फ़ोन सेक्स – मोबाइल फ़ोन सेक्स part 17

रात को सोने के लिए मैं सबसे ऊपर चढ़ गया, अंशिका सबसे नीचे वाली बर्थ पर और स्नेहा बीच वाली बर्थ पर सो गयी.

रात को लगबग २ बजे के आस पास मेरे पैरो के ऊपर को गुदगुदी करने लगा…मेरी नींद एकदम से खुल गयी..मैं उठ कर बैठा, वहां घना अँधेरा था, पर मैंने पैरों के पास देखा तो एक लड़की का चेहरा दिखाई दिया, और फिर वो फुसफुसाई : साईड में हो जाओ….मुझे ऊपर आने दो..

मुझे समझ नहीं आया की कोन है, स्नेहा या अंशिका…

मैं बाहर की तरफ खिसक गया, और वो ऊपर आ गयी, पास आकर पता चला की स्नेहा है..
मैं : ये क्या कर रही हो स्नेहा, कोई देख लेगा..

स्नेहा :सब सो रहे है…मुझे नींद नहीं आ रही थी..
और ये कहते हुए उसने अपना हाथ सीधा मेरे नींद से जाग रहे लंड के ऊपर रख दिया.

मैं घबरा गया, की अगर कोई देख लेगा तो क्या होगा, पर वो बिना किसी डर के सब कर रही थी..उसने अपना चेहरा आगे किया और मेरे होंठो को चूसने लगी…पहले तो मैंने कुछ नहीं करा पर जैसे-२ उसकी पकड़ मेरे होंठो पर बढती गयी मैं भी बेबस होता चला गया.

इन लडकियों के लिए हम लडको को सेक्स के लिए तैयार करना कितना आसान है…है न..

उसने स्ट्रेप वाली टाईट टी शर्ट पहनी हुई थी, मैंने उसके दोनों स्ट्रेप्स को कंधो से नीचे कर दिया, उसने नीचे ब्रा नहीं पहनी हुई थी..मैं थोडा नीचे हुआ और उसके ब्राउन निप्पल को मुंह में भर कर जोर से काट लिया….वो जोरो से चीख पड़ी…पर शुक्र है उसकी आवाज साथ से गुजरती ट्रेन की आवाज में दब कर रह गयी.

मुझे भी ध्यान आया की मुझे अपना हिंसक रूप नहीं दिखाना चाहिए, कोई भी आवाज सुनकर जाग सकता है, सबसे नीचे अंशिका भी सो रही थी, और दूसरी तरफ स्नेहा की माँ भी…

सीट थोड़ी छोटी थी, इसलिए लेटने में मुश्किल हो रही थी, मैंने हिम्मत करके स्नेहा को अपने ऊपर की तरफ खींच लिया, अब अगर कोई नीचे खड़ा होकर ऊपर देखेगा तो उसे साफ़ पता चल जाएगा की ऊपर क्या चल रहा है..

पर अँधेरा काफी था, इसलिए मैंने वो रिस्क उठा ही लिया.

स्नेहा ने ऊपर आते ही अपना हाथ नीचे करके मेरे लंड को बाहर निकाल लिया, और मेरे कान में धीरे से बोली : आज ज्यादा एक्सपेरिमेंट करने का टाईम नहीं है…इसलिए सीधा चुदाई करो…समझे..

मैंने हाँ में सर हिलाया और उसकी केप्री के बटन खोलकर उसे नीचे खिसका दिया, उसकी नंगी चूत की गर्मी मेरे शरीर पर पड़ते ही मुझे ऐसे लगा की किसी ने गर्म ईंट रख दी है मेरे लंड के पास..

पर मुझे मालुम था की उस गरम चूत को ठंडा करने का क्या तरीका है, मैंने अपने लम्बे लंड को सीधा किया और उसने भी अपनी गांड को हवा में उठाकर मेरे लंड को अपनी चूत के अन्दर फंसाया…और जैसे ही निशाना सेट बैठा, उसने अपने कुल्हे नीचे की तरफ करने शुरू कर दिए.

रसीली चूत में लंड जाते ज्यादा समय नहीं लगा, ट्रेन के धक्के इतने ज्यादा थे की हम दोनों को धक्के मारने की कोई आवश्यकता ही महसूस नहीं हुई…बस वो मेरे ऊपर लेटी रही और मैं उसके नर्म और मुलायम होंठो को चुस्त रहा…धक्के तो अपने आप लगते रहे…और जैसे ही मेरा रस निकलने को हुआ…मैंने उसके कान में कहा..आई एम् कमिंग….

स्नेहा ने झट से अपनी चूत को बाहर निकाल लिया…और घूमकर 69 के पोस में आ गयी..मुझे पता था की उसने ये इसलिए किया क्योंकि हमारे पास इस वक़्त चूत और लंड से निकले रस को साफ़ करने का कोई साधन नहीं था…उसकी ताजा चुदी चूत मेरे मुंह के सामने थी, मैंने उसके ऊपर मुंह लगा दिया…तब मुझे पता चला की वो तो पहले ही झड चुकी है…चूत की दीवारों से बहकर आता हुआ रस मैं चाटकर साफ़ करने लगा.

और दूसरी तरफ मेरे लंड ने जैसे ही प्रसाद बांटना शुरू किया, स्नेहा ने अपने मुंह का कमाल दिखा कर सारा प्रसाद सीधा ग्रहण कर लिया और खा गयी…और जब सारा खेल ख़त्म हुआ तो मैंने उसकी केप्री वापिस ऊपर खिसका दी और उसने भी मेरा पायजामा वापिस ऊपर कर दिया…और वहीँ से वो नीचे की तरफ उतर कर अपनी सीट पर जाकर लेट गयी..

चुदाई के बाद सच में बड़ी गहरी नींद आती है..मैं कब सो गया, मुझे पता ही नहीं चला.

सुबह हमारी ट्रेन रानीखेत पहुंची और वहां से हमने टेक्सी की और हम सीधा नेनीताल में पहुँच गए..पहाड़ो का मौसम खराब था, काफी बारिश थी रास्ते में..हमारा होटल पहले से बुक था, अंशिका ने सारा काम बखूबी किया था

किट्टी मेडम के कहे अनुसार सभी को अपने साथ आये रिलेटिव के साथ कमरा शेयर करना था, ये सुनते ही मेरा मन बाग़-२ हो उठा, अंशिका के साथ तीन दिन और रात एक ही कमरे में रहने का रोमांच ऐसे लग रहा था मानो मैं उसके साथ हनीमून पर आया हु.

अंशिका का चेहरा भी मंद-२ मुस्कुरा कर अपने अन्दर की ख़ुशी को बयान कर रहा था.

मैंने चाबी ली और अपने कमरे की तरफ चल दिया, अंशिका अभी नीचे ही थी, दुसरे स्टुडेंट्स को चाबी बांटने में लगी हुई थी वो.

मैंने अपना और अंशिका का सामान अन्दर रखा और बेग से कपडे लेकर बाथरूम में चला गया, नहा धोकर मैं बाहर आया तो पाया की अंशिका अभी तक नहीं आई है..मैंने नीचे टोवल लपेटे रखा था , मैंने सोचा की अभी थोड़ी ही देर में अंशिका के आने के बाद वैसे ही सब उतारना पड़ेगा, इसलिए कुछ नहीं पहना और मैं टोवल में ही अंशिका का इन्तजार करने लगा.

थोड़ी ही देर में दरवाजा खडका…मैं भागकर बाहर आया और दरवाजा खोला , अंशिका के आने के बारे में सोचकर ही मेरे लंड ने टोवल में तम्बू बना दिया था..पर जैसे ही दरवाजा खोला, सामने किट्टी मेम खड़ी थी…और उनके साथ एक दो और लडकिया भी थी..

मुझे टोवल में देख कर दोनों लडकिया खी खी करके हंसने लगी…एक लड़की तो अपने होंठो पर ऐसे जीभ फेरने लगी मानो मुझे चाट रही हो, अपनी आँखों से.

किट्टी मेम : विशाल…ये क्या है…कपडे क्यों नहीं पहने..
मैं : जी…जी वो …मैं बस नहाकर निकला ही था की बेल बज गयी…इसलिए खोलने चला आया..

उनकी नजर नीचे होकर मेरे लंड वाले हिस्से पर गयी…
और फिर वो बोली : ठीक है..ठीक है..हमारे ग्रुप में ज्यादातर लडकिया है…इसलिए थोडा बिहेव सही रखना अपना..समझे..और ये लो, अंशिका का एक और बेग, ये नीचे रह गया था, उसे अभी आने में टाईम लगेगा..ओके

और ये कहकर वो चली गयी.

मैंने राहत की सांस ली, पर मुझे उस लड़की का चेहरा याद आ रहा था जो अपने होंठो पर जीभ फेर रही थी..जल्दी ही उसके बारे में पता लगाना होगा.

जैसा की अंशिका ने बताया था, इस टूर पर टोटल पचास लोग आये थे, बीस स्टुडेंट्स, सोलह उनके रिलेटिव जो ज्यादातर भाई या बहन थे, और बाकी कॉलेज के स्टाफ..अब ये लड़की कॉलेज की है या किसी स्टुडेंट की बहन ये पता लगाना होगा.

मैंने अन्दर आकर जल्दी से कपडे पहन लिए, क्या पता किट्टी मेडम दोबारा अन्दर आ जाए.

जैसे ही मैंने कपडे पहने, बेल फिर से बज उठी, मैं भागकर फिर से बाहर आया, इस बार अंशिका थी ..

वो अन्दर आई, दरवाजा बंद किया, और मुझसे बुरी तरह से लिपट गयी.

मेरे शरीर से उठती महक और गीले बालो को देखकर वो बोली : नहा भी लिए तुम…वाह..पर ये कपडे क्यों पहने फिर…मेरा इन्तजार नहीं कर सकते थे…हूँ…

अब बताओ यार, पहले जब टोवल में इन्तजार किया तो किट्टी मेम आ गयी और बोली की टोवल में क्यों हो और अब जब कपडे पहन लिए तो ये मेडम कह रही है की कपडे क्यों पहने..

अंशिका ने मुझे प्यार से देखा और बोली…बी रेडी ….मैं नहाकर आती हु…

और मुझे देखकर, एक सिडक्टिव सी स्माईल देकर, वो बाथरूम के अन्दर चली गयी…नहाने.

मैं भी अपने कपडे उतार कर अंशिका का इन्तजार करने लगा, काफी देर हो गयी तो मैं उठकर दरवाजे तक गया और अंशिका से कहा की दरवाजा खोले और मुझे अन्दर आने दे.

अंशिका : रुको यार…बस एक मिनट में आई..और वैसे भी जब हमारे पास डबल बेड है तो क्यों इस छोटे से बाथरूम में प्यार करे..तुम रुको, मैं बस पांच मिनट में बाहर आई.

बात तो उसकी सही थी.

मैं अपने ज़ोकी में उसका इन्तजार करने लगा.

थोड़ी ही देर में दरवाजा खुला, और अंशिका बाहर आई..

उसे देखकर मेरी आँखे फटी की फटी रह गयी.

उसने अपनी कमर से टोवल लपेट रखा था, जैसे हम लड़के लपेटते है, नहाने के बाद, और दूसरा टोवल उसने अपने सर से बाँधा हुआ था, जो एक ऊँची ईमारत बना रहा था वहां…और बीच वाले हिस्से पर…सिवाए पानी की बूंदों के कुछ भी नहीं था…वो टोपलेस ही बाहर निकल आई थी…मैं उसकी हिम्मत देखकर दंग रह गया

पर यारो, क्या माल लग रही थी, उसके मोटे-मोटे मुम्मे जिनपर से पानी फिसल कर नीचे गिर रहा था, उसका सपाट पेट, और टॉवेल के नीचे की मोटी और सफाचट टाँगे…मेरे तो मुंह में पानी आ गया.

अंशिका (मुस्कुराते हुए) : क्या देख रहे हो…ये तो वैसे भी उतरने वाले थे…इसलिए मैं ऐसे ही आ गयी, जैसे घर पर नहाने के बाद निकलती हु..

मैं : मतलब…घर पर भी तुम ऐसे ही…वाव ….यार…

अंशिका : तुम तो ऐसे कह रहे हो जैसे तुमने मुझे ऐसे कभी देखा ही नहीं…

ये कहते-२ उसने अपने सर के ऊपर बंधा हुआ टोवल भी खोल दिया…और उससे अपने गीले बालों को मलने लगी..उसके मोटे मुम्मे बाल सुखाने की वजह से जोरों से हिलने लगे..और मेरी नजर पहली बार उसके तने हुए निप्पलस के ऊपर गयी, जो फटने की कगार पर थे, यानी वो पूरी तरह से गरम थी..आगे क्या होने वाला है उसके बारे में सोचकर.

वो मुझे जानती थी, की इस तरह से अपना नंगा शरीर दिखा कर मेरी भावनाओ को भड़का रही थी…और वो भड़क भी चुकी थी, मेरे लंड के रूप में.

मेरे लंड ने मेरे ज़ोकी में बवाल सा मचा रखा था…

मैंने एक झटके में अपना ज़ोकी नीचे कर दिया, और मेरे लंड ने नेनीताल की फिजाओं में पहली बार अपनी महबूबा को देखा और उसे सलाम ठोंका.

अंशिका ने मेरे लंड को अपनी नजरों में कैद किया और धीरे-२ अपनी गांड मटकाती हुई मेरे पास आई..और अपने हाथ में पकडे हुए टोवल को मेरे लंड पर झुला दिया, मानो वो लंड न हो, कपडे टांगने का खूंटा हो..टोवल के बोझ से मेरा लंड नीचे झुक गया पर टोवल नीचे नहीं गिरा.

ये देखकर अंशिका की हंसी निकल गयी और वो खिलखिला कर हंसने लगी…

मेरे सामने खड़ी होकर, वो अपने होंठो के ऊपर अपनी कोमल उँगलियों को रखकर जोर-२ से हंस रही थी, मैं तो उसके हुस्न और नजाकत को देखकर पागल सा हो गया…और मैंने झट से उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी बाँहों में बाँध लिया.

मेरा टोवल नीचे गिर गया..और मैंने अंशिका का टोवल भी खोल दिया, कमर वाला.

ये उसके लिए पहला अवसर नहीं था जब वो मेरे सामने नंगी खड़ी थी.

मैंने अपने लिप्स लगा दिए उसकी गर्दन पर और उसके शरीर से बहता हुआ पानी सोखने लगा.

अंशिका : सुनो विशाल….
मैं : हूँ…बोलो…
अंशिका : हम यहाँ तीन दिनों तक रहेंगे…एक ही कमरे में..
मैं : हूँ…पता है..
अंशिका : मैं चाहती हु की हम दोनों पति पत्नी की तरह से रहे..
मैं : क्या मतलब…
अंशिका : मतलब की तुम मुझे ऐसे प्यार करो जैसे हम शादी के बाद अपने हनीमून पर आये हैं..
मैं : वैसे ही तो रहेंगे हम जान…
अंशिका : नहीं ना….तुम समझे नहीं…सिर्फ फिसीकली नहीं, मेंटली भी…समझे…

मैं क्या कहता, मैं जानता था की वो क्या कहना चाह रही थी…इसमें मुझे भी कोई बुराई नहीं दिखी…और अंशिका ये सब शायद इसलिए बोल रही थी की उसे और मुझे पता था की हमारी शादी नहीं हो सकती, उम्र में इतना फर्क है इसलिए, और इतने दिनों में हमारे बीच जो नजदीकियां आई हैं, और हमने एक दुसरे को जितना समझा है, उसके अनुसार इतना हक तो बनता है की हम अपनी जिन्दगी के ये तीन दिन पति-पत्नी की तरह से बिता ले…

मैं : जैसा तुम चाहो अंशिका, तुम्हे मालुम है की मैं तुम्हारी किसी बात को मना नहीं कर सकता..

ये सुनते ही अंशिका मुझसे बेल की भाँती लिपट गयी और मुझे पागलो की तरह से चूमने चाटने लगी..
ओह…विशाल…..आई लव यु….
मेरा लंड बीच में बात करते-२ बैठ गया था, उसकी इस हरकत से वो फिर से खड़ा होने लगा…

अंशिका ने मेरे लंड को अपने हाथो में पकड़ा और उसे मसलने लगी..और मेरी आँखों में देखकर धीरे से फुसफुसाई : आज तुम देखना , मैं तुम्हारा क्या हाल करती हु…आज तो तुम ये समझो की हमारी सुहागरात है…

इस अलग तरह की सोच के साथ चुदाई करने में बड़ा ही रोमांच फील हो रहा था..

अंशिका ने मेरे सर को पकड़कर अपने मुम्मे पर रख दिया और मैं किसी पालतू बकरी की तरह उसका दूध पीने लगा..

उसके हाथ मेरे लंड से चिपके हुए थे, मैंने दुसरे हाथ से उसका मुम्म पकड़ कर निप्पलस को दबाना शुरू कर दिया.

अंशिका : अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह विशाल…….आज तुम जो चाहो करो…..जैसे चाहो करो…..जो चाहो करवा लो…..अह्ह्हह्ह….मैं कुछ नहीं कहूँगी….

वैसे ज्यादा करने को बचा नहीं था हमारे बीच, पर फिर भी ये सब सुनकर मुझे अच्छा लगा…वो किसी आज्ञाकारी बीबी की तरह अपने पति को खुश करने के लिए सब कुछ करने को तैयार थी..

मैं कुर्सी पर बैठ गया…और उसे हुक्म सा दिया : चलो आओ और मेरा लंड चुसो….अंशिका…और साथ-२ बोलती भी जाओ की तुम्हे कैसा लग रहा है..

अंशिका ने फ़ौरन मेरी बात का पालन किया और मेरे लंड को अपने गर्म मुंह के अन्दर रखकर चूसने लगी.

अह्ह्हह्ह्ह्ह ……धीरे साली…..धीरे काट…..मेरे लंड को कुतिया….

मुझे मालुम था की गन्दी गालियाँ सुनकर उसके अन्दर की जानवर और भी खुन्कार हो जाती है.

अह्ह्ह्ह ….तुम्हारा ये लंड कितने कमाल का है विशाल….जितना चुसो, और चूसने का मन करता है…..अन्दर जाकर जितना मजा देता है, उतना ही मुंह में भी …..अह्ह्ह्ह……

कुतिया सुनकर वो सच में कुतिया की तरह से अपनी जीभ से मेरे लंड और बाल्स को चाटने लगी….और चाटते -२ वो ऊपर तक आई और अपने गीले मुंह से मेरे होंठो को चूसने लगी….

अह्ह्हह्ह विशाल……..अब सहन नहीं होता……..डाल दो न….डाल दो अपना लंड…अपनी अंशिका की चूत …..

मैंने भी उसे ज्यादा तरसाना उचित नहीं समझा और उसकी गांड के नीचे हाथ रखकर, मैंने उसे अपने लंड के करीब खींचा…जैसे ही मेरा लंड उसकी गरमाई हुई चूत के संपर्क में आया, वो जोर से सिस्कार उठी….

आअयीईईइ …….विशाल……..जल रही है मेरी……चूऊऊत………अह्ह्ह्हह्ह…..

बुझा दो ये आग, अपने…..लंड से….अह्ह्ह्ह……

मैंने उसे अपने लंड के ऊपर खींच लिया, और वो अपनी कसी हुई चूत को मेरे लंड के चारों तरफ लपेटती हुई नीचे की तरफ आने लगी….

और अंत में आकर उसने मेरी गर्दन को जोर से पकड़ा और अपने गर्म होंठ मेरी गर्दन पर रखकर जोरों से सांस लेने लगी…

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह विशाल……..आई एम् ……..लविंग……यूर कोक …….इन माय पुससी …….

कुछ देर तक ऐसे ही रहने के बाद मैंने नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए.

अंशिका भी हरकत में आई और अपने बाल बांधकर वो भी मैदान में कूद गयी….

अह्ह्ह …ओह्ह्ह्ह….ओह्ह्ह विशाल……ओह्ह्ह्ह…..कितना मोटा लग रहा है तुम्हारा लंड आज…..अह्ह्ह…..मरररर गयी……अह्ह्ह्हह्ह……..येस्स.येस्सस्सस्स…आई एम् कमिंग…..विशाल……अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह….

और जैसे ही उसने अपनी चूत के झड़ने का एलान किया, मैंने भी अपने लंड के धक्के तेज कर दिए, और उसके साथ-२ मैं भी झड़ने लगा….

जब तूफ़ान थमा तो उसने अपना सर उठाया और मुझे प्यार से देखा, उसके देखने में एक अजीब से प्यार का एहसास था…और फिर उसने मुझे चूम लिया..

तभी बाहर से किट्टी मेम की आवाज आई..

अंशिका….अंशिका….जल्दी चलो…डिनर के लिए लेट हो रहा है…

अंशिका : ओके मेम….आप जाओ…हम आते हैं…

उनके जाने के बाद अंशिका जल्दी से उठी और वापिस बाथरूम में जाकर वाश करने लगी…

जब वो बाहर आई तो मुझे वैसे ही बैठा देखकर बोली : उन्नन …सुनो…जल्दी उठो…न..भूख लगी है मुझे…

वो ऐसे बात कर रही थी मानो अपने पति से बात कर रही है….मुझे काफी अच्छा लगा…
पर ये सोचकर परेशान भी हो गया की मैं अंशिका के रहते दूसरी चूतों के मजे कैसे ले पाउँगा…जो भी हो, मुझे कोई न कोई उपाय तो निकलना ही पड़ेगा.

हम तैयार होकर नीचे गए और सबने मिलकर खाना खाया, काफी स्वादिष्ट खाना था होटल का. उसके बाद हमने आइसक्रीम भी खायी और फिर अंशिका अपनी दूसरी टीचर्स के साथ गप्पे मारने लगी, मैंने स्नेहा को अपने पास बुलाया.

स्नेहा : क्या यार …तुम तो मुझे यहाँ आते ही भूल गए,

मैं : नहीं ..मैं ऐसा कैसे कर सकता हु.

स्नेहा : मुझे सब पता है..वर्ना जब से हम लोग नेनीताल आये हैं, तुमने मुझ से ढंग से बात भी नहीं की..
वो अपने होंठो पर अजीब तरीके से जीभ फेर रही थी.

मैंने अंशिका की तरफ देखा, वो तिरछी नजरो से मुझे ही देख रही थी, जैसे कोई पत्नी अपने पति के ऊपर नजर रखती है की वो किसके साथ बात कर रहा है.

मैंने स्नेहा की तरफ देखा और कुछ बोलने ही वाला था की मेरा सेल बज उठा, कोई नया नंबर था. मैंने फोन उठाया

मैं : हेल्लो
दूसरी तरफ से एक सेक्सी और मधुर से आवाज आई…हेल्लो….
मैं वो आवाज और अंदाज सुनकर चोंक गया, वो इसलिए की इतनी सेक्सी आवाज मैंने आज तक नहीं सुनी थी, और उसके हेल्लो कहने का अंदाज इतना निराला था मानो अपनी चूत में ऊँगली डालकर मुझसे बात कर रही थी और वही फीलिंग्स मुझे भी महसूस हो रही थी.

मैंने स्नेहा को एक्स्क्युस कहा और एक कोने में जाकर बात करने लगा

मैं : हेल्लो…कोन बोल रहा है.
आवाज : बस ये समझ लो की आपके चाहने वाले ही हैं हम भी..

मैं उसकी बात सुनकर खुश हो गया और ये सोचकर भी की इतनी सेक्सी आवाज वाली की मारने को मिल जाए तो मजे आ जायेंगे..पर है कोन ये..मुझे लगता है की मेरे घर के आस पास की रहने वाली या फिर शायद पारुल ने अपनी किसी सहेली को मेरे बारे में बताया हो और नंबर लेकर वो भी अपनी चूत की खुजली मुझसे शांत करवाना चाहती हो….

मैं : अच्छा जी..हमारे चाहने वाले हैं तो हमारे सामने तो आइये ..नाम क्या है आपका..
आवाज : अजी नाम जानकार क्या करेंगे..आपको तो पूछना चाहिए की मेरा फिगर क्या है..

साली बड़ी हरामी किस्म की लड़की लगती है..

मैं : चलिए कोई बात नहीं, अपना फिगर ही बता दीजिये..
आवाज : 33 26 34
मैं : वाव…पर आप इतना स्युओर कैसे हैं अपने फिगर के बारे में..कब नापा था.
आवाज : कल रात को नापा था तो यही था, अभी का पता नहीं..

मैं उसकी बात सुनकर हंस दिया और बोला : ये इंचीटेप तो गलत नाप बताते है, हमेशा लडको से कहा करो, वो सही तरीके से नाप लेंगे अपने हाथो से, और वोही साईज बताया कीजिये दुसरो को फिर..अगर आप कहो तो मैं आपका साईज लेने के लिए तैयार हु..

वो हंसने लगी…और फिर थोड़ी देर चुप रहने के बाद वो बोली : आज आप ब्लू टी शर्ट और ब्लेक जींस में काफी स्मार्ट लग रहे हैं..

ओ तेरी माँ की..यानी ये लड़की यहीं पर ही है…मेरा अंदाजा गलत निकला की ये दिल्ली से फ़ोन आया है, ये तो यही पर है…पर कोन है ये…

मैंने अपने चारो तरफ नजर घुमाई, आधे लोग जा चुके थे और बाकी जो बैठे हुए थे कोई भी फोन पर बात नहीं कर रहा था.

मैं : अच्छा…यानी आप भी यही पर है, हमारे ग्रुप में..
आवाज : जी…अब ये आपके ऊपर है की हमें कितनी जल्दी ढूंढते हैं आप और कितनी जल्दी मेरा फिगर अपने अनुभवी हाथो से नापते हैं.

मुझे उस लड़की की याद आ गयी, जो किट्टी मेम के साथ आई थी मेरे रूम में…जो मुझे देखकर बड़े ही कामुक स्टाईल से मुझे देख रही थी, हो न हो ये वही है..पर मुझे उसका नाम नहीं मालुम था. मैंने जल्दी से फ़ोन काटा और स्नेहा की तरफ गया, वो एक दूसरी लड़की के साथ बैठकर बाते कर रही थी, जैसे ही मैं उसके पास गया, उस लड़की को देखकर मैं चोंक गया, क्योंकि ये वही लड़की थी जिसके बारे में मैं अभी सोच रहा था और स्नेहा से उसके बारे में पूछने के लिए आया था.और जब से मैं फोन पर बात कर रहा था, स्नेहा इस लड़की के साथ यहीं बैठकर बाते कर रही थी, यानी ये वो लड़की नहीं है..

स्नेहा ने मुझे देखा और मुझे उस लड़की की तरफ घूरते पाकर वो बोली : अरे विशाल…ये है सिमरन..मेरी मम्मी की कलिग है न रजनी आंटी, उनकी बेटी है…और सिमरन ये है विशाल…वो अंशिका मेम है न..उनका कजिन..और ये मुझे टयूशन भी पढाते है..

मैंने अपना हाथ सिमरन की तरफ बढाया और उसने भी मेरे हाथ को अपने नर्म हाथो में पकड़कर दबा दिया..उसके चेहरे के एक्सप्रेशन अभी भी वैसे ही थे, मुझे खा जाने वाले..

मैंने सिमरन के साथ कुछ देर तक बात की और फिर मैं वापिस एक कोने में चला गया और उस लड़की को फिर से फोन मिलाया.

आवाज : येस…क्या हुआ था, एकदम से फ़ोन कट कर दिया, मेरी आवाज इतनी बुरी है क्या.

मैं : अरे नहीं…तुम्हारी आवाज तो इतनी सेक्सी है की ये सोचकर मैं तड़प रहा हु की तुम कितनी सेक्सी होगी.

आवाज : अरे विशाल…आवाज सुनकर कभी भी इंसान की शक्ल या फिगर का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता.

मैं : पर तुम्हारे बारे में मैं ये पक्का कह सकता हु की तुम देखने में भी और दिखाने में भी, दोनों में सेक्सी हो..

आवाज : हा हा आ….तुम बड़े इन्त्रस्टिंग इंसान हो…तुमसे दोस्ती करके मजा आएगा.

मैं : वो मजे तो आप तभी ले सकोगे जब हम मिलेंगे..

आवाज : चलो ठीक है, एक वादा करती हु, कल शाम तक अगर तुमने मुझे ढूंढ लिया तो जो तुम कहोगे वो मैं करुँगी..और अगर नहीं ढून्ढ पाए तो जो मैं कहूँगी , वो तुम्हे करना पड़ेगा…बोलो मंजूर है..

मैं उसकी बात सुनकर सोचने लगा, पर दोनों ही सूरत में मेरा ही फायेदा था, इसलिए मैंने हाँ कह दी.

मैं सीधा अंशिका के पास गया, और उसे एक कोने में लेजाकर मैंने कहा : सुनो, तुमने मुझे अपने ग्रुप में आये लोगो से तो मिलवाया ही नहीं,

अंशिका मेरी बात सुनकर मुस्कुराने लगी और बोली : मैं देख रही हु की तुम काफी बेचैन हो रहे हो यहाँ आकर, चारो तरफ इतनी तितलिया जो उढ़ रही है तुम्हारे, मैं देख रही थी तुम्हे, स्नेहा के साथ गप्पे मार रहे थे और सिमरन के साथ भी..

मैं : क्या यार, अब तुम तो अपनी कुलीग्स के साथ बीजी थी, मैंने अगर किसी और से बात कर ली तो इसमें प्रोब्लम क्या है..

अंशिका : प्रोब्लम क्यों नहीं होगी, हनीमून पर अगर किसी का पति उसके अलावा किसी और को देखे या उसके साथ बात करे, तो प्रॉब्लम तो होनी ही है न..

यार, ये अंशिका भी न, अपने चक्कर में मेरे मजे का कबाड़ा करने पर तुली है.

मेरी सूरत देखकर वो एकदम से हंसने लगी.

अंशिका : अरे मेरे राजा …मैं तो मजाक कर रही थी…घबराओ मत..मैं तुम्हे सबसे मिलवाउंगी .पर अपनी हद में रहना और किसी के साथ भी कुछ करने से पहले मेरे और मेरी पोसिशन के बारे में सोच लेना..ओके..

मैं समझ गया और मैंने उसे आश्वासन दिया की मैं किसी के साथ कोई बदतमीजी नहीं करूँगा..(पर अगर कोई सामने से करे तो मैं रोक नहीं पाउँगा न..)

अंशिका : आज तो सब काफी थके हुए थे, इसलिए खाना खाकर सभी सोने चले गए हैं, कल हमने बोटिंग करनी है और मार्केट घूमना है, और शाम को बोन फायर का प्रोग्राम है, तभी मिलवा दूंगी तुम्हे सबसे…ठीक है.

मैंने हाँ में सर हिला दिया, पर उस लड़की ने भी तो कल शाम तक का टाईम दिया था मुझे, अंशिका जब मिलवाएगी, तब मिलवाएगी, मुझे कल दिन के टाईम ही उसे ढूँढना पड़ेगा.

उसके बाद अंशिका बोली : सुनो, चलो न रूम में चलते हैं, देखो ज्यादातर लोग जा चुके हैं. सिर्फ किट्टी मेम और एक – दो और टीचर्स बैठकर गप्पे मार रही थी.

किट्टी मेम के पीछे ही स्नेहा भी बैठकर बोरियत से बचने के लिए अपने मोबाइल पर गेम खेल रही थी.

अंशिका और मैं किट्टी मेम के पास गए और उन्हें गुड नाईट बोला

किट्टी मेम : अरे अंशिका, तुम भी न, इतनी जल्दी क्या है सोने की, बैठो थोड़ी देर, चली जाना..

अंशिका ने मेरी तरफ देखा और फिर बोली : नहीं मेम…आज बहुत थक गयी हु, मुझे नींद आ रही है अब..

किट्टी मेम ने मेरी तरफ देखा और बोली : ठीक है , तुम जाओ, विशाल को बैठने दो थोड़ी देर तक…देखो न, स्नेहा भी बोर हो रही है, मैं अभी थोड़ी देर तक और बैठूंगी यहाँ, तब तक विशाल और स्नेहा एक दुसरे को कम्पनी देंगे, ठीक है न विशाल..

मैंने अंशिका की तरफ देखा…और फिर किट्टी मेम से बोला : ठीक है, मेम, जैसा आप कहो.

अंशिका किट्टी मेम को मना नहीं कर सकती थी, इसलिए उसने भी कुछ नहीं कहा और वो अन्दर चली गयी, किट्टी मेम फिर से अपनी सहेलियों के साथ गप्पे मारने लगी, मैं स्नेहा के पास जाकर बैठ गया.

स्नेहा : सुनो, अन्दर गेम रूम में चलते हैं, वहां बिलियर्ड टेबल है, मैंने आज तक नहीं खेला वो, मुझे सिखाओ न..

स्नेहा की बात किट्टी मेम ने भी सुन ली थी, वो बोली : हाँ हाँ…विशाल, इसे सिखा दो न बिलियर्ड्स..हमेशा बोलती रहती है..

मैं स्नेहा को लेकर अन्दर चला गया, वहां एक बड़ा सा रूम था, जिसमे हर तरह के खेल, जैसे केरम, टेबल टेनिस, बिलियर्ड्स, वगेरह थे, मैंने बाल्स को सेट किया और स्टिक लेकर मैं खड़ा हो गया.

स्नेहा को मैंने अपने पास बुलाया और उसके हाथ में स्टिक पकड़ाकर मैं उसके पीछे खड़ा हो गया.

उसकी मोटी गांड मेरे लंड वाले हिस्से को छु रही थी.

मैंने स्टिक को पकड़ा हुआ था, और स्नेहा ने मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रख दिया
मैं : स्नेहा , मेरे हाथ को नहीं, स्टिक को पकड़ो
स्नेहा : मुझे ये स्टिक नहीं, ये स्टिक पकडनी है..

उसने अपना हाथ मेरे लंड के ऊपर रखकर उसे धीरे से दबा दिया.

मैंने घबराकर बाहर की तरफ देखा, जहाँ किट्टी मेम और दूसरी टीचर्स बैठी थी, पर अन्दर सिर्फ टेबल के ऊपर लाईट होने की वजह से, हम दोनों को बाहर से नहीं देखा जा सकता था.

स्नेहा : डरो मत…मम्मी को मैंने पहले ही कह दिया था, और वैसे भी मेरे बाद मम्मी का ही नंबर है. उन्हें भी नहीं तो नींद नहीं आएगी आज की रात.

मैं किट्टी मेम की नहीं बल्कि अंशिका की चिंता कर रहा था, जो अपने कमरे में किसी नव विवाहित दुल्हन की तरह मेरा वेट कर रही थी. मुझे जल्दी ही इन दोनों की प्यास बुझानी होगी, वर्ना अंशिका को शक हो गया और वो यहाँ आ गयी तो मैं तो काम से गया फिर.

मैंने अपनी जिप खोली और स्नेहा के हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया.

उसे शायद उम्मीद नहीं थी की मैं इतनी जल्दी मान जाऊंगा.

पर अपने सामने लंड को पाकर वो ये भी भूल गयी की वो इस समय खड़ी कहाँ पर है, वो पलटी और मेरे लंड को हाथ में लेकर जोर से हिलाने लगी.

मेरी नजर बाहर की तरफ ही थी, किट्टी मेम का चेहरा हमारी तरफ था और बाकी की तीनो टीचर्स की पीठ थी इस कमरे की तरफ, अगर किट्टी मेम देख भी लेती है तो कोई परेशानी वाली बात नहीं है, पर किसी और ने देख लिया तो गड़बड़ हो जायेगी.

मैंने भी सोचा की ऐसा रोमांच और कब मिलेगा, इसलिए खुले कमरे में मैंने अपना लंड निकाल कर स्नेहा के सामने रख दिया था.

स्नेहा मेरे सामने बैठ गयी और मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर जोर से चूसने लगी.

उसने लॉन्ग स्कर्ट और टी शर्ट पहनी हुई थी, अपने दुसरे हाथ को अपनी स्कर्ट के अन्दर डाला और अपनी गीली चूत के अन्दर अपनी दो फिंगर डालकर हिलाने लगी.

बड़ा ही अजीब सा एहसास था वो, कमरे में पूरा अँधेरा था, सिर्फ टेबल के ऊपर की लाईट जल रही थी, हम उसे बंद भी नहीं कर सकते थे, क्योंकि बाहर बैठी हुई दूसरी टीचर्स को शक न हो जाए, और किट्टी मेम से डरने की कोई जरुरत नहीं थी, वो तो खुद ही लंडखोर थी.

मैंने किट्टी मेम की तरफ देखा, और पाया की उनकी नजर अब अन्दर की तरफ ही चिपकी हुई थी, वो शायद अपनी बेटी को ढूंढने की कोशिश कर रही थी, पर इतनी दूर से उन्हें साफ़-२ नहीं दिख रहा था की उनकी लाडली तो मेरा लोलीपोप चूस रही है.

पर मेरे हिलते हुए शरीर की वजह से उन्हें अंदाजा होने लगा था की अन्दर का एक्शन शुरू हो चूका है,

अब किट्टी मेम का भी ध्यान हमारी तरफ ज्यादा और अपनी सहेलियों की तरफ कम था.

मैंने नीचे हाथ करके स्नेहा की टी शर्ट को सर से घुमा कर उतार दिया, नीचे उसने सफ़ेद रंग की ब्रा पहनी हुई थी, जिसके ऊपर क्रिस्टल लगे हुए थे.

मैंने उसके ब्रा स्ट्रेप्स नीचे कर दिया और उसके दोनों मुम्मे बाहर की तरफ निकाल कर उन्हें हिलते हुए देखने लगा.उसके मुम्मो के ऊपर लगे हुए क्रिस्टल भी चमक रहे थे.

स्नेहा से अपनी चूत की गर्मी ज्यादा बर्दाश्त नहीं हुई, उसने मेरे लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला और खड़ी होकर मेरे होंठो को चूसने लगी पागलो की तरह

हलकी रौशनी हम दोनों के शरीर पर पड़ रही थी, जिसकी वजह से बाहर बैठी हुई किट्टी मेम को अब अपनी बेटी साफ़-२ मेरे होंठो को चुस्ती हुई दिखाई दे रही थी, और वो भी टोपलेस होकर.

किट्टी मेम ने ज्यादा देर तक बाहर बैठना उचित नहीं समझा , क्योंकि दूसरी टीचर्स का ध्यान कभी भी हमारी तरफ आ सकता था, इसलिए उन्होंने सभी को गुड नाईट बोलकर अन्दर चलने को कहा और फिर उन्हें ये कहकर की आप चलो मैं स्नेहा और विशाल को भी बुला कर लाती हु, हमारी तरफ आने लगी.

अन्दर आते ही किट्टी मेम की साँसे मुझे साफ़-२ सुनाई देने लगी.

आज पहली बार दोनों माँ-बेटी एक दुसरे के सामने मेरे साथ चुदने को तैयार थे, घर पर तो सिर्फ किट्टी मेम ने मुझसे अकेले में ही चुदवाया था और एक बार ही उन्होंने मुझे और स्नेहा को रंगे हाथो पकड़ा भी था, पर आज पहली बार था शायद जब वो अपनी जवान लड़की के सामने नंगी होकर मुझसे चुदवाने को तैयार थी.

स्नेहा ने जब देखा की उसकी मम्मी भी अन्दर आ चुकी है तो उसके उत्साह में दुगना इजाफा हो गया.

वो टेबल के ऊपर की तरफ झुकी और अपनी स्कर्ट को नीचे खिसका दिया, नीचे उसने चड्डी नहीं पहनी हुई थी, साली मदर्जात नंगी होकर खड़ी थी अब वो मेरे और अपनी माँ के सामने. आजकल की ये एडवांस लड़कियां अपने माँ बाप से भी नहीं शर्माती.

वो टेबल के ऊपर बैठ गयी, और अपनी टाँगे हवा में फेला कर मुझे अपनी तरफ खीचा, मैंने भी आनन् फानन में अपनी जींस को खोला और अंडरवीयर समेत नीचे खिसका दिया और अपने लोहे की रोड जैसे लंड को सीधा उसकी चूत में लगा कर एक जोरदार धक्का मारा.

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह विशाल………म्मम्मम……

उसकी चूत का गीलापन इतना अधिक था की टेबल के ऊपर भी फेलने लगा था वो.

उसकी हिलती हुई दोनों बाल्स और मेरे धक्को से हिलते हुए टेबल के ऊपर रखी हुई बाल्स , मेरे हर धक्के से नाच नाचकर अपनी ख़ुशी प्रकट कर रहे थे.

किट्टी मेम ने भी अपने कपडे उतारने शुरू कर दिए थे, उन्होंने एक पायजामा और लॉन्ग और लूस सी टी शर्ट पहनी हुई थी. जिसे उन्होंने उतार दिया था, फिर अपनी ब्रा भी खोल कर गिरा दी..नीचे उन्होंने भी अपनी बेटी की तरह कुछ नहीं पहना था,

वो टेबल के पास आई और अपनी बेटी के पास जाकर खड़ी हो गयी और उसके हिलते हुए मुम्मो को देखकर अपनी चूत में ऊँगली डालकर हिलाने लगी.

ओह्ह्ह्ह मम्मी……इतना मजा आता है इसके लंड से ….अह्ह्ह्हह्ह……देखो न…..कैसे जा रहा है बिलकुल अन्दर तक……अह्ह्ह्हह्ह……ओह्ह्ह्ह ममा……..आअज……तो……अह्ह्ह्ह…..मजा……अह्ह्हह्ह……..गया…….अह्हह्ह्हह्ह्ह्यी …..

और उसके कहते-२ ही उसकी चूत से रस निकल कर बाहर की तरफ आने लगा..और मेरे लंड ने भी उसकी चूत का साथ देने के लिए वहीँ पर अपने रस का त्याग कर दिया..

मैंने अपना लंड जैसे ही बाहर खींचा, किट्टी मेम जल्दी से आगे आई और अपने मुंह में मेरे लंड को भरकर जोर से चूसने लगी, और अपने एक हाथ को उन्होंने अपनी बेटी की चूत के ऊपर पंजे समेत जमा दिया, ताकि उसका रस बाहर निकल कर नीचे न गिर जाए, मेरे लंड को साफ़ करने के बाद उन्होंने अपनी बेटी की चूत की तरफ रुख किया और अपना उन्ह वहां पर लगाकर जोर जोर से अपनी बेटी की चूत चूसने लगी, और अन्दर जमा हुआ मेरा और स्नेहा का मिला जुला रस पीने लगी.

माँ बेटी का ऐसा प्यार देखकर मेरे लंड ने फिर से अपना सर उठाना शुरू कर दिया, मुझे अपने ऊपर विशवास था की एक बार में मैं लगातार तीन या चार बार चुदाई कर सकता हु, एक स्नेहा की हो गयी, किट्टी मेम के बाद अपनी अंशिका के लिए भी तो कुछ बचा कर रखना था न.

अपनी बेटी की चूत को साफ़ करने के बाद किट्टी मेम मेरी तरफ घूमी, उनकी हालत देखकर मैं तो सिर्फ एक ही बात सोच रहा था की आज ये मोटी मुझे छोड़ेगी नहीं…चल बेटा चढ़ जा इसके ऊपर भी.

जैसे ही किट्टी मेम मेरी तरफ घूमी, मेरी नजर सीधा उनके बेशुमार दोलत से भरे हुए उभारो पर पड़ी, ये वही उभार थे जिनको देखकर मेरे मन में न जाने कितनी बार इन्हें चोदने का ख्याल आया था, वैसे तो इनकी गांड भी उतनी ही दौलतमंद थी पर सामने जो दीखता है उसकी बात ही कुछ और होती है.

वो मेरे पास आई और मेरे सर को पकड़ कर बड़ी ही बेरहमी से अपनी छाती पर दे मारा.

मुझे तो ज्यादा नहीं , पर जिस अंदाज में उन्होंने मेरा सर मारा था अपने स्तन पर, उन्हें बड़ा दर्द हुआ होगा..पर दर्द होने के बावजूद उनके मुंह से दर्द के बजाये एक मीठी सी सिसकारी निकली, मानो मेरा लंड डाल लिया हो अपनी चूत में.

मैंने अपनी जीभ निकाल कर उनके मोटे निप्पल के ऊपर फिरानी शुरू की, ये दुनिया के सबसे मोटे निप्पल थे मेरे लिए, क्योंकि इनसे बड़े और मोटे तो मैंने आज तक नहीं देखे थे. मेरे मुंह में आकर वो ऐसे लग रहे थे मानो छेना मुर्गी का मीठा दाना, उतना हो मोटा और उतना ही मीठा.

मेरे दांत हलके-२ उनके निप्पल को काट भी रहे थे,

किट्टी मेम मचल सी रही थी, उनकी गांड बिलियर्ड टेबल के साथ सटी हुई थी, वो उचक कर उसके ऊपर बैठ गयी, अब उनके आधे शरीर पर ऊपर से आती हुई रौशनी पड़ रही थी, जो उनके खुले हुए योवन को और भी चमका कर मेरी और स्नेहा की आँखों के सामने ला रही थी.

किट्टी मेम : ओह्ह्हह्ह्ह्ह विशाल……..जोर से काट न……अखरोट नहीं खाए क्या कभी, इन्हें अखरोट की तरह से तोड़ दे….साले जब भी किसी जवान लंड को देखते है, कमीनो की तरह खड़े हो जाते हैं….अह्ह्हह्ह….बड़े ही धोखेबाज निप्पलस है ये मेरे, मेरी तो बात ही नहीं सुनते कभी भी, बीच बाजार में खड़े होकर दुनिया को अपने खड़े होने का एहसास कराते हैं, रोज क्लास में भी लडको को देखकर मचल उठते हैं…इन्हें आज इतना काट की ये ऐसा कभी न करे….सजा दे इन्हें…काट डाल….चबा डाल…अह्ह्हह्ह……ओह्ह्ह्ह….हाआन्न्न …..ऐसे…..ही ओफ्फ्फफ्फ्फ़….कुत्ते……..साले…..धीईएरे …..अह्ह्हह्ह्ह्ह अबे खून निकालेगा क्या…..म्मम्मम्मम…….अह्ह्ह्ह …आआन्हाअ……..ओह……

अपनी मम्मी की गन्दी बाते सुनकर स्नेहा भी अपने निप्पलस को अपने हाथो से मसलने लगी, वो शायद देख रही थी की उसके निप्पल अपनी माँ से कितने छोटे हैं…

स्नेहा को अपने निप्पलस को मसलता पाकर किट्टी मेम उससे बोली : बेटी……अपने दाने रोज मसला कर तू भी, अगर मेरे जैसे मोटे बनाने है तो, इन्हें अपने मुंह में लेकर तेरे पापा को भी बड़ा मजा आता है…और मेरे साथ के सभी लोंडो को भी…तू ब्रा कम पहना कर…इन्हें खुला छोड़ा कर…और जब भी मौका मिले..इन्हें दबाने लग जाया कर….और इन्हें ज्यादा से ज्यादा चुसवाया कर….तभी फूलेंगे ये…मेरी तरह….समझी…

अपनी माँ की ज्ञान भरी बाते सुनकर स्नेहा हां में हां मिलाये जा रही थी…

किट्टी मेम फिर वहीँ टेबल पर लेट गयी….उनके पैर अभी भी नीचे की तरफ लटके हुए थे..उन्होंने मुझे भी अपने ऊपर खींच लिया. मैंने ऊपर जाते ही अपना मुंह फिर से उनके मोटे स्तन पर लगा दिया और उन्हें पीने लगा.

अह्ह्ह्हह्ह ….विशाल……तुझे तो चुसना बड़ी अच्छी तरह से आता है…..लगता है तुझे काफी प्रेक्टिस है….ह्न्न्नन्न्न्न……..है न…….बोल…..साले….बोल….

मैं क्या बोलता….की अंशिका के मुम्मे चूस कर ही सीखा हु…पर उनकी नजर में तो मैं उसका कजिन था….मैं चुप चाप उनका दूध पीने में लगा रहा.

तभी स्नेहा अपनी जगह से हिली और अपनी मम्मी की टांगो के बीच आकर खड़ी हो गयी…किट्टी मेम समझ गयी की उनकी बेटी की चूत में फिर से खुजली होने लगी है…पर उन्हें तो पहले अपनी खुजली मिटानी थी, इसलिए उन्होंने अपनी टाँगे ऊपर उठाई, स्नेहा के कंधे पर रखी और उसे अपनी तरफ खींचा और अगले ही पल उनकी बेटी किट्टी मेम की रसीली चूत के रस को सोखने का काम करने लगी…

ऐसा लग रहा था जैसे उसके मुंह को किसी शरबत से भरे कटोरे में डाल दिया गया है, इतना रस उनकी चूत से निकल रहा था, जितना स्नेहा पी रही थी उससे ज्यादा निकलता चला जाता और उसके पुरे मुंह को चमकीले और गीले रस ने भिगो कर रख दिया था.

स्नेहा का और मेरा मुंह तो किट्टी मेम की सेवा करने की वजह से बंद था…पर किट्टी मेम अपने भारी भरकम शरीर पर दो-दो गीले मुंह लगाकर पुरे उत्साह के साथ मजे लेने में लगी हुई थी.

अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ……..सने……….हाआआ………मेरी बच्ची……..अह्ह्ह्ह……..चूस बेटा…..चूस….अह्ह्ह्ह…..अपनी मम्मी ….की…चाशनी…….पी…..ले ……रीईइ……..

और तभी उनकी चूत में जैसे धमाका हुआ….उसमे से एक अजीब तरह का प्रेशर निकला जिसकी वजह से स्नेहा के मुंह को भी झटका लगा और वो पीछे हो गयी.

और फिर किट्टी मेम की चूत से रस का फव्वारा निकलना शुरू हुआ जिसने सामने खड़ी हुई स्नेहा को पूरी तरह से भिगो दिया…रस के ख़त्म होने के बाद शायद उनके अन्दर का पेशाब भी निकल कर सविता को भिगोने लगा था….पहले तो स्नेहा भोचक्की रह गयी….पर फिर उसके कांपते हुए शरीर पर गिरती बोछारो ने जब उसके शरीर को एक नया एहसास देना शुरू किया तो वो भी अपनी आँखे बंद करे अपनी माँ के आशीर्वाद को अपने ऊपर महसूस करने लगी….जैसे-२ फव्वारा कम होता गया, स्नेहा का शरीर आगे की तरफ खिसकता चला गया, वो उनके रसिलेपन को आखिरी क्षण तक अपने ऊपर महसूस करना चाहती थी.

और जैसे ही उसके स्लिपरी मुम्मे अपनी माँ की जांघो से टकराए, किट्टी मेम ने फिर से उसको अपनी टांगो के मोहपाश में बाँध लिया और उसे फिर से अपनी चूत के ऊपर दबा कर उसे अपनी चूत के रस का मजा देने लगी.

उनकी चूत से उठ रही मादक स्मेल को महसूस करके मैं भी उस तरफ घूम गया, मेरे चूतडो के नीचे किट्टी मेम के दोनों विशाल मुम्मे थे, ऐसा लग रहा था की मैं किसी गद्देदार कुर्सी पर बैठा हुआ हु…

मैंने अपना सर झुकाया और अपना मुंह किट्टी मेम की चूत पर लगा कर वहां से निकल रहा अमृत पीने लगा…

किट्टी मेम ने भी मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरे लंड को सीधा करके बड़ी मुश्किल से अपने मुंह में डाल कर चूसने लगी…

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