दुलारा भतीजा part 3

चाची के मन में डर पैदा कर रही थी. शोभा रसोई में घुसी तो पद्मा सब के लिये चाय बना रही थी. “गुड माँर्निंग, दीदी!”, “मैं कुछ मदद करूँ?” ” ओह, गुड माँर्निंग शोभा. अरे, कुछ खास नहीं, हो गया सब. तुम आराम कर लेती ना. कल रात को तो बड़ी मेहनत कर रही थीं.” पद्मा ने जवाब दिया. शोभा तो जड़वत रह गई. कहीं पद्मा भाभी ने सच में उसे अजय के साथ रन्ग रेलियाँ मनाते देख तो नहीं देख लिया या वो सिर्फ़ अन्दाजा लगा रही हैं और उनका इशारा कुमार और उसकी चुदाई की तरफ़ था. जो भी हो आखिर इन लोगो की आवाजें भी तो पूरे घर में सुनाई दे रही थीं. “आप भी तो कल रात खूब पसीना बहा रही थीं”, शोभा ने मुस्कुराने की चेष्टा की. आम हिन्दुस्तानी घरों में जठानी और देवरानी में इस तरह का सैक्स संबंधी वार्तालाप काफ़ी सामान्य है. चाय में शक्कर डालते हुये पद्मा के हाथ रुक गये. “मैं क्या कर रही थी?” पद्मा ने पूछा. “भाभी, हम दोनों ने आप लोगों की आवाजें सुनी थीं” शोभा ने पद्मा के कन्धे पर हाथ रखते हुये कहा. “मैं अपने पति के साथ थी” पद्मा ने फ़िर से चाय के बर्तन में शक्कर डालते हुए कहा. शोभा का चेहरा लाल हो गया और दिल हथौड़े की तरह बजने लगा. गले में कुछ चुभ सा रहा था शायद, बड़ी मुश्किल से बोल पाई “मैं भी तो अपने पति के साथ ही थी”. “हाँ, आखिरकार”. पद्मा ने कन्धे से शोभा का हाथ झटकते हुये कहा. शोभा चुपचाप सिर झुकाये प्लेट में बिस्किट लगाने लगी. कहां कल कि रंगीन रात और कहां सवेरे सवेरे ये सब बखेड़ा. लेकिन जो भी हो सामना तो करना ही पड़ेगा. “सो, कैसा रहा सब कुछ.” पद्मा ने सामान्य बनते हुये पूछा. “दीदी, कल शाम को शराब पीने के बाद, इतनी सैक्सी फ़िल्म देख कर हम सब ही थोड़ा थोड़ा बहक गये थे” कहते हुये शोभा के हाथ काँप रहे थे. कल रात की याद करने भर से शोभा की चूत में गीलापन आ गया. “वो सब तो ठीक है, लेकिन तुमने मेरी बात का जवाब नहीं दिया. कल रात को मजा आया कि नहीं.” पद्मा तो जैसे जिद पर ही अड़ गयी. “पता नहीं आप को इस सब में क्या मजा आ रहा है, हम लोगों की ये कोई सुहागरात तो थी नहीं” शोभा थोड़ा शरमाते हुए बोली. “उसके लिये तो थी” आखिरकार पद्मा ने कह ही डाला. अब शक की कोई गुन्जाईश नहीं थी की पद्मा ने कल रात शोभा को अपने भतीजे के कमरे में देख लिया था. “दीदी, ये सब गलती से हुआ” अब शोभा भी टूट गई. दिल जोरो से धड़क रहा था और तेजी से चलती सांसो से सीना भी ऊपर नीचे हो रहा था. शर्म के मारे दोनों गाल लाल हो गये थे बिचारी के. “इतनी देर हो गई थी कि तुम खुद को रोक भी नहीं सकती थीं?” शोभा से किसी जज की तरह सवाल पूछा पद्मा ने. उसके भतीजे को बिगाड़ने का अपराध जो किया था शोभा ने. “नहीं दीदी, जब मुझे पता चला कि…..” “क्या पता चला तुम्हें?” पद्मा का स्वर तेज हो चला. “दीदी, पता नहीं कैसे आपको बताऊँ? लेकिन जैसे ही मैने उसको महसुस किया मैं समझ गयी कि ये कुमार तो नहीं हैं. किन्तु आपका भतीजा तो रुकने को ही तैयार नहीं था.” कहते हुये शोभा ने पद्मा का हाथ पकड़ लिया. डर रही थी कि कहीं पद्मा घर में महाभारत ना करा दे. पद्मा ने शोभा के हाथ को दबाते हुये सयंत स्वर में पूछा. “कैसे महसूस किया तुमने उसे?”.

कम से कम इतना जानने का अधिकार तो उसका था ही कि उसके भतीजे के साथ क्या हुआ था. अगर उसकी देवरानी ने जान बूझ कर अजय को उकसाया था तो ये एक अक्षम्य अपराध था. “मैनें तो सिर्फ़ वही किया जो में कुमार के साथ करती हूं”. पद्मा के कन्धे पर सर रखते हुये शोभा बोली. “हां तो ऐसा क्या किया तुमने कि तुमको मालूम पड़ गया कि ये कुमार नहीं अजय है और फ़िर भी तुम खुद को संभाल नहीं पाईं? मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा”. शोभा की समझ में आ गया की पद्मा को रोकना मुश्किल है. उसने सब कुछ बताने का निश्चय कर लिया. वो बोली “दीदी, उसका वो इतना लम्बा और तगड़ा था और इतनी जल्दी खड़ा हो गया था की वो कुमार का तो हो ही नही सकता था. मैने उसे रोकने की बहुत कोशिश की पर अजय बुरी तरह से उत्तेजित था.” “तुमने उसे रोकने की कोशिश की, कैसे?” पद्मा ने फ़िर से सवाल दाग दिया. “वैल, मैनेअपने को उससे छुड़ाया और वहां से उठ गई”, शोभा के मुहं से तुरन्त ही निकल गया. “ओ गॉड, तो क्या अजय से तुम लिपट गई थी?” अब पद्मा की चूत में पानी बहने लगा. अब पद्मा की चूत में पानी बहने लगा. एक औरत, उनकी देवरानी, कल रात अपने ही भतीजे से लिपटी थी. “उसने मुझे दबोच लिया था ।” पद्मा ने अविश्वास से शोभा की तरफ़ देखा. “कमरे में अन्धेरा था. मुझे लगा की कुमार सो रहे हैं. तो बाकी दिनों की तरह ही में अजय की चादर में घुस कर जल्दी मचाने लगी. नशे में तो मैं थी ही और आपकी और भाई साहब की चुदाई की आवाजों ने मेरा दिमाग खराब कर दिया था.” शोभा ने भी पूरे वाकिये को रसीला बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. “एक झटके में ही वो लन्ड फ़ूलकर इतना बड़ा हो गया था कि मैं तुरन्त ही समझ गई कि ये कुमार नहीं हैं.” ” क्या इतना बड़ा है अजय का लन्ड ?” पद्मा ने पूछा. किन्तु तुरन्त ही उसे अपनी गलती का एहसास हो गया. उसे ऐसा सवाल नहीं पूछना चाहिये था. अजय बचपन से अपने ताऊ ताई के साथ एक ही कमरे में सोता आया था. जब वो तेरह साल का हुआ तो एक दिन पद्मा को उसके बिस्तर में कुछ धब्बे मिले. उस दिन से उसने अजय का दूसरे कमरे में सोने का इन्तजाम कर दिया और साथ ही उसे नहलाना और उसके कपड़े बदलना भी बन्द कर दिया. उसके बाद पद्मा कभी भी अपने बेटे समान भतीजे को नग्नावस्था में ना देख सकी. पर आज वो सब कुछ जानना चाहती थी. शोभा ने भी पद्मा के व्यवहार में आये परिवर्तन को तुरन्त ही जान लिया. “शायद अजय को ये सब अपने ताऊ से मिला है. कुमार का लन्ड तो काफ़ी पतला और छोटा है, अजय अपनी उम्र के हिसाब से काफ़ी तगड़ा है. गजब की ताकत है उसमें” अपने नये प्रेमी की प्रशन्सा करने से ही शोभा के होंठ सूख गये.

“आओ, बैठ कर बात करते हैं” शोभा का हाथ पकड़ कर पद्मा उसे हॉल में ले आई. अपनी गलती पता चलने पर भी तुमने उसे रोका नहीं?” “दीदी, जब तक में कुछ समझ पाती काफ़ी देर हो चुकी थी, मैने लाईट जलाने की कोशिश की तो उसने अपने लन्ड से मेरे हाथ में झटके मारना शुरु कर दिया. मुझे लगा कि शायद वो कोई सपना देख रहा है पर जैसे ही वो जागा, बिल्कुल पागल ही हो गया. और फ़िर उसने मुझे भी अपने वश में कर लिया, “मैं कुछ न कर सकी दीदी, आई एम सॉरी”. “और फ़िर, तुम भी उसके साथ शुरु हो गईं? है ना?” इस वक्त पद्मा की चूत में बुलबुले से उठने लगे. जब शोभा ने बताया कि अजय का लन्ड कितना बड़ा है तो उसकी अजय के बारे में और जानने की इच्छा बढ़ गई. लेकिन खुद को चरित्रहीन साबित किये बगैर ये सब पूछ पाना भी जरा मुश्किल था. “मैने उसे रोकने की कोशिश की थी, लेकिन मैं उससे से दूर नहीं जा पाई. इतने सालों तक अपने हाथों से खिला पिला कर, नहला कर उसे बड़ा किया है मैनें. मेरे मन ने कहा कि बाकी सब की तरह ये भी उसकी ज़रूरतों का एक हिस्सा है. जब उसने मेरे बड़े बड़े स्तनों को दबाया तो मुझे लगा कि अगर मेरा सगा भतीजा मेरा भी दूध पी ले तो क्या हर्ज है”. पद्मा के स्तनों में लहर सी उठ रही थी तो दिमाग में अपनी बहन जैसी देवरानी के लिये ईर्ष्या. अपना हाथ शोभा के स्तनों पर रख कर उसके एक निप्पल को मसलते हुये पूछ बैठी, “क्या अजय ने इनको भी चूसा था?” शोभा ने पद्मा के कन्धे से सिर हटा कर उसकी आंखों में झांका. पद्मा की आंखों में पछतावे के आंसू थे जैसे कुछ खो गया हो. बीती रात खुद की जगह शोभा को अजय के ज्यादा करीब पाने का दर्द भरा था उसके दिल में. उधर, अपने प्यारे भतीजे की करतूत के बारे में उसकी ताई को बताने का शोभा का उत्साह दुगुना हो गया था. “दीदी, अजय जोर जोर से मेरे स्तनों को पकड़ कर मसल रहा था. मैं रुक ही नहीं पाई. ब्लाऊज को फ़टने से बचाने के लिये ही मैनें उसे खोल दिया.” शोभा ने अपना एक हाथ पद्मा के ब्लाऊज में डाल दिया और उन्गलियों से उसकी तनी हुयी निप्पल को मसलने लगी. “अपना अजय अब उतना छोटा नहीं रहा. घोड़ों के जैसी ताकत है उसमें. अगर गोपाल भाई साहब भी ऐसे ही हैं तो आप वास्तव में बहुत लकी हैं.” शोभा ने बात खत्म करते हुए कहा. मगर पद्मा का दिमाग तो किसी और ही ख्याल में डूबा हुआ था. जैसा शोभा ने बताया अगर वो सब सच है तो अजय अपने ताऊ से कहीं आगे था. शोभा ने पद्मा के गले में हाथों को डाल कर अपने गाल पद्मा के गालों से सटा दिये. पद्मा के पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई. शोभा के लिये अब उसकी भावनायें मिली जुली थी. एक और तो वो शोभा की आभारी थी कि उस जैसी सैक्स में अनुभवी औरत ने अजय की यौन जरुरतों को पूरा किया दूसरी और मन में एक ईर्ष्या का बीज भी था कि अजय को इस सब के लिये किसी दूसरी औरत का सहारा लेना पड़ा जबकि वो खुद उसके लिये ये सब कर सकती थी. दोनों औरतें चुप थीं. शोभा के हाथ पद्मा के बदन पर रेंग रहे थे और पद्मा अपने बदन में उठती सैक्स तरंगों को अच्छे से महसूस कर सकती थी. लेकिन अजय और उसके ताऊ की तुलना के बारे में वो कुछ नहीं बोल सकती थी. शोभा ने ही बातचीत में आये गतिरोध को तोड़ा. “एक बार जब में उसके ऊपर चढ़ी तो अजय के लन्ड ने यहां तक जगह बना ली.” अपने पेट पर नाभी के पास हाथ से इशारा करते हुये उसने पद्मा को दिखाया. “मैनें तो सोचा था कि एक बार अजय को मुठ मार के झड़ा दूंगी तो चली जाऊंगी. लेकिन पता नहीं कब मैं अपने होश खो बैठी और अजय के ऊपर जाँघ चढ़ा बैठी। उसके बाद अजय ने अपने आप वो तगड़ा लन्ड पूरा का पूरा मेरी चूत में डाल दिया. देखो यहां तक” अजय की प्रशन्सा करना अब शोभा को अच्छा लग रहा था. (पाठकों को याद होगा कि शोभा ने अपने हाथ से अजय के लन्ड को अपनी चूत का रास्ता दिखाया था, बिचारे १९ साल के कुंवारे अजय को क्या मालूम की औरत की चूत में लन्ड कहां डालना होता है. पद्मा से ये सब तथ्य छिपाना जरूरी था.) पद्मा ने शोभा की आंखों में देखा. ये औरत कुछ ही घन्टे पहले उनके भतीजे अजय के ऊपर चढ़ी हुई थी.

शोभा की चूत में भरा हुआ अजय के लन्ड का चित्र पद्मा के दिमाग में अपने आप बन गया. शोभा ने अजय का कुमारत्व छीन कर उसे बच्चे से जवान मर्द तो बना ही दिया था. अजय की जिन्दगी में किसी दूसरी औरत का साया पाकर उसका मन शोभा के लिये जबरदस्त जलन से भर गया. शोभा को खुद से दूर करके पद्मा उठी और रसोई में चली गयी. शोभा की आंखों में देख कर ना तो वो अपनी जलन को जाहिर करना चाहती थी और ना ही अजय के लिये अपने दिमाग में चलते आज रात के प्लान के बारे में उसे कुछ भनक पड़ने देना चाहती थी. अपने अजय को वो किसी के साथ भी नहीं बांट सकती थी. अगर अजय को किसी औरत का साथ ही चाहिये था तो वो साथ पद्मा का ही होना चाहिये था किसी और का नहीं. जिन निपल्लों को अजय ने चूसा वो उसकी ताई के ही होने चाहिये थे और उसके औजार ने शोभा की जो चूत मारी थी वो अब सिर्फ़ पद्मा की होनी चाहिये थी. कम से कम इस वक्त वो अजय के पुरुषत्व को छुना चाहती थी. उसे अपने करीब महसूस करना चाहती थी. खुद की चूत से जो पानी बह कर जांघों तक पहुंच गया था और अब वो पद्मा को आज रात तक चैन नहीं लेने देगा. हे भगवान, क्या क्या सोच रही है पद्मा? अजय के साथ हमबिस्तर होकर वो उसे वापिस पा लेगी. पद्मा की लम्बी चुप्पी ने शोभा पर कुछ और ही असर किया. शायद पद्मा इस पूरे प्रकरण से काफ़ी आहत हुई थी और शोभा से फ़िर कभी बात ही नहीं करेगी. कहीं पद्मा ने सब कुछ उसके पति को बता दिया तो गजब ही हो जायेगा. पूरे परिवार में दरार पड़ जायेगी. देर रात १० बजे. शोभा और कुमार घर छोड़ कर जा चुके थे. कुमार ने ऑफ़िस का कुछ जरूरी काम बता वहां से विदा ली. सवेरे जब चाय बना कर उसने सब को आवाज लगाई तो शोभा सबसे आखिर में पूरी तरह से तैयार हो कर डाईनिंग टेबिल पर आई थी. तब तक अजय अपने कॉलेज के लिये निकल चुका था. पूरे दिन के लिये अपनी सहेली के घर जाने का बहाना बना कर निकल गयी और फ़िर पद्मा के सामने नहीं आई. पद्मा को मालूम था कि असली वजह शोभा और उसके बीच सवेरे चला लम्बा वार्तालाप था.पद्मा अपने कमरे में बैठी कुछ सोच रही थी. गोपाल सो रहे थे. आज का पूरा दिन मानसिक और शारीरिक उथल पुथल से भरा रहा था. पद्मा ने आज पूरे दिन अजय पर नज़र रखी थी. अजय दिन भर अपनी पैंट के उभार को ठीक करता रहा था. बिचारा अपनी प्यारी चाची को ढूंढ रहा था. बोलना चाहता था कि वो उनसे कितना प्यार करता है. लेकिन उसकी प्यारी चाची तो कब की उसे छोड़ कर जा चुकी थीं. जब बार बार अजय किसी ना किसी बहाने से शोभा के बारे में पूछता तो पद्मा का दिल जल उठता. अजय को सिर्फ़ उसके बारे में ही सोचने का हक था. काश, उसने अजय को नहलाना बन्द नहीं किया होता तो जो सब शोभा ने किया वही सब वो खुद भी करती थी. उसका बेटा आज अपनी चाची का नहीं बल्कि उसका दिवाना होता था. अपने ही भतीजे के बारे में उसके कामुक विचार विकराल रुप धारण कर चुके थे. तेज होती सासें, पैरों के बीच अजय के लन्ड को महसूस करने की चाह और जबरदस्त तने हुये निप्पल सब कुछ वास्तविक था. और एक वास्तविकता ये भी थी कि वो अजय की ताई थी. ममता और वासना की मिली जुली भावनाओं से पद्मा के दिमाग में हलचल सी मची हुई थी. लेकिन जल्द ही वासना ने प्रेम के साथ मिल कर सब कुछ अपने काबू में कर लिया. दिमाग अब सिर्फ़ अजय के शरीर के बारे में सोचने लगा. आखिर कैसा होगा अजय का हथियार? लम्बा या मोटा? शोभा क्यूं कह रही थी की अजय बिल्कुल अलग है? या शायद अजय में वहीं जन्गली जानवर है जिसे सैक्स के समय हर औरत अपने सहचर में पाना चाहती है? इन सब विचारों से पद्मा का शरीर कांप रहा था. अब निर्णय की घड़ी पास ही थी. पद्मा अजय के कमरे मे दबे पांव घुसी. आज रात अपने बच्चे को पास से देखना चाहती थी. अजय के बिस्तर के किनारे पर लेटी हुई पद्मा, उसके नन्गे जिस्म को निहार रही थीं. अजय गहरी नींद में था. और पद्मा की आंखों में दूर दूर तक नींद का नामोनिशान नहीं था. निषिद्ध सैक्स और अजय के लिये मन में घर कर चुकी वासना ने उन्हें सोने ही नहीं दिया था.

थोड़ी देर के लिये पद्मा की आंख भी लग गयी. अचानक, बिस्तर के हिलने और कराहने की आवाजों से पद्मा जाग गयी. आंखें जब अन्धेरे की अभ्यस्त हुयीं तो देखा कि अजय चादर के अन्दर हाथ डाले किसी चीज को ज़ोर ज़ोर से हिला रहा था. अजय, कमरे में अपनी ताई कि मौजूदगी से अनभिज्ञ मुट्ठ मारने में व्यस्त था. शायद अजय कल की रात को सपनों में ही दुहरा रहा था. “आह, चाचीईईई” अजय की कराह सुनकर पद्मा को कोई शक नहीं रह गया कि अजय के दिमाग में कौन है. शोभा के लिये उनका मन घृणा से भर उठा. आखिर क्यूं किया उसने ऐसा? आज उनका लाड़ला ठीक उनके ही सामने कैसा तड़प रहा है. और वो भी उस शोभा का नाम ले कर. नहीं. अजय को और तड़पने की जरुरत नहीं है. जनम नहीं दिया तो क्या हुआ फ़िर भी यहां पर मैं उसकी ताई हूं उसकी हर ज़रुरत को पूरा करने के लिये. अजय के लिये उनके निर्लोभ प्रेम और इस कृत्य के बाद में होने वाले असर ने क्षण भर के लिये पद्मा को रोक लिया. अगर उनके पति अजय के ताऊ को कुछ भी पता चल गया तो? कहीं अजय ये सोचकर की उसकी ताई कितनी गिरी हुई औरत है उन्हें नकार दे तो? या फ़िर कहीं अजय जाकर सब कुछ शोभा को ही बता दे तो? तो, तो, तो? बाकी सब की उसे इतनी चिन्ता नहीं थी. और अपने खुले विचारों वाले पति को वो सब कुछ खुद ही बता कर समझा सकती थी कि अजय की जरुरतों को पूरा करना कितना आवश्यक था. नहीं तो जवान लड़का किसी भी बाजारु औरत के साथ आवारागर्दी करते हुये खुद को किसी भी बिमारी और परेशानी में डाल सकता था. पता नही कब, लेकिन पद्मा चलती हुई सीधे अजय की तरफ़ बिस्तर के पास जाकर खड़ी हो गईं. अजय ने भी एक साये को भांप लिया. तुरन्त ही समझ गया की ये शख्स कोई औरत ही है और पक्के तौर पर घर के अन्दर से ही कोई ना कोई है. क्या उसकी प्यारी शोभा चाची लौट कर आ गयीं हैं? क्या चाची भी उससे इतना ही प्यार करती है जितना वो उनसे? रात अपना खेल खेल चुकी थी. उसकी बिस्तर की साथी उसके पास थीं. अपने लन्ड पर उसकी पकड़ मजबूत हो गयी. बिचारा कितना परेशान था सवेरे से. दसियों बार मुत्ठ मार मार कर टट्टें खाली कर चुका था. लेकिन अब उसकी प्रेमिका उसके पास थी. और वो ही उसको सही तरीके से शान्त कर पायेंगी.

पद्मा कांपते कदमों से अजय कि तरफ़ बढ़ी. सही और गलत का द्वंद्ध अभी तक उसके दिमाग में चल रहा था. डर था कि कहीं अजय उससे नफ़रत ना करने लगे. तो वो क्या करेगी? कहीं वो खुद ही अपने आप से नफ़रत ना करने लगे. इन सारे शकों के बावजूद भतीजे को चोदने का ख्याल पद्मा अपने दिल से नहीं निकाल पाई. चादर के अन्दर हाथ डाल कर लन्ड के ऊपर जमे अजय के हाथों को अपने दोनो हाथों से ढक लिया. अब जैसे जैसे अजय लन्ड पर हाथ ऊपर नीचे करता पद्मा का हाथ भी खुद बा खुद उपर नीचे होता. “चाची” अजय फ़ुसफ़ुसाया. अपना हाथ लन्ड से अलग कर पद्मा के हाथों को पूरी आजादी दे दी उस शानदार खिलौने से खेलने की. अपने सपनों की मलिका को पास पाकर अजय का लन्ड कल से भी ज्यादा फ़ूल गया. पद्मा ने अजय के लन्ड पर उन्गलियां फ़िराईं तो नसों में बहता गरम खून साफ़ महसूस हुआ. आंखे बन्द करके पूरे ध्यान से उस महान औजार को दोनो हाथों से मसलने लगी. पद्मा के दिल से आवाज आई कि ये अजय का लन्ड कभी उसका हिस्सा था. इतना कठोर, इतना तगड़ा, अपने ही पानी से पूरी तरह से तर ये जवानी की दौलत उसकी अपनी थी. इससे पहले अपनी जिन्दगी में उन्होनें कभी ऐसे किसी लन्ड को हाथ में नहीं लिया था. पता नहीं अजय के जन्म से पहले उसकी माँ ने क्या खाया था कि आज उसका लन्ड अपने ताऊ चाचा से भी कहीं आगे था. अपने ही ख्यालों में डूबी हुई उस ताई को ये भी याद नहीं रहा कि कब उनकी मुट्ठी ने अजय के लन्ड को कसके दबाकर जोर जोर से दुहना चालू कर दिया. लन्ड की मखमली खाल खीचने से अजय दर्द से कराह उठा. हाथ बढ़ा कर अजय ने पद्मा की अनियंत्रित कलाई को थामा. पद्मा ने दूसरे हाथ से अजय का माथा सहलाया. खुद को घुटनों के बल बिस्तर के पास ही स्थापित करती हुई पद्मा ने लन्ड को मुठियाना चालू रखा. अजय के चेहरे से हटा अपने हाथ को पद्मा ने अब उसके सीने पर निप्पलों को आनन्द देने के काम में लगा दिया. “हाँ आआआआहहहह”. शरीर पर दौड़ती जादुई उन्गलियों का असर था ये. और ज्यादा आनन्द की चाह में अजय बेकरारी में अपनी कमर हिलाने लगा. अजय के हाथ पद्मा के कन्धों पर से होते हुए स्तनों को थामकर उन्हें अपने पास खीचने लगे. अन्धेरी रात में अजय उस मादा शरीर को अपने पूरे बदन पर महसूस करना चाहता था. लेकिन उसकी प्रेमिका ने तो पूरे कपड़े पहने हुये है. अजय की उत्तेजना अपने चरम पर थी. उधर पद्मा ने भी शरीर को थोड़ा और झुकाते हुए अजय के खड़े लन्ड तक पहुंचने की चेष्टा की. जो शोभा ने किया वो वह भी कर सकती है. तो क्या हुआ अगर लन्ड चूसने का उसका अनुभव जीरो है, भावनायें तो प्रबल हैं ना. एक बार के लिये उसे ये सब गलत लगा लेकिन फ़िर शोभा का ख्याल आते ही नया जोश भर गया. अगर उसने आज अजय का लन्ड नहीं चूसा तो वह कल फ़िर से इस आनन्द को पाने के लिये शोभा के पास जा सकता है. नहीं. नहीं. आज किसी भी कीमत पर वो अपने लाड़ले के दिलो दिमाग से शोभा की यादें मिटा देगी चाहे इसके लिये उन्हें कुछ भी क्युं ना करना पड़े. अजय अब अपनी सहचरी का चेहरा देखना चाहता था. वहीं चेहरा जो कल रात किसी देवी की मूर्ति की तरह चमक रहा था. हाथ बढ़ाकर बिस्तर के पास की लैम्प जलाई तो लम्बे बालों मे ढका चेहरा आज कुछ बदला हुआ लगा. ये उसकी चाची तो नहीं थीं. पद्मा ने अपना चेहरा अजय की तरफ़ घुमाया “ताई ?”

लड़के के चेहरे पर दुनिया भर का आश्चर्य और डर फ़ैल गया. अजय जल्दी से अपनी चादर की तरफ़ झपटा. पद्मा समझ गईं अभी नहीं तो कभी नहीं वाली स्थिति आ खड़ी हुई है. अगर उन्होनें वासना और अनुभव का सहारा नहीं लिया तो इस मानसिक बाधा को पार नहीं कर पायेंगी और फ़िर अजय भी कभी उनका नहीं हो पायेगा. लन्ड पर तुरन्त ही झुकते हुये पद्मा ने पूरा मुहं खोला और अजय के तन्नाये पुरुषांग को निगल लिया. पद्मा के होंठ लन्ड के निचले हिस्से पर जमे हुये थे. मुहं के अन्दर तो लार का समुन्दर सा बह रहा था. आखिर पहली बार कोई लन्ड यहां तक पहुंचा था. लन्ड चुसाई करते हुए भी पद्मा के दिल में सिर्फ़ एक ही जज्बा था कि वो अजय को सैक्स के चरम पर अपने साथ ले जायेगी जहां ये लड़का सब कुछ भूल कर बस उन्हीं को चोदेगा.दो मिनट पहले के मानसिक आघात के बाद जो लन्ड थोड़ा नरम पड़ गया था वो फ़िर से अपने शबाब पर लौट आया. पद्मा के लम्बे बाल अजय की जांघों और पेट पर बिखर कर अलग ही रेशमी अहसास पैदा कर रहे थे. पिछली रात से बहुत ज्यादा अलग ना सही लेकीन काफ़ी मजेदार था ये सब. अजय ने भी अब सब कुछ सोचना छोड़ कर पद्मा के सिर को हाथों से थाम लिया और फ़िर कमर हिला हिला कर उनके मुहं को चोदने लगा. अजय का नियंत्रण खत्म हो गया. वो अभी झड़ना नहीं चाहता था परन्तु पद्मा का मखमली मुहं, वो जोश, वो गर्मी और मुहं से आती गोंगों की आवाजों से आपा खो कर उसका वीर्य बह निकला. “ताई ताई” अजय सीत्कारा “रुको, रुको.. रुक जाओ” अजय चिल्लाया. पद्मा सब समझ गई. अजय छूटने वाला था. लन्ड की नसों मे बहते वीर्य का आभास पाकर पद्मा ने अपना मुहं हटाय़ा और गुलाबी सुपाड़े में से वीर्य की धार छूट पड़ी. पद्मा ने दोनो आंखें बन्द कर लीं. पद्मा का हाथ अजय के वीर्य से सना हुआ था. “बर्बाद” एक ही शब्द पद्मा के दिमाग में घूम रहा था. अभी तक झटके लेते लन्ड को पद्मा ने निचोड़ निचोड़ कर खाली कर दिया. लड़के के मुहं से कराह निकली ” ताई ताई, ये आपने क्या कर दिया?” “वहीं, जो मुझे बहुत पहले कर देना चाहिये था” पद्मा ने जवाब दिया “तुमको मेरी जरूरत है. ना कि किसी चाची या किसी भी ऐरी गैरी लड़की या औरत की, तू सिर्फ़ मेरा है” उनके वाक्यों में गर्व मिश्रित अधिकार था. अजय ने बिस्तर पर एक तरफ़ हटते हुये अपनी ताई के लिये जगह बना ली. पद्मा भी अजय के पास ही बिस्तर पर लेट गयी. खुद को इस तरह से व्यवस्थित किया की अजय का चेहरा ठीक उनके स्तनों के सामने हो और लन्ड उनके हाथ में. नाईट गाऊन के सारे बटन खोल कर पद्मा ने उसे अपने बदन से आज़ादी दे दी. अजय की आंखों के सामने ताई की नन्गी भरी पूरी जवानी बिखरी पड़ी थी. जबसे सैक्स शब्द का मतलब समझने लगा था उसकी ताई ने कभी भी उसे अपने इस रूप का दर्शन नहीं दिया था. हां चाची के साथ जरूर किस्मत ने कई बार साथ दिया था. अजय का सिर पकड़ पद्मा ने उसे अपने बड़े बड़े गोरे गुलाबी उरोजों में छिपा लिया. अजय थोड़ा सा कुनमुनाया. “श्श्श्श”. “मेरे बच्चे, तेरे लिये तेरी ताई ही सब कुछ है. कोई चाची या कोई भी दूसरी औरत मेरी जगह नही ले सकती. समझे?” अजय के होठों ने अपने आप ही ताई ताई के निप्पलों को ढूंढ लिया. ताई के दोनों निप्पल बुरी तरह से तने हुये थे. शायद बहुत उत्तेजित थी. अपने भतीजे के लिये उसकी ताई ने इज्जत की परवाह भी ना की. अजय का मन पद्मा के लिये प्यार और सम्मान से भर गया. ताई भतीजे एक दूसरे से बेल की तरह लपटे पड़े थे. अजय का एक पांव पद्मा की कमर को जकड़े था तो हाथ और होंठ ताई के सख्त हुये मुम्मों पर मालिश कर रहे थे. लन्ड में भी धीरे धीरे जान लौटने लगी. पर दिन भर का थका अजय जल्दी ही अपनी ताई के आगोश में सो गया.

पद्मा थोड़ी सी हताश तो थी किन्तु अजय की जरुरतों को खुद से पहले पूरा करना उनकी आदत में था. खुद की टांगों के बीच में आग ही लगी थी पर अजय को जन्मजात अवस्था में खुद से लिपटा कर सोना उसे सुख दे रहा था. थोङी देर में पद्मा भी नींद के आगोश में समा गयी. जो कुछ भी उन दोनों के बीच हुआ वो तो एक बड़े खेल की शुरुआत भर था. एक ऐसा खेल जो इस घर में अब हर रात खेला जाने वाला था. आधी रात के बाद अजय की नींद खुली। पिछले चौबीस घन्टों में अपने ही घर की दो सीधी सादी दिखने वाली भद्र महिलाओं के साथ हुये उसके अनुभव को याद करके अजय का लन्ड फ़िर तेजी से सिर उठाने लगा. बिस्तर पर उसकी ताई जन्मजात नन्गी अवस्था में उसकी बाहों में पड़ी हुयीं थीं. अजय की तरफ़ ताई की पीठ थी। ताई के कड़े निप्पलों को याद करके अजय का हाथ अपने आप ही पद्मा के बड़े बड़े स्तनों पर पहुंच गया. हथेली में एक स्तन को भर कर अजय हौले हौले से दबाने लगा. शायद ताई जाग जाये और क्या पता खुद को चोदने भी दे. आज की रात वो किसी औरत के जिस्म को बिना चोदे रह नहीं पायेगा. अजय ने धीरे से ताई की तरफ़ करवट बदलते हुये अपना लन्ड उनके भारी नितंबों की दरार में घुसेड़ दिया. अपनी चूतड़ पर दबाब पाकर पद्मा की आंखें खुल गईं. “अजय, ये क्या कर रहे हो?”, पद्मा बुदबुदाईं.

बिचारा अजय क्या बोलता की ताई मैं तुम्हे चोदना चाहता हूं. क्या कोई भी ये बात कभी भी अपनी ताई से कह पायेगा? नहीं ना? अजय ने जवाब में अपने गरम तपते होंठों से पद्मा के कानों को चूमा. बस. इतना करना ही काफ़ी था उस उत्तेजना से पागल हुई औरत के लिये. पद्मा ने खुद पेट के बल लेटते हुये अजय के हाथों को खींच कर अपनी झांटो के पास रखा और एक पैर सिकोड़ कर घुटना मोड़ते हुये उसे अपनी बुरी तरह गीली हुई चूत के दर्शन कराये. अजय ने ताई की झांटो भरी चूत पर उन्गलियां फ़िराई. परन्तु अनुभवहीनता के कारण ना तो वो उन बालों को अपने रास्ते से हटा पा रहा था ना ही चूत में अन्दर तक उन्गली करने का साहस कर पा रहा था. समस्या को तुरन्त ही ताड़ते हुये पद्मा ने अजय की उन्गलियो को अपने हाथों से चूत के होठों से छुलाया. फ़िर धीरे से अजय की उन्गली को गीली चूत के रास्ते पर आगे सरका दिया. जहां पद्मा को स्वर्ग दिख रहा था वहीं अजय ये सोच कर परेशान था की कहीं उसकी कठोर उन्गलियां उसकी प्यारी ताई की कोमल चूत को चोट ना पहुंचा दे. अजय शायद ये सब सीखने में सबसे तेज था. थोडी देर ध्यान से देखने के बाद बुद्धीमत्ता दिखाते हुये उसने अपनी उन्गली को चूत से बाहर खींच लिया. अब अपनी मध्यमा (बीच की सबसे बड़ी उन्गली) को चूतड़ के छेद के पास से कम बालों वाली जगह से ठीक ऊपर की तरफ़ ठेला. चूत के इस हिस्से में तो जैसे चिकने पानी का तालाब सा बना हुआ था. इस तरह धीरे धीरे ही सही अजय अपनी ताई की खुजली दूर करने लगा. पद्मा सिसकी और अपनी टांगों को और ज्यादा खोल दिया. साथ ही खुल गई चूत की दीवारें भी. अब एक उन्गली से काम नही चलने वाला था. अजय ने कुहनियों के बल ताई के ऊपर झुकते हुये एक और उन्गली को अपनी साथी के साथ चूत को घिसने की जिम्मेदारी सौंप दी. “आह, मेरे बच्चे”, अत्यधिक उत्तेजना से पद्मा चींख पड़ी. बाल पकड़ कर अजय का चेहरा अपनी तरफ़ खींचा और अपने रसीलें गरम होंठ उसके होठों पर रख दिये. आग में जैसे घी ही डाल दिया पद्मा ने. अजय ने आगे की ओर बढ़ते हुये ताई की जांघों को अपने पैरों के नीचे दबाया और फ़ुंकार मारते लन्ड से चूत पर निशाना लगाने लगा. अजय के शारीरिक बल और प्राकृतिक सैक्स कुन्ठा को देख कर पद्मा को शोभा की बात सच लगने लगी. नादान अजय के लन्ड को जांघों के बीच से हाथ डाल कर दबोचा और खाल को पीछे कर सुपाड़े को अपनी टपकती पावरोटी सी फ़ूली चूत के मुहांने पर रख दिया. कमर हिला हिला कर खुद ही उस कड़कड़ाते लन्ड को चूत रस से सारोबार करने के बाद फ़ुसफ़ुसाई “अब डाल न अन्दर इसे ।”. एक बार भी दिमाग में नहीं आया की ये कर्म अजय के साथ उनके एक नये रिश्ते को जन्म दे देगा. अब वो सिर्फ़ अजय की ताई नहीं बल्कि प्रेमिका, पत्नी सब कुछ बन जायेंगी. अजय ने ताई के मुम्मों को हथेलियों में जकड़ा और एक ही झटके में अपने औजार को ताई की पनियाती चूत में अन्दर तक उतार दिया. “ओह ताई ताईआआ”, “तुम्हारी बहुत गरम है अन्दर से” दोनों आंखे बन्द किये हुए चूत में लन्ड से खुदाई करने लगा. स्तनों को छोड़ अजय ने ताई की भरी हुई कमर को पकड़ा और अपनी तरफ़ खींचा कि शायद और अन्दर घुसने को मिल जाये. पद्मा का अपना कोई बच्चा नहीं था जो कुछ था वो अजय था उसके ताऊ के सामान्य लन्ड से इतने सालों तक चुदने बाद पद्मा की चूत अब भी काफ़ी टाईट बनी हुई थी. अजय का लन्ड आधा ही समा पाया था उस गरम चूत में. “आह बेटा, चोद मुझे जोर जोर से, फ़क मी”, पद्मा गिड़गिड़ाई. अपनी ताई के मुहं से ऐसे वचनों को सुनकर अजय पागल हो गया. “हां, हां, हां. बेटा, रुक मत ।”,

पद्मा आनन्द कराह रही थी. आज तक उनके पति ने कभी भी उनकी चूत को इस तरह से नहीं भरा था. सबकुछ काफ़ी तेजी के साथ हो रहा था और पद्मा अभी देर तक इन उत्तेजना भरे पलों का मजा उठाना चाहती थी. खुद को कुहनियों पर सम्भालते हुये पद्मा ने भी अजय के लन्ड की ताल के साथ अपने कुल्हों को हिलाना शुरु कर दिया. एक दूसरे को पूरा आनन्द देने की कोशिश में दोनो के मुहं से घुटी घुटी सी चीखें निकल रही थीं. “हां, लो और लो ताई, ” लन्ड को पद्मा की चुत पर मारते हुये अजय बड़बड़ा रहा था. अचानक पद्मा ने अपनी गति बढ़ा दी. अजय का लन्ड खुद को सम्भाल नहीं पाया और चूत से बाहर निकल कर ताई की गोल चूतड़ पर थपकियां देने लगा. “हाय, नो नो, अजय बेटा इधर आ, प्लीईईईज” “ले भर ना इसे” पद्मा कुतिया की तरह एक टांग हवा में उठा कर कमर को अजय के लन्ड पर पटकती हुई मिन्नतें करने लगी. लेकिन अजय का मन अब इस आसन से भर गया था. अब वो चोदते वक्त अपनी शयनयामिनी का चेहरा और उस पर आते जाते उत्तेजना के भावों को देखना चाहता था. ताई को अपने हाथों से करवट दे पीठ से बल पलटा और दोनों मोटी मोटी मांसल जाघों को अलग करते हुये उठा कर अपने कन्धों पर रख लिया. हजारों ब्लु फ़िल्मों को देखने का अनुभव अब जाकर काम आ रहा था. परन्तु एक बार फ़िर से ताई के अनुभवी हाथों की ज़रुरत आन पड़ी थी. पद्मा ने बिना कहे सुने ही तुरन्त लन्ड को पकड़ कर चूत का पावन रास्ता दिखाया और फ़िर अजय की कमर पर हाथ जमा एक ही धक्के में लन्ड को अपने अन्दर समा लिया. अजय ने ताई के सुन्दर मुखड़े की तरफ़ देखा. गोरा चिकना चेहरा, ताल के साथ दबाने मसलने से लाल हो रहे थिरकते बड़े बड़े गोरे उरोज और उनके बीच में से उछलता हार नाईट लैम्प की मद्दम रोशनी में दमक रहे थे. उत्तेजना से फ़ुदकती चूत में अजय का लन्ड अन्दर बाहर हो रहा था और ताई किसी रन्डी कि तरह चीखने को विवश थी. “हांआआआआ, हां बेटाआआआ” “उंफ़, आह, आह, हाय राम मर गई”. मन ही मन सोचने लगी की शायद अजय के साथ में भी जानवर हो गयी हूं. अपने ही हाथों से अपने भतीजे की पीठ, कुल्हों और टांगो पर ना जाने कितनी बार नाखून गड़ा दिये मैनें. अजय ने आगे झुक कर ताई के एक निपल को मुहं में दबा लिया. एक साथ चुदने और चुसे जाने से पद्मा खुद पर नियंत्रण खो बैठी. बड़े बड़े गोरे गुलाबी स्तनों के ऊपर अजय ने दांत गड़ा कर चाहे अपना हिसाब किताब पूरा कर लिया हो पर इससे तो पद्मा की चूत में कंपकंपी छूट गयी. पद्मा को अपनी चूत में हल्का सा बहाव महसूस हुआ. अगले ही क्षण वो एक ज्वालामुखी की तरह फ़ट पड़ी. ऐसा पानी छूटा की बस “ओह अजय, मेरे लाल, मैं ताई गई बेटा, आआआआहा”.

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