परिवार नेहा का part 6

बड़े मामा ने मुझे गुड़िया जैसे उठा कर कहा, ” नेहा बेटा, अब हम तुम्हारी चूत पीछे से मारेंगें.”

मैं बड़े मामा के महाविशाल लंड और अपनी चूत में से बहे खून को देख कर काफी असहाय महसूस करने लगी और बड़े मामा की शक्तिशाली मर्द सत्ता के प्रभाव में

उनकी हर इच्छा का पालन करने को इच्छुक थी. मेरी दृष्टी सफ़ेद चादर पर फैले गाड़े लाल रंग के बड़े दाग पर पड़ी. पता नहीं क्या मेरी चूत वाकई फट गयी थी?

इतना खून कहाँ से निकला होगा?

बड़े मामा ने मुझे घोड़े की मुद्रा में मोड़ कर स्थिर कर के मेरे फूले, मुलायम चूतड़ों के पीछे खड़े हो गए.

बड़े मामा ने अपना विशाल लंड तीन चार धक्कों में पूरा मेरी चूत में फिर से घुसेड़ दिया. मेरे मुंह से सिसकारी निकल पडीं , “धीरे बड़े मामा, धीरे. आपका लंड

बहुत बड़ा है,” मैंने अपने होंठ अपने दातों में दबा लिए वरना मेरी चीख निकल जाती.

“नेहा बेटा, अब तो तुम्हारी चूत दनदना कर मारूंगा. तुम्हारी कोमल चूत अब खुल गयी है.” बड़े मामा ने मेरी धीरे चूत मारने की प्रार्थना की खुले रूप से

उपेक्षा कर दी.

बड़े मामा ने अपने हाथों से मेरी गुदाज़ कमर को स्थिर कर अपने लंड से मेरी चूत मारना प्रारंभ कर दिया. इस बार बड़े मामा ने लंड दस-बारह

ठोकरों के बाद बाद मेरी चूत में अपना लंड से सटासट तेज़ और ज़ोर से धक्के मारने लगे. मेरी सांस अनियमित और भारी हो गयी. मेरी सिस्कारियों से कमरा गूँज

उठा. बड़े मामा की शक्तिशाली कमर की मांसपेशियां उनके विशाल लंड को मेरी चूत में उनका लंड बहुत ताकत से धकेल रहीं थी. बड़े मामा के लंड का हर धक्का

मेरे पूरे शरीर को हिला रहा था. मेरी नीचे लटकी बड़ी चूचियां बुरी तरह से आगे पीछे हिल रही थीं.

“आह, मामाजी, मुझे चोदिये. अँ…अँ..ऊं..ऊं..उह ..उह..और चोदिये बड़े मामा. मेरी चूत में अपना लंड ज़ोर से डालिए. मेरी चूत झाड़ दीजिये,” मेरे

मूंह से वासना के प्रभाव में अश्लील शब्द अपने आप निकल आकर बड़े मामा को और ज़ोर से चूत मारने को उत्साहित करने लगे.

बड़े मामा ने कभी बहुत तेज़ छोटे धक्कों से, और कभी पूरे लंड के ताकतवर लम्बे बेदर्द धक्कों से मेरी चूत का निरंतर मंथन अगले एक घंटे तक किया. मैं

कम से कम दस बार झड़ चुकी थी तब बड़े मामा ने मेरी चूत में अपना लंड दूसरी बार खोल कर वीर्य स्खलन कर दिया. दूसरी बार भी बड़े मामा के वीर्य की मात्रा

अमानवीय प्रचुर थी.

मैं बहुविध रति-निष्पत्ति से थकी अवस्था में बड़े मामा की आखिरी ठोकर को सह नहीं पाई और मैं मूंह और पेट के बल बिस्तर पर गिर पडी. बड़े मामा

का लंड मेरी चूत से बाहर निकल गया.

मुझे बड़े मामा के मुंह से मनोरथ भंग होने की कुंठा से गुर्राहट निकलती सुनाई पड़ी. बड़े मामा अब अपनी कामवासना से अभिभूत थे और उनकी

बेटी समान भांजी का किशोर नाबालिग शरीर उनकी भूख मिटाने के लिए ज़रूरी और उनके सामने हाज़िर था.

बड़े मामा ने बड़ी बेसब्री से मुझे पीठ पर पलट चित कर दिया. मेरी उखड़ी साँसे मेरे सीने और उरोज़ों से ऊपर को नीचे कर रहीं थी.

बड़े मामा ने मेरी दोनों टांगों को मेरी चूचियों की तरफ ऊपर धकेल दिया. मैं अब लगभग दोहरी लेटी हुए थी. बड़े मामा ने अपना अतृप्य स्पात के

समान सख्त विशाल लंड मेरी खुली चूत में तीन धक्कों से पूरा अंदर डाल कर वहशी अंदाज़ में चोदने लगे. बड़े मामा ने मेरी चूत को बेदर्दी से भयंकर ताकत भरे

धक्कों से चोदना शुरू कर दिया. बड़े मामा मानो मेरी कुंवारी, नाज़ुक चूत का लतमर्दन से विध्वंस करने का निश्चय कर चुके थे. मेरी सिस्कारियां और बड़े

मामा की जांघों के मेरे चूतड़ों पर हर धक्के के थप्पड़ जैसी टक्कर की आवाज़ से कमरा गूँज उठा.

बड़े मामा ने मेरे दोनों उरोज़ों को अपने हाथों में ले कर मसल-मसल कर बुरा हाल कर दिया. मुझे अपनी चड़ती वासना के ज्वार में समझ कुछ

नहीं आ रहा था कि कहाँ बड़े मामा मुझे ज्यादा दर्द कर रहे थे – अपने महाकाय लंड से मेरी चूत में या अपने हाथों से बेदर्दी से मसल कर मेरी चूचियों में.

अब मैं अपने निरंतर, लहर की तरह मेरे शरीर को तोड़ रहे चरम-आनन्द के लिए मैं दोनों पीड़ा का स्वागत कर रही थी.

“बड़े मामा, आपने तो मेरी चूत को आह..बड़े..ऐ..ऐ ..ऐ *मा..मा…मा..मामा..आं..आं..आं..आं..आं. मुझे झाड़ दीजिये.उफ ओह मामा जी

..ई..ई..ई.” मैं हलक फाड़ कर चिल्लाई. मेरे निरंतर रति-स्खलन ने मेरे दिमाग को विचारहीन और निरस्त कर दिया.

मेरा सारा शरीर दर्द भरी मीठी एंठन से जकड़ा हुआ था. बड़े मामा ने एक के बाद एक और भयानक ताक़त से भरे धक्कों से मेरी चूत को

बिना थके और धीमे हुए एक घंटे से भी ऊपर तक चोदते रहे. मैं अनगिनत बार झड़ चुकी थे और मुझ पर रति-निष्पत् के बाद की बेहोशी जैसी स्तिथी व्याप्त होने

लगी. मेरी चूत मेरे मामाजी के विशाल मोटे लंड से घंटों लगातार चुद कर बहुत जलन पर दर्द कर रही थी.

“बड़े मामा, अब मेरी चूत आपका अतिमानव लंड और सहन नहीं कर सकती. मेरे प्यारे मामाजी मेरी चूत में अपना लंड खोल दीजिये. मेरी चूत

को अपने गरम वीर्य से भर दीजिये,” मैं चुदाई की अधिकता भरी मदहोशी में बड़े मामा को चुदाई ख़त्म करने के लिए मनाने लगी. मुझे नहीं लगता था कि मैं काफी

देर तक अपना होश संभाल पाऊँगी.
मेरी थकी विवश आवाज़ और शब्दों ने बड़े मामा की कामेच्छा को आनन्द की पराकाष्ठा तक पहुंचा दिया,”नेहा बेटा,मैं अब तुम्हारी चूत में

झड़ने वाला हूँ,” बड़े मामा ने मेरे चूत का सिर्फ कौमार्य भंग ही नहीं किया था पर उसे अपने विशाल लंड और अमानवीय सहवास संयम-शक्ति से अपना दासी भी

बना लिया था. मैं बड़े मामा से सारी ज़िंदगी चुदवाने के लिए तैयार ही नहीं पर उसके विचार से ही रोमांचित थी.

बड़े मामा ने मेरे चूचियों को बेदार्दी से मसल कर मेरी छाती में ज़ोर से दबा कर अपने भारी मोटे लंड को पूरा बाहर निकाल कर पूरा अंदर तक

बारह-तेरह बार डाल कर मेरे ऊपर अपने पूरे वज़न से गिर पड़े. मेरे फेफड़ों से सारी वायु बाहर निकल पड़ी. उनका लंड मेरे चूत में फट पड़ा. बड़े मामा के

स्खलन ने मेरी चूत में नया रति-स्खलन शुरू कर दिया. मैंने अपने बाहें, ज़ोर-ज़ोर से सांस लेते हुए बड़े मामा की गर्दन के चरों तरफ डाल कर, उनको कस कर

पकड़ लिया. हम दोनों अवैध अगम्यागमन के चरमानंद से मदहोश इकट्ठे झड़ रहे थे.

बड़े मामा मेरी गरदन पर हल्क़े चुम्बन देने लगे. मैंने थके हुए अपने बड़े मामा को वात्सल्य से जकड़ कर अपने से चुपका लिया. मुझे बड़े मामा पर माँ का बेटे के ऊपर जैसा प्यार आ रहा था.

बड़े मामा और मैं उसी अवस्था में एक दूसरे की बाँहों में लिपटे कामंगना की अस्थायी संतुष्टी की थकन से निंद्रा देवी की गोद में सो गए.
मेरे आँख कुछ घंटों में खुली. मैंने अपने को बड़े मामा की मांसल भुजाओं में लिपटा पाया. बड़े मामा अभी भी सो रहे थे. उनके थोड़े से खुले होंठों से गहरी

सांस मेरे मुंह से टकरा रही थी. मुझे बड़े मामा की साँसों की गरमी बड़ी अच्छी लग रही थी. बड़े मामा के नथुने बड़ी गहरी सांस के साथ-साथ फ़ैल जाते थे. बड़े

मामा की गहरी सांस कभी खर्राटों में बदल जाती थी. मुझे बड़े मामा का पुरूषत्व से भरा खूबसूरत चेहरा मुझे पहले से भी ज़्यादा प्यारा लगा, और उनका वोह

चेहरा मेरे दिल में बस गया. मैंने अब आराम से बड़े मामा के वृहत्काय शरीर को प्यार से निरीक्षण किया. मामाजी की घने बालों से ढके चौड़े सीने के बाद उनका

बड़ा सा पेट भी बालों से ढका था. मेरी दृष्टी उनके लंड पर जम गयी. बड़े मामा का लंड शिथिल अवस्था में भी इतना विशाल था की मुझे मामाजी से घंटों चुदने के

बाद भी विश्वास नहीं हुआ की उनका अमानवीय वृहत लंड मेरी चूत में समा गया था. मैं मामाजी के सीने पर अपना चेहरा रख कर उनके ऊपर लेट गयी. बड़े मामा

ने नींद में ही मुझे अपनी बाँहों में पकड़ लिया.

मेरा बच्चों जैसा छोटा हाथ स्वतः मामाजी के मोटे शिथिल लंड पर चला गया. मैंने अपनी ठोढ़ी बड़े मामा जी के सीने पर रख कर उनके प्यारे मूंह को

निहारती, लेटी रही. कुछ ही देर में बड़े मामा का लंड धीरे-धीरे मेरे हाथ के सहलाने से सूज कर सख्त और खड़ा होने लगा. मेरा पूरा हाथ उनके लंड के सिर्फ आधी

परिधी को ही घेर पाता था. बड़े मामा ने नीद में मुझे बाँहों में भरकर अपने ऊपर खींच लिया. मैं हलके से हंसी और बड़े मामा के खुले मुंह को चूम लिया. बड़े

मामा की नीद थोड़ी हल्की होने लगी.

मैंने संतुष्टी से गहरी सांस ली और मामा के बालों से भरे सीने पर अपना चेहरा रख कर आँखे बंद कर ली. मेरा हाथ मामाजी के लंड को निरंतर सहलाता रहा.

शायद मैं फिर से सो गयी थी. मेरी आँख खुली तो बड़े मामा जगे हुए थे और मुझे प्यार से पकड़ कर मेरे मूंह को चूम रहे थे.

“मम्म्मम्म.. बड़े मामा आप तो बहुत थक गए,” मैंने प्यार से मामाजी की नाक को चूमा.

“नेहा बेटा, यह थकान नहीं, अपनी बेटी की चूत मारने के बाद के आनंद और संतुष्टी के घोषणा थी,” बड़े मामा ने हमेशा की तरह मेरे सवाल को मरोड़ दिया.

“अब क्या प्लान है, मामाजी,” मैंने अल्ल्हड़पन से पूछा.

बड़े मामा ने मेरी नाक की नोक की चुटकी लेकर बोले, “पहले नेहा बेटी की चूत मारेंगें, फिर नहा धोकर देर का लंच खायेंगे,” बड़े मामा ने अपने वाक्य के बीच में

मुझे अपने से लिपटा कर करवट बदल कर मेरे ऊपर लेट गए, ” उसके आगे की योजना हम आपके ऊपर छोड़ते हैं.” बड़े मामा ने मेरे खिलखिला कर हँसते हुए मुंह

पर अपना मुंह रख कर मुझे चूमने लगे.

मेरी अपेक्षा अनुसार बड़े मामा ने अपनी टांगों से मेरे दोनों टांगों को अलग कर फैला दिया. मामाजी ने अपना लोहे जैसा कठोड़ लंड मेरी चूत के द्वार पर

टिका कर हलके धक्के से अपना बड़ा सुपाड़ा मेरी चूत के अंदर घुसेड़ दिया. मेरी ऊंची सिसकारी ने बड़े मामा के लंड का मेरी चूत पर सन्निकट हमले की

घोषणा सी कर दी.
बड़े मामा ने दृढ़ता से अपने विशाल लंड को मेरे फड़कती हुई चूत में डाल दिया. मैंने अपने होंठ कस कर दातों में दबा लिए. मुझे आनंदायक आश्चर्य हुआ

की बड़े मामा के हल्लवी मूसल से मुझे सिवाय बर्दाश्त कर सकने वाले दर्द के अलावा जान निकल देने वाली पीड़ा नहीं हुई. मेरी चूत में बड़े मामा के लंड के प्रवेश

ने मेरी वासना की आग को हिमालय की चोटी तक पहुचा दिया.

मेरे बाँहों ने बड़े मामा की गर्दन को जकड़ लिया. मामाजी ने मेरे कोमल कमसिन बदन के ऊपर अपना भारी-भरकम शरीर का पूरा वज़न डाल कर मेरी

चूत की चुदाई शुरू कर दी. बड़े मामा के लंड ने मेरी सिस्कारियों से कमरा भर दिया. बड़े मामा ने मेरी चूत को आधा घंटा अपने मोटे लंड से सटासट धक्कों से

चोदा. मेरी चूत तीन बार झड गयी. बड़े मामा ने आखिर टक्कर से मेर्रे चूत में अपना लंड जड़ तक घुसेड कर मेरी चूत में झड़ गयी. बड़े मामा और में एक दूसरे को

बाँहों में पकड़ कर चुदाई के बाद के आनंद के रसास्वाद से मगन हो गए.

बड़े मामा ने प्यार से मुझे अपनी बाँहों में उठा कर स्नानघर में ले गए.

बड़े मामा जब पेशाब करने खड़े हुए तो मैंने उनका लंड अपने हाथ में लेकर उनकी पेशाब की धार को सब तरफ घुमाते हुए शौचालय में पेशाब कराया.

बड़े मामा का शिथिल लंड भी बहुत भारी और प्यारा था. मैंने उनके भीगे लंड को प्यार से चूमा. मुझे मामाजी के पेशाब का स्वाद बिलकुल भी बुरा नहीं लगा.

मैं जैसे ही शौचालय की सीट पर बैठने लगी बड़े मामा ने मुझे बाँहों में उठा कर नहाने के टब में खड़े हो गए. बड़े मामा ने अपने शक्तिशाली भुजाओं से

मुझे अपने कन्धों तक उठा कर मेरी टाँगें अपने कन्धों पर डालने को कहा. मेरा बड़े मामा की हरकतों से हसंते-हंसते पेट में दर्द हो गया. इस अवस्था में मेरी गीली

चूत ठीक मामाजी के मुंह के सामने थी.

मैं बड़े मामा से अपनी चूत चटवाने के विचार से रोमांचित हो गयी, “बड़े मामा मेरी वस्ति पूरी भरी हुई है. मेरा पेशाब निकलने वाला है.”

“नेहा बेटा, मुझे अपना मीठा मूत्र पिला दो. कुंवारी चूत की चुदाई के बाद पहला मूत तो प्रसाद की तरह होता है.” बड़े मामा ने मेरी रेशमी बालों से ढकी चूत

को चूम मुझे उन्हें अपना मूत्र-पान कराने के लिए उत्साहित किया.

मेरा पेशाब अब वैसे ही नहीं रुक सकता था. मेरे मूत की धार तेज़ी से बड़े मामा के खुले मूंह में प्रवाहित हो गयी. बड़े मामा ने मुंह में भरे मूत्र को जल्दी से

सटक लिया, पर तब तक मेरे पेशाब की तीव्र धार ने उनके मुंह का पूरा ‘मूत्र स्नान’ कर दिया. बड़े मामा ने कम से कम मेरे आधे पेशाब को पीने में सफल हो गए.

उनका मुंह, सीना और पेट मेरे मूत से भीग गया था. सारे स्नानघर में मेरे मूत्र की तेज़ सुगंध फ़ैल गयी.

“बड़े मामा, मुझे प्लीज़ शौचासन पर बैठना है.” बड़े मामा ने मुझे प्यार से कमोड पर बिठा दिया. मैंने बड़े मामा के आधे-सख्त लंड को मूंह में ले कर

मलोत्सर्ग करने लगी. मेरे पखाने की महक स्नानघर में फ़ैल गयी. बड़े माम ने गहरी सांस ली, मेरा शरीर रोमांच से भर गया, कि बड़े मामा को मेरा मलोत्सर्जन भी

वासनामयी लगता था. मेरे मल-विसर्जन की पाने में गिरने की आवाज़ से बड़े मामा का लंड और भी सख्त हो गया. जब मेरा मलोत्सर्ग समाप्त हो गया तो मामाजी

ने मुझे अपने को साफ़ किये बिना उठा कर, बिना फ्लश किये, शौचाल्या पर खुद बैठ गए.

बड़े मामा ने मुझे मोड़ कर झुका दिया. बड़े मामा ने मेरे गुदाज़ चूतड़ फैला कर गुदा-छिद्र को अपने मूंह से चाट कर साफ़ करने लगे. मेरी चूत में से रस

बहने लगा. मेरी नाबालिग जीवन में एक दिन में ही सहवास की वासना के कितने रूप बड़े मामा ने दिखला दिये थे. बड़े मामा की जीभ ने मेरी गांड को चाट कर

मुझे गरम कर दिया. मेरे साँसों में बड़े मामा के मलोत्सर्ग की गन्ध भर गयी. बड़े मामा जब मलोत्स्र्जन समाप्त कर रोल की तरफ हाथ बड़ाया तो मैंने उनका हाथ

पकड़ कर उन्हें खींचा. मेरा मुंह, जो मैं उनको अर्पण करना चाहती थी उसके विचार से ही लाल हो गया. बड़े मामा को मेरी इच्छा समझने में कुछ क्षण ही लगे

और मामाजी मुड़ कर अपने दोनों हाथो को घुटनों पर रख कर आगे झुक गए.

मैंने बड़े मामा के विशाल घने बालों से ढके चूतड़ों को फैला कर मामाजी की गुदा के बालों से भरे छल्ले को जीभ से चाटने लगी. मुझे मामाजी की गांड

में से मर्दों वाली सुगंध और स्वाद से आनंद आने लगा. मुझे मामाजी की गांड चाटने में बहुत मज़ा आया. मुझे अब मामाजी की अजीब इच्छाओं का महत्व समझ

आने लगा.

मैंने मामाजी की गांड अपने थूक से गीली कर बिलकुल साफ़ कर दी. बड़े मामा और मैंने पहले दातों को ब्रश किया फिर इकट्ठे स्नान करने के लिए

शावर के लिए चल पड़े. बड़े मामा ने मुझे प्यार से साबुन लगाया. उनके हाथों ने मेरी उरोजों, चूत और गांड को खूब तरसाया. मामाजी ने मेरे बालों को में शेम्पू

भी लगाया. मेरी शरीर में वासना की आग भड़कने लगी. मैंने भी बड़े मामा को सहला कर साबुन लगाया.मेरे हाथों ने उनके खड़े मूसल लंड को खूब सहलाया, मैंने

उनकी विशाल बहुत नीचे तक लटके अंडकोष को भी अपने हाथों में भरकर साफ़ करने के बहाने सहला कर मामजी की कामंगना को भड़का दिया.

मैंने उसके बाद साबुन भरे हाथों से मामाजी के विशाल बालों से भरे चूतड़ों को मसला और अपनी उंगली से उनकी चूतड़ों के बीच की दरार को

सहलाया, मेरी उंगली बड़ी देर तक उनके गांड के छेद पर टिकी रही. बड़े मामा ने मुझे मुड़ कर अपनी बाँहों में उठा लिया. मैं खिलखिला कर हंस पड़ी, मेरे बाहें

मामाजी की गर्दन से लिपट गयीं और मेरी टांगों ने मामाजी की चौड़ी कमर के उभार को जकड़ लिया.

बड़े मामा ने मेरे साबुन लगे चिकने चूतड़ों को अपने हाथों में संभाला और अपने घुटने झुका कर अपना अमानवीय अकार के घोड़े जैसे साबुन से

लस्त लंड के अत्यंत मोटे सुपाड़े को मेरी चूत में घुसेड़ दिया. हम दोनो के बदन साबुन के चिकने थे. मामाजी ने मेरा वज़न की सहायता से मेरी चूत में अपने विशाल

लंड को मोटे खूंटे की तरह धकेल दिया. मेरी चीख से स्नानघर गूँज उठा.

बड़े मामा ने मेरे चूतड़ ऊपर उठा और फिर मेरे वज़न का इस्तेमाल कर के नीचे गिरा कर अपने लंड से मेरी चूत बिजली की तेज़ी से मारने लगे.

बड़े मामा ने भयंकर तीव्रता से मेरी चूत मारनी शुरू कर दी. मेरे सांस एक बार भी संतुलित नहीं हो पायी. बड़े मामा ने अपने विशाल लोहे जैसे सख्त लंड

को स्थिर रख, मेरे चूतड़ों से आगे पीछे कर के वास्तव में मेरी चूत से अपना लंड मार रहे थे. मेरी सिस्कारियों से दीवारें बहरी हो गयीं. बड़े मामा ने मुझे अपनी और

अपने महाकाय लंड की मर्दानी ताकत का फिर से आभास कराया. मैंने अपना खुला सिसकता हुआ मुंह बड़े मामा की गर्दन में छुपा लिया.बड़े मामा की वहशी

चुदाई ने मेरी चूत को पांच बार झाड़ दिया. बड़े मामा की इतनी उत्तेजना भरी चुदाई ने मेरी हालत बेहाल कर दी. मेरी किशोर शरीर बड़े मामा के लंड से उपजी

महा-कामेच्छा को संभालने के लिए अभी बहुत अल्पव्यस्क था. मैंने अपने आपको बड़े मामा और अपनी धधकती वासना के ऊपर छोड़ दिया.

जब मुझे लगने लगा कि बड़े मामा उस दिन कभी भी नहीं झड़ेंगे, मामाजी ने मेरी चूत और भी तेज़ी से मारनी शुरू कर दी. मेरी सिस्कारियों में अब चरम

कामाग्नी के अलावा थोड़ा सा दर्द भी शामिल था. पर मुझे उस दर्द के भीतर छुपे काम-आनंद ने पागल कर दिया.

“मामाजी, मुझे चोदिये. और चोदिये. मेरी चूत अपने मोटे लंड से मारिये. आह अंन्ह …हाय मेरी चूत …मामाजी… ई..ई ….ई …. ई ……. मर गयी

ई ….ई … ई…….. मैं,” मेरा मुंह मामाजी कि गर्दन से चुपका हुआ था.

बड़े मामा अपने भयंकर लंड से मेरी चूत का विध्वंस निरंतर हिंसक तेज़ी से करते रहे जब तक उनका लंड अचानक मेरी चूत में स्खलित हो गया.

मामाजी के गरम वीर्य ने मेरे हलक से जोर की सिसकारी निकाल दी. मेरी चूत ने भी एक बार फिर से रति-रस विसर्जित कर दिया.बड़े मामा का महाकाय लंड ने

लगभग तेरह बार झटके मार कर मेरी चूत को अपने मर्दांगनी के निचोड़,संतान उत्पादक, वीर्य से भर दिया.

बड़े मामा ने मुझे जोर से अपने शरीर से भींच लिया. मैं भी उनसे बच्चे की तरह लिपट गयी. हम दोनों को काफी समय लगा अपनी सांसों को संतुलित करने में
गंगा बाबा हमारा इंतज़ार कर रहे थे. गंगा बाबा एक पहलवान के जिस्म के मालिक थे. उनका ६’१” ऊंचा शरीर अत्यंत चौड़ा

और विशाल था. उनकी घनी मूंछें उनके असम सुन्दर चेहरे को और भी निखार देतीं थीं. गंगा बाबा ४२ साल के विधुर थे और

अपनी अत्यंत सुंदर बेटी जानकी के साथ हमारे परिवार की विसायत के मैनेजर थे. दोनों हमारे परिवार की सारी*जागीर की

देखबाल करते थे. जानकी २१ साल के थोड़े भरे हुए शरीर की बेहद सुंदर स्त्री थी.

गंगा बाबा ने मुझे प्यार से गले लगा लिया.

रात का खाना और भी स्वादिष्ट था. बड़े मामा ने इटली की विंटेज लाल अंगूरी मदिरा, बरोलो, की बोतल खोली.

हम दोनों ने गंगा बाबा और जानकी दीदी के साथ खाना खाया. गंगा बाबा ने खाने के ठीक बाद सारे नौकरों को भगा दिया.

जानकी दीदी ने मुझे गले लगा कर शुभरात्री की इच्छा व्यक्त की,”वैसे यदि रवि चाचा जैसे मर्द का लंड पास हो तो कोई भी

रात शुभ ही होगी.”

मेरी शर्म से आवाज़ बंद हो गयी,जानकी दीदी को कैसे पता* चला? “दीदी आपको कैसे पता चला? क्या गंगा बाबा को भी

पता है? ”

“घबराओ नहीं, नेहा, पापा और रवि चाचू के बीच में कोई बात गुप्त नहीं रहती. पर घर की बात घर में ही रहेगी. रवि चाचू का

लंड मैंने भी झेला है.पहली बार की चुदाई करीब साल ६-७ साल पहले थी. फिर पापा और रवि चाचू ने मिल कर मुझे सारी रात

चोदा। अगले दिन मैं मुश्किल से खड़ी हो पाई चलना तो बहुत दूर रहा।” जानकी दीदी ने मुझे प्यार से चूम कर आश्वासन दिया.

बड़े मामा ने जानकी दीदी को भी चोदा था, इस विचार से ही मैं गरम हो गयी.

आखिर में नौ बजे तक घर में बड़े मामा और मैं फिर से अकेले थे. बड़े मामा ने स्कॉच के गिलास के साथ मुझे बाँहों में भर

कर सिनेमाघर वाले कमरे में सेक्स की अश्लील चलचित्र लगाया.

“नेहा बेटा, यह सारे चलचित्र यथार्थ हैं और वास्तविक परिवारों के निजी जीवन की कहानियां हैं.” बड़े मामा ने मुझे बताया.

मेरी चूत समरक्त व्यभिचार की अश्लील सिनेमा देख कर गीली हो गयी. मेरे नन्हे मुलायम हाथ बड़े मामा के प्रचंड विशाल लंड को सहला

कर उसे और भी प्रचंड बनाने लगे। बड़े मामा का लंड फिल्म के ससुर से बहुत मोटा और कम से कम दो-तीन इंच लंबा था.

“नेहा बेटा, हम लोग बिस्तर में चलें?| बड़े मामा ने मेरी कामवासना लिप्त चेहरा देख कर शरारत से पूछा.

शयनकक्ष में पहुँचते ही बड़े मामा ने मुझे प्यार से वस्त्रहीन कर दिया। शीघ्र ही मैं निवस्त्र बिस्तर में लेती बड़े मामा को कपड़े उतारते हुए

देख रही थी. बड़े मामा भी निवस्त्र हो कर मेरे साथ बिस्तर में लेट गए. हम दोनों ने एक दुसरे को बाँहों में भर कर खुले मुंह से चूमने लगे. बड़े

मामा ने मेरे गुदाज़ नितिम्बों को मसलते हुए मेरे मुंह में अपनी जीभ डाल कर मेरे सारे मुंह के अंदर सब तरफ घूमा दी. मैंने भी अपने जीभ

बड़े मामा की जीभ से भीड़ा कर उनके मीठे मुंह के स्वाद का आनंद लेने लगी.

बड़े मामा ने मुझे चित लिटा कर मेरे मुलायम बड़ी चूचियों को अपने मूंह से उत्तेजित करने लगे. बड़े मामा ने मेरे चूचुक अपने मूंह में

भर कर उनको पहले धीरे-धीरे फिर ज़ोर से चूस-चूस कर मेरी सिसकारी निकल दी.

बड़े मामा ने मेरे गोल भरे हुए पेट को चूमते हुए मेरी गीली चूत के ऊपर अपना मूंह रख कर मेरी हल्की सुनहरी झांटों को अपने

जीभ से भाग कर मेरी चूत के द्वार के अंदर डाल दी. मेरी ज़ोर की सिसकारी ने बड़े मामा को भी उत्तेजित कर दिया. बड़े मामा ने मेरी चूत

और भगशिश्निका को अपनी जीभ और मुंह से सता कर मेरी वासना को चरम सीमा तक पहुंचा दिया.

बड़े मामा ने अपनी खुरदुरी जीभ से मेरे क्लीटोरिस को चाट कर मुझे बिलकुल पागल सा कर दिया। उनकी एक उंगली अहिस्ता से

मेरी गीली मचलती चूत में फिसल कर अंदर चली गयी। उन्होंने अपनी उंगली को टेड़ा कर के मेरी योनी के सुरंग के आगे की दीवार को

रगड़ने लगे। उनकी जीभ और उंगली दोनों ही मुझे एक बराबर का आनंद दे रहीं थीं।

अचानक बड़े मामा ने अपने होंठों में मेरा भग-शिश्न को भींच कर अपनी उंगली को तेजी से मेरी चूत की दीवार को रगड़ना शुरू

कर दिया। उनकी अभ्यस्त जीभ और उंगली ने मेरे कमसिन कच्चे शरीर को वासना के समुन्द्र में फैंक दिया।

मैं ज़ोर से सिसक उठी। मैं अब झड़ने के लिए व्याकुल थी। यदि बड़े मामा मेरे क्लिटोरिस अपने दाँतों से चबा भी डालते तो मैं कोई शिकायत नहीं करती।

“आह…मामाजी…आंह …ऊम्म्म्म…हं..हं.. आ..आ…आह्ह्ह मेरी चू..ऊ..ऊ…त आह्ह.मैं आने वाली हूँ,” मेरी सिस्कारियों ने बड़े मामा को

मेरे सन्निकट रति-निष्पत्ति की घोषणा कर दी. बड़े मामा ने मेरी चूत चूसना रोक दिया. बड़े मामा ने मुझे मेरे यौन चरमोत्कर्ष के द्वार से पीछे

खींच कर मुझे आश्चर्यचकित कर दिया.

मैं वासना के अतिरेक से बिलबिला रही थी।

बड़े मामा ने मेरी दोनों भरी-भरी गोल झांघें उठा कर फैला दीं. बड़े मामा ने अपना मूंह मेरी गांड के ऊपर रख उसको प्यार से

चूमा. मेरे मूंह से घुटी-घुटी सिसकारी निकल पड़ी. बड़े मामा की जीभ शीघ्र ही मेरी गांड के छिद्र को तड़पाने तरसाने लगी.

मेरी गांड का छल्ला बारी-बारी से शिथिल और संकुचित होने लगा. बड़े मामा ने मेरी गांड के मलद्वार को अपनी जीभ से चूम कर

मेरी वासना को और भी प्रज्ज्वलित कर दिया. बड़े मामा की जीभ की नोक आखिरकार मेरी गुदा-द्वार के अंदर दाखिल हो गयी. मेरी

सिस्कारियों ने बड़े मामा को मेरी गांड को और भी चूसने-चूमने का निमंत्रण भेजा.

मेरा कुछ देर पहले का सन्निकट चरम-आनंद मेरे अविकसित शरीर को फिर से उमेठने लगा.

मेरी गांड स्वतः बड़े मामा के मूंह से चुपकने का प्रयास करने लगी. बड़े मामा ने पहले की तरह मेरे चूत को रति-निष्पत्ति होने से पहले

ही मेरी गांड से अपना मूंह हटा लिया. मेरी वासना के अनबुझी आग ने मेरे मस्तिष्क को पागल कर दिया. मैं बड़े मामा के सामने गिड़गिड़ाने

लगी,”बड़े मामा आप मुझे इतना क्यों तरसा रहें हैं? मेरी चूत झाड़ दीजिये. प्लीज़.”

मैं अपने चूतड़ पलंग से उठा कर अपनी गांड और चूत अपने बड़े मामा के मुंह के पास ले जाने का प्रयास कर रही थी।

बड़े मामा ने अपने तने हुए हल्लवी लंड से मेरी चूत रगड़ और *मेरे ऊपर नीचे गिरते-उठते पेट पर को अपने हाथ से मसल कर बोले, “नेहा

बेटा मुझे आपकी गांड मारनी है.”

“बड़े मामा, मुझे बहुत दर्द होगा?” बड़े मामा ने गौर किया होगा िक मैंने मना नहीं किया. इस वक़्त मैं बड़े मामा की हर शर्त मान लेती. मेरी

वासना की संतुष्टी की चाभी बड़े मामा का महाकाय लंड था.

मेरी छोटी सी गांड के अंदर बड़े मामा के विकराल स्थूल लंड के जाने के विचार से ही मैं सिहर गयी।

बड़े मामा ने आश्वासन दिया,”नेहा बेटा दर्द तो होगा. दर्द तो चूत मरवाने में भी हुआ था. पर अब आप चूत मरवाने से कितने खुश हैं.”

बड़े मामा मेरे दोनों उरोज़ों को हलके हलके सहलाने लगे।

मैंने अपना निचला होंठ वासना के उबलते ज्वार को नियंत्रित करने के प्रयास करते हुए अपने दांतों के बीच में भींच लिया।

बड़े मामा ने अपने विशाल लंड को मोटे डंडे की तरह मेरी चूत के द्वार के उपर रगड़ने लगे। मेरा जलता हुआ अल्पव्यस्क शरीर चर्मॉनन्द की

खोज में भभक उठा। बड़े मामा का रेशम जैसा चिकना पर लोहे जैसा सख्त वृहत लिंग मेरे भाग-शिश्न को रगड़ कर मेरी काम वासना की

प्रज्जवलित अग्नि को और भी भड़काने लगा।

“नेहा बेटी, जब तक आप स्वयं हमसे अपनी गांड मारने को नहीं कहेंगी हम तब तक कुछ भी नहीं करेंगें,” बड़े मामा के मर्दाने हाथ

मेरी चूचियों को प्यार भरा अमरदान कर रहे थे।

मेरा मस्तिष्क बड़े मामा के विकराल लंड से गांड मरवाने के विचार से डर के मारे कांप रहा था। पर मेरा विश्वासघाती सम्भोग कामना

से कम्पित शरीर बड़े मामा के अविश्वसनीय अमानवीय लंड से गान मरवाने के लिए उत्सुक हो उठा था। मेरे कमसिन नाबालिग शरीर में

जलती आग भुजाने का यंत्र बड़े मामा की विशाल झांगों के बीच में मोटे खम्बे की तरह फड़क रहा था।

मेरे शरीर की वासना और उसकी संतुष्टि की कामना ने मेरे मस्तिष्क के भीतर भरे भय के उपर विजय पा ली।

मैंने कम्पित स्वर में बड़े मामा की वासना भरे प्यार से चमकती हल्की भूरी आँखों में देख कर हलके से कहा, “बड़े मामा आप मेरी गांड मार

लीजिये। पर प्लीज़ मुझे बहुत दर्द नहीं कीजिएगा।”

बड़े मामा ने निर्ममता से उत्तर दिया, “नेहा बेटी दर्द तो होगा और उसे आपको सेहना पड़ेगा। पर मुझसे जितना हो सकेगा उतना प्रयास मैं

ज़रूर करूंगा।”

मेरा भय और वासना से कम्पित अल्पव्यस्क शरीर अब बड़े मामा की कृपा के उपर निर्भर था।

बड़े मामा ने अपना लंड को मेरे गीली चूत में डाल कर मेरे यौन-रस से लेप लिया. बड़े मामा ने अपना मुंह को थूक से भर मेरी गांड पर

रख कर अपनी लार गांड पर डाल दी.

बड़े मामा ने अपना विशाल लंड को मेरी गांड के छोटे तंग छल्ले के ऊपर रख कर दबाया,”नेहा बेटा, अपनी गांड पूरी ढीली छोड़ दो. जब

मैं अपना लंड अंदर की तरफ डालूँ तो आप अपनी गांड को मेरे लंड के ऊपर नीचे की तरफ ज़ोर लगायें. जैसे आप बड़ी सख्त टट्टी

निकालते हुए करती हैं.”

मैंने वासना में जलते अपने अविकसित शरीर से परेशान हो कर बड़े मामा के सुझाव को ठीक से समझे बिना अपना सर हिला कर समर्थन

दे दिया. बड़े मामा ने मुझे अपने बड़े हाथों से जकड़ कर मुझे बिस्तर पर दबा दिया. बड़े मामा ने अपने विशाल लंड के विकराल सुपाड़े को

मेरी नन्ही सी गांड के छिद्र पर दबाना शुरू कर दिया।

मेरी तंग कसी गांड का छल्ला बड़े मामा के लंड के प्रविष्टी के रास्ते में था। मेरी गांड की कसी हुई वलय ने बड़े मामा के भीमकाय लिंग के

आक्रमण को पीछे धकेलने का निरर्थक प्रयास किया।

बड़े मामा के विशाल लंड का सुपाड़ा मेरी गांड के छोटे से छेद को खोलने के लिए बेचैन था.

बड़े मामा ने हचक कर एक ज़ोर से धक्का लगाया. बड़े मामा के, छोटे सेब जितने बड़े लंड के सुपाड़े ने मेरी गांड के छिद्र को बेदर्दी से

चौड़ा कर दिया. मेरे गले से निकली दर्द भरी चीख से कमरा गूँज उठा.

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