परिवार नेहा का part 7

बड़े मामा ने मौका देख कर अपने लोहे जैसे सख्त मोटे लंड की तीन इंच मेरी गांड में बलपूर्वक ठूंस दीं. मैं दर्द से बिलबिला कर

चीख पड़ी.

मेरे नाखून बड़े मामा की बाँहों में गड़ गए. मैंने बड़े मामा की बाँहों की खाल से अपने नाखूनों से खरोंच कर खून निकाल दिया. बड़े

मामा ने एक बार भी उफ तक नहीं की.

मेरी चीख रोने में बदल गयी.मेरी आँखों से आंसूं बहने लगे. मुझे ऐसा लगा जैसे किसीने मेरी गांड के ऊपर चाक़ू चला दिया हो. मैं

सुबक-सुबक कर रो रही थी. बड़े मामा बेदर्दी से मेरी गांड में अपने अमानवीय विशाल लंड की एक इंच के बाद दूसरी इंच मेरी दर्द से

बिलखती गांड की गहराइयों में डालते रहे जब तक उनके पेड़ के तने जितना मोटा लंड जड़ तक मेरी गांड में नहीं समा गया.

मेरी गांड में उठे भयंकर दर्द से से बिलबिला उठी. मेरा शरीर पानी से बाहर फिकी मछली के समान तड़प रहा था. बड़े मामा के

विशाल भारी शरीर ने मेरे थरथराते हुए नाबालिग शरीर को अपने नीचे कस दबा लिया. मैं सुबकियां और हिचकी मार मार कर रो रही

थी.

“नहीं…नहीं…बड़े..मा..आ..मा..मेरी गांड फट गयी..ई…अपना लंड बाहर निका..आ..ल..लिजी ..आ..आ..ये. मैं मर जाऊंगी ,

मामाजी,” मैं सुबक सुबक कर हिचकियों के बीच में से बड़ी मुश्किल से बोल पा रही थी, “मुझे हुंह ….नहीं आन्नंह ….मरवानी

….अपनी गांड।”

बड़े मामा ने अपने मुंह से मेरा मुंह दबोच लिया. मामाजी ने बेदर्दी से मेरे रोने की उपेक्षा कर मेरी गांड अपने लंड से मारने लगे.

मेरी घुटी-घुटी चीखों और सिस्कारियों कमरे की दीवारों से टकरा कर मेरे कानों में गूँज रहीं थी. बड़े मामा ने अपने विशाल लंड की आधी

लम्बाई अंदर बाहर कर मेरी गांड की चुदाई शुरू कर दी.

बड़े मामा की बेरहमी ने मुझे दर्द से व्याकुल कर दिया। मेरे आंसूओं ने मेरे चेहरे को बिलकुल भिगो दिया।

मुझे पता नहीं की कितनी देर तक मैं रो रो कर अपनी गांड फटने की दुहाई देती रही पर बड़े मामा का विशाल लंड मेरी मेरी गांड को

निरंतर चोदता रहा.

मेरे आंसूओं ने मेरा चेहरा गीला कर दिया. थोड़ी देर में मेरी नाक बहने लगी. मेरी सुबकिया मेरे दर्द की कहानी सुना रहीं थीं। बड़े मामा ने

मेरा मुंह अभी भी अपने मुंह से दबा रखा था.

बड़े मामा ने मेरी गांड मारना एक क्षण के लिए भी बंद नहीं किया. मैं न जाने कितनी देर तक दर्द से बिलबिलाती हुई बड़े मामा के

विशाल शरीर के नीचे दबी सुबकती रही।

मुझे लगा कि एक जनम जितने समय के बाद मेरी सुबकियां थोड़ी हल्की होने लगीं। मुझे बड़ी देर लगी समझने में कि मैंने

रोना बंद कर दिया था। मेरा हिचकियाँ ले कर सुबकना भी बंद हो गया था।

जब बड़े मामा को लगा िक मैंने रोना बंद कर दिया था तो उन्होंने मेरा मुंह मुक्त कर मेरे आंसू और नाक से गंदे चेहरे को चाट

कर साफ़ करने लगे. बड़े मामा की जीभ मेरी नाक के अंदर समा गयी. बड़े मामा का लंड अभी भी मेरी गांड के अंदर-बाहर जा रहा था.

मुझे विश्वास नहीं हुआ कि मेरी गांड अब बड़े मामा के लंड को बिना तीव्र पीढ़ा के संभाल रही थी. बड़े मामा ने मेरी नाक को अपने मूंह

में भर कर ज़ोर से चूसा.

मामाजी ने मेरे दोनों नथुनों में अपने जीभ अंदर डाल कर मुझे हंसा दिया.

“नेहा बेटा, अब कितना दर्द हो रहा है?” बड़े मामा ने चेहरे पर शैतानी भरी मुस्कान थी.

मैं शर्मा गयी, “बड़े मामा मेरी गांड में बहुत दर्द हो रहा था. आप कितने बेदर्द हैं. एक क्षण भी आप ने अपना लंड को मेरी गांड मारने से

नहीं रोका.”

“नेहा बेटा, ऐसा दर्द तो सिर्फ पहली बार ही होता है. मुझे लगा कि जितनी जल्दी आपकी गांड मेरे लंड की आदी हो जाये आपका दर्द

उतनी ही जल्दी कम हो जाएगा.” बड़े मामा ने प्यार से मेरी नाक की नोक को अपने दाँतों से काटा.

मैंने बड़े मामा की बाँहों पर गहरे खरोंचो को प्यार से चूम कर खून चाट लिया, “सॉरी मामाजी, मैंने आपके बाहें खरोंच डाली.” बड़े

मामा ने मुस्कुरा कर मुझे प्यार से चूम लिया।

बड़े मामा ने मुझे चूम कर मेरी गांड मारनी शुरू कर दी. मेरी गांड अब बड़े मामा के विशाल लंड के अनुकूल रूप से चौड़ गयी थी.

उनका अमानवीय लंड मेरी गांड के छेड़ को रगड़ कर अंडर बाहर जा रहा था। मेरे गांड मानों सुन्न हो चुकी थी। मेरी गांड का दर्द पूरा

तो ठीक नहीं हुआ पर मुझे अब उस दर्द से कोई बहुत परेशानी नहीं हो रही थी। बड़े मामा ने अपने भीमाकार लंड को अविरत मेरी गांड

के भीतर-बाहर करते रहे। मामू मेरी गांड को अपने लंड से बहुत जल्दी परिचित कराने के लिये उत्सुक थे।

बड़े मामा ने अपने भारीभरकम कूल्हों का इस्तमाल कर अपनी कच्ची भांजी की गांड का मरदन निर्ममता से करना शुरू कर

दिया। बड़े मामा अपने वृहत्काय लंड के सुपाड़े को छोड़ कर पूरा बाहर निकालने के बाद एक भीषण धक्के से उसे वापस मेरी गांड में

ठूंस रहे थे। उनके जोरदार धक्कों से मेरी पूरा शरीर हिल रहा था। मेरी सिसकियाँ उनके मुंह में संगीत सा बजा रहीं थी।

मैं अपनी गांड में बड़े मामा के लंड के हर धक्के को अपनी सिसकारी से स्वागत कर रही थी. बड़े मामा ने मेरी गांड की

चुदाई के गति बड़ा दी. बड़े मामा अपना लंड सिवाय मोटे सुपाड़े को छोड़ कर पूरा बाहर निकाल कर एक भयंकर ठोकर से मेरी गांड

की भीतरी गहराइयों में ठूंस रहे थे. कमरे की हवा मेरी गांड की मधहोश सुगंध से भर गयी. बड़े मामा का लंड मेरी गांड को चौड़ा कर

आराम से अंदर बाहर जा रहा था. बड़े मामा ने मेरे दोनों चूचियों को मसलना शुरू कर दिया.

मेरी सिस्कारियां अब अविरत मेरे मूंह से उबल रहीं थीं.बड़े मामा का लंड डेढ़ घंटे से मेरी गांड मार रहा था. अचानक मेरी सिसकारी

मेरे दर्द भरे यौन चरमोत्कर्ष के तूफ़ान से और भी ऊंची हो गयी. बड़े मामा का वृहत्काय लंड अब मेरी गांड में रेल के इंजन की गति से

अंदर बाहर हो रहा था. बड़े मामा ने मेरे दोनों उरोज़ों को बेदर्दी से मसल कर अपना लंड मेरी गांड में जड़ तक अंदर दबा कर मेरे

ऊपर लेट गए. मैंने अपनी गुदाज़ गोल जांघें बड़े मामा की कमर इर्दगिर्द डाल कर अपनी एड़ियां मामाजी के विशाल कूल्हों पर कस

कर दबा दीं.

बड़े मामा ने मेरे मुंह को चूमते हुए मेरी गांड मारना फिर से शुरू कर दिया. बड़े मामा का लंड ने मेरी गांड को फिर से

मथ कर मेरे दुसरे कामोन्माद को परवान चड़ा दिया. बड़े मामा और मैं एक साथ अपने आनंद की पराकाष्ठा पर पहुँच गए.

मेरा सारा शरीर कामुकता की मदहोशी में अकड़ गया. बड़े मामा का लंड मेरी गांड में झटके मार-मार कर स्खलित होने

लगा. मेरी आँखे मादक चरम-आनंद की उन्मत्तता से बंद हो गयीं. बड़े मामा और मैं बड़ी देर तक अपने यौन स्खलन के

आनंद से एक दुसरे की बाँहों में लेते रहे.

आखिरकार बड़े मामा ने अपना मुश्किल से थोड़ा नरम हुए लंड को मेरी अत्यंत चौड़ी हुई गांड में से निकाल कर मेरी

गांड चाटने लगे. मेरे नथुने मेरी गांड की खुशबू से भर गए. बड़े मामा ने प्यार मेरी सूजी गांड को चाट कर साफ़ किया.

मामाजी की जीभ मेरी बेदर्दी से चुदी थोड़ी ढीली खुली गांड में आसानी से अंदर चली गयी. मेरी गांड साफ़ कर बड़े मामा

बोले, “नेहा बेटा, अब हम आपकी गांड पीछे से मारेंगें.” मैं अब गांड मारने के आनंद की कामुकता से प्रभावित हो गयी थी.

मैं पलट कर घोड़ी की तरह अपने हाथों और घुटनों पर हो गयी. बड़े मामा का तना हुआ लंड मेरी गांड के मल

के लेप से भूरे रंग का हो गया था. मैंने जल्दी से बड़े मामा के लंड तो अपने मूंह और जीभ से चाट कर साफ़ किया. मुझे

अपनी गांड और बड़े मामा के वीर्य का मिला-जुला का स्वाद अत्यंत अच्छा लगा.

बड़े मामा ने अपना लंड मेरी गांड में पीछे से हौले-हौले अंदर डाल दिया. मेरी गांड इतनी देर में फिर से तंग हो गयी थी.

पर मुझे इस बार बहुत थोड़ा दर्द हुआ. बड़े मामा ने मेरी गांड शीघ्र तेज़ी से चोदना शुरू कर दिया. हमारा कमरा मामा और

भांजी के बीच अवैध अगम्यागमन गांड-चुदाई से उपजी मेरी सिस्कारियों से भर गया.

बड़े मामा के हर भीषण धक्के से मेरा शरीर फिर से कांप उठा। उनकी बलवान मांसल झांगें हर धक्के के अंत में मेरे कोमल

मुलायम भरे भरे चूतड़ों से टकरा रहीं थीं। हमारे शरीर के टकराने की आवाज़ कमरे में ‘ थप्पड़ ‘ की तरह गूँज रही थी।

बड़े मामा ने मेरी गांड की चुदाई पहली बार की तरह बेदर्दी से की. मुझे पांच बार झाड़ कर बड़े मामा दूसरी बार मेरी गांड

में स्खलित हो गए. मामाजी का गरम गाड़ा वीर्य मेरी गांड की नाज़ुक दीवारों से टकरा कर मेरी गांड में मथे हुए मल के

साथ मिल गया.

बड़े मामा मेरी गांड से अभी भी संतुष्ट नहीं हुए थे. उन्होंने अपना मेरे मल से रंगा हुआ गन्दा लंड मेरे मूंह से साफ़ कराया

और एक बार फिर मेरी गांड के मंथन के लिए तैयार हो गए. उस रात बड़े मामा के स्थूल विशाल लंड ने मेरी गांड तीन बार

और मारी. मैं बड़े मामा के साथ लम्बी रतिक्रिया में बार बार झड़ने की मदहोशी से बेहोशी की अवस्था में पहुँच गयी.

मैं अपने निरंतर रति-निष्पत्ति की गिनती भी नहीं रख पाई. बड़े मामा ने मेरी गांड पांचवी बार अपने जनन-क्षम वीर्य से भर

दी. मैं बिकुल थक कर चूर हो गयी थी. बड़े मामा मेरी गांड चार घंटों से मथ रहे थे.

मैंने बड़े मामा के मुंह और गालों को प्यार से चूम चूम कर गीला कर दिया. बड़े मामा ने अपना लंड मेरी गांड से बाहर

निकाल लिया. मुझे लगा जैसे मेरा पखाना निकलने वाला था, “बड़े मामा मुझे शौचालय जाना है. आपके लंड ने मेरी टट्टी

मथ दी. मैं उसे अब रोक नहीं पा रही.”

“नेहा बेटा, गांड मरवाने के बाद ऐसा लगता है पर फ़िक्र नहीं करो कुछ बाहर नहीं निकलेगा,” बड़े मामा ने अपने अनुभव से

मुझे आश्वासन दिया, पर मेरी गुदा में बड़ते दबाव ने मेरे संयम को हरा दिया.

बड़े मामा ने हँसते हुए मुझे बाँहों में भर कर शौचालय में ले गए. बड़े मामा ने मुझे कमोड [शौचासन] के ऊपर बैठाने के

बजाय मुझे नहाने के टब में ले गए. बड़े मामा ने मुझे आगे झुका कर मेरी गुदाज़ चूतड़ों को चौड़ा कर अपना मुंह मेरी गांड

से लगा दिया.

“मामाजी मेरी गांड खुलने वाली है, प्लीज़ मुझे शौचासन पर जाने दीजिये,” मैंने बड़े मामा से अनुरोध किया.

“नेहा बेटा, अपनी बेटी की पहली बार गांड मारने के प्रसाद को हम हाथ से नहीं निकलने देंगें.”

“बड़े मामा पता नहीं मेरी गांड से क्या निकल जाये?” बड़े मामा की मेरी गांड के मंथन के फल को चखने की कामुक इच्छा

ने मुझे भी मदहोश कर दिया.

मैंने अपनी गांड को ढीला कर दिया. मेरी गुदा से मामाजी का गाड़ा जनन-क्षम वीर्य और मेरे मथे मल का मिश्रण फिसल

कर कर मामाजी के मुंह में टपकने लगा. मेरी मलाशय की सुगंध सारे स्नानगृह में समा गयी. मैंने ज़ोर लगा कर अपने

मलाशय के भीतर जमे मिश्रण को मामाजी के आनंद के लिए निकालने का प्रयास करने लगी. मेरे ज़ोर लगाने से मेरा पाद

निकल गया. मैं शर्मा कर दबी हंसी से बोली, “सॉरी मामाजी.”

बड़े मामा ने मेरी गांड को चूम कर मुझे आश्वासित किया. मेरी गांड से अचानक गीले मल और वीर्य मिश्रण के अलावा कुछ

ठोस पदार्थ भी फिसल कर बड़े मामा के मुंह में टपक गया. बड़े मामा ने उसे भी बेसब्री और क्षुधातुर प्रकार से स्वीकार

किया.

बड़े मामा ने अपना मुंह मुझे सीधा करके मेरी चूत पर लगा कर मेरे मूत्र की मांग की. मैंने अपना पेशाब धीरे-धीरे बड़े

मामा के मुंह में बहने दिया. बड़े मामा ने मेरा मूत्र प्यार से पी लिया.

मैं उसके बाद शौचासन पर बैठ कर ठीक से अपना मलाशय खोल दिया. बड़े मामा का मेरे मल से सना लंड मेरे मूंह के

सामने था. मैंने मामाजी का लंड चूस, चाट कर साफ़ कर दिया. मुझे अपने मल का स्वाद बड़े मामा के वीर्य से मिश्रित और

भी स्वादिष्ट लगा.

मैंने बड़े मामा की ओर प्रत्याशा से देखा, बड़े मामा ने मेरा आश्रय समझ गए. बड़े मामा ने अपने शिथिल पर भारी लंड के

सुपाड़े को मेरे खुले मुंह में डाल कर अपना मूत्र हौले-हौले खोलने लगे. मामाजी का मूत्र तीखा पर बहुत स्वादिष्ट था. बड़े

मामा ने अपने पेशाब की धारा को नियंत्रित प्रकार से मेरे मुंह में प्रवाहित किया. मामाजी मुझे अपने मुंह में भरे पेशाब को

पीने का समय देकर फिर से मेरा मुंह अपने मूत्र से भर देते थे. बड़े मामा का लंड जब तक मैंने उनका पूरा मूत पिया

लगभग पूरा सख्त हो गया था.

जब मैंने अपना मलोत्सर्ग समाप्त कर दिया तो मामाजी ने मुझे उठा कर शौचासन के कुंड पर हाथ रख कर आगे झुका दिया.

मेरा मूंह मेरे अपने मल से भरे कमोड के ठीक ऊपर था. बड़े मामा ने पहले मेरी गांड चाट कर साफ़ की फिर मुझसे पूछा,”नेहा

बेटा, पहले क्या मरवानी है- चूत या गांड?”

मैं तो अब बड़े मामा के महाकाय विशाल अतृप्य लंड की दीवानी हो गयी थी, “बड़े मामा आज आपने मेरी चूत बिलकुल भी नहीं

मारी. पहले चूत मारिये, प्लीज़,” मैंने मामाजी से अनुरोध किया.

बड़े मामा ने अपना विशाल स्थूल लंड मेरी चूत में चार भयंकर धक्कों से जड़ तक ठूंस दिया. मेरे गले से स्वतः चीख निकल पड़ी.

शीघ्र ही बड़े मामा का विकराल लंड मेरी रति-रस से भरी मखमली चूत में वैद्युत मूसल की भांति मेरी चूत की गहरायी नापने लगा ।

मेरी काम वासना से भरी सिस्कारियां स्नानगृह में गूँज उठीं । बड़े मामा का लंड ‘चपक-चपक’ की आवाजें बनाते हुए मेरी चूत का

प्यार भरा मर्दन करने लगा। मैंने अपने सूजे होंठ को चबा कर अपनी सिस्कारियों को दबाने का निष्फल प्रयास करने के बाद खुल

कर ऊंचीं ऊंचीं सीत्कारियां से मामाजी को मेरी चूत निर्मम प्राहरों से मारने के लिए उत्साहित कर दिया ।

बड़े मामा ने मेरी चूत मार कर मुझे तीन बार झाड़ दिया. मैं अपने आखिरी रति-निष्पत्ति से अभी संभल भी नहीं पाई थी कि बड़े मामा

ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकल कर मेरी गांड के छोटे तंग छल्ले पर रख कर अंदर दबा दिया.

जैसे ही मेरा गुदा-द्वार बड़े मामा के विशाल लंड के सेब सामान मोटे सुपाड़े के अकार के अनुरूप चौड़ा हुआ हुआ तो मेरी दर्द से भरी

चीत्कार स्नानगृह में गूँज उठी. पर बड़े मामा ने पहले के अनुभव से मेरी चीत्कार की उपेक्षा कर मेरी गांड में अपना लंड तीन लम्बी

विध्वंसक धक्कों से जड़ तक डाल दिया. बड़े मामा ने मेरी गांड का मंथन एक बार शुरू किया तो डेढ़ घंटे तक निरंतर मेरे गुदाभंजन

से मुझे बिलकुल पस्त कर दिया.

बड़े मामा और मेरा गुदामैथुन मेरी बेहोशी की अवस्था में समाप्त हुआ. मेरे अनगिनत यौन-चरमोत्कर्ष ने मुझे निढाल कर दिया. बड़े

मामा ने मेरी गांड में अपना लंड खोल दिया. यदि बड़े मामा ने मुझे नहीं सम्भाला होता तो मैं शौचासन पर गिर जाती, बड़े मामा के

साथ अवैध कौटुंबिक व्यभिचार के आधिक्य ने मुझे मदहोश कर दिया. मुझे याद नहीं कि कब बड़े मामा ने अपना स्खलित लंड मेरी

दुखती गांड में से बाहर निकाला, कब मुझे अपनी बाँहों में उठा कर बिस्तर में ले गए.

बड़े मामा और मैं देर रात को अचानक गहरी नींद से उठ गए. बड़े मामा का लंड चुदाई के लिए तैयार तना हुआ खड़ा था. मैं अभी

नींद में थी पर बड़े मामा ने मेरे ऊपर चढ़ कर मेरी चूत में अपना लंड तीन-चार धक्कों में पूरा अंदर डाल कर मेरी चूत को आधे घंटे

तक चोद कर तीन बार झाड़ दिया. हम दोनों उसके बाद देर सुबह तक सोते रहे.

हम दोनों को जानकी दीदी ने उठाया, “नेहा, चाचू. चलो दोनों उठो. सारे नौकर घर में हैं. कमरे की सफाई करने के लिए मैंने

उन्हें रोका कि आप दोनों अपने कमरों में सो रहे होंगे. चलिए दोनों तैयार हो जाइये. मैं कमरा और बिस्तर साफ़ कर देतीं हूँ,”

जानकी दीदी ने चादर पर लगे भूरे दागों को देख कर हम दोनों* चिड़ाया, “चाचू लगता है आपने कल रात नेहा की गांड की अच्छे

से सेवा की!”

मैं शर्मा गयी. बड़े मामा ने जानकी दीदी को बाँहों में भर कर चूमा और फिर शैतानी से उनके दोनों विशाल नर्म*उरोज़ों को कस कर

मसल दिया. जानकी दीदी चीख कर बड़े मामा की बाँहों से निकल गयीं.

बड़े मामा ने हँसते हुए मुझे अपनी बाँहों में उठा कर स्नानगृह की तरफ चल दिए, “जानकी बेटी, यदि आपकी चूत और गांड

खुजलाने लगे तो स्नानगृह खुला है.”

“इस बार आप सिर्फ नेहा की सेवा करें. पापा* के लंड ने कल रात मेरी दोनों छेदों की तौबा मचा दी.” जानकी दीदी ने इठला कर

कहा.

मेरे मूंह खुला का खुला रह गया. जानकी दीदी और उनके पिताजी, गंगा बाबा भी कौटुम्बिक व्यभिचार में संलग्न थे.

बड़े मामा ने मुझे दोनों की कहानी, जब मैं उनका सुबह सवेरे का ताज़ा पेशाब पी रही थी, सुनाई. बड़े मामा को जानकी दीदी ने इस

घटना को पूरे विस्तार से सुनाया था.
गंगा बाबा की पत्नी का देहांत १२ साल पहले हो गया. जानकी सिर्फ दस साल की थी. जानकी का शारीरिक विकास अत्यंत

कालपूर्व हो रहा था.उस उम्र में भी उनका वक्षस्थल किसी पन्द्रह साल की लड़की के सामान गर्व से उनके ब्लाउज़ को भर देता था.

गंगा बाबा और जानकी एक दुसरे के बहुत नज़दीक और संलग्न थे. बाप बेटी का रिश्ता इस दुःखद घटना के बाद, गंगा बाबा के

शोक में डूब गया.

जानकी अपने पिता को हर दिन ज्यादा शराब पीते देखती. तीन साल तक गंगा बाबा अपने विधुर्ता के दुःख में भूल गए कि उनकी

बेटी का शोक अपनी माँ को खोने में उतना ही दुःख दाई था. जानकी के धैर्य ने अस्त्र फैंक दिये । अत्यंत में हार मान

कर जानकी ने मेरे मम्मी से अपना दर्द बांटा.

एक रात को जब गंगा बाबा ने काफी शराब पी रखी थी तब जानकी अपनी मम्मी की साड़ी में अपने पिता जी के कमरे गयीं.

गंगा बाबा नशे में अपनी सुंदर अर्धांग्नी को देख कर पागल हो गए. गंगा बाबा ने जानकी के कपडे फाड़ कर उन्हें बिस्तर पर पटक

दिया. गंगा बाबा ने अपने विशाल स्थूल लंड से जानकी की कुंवारी चूत की बेदर्दी से चुदाई की. गंगा बाबा ने जानकी को उस रात

चार बार चोद कर बेहोश कर दिया. सुबह जब दोनों पिता-पुत्री जगे तो गंगा बाबा को समझने में कुछ देर नहीं लगी कि उनकी

प्यारी इकलौती बेटी उन्हें कितना प्यार करती है.

अपने पिता के महाकाय लंड से चुदवाने के बाद जानकी दीदी और उनका प्यार अपने पिता की तरफ और भी मज़बूत हो गया. तब

से दोनों बाप-बेटी रोज़ अगम्यगामी रतिक्रिया के सुख में डूबे रहते थे.

गंगा बाबा ने समाज की फ़िक्र से जानकी दीद का विवाह एक साल पहले एक अमीर घर में कर दिया. पर कुछ महीनों के बाद

सब को साफ़ हो गया कि जानकी का पति आलसी और निकम्बा था. जानकी की तरफ उसका व्यवहार भी अस्वीकार्य था. तब से

जानकी दीदी सिर्फ नाम के लिए विवाहित थीं.

बड़े मामा ने समाप्ती में कहा, “मैंने दोनों को सलाह दी है कि इस विवाह के नाटक में छुप कर दोनों अपना परिवार शुरू कर

सकते हैं. फिर जानकी अपने पति से कानूनी तौर से अलग हो सकती है. उनके लिए इस घर से जुड़ा ५ शयनकक्ष का घर बना

तैयार है.”

मैंने बड़े मामा के लंड तो चूस कर साफ़ कर दिया. बड़े मामा ने मेरा मूत्र्पान किया. बड़े मामा ने मेरी स्नान के बीच एक बार

फिर से मनमोहक पर भयंकर चुदाई की.

नाश्ते के बाद बड़े मामा और मैं झील की तरफ घूमने चल दिए. मुझे सारी रात और सुबह चोद कर भी बे मामा का मन नहीं

भरा था। उन्होंने झील के किनारे की सैर के बीच मुझे तीन बार और चोदा।

गंगा बाबा ने सुरेश अंकल और नम्रता चाची के आगमन की इत्तिला दी.

अंकल आंटी कमरे में अपने कपडे अलमारी में रख रहे थे. सुरेश शर्मा अंकल ६ फुट ऊंचे ४९ साल के बहुत मोटे मर्द थे. उनकी

तोंद का मज़ाक हम सब लोग बनाते थे. नम्रता शर्मा आंटी भी , ५’५” के ४५ साल की उम्र की, थोड़ी मोटी स्त्री थीं.उनका गदराया

हुए शरीर और अत्यंत सुंदर चेहेरा किसी भी मर्द को आकर्षित कर सकता था.

मैं खुशी से चीख कर दौड़ कर सुरेश अंकल की खुली बाँहों में समा गयी. अंकल ने मुझे बाँहों में उठा कर मेरा मूंह चुम्बनों से भर

दिया.

बड़े मामा ने आंटी को गले लगाया,”नम्रता भाभी आप हमेशा की तरह किसी अप्सरा जैसी सुंदर लग रहीं है.”

आंटी शर्म से लाल हो गयीं, ” रवि भैया आप तो मेरी प्रशंसा बस अपने प्यार के वजह से करते हैं.”

मैंने खुशी से किलकारी मारते हुए आंटी के आलिंगन में समा गयी. आंटी ने मेरे चेहरे को चूम चूम कर गीला कर दिया, फिर मेरे

कान में फुसफुसा कर पूछा, “नेहा बेटी, रवि भैया ने तुम्हारी चूत की पूरी देखबाल की ना? मैं तो तुम्हे बिस्तर में कराहते हुए देखने

की अपेक्षा कर रही थी.” मैं शर्म से लाल हो गयी. अंकल आंटी दोनों को बड़े मामा और मेरे कौटुम्बिक व्यभिचार के बारे में पता

था.

मैंने शरमाते हुए पर इठला कर कहा कहा,”आंटी बड़े मामा ने हमें बहुत बेदर्दी से चोदा है.”

“रवि भैया, नेहा बेटी पर थोड़ा तो रहम करना था ना. अभी बेचारी कमसिन है और आपका लंड घोड़े से भी बड़ा है,” नम्रता आंटी

ने बड़े मामा को प्यार से धक्का दिया, “पर नेहा बेटी अब आप किसी भी लंड से चुदवाने के लिए तैयार हो.” मैं शर्मा गयी.

“नम्रता भाभी, नेहा बेटी ने हमसे कोई शिकायत नहीं की.” बड़े मामा ने मुझे अपनी बाँहों में भर कर प्यार से चूमा.

सुरेश अंकल ने बड़े मामा की तरफदारी की, “नेहा बेटी आप जैसी अप्सरा सुन्दरी का कौमार्य-भंग कर स्त्री बनाना कोई आसान

काम नहीं है. मुझे विश्वास है कि रवि ने ज़रुरत से ज्यादा दर्द नहीं किया होगा.”

“सुरेश अंकल आप बड़े मामा की तरफदारी क्यों कर रहें है. आंटी आप अंकल को कहें ना?” मैंने प्यार से अंकल के पेट में घूँसा

मारा. अंकल ने मुझे हंस कर गले से लगा लिया.

“नेहा बेटी, लगता है तुम्हारे अंकल तुम्हारी चूत में घुसने की योजना बना रहे है. इस लिए वो तुम्हारे दर्द को नज़रंदाज़ करने के

कोशिश कर रहें है. ये भी रवि भैया के साथ मिल गए हैं.” नम्रता आंटी बड़े मामा की बाँहों में समा कर बोलीं.

मैंने शर्मा कर अपना मुंह अंकल के सीने में छुपा लिया.मुझे बड़े मामा पर तरस आ गया.

मैंने अंकल के सीने से लगे हुए कहा, “नहीं मेरे बड़े मामा ने मेरी चुदाई बहुत अच्छे से की है. आंटी आप उनको कुछ नहीं कहें.”

“देखा भाभी नेहा बेटी ने मुझे माफ़ कर दिया है,” बड़े मामा ठहाका लगा कर हंस दिए.

बड़े मामा ने हम सबके सामने नम्रता आंटी को प्यार से चूम लिया.

“रवि भैया,आज सिर्फ चुम्बन से काम नहीं चलेगा. मुझे आप से एक चुम्बन से बहुत ज़्यादा चाहिए.” आंटी ने बड़े मामा की चौड़ी

कमर के इर्द-गिर्द बाहें डाल कर उनसे कस कर लिपट गयीं.

बड़े मामा ने अपने विशाल हाथों में आंटी के बड़े-बड़े गुदाज़ चूतड़ों को भर कर जोर से मसला और कहा, “भाभी, हम तो आप के

देवी जैसे सौन्दर्य की सेवा करने के लिए तैयार हैं यदि सुरेश और नेहा को कोई आपत्ती नहीं हो तो.”

अंकल ने मेरी तरफ देखा. मैंने शर्म से लाल अपना मुंह अंकल के सीने में फिर से छुपा लिया और सिर्फ अपना सर हिला कर अनुमति दे दी.

हम सब भोजन कक्ष की तरफ चल पड़े. अंकल-आंटी गंगा बाबा और जानकी दीदी से गले मिले.

“आंटी, यदि आप एक दिन और रुक सकते हों तो रुक जाइये,” जानकी दीदी ने आंटी से अनुरोध किया.

अंकल ने जल्दी से सिर हिला कर आंटी को अपनी अनुमती देदी. आंटी ने भी हामी भर कर जानकी के चेहरा खुशी से भर दिया.

खाना ख़त्म होते ही गंगा बाबा ने सब नौकरों को विदा कर दिया. हम सब मदिरापान करने बैठक में चले गए. दो गिलास मदिरा के बाद गंगा बाबा ने जानकी की बाजू पकड़ कर उठाया और विदा मांगी.

“जानकी, लगता है आज रात तुम्हारी चूत की खैर नहीं है. गंगा, की बेसब्री छुप नहीं पा रही”. आंटी ने जानकी की चुटकी ली.

जानकी शर्मा कर लाल हो गयी,”पापा तो रोज़ मेरी हालत बुरी कर देतें है.पर मुझे भी उनके बिना चैन नहीं पड़ता.”

हम सब हंस दिए और दोनों को शुभ-रात्री की कामना के साथ विदा किया.

अंकल ‘सुधा’ के कौटुम्बिक-व्यभिचार के दूसरी किश्त ले कर आये थे. हम सब चलचित्र-गृह की तरफ चल दिए. बड़े मामा ने

नम्रता आंटी का हाथ खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया. आंटी ने भी अपनी बाहें बड़े मामा की गर्दन पर दाल दीं

मैं बड़े मामा और आंटी के बीच खुली संभोग पूर्व क्रीड़ा से प्रभावित हो गयी. जब अंकल ने मेरा हाथ पकड़ा तो मै स्वतः उनकी

गोद में समा गयी. अंकल ने रिमोट से फिल्म शुरू कर दी.

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