परदे मे रहने दो part 5

अगले दिन घर के सभी लोग अपनी अपनी वजहों से खुश थे….भानु और रानी दोनों इस बात से खुश थे की दो दिन फार्म हाउस में अच्छे बीतेंगे और बाकी के लोग इस बात से खुश थे की ये दो दिन वो सब जी भर के चुदाई करेंगे….सुबह से ही घर में चहल पहल थी…भानु और रानी के फार्म हाउस के बारे में सब कुछ बता दिया गया था…वो लोग कुछ ही देर में निकलने वाले थे….फार्म हाउस कुछ ४० मिनट की दूरी पर ही था. ड्राईवर उन्हें छोड़ने जाने वाला था और फार्म हाउस का स्टाफ भी उनका वेट कर रहा था….सोम ने रात में इंदु को खबर कर दी थी और इंदु ने बाकी की सभी औरतों को बता दिया था की पार्टी का क्या प्लान बन रहा है….सोम सारा सामान रात में ही ले आया था और नीलू और काकी ने भी घर में बाकी की चीजें जमा कर ली थी…बस भानु और रानी के जाने की देर थी…….भानु ने अपना लैपटॉप अपने साथ रख लिया था और अपना कैमरा भी…रानी ने अपने लिए कुछ अच्छी ड्रेस निकाल ली थीं और वो भी मजे करने के मूड में थी..अभी इन दोनों के मन में उस पिक वाली बात को ले के कोई कशमकश नहीं चल रही थी…रानी और भानु दोनों ही न जानते हुए भी एक दुसरे से एक ही तरह की बात करने के बारे में सोच चुके थे….रानी ने सोच लिया था की बिना भानु की हेल्प के उसे यहाँ अकेले ही रहना पड़ेगा इसलिए उसका भानु के साथ खुलना उसके लिए बहुत जरुरी था और भानु को इस बात का एहसास हो रहा था की घर में आने वाली उसकी माँ की इतनी सारी सहेलियों में से कोई अगर उसे फंसानी है तो इसमें उसे रानी की मदद चाहिए होगी तो वो भी रानी के साथ खुलना चाह रहा था…हालांकि दोनों ही सेक्स के बारे में एक दुसरे से पहले ही काफी खुले हुए थे एक दुसरे के बारे में सब जानते थे वो लोग लेकिन अभी तक उनका हिसाब अलग अलग चलता था…भानु अपने लिए लड़कियाँ खुद खोज लेता था और रानी को भी अपने साथ के मर्द खुद ही मिल जाते थे…लेकिन अब हालत ऐसी थी की दोनों को एक दुसरे की सहायता से ही अपने लिए पार्टनर नसीब होने वाला था…तो अब दोनों को सेक्स के बारे में एक नए सिरे से खुलना था….

उधर काकी को इस बात का एहसास था की इस बार उसे सब कुछ संभालना है और पिछले बार जैसे बहकने नहीं देना है और नीलू को इस बात की चिंता थी की इतनी सारी औरतों के बीच में कहीं सोम बहुत ज्यादा बिजी न हो जाए….पूरी पार्टी में वही एक मर्द था और सभी को चोदने की जिम्मेदारी उसी के उपर आने वाली थी….सोम ने तो रात में ही अपनी सब तयारी पूरी कर ली थी…उस अपनी ताकत वाली गोली खा ली थी….इसमें कोई बुराई की बात नहीं है.अब सोम की उम्र भी तो इतनी हो चली है और फिर दो दिन तक लगातार चुदाई करने की ताकत तो नए नए जवान लड़कों में भी नहीं होती तो फिर सोम तो उनसे बहुत बड़ा था ही…उसे जरुरत पड़ती थी गोलियों की….लेकिन फिर भी जादू तो उसके हथियार में ही था…गोलियां तो बस थोडा बहुत सहारा दे देती थी बस…सुबह करीब ११ बजे भानु और रानी घर से रवाना हो गए…..और आधे ही घंटे में पहली गाडी आके रुकी घर के पोर्च में….ये रूपा थी….

बिना कपड़ों के रूपा ऐसी दिखाती है….लेकिन उस समय गाड़ी से उतारते हुए वो नंगी नहीं थी बल्कि कपडे पहने हुए थी….रूपा ने उतर कर डोरबेल बजायी तो काकी बाहर आई….

काकी- आओ आओ रूपा …डोरबेल बजने की क्या जरुरत थी. सीधे ही अन्दर आ जाती.
रूपा – नहीं इंदु ने कल कहा था की सब लोग पहले पूछ लेना फिर अन्दर जाना.
काकी – अच्छा हाँ. नहीं नहीं अब ऐसी कोई बात नहीं है. बच्चे दोनों बाहर चले गए हैं तो घर पर अब दो दिन हम लोग ही हैं बस….
रूपा – ओके. कैसा चल रहा है सबा कुछ…आप कैसी हैं काकी…
काकी – सब ठीक है और मैं भी एकदम ठीक हूँ. लेकिन तुम थोडा मोटी हो गयी हो.
रूपा – हाँ काकी. हो तो गयी हूँ. क्या करूँ मुझसे वर्क आउट नहीं होता. मुझे बहुत आलस आता है…
काकी – चुदाई में तो नहीं आता न आलस?
रूपा – हा हा हा नहीं नहीं काकी उसके लिए तो मैं दौड़ दौड़ के भी चुदवाने को तैयार हूँ….
काकी – हा हा हा हा हा
रूपा – कहाँ हैं हमारे खिलाडी लोग?
काकी – तुम ही पहली हो. बाकी के लोग भी आते होंगे तब तक तुम आओ और मेरा हाथ बंटाओ जरा..
रूपा – जी काकी. चलिए न…

दोनों अन्दर आ गए….कुछ देर बाद नीलू भी नीचे वाले हॉल में आई तो वो भी रूपा से मिली..दोनों में अच्छी दोस्ती थी और रूपा सिम्पल ही थी. वो इंदु की तरह इन लोगों पर हुकूमत करने की नहीं सोचती थी…हाँ रूपा को गॉसिप का बड़ा शौक था….नीलू ने तो आते ही रूपा से नयी ताज़ी खबर सुनाने को कहा लेकिन रूपा ने कहा की अभी सब लोग आ जाएँ तब बतौंगी नहीं तो एक एक बात सब को बतानी पड़ेगी तो बोर हो जाउंगी…नीलू मान गयी और फिर वो भी इन लोगों के साथ काम करने लगी…अभी तेल को गरम किया जा रहा था…तेल को बस हल्का सा कुनकुना ही करना था..ज्यादा गरम नहीं करना था……काकी वही कर रही थी और तब इन दोनों ने बॉक्स में से क्रीम और शहद निकाल के बाउल में डालना शुरू केर दिया था…इतने में डोरबेल फिर से बजी और इस बार नीलू ही गयी…..मंजरी और रोमा आ गयी थीं..

नीलू उन लोगों को ले के अन्दर आ गयी….और फिर उन लोगों में बातें होने लगीं….कुछ ही देर में इंदु भी आ गयी….

सभी लोग अभी नीचे वाले हॉल में ही थे….इंदु ने आकर बताया की आज की पार्टी में इतने ही लोग हैं बस…बाकी की तीन औरतें कहीं बाहर चली गयी हैं…और चूँकि ये पार्टी अचानक ही हो गयी इसलिए उन्हें लौटने का टाइम नहीं मिला है….हो सका तो वो लोग कल तक आ जाएँगी और अगर नहीं आएँगी तो हमारे नियम के हिसाब से उनका डिपाजिट उन्हें वापिस नहीं किया जायेगा……इस बात से नीलू और काकी को भी आराम ही था..वो भी नहीं चाहते थे की बहुत ज्यादा लोग हो जाएँ पार्टी में….इन लोगों में से सिर्फ इंदु ही एक ऐसी थी जिससे अब नीलू और काकी को चिढ होने लगी थी..बाकी की औरतों के साथ उनके सम्बन्ध अभी भी बहुत अच्छे थे.और वो तीनो औरतें थी भी ऐसी की बस पार्टी में आके खूब रंडी पण कर लिया और उसके बाद अपनी अपनी लाइफ में लग गए…….अब जब सब लोग जमा हो गए थे तो थोडा चाय पानी के लिए वो लोग वहीँ हॉल में ही बैठे और बातें शुरू हो गयीं….

नीलू – हाँ रूपा अब तू सुना क्या नयी नयी खबर लायी है बाजार से…
रूपा – ओके ओके…अब तो सब लोग हैं…..हाँ तो पहली खबर….वो श्रीवास्तव जी याद हैं न जिनकी बीवी ने हमारे ग्रुप के बारे में बड़ी सारी बातें सुना दी थी हमें…जो बड़ी ही घरेलु बनती थीं….
( सबने एक स्वर में हामी भरी…सबको श्रीवास्तव की याद आ गयी की कैसे एक बार वो इनकी पार्टी में आयीं थी और उन्हें ठीक से पता नहीं था की क्या होने वाला है और फिर जैसे ही ये लोग शुरू हुए तो उसने बखेड़ा खड़ा कर दिया था की तुम लोग तो बेशरम हो जो इस तरह के काम करते हो और उन्हें खरी खोटी सुना के वहां से निकल गयी थी )
रूपा. – हां उनकी की बेटी…अभी कुछ २१ साल की होगी..वो पकड़ी गयी है…
इंदु – कैसे पकड़ी गयी है? धंधा शुरू केर दिया क्या?
रूपा – नहीं….वैसे हाँ कुछ कुछ वैसा ही समझो…
मंजरी – ठीक से बता न…
रूपा – एक दिन मुझे मेरी बायीं ने बताया उसके बारे में..वो उनके घर में भी काम करती है..हुआ क्या की दोनों मिया बीवी दो दिन के लिए बाहर गए थे..तो उनकी बेटी ने अपने यार को बुला लिया घर पर….जानती तो हो आजकल की लड़कियों की चूत में कैसी खुजली मचती हैऊ……दोनों ने जी भर के ठुकाई की होगी…..और फिर रात में पता नहीं क्या कर रहे थे…शायद थक गए होंगे चोद चोद के एक दुसरे को तो वो उसका यार हराम का जना उसकी चूत में ही लंड डाल के सो गया…..और उस रंडी को भी नींद आ गयी…ऐसा ही कुछ हुआ होगा…..तो दोनों लोग सो तो गए लेकिन उनकी आँख जब खुली तो मुसीबत बन गयी थी….
नीलू – कैसे ? क्या हो गया था?
रूपा – रात भर लंड चूत में ही पड़ा रहा था….तो शायद रात भर खड़ा भी रहा होगा..सुबह दोनों अलग होना चाह रहे थे लेकिन हो नहीं पा रहे थे..जैसे कुत्ता कुट्टी हो जाते हैं न चुदाई के बाद…जुड़ जाते हैं…वैसे ही उसके यार का लौड़ा भी फंस गया उसकी चूत में…निकल ही नहीं रहा था बाहर…दोनों ने बड़ी कोशिश की लेकिन कुछ नहीं हुआ..फिर दोनों को डर लगने लगा होगा तो वो लड़की रोने लगी….घर की बायीं जो की अपने टाइम से आ गयी थी वो पहुची….उसके पास चाबी थी तो वो सीधे अन्दर आ गयी और अपना काम करने लगी तब उसने इनकी चीख पुकार सुनी होगुई..वो अन्दर गयी तो उसने नजारा देखा….की दोनों ही बिस्टर पैर पड़े हुए हैं….लड़की के अन्दर लड़के का लंड है और दोनों रो रहे हैं…दर्द भी हो रहा होगा….बायीं की तो हंसी निकल गयी…उसने भी मौके का फायदा उठाया और दोनों से जैम कर पैसे वसूले…फिर उसके फॅमिली डॉक्टर को खुद फोन किया की आप घर आ जाईये…डॉक्टर आया तो उसने भी देखा तो हैरान रह गया….उसने लड़के को कोई सुई लगायी होगी तब जा के थोड़ी देर बाद उसका लंड ढीला हुआ तो उसने निकाला चूत से…..उसके बाद से वो डॉक्टर भी कहाँ मौका जाने देने वाला था हाथ से…पहले तो उसने जितने पैसे मिले वो ले लिए और फिर लड़की को भी फंसा लिया की अगर मुझे चोदने नहीं दिया तो पुरे शहर में बात फैला दूंगा….और उसके बाद से वो डॉक्टर मौका निकाल के आ जाता है और उसी के घर में उसे जी भर के चोद के जाता है….

सब लोग बड़े मजे ले ले के कहानियां सुन रहे थे…..एक के बाद एक रूपा इसी तरह की कहानियां सब को सुना रही थी..कुछ देर बाद जब चाय पानी ख़त्म हो गया तब काकी बोली की चलो सब लोग अब तयारी शुरू करो..बहुत देर हो गयी है…सोम भी बेचारा तब से उपर वेट कर रहा होगा तुम लोगों का…..सभी ने हामी भरी और अपने अपने कपडे उतारने शुरू केर दिए…..

उधर दूसरी तरफ भानु और रानी फार्म हाउस पर पहुच चुके थे और उन्होंने पूरी प्रॉपर्टी घूम के देख ली थी..मेनेजर को छुट्टी दे दी थी और अब वो घर पर अकेले ही थे….दोनों ने रास्ते में जरा भी बात नहीं की थी…लेकिन अब दोनों को मौका मिल गया था बात करने का…..हाउस के पूल के किनारे बैठे दोनों धुप का मजा ले रहे थे और बात पहले रानी ने ही शुरू की…

रानी – उस दिन थोडा शॉक लग गया था न…
भानु – हाँ यार….जब जब पिक देखना शुरू करते हैं तब तब ऐसा हो जाता है…
रानी – जब जब क्या? एक ही बार तो देखा है.
भानु – नहीं. एक बार मैं अकेले ही देख रहा था और पहली ही पिक मम्मी की निकल आई थी…
रानी – वो भी ऐसी ही थी क्या? क्या था उस पिक में?
भानु – नहीं ऐसी नहीं थी. सिम्पल ही थी. लेकिन उसमे भी मम्मी की ब्लाउज बहुत ज्यादा ही लो कट थी…
रानी – हाँ मम्मी को वैसा ही पसंद है.
भानु – यार उस दिन तो मैं बहुत डर गया था की तू नाराज हो गयी होगी…
(दोनों के मन में एक ही बात चल रही थी लेकिन दोनों में से कोई भी पहले नहीं बोलना चाह रहा था…रानी ज्यादा समझदार थी उसे ये बात समझ में आ गयी और उसने सोचा की उसे ही पहल करनी चाहिए )
रानी – हाँ मुझे पहले तो गुस्सा आया की तू ये सब क्यों कर रहा है और तूने मुझे भी शामिल कर लिया है….यार हमारे पेरेंट्स अगर मजे कर रहे हैं जिंदगी में तो इसमें हर्ज ही क्या है? हमें बुरा नहीं लग्न चाहिए न?
(भानु को तो जैसे मौका ही मिल गया था..उसने नोटिस किया की रानी ने बात डायरेक्ट ही मुद्दे पर डाल दी थी. वो इधर उधर की बात में टाइम नहीं वेस्ट कर रही थी. भानु की भी हिम्मत बंधी थोड़ी इस बात से )
भानु – नहीं इसमें कोई हर्ज नहीं. और फिर अपनी लाइफ में तो सभी मजे करते हैं लेकिन ऐसा भी क्या मजा करना की सब कुछ दूसरों को भी दिखे. हमें तो नहीं दिखना चाहिए न उनका मजा.
रानी – तो वो हमें दिखा थोड़ी न रहे हैं. बल्कि हम ही टांक झाँक कर रहे हैं उनकी लाइफ में. उनकी नहीं बल्कि हमारी गलती है.
भानु – हाँ है. लेकिन फिर भी…और फिर ये सब पार्टी में कैसे कैसे ड्रेस पहनते हैं. वो सही है क्या? ये अकेले मजे करते हैं या ग्रुप में?
रानी – यार देख मुझे तो लगता है की थोडा बहुत पार्टी कर लेने से इनका मूड फ्रेश रहता होगा और फिर एक ही लाइफ जी जी के बोर भी तो होते होंगे न..इसलिए थोडा बहुत एन्जॉय कर लेते हैं…
भानु – तुझे लगता है ये सब सही है?

रानी – बात सही या गलत की नहीं है. देख उन्होंने हमें तो अच्छी लाइफ दी है न. अब वो अपनी लाइफ में क्या कर रहे हैं इससे हमें क्यों तकलीफ होनी चाहिए???? उन्हें हक है अपनी लाइफ जीने का…जैसे हमें हक है हमारी लाइफ जीना का…
( अबकी बार भानु ने सोचा की अब उसे भी देर नहीं करनी चाहिए और उसने अपनी तरफ से एकदम खुल कर ही बात कर दी )
भानु – हक की बात अलग है. सबको अपनी अपनी लाइफ का हक होता है लेकिन मेरा तो इस बात से ध्यान नहीं हट पा रहा है की हमारे पेरेंट्स ग्रुप में चुदाई करते हैं…
(रानी ने गौर किया की भानु ने कितने अच्छे से चुदाई शब्द बोल कर बात को एकदम ही खोल केर रख दिया है. अब अगर वो इस शब्द पर आपत्ति करेगी तो बात पीछे हट जाएगी और अगर वो इस शब्द पर आपत्ति नही करती है तो भानु के लिए रास्ता साफ़ हो जायेगा….रानी को भी इस बात से ख़ुशी ही हुई…वो भी ज्यादा समय ये फिजूल की बातों में नहीं खर्च करना चाहती थी…)
रानी – नहीं रे. तू तो ज्यादा ही सोच गया…मुझे नहीं लगता की वो लोग ग्रुप में चुदाई करते होंगे…मुझे तो लगता है की ग्रुप में बस पार्टी होती होगी और उसके बाद सब अपने अपने घर चले जाते होंगे..एक साथ नहीं करते होंगे…
(भानु बहुत खुश हुआ की रानी ने चुदाई की बात पर आपत्ति नहीं की बल्कि खुद ही उस तरह की बात करने लगी. भानु को लगा की अब उसका रास्ता साफ़ है. अब उसे और भी खुल खुल कर बात करनी चाहिए)
भानु – भगवान करे की ऐसा ही होता हो..
रानी – अब इसमें भगवन क्या करेगा….इन लोगों के उपर है की ये क्या करते हैं..हा हा हा हा …
भानु – हाँ….मैं तो उस दिन से सोच रहा था की पता नहीं अब हम वो सब फाइल्स देखेंगे या नहीं..
रानी – सोच तो मैं भी रही थी….फिर मुझे लगा की देख लेते हैं. देखने में क्या हर्ज है…हम कौन सा उनके काम में टांग अदा रहे हैं..हम तो बस देख रहे हैं न….देख सकते हैं. मुझे तो लगता है की हमें देख लेना चाहिए. देखने में कोई बुराई नहीं है.
भानु – हाँ हाँ सही कह रही है तू. देखने में कोई हर्ज नहीं है. हमें देखना चाहिए….
रानी – लेकिन यार ये तेरा रैंडम पिक वाला सिस्टम सही नहीं है. इसका कोई आर्डर होना चाहिए.सेलेक्ट करने का आप्शन होना चाहिए. नहीं तो मजा नहीं आएगा.
भानु – मैंने खोज लिया है वो आप्शन भी. अब हम किसी एक की ही सारी पिक्स एक साथ भी देख सकते हैं. फाइल्स की कोडिंग होती है वो मेरी समझ में आ गयी है. तो अब हम जिसकी चाहें उसकी उसकी पिक ही देख सकते हैं. लेकिन ये सिर्फ पिक्स में होगा. विडियो में ऐसी कोई कोडिंग नहीं है तो विडियो तो हमें रैंडम ही देखने पड़ेंगे…
रानी – वाह…मतलब तू देखने का मन बना चुका था पहले ही और मेरे सामने नाटक कर रहा था…
भानु – नहीं. मैं तो बस ऐसे ही कोडिंग पढ़ रहा था…
रानी – हरामी है तू बहुत बड़ा…अब ये नाटक बंद कर..अच्चा ये बता की यहाँ कैसे देखेने वो सब?
भानु – मैंने अपने लैपटॉप को रिमोट एक्सेस में अपने सिस्टम से जोड़ लिया है तो हम यहाँ भी देख सकते हैं..
रानी – देखा मैंने कहा था न की तू हरामी है. सब तयारी पहले से कर रखी है लेकिन नाटक कैसा भोला बन्ने का करता है..हा हा हा ह
भानु – अरे ये सब तो तेरे डर से …..नहीं तो मैं कभी मौका जाने दूंगा क्या अपने हाथ से…अब चल अन्दर चलें….देखते हैं कुछ…
दोनों लगभग भाग के हाउस के अन्दर आ गए और भानु तुरंत अपना सिस्टम ले के बैठ गया……मन ही मन दोनों बहुत खुश थे..जिस कशमकश में दोनों थे वो तो बड़ी आसानी से हल हो गयी…दोनों का ही मन था की कुछ किया जाए और अब वो दोनों करने की तरफ बढ़ रहे थे……भानु ने अपना लैपटॉप चालू किया…..दोनों सोफे पैर बैठे हुए थे और भानु ने लैपटॉप को अपनी गोद में रखा हुआ था…स्क्रीन थोड़ी पीछे झुका दी थी जिससे दोनों को आसानी से दिख सके…उसने अपने लैपटॉप को अपने घर वाले सिस्टम से कनेक्ट किया और फिर दोनों एक पल के लिए ठिठक से गए….भानु के मन में था की सीधे नीलू की ही पिक्स देखि जाए लेकिन वो सोच रहा था की इस बात को रानी कहे….रानी के मन में भी यही बात थी..उसने भी एक पल कुछ सोचा और फिर कह ही दिया की इस बार सबसे पहले मम्मी की पिक्स देखेंगे…….भानु को तो मन की मुराद मिल गयी थी..उसने फोल्डर में जा के उसकी कोडिंग फिट की और बहुत सारी पिक्स लिस्ट के रूप में सामने आ गयी…अभी पिक्स ओपन नहीं हुई थी लेकिन इतनी सारी पिक्स की लिस्ट देख के दोनों के मन में हलचल सी हुई…..भानु बोला की ये तो बहुत सारी पिक्स हैं….रानी ने भी हाँ कहा….फिर भानु ने कहा की एक एक पिक देखनी है या पहले जैसे सब ऑटो शो में लगा दूं अपने आप कोई भी खुलती रहेगी…रानी ने पूछा की क्या सारी पिक्स एक लाइन से आएँगी…..भानु ने बताया की नहीं कोई भी पिक कहीं से भी आ जाएगी….इस पर रानी ने कहा की नहीं. ऐसे नहीं. ऐसे में तो कोई लिंक नहीं बनेगा….ज्यादा मजा आएगा अगर हम खुद ही एक एक पिक देखें…उसमे लिंक बनेगा न..भानु ने भी बात मान ली और उसने उस लिस्ट को डेट के हिसाब से सेट किया….अब वो सारी पिक्स डेट के हिसाब से एक साथ आ गयीं……..अब दोनों पिक्स देखने के लिए तैयार थे…..रानी ने कहा की हाँ अब शुरू कर….और भानु ने पहली पिक पर क्लिक किया…..और फिर उसने उसी डेट की कुछ और पिक्स पर क्लिक किया और सब एक के बाद एक खुलती गयीं…

भानु – ये क्या है? ये मम्मी ने गाँव वालो जैसे कपडे क्यों पहने हुए हैं?
रानी – उन्हें पसंद हैं अलग अलग तरह के ड्रेस पहनना. तुझे नहीं मालूम की उनका कलेक्शन कितना बड़ा है. हर तरह की ड्रेस पहनने के शौक है मम्मी को. इसमें वो एकदम देसी वाली ड्रेस में हैं…
भानु – कहाँ की पिक्स हैं ये ?
रानी – मुझे क्या पता…मैं तो अंदाजा लगा रही हूँ बस…
भानु – अच्छी लग रही हैं न…..
रानी – हाँ. अच्छी भी और सेक्सी भी…
भानु – तू ही बोल सेक्सी. मैं बोलूँगा तो तुझे बुरा लगेगा.
रानी – नहीं लगेगा. खुल के बोल न यार…मुझे क्यों बुरा लगेगा? मैं ही तो कह रही हूँ पिक्स देखने को….बता कैसी लग रही हैं तुझे…
भानु -. मुझे उनका ये देसी वाला अंदाज बहुत मस्त लग रहा है…छोटा सा घाघरा है और चोली देख कितनी लो गले की है…
रानी – हाँ…और??
भानु – और क्या? इसमें उनका फिगर अच्छे से दिख रहा है….
रानी – तू नहीं मानेगा..चल मैं बोलती हूँ कैसी लग रही हैं…
भानु – हाँ तू बता…फिर अगली पिक्स में मैं बताऊंगा सब कुछ साफ़ साफ़…
रानी – ठीक है….ये दूसरी वाली पिक देख…दुसरे नंबर की….उसमे वो कैसे तन के बैठी हुई हैं…..ये हम लोगों का ख़ास पोज होता है…ऐसे बैठने पर हमारा पेट अन्दर हो जाता है और हमारा सीना बाहर आ जाता है जिससे हमारे उभार बहुत अच्छे से दीखते हैं ….तूने कई लड़कियों को स्कूटी चलाते देखा होगा…वो ऐसे ही बैठती है…पीठ एकदम टाइट कर के बैठने से सीना अपने आप खुल जाता है और फिर जिनके सीने छोटे छोटे होते हैं वो भी बड़े बड़े दिखने लगते हैं…इस पोज में उनका फेस का एक्स्प्रेसन भी बहुत हॉट है…जैसे एकदम मूड में हों और अपने साथी को न्योता दे रही हों..इशारा कर रही हों…….समझ में आया कुछ??? ऐसे बताया कर पिक्स के बारे में..
भानु – हाँ समझ में आया…लेकिन तूने फिर भी कंजूसी कर दी…
रानी – क्या कंजूसी कर दी?
भानु – सीना उभार ये सब तो बड़े ही सिम्पल शब्द हैं…तूने यहाँ कंजूसी कर दी…इनके लिए भी थोडा ओपन बोलना था न…
रानी – हाँ वो तो मैंने जानबूझ कर नहीं बोला….वो तो तेरे बोलने के शब्द हैं…तू बोल के बताना अगली पिक्स में तब मैं भी सीख जाउंगी…
भानु – चल चल..तू क्या सीखेगी….तू तो पहले से ही सब कुछ जानती है..
रानी – हाँ जानती हूँ. सब कुछ जानती हूँ…लेकिन तेरे सामने तो अपना ज्ञान सी तरह से पहली बार रख रही हूँ न…इसलिए डर्टी वाले वर्ड्स पहले तू बोलना फिर मैं भी बोलने लग जाउंगी….मैंने इतना तो बोला न…तू तो इतना बी नहीं बोलता…चल अब बता कौन सी पिक के बारे में बोलेगा तू….

भानु – ओके…..देखने दे पहले….हाँ मैं इस चौथी पिक के बारे में बोलूँगा जिसमे वो किसी पत्थर पर पैर मोड़ के बैठी हुई हैं…
रानी – हाँ..मस्त पिक है…अब बोल इसके बारे में….
भानु – हाँ…सोचने तो दे…..हाँ…ठीक है बोलता हूँ अब…
रानी – अब बोलेगा भी की बस हवा ही खीचता रहेगा…बोल न जल्दी…फट्टू कहीं का…
भानु – ओके ओके….इस पिक में अच्चा ये है की इसमें बहुत हॉट लग रही हैं…
रानी – चल साले…ऐसे बोलना है क्या? मैंने कितना डिटेल में बताया सब…तू भी वैसे ही बता….
भानु – हाँ बता रहा हूँ न…रुक तो सही…..ओके….इसमें उनका फिगर अच्चा दिख रहा है…वो खुद ही जानबूझ के दिखाना चाह रही हैं की सब देख लो की मेरे बदन में क्या क्या है…..जैसे उनका ब्लाउज पहले ही इतना लो कट है और उस पर वो उसे और झुक झुक के अन्दर का भी दिखा रही हैं….और उनका घाघरा भी छोटा सा है और पैर इस तरह से मोड हुए हैं की एक तरफ से बहुत उपर तक उठ गया है…और इससे उनकी जांघ अन्दर तक दिख रही है…..और दुसरे हाथ से घाघरे को थोडा उपर तक खीच लिया है जिससे दूसरी जांघ भी थोड़ी थोड़ी दिख रही है….जांघ का अन्दर वाला हिस्सा बहुत मादक लगता है देखने में..और वो वही दिखा रही हैं……सामने खड़े हुआ आदमी अगर थोडा झाँक के देखे तो उनके घाघरे के अन्दर भी देख सकता है…और फिर उसे सब कुछ दिख जायेगा……
( इतना बोल के भानु चुप हो गया..उसने जोर की सांस ली…सांस तो अब रानी की भी भरी होने लगी थी….दोनों मन ही मन बहुत खुश थे…और दोनों को इस बात का भी बहुत रोमांच हो रहा था की वो अपनी ही माँ के बारे में ऐसे बात कर रहे हैं जैसे की मॉडल को देख के कह रहे हों….उसके फिगर क्र बारे में कह रहे हैं और एक दुसरे को बता रहे हैं…एक दुसरे को गरम कर रहे हैं….भानु ने देखा की रानी बार बार अपने आप को सोफे पर सेट कर रही थी….दरअसल रानी अपनी चूत को सोफे पैर घिस रही थी..कपड़ों के उपर से उसे कुछ ज्यादा मजा तो नहीं आ रहा था चूत में लेकिन इस तरह से बैठ कर वो अपनी चूत पर ज्यादा से ज्यादा दबाव बना रही थी….हम लड़कियों को इस काम में बहुत मजा आता है..लड़के तो ऐसा नहीं कर पाते होंगे लेकिन लड़कियां कर सकती हैं..हम उपर से बिना कुछ दिखाए बिना किसी को कुछ पता चलाये ही इस तरह से बैठ जाते हैं की हमारी चूत पर पूरी बॉडी का दबाव बनता है और दबाती हुई अन्दर ही अन्दर मन को मगन कर देती है….रानी ने सोचा की भानु को पता नहीं चलेगा…लेकिन भानु पहले ही इतनी सारी चूतों की सैर कर चुका था की उसे सब पता था और वो ये समझ रहा था की रानी बार बार सोफे पर खुद को क्यों एडजस्ट कर रही है…..उसने भी थोड़ी हिम्मत की अपनी गोद पर रखे लैपटॉप को ऐसे एडजस्ट किया जैसे वो रानी को बताना चाह रहा हो की उसका लंड खड़ा हो रहा है और ये लैपटॉप उसके लंड को खड़ा होने से रोक रहा है…..रानी ने भानु की इस हरकत को देखा और समझा और बोली…)
रानी – दिक्कत हो रही हो तो लैपटॉप को सामने टेबल पर रख दे…
भानु – नहीं अभी इतनी दिक्कत नहीं हो रही..जब होने लगेगी तब रख दूंगा….अब और पिक्स देखें??
रानी – हाँ हाँ..और दिखा न….

इस बार जो दो पिक्स खुली वो तो दोनों ही अपने आप में क़यामत थी….भानु और रानी दोनों ही थोड़ी देर उन पिक्स को चुपचाप एकटक देखते रह गए….और फिर भानु ने कहा…
भानु – इस बार तो दोनों ही जबरदस्त पिक्स खुली हैं यार..
रानी – हाँ यार…ऐसा लग रहा है जैसे दोनों ने हमें झटका दे दे के मार देने की सोची है और इसीलिए ऐसी ऐसी पिक्स सामने आ रही हैं..
भानु – अब बता तू किस पिक पर बोलेगी…
रानी – मैं इस पर जिसमे मम्मी और पापा दोनों हैं…
भानु – ठीक है..मैं दूसरी वाली पर बोलूँगा…तू बोल पहले..
रानी….ओके……ये वाली पिक….जिसमे मम्मी के पेट को पापा चूम रहे हैं….
भानु – ठीक से देख..चूम नहीं रहे हैं बल्कि चाट रहे हैं…मम्मी का पेट चाट रहे हैं पापा..
रानी – जी नहीं…सिर्फ चूम रहे हैं. तू ठीक से देख उनकी जीभ बहार नहीं है..वो सिर्फ पेट को चूम रहे हैं. अपने मन से कुछ भी मत बोल…
भानु – चल ठीक है. चूम ही रहे हैं……बोल आगे…
रानी – हाँ..ओके….अच्छा सुन…पहले जरा उभार के लिए कोई शब्द बता…
भानु – मुझे तो बोबे अच्छा लगता है.
रानी – नहीं.बोबे सुनने में ऐसा लगता है जैसे रबर का बना हुआ हो. और कोई बता..
भानु – थन….दूध…..चूची….मम्मे….
रानी – हाँ चूची ठीक है…मुझे चूची पसंद है…
भानु – मुझे भी चूची बहुत पसंद है…हा हा हा हा हा…
रानी – हट बदमाश कहीं का…..अब मैं बोलती हूँ पिक के बारे में….
भानु – हाँ बता..
रानी – हाँ देख…इसमें फिर से मम्मी ने वैसे ही पीठ को सीधे कर के अपने उभार..मेरा मतलब है चूची को बाहर किया हुआ है….कंधे खोले हुए हैं पीछे की तरफ इसलिए चूची और ज्यादा निखर के सामने आ रही हैं…और उनकी चूची की बीच की दरार बहुत बड़ी दिख रही है….और वो इस पोज में कड़ी हैं….पैर को उपर कर लिया है….इससे उनका घाघरा उठ गया है और दोनों ही जांघे बहुत अन्दर तक खुल गयी हैं….वो खुद ही अपने हाथ से अपने घाघरे को पीछे कर रही हैं और अपनी जाँघों को और ज्यादा खोल रही हैं….
भानु – जानबूझ के जांघे नंगी कर रही हैं?

loading...

Leave a Reply