छोटी बहन के साथ चुदाई part 7

अगली सुबह मैं वाक से आया तो विभा नहा धो कर पूजा कर रही थी और कामवाली झाड़ु-बुहारू में लगी हुई थी। मैं भी नहा धो कर आया विभा नास्ता के टेबुल पर मेरा इंतजार कर रही थी, काम वाली तुरन्त गई थी और घर पर सिर्फ़ हमदोंनो ही थे।
मैंने कल वाली बात दुहराई, “कल सोने में अच्छा लगा, उस सब के बाद?”
“हाँ भैया, बहुत गहरी नींद आई। बदन के रोम-रोम का दर्द जैसे निकल गया था। एकदम हल्का लग रहा था बदन सोते समय”, विभा बोली।
नास्ता करते हुए मैंने कहा, “यह तो कुछ भी नहीं है, जब सही चुदाई कराओगी फ़िर पता चलेगा”।
विभा बोली, “सही कह रहे हैं भैया आप…., अब तो लगता है कराना पड़ेगा।”
मैं चहका, “चलो फ़िर बिस्तर पर… कि यही चुदाओगी…”।
वो मुझे झिड़की, “हत्त…. अभी सुबह-सुबह आप भी क्ता बात ले कर बैठ गए। शाम में फ़िर जैसे कल किए थे वैसे हीं करेंगे”।
मैंने मुँह बनाते हुए कहा, “ठीक है…अगर उतने से ही संतुष्ट हो, पर मेरे लन्ड का क्या? कल तो बेचारा खुब हीं बेहाल हुआ और फ़िर निढ़ाल हुआ”।
“क्यों… जैसे पहले ब्लू-फ़िल्म देख कर हस्तमैथुन करते थे कर लीजिएगा”, वो मुस्कुराते हुए बोली और फ़िर नास्ता का सब प्लेट वगैरह ले कर चली गई।
मैं भी जिद नहीं कर रहा था। मेरी सबसे छुईमुई बहन, विभा, आज एक दिन के बाद खुद अपने मुँह से मुझसे मुख-मैथुन के लिए तैयार थी और यह मेरी बड़ी उपलब्धि थी। मुझे पता था कि आज न काल वो मेरे से हीं सील तुड़वाएगी। आज दिन भर मुझे काम में मन न लगा और बार-बार विभा का अनछुआ बदन मेरे दिमाग में आ रहा था। शाम को करीब ६ बजे हीं मैं घर के चल दिया। सात बजे के करीब घर आया। विभा मुझे देख कर हैरान रह गई और खुश भी हुई। मेरे हाथों में चाय देते हुए बोली, “मेरे बदन के लिए आप आज जल्दी घर आ गए”। मैंने थोड़ा झेंपते हुए कहा, “ऐसी बात नहीं है पर जब आ गए हैं तो फ़िर आज हमलोग जल्दी शुरु कर देंगे। इससे आराम से देर तक एक-दुसरे के बदन से खेलने का मौका मिलेगा।” विभा बोली, “ठीक है… मैं जल्दी से खाना बना लेती हूँ” फ़िर हमलोग खेलेंगे”।

करीब आठ बजे तक विभा किचेन से फ़्री हुई और पसीने से लथपथ मुझसे बोली, “नहा के खाना लगा देती हूँ… ठीक है”। मैंने कहा, “खाना हम लोग बाद में खाएँगे, पेट भारी होने से मजा कम मिलेगा। आओ पहले हमलोग अपना बदन ढ़ीला कर ले फ़िर खाना-वाना आराम से खाएँगे”। विभा बोली, “ठीक है… मैं दो मिनट में नहा के आई…”। मैंने उसकी कलाई पकड़ी और अपने पास खींचते हुए कहा, “क्या विभा डार्लिंग, पसीने की गन्ध तो प्यार करने वालों के एक टौनिक है… जब सही से चुदोगी तब इसी पसीने के बहने में असल मजा मिलेगा। आ जाओ डार्लिंग जैसे हो…मन बेचैन हो रहा है”। विभा मुस्कुराते हुए मेरी गोद में बैठते हुए बोली, “वाह रे, एक दिन में डार्लिंग बना लिए… अब आज के बाद गर्लफ़्रेन्ड बना लीजिएगा क्या?” मैंने उसकी दोनों चुचियों को कपड़े के ऊपर से मसलते हुए कहा, “तुम जो कहोगी मैं वही बना लुँगा तुमको। अब तो मैं तुम्हारे बदन का गुलाम हूँ”। वो खुब प्यार से पूछी, “आपको क्या मन है… आप मुझे क्या बनाना चाहते हैं”। मैंने उसके होठ से अपने होठ मिलाए और फ़िर कहा, “बताऊँ, मुझे क्या मन है… तुम बूरा मान जाओगी”। विभा ने कहा, “नहीं बूरा मनुँगी, अब बताईए न आपको क्या मन है”? मैंने भूमिका बाँधते हुए कहा, “वैसे यह होगा नहीं पर मेरा बस चले तो मैं तुम्हें इंटरनेशनल पोर्न-स्टार बनाऊँ। खुब सारी ब्लू-फ़िल्म में तुम काम करो। पूरी दुनिया तुम्हें पहचाने और फ़िर तुम्हारे नाम की मूठ मारे”। विभा बोली, “छी… कोई अपनी बहन के लिए ऐसे बोलता है। बहुत गन्दे हैं आप”। मैंने उसके पेट सहलाते हुए कहा, “क्यों, आखिर ब्लू-फ़िल्म की हीरोईन सब भी तो किसी की बेटी और बहन होती है। लड़की अपने बाप-भाई से चुदा सकती है और ब्लू-फ़िल्म में काम नहीं कर सकती, ये क्या बात हुई…”। वोभा अब सोचते हुए बोली, “हाँ बात तो सही है, अच्छा भैया… आज आप कोई बहुत गन्दी फ़िल्म दिखाईए ना मुझे।” मैंने कहा, “ठीक है पर मेरा ईनाम…”। मेरी बहन बात समझते हुए बोली, “मिलेगा…. आज न कल पर मिलेगा यह तय है। …कारज धीरे होत है, काहे होत अधीर…”। उसने मुझे भरोसा दिलाया।

मैं उसको ले कर अपने रुम में आया और फ़िर कंप्युटर औन करके बोला, “एक फ़िल्म है लोकल लड़की की। उसके मामा का टेलरिंग शौप है, उसी दुकान में उस लड़की को उसका मामा और एक उसका दोस्त चोदा है। करीब तीन साल पुराना विडियो है, अब तो लड़की की भी शादी हो गई है पुर्णियाँ में। कभी चलोगी तो उसको भी दिखा दुँगा, वो सेल्सगर्ल है टाईटन शो-रुम में। विडियो मस्त है…. देखोगी या कोई विदेशी गन्दा सा फ़िल्म लगा दूँ”। विभा उत्तेजित हो कर बोली, “कहाँ मिला ऐसा विडियो….?” मैंने कहा, “५००० में खरीदा उसके मामा से। लड़की का नाम सलमा है, तो सलमा नाम से है कंप्युटर पर… अगर कभी देखना हो बाद में तो”। विडियो अब शुरु हो गया था। एक सोफ़े पर एक **** लड़की नीले सलवार सुट में बैठ कर सामने टीवी पर एक ब्लू-फ़िल्म देख रही थी और उसके अगल-बगल दो मर्द बैठ कर शराब पी रहे थे। दोनों की उम्र ४०-४२ के करीब थी। लड़की बिना उन मर्दों की तरफ़ देखे सीधे टीवी पर नजर गराए थी पर वो दोनों कभी-कभी अपना ग्लास उसके होठे से सटाते तो वो एक चुस्की शरब पी लेती, अगर वो दोनों उसकी तरफ़ सिगरेट करते तो एक कश ले लेती। जब वो करीब ७-८ चुस्की शराब पी ली तब उसने एक बार मना कर दिया, “अब नहीं मामूजान…”। उसका मामा उसको सिखाया, “अरे सलमा बेटा, मामूजान नहीं फ़ैज बोलो… ये क्या बात हुई कि नूर को तो नूर मियां बोलती हो और मुझे मामू…”। नूर ने उसको चिढ़ाया, “अबे साले तू उसका मामा है तो बोलेगी ही। उसको तो मैंने पटाया था तू तो बीच में कबाब में हड्डी बन कर आ गया है… क्युँ सलमा”। फ़ैज ने कहा, “अरे तो फ़िर इसका निकाह भी तो अपने साले से तय कराया है…. लड़का अरब में है, अच्छे घर में जाएगी, मजे करेगी तो एक बार मुझे भी तो हक है… क्यों सलमा”। सलमा बिना कुछ कहे चुप-चाप सब देख रही थी। फ़ैज हीं पहले सलमा को अपनी बाँहों में लिया। सलमा कसमसा कर अपने को अलग करने की कोशिश की और अपनी नजर टीवी पर टिकाए थी। विभा यह देख कर बोली, “लग रहा है लड़की बेचारी को ये दोनों फ़ँसा कर लाए हैं”। मैंने कहा, “फ़ँसाना तो नहीं… लड़की खेली-खाई हुई है… वो सब जानती है कि उसको आज यहा क्यों लाया गया है। हो सकता है कि लड़की शायद मामा से यह सब करते शर्मा रही हो”। विभा मेरी हाँ में हाँ मिलाई, “सही कह रहे हो भैया, नहीं तो ऐसे इन दोनों के साथ नहीं बैठती”।

सलमा को उसका मामा अब बाहों में समेट कर चुम रहा था वो भी जल्दी से एक-दो बार चुम कर फ़िर अपनी नजर टीवी पर कर लेती थी, जैसे दिखा रही हो कि उसको इस सब में नहीं ब्लू-फ़िल्म देखने में इंटरेस्ट है। नूर अब एक नया सिगरेट जलाते हुए अपने दोस्त से बोला, “ठीक है यार, आज तू ही चढ़ ले इसपर पहले, मैं तो वैसे भी कई बार इसको चौड़ा किया है”। फ़ैज अबतक सलमा को खींच कर अपनी गोद में बिठा चुका था और अभी भी वो सामने टीवी देख रही थी जबकि उसका मामा उसकी चुचियो को कुर्ते के ऊपर से ही मसल रहा था। जब उसके अपना हाथ उसकी बूर की तरफ़ किया तो सलमा ने उसका हाथ पकड़ा और फ़िर उसको रोकते हुए अपनी तीरछी नजर से अपने मामा को देखा। उसके मामा ने अपने दोस्त को ईशारा किया और तब नूर ने सलमा के हाथ पकड़ कर ताकत के साथ फ़ैला दिया और इसबीच फ़ैज ने सलमा की सलवार नीचे सरार दी। सलवार में डोरी नहीं एलास्टिक लगा हुआ था। दर्जियों के परिवार से थी वो। हालाँकि वो अपने हिसाब से थोड़ा विरोध की और उसकी आवाज सुनाई दी, “फ़िल्म देखने दीजिए न पूरा मामूजान”। फ़ैज ने कहा, “देख लेना बेटा, सब सलवार उतार रहा हूँ… गर्मी लगेगी न तुम्को मेरी गोदी में”। उन दोनों ने उसकी सलवार खींच कर उसके बदन से अलग कर दी। इस चक्कर में उसकी झाँटों भरी बूर और चुतड़ सब कैमरे में कैद हो गया। वो अब बिना सलवार के सोफ़े पर बैठ गई और फ़ैज उसके सामने खड़ा हो कर अपना कपड़ा सब खोला और पूरा नंगा हो गया फ़िर सलमा का हाथ पकड़ कर अपने ढ़ीले लण्ड को पकड़ने का ईशारा किया। सलमा भी टीवी देखते हुए अपने मामा का लण्ड सहलाते हुए उसको आगे-पीछे करने लगी। फ़ैज का लन्ड जो ढ़ीली हालत में था धीरे-धीरे लम्बा होने लगा और टाईट भी। जब वो आधा टाईट हो गया तो फ़ैज आगे झुक कर सलमा के होठ चुसने लगा। सलमा भी अब आँख बन्द करके चुमने में साथ दी तो फ़ैज फ़िर से उसके बगल में बैठ कर सलमा को दुबारा अपनी गोद में बिठा लिया। उसका दोस्त नूर सलमा की सलवार उतरवा कर फ़िर से पास में बैठ कर सब देख रहा था और सिगरेट पी रहा था। जब सलमा फ़ैज की गोद में बैठ रही थी उसने उसकी चूचियों को जोर से दबा दिया तो सलमा चिहुँकी, “ओह दर्द करता है ऐसे मत करो”। नूर ने अब प्यार से उसको चुमा और कहा, “अच्छा मेरी जान”, उसकी चूची सहलाई और फ़िर कुर्ते के ऊपर से ही उसके निप्पल को ऊँगलियों के बीच ले कर हल्के से मसला।

फ़ैज तो गोदी में बैठी हुई अपनी भांजी के जाँघों को सहलाते हुए फ़ैलाने की कोशिश करने लगा था और सलमा थी कि अपने जाँघ जोर से सिकोड़ लेती थी। फ़ैज फ़िर झेंप गया तो नूर उसकी परेशानी समझ कर निप्पल मसलते हुए सलमा के कुर्ते को एक झतके से पकड़ा और उसके सर के ऊपर से खींच लिया। जबतक सलमा कुछ समझे, उसका आधा कुर्ता उसके सर की तरफ़ से बाहर हो गया था। वो हड़बड़ा कत फ़ैज की गोद से उठी और अपने कुर्ते को पकड़ने का अंतिम प्रयास किया, पर तब तक देर हो गई थी। कुर्ता उसके बदन से गायब हो गया था। इस क्रम में उसके हाथ जो ऊपर हुए तो उसकी काँख के काले-काले लम्बे बाल दिख गए। मैंने विभा से कहा, “ये लड़की भी तुम्हारी तरह की है, अपना बाल नहीं साफ़ करती है”। वो इसबार तपाक से बोली, “मैं तो अपना काँख का बाल रेगुलर साफ़ करती हूँ गर्मी में, नहीं तो स्लीवलेस कैसे पहनुँगी… जाड़ा में भले थोड़ा आलस हो जाए”। मैंने हँसते हुए पूछा, “और झाँट…?” वो बाद बदली, “अभी देखने दीजिए… अपने किशनगंज की लड़की कितनी मौड हो गई है कि फ़िल्म बनवाती है”। मैंने मन ही मन कहा, “तुम्हारी भी फ़िल्म बनाऊँगा मेरी बहना फ़िर तुम्हीं को दिखाऊँगा”। स्क्रीन पर अब नंगी सलमा फ़ैज की गोद में बैठी थी और फ़ैज कभी उसकी चुचियों तो कभी पेट या फ़िर कभी झाँटों भरी बूर को सहलाते मसलते दिख रहा था। सलमा की चुची का साईज किसी आम लड़की की तरह था, अभी उन्होंने अपना पूरा साईज नहीं पाया था पर आकर्षक साईज था। सलमा का रंग सांवला से थोड़ा साफ़ था पर मेरी बहनों मे वो कम गोरी थी। तभी नूर सोफ़े से उठा और अपने कपड़े उतार कर वो भी नंगा हो गया। उसका लन्ड भी लूज था, ४५ साल की उम्र में सब का लूज ही ज्यादा रहता है। वो अब सोफ़े के पास आया और सलमा के करीब हो कर अपना लन्ड अपने हाथ से पकड़ कर सलमा को ईशारा किया तो वो उस लूज लन्ड को अपने मुँह में लेकर चुसने लगी। वो भी अब बीच-बीच में सलमा की चुचियो और निप्प्ल से खेल लेता। उस सलमा के बदन पर चार मर्दाने हाथ लगे हुए थे। वो जब सर को एक तरफ़ घुमा कर नूर का लन्ड चुस रही थी तब उसका जाँघ भी थोड़ा खुल गया था और फ़ैज अब आराम से उसकी बूर की फ़ाँक से खेल रहा था।

मैं विभा को बोला, “विभा डीयर, अब मेरा भी तुम थोड़ा सहला दो ना” और मैं अपने बरमुडा को खोल कर अपने खड़े लन्ड को उसके सामने लहराया। विभा एक नजर मेरे खड़े लन्ड पर डाली और बोली, “आपका तो पहले से इतना कड़ा है… अभी देखने दीजिए इस फ़िल्म को पूरा से फ़िर आपके बारे में सोचुँगी”। मैंने भी बहस को बेकार समझा और हलके हाथ से अपने लन्ड को सहलाते हुए फ़िल्म देखेने लगा। नूर का लन्ड जब टनटना गया तो वो फ़ैज से बोला, “यार, अब शुरु करो… कितना खेलोगे इसकी फ़ाँक से। अब तो मेरा भी तनटना गया है”। फ़ैज यह सुन कर अब सलमा को अपनी गोदी से उठा दिया और उसको सोफ़े पर चित लिटाया। सलमा भी अब बिना कोई विरोध किए आराम से सोफ़े पर लेट गई और अपने पैरों को घुटने से हल्के से मोड़ कर सोफ़े की पीठ से सटा लिया। उसका दुसरा पैर सोफ़े के नीचे जमीन पर टिका हुआ था। वो अब बोली, “आप दोनों में पहले कौन आ रहा है…”? सलमा अपने बूर की फ़ाँक पर अपना थुक लगा रही थी बार-बार। नूर बोला, “आज पहले अपने मामू को चढ़ा लो फ़िर बाद में मैं चोद लुँगा। बेचारा बहुत बेकरार है तुम्हारे छेद लिए”। सलमा अब अपने मामू को ईशारा की और फ़ैज तुरन्त सोफ़े पर अपना एक घुटना टिका कर अपने दाहिने हाथ से अपना लन्ड को पकड़ कर सलमा की बूर से लगा कर धक्का दिया। पर सलमा की कमसीन जवानी या फ़िर उसके मामा की उत्तेजना, फ़ैज का लन्ड जो साधारण सा था करीब ५” का, वो सलमा की बूर में नहीं घुसा और फ़िसल गया। फ़ैज ने फ़िर कोशिश की और फ़िर यही बात। दो तीन बार जब वो असफ़ल हो गया तो सलमा उठ कर बैठी और फ़िर अपने मामू का लन्ड ले कर जोर-जोर से चुसने लगी। मैंने विभा को बताया, “लड़की एक्स्पर्ट है, देखो कैसे लन्ड को और ज्यादा कड़ा कर रही है”। विभा चुप-चाप सब देख रही थी। सलमा फ़िर से अब फ़िर लेट गई थी और इस बार वो अपने हाथ से अपने मामा का लन्ड पकड़ कर अपनी बूर में घुसा ली और फ़िर अपने मामा को थोड़ा झुक कर धक्के लगाने को बोली। उसका मामा फ़ैज अब वैसे ही आगे की तरफ़ झुक कर ऊपर से अपने कमर हिला-हिला कर धक्के लगाने लगा। सलमा भी मजे के साथ अपना आँख बन्द कर ली और चेहरे बनाने लगी।

तभी नूर आगे आया और सलमा की छाती के पास बिल्कुल उसके मामा की तरह दोनों तरफ़ घुटने सोफ़े पर सलमा की दोनों तरफ़ टिका कर सलमा की मुँह में अपना लण्ड घुसा दिया। इसके बाद नूर भी बिल्कुल ऐसे धक्के लगा-लगा कर सलमा की मुँह में लण्ड डालने लगा जैसे वो भी सलमा को चोद हीं रहा हो। विभा अब मेरी तरफ़ घुम कर बोली, “कैसा लग रहा यह यह देख कर… दोनों बुढ़े कैसे बेचारी की छेद में अपना-अपना घुसा रहे हैं”। मैंने कहा, “यह तो कुछ नहीं है… लड़की को भगवान तीन-तीन छेद दिए हैं, वो एक साथ तीन लन्ड को मजा दे सकती है”। विभा बिना कुछ सोचे-समझे बोली, “तीन?… कहाँ दो हीं न… एक मुँह और एक नीचे..”। मैंने कहाँ, “और गाँड़ को तुम क्यो भूल गई मेरी बोली बहना… सुनी नहीं हो ’गाँड मारना’, प्रसिद्ध गाली है यह तो – गाँड़ मराओ”। वो बोली, “अरे उस छोटे से छेद में किसी लड़के का कैसे घुसेगा… असंभव”। मैंने कहा, “ठीक है अब दिखाऊँगा तुम्हे एक फ़िल गाँड मराई बाली तब समझ में आएगा। किसी लड़की की बूर की चुदाई तो आम बात है, सब चुदती है… पर विशेष बात तब होती है जब लड़की की गाँड़ मारी जाती है। अभी नूर जो कर रहा है उसको लण्ड चुसना नहीं कहते है, कहेंगे कि नूर सलमा की मुँह मार रहा है। बूर में चुदवाने से ज्यादा कलाकारी का काम है मुँह या गाँड़ मरवाना”। विभा अब खुब रुची के साथ पूछी, “ऐसा क्यों भैया, मुँह मराना तो बहुत आसान लग रहा है… हाँ वो वाला का छेद बहुत छोटा है तो इसमें परेशानी समझ में आती है”।
हम दोनों सलमा को नूर और अपने मामा से मस्ती लेते हुए देख रही थे, और मैं अपनी बहन विभा की जानकारी बढ़ा रहा था। मैंने उसको समझाते हुए कहा, “असल में सलमा गाँड़ मराई में छेद तो एक आसान समस्या है, असल समस्या है गाँड़ के भीतर की बनावट। गाँड़ करीब ३-४” भीतर एकदम से पीछे यानि पीठ की तरफ़ मुड़ जाती है और लन्ड को उस मोड़ पर आगे जाने में परेशानी होती है और जोर का धक्का अगर ऊपर से कोई लगा दिया तो बहुत तेज दर्द होता है गाड़ के भीतर”। यन सब जानकारी बिभा के लिए नई थी तो वो बोली, “ओह… फ़िर”। मैंने हँसते हुए कहा, “फ़िर क्या… यही तो लड़की की कलाकारी है, वो कभी अपना पेट सिकोड़ेगी तो कभी कमर ऊपर-नीचे करके एक बार अगर लन्ड को भीतर धीरे-धीरे घुसवा ले फ़िर लन्ड को आगे परेशानी नहीं होती है और तब लन्ड खुद अपना रास्ता बना कर बार-बार अंदर-बाहर होता रहता है। मुँह के साथ भी यही बात है, कोई भी ६-७” का लन्ड आसानी से कंठ तक पहुँच जाएगा और फ़िर तुम्हें खाँसी आ जाएगी। जब तुम चुसोगी तो तुम तय करोगी कि कितना भीतर लो, पर जब लड़का तुम्हारी मुँह मारेगा तो वो तय करेगा कि कितना तुम्हारे मुँह में घुसाए और तब तुम्हें लगेगा कि तुम्हारा दम घुट रहा है। इसलिए लड़की को यह कला आना चाहिए कि कैसे और कब साँस रोक कर लण्ड को भीतर ले”।

अब तक नूर का सलमा की मुँह में छुट गया और वो अब सलमा के ऊपर से हट गया था और उसका मामा अब उसकी चूची मसलते हुए खुब जोर-जोर से धक्के लगाए जा रहा था। सलमा सब देखते हुए बोली, “आप तो बहुत बात जानते हैं भैया, कहाँ से सीखे यह सब…”। मैंने कहा, “ब्लू-फ़िल्म और लड़कियाँ सींखाई हैं सब…”। अब विभा ने मेरी आँखों में आँखें डालते हुए पूछी, “हुंहुं…, लड़कियाँ… कितनी भैया…? मैंने अब थोड़ा शर्माते हुए कहा, “अब तक १९…”। विभा अब बोली, “अच्छा भैया, क्या स्वीटी के साथ आप सब चीज किए, वो विडियो तो ऐसा नहीं था”। मुझे कुछ समय लगा कि वो यह जानना चाहती थी कि क्या मैंने स्वीटी की गाँड़ और मुँह भी मारी है। तब मैंने कहा, “नहीं, स्वीटी के साथ सिर्फ़ चुदाई किए हैं ३-४ बार। गाँड़ तो उसकी रूम-मेट है न गुड्डी उसकी मारे थे, बल्कि वही सिखाई गाँड़ मारना। वहाँ से आने के बाद एक बार एक कौल-गर्ल की गाड़ मारे हैं यहीं किशनगंज में। वो अब आश्चर्य से बोली, “अपने किशनगंज में है कौल-गर्ल…?” मैंने कहा, “हाँ, यहाँ जो लड़कियाँ आस-पास के गाँव से शहर पढ़ने आती है और इधर-उधर होस्टल में रहती है वो सब दोपहर में दो घन्टे आती है कई होटल है”। अब विभा पूछी, “कितना पैसा मिलता है उनको”? मैंने कहा, “पता नहीं, पर होटल वाला २००रू०, ३००रू०, ४००रू० से ५००रू० प्रति घन्टा या ज्यादा भी, लेता है, जैसी लड़की वैसा दाम… और रूम का अलग से २००रू”। लड़की को इसका आधा तो जरुर देता होगा”। सप्ताह में एक-दो दिन भी आ गई तो उसका पौकेट खर्च निकल जाएगा”। सलमा को अब दोनों नीचे दरी पर लिटा दिए थी और फ़िर वैसे हीं चोदने लगे थे, इस बार नूर उसको चोद रहा था और उसका मामा उसकी मुँह मार रहा था। मामा को ऐसे सामने देख वो बार-बार अपना चेहरा अपने हाथ से छुपाती तो उसका मामा खुद अपने हाथ से उसका हाथ चेहरा पर से हटा देता। उसको अपनी भांजी को ऐसे देख कर मजा आ रहा था। विभा थोड़ी देर चुप-चाप सब देखी फ़िर अचानक बोली, “आप कितना दिए उस कौल-गर्ल को”? मुझे उसके साथ ऐसे बात करके मजा आ रहा था। मैंने सच कहा, “दो दिन में ४०००रू०… पहले दिन १००० दिए और सिर्फ़ चोदे, और उसी बार अगले बार के लिए बात कर लिए गाँड़ मराने के लिए। वो रेट डबल माँगी गाँड़ मरवाने का, तो हम अगले दिन २०००रू गाँड़ मराई का और १०००रू० सीधी चुदाई का दिए”। गाँड़ वाला २०००रू० तो सीधा उसका हो गया, क्योंकि होटलवाले को यह सब पता नहीं था। तीन घंटा समय लिए थे तो होटल का किराया भी ज्यादा देना पड़ा”।

विभा बोली, “लड़की कैसी थी देखने में”? मैंने कहा, “सांवली थी, पर फ़ीगर से मस्त… बी०ए० फ़र्स्ट ईयर की थी। बनमंखी के पास के गाँव की थी, जाति से राजपूत पर गरीब…”। यहाँ करीब एक साल से हैं, पर होटल में तीन महीने से आना शुरु की है। उसका डीटेल रख लिए हैं, बाद के लिए… अच्छी लड़की है, बहुत मजा आया उसके साथ”। अब तक दोनों सलमा की दोनों छेद में फ़िर से झड़ गए थे और सलमा अपना बदन साफ़ कर रही थी। विभा अचानक से पूछी, “अगर मुझे होटल में जाना पड़ा तो कितना मिलेगा मुझे”? मैंने उसको अपने बाँहों में भर लिया, तुम्हारे बूर के लिए तो बोली लगेगा, नीलाम होगी तुम। कुँवारी, अनचुदी बूर तो अनमोल होती है, वैसे भी शक्ल-सुरत के हिसाब से भी तुम्हारा दाम ७००रू० से ८००रू० तो कम-कम से कम होगा”। विभा आराम से मेरी गोदी में बैठ गई। मैं नीचे से नंगा तो पहले से था सो वो खुद अपने चुतड़ों की फ़ाँक के बीच में मेरा लन्ड फ़ँसाअ कर आराम से बैठ गई थी, तब मैंने कहा कि अब ध्यान से देखो सलमा को… अब असल मजा आयेगा उसको”। विभा को लग रहा था कि फ़िल्म खत्म हो गई है, क्योंकि सलमा अपना बदन तौलिए से साफ़ करने लगी थी। वो बोली, “अब कौन मजा आएगा, दोनों बुढ़े तो अब साईड हो गए हैं”। मैं अब उसको ज्ञान देते हुए कहा, “मेरी बेवकूफ़ बहना, और वो जो फ़ोटोग्राफ़र है, वो फ़ोकट में इतना मेहनत किया है, फ़िल्म बनाया है”। जब तक मेरी बात पूरी हो सीन में एक २५-२६ साल का जवान लड़का नजर आया, बिल्कुल नंगा, अपने टनटनाए हुए ८” के लन्ड के साथ। मैंने विभा को बताया कि इसी लड़के के साथ सलमा का निकाह तय है। वो इसकी चुदाई करेगा और दोनों दोस्त इसकी फ़िल्म बनाएँगे। अब देखना, अभी तक जो सलमा इतना चुप-चुप से चुद रही थी कैसे बेचैन हो कर चीख-चीख कर चुदाएगी। विभा फ़िर से पूरे मन से फ़िल्म देखने लगी।

बिना किसी भूमिका के सलमा की चुदाई शुरु हो गई थी और वो खुब मस्त हो कर चुदा रही थी। ऐसे भी जब कोई लड़की अपने दुल्हा से चुदती है तो टेंशन फ़्री हो कर चुदाती है और खुब मस्ती देती है। जिन यार-दोस्तों ने अपनी बीवी को चोदा होगा, उन्हें पता होगा कि शुरुआती दौर में वो कैसे मस्त मजे देती है। विभा भी मन से सब देखती रही और मैं विभा की चुचियों को मसलते, चुमते, चाटते अपना समय काट रहा था और भगवान से मना रहा था कि विभा अब जल्दी से मान जाए। खैर फ़िल्म खत्म हुई और तब विभा बिना किसी हील-हुज्जत के खुब आराम से मेरे टन्टनाए हुए लन्ड को चुस कर झाड दी, फ़र्क सिर्फ़ इतना हुआ कि आज वो कुछ ज्यादा प्यार से मेरे लन्ड को पूरा का पूरा निगल रही थी और इसमें उसको अपने चेहरे और गले को थोड़ा एड्जस्ट भी करना पर रहा था। फ़िर अपने कपड़ पहनने लगी तब मैं बोला, “यार विभा, अब तो मान जाओ… तब तक मेरे लन्ड को तड़पाओगी?” विभा भी मुस्कुराते हुए बोली, “मन तो अब मेरा भी खुब करता है पर…. फ़िर लगता है कि भैया से कैसे भीतर घुसवाऊँ…।’ मैंने तपाक से कहा, “क्यों??? जैसे स्वीटी घुसवाई… और फ़िर तुमको सिर्फ़ लेटे रहना होगा और बाकी सब मैं कर लूंगा। तुम बस अपना आँख बन्द कर लेना अगर तुमको मेरा चेहरा नहीं देखना तो, और सोचना कि तुम्हें तुम्हारा पति चोद रहा है।” विभा मुस्कुराई और सो तो है….कह कर कमरे से निकल गई। मैंने उसको सुनाते हुए कहा, “देख लेना विभा, एक दिन मेरे हाथ से तुम्हारा बलात्कार हो जाएगा साली…”। उसने मुझे एक फ़्लाईंग किस दिया, “तब का तब देखा जाएगा…”। मैं अकेला अपने लन्ड को हाथ में पकड़े बुद्धु की तरह बिस्तर पर पडा रह गया। मैंने सोचा कि अगर यह लडकी मेरे से नहीं चुदेगी तो उसको किसी और से चुदा देता हूँ, फ़िर उसको चोद लुँगा, फ़िर एक विचार आया कि क्यों ना उसको जबर्दस्ती पकड कर चोद दूँ, एक बार जब चुद जाएगी तब शायद आराम से चुदे…। इसी उधेड़बुन में नींद आ गई।

अगली सुबह नाश्ते के समय विभा ने मुझे खबर दी कि उसका पीरियड शुरु हो गया है सो अब वो मेरे सामने नंगी नहीं होगी। मैंने मन मसोस कर कहा, “ठीक है, पर मेरा तो चुस दोगी न…?” वो हाँ में सर हिलाई और कहा, “आप इतना अच्छा-अच्छा फ़िल्म दिखाते है तो उसका ईनाम तो आपको कम से कम इतना तो जरुर मिलेगा”। मेरे यह पूछने पर कि कब तक उसके बूर की तरफ़ से रेड सिगनल है…, वो हंसते हुए बोली, “अब आज से तो शुरु हुआ है थोड़ा सा… तो अगले दो दिन तो जरुर, शायद तीसरे दिन भी”। मुझे अब काम से निकलना था सो मैं निकल गया। वैसे भी अब जल्दी घर आने से कुछ फ़ायदा तो होना नहीं था, मैंने विभा पर कई तरह से दबाब बनाया पर सब बेकार, सो अब मैं भी उसको भुल-भाल कर अपने काम में ध्यान लगाया और सोचा कि अब जरा इसको असल में गन्दी वाली कुछ क्लीप दिखाऊँग, अगले तीन-चार दिन में। घर लौटते समय मैं बाजार से दो, बेहद गन्दी फ़िल्मों की डीवीडी ले आया था – एक जानवर वाली, और दुसरी बलात्कार वाली। जानवर वाली के कभर पर हीं घोड़े, कुत्ते, गाय आदि की फ़ोटो थी, और दुसरी वाली में एक लम्बा क्लीप था, करीब ढाई घन्टे का। विडियो बंग्लादेश का था… जिसमें एक कोठे पर नई लडकियों को सीधा करने का विडियो था। उस शाम को मैंने विभा को दोनों विडियो डीवीडी दे दिया, उनकी थीम को ब्ता कर कि देखें वो पहले कौन सा देखना चाहते है। मेरा दिल चाह रहा था कि वो बंग्लादेशी फ़िल्म देखे। जब विभा ने भी उसी को चुना तो मेरा मन खुश हो गया। मैं अब सोच रहा था कि इस फ़िल्म के साथ बात करके उसको मनाने में शायद मान जाए। खैर उस रात वो पहले मेरा लंड झाड़ दी चुस और हिला कर फ़िर हम दोनों विडियो देखने बैठे।

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