धर्म से अधर्म

अजय एक 24 साल का युवक था अपने माता पिता के साथ जालंधर के एक हीसे मे अपना मकान था जो काफी पुराना हो चुका था जर्जर हालत मे कभी भी गिर सकता था मगर माली हालत ज्यादा अछि न होने के कारण वो उसी मे गुजारा कर रहे थे पिता एक कंपनी मे मामूली से कलर्क थे और माँ एक ग्रहणी थी अजय बहारवी पास करने के बाद छोटी मोटी नोकरी ढूंढने लगा अजय शरीर से थोड़ा गोल मटोल और रंग साफ था बोलबानी का परभाव अच्छा था सो उसे जल्द ही एक जगह स्टोर कीपर की नोकरी मिल गयी जहा वो ज्यादातर फ्री ही रेहता था वो थोड़ा धार्मिक किसम का इंसान था और शारदा और विश्वास उसमे कूट कूट कर भरे थे उसके सुभाव से सभी वोर्कर और मालिक उससे प्रभावित थे जिससे उसे कुछ ही महीनो मे वो सबका चहेता बन गया था उसके मालिक का नाम संदीप था एक दिन मालिक ने अजय को अपने पास बुलाया और कहा
अजय कल अपने फक्टरी पुजा है और ये लो लिस्ट जाकर बाज़ार से समान ले आओ
अजय : ठीक है सर सुबह आता हुआ ले आउगा
संदीप : अच्छा है तो ऐसा करो आज तुम बाइक ले जाओ सुबह पंडित जी को भी साथ ही लेते आना ये लो उनका पता
अजय : जी मैं सुबह समय से पंडित जी को लेके पहुच जाउगा
अजय घर जाते हुये सारा समान पंसारी की दुकान से लेता है और घर पाहुचता है और माँ से कहता है बहुत भूख लगी है खाना लगा दे
माँ : अजय बेटा ये पुजा का समान किस लिए
अजय : माँ कल फ़क्ट्री पुजा है उसी के लिए मालिक ने मौजे सारी जीमेदारी सोंपी है आप मुझे सुबह जल्दी उठा देना
माँ का सीना गर्व से फूल गया की मेरा बेटा कितना होनहार है की इतनी जल्दी मालिक का चेहता बन गया

अजय को सुबह माँ ने उठाया उठ बेटा सुबह हो गयी
अजय माँ अभी सोने दो
माँ बेटा तूने आज फेकटरी जल्दी जाना है पुजा के लिए
इतना सुनते ही अजय एक दम से बिस्तर से उठा ओर नहाने के लिए बाथरूम मे गुस गया बाहर आते ही तयार हो गया तो उसके पापा ने कहा क्या बात है दस मिनट दस मिनट करना वाला आज जल्दी कैसे तयार हो गया तो माँ ने बताया की आज उसके फेक्टरी पुजा है और मालिक ने एसकी जिमेदारी लगाई है तो अजय के पिता जी खुश हो गए अजय जल्दी से बाइक चला के पंडित जी के घर की तरफ चला गया
उनके घर पाहुचते ही अजय ने दरवाजा खड़काया तो एक लड़की ने खोला और बोली
जी कहिए मगर अजय उसकी खुबसुरती मे खो गया गोरा रंग पतली कमर और इतनी खूबसूरत आवाज़ थी इतने मे उसने अजय को कंधे से पकड़ के हिलाया ओ हैलो किसको मिलना है
अजय झेप गया
उसने कहा पंडित अनिल जी यही रहते है मुझे संदीप जी ने भेजा है उन्हे लेने के लिए
इतने मे अंदर से आवज आई नेहा बेटी कोण है
नेहा पापा संदीप अंकल की फेक्टरी से कोई लड़का आया है आपको लेने
पंडित जी बेटा उन्हे अंदर बिताओ मैं पाँच मिनट मे आता हूँ
नेहा जी अंदर चलिये
अजय अंदर जा कर भी उसी को देखता रहा हालाकि वो ऐसे लड़का नहीं था वो बचपन से शर्मिला और लड़कियो से डरने वाला था मगर आज नेहा को देखने के बाद उसे पता ही नहीं क्या हुआ कि उसकी नजर नेहा से हट नहीं रही थी नेहा ने उसे चाय दी और थोड़ा घूर के बोली चाय पी लीजिये पिताजी आ रहे है अजय एक दम से बोला आप बहुत खूबसूरत है नेहा आश्चर्य से उसे देखने लगी कि कितना बेशर्म लड़का है

इतने मे पंडित जी अंदर आ गए अजय ने उठ के पंडित जी के चरणों को सपर्श किया और वो अजय के साथ फेकटरी चले गए रास्ते मे पंडित अजय से बोले बेटा तुम संदीप जी पास कब से काम कर रहे हो पहले तो तुम्हें नहीं देखा अजय जी पंडित जी मुझे अभी 3 4 महीने ही हुए है पंडित जी बोले अच्छा है कहा रहते हो अजय ने अपने घर का बताया एसे ही बाते करते करते वो फेकटरी पहुच गए संदीप जी ने आगे बढ़ कर पंडित जी के पेर छूए और उनसे पूछा लड़का समय से पाहुच गया था ना पंडित जी बोले जी ये तो पाहुच गया था मुझे ही विलंभ हो गया अच्छा लड़का है संदीप जी खुश हो गए
उहनों ने अजय से समान मांगा और पुजा प्रारम्भ हो गयी अजय ने पुजा मे खुब अच्छे से सब कार्ये किए पुजा समापत होने के बाद पंडित जी ने अजय को कहा की वो उन्हे घर छोड़ आए तो अजय को लगा की उसे मुह मांगी मुराद मिल गयी वो नेहा का चेहरा भूल नहीं पाया था उसने अपने बॉस से पूछा उहनों ने भी हामी भर दी अब अजय सारे रास्ते यही सोच रहा था की उनके घर के अंदर कैसे जाऊ ताकि उसके अछे से देख सकु यही सोचते सोचते अजय पंडित जी के घर के बाहर पहुच गया पंडित जी ने उसे कहा अच्छा बेटा कभी कभार आते रहना मगर अजय मन मे सोच रहा था की मे तो आज ही आने की सोच रहा हूँ इतने मे पंडित जी बोलो बेटा कहा खो गए
अजय बोला पंडित जी क्या आप मेरी जनम पत्री देख देंगे
पंडित जी बोलो हाँ जरूर वैसे भी आज तुमने मेरी बहुत सेवा की है तुम मेरे साथ अंदर आओ
अजय का मन खुशी से झूम उठा और वो पंडित जी के साथ चल पड़ा

पंडित जी ने आगे बढ़ कर दरवाजा खड़काया और एक लड़की ने खोला जो पंडित जी के घर काम करने वाली नोकरानी थी
पंडित जी ने कहा नेहा कहा है उसने कहा वो छोटी दीदी के साथ बाजार गयी है शाम तक आए गी ये सुन के अजय का चेहरा उतार गया
वो जिसके दीदार के लिए आया था वो उसे मिली ही नहीं
पंडित जी ने राधा (नोकरानी) को चाय के लिए बोला और पंडित जी को अपने कक्ष मे ले गए
वाहा जाने पर पंडित जी ने अजय से उसकी पत्री की डिटेल ली और पत्री बनाने लगे
इतनी देर मे राधा आ गयी और झुक कर उनके सामने चाय रखने लगी जिससे अजय का ध्यान अचानक की उसके वक्ष की तरफ चला गया
उसके अंदर की गहराई देख कर अजय को कुछ कुछ होने लगा अजय ने अब ध्यान से उसके जिसम को देखा जिसे वो नेहा के लिए अनदेखा कर चुका था
वो सावले रंग की 20 साल और अछे से जिसम की मालिक थी मोटे मोटे चुचे और उबरी हुई गंड देख कर अजय का खड़ा होने लगा
अपने जिस्म को घूरता पा के राधा जल्दी से वहा से निकाल गयी
इतने मे पंडित जी बोले बहुत खूब
अजय ने एक दम से पूछा कया हुआ पंडित जी
पंडित जी बोले बेटा तुम्हारी कुंडली बहुत बढ़िया है ऐसी कुण्डलिया बहुत कम देखने को मिलती है
अजय खुश होता हुआ बोला क्या खास बात है मेरी कुंडली मे
पंडित जी बेटा तुम्हारी कुंडली मे राज योग है और अछे ज्योतिष और तंतर विध्या घ्याता के योग ऐसा आदमी तख्त पे बेटा साधू होता है जो धर्म और अधर्म दोनों साथ लेके चलता है
अजय मन मे हसने लगा की घर का गुजारा मुश्किल से चलता है और ये मुझे राजा बनाने चले है
अजय ने कहा पंडित जी क्यूँ आप मुझ से मज़ाक कर रहे है

एस पर पंडित जी थोड़ा ज़ोर से बोले मैं किसी से मज़ाक नहीं करता मेरी काली जुबान है मे हमेशा सच बोलता हूँ अजय पंडित जी का ये रूप देख कर शांत हो गया और उनके चरण स्पर्श कर के जाने लगा तो पंडित जी उसे बाहर छोडने आए और कहा जो मैंने कहा है वो अवश्य सत्य होगा और कभी कभार समय मिले तो आते रहना मैं तकरीबन घर पे ही होता हूँ अजय वहा से निकला मगर उसके मन मे पंडित जी के वही बाते घूम रही थी मैं किसी से मज़ाक नहीं करता मेरी काली जुबान है यही सोचते सोचते अजय घर पाहुच गया उसने अपनी माँ से पूछा माँ काली जुबान क्या होती है माँ ने कहा
बेटा काली जुबान वाले जो कह दे वो वाक्य हमेशा सत्य होते है पर तू ये सब क्यूँ पूछ रहा है
अजय ने सारी बात माँ को बताई तो उसकी माँ खुश हो गयी की शायद उसका बेटा सच मे इतना अमीर हो जाए
और अजय अभी तक नेहा के ख्यालो मे खोया हुआ था इतने मे उसे नींद आ गयी और वो सो गया सुबह उठते ही वो नहा धो के पंडित जी के घर की तरफ निकाल पड़ा मगर उसे समझ नहीं आ रहा था वो उन्हे क्या कहेगा
अजय ने घर के बाहर पहुच के दरवाजा खड़काया
कुछ देर बाद एक लड़की ने दरवाजा खोला और बोले किससे मिलना है वो लड़की नेहा से भी ज्यादा खूबसूरत थी अजय के मुह की बात मुह मे ही रेह गयी वो कुछ बोल न पाया
इतने मे नेहा आ गयी उसने पूछा नीता कोण है मगर बाहर अजय को देख कर बोली आप
अजय अचानक अपनी तिन्द्रा से बाहर आया उसने कहा मुझे तुमसे मतलब पंडित जी से मिलना था
नेहा कुछ कहने को हुयी इतने मे पंडित जी की आवाज़ अंदर से आई कोण है बेटा
नेहा ने कहा अजय जी आए है

पंडित जी ने कहा उन्हे चाय वगहरा पिलाओ मे पाँच मिनट तक आता हूँ नीता ने अजय से बोला मे पंडित जी की छोटी बेटी हूँ कल ही गाव से वापिस आई हूँ इसी लिए मुझे आपका पता नहीं था अजय ने कहा कोई नहीं थोड़ी देर मे राधा चाय दे गयी मगर आज अजय ने उनकी तरफ ध्यान नहीं दिया अजय चाय पीते हुये नेहा और नीता का अवलोकन कर रहा था कोण ज्यादा खूबसूरत है दोनों एक से बढ़ कर एक थी अब उसकी समस्या ये थी की बातचीत कैसे शुरू की जाए अजय को देखते ही नेहा का चेहरा बन जाता था थोड़ी देर मे पंडित जी आ गए अजय ने पंडित जी के पैर छूये पंडित जी ने कहा खुश रहो बेटा कैसे आना हुआ अब अजय समझ नहीं पा रहा था की काया जवाब दे बस अचानक ही उसके मुह से निकला क्या मे ज्योतिष सीख सकता हूँ
पंडित जी बोलो हा हा क्यूँ नहीं तुम एस मे बहुत उपर जा सकते हो
अजय ने मन मे सोचा मैं तो आपकी बेटी के उपर जाना चाहता हूँ अजय ने सोच के जवाब दिया क्या आप मुझे सिखाएगे
पंडित जी सोच के बोले देखो बेटा मैंने आज तक किसी को सिखया नहीं और ना ही सिखाता हूँ
अजय : प्लीस पंडित जी मैं बस आपसे ही सीखना चाहता हूँ
पंडित जी : देखो बेटा मैं सीखा नहीं पाउगा
अजय : नहीं पंडित जी ऐसा ना कहे आप जैसा सीखा देंगे मैं सीख लूँगा बस आप मुझे अपनी शरण मे ले ले
पंडित जी : ठीक है बेटा मगर एसके लिए तुम्हें रोज मेरे पास आना पड़ेगा
अजय : कोई बात नहीं पंडित जी मैं सब देख लूँगा
अजय बहुत खुश था क्यूँ की उसे उस घर मे आने जाने की अनुमति जो मिल गयी थी

घर जाके उसने अपनी माँ को बताया की वो पंडित जी से ज्योतिष विध्या सीखने जाया करेगा मगर पिता जी ने सुनते ही कहने लगे ये कया नया शोक चढ़ा है मगर अजय अपनी ही मस्ती मे खोया हुआ जाते ही सो गया सुबह अपने आप जल्दी उठ गया नहाने के बाद उसने माँ से खाना मांगा माँ ने घड़ी देखि और बोली इतनी जल्दी कहा चला है अभी तो पाँच बजे है
अजय : माँ आज पहला दिन है पहले ही दिन लेट नहीं जाऊगा वैसे भी कल उनसे समय पुछना भूल गया था अब जल्दी से खाना देदो
माँ अच्छा बेटा मगर बनाना पड़े गा जो रात का बचा है वही खा ले पहले बताया होता तो पहले ही बना देती अभी तो एक घंटा लग जाएगा
अजय : तो जल्दी से वही गरम कर दो
अजय ने जल्दी से खाना खाया और पंडित जी के घर की तरफ निकाल गया
उसने पंडित जी के घर कर दरवाजा खड़कने से पहले भगवान को याद किया की दरवाजा नेहा ही खोले
और उसने दरवाजा खड़काया और बेसबरी से इंतज़ार करने लगा भगवान ने उसकी सुन ली थी दरवाजा नेहा ने ही खोला और बोली आप और इतनी सुबह सुबह
अजय ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा वो अभी तक नाइट ड्रेस मे ही थी और उसकी कमीज से उसके बिना ब्रा उभारो का साफ पता चल रहा था अजय तो उसकी तरफ ही देखता रहा वो अब फिर गुस्से मे आने लगी थी वो ऐसे ही वापिस मूड गयी और अंदर जा के अपने पिता जी को बुलाने चली गयी
अजय डर गया उसने सोचा आज तो मे कुछ बोला नहीं फिर इतने गुस्से से क्यूँ गयी
थोडी देर मे पंडित जी आ गए अजय ने उनके पैर छूए
पंडित जी : खुश रहो बेटा आज इतनी सुबह सुबह

अजय ने अपने आने का कारण बताया जो पंडित जी भूल गए थे इतने मे नेहा चाय लेके आ गयी मगर अब उसके चेहरे पे गुस्सा नजर नहीं आ रहा था अजय ने राहत की सांस ली
पंडित जी बोले बेटा मेरे तो दिमाग से ही निकाल गया था चलो अच्छा है सुबह जल्दी आने से हम भी उठ जाया करेगे क्यूँ नेहा बेटा
नेहा बोली : जी पापा (उसने मन मे सोचा रोज एस हाथी का चेहरा देखना पड़े गा )
पंडित जी ने अजय को कुछ समान बताया जो उसके सीखने के लिए जरूरी था और कुछ और नियम बताए अजय पूरे मन से पंडित जी की बात पर ध्यान दे रहा था अब उनसे एक घंटा नेहा जो उनके पास ही बेठी थी उसपे ध्यान नहीं थोड़ी देर मे राधा झाड़ू हाथ मे लिए हाजिर हुयी और सब को बाहर जाने को कहा अजय ने उसकी तरफ देखा की उसने काफी पतले कपड़े की कमीज डाली हुयी थी जिसमे से उसके निप्पल साफ दिख रहे थे वो तीनों बाहर निकाल गए बाहर नीता बेठी सोफ़े पे ही सो गयी थी
पंडित जी हसे और बोले एसका यही हाल है जहा बेटे जीआई वही सो जाए गी ये बात सुन कर अजय और नेहा दोनों हास पड़े अजय ने हस्ती हुयी नेहा को देखा तो वो तो उसकी खूबसूरती मे ही खो गया
अजय ने जाने की इजाजत मांगी और फेकटरी चला गया
अब ये उसका दिनचर्या हो गया था रोज पंडित जी के घर जाना और उसके बाद फेकटरी
मगर अब तक दोनों मे कोई बातचीत शुरू नहीं हुई थी
अजय को फेकटरी की तरफ से शहर से बाहर भेजा गया दो दिन के लिए मगर अचानक जाने वजह से वो पंडित जी को बता नहीं पाया उसे ऑफिस की गाड़ी दी गयी थी जो उसने वही के ड्राईवर से सीखिए थी काम जरूरी थी एसे लिए संदीप ने उसे अपनी गाड़ी दे कर भेजा था

अजय ने एक ही दिन मे अपना सारा काम खतम कर लिया और गाड़ी से शहर गमने निकला जाते जाते बारिश शुरू हो गयी वो धीरे धीरे गाड़ी चलता हुया नेहा को याद कर रहा था
थोड़ा आगे जाते ही उसे एक लड़की सामने एक तरपाल के नीचे भीगी हुई और रोती हुयी दिखी अजय ने हल्का सा ध्यान दिया और गाड़ी आगे बढ़ा दी पर फिर एक दम से ब्रेक लगा के गाड़ी पीछे ले गया और लड़की देख कर चोंक गया वो उस लड़की के पास जाके बोला : नेहा तुम यहा और रो क्यूँ रही हो
नेहा ने अजय को देखा तो एक दम से चुप कर गयी और भाग के अजय के गले लग के ज़ोर से रोने लगी
अजय ने पूछा बता तो सही हुआ का और रो क्यूँ रही है नेहा सुबकते हुये बोली
मैं आज सुबह यहा पेपर देने आई थी और थोड़ी देर पहले मेरा किसी ने पर्स छीन लिया उसमे मेरे पैसे और मोबाइल था और यहा कोई मुझे जनता नहीं कोई मदद करने भी नहीं आया अजय ने कहा गाड़ी मे बेठों
नेहा उसके साथ गाड़ी मे बेठ गयी और अजय ने गाड़ी होटल की तरफ दोड़ा दी जहा वो ठहरा था
नेहा ने उससे पूछा आप यहा
अजय : मुझे संदीप जी ने किसी काम से भेजा था आज का काम जल्दी खतम हो गया था इसी लिए घूमने निकला था
नेहा : अच्छा हुआ आप मिल गए नहीं तो मेरा कया होता
अजय : एसी लिए भगवान ने मुझे भेजा ताकि आपकी मदद कर सकु दोनों मुस्कुरा उठे
अपने कमरे मे जाके अजय ने कहा की शाम हो गयी है और बारिश भी बहुत है एसी लिए आप कल मेरे साथ ही वापिस चलना
नेहा ने कहा की मगर मेरे पास तो कुछ भी नहीं

अजय ने कहा क्यूँ मे हूँ ना
नेहा ने आज पहली बार उसे अछे नजरिए से देखा अजय ने उसे कहा की आप पहले पंडित जी को फोन करके सब बता दो वो चिंतित हो रहे होंगे
नेहा ने तुरंत अजय के मोबाइल से फोन किया और पंडित जी को सब बता दिया पंडित जी वाकयी मे चिंतित थे क्यूँ की पिछले एक घंटे से नेहा का फोन लगा रहे थे जो बंद आ रहा था नेहा से बात करने के बाद वो निश्चिंत हो गए की अजय के साथ है
कुछ देर बाद अजय ने कहा की आपके कपड़े भीगे हुये है आपको ठंड लग जाए गी नेहा ने कहा मेरे पास तो और कपड़े नहीं है अजय ने कहा आप मेरे कपड़े पहन लीजिये तब तक ये सुख जाए गे नेहा ने कुछ सोच कर अजय का कुर्ता पाजामा पहन लिया
अजय ने कहा मैं अभी आया और बाहर निकाल गया

अजय थोड़ी देर बाद वापिस आया उसके हाथ मे दो पैकेट थे उसने आते ही नेहा की और दोनों पैकेट बढ़ते हुया कहा प्लीस इंकार मत करना लेलों
नेहा ने पैकेट खोल के देखा एक पैकेट मैं फ्रॉक सूट और एक मे नाइट ड्रेस थी दोनों ही एक से बढ़ कर एक खूबसूरत थी अजय ने कहा जल्दी से रेडी हो जाए खाना खाने भी चलना है वो कभी ड्रेससेस कभी अजय को देख रही थी उसे समझ नहीं आ रहा था की वो क्या प्रतिकिर्या दे अचानक ही उसने अजय के गले लग के उसे किस कर दिया और बोली थैंक यू अजय
ये ड्रेस मैंने सुबह देखि थी मगर मेरे पास इतने पैसे नहीं थे की मैं एसे ले सकु तुमने मेरे दिल की तमम्ना पूरी कर दी
अजय खुशी के मारे झूम गया और उसके हाथ नेहा की कमर मे चले गए नेहा कुछ बोल न सकी दो मिनट बाद नेहा बोली अजय मैं तयार होने जाऊ अजय ने एकदम से उसे छोड़ा और बोला सॉरी नेहा मुसकुराते हुये बाथरूम मे चली गयी

अजाने फटाफट अपने कपड़े बदले और नेहा का इंतज़ार करने लगा कुछ देर बाद नेहा जब बाहर न आई तो उसने आवाज़ दी नेहा क्या हुआ बहुत वक़्त लगा दिया नेहा ने कहा छोटी सी प्रॉबलम है
अजय घबरा गया उसने कहा क्या हुआ सब ठीक है न किसी को बुलाउ नेहा ने कहा अरे नहीं फ्रॉक की पीछे ज़िप नहीं लग रही
अभी रुको
दो मिनट बाद वो बाहर आई उसने अछे से चुनरी छाती पे लपेटी थी
अजय ने कहा कया हुआ
नेहा : कुछ नहीं ज़िप नहीं लग रही क्या तुम लगा दोगे
अजय : घूमो

नेहा घूम गयी अजय उसकी टोप्लेस पीठ देख कर बहकने लगा उसने प्यार से उसके पीठ पे हाथ फेरा नेहा एक दम से आगे हो गयी और मुसकुराते हुये बोली शरारत करो गे तो मैं नहीं चालूगी खाना खाने
अजय खुश हो गया वो समझ गया की डाटने की बजाए मुस्कुरा रही है एसका मतलब रास्ता क्लियर है उसने आराम से उसकी ज़िप लगाई और पीछे से गले पे किस करदी
नेहा ने कहा अजय प्लीस मत करो
फिर अजय ने रूम लोक किया और खाना खाने नीचे रेस्टोरेंट चले गए व्हा खाना खाने के बाद दोनों टहलने बाहर निकले चलते चलते अजय ने नेहा का हाथ पकड़ लिया नेहा अजय को देखने लगी और सोचने लगे यही लड़का कुछ दिन पहले मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता था आज मुझे क्या हो गया
थोड़ी देर मे अजय बोला वापिस चले
नेहा : कुछ देर रुको आज बहुत सालो बाद रात को काही बाहर घूम रही हूँ नहीं तो घर पे सात बजे ही घर से निकलना बंद हो जाता है
अजय उसे आइस क्रीम पार्लर ले गया
आइस क्रीम खाने के बाद दोनों सड़क पे आ गए अजय ने उसे कहा एक बात कहु वादा करो अगर बुरी लगी तो मेरी दोस्ती नहीं तोड़ो गी
नेहा : ऐसी कोण सी बात है जो तुम डर रहे हो वैसे तो बहुत जुबान चलती है
अजय : नेहा यार तू पहले वादा कर
नेहा : चलो ठीक है किया वादा अब बताओ
अजय नीचे बेठ के उसे बोला नेहा आई लव यू
नेहा उसे देखती रही कुछ बोली नहीं
अजय : प्लीस नेहा कुछ तो बोलो
नेहा : क्या बोलू

अजय : कुछ भी हाँ या ना कुछ तो बोलो
नेहा : मुझे समझ नहीं आ रही मुझे समझ नहीं आ रही क्या जवाब दु
अजय : जो तुमरे मन मैं है कह दो मैं बुरा नहीं मनुगा
नेहा : नहीं अजय तुम अजय हो जैसा मैं पहले सोचती थी वैसे नहीं हो मगर
अजय : मगर क्या नेहा क्या कोई और है तुम्हारी जिंदगी मे
नेहा(कुछ सोच के बोली ) हाँ
अजय मायूस हो गया और बोला कोई बात नहीं प्लीस मेरी बात को दिल पे मत लेना
नेहा : अरे नहीं मगर मुझे तुम्हारे चेहरे पर उदासी लग रही है
अजय (जबरदस्ती मुसकुराता हुआ) नहीं यार मैं ठीक हूँ
नेहा : नाम नहीं पुछो गे
अजय : मैं जान के क्या करुगा मुझसे तो अच्छा ही होगा
नेहा ने धीरे से उसके कान मे कहा आई लव यू टू अजय
अजय खुशी के मारे नाचने लगा उसने नेहा को खिच के गले लगा लिया और उसके होठो पे अपने होठ रख दिये
नेहा धीरे से पीछे हटते हुये यार क्या कर रहे हो हम रोड पर है अजय एक दम से पीछे हट गया साइड पे एक अंकल आंटी खड़े उसकी एस हरकत पे हस रहे थे

वो धीरे धीरे अपने होटल की तरफ बड़ने लगे तभी बारिश चालू हो गयी
दोनों भाग के होटल पाहुचे जब वो पाहुचे बुरी तरह से भीग चुके थे

दोनों बुरी तरह भीग चुके थे और जल्दी से अपने कमरे मे पहुचे अजय ने टावल से नेहा का सिर पोछना चालू किया और धीरे धीरे उसके हाथ उसके सीने तक जाने लगे नेहा मदहोश हो रही थी मगर उसने जल्दी से अपने आप को संभाला और पीछे हट गयी और नाइट सूट निकालने लगी और अजय से बोला आप कहा सोएगे
अजय ने कहा यही
नेहा : फिर मैं कहा साऊगी
अजय : तुम भी यही
नेहा : मगर हम साथ कैसे सो सकते है
अजय साथ कैसे मैं सोफ़े पे सो जाऊगा तुम बेड पे सो जाना
नेहा : मगर एक कमरे मे
अजय : क्या तुम्हें मुझपे विश्वास नहीं है
नेहा : है तो सही मगर
अजय ने कहा चलो ठीक है मैं बाहर बलकोणी मे सो जाऊ गा
नेहा : नहीं नहीं आप अंदर ही सोएगे
अजय : ठीक है
अजय ने कपड़े बदले सर्दी बढ़ रही थी मगर कंबल एक था फिर भी अजय ने नेहा पे कंबल डाल दिया और नेहा के माथे पे किस कर दी और सोफ़े पे सोने चला गया
रात को दो बजे नेहा की आँख खुली तो उसने सर्दी से कंपकपते अजय को देखा वो धीरे से उसके पास गयी और उसने अपना हाथ उसके सर पर फेरा वो एक दम से घबरा गयी अजय को बहुत तेज बुखार था उसकी सांस भी तेज हो गयी थी उसे समझ नहीं आ रहा था वो क्या करे उसने अजय को उठाने की कोशिश की मगर वो बेहोशी की हालत मे था उसे होश नहीं आ रही थी उसने दरवाजा खोल के बाहर देखा उसे कोई नजर नहीं आया

वो दरवाजा बंद करके नीचे रिसेप्शन पे चली गयी वहा जाके उसने कहा की भाई साहब नजदीक कोई डाक्टर मिल सकता है मिस्टर अजय को बहुत तेज बुखार है
मनेजर बोला : मैडम रात कोई कोई डाक्टर नहीं मिलेगा आप अपने हसबेंड को ये गोली खिला दीजिये सुबह ही मैं डॉक्टर को बुला लूँगा
नेहा हसबेंड सुन कर कुछ कहने को हुई मगर बोली थैंक्स और वापिस कमरे की तरफ चल पड़ी
उसके दिमाग मे आ गया था उसे क्या करना है

वो वापिस कमरे मे आ गयी और अछे से खिड़की दरवाजे बंद कर दिये और सोचने लगी की जो वो करने वाली है क्या वो ठीक है फिर उसने आगे बाद कर अजय को फिर से उठाने की कोशिश की वो नहीं उठा वो उसे खिच के बेड पे लेजाने लगी अजय का वजन ज्यादा होने के कारण वो बुरी तरह थक चुकी थी मगर फिर भी वो कुछ देर बाद उसे बेड पे ले गयी उसे वहा लेता दिया वो उसके हाथ पैर मलने लगी कुछ देर मलने के बाद कोई फर्क न पड़ने पर उसने अजय के कपड़े उतारने शुरू किए शर्ट के बटन खोलते हुये सोच रही थी क्या वो ठीक कर रही है मगर फिर भी उसने उसकी शर्ट पेंट और बानियाँ उत्तार दी अब सिर्फ वो अंडरवियर मे था उसने उसपे रज़ाई कर दी और हाथ अंदर कर के उसका अंडरवियर भी उतार दिया और लाइट बंद करके रज़ाई मे घुस गयी फिर उसने अपने अपनी नाइटी उतार दी उसके नीचे उसने कुछ नहीं पहना था वो धीरे धीरे अजय के करीब चली गयी उसके शरीर पे हाथ फेरने लगी उसके शरीर का नग्न स्पर्श पाकर नेहा को खुद कुछ कुछ हो रहा था वो उसके ठंडे हुये सीने से लिपट गयी और उसके होठो को अपने होठो मे डाल दिया कुछ देर बाद अजय के शरीर मे हलचल होनी शुरू हो गयी नेहा ने अब अपना जिस्म उसके जिस्म से अछि तरह से उसके रगड़ना शुरू कर दिया उसके हाथ अपने आप ही उसके लिंग से खेलने लगे धीरे-2 वो खड़ा होना शुरू हो गया नेहा भी पूरी तरह से गरम हो चुकी थी उसकी योनि पानी से भीगी हुयी थी वो उसके लिंग पे बेठने लगी अचानक बैलेन्स बिगड़ने से वो धाम से उसके लिंग पे गिर गयी और लिंग सिधा उसकी योनि मे धस गया उसकी एक जोरदार चिक निकल गयी
अजय के भी शरीर मे जोरदार हलचल शुरू हो गयी उसका शरीर गरम हो गया था उसकी साँसे समानये से तेज थी मगर उसकी अंखे अभी तक नहीं खुली थी नेहा ने धीरे से उठने की कोशिश की मगर वो उठ नहीं पायी वो ऐसे की उसपे लेती लेती सो गयी

अजय की कुछ देर तक आँख खुली उसने नेहा को एस तरह देखा तो वो उसके एस रूप से हेरान हो गया उसने धीरे से नेहा को नीचे उतारा और खुद उपर आ गया उसने उसके नग्न जिस्म को देख के वो उतेजना से भर गया उसने नेहा के होठो को अपने होठो से केद कर लिया और उसके हाथ उसके जिस्म से खेलने लगे नेहा की आँख खुल गयी और वो भी अजय का साथ देने लगी अजय ने उसके निपल को मुह मे भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा नेहा के मुह से निकला धीरे अजय और वो मस्ती से सिसकरिया भरने लगी अजय ने नेहा को नीचे लेटाया और एक उंगली उसकी योनि मे डाल दी और और उसके निपले चूस रहा था नेहा का शरीर अकड़ गया और वो ज़ोर से चीख के झड गयी अब अजय ने अपना लिंग उसकी योनि पे रखा नेहा को पहले वाला दर्द याद आ गया उसने अजय से कहा की बहुत दर्द होगा अजय ने कहा तुम टेंशन मत लो दर्द नहीं करुगा अजय ने बहुत सारा थूक अपने सुपाड़े पे लगाया और उसे योनि पे टीका दीया उसने नेहा के होठो को अपने होते मे कैद कर लिया और अपनी पकड़ उसके जिस्म पर कस दी और हल्के से लिंग अंदर कर दीया नेहा ने छूटने की कोशिश जी मगर अजय ने ने उसके जिस्म को हिलने दीया न उसके होठ छोड़े आधे मिनट बाद उसने एक और धक्का दीया और आधा लिंग अंदर चला गया नेहा की घुटी हुई चीख अंदर ही रेह गयी उसकी आंखो मे आँसू आ गए अजय ने धीरे से उसके होठो को छोड़ा और उसके निप्पल चूसने लगा नेहा ने पूछा कितना गया उसने कहा बस थोड़ा सा रेह गया वो आधा कह कर उसे डराना नहीं चाहता था थोड़ी देर मे नेहा मस्ती से कमर हिलाने लगी अजय समझ गया की अब बाकी का भी डालना ठीक है उसने एक दम से धक्का मारा उसका पूरा लिंग अंदर चला गया नेहा की चीख को अजय के हाथ ने रोक दीया वो उसके निप्पल चूसता रहा धीरे उसकी दर्द की जगह सिसकारियों ने लेली अजय ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिये उसकी कसी हुई चूत मे उसकी लिंग बहुत मुसकिल से जा आ रहा था नेहा फिर झाड़ने की कगार पे थी उसका जिस्म अकड़ने लगा अजय भी झाड़ने लगा था नेहा झाड गयी साथ ही अजय भी झाड गया

गया नेहा ने उठ के देखा तो चादर पे खून लगा था नेहा ने कहा मैं बाथरूम होके आती हूँ वो बिस्तर से उठी और एक दम से बेठ गयी उससे खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था अजय उसे सहारा देके बाथरूम ले गया वहा उसने गीजर के गरम पनि से उसकी चुत पे सेक किया फिर उसने अजय के बाहर जाने को कहा और मूतने लगी वो उठ के बाहर आई तब तक अजय ने वो चादर उतार दी थी अजय ने उसको खा की वो अभी थोड़ी देर मे दर्द की दवा ले आएगा नेहा ने उसको वो गोली दिखाई जो मनेजर ने उसे दी थी अजय ने कहा ये कहाँ से आई तो नेहा ने उसे सारी बात बता दी अजय की आँखों मे प्यार भरे आँसू आ गए उसने उठ के नेहा जो सीने से लगा लिया नेहा भी भी उसकी बहो मे खो गयी धीरे धीरे अजय ने उसके गर्दन पे किस करने लगा और मस्ती करने लगा नेहा मस्त हो गई और बराबर जवाब देने लगी अजय ने ज्यादा देर न करते हुये उसे नीचे लेटाया और अपना लिंग उसकी योनि मे फसा दीया औरधीरे से अंदर करने लगा नेहा के चेहरा पर दर्द के भाव उबर आए मगर एस बार वो दर्द से सकती थी अजय धीरे धीरे उसके जिस्म को सहलाता हुया ढके लगा रहा था और लिंग को और अंदर डाल रहा था थोड़ी देर ढके लगाने के बाद कमरे मे मस्ती और सिसकरिया घुंज रही थी अजय को बहुत आनंद आ रहा था उसका लिंग जब भी नेहा के अंदर जागे उसके गरभषये को छूता तो नेहा को अजीब सी अनुभूति होती वो तीन बार झड़ के थक चुकी थी अजय का अभी तक हुआ नहीं थी वो अब अजय के जिसम पे हाथ फेरने लगी जिससे अजय भी एक दम से झड़ गया वो दोनों एक दूसरे के आगोश मे सो गए

loading...

Leave a Reply