छोटी बहन के साथ चुदाई part 2

गुड्डी मुस्कुराते हुए बोली, “अरे नहीं पापा, मुझे भी लगा था आवाज, देखी कि कम जगह की वजह से स्वीटी, भैया से दब जाती थी… तो वही कराहने जैसा आवाज हो जाता था। फ़िर शायद दोनों को एक साथ सोने आ गया तो फ़िर वो लोग शान्ति से सोए रात भर.।” वो साली छिनाल, स्वीटी मेरे नीचे दब कर कराह रही थी कह रही थी, और अपना नहीं सुना रही थी खुद कैसे कुतिया वन कर चुदी और कैसी-कैसी आवाज निकाल रही थी। रीमा जी भी बोली, “हाँ दो बड़े लोग को एक बर्थ पर सोने में परेशानी तो होती ही है…”। मुझे यह बात समझ में नहीं आ रही थी कि ये दोनों कैसे माँ-बाप हैं कि बेटी जिस बर्थ पर सोई, उसके सामने वाले बर्थ पर जागी, और वो दोनों हम भाई-बहन की बात कर रहे थे…चूतिये साले।
गुड्डी ने उन सब से नजर बचा कर मुझे आँख मार दी। खैर थोड़ी देर ग्प-शप के बाद हम सब से नाश्ता किया और फ़िर स्वीटी बोली, “सलवार-सूट पहन लेते हैं अब…”, पर उसकी बात गुड्डी ने काट दी, “करना है सलवार-सूट पहन कर.. ऐसे आराम से जब मन तब ऊपर जा कर सो रहेंगे, इतना लम्बा सफ़र बाकि है।” इसके बाद मेरे से नजर मिला कर बोली, “रात में तो फ़िर नाईटी हीं पहनना है, इसमें खुब आराम रहता है, जैसे चाहो वैसे हो जाओ…इस तरह का आरामदायक कपड़ा लड़कों के लिए तो सिर्फ़ लूँगी ही है”, फ़िर मुझसे पूछी, “आप लूँगी नहीं पहनते?” मुझे लगा कि अगर मैं थोड़ी हिम्मत करूँ तो साली बाप के सामने चूदने को तैयार हो जाएगी। मैंने बस हल्के से अपना सर नहीं में हिला दिया।
फ़िर सब इधर-उधर की बात करने लगे।

स्वीटी और गुड्डी एक सीट पर बैठ कर फ़ुस्फ़ुसाते हुए बातें करने लगी, जैसे दो सहेलियाँ करती हैं। करीब ११ बजे दोनों लड़कियाँ सोने के मूड में आ गई….मैं और प्रीतम जी (गुड्डी के पापा) आमने सामने बैठे आपस में राजनीति की बातें कर रहे थे। गुड्डी मेरे सामने वाले बर्थ के ऊपर चढ़ने लगी और स्वीटी प्रीतम जी के सामने वाले बर्थ पर। नाईटी पहन कर ऊपर की बर्थ पर चढ़ना इतना आसान भी नहीं होता, सो वो जब नाईटी ऊपर चढ़ा कर बर्थ पर चढ़ने लगी तो उसकी पैन्टी साफ़ दिखने लगी। मेरे वीर्य से उसपर एक निशान सा बन गया था। मुझे उसकी पैन्टी को ऐसे घुरते हुए रीमा जी ने देखा तो अपनी बेटी से बोली, “नाईटी नीचे करो ना थोड़ा… बेशर्म की तरह लग रहा है”। मैं समझ गया कि वो क्या कह रही है। मेरा ध्यान अब प्रीतम जी की तरफ़ गया। वो बेचारा मुँह आधा खोले मेरी बहन की तरफ़ देख रहा था। मैंने स्वीटी की तरफ़ सर घुमाया। उसने एक पैर ऊपर की बर्थ पर रख लिया था और एक अभी भी सीढ़ी पर हीं था। पैन्टी तो नहीं पर उसकी जाँघ पूरी दिख रही थी। मुझे थोड़ा संतोष हुआ… साला मेरे घर के माल का सिर्फ़ जाँघ देखा और मैंने उसके घर की माल की पैन्टी तक देखी। फ़िर ख्याल आया, उसकी मेरे से क्या बराबरी… मैंने तो उसकी बेटी की बूर की छेद में अपना माल तक थूका था। साला कहीं मेरे बच्चे का नाना बन गया तो…, मुझे अब अपने ख्याल पर हँसी आ गई। जल्दी हीं दोनों बेसुध सो गईं। करीब ३ घन्टे बाद २ बजे हमने उन दोनों को जगाया, जब खाना खाने की बारी आई। फ़िर सब बैठ कर ताश खेलने लगे।

स्वीटी तो ताश खेलना आता नहीं था सो वो गुड्डी के पास बैठी देख रही थी। उन दोनों लड़कियों के सामने वाले बर्थ पर हम दोनों थे। मैं और रीमा जी पार्टनर थे और गुड्डी और उसके पापा एक साईड थे। मेरे और रीमा जी की टीम घन्टा भर बाद आगे हो गई। अब हम बोर होने लगे थे, सो खेल बन्द करना चाहते थे…पर गुड्डी की जिद थी कि वो जीतते हुए खेल को बन्द करेगी…सो हम खेल रहे थे। थोड़े समय बाद वो भी बोर हो गई, सो अब आखिरी बाजी फ़ेंटी गई। गुड्डी ने जोश से कहा, “पापा यह अंतिम बाजी हम हीं जीतेंगे….अंत भला तो सब भला…”। फ़िर उसने अजीब काम किया। अपने पैर ऐसे मोड़ कर बैठ गई कि घुटने के ऊपर छाती के पास जाने से नाईटी के सामने वाला भाग घुटने के सथ ऊपर चला गया और नाईटी के पीछे का भाग उसकी चुतड़ से दबा हुआ सीट के नीचे लटका रह गया। उसकी जाँघ और उन गोरी जाँघों के बीच फ़ँसी हुई हल्के पीले रंग की पैन्टी अब मेरे और उसके पापा के सामने थी। उसकी पैन्टी पर उसकी बूर के ठीक सामने मेरे वीर्य से बना एक धब्बा साफ़ दिख रहा था। मेरा ध्यान अब बँटने लगा था। प्रीतम जी ने भी देखा सब पर अब जवान बेटी से कहें कैसे कि वो गन्दे और बेशर्म तरीके से एक जवान लड़के के सामने बैठी हुई है। पता नहीं वो कैसा महसूस कर रहे ते…पर वो बार-बार देख जरूर रहे थे अपनी बेटी के उस सबसे प्राईवेट अंग को। रीमा जी को तो यह सब पता हीं नहीं चल रहा था, वो बैठी हीं ऐसे कोण पर थीं। अंतिम दो पत्ते हाथ में थे, और अगर सब ठीक हुआ तो मेरी टीम जीत जाती, पर जब मेरे चाल चलने की बारी आई तो मेरी नजर फ़िर से गुड्डी की पैन्टी की तरफ़ ऊठी और उसने अपने बूर से सटे पैन्टी के एलास्टीक के पास ऐसे खुजाया कि वो एलास्टीक एक तरफ़ हो गया और मुझे (और शायद प्रीतम जी को भी) उसकी चूत के साईड में जमे हुए काले-काले झाँटों के दर्शन हो गए।

एक जरा सा और कि मुझे उसकी कोमल बूर की फ़ाँक दिख जाती। तभी उसे लग गया कि उसका बाप भी उसकी बूर को इस तरह से खुजाते हुए देख रहा है… वो थोड़ा हड़बड़ाई, सकपकाई और जल्दी से अपने पैर नीचे कर लिए। पर मैंने उसको इस शादार अदा का ईनाम दे दिया, एक गलत पत्त फ़ेंक कर…इस तरह से वो प्यारी लड़की जीत गई। करीब ६ बजे मैं जब एक स्टेशन पर नीचे उतरा तो वो भी साथ में उतरी। स्वीटी फ़िर से ऊपर लेटने चली गई थी। वहाँ स्टेशन पर हम दोनों ने कोल्ड-ड्रीन्क पी। और फ़िर वहीं गुड्डी ने मुझसे सब राज खोला। उसी ने स्वीटी को जब कहा कि आज रात उसके मजे हैं वो पूरी रात जवान मर्द से चिपक कर सोएगी तो स्वीटी उसको बोली थी कि उससे क्या होगा, मेरे भैया हैं वो…कोई और होता तो कितना मजा आता, हिलते हुए ट्रेन में निचले होठ से केला खाते…। तब गुड्डी ने उसको हिम्मत दिया कि वो इशारा करेगी और फ़िर मौका मिलने से स्वीटी न शर्माए…। दोनों लड़कियाँ यह सब पहले हीं तय कर ली थीं और उसी प्लान से दोनों नाईटी पहनी थी। फ़िर मुझे उकसा कर उसने आखिर मुझे गुड्डी के ऊपर चढ़ा दिया। फ़िर वो बोली, “आज रात में मैं आपके साथ सोऊँगी…फ़िर पता नहीं मौका मिले या ना मिले ट्रेन पर चुदाने का। चलती ट्रेन के हिचकोले और साथ में चूत के भीतर लण्ड के धक्के एक साथ कमाल का मजा देते हैं।”

मैंने कहा, “और तुम्हारे मम्मी-पापा…?”
वो बोली, “मैं उन्हें नींद की गोली दे दुँगी एक माईल्ड सी…मम्मी तो वैसे हीं लम्बे सफ़र में खा कर हीं सोती है, पापा को किसी तरह दे दुँगी। वैसे भी उनकी नींद गहरी होती है। आज रात भर में कम से कम तीन बार चुदाना है मुझे….”
मैं बोला, “मेरा तो बैण्ड बज जाएगा…”
वो हँसते हुए बोली, “अब बैण्ड बजे या बारात निकले, पर तीन से कम में मैं सब से कह दुँगी की तुम मुझे और अपनी बहन दोनों को चोदे हैं रात में….सोच लो।” वो अब खुल कर हँस रही थी…हाहाहाहा…
मैं उसको डब्बे के तरफ़ ले जाते हुए कहा, “साली बहुत कमीनी चीज हो तुम…पक्का रंडी हो…” और मैं भी हँस दिया।
वो मेरी गाली का जवाब दी, “और तुम हो पक्के रंडीबाज….साले बहिनचोद…”
हम अब फ़िर से अपने सीट पर आ गए थे। इधर-उधर की बातें करते हुए समय कट गया….और फ़िर से करीब ८ बजे खाने के बाद सोने का मूड बनने लगा। दिन भर बातें वातें करके वैसे भी सब थकने लगे थे और कुछ लोग तो लगभग सो गए थे। अंत में गुड्डी ने बड़ी चालाकी एक आधे बोतल पानी में एक गोली घुला दी, फ़िर आदतन जब सोने के पहले प्रीतन जी ने पानी माँगा तो वही पानी देते हुए मुझे आँख मारी…यनि अब सब सेट है।

९:३० बज रहा था और रीमा जी सो चुकी थी। स्वीटी जागी हुई थी, और उसको लग रहा था कि आज भी उसे चुदना होगा सो वो इसी चक्कर में थी कि वो चुद जाए फ़िर सोएगी। वो अब सोने के पहले पेशाब करने के लिए गई, और जब लौटी तो बोली कि चार कम्पार्ट्मेन्ट बाद जा कर देखिए….हमसे भी आगे के लोग है इस ट्रेन में। मैं और गुड्डी उस तरफ़ चल दिए। वहाँ एक जोड़ा अपनी काम-वासना शान्त करने में लगा हुआ था। नीचे के एक बर्थ पर दोनों कमर से नीचे पूरी तरह से नंगे थे। करीब २४-२५ साल की लड़की के मुँह में शायद उसकी पैन्टी हीं घुसा दी गई थी कि उसके मुँह से ज्यादा आवाज न हो। गूँ-गूँ की आवाज निकल रही थी चूत में लगने वाले हर धक्के के साथ। सिर्फ़ एक ब्लाऊज था बदन पर। काली दक्षिण भारतीय लड़की थी वो। उसको एक करीब ३० साल का मर्द जो पूरी तरह से नंगा था चोद रहा था। आस-पास में सब सोए थे, या पता नहीं कहीं सोने का नाटक करके उनकी चुदाई देख हीं रहे हों। उस काली लड़की की खुली और चुद रही चूत के भीतर का भाग गजब का लाल दिख रहा था। हमारे देखते देखते उस मर्द ने उसकी चूत के भीतर हीं पानी छोड़ दी और जब उसने अपना लन्ड बाहर खींचा तो सफ़ेद मलाई चूत से बाहर बह निकला। आब उन दोनों ने हमें देखा और झेंप गए। लड़की ने जल्दी से साड़ी उठा कर अपना बदन ढ़का और सर नीचे करके बैठ गई। उस लड़के ने बताया कि वो उसकी बीवी है….। गुड्डी ने तुरन्त कहा, “शुभकामनाएँ…अगर यह बीवी न होती तो ज्यादा शुभकामना देती…”। पता नहीं वो क्या समझा, पर हम दोनों वहाँ से हँसते हुए अपने जगह पर चले आए।

स्वीटी पूछी,”देखे…कैसे बेशर्म थे, नीचे की सीट पर यह सब कर रहे थे?” गुड्डी बोली, “ये कौन सी बेशर्मी थी, यह तो कुछ नहीं था….आज मुझे देखना, पूरी रात बिल्कुल नंगी हो कर चुदाऊँगी और पूरा आवाज निकाल-निकाल कर। सब जान लें कि अच्छे से चुद रही हूँ।” स्वीटी बोली, “चलो देखते हैं तुमको भी…. वो लोग तो नीचे हीं बिना किसी से लजाए शुरु हो गये थे, और इसके बाद तुम कौन सा तीर मार लोगी…”। उसने भी स्वीटी का चैलेंज स्वीकार किया और फ़िर वहीं खड़े खड़े अपना नाईटी खोल दिया। अभी हमारे कंपार्टमेंट की बत्ती पूरी तरह से जली हुई थी। उसके मम्मी-पापा वहीं बर्थ पर सोए थे और यह बेशर्म उन दोनों के बीच में अधनंगी खड़ी हो गई। गुलाबी ब्रा और हल्के पीले रंग की पैन्टी में। ५’ २” लम्बी गुड्डी का सफ़ेद बुस्शाक बदन पूरी रोशनी में दमक उठा था। एक संपन्न घर की माड़वाड़ी लड़की थी। पिछली रात को तो कपड़े उतारे नहीं थे मैंने दोनों में से किसी लड़की के सो, अब पहली बार बिना नाईटी के गुड्डी का बदन दमक रहा था। उसने फ़िर अपने बाल की क्लीप खोली और अपने कंधे तक लम्बे बाल अपने चेहरे के दोनों तरफ़ ठीक से फ़ैला लिए। उसकी काँख में भी बाल थे जैसे उसकी बूर पे थे, करीब १५-२० दिन पहले के साफ़ किए गए। बालों को ठीक करते हुए वो अपने गोरी-गोरी काँखों के गढ़्ढ़े में निकले हुए काले घने हल्के से घुंघराले बालों का खूब जम कर दीदार कराई। मुझे डर था कि कहीं उसके माँ-बाप में से कोई जाग न जाए। पर वो आज खुद को बेशर्म साबित करने में लगी हुई थी।

वहीं खड़े खड़े उसने मुझे निमंत्रण दिया, “आ जाओ अब यहीं मैं टेबुल पकड़ कर झुकती हूँ तुम पहले पीछे से चोदो मुझे, यहीं नीचे… स्वीटी को भी पता चले कि उस औरत से ज्यादा गंदी मैं हूँ।” मैं घबड़ा गया और बोली, “हट… कहीं ये लोग जाग गए तो…तुम तो उनकी बेटी हो, मुझे वो कहीं का नहीं छोड़ेगे. यहाँ ऊपर कम से कम कुछ पर्दा तो होगा।” स्वीटी आराम से सब तमाशा देख रही थी। गुड्डी ने मेरे न का पक्का ईरादा महसूस किया तो हथियार डाले और बोली, “ठीक है, फ़िर पर रात भर में कम-से-कम तीन बार मुझे चुदना है, बहन को आज की रात छोड़ो…उसको तो कभी भी चोद लोगे।” फ़िर उसने अपनी ब्रा-पैन्टी नीचे खड़े-खड़े हीं खोली और अपनी माँ के बर्थ पर डालते हुए कहा, “कैसे हरामी हो कि तुम्हें एक जवान लड़की को तब चोदने का मौका मिल रहा है जब उस लड़की की एक तरह उसकी माँ लेटी है और एक तरफ़ उसके पापा…फ़िर भी तुम उसे वहाँ नहीं चोदोगे… अपने बेड पर हीं चोदोगे, बेवकूफ़…।” मैंने अब कह दिया, “सब के अलग-अलग संस्कार होते हैं…”। वो अब ऊपर मेरे बर्थ पे चढ़ते हुए बोली, “हाँ बे बहनचोद…तुम्हारा संस्कार मुझे पता है…एक मिनट में बह्न की चूत में अपना लण्ड घुसा कर उसमें से अपना बच्चा पैदा कर दोगे।” मुझे बहुत शर्म आई ऐसे उसकी बात सुन कर और स्वीटी तो शर्म से लाल हो गई पर अब हम दोनों के लिए यह बात सौ फ़ीसदी सच थी सो हम दोनों उस बात पर नजर नीची करने के अलावे और क्या कर सकते थे?

मैंने बत्ती बन्द कर दी तो उसने नाईट बल्ब जला लिया और बोली, “कल तो जैसे-तैसे हुआ…आज मुझे बिल्कुल एक दुल्हन जिसे सुहागरात को चुदती है वैसे प्यार से चोदो, पूरी तरह से गरम करके, फ़िर मुझे चोद कर ठण्डा करो” और इसी के साथ वो मेरे ऊपर चढ़ गई और मेरे होठ चुसने लगी। मेरे पास अब कोई ऊपाय नहीं था सो मैं भी शुरु हो गया। कुछ समय की चुम्मा-चाटी के बाद मैंने उसको नीचे लिटा लिया और उसकी झाँटों भरी बूर पर अपने होठ लगा दिया, और इस बार वो जिस तरह से वो उईई माँ बोली, मैं डर गया। आवाज कम से कम २० फ़ीट गई होगी दोनों तरह…लगभग पूरी बौगी ने सुना होगा (अगर जो कोई जगा हुआ हो तो)। मैंने अपना मुँह हटा लिया, तो उसको समझ में आया, वो बोली “अच्छा अब चाटो, मैं हल्ला नहीं करुँगी…” सच में इसके बाद वो हल्के-हल्के सिसकी भरने लगी और मैं अब आराम से उसके बूर को चाटता हुआ मजे लेने लगा। मेरे दिमाग में था कि यह सब स्वीटी देख रही है…अब अगली बार उसकी बूर भी पहले चाटुँगा फ़िर चोदुँगा। क्या वो मुझसे अपना बूर चटवाएगी, या शर्म से ना कह देगी? क्या मैं उसके साथ जबरद्स्ती करके उसकी बूर चाट पाऊँगा? फ़िर ख्याल आया – अरे वो तो मुझसे पहले ही किसी और से सेक्स करती रही है, ऐसी जवान और सेक्सी लड़की को कोई वैसी हड़बड़ी में तो चोदा नहीं होगा जैसी कल रात मैंने चोदी… और क्या पता कहीं मेरी बहन लण्ड भी चूसती हो, अब तो बिना उसके मुँह से सुने कुछ जानना मुश्किल है। गुड्डी अब कसमसाने लगी थी। वो कभी जाँघ भींचती तो कभी कमर ऊठाती। मुझे पता चल गया कि अब यह लैण्डिया चुदास से भर गई है सो मैं उठा और उसकी जाँघो को खोलते हुए उसके टाँगों के बीच में घुटने के बल बैठा।

वो समझ गई कि अब उसकी चुदाई होने वाली है सो वो भी अब शान्त हो कर आने वाले पल का इंतजार करने लगी। मैंने उसके बूर की फ़ाँकों को खोल कर उस पर अपना लण्ड भिरा दिया और फ़िर उसकी काँख के नीचे से अपने दोनों हाथ निकाल कर उसके कँधों को पकड़ लिया फ़िर अपने मांसल जाँघों से उसकी खुली हुई आमंत्रण देती जाँघो को दबा कर एक तरह से ऐसे स्थिर कर दिया कि अब अगर वो कुँवारी होती और उसकी सील तोड़ी जा रही होती तब भी उसके हिलन सकने की संभवना कम हीं थी। अपनी चुदाई में देर होता देख वो बोली, “ओह, ऐसे सेट करके भी इतना देर…” मैंने अब उसको कहा, “तुम्हीं बोली थी ना कि ऐसे चुदना है जैसे सुहागरात को दुल्हन चुदती है…सो मैंने अब तुमको वैसे हीं जकड़ लिया है जिस तरीके से ज्यादातर दुल्हन की सील टुटती है सुहागरात में। अब अगर एक झटके में भी लड़की की सील टुटेगी तब भी आँख से चाहे जितना आँसू बहे पर वो बिना अपनी सील टुटवाए निकल नहीं सकेगी मर्द की गिरफ़्त से।” इसके बाद मैंने उसकी बूर में लण्ड पेल दिया….फ़ीच्च… की आवाज हुई और पूरा का पूरा लण्ड जड़ तक भीतर। गुड्डी भी इस लण्ड से प्रहार से हल्के से मस्त तरीके से आआअह्ह्ह्ह्ह्ह…. की और फ़िर अपने आँख बन्द कर लिए।

मेरे लिए यह इशारा थ कि अब मैं अपनी चोदन-कला का प्रदर्शन करूँ, सो भी अब शुरु हो गया। मैंने अपनी बहन की तरफ़ देखा, जो आराम से अब रोशनी में मुझे एक जवान लड़की को चोदते हुए देख कर मुस्कुरा रही थी। उसने मुझे एक थम्स-अप दिया और आँख मारी। मैंने अब उसकी चिन्ता छोड़ दी और नीचे पड़ी गुड्डी की चुदाई करने लगा….गच्च गच्च फ़च्च फ़च्च… गच्च गच्च फ़च्च फ़च्च… की आवाज उसकी चुद रही बूर से निकल कर माहौल को हसीन बना रही थी, और मैं उसके भूल गया कि जिस बर्थ पर उसको चोद रहा हूँ उसके नीचे उसका सगा बाप सोया हुआ है और सामने की बर्थ पर उसकी माँ सोई है। बल्कि उसकी मम्मी का चेहरा तो हमारी बर्थ की तरफ़ हीं था और उसकी बेटी भी इस सब से बेफ़िक्र हो कर मस्त हो कर एक अजनबी से ट्रेन में ठीक-ठाक रोशनी में आह आह… ओह ओह.. करके चुदा रही थी। करीब ५० धक्के अपनी बूर में लगवाने के बाद गुड्डी बोली, “अब तुम लेटो और मैं तुम्हारी सवारी करती हूँ।” फ़िर मुझे नीचे लिटा कर गुड्डी मेरे ऊपर चढ़ गई और ऊपर से उछल-उछल कर मुझे चोदने लगी। इसी तरह मेरे लण्ड से अपनी बूर को रगड़ते हुए उसका बदन काँपा तो मैं समझ गया कि अब यह खलास हो रही है, तभी मैं भी झड़ गया, बिना उसको बताए…उसकी बूर में मेरे लण्ड ने भरपूर थुक निकाला, सफ़ेद-सफ़ेद….लसलसा…चिप-चिपा सा मेरा वीर्य उसकी बूर को भर दिया। उसे इसका आभास हो गया था, वो मुस्कुराते हुए मेरे ऊपर से हटी और नंगी ही नीचे उतर गई। नीचे की बर्थ पर एक तरफ़ उसकी माँ सोई थी और दूसरी तरफ़ उसका बाप और वो बेशर्म अपनी बूर में मेरा सफ़ेदा लिए बीच में खड़ी थी. उसकी झाँटों पर मेरा सफ़ेदा लिसड़ा हुआ साफ़ दिख रहा था और उसकी बूर से पानी उसकी भीतरी जाँघों पर बह रहा था।

उसने आराम से अपनी मम्मी के रुमाल से अपनी बूर पोछी और मुझे नीचे आने का इशारा किया। मेरा दिल धक से किया, क्या फ़िर इसको नीचे चुदाने का भूत सवार हो गया। मेरे ना में सिर हिलाने पर उसने गुस्से से मुझे जोर से डाँटते हुए कहा, “नीचे और नहीं तो मैं जोर-जोर से चिल्लाने लगुँगी” और उसने एक बार पुकारा भी “मम्मी,,,मम्मी…”। मेरा तो अब उसका यह ड्रामा देख फ़टने लगा। मैं तोलिया लपेट झट से नीचे आया। स्वीटी यह सब देख कर हँस पड़ी। गुड्डी वहीं नीचे खिड़्की पकड़ कर झुक गई और अपना एक हाथ अपने जाँघों के बीच से निकाल कर अपने बूर की फ़ाँक खोल दी। किसी बछिया की बूर जैसी दिख रही थी उसके बूर की अधखुली फ़ाँक। मेरे पास अब कोई चारा नहीं था। मेरा लन्ड एक बार हीं झड़ा था और उसमें अभी भी पूरा कसाव था। मैंने एक नजर उसके खर्राटे लेते बाप के चहरे पर डाली और फ़िर बिना कुछ सोचें उसकी बूर में लन्ड घुसा दिया। एक मीठी आआअह्ह्ह्ह्ह के साथ गुड्डी अपने बूर में मेरे लन्ड को महसूस करके शान्त हो गई। मैं अब हल्के-हल्के उसको चोदने लगा था, कि आवाज कम से कम हो। गुड्डी भी शान्त हो कर चुद रही थी, हाँ बीच-बीच में वो अपने माँ-बाप की तरफ़ भी देख लेती थी। जल्दी हीं मेरा खून गर्म हो गया और मैंने सही वाले धक्के लगाने शुरु कर दिए। आअह्ह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह ओह ओह से शमां बंधने लगा था। जल्द हीं मैं उसकी बूर में फ़िर से झड़ गया। वैसे भी किसी लड़की को ऐसे कुतिया के तरह चोदने में मैं जल्दी स्खलित हो जाता हूँ, मुझे ऐसा लगता है। वो यह समझ गई पर मुझे नहीं रुकने को कहा और फ़िर १५-२० सेकेण्ड बाद वो भी शान्त हो गई। हमदोंनो अलग हुए। गुड्डी ने फ़िर से अपनी मम्मी के रुमाल में अपना बूर पोछा और फ़िर उस लिसड़े हुए रुमाल को अपनी मम्मी के पास रख दिया। इसके बाद वो वैसे हीं नंग-धड़ंग टायलेट की तरफ़ बढ़ गई। मुझे भी पेशाब लग गया था, तो मैं भी हिम्मत करके उसके पीछे चल दिया। वैसे भी उस तरफ़ हीं वो जवान जोड़ा था जिसकी चुदाई हमने देखी थी।

मैंने देखा कि वो दोनों अभी भी जगे हुए हैं और मोबाईल पर कोई फ़िल्म देख रहे थे शायद। हम दोनों को ऐसे नंगे देख कर दोनों मुस्कुराए, तो मैं भी मुस्कुराया। टायलेट में पहले गुड्डी हीं गई, पर उसने दरवाजा बन्द नहीं किया और आज पहली बार मैंने एक जवान लड़की को पेशाब करते देखा। छॊटी बच्चियों को मैं अक्सर देखता था जब भी मौका मिला। बिना नजर हटाए मुझे बूर की उस फ़ाँक से निकलती पेशाब की धार को देखते हुए अपने लन्ड में हमेशा से कसाव्व महसूस होता था। आज मेरे सामने एक जवान लड़की जिसकी बूर पर झाँट भी थे, मेरे सामने बैठ कर मूत रही थी, मेरे से नजर मिलाए। मेरा लन्ड तो जैसे अब फ़ट जाता, कि तभी वो उठी और अपने बूर पर हाथ फ़िराया। उसकी हथेली पर उसके पेशाब के बूँद लग गए थे और उसने अपनी हथेली मेरी तरफ़ बढ़ाया। मैंने भी बिना कुछ सोंचे, उसकी पेशाब की बूँद को उसकी हथेली पर से चाट लिया। उसने मेरे होठ चूम लिए और फ़िर एक तरफ़ हट गई। उसके दिखाते हुए मैंने भी पेशाब किया और फ़िर जब मैं लन्ड हिला कर पेशाब की आखिरी कुछ बूँद निकाल रहा था गुड्डी झुकी और मेरे लन्ड को चाट ली। मेरा लन्ड अब कुछ ढ़ीला हो गया था और गुड्डी के पीछे-पीछे मैं भी अब वापस अपनी बर्थ की तरफ़ चल पड़ा। जाते हुए जब हमने फ़िर से उस दक्षिण-भारतीय जोड़े को देखा तो हम दंग रह गए। मेरे और गुड्डी को ऐसे डब्बे में घुमते देख उनको भी शायद जोश आ गया था और अब उस मर्द के लन्ड को चूस कर उसके साथ की लड़की कड़ा कर रही थी। गुड्डी ने एक बार उनको देखा फ़िर मुझे देखा और फ़िर वो नंगे हीं उस जोड़े की तरफ़ बढ़ गई। उसको पास आता देख वो लड़की सकपकाई और लन्ड को अपने मुँह से बाहर करके एक तरफ़ हट गई।

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