फ़ोन सेक्स – मोबाइल फ़ोन सेक्स part 10

स्नेहा चलती जा रही थी और उसकी मटकती हुई गांड देखकर मेरा लंड तेजी से उछलने लगा था.. मैं मन ही मन सोच रहा था की एक तरफ ये मुझे देने को तैयार है और दूसरी तरफ मेरी किस्मत मेरा साथ नहीं दे रही है..पर अभी के लिए तो जितना मिले उसे समेट लो..

स्नेहा जाकर अपनी सहेलियों के बीच खड़ी हो गयी..उसकी क्लास की सारी लड़कियां बड़ी ही सेक्सी ड्रेस्सेस में वहां आई हुई थी, एक ने तो मिनी स्कर्ट और टॉप पहना हुआ था और उसके शरीर का हर कसाव उसमे से साफ़ दिखाई दे रहा था, नीचे मोटी-२ टाँगे और ऊपर लटकते हुए रसीले आम..

पर मुझे तो सबसे पहले स्नेहा के साथ मजे लेने के लिए कोई जगह देखनी थी..मैं उठकर फार्म हॉउस के पीछे की तरफ चल दिया, खाने की टेबल्स के पीछे वाली जगह पर अँधेरा था, और उसके पीछे काफी ऊँची दिवार थी, ये जगह सही है…मैं जल्दी से वापिस आया और स्नेहा को ढून्ढने लगा, वो बर्थडे गर्ल हिनल के साथ खड़ी थी…और उनके साथ स्नेहा का वो पुराने वाला बॉय फ्रेंड भी था…मैं उनके पास गया.

स्नेहा : कहाँ चले गए थे तुम…मैं कब से तुम्हे ढून्ढ रही थी..

मैं : वो मैं…जरा लू गया था..

अंकित ने मेरी तरफ हाथ बड़ा दिया…

अंकित : हाय…आई एम् अंकित…

मैं : हाय..आई एम् विशाल..हाउ आर यु..

स्नेहा : तुम अंकित से मिल ही चुके हो न, मेरे बर्थडे पर…

मैं : हाँ…तुम्हारे घर की छत्त पर..

अंकित सकपका गया…और उसका चेहरा देखकर हिनल और स्नेहा ने फिर से एक दुसरे के हाथ पर ताड़ी मारी और हंसने लगी..

स्नेहा : विशाल…मैंने तुमसे कुछ नहीं छुपाया…ये मेरा एक्स बॉय फ्रेंड है…और मालुम है इसको लेकर मुझमे और हिनल में कितनी लडाई होती थी…हिनल का ये पहला क्रुष था…पर इसे मैंने पहले हथिया लिया…पर अब जबसे तुम मेरी जिन्दगी में आये हो, सो..यु नो..मैंने इसे डंप कर दिया…और आज जब मैंने ये बात हिनल को बताई तो इसने मुझे अंकित के साथ……फ्रेंड शिप करने के लिए कहा, इसलिए मैंने अभी अंकित को बुलाया था और मैं इन्हें एक दुसरे से मिलवा रही थी…सो…हिनल, ये रहा मेरी तरफ से तुम्हारा बर्थडे गिफ्ट…एन्जॉय…

और ये कहते हुए स्नेहा ने अंकित का हाथ पकड़कर हिनल के हाथ में दे दिया…

अंकित तो बेचारा भोला सा चेहरा बना कर खड़ा हुआ था, मानो उसे बकरी की तरह बाजार में बेचा जा रहा हो…पर हिनल उसका हाथ पकड़कर फूली न समायी…और वो अंकित के साथ लगभग चिपक कर खड़ी हो गयी..इतना गर्म माल पाकर कोई पागल ही होगा जो खुश न हो…हिनल के शरीर की गर्मी मिलते ही अंकित का मूड भी चेंज होने लगा…और वो हिनल से हंस कर बाते करने लगा. पर मेरा ध्यान तो हिनल की ड्रेस में से उसके निप्पलस ढून्ढ रहा था..और आखिर मेरी तेज नजरों ने उन्हें पा ही लिया, सफ़ेद ड्रेस जो उसकी ब्रेस्ट से चिपक कर नीचे की और आ रही थी और जिसपर हलके फुल्के सितारे लगे हुए थे, उसके निप्पल वाली जगह पर आकर एक स्पीड ब्रेकर जैसी हालत में उसके निप्पल्स तन कर खड़े हुए थे, शायद अंकित को अपने इतने पास पाकर वो गरमा रही थी…

स्नेहा मुझे लेकर थोडा दूर चली गयी..

स्नेहा : तुम्हे बुरा तो नहीं लगा न…दरअसल, हमारे फ्रेंड सर्कल में ये सब चलता है, एक दुसरे के बॉय फ्रेंड को हम सभी आपस में युस कर लेते हैं…तभी तो मजा बना रहता है…ये अंकित काफी बड़े घर का लड़का है..इसे सबसे पहले मैंने अपना बॉय फ्रेंड बनाया..ये मुझे छोड़ना तो नहीं चाहता था, पर तुम्हारे आगे मुझे ये कुछ भी नहीं लगता…पर मैंने इसके साथ हद से ज्यादा कुछ नहीं किया..वैसे हमारे ग्रुप की कई लड़कियों ने तो सब तरह के मजे कर लिए है…पर अभी भी कई हैं जो वर्जिन है..जिनमे से मैं और हिनल भी हैं..पर हमने दुसरे मजे बहुत लिए हैं…

उसके खुले विचार सुनकर मुझे बड़ी ख़ुशी हो रही थी, एक वजह तो ये थी की अगर उसे मेरे दुसरे संबंधो के बारे में पता चला तो वो शायद उतना बुरा नहीं मानेगी और दूसरी वजह ये की शायद मुझे उसकी दूसरी सहेलियों के साथ कुछ मजे करने को मिल जाए…खासकर हिनल के साथ..

मैं : नहीं, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है…वैसे मैंने एक जगह देखि है, जहाँ मैं ये चेक कर सकता हूँ की तुमने ब्रा पहनी हुई है या नहीं…

स्नेहा का चेहरा मेरी बात सुनकर मानो आग की तरह जलने लगा…

स्नेहा : क्या…सच…कहाँ है…चले क्या…?

मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे टेंट के पीछे की तरफ ले जाने लगा..

वो बार-२ मुड़कर पीछे देख रही थी, की कोई हमें देख तो नहीं रहा है न..

पीछे जाकर जब मैंने एक अँधेरे वाली जगह पर उसे खड़ा किया तो मुझे सिर्फ उसकी आँखें ही चमकती हुई दिखाई दे रही थी…

मैंने उसके दोनों हाथ पकड़ लिए, इतना करने की देर थी की उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और मेरे सीने से लग गयी..

स्नेहा : ओह्ह्ह…विशाल…तुमने तो मुझे पागल कर दिया है….हर समय मैं तुम्हारे बारे में ही सोचती रहती हूँ…

उसने मुंह ऊपर किया और मेरे तपते हुए होंठो को अपने मुंह में लेकर उन्हें चूसने लगी…

उसके मुंह का गीलापन देखकर मुझे उसके अन्दर जल रही आग का अनुमान हो रहा था…

मैंने उसके दोनों मुम्मो पर हाथ रख दिए और उन्हें दबाने लगा…हाथ पीछे लेजाकर मैंने उसके सूट के पीछे लगी जिप खोल दी और उसके सूट को कंधे से खिसका कर नीचे कर दिया…मेरे सामने उसकी नंगी चूचियां थी…

मैं : तो तुमने भी ब्रा नहीं पहनी…हूँ..

स्नेहा : वो क्या है न, आज मैंने और हिनल ने दिसायिद किया था की हम दोनों ब्रा नहीं पहनेगी..उस पागल की वजह से मुझे भी अपनी ब्रा उतारनी पड़ी आज…

मैं : अच्छा है ना…हम दीवानों का काम आसान हो गया…

स्नेहा : मेरा बस चलता तो मैं तुम्हारे सामने कुछ भी न पहनू…

उसकी इतनी गर्म बात सुनकर मैंने उसे किसी जंगली की तरह से बालों से पकड़ा और अपने होंठो पर दे मारा…

स्नेहा : अह्ह्ह्ह…..जंगली….

उसकी इस बात ने आग में घी जैसा काम किया…फिर तो मैंने उसे जंगली की तरह से चूमना और चाटना शुरू कर दिया…

उसने मेरा चेहरा पकड़कर नीचे किया और अपनी एक ब्रेस्ट पकड़कर मेरे मुंह में ठूस दिया…और जब मैंने उसी जंगलीपन में उसके निप्पल पर दांत से काटा तो उसने अपना सर पीछे करके एक तेज आवाज निकाली…

अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह……..उफफ्फ्फ्फ़……विशाल्लल्ल्ल……म्मम्मम्म…

मैंने एक एक करके उसके दोनों चुचे चूसने शुरू कर दिए…उसका सूट ऊपर से नीचे की और आकर कमर में अटका हुआ था…

मैंने हाथ नीचे लेजाकर उसकी चूत के ऊपर रखा, वहां तो मानो बाड़ सी आई हुई थी..पूरी तरह से गीली हो चुकी थी उसकी पेंटी और पय्जामी…मैंने हाथ वापिस ऊपर लाकर अपने मुंह में डाला और उसके रस का स्वाद लेने लगा…

उसने भी मेरे लंड के ऊपर हाथ मारने शुरू कर दिए थे…

वो अचानक मेरे सामने नीचे बैठ गयी और मेरी पेंट की जिप खोलने लगी…

अब अँधेरे में काफी देर तक रहने की वजह से मुझे वो साफ़ दिखाई दे रही थी…ऊपर से नंगी होकर वो मेरी आँखों में देखती हुई मेरी पेंट को नीचे कर रही थी..और फिर मेरे जोकी को भी नीचे करने के बाद उसने मेरे खड़े हुए लंड को जब चुसना शुरू किया तो मेरी टांगो में एक कंपकंपी सी छूट गयी…और मेरे मुंह से एक लम्बी सी हुंकार निकल गयी….

ऊऊऊऊऊऊऊऊह्ह्ह्ह ……..ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह…….स्नेहा…….म्मम्म….यस बेबी……सक मी…..सक मी हार्ड…..

वो तो मेरे लंड की पहले से ही दीवानी थी, उसने उसे अपने मुंह के अन्दर लेजाकर पूजना शुरू कर दिया…

तभी हमें अपनी तरफ कोई आता हुआ दिखाई दिया…

मैंने जल्दी से अपना लंड स्नेहा के मुंह से निकाला और एक झाडी की आड़ में हो गया…ताकि जो भी आ रहा है उसे हम दिखाई न दे..

थोडा पास आने पर पता चला की ये तो एक और जोड़ा है…और गोर से देखा तो पाया की ये तो हिनल और अंकित हैं…वो दोनों एक दुसरे को बुरी तरह से चूमने चाटने में लगे हुए थे…अंकित ने तो पीछे आते ही हिनल की ब्रालेस ड्रेस को साईड में खिसका कर उसे टोपलेस कर दिया था…और उसके दोनों रसीले आमो को हाथों से दबाकर उसके होंठ चूसने में लगा हुआ था..

उन्हें देखते ही स्नेहा उठ खड़ी हुई और उनकी तरफ जाने लगी…मैं उसे रोकने के लिए हाथ आगे किया पर तब तक वो उनके सामने आ चुकी थी…

उसने अपने सूट को ऊपर करके, बिना पहने, अपनी ब्रेस्ट को छुपा लिया था…

स्नेहा को देखते ही अंकित चोंक गया और उसने हिनल को छोड़ दिया…पर हिनल स्नेहा को देखकर हैरान नहीं हुई और वो अंकित से चिपक कर खड़ी हो गयी…

हिनल : ओहो…तो तुम यहाँ पर हो…तुम्हे भी यही जगह मिली थी…

उसने मुझे पीछे खड़े हुए देख लिया, अब मेरा भी छुपना बेकार था…मैंने अपने लंड अन्दर किया और उनकी तरफ आ गया…और स्नेहा की कमर में हाथ डालकर खड़ा हो गया..

स्नेहा : क्या यार…इतने बड़े फार्म हॉउस में तुझे भी यही जगह मिली थी क्या…और अंकित , तुम्हे तो मानना पड़ेगा,…मेरे बर्थडे पर मेरे साथ और अब हिनल के बर्थडे पर इसके साथ…मजे हैं तुम्हारे…

अंकित :तुम अगर मुझे न छोडती तो मैं अभी भी तुम्हारे पास होता…वहां…

उसका इशारा मेरी तरफ था…

पर मेरा सारा ध्यान तो हिनल की खुली हुई ब्रेस्ट के ऊपर था…क्या माल था यार…उसकी ब्रेस्ट तो अंशिका से भी बड़ी थी…और उसके निप्पल स्नेहा से काफी बड़े थे…

हिनल ने अपनी ब्रेस्ट पर मेरी नज़रों के तीर चलते पाकर मुझसे कहा : डू यु लाईक वाट यु सी…

मैं उसकी बात सुनकर सकपका गया…और वो दोनों सहेलियां फिर से एक दुसरे के हाथ पर ताली पारकर हंसने लगी…

स्नेहा : यार हिनल…ये गलत है…मैंने तुझे अपना एक्स दिया न…तू उसके साथ मजे ले, मेरे वाले को क्यों अपनी तरफ खींच रही है..

हिनल :मैंने क्या किया, वो ही मुझे घूर रहा है, तुने अपने तो छिपा रखे हैं, वो बेचारा तभी तो मेरे देख रहा है…

हिनल की बात सुनकर स्नेहा ने अपने सूट को वापिस नीचे कर दिया…मानो वो कम्पीटीशन में उतर आई हो..

स्नेहा : विशाल…लुक हियर…..एंड सक देम ….

मैं किस रोबोट की तरह उसकी बात को मानकर अपने मुंह को उसकी ब्रेस्ट तक ले गया ….और हिनल की आँखों में देखते हुए ही उसके निप्पल को चूसने लगा…

हिनल की नजरे भी मेरी आँखों से अलग नहीं हो रही थी…उसने भी अंकित को किसी बेजान चीज की तरह अपनी तरफ खींचा और अपनी ब्रेस्ट पर उसका मुंह लगाकर उसे अपने आम चुस्वाने लगी…और वो बेचारा भी स्नेहा के नंगे स्तनों को देखकर अपनी आँखे सकने में लगा हुआ था…शायद वो पहली बार ही देख रहा था उन्हें…

वो दोनों सहेलियां एक दुसरे के सामने मजे लेने में लगी हुई थी…

दोनों सहेलियों की सिस्कारियां गूँज रही थी मेरे कानो में…

फिर स्नेहा ने मेरे लंड पर हाथ रखकर उसे फिर से बाहर निकाल लिया…और नीचे बैठकर उसे फिर से चूसने लगी…

हिनल भी अंकित की पेंट से उसके लंड को बाहर निकाल कर उसके सामने बैठ गयी…वो अब अंकित के लंड को अपने हाथ में लेकर उसकी लम्बाई तय करने में लगी हुई थी..और फिर मेरे लंड की तरफ देखकर वो स्नेहा से बोली

हिनल : अब मालुम चला की तुने इस बेचारे को क्यों छोड़ दिया…

पर स्नेहा ने कोई जवाब नहीं दिया और मेरे लंड को चूसने में लगी रही…अंकित ने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया…मेरे लंड के सामने उसका लगभग 2 इंच छोटा था…

फिर भी हिनल अपने हाथ आई चीज को छोड़ना नहीं चाहती थी…उसने भी अपने जीभ निकाल कर उसके पांच इंच ले लंड को चुसना और चाटना शुरू कर दिया…

अंकित की नजर मेरे सामने बैठी हुई स्नेहा पर थी और मेरी नजरे हिनल के हिलते हुए मुम्मो पर…

जल्दी ही अंकित के चेहरे के भाव बदलने लगे और अगले ही पल उसके लंड ने हिनल के मुंह में पानी छोड़ दिया…

हिनल ने सारा रस पिया और अपने होंठ साफ़ करती हुई उठ खड़ी हुई…

मेरा लंड तो झड़ने के काफी दूर था अभी…

हिनल ने अंकित को घूर कर देखा मानो उसके जल्दी झड़ने पर गुस्सा दिखा रही हो …

फिर उसने अपनी ड्रेस को ऊपर की तरफ करना शुरू कर दिया…और उसकी नंगी टाँगे मेरे और अंकित के सामने आने लगी…उसने उस ड्रेस को पूरा ऊपर करने के बाद अपनी पेंटी से भी ऊपर उठा लिया और फिर उसने अपनी पेंटी को नीचे की और खिसका दिया…

मेरी तो हवा ही टाईट हो गयी उसकी सफाचट चूत को देखकर…और उसमे से निकलता पानी देखकर…

उसने मेरी तरफ ही देखते हुए अंकित को नीचे की और जाने का इशारा किया…और वो किसी पालतू कुत्ते की तरह नीचे घांस पर उसकी टांगो के बीच बैठ गया..

हिनल ने अपनी एक टांग उठा कर उसके कंधे पर रखी और उसकी रस टपकाती चूत अब सीधा अंकित के मुंह के ऊपर ही थी…और फिर हिनल अंकित के मुंह के ऊपर बैठ गयी…

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह …….ऊऊऊ माय गोड…….सक मी……सक मी.अंकित………संक मीईईईई………..अह्ह्हह्ह …

अंकित ने उसकी चूत को चुसना शुरू कर दिया था….

स्नेहा भी बैठी हुई थक सी गयी थी….मेरे लंड से पानी निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था….मुझे आज अपने लंड पर बड़ा नाज हो रहा था…

अंकित के मुंह के ऊपर एक पैर नीचे जमीन पर और दूसरा हवा में उठाकर बैठी हुई हिनल का बेलेंस अचानक बिगड़ा और उसने मेरी तरफ हाथ बढाकर मुझे पकड़ लिया….मेरे कंधे का सहारा पाकर वो गिरने से बची…

उसके दोनों चुचे मेरी बाजुओं से टक्कर खा रहे थे….और वो मेरी तरफ देखती हुई अपनी चूत को अंकित से चुसवा रही थी…

अह्ह्ह्ह…..ओह्ह्हह्ह……ओह्ह्हह्ह….येस्स…….म्मम्मम….

उसकी आँहो के साथ निकल रही तेज साँसे मेरे चेहरे पर पड़ रही थी…

स्नेहा ने जब ऊपर मुंह करके हिनल को मुझसे चिपक कर खड़े देखा तो उसने मेरा लंड अपने मुंह से बाहर निकाल दिया और उससे बोली

स्नेहा : ऐ हिनल…थोडा दूर तो हो जा….इतने पास आकर खड़ी होगी तो इसका ईमान तो डोल ही जाएगा न….

हिनल : मैं….अह्ह्ह…..मैं तो….तेरी हेल्प कर रही हूँ….अह्ह्ह….

स्नेहा : मेरी हेल्प….कैसे…

हिनल : अरे…तुने सुना नहीं….एक से भले दो…..तू इतनी देर से इसके पेनिस को चूस रही है….पर इसका निकल ही नहीं रहा…..क्या पता, मुझे इतने पास देखकर ये जल्दी डाउन हो जाए….है के नहीं….

बेचारी स्नेहा उसकी चालाक सी बातों में आ गयी…

स्नेहा :वाव….थेंक्स यार…जल्दी कर फिर तो….मैं भी थक गयी हूँ..इतनी देर से इसके पेनिस को सक करते हुए….मुझे भी यहाँ कुछ हो रहा है….

वो अपनी चूत को मसलती हुई बोली

हिनल : तू एक काम कर….जल्दी से अपने पय्जामी उतार दे…

उसकी बात सुनकर स्नेहा उठी और एक ही बार में अपनी पय्जामी उतार कर झाडी के ऊपर रख दी…और फिर से बैठ कर मेरे लंड को चूसने लगी…

हिनल : अंकित….तुम क्या अपनी पुरानी फ्रेंड की हेल्प नहीं करोगे….

अंकित उसकी बात सुनकर थोड़ी देर तक चूत चुसना भूल गया…उसे शायद अपने कानो पर विशवास नहीं हो रहा था की हिनल उसे क्या करने को कह रही है…फिर मुझे और स्नेहा को देखकर…धीरे से अपना हाथ आगे करके, स्नेहा की चूत के ऊपर लगा दिया….

स्नेहा की चूत तो पहले से ही टंकी की तरह से बह रही थी….उसे भी शायद झड़ने की जल्दी थी और मेरे लंड को झाड़ने की भी…और इसके लिए कोन क्या कर रहा है इसके बारे में सोचने का अब वक़्त नहीं था….उसने भी अपनी टाँगे चोडी करके अंकित के हाथो पर अपनी चूत को रगडा और जब अंकित ने उसकी रसीली चूत के अन्दर उँगलियाँ दाल कर हिलाना शुरू किया तो उसके मुंह से अजीब तरह की आवाजें निकलने लगी…

ओग्गग्ग्ग्ग …ओह्ह्ह्ह…..म्मम्मम….मूऊउ ……

उधर हिनल भी स्नेहा की हाँ पाकर और भी ज्यादा उत्तेजित हो गयी और अपनी चूत को अंकित के मुंह पर और तेजी से रगडती हुई वो मेरे से और जोर से चिपक कर खड़ी हो गयी ….और अगले ही पल मेरे हाथ अपने आप उसकी गोल गोल छातियों पर जाकर चिपक गए…और उसने भी बिना किसी बात की देरी किये बिना आने होंठ मेरे होंठों से चिपका दिए और मुझे बुरी तरह से चूसने लगी…

वहां खड़े-२ ही मुझे लगा की जैसे ग्रुप सेक्स हो रहा है…..

मेरी छाती से चिपकी हुई हिनल मुझे किसी कुल्फी की तरह से चूस रही थी और नीचे बैठी हुई स्नेहा मेरे लंड को लोलोपोप की तरह…

हिनल अपनी चूत को अंकित के मुंह पर रगड़ रही थी और अंकित अपनी उँगलियों का कमाल स्नेहा की चूत के अन्दर दिखा रहा था….

और फिर जल्दी ही मेरे मुंह को चूसते हुए हिनल ने झड़ना शुरू कर दिया…

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह…….आई …..एम्….कमिंग…….अह्ह्ह्हह्ह………..

मुझे उसके होंठों के नमपन से उसकी चूत से निकलते रस का पता चल गया…

उसके होंठों की मिठास को महसूस करते हुए मेरे लंड ने भी जवाब दे दिया और जल्दी ही मेरे लंड की पिचकारियाँ स्नेहा के मुंह के अन्दर जाने लगी….

अपने मुंह में मेरे रस को पाकर वो जल्दी से अपनी चूत को अंकित के हाथों पर और तेजी से रगड़ने लगी और मेरे लंड की आखिरी बूँद चूसते हुए उसकी चूत ने भी अपना प्यार बाहर की और फेंकना शुरू कर दिया…जिसे अंकित ने हाथों में समेत कर चाटना शुरू कर दिया….

स्नेहा तो निढाल सी होकर वहीँ पसर गयी…

अंकित भी अपने कपडे ठीक करता हुआ उठ खड़ा हुआ…

हिनल अभी भी ऊपर और नीचे से नंगी सी होअर मुझसे चिपकी खड़ी थी….

स्नेहा और अंकित हेरानी भरी नजरों से मुझे और हिनल को देख रहे थे…मानो कह रहे हो, भाई अब तो छोड़ दो एक दुसरे को…

सच में…ऐसा बर्थडे किसी-किसी को ही नसीब होता है..

मैं : हैप्पी बर्थडे हिनल..
हिनल (खुश होते हुए) : थैंक्स..एंड ये सब …इसके लिए भी..

और फिर उसने स्नेहा के सामने ही मेरे लंड को पकड़ा और उसे निचोड़ सा दिया…मेरे मुंह से आह सी निकल गयी.

पर आश्चर्य की बात ये थी की स्नेहा ने कुछ नहीं कहा..शायद इस वजह से की उसने भी तो अपने पुराने यार अंकित से मजे लिए थे अभी मेरे सामने..

अब काफी देर हो चुकी थी, बर्थडे गर्ल हमारे साथ थी, शायद उसे लोग ढूंढ भी रहे होंगे..

हिनल : स्नेहा, तू बाहर निकल और जाकर देखा जरा मम्मी कहीं मुझे न ढूंढ रही हो..अगर मेरे बारे में पूछे तो कहना की मैं तेरे साथ ही थी, बाथरूम गयी थी..

हिनल की बात सुनकर वो बाहर निकल गयी..
हिनल (अंकित को देखते हुए) : अब तुम भी जाओ..एक साथ सबका बाहर निकलना ठीक नहीं है.

और अंकित भी निकल गया.

अंकित के बाहर जाते ही हिनल ने मेरी तरफ मुंह किया और मुझसे बुरी तरह से लिपट गयी…मुझे लगा की उसने जान बुझकर दोनों को पहले भेज दिया है और अब ये मेरा “बलात्कार” करेगी..पर वो चाहकर भी कुछ और नहीं कर सकती थी, क्योंकि उसकी ही पार्टी थी इसलिए उसका जल्दी बाहर निकलना जरुरी था..

हिनल : तुम्हारा ये बर्थडे गिफ्ट मुझे हमेशा याद रहेगा..स्नेहा बड़ी लक्की है, जिसे तुम जैसा बी ऍफ़ मिला..
और ये कहते हुए उसने मेरे होंठो पर एक और गीली वाली पप्पी कर दी और मेरे लंड को भी पकड़कर मसल दिया.

मैं : तुम अपनी बेस्ट फ्रेंड के बॉय फ्रेंड के साथ जो कर रही हो…स्नेहा क्या सोचेगी..
हिनल (हँसते हुए) : हा हा…स्नेहा…अरे उसके और मेरे बीच कोई फर्क नहीं है…पता है, पहली बार स्नेहा को मैंने अपने फ्रेंड का पेनिस सक करने को दिया था…मैंने और स्नेहा ने एक साथ काफी मजे लिए हैं…वो कुछ नहीं कहेगी..

मैं : पर इसका मतलब ये नहीं की मैं भी कुछ नहीं कहूँगा…
हिनल (कामुक अंदाज में, अपनी जीभ से मेरे होंठो को चाटते हुए) : अच्छा जी…तुम मुझे ना कह सकते हो क्या…

अब मैं क्या करूँ, अगर कोई लड़की इस तरह से पेश आये तो अपने पर तो काबू पाना मुश्किल है,पर लंड महाराज को कोन समझाए..सो उसके खड़े होते ही मेरी बात का वजन अपने आप हल्का हो गया और वो मुस्कुराने लगी…

हिनल : जल्दी ही मिलेंगे…दोबारा…जब टाईम ही टाईम होगा..

और ये कहकर वो मुझे अँधेरे में खड़े लंड के साथ अकेला छोड़कर बाहर निकल गयी…

मैं कभी उसकी मटकती हुई गांड को और कभी अपने फुफकारते हुए लंड को देख रहा था.

मैं भी अपने कपडे ठीक करके बाहर निकल गया.
मैंने बाहर जाकर देखा की अंकित अपने दोस्तों के साथ कोने में जाकर बैठा हुआ है और खाना खा रहा है.
और हिनल अपने मम्मी पापा के साथ खड़ी हुई है..मुझे स्नेहा कही दिखाई नहीं दी.

मैं हिनल के पास गया : एक्स्कुस मी हिनल…वो, स्नेहा कहा है..
हिनल : अरे विशाल…आओ..मोम डेड..ये विशाल है, इसके बारे में ही बता रही थी मैं अभी.
हिनल की मम्मी : अच्छा…तो तुम भी इनके ग्रुप में ही हो..और बेटा..कहाँ रहते हो..कोन-२ है तुम्हारे घर पर…
वगेरह-२
मैं हैरान था की हिनल ने क्या बोला है अपने मम्मी पापा को और वो ऐसे क्यों ये सब मुझसे पूछ रहे हैं…शादी करनी है क्या इसकी मेरे साथ…

खेर मैंने. उनकी बातों का जवाब दिया और फिर मैं अलग होकर खड़ा हो गया और स्नेहा का इन्तजार करने लगा..

हिनल अपने मम्मी पापा से अलग होकर मेरे पास आई.
हिनल : क्यों घबरा रहे थे तुम…
वो शायद अपने मम्मी पापा के सामने मेरी पतली हालत को देखकर बोल रही थी.
मैं : वो तुमने क्या कहा अपने मम्मी पापा को मेरे बारे में जो वो इतना कुछ पूछ रहे थे..
हिनल : दरअसल मेरी मम्मी, पापा के साथ दो महीने के लिए दुबई जा रही है, अगले महीने..और स्नेहा को तो वो जानते ही हैं..सो मुझसे पूछ रहे थे की स्नेहा के साथ ये कोन लड़का आया है, मैंने कह दिया की हमारे ग्रुप में ही है, और स्नेहा का अच्छा दोस्त है, स्नेहा अक्सर मेरे साथ मेरे घर पर भी रहती है..और मम्मी पापा के जाने के बाद भी वो कभी मेरे घर या फिर मैं उसके घर जाकर रहूंगी..और तुम तो जानते ही हो की जवान लड़की के मम्मी पापा कितने फिकरमंद होते हैं, तभी वो तुम्हारे बारे में पूछ रहे थे..की कहीं उनके जाने के बाद तुम भी किसी दिन हमारे घर न आ जाओ, स्नेहा के साथ…समझे..

मैं : समझा..पर तुम फिकर मत करो…नहीं आऊंगा..मैं .

हिनल (मेरे और पास आते हुए) : उन्हें एक बार जाने तो दो तुम…फिर मैं देखती हूँ की तुम अपने घर से जाते कैसे हो ..समझ गए न..
मैं उसकी प्लानिंग सुनकर ही सुन्न सा हो गया..मेरे जहाँ में वाईल्ड इमेजेस आने लगी, जिसमे मैं , स्नेहा और हिनल, नंगे एक ही बिस्तर में, चुदाई करने में लगे हुए हैं…और भाग भागकर एक दुसरे को पकड़ रहे हैं…हिनल के मोटे मुम्मे भागने की वजह से हवा में उचल रहे हैं…और और…

हिनल : ऐ मिस्टर…कहाँ खो गए…अगले महीने की प्लानिंग बनानी शुरू कर दी है क्या…हे हे..

तभी स्नेहा आ गयी : किस बात की प्लानिंग बन रही है भाई..हमें भी तो बताओ..

हिनल कड़ी हुई मुस्कुराती रही और मेरा लाल चेहरा देखकर स्नेहा बोली : हे हिनल…देख तू मेरे विशाल को ज्यादा तंग मत कर…तुझे अब अंकित मिल गया है न..तू उसके साथ मजे कर…जा, वो तुझे ही देख रहा है…

हम सबने देखा, अंकित हमें ही बैठा हुआ देख रहा था..

हिनल ने हंस कर उसकी तरफ इशारा किया..और उसे थोडा वेट करने का इशारा किया,

हिनल :यार, तू कबसे इतनी पोसेसिव हो गयी, खेर, मैं विशाल से कह रही थी की अगले महीने मम्मी और पापा दुबई जा रहे हैं..और उसकी ही प्लानिंग करने की बात कह रही थी मैं..

स्नेहा : वाव…तब तो मजा आ जाएगा, तू अंकित को बुला लेना और मैं विशाल के साथ आ जाउंगी…पूरी ऐश करेंगे…वैसे कितने दिन के लिए जा रही है आंटी..

हिनल : पुरे दस दिनों के लिए.

स्नेहा : वाव…मजा आएगा…है न विशाल..

मैंने भी हंस कर उसकी ख़ुशी में इजहार किया…मैं तो पहले से ही आने वाले दिनों की तस्वीर अपने दिमाग में बना चूका था.

उसके बाद स्नेहा और मैंने खाना खाया और वापिस चल दिए.
किटी मेम का दो बार फोन आ चूका था..पर स्नेहा ने बताया नहीं की मैं भी उसके साथ हूँ.

स्नेहा को मैंने घर छोड़ा..वो पुरे रास्ते मुझसे चिपक कर बैठी रही..

स्नेहा का घर आने वाला था तो वो बोली : विशाल, वो मेरी बिल्डिंग से पहले वो पेड़ है न..उसके पीछे रोक लेना.

मैं वैसा ही किया.

वो मेरी बाईक के पीछे से उतरी..और आगे आकर वो उचक कर मेरी तरफ मुंह करके, बाईक के पेट्रोल टेंक के ऊपर बैठ गयी, दोनों तरफ पैर करके..

और अगले ही पल मैं और स्नेहा एक दुसरे को बुरी तरह से चूमने और चूसने में लगे हुए थे..मेरा खड़ा हुआ लंड सीधा उसकी चूत पर ठोकर मार रहा था..

स्नेहा : ओह्ह्ह्ह..विशाल…..आज तो तुम मेरी जान लेकर रहोगे…कितना सताते हो तुम…पूच पूच…

उसने तो मेरे चेहरे पर अपने होंठो के निशान छोड़ने शुरू कर दिए..

तभी स्नेहा का फोन बज उठा , उसने झल्लाते हुए फोन उठाया : या मोम…क्या है…आ गयी बस…बोला न…नीचे ही हूँ मैं…आ रही हूँ ऊपर…ओके..बाय…

उसके चेहरे पर गुस्सा साफ़ दिखाई दे रहा था..

मैं : स्नेहा , कोई बात नहीं , तुम जाओ…ये सब तो होता ही रहेगा अब..

स्नेहा : यस …ठीक है…गुड नाईट…स्वीट ड्रीम…और वो हिनल से ज्यादा मेल जोल बढाने की जरुरत नहीं है…समझे न…चल बाय…घर जाकर फोन करना.

और वो मुझे एक और बार चूम कर अपने घर की तरफ निकल गयी.

मैंने भी बाईक जल्दी से चलायी और अपने घर पहुँच गया.

मम्मी : आजकल बड़ी पार्टियाँ शार्तियाँ हो रही है…

मैं : मोम…आपका बेटा जवान हो गया है…ये सब तो चलता ही रहेगा अब…

मम्मी : ठहर बदमाश…अभी बताती हूँ तुझे…

पर उनके पकड़ने से पहले ही मैं अपने कमरे में घुस गया और दरवाजा बंद कर लिया.

मैंने शायद थोडा ज्यादा खा लिया था..मैं सीधा टॉयलेट में गया…और पेंट उतार कर कमोड पर बैठ गया.

मेरा फोन बजने लगा.
मैंने फ़ोन उठाया, वो अंशिका का था..

अंशिका :ये क्या हो रहा है आजकल…तुम्हे फोन करने की भी फुर्सत नहीं है…तुम्हारा फोन अनरीचएबल आ रहा था..पता है, एक घंटे से ट्राई कर रही हूँ…
मैं : सॉरी बाबा…वो इसमें आजकल सिग्नल की प्रोब्लम है..
अंशिका : ठीक है, ठीक है…वैसे क्या कर रहे हो अभी.

मैं उसे क्या बोलता…

मैं : कुछ नहीं…बस नहाने की सोच रहा था…गर्मी लग रही थी…बाथरूम में आया ही था बस.
अंशिका :ओहो…मैं भी आ जाऊ क्या..
मैं : नेकी और पूछ पूछ…आ जाओ तुम..
अंशिका : पर मुझे तुमपर भरोसा नहीं है, तुम नहाओगे नहीं , कुछ और करने लग जाओगे.
मैं : तो तुम नहीं चाहती की मैं कुछ और करूँ.

वो कुछ न बोली

मैं : बोलो न…चुप क्यों हो गयी तुम…

अंशिका : मैं क्या बोलू…तुम नहीं जानते विशाल, मेरी क्या हालत है आजकल..रात दिन बस तुम्हारे बारे में ही सोचती रहती हूँ..और तुम्हारे साथ कैसे क्या करुँगी, बस यही सब चलता रहता है मेरे दिमाग में…तुम जल्दी कुछ करो विशाल..नहीं तो मैं मर जाउंगी…

मैं : तुम मेरे लंड को लिए बिना नहीं मर सकती…समझी न..

अंशिका (हँसते हुए) : मैं तो तुम्हारा लंड लेते हुए ही मरना चाहती हूँ..

मैं : इतना भी लम्बा नहीं है मेरा लंड…सिर्फ सात इंच का है, और इसे लेने से तुम मरोगी नहीं, बल्कि मजे ले लेकर जिन्दा रहोगी..समझी न.

अंशिका : तो कब मुझे जिन्दा कर रहे हो तुम, क्योंकि तुम्हारा लिए बिना तो मेरा शरीर मरे के समान है…

उसकी बात मेरे दिल को छु गयी.

मैं : तुम फिकर मत करो..जल्दी ही मैं कुछ करता हूँ..

उसके बाद कुछ और बाते करने के बाद उसने फोन रख दिया.

अब मेरे सामने अपनी जिन्दगी का सबसे बड़ा चेलेंज था…अंशिका की चुदाई करना..और वो भी जल्दी ही…क्योंकि उसकी वजह से कितनी और चुते भी मेरे लंड का इन्तजार कर रही थी..

मैं बाहर निकला तो बाहर से मम्मी और पापा की आवाजे आ रही थी, मम्मी की आवाज कुछ ज्यादा ही तेज थी, शायद उनमे किसी बात पर बहस हो रही थी..
मैंने दरवाजा थोडा सा खोला और उनकी बात सुनने लगा

मम्मी : पर तुमने तो कहा था की कोई ना भी जाए तो चलेगा न…और अब कह रहे हो की सभी को जाना है..

पापा : अरे बाबा, कहा तो मैंने, मामाजी का खुद फोन आया था, वो कह रहे थे की बहु और विशाल दोनों को साथ लेकर ही आना.

मम्मी : पर विशाल कैसे जाएगा, उसके कॉलेज भी खुलने वाले हैं, उनका क्या है, वो कहेंगे तो हम सभी उठकर चल देंगे, बच्चे की पढाई तो हमें ही देखनी पड़ेगी न.

मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था की वो बात किसलिए कर रहे हैं.

मैं बाहर निकल आया.

मैं : क्या हुआ मोम..

मम्मी : देख विशाल…तेरे पापा क्या कह रहे हैं..

पापा : बेटा, मैं बताता हु, वो मेरे मामाजी है न , जो गाँव में रहते है, उनके पोते के बारे में तो तू जानता ही है..

दरअसल मामाजी के इकलोते बेटे का बड़ा बेटा, जिसकी पिछले साल ही शादी हुई थी पर एक दुर्घटना में उनके पोते की मौत हो गयी और अब पापा के मामाजी, अपने पोते की पत्नी को अपनी बेटी की तरह मानकर, उसकी दूसरी शादी कर रहे हैं.और इसलिए मामाजी चाहते हैं की हम सभी शादी में गाँव आये.

मम्मी को इसलिए भी गुस्सा था क्योंकि मामाजी ने एक बार बातो ही बातो में उसकी शादी मुझसे करने की बात की थी पापा से, जिसे सुनकर मम्मी को बड़ा गुस्सा आया था, इसलिए शायद वो गाँव जाने से कतरा रही थी.

मैंने मम्मी को समझाया : देखो मम्मी, पहले जो हो गया , सो हो गया, अब जब मामाजी उसकी दूसरी शादी कर रहे हैं तो आप लोगो का जाना तो बनता ही है, वो इतना नेक काम कर रहे हैं, जाना तो मैं भी चाहता हु, पर मेरे कॉलेज खुल रहे है, पर आप फिकर मत करो, मैं मेनेज कर लूँगा..

मेरे साथ-२ पापा भी मम्मी को समझाते रहे और आखिर में मम्मी गाँव जाने को तैयार हो ही गयी.

मैं : तो ठीक है, कब जाना है, मैं आज ही जाकर टिकेट बुक करवा आता हु.

पापा : अगले हफ्ते बुधवार की शादी है, तुम सन्डे की जाने की और फ्राईडे की आने की टिकेट करवा लाओ.

यानी लगभग एक हफ्ता…मेरे दिमाग में तो अंशिका को चोदने के ख्याल आने लगे..

मैंने सीधा अपने फ्रेंड के सायेबर केफे गया, जो टिकेटिंग का भी काम करता है, और उससे टिकेट बुक करवा लाया.

आज फ्राईडे है,यानी परसों तक मम्मी पापा चले जायेंगे..

मैंने घर जाकर टिकेट पापा को दी और अंशिका को फोन मिलाया

मैं : हाय…क्या कर रही थी

अंशिका : बस, अभी बैठी ही थी लेप्पी पर अपने, कुछ प्रोजेक्ट बनाना है कॉलेज का.

मैं : अच्छा सुनो, एक गुड न्यूज़ है..

अंशिका : क्या !!

मैं : सन्डे को मम्मी – पापा बाहर जा रहे हैं..एक हफ्ते के लिए

अंशिका मेरी बात सुनकर चुप सी हो गयी…

फिर वो धीरे से बोली

अंशिका : तो…तो क्या..
मैं : तो ..ये मेरी जान की तुम्हे चोदने का टाईम आ गया है अब..घर पर एक हफ्ते तक कोई नहीं होगा..हम जो चाहे कर सकते हैं..

उसकी गहरी साँसों की आवाजे मुझे साफ़ सुनाई दे रही थी..शायद वो आने वाले दिनों की कल्पना करके ही गर्म हो रही थी.

मैं : तुम्हे…तुम्हे ख़ुशी नहीं हुई क्या.
अंशिका : विशाल…….तुम जानते नहीं, इस समय मेरी हालत क्या हो रही है…यु नो…तुम मुझे बता रहे हो की दो दिनों के बाद तुम मेरे साथ सब कुछ करोगे…वो सब, जिसके बारे में हमने ना जाने क्या क्या प्लान बनाये हैं…और अब सिर्फ दो ही दिनों के बाद वो टाईम आ रहा है…आई एम् फीलिंग…फीलिंग..वेट डाउन देयर …

मैं : मेरा भी यही हाल है अंशिका…तुम नहीं जानती की तुम्हारी चूत मारने का मुझे कितना इन्तजार है…अच्छा सुनो, कल तुम्हे कॉलेज के बाद मैं पिक कर लूँगा और फिर हम सन्डे का प्लान बनायेगे..

अंशिका : पर कल तो सेटरडे है, कॉलेज की छुट्टी …
मैं : वह, तब तो और भी अच्छा है, कल हम दोपहर को मिलते हैं ..और मूवी देखेंगे..
अंशिका : वो दरअसल, मैंने और कनिष्का ने कल मार्केट जाने का प्रोग्राम बनाया है..उसे कॉलेज के लिए कुछ ड्रेसेस लेनी है..
मैं : तो ठीक है, उसे भी ले आना…हम सब मिलकर शोपिंग करेंगे, मूवी देखेंगे और हम आपस में प्रोग्राम भी बना लेंगे..
अंशिका : वाव…ठीक है…फिर कल मिलते हैं..बाय ..
मैं : बाय ….
और मैंने फोन रख दिया..मेर हालत क्या हो रही थी, ये तो आप सब लोग समझ ही सकते हैं…

अगले दिन सुबह उठकर मैं तैयार हो गया और नाश्ता करने लगा

मम्मी : देख बेटा, तू अपना ध्यान तो रख लेगा न, पहली बार तुझे अकेला छोड़कर जा रही हु, कहो तो तुम्हारी मास्सी को बोल देती हु, वो आकर रह लेगी कुछ दिनों तक..

मैं : मोम…इतना भी बच्चा नहीं हु मैं, कभी मुझे छोड़ोगे, तभी तो पता चलेगा न की मुझे कोई प्रोब्लम होती भी है या नहीं…और वैसे भी कॉलेज के बाद मैंने एम् बी ऐ करने के लिए पूना जाना है, वहां तो अकेले ही रहना पड़ेगा न..

मम्मी : ठीक है..ठीक है..पर अपना ध्यान रखना..

उसके बाद वो बैठ कर मुझे , ये करना, वो मत करना , ना जाने क्या क्या बताती रही..

मैंने जल्दी से नाश्ता ख़त्म किया और बाहर निकल गया.

अंशिका का फोन पहले ही आ चूका था, वो अपने पापा की कार लेकर आ रही थी, और मुझे मेनरोड पर मिलने को कहा था दस बजे ..

मैं बाहर आकर उनका इन्तजार करने लगा, थोड़ी ही देर में वो आई, कार अंशिका चला रही थी और उसके साथ ही कनिष्का बैठी थी.

अंशिका ने कार रोकी और बाहर निकल आई, और मुझे चाबी देकर बोली..: चलो जी..कहाँ ले जा रहे हो..
मैंने चाबी लेते हुए कहा : आज तो मार्केट ही ले जा रहा हु, कल का प्रोग्राम कुछ और है.
वो मेरी बात सुनकर शर्मा गयी.. और दूसरी तरफ जाकर कनिष्का का दरवाजा खोलकर खड़ी हो गयी..तब तक मैं ड्राईविंग सीट पर बैठ चूका था.

कनिष्का : हाय विशाल…कैसे हो..
मैं : हाय कनिष्का..मैं तो मस्त हु..तुम सुनाओ…वैसे आज बड़ी मस्त लग रही हो तुम..

वो भी मेरी बात सुनकर शर्मा गयी..इन दोनों बहनों का चेहरा चर्माते हुए लगभग एक जैसा ही लगता था.

अंशिका शायद मेरे साथ आगे बैठना चाहती थी. वो अभी तक दरवाजा खोलकर खड़ी थी.

अंशिका : तुम्हारी बाते हो चुकी हो तो कृपया करके बाहर निकलोगी क्या..
कनिष्का : दीदी..आप प्लीस पीछे ही बैठ जाओ न..मुझे आगे बैठना है आज.
अंशिका : कन्नू….चुपचाप पीछे चलो…मेरी बात एक ही बार में मान लिया करो…
अंशिका ने थोड़े गुस्से में कहा था इस बार.

वो भी बुड बुड करती हुई बाहर निकल गयी, दोनों बहने मेरे साथ आगे बैठना चाहती थी..

मैंने कार चलायी और सबको लेकर एक माल में गया..वहां दो-तीन शो रूम में जाकर कनिष्का अपने लिए कपडे देखती रही, और कुछ लेती भी रही.

जब वो चेंजिंग रूम में जाकर कपडे पहन कर देख रही थी तो मैंने अंशिका से कहा : सो…कल के लिए रेडी हो न..
अंशिका : तुमसे कही ज्यादा…पर कोई प्रोब्लम तो नहीं होगी न…
मैं : अब घर में कैसी प्रोब्लम…वहां कोई नहीं होगा और ना ही कोई आएगा…
अंशिका : और एक बात, कल के लिए कुछ प्रिकार्शन ले लेना..समझ गए न..

मेरी पॉकेट में वैसे तो हमेशा से ही कंडोम रहता था, आज से पहले अगर कोई मौका मिलता तो मैं उसको पहन कर ही अंशिका की चूत मारता पर जब अंशिका ने मुझे प्रिकॉशन लेने की बात कही तो मेरे मन में एक ख़याल आया, मैंने सोचा चलो ट्राई करके देखते हैं..क्या पता बात बन जाए.

मैं : नहीं…मैं चाहता हु की पहली बार मैं बिना किसी प्रिकॉशन के करू..तुम कोई टेबलेट ले लेना बाद में ..
अंशिका : यार तुम मरवाओगे..टेबलेट्स हमेशा सक्सेसफुल नहीं होती…तुम प्लीस…कंडोम ले लेना..वैसे वो तुम्हारी पॉकेट में ही तो रहता है हर समय..
मैं : नहीं…मैं अपनी वर्जिनिटी किसी रबड़ में लपेट कर नहीं खोना चाहता…अगर करना है तो बिना कंडोम के करना पड़ेगा…वर्ना नहीं..
मैंने कह तो दी थी ये बात पर मुझे डर लग रहा था की अगर अंशिका ने मना कर दिया तो मुझे कंडोम में ही करना पड़ेगा और मेरी बात कच्ची हो जायेगी..मेरा क्या है, मुझे तो चूत से मतलब है, अगर बिना कंडोम के मान गयी तो सही है वर्ना कंडोम के साथ कर लूँगा..

मैंने अंशिका की तरफ देखा..

उसकी आँखे लाल हो चुकी थी ये सब बाते करते हुए..उसकी मोटी-२ आँखों के सफ़ेद वाले हिस्से पर लाल रंग की पतली नसे मुझे साफ़ दिखाई दे रही थी..

अंशिका : तो…तो.तुम नहीं मानोगे..
मैं : नहीं..
अंशिका : तुम शुरू से ही बड़े जिद्दी हो…अपनी सारी बाते मनवा लेते हो..पर मेक स्योर कोई गड़बड़ न हो..

मेरा दिल तो उछल ही पड़ा उसकी रजामंदी सुनकर…मैंने झट से आगे बढकर उसके गाल को चूम लिया..वहां आस पास खड़े लोग मुझे देखते ही रह गए.

तभी अंशिका के पीछे से आवाज आई…: अहेम…अहेम….

वो कनिष्का थी, शायद उसने भी मुझे उसकी बहन को चुमते हुए देख लिया था..और गला खनकार कर वो अपने खड़े होने का एहसास करा रही थी..

अंशिका ने मुझे आँखों से तरेर कर देखा और पीछे खड़ी हुई कनिष्का की तरफ मुड़ी..वो नया टॉप और जींस पहन कर आई थी बाहर , हमें दिखाने के लिए..उसकी जींस और टॉप के बीच में लगभग दो इंच का गेप था..जिसमे से उसका सफ़ेद रंग का सपाट पेट साफ़ दिखाई दे रहा था..

कनिष्का : दीदी…कैसी है ये ड्रेस…

अंशिका ने उसे गोर से देखना शुरू किया..और मुड़कर उसके पीछे गयी और पीछे से भी देखने लगी…कनिष्का ने मेरी तरफ मुंह करके अपनी दोनों आई ब्रो को ऊपर करके मुझसे इशारे से पूछा की ड्रेस कैसी है..मैंने अपनी गर्दन हाँ के इशारे में हिलाई होंठ हिला कर , बिना आवाज निकले उससे कहा “सेक्सी”

वो मेरी तारीफ सुनकर शर्मा गयी..

अंशिका : कन्नू…ये शोर्ट टी शर्ट बड़ी अजीब लगती है..तू लॉन्ग वाली ले ले..हमारे कॉलेज में भी कई लडकिय पहनती है ऐसी..सब यहीं देखते रहते है..

कनिष्का : दीदी..आप भी न..ओर्थोडोक्स वाली बाते करती हो..ये फेशन है आजकल का..मुझे तो ये बहुत पसंद है..आई एम् फीलिंग सेक्सी..इन दिस टॉप..

अंशिका उसकी बात सुनकर कुछ न बोली..वो जानती थी की एक बार अगर कनिष्का ने डिसाईड कर लिया है तो उसे समझाना बेकार है..कनिष्का ने वैसे दो टॉप और एक जींस ली वहां से..उसके बाद उसने एक सूट और दो कुरते भी लिए…कुल मिलकर उसे आज शोपिंग करने का मजा आ रहा था.

हमने खाना खाया और उसी माल में लगी हुई मूवी “एजेंट विनोद” देखने चल दिए.

हाल खाली था, आगे अंशिका चल रही थी, इसलिए वो जाकर सबसे पहले सीट पर बैठ गयी..मैं उसके साथ ही बैठ गया, मेरे पीछे से आ रही कनिष्का मेरे दांये आकर बैठ गयी…यानी अब मैं उन दोनों बहनों के बीच में था.

अंशिका : अरे कन्नू…तू वहां कहाँ बैठ गयी, वो हमारी सीट नहीं है..तू यहाँ आ, मेरे पास.
कनिष्का : अरे दीदी, कुछ नहीं होता, देखो न, हॉल खाली है, कोई नहीं आएगा यहाँ..

फिल्म शुरू हो चुकी थी, इसलिए अंशिका ने उससे ज्यादा बहस करना उचित नहीं समझा.

एक्शन मूवी थी और मेरे आजू बाजू दो मस्त लडकिया बैठी थी..
हमारे आगे वाली सीट पर एक जोड़ा बैठा था.जो एक दुसरे से पूरी तरह से चिपक कर बैठा था और मूवी देख रहा था..उन्हें देखकर अंशिका ने भी मेरी बाजू पकड़ी, मेरी कोहनी को अपनी बांयी ब्रेस्ट के ऊपर लगाया और अपना सर मेरे कंधे पर टिका दिया..और मेरे कंधे को चूम लिया.

दूसरी तरफ कनिष्का वैसे तो मुझसे दूर बैठी थी, पर उसकी टाँगे मेरी टांगो से टच हो रही थी.

वो उन्हें हिला रही थी, जिसकी वजह से हम दोनों की टाँगे एक दुसरे पर घिसाई कर रही थी.

मुझे अभी तक ये पता नहीं चल पाया था की कनिष्का के मन में मेरे लिए क्या है..वो अच्छी तरह से जानती थी की मैं उसकी बहन का बॉय फ्रेंड हु, पर फिर भी उसके हाव भाव से लगता था की वो मेरी तरफ एट्रेक्ट हो चुकी है..मैंने सोच लिया की आज मैं इसका पता लगा कर रहूँगा की मेरा सोचना सही है या गलत.

मैंने भी अपनी टांग हिलानी शुरू कर दी..उसने अचानक मेरी तरफ घूम कर देखा..और मुस्कुरा दी..अँधेरे में मुझे सिर्फ उसकी चमकती हुई आँखे और सफ़ेद दांत ही दिखाई दिए.उसने सर आगे करके अपनी बहन को देखा, जो दीन दुनिया से बेखबर, मेरे कंधे पर सर टीकाकार, मूवी देख रही थी.

और फिर कनिष्का ने मेरी बाजू को अपनी तरफ खींचा, जो सीधा उसकी दांयी ब्रेस्ट से जा टकराई और अपनी बहन की ही तरह, उसने भी मेरे कंधे पर अपना सर टिका दिया और मूवी देखने लगी..

अगर उस समय कोई मेरे सामने आकर खड़ा होकर देखता तो मेरे दोनों बाजुओं से लिपटी हुई दो लडकिया जो मेरे कंधे पर सर टीकाकार मूवी देख रही है, पता नहीं क्या सोचता…

मैं भी अपने आप को भाग्यशाली समझ रहा था..पर एक प्रोब्लम थी..

उन दोनों ने जिस मदहोशी से मेरी बाजू पकड़ी हुई थी और अपनी गर्म साँसे मेरी गर्दन पर छोड़ रही थी, मेरा लंड खड़ा होने लगा था..मेरी टाईट जींस की वजह से उसे अपना फन उठाने में मुश्किल हो रही थी..उसे एडजस्ट करना बहुत जरुरी था, पर दोनों बहनों ने मेरी बाजुए पकड़ी हुई थी, मैं अगर अपना कोई भी हाथ हिलाता तो उस हाथ वाली को जरुर पता चल जाता..मैं कनिष्का को पहली ही बार में ये नहीं दर्शाना चाहता था की उसके पकड़ने की वजह से मेरा लंड खड़ा हुआ है..इसलिए मैंने अंशिका के कान में धीरे से कहा.
मैं : सुनो…तुम्हारे शरीर की गर्मी से मेरा सिपाही खड़ा हो गया है..पर उसे जगह नहीं मिल पा रही है…एक मिनट मेरा हाथ छोड़ो प्लीस..
अंशिका : उन्…नहीं न…इतना मजा आ रहा है..
मैं : समझा करो…प्लीस..मुझे प्रोब्लम हो रही है..
अंशिका : तो मैं तुम्हारी प्रोब्लम दूर कर देती हु.

और इतना कहकर उसने अपना हाथ मेरे लंड की तरफ खिसका दिया.

मैंने देखा की मेरे लंड वाले हिस्से पर घुप्प अँधेरा है, यहाँ तक की मैं भी अंशिका के हाथ हो नहीं देख पा रहा था..उसने मेरे नीचे की तरफ फंसे हुए लंड को धीरे-२ ऊपर की तरफ खिसकाना शुरू किया..पर ये लडकिया क्या जाने की हमारे लंड कितने नाजुक होते हैं..उन्हें किस अंदाज से ऊपर करना चाहिए..
मेरा लंड का सुपाड़ा मेरे अन्डरवेअर से टकरा रहा था और उसमे दर्द होने लगा, जिसकी वजह से मेरे मुंह से आह्ह सी निकल गयी..जिसे दोनों बहनों ने साफ़-२ सुना.

कनिष्का ने अपना मुंह ऊपर किया और मेरे कान में फुसफुसाई : क्या हुआ..मैंने थोडा तेज पकड़ा हुआ है क्या..

अब उसे क्या बताऊ, उसने नहीं उसकी बहन ने तेज पकड़ा हुआ है, और वो भी मेरा कन्धा नहीं, मेरा लंड.

मैंने भी फुसफुसाकर कहा : नहीं…ठीक है..
और वो और घुस कर मुझसे लिपट कर मूवी देखने लगी.
और दूसरी तरफ, अंशिका को भी शायद समझ आ चूका था की मेरे लंड को अडजस्ट करना थोडा मुश्किल है, उसने डेयरिंग दिखाते हुए, मेरी जिप खोल दी और अपना हाथ सीधा अन्डर डाल दिया.
मेरी तो साँसे ही अटक गयी, वैसे कोई प्रोब्लम नहीं थी, पर उससे ज्यादा मुझे डर लग रहा था, कही कनिष्का ने देख लिया तो क्या होगा..पर अँधेरा इतना था की नीचे कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा था.
अंशिका ने बड़ी सफाई से अपनी लम्बी उंगलियों का इस्तेमाल करते हुए, मेरे अन्डरवेअर के अन्डर हाथ डाला और मेरा गरमा गरम लंड पकड़ लिया.
उसके हाथ लगते ही मेरे शरीर के सारे रोंगटे खड़े हो गए. मुझे सांस लेने में तकलीफ सी होने लगी, मेरा गला सुख सा गया…और यही हाल शायद अंशिका का भी था..उसके दिल की तेज धड़कन मेरी बाजुओं पर साफ़ महसूस हो रही थी..
अंशिका ने मेरे लंड को धीरे -२ ऊपर की और खिसकाना शुरू किया..और जल्दी ही मेरा शेर ऊपर की और मुंह करके गुर्राने लगा.
मैंने उसके कानो की तरफ मुंह करके धीरे से कहा : थेंक्स..
उसने अपना चेहरा ऊपर उठाया, और मेरा लंड पकडे -२ ही मेरे होंठो पर अपने नर्म और मुलायम होंठ रख दिए.
मेरे लंड की तो मानो फटने वाली हालत हो चुकी थी.
अंशिका ने अब मेरा लंड बाहर की और निकाल लिया था..और उसे ऊपर नीचे करने लगी थी.
अंशिका : क्या यार….ये कन्नू न होती तो अब तक कितने मजे ले लिए होते…
वो अंदर ही अंदर अपनी बहन को गालियाँ निकाल रही थी शायद..
मैं : तुम उसकी चिंता मत करो..वो मस्ती में मूवी देख रही है..तुम जो चाहो वो कर लो..

अंशिका मेरे होंठो को दोबारा चूसते हुए : मन तो कर रहा है की अभी तुम्हारे ऊपर बैठ जाऊ..पर कोई बात नहीं, मैं कल का वेट कर लुंगी..पर ये मौका भी हाथ से नहीं जाने दूंगी..तुम बस कन्नू को इधर मत देखने देना.

और ये कहकर उसने हमारी सीट के बीच वाली आर्म को ऊपर की और मोड़ दिया..और अपना मुंह नीचे करके मेरे लंड के ऊपर ले गयी..और मेरा लंड सीधा अपने मुंह में डालकर चूसने लगी.
मैं तो उसकी हिम्मत देखकर हैरान रह गया, वैसे तो हमारे पीछे और बगल में कोई नहीं बैठा था जिसे अंशिका मेरा लंड चूसते हुए दिखाई दे..पर फिर भी अगर कनिष्का ने एकदम से आगे होकर अपनी बहन को देखा तो उसे सब पता चल जाएगा.
पर ऐसे हालात में लंड चुस्वाने का जो मजा मिल रहा था उसके भी क्या कहने..मैंने अपनी कोहनी को कनिष्का के मुम्मे पर जोर से दबा दिया, मुझे अपनी कोहनी के ऊपर कनिष्का के कठोर निप्पल का एहसास साफ़ तरीके से हो रहा था..मैंने अपनी कोहनी को उसी जगह पर घुमाना शुरू कर दिया, उसके निप्पल्स मेरे हाथो पर किसी कील की तरह से चुभ रहे थे.. ..वो भी मस्ती में आने लगी थी..उसने अपना सर मेरे कंधे से ऊपर उठाया, मैंने भी अपना चेहरा उसकी तरफ किया, शायद कुछ कहना चाहती थी, पर कहने से पहले वो देखना चाहती थी शायद की उसकी बहन तो नहीं देख रही उसे..जैसे ही उसने अपना सर आगे की और करना चाहा , मैंने जल्दी से अपने मुंह उसकी तरफ बड़ा दिया..और उसके होंठो को चूम लिया.
वो एकदम से सकपका गयी…और मेरी आँखों में झांककर देखने लगी…मुझे लगा की शायद उसे मेरा चूमना अच्छा नहीं लगा..पर मैं गलत था.
अगले ही पल उसने अपनी चूची को मेरे हाथो के ऊपर दबाते हुए, मेरे होंठो पर हमला सा कर दिया…और उन्हें बुरी तरह से चूसने लगी..
वह…क्या स्वाद था उसके होंठो का…किसी मिश्री की तरह मीठे थे उसके अनछुए होंठ..

नीचे उसकी बहन मेरा लंड चूस रही थी, उसे क्या मालुम था की ऊपर मैं उसकी छोटी बहन के होंठ चूस रहा हु…

मेरे लंड का बुरा हाल तो पहले से ही था, अब दोनों तरफ से चुसाई पाकर मेरा जल्दी ही निकलने वाला था..

और फिर जब मेरे लंड से रस निकलकर अंशिका के मुंह में जाने लगा…तो मेरे होंठो की पकड़ और भी तेज हो गयी कनिष्का के होंठो पर…उसे अभी तक मालुम नहीं चल पाया था की उसकी बहन मेरा लंड चूस रही है..या उसने ये जानने की भी कोशिश नहीं की थी की मैं जब उसके साथ किस कर रहा हु तो उसकी बहन को क्यों पता नहीं चल पा रहा है..

पर जो भी हो..मजा तो मुझे दोनों तरफ से मिल रहा था.

जैसे ही अंशिका ने चूसने के बाद मेरा लंड बाहर निकला, मैंने कनिष्का को पीछे कर दिया, ताकि अंशिका को पता न चले.
उसके बाद अंशिका ने मेरे लंड को वालिस अंदर कर दिया.और अपने बेग से रुमाल निकाल कर अपना मुंह साफ़ करने लगी.
दूसरी तरफ कनिष्का बार बार अपना चेहरा ऊपर करके मेरी तरफ प्यासी नजरो से देख रही थी..शायद वो और भी किस करना चाहती थी…पर अब अंशिका का चेहरा ऊपर था, इसलिए ये मुमकिन नहीं था..मैंने भी कनिष्का को कोई रेस्पोंस नहीं दिया..वो भी मेरी बाजू पर एक दो मुक्के मारकर मुझसे रूठने का नाटक करती हुई पीछे हो गयी और हम सभी आराम से मूवी देखने लगे.
मूवी ख़तम होने के बाद, उन दोनों ने मुझे घर के पास छोड़ा..अंशिका का चेहरा खिला हुआ था, पर कनिष्का बुझी हुई सी लग रही थी..शायद मुझसे नाराज हो गयी थी वो.

उन्होंने मुझे बाहर मेन रोड पर उतारा और घर चली गयी.

घर पहुंचकर मैं सीधा कमरे में गया और सो गया, पूरा दिन बाहर घूमकर थक गया था.

रात को लगभग 1 बजे मेरे सेल पर कॉल आया, मैंने टाइम देखा और अधखुली आँखों से फोन उठाया.

मैं : हेल्लो…कोन.

दूसरी तरफ कनिष्का थी.

कनिष्का : सो गए थे क्या..
मैं : हाँ , ठनक गया था..इसलिए….इतनी लेट फोन किया..क्या हुआ..सोयी नहीं क्या अभी तक..
कनिष्का : उन..हु…अभी तक नींद ही नहीं आई..
मैं : दीदी कहाँ है तुम्हारी..
कनिष्का : वो तो खर्राटे भर रही है..

मैं समझ गया की उसने अपनी बहन से छुप कर फोन किया है..

मेरी नींद भी अब खुल चुकी थी.

मैं : तुम्हारी दीदी को अगर पता चल गया न की तुम मुझे रात के एक बजे फोन कर रही हो तो उन्हें बुरा नहीं लगेगा क्या..
कनिष्का : नहीं…पर उन्हें अगर ये पता चला की तुमने मुझे किस्स किया था तो शायद ज्यादा बुरा लगेगा..
मैं : वो..वो दरअसल….मैं करना नहीं चाहता था..तुम्हे तो मालुम ही है..अंशिका और मेरे बीच..क्या चल रहा है..
कनिष्का : हाँ…मालुम तो है..ये तो आम बात है, इस उम्र में..
मैं : पर तुम्हे इतनी देर से अपने साथ बैठा हुआ देखकर…और तुम जिस तरह से मुझे पकड़कर बैठी थी..इसलिए मैंने तुम्हे किस्स कर दिया..
कनिष्का : विशाल….मैं इतनी छोटी बच्ची भी नहीं हु…जो कुछ न समझू…दीदी उस समय तुम्हारा पेनिस सक कर रही थी…और तुमने मुझे इसलिए किस्स किया ताकि मैं उनकी तरफ ना देख सकू…

ओह्ह.तेरी भेन की..इसको तो सब पता है..मैं चुप रहा और उसकी बाते सुनता रहा..

कनिष्का : पर जब तुम मुझे किस कर रहे थे तो तुम्हारी आँखे तो बंद थी पर मुझे दीदी किस्स करते हुए ना देख ले, इसलिए मैंने आँखे खुली रखी हुई थी..जिसकी वजह से मैंने दीदी को तुम्हारे पेनिस को साफ़ तरीके से सक करते हुए देखा..मालुम तो मुझे पहले से ही था की तुम दोनों काफी आगे बढ चुके हो, पर मुझे ये नहीं मालुम था की दीदी इतनी खुल चुकी है की मूवी हॉल में ही , और वो भी जब मैं साथ हु, तुम्हारे साथ इस तरीके से शुरू हो जायेगी..

मैं : कनिष्का…वो..वो दरअसल..

कनिष्का : सफाई देने की कोई जरुरत नहीं है…मुझे इस बात का कुछ बुरा नहीं लगा की तुम दीदी के साथ किस तरह के मजे लेते हो और ना ही मुझे कोई फर्क पड़ता है..ये तो आम बात है, सभी बॉय एंड गर्ल करते है….पर मैं हेरान जरुर हुई थी जब तुमने मुझे किस्स किया..वैसे सच कहू, मुझे मजा बहुत आया था, मेरा एक बॉय फ्रेंड था , होस्टल में..पर वो भी इतना अच्छा किस्सर नहीं था, जितने की तुम हो..बिलकुल इमरान हाशमी की तरह से चूस रहे थे तुम मेरे लिप्स..लगता है, दीदी के साथ काफी प्रेक्टिस की है तुमने..हे हे…

मैं : तुम्हे…तुम्हे बुरा नहीं लगा, की तुम्हारी दीदी के बॉय फ्रेंड ने तुम्हे किस्स किया..
कनिष्का : अरे बोला तो सही नहीं लगा….अब लिख कर दू क्या. वैसे मुझे अपनी दीदी के बॉय फ्रेंड को शेयर करने में कोई प्रोब्लम नहीं है..हा हा..
मैं : पर तुम्हारी दीदी को है..वो तुम्हारे लिए कितनी प्रोटेक्टिव है, मुझे सब पता है, इसलिए तुमसे मिलने भी नहीं दे रही थी मुझे शुरू में तो..
कनिष्का : दीदी की छोड़ो..क्या तुम्हे प्रोब्लम है..अपने आप को मेरे और दीदी के साथ शेयर करने में..
मैं : ये..ये तुम क्या कह रही हो…तुम्हारा तो वैसे भी बॉय फ्रेंड है न..फिर तुम ऐसे क्यों…
कनिष्का : मैंने कहा, वो होस्टल में था, उसे साथ लेकर नहीं घूम रही अभी तक मैं..वहां की बात वहीँ रह गयी…नाव आई एम् सिंगल..एंड रेडी टू मिन्गल..हे हे..

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