दीदी मैं तुम्हे और मम्मी को एक साथ चोदूंगा

स्कूल गेट के बाहर हर रोज घर ले जाने के लिये रिक्शावाला, मेरा इन्तेजार कर रहा था। मेरे बैठते ही रिक्शावाला तेजी के साथ दीदी के स्कूल की तरफ रवाना हो गया। ये मेरा हर रोज का रूटीन था। पहले रिक्शावाला मुझे लेता था, क्योंकि मेरे स्कूल की छुट्टी ११:३० बजे होती थी फिर दीदी को, जोकि १२वीं क्लास में पढती थी मैं दसवीं कक्षा का छात्र हुं। और उनके स्कूल की छुट्टी १२:०० बजे होती थी। कुछ ही देर में मैं दीदी के कोन्वेन्ट स्कूल के सामने पहुंच गया। अभी ११:४५ हुए थे, रिक्शावाला बगल की दुकान पर चाय पीने चला गया और मैने अपने बेग में से दो किताबे निकल ली। ये दोनो किताबे मेरे दोस्त सोहन ने मुझे दी थी। एक किताब में औरत-मर्द के नन्गे चित्र थे, और दुसरी किताब में कहानियां थी। कहानियों की किताब को मैने बाद में पढने का निश्चय किया, और पिक्चर वाली किताब को अपनी हिस्टरी बुक के बिच में रख कर वहीं रिक्शा पर देखने लगा। पिक्चर्स काफि सेक्षी और ईरोटीक थी। पिक्चर्स देखते-देखते मेरा लंड खडा होने लगा, और मेरे चेहरे का रंग उत्तेजना के मारे लाल हो गया। अपने खडे लंड को छुपाने के लिये, मैने अपना स्कूल बेग अपनी गोद में रख लिया और औरत-मर्द के चुदाई के विभिन्न आसनो में ली गई उन तसवीरों को देखने लगा। तभी स्कूल की घंटी बज उठी। मैने जल्दी से किताबों को मोड कर अपने स्कूल बेग में घुसाया, अपने लंड को अपनी पेन्ट में एडजस्ट किया और रिक्षे से उतर कर अपनी डार्लिंग बहन का इन्तेजार करने लगा।

ठीक बारह बजे मुझे मेरी प्यारी, सेक्षी गुडिया जैसी बहना रिक्शा की तरफ बढती हुई दिख गई। सच में कितनी खूबसुरत थी, मेरी बहन! उसको देखा कर, किसी भी मर्द की रीड की हड्डी में जरुर एक सिहरन उठ जाती होगी। मेरी बहन इतनी खूबसुरत और सेक्षी है कि, मैं उसके प्यार में पुरी तरह से डुब गया हुं। वो भी मुझ से उतना ही प्यार करती है। बाहर की दुनिया के लिये हम भले ही भाई-बहन है, मगर घर में अपने कमरे के अंदर हम दोनो भाई-बहन, एक-दुसरे के लिये पति-पत्नी से भी बढ कर है। आपको ये सुन कर शायद आश्चर्य लगेगा, मगर यही सच है। मेरी दीदी इस वक्त १९ साल की है, और मैं १८ साल का। हम दोनो अपने मम्मी-पापा के साथ, शहर से थोडी दूर उपनगरीय क्षेत्र में रहते है। मेरे पापा अभी ४० साल के, और मम्मी ३५ साल की है। हमारा एक मध्यम वर्गीय परिवार है। मेरी मां बहुत ही खूबसुरत महिला है, और पापा भी एक खूबसुरत व्यक्तित्व के मालिक है। दोनो ने लव-मैरीज की थी, इसलिये उन्हे परिवार से अलग हो कर रहना पड रहा है। जोकि हमारे लिये अच्छी बात है। पापा एक प्राईवेट बैंक में उंचे पद पर है, और मम्मी गवर्नमेन्ट जोब करती है। इस नये शहर में आकर, पापा ने जानबुझ कर शहर से बाहर शांति भरे माहोल में एक बंगलो खरीदा था। हमें स्कूल ले जाने और ले आने के लिये, उन्होने एक रिक्शा तय कर दिया था। घर की उपरी मंझिल पर, एक कमरे में मम्मी और पापा रहते थे और दुसरे कमरे में हम दोनो भाई-बहन। हमारे घर से स्कूल तक की दूरी, रिक्शा के द्वारा करिब ३० मिनट में तय हो जाती थी।

रिक्शा के पास आते ही बहन ने पुछा,
“और भाई, कैसे हो ? बहुत ज्यादा देर से इन्तेजार तो नही कर रहे ?”

मैने कहा,
“नही दीदी, ऐसा नही है।”,
और उसको देखते हुए मुस्कुराया।

मैने देखा कि, उसके गाल गुलाबी हो गये थे, और चेहरे पर शर्म की लाली और आंखो में वासना के डोरे तैर रहे थे। मैं सोचने लगा कि, मेरी प्यारी बहना के गाल गुलाबी और आंखे वासना से भरी भरी क्यों लग रही है ? क्या दीदी स्कूल में गरम हो गई थी ? मेरी बहन ने रिक्शा पर बैठने के लिये, अपने एक पैर को उपर उठाया। इस तरह करते हुए उसने बडे ही आकर्षक और छुपे हुए तरिके से, अपनी स्कर्ट को इस तरह से उठ जाने दिया कि, मुझे मेरी प्यारी बहन की मांसल, चिकनी और गोरी जांघे, उसकी पेन्टी तक दिख गई। एक क्षण में ही दीदी रिक्शा पर बैठ गई थी, पर मेरे बगल में शैतानी भरी मुस्कुराहट के साथ बैठ गई। मैं जानता था कि, यह उसका मुझे सताने के अनेक तरिको में से एक तरीका है। जब वो मेरे बगल में बैठी तो उसके महकते बदन से निकलती सुगंध ने मेरे नाक को भर दिया, और मैने एक गहरी सांस लेकर उस सुगंध को अपने अंदर और ज्यादा भरने की कोशिश की।

मेरी बहन मेरी उत्तेजना को समझ सकती थी।  उसने मुस्कुराते हुए पुछा,
“क्यों भाई, तुम्हारा चेहरा इस तरह से लाल क्यों हो रहा था, और तुम्हारी आंखे भी लाल हो रही है, क्या बात है ?”

मैने मुस्कुराते हुए उसकी ओर देखा और कहा,
“देखो दीदी, तुम तो मेरे दोस्त सोहन को तो जानती ही हो। उसने मुझे दो बहुत ही गर्म किताबे दी है। तुम्हारा इन्तेजार करते हुए, मैं उन्हे देखा रहा था और फिर तुम जब रिक्शे पर बैठ रही थी, तब तुमने मुझे अपनी पेन्टी और जांघे दिखा दी। अब जब कि तुम मेरे बगल में बैठी हो, तो तुम्हारे बदन से निकलने वाली खूश्बु मुझे पागल कर रही है।”मेरी बहन हंसने लगी। रिक्शावाले ने रिक्शे को आगे बढा दिया था और हम दोनो भाई-बहन धीमे स्वर में फुसफुसाते हुए आपस में बात कर रहे थे, ताकि हमारी आवाज रिक्शा वाला ना सुन सके।

मेरी बहन मेरे दाहिने तरफ बैठी थी, और अपनी दाहिने हाथ से उसने अपने किताबों को अपनी छाती से चिपकाया हुआ था। पथरीले रास्ते पर चलने के कारण रिक्शा बहुत हिल रहा था, और इसलिये अपना बैलेंस बनाने के लिये काजल दीदी ने अपने बांये हाथ को उपर उठा कर, रिक्शा का हुड पकड लिया। ऐसा करने से मेरी प्यारी बहन की चिकनी, मांसल कांख, (जोकि पसिने की पतली परत और उससे भीगे हुए उसके स्कूल ड्रेस के ब्लाउस से ढके हुए थे।)से निकलती हुई तीखी गंध सीधी मेरी नाक में आ कर समा गई। मेरी गोद में रखे मेरे बेग के निचे मेरा लंड अब पुरी तरह से खडा हो गया था, और ऐसा लग रहा था कि उसने मेरे बेग को अपने उपर उठा लिया है। यह मेरी बहन का एक और अनोखा अंदाज था मुझे सताने का, वो जानती थी कि मुझे उसकी कांख और उस से निकलने वाली गंध पागल बन देती है। उसके बदन की खुश्बु मुझे कभी भी उत्तेजित कर देती है।

उसने मुझे अपनी आंखो के कोनो से देखा, और सीट की पुश्त से अपनी पीठ को टीका कर आराम से बैठ गई। उसने अभी भी अपने बांये हाथ से हुड को पकड रख था, और अपनी किताबों को अपने छातियों से चिपकाये हुए थी। रिक्षा के हिलने के कारण उसकी किताबे, जोकि उसकी छातियों चिपकी हुई थी, बार-बार उसकी चुचियों पर रगड खा रही थी। जैसे ही रिक्शा एक मोड से मुडा तो मैने ऐसा नाटक किया कि, जैसे मैं लुढक रहा हुं और अपने चेहरे को उसकी मांसल कांखो में गडा दिया और लम्बी सांस खिंचते हुए उसकी कांखो को चाट लिया और हल्के से काट लिया। मेरी बहन के मुंह से एक आनंद भी चिख निकल गई और उसने मुझे जानवर कहा और बोली,
“देखो भाई, तुम एक जानवर की तरह से हरकत कर रहे हो। देखो, तुमने कैसे मेरी कांखो को चाट कर गुदगुदा दिया और काट लिया। मुझे दर्द हो रहा है, मुझे लगता है, तुम्हरे दोस्त की दी हुई कितबों ने तुम्हे कुछ ज्यादा ही गरम कर दिया है।”

“अगर तुम मुझे इस तरह से सताओगी तो तुम्हे यही मिलेगा, समझी मेरी प्यारी बेहना। वैसे डार्लिंग दीदी, मुझे एक बात बताओ कि, तुम आज कुछ ज्यादा ही चुलबुली और शैतान लग रही हो। ऐसा क्या हुआ है, आज ? क्या तुम भी मेरी तरह गरम हो गई हो, बताओना ?”

“तुम तो मेरी सहेली कनिका को जानते ही हो। उसने अपने घर पर कल रात हुई एक बहुत ही उत्तेजक घटना के बारे में मुझे बताया, जिसके कारण मैं बहुत गरम हो गई हुं। निचे से पुरी तरह से गीली हो गई हुं, और मेरी पेन्टी मेरे चूत के पानी से भीग गई है।”

“सच में डार्लिंग सिस, ऐसा क्या हुआ ? मुझे भी बताओना।”

“कल रात उसके घर पर उसके मामा, यानिकि उसकी मम्मी के छोटे भाई आये थे। उसे और उसकी मम्मी दोनो को सिनेमा दिखाने ले गये थे। सिनेमा होल में उसके मामा और मम्मी एक दुसरे से लिपटने चिपटने लगे थे। बाद में घर वापस लौटने पर, उसके छोटे मामा ने रात में उसकी मम्मी को खूब चोदा। भाई जब मेरी सहेली ने, अपने मामा और मम्मी की चुदाई की पुरी कहानी बताई तो, मेरी चूत बुरी तरह से पनिया गई और मैं बहुत उत्तेजित हो गई। कनिका ने मुझे बाद में बताया कि, उसके मामा ने बाद में उसे भी उसकी मम्मी के सामने ही नंगा कर के खूब चोदा। और उसकी मम्मी ने ये सब बहुत मजा लेकर देखा। तुम तो जानते ही हो भाई कि, उसके पापा विदेश गये हुए है।”“ओह दीदी, कनिका सचमुच में बहुत ही भाग्यशाली लडकी है। कनिका की, उसके मामा और मम्मी के साथ की गई चुदाई का अनुभव सच में बहुत उत्तेजक है। दीदी मैं भी सोचता हुं कि काश मैं तुम्हे और मम्मी को एक साथ, एक ही बिस्तर पर चोद पाता। इन किताबों को देखने के बाद, मैं भी बहुत गरम हो गया हुं। मेरी प्यारी बहेना रानी, चलो जल्दी से घर पर चलते है और एक दमदार चुदाई का आनंद उठाते है, क्यों ? मुझे लगता है तुम भी काफि गरम हो चुकी हो, अपनी प्यारी सहेली कनिका की कहानी को सुन कर।”

“हां भाई, तुम सच कह रहे हो। मैं स्कूल की छुट्टी का इन्तेजार कर रही थी। मेरी चूत खुजला रही है और मेरा पानी निकल रहा है।”

“ओह दीदी, तुम जब स्कूल से निकल रही थी, तभी मुझे लग रहा था कि तुम काफि गरम हो चुकी हो।”

“हां, मेरे प्यारे भाई, कनिका की बातो ने मुझे गरम कर दिया है। उसकी चुदक्कड मम्मी और चोदु मामा की कहानी ने, मेरी निचे की सहेली में आग लगा दी है। और मैं भी चाहती हुं कि, हम जल्दी से जल्दी घर पहुंच कर एक-दुसरे की बांहो में खो जायें।”

अभी हम घर से लगभग १०० मिटर की दूरी पर थे, तभी एक जोर की आवाज ने हमारा ध्यान भंग कर दिया। रिक्षा रुक गया था, और इसका एक टायर पंक्चर हो चुका था। आस-पास में कोई रिपेर करने वाली दुकान भी नही थी, और घर की दूरी भी अब ज्यादा नही थी। इसलिये हमने निर्णय किया कि, हम पैदल ही घर जाते है। रिक्षावाले ने अपने रिक्षे को दुसरी तरफ मोड लिया और हम दोनो भाई-बहन निचे उतर कर पैदल ही घर की ओर चल दिये।

कुछ दूर तक चलने के बाद, मेरी बहन ने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा,
“भाई, तुम मेरे पिछे-पिछे चलो, मेरे साथ नही।”

मेरी समझ में नही आया कि, मेरी डार्लिंग सिस्टर मुझे साथ चलने से क्यों मना कर रही है। मैने आश्चर्य से पुछा,
“तुम्हारे पिछे क्यों, दीदी ?”

मेरी बहन ने अपनी आंखो को नचाते हुए मुस्कुरा कर कहा,
“भाई, ऐसा करने में तुम्हार ही फायदा है। अगर तुम चाहो तो इसे आजमा कर देख शकते हो। बल्कि, मैं कहती हुं तुम्हे एक अनोखा मजा मिलेगा।”

मुझे अपनी बहन पर पुर भरोसा था। वो एक बहुत ही द्रढ निश्चय और पक्के विश्वास वाली लडकी थी, और हर चीज को नाप-तौल कर बोलती थी। अगर उसने मुझसे पिछे चलने के लिये कहा था तो, जरुर इसमे भी हंमेशा की तरह कोई अनोखा आनंद छुपा होगा। ऐसा सोच कर मैने अपनी प्यारी सिस्टर को आगे जाने दिया और खुद उसके पिछे, उस से कुछ फासले पर चलने लगा। पूरी सडक एकदम सुमसान थी, और एक-आध कुत्ते के अलावा कुछ भी नजर नही आ रहा था। शहर के इस भाग में मकान भी इक्का-दुक्का ही बने हुए थे, और एक साथ ना होकर इधर-उधर फैले हुए थे। मैं अपनी दीदी के पिछे धीरे-धीरे चल रहा था, और मेरी डार्लिंग बेहना भी धीरे-धीरे चल रही थी।

ओह डिअर, क्या नजारा था! मेरी प्यारी सिस्टर बहुत ही मादक अंदाज में अपने चुतडों को हिलाते हुए चल रही थी। अब मेरी समझ में आया, मुझे अपने पिछे आने के लिये कहने का राज। वो अपनी गांड को बहुत ही मस्त अदा के साथ हिलाते हुए चल रही थी। उसके दोनो गोल-मटोल चुतड, जिनको कि मैं बहुत बार देखा चुका था, उसकी घुटनो तक की स्कर्ट में हिंचकोले लेते हुए मचल रहे थे। मेरी बहन के चलने का यहां अंदाज मेरे लिये लंड खडा कर देने वाला था। उसके गांड नचा कर चलने के कारण उसके दोनो मस्त चुतड, इस तरह हिलते हुए घूम रहे थे कि, वो किसी मरे हुए आदमी के लंड को भी खडा कर सकते थे। मेरी बहन अपने मदमस्त चुतडों और गांड की खूबसुरती से अच्छी तरह से वाकिफ थी, और वो अक्सर इसक उपयोग मुझे उत्तेजित करने के लिये करती थी। उसकी गांड भी, मम्मी की गांड की तरह काफि खूबसुरत और जानमारु थी। दीदी को अच्छा लगता था, जब मैं उसकी गांड और चुतडों की तारीफ करता और उनसे प्यार करता था।घर तक पहुंचते-पहुंचते, उसकी गांड और चुतडों के इस मस्ताने खेल को देख कर, मेरे सब्र का बांध तूट गया। मुझे लग रहा था कि, मेरे लंड से अभी पानी निकल जायेगा। मैं जल्दी से उसके पास गया और बोला,
“सिस्टर, तुम तो मुझे मार ही दोगी। मुझ से अब बरदाश्त नही होता है। चलो, जल्दी से घर के अंदर।”

“भाई, क्या ये इतना बुरा है, जो तुम जल्दी से घर के अंदर जाना चाहते हो।”

“ओह दीदी, ये तुम तब जान जाओगी, जब हम अपने कमरे के अंदर होन्गे, जल्दी करो।”

जब हम घर पहुंचे तो मम्मी घर पर नही थी। जैसाकि आमतौर पर होता था, वो इस वक्त अपने ओफिस में होती थी। घर पर केवल खाना बनाने वाली आया थी। जिसने हमे बताया कि, खाना तैयार होने में कुछ समय लगेगा। हमे इससे कोई ऐतराज नही था, बल्कि हम दोनो भाई-बहन तो ऐसा ही चाहते थे। हमने उससे कह दिया कि, हम उपर अपने कमरे होम-वर्क कर रहे है, और वो हमे डिस्टर्ब ना करे। खाना बनाने के बाद, वो घर चली जाये। हम जल्दी से सीढीयों से चढ कर उपर जाने लगे। यहां भी दीदी ने एक लंड खडा कर देने वाली शैतानी की। उसने मुझे निचे ही रोक दिया और वो खुद अपने चुतडों को हिलाते हुए, बडे ही स्टाईलिश अंदाज में सीढीयां चढने लगी। जब वो काफि उपर पहुंच गई, तब उसने अपने बांये हाथ को पिछे ला कर, अपनी नेवी ब्लू कलर की स्कर्ट (जोकि उसके घुटनो तक ही थी) को बडे ही सेक्षी तरिके से थोडा सा उपर उठा दिया। ऐसा करने से पिछे से उसकी मांसल और मोटी जांघे पुरी तरह से नंगी हो गई और उसकी काले रंग की, नायलोन की, जालीदार पेन्टी का निचला भाग दिखने लगा। पेन्टी के साथ में, उनमे कसे हुए उसके मदमस्त चुतडों की झलक भी मुझे मिल गई। मेरी बहन की इस हरकत ने आग में घी का काम किया, और अब बरदाश्त करना मुश्किल हो चुका था। मैं तेजी से दो-दो सीढीयां फलान्गते हुए, सेकंडो में ही अपनी प्यारी दीदी के पास पहुंच गया और हम दोनो भाई-बहन हंसते हुए, अपने कमरे की ओर भागे।

हम दोनो के बदन में आग लगी हुई थी, और हम बेचैन थे कि, कब हम एक-दुसरे की बांहो में खो जाये। इसलिये हमने दरवाजे को धक्का दे कर खोला और अपने बेग और किताबों को एक तरफ फेंक कर, जूतों को खोल कर, सीधे ही एक-दुसरे की बांहो में समा गये। दरवाजा हालांकि हमने बंध कर दिया था, पर हम दोनो में से किसी को उसको लोक करने का ध्यान नही रहा। वासना की आग ने, हमारी सोचने-समझने की शक्ति शायद खतम कर दी थी। मैने जोर से अपनी प्यारी बहन को अपनी बांहो में कस लिया, और उसके पुरे चेहरे पर चुंबनो की बरसात कर दी। उसने भी मुझे अपनी बांहो में कस कर जकड लिया था, और उसकी कठोर चुचियां मेरी छाती में दब रही थी। उसकी चुचियों के खडे निप्पल की चुभन को, मैं अपने छाती पर महसूस कर रहा था। उसकी कमर और जांघे मेरी जांघो से सटी हुई थी, और मेरा खडा लंड मेरे पेन्ट के अंदर से ही उसकी स्कर्ट पर, ठीक उसकी बुर के उपर ठोकर मार रहा था। मेरी प्यारी दीदी अपनी चूत को मेरे खडे लंड पर, पेन्ट के उपर से रगड रही थी। हम दोनो के होंठ एक-दुसरे से जुडे हुए थे और मैं अपनी प्यारी बहन के पतले, रसीले होंठो को चुसते हुए, चुम रहा था। उसके होंठो को चुसते और काटते हुए, मैने अपनी जीभ को उसके मुंह में ठेल दिया था। उसके मुंह के अंदर जीभ को चारो तरफ घुमते हुए, उसकी जीभ से अपनी जीभ को लडाते हुए, दोनो भाई-बहन एक-दुसरे के बदन से खेल रहे थे। उसके हाथ मेरी पीठ पर से फिरते हुए, मेरे चुतडों और कमर को दबाते हुए, अपनी तरफ खींच रहे थे। मैं भी उसके चुतडों को दबाते हुए, उसकी गांड की दरार में स्कर्ट के उपर से ही अपनी उन्गली चला रहा था। कुछ देर तक इसी अवस्था में रहने के बाद मैने उसे छोड दिया, और वो बेड पर चली गई।

उसने अपने घुटनो को बेड के किनारे पर जमा दिया। फिर वो इस तरह से झुक गई, जैसे कि वो बेड की दुसरी तरफ कोई चीज खोज रही हो। अपने घुटनो को बेड पर जमने के बाद, मेरी प्यारी बेहना ने गरदन घुमा कर मेरी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए अपने स्कर्ट को उपर उठा दिया। इस प्रकार उसके खूबसुरत गोलाकार चुतड, जो कि नायलोन की एक जालीदार कसी हुई पेन्टी के अंदर कैद थे, दिखने लगे। उसकी चूत के उभार के उपर, उसकी पेन्टी एक दम कसी हुई थी और मैं देखा रहा था कि, चूत के उपर पेन्टी का जो भाग था, वो पुरी तरह से भीगा हुआ था। मैं दौड के उसके पास पहुंच गया और अपने चेहरे को, उसकी पेन्टी से ढकी हुई चूत और गांड के बिच में घुसा दिया। उसके बदन की खुश्बू, और उसकी चूत के पानी व पसिने की महक ने मेरा दिमाग घुमा दिया, और मैने बुर के रस से भीगी हुई उसकी पेन्टी को चाट लिया। वो आनंद से सिसकारीयां ले रही थी, और उसने मुझसे अपनी पेन्टी को निकाल देने का आग्रह किया।

मैने उसकी चूत और गांड को कस कर चुमा, उसके मांसल चुतडों को अपने दांतो से काटा और उसके बुर से निकलने वाली मादक गंध को एक लम्बी सांस लेकर अपने फेफडों में भर लिया। मेरा लंड पुरी तरह से खडा हो चुका था, और मैने अपने पेन्ट और अंडरवियर को खोल कर इसे आजादी दे दी। दीदी की मांसल, कंदील जांघो को अपने हाथो से कस कर पकडते हुए, मैं उसकी पेन्टी के उपर से ही उसकी चूत चाटने लगा। जालीदार पेन्टी से रीस-रीस कर बुर का पानी निकल रहा था। मैं पेन्टी के साथ ही उसकी बुर को अपने मुंह में भरते हुए, चुसते हुए, चाट रहा था। पेन्टी का बिच वाला भाग सीमट कर उसकी चूत और गांड की दरार में फस गया था, और मैं चूत चाटते हुए, उसकी गांड पर भी अपना मुंह मार रहा था। मेरे ऐसा करने से बहन की उत्तेजना बढ गई थी। वो अपनी गांड को नचाते हुए, अपनी चूत और चुतडों को मेरे चेहरे पर रगड रही थी। फिर मैने धीरे से अपनी बहन की पेन्टी को उतार दिया। उसके खूबसुरत चुतडों को देख कर मेरे लंड को जोरदार झटका लगा। उसके मैदे जैसे, गोरे चुतडों की बिच की खाई में भुरे रंग की अनछुई गांड, एकदम किसी फूल की कली की तरह दिख रही थी। जिसे शायद किसी विशेष अवसर पर (जैसाकि दीदी ने प्रोमिस किया था), मारने का मौका मुझे मिलने वाला था। उसकी गांड के निचे गुलाबी पंखुडियों वाली उसकी चिकनी चूत थी। दीदी की चूत के होंठ फडफडा रहे थे और भीगे हुए थे। मैने अपने हाथो को धीरे से उसके चुतडों और गांड की दरार में फिराया, फिर धीरे से हाथो को सरका कर उसकी बिना झांठो वाली चूत के छेद को अपनी उन्गलियों से कुरेदते हुए, सहलाने लगा। मेरी उन्गलियों पर उसकी चूत से निकला, उसका रस लग गया था। मैने उसे अपनी नाक के पास ले जा कर सुंघा, और फिर जीभ निकल कर चाट लिया। मेरी प्यारी बहन के मुंह लगातार सिसकारीयां निकल रही थी, और उसने मुझसे कहा,
“भाई, जैसाकि मैं समझती, अब तुमने जी भर कर मेरे चुतडों और चूत को देखा लिया है। इसलिये तुम्हे अपना काम शुरु करने में देर नही करनी चाहिए।”

मैं भी अब ज्यादा देर नही करना चाहता था, और झुक कर मैने उसकी चूत के होंठो पर अपने होंठो को जमा दिया। फिर अपनी जीभ निकाल कर उसकी चूत को चाटना शुरु कर दिया। उसकी बुर का रस नमकीन-सा था। मैने उसकी बुर के कांपते हुए होंठो को, अपनी उन्गलियों से खोल दिया, और अपनी जीभ को कडा और नुकिला बना कर, चूत के छेद में घुसा कर उसके भगनशे को खोजने लगा।उसके छोटे-से भगनशे को खोजने में मुझे ज्यादा वक्त नही लगा। मैने उसे अपने होंठो के बिच दबा लिया, और अपनी जीभ से उसको छेडने लगा। दीदी ने आनंद और मजे से सिसकारीयां भरते हुए, अपनी गांड को नचाते हुए, एक बहुत जोर का धक्का अपनी चूत से मेरे मुंह की ओर मारा। ऐसा लग रहा था, जैसे मेरी जीभ को वो अपनी चूत में निगल लेना चाहती हो। वो बहुत तेज सिसकारीयां ले रही थी, और शायद उत्तेजना की पराकाष्ठा तक पहुंच चुकी थी। मैं उसके भगनशे को अपने होंठो के बिच दबा कर चुसते हुए, अपनी जीभ को अब उसके पेशाब करने वाले छेद में भी घुमा रहा था। उसके पेशाब की तीव्र गंध ने मुझे पागल बना दिया था। मैने अपनी दो उन्गलियों की सहायता से, उसके पेशाब करने वाले छेद को थोडा फैला दिया। फिर अपनी जीभ को उसमे तेजी से नचाने लगा। मुजे ऐसा करने में मजा आ रहा था, और दीदी भी अपनी गांड को नचाते हुए सिसकारीयां ले रही थी।

“ओह भाई, तुम बहुत अच्छा कर रहे हो। डार्लिंग ब्रधर, इसी प्रकार से अपनी बहन की गरमाई हुई बुर को चाटो, हां,,, हां भाई,,,, मेरे पेशाब करने वाले छेद को भी चाटो और चुसो। मुझे बहुत मजा आ रहा है, और मुझे लगता है, शायद मेरा पेशाब निकल जायेगा। ओह भाई, तुम इस बात का ख्याल रखना कि, कहीं तुम मेरे मुत ही नही पी जाओ।”

मैने दीदी की चूत पर से, अपने मुंह को एक पल के लिये हटाते हुए कहा,
“ओह सिस्टर, तुम्हारे पेशाब और चूत की खूश्बु ने मुझे पागल बना दिया है। ऐसा लगता है कि, मैने तुम्हारी मुत की एक-दो बुंद पी भी ली है, और मैं अपने आप को इसका और ज्यादा स्वाद लेने से नही रोक पा रहा हुं। हाये दीदी, सच में तुम्हारे बदन से निकलने वाली हर चीज बहुत ही स्वादिष्ट है,,,,, ओह,,,,।”“ओह भाई ! लगता है, तुम कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो चुके हो, और मुझे ये बहुत पसंद है। तुम्हारा इस तरह से मुझे प्यार करना, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, प्यारे भाई। पर अगर तुम इसी तरह से मेरी चूत और पेशाब वाले छेद को चुसोगे, तो मुझे लगता है कि मेरा पेशाब निकल जायेगा। और मैं नही चाहती कि, हमारे कपडे और बिस्तर खराब हो,,,,,,,, ओह राजा, मेरे प्यारे सनम,,,,,,,तुम इस बात का ख्याल रखते हुए मुझे प्यार करो।”

मैं अभी तक पेशाब वाले छेद को चिडोर-चिडोर कर चाट रहा था। मगर दीदी के बोलने पर मैने उसको छोड कर, अपना ध्यान उसकी चूत और भगनशे पर लगा दिया। उसके भगनशे को अपने होंठो से छेडते हुए, उसकी पनियाई हुई बुर के कसे हुए छेद में, अपनी जीभ को नुकिला करके पेलने लगा। अपने हाथो से उसके चुतडों और गांड के छेद को सहलाते हुए, मैं उसकी गांड के छेद को अपने अंगुठे से छेडने लगा। मैं अपनी जीभ को कडा कर के उसकी चूत में तेजी के साथ पेल रहा था, और जीभ को बुर के अंदर पुरा ले जाकर उसे घुमा रहा था। दीदी भी अपने चुतडों को तेजी के साथ नचाते हुए, अपनी गांड को मेरी जीभ पर धकेल रही थी, और मैं उसकी बुर को चोद रहा था।

हालांकि, इस समय मेरा दिल अपनी प्यारी बहन की गांड के भुरे रंग के छेद को चाटने का कर रहा था। परंतु मैने देखा कि, दीदी अब उत्तेजना की सीमा को पार कर चुकी थी, शायद। वो अब अपने चुतडों नचाते हुए बहुत तेज सिसकारीयां ले रही थी।

“,,,,,भाई, तुम मुझे पागल बना रहे हो,,,,,,ओह,,,,डार्लिंग ब्रधर हां ऐसे,,,,, ही,,,,, ऐसे ही, चुसो मेरी चूत को,,,,,,,मेरी बुर के होंठो को अपने मुंह में भर कर,,,, ऐसे ही चाटो राजा,,,,,,ओह, प्यारे,,,,, बहुत अच्छा कर रहे हो तुम। इसी प्रकार से मेरी चूत के छेद में अपनी जीभ को पेलो, और अपने मुंह से चोद दो, मुझे। हाय, मेरे चोदु भाई,,,,, मेरी चूत के होंठो को काट लो और उन्हे काटते हुए अपनी जीभ को मेरी बुर में पेलो।”

चूत के रस को चाटते हुए और बुर में जीभ पेलते हुए, मैं उसके भगनशे को भी छेड देता था। मेरे ऐसा करने पर वो अपनी गांड को और ज्यादा तेजी के साथ लहराने लगती थी। दीदी अब पुरी उत्तेजना में आ चुकी थी। मैने अपने पंजो के बिच में उसके दोनो छुतडों को दबाया हुआ था, ताकि मुझे उसकी प्यारी चूत को अपने जीभ से चोदने में परेशानी ना हो। मैं अपनी नुकिली जीभ को उसकी चूत के अंदर गहराई तक पेल कर, घुमा रहा था।

“ओह भाआआईईईई,,,,,, ऐसे ही प्यारे, मेरे डार्लिंग ब्रधर,,,,, ऐसे ही। ओह,,,, खा जाओ मेरी चूत को, चुस लो इसका सारा रस,,,, प्यारे!!!! ओह,,, चोदु,,,, मेरे भगनशे को ऐसे ही छेडो और कस कर अपनी जीभ को पेलो,,,,,,,, ओओओओह्ह्ह्ह,,, सीईईईईईई मेरे चुदक्कड बालम,,,, मेरा अब निकलने ही वाला,,,, ओह…मैं गई,,,,,,, गईईईईई,,,,,,,, गई राआज्जाआआ,,,,, ओह बुरचोदु,,,,,,,,देखो मेरा निकल रहा है,,,,,,,,, हायेएएए,,, पी जाओ,,,,,, इसे!!!!! ओह,,,, पी,,,,, जाओ मेरी चूत से निकले पानी को,,,,,,,ईईईईईशीशीशीश्श्शीईई,,,, भाई, मेरी चूत से निकले स्वादिष्ट पानी को पीईईई जाआआओओओ प्याआआरेएएएए,,,,,”,
कहते हुए दीदी अपनी चूत झाडने लगी।

उसकी मखमली चूत से गाढा द्रव्य निकलने लगा। वो मेरे चेहरे को अपनी चूत और चुतडों के बिच दबाये हुए, बिस्तर पर अपनी गांड को नचाते हुए गीर गई। उसकी चूत अभी भी फडफडा रही थी, और उसकी गांड में भी कंपन हो रहा था। मैने उसकी चूत से निकले हुए रस की एक-एक बुंद को चाट लिया, और अपने सिर को उसकी मांसल जांघो के बिच से निकाल लिया।

मेरी बहन बिस्तर पर पेट के बल लेटी हुई थी। कमर के निचे वो पुरी नंगी थी। झड जाने के कारण उसकी आंखे बंध थी, और उसके गुलाबी होंठ हल्के-से खुले हुए थे। वो बहुत गहरी सांसे ले रही थी। उसने अपने एक पैर को घुटनो के पास से मोडा हुआ था और दुसरे पैर को फैलाया हुआ था। उसके लेटने की ये स्थिति बहुत ही कामुक थी। इस स्थिति में उसकी सुनहरी, गुलाबी चूत, गांड का भुरे रंग का छेद और उसके गुदाज चुतड मेरी आंखो के सामने खुले पडे थे और मुझे अपनी ओर खींच रहे थे। मेरा खडा लौडा, अब दर्द करने लगा था। मेरे लंड का सुपडा, एक लाल टमाटर के जैसा दिख रहा था। मेरे लंड को किसी छेद की सख्त जुरुरत महसूस हो रही थी। मैं गहरी सांसे खींचता हुआ, अपनी उत्तेजना पर काबु पाने की कोशिश कर रहा था। मेरे हाथ मेरी दीदी के नंगे चुतडों के साथ खेलने के लिये बेताब हो रहे थे। मैं अपने अंडकोषो को सहलाते हुए, सुपाडे के छेद पर जमा हुई पानी की बुंदो को देखते हुए, अपनी प्यारी नंगी बहन के बगल में बेड पर बैठ गया। मेरे बेड पर बैठते ही दीदी ने अपनी आंखे खोल दी। ऐसा लग रहा था, जैसे वो एक बहुत ही गहरी निंद से जागी हो। जब उसने मुझे और मेरे खडे लंड को देखा तो, जैसे उसे सब कुछ याद आ गया और उसने अपने होंठो पर जीभ फेरते हुए, मेरे खडे लंड को अपने हाथो में भर लिया और बोली,
“ओह प्यारे, सच में तुमने मुझे बहुत सुख दिया है। ओह भाई, तुमने जो किया है, वो सच में बहुत खुशनुमा था। मैं बहुत दिनो के बाद इस प्रकार से झडी हुं।,,,,, ओह प्यारे, तुम्हारा लंड तो एकदम खडा है।,,,,,,ओह,,, मुझे ध्यान ही नही रहा कि, मेरे प्यारे भाई का डण्डा खडा होगा और उसे भी एक छेद की जुरूरत होगी। ओह डार्लिंग आओ,,,,,,,, जल्दी आओ, तुम्हारे लंड में खुजली हो रही होगी। मैं भी तैयार हुं,,,,, तुम्हारा खडा लंड देख कर मुझे भी उत्तेजना हो रही है, और मेरी बुर भी अब खुजलाने लगी है।”

“ऐसा नही है दीदी, अगर इस समय तुम्हारी ईच्छा नही है तो कोई बात नही है। मैं अपने लंड को हाथ से झाड लुन्गा।”

“नही भाई, तुम अपनी बहन के होते हुए ऐसा कभी नही कर सकते, अगर कुछ करना होगा तो मैं करुन्गी। भाई, मैं इतनी स्वार्थी नही हुं कि, अपने प्यारे सगे भाई को ऐसे तडपता हुआ छोड दुं। आओ भाई, चढ जाओ अपनी बहन पर और जल्दी से चोदो,,,,,,,,,, चलो, जल्दी से चुदाई का खेल शुरु करें।”

मैने उसके होंठो पर एक जोरदार चुंबन जड दिया। और उसके मांसल, मलाईदार चुतडों को अपने हाथो से मसलते हुए, उससे कहा,
“दीदी, तुम फिर से घुटनो के बल हो जाओ, मैं तुम्हे पिछे से चोदना चाहता हुं।”मेरी बात सुन कर मेरी प्यारी सिस्टरने बिना एक पल गंवाये, फिर से वही पोजीसन बना ली। उसने घुटनो के बल होकर, अपनी गरदन को पिछे घुमा कर मुस्कुराते हुए, मुझे अपनी बडी-बडी आंखो को नचाते हुए आमंत्रण दिया। उसने अपने पैरों को फैला कर, अपने खजाने को मेरे लिये पुरा खोल दिया। मैने फिर से अपने चेहरे को उसकी जांघो के बिच घुसा दिया, और उसकी चूत को चाटने लगा। चूत चाटते हुए अपनी जीभ को उपर की तरफ ले गया, और उसकी खूबसुरत और मांसल गांड की दरार में अपनी जीभ को घुसा दिया और जीभ निकाल कर उसकी गांड को चाटने लगा। मैने अपने दोनो हाथो से उसके चुतडों फैला कर, उसकी गांड के छेद को चौडा कर दिया। फिर अपनी जीभ को कडा करके, उसकी गांड में धकेलने की कोशिश करने लगा। उसकी गांड बहुत टाईट थी और इसे मैं अपनी जीभ से नही चोद पाया। मगर मैं उसकी गांड को तब तक चाटता रहा, जब तक कि, दीदी चिल्लाने नही लगी और सिसयाते हुए मुझे बोलने लगी,
“ओह ब्रधर, अब देर मत करो। मैं अब गरम हो गई हुं। अब जल्दी से अपनी प्यारी बहन को चोद दो, और अपनी प्यास बुझा लो। मैं समझती हुं, अब हमारा ज्यादा देर करना उचित नही होगा। ओह भाई, जल्दी करो और अपने लंड को मेरी चूत में पेल दो।”

मैने अपने खडे लंड को उसकी गीली चूत के छेद पर लगा दिया। फिर एक जोरदार धक्के के साथ अपना पुर लंड उसकी बुर में, एक ही बार में पेल दिया। ओह, क्या अदभुत अहसास था, यह ! इसका वर्णन शब्दो में करना संभव नही है। उसकी रस से भरी, पनियाई हुई चूत ने, मेरे लौडे को अपनी गरम आगोश में ले लिया। उसकी मखमली चूत ने मेरे लंड को पुरी तरह से कस लिया। मैं धक्के लगाने लगा। मेरी प्यारी बहन ने भी अपनी गांड को पिछे की तरफ धकेलते हुए, मेरे लंड को अपनी चूत में लेना शुरु कर दिया। हम दोनो भाई-बहन, अब पुरी तरह से मदहोश होकर मजे की दुनिया में उतर चुके थे। मैं आगे झुक कर, उसकी कांख की तरफ से अपने हाथ को बाहर निकाल कर उसकी गुदाज चुचियों को, उसके ब्लाउस के उपर से ही दबाने लगा। उसकी चुचियां एकदम कठोर हो गई थी। उसकी ठोस चुचियों को दबाते हुए मैं अब तेजी से धक्के लगाने लगा था, और मेरी दीदी के मुंह से सिसकारीयां फुटने लगी थी। वो सिसकाते हुए बोल रही थी,
“ओह भाई, ऐसे ही, ऐसे ही चोदो, हां,,,, हां, इसी तरह से जोर-जोर से धक्का लगाओ, भाई। इसी प्रकार से चोदो, मुझे।”“आह, शीईईईई, दीदी तुम्हारी चूत कितनी टाईट और गरम है। ओह,,, मेरी प्यारी बहना,,,, लो अपनी चूत में मेरे लंड को,,,, ऐसे ही लो। देखो,,, ये लो मेरा लंड अपनी चूत में,,,,,, ये लो,,,,,,,, फिर से लो,,,,,,, क्या, एक और दुं ?? ले लो,,,, मेरी रानी बहन,,,,, हाये दीदी।”

मैं उसकी चूत की चुदाई, अब पुरी ताकत और तेजी के साथ कर रहा था। हम दोनो की उत्तेजना बढती जा रही थी। ऐसा लग रहा था कि, किसी भी पल मेरे लौडे से गरम लावा निकल पडेगा।

“ओह चोदु,,,,, चोदो,,,,,, और जोर से चोदो। ओह, कस कर मारो,,,,,, और जोर लगा कर धक्का मारो। ओह,,,, मेरा निकल जाआयेएएगाआ,,,,, उईईईईई!!!!!! कुत्तेएएए, और जोर से चोद, मुझे। बडी बहन की बुर चोदने वाले,,,, चोदु हरामी,,,, और जोर से मारो, अपना पुरा लंड मेरी चूत में घुसा कर चोद,,,,, कुतिया के बच्चे,,,,,,,,श्श्शीशीशीईईईईईई,,,,, मेरा निकल जायेगाआआ,,,,,,”

मैं अब और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। मैं अपने लंड को पुरा बाहर निकल कर, फिर से उसकी गीली चूत में पेल देता। दीदी की चुचियों को दबाते हुए, उसके चुतडों पर हाथ फेरते और मसलते हुए, मैं बहुत तेजी के साथ दीदी को चोद रहा था। मेरी बहन, अब किसी कुतिया की तरह कुकिया रही थी। और वो अपने चुतडों को नचा-नचा कर, आगे-पिछे धकेलते हुए, मेरे लंड को अपनी चूत में लेते हुए, सिसिया रही थी,
“ओह चोदो, मेरे चोदु भाई, और जोर से चोदो। ओह,,,,,, मेरे चुदक्कड बलमा, श्श्शीशीशीशीईईईई,,,,,,, हरामजादे,,,,,,, और जोर से मारो मेरी चूत को,,,, ओह,,,, ओह,,,,,ईईईस्स्स,,,,आआह्ह,,,, बहनचोद,,,,, मेरा अब निकल रहा हैएएएए,,,, ओओओओह्ह्ह,,, ,,, श्श्शीशीशीशीईईईई,,,,,!!!!!”,
कहते हुए, अपने दांतो को पीसते हुए, और चुतडों को उचकाते हुए, वो झडने लगी।

मैने भी झडने ही वाला था। इसलिये चिल्ला कर उसको बोला,
“ओह कुतिया,,,,, लंडखोर,,,, साआल्ली,,, मेरे लिये रुको। मेरा भी अब निकलने वाला,,,,,,,, ओह,, रानी,,,, मेरे लंड का पानी भी,,,,, अपनी बुर में लोओओओ,,, ओह,,, लो,,, लो,,,, ओह ऊउफ्फ्फ,,,,,,,”
ठीक उसी समय मुझे ऐसा लगा, जैसे मैं किसी के जोर से बोलने और चिल्लाने की आवाज सुन रहा हुं। जब मैने दरवाजे की तरफ मुड कर देखा तो, ओह,,, ये मैं क्या देखा रहा हुं !!!!!! मेरे अंदर की सांस, अंदर ही रह गई। सामने दरवाजे पर मेरी मम्मी खडी थी। उसका चेहरा गुस्से से लाल हो रहा था। वो क्रोध में अपने होंठो को काट रही थी, और अपने कुल्हे पर अपने हाथ रख कर चिल्ला रही थी। उसका चिल्लाना तो, एक पल के लिये हम दोनो भाई-बहन को कुछ समझ में नही आया। थोडी देर बाद हमे उसकी स्पष्ट आवाज सुनाई दे रही थी।

“ओह,,,!!! तुम दोनो बिलकुल अच्छे बच्चे नही हो, पापियों। खडे हो जाओ। क्या मैने तुम्हे यही शिक्षा दी थी ? ओह, तुमने मेरा दिमाग खराब कर दिया। एक भाई-बहन हो कर,,,,,,”,
इसके आगे वो कुछ भी नही बोल पाई।मैं एकदम भोंचक्का रह गया था, और शिघ्रता से अपने लंड को अपनी बहन की चूत में से निकाल लिया। मेरे लंड का पानी अभी नही निकला था। वो निकलने ही वाला था, पर बिच में मम्मी के आ जाने के कारण रुक गया था। इसलिये मेरा लंड दर्द कर रहा था। मेरे दिमाग को शायद, अभी भी हमारी पुरी स्थिति की गंभिरता का अहसास नही हुआ था। इसलिये मेरा लंड अभी भी खडा और उत्तेजित था। फिर अचानक से एक झटके के साथ, उसमे से एक तेज धार के साथ पानी निकल गया। मेरे विर्य की कुछ बुंदे उछल कर सीधी मम्मी के उपर, उसकी साडी और पेट पर जा गीरी। ये सब कुछ एक क्षण में हो गया था।

झड जाने के बाद, मेरे सामने खडी मम्मी को देख कर, मेरे दिमाग में डर हावी हो गया और मैं डर कर अपनी पेन्ट को खोजने लगा। मैं अपनी कमर के निचे पुरी तरह से नंगा था। मेरा लंड अब पानी छोड कर लटक गया था। मेरी बहन तेजी के साथ बिस्तर पर से उतर गई और अपनी स्कर्ट को उसने चुतडों से निचे गीरा लिया था। मेरी मम्मी कुछ नही बोल पाई और मेरे विर्य को अपने साडी और पेट पर से साफ करने लगी।“छीईई,,,,,,छीईई,,,”,
कहते हुए, वो कमरे से बाहर बिना कोई शब्द बोले, हम दोनो को अकेला छोड कर, निकल गई।

हम दोनो एकदम अचंबित हो कर कुछ देर वहीं पर खडे रहे, फिर हमने अपने कपडे पहन लिये। हम दोनो के अंदर इतनी हिम्मत नही थी कि, हम कमरे से बाहर जा सके। मेरी बहन बहुत उदास थी और मैं बहुत डरा हुआ था। दीदी ने कहा,
“चलो जो हुआ, सो हुआ। अब हमारे हाथ में कुछ भी नही है। हम इस स्थिति का सामना करते है।”

करीब एक घंटे के बाद हम दोनो निचे गये, और फ्रेश हो कर अपना लंच लिया। हम दोनो ठीक तरह से खा भी नही पा रहे थे, क्योंकि हमारे दिल में डर भरा हुआ था। हम नही जानते थे कि, हमारे साथ क्या होने वाला है ? फिर हम अपने कमरे में आ गये, मम्मी अपने कमरे में ही थी। हमने दोनो थोडी देर तक पढाई की। फिर निचे उतर कर नौकरानी से मम्मी के बारे में पुछा, तो उसने बताया कि मम्मी अपने कमरे में है, और उन्होने कहा है कि, उन्हे डिस्टर्ब न किया जाये। तभी कोल-बेल बज उठी। दरवाजे पर डैडी के ओफिस का प्युन था। जोकि, पापा का सूटकेस लेने के लिये आया था। पापा शायद चार दिनो के लिये बाहर जा रहे थे। मैने हिम्मत कर के मम्मी के कमरे का दरवाजा खटखटाया, और उसे इस बारे में बताया। मम्मी ने सामने रखे हुए एक सूटकेस की ओर इशारा किया। मैने चुपचाप उस सूटकेस को उठा लिया, और बाहर आ कर उसे प्युन को दे दिया। फिर हम दोनो भाई-बहन ने डिनर लिया, और दीदी वापस कमरे में चली गई। मैं हिम्मत कर के मम्मी के कमरे की ओर चला गया। दरवाजा खुला था और मैं सीधा मम्मी के पास इस तरह से गया, जैसे कुछ हुआ ही नही है और पुछा क्या उसने डिनर कर लिया है ? क्योंकि नौकरानी अब घर जाना चाहती है। उसने कोई जवाब नही दिया और मैने बाहर आ कर नौकरानी को घर जाने के लिये कह दिया।हम दोनो भाई-बहन, अब भी अपने अंदर काफि ग्लानी महसूस कर रहे थे। हमने एक-दुसरे से कोई ज्यादा बातचीत भी नही की। चूंकि हुमारा कमरा एक था, इसलिये हम दोनो चुप-चाप आ कर सो गये। बेड के एक छोर पर वो और दुसरे छोर पर मैं लेट गया। हम दोनो ने एक-दुसरे को छुआ भी नही। दरवाजा भी खुला हुआ ही था। रात के १२ बजे के आस-पास अचानक मेरी नींद खुली। मुझे प्यास लगी थी। मुझे महसूस हुआ कि, मेरी कमर के उपर कोई भरी चीज रखी है। मैने सोचा, हो सकता है, ये मेरी दीदी का पैर हो। मगर जब मैने उसे अपनी कमर के उपर से हटाने की कोशिश की, तो मुझे भारी महसूस हुआ। ऐसा लगा जैसे ये मेरी बहन के पैर नही है। मेरी आंखे खुल गई, और कमरे की मध्यम रोशनी में मैने जो देखा, उसने मेरे दिल की धडकने बढा दी। मेरा तो गला ही सुख गया।

ओह, ये मैं क्या देखा रहा था ? मेरे और मेरी दीदी के बिच में हमारी मम्मी सोई हुई थी। एक पल के लिये तो मेरी समझ में कुछ नही आया, मगर फिर मैं टोईलेट जाने के लिये बेड से निचे उतर गया। मैं एक य दो कदम ही आगे बढा पाया था कि, मम्मी की फुसफुसाहट भरी आवाज सुनाई दी,
“कहां जा रहे हो, तुम ?”

“ओह, मम्मी तुम जाग रही हो ? मैं ये नही जानता था। अ,,अ,, मैं टोईलेट जा रहा हुं।”

“ठीक है। जरा इन्तजार करो, मुझे भी वहीं जाना है।”,
कहते हुए, वो भी बेड से निचे उतर गई।

जब वो खडी हो गई, तो मैने ने उसे पुरी तरह से देखा। उसके बाल बिखरे हुए थे, उसने केवल ब्लाउस और पेटिकोट पहन रखा था। उसका गोरा चेहरा थोडा फुला हुआ-सा लग रहा था, मगर फिर भी उसकी सुंदरता में कोई कमी नही आई थी। वो गजब की जानमारु लग रही थी। जहां मैं खडा था, वहां तक आने के लिये उसने कदम बढाये। जब वो चलने लगी तो, उसके कदम डगमगा गये और उसके मुंह से हल्की-हल्की बदबु भी आने लगी थी। मुझे लग रहा था, शायद मम्मी ने घर में डैडी की शराब में से कुछ पी ली था।

जो भी हो, उसने मेरे नजदिक आ कर, अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया और आगे बढते हुए मुझे अपने से सटा लिया। मैने भी अपना एक हाथ उसकी कमर में डाल दिया। मेरे ऐसा करने से मेरे बदन में एक हल्की सिहरन-सी हुई, और इस बात से मैं इनकार नही कर सकता था। मगर दोपहर की घटनाओं की रोशनी में, इस समय इस तरह का कोई भी ख्याल, मैं अपने दिमाग से कोशो दूर झटक देना चाहता था। टोईलेट की तरफ जाते हुए, मम्मी का बदन मेरे बदन से रगड खा रहा था और उसकी एक चुंची मेरे चेहरे पर दबाव डाल रही थी। इन सब कारणो से मेरे हाथ एकदम ठण्डे हो गये थे, और कमर से निचे खिसक कर उसके चुतडों पर चला गया थाटोईलेट में पहुंच कर मम्मी ने लाईट ओन कर दी। तेज चमकदार रोशनी में वो बहुत खूबसुरत रही थी। गोरा चेहरा, तीखे नाक-नक्श, बिखरे बाल, बडी-बडी नशे के कारण गुलाबी हुई आंखे, और थोडा-सा फुला हुआ चेहरा, कुल मिला के उसे खूबसुरत ही बना रहे थे। उसकी सांसे बहुत तेज चल रही थी, जिसके कारण उसकी ब्लाउस में कैद चुचियां, तेजी से उठ-बैठ रही थी। उसने मेरी ओर देखा और मुस्कुराते हुए मुझसे पेशाब करने के लिये कहा। मैने थोडा हिचकिचाते हुए मम्मी कि ओर देखा तो, वो मुस्कुराते हुए आगे बढी और मेरे पिछे आ कर, मुझे पिछे से अपनी बांहो में भर लिया। फिर मेरे पजामे के नाडे को खोल कर, उसे नीचे कर, मुझे पेशाब करने के लिये कहा। मुझे बहुत शरम आ रही थी, मगर साथ ही साथ मैं धीरे-धीरे उत्तेजित भी हो रहा था। क्योंकि, मम्मी का मांसल बदन मेरी पीठ से चिपका हुआ था।

मुझे महसूस हुआ कि उसकी चुचियां, मेरी पीठ से चिपकी हुई है और मेरे चुतड उसकी मांसल जांघो के बिच के गड्ढे में, उसकी चूत के उपर चिपके हुए है। मेरा लंड पुरी तरह से खडा हो गया और मेरे लिये पेशाब करना बहुत मुश्किल हो चुका था। मम्मी ने अपनी गरदन को मेरे कंधे पर रखते हुए, अपने गाल को मेरे चेहरे से सटा कर, रगडते हुए बोली,
“ओह लडके, क्या तुम्हे पेशाब नही आ रहा है ? पेशाब करो, दिखाओ मुझे तुम कैसे पेशाब करते हो ? मैने तुम्हे चोदते हुए तो देखा ही है।”

मेरे पास इसका कोई जवाब नही था और मेरा लंड अब अपनी पुरी औकात पर आ गया था। यानि कि, ७ इंच लम्बा हो गया था। मेरे लंड को देखते हुए उसने कहा,
“ओह, कितना बडा डण्डा है, तुम्हारा ? तुम्हारी उमर के लिये तो ये बहुत बडा है, लेकिन बहुत अच्छा भी है।”

इतना कहते हुए उसने अपने मुंह से चटकारे की आवाज निकाली। जैसेकि खाने की कोई बहुत स्वादिष्ट चीज, उसे मिल गई हो। उसने मेरे लंड को अपने हाथो से पकड लिया। मैने इससे बचने की कोशिश की, मगर कोई फायदा नही हुआ। जब मैने उसकी ओर पलट कर देखा तो, उसने सीधा मेरे होंठो पर अपने गरम मुलायम होंठ रख दिये और अपनी जीभ को मेरे मुंह में पेलने की कोशिश की। मुझे उसके मुंह से शराब का टेस्ट महसूस हुआ। मम्मी मेरे लंड को थोडी देर तक सहलाती रही, फिर बोली,
“ठीक है, अगर तुम पेशाब नही करना चाहते तो कोई बात नही। मुझे पेशाब आ रही है, और मैं सोचती हुं मुझे कर ही लेना चाहिए।”इतना कहने के बाद वो मेरे आगे आई और अपने पेटीकोट को अपने चुतडों के उपर उठा कर, घुटनो को मोड कर, वहीं पर बैठ गई। ओह, कितना मनोहर द्रश्य मेरी आंखो के सामने था ! ओह प्यारो, उसके खूबसुरत गोलाकार चुतड, जोकि सफेद संगेमरमर के जैसे थे और भूरे रंग की खाई के द्वारा अलग-अलग बटें हुए थे, जिनके बिच में सिकुडा हुआ, छोटा-सा भूरे रंग का छेद था। ये सब देखते ही मेरी आंखे फैल गई। मेरा मुंह और गला दोनो ही सुख गये, जब मैने उसकी चूत को पिछे से देखा। उसकी पेशाब करने की आवाज ने मुझे और भी ज्यादा उत्तेजित कर दिया था। पेशाब की तीखी गंध ने मेरे नथुनो को भर दिया और मेरे बदन में दौडते खून ने मेरे चेहरे पर आ कर उसका रंग बदल दिया। थोडी देर तक पेशाब करने और मुझे इस खूबसुरत, दिल को घायल कर देने वाला नजारा दिखाने के बाद, वो उठी और पेटीकोट को निचे कर, मेरी ओर देखते हुए प्यार से मुस्कुराते हुए बोली,
“बेटे, अगर तुम्हे पेशाब लगी है तो तुम कर लो। मैं अपने कमरे में जा रही हुं और वहीं तुम्हारा इन्तेजार करुन्गी।”,
कह कर वो बाथरूम से निकल गई।

मैं थोडी देर तक वहीं खडा सोचता रहा। इस बिच मेरा लंड थोडा ढीला हो गया था, इसलिये मैने भी पेशाब कर लिया। बाथरूम से निकल कर जब मैं मम्मी के कमरे में पहुंचा, तो मैने देखा कि डबल बेड पर मम्मी तकिये के सहारे पीठ टीका कर बैठी थी। उसके सामने एक छोटी टेबल पर ग्लास में ड्रींक रखा हुआ था। उसने इस समय अपने बालो को संवार लिया था। उसका पेटीकोट, उसकी नाभि से निचे बंधा हुआ था। जिसके कारण उसका गोरा, मांसल पेट और नाभि दिख रहे थे। उसके ब्लाउस का आगे का एक बटन खुला हुआ था, जिसके कारण उसकी चुचियां एकदम बाहर की ओर नीकली हुई दिख रही थी। मैं धीमे कदमो से चलते हुए उसके पास पहुंचा। उसने मुझे बेड पर बैठने का इशारा करते हुए पुछा,
“क्या तुम ड्रींक लेना पसंद करोगे ?”

मैं कुछ नही बोला, और चुपचाप उसकी तरफ देखता रहा। तो उसने एक दुसरे ग्लास में ड्रींक डाल दी और थोडा मुस्कुराते हुए बोली,
“लो पी लो, मैं समझती हुं कि, इसको लेने के बाद तुम अच्छा महसूस करोगे। फिर हम दोनो आराम से बात कर सकेन्गे।”मैने देखा कि जब वो खुद ही मुझे ड्रींक ओफर कर रही है, तो मैने उसे उठा लिया ओर एक ही सांस में पी गया। उसने भी अपने ड्रींक को खाली कर दिया और फिर मेरी तरफ घुम कर बोली,
“लडके, तुम ऐसा कब से कर रहे हो ?”

मैं चुप रहा।

“देखो, मैं तुम्हे डांट नही रही हुं। मैं सिर्फ इतना पुछना चाहती हुं कि तुम ऐसा कैसे कर सकते हो ? क्या तुम्हे डर नही लगा ?”

मैने बात को थोडा घुमने के इरादे से, हिम्मत करके जवाब दिया,
“तुम क्या बात कर रही हो, मम्मी ? मैं चाहता हुं कि तुम थोडा खुल कर बताओ।”

“मुझे आश्चर्य है कि तुम दोपहर की घटना को इतनी जल्दी भूल गये। फिर भी मैं तुम से खुल कर पुछती हुं कि तुम ऐसा, यानि कि अपनी बहन को कब से चोद रहे हो ?”

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