दुलारा भतीजा part 4

पद्मा के गले से निकली चीख घर में जागता हुआ कोई भी आदमी आराम से सुन सकता था. पूरी ताकत के साथ अपने सुन्दर नाखून अजय के नितम्बों में गड़ा दिये. पद्मा ने अजय को कस कर अपने सीने से लगा लिया. लेकिन अजय तो झड़ने से कोसों दूर था. पद्मा ताई खुद थोड़ा सम्भली तो अजय से बोली “श्श्श्श्श बेटा, मैं बताती हूं कैसे करना है”. पद्मा को अपनी बहती चूत के अन्दर अजय का झटके लेता लन्ड साफ़ महसूस हो रहा था. अभी तो काफ़ी कुछ सिखाना था इस नौजवान को. जब अजय थोड़ा सा शांत हुआ तो पद्मा ने उसे अपने ऊपर से धक्का दिया और पीठ के बल उसे पलट कर बैठ गईं. अजय समझ गया कल रात में चाची को अपने भतीजे के ऊपर सवारी करते देख ताई भी आज वहीं सब करेंगी. लेकिन अजय को इस सब से क्या मतलब उसे तो बस अपनी गरम गरम रॉड को किसी चिकनी चूत में जल्द से जल्द पैवस्त करना था. पद्मा ने अजय को एक बार भरपूर प्यार भरी निगाहों से देखा और फ़िर उसके ऊपर आ गईं. एक हाथ में अजय का चूत के झाग से सना लन्ड लिया तो सोचा की इसे पहले थोड़ा पोंछ लूं. अजय की छाती पर झुकते हुये उसकी छाती, पेट और नाभी पर जीभ फ़िराने लगी. खुद पर मुस्कुरा रहीं थीं कि सवेरे मल मल कर नहाना पड़ेगा. दिमाग ने एक बात और भी कही कि ये सब अजय के ताऊ से सवेरे आंखे मिलाने से पहले होना चाहिये. पद्मा ने बिस्तर पर बिखरे हुये नाईट गाऊन को उठा कर अजय के लन्ड को रगड़ रगड़ कर साफ़ किया. अपने खड़े हथियार पर चिकनी चूत की जगह खुरदुरे कपड़े की रगड़ से अजय थोड़ा सा आहत हुआ. हालांकि लन्ड को पोंछना व्यर्थ ही था जब उसे ताई की रिसती चूत में ही जाना था. सवेरे से बनाया प्लान अब तक सही तरीके से काम कर रहा था. अजय को अपना सैक्स गुलाम बनाने की प्रक्रिया का अन्तिम चरण आ गया था. पद्मा ने अजय के लन्ड को मुत्ठी में जकड़ा और घुटनों के बल अजय के उपर झुकते हुये बहुत धीरे से लन्ड को अपने अन्दर समा लिया. पूरी प्रक्रिया अजय के लिये किसी परीक्षा से कम नहीं थी. “हां ताई, प्लीज, जोर जोर से…ओह” चिल्लाता हुआ अजय ताई की चूत भरे जा रहा था. जब अजय का लन्ड उसकी चूत की गहराईओं में खो गया तो पद्मा सीधी हुई. अजय के चेहरे को हाथों में लेते हुये उसे आदेश दिया “अजय, देख मेरी तरफ़”. धीरे धीरे एक ताल से कमर हिलाते हुये वो अजय के लन्ड की भरपूर सेवा कर रही थीं. उस तगड़े हथियार का एक वार भी अपनी चूत से खाली नहीं जाने दिया. वो नहीं चाहती थी की अजय को कुछ भी गलत महसूस हो या जल्दबाजी में लड़का फ़िर से सब कुछ भूल जाये. “मै कौन हूं तेरी?” चुत को अजय के सुपाड़े पर फ़ुदकाते हुए पूछा. ” ताई ” अजय हकलाते हुये बोला. इस रात में इस वक्त जब ये औरत उसके साथ हमबिस्तर हो रही है तो उसे याद नहीं रहा की ताई किसे कहते है. ” ताई इतने सालों से तेरी हर जरूरत को पूरा करती आई है. है कि नहीं?” पद्मा ने पासा फ़ैंका. आगे झुकते हुये एक ही झटके में अजय का पूरा लन्ड अपनी चूत में निगल लिया. “आआआआआह, हां ताई ताई, सब कुछ !” अजय हांफ़ रहा था. उसके हाथों ने ताई की चिकनी गोल चूतड़ को पकड़ कर नीचे की ओर खींचा. “आज से तुम अपनी शारीरिक जरूरतों के लिये किसी भी दूसरी औरत की तरफ़ नहीं देखोगे. समझे?” अपने नितंबों को थोड़ा ऊपर कर दुबारा से उस अकड़े लन्ड पर धम्म से बैठ गईं. “उउउह्ह्ह्ह, नो, नो, आज के बाद मुझे किसी और की जरुरत नहीं है.” कमर ऊपर उछालते हुये ताई की चूत में जबर्दस्त धक्के लगाने लगा.

अजय के ऊपर झुकते हुये पद्मा ने सही आसन जमाया. “अजय, अब तुम जो चाहो वो करो. ठीक है” पद्मा की मुस्कुराहट में वासना और ममता का सम्मिश्रण था. अजय ने सिर उठा कर ताई के निप्पलों को होठों के बीच दबा लिया. पद्मा के स्तनों से बहता हुआ करन्ट सीधा उनकी चूत में पहुंचा. हांलाकि दोनों ही ने अपनी सही गति को बनाये रखा. जवान जोड़ों के विपरीत उनके पास घर की चारदीवारी और पूरी रात थी. पद्मा ने खुद को एक हाथ पर सन्तुलित करते हुये दूसरे हाथ से अपनी चूचीं पकड़ कर अजय के मुहं में घुसेड़ दी. अजय ने भी भूखे जानवर की तरह बेरहमी से उन दो सुन्दर गुलाबी स्तनों का मान मर्दन शुरु कर दिया. ताई के हाथ की जगह अपना हाथ इस्तेमाल करते हुये अजय ने दोनों निप्पलों को जोर से उमेठा. अब पद्मा ने आसन बदलते हुये एक नया प्रयोग करने का मन बनाया. अजय की टांगों को चौड़ा करके पद्मा उनके बीच में बैठ गयीं. एक बार के लिये अजय का लन्ड चूत से बाहर निकल गया परन्तु अब वो अपने पैरों को अजय की कमर के आस पास लपेट सकती थी. जब अजय भी उठ कर बैठा तो उसका लन्ड खड़ी अवस्था में ही ताई के पेट से जा भिड़ा. पद्मा ने नज़र नीची करके उस काले नाग की तरह फ़ुंफ़कारते लन्ड को अपनी नाभी के पास पाया. २ सेकेन्ड पहले भी ये लन्ड यहीं था लेकीन उस वक्त यह उनके अन्दर समाया हुआ था. अजय की गोद में बैठ कर पद्मा ने एक बार फ़िर से लन्ड को अपनी चूत में भरा. चूत के होंठ बार बार सुपाड़े के ऊपर फ़िसल रहे थे. अजय ने घुटनों को मोड़ कर उपर ऊठाने का प्रयत्न किया किन्तु ताई के भारी शरीर के नीचे बेबस था. “ऊईईई माआआं” पद्मा सीत्कारी. अजय की इस कोशिश ने उनको उठाया तो धीरे से था पर गिरते वक्त कोई जोर नहीं चल पाया और खड़े लन्ड ने एक बार फ़िर ताई की चूत में नई गहराई को छू लिया था. पद्मा ने उसके कन्धे पर दांत गड़ा दिये उधर अजय भी इस प्रक्रिया को दुहराने लगा. पद्मा ने अजय का कन्धा पकड़ उसे दबाने की कोशिश की. इतना ज्यादा आनन्द उसके लिये अब असहनीय हो रहा था. ताई भतीजे की ये सैक्सी कुश्ती सिसकियों और कराहों के साथ कुछ क्षण और चली. पसीने से तर दोनों थक कर चूर हो चूके थे पर अभी तक इस राऊंड में चरम तक कोई भी नहीं पहुंचा था. थोड़ी देर रुक कर पद्मा अपने लाड़ले भतीजे के सीने और चेहरे को चूमने चाटने लगी. अजय को अपने सीने से लगाते हुये पूछा, “शोभा कौन है तुम्हारी?”. “कौन?” इस समय ऐसे सवाल का क्या जवाब दिया जा सकता था? अजय ने एक जोरदार धक्का मारते हुये कहा. “कोई नहीं, राईट?” पद्मा ने भी अजय के धक्के के जवाब में कमर को झटका दे उसके लन्ड को अपनी टाईट चूत में खींच लिया. ताई के जोश को देख कर बेटा समझ गया कि शोभा जो कोई भी हो अब उसे भूलना पड़ेगा. “उसका काम था तुम को मर्द बना कर मेरे पास लाना. बस. अब वो हमेशा के लिये गई. समझ गये?” पद्मा के गुलाबी होंठों पर जीत की मुस्कान बिखर गई.

इतनी देर से चल रहे इस चुदाई कार्यक्रम से अजय के लन्ड का तो बुरा हाल था ही पद्मा कि चूत भी अन्दर से बुरी तरह छिल गय़ी थी. शोभा सही थी. उसके भतीजे ने जानवरों जैसी ताकत पाई है. और ये अब सिर्फ़ और सिर्फ़ उसकी है. अजय को वो किसी भी कीमत पर किसी के साथ भी नहीं बाटेगी. “अजय बेटा. बस बहुत हो गया. अब झड़ जा. ताई कल भी तेरे पास आयेगी” पद्मा हांफ़ने लगी थी. अजय का भी हाल बुरा था. उसके दिमाग ने काम करना बन्द कर दिया था. समझ में नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दे. बस पद्मा के फ़ुदकते हुये मुम्मों को हाथ के पंजों में दबा कमर उछाल रहा था. “ऊहहहहहहहहहह! हां! ऊइइइ ताई ताईआआ!” चेहरे पर असीम आनन्द की लहर लिये पद्मा बिना किसी दया के अजय के मुस्टंडे लन्ड पर जोर जोर से चूत मसलने लगी. “आ आजा बेटा, भर दे अपनी ताई को”, अजय को पुचकारते हुये बोली. इन शब्दों ने जादू कर दिया. अजय रुक गया. दोनों जानते थे कि अभी ये कार्यक्रम काफ़ी देर तक चल सकता है लेकिन उन दोनों के इस अद्भुत मिलन की साथी उन आवाजों को सुनकर गोपाल किसी भी वक्त जाग सकते थे और यहां कमरे में आकर अपने ही घर में चलती इस पाप लीला को देख सकते थे. काफ़ी कुछ खत्म हो सकता था उसके बाद और दोनों ही ऐसी कोई स्थिति नहीं चाहते थे. अजय ने धक्के देना बन्द कर आंखे मूंद ली. लन्ड ने गरम खौलते हुये वीर्य की बौछारे ताई की चूत की गहराईयों में उड़ेल दी. “ओह” पद्मा चीख पड़ी. जैसे ही वीर्य की पहली बौछार का अनुभव उन्हें हुआ अपनी चूत से अजय के फ़ौव्वारे से लन्ड को कस के भींच लिया. अगले पांच मिनट तक लन्ड से वीर्य की कई छोटी बड़ी फ़ुहारें निकलती रहीं. थोड़ी देर बाद जब ज्वार उतरा तो पद्मा उसके शरीर पर ही लेट गय़ीं. भारी भरकम स्तन अजय की छातियों से दबे हुये थे. अजय ने पद्मा के माथे को चूमा और गर्दन को सहलाया. ” ताई ताई, मैं हमेशा सिर्फ़ तुम्हारा रहूंगा. तुम जब चाहो जैसे चाहो मेरे संग सैक्स कर सकती हो, आज के बाद मैं किसी और की तरफ़ आंख उठा कर भी नहीं देखूंगा”, अजय ने अपनी ताई ताई, काम क्रीड़ा की पार्टनर पद्मा को वचन दिया. पद्मा ने धीरे से सिर हिलाया. अजय आज के बाद उनकी आंखों से दुनिया देखेगा. एक बार फ़िर अजय को सब कुछ सिखाने की जिम्मेदारी उनके ऊपर थी. और अब उन्हें भी सैक्स में वो सब करने का मौका मिलेगा जो उनके पति के दकियानूसी विचारों के कारण आज तक वह करने से वंचित रहीं. अजय को फ़िर से पा लेने की सन्तुष्टी ने उनके मन से अपने कृत्य की ग्लानि को भी मिटा दिया था. पद्मा ने अजय के मोबाईल में सवेरे जल्दी उठने का अलार्म सेट किया ताकि अपने पति से पहले उठ कर खुद नहा धो कर साफ़ हो सकें. मोबाईल साथ ले अजय के होठों पर गुड नाईट किस दिया और अपने कमरे में चली गयी.

उस रात के बाद पद्मा के जीवन में एक नया परिवर्तन आ गया. अपने अजय के साथ संभोग करते समय हर तरह का प्रयोग करने की छूट थी जो उनका उम्रदराज पति कभी नहीं करने देता था. हालांकि दैनिक जीवन में दोनों काफ़ी सतर्क ताई भतीजे की तरह रहते थे. दोनों के बीच बातचीत में उनके सैक्स का जिक्र कभी नहीं आता था. पद्मा ने अजय के व्यवहार में भी बदलाव महसूस किया. अजय पहले की तुलना में काफ़ी शान्त और समझदार हो गया था. सबकुछ अजय के बेडरूम में ही होता था और वो भी रात में कुछ घन्टों के लिये. पद्मा ही अजय के बेडरूम में जाती थी जब उन्हें महसूस होता था की अजय की जरुरत अपने चरम पर है. बाकी समय दोनों के बीच सब कुछ सामान्य था या यूं कहें की दोनों और ज्यादा करीब आ गये थे. हाँ, अजय के कमरे में दोनों के बीच दुनिया की कोई तीसरी चीज नहीं आ सकती थी. अजय और पद्मा यहां वो सब कर सकते थे जो वो दोनों अश्लील फ़िल्मों में देखते और सुनते थे. एक दूसरे को सन्तुष्ट करने की भावना ही दोनों को इतना करीब लाई थी. इस सब के बीच में फ़िर से शोभा चाची का आना हुआ. काफ़ी दिनों से कुमार अपने बड़े भाई के घर जाना चाहता था और शोभा इस बार उसके साथ जाना चाहती थी. पिछली बार शोभा ने कुमार को वहां से जल्दी लौटने के लिये जोर डाला था और कुमार बिचारा बिना कुछ जाने परेशान सा था कि अचानक से शोभा का मूड क्यूं बिगड़ गया. खैर अब सब कुछ फ़िर से सामान्य होता नज़र आ रहा था. उधर शोभा अपने घर लौटने के बाद भी अजय को अपने दिमाग से नहीं निकाल पाई थी. अजय के साथ हुये उस रात के अनुभव को उसने कुमार के साथ दोहराने का काफ़ी प्रयत्न किया परन्तु कुमार में अजय की तरह किशोरावस्था की वासना और जानवरों जैसी ताकत का नितान्त अभाव था. कुमार काफ़ी पुराने विचारों वाला था. शोभा को याद नहीं कि कभी कुमार ने उसे ढंग से सहलाया और चाटा हो. लेकिन अजय ने तो उस एक रात में ही उसके पेटीकोट में घुस कर सूंघा था. क्या पता अगर वो अजय को उस समय थोड़ा प्रोत्साहन देती तो लड़का और आगे बढ़ सकता था. चलो फ़िर किसी समय सही….शोभा पद्मा के घर में फ़िर से उसी रसोईघर में मिली जहां उसने अजय के साथ अपनी रासलीला को स्वीकारा था. अजय एक मिनट के लिये अपनी चाची से मिला परन्तु जल्द ही शरमा कर चुपचाप खिसक लिया था. अभी तक वो अपनी प्रथम चुदाई का अनुभव नहीं भूला था जब उसकी चाची ने गरिमापूर्ण तरीके से उसे सैक्स जीवन का महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाया था. “सो, कैसा चल रहा है सब कुछ”, शोभा ने पूछा.”क्या कैसा चल रहा है?” पद्मा ने शंकित स्वर में पूछा.

अपनी और अजय की अतरंगता को वो शोभा के साथ नहीं बांट सकती थी.”वहीं सबकुछ, आपके और भाई साहब के बीच में..” शोभा ने पद्मा को कुहनी मारते हुये कहा. दोनों के बीच सालों से चलता आ रहा था इस तरह का मजाक और छेड़खानी.”आह, वो”, पद्मा ने दिमाग को झटका सा दिया. अब उसे बिस्तर में अपने पति की जरुरत नहीं थी. अपनी शारीरिक जरुरतों को पूरा करने के लिये रात में किसी भी समय वो अजय के पास जा सकती थी. अजय जो अब सिर्फ़ उनका भतीजा ही नहीं उनका प्रेमी भी था.”दीदी, क्या हुआ?” शोभा के स्वर ने पद्मा के विचारों को तोड़ा.”नहीं, कुछ नहीं. आओ, हॉल में बैठ कर बातें करते हैं”. साड़ी के पल्लू से अपने हाथ पोंछती हुई पद्मा बाहर हॉल की तरफ़ बढ़ गई. हॉल में इस समय कोई नहीं था. दोनों मर्द खाने के बाद अपने अपने कमरों मे सोने चले गये थे और अजय का कहीं अता पता नहीं था. दिन भर में अजय ने सिर्फ़ एक बार ही अपनी चाची से बात की थी और पहले की तुलना में काफ़ी सावधानी बरत रहा था. उसके हाथ शोभा को छूने से बच रहे थे और ये बात शोभा को बिल्कुल पसन्द नहीं आई थी. पद्मा सोफ़े पर पसर गई और शोभा उसके बगल में आकर जमीन पर ही बैठ गयी.”आपने जवाब नहीं दिया दीदी.” “क्या जवाब?” पद्मा झुंझला गयी. ये औरत चुप नहीं रह सकती. “मुझे अब उनकी जरुरत नहीं है” फ़िर थोड़ा संयन्त स्वर में बोली. “क्यूं?” शोभा ने पद्मा के चेहरे को देखते हुए पूछा. “क्या कहीं और से…?” शोभा के होठों पर शरारत भरी मुस्कान फ़ैल गई. पद्मा शरमा गई. “क्या कह रही हो शोभा? तुम्हें तो पता है कि मैं गोपाल को कितना प्यार करती हूं. तुम्हें लगता है कि मैं ऐसा कर सकती हूं?” “हां तुमने जरूर ये कोशिश की थी” पद्मा ने बात का रुख पलटते हुये कहा. अजय और शोभा के संसर्ग को अभी तक दिमाग से नहीं निकाल पाई थी. चूंकि अब वो भी अजय के युवा शरीर के आकर्षण से भली भांति परिचित थी अतः वो इसका दोष अकेले शोभा को भी नहीं दे सकती थी. लेकिन अजय को अब वो सिर्फ़ अपने लिये चाहती थी. शोभा पद्मा के कटाक्ष से आहत थी. खुद को नैतिक स्तर पर पद्मा से काफ़ी छोटा महसूस कर रही थी.”आप जैसा समझ रही हैं वैसा कुछ भी नहीं था मेरे मन में. हां उसके कमरे में गलती से में घुसी जरूर थी फ़िर अपने ही भतीजे को तड़पते देख उसकी जरुरत को पूरा करने की भावना में बह मैनें ये सब किया था।” वो पद्मा के सामने सिर झुकाये बैठी रही. पद्मा ने अपना हाथ शोभा के कन्धे पर रखते हुये कहा “हमने कभी इस बारे में खुल कर बात नहीं की ना?” “मुझे लगा आप मुझसे नाराज है. इसी डर से तो में उस दिन चली गई थी” शोभा बोली. “लेकिन मैं तुमसे नाराज नहीं थीं.” शोभा के कन्धे पर दबाव बढ़ाते हुये पद्मा ने कहा. “फ़िर आप कुछ बोली क्यूं नहीं””मैं उस वक्त कुछ सोच रही थी और जब मुड़ कर देखा तो तुम जा चुकी थीं. अब मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है. इस उम्र के बच्चों को ही अच्छे बुरे की पहचान नहीं होती और फ़िर तुम उसके कमरे में गलती से ही घुसी थीं. अजय को देख कर कोई भी औरत आकर्षित हो सकती है”.”हां दीदी, मैं भी आज तक उस रात को नहीं भूली. उसकी वो ताकत और वो जुनून मुझे आज भी रह रह कर याद आता है. कुमार और मैं सैक्स सिर्फ़ एक दुसरे की जरूरत पूरा करने के लिये ही करते हैं.” “अजय ने मेरी बरसों से दबी हुई इच्छाओं को भड़का दिया है और ये अब मुझे हमेशा तड़पाती रहेंगी. लेकिन जो हुआ वो हुआ. उस वक्त हालात ही कुछ ऐसे थे. अब ये सब मैं दुबारा नहीं होने दूंगी. शोभा के स्वर में उदासी समाई हुई थी. मालूम था की झूठ बोल रही है. उस रात के बारे में सोचने भर से उसकी चूत में पानी भर गया था. पद्मा ने शोभा की ठोड़ी पकड़ कर उसका चेहरा ऊपर उठाया, बोली “उदास मत हो छोटी, अजय है ही ऐसा. मैनें भी उसे महसूस किया है. सच में एक एक इन्च प्यार करने के लायक है वो”.

शोभा पद्मा के शब्दों से दंग रह गयी,”क्या कह रही हो दीदी ?” पद्मा को अपनी गलती का अहसास हो गया. कुछ भावनाओं में बह कर पाप का राज संगी पापी के संग बांटने के लिए उसने शोभा को उसके और अजय के बीच बने नये संबंधों का इशारा ही दे दिया था. शोभा ने पद्मा को हाथ पकड़ कर अपने पास खींचा और बाहों में भर लिया. “क्या हुआ था दीदी” शोभा की उत्सुकता जाग गयी.”मैं नहीं चाहती थी अजय मेरे अलावा किसी और को चाहे. पर उसके मन में तो सिर्फ़ तुम समाई हुयीं थी.””तो, आपने क्या किया?””उस रात, तुम्हारे जाने के बाद मैं उसके कमरे में गई, बिचारा मुट्ठ मारते हुये भी तुम्हारा नाम ले रहा था. मुझसे ये सब सहन नहीं हुआ और मैनें उसका लन्ड अपने हाथों में ले लिया और फ़िर….” पद्मा अब टूट चुकी थी. शोभा के हाथ पद्मा की पीठ पर मचल रहे थे. जेठानी के बदन से उठती आग वो महसूस कर सकती थी. “क्या अजय ने आपके बड़े बड़े ये (स्तन) भी चूसे थे?” बातों में शोभा ही हमेशा बोल्ड रही थी.”हां री, और मुझे याद है कि उसने तुम्हारे भी चूसे थे.” पद्मा ने पिछले वार्तालाप को याद करते हुये कहा. उसके हाथ अब शोभा के स्तनों पर थे. अपनी बहन जैसी जेठानी से मिले इस सिग्नल के बाद तो शोभा के जिस्म में बिजलियां सी दौड़ने लगीं. पद्मा भी अपने ब्लाऊज और साड़ी के बीच नन्गी पीठ पर शोभा के कांपते हाथों से सिहर उठी. दोनों औरतों को कोई गुमान नहीं था. ना तो पद्मा को आज तक ऐसा आर्गैज्म आया था ना ही शोभा को. लेकिन शोभा के उछलते चूतड़ों की बढ़ती गति और सिकुड़ते फ़ैलते चूत के होठों को देखकर अनुमान लगाया जा सकता था कि अब क्या होने वाला है. जब शोभा की चूत की दीवारों से पानी छूटा वो जैसे अन्दर ही अन्दर पिघल गई वो. थोड़ी देर में शोभा सुस्त हो कर पद्मा के ऊपर ही गिर पड़ी. इस शक्तिशाली ओर्गैज्म ने उसके शरीर से पूरी ताकत निचोड़ ली थी. अब दोनों ही औरते एक दूसरे के रस से लथपथ हुई पड़ी थीं. शोभा पद्मा के शरीर पर से उतर कर जमीन पर उसके बाजु में आ गयी और उसकी तरफ़ चेहरा कर लेट गयी. “आपमें और मुझमें कोई मुकाबला नहीं है दीदी.” शोभा बुदबुदाई. “जैसे अजय आपका है वैसे ही मैं भी आपकी ही हूं. आप हम दोनों को ही जैसे मर्जी चाहे प्यार कर सकती है. अगर ये सब मुझे आप से ही मिल जायेगा तो मैं किसी की तरफ़ नहीं देखूंगी” कहते हुये शोभा ने अपनी आंखें नीची कर ली. शोभा के बोलों ने पद्मा को भी सुधबुध दिलाई को वो दोनों इस वक्त हॉल में किस हालत में है. कुशन, कपड़े और फ़र्नीचर, सब बिखड़ा पड़ा था. इस हालत में तो दुबारा पहले की तरह कपड़े पहन पाना भी मुश्किल था. पद्मा ने शोभा की चूतड़ पर थपकी दी और बोली, “छोटी, हम दोनों को अब उठ जाना चाहिये. कोई आकर यहां ये सब देख ना ले”. “म्म्मं, नहीं”, शोभा ने बच्चों की तरह मचलते हुये कहा। पद्मा ने समझा बुझा कर उसे अपने से अलग किया. हॉल में बिखरे पड़े अपने कपड़ों को उठा कर साड़ी को स्तनों तक लपेट लिया और ऊपर अपने कमरे की राह पकड़ी. जाती हुई पद्मा को पीछे से देख कर शोभा को पहली बार किसी औरत की मटकती चूतड़ का मर्दों पर जादुई असर का अहसास हुआ. पद्मा ने पलट कर एक बार जमीन पर पसरी पड़ी शोभा पर भरपूर नज़र डाली और फ़िर धीमे से गुड नाईट कह ऊपर चढ़ गई.

शोभा की आंखें थकान और नींद से बोझिल हो चली थी और दिमाग अब भी पिछले २-३ महीनों के घटनाक्रम को याद कर रहा था. अचानक ही कितना कुछ बदल गया था उसके सैक्स जीवन में. पहले अपने ही भतीजे अजय से अकस्मात ही बना उसका अवैध संबंध फ़िर पति द्वारा संभोग के दौरान नये नये प्रयोग और अब बहन जैसी जेठानी से समलैंगिक सैक्स. किसी मादा शरीर से मिला अनुभव नितांत अनूठा था पर रात में इस समय बिस्तर में किसी पुरुष के भारी कठोर शरीर से दबने और कुचले जाने का अपना अलग ही आनन्द है. काश अजय इस समय उसके पास होता. किस्मत से एक ही बार मौका मिला था उसे परन्तु पद्मा तो हर रात ही अजय से चुदने का लुत्फ़ लेती होगी. आज अजय मिल जाये तो उसे काफ़ी कुछ नया सिखा सकती है. अजय अभी नौजवान है और उसे बड़ी आसानी प्रलोभन देकर अपनी चूत चटवाई जा सकती है. फ़िर वो पद्मा के मुहं की तरह ही उसके मुहं पर भी वैसे ही पानी बरसायेगी. मजा आ जायेगा. पता नहीं कब इन विचारों में खोई हुई उसकी आंख लग गयी. देर रात्रि में जब प्यास लगने पर उठी तो पूरा घर गहन अन्धेरे में डूबा हुआ था. बिस्तर के दूसरी तरफ़ कुमार खर्राटे भर रहे थे. पानी पीने के लिये उसे रसोई में जाना पड़ेगा सोच कर बहुत आहिस्ते से अपने कमरे से बाहर निकली. सामने ही अजय का कमरा था. हे भगवान अब क्या करे. पद्मा को वचन दिया है कि कभी अजय की तरफ़ गलत निगाह से नहीं देखेगी. पर सिर्फ़ एक बार दूर से निहार लेने से तो कुछ गलत नहीं होगा. दिल में उठते जज्बातों को काबू करना जरा मुश्किल था. सिर्फ़ एक बार जी भर के देखेगी और वापिस आ जायेगी. यही सोच कर चुपके से अजय के कमरे का दरवाजा खोला और दबे पांव भीतर दाखिल हो गई. कमरे में घुसते ही उसने किसी मादा शरीर को अजय के शरीर पर धीरे धीरे उछलते देखा. पद्मा के अलावा और कौन हो सकता है इस वक्त इस घर में जो अजय के इतना करीब हो. अजय की कमर पर सवार उसके लन्ड को अपनी चूत में समाये पद्मा तालबद्ध तरीके से चुद रही थी. खिड़की से आती स्ट्रीट लाईट की मन्द रोशनी में उसके उछलते चूंचे और मुहं से निकलती धीमी कराहो से पद्मा की मनोस्थिति का आंकलन करना मुश्किल नहीं था. “कुतिया, अभी अभी मुझसे से चुदी है और फ़िर से अपने भतीजे के ऊपर चढ़ गई” मन ही मन पद्मा को गन्दी गन्दी गालियां बक रही थी शोभा. खुद के तन भी वही आग लगी हुई थी पर मन तो इस जलन से भर उठा कि पद्मा ने उसे अजय के मामले में पछाड़ दिया है. उधर पद्मा पूरे जोशोखरोश के साथ अजय से चुदने में लगी हुई थी. रह रहकर उसके हाथों की चूड़ियां खनक रही थी. गले में पड़ा हार भी दोनों स्तनों के बीच उछल कर थपथपा कर उत्तेजक संगीत पैदा कर रहा था और ये सब शोभा की चूत में फ़िर से पानी बहाने के लिये पर्याप्त था. पहले से नम चूत की दीवारों ने अब रिसना चालू कर दिया था. आभूषणों से लदी अजय के ऊपर उछलती पद्मा काम की देवी ही लग रही थी. शोभा को अजय का लन्ड चाहिये था. सिर्फ़ पत्थर की तरह सख्त अजय का मासपिण्ड ही उसे तसल्ली दे पायेगा. अब यहां खड़े रह कर इनकी काम क्रीड़ा देखने भर से काम नहीं चलने वाला था. शोभा मजबूत कदमों के साथ पद्मा की और बढ़ी और पीछे से उसका कन्धा थाम कर अपनी और खींचा. हाथ आगे बढ़ा शोभा ने पद्मा के उछलते कूदते स्तनों को भी हथेलियों में भर लिया. कोई और समय होता तो पद्मा शायद उसे रोक पाती पर इस क्षण तो वो एक चरम सीमा से गुजर रही थी. अजय नीचे से आंख बन्द किये धक्के पर धक्के लगा रहा था. उसे ताई के दुख रहे मुम्मों का कोई गुमान नहीं था. इधर पद्मा को झटका तो लगा पर इस समय स्तनों को सहलाते दबाते शोभा के मुलायम हाथ उसे भा रहे थे. कुछ ही क्षण में आने वाली नई स्थिति को सोचने का समय नहीं था अभी उसके पास. शोभा को बाहों में भर पद्मा उसके सहारे से अजय के तने हथौड़े पर कुछ ज्यादा ही जोश से कूदने लगी. “शोभा–आह–आआह”, पद्मा अपनी चूत में उठती ऑर्गैज्म की लहरों से जोरो से सिसक पड़ी। वो भी थोड़ी देर पहले ही अजय के कमरे में आई थी. शोभा की तरह उसकी चूत की आग भी एक बार में ठंडी नहीं हुई थी और आज अजय की बजाय अपनी प्यास बुझाने के उद्देश्य से चुदाई कर रही थी. अजय की जब नींद खुली तो ताई बेदर्दी से उसके फ़ूले हुये लण्ड को अपनी चूत में समाये उठक बैठक लगा रही थी. कुछ ना कर पाया लाचार अजय. आज रात अपनी ताई की इस हिंसक करतूत से संभल भी नहीं पाया था कि दरवाजे से किसी और को भी कमरे में चुपचाप आते देख कर हैरान रह गया. पर किसी भी तरह के विरोद्ध की अवस्था में नहीं छोड़ था आज तो ताई ने.

“शोभा तुम्हें यहां नहीं आना चाहिये था, प्लीज चली जाओ.” पद्मा अनमनी सी बोली थी. शोभा के गदराये बदन को बाहों में लपेटे पद्मा उसकी हथेलियों को अपने दुखते स्तनों पर फ़िरता महसूस कर रही थी. लेकिन अपने भतीजे के सामने.. नहीं नहीं. रोकना होगा ये सब. किन्तु किशोर अजय का लण्ड तो ताई के मुख से अपनी चाची का नाम सुनकर और ज्यादा कठोर हो गया. पद्मा ने शोभा को धक्का देने की कोशिश की और इस हाथापाई में शोभा के बदन पर लिपटी एक मात्र रेशमी चादर खुल कर गिर पड़ी. हॉल से आकर थकी हुई शोभा नंगी ही अपने बिस्तर में घुस गई थी. जब पानी पीने के लिये उठी तो मर्यादावश बिस्तर पर पड़ी चादर को ही लपेट कर बाहर आ गई थी. शोभा के नंगे बदन का स्पर्श पा पद्मा के तन बदन में बिजली सी दौड़ गई. एकाएक उसका विरोध भी ढीला पड़ गया. अजय के लण्ड को चोदते हुये पद्मा और कस कर शोभा से लिपट गई. नीचे अजय अपनी ताई की गीली हुई चूत को अपने लण्ड से भर रहा था शोभा के मन में डर पैदा हो गया कि कहीं अजय उसकी चूत भरने से पहले ही झड़ ना जाये उसने ऊपर से दाहिना हाथ आगे बढ़ा हथेली को संभोगरत ताई भतीजे के मिलन स्थल यानि पद्मा की चूत के पास फ़सा दिया. किसी अनुभवी खिलाड़ी की तरह शोभा ने क्षण भर में ही पद्मा के तने हुये चोचले को ढूंढ निकाला और तुरंत ही चुटकी में भर के उस बिचारी को जोरों से मसल दिया. लण्ड पर चाची की उन्गलियों का चिर परिचित स्पर्श पा अजय मजे में कराहा, “चाचीईईईई”. “हां बेटा”, शोभा चाची ने भी नीचे देखते हुये हुंकार भरी.

पद्मा की चूत अजय के मोटे लण्ड के कारण चौड़ी हुई पड़ी थी और शोभा भी उसे बख्श नहीं रही थी. रह रह कर बार बार चूत के दाने को सहला छेड़ रही थी. पद्मा बार बार अजय की जांघों पर ही कमर को गोल गोल घुमा और ज्यादा उत्तेजना पैदा करने की कोशिश कर रही थी. पद्मा तो पहले से ही चरम सीमा के करीब थी , सो शोभा की इस हरकत से जल्दी ही झड़ने लग़ी “शोभा~आआआआआ” शोभा तुरन्त समझ गयी कि पद्मा झड़ गयी है। उसने पद्मा के कंधे को छोड़ अपना हाथ उसकी बाहों के नीचे फ़सा दिया और बलपूर्वक पद्मा को अजय के ऊपर से उठाने लगी. दिमाग चलाते हुये उसने तुरंत ही अपने दुसरे हाथ की पांचों उंगलियों को एक साथ कर पद्मा की झड़ती रिसती चुत में घुसेड़ दिया. परंतु शोभा की उन्गलियां अजय के लण्ड की भांति गीली और चिकनी नहीं थी अतः पीड़ा की एक लहर उसके चेहरे पर फ़ैल गई. अजय भी गुर्रा पड़ा. वो झड़ने की कगार पर ही था कि उसकी चाची ने ताई की चूत को लण्ड पर से हटा लिया था. अब उसका पानी भी वापिस टट्टों में लौट गया था. शोभा ने पद्मा को खींच कर जमीन पर गिरा दिया और खुद उसके ऊपर आ गई. औरतों के बीच चलते इस मदन-युद्ध को पीछे से देख अजय भौंचक्का रह गया. दोनों ही उसे प्यारी थी. खुद के आनन्द के लिये वो किसी एक को भी छोड़ने को तैयार नहीं था. अपनी चाची के पुष्ट भारी स्तनों और फ़ुदकती चूत की तस्वीर उसके दिमाग में अब भी ताजा थी जिसे याद कर वो रोज ही मुट्ठ मारता था. उसकी ताई भी रोज रात को उसे स्त्री शरीर का सुख देती थी. दोनों ही औरतों से उपेक्षित अजय ने अपने बेबस तेल पिये लण्ड को मुट्ठी में भर लिया.

अजय के सामने ही शोभा पद्मा को अपने नीचे दबा एक हाथ से उनकी चूत में पांचों उन्गलियां घुसाये दे रही थी और दूसरे से पद्मा के बड़े बड़े स्तनों को निचोड़ रही थीं. चाची के होंठ पद्मा ताई के होंठों से चिपके हुये थे और जीभ शायद कहीं ताई के गहरे गले में गोते लगा रही थी. आंख के कोने से शोभा चाची ने अजय को लन्ड मुठियाते देखा तो झटके से जेठानी की चूत को छोड़कर अजय की कलाई थाम ली. अजय का हाथ उसके लन्ड पर से खींच कर चाची पद्मा के कानों मे फ़ुसफ़ुसाई “दीदी, देखो हमारा अजय क्या कर रहा है?” इस प्रश्न के साथ ही शोभा ने पद्मा और अपने बीच में चल रहा अजय का विवाद भी जैसे निपटा दिया. और यही तो उन दोनों के बीच चले लम्बे समलैंगिक संभोग का भी आधार था. जिस्मों की उत्तेजना में कुछ भी स्वीकार कर लेना काफ़ी आसान होता है. हां, अपने भतीजे के सामने पद्मा पूरी तरह से चरित्रहीन साबित हो चुकी थी परन्तु जब उसने शोभा के हाथ को अजय के विशालकाय लण्ड को सहलाते देखा तो उसे शोभा में अपनी प्रतिद्वंद्धी नहीं, बल्कि अजय को उसके ही समान प्यार करने वाली एक और ताई/चाची दिखाई दी. अजय हालांकि रोज अपनी ताई को चोदता था और इस तरह से उसकी शारीरिक जरुरतें सीमा में रहती थी. किन्तु ताई सिर्फ़ रात में ही उसके पास आती थीं. उसके बेडरूम के बाहर वो सिर्फ़ उसकी ताई थीं. अपनी ताई के जाने के बाद ना जाने कितनी ही रातों को अजय ने चाची के बारे बारे में सोच सोच कर अपना पानी निकाला था. अन्जाने में ही सही, एक बार तो चाची की चूत के काफ़ी नजदीक तक उसके होंठ जा ही चुके थे और दोनों ही औरतों ने अपने जिस्म से उसके लण्ड की जी भर के सेवा भी की है. वो भी उन दोनों के इस कृत्य का बदला चुकाने को उत्सुक था. पर किससे कहे, दोनों ही उससे उम्र में बड़ी होने के साथ साथ पारिवारिक परम्परा के अनुसार सम्मानीय थी. दोनों ही के साथ उसका संबंध पूरी तरह से अवैध था. अपने दिल के जज्बातों को दबाये रखने के सिवा और कोई चारा नहीं था उसके पास. इसीलिये जब उसकी चाची ने मात्र एक चादर में लिपट कर उसके कमरे में प्रवेश किया था और अपने भारी भारी स्तनों को ताई के कन्धे से रगड़ना शुरु किया तो वो उन पर से अपनी नज़र ही नहीं हटा पाया था। शोभा की नाजुक उन्गलियां अजय के तने हुये काले लन्ड पर थिरक रही थीं तो बदन पद्मा के पूरे शरीर से रगड़ खा रहा था. दोनों ही औरतों के बदन से निकले मादा खुश्बू अजय को पागल किये जा रही थी. पद्मा ने जब अजय को शोभा के नंगे शरीर पर आंखें गड़ाये देखा तो उन्हें भी अहसास हुआ कि अजय को भरपूर प्यार देने के बाद भी आज तक उसके दिल में अपनी चाची के लिये जगह बनी हुई है. दोनों औरतों के बदन के बीच में पद्मा की चूत से निकलता आर्गैज्म का पानी भरपूर चिकनाहट पैदा कर रहा था. “देखो दीदी” शोभा ने अजय के फ़ूले तने पर नजरें जमाये हुए कहा. कुशल राजनीतिज्ञ की तरह शोभा अब हर वाक्य को नाप तोल कर कह रही थी. पद्मा को बिना जतलाये उसे अजय को पाना था. अजय को बांटना अब दोनों की ही मजबूरी थी और उसके लिये पद्मा की झिझक खत्म करना बहुत जरूरी था. “कैसा कड़क हो गया है?” पद्मा के चूतरस से सने उस काले लट्ठ को मुट्ठी में भरे भरे ही शोभा धीरे से बोली. पद्मा के गले से आवाज नहीं निकल पाई. “हम इससे अपनी चूत चुसवाना चाहते थे.” शोभा बोली.शोभा ने चेहरा पद्मा की तरफ़ घुमाया और अपने होंठ पद्मा की रसीली चूत के होंठों पर रख दिये. पद्मा के चूत को चूसते हुये भी उसने अजय के लण्ड को मुठियाना जारी रखा. नजाकत के साथ अजय के सुपाड़े पर अंगूठा फ़िराने लगी.

loading...

Leave a Reply