नई दुल्हिनियां

हाय दोस्तों, मेरा नाम दिवाकर है और मैं पटना बिहार का रहने वाला हूं। मेरे को नयी नयी दुल्हनों की चूत बेहद पसंद है और अगर वो ताजी ताजी मिल जाये तो बहुत ही बढिया है। अब क्या बताउं मेरे ही घर में एक नयी नयी दुल्हन आ चुकी थी और अगर मैं ये टेन्डर न पेल पाता तो बेकार लाईफ़ हो जाती मेरी। मेरे बड़े भाई अनिल की दुल्हन गवना करके आयी थी कल ही और फ़िर मुझे अपने पड़ोस वाले कमरे में चूत के उद्घाटन समारोह की खबर भी लग चुकी थी। मैंने भाभी से मिलने की सोची, इससे पहले कि मेरा भाई उस चूत का कर देता उद्घाटन। मैने दरवाजा नाक किया तो भाभी ने थोड़ी देर लगायी दरवाजा खोलने में। जब उन्होंने खोला तो मै उन्हे देखता रह गया। क्या माल थी भाई, भरी भरी गांड, उभरी चूंचियां,सुन्हेरे बाल वाली लड़की को दुल्हन के रुप में देख कर मेरा लंड कत्थक करने लगा। मैने पैर छू कर नमस्ते किया, नमस्ते क्या किया, घुटने पर हाथ लगाया और हटाते समय उपर तक सरकाते हुए फ़ुद्दी के पास हल्का रगड़ दिया। मुझे उपर से ही उम्भ्री चूत का अंदाजा हो चुका था। उफ़्फ़, ये गोरा बदन, हरी जवानी, रात को चुदने का कार्यक्रम और फ़िर मेरा ठरकी लंड्। कुछ तो करना था बीड़ू! मैं भाभी के पास बैठ गया और शादी की फ़ोटो एलबम मांग के फ़ोटोज देखने के बहाने वही बैठा रहा। भाभी को भी बुला लिया और फ़ोटोज में कौन कौन हैं, ये पूछने लगा। भाभी को शायद कुछ प्राब्लम थी, वो अपना पिछवाड़ा कभी इधर तो कभी उधर कर रही थीं, उनसे आराम से बैठा नही जा रहा था। मैने पूछ लिया भाभी जी कोई दिक्कत है क्या? वो शरमाते सकुचाते हुए बोली नही देवर जी ऐसा कुछ नही है! मैने जोर देकर पूछा तो उन्होंने बता दिया। उनके पिछवाड़े पर एक फ़ोड़ा था जिसको वो फ़ोड़ नही पा रही थी और वो उसे बैट्ने भी नहि दे रहा था। मैने कहा लाईये मैं आपकी मदद करता हूं, वो बहुत शरमा रही थीं लेकिन मजबूरी थी, करे तो क्या करें क्योंकि आज ही रात को उनकी चूत और गांड को पानीपत की लड़ाई मेरे बड़े भाई के लौड़े के साथ खेलनी थी। मैने कहा लाइये फ़ोड़ देता हूं तो बड़े संकोच के बाद वो तैयार हुईं।

उन्होंने पलंग पर लेटकर अपनी पेटीकोट उपर चूत की तरफ़ सरकाना शुरु किया। चिकनी चिकनी पिंडलियां उघाड़ देख मेरे लंड की सन्नाहट आहिस्ता आहिस्ता बढती जा रही थी। घुटनो तक नंगी चिकनी टांगे और बिना बाल वाली चिकनी जांघे देख कर मेरा लंड पूरा ही तन चुका था। मैने अपने लोवर में अपने लंड के सुपाड़े को भींच लिया क्योंकि अभी बहुत जल्दी हो जाती। इसके बाद जैसे ही भाभी ने अपनी पेटीकोट घुटनों से उपर खींचा मेरी हालत खराब होने लगी, बस मन तो कर रहा था कि अभी शुरु हो जाउं लेकिन कंट्रोल किये हुए था। अब उसकी गांड की गोलाईयां साफ़ दिख रही थीं, और उनके मोटे साईज में अभी मैं गांड का छेद छुपा हुआ था शायद। इसके बाद उसकी दायीं गांड पर मुझे फ़ोड़ा दिख गया, अबे फ़ोड़ा क्या था फ़ुंसी थी, मच्छर के काटे के बराबर! मैने वहां अपनी गरम फ़ूंक मारी और पूछा भाभी कैसा लग रहा है, वो बोली अच्चा लग रहा है और जरा फ़ूंकिये। मैने और मुह नजदीक किया पिछवाड़े के पास और जैसे ही फ़ूंक मारने चला भाभी ने अपनी गांड जरा उपर कर दी और अनजाने मे ही मैने भाभी के चौखटे जैसी पुष्ट गांड का चुम्मा ले लिया। कहानी का मोड़ यही बदल गया, उसका स्वाद मेरे मुह लग गया।
उसके गांड के फ़ोड़े को फ़ोड़ने के बहाने मैने उसका सुन्दर गोलाई वाला पिछवाड़ा चूसना शुरु कर दिया था। मैने उस नाममात्र के फ़ोड़े को दांत से पकड़ा और काट दिया, खून की हल्की सी धारा भाभी की सुन्हेरी गांड पर बहने लगी और मैने उसे अपनी जीभ से चाटना शुरु कर दिया। भाभी सीसी कर रही थी, उफ़्फ़्फ़ देवर जी ये क्या कर रहे हो प्लीज रुको ना ओह ओह्ह्ह्ह!! और खून गांड की गोलाइयो से उतरता हुआ फ़ुद्दी की घाटी में जाने लगा। मैने अपना मुह वहां ढलान पर लगा दिया। बता दूं कि भाभी ने च्ढ्डी नही पहनी हुई थी। अपने जीभ की पुलिया बना मैने उस खून की धारा को चूत में जाने से तो रोक लिया लेकिन मेरी जीभ का एक सिरा उसकी फ़ुद्दी की फ़ांकों से छू रहा था। वो कसमसाने लगी, तड़फ़ड़ाने लगी। अब तक हम दोनो एक दूसरे से बात ही नही कर रहे थे, लेकिन जैसे ही मैने अपने मुह का दबाव उसकी गोरी चमड़ी पर बनाते हुए हल्के दांत लगाने शुरु किये और जीभ से उसकी गांड की सफ़ाई करने लगा, वैसे ही उसके मुह से कुछ कुछ आवाजे निकलने लगीं। उफ़्फ़ आह्ह्ह!! हुम्म्म!! धीरे धीरे चूसो ना ओह प्लीज चूस लो ना देवर जी आह अच्छा लग रहा है, उम्म्म्म्म प्लीज छोड़ो ना कोई देख लेगा आपके भैया आते ही होंगे। लेकिन कभी शेर ने अपना मुह मे आया शिकार छोड़ा है जो मुह में आयी हुई कोरी कवारी चूत को मैं छोड़ दूं।

मेरे हाथ भाभी के पीठ पर सरकते हुए उसके चोली के डोर पर चला गया जो कसके बंधी हुई उसके चूंचे को बेवजह गुलाम बना रही थी। मेरे हाथो की गुदगुदी से उसका बदन सिमटा जा रहा था और ऐसा लग रहा था वो या तो बिस्तर में छेद करके अंदर घुस जायेगी या फ़िर सिमट के गोल हो जायेगी। मैने डोर खोल दी। अंदर बस एक ब्रा थी जो कि खुद ही चूंचे के दबाव से खुल गयी। बेकाबू होती गरम जवानी और गदराये बदन की मल्लिका की नंगी पीठ पर लंड रगड़ने का यही सही मौका था। मैने उल्टा होकर अपना लंड उसकी गरदन की तरफ़ किया और अपने लंड को एक हाथ से उसकी नंगी गोरी पीठ कि चमड़ी से रगड़ते हुए अपना मुह उसकी गांड के छेद पर लगा दिया। शायद उसे इस का पहला एहसास था, वो मारे मजे के सीत्कारें मार ने लगी। मैने अच्छे से उसकी छेद की चुसाई करी। अब तक मैं उसके पीठ और पिछ्वाड़े का मजा ले रहा था, अगाड़ी तो अभी बाकी थी। पलट दिया मैने उसे और उसके नुकीले चूंचे पर अपने उंगलियों का कब्जा जमा दिया, मेरे होट उसके होटो के अंदर था और वह मस्ताते हुए मेरे होटो को काट रही थी। मेरा लंड कब मेरे पैंट से बाहर आ चुका था ये उत्तेजना और आकर्षण से पता भी नही चला। उसकी टांगें खुली थीं और हाथ धीरे से मेरे मोटे लौंडे के उपर कब्जा जमा चुके थे।
मेरा मोटा लंड लम्बा तो नही था पर हां मोटा हद्द था और किसी भी फ़ुद्दी के घेरे को दो गुना बड़ा जरुर कर देता था। उसके एक हाथ में नही आ पा रहा था, मैने उसे अपना सुपाड़ा चटाया काहे कि मुह में घुसा देता तो पहले मुह ही फ़ट जाता। अब बारी थी उसके चूत की। और जब मैने उसके फ़ुद्दी को देखा तो अवाक रह गया। चूत की बाहरी दीवारों में उसने सोने की नथुनी पहन रखी थी। कसम से ये मुझे भयंकर रुप से उत्तेजित कर रही थी। मेरा लंड इस चूत की नथ उतारने को बेताब था। मैने उसके फ़ुद्दी का जायेजा लिया जो पहले ही गीली गीली होकर रोना शुरु कर चुकी थी। मैने अपने लोड़े का मुहाना उसके चूत के सुराख पर रखा और रगड़ने की जगह थोड़ा टिका कर फ़ुद्दी की गरमी को महसूस करता रहा। उसकी धड़कन फ़ड़क फ़ड़क कर मेरे लोड़े को भड़का रही थी। मैने उसे अपना छेद खोलने को कहा। उसकी बड़े नाखून वाली उंगलियां चूत की फ़ांकों को खोलने लगी और मुझे अंदर का गुलाबी नजारा दिखा। ऐसा लगा जैसे कि गुलाबों की ढेरे अंदर रखी हो और उसपर ओस पड़ी हो। वाकैई फ़ुद्दी की दीवारें गरम गरम रस से भरी पडी थीं। मैने लोड़े को अंदर ठेलने के लिये सुरंग के मुहाने पर रख कर चिपना शुरु कर दिया। पीछे से कमर पकड़ रखी थी कि वो हटा न ले अपना पिछवाड़ा नीचे से। वो चिचियाने लगी, ये तो होना ही था, मरती हुई मुर्गी की पंखों की तरह उसके बाजू फ़ड़फ़ड़ा रहे थे लेकिन मेरे वजन के नीचे दबी वो कुछ भी करने मे असमरथ थी। मैने अपना सारा वजन डाल दिया अपने लोड़े पर और वह आवेग से अंदर का रास्ता किसी खजर की तरह चीरता हुआ सीधा खोलता चला गया।

ये सब 10 सेकंड का खेल था, वो मरमरा गयी थी। अब लंड ने उसके चूत के उपरी और निचले किनारे एक एक इंच और खोल दिये थे। फ़ुद्दी फ़ट चुकी थी। मैने अपने धक्को को लगाना जारी रखा और फ़िर उसे पलाट कर कुतिया बना चोद दिया। अरमान पूरे हो चुके थे मेरे बिगड़े लंड के और उसकी नन्हीं फ़ुद्दी बम भोसड़े प्रचँड चूत की रानी बन चुकी थी। सारा वीर्य उसके बालो पर छिड़क कर मैने रहा सहा कसर निकाल दिया। वो रोने लगी मेरे कंधे से चिपट कर कि थोड़ी देर में उसके भाई साहब आयेंगे तो क्या कहेंगे। मैने कहा इसका इंतजाम मेरे उपर छोड़ दो भाभी। शाम को भाई को इम्पोर्टेड व्हिस्की पिला दी और उसे भोसड़े और फ़ुद्दी का फ़र्क समझने की क्षमता जाती रही। रात को वो मेरे बनाये रास्ते पर चल कर अपने को तीसमार खां समझता रहा। सुबह भाभी के लिये खुद ही दवा लाकर उसने दिया और मेरे से कहा यार मैने तो आज तेरी भाभी की चिन्दियां उडा दीं। मैने कहा शाबाश भैया!! the end

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