फ़ोन सेक्स – मोबाइल फ़ोन सेक्स part 13

वो वापिस नीचे उतर गयी और बाहर जाकर सोफे पर बैठ गयी.

पारुल अभी तक नहीं निकली थी वहां से..मुझे घबराहट सी होने लगी.

पारुल : इतने नर्वस क्यों हो…आओ न. यहाँ बैठो

उसने सोफे की तरफ इशारा किया.

मैं उसके पास जाकर बैठ गया.

वो झटके से उठी और मेरी गोद में आकर बैठ गयी, अपनी बाहे मेरी गर्दन पर लपेट दी और मेरी आँखों में देखकर बोली : आई वास वेटिंग फॉर दिस मोमेंट …

और ये कहते हुए उसने मेरे होंठो पर अपने ताजा तरीन होंठ रख दिए..और उन्हें चूसने लगी.

मेरा लंड खड़ा होने लगा, जो उसकी गांड के नीचे दबा हुआ था, मैंने जोर लगा कर अपने लंड को एक जोरदार झटका दिया…वो उछल सी गयी, मानो स्प्रिंग पर बैठी हुई थी वो…

स्नेहा : वोहोऊ …इतना गुस्सा….अभी बताती हु तुझे…
वो मेरे लंड से बात कर रही थी, उसकी तरफ देखकर…

उसने मेरी चादर को पकड़ा और उसे खींच दिया और जैसे ही मेरा लंड उसकी आँखों के सामने आया,

मैं : नहीं…स्नेहा…अभी नहीं…

स्नेहा ने आँखे तरेर कर मुझे देखा और मेरे लंड को पकड़ कर मसलने लगी : अभी नहीं मतलब…कोई महूरत निक्ल्वाओगे क्या..अभी थोड़ी देर पहले तो मुझे बेडरूम में लेजा रहे थे सीधा, अब क्या हुआ, घर तो पूरा खाली है, फिर डर क्यों रहे हो तुम…

मैं : नहीं…वो ऐसी कोई बात नहीं है…मैं सोच रहा था की कुछ खाने के बाद…नहाने के बाद…अभी तो पूरा दिन पड़ा है न…चलो ऊपर चलते है, मेरे रूम में, एकसाथ नहायेंगे..

स्नेहा : नो….तुम्हारे रूम में तो बिलकुल नहीं…इतनी स्मेल है वहां, चलो दुसरे रूम में चलते है, वहां..

उसने मम्मी-पापा के रूम की तरफ इशारा किया, मेरी तो फटने लगी..

मैं : नहीं…वहां कैसे, मोम-डैड क्या कहेंगे…

स्नेहा : तुम तो ऐसे कह रहे हो जैसे उन्हें पता चलेगा…चलो उठो अब..

उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे खींचकर उस कमरे में ले गयी.

स्नेहा : वाव…इतना सुन्दर रूम, और क्या बेड है…वाव…और वो अपने शूस उतार कर बेड के ऊपर चढ़ गयी और उसपर उछालने कूदने लगी…ठीक वैसे ही जैसे कल पारुल नंगी खड़ी होकर उछल रही थी मेरे कमरे में..

पर मुझे तो पारुल की फिकर हो रही थी, मैं किसी भी कीमत पर नहीं चाहता था की स्नेहा को पारुल के होने का आभास हो, नहीं तो हो सकता है की वो मुझे अपनी दे ही न और चली जाए..

स्नेहा ने मुझे ऊपर खींचा और मुझसे लिपट कर मुझे किस करने लगी. मेरी आँखे खुल्ली हुई थी, मैं बार-२ बेड के नीचे की तरफ, बाथरूम के दरवाजे की तरफ और अलमारियो की तरफ देख रहा था की कहीं से शायद पारुल दिखाई दे जाए, पर उसका कोई भी आभास नहीं हुआ मुझे, फिर मुझे लगा की शायद मैं जब ऊपर गया था तो वो इस कमरे से निकल कर बाहर के स्टोर रूम में न चली गयी हो, ये सोचते ही मेरी जान में जान आई, और फिर मैंने भी उसे चूमना चाटना शुरू कर दिया.

स्नेहा ने मेरे लंड को पकड़ा और उसे मसलते हुए, मेरे सामने बैठ गयी, और ऊपर मेरी तरफ देखते हुए, उसे चुसना शुरू कर दिया, मैं अभी भी बेड के ऊपर खड़ा हुआ था, ऊपर से देखने पर मुझे उसका चेहरा बड़ा ही दिलकश लग रहा था, मासूम सी थी वो बिलकुल, मैंने नीचे झुककर उसके टॉप को पकड़ा और उसे ऊपर खींच कर उतार दिया, नीचे उसने स्ट्रेपलेस ब्रा पहनी हुई थी, उसकी ब्रेस्ट तो वैसे भी नाम मात्र की थी, पर उसके निप्पलस मुझे अभी तक याद थे, मैंने उसकी ब्रा को भी खींच कर उतार दिया और मेरे सामने फिर से उसकी कोमल सी ब्रेस्ट और उनपर चमकते हुए मोटे-२ निप्पलस आ गए.

उसने अपने मुंह से मेरा लंड बाहर निकाला और मेरी आँखों में देखते हुए , मेरे गीले लंड को अपने कठोर से निप्पल के ऊपर मसलने लगी..

मेरे मुंह से एक लम्बी सिसकारी निकल गयी…फिर उसने मेरे लंड के चारो तरफ अपनी ब्रेस्ट लपेट कर मुझे टिट फकिंग करने की कोशिश की, पर छोटी होने की वजह से वो कर न पायी…वो अपनी ब्रेस्ट वाले हिस्से पर दबाव डालकर उठी और मेरे हाथो को अपनी मोटी गांड के ऊपर रख कर मुझे बड़े ही प्यार से देखने लगी…

मैंने उसकी जींस के बटन खोले और उसके सामने बैठ कर मैंने उसे नीचे खींच दिया, उसकी ब्लेक कलर की पेंटी, जो पूरी गीली थी मेरी आँखों के सामने थी, मैंने उसे भी नीचे किया और उसने पैर ऊपर करके अपनी जींस और पेंटी एक ही बार में बाहर की, और मुझे देखते हुए, शर्माते हुए, मुझे नीचे लिटाकर, मेरे ऊपर ही लेट गयी…

उसकी चूत से मेरे लंड के ऊपर बरसात सी हो रही थी, अपनी चूत को वो मेरे लंड के ऊपर बुरी तरह से घिसने में लगी हुई थी..अब वो मौका आ ही गया था, जिसका हर लड़की को इन्तजार रहता है, अपनी चूत में पहली बार लंड डलवाने का…और शायद ये बात स्नेहा भी जान चुकी थी, क्योंकि उसके चेहरे पर एक अजीब सी लालिमा आ गयी थी..

मैंने उसके चेहरे को पकड़ा और कहा : तुम तैयार हो आज…कलि से फूल बनने के लिए..

स्नेहा : मैं तो कब से तैयार हु विशाल…आज जैसे भी करो, पर मुझे कलि से फूल बना ही दो…आई एम् डाईंग टू बीकम कम्प्लीट वूमन… मेक मी वूमन …..प्लीस….

मुझे उसकी प्लीस को कोई जरुरत नहीं थी आज, मैं तो वैसे भी उसे चोदने ही वाला था..

मैंने उसे नीचे लिटाया, उसकी दोनों टाँगे ऊपर हवा में उठाई, उसकी गांड के नीचे एक तकिया लगाया, अपने लंड के ऊपर थूक लगायी और उसे हाथ से पकड़ कर, उसकी छोटी सी दिख रही चूत के मुहाने पर लगा दिया..

अचानक मुझे सामने की अलमारी का पल्ला हिलता हुआ सा महसूस हुआ, और अगले ही पल पारुल वहां से झांकती हुई दिखी…

स्नेहा के पीछे थी वो अलमारी, इसलिए वो देख नहीं पा रही थी…पर पारुल को उसी कमरे में पाकर मेरी हलक सूखने लगी…पारुल बड़े मजे से मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी, वो अभी तक नंगी ही थी..उसने आधे से ज्यादा पल्ला खोल रखा था, अगर स्नेहा एकदम से पीछे देखेगी तो उसे पारुल नंगी खड़ी हुई दिखाई दे जायेगी….उस स्थिति में फंसकर अचानक मेरे खड़े हुए लंड ने मुरझाना शुरू कर दिया…मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की मैं क्या करूँ…

स्नेहा को जब एहसास हुआ की मेरा लंड मुरझाकर उसकी चूत के ऊपर लटक सा गया है तो वो बोली : क्या हुआ बेबी…….करो ना प्लीस…डाल दो…..

पर मैं कुछ न बोला..

स्नेहा : ओह…लगता है तुम नर्वस हो गए हो…मेरी तरह तुम्हारा भी तो ये पहली बार है न…आई केन अंडरस्टेंड …कम….कम हेयर….

उसने मुझे ऊपर की तरफ खींचा….और मेरा लंड जब उसके मुंह के पास पहुंचा तो उसने उसे मुंह में लेकर चुसना शुरू कर दिया….मेरी आँखे बंद सी होने लगी, उसके निप्पल मेरी गांड के अंदर चुभ रहे थे, मैंने भी अपने चुतड हिला – हिलाकर उन्हें मसलना शुरू कर दिया..जल्दी ही मेरा लंड फिर से फुफकारने लगा..

मैंने अपनी आँखे खोली, सामने पारुल पूरी अलमारी खोलकर, अपनी चूत को बुरी तरह से घिस रही थी, उसके सामने किसी लड़की की पहली बार चुदाई जो हो रही थी, जिसे देखकर उसे उत्तेजना सी होने लगी, और शायद स्नेहा की बात सुनकर उसे भी पता चल गया था की ये वो लड़की नहीं है जिसकी मैंने कल पूरा दिन मारी थी, पर मौके की नजाकत को देखते हुए उसने छुपे रहना ही बेहतर समझा और छुपकर वो अपनी चूत मसलकर मुझे देखते हुए मजे भी ले रही थी.

मैं फिर से नीचे गया, फिर से अपने लंड पर थूक लगायी और उसकी ताजा सफा हुई चूत के ऊपर लंड टीकाकार धीरे से धक्का दिया, मेरा लंड तो चिकना था ही, उसकी चूत में से भी मीठा रस निकल कर उसे और भी चिकना बना रहा था, एक दो बार तो लंड फिसला पर फिर एक बार जोर लगाकर मैंने जब धक्का दिया तो सुपाड़ा अंदर घुस ही गया…

स्नेहा की आँखे फटने को हो गयी, मुंह ओ की शेप में खुल गया, निप्पल तनकर फटने जैसे हो गए…

मैंने उसके दोनों हाथो को सर के ऊपर किया, उन्हें दबोचा और एक और झटका मारा…और एक के बाद एक कई झटके मारकर, लंड को इंच बाय इंच अंदर धकेलता चला गया…और स्नेहा की हालत ऐसी थी की उससे चीखा भी नहीं जा रहा था…आँखों के किनारे से आंसू निकल कर नीचे गिर रहे थे…मैंने नीचे झुककर उसके होंठो को चूसा पर उसकी तरफ से कोई रिस्पोंस नहीं आया, शायद दर्द की वजह से वो कुछ भी मजे लेने की हालत में नहीं थी..

मेरा लंड जब उसकी चूत में अंदर तक उतर गया तो मैंने उसकी आँखों में देखा और कहा : मुबारक हो…तुम कलि से फूल बन चुकी हो….

उसने रोते हुए मेरी पीठ पर मुक्का मारा…

मैंने फिर अपने लंड को वापिस खींचा, मेरे साथ-२ वो भी नीचे देखते हुए अपनी चूत से मेरे लंड को निकलता हुआ देख रही थी, वो उसके खून से सना हुआ था…और सफ़ेद रंग के द्रव्य से भी, शायद उसकी चूत से ही निकला था वो भी…

जब पूरा लंड बाहर निकल आया तो स्नेहा बोली : निकाला क्यों…डालो इसे अंदर…अब ठीक है…मजा आ रहा था अब तो..

मैंने उसकी तरफ मुस्कुरा कर देखा और अपना लंड उसी अवस्था में वापिस डालना शुरू कर दिया…इस बार उसे कम दर्द हुआ..उसने मेरे चूतडो पर अपने पैर की एडिया रख कर मुझे अपनी तरफ खींचना शुरू किया…और फिर तो जब मोशन बन गया तो उसके मुंह से लम्बी -२ सिस्कारिया निकलने लगी…

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्मम येस्सस्सस्स …….श्ह्ह्हह्ह्ह्ह ……..फक मी…..अह्ह्ह्हह्ह …ओह्ह्ह विशाल्ल्ल……फक मी……य़ा……येस्स…..ऐसे ही…..अह्ह्हह्ह्ह्ह …ओह्ह्ह्ह …म्मम्म….

वो उठ कर बैठ गयी और मेरी गोद में चढ़ कर अपनी टाँगे मेरे चारो तरफ लपेट दी और खुद ऊपर नीचे होने लगी…मैं थोडा आगे हुआ और अपने पैर नीचे लटका कर बेड के किनारे पर बैठ गया, स्नेहा मेरी गोद में थी और उसकी पीठ पारुल की तरफ थी, जो बुरे-२ मुंह बना कर हमें देखते हुए, अपनी चूत के अंदर अपनी सारी उंगलिया डालकर मास्टरबेट करने में लगी हुई थी…

मैंने नीचे सर करके उसके निप्पल को मुंह में भरा और उसका शहद पीने लगा..वो मेरे सर को अपनी छाती पर मसलते हुए बुरी तरह से करहा रही थी…पर मादक अंदाज में…

ओह्ह्हह्ह य़ा…..विशाल्लल्ल्ल…..यु आर ग्रेट…..अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ……….सक….मी…….फक मी…..ओह….ओह्ह्ह ओह्ह्ह्ह ओह्ह्हह्ह गोड…. अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

और उसने चीखते हुए, मेरे होंठो को चुसना शुरू कर दिया, मेरे लंड के ऊपर उसकी चूत से निकली हुई गरमा गरम चाशनी गिरने लगी…चाशनी की गर्मी पाकर मेरे लंड ने भी अपने मुंह से सफ़ेद झाग उगलनी शुरू कर दी….और जैसे ही उसने मेरे लंड की हलचल अपने अंदर महसूस की वो चीखने लगी…..अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्मम ……..

सामने देखा तो पाया की पारुल भी निढाल सी होकर खड़ी हुई है…उसने धीरे से अलमारी का पल्ला बंद कर लिया ताकि स्नेहा उसे न देख पाए…

वो मेरे लंड से उतरी और उसके उतारते ही उसकी चूत से टपटप करके मेरा रस और उसकी चाशनी बाहर निकलने लगी…

मैंने उसे बाथरूम में जाकर साफ़ करने को कहा, वो झट से अंदर भाग गयी.

वो मेरे लंड से उतरी और उसके उतारते ही उसकी चूत से टपटप करके मेरा रस और उसकी चाशनी बाहर निकलने लगी…

मैंने उसे बाथरूम में जाकर साफ़ करने को कहा, वो झट से अंदर भाग गयी.

उसके भागते ही मैंने अलमारी खोली, अंदर पारुल ने अपने कपडे पहन लिए थे, वो मुझसे धीरे से बोली : अच्छा बच्चू, मुझे झूट बोला की ये लड़की कल वाली ही है….और कितनी है तेरे पास…

मैं : देख पारुल, तुने ही कहा था न की अब हम फक बडी है, इसलिए तू भी मजे कर और मुझे भी करने दे, तू और किसके साथ क्या करती है, या मैं किसी और के साथ क्या करता हु, ये सब मायने नहीं रखता…समझी..चल अब जल्दी से जा…

वो समझ गयी और उसने भी ज्यादा बहस नहीं की, बाथरूम से स्नेहा कभी भी आ सकती थी, उसने फिर से मिलने का वादा किया और चली गयी, हमारा बाहर का दरवाजा नोब वाला है, उसे उसने खोला, अंदर से लोक किया और बंद करके बाहर निकल गयी , मैंने भी चैन की सांस ली, मैं बाथरूम के अंदर चल दिया..

अंदर स्नेहा नीचे झुक कर अपनी चूत का डेमेज एक्सामिन कर रही थी…मैं उसके पीछे गया और उसे भींच कर खड़ा हो गया..

स्नेहा : देखो न विशाल…तुमने क्या कर दिया…मेरी पुस्सी का कितना बुरा हाल किया है तुमने…

मैं : अरे ये तो अभी शुरुवात है…ये कहते हुए मैंने शावर चला दिया..

एकदम से ठंडा पानी अपने ऊपर पड़ते ही वो पलट कर मुझसे लिपट गयी….
ओफ्फफ्फ्फ़….बंद करो इसे…..ठंडा है पानी….उन्हूऊ ……..

पर मैंने पानी बंद नहीं किया…और उससे लिपट कर खड़ा ही रहा…मैंने उसके पुरे शरीर पर हाथ फेरने शुरू कर दिए…और जल्दी ही उसकी तरफ से भी री एक्शन होने लगे….मैंने उसे वहीँ गीले फर्श पर लिटाया और चूमना शुरू कर दिया…उसने मुझे नीचे किया और मेरे ऊपर सवार हो गयी…ऊपर से शावर का पानी बारिश की तरह हमारे ऊपर गिर रहा था…उसका भीगा हुआ बदन मेरे ऊपर था…वो झुकी और मेरे लंड को अपनी चूत के ऊपर लगा कर, उसके ऊपर बैठने लगी…पानी की वजह से और शायद उसकी चूत से निकलते लुब्रिकेंट की वजह से इस बार ज्यादा तकलीफ नहीं हुई उसे..फिर तो वो कावगर्ल वाले स्टाईल में मेरे घोड़े के ऊपर उछल-उछल कर मजे लेने लगी….

अह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फ्फ़ ओन्न्न्न ओम्म्म्मम्म म्मम्मम्म एस……..अह्ह्ह्हह्ह …..विशाल्ल्ल्ल……जोर से…..अह्ह्हह्ह……मजा आ गया…..आह्ह्ह्ह….म्मम्मम….

और फिर वो धप्प से मेरे ऊपर गिर गयी…उसके शूल जैसे निप्पल मेरे चेहरे पर चुभने लगे…

मैंने भी उसकी गांड के ऊपर हाथ रखा और उसकी चूत के अंदर अपना लंड पेलना शुरू कर दिया….और जल्दी ही मेरा भी निकलने लगा…मैंने उसे और तेजी से भींच लिया अपनी तरफ…

उसने मुंह ऊपर किया …मुझे किस किया और खड़ी होकर नहाने लगी…और फिर हम अंदर आ गए..

स्नेहा : तुम तैयार होकर बाहर आओ, मैं नाश्ता बनाती हु तुम्हारे लिए कुछ…

मैं ऊपर अपने कमरे में गया…वहां मेरा फोन लगातार बज रहा था…मैंने जाकर देखा तो अंशिका का फोन था…

मैं : हाय…
अंशिका : क्या यार…इतनी देर से फोन कर रही थी…कहाँ थे…
मैं : वो…मैं..नहा रहा था…
अंशिका : ठीक है…अच्छा बोलो…आज का क्या प्रोग्राम है…
मैं : आज का…क्या मतलब…
अंशिका (धीरे से) : मुझे कल वाली बाते याद आ रही है सुबह से…समझे..अब बोलो, आज का क्या प्रोग्राम है..

मैं समझ गया की अंशिका की चूत में खुजली हो रही है अब…

मैं : ओके….तुम कहाँ हो अभी….
अंशिका : मैं कॉलेज में हु…दो बजे तक फ्री हो जाउंगी…आ जाऊ क्या फिर…तुम्हारे घर…
मैं : ओके…ओके…आ जाना…
अंशिका : ओह्ह….वाव….थेंक्स….ठीक है फिर मिलते हैं…तीन बजे तक…लंच एक साथ करेंगे….और फिर…
मैं : और फिर क्या…
अंशिका : बदमाश…मैं आकर बताती हु तुम्हे तो…ओके..बाय…

मैंने फ़ोन रख दिया…और नीचे चल दिया नाश्ता करने…

मैंने अपने पुरे कपडे पहन लिए, ताकि मुझे आधा या पूरा नंगा देखकर स्नेहा का मन फिर से न कर पड़े, मैं अब सीधा अंशिका को ही चोदना चाहता था, स्नेहा के साथ और मजे लेकर और एनर्जी खर्च नहीं करना चाहता था अब मैं..

स्नेहा नीचे किचन में खड़ी हुई ब्रेड ओम्लेट बना रही थी, उसने सिर्फ पेंटी और ब्रा पहनी हुई थी..

मुझे पुरे कपड़ो में देखकर उसने कहा : बड़ी जल्दी कपडे पहन लिए..मुझे तो लगा की आज पूरा दिन तुम ऐसे ही रहोगे..

मैं : वो दरअसल मुझे कहीं जाना है अभी..

मेरी बात सुनते ही वो रुक सी गयी.

स्नेहा : क्या यार…मैंने आज तुम्हारी वजह से स्कूल से बंक मारा है…मैंने सोचा था की पूरा दिन तुम्हारे साथ रहूंगी..

ये कहते हुए वो मेरी तरफ आ गयी, उसका चहरा उतर सा गया था.

अभी तो सिर्फ ग्यारह ही बजे थे, उसके स्कूल से घर जाने में भी अभी २ घंटे का टाइम था और अंशिका ने तो दो बजे के बाद ही आना था.

मैंने स्नेहा को अपनी गोद में बिठाया और उसके गाल पर एक किस्स कर दी.

मैं : ओह्ह माय बेबी ….नाराज क्यों होती हो…मैं कोनसा तुम्हे जाने को कह रहा हु, तुम्हे तो घर वैसे भी एक बजे ही जाना है न..ठीक है फिर, मैं तुम्हारे घर जाने के बाद ही जाऊंगा..

मेरी बात सुनते ही वो खुश हो गयी और मुझसे लिपट गयी..मैं उसकी नंगी पीठ पर हाथ फेरने लगा.

तभी कुछ जलने की स्मेल आई…और वो चीखती हुई भाग खड़ी हुई..: हे भगवान्….मेरा अंडा…

उसका अंडा…मतलब, तवे पर रखा हुआ आमलेट जल चूका था..

उसका चेहरा रुआंसा सा हो गया. जिसे देखकर मेरी हंसी निकल गयी.

मुझे हँसता हुआ देखकर वो मुझे मारने को दौड़ी…और बोली : अभी मजा चखाती हु..अब तो तुम्हारे अंडे भी गए समझो…

उसकी बात का मतलब समझते ही मैं सर पर पैर रखकर भागने लगा..वो ब्रा पेंटी में मेरे पीछे भागकर मुझे पकड़ने की कोशिश करने लगी…और अंत में मुझे उसने मेरे कमरे में घेर ही लिया..मेरे पीछे सिर्फ मेरा बेड था, कोई और रास्ता नहीं था निकलने का..

मैं : ओके…बाबा…सोरी…गलती हो गयी…अब नहीं हंसुगा..

पर वो बड़े ही अजीब तरीके से मुझे घूरते हुए मेरी तरफ आती जा रही थी…और जैसे ही मैं बेड से टकरा कर उसपर गिरा, वो उछलकर मेरी टांगो के बीच आ बैठी..और अपना हाथ सीधा मेरे लंड वाले हिस्से पर रख दिया..उसके नन्हे हाथ अपने बुलडोजर के ऊपर पाते ही मेरा लंड उसकी चूत को रोंदने के लिए फिर से व्याकुल हो उठा..

अभी थोड़ी ही देर पहले मैंने उसकी दो बार मारी थी..और अंशिका के लिए भी मुझे अपनी स्ट्रेंथ बचा कर रखनी थी..पर अभी वो इस तरह से मेरे लंड को सहला रही थी की मुझे बाद में क्या करना है और किसके लिए करना है, उसका कोई होश नहीं रहा…और मैंने भी उसकी ब्रा को नीचे करके उसके तने हुए निप्पल से खेलना शुरू कर दिया…

स्नेहा : कितना आसान है तुम लडको को सेक्स के लिए मनाना….

बात तो वो सही कह रही थी…और आता भी क्या है हम लंड वालो को…

स्नेहा ने झटके से मेरा बोक्स्सर नीचे खींच दीया और जब उसके सामने मेरा लहराता हुआ सांप आया तो उसने उसे अपने हाथो में समेट कर ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया…पर अपना मुंह नहीं लगाया…और फिर जब उसने अपनी जीभ बाहर निकाली तो मेरे लंड को छोड़ कर मेरी बाल्स को चाटने लगी..मुझे ये बड़ा अजीब सा लगा…पर मजा भी आ रहा था..

और फिर उसने झुक कर अपने रसभरी जैसे होंठ मेरी बाल्स के ऊपर रख दिए और उन्हें चूसने लगी, जैसे वो मेरे होंठ हो और उनमे से कोई जूस निकल रहा हो…उसकी नाक मेरे लंड से टकरा रही थी..और उसका हाथ मेरे लंड को ऊपर नीचे करने में लगा हुआ था…और फिर उसने अपना मुंह पूरा खोला और एक ही बार में मेरी दोनों बाल्स को अन्दर निगल लिया..और उन्हें आम की तरह से चूसने लगी..मेरे आनंद की तो सीमा ही नहीं रही…मैंने उसके द्वारा ऐसा ट्रीटमेंट एक्स्पेक्ट ही नहीं किया था..

फिर उसने मेरी बाल्स को बाहर निकाला और मुझसे कहा : अब बोलो…खा जाऊ क्या तुम्हारे ये अंडे…उड़ाओगे मेरा मजाक आज के बाद …बोलो….

मैंने हँसते हुए कहा : अगर तुम मेरी बात से नाराज होकर इसी तरह की सजा देती रहोगी तो हर बार उड़ाऊंगा तुम्हारा मजाक….

मेरी बात सुनते ही, उसने हँसते हुए मेरे अन्डो को फिर से अपने मुंह में डाला और उन्हें अपनी जीभ और दांतों से मसाज देने लगी..उसका पूरा मुंह मेरे अन्डो से भर चूका था..वो साथ-२ मेरे लंड को भी ऊपर नीचे लारती जा रही थी…आज जैसा उत्तेजित तो मैंने कभी भी फील नहीं किया था..

उसके मुंह में जाकर आज मेरी बाल्स कुछ ज्यादा ही बड़ी हो चुकी थी…और उसे अब अपनी जीभ घुमाने में भी मुश्किल हो रही थी..पर फिर भी उसने अपने मुंह से उन्हें बाहर नहीं निकाला…और ऊपर मुंह करे, मेरे लंड को मसलते हुए, वो लगी रही…

और जल्दी ही मेरे लंड से आनंद की वर्षा होने लगी और उसके फूल से चेहरे के ऊपर उछल – २ कर गिरने लगी…स्नेहा का पूरा चेहरा मेरे लंड से निकली बर्फ से ढक कर सफ़ेद हो चूका था…और जैसे ही मेरे अन्डो का साईज कम हुआ वो अपने आप उसके मुंह से फिसल कर बाहर निकल आये….उसने अपने हाथो की उँगलियों से अपने चेहरे को ऐसे पोंचा जैसे पसीना आया हो उसके चेहरे पर और फिर उन उँगलियों को वो चाट चाटकर साफ़ करने लगी…

मैं धम्म से बेड के ऊपर गिर पड़ा..

फिर उसने पास ही पड़े हुए टावल से अपना मुंह साफ़ किया और कहा : अब कभी पंगा मत लेना मुझसे …समझे…

और फिर से नीचे की तरफ चल दी..मैं भी उठा और नीचे जाकर बैठ गया, उसने फिर से आमलेट ब्रेड बनाया और हमने मिलकर ब्रेक फास्ट किया.

उसके बाद वो सब कुछ समेटने लगी और मैं सोफे पर आकर अखबार पड़ने लगा.

वो कुछ देर में ही मेरे साथ आकर बैठ गयी और मेरे कंधे पर सर रखकर बोली : तुम बड़े गंदे हो…
मैं : मैं…गन्दा…कैसे…

स्नेह : तुम्हारे अंडे खाने के बाद भी मैं भूखी ही रह गयी..तुम्हे तो मेरी कोई फ़िक्र ही नहीं है…
और अपनी लेफ्ट ब्रेस्ट को मेरी बाजू से घुसने लगी..

साली…फिर से मुझे उकसा रही है..

मैं : यार…तुम भी न…समझा करी…मैं इंसान हु, कोई मशीन नहीं…थोडा तो टाइम दो मुझे रिचार्ज के लिए..

स्नेह : और भी तो तरीके होते है…भूख मिटाने के…

और वो मेरे होंठो पर अपनी उंगलिया फिराने लगी..यानी वो कहना चाहती थी की जैसे उसने चूसकर मेरा जूस निकाला वैसे ही मैं भी उसे मजे दू…मुंह से..

मैंने टाइम देखा, एक बजने में अभी आधा घंटा था..मैंने सोचा ये मानेगी तो है नहीं, इसलिए जल्दी से इसे फारिग कर देना चाहिए…और मैंने उसकी लम्बी और नंगी टांगो को ऊपर किया, उसकी पेंटी को नीचे खींचा , जो पूरी गीली हो चुकी थी अपने ही रस में डूब कर…जैसे ही मैंने उसकी गीली कच्छी उसकी चूत से जुदा की , उसके मुंह से एक तीखी सिसकारी निकल गयी….आआआआह्ह्ह्ह ……विशालल्लल्लल …..म्मम्म..
और अगले ही पल उसकी चूत से उतनी ही तीखी स्मेल निकल कर मेरे नथुनों से टकराई…और मैंने अपना मुंह उसकी शहद से लबालब चूत में दे मारा….
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ………म्मम्म..

शहद के बारे में सोचते ही मेरे दिमाग में एक आईडिया आया, मैं भागकर फ्रिज तक गया और उसमे से शहद की शीशी निकाल लाया…स्नेहा समझ गयी की मैं क्या करने वाला हु…मैंने ढक्कन खोलकर ठंडा शहद जैसे ही उसकी चूत के ऊपर डाला…

अग्ग्ग्गहह ह्ह्हह्ह्ह्ह ………..ओफ्फफ्फ्फ़ …………..मर्र्र्रर्र्र गयी…………अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ….

वो इतनी जोर से चीखी की मुझे भी डर लग गया की कहीं बाहर कोई ये न सोचे की अन्दर रेप हो रहा है…

मैंने अपनी जीभ से ठंडा शहद इकठ्ठा किया और उसी ठंडी जीभ को उसकी गर्म चूत की गहराईयों में उतार दिया…अन्दर से ठंडक का एहसास पाते ही उसकी कंपकपी सी छूट गयी…और अगले ही पल उसकी चूत से गर्म रस की फुहार आकर मेरे चेहरे को भिगोने लगी…

कमीनी ने मेरा सोफा पूरा गिला कर दिया.

मैंने जितना हो सका उसके रस को चाटकर साफ़ किया और फिर उठ कर बाथरूम मे अपना मुंह साफ़ किया और जींस और टी शर्ट पहन कर बाहर आ गया…वो भी अपने कपडे पहन चुकी थी…और वापिस जाने के लिए तैयार थी…

स्नेह : अब कब मिलेंगे…हम इस तरह…

मैं : जल्दी ही…अभी चलो, मुझे बेंक का काम निपटाना है…और तुम्हे भी देर हो रही होगी…

स्नेहा ने मुझे आखिरी बार जोरदार किस किया और हम बाहर निकल आये…

मैंने उसे स्टेंड पर उतारा और मैं सीधा डोमिनोस के स्टोर में गया और अपने और अंशिका के लिए पिज्जा पेक करवाकर वापिस चल दिया…

अभी उसे आने में आधा घंटा और लगेगा, ये सोचते हुए मैंने जल्दी से घर की सफाई करनी शुरू कर दी, ताकि उसे कोई सबूत न मिल जाए की कल या आज सुबह यहाँ कोई आया था…मैंने पुरे घर में रूम फ्रेशनर डाल कर सेक्स की गंध को भी हटा दिया…और मैं बैठकर अंशिका का वेट करने लगा..

सवा दो बजे मेरे घर की बेल बजी और मैं भागकर बाहर आया…दरवाजा खोला तो मैं हेरान रह गया…

अंशिका के साथ कनिष्का भी थी.

एक बार तो मैं घबरा गया, क्योंकि मुझे ये बिलकुल भी आशा नहीं थी की अंशिका के साथ कनिष्का भी आ जायेगी, पर फिर मैंने अपने आप को संभाला और दोनों को अन्दर आने को कहा.

अंशिका ने हमेशा की तरह कॉलेज की मेडम वाली साडी पहनी हुई थी और कनिष्का ने एक बिंदास सी केप्री और टी शर्ट.

अंशिका ने मेरे चेहरे पर आये सवाल शायद पढ़ लिए थे, की वो अंशिका को क्यों साथ में लेकर आ गयी.

अंशिका : विशाल, आज तो इतफ्फाक हो गया, मैं जिस बस से घर जा रही थी, वो बाहर सड़क पर ही खराब हो गयी, मैंने सोचा की तुमसे कह दूंगी की तुम अपनी बाईक पर मुझे घर छोड़ देना, और जब मैं यहाँ आ रही थी तो मुझे कनिष्का भी यहीं मिल गयी, वो अपनी इसी सहेली के घर आई थी, वो सामने वाली गली में रहती है शायद, तो मैं इसे भी ले आई…मुझे मालुम है की हम दोनों को एक साथ बाईक पर बिठाना थोडा मुश्किल होगा..पर कोई प्रोब्लम है तो हम ऑटो कर लेंगे…

मैं : अरे नहीं , कैसी बात करती हो अंशिका…इसमें मुश्किल की क्या बात है, मैंने इससे तो एक बार पांच लड़कियों को एक साथ बिठाया था अपनी बाईक पर…

इस बार अंशिका हेरान होकर बोली : पांच -२ लडकिया, और तुम्हारी बाईक पर एक साथ….वाव….कैसे किया तुमने ये कारनामा…

मैं : दो आगे बैठ गयी, दो पीछे और एक मेरे सर के ऊपर….हा हा…

कनिष्का : हा हा..वैरी फन्नी ..

अंशिका भी मेरी मसखरी सुनकर मुस्कुराने लगी..

मैं : अरे बैठो तो सही, मैं कुछ लाता हु तुम दोनों के लिए..

और मैंने उन्हें सोफे पर बिठा दिया और भाग कर किचन में गया और कोल्ड ड्रिंक की बोतल निकाल कर उसे ग्लास में डालने लगा. तभी पीछे से कनिष्का अन्दर आ गयी..

कनिष्का : कोई हेल्प चाहिए क्या…

मैंने उसे देखा और उसका हाथ पकड़कर मैंने उसे फ्रिज के पीछे खींच लिया ताकि बाहर बैठी हुई अंशिका हमें न देख पाए

मैं : ये क्या पागलपन है, मुझे बता तो देती की तुम भी आ रही हो..

कनिष्का : मैं तो तुम्हे सरप्राईज देना चाहती थी..मुझे क्या पता था की आज फिर तुम्हारा प्रोग्राम है दीदी के साथ..मैं तो सीधा तुम्हारे घर आ रही थी, तभी सामने से एकदम दीदी आ गयी, मुझे मालुम की वो तुमसे ही मिलने आ रही थी, बस खराब होने का तो उन्होंने बहाना बनाया मुझे देखकर…और मैंने भी कह दिया की मैं अपनी सहेली से मिलने आई थी और घर जा रही हु, तब दीदी ने कहा की विशाल के घर चलते है, वो अपनी बाईक से छोड़ देगा..

मैं : जो भी हो…पर तुम्हारे चक्कर में अब आज का दिन खराब जाएगा मेरा.

कनिष्का ने आगे बढकर मेरे गले में बाहे दाल दी : वाह जी वाह…तुम्हे तो अपनी ही फिकर है, हमारी क्या हालत है उसका कुछ अंदाजा भी है तुम्हे…अब तो तुमने दीदी के साथ सब कुछ कर ही लिया है, और वादे के मुताबिक अब तुम्हे मुझे प्यार करना है..और ये तुम सोचो की कैसे करोगे..दीदी को भगा कर या उनके सामने ही…

उसके चेहरे पर एक इरोटिक एक्सप्रेशन आ गए ये सब कहते हुए..उसकी टी शर्ट के अन्दर कैद ब्रेस्ट के निप्पल्स भी साफ़ दिखाई देने लगे..

मेरा लंड तो उसकी बाते सुनकर पागलो की तरह पायजामे में ठोकरे मारने लगा..और उसकी बाते सुनकर तो मुझे यही महसूस हो रहा था की वो अपनी बहन के सामने भी चुदने को तैयार है.

मैंने अपने हाथ उसकी कमर के ऊपर रखे और अपना चेहरा आगे करके उसे चूमने ही वाला था की तभी अंशिका की आवाज आई :कनिष्का…विशाल…..ये …ये क्या कर रहे हो तुम दोनों …

ओह…फक्क्क …अंशिका ने अन्दर आकर सब देख लिया था…

मेरी तो हालत ही खराब हो गयी..पर कनिष्का के चेहरे को देखकर लगा की उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ा..

अंशिका अपने मुंह पर हाथ रखे हुए कभी मुझे और कभी अपनी छोटी बहन को देखे जा रही थी..और सोचने-समझने की कोशिश कर रही थी की ये कब से चल रहा है..

कनिष्का ने मोर्चा संभाला.

कनिष्का : इसमें विशाल की कोई गलती नहीं है दीदी…दरअसल ये मुझे शुरू से ही अच्छा लगता है..पर इसने सच्चाई से मुझे पहले ही बता दिया था की तुम दोनों के बीच क्या चल रहा है..मैंने तो विशाल को कई बार सब कुछ करने को कहा..पर इसने मना कर दिया..दो दिन पहले भी मैं आई थी इसके पास, पर इसने बताया की इसने आपसे वादा किया है की पहले ये आपके साथ सेक्स करेगा…फिर किसी और के साथ..

अंशिका मुंह फाड़े अपनी बहन की बाते सुन रही थी, उसे शायद ये विशवास नहीं हो पा रहा था की उसकी छोटी बहन के जिस्म में भी जवानी की आग भड़कने लगी है..जिसका उसे आज तक अंदाजा भी नहीं था.

अंशिका ने आगे कहा : दीदी, मुझे गलत मत समझना, पर होस्टल में मेरा एक बॉय फ्रेंड था, जिसके साथ मैंने..मैंने..सब कुछ किया है..एंड आई एम् नो मोर वर्जिन ……

अंशिका जिसे अपनी मासूम बहन समझकर आज तक उसे प्यार करती आई थी उसने इस बात की कल्पना भी नहीं की थी…और शायद इस बात की भी नहीं की वो आज मेरे सामने खड़ी होकर ये बात काबुल करेगी..

कनिष्का : और दीदी…यहाँ आने के बाद मुझे अपने होस्टल वाले दिन बहुत याद आते हैं…आई होप यु अन्डरस्टेंड …..और एकदम से तो कोई मिल नहीं जाता, कॉलेज खुलने में भी टाईम है अभी जहाँ नए लड़के मिलेंगे…इसलिए…इसलिए विशाल को देखकर मेरे मन में ये सब आया…पर जैसा उसने कहा था की पहले वो आपके साथ और फिर किसी और के साथ…इसलिए मैं आई थी आज..क्योंकि मैं जानती हु की आप कल पूरा दिन यहाँ थी इसके साथ…और आप दोनों ने..

अंशिका : चुप कर कन्नू….हमारे बीच जो भी चल रहा है, उससे तेरा कोई मतलब नहीं है…मैंने सोचा भी नहीं था की तू इतना आगे निकल चुकी है…मुझे तो अपने कानो पर विशवास ही नहीं हो रहा है…

अंशिका की आँखों से आंसू निकलने लगे थे.

कनिष्का भाग कर अपनी बहन के पास गयी और उसके आंसू पोछने लगी : नहीं दीदी…आप प्लीस रोना मत….आप कहती हो तो मैं चली जाती हु अभी…और कभी भी विशाल के पास नहीं आउंगी…आपकी कसम दीदी…पर आप रोना मत..मैं आपको दुखी नहीं देख सकती…गलती मेरी ही है, मैंने ही आपके फ्रेंड के ऊपर गलत नजर रखी, ये भी नहीं सोचा की आपके ऊपर क्या गुजरेगी…आप बैठो यहाँ, मैं चलती हु ..

और वो मुढ़कर जाने लगी.

मैं उन दोनों बहनों का प्यार देखकर भावुक सा हो उठा..

अंशिका : रुक जा…

अंशिका ने उसे रोका और उसका हाथ पकड़कर बाहर ले गयी, और सोफे पर बैठ गयी.

मैं भी उनके पीछे-२ बाहर निकला.

अंशिका ने आगे बढकर अपनी बहन को गले से लगा लिया और अपने आंसू पोछकर बोली : तुझे जाने की कोई जरुरत नहीं है…और जैसा विशाल ने तुझे बताया था, सब कुछ ठीक है, हम दोनों में एक ऐसी अन्डर स्टेंडिंग है जो शायद ही किसी में देखने को मिले, ये मेरी बातो और जज्बातों का पूरा ध्यान रखता है…इसके जैसा अन्डर स्टेंडिंग फ्रेंड मुझे कोई मिल ही नहीं सकता..और जो ख़ुशी इसने मुझे दी है, उसका एहसास ही मुझे आज दोबारा खींच लाया है इसके पास आज यहाँ…पर तेरे दिल में भी इसके लिए कुछ है ये मैं नहीं जानती थी…..जानती है, मैंने तुझे दुनिया की हर बुरी नजर से बचा कर रखा है, यहाँ तक की शुरू में जब विशाल भी तेरे बारे में कोई बात करता था तो मैं इसे भी डांट देती थी, पर मुझे क्या मालुम था की मेरी छोटी बहन अब बड़ी हो चुकी है…उसने भी अपनी जवानी की हर देहलीज पार कर ली है और मर्यादा के वो सारे बंधन भी वो तोड़ चुकी है जिसे सिर्फ शादी के बाद सही माना जाता है…पर इसमें तेरा भी कोई दोष नहीं है, मैं भी तेरी तरह इसी उम्र से गुजरी हु और मैंने भी वो सब किया है…पर ये जो उम्र का पड़ाव है, जहाँ शादी अभी काफी दूर है और आस पास के किसी भी इंसान पर किसी तरह का भरोसा करके अपने आप को उसे सोंपना काफी जोखिम भरा है..तब मैंने विशाल पर विशवास करके उसे अपना जिस्म सोंपा ..और इसने मेरे विशवास का सही तरह से पालन भी किया..हमारे बीच में कोई बॉय फ्रेंड – गर्ल फ्रेंड जैसा या शादी करने जैसा कोई कमिटमेंट नहीं है…बस सच्चे दिल से एक दुसरे को मनचाही खुशिया देने का जज्बा है..और तुझे भी ऐसा लड़का और कोई नहीं मिलेगा…इसलिए..इसलिए..तू यहाँ रुक और मैं चलती हु..

ओ तेरे की….यानी अंशिका अपनी बहन को मुझे सोंपकर जाने की बात कर रही थी…ताकि मैं उसे चोद सकू..वाव..

अंशिका की बात सुनकर कनिष्का ने अपनी बहन को गले से लगा लिया : मैं जानती थी दीदी, की तुम ऐसा ही करोगी, पर मैं नहीं चाहती की तुम मेरे लिए अपनी खुशियों की बलि दो…अगर..अगर आपको बुरा न लगे तो…हम दोनों..एक साथ..विशाल के साथ…..

बस कर यार…मार डालेगी क्या…साले मेरे लंड का तो बुरा हाल हो गया, कनिष्का की ये बात सुनकर, अभी दो दिन पहले ही मैं सपना देख रहा था दोनों बहनों को एक साथ नंगा करके चोदने का …मुझे क्या मालुम था की मेरा सपना इतनी जल्दी साकार होता दिखाई देगा…

कनिष्का की बात सुनकर अंशिका का चेहरा शर्म से लाल हो उठा : पागल है क्या…हम कैसे एक साथ…तू एक काम कर, आज तू रह जा इसके साथ, मैं कल आ जाउंगी…पर मुझसे नहीं होगा..तेरे सामने ही …समझा कर पगली, मुझे शर्म आती है…

उसकी साँसे ये कहते हुए तेजी से चल रही थी, चेहरा लाल हो चूका था…और साडी के नीचे ब्लाउस और उसके नीचे छुपे निप्पल तन कर साफ़ दिखाई देने लगे थे…जिसे मेरे साथ-२ कनिष्का ने भी महसूस किया था..वो समझ चुकी थी की अपनी दीदी को थ्रीसम के लिए मनाना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा अब…

कनिष्का : ओहो…दीदी…आप भी न…आप तो ऐसे कह रही हो जैसे आपने मुझे या मैंने आपको नंगा नहीं देखा कभी..

अंशिका : वो बात और है..घर पर चेंज करते हुए या नहाते हुए कभी-कभार एक दुसरे को देखना अलग बात है…पर किसी और के सामने और वो भे सेक्स करते हुए…नहीं ..नहीं…मैं नहीं कर पाउंगी..

और वो उठ कर जाने लगी.

कनिष्का ने भाग कर उसे दुबारा पकड़ लिया..

कनिष्का : पर दीदी…आज तो आपको रुकना ही पड़ेगा…मुझे तो आज पहले से ही डर लग रहा है..

अंशिका : इसमें डरने वाली क्या बात है, तुने ही तो कहा था अभी की तू पहले भी कर चुकी है…

कनिष्का : हाँ दीदी…पर यहाँ से नहीं…(उसने अपनी गांड की तरफ इशारा किया), और मैंने परसों ही विशाल को कह दिया था की आई विल गिव माय दिस वर्जिनिटी टू हिम टुडे ….

अपनी छोटी बहन की बेशर्मी भरी बात सुनकर अंशिका फिर से हेरान होकर उसके चेहरे को देखने लगी..उसने शायद सोचा भी नहीं था की आज उसकी बहन यहाँ चूत नहीं गांड मरवाने के लिए आई है..

अंशिका : हे भगवान्….कन्न्नु…मैंने तो सोचा भी नहीं था की तू इतनी आगे निकल चुकी है इन सब मामलो में…

कनिष्का : प्लीस दीदी…ट्राई तो अन्डर स्टेंड ..मुझे याद है, पहली बार जब मैंने अपने बॉय फ्रेंड के साथ किया था तो कितनी तकलीफ हुई थी..और गांड मरवाने में तो और भी ज्यादा दर्द होगा न..मैं चाहती हु की आप मेरे पास रहो उस वक़्त…आप ये तो नहीं चाहती न की मुझे कोई तकलीफ हो ये सब करवाने में…प्लीस…

अंशिका : अगर इतना ही डर लग रहा है तो क्यों गांड मरवाने चली है तू…चूत मरवा और खुश रह…

उन दोनों बहनों के मुंह से गांड-चूत की बाते सुनकर मुझे बड़ा मजा आ रहा था…

कनिष्का : नहीं दीदी…आज मैंने सोच रखा है, अपनी गांड मरवाकर रहूंगी…सहेलियों ने बताया है की कितना मजा आता है बाद में..पर पहली बार तकलीफ होती है बस..और अगर आप मेरे सामने रहोगी तो मुहे इस तकलीफ का एहसास कम होगा..

अंशिका ने आखिरी बार अपना तर्क दिया : पर कन्नू…मेरे बिना भी तो तू ये सब करवाने के लिए आई ही थी न यहाँ…वो तो इतफ्फाक से हम दोनों एक साथ पहुँच गए, वर्ना तू तो तैयार थी न ये सब अकेले में करवाने के लिए…बस तू येही समझ की मैं यहाँ आई ही नहीं थी..

कनिष्का : पर दीदी…अब तो आप यहाँ पर हो न…प्लीस…मैंने आज तक आपसे किसी चीज के लिए भी इतनी मिन्नत नहीं की…आप तो एक ही बार में मेरी हर बात मान लेती हो..फिर आज क्यों इतनी देर लगा रही हो…

अंशिका ने एक गहरी सांस ली…और उसके गालो को अपने हाथो में पकड़कर बोली : देख कन्नू…जो तू कह रही है और जो तू चाहती है, वो बड़ा ही मुश्किल काम है, हम दोनों एक दुसरे के सामने एक लड़के के सामने अपना सब कुछ परोस कर बैठ जाए, मुझे विशाल पर पूरा विशवास है की वो इस बात को किसी और से कभी नहीं करेगा…(उसने मेरी तरफ आशा पूर्ण नजरो से देखा, मैंने भी अपनी पलके झुका कर उसे आश्वासन दिया)

वो आगे बोली : और तेरी हर बार की जिद्द की तरह आज भी मैं तेरे सामने हार गयी…

अंशिका ने अपनी स्वीकृति दे डाली अपनी छोटी बहन को.

कनिष्का ने ख़ुशी के मारे अंशिका को जोर से गले लगा लिया…: ओह…दीदी…आई लव यु …

और अगले ही पल उसने जो किया उसे देखकर मेरे साथ-२ अंशिका भी दंग रह गयी….

कनिष्का ने अंशिका के चेहरे को पकड़ा और उसके होंठो पर अपने होंठ लगा दिए..और उन्हें जोर-जोर से चूसने लगी…

मुझे पक्का विशवास था की इस तरह की किस इन दोनों बहनों में पहली बार हो रही है….क्योंकि अंशिका अपनी फटी हुई आँखों से , अंशिका के होंठो से छुटने की कोशिश कर रही थी….और कभी मुझे और कभी उसे देख रही थी….

और फिर कनिष्का ने अंशिका के दांये मुम्मे के ऊपर अपना हाथ रखा और उसे जोर से दबा दिया…अंशिका के निप्पल तो पहले से ही खड़े होकर आने वाले पलों के बारे में सोचकर पुलकित हो रहे थे, अपनी बहन के हाथो का स्पर्श पाते ही उनमे करंट सा दौड़ गया….और आनंद के मारे अंशिका की आँखे भी कनिष्का की तरह से बंद होती चली गयी…..

इतना इरोटिक सीन देखकर तो मैं पागल सा हो गया…दुनिया की सबसे सेक्सी बहने एक दुसरे को चूसने चाटने में लगी हुई थी…और मुझे और मेरे लंड को मालुम था की आज का पूरा दिन कैसे बीतने वाला है….मैंने अपना पायजामा एक झटके में उतार फेंका और ऊपर से टी शर्ट भी….और घुस गया नंगा होकर उन दोनों बहनों के बीच और अपने होंठ भी घुसा दिए उन दोनों के थूक से भीगे हुए लबो के दरम्यान…….

अंशिका पर ना जाने किस बात का खुमार चड़ा हुआ था की आज वो पहले से ज्यादा उत्तेजित लग रही थी, शायद आने वाले पलों की कल्पना करके उसके हाव-भाव अलग ही लग रहे थे.

मेरे होंठो में जैसे ही अंशिका के होंठ आये वो उन्हें कच्चे चिकन की तरह चबाने में लग गयी और उनका जूस निकाल कर पीने लगी, आज तक उसने इतनी तेजी से मेरे होंठो को नहीं चबाया था, कनिष्का ने मेरी कमर के ऊपर हाथ रखा और मेरे गालों के ऊपर जोरदार चुम्मा दे दिया, और फिर मुझे और अपनी बहन को आराम से देखते हुए वो अपनी लेफ्ट ब्रेस्ट को मसलती हुई बड़ी ही कामुक नजरों से हम दोनों को देखने लगी.

मैंने अंशिका के नंगे पेट वाले हिस्से पर हाथ रखे और उसकी नाभि वाले भाग पर अपनी उँगलियाँ रगड़ने लगा, और धीरे-२ अपनी उँगलियाँ नीचे की तरफ खिसकाने लगा, अपनी चूत की तरफ बड़ते हुए मेरे लम्बे हाथो के एहसास ने अंशिका की साँसों की गति और भी तेज कर डाली, और उसने एक गहरी सांस लेकर अपना पेट और भी अन्दर कर लिया, मेरी उँगलियों को रास्ता मिल गया गुफा में जाने का और मैंने अपना पंजा उसके पेट से सटा कर अन्दर की तरफ धकेल दिया..

और मेरे हाथों का दबाव इतना तेज था की वो सीधा उसकी चूत के ऊपर जाकर ठहर गया, और अब मेरे हाथों के नीचे थी उसकी गीली कच्छी…मैंने अपना पूरा पंजा जोर से उसकी भीनी खुशबु छोडती हुई चूत के ऊपर जमा दिया….और ऐसा करते हुए मुझे लगा की मैंने किसी संतरे को जोर से दबा कर निचोड़ दिया है, क्योंकि उसकी चूत से इतना रस निकल कर नीचे गिरने लगा मानो कोई गुब्बारा फटा हो वहां..

अंशिका : आआआअह्ह्ह्ह ………ओग्गग्ग्ग्ग…..

अपनी बहन को कामुकता की चादर में लिप्त देखकर कनिष्का तो पागल ही हो गयी…उसने अंशिका की साडी के पल्लू को पकड़ा और घूम घूमकर उसे उतारना शुरू कर दिया.

जैसे -२ साडी निकलती जा रही थी, उसकी साँसे तेज होती जा रही थी..मेरे हाथ लगाने भर से ही वो एक बार तो झड ही चुकी थी..आज और क्या होगा उसके साथ, ये शायद सोच-सोचकर वो आँखे बंद किये हुए मंद-मंद मुस्कुराने लगी थी.

और जब अंशिका की साडी पूरी तरह से उतर गयी तो मैंने पेटीकोट के नाड़े को अपने हाथो से पकड़ा और उसे जोर से खींच दिया, अन्दर का नजारा पर्दा गिरते ही हम दोनों के सामने आ गया, अंशिका की आँखे अभी तक बंद थी, वो शायद शर्मा रही थी, अपनी बहन के सामने..

कनिष्का और मैं उसके एरोटिक रूप को देखकर अपनी जीभ होंठो पर फिर रहे थे.

अंशिका का गोरा और भरा हुआ बदन अब सिर्फ ब्लाउस और पेंटी में हम दोनों के सामने था, नीचे उसने हाई हील की सेंडल पहनी हुई थी..

कनिष्का ने अपनी केप्री और टॉप को उतार कर एक कोने में उछाल दिया, और जैसे ही उसकी ब्रा में कैद मुम्मे मेरी नजरों के सामने आये , मैं अंशिका को भूल कर उसकी तरफ देखने लगा, मैंने अपने हाथ का दबाव उसकी चूत के ऊपर से हटा लिया. मेरा हाथ की पकड़ चूत के ऊपर से हटते ही उसने अपनी आँखे खोल दी और मुझे अपनी बहन की तरफ घूरते हुए देखा और जब उसने मेरी आँखों का पीछा करते हुए कनिष्का को देखा तो वो झुक कर अपनी पेंटी को अपनी जांघो से नीचे खिसका रही थी..मेरा हाथ अभी भी अंशिका की गीली कच्छी में था पर मेरा पूरा ध्यान कनिष्का की तरफ था..

कनिष्का ने जैसे ही अपनी पेंटी उतार कर बाहर की, मेरे और अंशिका के सामने उसकी गुलाबी रंग की, ताजा तरीन, बिना बालों वाली चूत आ गयी, लगता था की मेरे लिए ही तैयार होकर आई थी वो.

और फिर मेरी तरफ देखते हुए उसने अपने हाथ पीछे किये और अपनी ब्रा को भी अपने बदन से जुदा करते हुए मेरी तरफ उछाल दिया…और अब वो पूरी तरह से नंगी होकर खड़ी थी…उसकी ब्रेस्ट का साईज अंशिका के मुकाबले काफी छोटा था, पर लाजवाब थी वो भी, एकदम सामने देख रहे थे उसके निप्पल, इतना कसाव था उसके मुम्मो में..चूत की शेप भी काफी लुभावनी थी, मानो कोई नंगी पहाड़ी, जिसपर जंगली घान्स्फूंस का नामो निशान भी नहीं है, सिर्फ चिकने और बड़े-२ पत्थर है.

मैंने आगे बढकर उसके गले में हाथ डाला और उसे अपनी तरफ खींच लिया, मैंने जैसे ही अपना दूसरा हाथ अंशिका की चूत से खींचना चाह, उसने उसे रोक लिया…मैंने एकदम से घूम कर उसकी तरफ देखा, पर उसकी नशीली आँखों में देखर मैं कुछ समझ न पाया, शायद वो मेरे हाथ की गर्मी और कुछ देर तक लेना चाहती थी, अभी थोड़ी देर पहले तो वो अपनी बहन को मेरे पास छोड़कर जाने की बात कर रही थी और अब मेरे हाथ को अपनी चूत से बाहर ही नहीं निकाल रही है, थोडा बहुत लालच तो हर इंसान के मन में आ ही जाता है ऐसे मौके पर, फिर चाहे दूसरी तरफ अपना कोई सगा क्यों न हो…

पर मुझे कोई प्रोब्लम नहीं थी, मैंने भी कोई जबरदस्ती नहीं की और अपना हाथ वहीँ रहने दिया और अपना दूसरा हाथ खिसका कर मैंने कनिष्का की चूत के ऊपर रख दिया…और मैंने अपने होंठ कनिष्का के होंठो पर रख दिए…

नंगी कनिष्का मेरे हाथो का स्पर्श पाते ही किसी बेल की भाँती मुझसे लिपट गयी..अब मेरे एक हाथ में अंशिका और दुसरे में कनिष्का की चूत थी और दोनों से इतना पानी निकल रहा था की मेरे दोनों हाथो में चिपचिपापन होने लगा था…

कनिष्का मेरे होंठो को चूसने में अपना पूरा जोर लगा रही थी..और दूसरी तरफ अंशिका ने भी मौका पाकर अपना ब्लाउस और ब्रा उतार डाले….और हाथ नीचे करके अपनी पेंटी भी…

वो अजंता की मूरत बन गयी और कनिष्का अलोरा की.

और दोनों नंगी बहनों को थामे हुए मेरा क्या हाल हो रहा होगा, आप दोस्त लोग तो समझ ही सकते हैं..

मैं खड़े हुए थक चूका था, मैं जाकर सोफे पर बैठ गया.

और उन दोनों बहनों को देखते हुए अपने लंड के ऊपर उनकी चूत का रस रगड़ने लगा…

क्या सीन था यारो, एक तरफ थोड़ी भरी पूरी अंशिका थी और दूसरी तरफ ताजा-२ जवान हुई कनिष्का…पर दोनों थी ग़जब का माल.

मैंने अंशिका को अपनी तरफ आने का इशारा किया और वो बेसब्री से आगे बड़ी और सीधा मेरी गोद में आकर बैठ गयी, अपने हाथ मेरी गर्दन में लपेटे और मुझे पागलो की तरह से चूसने लगी…और अपनी मोटी गांड को मेरे खड़े हुए लंड के ऊपर मसलने लगी…और एक बार तो मेरा लंड उसकी चूत के मुंहाने पर फंस ही गया…उसके मुंह से एक तेज आवाज निकली…जिसे सुनकर मेरे साथ-२ कनिष्का भी अपनी बड़ी बहन की तरफ देखने लगी..

वो शायद भूल गयी थी की पहले कनिष्का की गांड मारनी है मुझे और फिर बाद में अगर मौका मिला तो अंशिका का नंबर आएगा..

पर अपनी चूत में आया मेरा लंड शायद अंशिका खोना नहीं चाहती थी…इसलिए इधर-उधर फिसल कर उसने मेरे लंड रूपी सांप को अपनी चूत में निगलना शुरू कर दिया…

मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आपको और अपने लंड को उसकी चूत में जाने से बचा रखा था…पर अचानक अंशिका ने अपनी टांग उठा कर मेरी दोनों जांघो के ऊपर रख दी और मेरी तरफ मुंह करते हुए उसने मेरा लंड एक ही बार में अपनी चूत में उतार लिया…

आआआआआअह्ह्ह म्मम्मम्मम……विश्लल्ल्ल………अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ….म्मम्मम्म….

मैं उसके इस रूप के देखकर हेरान था…और शायद कनिष्का भी अपनी बहन के तेवर देखकर ज्यादा खुश नहीं थी…वो सोच रही थी की अभी तो कुछ देर पहले त्याग की मूरत बन रही थी और जैसे ही लंड देखा अपनी चूत के अन्दर डाल लिया…और मुझे यहाँ तड़पता हुआ छोड़ दिया..

पर हम दोनों गलत थे..

अपनी चूत में मेरा पूरा लंड लेने के बाद उसने एक दो झटके दिए, और फिर एकदम से उठ गयी मेरे ऊपर से…

मुझे अभी तो उसकी मखमली चूत के एहसास से मजे आने शुरू हुए थे , एकदम से उसने जब वो मख्मलिपन हटा लिया तो मैं भी हेरान रह गया.

अंशिका ने अपनी बहन को देखा और उसे लेकर सोफे पर घोड़ी वाले आसन में आधा लिटा दिया…और मेरी तरफ देखकर बोली. : चलो अब डालो इसकी गांड में अपना घोडा…चिकना कर दिया है इसे मैंने अपने रस से..

अंशिका ने मेरे लंड को अपनी चूत में डुबोकर अपना रस लगा दिया था ताकि उसकी बहन कनिष्का की गांड में घुसाने में मुझे ज्यादा जोर न लगाना पड़े.

कोई और होता तो लंड का रस निचोड़ने के बाद ही उठता…पर बड़ी बहन का ऐसा प्यार और लगाव हर जगह देखने को नहीं मिलता…

पर ये समय भावुक होने का नहीं था…मैंने कनिष्का की गांड के छेद को अपनी ऊँगली से फेला कर देखा..मेरा लंड तो अंशिका की चूत के रस में नहाकर पूरा लुब्रिकेट हो चूका था..

अचानक अंशिका आगे आई और अपनी चूत में हाथ डालकर थोडा और तेल निकाला और कनिष्का की गांड के छेद के ऊपर मलने लगी.

और अपनी दो और फिर तीन उँगलियाँ उसने एक के बाद एक उसकी गांड के छेद में घुसा डाली.

फिर मेरी तरफ देखकर अंशिका बोली : अब डालो विशाल …पर धीरे से करना , मेरी कन्नू का पहली बार है यहाँ से..

और फिर बड़ी बहन वाला प्यार दिखाते हुए , अंशिका ने उसके नितम्ब पर एक जोरदार चुम्मा दे दिया..

मेरे लंड को उसने अपने हाथो से पकड़कर बोर्डर तक छोड़ा और फिर मुझे धक्का मारने का इशारा किया.

कनिष्का की गांड फटने वाली थी, ये सोचकर उसकी गांड ऐसे ही फटे जा रही थी.

कनिष्का ने डरी हुई आँखों से अपनी बहन को देखा और उसके एक हाथ को पकड़कर अपनी मुंह के ऊपर भींच लिया, ताकि जब वो चीखे तो उसकी बहन का हाथ उसके पास हो.

मैंने अपने गीले लंड का धक्का एक जोरदार शोट के जरिये उसकी गांड में लगाया .

निशाना बिलकुल सही था, लंड का सुपाड़ा सरहद को तोड़ता हुआ उसकी गांड के छेद के रिंग में जा फंसा .

आआआआआअह्ह्ह …….मर्र्र्रर्र्र गयी…….दीदी ……

उसकी आँखों से आंसू निकल आये थे…कनिष्का ने अपनी बहन का हाथ इतनी तेजी से अपनी तरफ खींचा की वो लुडक कर उसके मुंह पर जा गिरी .

अंशिका के मोटे -२ चुचे कनिष्का के चेहरे पर जा लगे …

कनिष्का का मुंह तो वैसे ही चीखने की वजह से खुला हुआ था, सो अंशिका ने उसे चुप करवाने के लिए अपना एक मुम्म उसके मुंह के अन्दर डाल दिया…

और अगले ही पल कनिष्का के पेने दांत अपनी बहन के मुम्मे को चूसने और काटने में लग गए ..

मैंने एक और तेज धक्का मारकर अपना लंड आधे से ज्यादा उसकी गांड में उतार दिया…

कनिष्का की गांड फट चुकी थी…उसे बड़ा ही तेज दर्द हो रहा था.

उसके मुंह में अंशिका का स्तन था और वो गूं गूं की आवाजे निकाल रही थी…और सोफे पर छटपटा रही थी.

अंशिका : धीरे करो विशाल ….कन्नू को दर्द हो रहा है…

मैं : ओके …

और फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और आधे लंड से ही उसकी गांड मारने लगा.

कनिष्का ने चूस चूसकर अंशिका के मुम्मे को लाल सुर्ख कर दिया था और उसे भी शायद दर्द होने लगा था वहां , पर कनिष्का के दर्द के आगे ये अंशिका का दर्द कुछ भी नहीं था…

मैंने एक दो मिनट रुकने के बाद फिर से अपने लंड को और अन्दर धकेलना शुरू कर दिया..

कनिष्का ने ब्रेस्ट चुसना छोड़कर फिर से रोना शुरू कर दिया.

अंशिका ने कनिष्का को डांटते हुए कहा : चुप कर कन्नू, जब पता था की इतना दर्द होगा तो अब बच्चो की तरह से क्यों रो रही है, चुप नहीं होगी तो मैं विशाल से कह देती हु की अपना लंड निकाल ले…बोल

कनिष्का : नहीं दीदी…ऐसा मत करना….मैं कोशिश तो कर रही हु..पर इसका लंड है ही इतना मोटा की अगर ये मेरी चूत में भी जाता तो शायद मुझे दर्द होता, क्योंकि मेरे बॉय फ्रेंड के मुकाबले ये काफी मोटा और लम्बा है…पर कोई बात नहीं मैं कोशिश करती हु की चुप रहू…

अब ओखली में सर दे ही दिया है तो मुसल से क्या डरना..ये सोचते हुए उसने दुबकते हुए अपने रोने पर कण्ट्रोल करना शुरू कर दिया.

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