पराया पिया प्यारा लगे

हमारे पड़ोस में ही, एक नेपाली परिवार रहता था।
बाहदुर, 30 साल का एक दुबला सा नेपाली और उसकी 28 साल की बीवीमिष्टी।
उनके कोई औलाद नहीं, पर मियाँ बीवी अपने आप में बहुत खुश हैं और दोनों ही बहुत मिलनसार हैं।
बाहदुर सरकारी नौकरी में है और महीने में, 20 दिन तो वह राजधानी में ही रहता है।
हम जब उनके पड़ोस में आए तो नीरू का मिष्टी से परिचय हुआ और मिष्टीहमारी मुनिया से बहुत प्यार करने लग गई, जो उस समय साल भर की रही होगी।
धीरे धीरे, नीरू और मिष्टी पक्की सहेलियाँ बन गई।
मैं उसे, मिष्टी भाभी कह के बुलाता था।
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वह, अक्सर हमारे घर आती रहती थी और मैं उससे नीरू की मौजूदगी में भी दो-अर्थी मज़ाक कर लिया करता था।
वह, कभी बुरा नहीं मानी और हँसती रहती थी।
मिष्टी भाभी, बिल्कुल गोरी चिट्टी और भरे बदन की मस्त औरत थी।
जैसे पहाड़ी जातियों में होता है, एक दम गोल चेहरा, कद कुछ नाटा, और जवान अंगों में पूरा उभार।
मैं हमेशा कल्पना किया करता था की मिष्टी भाभी को जम के चोदूँ और मिष्टी मेरी भी, मेरी बीवी जैसी दोस्त बन जाय और उन दोनों औरतों को एक साथ चोदूँ।
आख़िर, मुझे मौका मिल ही गया।
मेरे ऑफीस से खबर आई की मुझे अगले ही दिन, काठमांडू जाना है।
मैं शाम को घर पहुंचा।
उस समय घर में, मिष्टी भाभी भी मौजूद थी।
मैंने उन दोनों के सामने ही, यह बता दिया की मुझे 3–4 दिनों के लिए काठमांडू जाना है और कल की नाइट बस से मैं काठमांडू जाऊंगा..!
मिष्टी भाभी, थोड़ी देर में ही अपने घर चली गई।
आज की रात, मैंने नीरू को जम के चोदा और उसने भी मस्त होके चुदवाया, क्योंकि आने वाले तीन चार दिन, हमें अलग रहना था।
दूसरे दिन, मैं ऑफीस से दोपहर में ही आ गया।
घर पहुँचने पर, नीरू बोली तुम्हारे लिए, एक बहुत ही बड़ी खुशख़बरी है..! बोलो, क्या इनाम दोगे..! ??
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मैं अरे, पहले यह तो बताओ की वह खुशख़बरी क्या है..! ??
नीरू तो सुनो, दिल थाम के..! तुम्हारे साथ, मिष्टी भी काठमांडू जानाचाहती है..! उसका हज़्बेंड, वहाँ बीमार है और वह उसे देखने जाना चाहतीहै..! और हाँ, तुम्हारे साथ ही वापस भी आएगी..!
मेरा मन तो बल्लियों उछलने लगा पर मैं अपनी खुशी को छिपाते हुए बोला इसमें, खुश खबरी वाली क्या बात है..! ठीक है, तुम्हारी सहेली है और पड़ोसी है तो उसे मैं वहाँ उसके हज़्बेंड के पास पहुंचा दूँगा..! तुम भी खुश, तुम्हारी सहेली भी खुश और उसका पति भी खुश..! जो वहाँ बैठा,मुट्ठी मार रहा होगा..! पर मुझे क्या मिलेगा..!
नीरू नौटंकी तो देखो, जनाब की..! अब आ के मुझे मत बोलना की तुम्हें भी वहाँ जा के मूठ मारनी पड़ी..! बंदोबस्त करके, तुम्हारे साथ भेज रही हूँ..! वो हँसती हुई बोली।
मेरा अभी उसे कुछ करने का मूड हो ही रहा था की दरवाजे की घंटी बजी।
नीरू ने दरवाजा खोला तो मिष्टी भाभी थी।
वह अंदर आई और मुझे देख बोली क्यों, कहीं में ग़लत टाइम पर तो नहीं आ गई..! ??
खैर, हमारी बस रात के ठीक 9 बजे चली।
11 बजने तक, बस की सारी बत्तियाँ बुझा दी गई और बस पहाड़ी रास्ते पर हिचकोले खाती, काठमांडू की तरफ बढ़ रही थी।
मिष्टी भाभी, बिल्कुल मेरे बगल वाली सीट पर बैठी हुई थी।
जब बस को झटका लगता तो हम दोनों के शरीर, आपस में रगड़ खा जाते।
इसका नतीज़ा यह हुआ की मैं उत्तेजना से भर गया और मेरा लण्ड पैंट में,एकदम खड़ा हो गया था।
फिर, मिष्टी भाभी को नींद आने लगी और कुछ देर बाद, उसका सिर नींद में मेरे कंधे पर टिक गया।
उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ, मेरी कोहनी से टकरा रही थी।
मैंने भी कोहनी का दबाव, उसकी चूचियों पर बढ़ाना शुरू कर दिया। लेकिन, वह वैसे ही बिना हीले डुले सोई रही, इससे मेरी हिम्मत और बढ़ी।
मैंने अपने हाथ, एक दूसरे से क्रॉस कर लिए और एक हाथ से उसके बूब को हल्के से पकड़ लिया।
वह, वैसे ही सोई रही।
अब तो मेरी और हिम्मत बढ़ गई और मैंने उसकी चूची पर हाथ का दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया और जब उसकी कोई हरकत नहीं देखी तो मैं उसकी चूची को दबाने लगा।
बस में अंधेरा था और केवल बस के चलने की ही घड़ घड़..! की आवाज़ आ रही थी।
मेरा लण्ड पैंट फाड़ के बाहर आने के लिए, मचल रहा था।
बड़ी मुश्किल से उसे कस के दबा के, काबू में किए हुए था।
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मिष्टी भाभी, मेरे कंधे पर अपना सर रखे चुप चाप सोई हुई थी।
मेरी हिम्मत बढ़ी और मैंने हाथ उसकी ब्लाउज में सरका दिया और उसकी भारी चूची को कस के पकड़ लिया।
फिर उसे जैसे ही कस के दबाया, मिष्टी बोल पड़ी इतने ज़ोर से मत दबाइए..! दुख़्ता है..!
मैं तो यह सुनते ही, खिल उठा और अपनी इस खुशी को अपने आप तक नहीं रख सका और मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए।
उसने भी, एक हाथ मेरी पैंट पर मेरे लण्ड पर रख दिया और उसे पैंट पर से हल्के हल्के दबाने लगी।
मैंने नीचे झुक के, उसकी साड़ी थोड़ी उँची उठा ली और हाथ भीतर डाल दिया।
मेरा हाथ नंगी चूत से टकराया औरमैं झूम उठा की भाभी भी मज़ा लेने की तैयारी करके ही आई है।
जैसे ही मैंने चूत में उंगली डालनी चाही, उसने साड़ी पर से मेरे हाथ को रोक दिया और बोली ऐसे नहीं, कोई देख लेगा..!
तब उसने सीट के नीचे रखी, अपनी बैग खोली और उसमें से एक चादर निकाल ली और उसे लपेट के ओढ़ ली।
मैंने फिर उसकी चूची पर हाथ रख दिया और उसे ब्लाउज पर से दबाने लगा तो वह फिर बोली ब्लाउज का हुक खोल कर, ठीक से करो..! ज़्यादा मज़ा आएगा..!
मैंने उसकी ब्लाउज के हुक खोल दिए, अंदर ब्रा भी नहीं थी।
चूची फुदक के, बाहर आ गई।
इस बीच, उसने वह चादर मेरे ऊपर भी लपेट दी।
अब हम दोनों एक चादर में लिपटे हुए थे और भीतर हम क्या हरकत कर रहे हैं, बाहर से उसका कुछ भी पता नहीं चल रहा था।
फिर, उसने मेरी पैंट की चैन खोल दी और चड्डी को एक और कर के, लण्ड को आज़ाद कर लिया।
इसके बाद, वह जैसे बहुत नींद में हो और सोना चाहती हो.. वैसे कुछ अंदाज़ में, पाँव सीट से बाहर कर सो गई.. लेकिन, वह कुछ ऐसे अंदाज़ में सोई की उसे मेरे लण्ड को मुख में लेने में कोई कठिनाई नहीं हुई..
जिसे, वह अगले आधे घंटे तक चूसती रही। जब तक की मैं उसके मुख में नहीं झड़ा।
मेरे रस को वह, पूरा का पूरा गटक गई।
फिर मैंने भी उसकी चूत में उंगली करके, उसकी आग ठंडी की और हम दोनों चादर में लिपटे ही सो गये।
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भोर में चार बजे, हमारी बस काठमांडू पहुँच गई।
मैंने उससे पूछा मिष्टी भाभी, किसी लॉज में चलते हैं..! थोड़ा आराम करने के बाद, अपने हज़्बेंड के पास चली जाना..!
वह मेरी बात कहते ही, मान गई।
मैंने एक अच्छे होटल में, डबल बेड वाला कमरा लिया।
कमरे में पहुँचते ही, वह बाथरूम में भागी और जैसे ही दरवाजा बंद करने को हुई मैं भी दरवाजे पर पहुँच गया और उसके साथ साथ, बाथरूम में घुस गया।
वह हड़बड़ा के बोली क्या है..! मुझे पेशाब करना है, बाहर जाओ..!
मैं नहीं जानेमन, तुम मुतो..! मैं तुम्हें मूतते हुए, देखना चाहता हूँ..!
बस की रात भर की यात्रा से, वह पूरी मुतासी थी और फ़ौरन अपनी साड़ी,पेटिकोट सहित अपनी कमर तक उँची की और मेरी तरफ अपनी गोल गोरी गाण्ड कर के बैठ गई और बहुत ही तेज़ी के साथ सर र र र सर र र र..! करके मूतने लगी।

मैं एक दम गरम हो उठा और जैसे ही हम दोनों कमरे में आए, मैंने उसकी साड़ी उतार दी, फिर ब्लाउज खोला और उसका पेटिकोट भी खोल दिया।
ब्रा और पैंटी तो उसने पहले से ही नहीं पहन रखी थी और मेरे सपनों की रानी मिष्टी भाभी, अब मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी।
मैंने जैसे ही उसकी चूची पकड़ी, वह बोल पड़ी पहले, अपने कपडे तो उतार दो..!
मैं भी फ़ौरन, पूरा नंगा हो गया।
अब मैंने मिष्टी भाभी को चित लेटा दिया और मैं उसके मुख के दोनों तरफ घुटने मोड़ कर बैठ, उसकी चूत पर झुक गया।
अब मेरा लण्ड उसके मुख के सामने था और मेरे चेहरे के ठीक सामने,उसकी खुली चूत मुझे दावत दे रही थी।
उसने मेरा लण्ड, मुख में ले लिया और इधर, मैं उसकी माल पुए सी चूत पूरी जीभ भीतर घुसा कर, चाटने लगा।
हम दोनों ही, काम वासना में पुरे व्याकुल थे।
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तभी, वह बोली चूसना चाटना बाद में, पहले इसे भीतर डाल के मुझे चोदो..! बस से ही, तुमने मुझे पागल कर रखा है..!
मैं इतना सुनते ही, उसकी टाँगों के बीच आ गया और उस की चूत के गुलाबी छेद में अपना 8 इंच का लण्ड, एक ही झटके में पूरा पेल दिया।
तभी वह बोली इतने ज़ोर से, पेलोगे तो मेरी चूत फट जाएगी..! मेरे पतिको, शक हो जाएगा..! ज़रा प्यार से, धीरे धीरे चोदो..! मैं कोई भाग थोड़े ही रही हूँ..!
मैं मिष्टी भाभी, मैं तुम्हें चोदने का सपना बहुत दिनों से देख रहा था..! लेकिन, डरता था की कहीं तुम नाराज़ ना हो जाओ..!
मिष्टी नहीं, ऐसी बात नहीं है..! मैं तो खुद तुम से चुदवाने को बहुतव्याकुल रहती हूँ..! तुम्हारी बीवी ने बताया था की तुम लगातार घंटो तक,चूत में लण्ड डाल कर हिलाते रहते हो..! तुम्हारे एक बार झड़ने तक, वो चार पाँच बार झड़ जाती है..! मेरा पति तो चुदाई के मामले में बीमार है,चूत में लौड़ा डाला नहीं की झड़ गया..! मैं तो तड़पति रह जाती हूँ..! तुम्हारी बीवी, बड़ी भाग्यशाली है के उसे तुम जैसा चुड़क्कड़ पति मिला..! आज, मेरी चूत की प्यास पूरी तरह मिटा दो..!
मैं बोला घबराओ नहीं..! आज तो मैं तुम्हारे चूत का वो हाल बनाऊंगा की तुम जिंदगी भर मुझे याद रखोगी..!
मिष्टी बातें, मत बनाओ..! अब ज़रा, ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत को चोदो..! पेलो, अपना लण्ड पुरे ज़ोर से..!
मैंने भी चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी।
अब मेरा लण्ड एक पिस्टन की तरह, उसकी चूत से अंदर बाहर हो रहा था।
मिष्टी हाँ!! और ज़ोर से..! ऐसे ही, धक्के मारो..! मैं आ रही हूँ..! हाय!! मेरे राजा..! आज, मेरी चूत का गरमी उतार दो..! मैं बहुत दिनों से प्यासी हूँ..!
मैं जीतने ज़ोर से उसे चोदता, वह उतनी ही तड़प तड़प के और माँग रही थी।
वो हाँ!! और ज़ोर से चोदो..! मेरी चूत फाड़ डालो..! चोदो और चोदो..!चोदते रहो..! हाय!! पेलो ना..! और कस के पेलो, अपना लण्ड..! हाँ..! पूरालण्ड डाल कर चोदो..! हाय मैं गई..! ओह..! ओहआ आ आ आ आ आ आ आ..! और धीरे धीरे, वह सुस्त पड़ गई।
पर मैं उसकी रस से भरी चूत में वैसे ही, फ़च्छ.. फ़च्छ.. कर के लण्ड पेल रहा था।
उसके रस से, चूत बहुत चिकनी हो चुकी थी और मेरा लण्ड बार बार स्लिप हो रहा था।
तब मैंने अपना लण्ड, उसकी गाण्ड के छेद से टीका दिया।
मिष्टी हाय!! गाण्ड में मत पेलो..! बहुत दुखेगा..!
मैं मिष्टी भाभी..! प्लीज़, एक बार जी भर के अपनी गाण्ड मार लेने दो..! मैंने बहुत कोशिश किया, लेकिन मेरी बीवी मुझे अपनी गाण्ड नहीं मारनेदेती..!
मिष्टी मुझे मालूम है..!
मैं क्या, तुम लोग ऐसी बातें करती हो..!
मिष्टी हाँ!! हम लोग और भी बहुत कुछ करते हैं..!
मैं सही में..! पहले गाण्ड मारने दो, फिर बातें बताना..!
मेरा लण्ड और उसकी गाण्ड, दोनों चूत के रस से चिकनी थी और मुझे उसकी गाण्ड में लण्ड पेलने में ज़्यादा परेशानी नहीं हुई।
फिर, जैसे मैंने उसकी चूत मारी, वैसे ही गाण्ड भी मारी और लगभग 15मिनट बाद, मैं उसकी गाण्ड में झड़ गया।
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गाण्ड मारने के बाद, मैंने पूछा अब बताओ, तुम को कैसे मालूम की मैंअपने बीवी की गाण्ड मारना चाहता हूँ..! और वो मुझे अपनी गाण्ड नहीं मारने देती..!
मिष्टी एक दिन, तुम कहीं बाहर गये थे..! मेरा पति भी नहीं था..! मुझेअकेले सोने में डर लग रहा था, इसलिए उस दिन मैं सोने के लिए तुम्हारे घर गई थी..!
रात में नीरू के हाथों का दबाव अपनी चूची पर पा कर, मेरी नींद खुल गई और मैं बोली अरे..! ये क्या कर रही हो..! ??
वो कुछ नहीं..! मैं सोच रही हूँ की मेरा पति तुम्हें चोदने का ख्वाब क्यों देखता है..! जब भी वो मुझे चोदता है तो अक्सर तुम्हारी बातें करता रहता है..!
मैं तो क्या देखा..! ??
वो अभी तो सिर्फ़ चूची छुई है..! अब तुम्हारी चूत देखूँगी..!
और उसने मेरा पेटिकोट खोलना शुरू कर दिया।
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साड़ी तो मैं पहले ही खोल कर सोई थी, और पैंटी भी नहीं पहनी थी।
फिर उसने मेरा ब्लाउज और ब्रा भी खोल दिया।
अब नीरू, मेरी चूचियों को बारी बारी से चूसने और मसलने लगी।

मेरी एक चूची उस के मुँह में थी और एक चूची को अपने एक हाथ से मसलते जा रही थी।
धीरे धीरे, उसके हाथ मेरे पेट और नाभि के रास्ते से फिसलते हुए मेरी चूत की तरफ बढ़ रहे थे।
थोड़ी ही देर में, उस का हाथ मेरी चूत को मसलने लगा।
मेरी फुददी भी ज़ोर ज़ोर से खुजलाने लगी।
मैं अपनी चूत को ज़ोर ज़ोर से, उसके हाथों पर दबाने लगी।
अब मैंने भी अपना एक हाथ उसके चूची पर रख कर, उसके चूची को मसलना शुरू किया और दूसरे हाथ को पेटीकोट के ऊपर से ही, उसकी चूत पर रख कर दबाने लगी।
तो उसने कहा अरे, कपड़ों के ऊपर से क्या मज़ा आएगा, जालिम..! मसलना है तो कपड़े खोल कर, मसल..!
और मैंने जल्दी जल्दी उसका ब्लाउज, ब्रा और पेटीकोट खोल डाला।
अब हम दोनों बिल्कुल नंगी, एक दूसरे की चूचियों और चूत से खेल रहे थे।
वो अपनी उंगलियो से, मेरी फुददी चोद रही थी और मैं अपनी उंगलियों से, उसकी चूत चोद रही थी।
थोड़ी देर बाद, वो मुझे चित सुलाकर मेरी जाँघों के बीच बैठ गई और झुक कर मेरी चूत को अपने जीभ से चाटने लगी।
मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।
आज से पहले, किसी ने मेरी फुददी नहीं चाटी थी।
फिर उसने, मुझे अपनी चूत चाटने को कहा।
मुझे अच्छा तो नहीं लगा, लेकिन उसके जीभ ने मेरी चूत को जो आनंद दिया था उसके बदले मैं उसकी चूत चाटने लगी।
दोनों काफ़ी देर तक 69 पोज़िशन में, एक दूसरी की चूत चाटते रहे।
फिर वो दो लंबे बैंगन लाकर, एक मेरे हाथ में देती हुई और एक बैंगन को मेरी चूत में पेलने लगी।
बैंगन इतना मोटा था की चूत में उसके घुसने की कल्पना, मैं नहीं कर सकती थी।
लेकिन, मेरी फुददी उसकी जीभ के चाटने से इतनी उत्तेजित हो गई थी के बड़ी आसानी से वो मेरी चूत में चला गया।
इधर, अपने हाथ के बैंगन को मैं उसकी चूत मे घुसेड़ने लगी।
फिर हम दोनों काफ़ी देर तक एक दूसरे की चूत को बैंगन से चोदते रहे।
करीब एक घंटे की चुदाई के बाद, हम अलग हुए और एक दूसरे की बाँहो में समाकर नंगे सो गये।
सोने से पहले, उसने तुम्हारे लण्ड और चुदाई के तरीके, बड़े चटकारे के साथ सुनाए थे।
उसी दिन से, मैं तुम से चुदवाने के लिए पागल रहने लगी थी।
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वैसे तो उसने मौका निकालकर, तुम से मेरी फुददी चुदवा देने का वादा किया था।
लेकिन, जब भी मैं कहती थी तो बात टाल जाती थी।
आज जाकर, तुमसे चुदवाने का मौका मिला..! कैसा लगा, मेरी चूत मार कर..! ??
मैं बहुत अच्छा..!
मिष्टी क्या, एक बार फिर चोदोगे..! ??
मैं क्यों नहीं..!
ऐसा कह कर, हम लोगों की चुदाई एक बार फिर शुरू हो गई।
काठमांडू पहुँचते ही, मैं मिष्टी भाभी की चूत और गाण्ड में दो बार पानी निकाल चुका था।
हमें होटल के कमरे में आए हुए, दो घंटे से अधिक हो चुके था।
इन दो चुदाई के बाद, मुझे गहरी नींद आने लगी क्योंकि में रात भर बस में भी नहीं सोया था।
एक बार, मैं सोया तो 9 बजे तक सोता ही रहा।
जब 9 बजे उठा तो देखा की मिष्टी भाभी ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठी, मेक उप कर रही थी।
उसने लाल रंग की बहुत ही आकर्षक साड़ी पहन रखी थी और उससे मिलता जुलता हल्के लाल रंग का ब्लाउज, जिससे उसकी ब्रा के पटे साफ़ दिख रहे थे।
मैं सीधा बाथरूम में घुसा और लगभग आधे घंटे में ही, तैयार हो के बाहर आ गया।
तब तक मिष्टी भाभी, पूरी सज धज चुकी थी।
मैंने उसे पीछे से बाहों में जकड़ते हुए, उसे हल्के से चूमा और कहा जानेमन, आज तुम इस लाल साड़ी में बहुत सुंदर दिख रही हो..!
मिष्टी अच्छा..! ??
मैं हाँ!! तुम्हारे गोरे मुखड़े पर, ये लाल बिंदी, रसीले होंठों पे, गुलाबी लिपस्टिक, माँग में सिंदूर, ऊपर से, ये बड़े गले की लो कट ब्लाउज में से झाँकती हुई चूचियाँ, साड़ी और ब्लाउज के बीच का नंगा पेट और कमर,तथा गोरे पेट के ऊपर गोल नाभी, सब मिलकर तुम्हारी जवानी पर कयामत गिरा रहे हैं..!
मिष्टी इतनी भी तारीफ़ मत करो..! चलो, मेरे पति से मिल कर आते हैं..!
मैं अरे!! ये क्या कर रही हो..! रास्ते में, तुम्हारी ये जवानी देख करमनचले लड़के उठा ले जाएँगे और चोद चोद कर तुम्हारे चूत का भरता बना देंगे..! तुम अगर, अपने पति के पास चली गई तो फिर मेरा क्या होगा..! मेरे लण्ड की प्यास तो अभी शांत नहीं हुई..!
मिष्टी दो घंटे तक तो मेरी फुददी और गाण्ड चोद चुके..! फिर भी तुम्हारे लण्ड की प्यास नहीं बुझी..!
मैं अरे नहीं, मिष्टी जानेमन..! तुम्हारी चूत ही ऐसी है की इसे जितनाचोदो तो और चोदने का मन करता है..! तुम कल, अपने पति से मिल लेना..! आज तो दिन भर, मैं तुम्हारी चूंचियों को मसलते हुए तुम्हारी चूत और गाण्ड चोदता रहूँगा..!
मिष्टी अच्छा..! चलो, अगर अब भी तुम में जान बाकी है तो आ जाओ मैदान में..! देख क्या रहे हो..!
यह चुनौती सुनते ही, मैंने मिष्टी को बाहों में जकड लिया।
उसे बिस्तर पर गिरा दिया और उसकी तनी हुई चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही, मसलने लगा।
मैंने अपने जलते होंठ, उसके रसीले होंठों पर रख दिए।
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उसने हल्का सा मुख खोला और इसी बीच, मैंने अपनी जीभ उसके मुख में घुसा दी।
अब, मैंने उसकी साड़ी ऊपर उठा के उसकी कमर में लपेट दी और उसकी चूत की दरार पर, अपनी उंगली टीका दी।
मैं काफ़ी देर उसकी चूत की दरार को उंगली से रगड़ता रहा और फिर उंगली चूत में तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा।
फिर मैंने दो उंगली उसकी चूत में डाली और बाद में तो तीन उंगली डाल के उसकी चूत की, उंगली चुदाई की।
वह भी मेरी जांघों की तरफ झुक गई और मेरे लण्ड को बाहर निकाल लिया।
कुछ देर मेरे लण्ड से खेलने के बाद, उसने मेरा लण्ड मुख में ले लिया और बड़े प्यार से चूसने लगी।
हम, एक दूसरे को 10 मिनट तक चाटते और चूसते रहे।
इसके बाद, मैंने उसे चित लिटा दिया और मेरा लण्ड उस की चूत के मुहाने पर टीका दिया।
चूत के मुख पर लण्ड का स्पर्श पाते ही, उसने मेरी कमर कस के जकड ली और साथ ही साथ अपनी गाण्ड भी उठा दी और मेरा लण्ड एक ही झटके में उसकी चूत में समा गया।
फिर मैं रफ़्तार तेज़ करता गया और एक बार फिर, मेरे लण्ड और उसकी चूत में भीषण युद्ध छिड़ गया।
मिष्टी ऊओ आ आहह उन..! अरे..! बहन चोद और ज़ोर से चोद..! हाँ..! और कस के, मेरे राजा..! और कस के चोदो..! और..! हान्न्न..!
मैं सम्भालो, मेरी जान..! मैं तुम्हारी चूत में पुरे ज़ोर से पेल रहा हूँ,अपना लण्ड..! मेरे पूरे लण्ड को, अपनी चूत में ले लो..!
मिष्टी चोदो..! और ज़ोर से चोदो..! पूरा भीतर पेल पेल के चोदो..! मेरे राजा..!
मैं उसे पागलों की तरह, चोदे जा रहा था।
मैं ओह, मिष्टी जानेमन..! मैं आ रहा हूँ..! लो सम्भालो..!
मिष्टी मैं भी झड़ने वाली हूँ..! ओह..! मारो मेरी चूत, आज जी भर के..! और इस बार पता नहीं क्या क्या बकते हुए, हम साथ साथ झड़ गये।
मेरे लण्ड से रस के फव्वारे छूट रहे थे और उसकी चूत मेरे रस से भरी जा रही थी।
आज तो मैंने उसकी वह चुदाई की, जो मैंने अपनी बीवी नीरू की भी कभी नहीं की।
फिर, उसने मेरा लण्ड अपने मुख में ले लिया और उसे चाट चाट के साफ़ करने लगी।
उसने अपनी टाँगें फैला कर, अपनी बुरी तरह से चुदी हुई भोसड़ी चौड़ी कर दी और मेरे मुख को अपनी चूत से लगा दिया, जिसे मैंने भी चाट चाट के साफ़ कर दिया..
अब मैंने पूछा मज़ा आया, भाभी..! ??
मिष्टी बहुत..! जितना तुम्हारी बीवी बताती है, उस से भी ज़्यादा..!
मैं भाभी, कुछ ऐसा आइडिया लगाओ की मैं तुम्हें अपनी बीवी के सामने चोद सकूँ..! मैं तुम दोनों को एक साथ चोदना चाहता हूँ..! और अगर तुम ऐसा कुछ आइडिया लगा सको की तुम्हें तुम्हारे पति के सामने चोदने का मेरा सपना पूरा हो जाए..! प्लीज़, कोई उपाय करो ना ताकि वो खुद तुम्हारी चूत अपनी उंगलियों से फैला कर, तुम्हारी चूत में मेरा लण्ड डालवा ले..! या फिर किसी और से ही मेरे सामने चुदवा लो ताकि तुम्हारी चूत में घुसते निकलते लण्ड को मैं देख सकूँ..!
मिष्टी वापस तो चलो..! कोई ना कोई, आइडिया सोचती हूँ..! मैं भी तुम्हें अपने सामने तुम्हारी बीवी को चोदते हुए देखना चाहती हूँ..! चूत में घुसते निकलते लण्ड को देखने में, मुझे भी बड़ा मज़ा आता है..!
मैंने पूछा अरे!! तुमने कब किसी को चुदवाते हुए देखा..! ??
उस ने बताया के एक दिन मैं घर पर अकेली थी, तभी मेरे घर की कॉल बेल बज उठी।
मैंने दरवाजा खोला तो सामने मेरा एक बहुत पुराना आशिक़ खड़ा था।
उसे देखते ही, मुझे अपने उसके साथ बिताए हुए दिन याद आने लगे।
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मैं उसके साथ बिताए, हसीन पलों में खो कर रह गई।
मुझे तो होश तब आया जब उसने कहा अरे मिष्टी, क्या मुझे अंदर आने को नहीं कहोगी..!
मिष्टी अरे, आ जाओ ना..! और वो अंदर आ गया।
मैं उसे सीधे अपने बेड रूम में ले गई।
मिष्टी का आशिक़ तुम तो पहले से भी ज़्यादा खूबसूरत हो गई हो..!
मिष्टी मज़ाक करते हो..!
मिष्टी का आशिक़ अरे नहीं, तुम्हारी जवानी तो और खिल गई है..! लगता है, तुम्हारा पति तुम्हारा बहुत ख़याल रखता है..!
मिष्टी छोड़ो भी..! तुम फ्रेश हो जाओ, मैं कुछ खाने को लाती हूँ..!
मिष्टी का आशिक़ मैं रास्ते में खा कर आया हूँ..! कुछ खिलाना ही है तोएक बार, अपना हुस्न खिला दो ना..! मैं बहुत दिनों से तुम्हारे लिए तड़परहा हूँ..! और उसने मुझे अपने बाहों में जकड लिया।
मिष्टी अरे सब्र करो..! जब तुम आ ही गये हो तो जी भर के कर लेना..! अभी कोई आ गया तो लेने के देने पड़ जाएँगे..!
मिष्टी का आशिक़ जो भी हो..! अब तो मुझ से बर्दशात नहीं हो रहा है..! प्लीज़, एक बार कर लेने दो..! प्लीज़..!
और फिर उसने मेरे चूचियों को मसलना शुरू कर दिया।
वो मेरे गालों और होंठों को भी, चूमता जा रहा था।
उसने धीरे धीरे, मेरे कपड़े खोलना शुरू कर दिया।
कुछ ही देर में, मैं उसके सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी और वो मेरी चूचियों को और मेरी चूत को निहारे जा रहा था।
फिर वो मुझे अपनी बाहों में भर कर, मेरी चूंचियों को मसलने लगा।
मैं भी उसके कपड़ो को एक एक कर के खोलने लगी।
जब हम दोनों बिल्कुल नंगे हो गये तो वो मुझे बिस्तर पर खींच लाया।
वो मेरी चूत को टटोलने लगा।
मैं उसके खड़े लण्ड को सहलाने लगी।
वो बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो चुका था.. इसलिए, बिना वक़्त गँवाए ही मुझे लेटा कर, मेरी चूत में अपना खड़ा लण्ड डाल कर चोदने लगा..
बहुत दिनों बाद, उसका मोटा लण्ड मिला था.. इस लिए, मैं भी बड़ी मस्ती में उस से चुदवा रही थी..
हम दोनों इतने मस्ती में थे की अब हमें किसी बात का होश नहीं था।
उसका लण्ड, मेरी चूत में दाना दान अंदर बाहर हो रहा था।
राज शर्मा स्टॉरीज पर पढ़ें हजारों नई कहानियाँ !!! !!
मैं अपना चुत्तड़ उठा उठा कर, उस से चुदवा ही रही थी के एक दम तुम्हारी बीवी मेरे बेड रूम में आ गई।
बेड रूम का दरवाजा बंद करना, हम भूल गये थे।
वो घबरा कर, मुझ से अलग हुआ और अपने नंगे बदन को छुपाने लगा।
तुम्हारी बीवी, मेरी चूचियों पर घूसा मारती हुई बोली अरे रंडी!! ये क्या कर रही हो..! कौन है ये, जिस से तुम ऐसे दिन दहाड़े चुदवा रही थी..!आने दो तुम्हारे पति को, आज मैं तुम्हारी दूरगत बनवाती हूँ..!
मिष्टी प्लीज़, ऐसा मत करना..! तुम जो कहोगी, मैं मानने को तैयार हूँ..! लेकिन, मेरे पति को ये सब मत बताना..!
नीरू ठीक है..! नहीं बताउंगी..! लेकिन, इस के लिए एक शर्त है..!
मिष्टी मुझे मंजूर है, अपनी शर्त बताओ..!
नीरू शर्त ये है की तुम मेरी आँखों के सामने इस से चुदवाओ..! मैं तुम्हारी चुदाई का खेल देखना चाहती हूँ..!
मिष्टी बस इतनी सी बात..! ये तो मैं कर ही रही थी..!
नीरू अब मेरे सामने करो..!
मिष्टी आओ मेरे राजा..! मेरी फुददी, इसके सामने चोद कर देखा दो..! येसाली, बहुत बड़ी छीनाल है..! अक्सर ब्लू फिल्म देखा करती है और कई बार लाइव ब्लू फिल्म देखने को कहा करती थी..! आज इसे जी भर के दिखा दो..!
मेरी बात ख़त्म होते ही, उसने फिर से मुझे पकड़ कर बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे जाँघों को फैला कर मेरी चूत में अपना मोटा लण्ड डाल कर दाना दान चोदने लगा।
तुम्हारी बीवी मेरे बगल में बैठ कर, मेरी चुचियों को मसलने लगी।
वो झुक झुक कर, मेरी चूत में उसके लण्ड को घुसते निकलते देख रही थी।
मेरी चूत में अपने लण्ड से धक्का मारते मारते, मेरे चोदु यार ने तुम्हारी बीवी की एक चूची को पकड़ कर मसल दिया।
मिष्टी का आशिक़ अरे भाभी..! तुम्हारी चूची तो इस से भी ज़्यादा मस्त और नरम है..!
नीरू अभी तो कपड़े के ऊपर से छुआ है..! नंगी कर के देखो और छुओ तो इस साली की चूची कभी याद भी नहीं आएगी..! तुम जो इसके पचासों मर्दों से चुडवाई हुई चूत पे इतने दीवाने हुए जा रहे हो..! जब मेरी चूत देखोगे तो उसे चोदने के लिए, पागल हो जाओगे..!
तुम्हारी बीवी, अपना एक हाथ अपनी चूची पर और एक साड़ी के ऊपर से चूत पर रख कर दबाते हुए बोल पड़ी।
मिष्टी का आशिक़ ज़रा, इन्हें खोल कर दिखाओ ना..!
मुझे चुदवाते हुए देख कर, नीरू भी पुरे मस्ती में आ चुकी थी।
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उसने फटा फट, अपने सारे कपड़े खोल डाले और मेरे चोदु यार का मोटा लण्ड मेरी चूत से खींच कर, अपनी चूत के तरफ करने लगी।
उसने मेरे यार का लण्ड इतना ज़ोर से खींचा था की वो दर्द से छटपटाते हुए मुझ से अलग हो कर, तुम्हारी बीवी को पटक कर उसके ऊपर चढ़ते हुए एक ही धक्का में अपना पूरा लण्ड उस की चूत में घुसा दिया।
ऐसे जबरदस्त धक्के के लिए, नीरू तैयार नहीं थी और वो दर्द के मारे ज़ोर से चिल्ला उठी।
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आहह ह ह ह हह ह ह ह हह..!
घबरा कर, उसने अपना लण्ड वापस खींच लिया।
इस पे नीरू, उसकी खिल्ली उड़ाती हुए बोल पड़ी अरे साले, मादर चोद..! चोद ना..! छोड़ क्यों दिया..!
फिर, वह अपना लण्ड उस की चूत में पेल कर जल्दी जल्दी धक्के मारने लगा।
तुम्हारी बीवी की चूत में, उसका लण्ड बड़ी तेज़ी के साथ अंदर बाहर हो रहा था।
अपनी चूत में पड़ते, उसके हर धक्के के जवाब में नीरू बड़ी तेज़ी से अपनी गाण्ड ऊपर की तरफ उछाल देती।
गाण्ड उठा उठा कर, वो बड़ी मस्ती में चुदवा रही थी।
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उसकी चूत में तबाड तोड़, उसका लण्ड अंदर बाहर आ जा रहा था।
तुम्हारी बीवी के मुँह से बड़ी अजीब किस्म की सिसकारियाँ निकल रही थी। उंह माँ चोद डाल..! आँह यहम..! रंडी हूँ मैं..! आ आ आ आ आ आ आ..! मुझे एक साथ तीन चार लंड चाहिए..! छीनाल बनवा दो मुझे..! उन्ह ह ह ह ह ह..! बहन चोद द द द द द..! चोद ह ह s s s s s s..!
अपनी चूत में, उसके लण्ड से धक्के मरवती हुई उसने मुझे अपने ऊपर खींचलिया और मेरी एक चूची को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और अपना हाथ मेरी चूत पर रख कर, अपनी उंगलियों से मेरी चूत को चोदने लगी।

ये सब देख कर, मेरा यार और मस्ती में आ गया और तुम्हारी बीवी के चूत में और जल्दी जल्दी, अपना लण्ड अंदर बाहर करने लगा।
वो भी गाण्ड उछाल उछाल कर, चुदवाती रही।
काफ़ी देर की लगातार चुदाई के बाद, उसका लण्ड तुम्हारी बीवी की चूत में ही अपना पानी छोड़ने लगा।
इस पर वह और ज़्यादा मस्त हो कर, उस से और ज़ोर से चिपक गई।
अब उस की चूत ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया।
दोनों काफ़ी देर तक, एक दूसरे से हाँफते हुए चिपके रहे फिर अलग हुए।
अब तुम्हारी बीवी ने अपनी चूत के, अगल बगल और मेरे यार के लण्ड के अगल बगल फैले चूत और लण्ड के मिश्रीत पानी को, चाट कर साफ़ करने का हुक्म मुझे दिया।
मैंने इनकार किया तो फिर मेरे पति से सब कुछ बता देने की धमकी देने लगी।
जिसके कारण, पहले उस की चूत को फिर अपने यार के लण्ड को चाट चाट कर मैं साफ़ करने लगी।
जब मैं अपने यार के लण्ड को चाट कर साफ़ कर रही थी तब नीरू मेरी चूत को फैला कर, मेरी चूत में अपनी जीभ डाल कर चाट रही थी।
मेरी चूत में चलती हुई उसकी जीभ का असर, मेरी चूत पर होने लगा।
मेरी फुददी, जो पहले से ही नीरू के चुदाई को देख देख कर पागल हो चुकी थी अब और ताव में आ गई।
उधर, मेरे यार के लण्ड पर भी मेरे मुँह का असर होने लगा।
उसका लण्ड फिर से खड़ा हो गया।
उसने फिर एक बार, मेरी चूत में अपना लण्ड डाल कर चोदना शुरू किया।
नीरू, अब मेरी गाण्ड सहला रही थी।
उसने मेरी गाण्ड में अपनी उंगली अंदर बाहर करना शुरू किया।
ये देख कर, मेरे यार के मन में ना जाने क्या आया की उसने मेरी चूत से अपना लण्ड निकाल कर मेरी गाण्ड में पेल दिया।
अब वो मेरी गाण्ड मार रहा था और झुक कर नीरू मेरी फुददी चाट रही थी और मेरा यार, अपनी जीभ से तुम्हारी बीवी की चूत चाट रहा था।
वो इतने ज़ोर से मेरी गाण्ड में अपना लण्ड पेल रहा था की लगता था मेरी गाण्ड फट जाएगी और मैं बेहोश हो जाउंगी।
मैं गिड गीडा कर उस से अपना लण्ड निकाल लेने को कहने लगी, जिस से उसे मुझ पर दया आ गई और उसने अपना लण्ड मेरी गाण्ड से खींच लिया।
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लेकिन, उसका लण्ड अब भी पुरे ताव में था इस लिए उसने तुम्हारी बीवी को कस के पकड़ते हुए उसकी गाण्ड में अपना लण्ड पेल दिया और ज़ोर ज़ोर से तुम्हारी बीवी की गाण्ड मारने लगा।
नीरू दर्द से छटपटाती रही, लेकिन बिना दया किए वो उसकी गाण्ड चोदता रहा।
अब उसका लण्ड तुम्हारी बीवी की गाण्ड में सटा सट अंदर बाहर हो रहा था।
नीरू भी अब मस्ती में आ चुकी थी और अपना चुत्तड़ हिला हिला कर,अपनी गाण्ड मरवा रही थी।
करीब दस पंद्रह मिनट तक लगातार तुम्हारी बीवी की गाण्ड में धक्का मारते मारते, उसने उसकी गाण्ड में ही अपना पानी छोड़ दिया।
फिर हम लोग, अपने अपने कपड़े पहन कर बैठ गये और बातें करने लगे तभी मेरे पति आ गये।
मैंने कहा अरे, भाभी ये सब बातें तो मुझे आज तक पता नहीं थी..! छीनाल की जनि, मेरे सामने सती साबित्री बनी रहती है और अकेले में गैर मर्द से अपना चूत ही नहीं गाण्ड भी चुदवाती है..! साली रंडी की गाण्ड में,जब भी मैं अपना लण्ड पेलने की कोशिश करता हूँ तो गुस्से में पागल हो जाती है..!
मिष्टी के मुँह से चुदाई और गाण्ड मरवाने की अपनी बीवी की कहानी सुन कर, मेरा लण्ड फिर से तैयार हो चुका था और मैं बोला आओ..! एक बार आप ही, अपनी गाण्ड मार लेने दो..!
उसने मेरे सामने घुटनों और कोहनी के बल झुक, गाण्ड हवा में उँची कर दी।
मैं उसके पीछे गया और उसकी मस्त गोल, गोरी, नरम गाण्ड फैला के उसके गाण्ड के छेद पर लण्ड का सुपाड़ा टीका दिया और मैं उसकी मस्त गाण्ड खूब मस्ती के साथ मारने लगा।
दस मिनट तक, मैंने उस की गाण्ड मारी और फिर उस की गाण्ड में झड़ गया।
मिष्टी भाभी की दस मिनट तक अच्छी तरह से गाण्ड मारकर, हम दोनों करवट के बल लेट गये।
बातों ही बातों में, मिष्टी एक और परदा खोलने लगी जैसा की मैं तुम्हेंपहले भी बता चुकी हूँ की नीरू मेरी बहुत अच्छी सहेली है..! हम दोनों केबीच, किसी तरह की सीक्रेसी नहीं है..! हम अपनी अपनी चुदाई की कहानियाँ, एक दूसरे से अक्सर बताते रहते हैं..!
एक दूसरे की कहानी, सुनते सुनते कभी कभी हम उत्तेजित हो जाया करती हैं और एक दूसरे के बदन से चिपक कर एक दूसरे के गुप्तांगों को सहलाने,मसलने और चाटने लगते हैं।
एक दिन, ऐसे ही हम एक दूसरे के साथ मौज कर रहे थे।
मैं काफ़ी देर से उस की चूत को अपनी जीभ से सहला और चाट रही थी।
वो मेरी चूत में उंगलियाँ पेल रही थी। लेकिन, हमारी उत्तेजना शांत होने के बजाय और बढ़ते जा रही थी।
हमें किसी जवान मर्द के मोटे तगड़े लण्ड की जबरदस्त ज़रूरत महसूस होने लगी थी।
उसने कोई तरकीब निकालने को कहा।
थोड़ी देर के राय मशवरा के बाद, हम फेवा ताल (एक टूरिस्ट प्लेस, ..! में) की तरफ निकल पड़े।
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शाम का वक़्त था। इस समय अक्सर मनचले छोकरे ताल पर घूमने आई लड़कियों और औरतों को घूरते और कभी कभी, उन के साथ छेड़खानी करने का दुस्साहस करते पाए जाते थे।
हम दोनों ने वहाँ जाने से पहले, एक दूसरे को काफ़ी अच्छी तरह सज़ा संवार दिया था।
हम दोनों साड़ी ब्लाउज में थे।
हम ने बिना बाँह का लो-कट ब्लाउज पहन रखा था, जिस से हमारे पूरे पेट और कमर का हिस्सा नंगा तो था ही, लो कट ब्लाउज के बड़े गले से हमारी चूंचियों का काफ़ी हिस्सा नज़र आ रहा था।
ब्लाउज के कपड़े इतने महीन थे के उस में से हमारे ब्रा की सिलाई का एक एक धागा, साफ़ साफ़ नज़र आ रहा था।
साड़ी भी हम दोनों ने कमर के काफ़ी नीचे बाँध रखी थी।
जिस से हमारी खूबसूरत पेट और ढोंढी, साफ़ साफ़ नज़र आ रहे थे।
मैं पुरे यकीन से कह सकती हूँ के हमें इस पोज़ में देख कर किसी भी मर्द के लण्ड को हमें चोदने के लिए, व्याकुल हो जाना तो साधारण बात थी।
हम जैसी मनचली दूसरी लड़कियों का मन भी हमारी चूंचियों से खेलने और हमारे जवान अंगों से खेलने को हो सकता था।
हम झील के किनारे, इधर से उधर अपनी गाण्ड को मटकाते हुए किसी ऐसे मर्द की तालश में घूम रहे थे जो हमारे चूत की गरमी को अपने लण्ड से चोद चोद कर शांत कर सके।
अभी तक हमें कोई ऐसा मर्द नहीं दिखलाई दे रहा था।
शाम होने को थी।
हम मायूस होने लगे थे की आज कोई हमें चोद कर, हमारी जवानी की आग को शांत करने वाला नहीं मिलने वाला है।
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हम झील के किनारे, एक एकांत जगह पर एक दूसरे से सात बैठ गये और एक दूसरे के चूत को थप थापा कर सांत्वना दे रहे थे।
तभी एक हसीन जोड़ी, उसी तरफ आते हुए दिखाई दिया।
वो हम से कुछ ही दूरी पर आ कर, बैठ गये।
मर्द की उम्र, कोई 40-45 साल के आस पास होगी और उस के साथ आई लड़की की उम्र 17-18 के करीब रही होगी।
देखने में, वो दोनों बाप बेटी लग रहे थे।
लड़की देखने में काफ़ी खूबसूरत थी।
वो टाइट जीन्स में काफ़ी सेक्सी लग रही थी।
मर्द साधारण व्यक्तित्व का था।
हम ने उन के ऊपर, कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया।
उन के हमारे करीब आ कर बैठ जाने से, हमें कुछ अच्छा नहीं लग रहा थाक्यों की अब हम एक दूसरे से ना तो खुल कर चुदाई की बातें ही कर सकते थे और ना ही एक दूसरे के बदन के साथ छेड़खानी कर के आनंद ही उठा सकते थे.. इस लिए, हम वहाँ से झील के दूसरे किनारे की तरफ जाने के सल्लाह कर ही रहे थे की लड़की के खिल खिला कर हँसने की आवाज़ से,हम उन की तरफ आकर्षित हो गये..
वो मर्द, जो देखने में उस लड़की का बाप जैसा लग रहा था, वो हमारीउपस्थिति का ध्यान भी ना देते हुए, उस लड़की की चूचियों के साथ छेड़खानी कर रहा था।
यह सीन देख कर, मैंने तुम्हारी बीवी की चूची पर अपनी कोहनी से धक्का मारते हुए उधर देखने का इशारा किया।
वो खुद भी पहले से ही उधर देख रही थी।
वे लोग, हमारी तरफ बिल्कुल ध्यान दिए बिना अपने खेल में लगे रहे।
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अब उस मर्द ने उस लड़की को अपने गोद में खींच लिया था और उसके शर्ट के अंदर अपना हाथ डाल कर, उस लड़की की चूचियों से खेल रहा था।
वो लड़की, उस की गोद में बड़े अजीब ढंग से मचल मचल कर उस से अपनी चूचियों को मसलवा रही थी।
कुछ देर बाद, वो लड़की उसकी गोद से उतर कर उसके बगल में बैठ गई और उस मर्द के पैंट का ज़िपर खोलने लगी।
अब उस मर्द का लण्ड, उस के पैंट के बाहर उस लड़की के हाथ में झूल रहा था।
उस का लण्ड देख कर, मेरा दम घुटने लगा था,
उसके यार का साइज़, लगभग 10 इंच था।
इसे देख कर, नीरू आँह भरते हुए मेरे कानों के पास अपना मुँह लाकर बोली हाय!! मिष्टी, कितना लंबा और कैसा मोटा लण्ड है..! उसका, एक बार हमें मिलता तो मैं उस के लण्ड से अपनी चूत फाट्वा लेती..! वो लड़की तो बेहोश हो जाएगी, जब वो अपना पूरा लण्ड उसके नन्ही सी चूत में डालेगा..! इस के लण्ड से चूत फटवाने के बाद तो हम घोड़े से भी चुदवा सकती हैं, कोई उपाय सोचो इस के लण्ड से चुदवाने का, ऐसा लण्ड मैंने आज तक नहीं देखा है..!।
मैंने कहा मैं जैसा कह रही हूँ, वैसा करते जा..! वो खुद हमें चोदने को पागल हो जाएगा..!
और मैंने तुम्हारी बीवी की साड़ी उलट कर, उस की चूत पे अपना मुँह रख कर उस की चूत को अपनी जीभ से चाटने लगी।
वो अपने हाथों से, अपनी चूत फैलाए हुए थी।
हमें इस पोज़ में देख कर, वो मर्द उठ कर हमारी तरफ आने लगा और हमारे पास पहुँचते ही उस ने मेरी साड़ी को उलटा कर, मेरी गाण्ड में अपने उंगली घुसा दिया।
वो लड़की, तुम्हारी बीवी की चूची पकड़कर मसलने लगी।
थोड़ी देर तक, हम चारों ऐसे ही मस्ती लूटते रहे। फिर उस मर्द ने कहा अगर, तुम लोग पूरा मज़ा लेना चाहती हो तो हमारे साथ चलो
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मैंने कहा तुम्हारे साथ तो पहले से ही ये है, इसे चोदने के बाद क्या तुम हम दोनों की प्यास बुझा सकते हो..!
वो मर्द आजमा कर देखो, एक बार..! मुझ से चुदवाने के बाद, किसी और के लण्ड से तुम्हारी प्यास नहीं बुझेगी..! तुम दोनों के लिए, मैं अकेला काफ़ीहूँ परंतु अगर तुम लोग संभाल सकी तो मैं तुम दोनों की प्यासी चूत के लिए दर्जनों लड़कों का लाइन लगवा दूँगा..! हमारे ग्रूप में, हर उम्र के लड़केहैं जिन के पास हर साइज़ का लण्ड है..! हमारे ग्रूप में, 15 साल से लेकर60 साल तक के चुड़क्कड़ मर्द हैं..! उनके लण्ड का साइज़ 4 इंच से लेकर 10इंच लंबा तक है..! तुम जिस जिस को पसंद करोगी और जब तक चाहोगी,वो तुम्हें चोदते रहेंगे..! हमारे लड़के जवान से जवान लड़कियों की चूत से लेकर, बूढ़ी औरतों के फैले हुए भोस्डे तक को, पूरी तरह संतुष्ट करने का क़ाबलियत रखते हैं..!
मैं अच्छा चलो, एक बार आजमा कर देखते हैं की तुम्हारे और तुम्हारे लड़कों के लण्ड में कितनी ताक़त है..!
और वो हमें एक सुनसान इलाक़े में, एक सुनसान मकान के अंदर ले गया।

वहाँ पहुँच कर, उसने किसी को फोन करके बोला दो बड़ी जानदार भाभियाँ आई हुई हैं..! ये काफ़ी प्यासी भी लगती हैं..! इन की चूत की प्यास बुझाने के लिए, अपने ग्रूप के साथ आ जाओ..!
फोन करने के बाद, वो हमें एक बेड रूम के अंदर ले गया।
बेड रूम में पहुँचते ही, उस के साथ वाली लड़की मुझे अपनी बाँहों में भर कर मेरी चूचियों को मसलने लगी।
जवाब में, मैंने भी उस की चुचियों को पकड़ कर ज़ोर से मसल दिया।
फिर, उसने मेरे कपड़ो को खोलना शुरू किया।
पहले उसने मेरी साड़ी, उसके बाद ब्लाउज और ब्रा खोल कर, मेरे बदन से अलग किया।
मेरी नंगी चुचियों को बारी बारी से, अपने मुँह में लेकर बच्चों के तरहचूसती हुई और अपने हाथों में उन्हें लेकर मसलती हुई मेरे चूचियों का तारीफ़ करने लगी।
अब उसका हाथ, मेरे पेटीकोट को जबरन खींच रहा था।
अगले ही पल, मेरा पेटीकोट फिसलते हुए मेरे जांघों से नीचे के तरफ सरक रहा था।
अगले पल, मैं बिल्कुल नंगी खड़ी थी।
अब वो मुझे पलंग पर सुला कर, मेरी चूत पर अपनी जीभ रगड़ने लगी थी।
मैंने उसे अपने कपड़े भी उतार लेने को कहा तो उसने एक एक कर के अपनी जीन्स, शर्ट, ब्रा और पैंटी उतार डाली।
उस की चूचियाँ, बिल्कुल गोल परंतु काफ़ी छोटी थी।
शायद 32 सी साइज़ की होंगी।
उसने अपनी चूत पर उगे बालों को शायद आज ही साफ़ किया था, जिस से उस की छोटी और चुलबुली चूत, काफ़ी खूबसूरत दिख रही थी।
मुझे तो नीरू के साथ, अपनी चूत चटवाने और उस के चूत को चाटते हुए उस में उंगली घुसेड़ने की आदत पड़ चुकी थी।
इस की छोटी सी साफ़ सूत्री चूत को देख कर, मेरे मुँह में पानी भर आया।
मैं उसे चित लिटा कर, उसके ऊपर इस तरह से चढ़ि की मेरी चूत उस के मुँह के सामने आ गई और मेरा मुँह उस की चूत के पास था।
मैंने उस की चूत को अपने उंगलियों से फैलाया और उस की चूत के पतले गुलाबी छेद में, अपनी जीभ घुसेड कर चाटने लगी।
उसने भी, अपने हाथों से मेरी फूली हुई चूत को ज़ोर से चौड़ी कर मेरी चूत में अपनी जीभ घुसेड दी।
मैं अपनी जीभ तेज़ी के साथ उसकी चूत में और वो अपनी जीभ जल्दी जल्दी, मेरी चूत में चलाने लगी।
वो नीचे से अपने चुत्तड़ उठा उठा कर, अपनी चूत मेरे मुँह पर रगड़ रही थी।
मैं उसकी चूत में जितना संभव था, उतना अंदर तक अपनी जीभ घुसेड कर उस की चूत को ज़ोर ज़ोर से चाटते हुए उसके मुँह पर अपनी चूत ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी।
वो मेरी चूत में और मैं उसकी चूत में, अपनी जीभ घुसेड एक दूसरे की चूत चाटने में भिड़े हुए थे।
उधर, उसी बड़े पलंग पर वो मर्द नीरू को नंगा कर के, और खुद भी नंगा होकर नीरू के साथ भिड़ा हुआ था।
नीरू उसके लण्ड को अपने हाथ में लेकर, अपनी जीभ से उसे चाट रही थी और वो नीरू के चूत में अपनी उंगली डाल कर तेज़ी से अंदर बाहर कर रहा था।
नीरू अपने चुत्तड़ हिला हिला कर, अपनी चूत में उसकी उंगली डळवाते हुए उसके 10 इंच लंबे लंड को, अपनी जीभ से चाट रही थी।
वो कभी कभी, उसके लण्ड के सुपाड़े को अपने मुँह में लेकर चूसने लगती थी तो कभी उस के लण्ड पर अपनी जीभ रगड़ कर के ज़ोर से उसे चाटने लगती।
उस की उंगली लगातार, नीरू के चूत में अंदर बाहर फिसल रही थी।
नीरू ने उसे अपनी चूत में लण्ड डाल कर, चोदने को कहा।
वो नीरू को चित लिटाकर, उसके जांघों के बीच बैठ गया।
नीरू ने अपनी जांघों को मोड़ कर फैलाते हुए, अपनी जांघों के बीच उसके लिए जगह बना ली थी।
वो नीरू के जांघों के बीच बैठ कर, अपना सिर उस की चूत पर झुकाते हुएअपने दोनों हाथों से उस के चूत को चौड़ा कर उस में अपनी जीभ रगड़ने लगा।
वो नीरू की चूत चाट रहा था और तुम्हारी बीवी, अपने चुत्तड़ उछाल उछाल कर उस से अपना चूत चटवा रही थी।
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उत्तेजना के मारे, नीरू के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी थी।
अब उस की उत्तेजना इतनी बढ़ गई थी की वो चुत्तड़ हवा में उठा कर,लगातार अपना चूत उसके मुँह में ठेले जा रही थी।
नीरू उस से बोली अब बर्दशात नहीं हो रहा है..! जीभ निकाल कर, अब मेरी चूत में अपना लण्ड घुसेड कर चोद दो..! फिर चाहो तो चोदने के बाद,मेरी फुददी जी भर के चाट लेना..!
वो मर्द अच्छा, संभाल अपनी चूत..! अब मैं अपना फौलादी लण्ड, तेरी चूत में डाल रहा हूँ..!
अपने हाथों से अपनी चूत को फैलाते हुए, नीरू ने कहा डालो, मेरे राजाअपना फौलादी लण्ड, मेरी चुड़क्कड़, छीनाल, प्यासी चूत में..! औरत नहीं,रंडी की माँ हूँ मैं..! तेरा फौलादी लंड क्या, पूरा का पूरा तुझे ही खाजाउंगी..!
उसने अपने लण्ड का फूला हुआ बड़ा सा सुपाड़ा, नीरू की फैली हुई चूत के मुँह पर रख कर, एक करारा धक्का लगाया।
उसकी चूत पर उसने इतने ज़ोर का धक्का मारा था की एक ही धक्के में उसके मोटे लण्ड का आधा हिस्सा, नीरू की गरम चूत में घुस गया।
उस के लण्ड की मोटाई, इतनी ज़्यादा थी की उत्तेजना के मारे लण्ड निगलने को व्याकुल, तेरी बीवी की चूत में ज़ोर की जलन हुई.. जिस से,उसने मां ह ह s s s s s कहते हुए, अपनी गाण्ड ऐसे सिकोडी की उसका लण्ड, उसकी चूत के बाहर आ गया।
वो मर्द अरे!! गाण्ड क्यों सिकोडी..! साली, अभी अभी तो बड़ा इतरा रही थी लण्ड डलवाने के लिए..! अब क्या हुआ, मेरी रंडी की माँ..!
नीरू कुछ नहीं, धक्का इतने ज़ोर का था की मेरी चूत बर्दशात नहीं करसकी..! अब ज़रा प्यार से, मेरी चूत में अपना लण्ड पेलो..! फिर हुमच हुमच के चोदना..! कहते हुए उसने अपने हाथों से अपनी चूत फैला कर,फिर से उसका लण्ड अपनी चूत के मुँह पर रखते हुए, अपने दाँत ज़ोर से भींच लिए।
उसने फिर पहले से भी अधिक ज़ोर से, अपना लण्ड उसकी चूत में पेल दिया।
इस बार भी उस के मुँह से चीख निकल पड़ी.. पहले से भी अधिक..
लगभग, उसके लण्ड का दो तिहाई भाग उसकी चूत में एक ही धक्के में समा चुका था.. लेकिन, इस बार उस ने अपनी गाण्ड नहीं सिकोडी..
उसने तुरंत अपना लण्ड थोड़ा सा बाहर खींच कर, फिर पुरे ताक़त से एक और धक्का उस के चूत पर मार दिया, जिस से उसका लंबा और मोटा लण्ड पूरा उसकी चूत के अंदर समा गया।
उसके लण्ड ने, नीरू की चूत को कस के हिला दिया था।
उस का लण्ड, नीरू की चूत में ऐसे फिट बैठा था की लगता था किसी लोहे के रोड को किसी ने ज़ोर से प्लास से दबा रखा हो।
उस की चूत में, कहीं से थोड़ा सी भी जगह नहीं दिख रहा था।
थोड़ी देर तक उसने अपने लण्ड को यूँ ही उस की चूत में छोड़ दिया, जिस पर वो बोल पड़ी अरे, मेरे पेलू राजा..! क्या ऐसे ही चूत में लण्ड डाले पड़े रहोगे या चुदाई भी करोगे..! चलो, अब धक्के मारना शुरू करो..! मेरी चूत अब हर फौलादी धक्के के लिए तैयार है..!
उसने पहले धीरे धीरे नीरू की चूत में धक्का मारना शुरू किया.. फिर, धीरे धीरे उस की चूत में धक्कों का स्पीड बढ़ाने लगा..
अब वो तेज़ी के साथ नीरू की चूत में, अपने लण्ड को पेल रहा था।
नीरू उसके हरेक धक्कों के जवाब में अपने चुत्तड़ ऊपर की तरफ इस तरह उछाल रही थी, जैसे उसका 10 इंच लंबा लण्ड भी उस की चूत के लिए छोटा पड़ रहा हो और वो और ज़्यादा लंबा लण्ड अपनी चूत में डलवाने के लिए, व्याकुल हो रही हो।
उस के मुँह से भी बड़ी अजीब किस्म की आवाज़ निकल रही थी।
उस की चुदाई को देख देख कर, मेरी चूत भी पानी छोड़ने लगी थी।
मेरी चूत में उस लड़की के घुसती निकलती जीभ, अब कोई खास मज़ा नहीं दे पा रही थी।
मन कर रहा था की मैं अब नीरू की चूत से वो मोटा लण्ड खींच कर,अपनी चूत में डलवा कर, ज़ोर ज़ोर से धक्के लगवाऊँ।
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मैं पलंग पर खिसकते हुए, नीरू के पास चली गई और उस के पैरों के रास्ते अपना एक हाथ, उस की चूत तक ले गई।
उस का लण्ड, जब नीरू की चूत से थोड़ा बाहर आता तो मैं उसे अपने हाथों से सहला देती।
कभी कभी, उस के लण्ड के साथ ही मैं अपनी एक उंगली भी नीरू की चूत में घुसेड देती.. इस से, नीरू की उत्तेजना और बढ़ती गई..
वो बोलने लगी हाय जालिम..! तुम तो बड़े चुड़क्कड़ बन रहे थे, लेकिनतुम्हारा लण्ड तो मेरी चूत में ना जाने कहाँ खो गया है..! मेरी चूत में तुमअपना पूरा लण्ड नहीं डाल रहे हो क्या..! पूरा लण्ड मेरी चूत में पेल के,मेरी चूत में जल्दी जल्दी धक्के मारो ताकि मेरी प्यासी चूत की चुदाई कीप्यास बुझ जाए..!। हाय पेलो, अपना लंबा मूसल जैसा लण्ड..! ओह..! उनमह..! यान्ह ह ह ह ह ह s s s s s..! आहह आ ह आअ ह ह ह ह ह आ आ आ आ आ आ आ आ आ..! बहुत मज़ा आ रहा है..! इससश इनयः या मा ह ह ह ह s s s s s..!
वो भी अपनी पूरी ताक़त के साथ, उसकी चूत में धक्के मार रहा था.. लेकिनराजधानी एक्सप्रेस के पिस्टन से भी तेज़ी के साथ उस की चूत में घुसतेनिकलते उस के लण्ड की स्पीड भी नीरू को कम लग रही थी..
वो अपनी गाण्ड उछाल उछाल कर और ज़ोर ज़ोर से जल्दी जल्दी, अपनी चूत में उसके लण्ड से धक्के मरवा रही थी।
साथ ही साथ, वो चिल्लाती भी जा रही थी।
आहह ह ह ह ह ह..! आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ..! इनया या आ..! उंह ह ह ह ह ह..! मां स स्स s s s s s..! इशह..! मा की चूत त त त त त..! चोद द द द चोद द द द चोद द द द चोद द द द चोद द द द द द द s s s s s s s s s s..! उफ्फ फ फ फ फ फ..!
वो इसी तरह चिल्ला चिल्ला कर, अपनी चूत चुदवा रही थी।
उस की चूत में शताब्दी एक्सप्रेस के पिस्टन से भी तेज चाल से, उस का मोटा लण्ड घुस और निकल रहा था।
जितनी तेज़ी से वो उस की चूत में अपना लण्ड पेलता, उतनी ही तेज़ी में वो अपनी गाण्ड उछाल उछाल कर, अपनी चूत में उसका लण्ड ले रही थी।
इसी तरह, लगभग 20 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद, वो शांत हुई।
उस के शांत होते ही, उस ने अपना लण्ड उस की चूत से बाहर खींचा।
चूत से बाहर लण्ड निकलते ही, उसकी चूत पक..! की आवाज़ कर के सिकुड गई।
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उस की चूत से खींचने के बाद, उसने अपना लण्ड नीरू के मुँह के पास लेजाकर, उसके मुँह में घुसेड दिया और वो उसके लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।
करीब 4-5 मिनट की चूसाई के बाद, उसका लण्ड नीरू के मुँह में ही झड़ने लगा।
फ़च फ़च..! करके, उसके लण्ड से निकलता हुआ उसका मूठ नीरू के मुँह में उसकी जीभ पर गिरने लगा।
तुम्हारी बीवी ने अपना मुँह खोल कर, अपनी जीभ बाहर निकाल रखी थी।
उसने अपने लण्ड को निचोड़ निचोड़ कर, अपने लण्ड से निकलने वाले मूठ का एक एक कतरा, उसके मुँह में गिरा दिया।
बाप रे बाप!! उसके लण्ड से मूठ भी कितना निकाला था।
जैसा तगड़ा उसका लण्ड था, उतना ही ज़्यादा उसने मूठ भी ऊडेला था।
शर्त लगा लो, कम से कम 50-60 मिली लीटर रहा होगा, उसका वीर्य, जो उस के मुँह से फिसलकर, तुम्हारी रंडी बीवी के होंठों और गालों पर भी फैल गया था।
वो अपनी जीभ निकाल कर, उस के वीर्य को चाटने लगी।
वीर्य का जो हिस्सा उसके जीभ की पंहुच से बाहर था, उसे वो अपनी उंगलियों से अपने मुँह में लेजा कर चाट गई।
उसके बाद, उसके लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।
अब वो काफ़ी संतुष्ट दिख रही थी.. लेकिन, उसकी शानदार चुदाई को देख कर, मेरी चूत की हालत काफ़ी खराब हो गई थी।
अब मैं नीरू के मुँह के पास, अपनी जीभ ले जाकर नीरू के गालों को चाटने लगी।
अब तक उस का लण्ड नीरू के मुँह में ही था, जिसे उसने उस के मुँह से निकाल कर, मेरे मुँह में घुसेड दिया।
मैं भी तुरंत, उसके लण्ड को चूसने लगी।
धीरे धीरे, उसका लण्ड फिर से फनफ़नाने लगा।
अब मैं उस के लण्ड को अधिक से अधिक, अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।
नीरू अपनी टाँगों को फैलाकर चित लेती हुई, हमारा खेल देख रही थी।
उस की चूत के अगल बगल, उस की चूत से निकला पानी और उस में मिला हुआ, उस के लण्ड का पानी फैला हुआ था।
इधर, वो लड़की नीरू की चूत के ऊपर अपनी जीभ रख कर, उस की चूत पर फैले चूत और लण्ड के मिश्रित पानी को चाटने लगी।
वो उसकी चूत के अंदर अपनी जीभ डाल डाल कर, चूत के भीतर फैले पानी को चाट ती रही।
मैं उसके लण्ड को तब तक चूसती रही, जब तक वो फिर से फौलाद की तरह खड़ा ना हो गया।
अब उसका लण्ड, फिर से ताव में आकर फनफ़नाने लगा था।
वो साला, मेरे मुँह में ही चूत की तरह धक्के मारने लगा।
मेरी चूत तो पहले से ही नीरू की चूत की चुदाई देख देख कर, चुदवाने कोउत्तावली थी ही, ऊपर से उसके लण्ड की चूसाई और उसके द्वारा अपने मुँह में पड़ते लण्ड के धक्के का असर, मुझे सीधे अपनी चूत पर पड़ते दिखा।
मैंने उस से अपनी चूत में लण्ड डाल कर चोदने को कहा कब तक मुँह में ही लण्ड पेलते रहोगे..! मेरी चूत जल रही है, इसे अपने लण्ड से चोद कर इस की आग शांत करो..! प्लीज़..!
मेरे आग्रह को मानते हुए, उसने मुझे घुटने के बाल झुकने को कहा।
मैं अपने घुटने पे झुक गई।
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वो मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया और अपना लण्ड मेरी गाण्ड पर रगड़ने लगा।
मेरी गाण्ड पर अपना लण्ड रगड़ते रगड़ते, उसने अपना लण्ड पीछे से ही मेरी चूत पे टीका कर, मेरी चूत में पेल दिया।
मैंने अपनी चूत फैला ली।
थोड़े प्रयास के बाद ही, उसका लण्ड का सुपाड़ा मेरी चूत के फांकों को चीरता हुआ, मेरी चूत में घुस गया।
उसने मेरी चूत में, अपने लण्ड को ठीक से सेट करने के बाद मेरी कमर कोअपने हाथों से पकड़ कर, चूत में अपना लण्ड पूरी ताक़त के साथ घुसेड दिया।
उसका मोटा लण्ड, एक ही धक्के में आधे से ज़्यादा, मेरी चूत में घुस गया।
चूत में, उसके लण्ड के घुसने से थोड़ा दर्द तो हुआ.. लेकिन, अपनी चूत मेंउसके लण्ड के घुसने से जो मज़ा मुझे आया, उसकी खातिर अपने होंठों को चबा कर मैं सारा दर्द पी गई।
उसने धीरे से अपने लण्ड को थोड़ा बाहर कर के, दाना दान तेज़ी के साथ3-4 धक्के मेरी चूत में जड़ दिए, जिस से उसका पूरा लंड मेरी चूत में चला गया।
अब वो तबाड तोड़, मेरी चूत में धक्के मारने लगा।
जब वो ज़ोर से अपने मोटे लण्ड को मेरी चूत में पेलता तो लगता था की उसका सुपाड़ा, मेरी बच्चेदानी के मुँह पर घुसा मार रहा हो।
उस के मोटे लण्ड के घुसने से, मेरी चूत पूरी तरह फैल गई थी।
उस का लण्ड मेरी चूत के दाने को रगड़ता हुआ, मेरी चूत में अंदर बाहर हो रहा था।

वहाँ पहुँच कर, उसने किसी को फोन करके बोला दो बड़ी जानदार भाभियाँ आई हुई हैं..! ये काफ़ी प्यासी भी लगती हैं..! इन की चूत की प्यास बुझाने के लिए, अपने ग्रूप के साथ आ जाओ..!
फोन करने के बाद, वो हमें एक बेड रूम के अंदर ले गया।
बेड रूम में पहुँचते ही, उस के साथ वाली लड़की मुझे अपनी बाँहों में भर कर मेरी चूचियों को मसलने लगी।
जवाब में, मैंने भी उस की चुचियों को पकड़ कर ज़ोर से मसल दिया।
फिर, उसने मेरे कपड़ो को खोलना शुरू किया।
पहले उसने मेरी साड़ी, उसके बाद ब्लाउज और ब्रा खोल कर, मेरे बदन से अलग किया।
मेरी नंगी चुचियों को बारी बारी से, अपने मुँह में लेकर बच्चों के तरहचूसती हुई और अपने हाथों में उन्हें लेकर मसलती हुई मेरे चूचियों का तारीफ़ करने लगी।
अब उसका हाथ, मेरे पेटीकोट को जबरन खींच रहा था।
अगले ही पल, मेरा पेटीकोट फिसलते हुए मेरे जांघों से नीचे के तरफ सरक रहा था।
अगले पल, मैं बिल्कुल नंगी खड़ी थी।
अब वो मुझे पलंग पर सुला कर, मेरी चूत पर अपनी जीभ रगड़ने लगी थी।
मैंने उसे अपने कपड़े भी उतार लेने को कहा तो उसने एक एक कर के अपनी जीन्स, शर्ट, ब्रा और पैंटी उतार डाली।
उस की चूचियाँ, बिल्कुल गोल परंतु काफ़ी छोटी थी।
शायद 32 सी साइज़ की होंगी।
उसने अपनी चूत पर उगे बालों को शायद आज ही साफ़ किया था, जिस से उस की छोटी और चुलबुली चूत, काफ़ी खूबसूरत दिख रही थी।
मुझे तो नीरू के साथ, अपनी चूत चटवाने और उस के चूत को चाटते हुए उस में उंगली घुसेड़ने की आदत पड़ चुकी थी।
इस की छोटी सी साफ़ सूत्री चूत को देख कर, मेरे मुँह में पानी भर आया।
मैं उसे चित लिटा कर, उसके ऊपर इस तरह से चढ़ि की मेरी चूत उस के मुँह के सामने आ गई और मेरा मुँह उस की चूत के पास था।
मैंने उस की चूत को अपने उंगलियों से फैलाया और उस की चूत के पतले गुलाबी छेद में, अपनी जीभ घुसेड कर चाटने लगी।
उसने भी, अपने हाथों से मेरी फूली हुई चूत को ज़ोर से चौड़ी कर मेरी चूत में अपनी जीभ घुसेड दी।
मैं अपनी जीभ तेज़ी के साथ उसकी चूत में और वो अपनी जीभ जल्दी जल्दी, मेरी चूत में चलाने लगी।
वो नीचे से अपने चुत्तड़ उठा उठा कर, अपनी चूत मेरे मुँह पर रगड़ रही थी।
मैं उसकी चूत में जितना संभव था, उतना अंदर तक अपनी जीभ घुसेड कर उस की चूत को ज़ोर ज़ोर से चाटते हुए उसके मुँह पर अपनी चूत ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी।
वो मेरी चूत में और मैं उसकी चूत में, अपनी जीभ घुसेड एक दूसरे की चूत चाटने में भिड़े हुए थे।
उधर, उसी बड़े पलंग पर वो मर्द नीरू को नंगा कर के, और खुद भी नंगा होकर नीरू के साथ भिड़ा हुआ था।
नीरू उसके लण्ड को अपने हाथ में लेकर, अपनी जीभ से उसे चाट रही थी और वो नीरू के चूत में अपनी उंगली डाल कर तेज़ी से अंदर बाहर कर रहा था।
नीरू अपने चुत्तड़ हिला हिला कर, अपनी चूत में उसकी उंगली डळवाते हुए उसके 10 इंच लंबे लंड को, अपनी जीभ से चाट रही थी।
वो कभी कभी, उसके लण्ड के सुपाड़े को अपने मुँह में लेकर चूसने लगती थी तो कभी उस के लण्ड पर अपनी जीभ रगड़ कर के ज़ोर से उसे चाटने लगती।
उस की उंगली लगातार, नीरू के चूत में अंदर बाहर फिसल रही थी।
नीरू ने उसे अपनी चूत में लण्ड डाल कर, चोदने को कहा।
वो नीरू को चित लिटाकर, उसके जांघों के बीच बैठ गया।
नीरू ने अपनी जांघों को मोड़ कर फैलाते हुए, अपनी जांघों के बीच उसके लिए जगह बना ली थी।
वो नीरू के जांघों के बीच बैठ कर, अपना सिर उस की चूत पर झुकाते हुएअपने दोनों हाथों से उस के चूत को चौड़ा कर उस में अपनी जीभ रगड़ने लगा।
वो नीरू की चूत चाट रहा था और तुम्हारी बीवी, अपने चुत्तड़ उछाल उछाल कर उस से अपना चूत चटवा रही थी।
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उत्तेजना के मारे, नीरू के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी थी।
अब उस की उत्तेजना इतनी बढ़ गई थी की वो चुत्तड़ हवा में उठा कर,लगातार अपना चूत उसके मुँह में ठेले जा रही थी।
नीरू उस से बोली अब बर्दशात नहीं हो रहा है..! जीभ निकाल कर, अब मेरी चूत में अपना लण्ड घुसेड कर चोद दो..! फिर चाहो तो चोदने के बाद,मेरी फुददी जी भर के चाट लेना..!
वो मर्द अच्छा, संभाल अपनी चूत..! अब मैं अपना फौलादी लण्ड, तेरी चूत में डाल रहा हूँ..!
अपने हाथों से अपनी चूत को फैलाते हुए, नीरू ने कहा डालो, मेरे राजाअपना फौलादी लण्ड, मेरी चुड़क्कड़, छीनाल, प्यासी चूत में..! औरत नहीं,रंडी की माँ हूँ मैं..! तेरा फौलादी लंड क्या, पूरा का पूरा तुझे ही खाजाउंगी..!
उसने अपने लण्ड का फूला हुआ बड़ा सा सुपाड़ा, नीरू की फैली हुई चूत के मुँह पर रख कर, एक करारा धक्का लगाया।
उसकी चूत पर उसने इतने ज़ोर का धक्का मारा था की एक ही धक्के में उसके मोटे लण्ड का आधा हिस्सा, नीरू की गरम चूत में घुस गया।
उस के लण्ड की मोटाई, इतनी ज़्यादा थी की उत्तेजना के मारे लण्ड निगलने को व्याकुल, तेरी बीवी की चूत में ज़ोर की जलन हुई.. जिस से,उसने मां ह ह s s s s s कहते हुए, अपनी गाण्ड ऐसे सिकोडी की उसका लण्ड, उसकी चूत के बाहर आ गया।
वो मर्द अरे!! गाण्ड क्यों सिकोडी..! साली, अभी अभी तो बड़ा इतरा रही थी लण्ड डलवाने के लिए..! अब क्या हुआ, मेरी रंडी की माँ..!
नीरू कुछ नहीं, धक्का इतने ज़ोर का था की मेरी चूत बर्दशात नहीं करसकी..! अब ज़रा प्यार से, मेरी चूत में अपना लण्ड पेलो..! फिर हुमच हुमच के चोदना..! कहते हुए उसने अपने हाथों से अपनी चूत फैला कर,फिर से उसका लण्ड अपनी चूत के मुँह पर रखते हुए, अपने दाँत ज़ोर से भींच लिए।
उसने फिर पहले से भी अधिक ज़ोर से, अपना लण्ड उसकी चूत में पेल दिया।
इस बार भी उस के मुँह से चीख निकल पड़ी.. पहले से भी अधिक..
लगभग, उसके लण्ड का दो तिहाई भाग उसकी चूत में एक ही धक्के में समा चुका था.. लेकिन, इस बार उस ने अपनी गाण्ड नहीं सिकोडी..
उसने तुरंत अपना लण्ड थोड़ा सा बाहर खींच कर, फिर पुरे ताक़त से एक और धक्का उस के चूत पर मार दिया, जिस से उसका लंबा और मोटा लण्ड पूरा उसकी चूत के अंदर समा गया।
उसके लण्ड ने, नीरू की चूत को कस के हिला दिया था।
उस का लण्ड, नीरू की चूत में ऐसे फिट बैठा था की लगता था किसी लोहे के रोड को किसी ने ज़ोर से प्लास से दबा रखा हो।
उस की चूत में, कहीं से थोड़ा सी भी जगह नहीं दिख रहा था।
थोड़ी देर तक उसने अपने लण्ड को यूँ ही उस की चूत में छोड़ दिया, जिस पर वो बोल पड़ी अरे, मेरे पेलू राजा..! क्या ऐसे ही चूत में लण्ड डाले पड़े रहोगे या चुदाई भी करोगे..! चलो, अब धक्के मारना शुरू करो..! मेरी चूत अब हर फौलादी धक्के के लिए तैयार है..!
उसने पहले धीरे धीरे नीरू की चूत में धक्का मारना शुरू किया.. फिर, धीरे धीरे उस की चूत में धक्कों का स्पीड बढ़ाने लगा..
अब वो तेज़ी के साथ नीरू की चूत में, अपने लण्ड को पेल रहा था।
नीरू उसके हरेक धक्कों के जवाब में अपने चुत्तड़ ऊपर की तरफ इस तरह उछाल रही थी, जैसे उसका 10 इंच लंबा लण्ड भी उस की चूत के लिए छोटा पड़ रहा हो और वो और ज़्यादा लंबा लण्ड अपनी चूत में डलवाने के लिए, व्याकुल हो रही हो।
उस के मुँह से भी बड़ी अजीब किस्म की आवाज़ निकल रही थी।
उस की चुदाई को देख देख कर, मेरी चूत भी पानी छोड़ने लगी थी।
मेरी चूत में उस लड़की के घुसती निकलती जीभ, अब कोई खास मज़ा नहीं दे पा रही थी।
मन कर रहा था की मैं अब नीरू की चूत से वो मोटा लण्ड खींच कर,अपनी चूत में डलवा कर, ज़ोर ज़ोर से धक्के लगवाऊँ।
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मैं पलंग पर खिसकते हुए, नीरू के पास चली गई और उस के पैरों के रास्ते अपना एक हाथ, उस की चूत तक ले गई।
उस का लण्ड, जब नीरू की चूत से थोड़ा बाहर आता तो मैं उसे अपने हाथों से सहला देती।
कभी कभी, उस के लण्ड के साथ ही मैं अपनी एक उंगली भी नीरू की चूत में घुसेड देती.. इस से, नीरू की उत्तेजना और बढ़ती गई..
वो बोलने लगी हाय जालिम..! तुम तो बड़े चुड़क्कड़ बन रहे थे, लेकिनतुम्हारा लण्ड तो मेरी चूत में ना जाने कहाँ खो गया है..! मेरी चूत में तुमअपना पूरा लण्ड नहीं डाल रहे हो क्या..! पूरा लण्ड मेरी चूत में पेल के,मेरी चूत में जल्दी जल्दी धक्के मारो ताकि मेरी प्यासी चूत की चुदाई कीप्यास बुझ जाए..!। हाय पेलो, अपना लंबा मूसल जैसा लण्ड..! ओह..! उनमह..! यान्ह ह ह ह ह ह s s s s s..! आहह आ ह आअ ह ह ह ह ह आ आ आ आ आ आ आ आ आ..! बहुत मज़ा आ रहा है..! इससश इनयः या मा ह ह ह ह s s s s s..!
वो भी अपनी पूरी ताक़त के साथ, उसकी चूत में धक्के मार रहा था.. लेकिनराजधानी एक्सप्रेस के पिस्टन से भी तेज़ी के साथ उस की चूत में घुसतेनिकलते उस के लण्ड की स्पीड भी नीरू को कम लग रही थी..
वो अपनी गाण्ड उछाल उछाल कर और ज़ोर ज़ोर से जल्दी जल्दी, अपनी चूत में उसके लण्ड से धक्के मरवा रही थी।
साथ ही साथ, वो चिल्लाती भी जा रही थी।
आहह ह ह ह ह ह..! आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ..! इनया या आ..! उंह ह ह ह ह ह..! मां स स्स s s s s s..! इशह..! मा की चूत त त त त त..! चोद द द द चोद द द द चोद द द द चोद द द द चोद द द द द द द s s s s s s s s s s..! उफ्फ फ फ फ फ फ..!
वो इसी तरह चिल्ला चिल्ला कर, अपनी चूत चुदवा रही थी।
उस की चूत में शताब्दी एक्सप्रेस के पिस्टन से भी तेज चाल से, उस का मोटा लण्ड घुस और निकल रहा था।
जितनी तेज़ी से वो उस की चूत में अपना लण्ड पेलता, उतनी ही तेज़ी में वो अपनी गाण्ड उछाल उछाल कर, अपनी चूत में उसका लण्ड ले रही थी।
इसी तरह, लगभग 20 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद, वो शांत हुई।
उस के शांत होते ही, उस ने अपना लण्ड उस की चूत से बाहर खींचा।
चूत से बाहर लण्ड निकलते ही, उसकी चूत पक..! की आवाज़ कर के सिकुड गई।
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उस की चूत से खींचने के बाद, उसने अपना लण्ड नीरू के मुँह के पास लेजाकर, उसके मुँह में घुसेड दिया और वो उसके लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।
करीब 4-5 मिनट की चूसाई के बाद, उसका लण्ड नीरू के मुँह में ही झड़ने लगा।
फ़च फ़च..! करके, उसके लण्ड से निकलता हुआ उसका मूठ नीरू के मुँह में उसकी जीभ पर गिरने लगा।
तुम्हारी बीवी ने अपना मुँह खोल कर, अपनी जीभ बाहर निकाल रखी थी।
उसने अपने लण्ड को निचोड़ निचोड़ कर, अपने लण्ड से निकलने वाले मूठ का एक एक कतरा, उसके मुँह में गिरा दिया।
बाप रे बाप!! उसके लण्ड से मूठ भी कितना निकाला था।
जैसा तगड़ा उसका लण्ड था, उतना ही ज़्यादा उसने मूठ भी ऊडेला था।
शर्त लगा लो, कम से कम 50-60 मिली लीटर रहा होगा, उसका वीर्य, जो उस के मुँह से फिसलकर, तुम्हारी रंडी बीवी के होंठों और गालों पर भी फैल गया था।
वो अपनी जीभ निकाल कर, उस के वीर्य को चाटने लगी।
वीर्य का जो हिस्सा उसके जीभ की पंहुच से बाहर था, उसे वो अपनी उंगलियों से अपने मुँह में लेजा कर चाट गई।
उसके बाद, उसके लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।
अब वो काफ़ी संतुष्ट दिख रही थी.. लेकिन, उसकी शानदार चुदाई को देख कर, मेरी चूत की हालत काफ़ी खराब हो गई थी।
अब मैं नीरू के मुँह के पास, अपनी जीभ ले जाकर नीरू के गालों को चाटने लगी।
अब तक उस का लण्ड नीरू के मुँह में ही था, जिसे उसने उस के मुँह से निकाल कर, मेरे मुँह में घुसेड दिया।
मैं भी तुरंत, उसके लण्ड को चूसने लगी।
धीरे धीरे, उसका लण्ड फिर से फनफ़नाने लगा।
अब मैं उस के लण्ड को अधिक से अधिक, अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।
नीरू अपनी टाँगों को फैलाकर चित लेती हुई, हमारा खेल देख रही थी।
उस की चूत के अगल बगल, उस की चूत से निकला पानी और उस में मिला हुआ, उस के लण्ड का पानी फैला हुआ था।
इधर, वो लड़की नीरू की चूत के ऊपर अपनी जीभ रख कर, उस की चूत पर फैले चूत और लण्ड के मिश्रित पानी को चाटने लगी।
वो उसकी चूत के अंदर अपनी जीभ डाल डाल कर, चूत के भीतर फैले पानी को चाट ती रही।
मैं उसके लण्ड को तब तक चूसती रही, जब तक वो फिर से फौलाद की तरह खड़ा ना हो गया।
अब उसका लण्ड, फिर से ताव में आकर फनफ़नाने लगा था।
वो साला, मेरे मुँह में ही चूत की तरह धक्के मारने लगा।
मेरी चूत तो पहले से ही नीरू की चूत की चुदाई देख देख कर, चुदवाने कोउत्तावली थी ही, ऊपर से उसके लण्ड की चूसाई और उसके द्वारा अपने मुँह में पड़ते लण्ड के धक्के का असर, मुझे सीधे अपनी चूत पर पड़ते दिखा।
मैंने उस से अपनी चूत में लण्ड डाल कर चोदने को कहा कब तक मुँह में ही लण्ड पेलते रहोगे..! मेरी चूत जल रही है, इसे अपने लण्ड से चोद कर इस की आग शांत करो..! प्लीज़..!
मेरे आग्रह को मानते हुए, उसने मुझे घुटने के बाल झुकने को कहा।
मैं अपने घुटने पे झुक गई।
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वो मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया और अपना लण्ड मेरी गाण्ड पर रगड़ने लगा।
मेरी गाण्ड पर अपना लण्ड रगड़ते रगड़ते, उसने अपना लण्ड पीछे से ही मेरी चूत पे टीका कर, मेरी चूत में पेल दिया।
मैंने अपनी चूत फैला ली।
थोड़े प्रयास के बाद ही, उसका लण्ड का सुपाड़ा मेरी चूत के फांकों को चीरता हुआ, मेरी चूत में घुस गया।
उसने मेरी चूत में, अपने लण्ड को ठीक से सेट करने के बाद मेरी कमर कोअपने हाथों से पकड़ कर, चूत में अपना लण्ड पूरी ताक़त के साथ घुसेड दिया।
उसका मोटा लण्ड, एक ही धक्के में आधे से ज़्यादा, मेरी चूत में घुस गया।
चूत में, उसके लण्ड के घुसने से थोड़ा दर्द तो हुआ.. लेकिन, अपनी चूत मेंउसके लण्ड के घुसने से जो मज़ा मुझे आया, उसकी खातिर अपने होंठों को चबा कर मैं सारा दर्द पी गई।
उसने धीरे से अपने लण्ड को थोड़ा बाहर कर के, दाना दान तेज़ी के साथ3-4 धक्के मेरी चूत में जड़ दिए, जिस से उसका पूरा लंड मेरी चूत में चला गया।
अब वो तबाड तोड़, मेरी चूत में धक्के मारने लगा।
जब वो ज़ोर से अपने मोटे लण्ड को मेरी चूत में पेलता तो लगता था की उसका सुपाड़ा, मेरी बच्चेदानी के मुँह पर घुसा मार रहा हो।
उस के मोटे लण्ड के घुसने से, मेरी चूत पूरी तरह फैल गई थी।
उस का लण्ड मेरी चूत के दाने को रगड़ता हुआ, मेरी चूत में अंदर बाहर हो रहा था।

मैं अपनी कमर को आगे पीछे हिला हिला कर, उसे चोदने में सहयोग कर रही थी।
इधर, उस का लण्ड बड़ी तेज गति से मेरी चूत में अंदर बाहर होने लगा था।
अब मैं भी नीरू की तरह ही उत्तेजना के मारे, चिल्ला चिल्ला कर उस के लण्ड से अपनी चूत चुदवा रही थी।
वो दाना दान, मेरी फुददी चोदे जा रहा था।
मैं कमर हिला हिला कर, उस से चुदवाये जा रही थी।
लगभग 15-20 मिनट तक मेरी चूत को चोदने के बाद, उसने अपना लण्ड चूत से खींच कर एका एक मेरी गाण्ड में पेल दिया।
अरे, बाप रे बाप!!
मैं चिल्ला पड़ी अन्ह ह ह ह ह ह..! आआआ आ आ आ आ आ आआ..! बहन के लौड़े..! उन्म मम्म म म म म ह ह ह ह ह..! तेरी माँ का भोसड़ा,गांडू..! फूह स स स स स s s s s s..! साले, तेरी बहन का लण्ड..! निकाल भडुए, बाहर..! इस्शह..! उफ्फ ह ह ह ह ह..! तेरी माँ चुद जाये, बीच बाजार हरामी..! इयाः यामाह..! आ आ आ आ आ..! तेरी गाण्ड पर सूअर मुते, भोसड़ी वाले..! आह s s s s s s s s s s..! माँ के चूत, तेरी बहन चोद द द द द द द..! तेरे खानदान की सारी औरतें चुदेंगी, कोठे पर..! मादर चोद द द द द द द s s s s s s s s s s..!
पर, इसके बाबजूद उसने मेरी गाण्ड में 4-5 धक्के लगाकर, अपना पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में ठूंस दिया।
दर्द के मारे, मेरी गाण्ड की हालत पस्त हो चुकी थी.. लेकिन, वो मान ने वाला कहाँ था..
मेरे दर्द और मेरी गाण्ड की हालत की परवाह किए बिना, लगातार अपने लण्ड को गाण्ड में पेलता गया।
अब मेरी गाण्ड का दर्द, धीरे धीरे कम होने लगा था और मेरी गाण्ड में घुसता निकलता, उसका लण्ड धीरे धीरे मज़ा देने लगा था।
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वो गाण्ड में लण्ड को पेलने की गति तेज करने लगा।
अब उसका लण्ड गाण्ड में सटा सटा, अंदर बाहर होने लगा था।
जब उसका लण्ड गाण्ड में घुसता तो मेरी चूत भी फैल जाती और उसके लण्ड के गाण्ड से बाहर निकलते ही, मेरी चूत भी सिकुड जाती थी।
मुझे अब अपनी गाण्ड में उसका लण्ड लेने में, बहुत मज़ा आ रहा था।
मैं वैसे पहले भी कई बार अपनी गाण्ड मरवा चुकी थी.. लेकिन, गाण्ड मरवाने में मुझे आज तक, ऐसा मज़ा नहीं आया था..
गाण्ड मरवाने में, आज मुझे जो आनंद मिल रहा था उसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती।
इधर, नीरू खिसकते हुए मेरे नीचे आ गई और मेरी गाण्ड में पड़ते लण्ड केहर धक्के के असर से हिलती हुई मेरी चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसनेलगी, जिस से मेरा आनंद और भी बढ़ गया।
वो लड़की, अब भी नीरू के चूत को चाटे जा रही थी और नीरू अपने पैर सटका सटका कर उस से अपनी चूत चटवाए जा रही थी।
नीरू, मेरी एक चूची को मुँह में लेकर चूसते हुए मेरी दूसरी चूची की घुंडी को अपनी उंगलियों में लेकर मसलते जा रही थी।
इस तरह, तुम्हारी बीवी से अपना चूची चूसवाते और मसलवाते हुए, उस का लण्ड अपनी गाण्ड में लेने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
मेरा मन कर रहा था की गाण्ड में घुसते लण्ड की तरह ही, एक और मोटा सा लण्ड कोई नीचे से मेरी चूत में पेल देता।
मैं अपना हाथ नीचे लेजा कर, अपनी चूत को मलने लगी थी।
वो लड़की, शायद मेरे मन की बात ताड़ गई थी।
वो उठकर, वहीं पड़े टेबल के ड्रॉयर से दो मोटे नकली लण्ड निकाल लाई।
एक लण्ड, करीब 12 इंच लंबा था और दूसरे का साइज़ 14 इंच के आस पास था।
छोटा वाला लण्ड, नीरू ने ले लिया और उसे मेरी चूत में पेलने लगी।
दो तीन धक्कों में ही, उसने पूरा लण्ड मेरी चूत में पेल दिया।
अब एक तगड़ा लण्ड, मेरी गाण्ड में अंदर बाहर हो रहा था और उस से भी बड़ा एक लण्ड, मेरी चूत में अंदर बाहर हो रहा था।
मैंने नीरू से वो छोटा वाला लण्ड निकाल कर, बड़ा लण्ड मेरी चूत में पेलने को कहा।
उसने तुरंत मेरी चूत में उस लण्ड को निकाल कर, उस लड़की को थामते हुए उसके हाथ से लंबा वाला लण्ड लेकर, मेरी चूत में पेल दिया।
वो लड़की, मेरी चूत से निकाल कर दिए लण्ड को नीरू के चूत में पेलने लगी।
अब मेरी चूत में 14 इंच लंबा और गाण्ड में 10 इंच लंबा लण्ड, साथ साथ अंदर बाहर होने लगे थे।
मैं तो अपने दोनों छेदों में घुसते निकलते लंड के मज़े को पकड़, स्वर्ग का सफ़र करने लगी थी।
यूँ ही तेरी बीवी, मेरी चूत में और वो जालिम मर्द मेरी गाण्ड में, अपना लण्ड पेलते रहे।
मैं गाण्ड हिला हिला कर, अपनी गाण्ड और चूत में एक साथ लण्ड लेती रही।
उधर, वो लड़की नीरू के चूत में 12 इंच लंबा आर्टिफिशियल लण्ड पेलकर हिलाते जा रही थी।
मैं चरम बिंदु के करीब पहुँच चुकी थी की तभी उस ने अपने लण्ड का पानी मेरी गाण्ड में उडेल दिया।
मेरी चूत भी ठीक उसी वक़्त, अपना पानी छोड़ने लगी।
वो अपना लण्ड कच कचाकर मेरी गाण्ड में और नीरू आर्टिफिशियल लण्ड को मेरी चूत में ठेले हुए थी।
मैंने अपनी चूत और गाण्ड दोनों बड़ी ज़ोर से सिकोडे हुए, अपने दोनों छेदों में एक एक लण्ड को संभाली हुई थी।
हमारी पहले दौर की चुदाई ख़तम होते ही, बाहर से दरवाजा नॉक हुआ..! ..!
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उस लड़की ने कौन है पूछते हुए, दरवाजा खोल दिया।
रूम में एक साथ, 10 लड़के दाखिल हुए।
हमें पहले से ही नंगा देख कर, वो जल्दी जल्दी अपने कपड़े खोलने लगे और कुछ ही देर में, वो सब भी नंगे हो गये।
उन में से हर एक का लण्ड खड़ा हुआ था।
उन में से किसी का भी लण्ड 7-8 इंच से कम का नहीं था।
वो दो ग्रूप में बँट कर, हम दोनों की तरफ बढ़ने लगे।
मेरे पास आकर, एक ने मेरी एक चूची को तथा दूसरे ने मेरी दूसरी चूची को अपने हाथों में ले लिया और मसलने लगे।
एक ने मेरी चूत में तथा एक ने मेरी गाण्ड में, उंगली पेल दी और अंदरबाहर करने लगे, पाँचवे लड़के ने अपना लण्ड मेरे मुँह में पेल दिया, जिसेमैंने फ़ौरन चूसना शुरू कर दिया।
ठीक इसी तरह, नीरू के गाण्ड तथा चूत में दो लड़के अपनी उंगली पेलने लगे तथा दो लड़के उसकी एक एक चूची अपने मुँह में लेकर चूसने लगे और पाँचवे ने अपना लण्ड उसके मुँह पे सटा दिया, जिसे वो चूसने लगी थी।
नीरू, उन दोनों लड़कों का लण्ड अपने दोनों हाथों में लेकर सहला रही थी जो उसकी चूचियों को चूस रहे थे।
मेरे और नीरू की गाण्ड और चूत में जो लड़के अपनी उंगलियाँ अंदर बाहर पेल रहे थे, उनका लण्ड हमारी कमर के पास हिचकोले मार रहे थे।
हम दोनों के साथ, एक बार में पाँच पाँच लड़के भिड़े हुए थे।
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वो पहले वाला मर्द जो अभी कुछ ही देर पहले तेरी बीवी को और फिर मुझे चोद चुका था वो अब उस लड़की को अपनी गोद में लेकर, सोफे पे बैठा हमारा खेल देखता हुआ, उसकी छोटी छोटी चूचियों से खेल रहा था।
वो लड़की, उसकी गोद में बैठी अपने चुत्तड़ उस के लण्ड पे रगड़ रही थी।
उस का लण्ड, उसके चुत्तड़ को स्प्रिंग की तरह ऊपर उठा रहा था।
दस पंद्रह मिनट तक, हमारे साथ ऐसे ही खेलते खेलते वो लड़के काफ़ी गरम हो गये।
हम दोनों का बदन तो पहले से ही गरम था ही ऊपर से दस दस लड़कों के तनतनाए हुए लण्ड देख कर और अपने बदन पे उनके द्वारा की गई छेड़खानी के कारण, हमारी चूत में खुजली होने लगी थी।
उन में से मेरी चूंचियों से खेलते लड़कों में से एक ने नीचे चित लेटते हुए,मुझे अपने ऊपर खींच लिया और अपना लण्ड मेरी चूत पे रखते हुए मुझे ऊपर से धक्का मारने को बोला।
जब मैंने ऊपर से धक्का मारा तो उसने नीचे से अपना चुत्तड़ उछाल कर,अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में पेल दिया।
मेरी दूसरी चूची से खेलता लड़का, मेरे पीछे आकर उसने मेरी गाण्ड में अपना लण्ड पेल दिया।
मेरी गाण्ड में उंगली करते लड़के ने, अपना लण्ड मेरे मुँह में रख दिया जिसे मैं चाटने लगी।
बाकी दोनों लड़कों का लण्ड, मैं अपने हाथों में लेकर सहलाने लगी।
उसी तरह, एक लड़के के ऊपर चढ़ कर नीरू ने उसका लण्ड अपनी चूत में ले लिया और ठीक मेरी ही तरह एक लड़के ने अपना लण्ड उस की गाण्ड में और दूसरे ने अपना लण्ड उस के मुँह में पेल दिया था।
वो भी एक एक लड़के का लण्ड, अपने हाथों में लेकर सहला रही थी।
हम दोनों की चूत, गाण्ड और मुँह में एक एक लण्ड एक साथ अंदर बाहर हो रहे थे और हम अपने हाथों में एक एक लण्ड पकड़े, कभी उन्हें सहलाने लगती थीं तो कभी सिर्फ़ ज़ोर से पकड़ कर अपनी चूत गाण्ड और मुँह में लण्ड पेलने का मज़ा लेने लगती थीं।
हमारी चूत और गाण्ड में उनके लंड के धक्के की स्पीड, हर पल बढ़ती ही जा रही थी।
चूत और गाण्ड में जिस रफ़्तार से लण्ड घुस और निकल रहे थे, उस से भी तेज गति से हमारे मुँह में लण्ड का धक्का पड़ रहा था।
आनंद के मारे, हम पागल हुए जा रही थीं।
ऐसी जानदार चुदाई का खेल, हम दोनों में से किसी ने भी आज से पहले नहीं खेला था।
दस पाँच मिनट की शानदार चुदाई के बाद, उन लड़कों ने अपना पोज़िशन चेंज किया।
मेरी गाण्ड में जो अब तक अपना लण्ड पेल रहा था, वो अब अपना लण्ड मेरे मुँह में पेलने लगा।
जिन दो लड़कों का लण्ड, मैं अपने हाथों से सहला रही थी उन में से एक नेअपना लण्ड मेरी चूत में और दूसरे ने अपना लण्ड मेरी गाण्ड में पेल, धक्कामारने लगा।
नीरू की चूत चोदते लड़के ने, अपना लण्ड अब उस के मुँह में पेल दिया और जिन दो लड़कों का लण्ड वो हाथों से सहला रही थी, उन में से एक ने अपना लण्ड उसकी चूत में और दूसरे ने अपना मोटा लण्ड उसकी गाण्ड में पेल कर, घचा घच चोदना शुरू कर दिया था।
करीब एक घंटे की चुदाई के बाद, सभी लड़कों ने एक के बाद एक चूत में किसी ने गाण्ड में किसी ने मुँह में और बाकी दो ने जिस्म के उपर अपना अपना वीर्य छोड़ दिया।
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अब हमें वहाँ लाने वाले मर्द ने कहा अरे भाभियों, आज मेरी वजह से तुमलोगों को इतने शानदार चुदाई का मौका मिला और तुम्हारी घंटों की जानदार चुदाई देख देख कर, मेरा लण्ड तुम्हारे चूत और गाण्ड के लिए पागल हो रहा है..! कम से कम, एक एक बार अपना चूत और गाण्ड का रसपान तो करा दो इसे..!
उसके आग्रह और उसके लपलपाते लण्ड पे, हमें तरस आ गया और फिर पहले नीरू ने और उस के बाद मैंने उसके लण्ड को एक एक बार अपनी चूत और गाण्ड का रसपान करा दिया।
हमारे चूत और गाण्ड से, उनका वीर्य टपक टपक कर बाहर चू रहा था।
हमारे बदन पे भी हर जगह उन का वीर्य लगा हुआ होने के कारण, हमारा पूरा बदन चिप चिपा हो गया था।
हमें लाने वाले मर्द ने हमें एक दूसरे के चूत और गाण्ड से टपकते वीर्य को चाटने का और एक दूसरे के बदन पे लगे वीर्य को चाट चाट कर साफ़ करने का निर्देश दिया।
हमने वैसा ही किया।
फिर हम ने उस के बाथरूम में जाकर, पेशाब किया और नहाने लगे।
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हमारी चूत और गाण्ड उन में पड़े उनके घंटों के धक्के के कारण, दोनों फूल कर लाल लाल हो गई थी।
उसी तरह हमारी चूचियाँ भी सूज गई थीं और वी भी लाल लाल हो गई थीं।
हमारे बदन के अलग अलग हिस्सों पे भी उनके नाख़ून और दाँत के निशान दिख रहे थे जो चोदते वक़्त, उन्होने अपने नाखूनों तथा दाँतों से काट काट कर बना दिए थे।
नहाने के बाद, हमने अपने कपड़े पहने, अपने आप को ठीक किया और गिरते पड़ते कदमों से अपने होंठ चबाकर, चूत और गाण्ड में उठते दर्द को पीते हुए अपने घर की तरफ वापिस आ गये।
हमने वहाँ से चलते वक़्त फिर से वहाँ आने का वादा किया था.. लेकिन,वहाँ जाने के नाम से ही हमारी चूत और गाण्ड दुखने लगती थी.. इस लिए,आज तक हम ने फिर कभी उन से संपर्क नहीं किया..
मैं एक नाइट कोच से, मिष्टी के साथ काठमांडू से लौट रहा था।
होटल से निकलने के पहले, मिष्टी ने नहा कर काफ़ी आकर्षक मेकअप किया था।
उस ने गुलाबी रंग की सिल्क की साड़ी और उस से मिलते रंग का ब्लाउज पहन रखा था..
ब्लाउज का गला, आगे और पीछे दोनों तरफ से काफ़ी बड़ा था.. जिस से,उस के पीठ का लगभग पूरा हिस्सा खुला हुआ था..
ब्लाउज के आगे के लो कट शेप के गले से, उस की चूचियों का कुछ हिस्सा झलक रहा था..
ब्लाउज के अंदर पहने उसके ब्रा का पूरा नक्शा, ब्लाउज के ऊपर से साफ़ दिख रहा था..
टाइट ब्लाउज में कसे होने के कारण, उस की चूचियों के बीच एक लाइन बन गई थी..
साड़ी और ब्लाउज में कसमसाती उस की चूंचिया, काफ़ी सुडौल और आकर्षक लग रही थीं..
उन्हें देख कर, किसी भी मर्द का मन उन्हें कपड़ों के बाहर देखने को तडपे बिना नहीं रह सकता।
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गले में उसने सोने की चैन और चैन में एक आकर्षक लॉकेट पहन रखा था,जो उस की चूचियों के ऊपर लटक रहा था..
कानों में सुंदर सोने की बालियां और नाक में सोने की नाथ, उस की सुंदरता को और बढ़ा रहे थे..
उसने अपनी दोनों बाँहों में, साड़ी से मिलते जुलते रंग की सुंदर चूड़ी पहन रखी थी..
उस की दोनों हथेली, आकर्षक डिज़ाइन में लगी मेहंदी से सजी हुई थी और उस के हाथों और पाँवों के नाखूनों पर गुलाबी नेल पोलिश लगी हुई थी..
उस ने अपने पाँव में, चाँदी की पायल पहन रखी थी..
इस तरह, चलते वक्त उस की पायल के घुंघरुओं से छम छम का मधुर संगीत बज उठता था और जब कभी वो अपने हाथों को हिलाती थी तो उस की बाँहों की चूड़ी खनक कर, वातावरण को मधुर तरंगों से भर देती थी..
उसने मेक-उप भी काफ़ी आकर्षक ढंग से किया था..
उस के गोरे गाल, क्रीम लगी होने से और सुंदर लग रहे थे तो वहीं होंठों पे लगा लिपस्टिक, उस के होंठों की सुंदरता को और बढ़ा रहा था..
उस के माथे पे लगी बिंदी और माँग में सज़ा सिंदूर, उस के रूप को ऐसेचमका रहे थे जिसे देखने के बाद, उसके सुंदर मुखड़े को छूने और चूमने को कोई भी व्याकुल हो जाए..
जब वो अपनी बलखाती चाल के साथ, ऑटो से उतर कर अपनी कमर मटकाती बस में सवार हुई, तो लोग उसे देखते रह गये।
मुझे पूरी उम्मीद है की आसपास के सभी मर्द उसे छूने और कम से कम, एक बार उसे चोदने की लालसा ज़रूर किए होंगे।
आस पास की औरतों और लड़कियों को उस के हुस्न से ज़रूर जलन हुई होगी।
लेकिन, इन बातों से बेख़बर वो अपनी कमर मटकाती हुई, बलखाती चाल से चलती हुई बस में सवार हो कर, अपनी सीट पे बैठ गई और उस के पीछे पीछे चलते हुए, मैं भी उस के बगल वाली सीट पे बैठ गया।
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बस के अंदर भी हमारी सीट के आस पास बैठे लोग, एक दूसरे की नज़र बचा कर अपनी आँखों से उस की सुंदरता के जाम को पी रहे थे।
हमारी सीट से आगे के सीट में बैठे लोग, बार बार पीछे मूड कर उसे देखलेते थे.. मानो, ऐसा करने से उन की आँखों और दिलों को ठंडक पहुँच रही हो..
हमारी रो में उलटी साइड की सीट पे, दो सुंदर लड़कियाँ बैठी हुई थीं और वो भी कभी कभी मूड कर, मिष्टी और मेरी तरफ देख लेती थीं।
बस अपने निर्धारित समय से, रात के 9 बजे चल पड़ी।
बस चलने के बाद, करीब एक घंटे तक बस के अंदर की लाइट जलती रही और इस बीच लोग बार बार उस की सुंदरता को अपनी आँखों से पीते रहे।
करीब दस बजे कंडक्टर ने बस की सारी बत्तियाँ बुझा दी, जिस से बस के अंदर अंधेरा छा गया।
अंधेरे में कुछ देर तक लोगों की बात चीत की आवाज़ आती रही और करीब10:30 बजते बजते बस के अंदर, बिल्कुल खामोसी छा गई।
मैं तो इसी मौके के इंतजार में था।
मैंने मिष्टी को अपने पास खींच लिया और खुद भी थोड़ा खिसक कर, उस से सट गया।
मैंने अपने दाहिने हाथ में उसका बायां हाथ ले लिया और उसके हाथ को अपने हाथों से सहलाने लगा।
मेरे अंदर इस से सनसनी बढ़ती जा रही थी।
फिर मैंने उसे अपनी गोद में खींच कर, उसके मुखड़े पे एक चुंबन जड़ दिया।
अब मैंने अपने दाय हाथ को उस के कंधे पे रख कर उस के कंधे और उसकी लगभग नंगी पीठ को सहलाने लगा।
थोड़ी देर में, मेरा हाथ फिसलता हुआ उस की दाहिने चूची पे पहुँच गया और मैं उसे ब्लाउज के ऊपर से ही सहलाने लगा।
चूची को सहलाते सहलाते, कभी कभी मैं उसे जोश से दबा देता था।
अब मेरा लण्ड पैंट के अंदर, पूरी तरह खड़ा हो कर तेज़ी से फुदकने लगा था।
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मैंने उसके बाएँ हाथ को अपने बाएँ हाथ से पकड़ कर, अपने लण्ड पे खींच लाया।
वो अपने हाथ से पैंट के ऊपर से ही, मेरे लण्ड को दबाने लगी।
मैं अपने उलटे हाथ को उस की जांघों पे रख कर, उन्हें सहलाने लगा।
मेरा दाहिना हाथ, लगातार उस की चूंचियों पे फिसल रहा था।
मैं मिष्टी की चूचियों और जांघों को सहला रहा था और वो मेरे लण्ड को अपने हाथों से मसल रही थी।
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रात अब काफ़ी बीत चुकी था और मार्च का महीना होने के कारण, अब हल्की ठंड महसूस हो रही थी.. जिस का फायदा उठाते हुए, बैग से हमने एक चादर निकल कर उसे अपने जिस्मों पर डाल लिया..
हमारे जिस्म, अब चादर से पूरी तरह ढक गये थे।
जिस्म पे चादर डालने के पीछे, ठंड तो सिर्फ़ एक बहाना था क्योंकि इतनाज़्यादा ठंड भी नहीं पड़ रही थी की बिना चादर के काम ना चल सके।
हमने तो चादर का इस्तेमाल, सिर्फ़ खुल कर एक दूसरे के बदन का लुत्फ़ उठाने के लिए किया था।
चादर डालने के बाद, मैंने मिष्टी की साड़ी और पेटिकोट को उसके कमर तक उठा दिया और उसके ब्लाउज के हुक और ब्रा के हुक को खोल कर उस की चूचियों को इन के बंधन से मुक्त कर दिया।
अब मैं अपने एक हाथ से उसकी नंगी चूचियों को मसलते हुए, दूसरे हाथ से उस की नंगी जांघों और चूत को सहला रहा था।
मिष्टी ने मेरे पैंट का ज़िपर खोल कर, मेरे खड़े लण्ड को बाहर निकाललिया था और वो उसे अपने हाथों में लेकर बड़े प्यार से सहला रही थी।

मैं उस की चूचियों को मसलते मसलते, कभी कभी उस की चूचियों की घुंडी को ज़ोर से दबा देता।
वो मेरे लण्ड को तेज़ी के साथ, सहलाने लगी थी।
मेरे कड़े लण्ड से थोड़ा थोड़ा पानी (प्री-कम) निकलने लगा था, जो लण्ड पे चिकनाई का काम कर रहा था।
अब उसके हाथ मेरे पुरे लण्ड पे तेज़ी के साथ चल रहे थे।
वो मेरे लण्ड पर सुपाड़े से लेकर जड़ तक और कभी कभी मेरे अंडकोष तक,अपने हाथ को घुमाने लगी थी।
उत्तेजना हर पल बढ़ती जा रही थी और हम अब तेज़ी से एक दूसरे के बदन को ज़ोर ज़ोर से दबाने और सहलाने लगे थे।
मैंने उसकी जांघों को थोड़ा फैला कर, अपना हाथ उसकी चूत पे रख कर,उस की चूत की फांको को अपनी उंगली से फैला कर, उस की चूत की दरार में अपने हाथ की बीच की उंगली घुसा दी।
मेरी उंगली उस की चूत के अंदर के दाने को टिक टिक कर के सहला रही थी।
अब उत्तेजना के मारे, वो अपनी कमर हिलाने लगी थी।
उस की चूत के दाने को काफ़ी देर तक सहलाने के बाद, मैं अपनी उंगली चूत के छेद पे रख कर अंदर की तरफ ठेलने लगा।
मेरी उंगली बड़ी आसानी से उसकी चूत में समा गई क्यों की काफ़ी लंबे समय से सहलाए और मसले जाने के कारण, उस की चूत पानी छोड़ने लगी थी।
मैं उस की चिकनी चूत में गचा गच उंगली पेले जा रहा था।
मेरी उंगली तेज़ी से, उस की चूत में अंदर बाहर होने लगी थी।
उस ने अपने होंठो को ज़ोर से दबा रखा था.. शायद उसने अपने मुँह से निकल पड़ने वाली व्याकुल सेक्सी उत्तेजक सिसकारियों को रोकने के लिए,ऐसा किया थी..
अपनी चूत में घुसती निकलती उंगली की तेज गति के साथ लय मिलाकर,वो अपनी कमर हिलाए जा रही थी।
वो मेरे लण्ड को भी ज़ोर ज़ोर से मसलने लगी थी।
हम दोनों उस वक़्त, स्वर्ग का आनंद उठा रहे थे।

फिर मिष्टी ने एका एक, मेरे लण्ड को कस के पकड़ कर अपनी जाँघों की तरफ खींचना शुरू किया।
मैंने अपना दाहिना पैर सीट के ऊपर किया और थोड़ा तिरछा होकर,अपनी कमर को उस की नंगी जाँघों से सटा दिया।
अब मेरा लण्ड उस के जांघों से टकरा रहा था।
उस ने भी अपने दाहिने पैर को सीट पे मोड़ कर रख लिया और मेरे उल्टे डाइरेक्षन में झुकते हुए, अपने चुत्तड़ को मेरे लंड पे सटा दिया।
अब मेरा लण्ड उस के चुत्तड़ के बीच की दरार पर, बस की रफ़्तार के साथ ही हिचकोले खा रहा था।
मैं अपनी कमर को हिलाते हुए उस की गाण्ड के बीच की दरार में, अपने लण्ड का धक्का लगाने लगा।
मेरा लण्ड उस के चुत्तड़ के बीच आगे पीछे घूमते हुए, पूरी मस्ती में उसकी गाण्ड के बीच सफ़र कर रहा था।
सफ़र में कभी मेरा लण्ड उस के गाण्ड के छेद से टकरा जाता तो कभी उस की चूत तक पहुँच जाता।
वो अपने चुत्तड़ को थोड़ा और तिरछा करते हुए, थोड़ा और झुक गई।
मैंने भी अब अपने चुत्तड़ को थोड़ा और तिरछा कर लिया, जिस से मेरा लण्ड अब उसके फुददी के छेद से सट गया।
उस की जांघों को अपने हाथ से पकड़ कर, मैंने अपना लण्ड उस की चूत मेंठेलने की कोशिश की.. लेकिन, अंदर जाने के बजाय मेरा लण्ड फिसल कर उस की चूत पे आगे बढ़ गया..
मैं पोज़ बदल बदल कर, उस की चूत में अपना लण्ड घुसाने की कोशिश करता रहा और आख़िर मुझे कामयाबी मिल ही गई।
मेरा लण्ड उस की चूत के अंदर समा गया।
अब मैं उस की चूत में अपनी कमर हिलाते हुए, लण्ड को धकेलने लगा।
मेरा लण्ड उसकी चूत में अंदर बाहर होने लगा।
लेकिन स्थान की कमी के अभाव में धक्के लगाते वक्त, बार बार मेरा लण्ड उस की चूत के बाहर आ जाता था।
लण्ड के चूत से बाहर निकलते ही, वो अपने हाथ से पकड़ कर मेरे लण्ड कोअपनी चूत में घुसा लेती थी और मैं फिर से धक्के लगा कर, उस की चूत को चोदने लगता था।

उस की चूत को इस तरह चलती बस में चोदने में, मुझे बड़ा अनोखा मज़ा मिल रहा था।
ऐसा मज़ा उसे या किसी और को चोदने में मुझे कभी नहीं मिला था।
वो भी पूरी मस्ती में अपना चूत चुदवाये जा रही थी।
उस की चूत को चोदते हुए, एका एक मेरे मन में शरारत सूझी।
मैंने सोचा की चूत से बार बार लण्ड बाहर निकल जा रहा है।
उस की चूत की जगह गाण्ड का कोण लण्ड पेलने के लिए, ज़्यादा सुविधा जनक है, इस लिए क्यों ना गाण्ड में ही लण्ड घुसा कर गाण्ड मारने की कोशिश की जाए।

ये सोच कर, मैं एक दम रोमांचित हो गया और अपने हाथ से लण्ड पकड़ कर मैंने उसे मिष्टी के गाण्ड पर टीका कर एक ज़ोर दार धक्का लगा दिया।

मेरे लण्ड का सुपाड़ा, मिष्टी के गाण्ड में फँस गया।
मैंने तुरंत बिना समय गँवाए, दो तीन धक्के उस के गाण्ड में जड़ दिए।
मेरा समुचा लण्ड उस की गाण्ड में समा गया।

जैसा मैंने सोचा था वैसे ही, चूत की बजाए गाण्ड में लण्ड पेलने में ज़्यादा आसानी हो रही थी।
लेकिन, इस का उल्टा असर मिष्टी पे पड़ा।
अचानक गाण्ड में लण्ड के घुसने से, वो एकाएक चीख पड़ी आआआहह हह हह आआह..!

उस की चीख से, हमारे उल्टी रो में बैठी लड़की की आँख खुल गई और हमें इस पोज़ में देख कर उस की आँखें हैरत से फटी रह गई।
लेकिन, मैं इतना ज़्यादा उत्तेजित हो चुका था की उस के देखने का परवाह किए बगैर मैं दनादन मिष्टी के गाण्ड में अपना लण्ड पेलता रहा।

मिष्टी की गाण्ड में घुसता निकलता लण्ड तो वो नहीं देख सकती थी क्यों की हमारा जिस्म चादर से ढाका हुआ था.. लेकिन, हमारे हिलते चूतड़ की गति से वो समझ चुकी थी की चलती बस में हम चुदाई में भिड़े हुए हैं..

उस के लगातार, हमारे तरफ देखते रहने से हम और अधिक उत्तेजित हो गये और मैं तेज़ी से मिष्टी के गाण्ड में अपना लण्ड आगे पीछे ठेलने लगा।

मुझ से भी ज़्यादा मिष्टी उत्तेजित हो चुकी थी और वो काफ़ी बोल्ड भी हो गई।
उस ने धीरे से चादर, हमारे बदन से सरका दी। अब वो लड़की और हैरत से हमारी तरफ देखने लगी थी।

मिष्टी के ब्लाउज और ब्रा खुले हुए थे और उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी जिस से उसकी नंगी, गोरी और सुडौल चिकनी जांघें बस के भीतर की हल्की लाइट में चमक रही थी।

मैं उस लड़की की आँखों के सामने, मिष्टी की गाण्ड में सटा सट अपना लण्ड पेले जा रहा था।

गाण्ड मराने में मिष्टी भी अपनी कमर हिला हिला कर, मेरी मदद कर रही थी और हमारी चुदाई का खेल वो लड़की आँखें फाडे देख रही थी।

करीब दस मिनट के धक्कों के बाद, मैं मिष्टी के गाण्ड में ही झड़ गया।
फिर हम सीधे होकर बैठ गये।

अभी भी हम में से किसी ने अपने कपड़े दुरुस्त नहीं किए थे।
अभी तक शायद वह लड़की मिष्टी की चूत या मेरा लण्ड नहीं देखा पा रही थी।

ठीक उसी समय, आगे से कोई गाड़ी आई जिस की हेडलाइट में हमारा नंगा जिस्म, मेरा लण्ड और मिष्टी की चूत और चूची चमक पड़ी।

मेरा लण्ड और मिष्टी की चूत और चूची को देख कर पता नहीं उस लड़की पे क्या असर पड़ा.. लेकिन, मेरे मन में उसे चोदने की इच्छा जाग उठी..

मैं इसी ख्याल में मिष्टी के होंठों को उस लड़की के सामने, चूमते हुए उस की चूचियों को ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा।
साथ ही मैंने अपने एक हाथ की उंगली से मिष्टी की चूत फैला कर, उस में उंगली घुसेड दी।

मिष्टी मेरे मुरझाए लण्ड को अपने हाथों में लेकर, उस के सामने ऐसेहिलाने लगी.. मानो, वो उस लड़की को चुदवाने का निमंत्रण दे रही हो..

ऐसा करते वक्त, मिष्टी ने उस लड़की की तरफ देखते हुए आँख मार दी।

इस पे उसने लड़की ने अपनी आँख बंद कर के अपना मुँह दूसरी तरफ फेर लिया.. लेकिन, हम देख सकते थे की उस की साँसें बड़ी तेज़ी से चल रही थीं..

कुछ देर तक ऐसे ही हम दोनों चलती बस में नंगे बैठे रहे, फिर हमने अपने कपड़े ठीक कर लिए।
इस घटना के करीब एक घंटे बाद, बस एक सुनसान जगह पे लोगों के पेशाब करने के लिए रुकी।

मैं बस से उतर कर, पेशाब करने चला गया।

मेरे बाद मिष्टी भी उतर कर, एक तरफ चल पड़ी।

उसके बाद वो लड़की भी उसी तरफ चल पड़ी, जिधर मिष्टी गई थी।
मैं उन्हें ही देख रहा था।

पेशाब कर के आते वक्त, वो दोनों आपस में कुछ बातें कर रही थीं।

बस चलने के बाद, मैंने धीरे से मिष्टी से पूछा की तुम्हारी क्या बातें हुई।
उसने बाद में बताने को कह के बात टाल दी।

घर पहुँच कर, उस ने कहा की वो लड़की बंद कमरे में हमारी चुदाई का खेल अपनी आँखों से देखना चाहती है।
उसने इसके लिए अपना नंबर भी दिया है.. ..!

हमारे सफ़र वाले दिन के बाद के अगले शनिवार को, करीब 12 बजे दिन में बस वाली लड़की के द्वारा दिए गये नंबर पे, मिष्टी ने उसे फोन किया।

उस से संपर्क हो जाने के बाद, मिष्टी ने उसे हमारे यहाँ आने का निमंत्रण दिया.. जिसे, उस ने स्वीकार करते हुए हमारा पता पूछा..

मिष्टी ने हमारे घर के पास के एक पार्क में मिल कर, उसे साथ लाने की बात बताकर संपर्क बिछेद कर दिया।
अब हम उस लड़की के बारे में बातें करते हुए, पार्क की तरफ चल पड़े।

रास्ते में मिष्टी ने बताया की बस से उतर कर पेशाब करने जाते समय, उसलड़की ने उसे गाली बकते हुए कहा था तुम्हें और तुम्हारे सौंदर्या को देखकर तुम मुझे बहुत अच्छी लगी थीं.. लेकिन, तुम तो बिल्कुल रंडी ही निकली..! क्या हिम्मत के साथ, तुमने चलती बस में चुदवा लिया..! और तो और, मेरे उठने का भी तुम्हें कोई ख्याल नहीं हुआ..! मुझे तो तुम्हारे रंडी होने का पूरा यकीन तब हुआ, जब तूने चुदवाने के बाद मेरे सामने अपनी चूचियों को और अपनी चूत को पसार कर दिखा दिया..! ऐसे चलती बस में चुदवाने में, वो भी मेरे सामने तुम्हें शरम भी नहीं आई..! क्या घर में भी तुम दूसरों के सामने ऐसे ही, चुदवा कर दिखाती हो..!

मैं बोली ऐसा मौका, आज तक तो नहीं आया..! लेकिन, अगर तुम देखना चाहो तो मैं तुम्हें अपनी चुदाई का खेल दिखा सकती हूँ..! देखना हो तो बोलो, ऐसा मौका बार बार नहीं मिलता..! मुझे चुदवाते देख कर, तुम्हारी भी चूत मस्त हो जाएगी..!

वो लड़की ठीक है..! लेकिन, ये होगा कैसे..! मेरी तो चूत अभी से ही चुलबुला रही है..!

मैं चिंता मत करो..! तुम अपना फोन नंबर दे दो..! मैं तुम से संपर्क कर लूँगी..! और उसने अपना फोन नंबर दे दिया था।
यही बातें करते, हम पार्क में पहुँच गये।

करीब आधे घंटे के बाद, वो दूर से ही आती हुई दिख गई।
हम उस की तरफ गये।
पास आते ही, मिष्टी ने उस से हाथ मिलाया और हम सब साथ साथ अपने घर के तरफ चल पड़े।
घर पहुँच कर, मिष्टी उसे सीधे अपने बेडरूम में ले गई और घर का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया।
तुम्हारा नाम क्या है और तुम क्या करती हो..! ?? मिष्टी ने पूछा।
वो मेरा नाम पिंकी है और मैं कॉलेज में पढ़ रही हूँ..!
मिष्टी तुम्हारे साथ जो बैठी थी, वो कौन थी..! ??
वो लड़की वो, मेरी भाभी थी..!
मिष्टी क्या हमारे उस दिन के खेल के बारे में, तुमने उसे बता दिया है..!??
हाँ, वो बोल रही थी की मैंने उसे क्यों नहीं जगाया..! वो भी देखना चाहतीथी..! उसे भी ये सब देखने का मौका नहीं मिला है..! वो बोली।
मिष्टी ठीक है..! आज तुम ठीक से देख लो, फिर किसी दिन, उसे भी लेते आना..! हम उसे भी दिखा देंगे..!
उस के बाद, मिष्टी मेरे पास खिसक आई।
मैंने मिष्टी को सोफे पे खींच लिया और उसकी साड़ी के पल्लू को उस कीछाती से हटा कर, उसकी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही मसलने लगा।
मिष्टी मेरे कपड़ों को हल्का करने में जुट गई।
कुछ देर बाद, मैं बिल्कुल नंगा पड़ा था।
मेरा अर्ध उत्तेजित लण्ड, जो मेरी जाँघों के बीच लटक रहा था, उसी पे पिंकी की आँख टिकी हुई थी।
मिष्टी को नंगा किए बगैर ही, मैं उसकी चूचियों को अब भी मसलते जा रहा था।
मिष्टी मेरे लण्ड को अपने हाथ में लेकर, उसे दिखाती हुई सहला रही थी।
लण्ड, अब धीरे धीरे तन कर खड़ा होने लगा था।
मिष्टी ने मेरे लण्ड पे अपना मुँह रख, उसे अपने होठों से उसे चूमने लगी।
वो अपनी जीभ निकाल कर, मेरे लण्ड पर रगड़ने लगी।
कभी कभी, वो मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगती थी।
अब मेरा लण्ड पुरे फुलाव में आ गया था।

मैंने मिष्टी के ब्लाउज को खोल कर, उस के बदन से निकाल दिया और ब्रा में कसी उस की चूचियों को मसलने लगा।
मैंने ब्रा के ऊपर से ही, उसकी चूचियों को चूम लिया और फिर उस के ब्रा के हुक को खोल दिया।
अब उसकी चूंचिया मेरे मुँह के पास, झूल रही थीं।
मैंने बारी बारी से पहले दोनों चूचियों को चूम लिया, फिर उन्हें अपने मुँह में लेकर चूसने लगा।
एक चूची को चूसते हुए, मैं उस की दूसरे चूची को अपने हाथों से मसलता जा रहा था।
पिंकी, हमारे खेल को हैरियट भरी निगाहों से चुप चाप देखे जा रही थी।
मैं करीब दस मिनट तक, मिष्टी की चूचियों से इसी तरह खेलता रहा।
उस के बाद, मैंने मिष्टी की साड़ी और पेटिकोट खोल दिया।
अब उस के बदन पे कपड़ों के नाम पर, सिर्फ़ पैंटी ही रह गई थी।
मैं मिष्टी की जांघों को अपने हाथों से, फिर होंठों से सहलाने लगा।
मैं मिष्टी की दोनों जांघों और टाँगों को अपने होंठों और हाथों से सहलाता रहा।
वो हमें ही देखे जा रही थी।
उस के सामने ये सब करते हुए, हम दोनों काफ़ी रोमांचित हुए जा रहे थे।
उसे दिखा दिखा कर, ये सब करने में हमें बड़ा मज़ा आ रहा था।
करीब पाँच सात मिनिट तक उसकी जांघों से खेलने के बाद, मैंने मिष्टी की पैंटी उतार दी।
अब पिंकी बड़े गौर से मिष्टी की चूत को निहार रही थी।
मिष्टी ने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत को दबाना शुरू किया और अंत मेंउस ने उंगलियों से पिंकी की तरफ अपना चूत कर के, चौड़ी कर उसे अपनी चूत की अंदर की लाली को दिखाया।
वो अपनी उंगलियों से अपनी चूत को बार बार फैला और सिकोड रही थी।
मैं अपने ही हाथों से अपने लण्ड को सहलाए जा रहा था।
मिष्टी की फैलती और सिकोडती चूत और मेरे लण्ड पे फिसलते मेरे हाथ को देख देख कर, पिंकी गरम होने लगी थी।
कमीज़ के ऊपर से ही वो खुद अपने ही हाथों से, अपनी चूचियों को मसलना शुरू कर चुकी थी।

कभी कभी, वो अपने ही हाथों से सलवार के ऊपर से अपनी चूत को भी खुज़लाने लगती थी।
उस को मस्ती में आते देख कर, हम दोनों भी मस्त हो रहे थे।
मिष्टी ने मुझे खींच कर बेड पर चित लेता दिया और मेरे ऊपर झुक कर अपनी चूचियों को मेरे पुरे बदन पे रगड़ने लगी।
उस ने अपनी चूचियों को मेरे पैर से सटा कर रगड़ना शुरू किया था और धीरे धीरे ऊपर की तरफ बढ़ रही थी।
मेरे पैर से होते हुए, उसकी चुचियाँ मेरी जाँघों के ऊपर से होते हुए मेरे लण्ड तक पहुँच गई थी।
मेरे लण्ड पे कुछ देर तक अपनी चूचियों को रगड़ने के बाद, उस ने फिर ऊपर की तरफ बढ़ते हुए अपनी चूचियों को मेरे पेरू, पेट और छाती के ऊपर से घुमाती हुई, अब वो चूचियों को मेरे गालों पे घुमा रही थी।
मैंने अपना मुँह खोल लिया था और वह दोनों चूचियों के निपल्स को बारी बारी से मेरे मुँह में घुसेड रही थी।
मैं उस के चूचियों के निपल्स को अपने मुँह में लेकर चूस रहा था।
कुछ देर तक इसी तरह चूचियों को चुसवाने के बाद, वो अपनी चूत मेरे मुँह पे रख कर बैठ गई।
मैं उस की चूत पे अपनी जीभ रगड़ने लगा।
मिष्टी ने पिंकी से कहा साली, क्या देख रही है..! अपने हाथों से मेरा चूत फैला, ताकि ये मेरी चूत के भीतर तक अपनी जीभ घुसा के चाट सके..!
मिष्टी की बातों ने उस के ऊपर जादू सा असर किया और उसने अपने हाथों से मिष्टी की चूत को कस के फैला दिया।
चूत फैलते ही, मिष्टी की चूत के गुलाबी छेद में मैंने अपनी जीभ घुसा दी और उस की चूत के भीतर जीभ को घुमाने लगा।
मिष्टी ने उस की चूचियों को पकड़ कर, कमीज़ के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया।
वो काफ़ी उत्तेजित हो चुकी थी।
उस ने कहा मुझे मेरे कपड़े अब खोल लेने दो और मेरी चूत भी अपने यार से मरवा दो..! प्लीज़..! मेरी चूचियों को भी अपनी ही तरह चूसवा दो..!प्लीज़..! अब मुझ से बर्दशात नहीं हो रहा है..!
ठीक है..! अपने कपड़े उतार लो मिष्टी ने कहा।

उस ने अपनी कमीज़ उतार दी और अब ब्रा में कसी, उसकी छोटी छोटी चूंचियाँ बिल्कुल तनी हुई दिख रही थी।
कमीज़ के बाद, उसने अपना सलवार उतारा.. उसकी जांघें बिल्कुल चिकनी थी..
उस की चूचियाँ और चूत, अब भी ब्रा और पैंटी में छुपी हुई थी।
उसने पहले अपने ब्रा का हुक खोल कर अपनी चूचियों को नंगा किया।
ब्रा के बंधन से मुक्त होते ही, उसकी नन्ही चूचियाँ बिल्कुल अकड़ कर हमारी आँखो के सामने चमकने लगी थी।
उस की चूचियों का निपल्स भी उस की चूचियों के समान ही हल्के गुलाबी रंग के थे।
उस के निपल्स बिल्कुल कड़े हो चुके थे।
अब वो अपने हाथ को पैंटी पर रख कर, पैंटी को धीरे धीरे नीचे की तरफ सरकाने लगी।
उस की पैंटी में चूत के पास का हिस्सा गीला हो चुका था। शायद हमारे खेल को देख देख कर, उस की चूत पानी छोड़ रही थी।
उस ने अंततः अपनी पैंटी को भी उतार फेंका।
उसकी नन्ही सी चूत, बिल्कुल चिकनी लग रही थी।
उस ने शायद आज ही, अपनी चूत पे उगी झांट को साफ़ किया था।
उस की चूत से धीरे धीरे पानी रिस रिस कर बाहर आ रहा था।
अपने जिस्म को कपड़ों की क़ैद से आज़ाद करने के बाद, इठलाती हुई वो फिर हमारे करीब आ गई।
मिष्टी ने उस की चूचियों को पकड़ कर, मसलना शुरू कर दिया।
मैं अब भी मिष्टी की चूत को चाट रहा था।
अब मिष्टी मेरे ऊपर से उतर कर बेड पे घोड़ी बन गई और मुझे पीछे से आकर अपनी चूत में लण्ड डालने को कहा।
मैंने मिष्टी के पीछे आकर उस की चूत में लण्ड डाल कर, धक्के मारना शुरू किया।
मिष्टी अपनी गाण्ड हिला हिला कर, चोदने में मुझे सहयोग करने लगी।
मैं दाना दान मिष्टी की चूत में अपना लण्ड ठेलने लगा।
अब मिष्टी भी पूरी मस्ती में आ चुकी थी।
वो उत्तेजना के मारे बड़बड़ाने लगी थी अबे साले, आज तेरे लण्ड को क्याहो गया है..! ?? ज़ोर ज़ोर से धक्के मार ना..! बहन चोद और कस के चोद..!उनमह..! जल्दी जल्दी, धक्के मार मादर चोद..! पूरी ताक़त से..! अँह उंह इयाः या ह ह ह ह ह आ आ आ आ आ आ आ आ s s s s s s s s s s..!
मिष्टी की उत्तेजित आवाज़ से मेरी उत्तेजना भी और बढ़ती जा रही थी और मैं उसकी चूत में और तेज़ी से अपना लण्ड पेलने लगा था।
मैं बड़ी तेज गति से मिष्टी की चुदाई कर रहा था।

पिंकी मिष्टी की चूत में घुसते निकलते, मेरे लण्ड को बड़े गौर से देख रही थी।
करीब दस मिनट तक पीछे से मिष्टी की चूत में धक्के मारने के बाद, वो मुझसे अलग हो गई और खींच कर मुझे चित लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ कर अपनी चूत मेरे लण्ड पे रख कर बैठ गई।
उस की गीली चूत से सटे ही मेरा लण्ड फिसल कर उस की चूत में समा गया।
अब मिष्टी ने ऊपर से धक्के मारना शुरू कर दिया।
इस पोज़ में हमें चुदाई करते हुए, पिंकी बड़े गौर से देख रही थी।

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