसका फायेदा उसने बखूबी उठाया….मेरे होंठो को एकदम से चुसना छोड़कर उसने फिर से किट्टी मेम की चूत को चुसना शुरू कर दिया…

मैं उसकी चतुरता देखकर दंग रह गया…

पर मैंने भी हार नहीं मानी….मैं एकदम से उठा , अपने लंड को बड़ी मुश्किल से किट्टी मेम के मुंह से छुड़ाया, और नीचे आ गया…

अब मेरे सामने किट्टी मेम की चूत को चूस रही स्नेहा खड़ी थी….मैंने उसकी उठी हुई गांड को अपने हाथो से दबाना शुरू कर दिया….उसकी गांड अभी भी कुंवारी थी…पर आज उसकी गांड मारने का मौका नहीं था, अगर उसकी चीख बाहर निकल गयी तो गड़बड़ हो जायेगी…इसलिए मैंने अपना हाथ थोडा नीचे किया और उसकी चूत का जाएजा लिया, जिसे मैंने अभी थोड़ी देर पहले ही मारा था, पर उसके अन्दर की गर्मी देखकर लग रहा था की वो फिर से तैयार है….मैंने उसकी चूत के आगे अपना लंड लगाया, और एक तेज धक्का मारकर अपने सुपाड़े को अन्दर धकेल दिया….

अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ममम्म्म्मी ………….

चुदते हुए उसकी मम्मी इतने पास थी , ये बड़ा ही सोभाग्य था उसके लिए…

मेरे धक्के से वो अपनी माँ की चूत को चुसना भूल गयी..और उसने अपने दोनों हाथ उनकी जांघो पर रख दिए…और अपनी आँखे बंद करके अगले धक्के का इन्तजार करने लगी…जैसे ही अगला धक्का आया, उसकी चूत ने मेरे लंड को पूरी तरह से अपने अन्दर उतार लिया…और उसका शरीर भी थोडा आगे खिसक कर लगभग अपनी माँ के ऊपर तक आ गया…

मैंने तीन-चार धक्के और मारे तो वो उछल कर अपनी माँ के ऊपर चढ़ गयी….और सीधा जाकर अपने मुंह में इकठ्ठा किया हुआ शहद वापिस उन्हें पिलाने लगी…

म्मम्मम्म ……ओह्ह्ह्ह….स्नेहा…….म्मम्मम….

वो दोनों इतनी बुरी तरह से एक दुसरे के होंठो को नोच रहे थे मानो उन्हें जड़ से उखाड़ देना चाहते हो…

मेरे लंड के चारो तरफ स्नेहा की चूत थी और उसके थोडा सा नीचे ही उसकी माँ की भी…मैंने अपने लंड को पूरा बाहर निकाल लिया…और नीचे की तरफ पड़ी हुई किट्टी मेम की चूत के ऊपर रखकर एक तेज शोट मारा….

अह्ह्हग्ग्ग्गघ्ह्ह्ह ………….साले……बता तो देता…..अह्ह्हह्ह….की डाल रहा है…..म्मम्मम्मम……..ओह्ह्ह्ह विशाल…….कितना बड़ा लंड है तेरा…..अम्म्म्मम्म……….जोर से चोद मुझे अब……..जोर से…..अह्ह्ह्ह…..

उसकी बोलती जुबान को स्नेहा ने अपने होंठो से फिर से बंद कर दिया…..

फिर तो मैंने जो धक्के मारे किट्टी मेम की चूत में…उनका हिसाब ही नहीं था…..उनकी मोटी टांगो ने मेरी कमर को अपने जाल में बाँधा हुआ था…ऐसा लग रहा था की वो मुझे अपनी चूत में खींच रही है…..मैंने हाथ आगे किये और अपनी माँ के ऊपर लेती हुई स्नेहा के गीले शरीर पर फिराने लगा…और उसके मुम्मो को दबाने लगा…मेरे हाथ उसके और उसकी माँ के मुम्मो के बीच पिस गए थे और मुझे दोनों तरफ से गुदगुदेपन का एहसास करा रहे थे…

किट्टी मेम का शरीर अकड़ने सा लगा….उन्होंने अपनी कमर को हवा में उठाना शुरू कर दिया, जैसे कोई प्लेन हवा में उडता है, उनके ऊपर लेटी हुई स्नेहा को तो फ्री में झूले मिलने लगे थे.

किट्टी मेम अपनी चूत को मेरे लंड के ऊपर बुरी तरह से दबा रही थी….मुझे लगा की मेरे लंड ने उनकी चूत के अन्दर की उन परतो को भी खोल दिया है, जहाँ आज तक कोई और नहीं गया….

ओह्ह्ह्हह्ह फक्क्कक्क्क………म्मम्मम……विशाल्ल्ल्ल….ययु आआर…….टूssssssssssssss गुड ……

स्नेहा भी अपनी माँ के ऊपर से हट गयी और मेरी तरफ मुंह करके खड़ी हो गयी….
अब किट्टी मेम टेबल पर लेटी थी और मैं नीचे खड़ा होकर उनकी चूत मार रहा था, और उनकी बेटी टेबल पर मेरी तरफ मुंह करके खड़ी थी…मुझे पता था की वो क्या चाहती है, पर मैंने अपनी तरफ से कोई पहल नहीं की और किट्टी मेम की चूत मारने में लगा रहा….

उससे और सहन नहीं हुआ और उसने मेरे सर के पीछे हाथ रखकर होले से अपनी चूत को मेरे मुंह से लगा दिया…..और एक तेज सिसकारी मारकर, अपनी आँखे बंद करके, अपने पंजो के बल, मेरे मुंह के ऊपर बैठ सी गयी…..

अह्ह्ह्हह्ह स्स्स्सस्स्स्स……म्मम्मम्म……

मैंने भी अपनी जीभ पूरी तरह से बाहर निकाल ली थी जो उसकी चूत के लिए उस समय पार्ट टाईम लंड का काम कर रही थी, मेरी तनी हुई जीभ के ऊपर वो अपनी चूत को डुबकियाँ दिलवा रही थी, और अपने शरीर को गिरने से बचने के लिए मेरे सर के ऊपर अपने हाथो को रखकर बेलेंस बना रही थी..

अह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्हह्ह….विशाल……म्मम्मम…ओह्ह्हह्ह गोड…..म्मम्म….सक……सक्क्क्क माय पुस्स्सी……फक्क्क्क माय पुस्स्सी……विद ……यूर टंग……..म्मम्मम्म…..ओह माय गोड …..ओह माय गोड……आई एम् कमिंग……कमिंग……कमिंग…….ओह्ह्ह्ह फक्क्क्क……..यु मदर फकर…..अह्ह्ह….

साली, मुझे माँ की गाली दे रही थी…जबकि उसकी माँ को मैं चोद रहा था..

अपनी चूत से उसने अपनी माँ की ही तरह शहद का झरना खोल दिया…..मेरे मुंह से टकराकर वो झरना नीचे की तरफ गिरने लगा….अपनी बेटी के गर्म रस का एहसास अपने ऊपर पाते ही किट्टी मेम की चूत के अन्दर से भी अपनी बेटी की ही तरह एक और तूफ़ान निकलने लगा…..और मैं उन दोनों माँ बेटियों के रस में नहाकर अपने आप को गोर्वान्वित महसूस कर रहा था.

जब तूफ़ान थमा तो उसे मैंने अपने मुंह से उतारा और वहीँ टेबल पर उसकी माँ के पास लिटा दिया….

दोनों ने एक दुसरे को चूमना चाटना शुरू कर दिया…मैंने सोचा की इन्हें यही छोड देना चाहिए, मेरा इन्तजार जो हो रहा था.

फिर मैंने पास ही पड़े हुए टोवल से अपने शरीर को पोंछा और अपने कपडे पहन कर अपने कमरे की तरफ भागा….वहां मेरी “बीबी” अंशिका मेरा इन्तजार जो कर रही थी….

और आज उसके लिए मेरे पास एक नया तरीका था, जिसे मैंने अभी माँ-बेटी को चोदते हुए ही सोचा था.

जैसे ही मैं अपने कमरे के पास पहुंचा, मेरा फ़ोन फिर से बजने लगा, ये वोही अनजान नंबर था..

मैं : हेल्लो..
आवाज : बड़े मजे ले रहे हो तुम तो…किट्टी मेडम और उनकी बेटी दोनों को एक साथ ही चोद डाला तुमने तो

मैं उसकी बात सुनकर हेरान रह गया…इसका मतलब वो मुझे देख रही थी..

उसकी आवाज में एक अजीब सा भूखापन था, यानी जब वो ये बात बोल रही थी, मानो अफ़सोस के साथ कह रही थी की ये सब उसके साथ क्यों नहीं हुआ..

मैंने भी अँधेरे में तीर मारा : तुम हम सब को देख रही थी और मैं तुम्हे देख रहा था..

अब हेरान होने की बारी उसकी थी.
आवाज : यानी…यानी…तुमने मुझे पहचान लिया…

मैं : हाँ…पहचानन भी गया और जान भी गया…तुम्हारे चेहरे के एक्सप्रेशन मैं अँधेरे में भी साफ़ देख पा रहा था..शीशे में से..

मैंने ये इसलिए कहा क्योंकि उस कमरे से बाहर की तरफ देखने का एकमात्र साधन वो खिड़की ही थी, जिसपर शीशा लगा हुआ था.

वो मेरे जाल में फंस सी गयी..
मैं : अब कल तक का इन्तजार करने का टाइम नहीं है मेरे पास, मैं अभी नीचे वापिस आ रहा हु, जल्दी से तुम भी आ जाओ..समझी..

वो कुछ न बोली और फोन रख दिया.

मैंने कमरे में झांककर देखा, अंशिका सो रही थी, मेरा इन्तजार करते-२ उसकी आँख लग चुकी थी, उसने अपने पुरे शरीर पर रजाई ओढ़ रखी थी, और उसका सुन्दर सा चेहरा बड़ा हो मोहक लग रहा था, उसने शायद थोडा मेकअप भी कर रखा था, पर इस समय मैं नीचे खड़ी उस लड़की के बारे में सोच रहा था, इसलिए मैंने दरवाजा बंद किया और वापिस नीचे की तरफ भागा.

किट्टी मेम और स्नेहा वापिस जा चुके थे, कमरे की लाईट भी बंद हो चुकी थी.

मैं पार्क में जाकर एक बेंच पर बैठ गया, तभी दूसरी तरफ से एक लड़की आती हुई दिखाई दी.

काफी अँधेरा था वहां पर…पर जैसे-२ वो पास आती जा रही थी, उसका चेहरा साफ़ होता जा रहा था.

वो एक छोटे से कद की लड़की थी, वैसे भी जिस लड़की सिमरन के बारे में मैं सोच रहा था वो तो शाम को ही स्नेहा के साथ बैठी थी, इसलिए उसके बारे में अंदाजा लगाना तो मैंने पहले ही छोड़ दिया था.

ये लड़की तो काफी सिंपल सी लग रही थी, चेहरे पर चश्मा था, रंग गोरा था, ब्रेस्ट भी ज्यादा बड़ी नहीं थी, कद भी पांच फूट दो इंच के आस पास था, कुल मिला कर काफी साधारण सी थी वो..

मेरे पास आकर वो खड़ी हुई तो मैंने हेरानी से पूछा : तुम थी वो…??

मेरी बात सुनकर वो मुझे आश्चर्य से देखने लगी : इसका मतलब…तुमने मुझे नहीं देखा था…ओह माय गोड…मतलब तुमने मुझे झूट कहा था की तुमने मेरा चेहरा देखा अभी..

मैं मुस्कुरा दिया…उसका चेहरा उतर सा गया था…वैसे जैसे भी थी वो, उसकी आवाज सुनते ही मेरे पुरे शरीर में करंट सा दोड़ने लगा, इतनी गहरी आवाज थी उसकी की मन कर रहा था की वो मेरे कानो के पास खड़ी होकर बोलती रहे…

मैं : अब तुमने मुझे चेलेंज जो इया था, और चेलेंज मैंने पूरा कर दिया…अब जो मैं चाहूँगा, वोही करना होगा तुम्हे..

उसके चेहरे के रंग बदलने लगे…

मैं समझ गया की ये एक जवानी की देहलीज पर कदम रख रही वो लड़की है जिसने अपने आस पास हो रही हलचल को महसूस करके अपने ख्वाब बुने है, किसी लड़के के साथ मजे लेने के..पर शायद उसका चेहरा और शरीर ऐसा नहीं था जो आजकल के लडको को लुभा सके, आजकल के लडको को तो बस मोटी-२ ब्रेस्ट और अपने सुन्दर शरीर और चेहरे से घायल करने वाली लड़कियां ही पसंद है, और ये लड़की उस केटागिरी में नहीं आती.

और शायद मुझे देखकर और मेरे अंदाज को देखकर इसने सोचा होगा की मेरे साथ कुछ पंगा लिया जाए इसलिए वो मुझे फोन कर रही थी…वो तो मेरा दिमाग चल गया और ये मेरी बातो में आकर मेरे सामने आ गयी, वर्ना शायद ये मुझे कल भी न मिलती. क्योंकि मैं इस लड़की के बारे में तो सोच भी नहीं सकता था की ये मुझे फोन कर रही होगी.

मैं : चलो छोड़ो सब बातो को…तुम्हारा नाम क्या है..

लड़की : माय नेम इस रीना ….और मैं यहाँ अपनी दीदी के साथ आई हु, उनका नाम माया है..

मैं उसके शरीर को घूरने लगा..

रीना : क्या देख रहे हो इस तरह..

मैं : देख रहा हु की तुमने जो अपने फिगर का साईज बताया था, ये कुछ कम सा लग रहा है…
रीना : अच्छा जी…नाप कर देख लो…एक इंच भी कम निकले तो जो कहोगे वो करुँगी मैं…

बड़ी ही बडबोली टाईप की थी वो…मैं उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दिया.

मैं : मेरे पास इंचीटेप तो है नहीं..पर जैसा मैंने कहा था, मैं अपने हाथो से नाप कर बता सकता हु ..

मेरी बात सुनकर उसके चेहरे का रंग लाल हो उठा…

उसके होंठ कांपने से लगे.

मैं अपनी जगह से उठा और उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया..

उसकी तेज साँसे मैं साफ़ सुन पा रहा था.

उसके पीछे जाकर मैंने अपने हाथ उसके पेट वाले हिस्से पर रख दिए…वो सिहर सी उठी..

उसने पायजामा और टी शर्ट पहनी हुई थी…

मैंने झुक कर अपना चेहरा उसके कंधे पर रख दिया.

मैं : तुम्हारे शरीर के हर हिस्से का नाप लेकर मैं तुम्हे बता सकता हु….
रीना : हननं……

उसकी तो जैसे गिग्घी सी बंध गयी थी…

मैं : तुम्हारे पेट पर तो कुछ भी नहीं है….इतना सपाट है ये….

मैंने टी शर्ट और पायजामे के बीच से उसके पेट वाले हिस्से के अन्दर अपने हाथ खिसका दिए…

उसका सर मेरी तरफ झुक सा गया…

उसके दोनों मुम्मे और उनकी उचाई अब मेरे सामने थी..

मैंने अपने हाथ ऊपर किये और उसके छोटे-२ स्तनों के ऊपर हाथ रखकर सहलाने लगा..

वाव…..इतने कठोर थे वो दोनों….शायद उसने अपनी ब्रा काफी टाईट करके पहनी हुई थी…

मैंने हाथ पीछे लेजाकर अपने एक ही हाथ से उसकी ब्रा के स्ट्रेप को खोल दिया…

प्लक की आवाज के साथ उसकी ब्रा खुल गयी….और उसके मुम्मे आगे की तरफ लटक गए..

अब मैंने उन्हें अपनी हथेली में भरा, सच में..ये अब ज्यादा बड़े लग रहे थे…और शायद वो ठीक ही कह रही थी…33 तो होंगे ही वो…

मैं : तुमने सही कहा था…इनका साईज तो 33 ही है..

वो मेरी बात सुनकर रीना मुस्कुरा उठी.

मैंने अपने हाथ अन्दर डाल कर उसकी ब्रा को ऊपर किया और उसके नंगे बूब्स पकड़ कर उनके साथ खेलने लगा.

इतने तने हुए और अपनी शेप में आये हुए मुम्मे मैंने आज तक नहीं देखे थे.

इतने सोफ्ट थे मानो जेल से भरा गुब्बारा….जिसे जितना दबाव उतना ही मजा आये…

मैंने उसकी गर्दन पर अपने होंठ रख दिए….वो तड़प सी उठी..

मैंने अपना एक हाथ सीधा उसके पायजामे में डालकर उसकी गरमा गरम चूत के ऊपर रख दिया…वो एक तेज सिसकारी मारकर अपनी गांड वाले हिस्से को मेरे लंड के ऊपर दबाने लगी…

वैसे जिस तरह की हरकते कर रही थी, मुझे पक्का मालुम था की वो वर्जिन थी अभी तक.

वो मेरी तरफ घूमी और एकदम से अपने होंठो से मुझे चूसने लगी..

इतने मुलायम थे उसके होंठ…एक अजीब सी तपिश थी उनमे..शायद पहली बार चूस रही थी वो किसी के होंठ.

तभी मेरा सेल बज उठा…मैंने हडबडा कर उसके होंठो से अपने आप को छुड़ाया…वो अंशिका का फोन था.

मैं : हाँ…हेल्लो…

अंशिका : विशाल….कहाँ हो तुम…मैं कितनी देर से इन्तजार कर रही थी तुम्हारा..

मैं : अरे मैं तो आया भी था, तुम सो रही थी इसलिए वापिस नीचे आकर टहलने लगा…बस अभी आया ऊपर..

ये कहकर मैंने फोन रख दिया.

रीना मेरी तरफ देख रही थी.

मैं : देखो रीना ..मैं समझ सकता हु की इस समय तुम क्या चाहती हो…और सच बताऊ…मैं भी तुम्हे पुरे मजे देना चाहता हु…पर अंशिका को शक न हो जाए…इसलिए कल तक का इन्तजार करो….तुम्हारी प्यास मैं बुझाकर रहूँगा….ओके..

मेरी बात सुनकर वो शर्मा सी गयी…चुदने के लिए पूरी तरह से तैयार थी वो भी…पर मेरी बात शायद समझ गयी थी वो…और पहली बार में ज्यादा जिद करके वो बुरी भी नहीं बनना चाहती थी शायद…

मैं वापिस ऊपर की तरफ भागा…अंशिका के पास.

मैंने दरवाजा खोला और अन्दर से बंद करके मैं अंशिका की तरफ मुड़ा, तो उसे देखकर मैं दंग सा रह गया, वो बेड के ऊपर , लाल साडी में सजी हुई, दुल्हन की भाँती बैठी थी, जैसे मैं उसका दूल्हा, सुहागरात वाले दिन, कमरे में आया हु.

वो अपने साथ साडी और ये सब सामान भी लायी थी, यानी वो ये सब करना चाहती थी, और जब मैं पहले भी कमरे में आया था तो उसने अपने ऊपर रजाई ले रखी थी, इसलिए शायद मैं उसके कपडे देख नहीं पाया था.

लाल साडी, बिंदी, लिपिस्टिक और हाथो में चुडा, जो ब्याहता लडकिय पहनती है, मैं तो उसके रंग रूप को देखकर मंत्र्मुघ्ध सा रह गया.

मैं धीरे-२ चलकर बेड के पास पहुंचा, वो उठी और मेरे पैरो को हाथ लगाने लगी, मैंने उसे बीच में ही पकड़ लिया..

मैं : अरे अंशिका…ये क्या..कर रही हो..
अंशिका : वही…जो एक शादीशुदा लड़की करती है, शादी के बाद..
मैं : देखो अंशिका…इन सबकी कोई जरुरत नहीं है…मैं वो सब तो कर ही रहा हु न तुम्हारे साथ ….

मेरा मतलब चुदाई से था…जो वो समझ गयी..और उसके चेहरे पर हल्का सा गुस्सा आ गया..

अंशिका : विशाल…तुम ये बात कभी नहीं समझ सकते, की मेरे दिल में इस समय क्या चल रहा है…मैं जानती हु और तुम भी की हमारी शादी कभी नहीं हो सकती, पर सच मानो, मैंने जब से तुमसे फिसिकल रिलेशन बनाया है, हर लड़की की तरह, मैंने भी तुम्हे अपनी जिन्दगी और दिल का शेह्जादा माना है..और यही कारण है की यहाँ आकर मैंने तुमसे हसबेंड और वाईफ की तरह रहने को कहा, और इन सब के बीच मैंने सोचा की क्यों न अपनी जिन्दगी की सुहागरात भी मैं यही मना लू, तुम्हारे साथ…मुझे मालुम है की अब तुम्हारे लिए इन सबका कोई मतलब नहीं है, पर मेरे लिए ये बहुत मायने रखता है…

ये सब कहते-२ उसकी आँखों में आंसू आ गए थे..

और सच कहू, आज पहली बार मेरे दिल में एक तीस सी उभरी थी, ये सोचकर की मेरी शादी अंशिका के साथ क्यों नहीं हो सकती…इतना प्यार करने वाली मुझे और कहाँ मिलेगी, हम दोनों एक दुसरे को कितना समझते हैं, एक दुसरे को हर तरह का शारीरिक सुख तो दिया ही है..पर क्या मैंने कभी अंशिका की तरह उसके आगे भी सोचा है…सेक्स के अलावा मैंने क्या कभी अंशिका को अपने प्यार, अपने महबूब की नजर से देखा है….नहीं…ऐसा कभी नहीं किया मैंने…मैं तो हमेशा से सेक्स के पीछे ही भागता रहा और अंशिका ने भी मुझे कभी मना नहीं किया…और आज जब उसके मन में इस तरह के विचार आ रहे है तो मुझे भी उसकी भावनाओ को समझना चाहिए…और उसका साथ देना चाहिए..

मैंने उसे गले से लगा लिया…भरी भरकम साडी में लिप्त उसका बदन मेरी बाहों में आते ही बेकाबू सा हो गया और वो फूट-फूट कर रोने लगी…

अंशिका : ओह्ह्ह….विशाल…..तुम नहीं समझ सकते …मैं तुम्हारे बारे में क्या सोचती हु….उनहू…..उनहू….

मैंने उसका चेहरा अपने हाथो में पकड़ा और उसके आंसूओ के ऊपर मैंने जीभ फेरकर उन्हें पी लिया…

मैं : अपनी सुहागरात वाले दिन तुम रो रही हो…लगता है तुम्हे डर लग रहा है की मैं कहीं चुदाई करते वक़्त तुम्हे तकलीफ न पहुँचाऊ…है न..

मेरी बात सुनकर उसके रोते हुए चेहरे पर हंसी आ गयी.

मैं : मैं वादा करता हु अंशिका, मैं तुम्हारे साथ सिर्फ सेक्स नहीं…बल्कि प्यार से भी प्यारा, प्यार करूँगा…जैसा आजतक किसी ने भी नहीं किया होगा…

मैं कहता जा रहा था और उसकी गर्दन और गालो पर किस्स देता जा रहा था.

उसका शरीर कांपने सा लगा…ऐसा लग रहा था की जैसे ये सब उसके साथ पहली बार हो रहा है.

मेरा लंड भी अपने रूप में आने लगा था.

मैंने उसकी साडी का पल्लू नीचे गिरा दिया…और उसकी साडी को खींच कर निकालने लगा, वो साडी के निकलने के साथ-२ घुमती जा रही थी.

और अंत में मैंने उसकी भारी भरकम साडी को निकाल कर एक तरफ रख दिया.

लाल रंग के ब्लाउस में से उफन कर बाहर आते हुए उसके गोरे-चिट्टे मुम्मे देखकर तो मैं उनकी सुन्दरता में खो सा गया…मैंने आज पहली बार गोर से देखा की उसके गोरे मुम्मे के ऊपर एक छोटा सा तिल है, जो शायद उन्हें बुरी नजर से बचने के लिए ही बनाया गया है.

और नीचे उसका हल्का सा थुलथुला और गोरा पेट था, जिसके अन्दर घुसी हुई उसकी नाभि बड़ी ही दिलकश सी लग रही थी.

और नीचे था उसका पेटीकोट , जो इतना टाईट था की उसकी गांड और जांघो की ऊँचाईया अलग ही चमक रही थी.

इतनी सेक्सी मैंने अंशिका को आज तक नहीं देखा था.

मैंने अपनी टी शर्ट उतार दी और अपने पायजामे को भी उतार कर साईड में रख दिया, अब मैं सिर्फ जोक्की में खड़ा था, अपनी तोप को उसकी तरफ ताने हुए.

मैंने अंशिका से कहा : याद है, मैंने कहा था की तुम्हे नेनीताल में जाकर मेरी हर बात माननी होगी…अब उसका टाईम आ गया है..

अंशिका : वो बात तुमने ना भी कही होती , तो भी मैं तुम्हारी किसी बात को मना नहीं करती आज..बोलो क्या करू, जिससे तुम खुश हो जाओ..

मैं सोफे के किनारे पर बैठ गया..और आधा पीछे की तरफ लेट कर उसकी आँखों में देखकर मैंने कहा : अपने बचे हुए कपडे उतारो…एक – एक करके…और साथ-ही-साथ नाचती भी रहो…धीरे-धीरे.

अंशिका मेरी बात सुनकर मुस्कुरा उठी…पर कुछ न बोली..

और अगले ही पल उसकी गजब सी कमर ने मटकना शुरू कर दिया.

वो इतने सिडक्टिव तरीके से अपने बदन को हिला रही थी की मुझे अपने ऊपर सबर करना मुश्किल सा हो रहा था..मन कर रहा था की अभी अंशिका को बेड पर पटक कर उसे चोद डालू…पर आज कुछ अलग करना था..इसलिए मैंने अपने आप पर काबू पाया.

अंशिका ने अपने हाथ आगे किये और ब्लाउस के हूक खोलने शुरू कर दिए.

और जल्दी ही उसने ब्लाउस को खोल दिया और अपने हाथ ऊपर करके उसे निकाल कर मेरे मुंह के ऊपर फेंक दिया…

उसकी बगलों से निकले पसीने की महक को सूंघकर मेरे लंड ने बगावत का एलान कर दिया.

उसके बाद उसने अपने इलास्टिक वाले स्ट्रेचेबल पेटीकोट को भी खींच कर नीच गिरा दिया..

उसकी मोटी-२ जांघे और सुदोल पिंडलिया देखकर मेरा मन उन्हें चूमने को करने लगा.
अंशिका ने पिंक कलर की ब्रा और पेंटी पहनी हुई थी और वो भी जाली वाली..मैंने ये सेट उसके ऊपर पहले कभी नहीं देखा था…लगता है, ये अपनी “सुहागरात” के लिए स्पेशल लेकर आई है.

और फिर उसने धीरे-२ डांस करते हुए अपनी ब्रा और पेंटी भी खोल कर मेरी तरफ उछाल दी..उसकी पेंटी के गीलेपन को देखकर ही मुझे उसकी चूत से उफान मार रहे मीठे शहद का आभास हो गया था.

आज उसके निप्पल कुछ ज्यादा ही चमक रहे थे.

अंशिका ने मुझे उसके निप्पलस को घूरते देखकर कहा : क्या देख रहे हो…मैंने इनपर तुम्हारे लिए कुछ लगाया है…छुकर देखो जरा..इन्हें..अपने होंठो से..

वो मेरी तरफ कमर मटकाती हुई आई…और मेरे ऊपर आधी लेटकर अपने मोटे मुम्मे को पकड़कर मेरे मुंह के अन्दर धकेल दिया..

सच में…उसने अपने निप्पलस के ऊपर कुछ लगाया था, जिसकी वजह से वो चमकने के साथ-२ मीठे भी लग रहे थे…मन कर रहा था की मैं उन्हें चूसता ही जाऊ..चूसता ही जाऊ…

मेरे हाथ अपने आप उसकी गांड के ऊपर चले गए..और उन्हें दबाने लगे.

पर मेरा खेल अभी ख़त्म नहीं हुआ था…मैंने अंशिका को पीछे किया…और कहा : तुम्हे मैंने अभी और कुछ करने को नहीं कहा…पहले तुम मेरे सामने अपनी चूत के साथ खेलो…

अंशिका मेरी बात सुनकर मुझे सवालिया नजरो से देखने लगी…पर वादे के मुताबिक कुछ न बोली…और वहीँ मेरे बेड के ऊपर, मेरे दोनों तरफ टाँगे करके वो खड़ी हो गयी…उसकी गीली चूत मुझे नीचे लेटे हुए साफ़ नजर आ रही थी…मैंने भी अपने जोक्की को एक झटके में नीचे कर दिया और अपने तने हुए लंड को हाथ में लेकर ऊपर की तरफ देखते हुए उसे हिलाने लगा.

अंशिका ने अपनी चूत के ऊपर अपनी उंगलिया रखी और उसे मसलने लगी.

उसकी चूत से छिटक कर एक-दो रस की बूंदे मेरे पेट के ऊपर गिरी, जिसे मैंने हाथ से समेट कर अपने लंड के ऊपर मल दिया…

वो मुझे देखकर अजीब से मुंह बना रही थी, मानो कुछ सोच रही थी, और अपने होंठो को गोल करके अजीब तरीके से आवाजे निकालने लगी..

आग्ग्गग्ग्ग्घ …….विशाल्लल्ल्ल्ल…….ओह माय लव…….म्मम्म…..स्सस्सस्स…..यु आर…..माय लाईफ…..ओह्ह्ह्ह.. …म्मम्मम्म…… ओह्ह्ह्ह गोड…….म्मम्मम ….

मेरे लंड ने तो थोड़ी देर पहले ही दो बार पानी छोड़ा था, इसलिए उसे दोबारा डिस्चार्ज होने में टाइम लगना था…पर अंशिका का ये पहला मौका था, इसलिए सिर्फ पांच मिनट के अन्दर ही वो बुरी तरह से हांफती हुई, मेरे ऊपर मीठे रस की बारिश करने लगी…

अह्ह्ह्हह्ह विशाल्ल्ल्ल…..आई एम् कमिंग……

उसने कमिंग बाद में बोला पर उसके रस ने मुझे पहले से ही भिगो दिया था..

वो निढाल सी होकर मेरे ऊपर गिरने सी लगी, मैंने उसकी मोटी गांड को पकड़ा और सीधा अपने खड़े हुए रोकेट के ऊपर लेंड करवा दिया….जैसे ही मेरे लंड ने उसकी गीली चूत को छुआ, वो उसके अन्दर तक घुसता चला गया और फिर उसे वापिस आसमान की सेर कराने चल दिया.

अह्ह्हह्ह्ह्ह फक्क्क्कक्क्क…….अंशिका……यु आर…..सो गुडsssssssssssssssssss ….
मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर किसी पिस्टन की तरह से चलने लगा, इतनी स्लिपरी चूत तो आज तक नहीं दिखी थी उसकी.

वो अपने मुम्मे मेरे मुंह के ऊपर बुरी तरह से पिस रही थी, जिन्हें मैं अपने दांतों से और होंठो से काटने और चूसने में लगा था.

मैंने एक ऊँगली उसकी गांड के छेद में डाल दी…और वो झनझनाती हुई सी एक बार और मेरे लंड के ऊपर झड़ने लगी…

मैंने अंशिका को अपने हाथो में उठाया, लंड अभी भी उसकी चूत में ही था, और मैंने उसे बेड पर पीठ के बल लिटाया और खुद उसके ऊपर आ गया, और फिर उसकी टांगो को फेलाया और दे दना दन उसकी चूत के अन्दर धक्के मारने लगा….

उसने अपने हाथ अपने सर के ऊपर करे हुए थे, और उसके मोटे चुचे मेरे हर धक्के से बुरी तरह से हिल रहे थे…

पुरे कमरे में फचा फच और उसकी सिस्कारियों की आवाजे गूँज रही थी..पलंग भी बुरी तरह से हिल रहा था.

और फिर जब मुझे महसूस हुआ की मेरा रस निकलने वाला है, मैंने अपने लंड को बाहर निकाला, पर तभी उसने मेरे पीछे टांग बांधकर मुझे फिर से अपनी चूत के अन्दर खींच लिया और मेरे होंठो को चूसने लगी…और बीच में रुक कर बोली…..: मेरे अन्दर ही करो……आज की रात मैं तुम्हे पूरी तरह से महसूस करना चाहती हु…

मुझे उसकी इस बात पर क्या एतराज हो सकता था….मेरे लंड ने एक के बाद एक कई पिचकारिया उसकी चूत के अन्दर तक मारनी शुरू कर दी.

और जब तूफ़ान थमा तो मैंने और अंशिका ने एक साथ बाथरूम में जाकर एक दुसरे के शरीर को पूरी तरह से साफ़ किया…और वापिस बेड पर आकर, नंगे ही एक दुसरे की बाहों में लेट गए…

और उस रात दो बार और मैंने उसकी चूत और गांड का बेंड बजाया…और वो भी एक आज्ञाकारी दुल्हन की तरह मुझसे चुदती रही…

आज की रात मैं अपनी जिन्दगी में कभी नहीं भूलूंगा.

पूरी रात चुदाई करने के बाद मैं और अंशिका बुरी तरह से थक चुके थे.

सुबह आठ बजे मेरी नींद खुली, मुझे बड़ी ही तेज पेशाब आया था, मैं नंगा ही बाथरूम की तरफ भागा

सुबह-२ मेरा लंड अपने पुरे शबाब में था, मैंने अपने हाथ धोये और वापिस बेड के पास आया.

अंशिका बेसुध सी होकर सो रही थी.

उसके ऊपर से रजाई हट चुकी थी और उसकी नंगी पीठ और नीचे की तरफ के मोटे और गद्देदार चुतड बड़े ही दिलकश से लग रहे थे.

मेरे लंड को सुबह-२ और क्या चाहिए था, मैं उसके साथ ही बेड पर लेट गया और उन्हें सहलाने लगा.

वो नींद में कुनमुनाई और फिर दूसरी तरफ मुंह करके सो गयी.

आज उसकी मोटी गांड को मैं गोर से देख पा रहा था, क्या गांड थी यार, और उसके ऊपर कमर से जुड़ता हुए हिस्से का घुमाव वाला हिस्सा तो इतना मजेदार था की मैंने अपने हाथ उस मोड़ के ऊपर आगे पीछे करने शुरू कर दिए..

अपने लंड को मैंने उसकी गांड के साथ दबा दिया और उसकी टांग को उठा कर उसकी गर्म जांघो के बीच फंसा दिया.

आज बड़ा ही प्यार आ रहा था मुझे अंशिका पर..

कल रात को जिस तरह से उसने एक पत्नी की तरह मुझे प्यार दिया था, उसे पाकर मेरे मन में भी उसके लिए एक अजीब तरह की लगन पैदा हो चुकी थी..

मैं उसके बालो में उंगलिया फेरा कर उसे देख रहा था की तभी अंशिका का मोबाइल बजने लगा..मैंने झट से उसे सायलेंट पर कर दिया ताकि उसकी नींद न खुल जाए.

वो कनिष्का का फोन था.

मैंने फोन उठा लिया.
मेरी आवाज सुनते ही वो खुश हो गयी.

कनिष्का : वाह …क्या बात है…दीदी के फोन को आपने उठाया..सुबह-२..लगता है एक ही बेड पर हो तुम दोनों..

मैं : ठीक कहा…और वो भी नंगे..हा हा..

कनिष्का : उनहू….यार…ये गलत बात है…एक तो मुझे नहीं लेकर गए…ऊपर से मुझे चिड़ा भी रहे हो…ईट इस नोट फेयर…

मैं धीरे-२ बात कर रहा था ..ताकि अंशिका की नींद न खुल जाए.

कनिष्का : अच्छा विशाल…बताओ न…क्या किया तुमने रात को..

मैं : अब तुम्हारी बहन जैसी सेक्सी लड़की मेरे साथ होगी तो क्या करूँगा मैं…पूरी रात चुदाई की उसकी…

कनिष्का : वाव….की…कितनी बार….

उसकी तेज धडकनों के बीच ….रुकी-२ सी आवाज आई..

मैं समझ गया की अपनी बहन की चुदाई की बात सुनकर वो एक्साय्तेद हो रही है..

और उसकी ऐसी हालत के बारे में सोचते ही मेरा लंड एक इंच और बाहर निकल आया…और सामने सो रही अंशिका की सोती हुई चूत के दरवाजे को धकेल कर अन्दर दाखिल हो गया..

अंशिका की नींद खुल गयी…मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी चूत के अन्दर फंस चूका था..

वो हेरानी से मुझे अपने पीछे लगे हुए देखने लगी और वो भी उसके फोन पर बात करते हुए..

मैंने उसे चुप करने का इशारा किया..और होंठ हिला कर बताया की कनिष्का का फोन है..

अंशिका सीधी हो चुकी थी, और अपनी पीठ के बल लेट गयी और अपनी एक टांग उठा कर मेरी कमर के ऊपर रख दी…ताकि मेरा लंड सीधा उसकी चूत के अन्दर तक जाए..

मैं कनिष्का से बाते करता रहा..

वो पूछती रही की मैंने कल रात को कैसे और क्या-२ किया…मैं बताता रहा…अंशिका को शायद उम्मीद नहीं थी की मैं वो सारी बाते उसकी छोटी बहन को ज्यो की त्यों बता दूंगा..पर अपनी चूत में लंड और मेरे चुप करने की वजह से वो बस अपनी गोल आँखों से मुझे बोलते और अपनी चूत को चुदते हुए देखती रही..

मैंने अब तेज धक्के मारने शुरू कर दिए थे…और उसकी वजह से मुझे बात करने में मुश्किल हो रही थी…मैंने एक हाथ से फोन भी पकड़ा हुआ था…

मैंने फोन को स्पीकर मोड पर कर दिया…और उसे अंशिका के मुम्मो के बीच रख दिया…

अंशिका की तेज साँसे सीधा फोन के ऊपर पड़ रही थी…और उतनी ही तेज साँसे दूसरी तरफ से कनिष्का की भी आ रही थी…क्योंकि कल रात की चुदाई की कहानी सुनकर शायद वो भी नंगी-पुंगी होकर अपनी चूत के अन्दर अपनी उंगलियों को डालकर अपना तेल निकलने में लगी हुई थी…

और तभी अंशिका के मुंह से रसीली सिस्कारियां निकलने लगी…वो इतनी देर से अपने मुंह को बंद करे बैठी थी पर अब उससे सहन नहीं हुआ…और वो सीत्कार उठी मेरे लंड की टक्कर अपनी चूत के अन्दर तक पाकर…

अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह स्स्स्सस्स्स्स…….म्मम्मम्म…..विशाल्लल्ल्ल……

और जैसे ही कनिष्का ने सुना…वो भी हेरान सी होकर बोल पड़ी…: दी…..दीदी….अआप क्या अभी भी…..मेरा मतलब है…विशाल क्या तुम अभी मेरी दीदी को चोद रहे हो…..

मैं : हूँ….हाँ….कन्नू……तेरी दीदी की गरमा गरम चूत के अन्दर है मेरा साड़े छह इंच का लम्बा लंड….और वो भी बड़े मजे ले लेकर मुझसे चुद रही है….

कनिष्का की तो आवाज ही आनी बंद हो गयी…

तब अंशिका बोली : कन्नू…..अह्ह्हह्ह ……बेबी……काश तू भी यहाँ होती आज…….

कनिष्का तो अपनी बहन का प्यार देखकर फूली नहीं समायी….: ओह्ह्ह….दीदी…मैं भी तो येही कह रही थी अभी विशाल से…..काश मैं भी होती वहां….आपकी चूत के अन्दर …विशाल का लम्बा लंड जाते हुए देखती…..और ….और …अपनी जीभ से वहां पर चाटती ….और …अपनी पुससी को आपके मुंह के ऊपर रखकर…..ओह्ह्ह्ह दीदी…..अह्ह्हह्ह…..ये सोचकर ….ही …मेरे अन्दर……का …..ज्वालामुखी ……फूट रहा है….अह्ह्हह्ह….ओह्ह्ह फक्क्क्कक…….आयी एम् कमिंग……दीदी….आई एम् कमिंग….ओन यूर फेस ……अह्ह्हह्ह…..

अंशिका की आँखे तो बंद सी होने लगी…अपनी छोटी बहन की चूत को अपने मुंह के ऊपर झड़ता हुआ सोचकर…

मैंने आगे बढकर अंशिका के निप्पल को मुंह में भरा और उनमे से शहद की बूंदे निचोड़ने लगा..

अब अंशिका का नंबर था…चीखने का…

अह्ह्ह्हह्ह…….विशाल…….जोर से करो….और तेज….हां ……ऐसे ही…..येस्स्स्स……..म्मम्मम……आई केन फील यु कन्नू…..ओन माय फेस …..येस्स्स्स……

और अंशिका ने मेरे मुंह को पकड़कर अपनी ब्रेस्ट के ऊपर और तेजी से दबा दिया….और फिर मेरे चेहरे को अपनी तरफ खींचकर मुझे जोर-जोर से स्मूच करने लगी…मानो आज के बाद कोई दिन नहीं निकलेगा…जो करना है …आज ही कर ले…

हम दोनों के नंगे जिस्मो के बीच पीसकर अंशिका का फोन कब बंद हो गया..पता ही नहीं चला…और अंशिका के चूसने से मेरे लंड का पानी निकल कर कब उसकी चूत के अन्दर शिफ्ट हो गया…मुझे भी पता नहीं चला…

मैं तो धक्के मारता गया…और तब रुका जब लंड में दर्द सा होने लगा…और तब महसूस हुआ की लंड का रस निकल चूका है.

मैं भी हांफता हुआ उसके पहाड़ो की चोटियों के ऊपर गिर पड़ा.

आज जैसा ओर्गास्म मुझे कभी नहीं हुआ था…

अब तक 9 बज चुके थे..अंशिका उठी और बाथरूम में जाकर क्लीन करने लगी…

वो बाहर आई…नंगी…और शीशे के सामने खड़े होकर अपने पुरे शारीर को घूम घूमकर देखने लगी..

मैंने उसे ऐसा करते देखकर सीटी मारी..

अंशिका : बदमाश हो तुम एक नंबर के…देखो …तुमने मेरी ब्रेस्ट को दबा-दबाकर कितना बड़ा कर दिया है…

मैं : अरे मैं तो इन्हें इसलिए दबाता हु की ये अन्दर घुस जाए…पर पता नहीं ये हर बार बड़े क्यों होते चले जा रहे है…पर पता है..येही है तुम्हारा असली एट्रेक्शन…जो मुझे खींच लाता है तुम्हारे पास…

वो मेरी बात सुनकर मुस्कुरा दी..

अंशिका : अच्छा चलो अब बहुत हो गया….उठो और जल्दी नहा लो…आज हमें घुमने जाना है…नोकुचिया ताल और उसके आस पास के और भी ताल देखने..

मैं जल्दी से अन्दर गया…और नहा धोकर एक जींस और टी शर्ट पहन कर जल्दी से तैयार हो गया..अंशिका भी नहाई और तैयार होकर हम दोनों नीचे आ गए..

सभी नाश्ता कर रहे थे…मेरी नजरे तो रीना को तलाश रही थी, जिसे मैंने रात को प्यासा छोड़ दिया था.

जल्दी ही मुझे रीना मिल गयी, वो टेबल पर बैठी हुई नाश्ता कर रही थी और उसके साथ बैठी थी वोही सेक्सी लड़की…सिमरन.

अंशिका अपनी प्लेट लेकर किट्टी मेम के पास चली गयी, मैंने भी ब्रेड ओम्लेट लिया और रीना की टेबल की तरफ चल दिया.

रीना ने जैसे ही मुझे आता हुआ देखा, सिमरन को हाथ मारकर इशारा किया की मुझे देखे…और जैसे ही उस सेक्सी ने मुझे देखा, उसकी आँखों में लाल डोरे तेर गए, मुझे देखते ही……..शायद रीना ने सिमरन को मेरे बारे में बताया होगा, की रात को मैंने उसके साथ क्या-२ किया…

पर मुझे नहीं पता था की रीना सिमरन की दोस्त है…शायद यहाँ आकर दोनों में दोस्ती हुई है..

मैं : हाय रीना….सिमरन…क्या मैं यहाँ बैठ सकता हु…

रीना : हाँ..हाँ…क्यों नहीं विशाल…अभी मैं सिमरन से तुम्हारी ही बात कर रही थी..

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