दुलारा भतीजा

शोभा के अलावा घर के दूसरे लोग अलग अलग समय पर अपने अपने कमरों में सोने के लिए चले गए थे. शोभा और कुमार इस वक्त गोपाल और पद्मा के घर पर आये हुये थे. गोपाल कुमार का बङा भाई था. घर में, गोपाल, गोपाल के दिवंगत मझले भाई विजय का एक 18 साल का लड़का अजय भी था. अजय अपने ताऊ ताई के रहता था और उन्हें अपने माँ बाप की तरह मानता था। उस वक्त सब लोग एक हत्या की कहानी पर आधारित जो इस फिल्म देख रहे थे. आम मसाला फिल्म की तरह इस फिल्म में भी कुछ कामुक दृश्य थें.

एक आवेशपूर्ण और गहन प्यार दृश्य आते ही अजय कमरें को छोड़ कर जा चुका था. गोपाल और पद्मा दृश्य के आते ही और लड़के के कमरा छोड़ने के कारण जम से गये थे. घर के ऊपर और सब सोने के कमरें थे और और शाम को जब से ये लोग आये थे, कोई भी ऊपर नहीं गया था. नौकर सामान लेकर आया था और गोपाल, कुमार शराब के पैग बना रहे थे. महिलायें भी इस वक्त उनके साथ बैठ कर पी रही थी. हालांकि परिवार को पूरी तरह से बड़े बूढ़ों की रूढ़िवादी चौकस निगाहों के अधीन रखा गया था. बड़ों के आसपास होने पर महिलायें सिंदूर, गले का हार और साड़ी परंपरागत तरीके से पहनती थी. कुमार के बड़े भाई होने के नाते, शोभा के लिए, गोपाल भी बङे थे और वह अपने सिर को उनकी उपस्थिति में ढक कर रखती थी. लेकिन चूंकि, दोनों कुमार और गोपाल बड़े शहरों में और बड़ी कंपनियों में काम करने वाले है, सो उनके अपने घरों में जीवन शैली जो बड़े पैमाने पर उदार है. शोभा और पद्मा दोनो हो बङे शहरों से थी अतः उनके विचार काफी उन्मुक्त थे. दोनों महिलायें हमेशा नये फैशन के कपङे पहन कर ही यात्रा करती थी, खासकर जब घर के माता ताऊ साथ नहीं होते थे. हालांकि, दोनों की उम्र में दस साल का अंतर है, पद्मा अपनी वरिष्ठता का उपयोग करते हुए घर में नये फैशन की सहमति बनाती थी. इस प्रकार, गहरे गले के बिना आस्तीन वाले खुली पीठ के ब्लाउज, स्तनों ऊपर को उठा कर दिखाने वाली ब्रा, मेकअप का उपयोग होता था. हालांकि, यह स्वतंत्रता केवल छुट्टियां व्यतीत करते समय के लिये ही दी गई है. सामान्य दिनचर्या में ऐसी चीजों के लिये कोई जगह नहीं थी. वे अक्सर सेक्स जीवन की बातें आपस में बाटती थीं और यहाँ से भी दोनों में काफी समानतायें थीं. दोनों ही पुरुष बहुत प्रयोगवादी नहीं थें और सेक्स एक दिनचर्या ही था. लेकिन अगली पीढ़ी का अजय बहुत अलग था. वह एक और अधिक उदार माहौल में, भारत के बड़े शहरों में बङा हुआ था. अजय वास्तव में, काफी कुछ ही खेलों में भाग लेने के कारण एक चुस्त शरीर के साथ एक दीर्घकाय युवा था.

लड़का बड़ा हो गया था और बहुत जल्द ही अब एक पुरुष होने वाला था. ये बात भी शोभा ने इस बार नोट की थी. फिल्म में प्रेम दृश्य आने पर वह कमरा छोड़कर गया था इसी से स्पष्ट था उसें काफी कुछ मालूम था. बचपन में गर्मीयों की छुट्टी अजय शोभा के यहां ही बिताता था. एक छोटे लड़के के रूप में शोभा उसको स्नान भी कराती थी. कई बार कुमार की कामोद्दीपक उपन्यास गायब हो जाते थे वह खोजने पर वह उनको अजय के कमरे में पाती थी. इस बारे में सोच कर ही वह कभी कभी उत्तेजित हो जाती थी पर अजय के एक सामान्य स्वस्थ लड़का होने के कारण वह इस बारे में चुप रही. अजय के कमरा छोडने के फौरन बाद, गोपाल और पद्मा भी थकने का बहाना बना कर जा रहे थे. हालांकि, वे दोपहर में भोजन के बाद अच्छी तरह से सो चुके थे. शोभा को कोई संदेह ना था कि ये क्या हो सकता है. पद्मा से उसकी नजरें एक बार मिली थी. पर पद्मा बिना कुछ जताये सीढ़ियों पर पति के पीछे चल दी. कुमार कब कमरा छोड़ कर गये ये उसको ज्ञात नहीं था पर जब अचानक उसकी आंख खुली तो ऊपर के कमरे से जबर्दस्त आवाजें आ रही थी. शराब का नशा होने के बाद भी वह गोपाल और पद्मा के कमरें से आती खाट की आवाज से जानती थी के इस वक्त गोपाल अपनी पत्नी को चोदने में व्यस्त हैं. किन्तु उसे पक्का नहीं था कि क्या वे ठीक से कमरे का दरवाज़ा बंद करने में विफल रहे या क्या शोर ही इतना ऊंचा था. लेकिन वह पद्मा की मादक आहें सुन सकती थी जो इस वक्त गोपाल से चुदने के कारण “हां जी हां जी हां! हां, ऊई माँ, हाय हाय मर गयी” के रूप में निकल रहीं थीं. फिर उसने एक लम्बी आह सुनी. शायद गोपाल चुदाई खत्म करके अपना वीर्य अपनी पत्नी में खाली कर चुका था.

फिल्म का असर गोपाल पद्मा पर काफी अच्छा रहा था. फिल्म के उस प्रेम दृश्य में आदमी उस औरत को जानवरों की तरह चौपाया बना कर चोद रहा था. अपने कॉलेज के दिनों में शोभा ने इस सब के बारें में के बारे में अश्लील साहित्य में पढ़ा था और कुछ अश्लील फिल्मों में देखा भी था लेकिन अपने पति के साथ कभी इस का अनुभव नहीं किया. इस विषय की चर्चा अपने पति से करना उसके लिये बहुत सहज नहीं था. उनके लिए सेक्स शरीर की एक जरूरी गतिविधि थी. शोभा ने अपने आप को चारों ओर से उसके पल्लू से लपेट लिया. इन मादक आवाजों के प्रभाव से उसे एक कंपकंपी महसूस हो रही थी. इस वक्त वह सोच रही थी कि क्या अजय ने अपने माता ताऊ की आवाजें सुनीं होंगी? और कुमार, वह कहां हैं? शोभा को नींद आ रही थी और उसने ऊपर जाकर सोने का निर्णय लिया. सीढ़ियों से उपर आते ही, अचानक उसने अपने आपको ऊपर के कमरों की बनावट से अपरिचित पाया. वजह, इस घर में गोपाल नव स्थानांतरित हुये थे. जैसे ही वह सीढ़ियों से ऊपर आयी उसने खुद को कई सारे दरवाजों के सामने पाया. दो दरवाजे खुले थे और वे शयन कक्ष नहीं थे. तीन कमरों के दरवाजों को बंद किया था, और उन में से एक उसका और कुमार का था जब तक वो लोग वहां रहने वाले थे. परन्तु कौनसा दरवाजा उसका है? अगर गलती से उसने गोपाल और पद्मा क कमरा खोल दिया तो क्या होगा. इस बात कि कल्पना मात्र से ही उसको और नशा चढने लगा. अपनी कामुक कल्पना पर खुद ही मुस्कुरा के झूम सी उठी थी वो. अब जल्दी से जल्दी वो अपने बिस्तर तक पहुंचना चाहती थी. अपनी चूत में उठती लहरों को शान्त करना उसके लिये बहुत जरूरी हो गया था. दरवाजों के सामने खडे होकर शोभा, कुछ देर पहले आती आवाजों से अन्दाजा लगाने की कोशिश कर रही थी कि वो कहां से आ रही थी. काफी देर के बाद खुद हो सन्तुष्ट करके उसने एक दरवाजे को हल्के से खोला. अन्दर से कोई आवाज नहीं आई. कमरे में झांक कर देखा तो बिस्तर पर एक ही व्यक्ति लेटा हुआ था. निश्चित हि यह गोपाल और पद्मा का कमरा नहीं था. अन्दर घुसते हे वो बिस्तर के पास पहुंची और चद्दर उठा कर खुद को दो टांगो के बीच में स्थापित कर लिया. आज रात कुमार के लिये उसके पास काफी प्लान थे. शीघ्र ही शोभा ने उस सोये पडे कुमार के पैजामे के नाड़े को खोल लिया. पता नहीं क्युं पर, आज उसे कुमार का पेट काफी छरहरा लगा, परन्तु ये तो अभी अभी शुरु की हुयी जिम क्लास का नतीजा भी हो सकता है. जैसे ही शोभा ने कुमार के पेट को चूमा एक हाथ ने उसका सिर पकड लिया.झाटों के घुंघराले बालों को एक तरफ करते ही उसके रसीले होंठों को थोडा मुरझाया हुआ सा लन्ड मिल गया. अपने होंठों को गोल करके शोभा ने चूम लिया. उसकी आंखें आश्चर्य से तब फैल गयी जब तुरन्त ही लन्ड ने सर उठाना शुरु कर दिया. सामान्य तौर पर उसके पति के लन्ड से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती थी. चाहें वो उस पर अपने हाथों का प्रयोग करे या कि जिसम के किसी और हिस्से का. धीरे धीरे ऊपर नीचे कर गुदाज हथेली से सहलाते हुए सोये पड़े कुमार को आज वो पूरा आनन्द देना चाहती थी ताकि लन्ड अपन पूरा आकार पा सके और फिर वो जी भर कर उस पर उछल उछल कर सवारी कर सके।

शोभा के सिर पर एक हाथ धीरे से मालिश कर रहा था. शोभा को अगला आश्चर्य तब हुआ जब लन्ड से उसका पूरा हाथ भर गया और आश्चर्यचजनक रूप से जो लन्ड आज तक उसके हाथ में आसानी से समा जाता था आज उसका सुपाड़ा बाहर निकल आया था. लेकिन जब छाती के एकदम छोटे और कम बाल उसके हाथ में आये तब उसके दिमाग को एक झटका लगा. किन्तु इसी समय उस लेटे हुये व्यक्ति की कमर ने एक ताल में उछलना शुरु कर दिया था. इतना सब कुछ, एक साथ उसके लिये काफी असामान्य था. शोभा ने हाथ बढा कर बिस्तर के पास रखी लैम्प तक पहुँचने की कोशिश की. ठीक उसी वक्त एक और हाथ भी लैम्प लिए आगे बढ रहा था. और चूंकि तकिये पर सिर होने के कारण अजय लैम्प के पास था और शोभा लन्ड थामे पैरों की तरफ़ होने के कारण उस तक आसानी से नहीं पहुंच सकती थी. अतः अजय ने ही पहले लैम्प का स्विच दबाया. अजय के लिये तो ये सब एक सामान्य सेक्सी सपना ही था जिसमे हर रात वो एक गुदाज हथेली को अपने लन्ड पर महसूस करता था. लेकिन आज जब वो गुदाज हथेली उसके लन्ड पर कसी तो उसे कुछ नया ही मजा आया और इसी वजह से उसकी आंखें खुल गयी. इस वक्त अजय के हाथ एक औरत के सिर पर थे और अपने धड़ पर भारी गरम स्तन वो आराम से महसूस कर सकता था. उसे पता था कि यह एक सपना नहीं हैं. लाइट चालू करते ही उसने वहां अपनी शोभा चाची को देखा. चाची के कपडे पूरी तरह से अस्त व्यस्त थे.चाची उसकी दोनों टांगों के बीच में बैठी हुई थी. उनकी साड़ी का पल्लू बिस्तर पर बिछा हुआ था. लो कट के ब्लाउज से विशाल स्तनों के बीच की दरार साफ दिख रही थी और चाची की गुदाज हथेली उसके लण्ड के रस से सनी हुई थी. अजय और चाची ने सदमे भरी निगाहों से एक दूसरे को देखा. पर किशोर अवस्था कि सैक्स इच्छाओं और वासना से भरे अजय के दिमाग ने जल्दी ही निर्णय ले लिया. आखिरकार उसकी चाची ने खुद ही कमरे में प्रवेश किया था और अब वो उसके लन्ड को मुँह से चूम भी चुकी थी. निश्चित ही चाची ये सब करना चाहती थी.

अजय ने वापस अपना हाथ शोभा चाची के सिर पर रख कर उनके मुंह में लन्ड घुसेडने का प्रयास किया. चाची अब तक अपने हाथ को उसके लन्ड से अलग कर चुकी थीं और सीधे बैठने की कोशिश कर रही थीं. इस जोर जबरदस्ती में अजय का फुंफकार मारता लन्ड शोभा के सिर, बालों और सिन्दूर से रगड खा के रह गया. अपना लक्ष्य चूक जाने से अजय का लन्ड और भी तन गया और उसके मुंह से एक आह सी निकली. “चाची, आप क्यूं रूक गए?”. शोभा ने अपनी आँखें बंद किये हुये ही जवाब दिया “बेटा गलती हो गई. मुझे नहीं पता था कि यह तुम्हारा कमरा है”. चाची की हालत इस वक्त रंगे हाथों पकडे गये चोर जैसी थी और वो लगभग गिड़गिड़ा रही थीं. धीरे से उन्होनें अपनी आंखें खोल कर अपने सामने तन कर खडे हुये उस शानदार काले हथौङे को देखा जो इस वक्त उनके गाल, ठोड़ी और होंठों से रगड खा रहा था. मन्त्रमुग्ध सी वो उस मर्दानगी के औजार को देखती ही रह गयीं. क्षण भर के लिये शोभा के दिमाग में पद्मा का विचार आया. अगर अजय के ताऊ गोपाल का लन्ड भी अजय के जैसा शान्दार है तो पद्मा वास्तव में भाग्यशाली औरत है. परन्तु शीघ्र ही अपने मन पर काबू पाते हुये उन्होंने दुबारा संघर्ष की कोशिश की. अजय अब तक उनके कंधों के आसपास अपने पैर कस कर शोभा को उसी स्थिति में जकड चुका था. उन पैरों कि मजबूत पकड़ के बीच में शोभा चाची के दोनो स्तन अजय के शरीर से चिपके हुये थे. शोभा चाची ने नीचे झुककर देखा तो ब्लाउज का लो कट गला, दो भारी स्तनों और उनके बीच की दरार का शानदार दृश्य भतीजे अजय को दिखा रहा था. चाची का गले का हार इस वक्त उनके गले से लटका हुआ दो बङी बङी गेंदों के बीच में झूल रहा था. चाची ने तुरन्त ही हार को वापिस से ब्लाउज में डाला और वहीं पास पडे साड़ी के पल्लू से खुद को ढकने की कोशिश की. तब तक अजय के हाथ उनके मोटे मोटे उरोजों को थाम चुके थे. दोनों हाथों से उसने चाची के उरोजों को बेदर्दी से मसल दिया. उसकी उंगलियां चाची के निप्पलों को खोज रही थीं. “बेटा, ये तुम क्या कर रहे हो? अपनी चाची के बड़े बड़े स्तनों को हाथ लगाते शरम नहीं आती तुम्हें?”

शोभा चाची ने उसे डांटते हुए कहा. “मुझे सिर्फ आप चाहिये. क्या शरम, कैसी शरम. कमरे में तो आप आई हैं. और फिर आपने मुझे कभी नन्गा नहीं देखा क्या? मैंने भी आपको कई बार नन्गा देखा है जब आप नहा कर बाथरूम से निकलती थी. आप ज्यादातर बाथरूम से सिर्फ तौलिया लपेटे ही बाहर आ जाती थी और फिर कपडे मेरे सामने ही पहनती थी” अजय ने चाची को याद दिलाया. “फिर मुझे नहलाते समय भी तो आप मेरे लन्ड को अपने हाथों से धोती थी. “तब तो आप को कोई परेशानी नहीं थी”. “वो कुछ और बात थी”, अपनी आंखों के आगे नाचते उस शानदार माँसपिन्ड के लिये अपनी वासना को दबाती हुयी सी शोभा चाची बडबडाई. चाची ने धक्का दे कर अजय कि टांगों को अपने कंधे से हटाया और खुद बिस्तर के बगल में खङी हो गईं. चाची की उत्तेजना स्वभाविक थी. भारी साँसों के कारण ऊपर नीचे होते उनके स्तन, गोरे चेहरे और बिखरे हुए बालों पर लगा हुआ अजय के लण्ड का चिकना द्रव्य, और पारंपरिक भारतीय पहनावा उनके इस रूप को और भी गरिमामय तरीके से उत्तेजक बना रहा था. किन्तु अब भी वो सामाजिक और पारिवारिक नियमों के बंधनों को तोड़ना नहीं चाहती थी. उनकी आंखों के सामने अपनी पूरी जिन्दगी में देखा सबसे विशालकाय लन्ड हवा में लहरा रहा था.

अजय उठा और चाची के खरबूजे जैसे स्तनों पर हाथ रख दिया. चाची ने उसकी कलाई पकड़ कर उसे रोकने की कोशिश की. किन्तु यहां भी यह सिर्फ दो विपरीत लिंगो का एक और शारीरिक संपर्क ही साबित हुआ. अजय ने अपना दूसरा हाथ चाची की कोमल नाभी के पास फिराते हुए कहा. “चाची, आ जाओ ना”. अजय की आवाज में घुली हुई वासना में उन्हें अपने लिये चुदाई का स्वर्ग सुनाई दे रहा था. अपने घुटनों में आई कमजोरी को महसूस कर शोभा ने वहां से जाना ही उचित समझा. वो एक पल के लिये आगे झुकी और अजय के माथे पर चुंबन दिया. शायद चाची उसको शुभरात्रि कहना चहती थी. पर इस सब में उनका पल्लू गिर गया और अजय को अपनी आंखों के ठीक सामने ब्लाउज के अन्दर से निकल पङने को तैयार दो विशाल, गठीले बड़े बड़े स्तन ही दिखाई दिये. चाची के पसीने से उठती हुई मादक खूशबू उसे पागल कर रही थी. उसका किसी भी औरत के साथ ये पहला अनुभव था. कांपते हुए हाथों से उसने शोभा चाची के स्तनों को एक साइड से छुआ और शोभा के मुहं से एक सीत्कार सी निकल गयी. नौजवान अजय ने अपनी चाची के गुब्बारे कि तरह फूले हुये उन स्तनों को दोनो हाथों में थाम रखा था और उसके अंगूठे चाची के निप्पलों को ढूंढ रहे थे. चाची के ब्लाउज के पतले कपड़े के नीचे ब्रा की रेशमी लैस थी. अजय बिना कुछ सही या गलत सोचे पूरी तन्मयता से अपनी ही चाची के शरीर को मसल रहा था. ब्लाउज इस वक्त शोभा चाची की पसीने से भीगी बाहों से चिपक कर रह गया था. उत्तेजना के मारे बिचारे अजय की हालत खराब हो रही थी. उसके दिल की धडकन एक दम से तेज हो गई थी और गला सुख रहा था. अब शोभा चाची भी गरम होने लग गयी थीं. चाची ने दोनों हाथों से अजय के सिर को पकड कर चेहरे को अपने उरोजों के पास खींचा. शोभा को भी चूत के साथ साथ अपने बड़े बड़े स्तनों में भी दर्द महसूस होने लगा. बिचारे उसके स्तन अभी तक ब्रा और ब्लाउज की कैद में थे. शोभा ने अजय के सिर से हाथ हटा ब्लाऊज के सारे हुक खींच कर तोड़ डाले. ब्लाउज के खुलते ही चाची के दोनों स्तन पतली सी रेशमी ब्रा से निकल पडने को बेताब हो उठे. हुक टूटने की आवाज सुनकर अजय ने सिर उठाय़ा और छोटी सी रेशमी ब्रा में जकड़े शोभा के दोनों कबूतरों को निहारा. ये दृश्य अजय जैसे कामुक लङके को पागल करने के लिये काफी था.

शोभा की ब्रा का हुक पीछे पीठ पर था पर अजय इन्तजार नहीं कर सकता था. दोनों हाथों से खींच कर उसने शोभा की ब्रा को ऊपर सरकाया और फ़ड़फ़ड़ाकर आजाद हुये दोनों बड़े बड़े थिरकते गोरे गुलाबी स्तनों को दबोच मुँह मारने और चूमने लगा. शोभा ने किसी तरह खुद पर काबू करते हुये जल्दी से अपन ब्लाऊज बदन से अलग किया इस बीच अजय ने भी आगे बढ़ते हुये चाची के आगे को तने थिरकते बड़े बड़े स्तनों के ऊपर मुँह मार मार के चुम्बनों की बारिश सी कर दी. चाची ने अजय के सिर को अपने दोनों स्तनों के बीच में दबोच लिया. इस समय चाची अपना एक घुटना बिस्तर पर टेककर और दूसरे पैर फर्श पर रख कर खडी़ हुई थीं. अजय होंठों से चाची के स्तनों पर मालिश सी कर रहा था. “चाची!” अजय फुसफुसाया. “हाँ बेटा,” शोभा ने जवाब देते हुये उसके गालों को प्यार से चूम लिया

आज से पहले भी ना जाने कितनी बार शोभा ये शब्द अजय को बोल चुकी थी उसकी इकलौती चाची के रुप में. पर आज ये सब बिलकुल अलग था. आज की बातों में सिर्फ सेक्स करने को आतुर स्त्री-पुरुष ही तो थे. अजय ने जब अपने खुरदुरे हाथों से चाची की नन्गी पीठ को स्पर्श किया तो शोभा चाची एक दम से चिहुंक पङी. आज से पहले कभी उन्होने अपने बदन पर किसी एथलीट के हाथों को महसूस नहीं किया था. परन्तु अब शोभा खुद भी अपने भतीजे के साथ जवानी का ये खेल बन्द नहीं करना चाहती थी. अपने शरीर पर अजय के गर्म होंठ उनको एक मानसिक शान्ति दे रहे थे. ” रूक जा अजय बेटा, , हमें ये सब नहीं करना चाहिए” चाची फुसफुसाई. “लेकिन मैं तो बस आपको किस ही तो कर रहा हूं. अजय के मुहं से उत्तेजना भरा जवाब निकला.

चाची उसके स्वर में कंपकपीं साफ सुन सकती थीं. अजय ने शोभा चाची के दोनों विशाल गुम्बदों पर अपने होंठ रगड़ते हुये एक हाथ से उनकी पीठ और गर्दन सहलाना जारी रखा. इधर चाची ने भी अजय के सीने पर हाथ फिरते हुये उसके बलशाली युवा बदन को परखा. जैसे ही चाची ने अजय की कमर और फिर उसके नीचे एकदम कसे हुये नितंबों का स्पर्श किया, अजय के फूले हुये लन्ड का विशाल सुपाङा उनके पेट से जा लगा. चाची के मुहं से एक सिसकारी छूट गयी. “क्या हुआ, चाची?” अजय ने पूछा. “कुछ नहीं” चाची ने अजय से खुद को छुड़ाने कि कोशिश करते हुये कहा. चाची को पता था कि अब स्थितियां काफी खतरनाक हो चली हैं. उन्हें इस कमरे में आना ही नहीं चाहिये था. अजय को दूर धकेल कर चाची कमरे से बाहर जाने की कोशिश करने लगी. पर अजय ने चाची के दोनों भारी गुदाज चूतङों को अपने पन्जों में दबाते हुये चाची को अपनी तरफ खींचा और फिर अपने होंठों को चाची के तपते पेट से सटा दिया. चाची तो जैसे उत्तेजना के मारे कांप ही गयी. अजीब सी दुविधा में फंस गयी थी बिचारी शोभा. शरीर अजय की हर हरकत का जवाब दे रहा था और मन अब भी इसे एक पाप कह रहा था. अपने पति के भतीजे के साथ चुदाई पारिवाइक और सामाजिक हदों के बाहर थी. अजय ने चाची की साड़ी को खीन्च कर उनके बदन से अलग कर दिया और अपना चेहरा चाची के पेटीकोट की दरार में घुसेङ दिया. सामान्यतः हिन्दुस्तानी औरतें जब पेटिकोट पहनती हैं तो जहां पेटीकोट के नाङे में गाँठ लगाई जाती है वहां पर एक छोटी से दरार रह जाती है और औरतों के अन्दरुनी अंगों का शानदार नजारा कराती है. दोस्तों, आप लोगो ने भी कई बार अपने घर की औरतों को कपङे बदलते देखा होगा और इस सब से भलीभांति परिचित होंगे. अजय के एक ही चुम्बन से शोभा की तो जैसे जान ही निकल गयी. चाची का पेटीकोट अब उसके रास्ते का रोङा बन रहा था.

शोभा कराही “अजय, ये तू क्या कर रहा हैं, बेटा? ये क्या हो गया है तुझको?” उधर अजय को पेटीकोट की गाँठ मिल गयी थी जिसे उसने एक ही झटके में खींच दिया. चाची का पेटीकोट खुलकर अब उनके कूल्हों पर आ गया था. अजय ने आगे बढ़ते हुये अपनी उन्गलियों को उन्के विशाल संगमरमरी नितंबों पर फिराते हुये चाची का पेटीकोट नीचे सरका दिया. पेटीकोट अब चाची के पैरों के पास घेरा बनाये पङा था और वो खुद सिर्फ एक लो कट की ब्रा और पतली सी पैन्टी में अपने भतीजे अजय के सामने खङी थी. अजय के होठों ने तुरन्त ही चाची की केले के तने जैसी मांसल जांघों के बीच में अपनी जगह बना ली. जानवरों की तरह चाची की गदराई जांघों को चाट रहा था वो । अब शोभा चाची की सहनशक्ति जवाब दे चुकी थी. दोनों टागें फ़ैला कर चाची खुद ही बिस्तर पर लेट चुकी थीं. अजय, चाची की टागों के बीच में बैठा हुआ था और उसका मुंह शोभा चाची की मखमली मांसल जांघों के अन्दर घुसा हुआ था. शोभा के हाथ अब भी अजय के कन्धों और नितम्बों पर घूम रहे थे. उनका अब अपने दिलोदिमाग पर कोई काबू नहीं रह गया था. अजय के हाथ अब उनकी रेशमी पैन्टी से जूझ रहे थे. शोभा चाची अब भी अजय के लन्ड को छूने से बच रही थीं. लन्ड को अपने हाथों से छूने भर का मतलब खुद को पूरी तरह से अजय के हाथों सुपुर्द कर देना था.

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