दिवाली का जुआ – 2

दोस्तों 
जैसा मैंने वादा किया था , अपनी कहानी दिवाली का जुआ का दूसरा भाग लिखने का, तो मैं हाजिर हु . दिवाली भी आ रही है और मेरी कहानी का प्लाट भी तैयार है ..और मैंने सोच लिया है की हर दिवाली पर इस नाम पर एक छोटी कहानी जरुर लिखूंगा , आप इसे सिक्वल कह सकते हैं पर इस कहानी का पिछली कहानी से कोई वास्ता नहीं है . ये बिलकुल अलग होगी .

आशा करता हु की ये कहानी भी आपको पसंद आएगी .
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मनीष ने जब से होश संभाला था वो जुआ खेलने में लग गया था ..उसके गाँव के दोस्तों ने उसकी जवानी के शुरू के साल जुआ सिखाने और खिलाने में ही बर्बाद कर दिए , उसका मन किसी और काम में लगता ही नहीं था ..उसके पिता के पास एक आलिशान कोठी और बहुत जमीन थी . और उसकी देखभाल और जुताई के लिए उन्होंने दुसरे लोग रखे हुए थे क्योंकि उनका खुद का बेटा तो हमेशा गलत संगत में ही रहता था और उसके जिम्मे कोई भी काम छोड़ना घाटे का सौदा था ..

मनीष के पिता की उम्र हो चुकी थी ..वो हमेशा चिंता में रहते थे की उनके बाद इतनी जमीन की देखभाल मनीष कैसे करेगा ..तभी एक दिन जैसे ऊपर वाला उनपर मेहरबान हो गया ..उनके खेत की जमीन गाँव की मेन सड़क के पास थी और वहां पर एक हाईवे प्रोजेक्ट शुरू होने की वजह से सरकार ने उनकी जमीन मुंह मांगे दाम पर खरीद ली ..तकरीबन आठ करोड़ रूपए मिले उन्हें मुवावजे के रूप में ..जो उनकी पुश्तों के लिए बहुत थे ..

मनीष के पिताजी शहर जाकर बस गए और ट्रेक्टर पार्ट्स की फेक्ट्री दाल दी और आलिशान बंगले में शान से रहने लगे .

उन्होंने एक अच्छे से घर में मनीष की शादी भी कर दी .

लड़की का नाम था दिव्या ..

जैसा नाम था वैसा ही उसका व्यक्तित्व ..जो उसे एक बार देख ले पल्कें झपकाना भूल जाए ..जैसी वो साऊथ की एक हिरोइन है तापसी पन्नू ..ठीक वैसी ही थी वो भी . साथ ही पड़ी – लिखी , समझदार भी.
शादी के बाद मनीष ने एक – दो हफ्ते तो दिव्या की अच्छे से चुदाई की ..पर जब उसने रात-२ भर घर से गायब रहना शुरू कर दिया उसे जल्दी ही पता चल गया था की उसका पति निकम्मा है ,वो तो बस सरकार से मिले रूपए थे जो उसके पिताजी एक बिज़नस चला रहे थे और उसे ये पता चलते भी देर नहीं लगी की उसे जुए की लत है ..अपने पिता से मिलने वाले पैसों को वो जुए में उड़ा देता था .

दिव्या ने जो सपने संजोय थे अपनी शादी और अपने पति के लिए वो सब चकनाचूर हो गए थे . वो चाहती थी की उसे एक प्यार करने वाला पति मिले, जो उसकी और उसके शरीर की हर इच्छा पूरी करे, पर ऐसा होता दिख नहीं रहा था ..

और अब दो हफ्ते की चुदाई के बाद उसकी चूत को जैसे लंड खाने की भूख सी लग गयी थी ..वैसे ये सच भी है, एक बार जब चुदाई शुरू हो जाती है तो चूत कसमसाती रहती है ..पर दिव्या के नसीब में मनीष की बेरुखी लिखी थी .

दिवाली आने वाली थी , ये समय ऐसा होता है जब हर जुवारी के मन में दिवाली से ज्यादा जुए की ललक होती है ..यूँ तो ऐसे लोग पूरा साल भी जुआ खेलते है, पर दिवाली तो जैसे इनके लिए कोई ओलिंपिक खेलो के आयोजन जैसा होता है, रात दिन अय्याशी चलती है ..और यही हाल मनीष का भी था , दिवाली को अभी 15 दिन बाकी थे जब वो पूरा दिन और रात घर नहीं लोटा, दिव्या ने झिझकते -२ अपने ससुर से बात की , और उन्होंने दिव्या को यकीन दिलाया की जल्दी ही इसका कोई उपाय निकालेंगे ..
अगले दिन जब मनीष जुए में हार कर लुटा-पिटा सा वापिस आया तो उसके पिता ने उसकी खूब खिंचाई की और उसके जिम्मे एक काम सौंप दिया .

उन्होंने उसे कहा की गाँव जाए अपने पुश्तेनी घर की साफ़ सफाई और पुताई करवा दे ..और दिवाली तक वहीँ रहे ..और दिव्या को भी साथ ले जाए ताकि वो भी उनका गाँव देख सके .

मनीष के लिए तो ये जैसे सोने पर सुहागा हो गया ..शहर में रहते हुए उसका लक साथ नहीं दे रहा था और पिछले कुछ दिनों से वो लगातार हार भी रहा था , और उसपर उधार भी काफी चढ़ चूका था , इसलिए वो खुद ही सोच रहा था कुछ दिनों के लिए कहीं गायब हो जाए ताकि उधार मांगने वालो से कुछ समय के लिए छुटकारा मिल सके ..और साथ ही उसे अपने गाँव के दोस्तों से मिलने की भी ख़ुशी थी , जिनके साथ वो बचपन से जुआ खेलता आया था ..और उनके साथ खेलते हुए वो ज्यादातर जीता ही था , इसलिए उसे ये विश्वास था की वो जीते हुए पैसो से अपना उधार भी उतार देगा .. 

मकान की मरम्मत और सफाई के लिए उसने पिताजी से पांच लाख रूपए लिए और दिव्या को अपनी स्कोडा कार में लेकर वो गाँव की तरफ चल दिया ..

शहर से उनके गाँव का रास्ता करीब 6 घंटे का था ..और रास्ते में पहाड़ियां और जंगल भी थे और हलकी बारिश ने मौसम को रोमांटिक भी बना दिया था ..दिव्या बहुत खुश थी , आज पहली बार वो इस तरह से अपने पति के साथ अकेले कहीं जा रही थी ..और वो भी पुरे 15 दिनों के लिए ..

उसने जींस की शर्ट और पेंट पहनी हुई थी . जिसमे वो काफी सेक्सी लग रही थी .

मनीष ने उसे प्यार से देखा तो दिव्या बोली : "ऐसे क्यों देख रहे हो …इरादा क्या है ..”

ये बात उसने जान बूझकर बोली थी ..क्योंकि इरादे तो उसके बेईमान हो रहे थे, इतने सेक्सी मौसम में ..

मनीष : "अभी तक तो नेक ही थे ..पर अब खतरनाक हो रहे हैं ..”

दिव्या : "आन हांन… ..दिख रहा है …सब ..कितने खतरनाक हो रहे हैं ..”

उसकी तेज निगाहों ने मनीष की पेंट में बन रहे टेंट की तरफ इशारा किया ..

सड़क बिलकुल सुनसान थी ..हलकी बूंदा बंदी हो रही थी ..मनीष ने अपनी कार सड़क से उतार कर जंगल में डाल दी ..और घने पेड़ों के बीचो बीच पहुंचकर कार रोक दी .

आज उसका मन भी वाइल्ड तरीके से चुदाई करने का था .

और दिव्या की तो ये एक फेंतासी थी ..खुले आसमान के नीचे नंगे होकर चुदाई करवाना ..और आज उसका ये सपना सच होता दिख रहा था ..इसलिए जैसे ही मनीष ने कार रोकी, वो उछलकर उसकी गोद में चढ़ गयी और बुरी तरह से उसके होंठों को चूसने लगी .
आनन् फानन में ही दिव्या की शर्ट और ब्रा निकाल फेंकी मनीष ने और उसके स्वर्ण कलश जैसे मुम्मों पर अपने दांतों की तेज धार से टेटू बनाने लगा ..

उसके गोरे जिस्म पर दांतों के लाल निशान चमकने लगे ..और वो जोर-२ से सिस्कारियां लेकर मनीष के सर को अपनी छाती पर दबाने लगी ..

”उम्म्म्म्म्म्म्म येस्स्स्स ….काटो …..खा जाओ …..मुझे ….ये ब्रैस्ट …तुम्हारे लिए ही हैं …खाओ ..इन्हें ..काटो ….और तेज ….उम्म्म्म …..अह्ह्ह्ह्ह ……नाआअन्न्न्न ……यहाँ ….नहीं ……..”

आवेश में आकर मनीष ने उसके निप्पल को अपने दांतों के बीच फंसा कर इतनी जोर से बाहर की तरफ खींचा जैसे वो उन्हें छाती से निकाल ही लेना चाहता हो ..दिव्या दर्द से बिलबिला उठी ..

”ऐसे भी कोई करता है क्या ..जानवर बन जाते हो तुम तो कभी – २ ….” उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे ..निप्पल सूजकर कुप्पा हो गया था .

मनीष कुछ कहने ही वाला था की पीछे से पुलिस सायरन की आवाज सुनाई दी और उनकी कार के पीछे एक जीप आकर रुक गयी ..और पलक झपकते ही उसमे से एक इंस्पेक्टर निकल कर उनकी खिड़की के बाहर खड़ा था ..

दोनों ने मन ही मन सोचा की ये कौनसी मुसीबत आ गयी है अब ..सारा मजा खराब कर के रख दिया ..

दिव्या को अपनी छातियाँ छुपाने का भी मौका नहीं मिल पाया था जिसकी वजह से बाहर खड़े इन्स्पेक्टर की आँखे बाहर निकलने जैसी हो गयी थी ..उसने शायद इतनी गोरी और भरी हुई लड़की आज तक नहीं देखि थी ..

उसने खींसे निपोरते हुए मनीष से कहा : "चलो जी …निकलो बाहर …”

दिव्या ने जल्दी से साईड में पड़ी हुई शर्ट को उठाया और उससे अपनी छाती ढक ली ..ब्रा और शर्ट को प्रोपर तरीके से पहनने का समय नहीं था ..

मनीष ने गाडी का शीशा नीचे किया और इन्स्पेक्टर से बोला : "क्या बात है सर …हम पति-पत्नी है .बस जाते-२ रुक गए थे ..”

इन्स्पेक्टर की आवाज में अचानक कठोरता आ गयी : "साले …चुतिया समझे है के मन्ने …निकल बाहर …”

मनीष ने बहस करनी उचित नहीं समझी और बाहर आ गया ..जीप में से निकल कर एक हवालदार भी वहां पहुँच गया ..

इन्स्पेक्टर : "और अपनी छमिया को भी बोल बाहर निकले ..”

मनीष : "सर …मैंने कहा न वो मेरी पत्नी है …”

इन्स्पेक्टर : ”पत्नी है तो घर में बैठ कर चूस न इसके मुम्मे …साले जंगल में मंगल क्यों कर रहा है ..सब समझता हु मैं तुम शहर वालों को ..दुसरे की बीबी के साथ मस्ती करने का अच्छा धंधा चल रहा है आजकल ..गाडी में बिठाकर शहर से बाहर ले आओ ..और ऐसे जंगल में आकर चोदो ..और शाम तक वापिस ..कोई देखेगा भी नहीं, कोई खर्चा भी नहीं ..और मस्ती की मस्ती …”

मनीष कुछ बोलने ही वाला था की दिव्या बाहर निकल आई, वो गुस्से में थी : "इन्स्पेक्टर साब, मैं इनकी पत्नी हु ..आप कैसी बातें कर रहे हैं ..हमारी अभी कुछ महीने पहले ही शादी हुई है ..हम लोग तो बस आगे इनके गाँव जा रहे थे ..”

वो गुस्से में बाहर तो निकल आई थी पर शर्ट पहनना भूल गयी थी ..वो उसने अभी तक अपने हाथों से पकड़ कर अपने आगे लगायी हुई थी .

इन्स्पेक्टर बड़े गौर से उसके चारों तरफ घूमता हुआ बोला : "अच्छा …चलो मान लेता हु ..की तुम इसकी पत्नी हो ..कोई सुबूत है तुम्हारे पास …”

ये सुनकर दोनों एक दुसरे को देखने लगे …अब इस बात का क्या सबूत दिखाए उसे ..दिव्या के पास एक वोटर कार्ड तो था पर उसमे उसका सरनेम शादी से पहले वाला था ..जिसे देखकर इन्स्पेक्टर कभी भरोसा नहीं करता …

आखिर मनीष ने कहा : "आप चाहते क्या है …जल्दी बताइए ..हमें आगे भी जाना है ..”
ये सुनते ही इन्स्पेक्टर के चेहरे पर हंसी आ गयी : "देखा …मैं न कहता था की तू इसका पति है ही नहीं …चल अब तूने मान ही लिया है तो निकाल एक लाख रूपए …”

मनीष और दिव्या हेरानी से एक दुसरे का चेहरा देखने लगे …

मनीष : "एक लाख …इतने पैसे …वो किसलिए ..”

इन्स्पेक्टर : "अब वो भी मैं ही बताऊँ के …तुम्हारे घर वालों को तुम दोनों के बारे में पता ना चले ..इसलिए ..चलो निकालो …”

उसने सख्त आवाज में कहा ..

मनीष ने मन ही मन सोचा ‘पता नहीं ये मुसीबत कहाँ से आ गयी है ..’

मनीष : "पर सर …इतने पैसे मेरे पास नहीं है …”

इन्स्पेक्टर : "बीस लाख की गाडी लेकर और करोड़ रूपए का पटाखा लेकर घूम रहा है और एक लाख नहीं है तेरी जेब में …”

उसने हवालदार की तरफ देखा और बोला : "चल रे घनशाम …तलाशी ले गाडी की ..और इनके सामान की ..अभी पता चल जाएगा की कितना सच बोल रा है ये ..”

ये सब बोलते हुए उसकी नजरें अभी तक दिव्या की नंगी पीठ को ही घूर रही थी ..

इन्स्पेक्टर की बात सुनते ही मनीष की सिट्टी पिट्टी गम हो गयी ..क्योंकि डिक्की में पांच लाख रूपए केश पड़े थे ..

मनीष : "ये …ये आप नहीं कर सकते ..मैंने कहा न …हमारे पास इतने पैसे नहीं है ..ये ..ये आप इतना रखिये ..”

उसने अपनी पर्स में रखे हुए लगभग तीन हजार रूपए निकाल कर उसके हाथ में रख दिए ..

पर इन्स्पेक्टर तो जैसे जिद्द पर अटक गया था .."देखो भाई …हम लोगों को तुम जैसे बहुत से लोग मिलते हैं ..अब इतने से तो हमारा कुछ न हौन वाला ..पर अगर ….”

उसने बात अधूरी छोड़ दी ..

मनीष : "अगर क्या ???” 

इन्स्पेक्टर :"अगर मेडम हमारी भी कुछ सेवा कर दे तो …इतने से ही काम चला लेंगे ..वर्ना गाड़ी को ले चालो थाणे में , पूरी तलाशी होगी ….जांच पड़ताल होगी ..तब देखेंगे ..”

मनीष तो समझ गया की वो क्या कहना चाहता है ..पर दिव्या नहीं समझी …और एक मिनट के बाद जब उसकी ट्यूबलाइट जली तो उसका चेहरा गुस्से से लाल हो उठा ..

”अपनी औकात में रहो इन्स्पेक्टर …तुमने मुझे समझ क्या रखा है ..मैं इनकी पत्नी हु ..कोई धंधे वाली नहीं ..”

इन्स्पेक्टर : "भाई बड़ी मिर्ची लग गयी तुझे तो छोरी …तेरे यार को तो कुछ हुआ नहीं और तू ऐसे ही मचल रही है …”

और सच में ..मनीष को उसकी बात सुनकर जैसे कुछ हुआ ही नहीं था ..वो चुपचाप सा खड़ा था ..

दिव्या ये देखकर और भी गुस्से में आ गयी : "तुम कुछ बोलते क्यों नहीं …ये मेरे बारे में क्या सोच रहा है …क्या करवाना चाहता है …कुछ बोलते क्यों नहीं तुम …”

इन्स्पेक्टर उन दोनों को लड़ता हुआ देखकर साईड में जाकर खड़ा हो गया और दिव्या की नंगी पीठ और उसकी कसी हुई गांड को देखकर आहें भरने लगा ..उसका हवलदार भी अपनी तोंद के नीचे खड़े हुए लंड को अपने हाथों से मसलने लगा ..

मनीष ने धीरे से दिव्या से कहा : "देखो दिव्या ..ये लोग ऐसे नहीं मानेंगे ..तुम भी जानती हो की गाडी में पांच लाख रूपए पड़े हैं ..इन लोगों की नजर पड़ गयी तो सब जायेंगे …”

वो धीरे-२ बोल रहा था ताकि उनकी बातें वो दोनों ना सुन सके ..

दिव्या : "इसका क्या मतलब है …तुम्हे पैसे ज्यादा प्यारे हैं या अपनी पत्नी ..और वैसे भी ये एक लाख मांग रहा है ..उसमे से एक लाख निकाल कर इसके मुंह मारो और निकल चलो यहाँ से ..”

पर शायद मनीष सब कुछ सोच चुका था ..उसके जुवारी दिमाग ने सब केलकुलेशन कर ली थी ..एक लाख की क्या वेल्यु थी उसके लिए वो अच्छी तरह जानता था ..और वैसे भी, अगर उन रुपयों में से एक लाख निकालता तो बाकी के पैसे कोन सा वो इन्स्पेक्टर इतनी आसानी से छोड़ देता ..ये सब मनीष ने एक मिनट के अन्दर ही अन्दर सोच लिया था ..

उसका सपाट सा चेहरा देखकर दिव्या को समझते हुए देर ना लगी की वो पत्थर के आगे बीन बजा रही है ..

"यानी …यानी तुम चाहते हो की मैं इन कुत्तों के साथ ….छि …मुझे सोच कर भी घिन्न आ रही है …”

वो गुस्से में कुछ ज्यादा जोर से बोल गयी थी ये बात जिसे इन्स्पेक्टर ने सुन लिया था ..

इन्स्पेक्टर : "अरे नहीं मेडम जी ..हमें कुछ ज्यादा नहीं करना है ..पुरे झंझट वाला काम नहीं करना हमें तो ..तुम जैसी के साथ करने के बाद कोई बीमारी लग गयी तो क्या होगा हमारा ..हा हा ..आप तो बस हमारा कल्याण अपने हाथों से ही कर दो बस ..ही ही ..”
इतनी बेइज्जती आज तक दिव्या की कभी नहीं हुई थी ..एक तो उसका पति फट्टू निकला था और दुसरे ये पुलिस वाले उसे एक रंडी समझ रहे थे ..उसकी आँखों से आंसू बहने लगे ..और उसने गुस्से में आकर अपनी शर्ट नीचे फेंक दी और अपनी बाहें ऊपर करके चिल्लाई : "आओ फिर ..जो करना है कर लो …यु बास्टर्डस ….”

इन्स्पेक्टर और हवलदार की आँखे फटी की फटी रह गयी …उनके सामने दो सफ़ेद बॉल्स लहरा रही थी ..और उनपर लगे एक सूजे हुए निप्पल को देखकर वो इन्स्पेक्टर तो जैसे पागल ही हो गया ..

इन्स्पेक्टर : "अरे देख रे घनशाम ….मेडम के दाने को तो देख …पहले कभी देखा है ऐसा पीस …”

उसने ना में सर हिला दिया ..

दिव्या ने भी गुस्से में आकर अपनी नंगी छातियाँ उन दोनों के सामने उजागर तो कर दी थी पर उसे डर भी लग रहा था की वो पता नहीं कैसा व्यवहार करेंगे उसके साथ ..पर साथ ही थोडा सकूं भी मिला था की वो उसकी चूत नहीं मारेंगे ..

और मनीष ने तो अपने पैसे बचाने के लिए अपनी नव विवाहित पत्नी का जुआ खेल लिया था ..पैसे के बदले उसने अपनी पत्नी को उन दोनों दरिंदो के आगे परोस दिया था ..वो सोच रहा था की ज्यादा से ज्यादा वो क्या करेंगे ..कम से कम मेरे एक लाख रूपए तो बच गए न ..

इसी बीच दोनों अपनी जीभ निकाल कर कुत्ते की तरह दिव्या के सामने पहुँच गए ..
और वो इन्स्पेक्टर जिसका नाम राहुल था बड़ी ललचाई हुई निगाहों से दिव्या के उभारों को देख कर अपनी जीभ को होंठों पर फेर रहा था ..और जैसे ही वो उसके सामने पहुंचा उसने बिना एक पल की देर किये अपने गीले होंठों को उसके मुम्मे पर दे मारा ..

मनीष ने जिस निप्पल को काटकर सुजा दिया था राहुल ने उसी को अपने मुंह में दबोच कर जोर से चूसा था ..वो फिर से दर्द से कराह उठी ..पर साथ ही उसकी गर्म जीभ के एहसास से उसे सकून भी पहुंचा जैसे वो अपनी गर्म जीभ से उसके सूजे हुए निप्पल की सिंकाई कर रहा हो ..

”अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह …….ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ …..उम्म्म्म्म्म्म्म ……”

और ना चाहते हुए भी उसे गोरे हाथ उठकर इन्स्पेक्टर राहुल के सर के पीछे पहुँच गए और उसने उन्हें जोर से अपनी छाती पर दबा लिया ..

और ये सब वो कर रही थी अपने पति मनीष के सामने ..जो बड़ी अजीब नजरों से अपनी पत्नी को किसी और मर्द के साथ देखकर अपना लंड मसल रहा था ..

वैसे ये सब मनीष के विकृत दिमाग ने शादी से पहले भी सोचा हुआ था की शादी के एक-दो सालों के बाद अपनी पत्नी को किसी और मर्द से भी चुद्वायेगा ..शायद कहीं कोई स्टोरी पड़ी थी उसने इस तरह की, जिसने उसे काफी उत्तेजित किया था , पर दिव्या जैसी खूबसूरत पत्नी पाकर वो शायद ये बात भूल चूका था और खुद ही उसे चोदता रहता था पर आज जिस तरह से ये परिस्थितिया बनी थी वो सब उसकी उस सोच से मिलती जुलती थी जो वो शादी से पहले सोचा करता था ..इसलिए अपनी पत्नी के गोरे मुम्मे को किसी और मर्द के मुंह में देखकर उसका लंड अजीब तरह से छटपटा रहा था ..

और इसी बीच हवलदार घनशाम ने अपनी पेंट उतार डाली और दिव्या के पास पहुंचकर अपना लंड उसके हाथ में पकड़ा दिया ..

वो जैसे नींद से जागी ..और जैसे ही उसकी नजर उसके लंड पर पड़ी, वो जोर से चिल्ला पड़ी ..

”नहीईइ ……….ये ..ये …क्या है …..”

और सच में , उसका चिल्लाना सही था, घनशाम का लंड था ही ऐसा ..गधे के लंड जैसा, मोटा और लम्बा ..और उसका सुपाडा भी इतना मोटा था की एक बार में चूत के अन्दर घुस ही ना पाए ..

इन्स्पेक्टर : "साले ….तुझे कितनी बार बोला है …ऐसे अपना लंड दिखाकर डराया मत कर ..देखा ..मेडम जी डर गयी ..”

और फिर दिव्या की तरफ देखकर बोला : "मेडम जी …ये तो जानवर है …आप इसे देखिये …”

और इतना कहकर उसने जल्दी से अपनी पेंट खोली और अपना सात इंच का मोटा ताजा लंड उसके सामने लहरा दिया ..जो मनीष के लंड से भी एक इंच लम्बा ही था ..

वो कुछ और बोल पाती इससे पहले ही इन्स्पेक्टर राहुल ने उसे नीचे खिसकाया और घुटनों के बल बिठा कर अपने लंड को उसके होंठों के सामने लहरा दिया : "चलो मेडम जी ..शुरू हो जाओ ..आपको भी देर हो रही होगी …शाबाश …चुसो इसे …”

दिव्या ने एक नजर मनीष की तरफ डाली पर उसने नजरें झुका ली ..दिव्या का मन गुस्से और घृणा से भर गया ..और वो सोचने लगी ‘जब मेरा खुद का पति ही ये चाहता है तो मैं क्यों पीछे रहू मजे लेने में ..”

और उसने मुस्कुराते हुए राहुल की तरफ देखा और उसके लंड को पकड़कर अपने लाल होंठों से लगाया ..और अगले ही पल उसे अन्दर ले कर प्यासी पिशाचिनी की तरह चूसने लगी ..

इन्स्पेक्टर तो अपने पैरों के पंजों पर खड़ा हो गया ..और उसके मुंह से सिसकारी निकल गयी …

”स्स्स्स्स्स्स्स …..अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह …….धीरे ….मेरी जान …..धीरे …”

खुले आसमान के नीचे, जंगल में उसका शरीर किसी नागिन की तरह लहरा रहा था ..और वो अपने सामने खड़े नाग को अपने मुंह में लेकर उसका मर्दन अपने मुंह से कर रही थी ..
तभी उसकी दांयी तरफ एक और नाग प्रकट हुआ ..कोबरा ..यानी घनशाम का लंड .

जो काफी देर से कोने में खड़ा हुआ अपने साहब के लंड को उसके गुलाबी होंठों के बीच जाता हुआ देखकर व्याकुल हो रहा था ..और जब उससे रहा नहीं गया तो पहुँच गया अपने खड़े लंड के पीछे-२ वो भी दिव्या की बगल में .

दिव्या ने जब और करीब से उसके भयंकर लंड को देखा तो उसे उबकाई सी आ गयी ..घने बाल थे उसकी बाल्स पर ..काल कलूटा लंड ..और अजीब सी दुर्गन्ध भी आ रही थी वहां से ..जैसे सही से साफ़ -सफाई ना करता हो वो ..वैसे करता भी कैसे, उसकी मोटी तोंद के नीचे जो था इतना बड़ा अजगर ..

दिव्या ने दूसरी तरफ मुंह कर लिया तो घनशाम ने आगे बढकर अपने लंड को उसके चेहरे के आगे लगा कर उसके होंठों से छुआ दिया ..और एक अजीब सी महक दिव्या के नथुनों के अन्दर उतर गयी ..महक गन्दी थी, पर उसमे एक नशा सा था ..एक सम्मोहन था ..जो उसे अपनी तरफ खींच रहा था ..और वो सम्मोहित सी होकर उस तरफ मुड़ी और उसने इन्स्पेक्टर के लंड को मुंह से निकालकर हवालदार के लंड को पकड़ लिया ..और अपने होंठों से लगाकर गहरी-२ साँसे लेने लगी ..जैसे उसकी महक की मादकता ने उसे मदहोश सा कर दिया हो …एक अजीब किस्म का नशा चड़ने लगा उसके ऊपर ..

राहुल : "साले …फिर से मरवा ली न तूने अपनी गांड बीच में …अच्छी भली चूस रही थी ..तू हमेशा बीच में आकर अपनी माँ क्यों चुदवाने लग जाता है कमीने ..पता नहीं क्या मलकर आता है अपने गधे जैसे लंड पर ..साला कुत्ता …”

इतना कहकर वो गुस्से में बडबडाते हुए एक तरफ खड़ा होकर खुद ही अपने लंड को मसलने लगा ..जैसा की मनीष कर रहा था ..

और दिव्या ने इन्स्पेक्टर की बातों की परवाह ना करते हुए अपनी पतली उँगलियों से उसके मोटे-ताजे लंड की मालिश की और फिर अपने मुंह की गुफा खोलकर उसे निगलने लगी अपने मुंह के अन्दर ..

”उम्म्म्म्म्म ……..पुच्च्छ्ह्ह्ह ……..अह्ह्ह्ह्ह्ह …..”

इतना मुश्किल था उसे निगलना …पर फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी ..जैसे कोई उपरी हवा लग गयी हो …वो किसी रंडी की तरह से उसके मोटे लंड को अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपने छोटे से मुंह में धकेल रही थी ..और उसके मुंह से सिस्कारियां और लार एक साथ निकल रही थी .

और जब और अन्दर जाने की जगह ना बची तो दिव्या ने आँखे खोली और देखा की अभी भी आधे से ज्यादा लंड उसके मुंह से बाहर ही था ..वो सोचने लगी की काश वो पूरा लंड उसकी चूत के अन्दर घूस जाए ..इतना सोचते ही उसकी चूत के अन्दर से एक गाड़े रस की घार निकल कर बाहर की तरफ बह चली ..और उसकी पेंटी गीली हो गयी ..उसने एक हाथ से अपनी चूत को रगडा और दुसरे से घनशाम के लंड को पकड़कर उसे अपने मुंह के अन्दर बाहर करने लगी ..

तभी दिव्या की नजरें अपने पति की तरफ गयी, जिसने अपना लंड बाहर निकाल लिया था और उसे बुरी तरह से मसलता हुआ आगे पीछे कर रहा था ..ये देखकर वो हेरान रह गयी ..यानी उसका खुद का पति, उसे किसी और मर्द के साथ देखकर उत्तेजित हो रहा है ..ये कैसी मानसिकता है ..ये कैसा मर्द है ..पर उसे क्या, उसे तो खुद ही आज इतना मजा आ रहा था , जो उसने आज तक सपने में भी नहीं सोचा था वो कर रही थी आज दिव्या ..और इस घनशाम के लंड ने तो उसे अपना दीवाना सा बना डाला था ..

तभी इन्स्पेक्टर राहुल जो काफी देर से खड़ा हुआ मुट्ठ मार रहा था, एक तेज आवाज करता हुआ दिव्या की तरफ भागता हुआ आया और अपने लंड की पिचकारियाँ उसने दिव्या के चेहरे पर दे मारी ..

”अह्ह्ह्ह्ह्ह ……उम्म्म्म्म्म्म्म्म ….उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ …….मेडम जी …….अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह …….. लो ….. पियो …..मेरा जूस …..उम्म्म्म्म्म ……”

इन्स्पेक्टर ने अपने लंड के ब्रश से उसके चेहरे के केनवास पर मॉडर्न आर्ट बनानी शुरू कर दी .
दिव्या के मुंह जैसे ही उसके गर्म हलवे का स्वाद लगा वो बावली हो गयी, इतना टेस्टी तो मनीष का भी नहीं था , उसने चटर-पटर करते हुए सारा वीर्य इकठ्ठा करके अपने मुंह के अन्दर धकेल लिया ..और कुछ ही देर में उसका रस से भीगा चेहरा चमचमा रहा था ..

और अब बारी थी घनशाम की, वो आगे आया और अपने लंड को फिर से दिव्या के मुंह के अन्दर डाल कर हिलाने लगा ..

दिव्या ने भी एक हाथ अपनी चूत पर और दुसरे से उसके लंड को रगड़ते हुए इतनी तेजी से उसे आगे पीछे किया की एक मिनट के अन्दर ही उसके लंड की सूंड से सफ़ेद पानी की बोचारें फिर से उसके गुलाबी चेहरे को भिगोकर सफ़ेद चादर में ढकने लगी ..

और तभी दिव्या के अन्दर का तूफ़ान भी बाहर निकल आया और वो पूरी तरह से तृप्त होकर अपने ऊपर हो रही बरखा का स्वाद मुंह खोलकर लेने लगी ..

और अपनी पत्नी को किसी रंडी की तरह बिहेव करते देखकर मनीष के लंड ने भी पिचकारियों की लाईन लगा दी और जंगल की जमीन पर उसने भी अपने बीज बो दिए ..

दिव्या का मन तो कर रहा था की घनशाम को वहीँ दबोचे और चढ़ जाए उसके ऊपर और डाल ले उसके लंड को अपने अन्दर ..पर वो इन्स्पेक्टर और हवालदार तो अपना काम निकलते ही चलने की तय्यारी करने लगे ..शायद उन्हें यों संक्रमण का खतरा था ..क्योंकि वो तो दिव्या को एक रंडी ही समझ रहे थे ..

उन्होंने अपने -२ कपडे ठीक किये और जीप में जा बैठे और जाते-२ इन्स्पेक्टर मनीष से 
बोला : "रात होने वाली है …मेडम को लेकर जल्दी से निकल ले अब ..”

और उन्होंने अपनी जीप वापिस मोड़ी और आँखों से ओझल हो गए ..दिव्या बेचारी निराश सी हो गयी ..

दिव्या ने भी अपना हुलिया सही किया और हाथ मुंह धोकर अपने कपडे पहन कर कार में जाकर बैठ गयी, मनीष भी बिना कुछ बोले अन्दर आया और दोनों फिर से अपने गाँव की तरफ चल दिए ..

पुरे रास्ते दोनों ने उस घटना के बारे में कोई बात नहीं की .

गाँव पहुँचते -२ शाम हो चुकी थी ..और दिव्या बुरी तरह से थक गयी थी ..वो आराम करना चाहती थी . 

पर उसे अभी पता नहीं था की अब उसकी जिन्दगी में आराम इतनी आसानी से नहीं मिलने वाला .
मनीष के पिताजी ने गाँव में फ़ोन करके पहले से ही हवेली कि साफ़ सफाई करवा दी थी , ताकि उन्हें सोने में कोई परेशानी न हो ..वहाँ उनका पुराना वफादार नौकर हरिया जो करीब 50 साल का था उसने पहले से ही खाना भी तैयार करवा कर रख दिया था ….

मनीष और दिव्या फ्रेश होकर बैठ गए और हरिया ने खाना लगा दिया .खाने के बाद जैसे ही दिव्या ने कपडे बदले ही थे कि मनीष पीछे से आया और उसे अपनी बाहीं में पकड़ कर बेतहाशा चूमने लगा ..

”हटिये न …मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी ..आज जो आपने किया है उसके लिए मैं आपको कभी माफ़ नहीं करुँगी ..” उसने गुस्से में मनीष से कहा, पर वो अंदर से जानती थी कि उसे कितना मज़ा आया था वो सब करने में ..

मनीष : "मुझे माफ़ कर दो स्वीटहार्ट ..तुमने देखा था न, वो कमीने कैसे पैसों के पीछे पड़े थे ..तुम अगर आज न होती तो वो पुरे 5 लाख हमारे हाथ से चले जाते और पिताजी जो मुझे पहले से ही नाकारा समझते हैं उन्हें मुझे गालियां देने का एक और मौका मिल जाता ..मैं तो तुम्हे बस थेंक्स कह रहा था ..”

दिव्या मनीष कि तरफ घूमी और बिल्ली जैसा फेस बना कर अपने होंठों को फेला कर बड़े ही प्यार से बोली : "ऐसे थेंक्स कहते हो तुम ..”

मनीष : "तो कैसे कहूं …तुम ही बता दो ..”

दिव्या ने होले से मुस्कुराते हुए मनीष के सर के ऊपर हाथ रखा और उसे नीचे कि तरफ धकेलने लगी ..और तब तक नीचे करती रही जब तक वो अपने घुटनों के बल नीचे नहीं बैठ गया ..और फिर दिव्या ने अपनी एक टांग उठा कर एक दम से उसके कंधे पर रख दी ..और धीरे -2 अपना गाउन ऊपर खिसकाते हुए अपनी टांगो को नंगा करने लगी ..और जल्द ही उसका गाउन कमर से भी ऊपर उठ गया ..जिसे उसने अपने सर से घुमा कर फेंक दिया ..

उसने ब्लेक कलर कि ब्रा-पेंटी पहनी हुई थी ..जिसमे उसका सफ़ेद शरीर बड़ा ही सेक्सी लग रहा था ..

मनीष समझ गया कि वो क्या चाहती है ..उसकी चूत से निकल रही महक उसे साफ़ महसूस हो रही थी ..और वहाँ का गीलापन भी उसे दिखायी दे रहा था ..उसने आज तक दिव्या कि चूत को चखा नहीं था ..और आज दिव्या मनीष कि गलती कि सजा के रूप में उससे अपनी चूत चुस्वाने का इंतजाम कर रही थी ..और मनीष मना भी नहीं कर सकता था .

दिव्या ने एक ही झटके में आगे होकर अपनी चूत वाला हिस्सा मनीष के मुंह पर लगा दिया ..और उसके बालों को पकड़ कर ऊपर मुंह करके सियार कि तरह हुंकारने लगी ..

”अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ………उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म …….सक्क्क मीईsssssssssssssss ……”

आज तो दिव्या कि कमांड उसके लिए आदेश कि तरह था ..उसने बिना देरी किये उसकी चूत को कपडे समेत अपने मुंह में भरा और बर्फ वाली आइसक्रीम कि तरह चूसने लगा …उसमे से मीठा रस छनकर उसके मुंह में जाने लगा जो उसे काफी अच्छा लगा ..वो सोचने लगा कि पहले क्यों नहीं चूसा उसने अपनी बीबी कि चूत को ..
मनीष ने अपने हाथ ऊपर किये और उसके कूल्हों पर फंसी हुई कच्छी को पकड़ कर फाड़ दिया ..और उसकी संतरें कि फांकों को अपने मुंह में लेकर ऑस्ट्रेलियन किस्स करने लगा ..

इतना रस तो असली के संतरे में से भी नहीं निकलता जितना इन संतरों में से निकल रहा था ..दिव्या ने एक टांग को मनीष के कंधे के पीछे और दूसरी उसके सामने नीचे टिका रखी थी ..बड़ा ही परफेक्ट आसान था ये चूत चुसाई का ..

और जल्द ही दिव्या के अंदर एक ओर्गास्म जन्म लेने लगा ..और उसने मनीष के सर के बालों को पकड़ कर जोर-२ से अपनी चूत पर मारना शुरू कर दिया ..

”अह्ह्ह्हह्ह्ह …..चूसो …….खा जाओ ……ईट मी …….सक्क्क मी …….अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह …….”

मनीष भी उसके जंगलीपन में उसका साथ देने लगा ..और जल्द ही उसकी चूत कि दरारों में से ठंडा नारियल पानी निकल कर झरने कि तरह कलकलता हुआ उसके मुंह में जाने लगा ..मनीष ने भी बिना कोई बूँद गिराए वो सब अपने मुंह के अंदर समेट लिया ..

दिव्या का शरीर निढाल सा होकर उसके ऊपर गिर गया ..जिसे उसने बड़े ही प्यार से नीचे लिटाया और खुद उसके ऊपर आ गया …और एक मिनट के अंदर ही उसने अपने सारे कपडे निकाल फेंके ..जमीन पर पड़ी हुई दिव्या मदहोश आँखों से अपनी टाँगे फेला कर मनीष के लंड का इन्तजार कर रही थी ..और जैसे ही मनीष ने उसकी चूत के अंदर अपना गर्म लंड लगाया वो फिर से सजग हो उठी ..और उसने अपनी ब्रा के स्ट्रेप्स को नीचे करके अपनी ब्रेस्ट नंगी कि और मनीष के सर को पकड़ कर वहाँ दबा दिया .

मनीष ने उसका दूध पीते हुए अपना दूध निकालने का काम जारी रखा ..नीचे से मिल रहे झटकों और ऊपर से मिल रही चुसाई कि वजह से उसके अंदर एक और तूफ़ान जन्म लेने लगा …शाम कि घटना को मिलाकर वो करीब 3 घंटों में तीसरी बार झड़ने वाली थी ..इतना स्टेमिना है उसके अंदर ये उसे आज ही पता चला ..उसके बड़े-२ थन बुरी तरह से हिल रहे थे और हर झटके से ऊपर नीचे हो रहे थे ..

मनीष के झटके भी आज कुछ ज्यादा ही तेज थे ..उसने आँखे बंद कि तो वहाँ उसे वही सीन दिखा जब वो इन्स्पेक्टर और हवलदार अपने लंड कि पिचकारियों से उसकी बीबी को नहला रहे थे ..और अब वो उन्ही छातियों को चूस रहा था जिनपर उनका रस गिरा था …

इतना बहुत था उसके ओर्गास्म को चरम सीमा तक पहुंचाने के लिए …उसने दो-चार तेज झटके मारे और तेज गर्जना के साथ अपनी लस्सी उसकी मटकी में भर दी ..

”अह्ह्ह्हह्ह्ह …….ओह्ह्ह …..दिव्याा …..उम्म्म्म्म्म्म्म ……मेरी जान …….”

और वहीँ जमीन पर उसके ऊपर लेट कर गहरी साँसे लेने लगा ..

उसकी गर्म रोड के अंदर कि सप्लाई अपनी चूत के अंदर महसूस करते ही उसके ओर्गास्म का गुब्बारा भी फूट गया और उसके अंदर का लावा निकलकर मनीष कि लस्सी में घुलने-मिलने लगा ..

ऐसा लगा जैसे कमरे के अंदर एक तूफ़ान आकर गुजर गया ..

पर तूफ़ान सिर्फ कमरे में ही नहीं बाहर भी आया था ..
हरिया काका अपनी धोती में से लंड को निकाल कर , अंदर से आ रही तेज आवाजों को सुनते हुए 
जोर-२ से मसल रहे थे ..क्योंकि जब से उन्होंने छोटी मालकिन को देखा था तब से उनका लंड बैठने का नाम नहीं ले रहा था ..और इसलिए वो उनके कमरे के बाहर आकर खड़ा हुआ था ताकि कुछ मजेदार मसाला मिल सके ..और अंदर से आ रही सिस्कारियों से उसे पता चल गया था कि कार्यकर्म शुरू हो चूका है , इसलिए वो अपने लंड को निकालकर वहीँ मसलने लगा ..

और दिव्या – मनीष के साथ-२ उनके लंड ने भी जब तेज धार जमीन पर गिरानी शुरू कि तो वहाँ सफ़ेद पानी का इतना ढेर लग गया जैसे किसी ने कटोरी में से दहीं गिरा दी हो वहाँ …

वो भागकर किचन कि तरफ गए ताकि किसी कपडे से वो सब साफ़ कर सके ..और इसी बीच दिव्या ने अपना गाउन पहना और बाहर कि तरफ निकलकर बाथरूम में जाने लगी ..क्योंकि पुराने टाइम के अनुसार बनी कोठी में बाथरूम अटेच नहीं था ..और जैसे ही बाहर निकलते हुए उसका पैर हरिया काका द्वारा बनायी हुई झील पर पड़ा , वो ठिठक कर रुक गयी ..और नीचे बैठ कर, अपनी उँगलियों से उठा कर जब उसने देखा कि वो है क्या, तो उसे समझते हुए देर नहीं लगी कि कोई उनके कमरे के बाहर कोई सब देख या सुन रहा था ..और इस समय पूरी कोठी में हरिया काका के अलावा कोई और तो है नहीं ..ये सोचते ही उसके पुरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गयी कि एक पचास साले के बुड्डे नौकर ने उसकी चुदाई वाली आवाजें सुनी होगी ..और वो सोचने लगी कि चलो अच्छा हुआ, उनकी वजह से बूढ़े का भला हो गया ..और अपनी ही बात पर मुस्कुराती हुई वो बाथरूम कि तरफ भाग गयी ..और वाश करके वो जब वापिस आयी तो हरिया जमीन पर बैठा हुआ अपनी करतूत पर पोचा लगा रहा था ..

दिव्या भी बेशर्मों कि तरह उसकी बगल से होती हुई अंदर चली गयी ..और जाकर सो गयी ..

अगले दिन सुबह उठकर वो जब नीचे गयी तो हरिया उससे नजरें भी नहीं मिला रहा था ..और ये देखकर दिव्या मन ही मन मुस्कुरा रही थी ..

तभी बाहर का दरवाजा खडका और हरिया ने दरवाजा खोल दिया ..सामने चार लोग खड़े थे ..जिन्हे देखते ही हरिया ने बुरा सा मुंह बनाया और बोला : "आ गए तुम मनहूसों …खुशबु आ गयी होगी अपने यार कि …”

ये चारों थे मनीष के बचपन के दोस्त ..

राजेश , हर्षित , बिल्लू और थापा ..

येही चारों थे जिनकी वजह से आज मनीष जुवारी बन चुका था .
बिल्लू : "अरे बुड्डे ….तू अभी तक जिन्दा है …हा हा ..सेंचुरी मारेगा क्या ..”

थापा : "अरे नहीं यार ..ये अब क्या सेंचुरी मारेगा ..इसका तो सर्किट ही खराब हो चुका है …ही ही ..”

थापा ने हरिया काका के लंड कि तरफ इशारा करते हुए उनका मजाक उड़ाया ..

ये उन सबका हर बार का नाटक था ..वो हरिया काका को बहुत सताते थे ..और हरिया उनकी बाते सुनकर कुछ नहीं कर पाता था ..उसकी इतनी औकात ही नहीं थी ..उनके सामने बोलने का मतलब था अपने सर पर मुसीबत बुलाना ..

पर जितना लाचार वो बनता था वो उतना था भी नहीं ..क्योंकि उसके पठानी लंड ने पिछले बीस सालों से गाँव कि ना जाने कितनी चूतों का कल्याण किया था ..और उनमे से बिल्लू और थापा कि माँ भी थी ..और थापा कि माँ तो उससे मिलने अभी तक आती थी ..छुप -२ कर ..

पर अपने ”सर्किट” का बखान वो अभी इन बच्चो के सामने नहीं करना चाहता था ..

राजेश : "काका …जल्दी से मनीष को बुलाओ …”

और उनकी बगल से निकलते हुए सभी अंदर आकर सोफे पर बैठ गए ..

हरिया ने मनीष को जाकर बता दिया कि उसके दोस्त मिलने आये हैं ..मनीष भी ख़ुशी -२ भागता हुआ नीचे आया और उनसे लिपट गया ..

हर्षित : "साले …तू तो हम लोगो को भूल ही गया है …इतना बड़ा आदमी हो गया है कि अपने दोस्तों से मिलने का टाइम भी नहीं है ..”

थापा : "अरे अब हमे लिए इसके पास टाइम कहा से आएगा ..अभी तो भाभीजी के पल्लू से बाहर निकलने का टाइम ही नहीं मिलता होगा ..हा हा ..”

बिल्लू : "यार …भाभीजी से याद आया, सुना है तेरी बीबी एकदम पटाखा है …भेन चोद ….मिलवायेगा नहीं क्या …हम उठा कर थोड़े ही ले जायेंगे उसको ..”

मनीष उसकी बात सुनकर झेंप सा गया …वैसे तो मनीष भी इनकी तरह ही था …ऐसे ही गालियां देकर बाते करने वाला ..दोस्तों कि बीबी पर भद्दी कमेंट करने वाला ..पर आज जब अपने ऊपर ऐसी परिस्थिति आयी तो उसे एहसास हुआ कि सामने वाले कितने गलत होते हैं ..

मनीष अपनी झेंप मिटाते हुए बोला : "अरे यारो ..तुम भी ना …रुको ..मैं मिलवाता हु ..”

और उसने ऊपर मुंह करके दिव्या को बुलाया : "दिव्याआआ ………..ओ दिव्या ……नीचे आओ जल्दी ..”

वो उस वक़्त नहा रही थी ..उसने बाथरूम का दरवाजा खोला और बोली : "रुकिए …दस मिनट में आयी …”

उसके दोस्त ये सुनकर हंसने लगे …जैसे उसका मजाक उड़ा रहे हो कि तेरी बीबी तो तेरी बात मानती ही नहीं है ..

ये देखकर मनीष को गुस्सा आ गया ..वो और जोर से चिल्लाया ..: "दस मिनट नहीं …अभी के अभी …जल्दी आओ …”

ये सुनते ही दिव्या के शरीर के रोंगटे खड़े हो गए …क्योंकि इतनी तेज आवाज से आज तक मनीष ने उसे नहीं पुकारा था ..उसने जल्दबाजी में अपना शरीर तोलिये से सुखाया और बाथरूम में लटकी अपनी रात वाली ड्रेस जो कि उसकी जाँघों तक ही आ पा रही थी पहन कर नीचे भागती चली गयी ..और वो भी बिना ब्रा के ..

अब उस बेचारी को क्या पता था कि मनीष उसे क्यों बुला रहा है ..
सीडियों से उतरते हुए उसकी दोनों छातियाँ ऊपर नीचे हो रही थी ..और मनीष के गुस्से के डर से और गाउन के कपडे से रगड़ खाने कि वजह से उसके ब्राउन निप्पल चेरी के दाने जितने बड़े होकर अलग ही चमक रहे थे ..

नीचे खड़े चारों लौंडे उसे ऐसे देख रहे थे मानो पका हुआ फल उनकी झोली में आकर गिरने वाला है ..और नीचे पहुंचकर जैसे ही वो उन सबके सामने पहुंची, उसे अपनी गलती का एहसास हुआ ..पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी ..

चारों कुत्तों कि नजरें उसकी छातियों पर सजे फ्रूट के दानों को देखकर अपनी जीभ से होंठों को गीले कर रहे थे ..दिव्या के बालों से निकल रहा पानी उसके चेहरे और ड्रेस को गीला कर रहा था , और उसकी मोटी जांघे देखकर तो उनकी जीभ ही बाहर आने को हो गयी ..जिसकी वजह से वो और भी सेक्सी लग रही थी ..सभी के लंड एक दम से खड़े होकर अपनी भाभी को नमस्ते बोलने लगे ..

मनीष को तो काटो तो खून नहीं ..ऐसी हालत हो रही थी ..फिर भी वो सहज भाव से मुस्कुराते हुए बोला : "दिव्या …ये मेरे बचपन के दोस्त है …”

और फिर सभी का नाम और उनके घर के बारे में जानकारी देने लगा ..पर दिव्या का ध्यान उनकी तरफ था ही नहीं ..उसकी हालत तो ऐसी थी जैसे बाजार में बिकने वाली गुलाम और सामने खड़े खरीदार उसके शरीर को अपनी आँखों से तोल – मोल कर खरीदने खड़े हैं ..

मनीष : "जाओ …इनके लिए कुछ पीने के लिए ले आओ …”

मनीष के कहने कि देर थी कि दिव्या पलटी और भागकर वापिस ऊपर चली गयी ..

चारों कि नजरें उसकी हिलती हुई गांड पर जम कर रह गयी ..

सभी कि हालत खराब हो चुकी थी, इतनी सेक्सी लड़की देखकर …

आखिर बिल्लू बोल ही पड़ा : ”उफ्फ्फ्फ़ ….क्या चीज है …यार तेरे तो मजे हो गए …दिन रात बजाता होगा इसकी …बोल साले …”

गलती उनकी भी नहीं थी जो वो इस तरह से बोल रहे थे ..मनीष भी ऐसे ही छेड़ता था अपने दोस्तों को ..खासकर बिल्लू को, क्योंकि इन चारों में से सिर्फ उसकी ही शादी हुई थी और वो भी बचपन में ..और इन सभी ने जवान होते हुए देखा था उसकी बीबी को ..और रोज उसके बारे में गन्दी-२ बातें बोलकर बिल्लू को परेशान किया करते थे ..इसलिए शायद आज बिल्लू उन सभी बातों का बदला उतार रहा था ..

राजेश ने उसे इशारे से चुप रहने को कहा ..कहीं उसे गुस्सा आ गया तो ”वो” काम नहीं हो पायेगा, जिसके लिए वो यहाँ आये थे ..

बिल्लू ने आगे कुछ नहीं बोला ..

मनीष सभी को लेकर बैठक में आ गया ..

अंदर बैठने के साथ ही राजेश ने जेब से ताश के पत्तो कि गड्डी निकाली और सेंटर टेबल पर रख दी ..जैसे बता रहा हो कि वो क्या करने आये हैं ..

मनीष कुछ बोलने ही वाला था कि तभी दिव्या वहाँ आ गयी ..

उसने साडी पहन ली थी ..पर्पल कलर की …और वो भी शिफॉन कि ..जो उसके मदमस्त शरीर पर किसी बेल कि भाँती लिपटी हुई थी ..और उसके हर उतार-चढ़ाव को दिखा रही थी .

पर इन सभी कुत्तों कि नजरें अब उसके नंगे पेट पर फिसल रही थी ..एकदम चिकना और सपाट पेट देखकर थापा का तो मन कर रहा था कि उसे वहीँ दबोच ले और उसकी नाभि के अंदर अपनी जीभ डाल दे ..

बिल्लू और हर्षित का भी यही हाल था ..पर कोई कुछ बोल नहीं रहा था ..

तभी बाजी मारते हुए राजेश उठा और उसने दिव्या के हाथों से ट्रे ले ली और बोला : "अरे भाभी …आप और तकलीफ ना करो …मैं दे देता हु सबको …
पर ऐसा करते हुए उस कमीने ने दिव्या के हाथों पर अपने हाथ रख दिए …और जल्द ही हटा भी लिए ..जैसे वो सब गलती से हुआ हो ..

दिव्या ने भी गौर नहीं किया ..और बिना कुछ बोले वहाँ से चली गयी ..

और उसके जाते ही, राजेश ने मनीष कि नजर से बचकर, अपने दोस्तों को देखते हुए, अपनी उँगलियाँ चाट ली ..

ये देखकर बाकी के तीनो दोस्त बुरी तरह से हंसने लगे ..

मनीष को कुछ समझ नहीं आया ..पर उसे पता चल गया कि उसकी बीबी से सम्बंधित ही होगा कुछ ..

खेर ..

कोल्ड्रिंक्स पीने के बाद राजेश ने गड्डी उठायी और उसमे से ताश निकाल ली ..

मनीष तो खुद ही कुलबुला रहा था खेलने के लिए ..

और उन्होंने अपना प्रिय खेल खेलना शुरू कर दिया ..

तीन पत्ती ..यानि फलेश .

राजेश ने पत्ते बांटे ..सभी ने बूट के पांच -२ सौ रूपए निकाल कर बीच में रख दिए ..

बिल्लू ने ब्लाइंड चली ..और एक पांच सौ का पत्ता बीच में रख दिया ..

थापा ने पत्ते देख लिए ..उसके पास एक बादशाह और दो छोटे पत्ते निकले ..उसने रिस्क लेना सही नहीं समझा और पैक कर लिया ..

राजेश ने भी ब्लाइंड खेली ..और मनीष ने भी ..

इस बार बिल्लू ने पत्ते देख लिए ..उसके पास सात का पेयर निकला ..वो खुश हो गया और उसने एक हजार कि चाल चल दी .

ये देखकर राजेश कि फट सी गयी …उसने भी पत्ते देखे ..पर सब बकवास ..एक भी पत्ता काम का नहीं था ..उसने भी पेक कर दिया ..

अब बचे थे बिल्लू और मनीष .

मनीष ने दांव बढ़ाते हुए एक हजार की ब्लाइंड खेली ..बिल्लू को तो जैसे यकीन था कि उसके पत्ते सबसे बड़े हैं ..उसने भी दो हजार कि चाल चल दी ..

अब मनीष ने भी अपने पत्ते देख लिए ..और उन्हें देखते ही उसके पुरे बदन में गर्मी सी दौड़ गयी ..

और अगले ही पल उसने चार हजार रूपए (बिल्लू कि चाल से डबल) बीच में फेंक दिए ..

सभी हैरान थे कि ऐसे कौन से पत्ते आ गए उसके पास जो वो इतना चौड़ा हो रहा है ..

अब मनीष से शो मांगने का मतलब था बिल्लू को भी चार हजार बीच में डालने पड़ते . वैसे भी अगली चाल चलने का रिस्क वो लेना नहीं चाहता था ..

पहली ही गेम में करीब दस हजार रूपए बीच में आ गए ..पर बिल्लू को जैसे अपने आप पर भरोसा था ..उसने शो मांगते हुए चार हजार बीच में फेंक दिए ..

और मनीष ने अपने पत्ते एक – २ करते हुए उसके सामने फेंके ..

पहला 5 

दूसरा 5 

और 

तीसरा भी 5 

पांच कि ट्रेल थी उसके पास … 

सभी उसकी किस्मत पर रश्क सा करने लगे ..

और मनीष भी बीच में पड़े नोट बटोरता हुआ ख़ुशी से दोहरा हुआ जा रहा था ..इतनी अच्छी शुरुवात तो आज तक उसकी नहीं हुई थी ..

दीवाली आने में अभी टाइम था पर उसकी दीवाली अभी से शुरू हो चुकी थी .

और यहीं तो जुवारी फंस जाते हैं ..अगेय भी ऐसे ही जीतने का लालच उन्हें ले डूबता है .

और अगली बार के पत्ते बाँटने शुरू किये मनीष ने .
मनीष को ख़ुशी से नोट बटोरते हुए देखकर थापा ने कहा "लगता है भाभीजी ने गुड लक दिया है …तभी तो पहली गेम में ही ट्रेल आ गयी …”

मनीष कुछ ना बोला ..वो जानता था कि वो उसे छेड़ने के लिए ऐसा बोल रहा है ..

पर जल्द ही उसे थापा कि बात सच लगने लगी ..क्योंकि अगली चार बाजियां वो लगातार हारता चला गया ..

और वो लगभग बीस हजार रूपए माइनस में चला गया ….

पत्ते बांटने शुरू हुए तो थापा ने फिर से कहा : "मनीष भाई ..भाभीजी को बुला लो …गुड लक के लिए ..हा हा ”

और इस बार उसने उसकी बात का बुरा नहीं माना …बल्कि आवाज देकर उसने दिव्या को वहाँ बुला ही लिया ..जैसे वो काफी देर से यही सोच रहा था ..

सभी ये देखकर हैरान थे कि जुआ जीतने के लिए मनीष कितनी आसानी से अपने कमीने दोस्तों कि परवाह किये बिना अपनी पत्नी को उनके सामने बुला रहा है ..

दिव्या उसकी आवाज सुनकर भागती हुई चली आयी ..और मनीष ने उसे अपने पास बैठने को कहा ..

दिव्या भी फीकी सी स्माइल देकर वहीँ मनीष के पास बैठ गयी .

उसकी बांयी ब्रैस्ट साइड में से झाँक रही थी ..जिसे हर्षित बड़े ही हर्षो उल्लास के साथ देख रहा था और अपने होंठों पर जीभ फेर कर अपनी प्यास को जाहिर कर रहा था ..

पत्ते बाँटने शुरू हुए ..

हर्षित ने शुरू में ही पेक कर दिया ..

थापा ने भी एक दो ब्लाइंड चलकर अपने पत्ते देखे और पेक कर लिया …

और मनीष को तो जैसे विशवास था कि दिव्या के आने के बाद उसके पास अच्छे पत्ते ही आयें होंगे इसलिए वो ब्लाइंड पर ब्लाइंड चल रहा था ..

बिल्लू भी इस बार झुकने को तैयार नहीं था , वो भी पांच-२ सौ के नोट फेंके जा रहा था ..जल्द ही बीच में लगभग चालीस हजार रूपए आ गए ..

आखिर बिल्लू ने अपने पत्ते उठा ही लिए ..उसके चेहरे पर चिंता के भाव थे ..क्योंकि पत्ते ही ऐसे आये थे उसके पास ..एक पांच था, दूसरा नौ और तीसरा बादशाह ..

फिर भी उसने हिम्मत करते हुए शो मांग ही लिया ..

मनीष ने अपने पत्ते खोलने शुरू किये ..

पहला गुलाम था ..

दुसरा चार नंबर ..

और तीसरा खोलते हुए उसकी सच में फट रही थी ..और दिल तो दिव्या का भी धड़क रहा था ..उसकी समझ से ये गेम बाहर थी ..पर इतना तो उसकी समझ में भी आ रहा था कि मनीष का तीसरा पत्ता ही उसे बचा सकता है ..

उसने धड़कते दिल से मनीष के हाथों के ऊपर अपना हाथ रख लिया ..और मनीष ने पत्ता पलट दिया ..

वो इक्का निकला ..

यानि गेम मनीष जीत गया ..

वो ख़ुशी से चिल्ला पड़ा ..और आवेश में आकर उसने दिव्या को गले से लगा कर होंठों पर चूम लिया ..ये सब इतनी जल्दी हुआ कि दिव्या को कुछ करने या कहने का मौका भी नहीं मिला ..उसकी समझ में नहीं आया कि कैसे रिएक्ट करे ..पर सबके सामने ऐसी किस्स पाकर वो शरमा जरुर गयी ..

और दूसरी तरफ मनीष अपने दोनों हाथों से बीच में पड़े हुए नोटों को समेटने लगा ..

बाकी के तीनो दोस्त थापा को ऐसे घूरने लगे जैसे उसने मनीष को दिव्या को बुलाने का सुझाव देकर कोई गुनाह कर दिया हो ..
थापा भी बड़ा कमीना था ..वो बोला : "भाभी को बुलाने के बाद इतनी बड़ी गेम जीते हो मनीष भाई ..चूमने के बाद तो हमारी फाड़ ही डालोगे …”

उसकी बात सुनकर दिव्या का चेहरा लाल सुर्ख हो उठा ..वो वहाँ से उठकर जाने लगी तो मनीष ने रोक दिया ..और बोला : "अरे इनकी बातों का बुरा मत मानो …ये ऐसे ही बोलते हैं ..तुम यहीं बैठो ”

वो अपना गुड लक खोना नहीं चाहता था ..

वैसे ये बात सच भी है ..जुवारी के दिल में अगर कोई बात बैठ जाए कि ऐसा करने से उसकी जीत होती है तो वो तब तक वैसा करता रहता है जब तक वो बुरी तरह से हार ना जाए ..इसे वो लोग अपनी भाषा में टोटका कहते हैं ..

और अभी तो दिव्या के आने भर से ही वो 45 हजार जीत गया था ..उसे इतनी आसानी से कैसे जाने देता वो ..

और ऐसे मौके को हर्षित जैसा कमीना भी नहीं छोड़ने वाला था ..

उसने अपना पैर आगे किया और अपनी जांघ को दिव्या कि जांघ के साथ सटा दिया ..

दिव्या का पूरा शरीर करंट खा गया ..और गर्म हो उठा ..

और उसकी गर्मी को हर्षित अपनी टांग पर साफ़ महसूस कर पा रहा था ..

मनीष और दिव्या एक ही सोफे पर बैठे थे ..इसलिए दूसरी तरफ खिसकने कि जगह नहीं थी दिव्या के पास ..इसलिए साईड वाले सोफे पर बैठे हुए हर्षित को दिव्या को छेड़ने में ज्यादा तकलीफ नहीं हो रही थी .

आखिर दिव्या ने सकुचाते हुए धीरे से मनीष से कहा : "सुनिये …मैं ऊपर जाऊ क्या …मेरा यहाँ क्या काम …”

मनीष गुस्से से आग बबूला हो उठा ..और बोला : "ऊपर क्या काम है तुझे ..बोला न यहीं बैठी रह …”

इतना काफी था दिव्या को डरा कर वहाँ बिठाये रखने के लिए ..मनीष का ये रूप आज वो पहली बार देख रही थी ..

हर्षित ने भी मौके कि नजाकत को भांपते हुए अपनी सिकाई चालु रखी और दिव्या कि जांघ पर हाथ रखते हुए बोला : "अरे भाभीजी …मनीष ठीक ही कह रहा है ..आपने देखा न कि आपके आते ही वो कितने रूपए जीता एक ही बार में ..आप भी बैठो और मजे लो ..”

हर्षित का हाथ कोई और नहीं देख पा रहा था ..क्योंकि पैर टेबल के नीचे छुप गए थे ..

दिव्या का बुरा हाल हो रहा था ..क्योंकि उसका पति मनीष जैसे जान कर भी अनजान सा बना हुआ था , अपने लुच्चे दोस्तों कि खा जाने वाली नजरें क्या मनीष को नहीं दिख रही थी ..फिर भी वो सिर्फ पैसे जीतने के लिए अपनी पत्नी को उनके सामने परोस कर रखना चाहता था ..

दिव्या को भी गुस्सा आ गया ..उसने मन ही मन सोचा कि जब उसके पति को ही उसकी कोई कदर नहीं है तो वो क्यों चिंता करे ..वो भी आराम से बैठ गयी ..

पर चिंता का विषय तो था हर्षित का हाथ ..जो धीऱे -2 उसकी जांघ को सेहला रहा था ..

और उसके सहलाने का ढंग ही इतना उत्तेजक था कि गुस्से में होने के बावजूद उसके रोंगटे खड़े होने लगे ..उसके होंठ कंपकंपाने लगे ..हाथों कि उँगलियाँ भी थरथराने लगी ..

अचानक उसे अपनी चूत के अंदर हलचल सी महसूस हुई ..और वही एहसास आया जो आज सुबह पोलिस वालों के लंड चूसते हुए आया था ..यानि वो उत्तेजित हो रही थी ..अंदर से ..और उसने आँखे बंद करते हुए एक गहरी सांस ली और अपना बांया हाथ नीचे लेजाकर हर्षित के हाथ के ऊपर रख दिया ..और उसे जोर से भींच दिया ..

जैसे कह रही हो ..’देवर जी ….जरा जोर से …भींचो न …’

दिव्या के कोमल हाथों को अपने हाथ पर पाकर हर्षित के तो होश ही उड़ गए ..उसने जल्दी से चारों तरफ देखा ..किसी का भी ध्यान उनकी तरफ नहीं था …उसने तो दिव्या से ऐसी उम्मीद ही नहीं कि थी ..और उसकी तरफ से ऐसा सिग्नल मिलते ही उसे लगने लगा कि अगर वो थोड़ी और कोशिश करे तो उसे चोद भी सकता है ..

पर उसे क्या पता था कि उसकी सोच कितनी जल्दी हकीकत में बदल जायेगी ..
हर्षित ने अपना हाथ घूमा कर उल्टा कर दिया ..और दिव्या के हाथ में अपनी उँगलियाँ फंसा कर उन्हें जकड लिया ..जैसे जन्मो के बिछड़े हुए प्रेमी हो वो ..इतनी व्याकुलता और अधीरपन महसूस हो रहा था दोनों को ..

दिव्या को अपने आप पर गुस्सा आ रहा था कि वो अपनी भावनाओ को क्यों काबू में नहीं रख पा रही है …उसके साथ आज तक ऐसा नहीं हुआ था ..उसने मनीष के अलावा किसी और के बारे में सोचा भी नहीं था ..और आज सुबह के वाक्ये ने और अब हर्षित के साथ ऐसी भावनाए निकलने से वो पूरी तरह से बदल चुकी थी ..वैसे इसमें कुछ हद तक मनीष का भी हाथ था क्योंकि उसकी बेरुखी और लालच कि वजह से ही ये सब हुआ था .

अचानक दिव्या ने अपने दांतों को भींचते हुए अपनी आँखे बंद कर ली और हर्षित के हाथ को धीरे खिसकाते हुए अपनी चूत के ऊपर तक ले आयी ..और वहाँ लेजाकर उसको जोर से दबा दिया ..

हर्षित को ऐसा महसूस हुआ कि उसका हाथ किसी भट्टी के आगे रख दिया गया है ..इतनी गर्मी निकल रही थी वहाँ से ..अब तक हर्षित को भी पता चल चूका था कि दिव्या भी वही चाहती है जो उसके मन में है ..इसलिए उसने अपने पंजे को खोलकर वापिस नीचे कि तरफ किया और एक जोरदार झटके के साथ दिव्या कि चूत को अपने शिकंजे में ले लिया ..

दिव्या कि भिंची हुई आँखे एकदम से खुल गयी और उसके मुंह से एक हलकी सी सिसकारी निकल गयी ..जिसे कोई नहीं सुन पाया ..क्योंकि सभी गेम के अंदर इतने घुसे हुए थे कि उन्हें दिव्या और हर्षित के बीच हो रही कार्यवाही ना तो दिखायी दे रही थी और ना ही सुनायी ..

हर्षित भी अपनी सुध बुध खोये हुए पांच -२ सौ के नोट उठा कर बीच में फेंके जा रहा था ..जैसे वो पैसे उसके लिए कोई एहमियत ही ना रखते हो ..और ऐसा करते -२ उसने लगभग दस हजार रूपए दिव्या के नाम कुर्बान कर दिए ..

लास्ट में सिर्फ मनीष और हर्षित ही रह गए थे ..बाकी सभी ने पेक कर दिया था ..अब हर्षित का ध्यान टेबल पर गया तो उसे मालुम चला कि आखिर हो क्या रहा है वहाँ ..मनीष तो ब्लाइंड पर ब्लाइंड चल रहा था क्योंकि उसे तो विशवास था कि दिव्या के होते हुए वो जीतेगा ही ..

आखिर हर्षित ने अपने पत्ते उठा ही लिए ..क्योंकि अब सभी का ध्यान उसकी और मनीष कि तरफ ही था ..

उसके पास गुलाम का पेयर आया था ..और साथ में आठ नंबर ..

उसके पास पैसे नहीं बचे थे क्योंकि आज के लिए वो सिर्फ एक लाख रूपए ही लेकर आया था, वर्ना पेयर आने के बाद वो चाल जरुर चलता ..इसलिए उसने शो मांग लिया ..

मनीष ने अपने पत्ते उठाये ..

और उठाने के साथ ही उसकी आँखे चमक उठी ..और वो मुस्कुरा दिया ..और बोला : "पेयर है मेरे पास .."

हर्षित भी मुस्कुराया और बोला : "मेरे पास भी ..”

सभी के चेहरो पर सस्पेन्स बढ़ता जा रहा था ..

मनीष बोला : "मेरे पास फोटो वाला पेयर है ..” उसके हाथ कुलबुला रहे थे बीच में पड़े हुए अस्सी हजार रूपए उठाने के लिये ..

हर्षित के पास भी फोटो वाला (गुलाम) पेयर था ..वो भी बोला : "मेरे पास भी फोटो वाला पेयर है …"

इतना सुनते ही मनीष का चेहरा फक्क सा रह गया ..और उसने बड़ी मुश्किल से अपने दो पत्ते नीचे 
फेंके और वो दोनों पत्ते भी गुलाम ही निकले ..जो कि हर्षित के पास भी थे ..

हर्षित ने भी दोनों गुलाम बीच में फेंक दिए ..और बोला : "ये रहा मेरा भी पेयर …”

सभी हेरान थे कि दोनों के पास सेम पेयर है ..यानि अब नतीजा सिर्फ तीसरा पत्ता ही निकाल सकता था, जिसके पास बड़ा पत्ता होगा वो जीतेगा बीच में पड़ा हुआ माल ..

मनीष से शो मांगी गयी थी इसलिए उसने अपना पत्ता बीच में फेंक दिया ..5 नंबर था उसके पास ..

और ये देखते ही हर्षित उछल पड़ा ..क्योंकि उसके पास 8 था ..और उसने बीच में पत्ता फेंका और सारे पैसे उठा कर अपनी तरफ खिसका लिये ..

मनीष को तो जैसे विशवास ही नहीं हो रहा था कि वो इतनी बड़ी गेम हार गया ..और वो भी दिव्या के गुड लक के होते हुए ..

पर उसे क्या पता था कि उसके गुड लक पर हर्षित ने सिंकाई करके उसे अपनी तरफ कर लिया था ..

वो आगे पत्ते बांटने ही वाले थे कि दिव्या बोल पड़ी : "मैं ….ऊपर जाऊ क्या ..”

मनीष ने झल्ला कर कहा : "जा …चली जा …”

जैसे वो खुद उसे वहाँ से भागना चाहता हो ..क्योंकि इतनी बड़ी हार कि वजह वो एक तरह से उसे ही मान रहा था ..

दिव्या वहाँ से उठी और हर्षित के आगे से होती हुई बाहर कि तरफ निकल कर ऊपर चली गयी ..

और जब वो हर्षित के आगे से निकल रही थी तो उसके चेहरे के सामने उसकी चूत वाला हिस्सा था जिसकी गर्मी से उसका चेहरा झुलस गया ..

बेचारा हर्षित अपने लंड पर हाथ फेरकर ही रह गया ..
अचानक मनीष ने बिल्लू से पूछा : "और सुना बिल्लू भाई ..रिया कैसी है ..”

रिया दरअसल में बिल्लू कि बहन थी ..जो काफी सुन्दर थी ..और पुरे गाँव में उसके हुस्न के चर्चे थे ..और मनीष तो उसके पीछे पागल था ..और उसने काफी मेहनत करके उसे पटा भी लिया था ….और ये वाली बात तो बिल्लू भी जानता था क्योंकि हर्षित ने एक दो बार उसे बताया था कि मनीष आजकल काफी मिलने लगा है रिया से ..पर दोस्ती के नाते वो कुछ नहीं बोल सकता था उसे ..और उनके बीच किस हद्द तक बात बड़ चुकी थी ये तो वो दोनों ही जानते थे .. 

और जब मनीष के पिताजी ने गाँव कि जमीन बेचकर शहर में शिफ्ट किया तो उसके दो महीने के अंदर ही रिया कि शादी भी हो गयी ..लड़का पास ही के गाँव का था ..और निठल्ला था, बस इधर – उधर के छोटे – मोटे काम करके अपना घर चला रहा था ..

बिल्लू बोला : "ठीक है …आजकल आयी हुई है अपने पति के साथ हमारे घर ..भाई दूज के बाद ही जायेगी अब ..”

तभी थापा बोल पड़ा : "अरे यार ….अपने जिज्जे को भी यहीं बुला ले न …बड़ा प्लेयर बनता है अपने आप को …आज देखते हैं ..कितना खेलना आता है उसे ..”

सभी को उसकी बात सही लगी ..मनीष भी बोल पड़ा : "एक काम कर न ..रिया को भी बुला ले ..वो ऊपर दिव्या के साथ बैठी रहेगी ..नहीं तो उसने बोर हो जाना है ..”

हर्षित और थापा तो हंस दिए ये बात सुनकर क्योंकि उन्हें पता था कि मनीष सिर्फ रिया को देखने के लिए ही ऐसा बोल रहा है, वर्ना दिव्या कि बोरियत कि फ़िक्र उसे क्या होगी ..

बिल्लू ने कुछ देर तक सोचा और फिर रिया को फ़ोन मिला कर उसे आने के लिए बोल दिया अपने पति के साथ ..

इन सभी के बीच हर्षित कि हालत बहुत बुरी थी ..वो कुलबुला रहा था दिव्या के पास जाने के लिए ..

पत्ते बाँटने जैसे हुए शुरू हुए, हर्षित ने नोटों कि गड्डी को मनीष कि तरफ खिसकाते हुए कहा : "यार तू मेरी ब्लाइंड चलता रह ..मैं बस अभी आया ..”

और उसने छोटी ऊँगली का इशारा करके समझाया कि वो मूतने जा रहा है ..

सभी अपनी-२ ब्लाइंड्स चलने लगे ..और हर्षित झटके से उठकर बाहर कि तरफ भाग लिया ..

और कमरे से निकलते ही वो बाहर बने बाथरूम में जाने के बदले ऊपर जाने वाली सीढ़ियों कि तरफ लपका और लगभग भागता हुआ दिव्या के बेडरूम के अंदर जा पहुंचा ..

दिव्या आराम से अपने बिस्तर पर सोने कि कोशिश कर रही थी ..अपनी बगल में तकिया लगाये ..जिसमे वो अपनी चूत से निकल रही गर्मी को ट्रान्सफर कर रही थी .

हर्षित सीधा जाकर दिव्या कि बाहर निकल रही गांड से जाकर चिपक गया ..और ऐसे झटके मारने लगा जैसे सच में उसकी गांड के अंदर लंड डाल रखा हो उसने ..

दिव्या एकदम से हड़बड़ा कर उठ गयी ..और उसके मुंह से चीख निकल गयी ..हर्षित ने उसके मुंह के ऊपर हाथ रखकर अगर उसे चुप न करा लिया होता तो सभी को पता चल जाता कि ऊपर क्या हो रहा है ..

दिव्या उसकी गिरफ्त में आकर छटपटाती रही और हर्षित का दूसरा हाथ सीधा उसकी ब्रैस्ट के ऊपर आया और उन्हें वो जोर -२ से मसलने लगा ..

और उसके मसलने का असर ऐसा हुआ दिव्या पर कि वो छटपटाते हुए ही मचलने लगी ..और अपने शरीर कि लहरों से हर्षित को टच करते हुए उसे भी मजा देने लगी ..

और जब हर्षित को विशवास हो गया कि वो अब चिल्लाएगी नहीं तो उसने उसके मुंह से हाथ हटा लिया ..और जैसे ही उसे अपनी तरफ घुमाया वो बावली सी होकर उसे ऐसे चूमने लगी जैसे वो उसका पति हो ..

हर्षित के चेहरे को पकड़ कर वो उसे पीने लगी ..बरसों कि प्यासी आत्मा कि तरह ..

हर्षित के हाथ उसकी नंगी कमर पर फिसल रहे थे ..और फिर उसने अचानक अपना मुंह नीचे करके उसकी ब्रैस्ट को अपने मुंह में ले लिया ..और कपडे के ऊपर से ही उसका निप्पल चूसने लगा ..

”आअयीईईईईई …….उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म ………अह्ह्ह्हह्ह्ह ……”

दिव्या से सहन नहीं हो पा रहा था ..उसने अपने ब्लाउस को पकड़ा और एक ही झटके में ब्लाउस के साथ-२ ब्रा को भी नीचे खिसका दिया ..और अपनी नंगी ब्रैस्ट उसके मुंह में ठूस दी ..

हर्षित कि तो चांदी हो गयी …इतना मोटा निप्पल उसने आज तक नहीं चूसा था ..अब उसे पक्का विशवास हो गया था कि वो उसकी चूत मार सकता है ..

वो बिना किसी कि परवाह के एक दूसरे को चूमने चाटने में लगे हुए थे ..और ना जाने कब तक लगे रहते अगर उन्हें बाहर गाडी के रुकने कि आवाज ना आयी होती ..

हर्षित एकदम से उठ खड़ा हुआ ..और भागकर खिड़की तक गया और बोला : "अरे ..वो रिया और उसका पति आ गए हैं ..मुझे नीचे जाना चाहिए ..”

इतना कहकर उसने अपना हुलिया ठीक किया और नीचे कि तरफ भाग गया ..

और दिव्या अपनी एक ब्रैस्ट को बाहर लटकाये हुए गहरी साँसे ले रही थी ..और कुछ पल पहले हुए सीन को याद करके विश्वास ही नहीं कर पा रही थी कि उसने वैसा कुछ किया ..और वो भी अपने पति के दोस्त के साथ ..और उसका पति नीचे बैठा हुआ ताश खेल रहा है ..उसे पता भी नहीं है कि उसकी पत्नी क्या गुल खिला रही है ..

ये सोचते हुए उसे खुद पर ही हंसी आ गयी ..और उसने अपनी गीली ब्रैस्ट को उठा कर अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगी ..और सोचने लगी कि ये कैसी दिव्या बाहर निकल रही है जो उसके व्यक्तित्व से बिलकुल अलग है ..और आगे चलकर ये पर्सनेलिटी और क्या गुल खिलायेगी ..ये शायद उसे भी नहीं पता था ..पर जो भी था, उसे मजा बहुत आ रहा था ..

दिव्या ने भी अपने कपडे ठीक किये और नीचे कि तरफ चल दी ..
जैसे ही वो सीडियां उतर कर नीचे पहुंची एक सुन्दर सी लड़की बाहर से अंदर आती दिखी ..उसे पता नहीं था कि नीचे क्या बात हुई है रिया को बुलाने के बारे में ..इसलिए वो बस सीडियों पर खड़ी रही ..

रिया उसे पास आयी और बोली : "ओहो …तो तुम ही दिव्या …वह बहुत सुन्दर हो तुम तो …मेरा नाम रिया है ..और मैं बलदेव (बिल्लू) कि बहन हु ..मनीष कहाँ है ..”

दिव्या ने हाथ का इशारा करके रिया को अंदर भेज दिया ..और रिया भी हिरनी कि तरह कुलांचे भरती हुई अंदर कि तरफ चल दी ..

और उसके पीछे -२ रिया का पति अंदर दाखिल हुआ ..जिसे देखते ही दिव्या के चेहरे का रंग ही उड़ गया ..

ये वही इन्स्पेक्टर था जिसने आज सुबह उन्हें रोका था और दिव्या से अपना लंड चुसवाया था ..

दिव्या ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वो ऐसे उसके सामने आ जाएगा ..

और दूसरी तरफ इन्स्पेक्टर (राहुल) भी उसे देखकर हैरान रह गया ..

राहुल : "अरे मेडम जी आप …और यहाँ …अच्छा तो आप हो मनीष बाबू कि बीबी …और वो सुबह जो आपके साथ थे वो ही मनीष बाबू थे …धत्त तेरी कि …मैं तो समझ रहा था कि आप धंधे वाली हो ..अगर पता होता तो कुछ और ही कर लेना था आज …ही ही ….”

वो भद्दी सी हंसी हँसता हुआ दिव्या के इतने करीब आ गया कि दिव्या कि गहरी साँसों को भी महसूस कर पा रहा था ..

दिव्या एकदम से पीछे हो गयी ..

राहुल : "हा हा …आप तो ऐसे डर रही हो मेडम जी जैसे मैं कोई भूत हु …अरे भूल गए क्या …आज सुबह ही तो आपने मेरा लंड चूसा था ..और अपने मुम्मे भी चुसवाये थे …”

वो बड़ी ही बेशर्मी से वो सब बोल रहा था जिसे सोचकर भी दिव्या को शर्म आ रही थी ..

दिव्या एकदम से भागकर अंदर चली गयी ..और उसके पीछे-२ राहुल भी अंदर आ गया ..

और दिव्या के पीछे-२ राहुल को अंदर आता देखकर मनीष एकदम से करंट खाकर उठ खड़ा हुआ ..

मनीष : "तू …तुम …..यहाँ …..कैसे …”

मनीष कि बात सुनते ही बिल्लू बोला : "अरे मनीष ..तू जानता है इन्हे …ये मेरे जीजाजी है …रिया के पति ..”

इतना सुनते ही मनीष के पसीने निकलने लगे ..

मनीष : "तुमने बताया नहीं कि इन्स्पेक्टर के साथ शादी हुई है रिया कि …”

बिल्ली : "हा हा ….क्या बोला …इन्स्पेक्टर …अरे नोटंकी में काम करता है हमारा जीजा ..और उसमे इन्स्पेक्टर बनता है …पर तुम कब मिले इनसे …”

अब मनीष क्या बोलता …वो समझ चुका था कि आज सुबह बिल्लू के जीजाजी ने उसे उल्लू बना कर दिव्या के साथ मजे लूट लिए ..और शायद ये उनका रोज का काम होगा तभी वो इतने कॉंफिडेंट से लग रहे थे ..

अब बेचारा मनीष भी क्या बोलता कि कहाँ मिला था राहुल उन्हें ..

उसे सोचता हुआ देखकर राहुल ही बोल पड़ा : "अरे साले साहब …हुआ यूँ कि आज सुबह मैं जब रिहर्सल के बाद वापिस आ रहा था तो इनकी कार खराब हो गयी थी ..बस इनकी मदद कर दी ..और शायद इन्होने समझा कि मैं सचमुच का इन्स्पेक्टर हु …हा हा …”

बेचारे मनीष के पास बोलने के लिए कुछ भी नहीं था ..

वो चुपचाप उठकर बाहर निकल आया ..

और उसके पीछे-२ रिया भी .
रिया ने पीछे से आवाज लगायी : "मनीष …..सुनो …अरे रुको तो …”

मनीष उसे अनसुना सा करता हुआ हवेली के पीछे बने स्टोर रूम कि तरफ चलता चला गया ..और अंदर पहुंचकर ये सोचने लगा कि कितनी आसानी से उस राहुल ने नकली इन्स्पेक्टर बनकर उसे उल्लू बना दिया ..और वो हरामी निकला भी कौन ..रिया का पति ..

वो ये सोच ही रहा था कि रिया भागती हुई अंदर आयी और पीछे से आकर मनीष से लिपट गयी : "ओह्ह्ह्हह्ह मनीषssssssssssss ….कब से बुला रही हु ….आने के बाद तुमने देखा ही नहीं मुझे ..ऐसा भी क्या हो गया ..मेरी शादी हो गयी है अब इसलिए ….”

मनीष उसकी तरफ गुस्से से पलटा और उसके चेहरे को अपने पंजे से दबा कर उसके मुंह पर चिल्लाया : "बात मत कर अपनी शादी कि मुझसे कमीनी ..शादी के लिए तुझे वो हरामी ही मिला था ..”

दरअसल मनीष का गुस्सा राहुल के ऊपर था पर उतार वो रिया पर रहा था ..

रिया (मुस्कुराते हुए) : "अच्छा …तो मेरे पति ने कोई हरामीपन जरुर दिखाया होगा ..तभी तू गुस्से से इतना लाल पीला हो रहा है ..चल जो भी है ..उसका बदला तू मुझसे उतार ले न ..”

इतना कहते हुए रिया ने उसका हाथ पकड़कर अपनी छाती पर रख दिया ..और उसे जोर से दबा दिया ..

शादी से पहले दोनों ने ना जाने कितनी बार एक दूसरे के साथ चुदाई कि थी ..कभी तालाब के किनारे , कभी घने जंगलों में ..और कितनी बार तो इसी स्टोर रूम में भी ..पर हर बार सभी कि नजरों से छुप कर ….

और आज जब रिया ने मनीष को अपनी शादी के बाद पहली बार देखा तो उसके अंदर कि उमंगें फिर से जाग उठी ..वैसे तो उसका पति उसकी दिन रात बजाता था पर पहला प्यार आखिर पहला ही होता है ..

अपनी छाती पर मनीष का चिर-परिचित हाथ लगते ही वो फिर से सुलग उठी ..पर मनीष के चेहरे पर गुस्से के अलावा कुछ और था ही नहीं ..

मनीष : "तू जानती भी है कि तेरे पति ने मेरे और मेरी पत्नी के साथ क्या किया आज …”

रिया जानती थी कि उसका पति अय्याश है ..बाहर भी मुंह मारता है ..और शायद आज भी कुछ ऐसा किया होगा उसने ..क्योंकि एक दो बार तो नकली पोलिस बनकर दूसरों को ठगने कि बात तो उसने खुद बतायी थी रिया को ..और ऐसी सिचुएशन में फंसाकर कैसे दूसरों का फायदा उठाया जा सकता है वो भी रिया जानती थी ..

रिया : "अच्छा …तो तुझे अपनी बीबी कि इतनी फ़िक्र है ..तो ऐसा कर न ..जो उसने तेरी बीबी के साथ किया, तू उसकी बीबी के साथ कर ले ..”

इतना कहते हुए वो उचकी और मनीष के होंठों से जोंक कि तरह चिपक गयी ..

मनीष से भी अब सहन करना मुश्किल हो गया था ..एक तो इतने दिनों के बाद उसकी माशूका मिली थी और ऊपर से खुद ही अपनी छातियाँ मलवा रही थी ..और साथ ही उसके पति पर आ रहा गुस्सा … वो आखिर क्या करता ..कब तक सब्र करता ..

मनीष ने उसकी कमर पर हाथ रखकर उसे जमीन से ऊपर उठा लिया ..रिया कि ब्रैस्ट काफी बड़ी थी जो दोनों के बाच पिस कर रह गयी .

मनीष उसके नरम होंठों को अपने पैने दांतो से कुतरने लगा ..

”उम्म्म्म …..अह्ह्हह्ह …..धीरे …..उहह्ह्हह्ह्ह्ह ……म्म्म्म्म्म्म ….माय लव …..अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह …..लव …मी …..उम्म्म्म्म्म्म …..”

मनीष जानता था कि उसके पास ज्यादा वक़्त नहीं है वर्ना उसकी चूत मारने में वो जरा भी देर नहीं करता ..उसने जल्दी से उसे नीचे धक्का दिया और अपनी पेंट कि जिप खोलकर अपना पहलवान उसके सामने लहरा दिया ..

रिया ने भी मुस्कुराते हुए अपनी नरम और मुलायम जीभ से उसके लंड को अपने मुंह में लेकर जोर-२ से चूसना शुरू कर दिया ..

मनीष को रिया इस वक़्त सिर्फ और सिर्फ राहुल कि बीबी के रूप में दिख रही थी ..और उससे अपना लंड चुस्वाकर उसे इतना सकून मिल रहा था जैसे उसका बदला पूरा हो गया हो ..
उसने रिया के मुंह को पकड़ा और उसके मुंह के अंदर बुरी तरह से झटके मारने लगा ..रिया के साथ इतना बेदर्दी बर्ताव आज तक कभी भी नहीं किया था मनीष ने ..

और आज रिया को मनीष का ये जंगली रूप भी पसंद आ रहा था ..उसने अपनी चूत के ऊपर हाथ रखकर उसे सलवार के ऊपर से ही मसलना शुरू कर दिया ..

और साथ ही साथ वो मनीष के लंड को लोलीपोप कि तरह से चूस रही थी .अचानक रिया ने अपनी ब्रैस्ट को बाहर निकाला और उसके बीच में मनीष के लंड को फंसा कर टिट फ़किंग करने लगी ..और जब झटके से मनीष का लंड ऊपर तक आता तो वो उसे चूम भी लेती ..

मनीष ने जल्दी-२ झटके मारते हुए दो मिनट के अंदर ही अपना सारा रस निकाल कर उसके अंदर पहुंचा दिया ..और वो भी हर बार कि तरह मनीष के मीठे रस को पीकर तृप्त हो गयी क्योंकि साथ ही साथ उसकी चूत का रस भी ढलक चुका था .

उन्होंने जल्दी से अपना हुलिया ठीक किया और अंदर कि तरफ चल दिए ..

अब मनीष का गुस्सा उतर चुका था .

तब तक पीछे से एक और बाजी शुरू हो चुकी थी ..किसी का भी ध्यान इस तरफ नहीं था कि मनीष और रिया एक साथ कहाँ गायब हो गए ..सिवाए दिव्या के ..जो काफी देर से सोच रही थी कि आखिर मनीष कहाँ गायब हो गया ..

और जैसे ही उसने मनीष को आते हुए देखा उसे सकून सा मिला और पीछे -२ रिया को देखकर उसे थोडा सा शक़ भी हुआ ..क्योंकि वो अभी तक अपने चेहरे को साफ़ करती हुई अंदर आ रही थी कि कहीं मनीष के रस कि बूंदे बाहर न रह गयी हो ..वैसे भी अपने सामान कि रक्षा करना हर बीबी का कर्त्तव्य है ..और यही शायद दिव्या भी कर रही थी .

मनीष ने आते ही कहा : "अरे …मेरा इन्तजार तो कर लेते …”

थापा : "भाई …तुझे फुर्सत ही कहाँ है अभी …”

उसने रिया कि तरफ देखते हुए मनीष से कहा और उसे एक आँख मार दी ..जैसे वो जानता था कि वो दोनों क्या कर रहे थे .

मनीष भी चुपचाप वहाँ बैठ गया ..और उनका खेल देखने लगा ..वो बाजी राहुल जीत गया ..

अब खेलने वाले 6 लोग थे . पत्ते बाँटने शुरू हुए ..

इस बार सबसे पहले हर्षित ने अपने पत्ते उठा कर देखे ..उसके पास इक्का और बादशाह थे ..साथ में पंजी ..उसने रिस्क लेते हुए चाल चल दी .

सामने से किसी ने भी चाल नहीं चली ..बल्कि राहुल ने तो ब्लाइंड भी डबल करते हुए एक हजार कर दी ..इसलिए अगली बार कि चाल राजेश के लिए दो हजार कि हो गयी ..उसने दो हजार कि चाल चल दी ..ये देखते हुए बिल्लू ने भी अपने पत्ते उठा ही लिए , उसे लगा कि शायद राजेश के पास अच्छे पत्ते आ गए हैं इसलिए वो चाल पर चाल चल रहा है ..उसके पास एक बेगम और दो छोटे पत्ते थे ..उसने झट से पेक कर दिया .उसकी देखा देखि राजेश ने भी पेक कर दिया ..

हर्षित ये देखकर खुश हो गया कि चलो अच्छा हुआ , दो बन्दे गए बीच में से .

अब मनीष, थापा और राहुल को भी लगा कि ब्लाइंड चलने का कोई फायेदा नहीं है ..क्या पता हर्षित के पास ट्रेल आ गयी हो किसी कि …ये सोचते हुए उन्होंने भी अपने-२ पत्ते उठा लिए .

थापा के पास मुफलिस पत्ते आये थे ..दो, चार और पांच ..उसने अपना माथा पीटते हुए पत्ते नीचे फेंक दिए और बोला : "अपुन का तो बेड लक ही खराब है आज ..काश मेरे पास भी कोई गुड लक होता ..”

उसका इशारा दिव्या कि तरफ था ..पर किसी ने भी उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया ..
अब बचे थे राहुल , मनीष और हर्षित ..

राहुल ने अपने पत्ते उठाये ..उसके पास इक्का था और दो छोटे पत्ते …फिर भी उसने ब्लफ मारते हुए चाल चल दी ..

उसके पीछे उसकी बीबी रिया खड़ी थी ..और जैसे ही राहुल ने पत्ते उठाये थे उसने इशारे से बुरा सा मुंह बनाते हुए मनीष को बता दिया कि उसके पत्ते बेकार हैं ..

मनीष ने अपने पत्ते देखे, उसके पास इक्का, बादशाह और दुक्की था ..यानि हर्षित के पत्तों के मुकाबले वो हार ही जाता ..पर उसे क्या पता था कि हर्षित के पास क्या है ..इसलिए उसने हिम्मत करते हुए चाल चल दी ..

बड़ा ही अजीब मंजर था ..किसी के पास भी ढंग के पत्ते नहीं थे ..फिर भी सभी ने चाल चल दी थी ..

हर्षित ने रिया को मनीष कि तरफ इशारा करते हुए देख लिया था ..और वो समझ भी गया था कि राहुल ब्लफ खेल रहा है ..उसने दिव्या कि तरफ देखा जो कि मनीष के पीछे खड़ी थी ..वो एकटक उसकी आँखों में देखता रहा ..जैसे मनीष के पत्तों के बारे में पूछ रहा हो ..पहले तो दिव्या घबरा गयी ..पर फिर ना जाने क्या सोचकर उसने भी इशारे से उसे समझा दिया कि मनीष के पत्ते भी बेकार है ..

बस इतना काफी था हर्षित के लिए, उसने पांच हजार कि चाल चल दी ..

अब तो राहुल कि भी फट गयी ..उसने हिम्मत करते हुए पैसे बीच में फेंके और राजेश से साइड शो मांग ली ..और जैसा वो सोच रहा था वो हार भी गया ..

अब मनीष और हर्षित थे बीच में .मनीष को तो विशवास हो चला था कि वो जीत ही जाएगा ..
पर दो चाल के बाद ही जब उसे लगने लगा कि अब और नहीं तो उसने आखिरकार शो मान ही ली ..

और हर्षित के पत्ते देखकर सभी ने उसकी किस्मत कि तारीफ कि ..और मन ही मन सुलग भी गए ..

हर्षित पूरे अस्सी हजार जीता था एक ही बार में ..

मनीष का बुरा हाल था ..अगली दो बाजियां भी वो नहीं जीत पाया , उसकी झुंझुलाहट बढ़ती जा रही थी ..उसे पता चल गया कि अब वो आगे नहीं जीत पायेगा ..इसलिए उसने बोला कि ‘आज के लिए इतना ही काफी है ‘ 

सभी ने मन मारते हुए उसकी बात मान ली ..और अगले दिन का वादा करके सभी अपने-२ घर चले गए .

मनीष आज करीब दो लाख रूपए हार चूका था . वो अपने कमरे में जाकर सो गया ..शाम का अँधेरा फ़ैल चूका था ..दिव्या को नींद नहीं आ रही थी .इसलिए उसने एक शाल पहनी और बाहर निकल गयी ..
बाहर निकलकर वो गाँव के बाहर बनी नदी कि तरफ चल दी ..क्योंकि उनके घर से उस नदी का पानी दूर से काफी सुन्दर दिख रहा था ..

चारों तरफ घना अँधेरा फेला था ..बस आकाश से चाँद कि हलकी रौशनी पड़ रही थी ..

उसके मन में अचानक एक इंग्लिश मूवी का सीन आ गया जिसमे हिरोइन समुंदर में नंगी नहा रही थी ..और ये सोचते ही उसके अंदर छुपी एक विकृत इच्छा बाहर निकल आयी और उसने अपनी शाल निकाल कर एक पेड़ के नीचे रख दी ..

चारों तरफ एक बार फिर से देखने के बाद उसने अपनी टी शर्ट और जींस भी उतार दी ..हलकी ठंडी हवा चल रही थी उसके पुरे बदन में एक सिहरन सी दौड़ गयी ..अब वो सिर्फ ब्लेक पेंटी और ब्रा में थी ..और नीचे हील वाले सेंडिल .

वो थोड़ी देर तक तो उन बचे हुए कपड़ों के नदी के किनारे टहलती रही ..और जब थोड़ी गर्मी आ गयी बदन में तो उसने हिम्मत करते हुए अपने बाकी के दोनों वस्त्र भी उतार कर वहाँ रख दिए ..
 
और तभी आकाश में से बादल तितर बितर हो गए और चाँद कि पूरी रौशनी में नहाकर दिव्या का दूध जैसा बदन चमक कर लश्कारे मारने लगा ..उसने एक मादक सी अंगड़ाई ली और चाँद कि रौशनी में अपने हुस्न को निहारने लगी ..


तभी उसे कुछ लोगो कि बात करने कि आवाज सुनायी दी ..जो शायद नदी कि तरफ ही आ रहे थे ..उसे समझ नहीं आया कि क्या करे , क्योंकि उसके कपडे जहाँ पड़े थे आवाज वहीँ से आ रही थी ..वो घूमी और जल्दी से नदी के अंदर घुस गयी ..

और बीच में एक चट्टान के पीछे जाकर चुप गयी ..पूरी नंगी .

वो आदमी बातें करते-२ वहाँ आ पहुंचे और आते ही नदी के किनारे आकर बैठ गए ..उनके हाथ में एक बीयर कि बोतल कि पेटी थी ..

दिव्या उन्हें छुप कर देख रही थी ..और जैसे ही उनके चेहरे देखे तो उसके पुरे शरीर में करंट सा दौड़ गया ..

वो हर्षित , थापा और राजेश थे ..

राहुल और रिया तो घर चले गए थे ..और चूँकि हर्षित आज काफी माल जीता था इसलिए वो अपने दोस्तों को पार्टी दे रहा था ..

हर्षित : " चियर्स भाई लोगो …..आज जितनी पीनी है पी लो …मेरी तरफ से फुल नाईट पार्टी ….हा हा ..”

थापा बोला : "भाई ..मानना पड़ेगा …तेरी किस्मत को …आज तो तूने इतना माल लूटा है कि जलन हो रही है मुझे …”

हर्षित : "साले …जब तू जीतता है तो मुझे क्या ख़ुशी होती है …हाँ …बोल …”

थापा कुछ न बोला …

राजेश : "वैसे ये सिर्फ पैसे जीतने कि ख़ुशी नहीं है …और भी कुछ ख़ास है …”

उसकी बात सुनकर हर्षित और थापा उसके चेहरे कि तरफ देखने लगे ..
हर्षित का चेहरा ऐसा हो गया जैसे उसकी कोई चोरी पकड़ी गयी हो ..

और राजेश कि बात सुनकर नदी के अंदर छुपी हुई दिव्या भी घबरा गयी ..

राजेश बोला : "भाई …देख रहा था मैं वो सब …कैसे तुम और भाभी जी ..एक दूसरे को देख रहे थे ..कैसे एक साथ गायब हुए ..”

थापा बोला : "अच्छा जी ….मैंने तो नोट ही नहीं किया ये सब …पैसे हारते हुए दिमाग जो खराब हो गया था मेरा …अच्छा बता न हर्षित भाई …क्या किया भाभी के साथ …बोल न …साले ..”

अब हर्षित को पता चल चूका था कि उसके कमीने दोस्तों से सब छुपाना मुश्किल होगा ..इसलिए वो रहस्यमयी हंसी के साथ बोला : "यार …बस ये समझ लो कि तुम्हारे भाई कि लॉटरी लग गयी है ..”

थापा : "सच बोल साले …क्या – क्या किया …जल्दी बोल …”

और फिर हर्षित ने नमक मिर्च लगा कर एक – एक बात अपने दोस्तों को बता दी ..

और पानी में खड़ी हुई दिव्या शर्म से पानी हुई जा रही थी ..

तभी राजेश खड़ा हुआ और मूतने के लिए पेड़ कि तरफ जाने लगा , उसे देखकर थापा बोला : "भाई ..मूतने ही जा रहा है या भाभी के नाम कि मुठ मारने ..”

राजेश बोला : "यार …हमारी किस्मत तो ऐसी नहीं है कि वो पारी हमारा लंड चूसे ..अब उसके नाम कि मुठ मारकर ही गुजारा करना पड़ेगा ..हा हा "

उसकी बात सुनकर सभी हंसने लगे ..

पर वो राजेश उसी पेड़ के नीचे जा पहुंचा जहाँ दिव्या के कपडे पड़े हुए थे ..

जैसे ही उसने मूतने के लिए अपना लंड निकाला उसे दिव्या कि ब्रा पड़ी हुई दिखायी दी ..उसने आँखे मलते हुए वो उठा ली ..और फिर एक – २ करते हुए सारे कपडे उठा -२ कर देखने लगा ..

और चिल्ला कर वो हर्षित से बोला : "अरे हर्षित भाई …ये देखो ..क्या मिला मुझे यहाँ ..”

और अपने हाथों में पूरा पिटारा उठा कर वो वहीं पर ले आया जहाँ वो दोनों बैठे थे ..

और उसके हाथ में अपने कपडे देखकर दिव्या कि हालत खराब हो गयी .

थापा : "ओह तेरी बहन कि चूत ….ये किसके कपडे है साले …कहाँ से मिले ??"

राजेश ने पेड़ कि तरफ इशारा किया ..

अचानक हर्षित ने दिव्या का टॉप उठा कर देखा …और फिर ब्रा को गौर से देखने के बाद चिल्ला पड़ा : "अरे साले …ये तो दिव्या भाभी के कपडे हैं …”

उसने सुबह से वही कपडे पहने हुए थे और हर्षित से ज्यादा अच्छी तरह कौन जान सकता था वो ..

सभी ने अपने दिमाग पर जोर दिया तो उन्हें भी याद आ गया कि ये टॉप और जींस तो दिव्या ने पहना हुआ था .. 
हर्षित : "पर ये यहाँ आये कैसे …अभी आधा घंटा पहले तक तो भाभी ने पहने हुए थे ..”

सभी सोचने लगे …

हर्षित : "यानि भाभी यहाँ आयी थी …और अपने कपडे उतार कर ..वो …वो …पानी के अंदर …”

और सभी घबरा कर पानी कि तरफ देखने लगे ..उन्हें लगा कि दिव्या पानी में डूब गयी है ..

हर्षित ने आनन् फानन में अपने कपडे उतारे और पानी के अंदर कूद गया , दिव्या को ढूंढने के लिए ..

थापा पीछे जंगल कि तरफ भागा , उसे लगा कि कहीं वो वहाँ कि तरफ न चली गयी हो ..और राजेश अपना सर पकड़ कर इधर उधर देखते हुए बड़बड़ाने लगा : "साला …सारा नशा उतर गया …”

पानी के अंदर इधर उधर ढूंढने के बाद जैसे ही हर्षित उस चट्टान कि तरफ जाने लगा तो दिव्या को लगा कि अब बचना बेकार है ..पर तभी उसके दिमाग के अंदर एक आईडिया आया और वो चट्टान के ऊपर उलटी लेट गयी ..और बेहोशी का नाटक करने लगी ..

जैसे ही हर्षित तैरता हुआ वहाँ पहुंचा वो जोर से चिल्लाया : "मिल गयी ….यहाँ है दिव्या .."

और जैसे ही राजेश ने ये सुना वो भागता हुआ आया और पानी के अंदर कूद गया वो भी ..और वहाँ पहुंचकर उसकी हालत खराब हो गयी ..दिव्या पूरी नंगी पड़ी हुई थी वहाँ ..

उसने होश सम्भालते हुए हर्षित कि मदद कि और दोनों ने दिव्या के नंगे जिस्म को पकड़कर तैरते हुए बाहर निकाल लिया …

तब तक थापा भी वापिस आ गया …और आते ही उसने देखा कि दिव्या का नंगा जिस्म दोनों के बीच में पड़ा हुआ है ..

थापा : "ओह …तेरी माँ कि …चूत साले ….ये तो सच में दिव्या भाभी है …और वो भी पूरी नंगी …”

इतना कहते हुए उसने अपना हाथ आगे किया और उसकी ब्रैस्ट को पकड़ कर हिला दिया ..

हर्षित ने उसके हाथ को झटका : "साले …क्या कर रहा है …कोई गलत हरकत मत कर …समझा …लगता है तैरना नहीं आता था ..बेहोश हो गयी है ..”

वो तीनो उसके नंगे जिस्म को ऊपर से नीचे तक घूर – २ कर देख रहे थे ..पर उनके संस्कार कुछ भी करने कि इजाजत नहीं दे रहे थे . एक तो वो उनके दोस्त कि बीबी और ऊपर से बेहोश भी थी ..इसलिए वो उसका गलत फायेदा नहीं उठाना चाहते थे ..

पर लंड के पास दिमाग नहीं होता ..वो ये सब नहीं सोचता ..

दिव्या का नंगा बदन देखकर तीनों का लंड पूरी तरह से टन्ना चूका था ..

तीनों को दिव्या बेहोशी कि हालत में एक नहीं तीन दिख रही थी ..हर एक लिए एक दिव्या ..

थापा ने हर्षित कि तरफ देखा और बोला : "भाई …अब क्या करे …मेरे से तो सब्र नहीं हो रहा ये सब देखकर …ये देख ..”

उसने अपने लंड कि तरफ इशारा किया ..सभी वहाँ देखने लगे ..और दिव्या ने भी थोड़ी सी आँख खोलकर वहाँ देखा ..सच में बुरी तरह से हिनहिना रहा था सभी का घोडा ..

और ये सब देखकर उसकी चूत के अंदर से भी एक गर्म पानी कि धार बाहर निकल पड़ी ..

हर्षित अब तक समझ नहीं पा रहा था कि करे तो क्या करे ..क्योंकि मन तो उसका भी कर रहा था ..फिर वो सभी को आदेश देता हुआ बोला : "देखो भाई …इस वक़्त भाभी का फायेदा उठाना तो बुरी बात है ..पर जब ये इतना खुल कर नहाने के लिए यहाँ नंगी जा सकती है तो थोडा बहुत तो हम लोग भी कर सकते हैं …पर ज्यादा कुछ करने कि मत सोचना …ठीक है ..”

सभी ने हाँ में सर हिला कर उसकी बात मान ली …थापा ने मन ही मन कहा कुछ ना होने से कुछ होना बेहतर है ..’
दिव्या के पुरे शरीर में चींटियाँ सी रेंग रही थी ..हलकी हवा चलने से उसका शरीर भी कांप रहा था ..जिसे देखकर थापा बोला : "यार …लगता है भाभी को ठण्ड लग गयी है ..देखो तो कैसे कांप रहा है इनका शरीर ..”

और ये कहते -२ उसने अपने दोनों हाथों को उसके पेट पर रख दिया और ऐसे घिसने लगा जैसे जिन्न निकालने के लिए चिराग को घिस रहा हो ..और घिसाई करते – २ उसके हाथ ऊपर खिसक आये और उसने बड़े – २ हाथों से उसकी पहाड़ी चोटियों कि बर्फ अपने हाथों से तराशनी शुरू कर दी ..

सभी अपने मुंह से लार टपकाए ये सब देख रहे थे ..

और फिर धीरे – २ राजेश के हाथ भी सरकते हुए उसकी जाँघों पर आये और वो उन्हें दबाने लगा ..अब बेचारा हर्षित भी क्या करता ..उसने भी अपने हाथों से उसकी छातियों कि मालिश शुरू कर दी ..

अब दिव्या के पुरे शरीर पर 6 हाथ और तीस उँगलियाँ फिसल रही थी ..जो उसे मसल रही थी ..कचोट रही थी ..नोच रही थी ..और उसके शरीर को गरमी प्रदान कर रहे थे .उनके हिसाब से तो दिव्या बेहोश थी ..पर वो शायद ये नहीं जानते थे कि औरत चाहे जितनी मर्जी गहरी नींद या बेहोशी में हो, उसके शरीर के साथ क्या हो रहा है वो सब उसे पता रहता है .

दिव्या तो वैसे खुद ही यही चाहती थी ..पर बेहोशी का नाटक करते हुए वो सोच रही थी कि उसकी मर्यादा अभी तक बची हुई है क्योंकि वो अपनी तरफ से तो ये सब नहीं कर रही ..

और यही सोचकर वो बस मजे लेने के लिए बेहोशी का नाटक करती रही ताकि जितना हो सके उसका फल मिल सके . वैसे उसके शरीर के साथ इतना खिलवाड़ हो रहा था जिसकी वजह से उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी ..पर वो कुछ कर भी नहीं सकती थी .

काफी देर तक उसके शरीर का आटा गूंथने के बाद सभी कि हालत बिगड़ सी गयी ..उनका वो हिसाब हो गया कि ‘ये दिल मांगे मोर ..’

इसलिए सबसे पहले राजेश ने अपना लंड बाहर निकाला और एक हाथ से दिव्या का मुम्मा मसलते हुए अपने लंड को भी मसलने लगा ..

और उसकी देखा देखि थापा और हर्षित ने भी अपने-२ लंड बाहर निकाल लिए और उन्हें मसलने लगे ..

दिव्या ने कनखियों से देखा कि किस तरह सभी के घोड़े अस्तबल से बाहर निकल आये हैं और दौड़ने कि तैयारी कर रहे हैं ..इतने सारे लंड एक साथ उसने पहली बार देखे थे ..

अचानक थापा थोडा नीचे गया और उसने दिव्या कि टाँगे चौड़ी करते हुए अपने लंड को उसकी चूत के सामने रख दिया ..

हर्षित चिल्लाया : "अबे थापा …बोला न ..ये मत कर …समझता नहीं है साले ..”

थापा : "यार ….इतना कुछ तो कर ही रहे हैं …अब ये भी कर डालते हैं ..”

हर्षित : "नहीं …ये गलत है ..इसकी बेहोशी का ऐसे फायदा उठाना गलत है .."

राजेश : "हाँ थापा ….हर्षित सही केह रहा है …अगर ज्यादा ही आग लगी है तो इसके मुंह में कर लेते हैं .."

हर्षित को भी राजेश कि बात सही लगी ..पर सवाल ये कौन डालेगा उसके मुंह के अंदर अपना लंड ..क्योंकि मुंह में लंड डालने कि बात सुनते ही सभी के चेहरे पर रौनक सी आ गयी थी ..

राजेश बोला : "मेरे पास एक आईडिया है …"

और इतना कहते हुए उसने अपनी जेब से ताश कि गड्डी निकाल ली और बोला : "हम तीनो एक – २ पत्ता बाँटेंगे , जिसका बड़ा पत्ता आएगा वो डालेगा भाभी के मुंह में अपना लंड ..”

सभी को उसकी बात सही लगी ..दिव्या मन ही मन सोचने लगी कि यहाँ भी इन जुआरियों को जुआ खेलने से फुर्सत नहीं है ..

राजेश ने पत्ते निकाले और दिव्या के ऊपर ही पत्ते बांटने शुरू कर दिए , एक पत्ता दिव्या के दांये मुम्मे पर , दूसरा उसके बाएं मुम्मे पर और तीसरा उसकी चूत पर ..
तीनो के दिल कि धड़कन तेजी से चल रही थी ..सभी ने अपने-२ पत्ते उठा लिए ..और ऊपर वाले का नाम लेकर धीरे -२ देखा ..

थापा के पास बेगम आयी थी ..वो ख़ुशी से हवा में उड़ने लग गया ..राजेश के पास पांच नंबर था ..उसने पत्ते को नीचे वापिस दिव्या कि चूत पर फेंक दिया ..उसके ऊपर थापा ने अपनी बेगम फेंक दी ..

अब दोनों कि नजरें हर्षित पर थी ..उसने जैसे ही अपना पत्ता देखा वो ख़ुशी से उछल पड़ा ..उसके पास इक्का आया था ..उसने सीना फुला कर अपना पत्ता बेगम के ऊपर दे मारा …

थापा का चेहरा फीका पड़ गया .. 

हर्षित अपने लंड को सहलाते हुए दिव्या के चेहरे कि तरफ आकर बैठ गया ..

अब तक दिव्या को भी पता चल चूका था कि क्या हुआ है ..और वो खुश भी थी कि हर्षित ये बाजी जीता है ..क्योंकि राजेश और थापा के दुर्गन्ध वाले शरीर के अपने पास बिठाकर ही वो इतनी परेशान थी कि उनके लंड अपने मुंह में लेने का सोचकर ही उसे उलटी सी आ रही थी ..

राजेश ने अपनी पेंट पूरी तरह से उतार दी ..और दिव्या के चेहरे के दोनों तरफ अपने घुटने मोड़कर अपने लंड को उसके चेहरे के आगे लटका दिया ..और फिर उसके गुलाब जैसी पंखुड़ी वाले होंठों को खोलकर उसके मुंह के अंदर अपना लंड धकेल दिया .

और धीरे-२ धक्के लगाकर उसके मुंह कि चुदाई करने लगा ..

दिव्या के मुंह के अंदर वो पूरा नहीं आ रहा था ..पर उसका चॉकलेटी स्वाद उसे बहुत पसंद आया था ..इसलिए उसने भी अपनी जीभ से उसके लंड कि सिंकाई करनी शुरू कर दी ..

एक पल के लिए तो हर्षित को लगा कि दिव्या उसके लंड को सच में चूस रही है …वो सोचने लगा कि कहीं वो बेहोशी का नाटक तो नहीं कर रही ..और ये सोचकर वो थोड़ी देर के लिए रुक गया ..दिव्या को भी इसका आभास हो गया और उसने भी लंड कि चुसाई बंद कर दी ..और जब हर्षित को लगा कि सब ठीक है तो उसने फिर से अपने लंड को उसके मुंह के अंदर पेलना शुरू कर दिया ..

दूसरी तरफ थापा कि हालत खराब होने लगी ..उसके लंड से पिचकारी निकलने को हो रही थी ..उसने अपना मुंह सीधा लेजाकर दिव्या कि चिकनी चूत पर लगाया और वहाँ से निकल रहा शहद चूसते हुए अपने लंड को जोर से मसलने लगा ..

राजेश भी अपने चरम पर था, उसने भी दिव्या के दोनों स्तनों को बारी-२ से मसलते हुए अपने लंड कि नसों में सफ़ेद वीर्य का पर्वाह करने का पूरा इंतजाम कर लिया .. 
दिव्या के साथ जो भी हो रहा था , उसका मन कर रहा था कि वो उठ बैठे और पूरी तरह से भोगने दे सभी को अपना जिस्म ..पर ना जाने क्या उसे अंदर से वो सब कुछ करने से रोके हुआ था ..

सबसे ज्यादा मजा तो उसकी चूत से निकल रही तरंगो से मिल रहा था उसे ..जिसे थापा किसी जंगली कुत्ते कि तरह चाट रहा था .उसकी जीभ इतनी लम्बी थी कि चूत के आखिरी सिरे तक पहुंचकर वहाँ से भी मलाई को समेट कर ला रही थी . और उसके निप्पल तो उसकी बॉडी का सबसे सेंसेटिव पॉइंट थे , जिन्हे राजेश ऐसे मसल रहा था जैसे उनमे कोई जान ही ना हो ..कोई और मौका होता तो वो चिल्ला रही होती ..पर आज वो चिल्लाती भी कैसे, उसके मुंह में हर्षित का लंड जो था जिसे वो मुंह में भींचकर अपनी चीख को दबा रही थी .

अचानक थापा उठ बैठा और अपने लंड को दिव्या कि तरफ करके चिल्लाया : "अह्ह्हह्ह …….उम्म्म्म …..”

सभी समझ गए कि उसकी तोप के गोले निकलने वाले हैं …और यही हाल राजेश और हर्षित का भी था …हर्षित ने भी अपना लंड बाहर खींच लिया और दिव्या के साईड में आकर खड़ा हो गया ..राजेश तो पहले से ही उसके दूसरी तरफ खड़ा था ..

और फिर एक साथ सभी अपने-२ लंड मसलकर दिव्या के सेक्सी बदन को देखकर मुठ मारने लगे ..

सबसे पहले थापा के लंड कि बरसात हुई दिव्या के गर्म जिस्म पर …उसपर वीर्य कि बूंदे पड़ते ही उसका जिस्म सुलग पड़ा ..

थापा चिल्लाया : "अह्ह्ह्हह्ह्ह …..भाभी …….ओह्ह्हह्ह …..दिव्या भाभी …….उम्म्म्म्म्म्म्म ….”

और उसने अपने लंड का पानी दिव्या के नाम कुर्बान कर दिया ..

और फिर राजेश और हर्षित ने भी एक साथ अपनी पिचकारियों से उसके शरीर को भिगोना शुरू कर दिया ..राजेश का निशाना उसके मुम्मे थे और हर्षित का निशाना उसका चेहरा ..

और देखते ही देखते दोनों ने अपने रस से उसके ऊपर सफ़ेद और गाड़े रस कि चादर सी बिछा दी ..

दिव्या को ऐसा लगा कि ठण्ड के मौसम में किसी ने उसके शरीर पर गर्म चादर औढ़ा दी हो ..वो पूरी तरह से उनके रस में नहाकर भीग गयी थी ..

और जब तूफ़ान थमा तो सभी सोचने लगे कि अब क्या किया जाए ..किसी कि समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे …क्योंकि एक तो वो पूरी तरह से नंगी थी और ऊपर से उन्होंने उसके शरीर पर अपना वीर्य गिराकर उसे गन्दा भी कर दिया था ..

तभी दिव्या ने बेहोशी से उठने का नाटक करते हुए धीरे -२ हिलना शुरू कर दिया …

हर्षित बोला : "लगता है होश आ रहा है ..एक काम करो ..इन्हे उठाकर किनारे पर लिटा दो ..”

थापा और राजेश ने दिव्या के हाथ पाँव पकड़कर उठाया और उसे नदी के किनारे पर लिटा दिया ..जहाँ का पानी उसके आधे शरीर तक आ रहा था ..और पानी कि एक दो लहरो ने आकर उसके शरीर पर लगे चिपचिपे रस को धोकर रख दिया ..

इतना करने के बाद सभी वहाँ से दुम दबा कर भाग लिए ..

उनके जाते ही दिव्या एक दम से उठ बैठी ..और उसका हाथ सीधा अपनी चूत के ऊपर गया और वो उसे मसलते हुए जोरों से बुदबुदाने लगी …

”अम्म्म्म्म्म ……अह्ह्ह्हह्ह …….उम्म्म्म्म्म्म …..”

और अगले ही पल उसकी चूत से निकले गर्म पानी ने नदी के पानी में मिलकर वहाँ आग सी लगा दी ..

उसके बाद उसने अपने शरीर को पूरी तरह से साफ़ किया और उठकर अपने कपडे पहन लिए .और वापिस अपने घर कि तरफ चल दी .

मनीष गहरी नींद में सो रहा था ..वो चुपचाप जाकर उसकी बगल में सो गयी .आज कि रात उसकी जिंदगी में किसी फेंटेसी कि तरह थी .

अगला दिन काफी रोचक होने वाला था .
अगले दिन जब दिव्या नींद से उठी तो कमरे में हरिया काका सफाई करने में लगे हुए थे ..शायद ये उनका रोज का नियम था ..मनीष बिस्तर पर नहीं था ..उसने टाइम देखा आठ बजने वाले थे ..अभी ज्यादा टाइम भी नहीं हुआ था ..अचानक रात कि बात याद करते हुए उसके शरीर से गर्मी सी निकलने लगी ..उसने साटन का गाउन पहना हुआ था ..और रात को जल्दबाजी के चक्कर में उसने ब्रा पेंटी भी नहीं पहनी थी ..

उसने हरिया काका से भी मजे लेने कि सोची ..क्योंकि कल उसके कमरे के बाहर ”किसी” का वीर्य पड़ा मिला था , उसे पूरा विश्वास था कि वो हरिया काका का ही है ..और आज वो इस बात को कन्फर्म करना चाहती थी ..

उसने अपने शरीर पर पड़ी हुई चादर उतार कर नीचे कर दी .और अपने कूल्हे हरिया काका कि तरफ निकाल कर सो गयी ..

उसकी एक टांग दूसरी टांग के ऊपर चढ़ी हुई थी ..जिसकी वजह से उसकी गांड का एक हिस्सा तराशा हुआ सा बाहर निकल आया था ..और उसकी गांड का चीरा साफ़ दिख रहा था महीन कपडे के नीचे ..

हरिया काका जैसे ही झाड़ू मारते -२ उसकी तरफ पलटे वो वहीँ जम कर रह गए ..उनके हाथों से झाड़ू फिसल कर नीचे गिर गया ..उनके बूढ़े शरीर के अंदर से चिंगारियां सी निकलने लगी ..और बहुरानी कि सपाट गांड के उतार चढ़ाव देखकर उनकी धोती में उठाव आ गया ..और उनका पहलवान खड़ा होने लगा ..

दिव्या का मुंह जिस तरफ था वहाँ ड्रेसिंग टेबल रखा हुआ था इसलिए वो अपनी अधखुली आँखों से पीछे खड़े हुए हरिया काका कि हर हरकत देख पा रही थी ..उनके चेहरे पर आ रहे भाव को पड़ पा रही थी ..

हरिया काका थोड़ी देर तक तो बुत बने हुए खड़े रहे और फिर दरवाजे तक गए और बाहर झाँक कर देखा ..शायद सुनिश्चित करना चाह रहे थे कि मनीष आस पास तो नहीं है ..और फिर उन्होंने गजब कि हिम्मत का प्रदर्शन करते हुए दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और चिटखनी लगा दी ..

दिव्या को उनसे ऐसे बर्ताव कि उम्मीद बिलकुल नहीं थी ..उसका दिल जोर से धड़कने लगा ..

हरिया काका धीरे -२ उसके पास आये और दिव्या को आवाज लगायी : "बहु रानी …ओ बहु रानी ..”

और एक दो आवाजों के बाद उसने दिव्या कि कमर के ऊपर हाथ रखकर उसे हिलाया ..वो तब भी नहीं उठी ..

तब हरिया समझ गया कि वो गहरी नींद में सो रही है ..और शायद ये सब उसने यही जानने के लिए किया था ..

दिव्या सोच ही रही थी कि ना जाने वो अब क्या करेगा, तभी हरिया का हाथ सीधा उसकी मखमली गांड के ऊपर आ लगा ..उसके दिल कि धड़कने और तेज हो गयी ..और फिर हरिया काका कि बूढ़ी उँगलियों कि ताकत जब उसे अपने मांसल कूल्हों पर महसूस हुई तो उसके शरीर में जल तरंग सी बजने लगे ..वो बहुत धीरे-२ अपनी उँगलियों के आगे वाले हिस्से को उसकी गांड कि चर्बी में दबा रहा था ..दिव्या को ऐसा लग रहा था जैसे उसके कूल्हों कि मसाज कर रहा है वो ..जो भी था, उसे ये सब महसूस करते हुए बहुत मजा आ रहा था ..

और फिर दिव्या को उनका दूसरा हाथ भी महसूस हुआ … पहले कमर पर और फिर धीरे-२ खिसकता हुआ वो ऊपर आने लगा और पीठ पर फिसलने लगा ..शायद वो देखना चाह रहे थे कि दिव्या ने ब्रा पहनी हुई है या नहीं ..और ब्रा के स्ट्रेप का अवरोध ना मिलने पर उनके हाथ धीरे-२ खिसक कर आगे कि तरफ आने लगे ..

अपने शरीर के साथ ऐसा मादक एहसास तो उसे रात को भी महसूस नहीं हुआ था जब वो तीनो दोस्त उसे बेहोश समझ कर मजा ले रहे थे ..

हरिया काका के अनुभवी हाथों का सुखद एहसास हो रहा था दिव्या को ..

दिव्या सांस रोके उनके दूसरे हाथ को अपनी छातियों कि तरफ बढ़ता हुआ महसूस कर रही थी ..और वहाँ पहुँचते ही हरिया काका ने अपना पूरा पंजा उसकी ऊपर वाली लटकी हुई ब्रेस्ट के नीचे फंसा कर उसे ऊपर उठा लिया ..

दिव्या का पूरा शरीर जल सा उठा ..उसमे से आग सी निकलने लगी ..

और हरिया काका तो जैसे उसके मुम्मे का वजन नाप रहे थे ..या शायद उसका नरमपन ..

और जब उन्होंने अपनी हथेलियों को भींचा तो उसकी बड़ी सी ब्रेस्ट भी उनकी लम्बी उँगलियों के बीच फंस कर छोटी प्रतीत हुई ..उनकी उँगलियों ने उसकी वाटर बेलून जैसी ब्रेस्ट को चारों तरफ से जकड लिया ..और उनकी हथेली के बीचो बीच उसका खड़ा हुआ गर्म निप्पल आ लगा ..और एक पल के लिए तो हरिया को लगा कि दिव्या का वो खड़ा हुआ निप्पल उनकी हथेली में छेद कर देगा ..उन्होंने उसकी ब्रेस्ट पर अपनी पकड़ कम कर दी और अपनी उँगलियों से उसकी नरम खाल को महसूस करते हुए धीरे-२ सिकोड़ कर उसके निप्पल पर ले आये और एक साथ अपनी पांचो उँगलियों से उसके करोंदे जितने बड़े निप्पल को पकड़ लिया ..और जोर से खींच कर बाहर कि तरफ उभारा …

दिव्या के मुंह से चीख निकलते -२ बची …

और फिर उन्होंने और हिम्मत का प्रदर्शन करते हुए दिव्या के गाउन में आगे कि तरफ लगी हुई चैन खोल दी ..और चैन के खुलते ही उसका बड़ा सा मुम्मा फिसल कर बाहर आ निकला ..
 
और साथ ही हरिया काका के हाथ लगा उसका नंगा निप्पल …जिसे वो नीम्बू कि तरह निचोड़ कर उसका रस निकालने लगे …मगर बहुत प्यार से ..

दिव्या तो हरिया काका के हुनर कि कायल होती जा रही थी ..

इंसान चाहे जितना बूड़ा हो जाए , जवान जिस्म को अपने सामने देखकर वो नए-२ तरीके अपनाता है, जो शायद आजकल के नौजवान भी नहीं कर पाएं ..

और शायद इसी वजह से दिव्या के पुरे शरीर पर चींटियाँ सी रेंग रही थी ..ऐसा एहसास तो आज तक उसे किसी ने नहीं दिया था ..उसका तो मन कर रहा था कि अपना गाउन उतार फेंके और बोले हरिया काका से ‘आओ काका …….और मत तरसाओ मुझे …’

पर अपना ओहदा और दूसरी कई चीजों का ख़याल करते हुए उसने वो विचार त्याग दिया ..

वो बस ये देखना चाहती थी कि आज हरिया काका किस हद तक जाते हैं ..वो जहाँ तक भी जाएँ , उसे तो मजे ही आ रहे थे ..

अचानक हरिया काका ने उसकी ब्रेस्ट के ऊपर से अपना हाथ हटा लिया …एक अजीब सा खालीपन महसूस हुआ दिव्या को ..पर उसकी गांड के ऊपर उनकी उँगलियाँ चलती रही ..

दिव्या ने धीरे से आँखे खोलकर शीशे में से हरिया काका कि तरफ देखा ..तो वो दंग रह गयी ..उन्होंने अपनी धोती में से अपना लंड बाहर निकाल लिया था और आँखे बंद करे हुए वो एक हाथ से दिव्या कि गांड मसल रहे थे और दूसरे से अपना लंड ..

उनकी आँखे बंद थी ..इसलिए दिव्या ने अपनी पूरी आँखे खोल कर उनके लंड को पूरी तरह से देखा …

‘ओह …माय गॉड …..ये क्या है …..इतना लम्बा ….उम्म्म्म्म्म्म ….’

मनीष और उसके तीनों दोस्तों के सामने हरिया काका का पहलवान लंड सबसे बड़ा था ..जब शीशे में देखने से इतना बड़ा लग रहा है तो सामने देखने में या फिर अंदर लेने में कैसा होगा …

बस इतना सोचते ही उसकी चूत अपने ही पानी से तर-बतर हो गयी …

अब तक दिव्या का बुरा हाल हो रहा था , उसे भी हरिया काका के द्वारा किया जा रहा उसके शरीर का मर्दन अच्छा लग रहा था ..उसने थोडा और मजा लेने कि सोची …और नींद में करवट बदलने का बहाना करते हुए अपनी पीठ के बल लेट गयी ..

हरिया काका एकदम से घबरा गए ..और उन्होंने अपना हाथ पीछे खींच लिया ..और अपनी धोती से लंड को ढक लिया ..उनका चेहरा देखने वाला था ..पर दिव्या के नींद से ना जागने कि वजह से उन्होंने फिर से राहत कि सांस ली ..

पर राहत कि सांस लेने कि उन्हें फुर्सत ही कहाँ थी ..सामने आ जाने कि वजह से दिव्या कि उघड़ी हुई छातियाँ उनके सामने थी ..जैसे किसी ने थाली में परोस कर रखी हो ..एक ब्रेस्ट तो पूरी तरह से बाहर थी ..और दूसरी आधी से ज्यादा ..

और पलटते हुए उसने अपनी टांग को भी ऊपर करा था जिसकी वजह से उसकी मखमली त्वचा से फिसलकर उसका गाउन घुटनों से थोडा ऊपर आ चुका था ..

इतना गुदाज माल अपने सामने देखकर एक पल के लिए तो हरिया को लगा कि उन्हें हार्ट अटैक आने वाला है ..पर बड़ी मुश्किल से अपनी साँसों पर काबू करते हुए उन्होंने फिर से अपना हाथ उसकी ब्रैस्ट के ऊपर रख दिया …

अब तो दिव्या का मन भी अंदर से चीख -२ कर केह रहा था कि उठ जा दिव्या …उठ जा ..पर ना जाने किस चीज ने उसे अब तक रोका हुआ था ..

खेर …वो अभी ये सब सोच ही रही थी कि अचानक उसे अपने निप्पल पर गर्माहट का एहसास हुआ ..वो और कुछ नहीं, हरिया काका के मुंह से निकल रही गर्म साँसे थी ..वो कुछ कर पाती इससे पहले ही उन्होंने अपना मुंह खोला और खड़े हुए लाल रंग के निप्पल को अपने मुंह के अंदर निगल लिया …और चैरी कि तरह उसे चुभलाने लगे ..

दिव्या के तो होंठ कांपने से लग गए ..वो थरथराने लगे ..और रही सही कसर हरिया काका ने पूरी कर दी ..उन्होंने अपना हाथ सीधा उसके गाउन के अंदर डाल दिया और अपनी पाँचों उँगलियों से उसकी भभक रही चूत को पकड़ लिया ..

अब सोने कि एक्टिंग करनी बेकार थी ..उसके शरीर ने उसका साथ छोड़ कर हरिया काका का दामन पकड़ लिया ..

उसके हाथ सीधा ऊपर आये और उसने हरिया काका के सर के पीछे हाथ लगा कर उन्हें अपनी छाती पर भींच लिया ..और चीख पड़ी 

”अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह …….ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ……हरिया ……काका …….उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म …….सक्क्क्क्क्क ….मीईईए …..अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ….”

और अनुभवी हरिया काका को समझते हुए देर नहीं लगी कि बहु जाग चुकी थी और उनकी हरकतों कि वजह से पूरी तरह से गर्म ही हो चुकी थी ..

उन्होंने भी शरम का अवरोध गिराते हुए पूरी तरह से मजे लेने शुरू कर दिये और अपना पूरा मुंह खोलकर दिव्या का आधे से ज्यादा मुम्मा निगल लिया ..और उसे जोर -२ से चूसने लगे ..
”अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह … …..बाईट इट ……….कट इट ………स्स्स्स्स्स्स्स्स्स ……उम्म्म्म्म्म्म्म …. …..खा जाओ ……काका ……अह्ह्ह्हह्ह्ह …..”

अब इतनी इंग्लिश तो उन्हें भी आती थी ..उन्होंने उसका गुलाबी मुम्मा बाहर निकाला और बड़े ही प्यार से उसके निप्पल को अपने दांतों के बीच फंसा कर ऊपर कि तरफ खींचा ..और उसकी आँखों में देखते हुए उन्होंने अपने दांतों कि पकड़ और बड़ा दी ..

और अब पहली बार दोनों कि नजरें मिली ..और वो भी इतने करीब से ..

दिव्या का पूरा मुंह खुल गया …और उसकी लाल जीभ के पीछे तक के टॉन्सिल्स दिख गए हरिया काका को ..क्योंकि उन्होंने काटा ही इतना तेज था उसके दानों को ..

दिव्या के गुलाबी होंठों को अपने सामने फेला हुआ पाकर हरिया काका से सब्र नहीं हुआ और उन्होंने दिव्या के निप्पल को अपने मुंह से निकालकर उसके होंठों को अपनी गिरफ्त में ले लिया ..और उतनी ही तेजी और लगाव से चूसने लगे जितने प्यार से उन्होंने उसकी ब्रेस्ट चूसी थी ..

हरिया काका के बूढ़े होंठों कि ताकत अपने मुंह पर महसूस करके दिव्या तो हवा में उड़ने लगी ..

अब उससे सब्र नहीं हो रहा था …उसने अपनी पूरी ताकत का प्रयोग करते हुए हरिया काका को ऊपर खींचा और उनकी धोती उतार कर नीचे फेंक दी …और उनके लंड को पकड़ कर जोर-२ से हिलाने लगी ..

उसे तो ऐसा लगा कि उसने कोई जलती हुई रोड पकड़ ली है ..उसने अपनी टाँगे फैलायी, उसने एक ही झटके में अपना गाउन उतार फेंका ..और अपनी नंगी चूत के अंदर फंसा कर उनके लंड को अपनी चूत के अंदर निगल गयी …

”अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ……उम्म्म्म्म्माआह्हह्ह ………ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ……..”
अभी एक दो झटके ही मारे थे हरिया काका ने कि बाहर से मनीष कि आवाजें आने लगी …

”दिव्यआ ………..ओ दिव्या …….”

दोनों के चेहरे पीले पड़ गए …

चूत के अंदर लंड था ..और बाहर पति …आखिर करे तो क्या करे …

दिव्या ने कहा , जो होगा देखा जाएगा …और हरिया काका कि कमर पर पैरों को बांधकर उन्हें और अंदर घुसा लिया …

बाहर से आवाजें आती रही …दिव्या …ओ दिव्या …
और अंदर वो अपना मुंह खोले चुदती रही …

अचानक एक छपाक कि आवाज के साथ उसका पूरा चेहरा भीग गया …और वो चोंक कर उठ बैठी ..

सामने मनीष खड़ा था …हाथ में पानी का गिलास लिए ..

वो हँसते हुए बोला : "कब से उठा रहा हु …पर लगता है कोई सपना देख रही थी …देखो तो जरा अपना चेहरा …पुरे पसीने से भीगा हुआ है …”

उसने अपनी हालत देखि …उसके कपडे तो वैसे के वैसे ही थे …और हरिया काका भी नहीं थे वहाँ ..टाइम देखा तो पुरे आठ बज रहे थे ..

यानि वो इतनी देर से सपना देख रही थी …ये सोचते ही उसके होंठों पर एक हलकी सी मुस्कान उभर आयी ..

वो एक टावल लेकर अपने चेहरे को साफ़ करने लगी …वैसे साफ़ तो उसे अपनी चूत को भी करना था ..क्योंकि वो चेहरे से ज्यादा भीगी चुकी थी .

मनीष बोला : "चलो अब उठ जाओ …नाश्ता करने के बाद मुझे घर कि सफाई का काम पूरा करवाना है ..और फिर दोपहर को वो सब भी आ जायेंगे …”

इतना कहकर वो चला गया ..

और दिव्या अपनी गीली चूत लेकर बाथरूम कि तरफ चल दी ..नहाने के लिए ..

नहाते हुए उसने हरिया काका के नाम कि मुठ भी मारी ..

नाश्ता करने के बाद मनीष कुछ देर के लिए हरिया काका के साथ मार्किट चला गया ..कारपेंटर और वाइट वश वालों से बात करने के लिए …दिव्या सोचने लगी कि काश हरिया काका को छोड़कर गया होता मनीष, शायद सुबह कि बात को याद करते हुए वो कुछ करने कि सोच बैठती उनके साथ ..

अभी मनीष और काका को गए आधा घंटा ही हुआ था कि बाहर कि बेल बजी और वो भागती हुई नीचे उतर आयी ..

सामने देखा तो हर्षित खड़ा था ..दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुराये ..

दिव्या साईड में हो गयी ..और हर्षित अंदर आ गया ..

और आते हुए उसने दरवाजा फिर से बंद कर दिया ..
दिव्या : "मनीष तो मार्किट गए हैं अभी …”

हर्षित : "मुझे पता है, मैंने उसे अभी हरिया काका के साथ जाते हुए देखा …"

दिव्या : "अच्छा जी …फिर भी यहाँ चले आये …"

हर्षित : "हाँ …क्योंकि मुझे आपसे बात करनी थी ..”

दिव्या (मंद – २ मुस्कुराते हुए ) : "मुझसे !!? मुझसे क्या बात करनी है ..”

हर्षित : " कल रात के बारे में ..!"

दिव्या का दिल धक् से रह गया …वो बोली : "कल रात के बारे में क्या .."

हर्षित : "कल आप नदी किनारे गयी थी .."

दिव्या : "हाँ ..तो …"

हर्षित : "आपको शायद पता नहीं है ..कल शायद नदी में तैरते हुए आप बेहोश हो गयी थी ..और मैंने आपको बचाया था ..”

उसने अपने दोस्तों का तो नाम भी नहीं लिया ..

दिव्या : "ओहो …तो आप थे ..दरअसल मुझे तैरना नहीं आता ..पर कल वहाँ का पानी देखकर ना जाने मेरे मन में आया कि मैं बिना कुछ सोचे समझे नदी में उतर गयी ..और डूबने लगी ..और बेहोश हो गयी ..और जब मुझे होश आया तो मैं किनारे पर पड़ी थी ..”

हर्षित : "हाँ ..आप बीच नदी में एक चट्टान के के सहारे पड़ी थी ..मैंने आपको निकालकर किनारे पर लिटाया था .."

दिव्या शर्माने का नाटक करते हुए : "ओहो ….यानि …कल ..तुमने …मुझे ..बिना कपड़ों के देख लिया …”

हर्षित उसके बिलकुल पास आ गया, इतने पास कि उनके बीच सिर्फ कुछ इंच का फांसला रह गया .

हर्षित : "मुझे तो लगा था कि तुम थैंक यू बोलोगी …”

दिव्या : "हूँ …..थेंक्स …”

वो बहुत धीरे से बोली ..

हर्षित : "पर एक बात जरुर कहना चाहूंगा मैं …आप हो बहुत सुन्दर ..”

दिव्या तो शर्म से गड़ी जा रही थी जमीन में ..उसकी साँसे तेजी से चलने लगी ..और जैसे ही हर्षित ने उसकी तारीफ कि वो झट से पलटी और शरमाकर ऊपर अपने कमरे कि तरफ भाग ली ..

हर्षित पीछे खड़ा हुआ उसकी उछलती हुई गांड देखता रह गया ..

ऊपर पहुंचकर दिव्या थोड़ी देर के लिए रुकी, और उसने पलटकर हर्षित कि तरफ देखा ..और मुस्कुरायी ..और फिर अंदर भाग गयी अपने कमरे में ..

हर्षित समझ गया कि दिव्या क्या चाहती है ..वो भी जल्दी से ऊपर कि तरफ भागा ..

ऊपर पहुंचकर उसने देखा कि दरवाजा तो बंद है ..हर्षित ने धीरे से दरवाजा खड़काया और बोला : "खोलो न ..दरवाजा क्यों बंद कर लिया …खोलो प्लीज …”

दिव्या दरवाजे के साथ पीठ लगा कर खड़ी थी ..अपनी उखड़ी हुई साँसों पर काबू करते हुए वो बोली : "नहीं …मुझे शर्म आ रही है ..”

हर्षित : "अब क्यों शरमा रही हो ..कल तो मैंने सब देख ही लिया है ..अब शर्माने का क्या फायेदा ..”

दिव्या : "पर ये गलत है …तुम्हे मुझे उस अवस्था में नहीं देखना चाहिए था ..”

हर्षित : "तो अब तुम मुझे देख लो वैसे …जैसी तुम थी कल वहाँ ..बिना कपड़ों के ..”

हर्षित ने बड़ी चालाकी से बात को आगे बढ़ाया ..

दिव्या कुछ ना बोली ..वैसे भी कल रात को उनके लंड देखकर और आज सुबह हरिया काका के बारे में सोचकर वो अपनी सुध बुध खो बैठी थी ..

हर्षित ने उसकी चुप्पी को हाँ समझा और बोला : "ठीक है …मैं कपडे उतार रहा हु ..तुम चाहो तो देख सकती हो ..”

दिव्या कि साँसे फिर से रेलगाड़ी कि तरह भागने लगी ..

अगले एक मिनट तक दिव्या को सिर्फ कपड़ों कि सरसराहट सुनायी दी ..और फिर हर्षित कि आवाज आयी : "देख लो भाभी ..मैंने भी अब सारे कपडे उतार दिए हैं …”

कुछ सेकंड के इन्तजार के बाद दरवाजा खुलने कि आवाज आयी ..हर्षित समझ गया कि लोंडिया गर्म हो चुकी है ..

दिव्या ने दरवाजा पूरा खोल दिया ..

उसकी नजरें झुकी हुई थी ..जो हर्षित के पैरों कि तरफ थी ..उसने धीरे-२ नजरें ऊपर करनी शुरू कि ..हर्षित कि नंगी टांगों से होती हुई उसकी नजर जैसे ही उसके अस्तबल पर जाकर रुकी तो देखा कि उसने अपने घोड़े को अपने हाथों के पीछे छुपा रखा है ..

उसका कसरती बदन देखकर उसका दिल झूम उठा ..उसके अंदर चिंगारियां सी जलने लगी ..वो पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी .

उसने याचना भरी नजरों से हर्षित को देखा, जैसे कह रही हो कि हटा लो ये हाथ भी …

हर्षित ने ना में सर हिलाते हुए कहा : "पहले आप भी दिखाओ मुझे …”

अब ना करने का कोई प्रश्न नहीं रह गया था ..वो वासना कि आग में पूरी तरह से जल रही थी , उसके अन्दर सोचने समझने कि कोई शक्ति नहीं रह गयी थी , उसने अपने बदन से साडी का पल्लू खिसका दिया ..और अपने ब्लाउज़ के हुक खोलने लगी ..
दिव्या इतनी जल्दी मान जायेगी ये हर्षित ने बिलकुल नहीं सोचा था , पर वो बेचारा ये नहीं जानता था कि कल रात से अब तक दिव्या किस तरह से अपने आप पर काबू रखे हुए है ..और अब हर्षित को अपने सामने पाकर वो अपनी सारी मर्यादा भूलकर बस मजे लेने के मूड में आ चुकी थी ..

जैसे ही हर्षित ने दिव्या कि ब्लेक ब्रा देखि ..उसने अपने लंड को अपने हाथ कि गिरफ्त से आजाद कर दिया …

और अपने हष्ट – पुष्ट और स्वस्थ लंड को हिला हिलाकर दिव्या के सामने नचाने लगा ..

दिव्या कि तो ऊपर कि सांस ऊपर और नीचे कि नीचे ही रह गयी …

उसने किसी सम्मोहन में बंधे हुए अपनी ब्रा को भी उतार फेंका और अब वो हर्षित के सामने टॉपलेस खडी थी ..

हर्षित अपना लंड झूलता हुआ अंदर आ गया और उसके पास जाकर खड़ा हो गया ..और उसने दिव्या को अपनी बाहों में पकड़कर अपने गले से लगा लिया …

ऐसा लगा जैसे बरसों के बिछड़े हुए प्रेमी गले मिल रहे हैं ..

हर्षित ने उसकी नरम और मुलायम छातियों को अपनी बलिष्ट पकड़ में लेकर अपनी छाती से पीस दिया …

उसके नन्हे -२ निप्पल घने बालों के अंदर छिपकर वहाँ से मिल रही घिसाई का आनंद लेने लगे ..

और फिर दिव्या ने अपना मुंह खोला और हर्षित के होंठों को अपने अंदर लेते हुए जोर से किस्स करना शुरू कर दिया …

”उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म ……पुछssssssss ……….अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ….”

वो तो कि तरह अपने मुंह से हुए हर्षित के होंठों का मांस खाने में लगी हुई थी .., इतनी बेसब्री तो उसे आज तक महसूस नहीं हुई थी ..

हर्षित ने भी इतनी गर्म औरत अपनी जिंदगी में नहीं देखि थी ..जो उसके लंड के देखते ही उसके सामने बेशर्मों कि तरह नंगी हो गयी थी ..

उसने दिव्या के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और वो नीचे गिर पड़ा …दिव्या ने नीचे पेंटी नहीं पहनी हुई थी ..

हर्षित ने आगे बढ़कर अपने लंड को उसकी चूत से मिला दिया ..और दोनों ने एक हुंकार सी भरी , अपना -२ मुंह ऊपर करते हुए ..

हर्षित ने दिव्या को धक्का देते हुए नीचे बिठा दिया, और वो पंजों के बल बैठकर सीधा उसके लंड के सामने आ गयी ..और उसके फड़फड़ाते हुए लंड को ललचायी नजरों से देखते हुए उसे पकड़कर अपने मुंह के पास लायी और बड़े ही प्यार से उसे नीचे से ऊपर कि तरफ चाटा ..
और फिर उसे अपने मुंह के अंदर निगल कर जोरों से चूसने लगी ..

हर्षित चिल्ला पड़ा : "अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ………..ओह्हह्हह्हह्हह …..दिव्या …….उम्म्म्म्म्म्म ….”

इस समय दिव्या का मुंह किसी सकिंग मशीन कि तरह उसके लंड को निगलकर उसका रस चूसने में लगा हुआ था ..

और वो भी उसके बालों को पकड़कर अपने पठानी लंड को उसके मुंह के अंदर जोरों से मार रहा था ..

ज्यादा उत्तेजना और दिव्या के जोर से चूसने कि वजह से उसके लंड ने आखिर जवाब दे दिया ..और उसने भरभराकर अपना सारा रस उसके मुंह के अंदर विराजमान करा दिया …

दिव्या को उसका देसी स्वाद बहुत अच्छा लगा ..और वो सारा रस मजे लेते हुए गटक गयी ..

अब दिव्या की बारी थी ..उसकी टपक रही चूत की बारी..हर्षित ने उसे उठाया और अपने गले से लगाकर उसके पैरों तले की ज़मीन गायब कर दी ..दिव्या भी हर्षित के गले से लगकर अपने गुब्बारे दोनो के बीच फँसा कर लटक गयी ..हर्षित ने उसे लेजाकर बेड पर लिटा दिया ..और उसकी नशीली आँखों मे देखते हुए उसकी टाँगों के बीच बैठ गया ..दिव्या की चूत के होंठ उसके लपलपाते हुए होंठों को देखकर फड़कने लगे और उनमे से रिस रहा गाड़ा और मीठा रस हर्षित के मुँह मे जाने के लिए कुलबुलाने लगा ..हर्षित ने भी उन्हे ज़्यादा इंतजार नही कराया और अपनी पेनी जीभ निकाल कर उसने उसकी गीली चूत को सुखाना शुरू कर दिया .

”अहह ह ह ह ह ह ह ह… एम्म म म म म म … येस स स स स स स स सस्स स स स”

दिव्या ने हर्षित के बालों में अपनी उँगलियाँ फंसाकर उसे लगाम बना लिया और उसे किसी घोड़े कि तरह दौड़ाना शुरू कर दिया . .

अपनी चूत कि सफाई वो बड़ी अच्छी तरह से करवा रही थी । हर्शित ने उसकी चूत कि फांके खोलकर उसमे छुपे हुए मोती को ढूंढ निकाला …

और जैसे ही हर्षित ने उसपर जमी हुई ओस को अपनी जीभ से चाटकर साफ़ किया दिव्या चिहुंक कर उछल पड़ी उसने गजब कि फुर्ती का परिचय देते हुए अपनी टांगों के बीच बंधे हुए हर्षित को घूमा कर बेड पर लिटाया और खुद उसके मुंह पर सवार हो कर उसकी खड़ी हुई जीभ पर अपनी चूत कि रगड़ाई करने लगी 

एक छोटे मोटे लंड का काम कर रही थी हर्षित कि जीभ और वो भी सीधा उसके दाने के ऊपर …

ज्यादा तेज घस्से मारने से दिव्या कि चूत आग उगलने लग गयी इतना ताप निकल रहा था उसके अंदर से जैसे कोई भट्टी जल रही हो । पर जैसे हर मौसम बदलता है वैसे ही वहाँ के हालात भी बदले । अपनी गर्मी उड़ेलने के बाद उसमे से ठंडी बारिश कि भांति मीठे पानी कि बूंदे उमड़ – २ कर हर्षित के चेहरे पर टपकने लगी …जिसे वो ख़ुशी – २ अपनी जीभ से लपक कर पीने लगा । और जब दिव्या कि तिजोरी का सारा रस ख़त्म हो गया तो वो वहीँ बेड पर गिरकर गहरी – २ साँसे लेने लगी .

”अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह। … …. हर्षित। …।उम्म्म्म्म्म्म ”

अब तक हर्षित का लंड फिर से खड़ा हो चूका था और इस बार वो पूरा मैच खेलने के मूड में था .
अपनी गहरी साँसे गिन रही दिव्या को देखा और उसकी टाँगे खोलकर उसके बीच आ गया ।

पर जैसे ही उसने अपने खड़े हुए नवाब को उसकी शहजादी से मिलाना चाहा तो सीडियों से किसी के चढ़ने कि आवाज सुनकर दोनों चोंक गए ।

दिव्या समझ गयी कि मनीष वापिस आ गया है …उसने बाहर का दरवाजा सिर्फ बंद किया था उसे अंदर से लॉक नहीं किया था .

हर्षित ने आनन् फानन में अपने कपडे समेटे और बेड के नीचे घुस गया । दिव्या के पास कपडे पहनने का समय नहीं था इसलिए उसने बेड पर पड़ी हुई चादर को अपने ऊपर ओड लिया और सो गयी ।

अगले ही पल मनीष अंदर दाखिल हुआ और उसने दिव्या को सोते हुए देखा । अगले ही पल उसने मुस्कुराते हुए दरवाजे कि चिटखनी लगा दी और बेड पर आकर बैठ गया ।

हर्षित : "दिव्या …ओ दिव्या , उठ जाओ। …आज और कितना सोना है तुम्हे …”

कहते – २ उसने उसके कूल्हे पर हाथ रखकर उसे उठाया और अगले ही पल वो उसके पुरे शरीर पर हाथ फिराते हुए जान गया कि दिव्या ने कुछ भी नहीं पहना हुआ है , मनीष कुछ और सोच पाता इससे पहले ही दिव्या उठने कि एक्टिंग करते हुए बोली : "उम्म्म्म्म्म्म्म। आ गए आप … कितनी देर से आपका वेट कर रही थी । पता है कितना मन कर रहा है ”

दिव्या कि बात सुनकर मनीष खुश हो गया , वैसे ये बात सुनकर तो हर पति खुश हो जाता है जब उसकी बीबी खुद चुदाई का निमंत्रण देती है .

हर्षित : "मन तो मेरा भी कर रहा है , तभि तो आधा काम छोड़कर भागा चला आया । बाकि का काम हरिया काका कर लेंगे । इसलिए उन्हें वहीँ छोड़कर आ गया ।"

खेर , दिव्या कि बात सुनकर मनीष उठ खड़ा हुआ और उसने अपने कपडे जल्दी – २ उतारने शुरू कर दिए , उसका लंड तो तभी से खड़ा हो चूका था जब वो कमरे में दाखिल हुआ था ।

बेड के नीचे छुपे हुए हर्षित के सामने मनीष के उतारे हुए कपड़ों का ढेर लग गया। 

फिर उन्ही कपड़ों के ऊपर दिव्या के बदन से उतार कर फेंकी हुई चादर आ गिरी 

हर्षित समझ गया कि उसके सर के ऊपर बिस्तर पर पड़ी हुई दिव्या अब मनीष के सामने पूरी तरह से नंगी लेटी हुई है .

मनीष ने दिव्या कि तजा चूसी हुई गीली चूत देखकर कहा : "सच में । तुम तो चुदने के लिए बिलकुल तैयार हो ।”

नीचे छुप कर बैठे हुए हर्षित को हंसी आ गयी उसकी बात सुनकर , क्योंकि कुँवे कि खुदाई तो उसने कि थी और पानी निकालने आ गया मनीष ।

मनीष ने अपने लंड को मसलकर जंग के लिए तैयार किया और उसकी रस बरसाती हुई चूत पर अपने लंड को लगाकर एक होले से धक्का दिया …और वो हल्का धक्का भी बहुत था उसके अंदर दाखिल होने के लिए ।

दिव्या आनंद सागर में गोते लगाती हुई कराह उठी 

”आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह …।उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म। …. मंनिईईईइश। ……।अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह …… चोदो मुझे ……अह्ह्ह्ह्ह्ह। ……जोर से चोदो ”

उसकी आवाजें पुरे कमरे में गूंजने लगी थी ।

और नीचे लेटे हुए हर्षित ने भी उसकी सेक्सी आवाज सुनकर अपने लंड को मसलना शुरू कर दिया ।

कुछ देर तक उस आसान में मारने के बाद मनीषा बेड से नीचे उतर आया और उसने दिव्या कि दोनों टाँगे पकड़कर हवा में लहरा दिया और अपने लंड को फिर से उसकी गुफा के अंदर डालकर जोरों से झटके मारने लगा ।

हर्षित के बिलकुल पास थे मनीष के पैर … वो उसके हिलते हुए शरीर को देखकर अंदाजा लगा रहा था कि तेज झटकों से मिल रहे मजे किस तरह दिव्या को आनंद प्रदान कर रहे हैं उसने भी मनीष कि लय में लय मिलाकर अपने लंड को झटके देने शुरू कर दिए और अपनी आँखे बंद करके सोचने लगा कि वो झटके दिव्या कि चूत में दे रहा है ।

और ऊपर चुद रही दिव्या भी अपनी आँखे बंद किये हुए हर्षित के बारे में सोच रही थी । उसकी चूत में लंड तो उसके पति का था पर मन में उसका आशिक़ था जो उसकी बुरी तरह से चुदाई कर रहा था ।

हर्षित के बारे में सोचते हुए और मनीष के लंड के तेज झटके खाते हुए दिव्या बुदबुदाने लगी : "अह्ह्ह्हह्ह उम्म्म्म। …हान …. हाँ …. ऐसे ही चोदो मुझे … रंडी कि तरह … अह्ह्हह्ह मैं हु रंडी … चोदो मुझे …। आह्ह्ह्हहह्ह्ह्ह ……”

बस इतना ही बहुत था मनीष के लिए …. एक मर्द को वही औरत पसंद आती है जो बिस्तर पर किसी रंडी कि तरह चुदे … और दिव्या उस पैमाने पर खरी उतर रही थी ।

मनीष के लंड ने जवाब दे दिया और उसके लंड से पिचकारी निकल पड़ी …

उसने अपने पाईप को बाहर निकाल लिया और उसे अपने हाथ में लेकर उससे दिव्या कि चूत कि सिंचाई करने लगा । और उसकी चूत को पूरी तरह से अपने रस से रंगने के बाद वो उसके ऊपर ओंधा होकर गिर पड़ा …


और यही हाल हर्षित का भी हुआ , उसके लंड से भी रंग बिरंगी पिचकारियाँ निकल कर बेड के नीचे वाले हिस्से से जा चिपकी। 

मनीष उठा और वाश करने के लिए बाथरूम में चला गया .

दिव्या के कहने पर हर्षित जल्दी से बाहर निकला और अपने कपडे लेकर बाहर कि तरफ भागा ।

और नीचे पहुंचकर उसने अपने कपडे पहने और घर से बाहर निकल गया। .

और लगभग एक घंटे बाद वो फिर से मनीष के घर कि तरफ चल दिया ।

और इस बार उसका मकसद दूसरा था 

जुआ खेलना 

पर उसे नहीं पता था कि आज का जुआ क्या – २ रंग दिखाने वाला है .
 

   
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