छोटी बहन के साथ चुदाई part 11

रास्ते में चलते हुए मैं सोच रहा था कि अब विभा को कुछ ऐसे चोदना है कि वहाँ का बाकी जोड़ा अपना चुदाई छोड कर विभा की चुदाई देखे। मैंने विभा को कह दिया कि वहाँ वो मुझे पुरा सहयोग करे और बिन्दास चुदे, बिना कोई फ़िक्र। वो बोली, “अभी तक आपको परेशानी हुई है…. जो कहे सब कर रही हूँ। जैसा कपड़ा बोले… पहनी, जब जैसा कहे… की। यहाँ ऐसे खुले में सब के सामने करते इतना लाज लगेगा फ़िर भी आपके लिए अभी तैयार हुई की नहीं। आपको क्या लगता है कि मैं आपको निराश करुँगी। मम्मी-पापा के बाद आप हम सब को इतना मेहनत से और प्यार से पाले हैं। आपकी शादी के लिए कैसे सब जोर दे रहे थे माँ के मरने के बाद की घर में ३ लडकी है कैसे रहेगी, पर अगर आप शादी कर लेते और भाभी के साथ अलग हो जाते तब हम लोग कहाँ जाते।” उसकी आँख डबडबा गई थी, यह सब कहते। मैंने उसको कहा, “पगली यही सब सोचती हो… तुम लोग को पाले तो क्या इसीलिए तुम चुदवा रही हो। मैं प्यार नहीं करता क्या? सिर्फ़ चुदाई का हीं रिश्ता हमारे बीच नहीं है। यह सब मत सोच… मेरी बहन। अब चट-पट मेरी जान बन जाओ…. यहाँ अभी तुम बहन नहीं हो मेरी, कोई दया नहीं करने वाला मैं…” और मैंने उसको आँख मारी। वो हँसने लगी… तो मैंने कह दिया, “यहाँ तो मैं अपनी जान को रंडी बनाने के लिए लाया हूँ”। वो बोली, “चुप… बदमाश… गुंडा कहीं का”। हम दोनों हँस दिए। बीच पर पहुँचते-पहुँचते ६ बजने लगा था और सूर्यास्त के बाद का हल्का सा रोशनी अब था। उस चाय की दुकान पर फ़िर हम दोनों पहुँचे तो उस लडके ने पहचान कर पूछा, “कल कोई परेशानी नहीं हुई न… कुछ हो तो बताना”। मैंने उस लडके को २०० रु० देते हुए कहा, “पीछे खाली है?” वो मुस्कुराते हुए बोला, “खाली होता है ऐसा जगह… अभी भी दो या तीन होगा, अब लोग के आने का समय हुआ है… जाओ, ८ बजे का टाईम याद रखना।” मैं अभी बात कर हीं रहा था कि दो और जोडा आ गया। दोनों दक्षिण भारतीय लग रहे थे, एक तो ४० पार का जोडा था और एक जवान जोडा था विद्यार्थी टाईप। हम सब एक दुसरे पर नजर डाले और लगभग साथ-साथ झोपड़ी के पीछे चल दिए। पीछे दो और जोडा था। एक अपनी चुदाई खत्म कर चुका था और लडकी खडा हो कर अपनी साड़ी पहन रही थी, जबकि लड़का पास में सिर्फ़ अंदरवीयर पहन कर बैठा था, शाय्द वो एक बार और चुदाई करने के लिए आराम कर रहा था। दुसरा जोडा का चुदाई चल रहा था। लडकी आँख बन्द करके लेटी थी और अपना चेहरा अपने हथेली से ढकी हुई थी। घरेलू नौकरानी टाईप की थी २० के आस पास की और उसके जाँघ को अपने हाथों से फ़ैला कर एक दुबला-पतला मरीयल सा करीब ४० साल का मर्द उसको चोद रहा था। उसको हमारे आने से कोई फ़र्क नहीं पडा था। हमारे साथ का जवान जोडा एक तरफ़ अलग आगे बढा और फ़िर साईड में बैठ कर एक दुसरे को बाँहों में भर कर चुमने लगा। हमारे साथ वाले अंकल-आंटी भी अपना जगह खोज लिए और शान्ति से बैठ कर कभी समुद्र तो कभी उस चुदाई कर रहे जोडे को देखते थे चुप-चाप। शायद उन्हें अंधेरा होने का इंतजार था। मैं विभा का हाथ पकड कर उस चुदाई कर रहे जोड़े की तरफ़ बढ गया।

हमारे साथ वाले दोनों जोडे भी ऐसी जगह बैठे थे कि उनको चुदाई करते देख सकते थे और थोडा दूर थी। पर मैंने जो जगह चुना वो ऐसा था जैसे मैं विभा को दिखाना चाहता था सब। मैं विभा का हाथ पकड़े उन चुदाई करते जोडे से २’ की दूरी पर जा कर उनपर भरपूर नजर डालते हुए बैठा और फ़िर विभा को भी बैठने का इशारा किया। उस लडकी को चोद रहे लडके अपना धक्का रोक कर एक नजर हम दोनों पर डाली तो उस लडकी ने भी अपना हाथ चेहरे से हटा कर आँख खोल कर देखा। हम सब की नजरे मिली। उसी समय मैंने विभा को कहा कि वो अपना कपड़ा उतारे और मैं भी अपने शर्ट की बटन खोलने लगा। हमें अपने चुदाई की तैयारी करते देख उस मर्द ने थोडा निश्चिन्त हो कर अपना लन्ड बाहर निकाला और लडकी से पलटने को कहा। लड़की की चूत झाँटों से भरी हुई थी, जैसा कि गरीब नौकरानी टाईप लडकियों का होता है। उसका केवल सलवार खुला था और वो अपना कुर्ता पहने हुए थी। वो पलट गई और तब उस मर्द ने उसको पीछे से चोदना शुरु किया। मैं अपना आधा बदन नंगा किया तब तक विभा भी अपना कुर्ता उतार दी थी। वो काली ब्रा पहने हुए थी नई वाली। घुटने पर बैठ कर वो अपने सलवार का डोरी खींचने वाली थी कि मैं उसको अपने बाँहों में भर लिया और होठ चुमने लगा। मुझे पक्का यकीन था कि सब अब हमें भी देख रहे हैं। मैं तिरछी नजर से इसकी जाँच भी की और फ़िर विभा को खड कर दिया और उसकी सलवार उतार दी। काली नन्ही सी पैन्टी में विभा का सिर्फ़ फ़ाँक ढ़का हुआ था और वो उस ब्रा-पैन्टी में मस्त माल दिख रही थी। उस जगह १० लोग थे, पर वो अकेली खडी थी। जब वो बैठने लगी तब मैंने उसको वैसे ही रुकने को कहा और भर नजर उसकी खुबसुरती को देखने लगा। शाम के रोशनी में मैंने विभा का सुनदर गोरा बदन को खुब निहारा सामने बैठ कर और बाकी सब को भी खुब मौका दिया कि वो लोग भी विभा की जवानी का रस पान करें। फ़िर मैं उठा और उसको सीने से चिपका कर चुमते हुए उसके ब्रा का हूक खोला, फ़िर चुचियों को सहलाते हुए अपने हाथ पेट से कमर पर घुमा कर उसको अपने कमर से सटाया। इसके बाद मैं घुटनों क बल बैठ गया जैसे नमाज पढते समय लोग बैठता है और उसकी पैन्टी की डोरी पकड कर नीचे खींच दिया। उसका मक्खन जैसई चिकनी चूत शाम की हल्की रोशनी में दमक उठी। उसी समय मेरे बगल में चोद रहे मर्द ने अपना माल उस नौकरानी के चूत में निकाल दिया और और गुस्सा करने लगी। फ़िर दोनों अपना-अपना कपड़ा पहनने लगे और अब वो दोनों मेरी विभा को भरपूर नजर से देख रहे थे। उस शाम की रोशनी में भी मुझे विभा का चेहरा शर्म से लाल होता हुआ दिखा। मैंने नजर घुमाई तो देखा कि सब मर्द लोग अपनी अपनी लडकी के कपडे उतारते हुए चुम्मा-चाटी कर रहे हैं। मैंने विभा को हिम्मत दिया, लोग पर ध्यान मत दो, सब अपने काम में लगे हैं, तुम भी अपने काम में लगो।

मैं विभा को वैसे ही खडा रखे हुए उसकी चोत पर अपना मुँह चिपका दिया और उसकी चिकनी चूत को चाटने लगा। बिना झाँट के उसकी चूत मक्खन-मलाई का मजा दे रही थी।जल्दी ही वह उत्तेजना से सिस्की लेने लगी। बाके के सब लोग भी आपने खेल के साथ बीच-बीच में हम दोनों का भी खेल देख रहे थे। विभा वहाँ मौजुद सब माल में सबसे हिट थी। उससे अब रहा नहीं जा रहा था तो वो वो बैठने लगी मैं भी अब अति उत्तेजित हो गया था, सो मैंने उसको बैठने दिया और खडा हो कर अपना पैन्ट खोल दिया और नंगा हो गया। मेरा लन्ड अपना पूरा ७’ का शक्ल ले चुका था। लाल सुपाड़ा चमक रहा था। मैंने उसको अपना लन्ड चुसने को कहा, जब मैंने देखा कि वो अंकल अपना लन्ड आंटी से चुसा रहे हैं और हमारे तरफ़ देख रहे हैं। वो विद्यार्थी जोडा अब चुदाई शुरु कर दिया था। लड़का नीचे लेटा हुआ हम दोनों को देख रहा था और लडकी उसके लन्ड की सवारी कर रही थी।

विभा पर उस महौल का सर हुआ और फ़िर वो भी खुलने लगी। यह सब देख कर जोश में भर कर मैंने विभा को दो पानी चोदा। बेचारी थक जाने के बाद भी मेरे खुशी के लिए मेरे ईशारे पर नाच रही थी। शुरु की उसकी हिचक अब पूरी तरह से दूर हो गई थी और वो बिना किसी लाज-शर्म के अब एक असल कुतिया की तरह चुद रही थी। करीब दो घन्टे की मस्ती के बाद अब मेरा भी बुरा हाल हो गया था सो अब हम दोनों भी थक कर शान्त हो गए और फ़िर वहाँ से निकल लिए। उस रात कमरे में हम दोनों नंगे ही सोए, इतना थक गए थे कि आज रात चुदाई का सवाल ही नहीं था। सुबह-सुबह विभा ने मुझे जगाया और फ़िर एक जोरदार चुम्बन के बाद हम दोनों बिस्तर से बाहर निकले और नहा-धोकर मंदिर निकल गए। दिन भर घुम-घाम कर शाम को फ़िर से समुद्र किनारे पहुँच गए चुदाई करने के लिए।

आज वहाँ कोई नहीं था, सो विभा और मैं आराम से अपने कपडे खोले और फ़िर एक-दूसरे से चिपट कर चुम्मा-चाटी करने लगे। तभी वहाँ दो जोडा आया, वो सब हमलोग की तरह ही २०-३० के बीच की उम्र के थे। वो सब हम दोनों को नंगे एक-दूसरे से लिपटे हुए देख कर हाथ हिला कर हमें विश किया और फ़िर हमलोग से करीब १० फ़ीट बगल में अपने बैग से चादर निकाल कर बिछाने लगे। लडके सब इंतजाम कर रहे थे जबकि लड़कियाँ साथ-साथ बात करते हुए अपने कपड़े उतारने लगीं। वो सब लोकल ओडिसा के हीं थे और ऊड़िया में आपस में बात कर रहे थे। दोनों लडकियाँ जब नंगी हो गई तो दोनों चादर कर लेट गई और फ़िर उन दोनों लड़कों ने अपनी-अपनी लडकी की चुतड़ों को सहलाते हुए उनकी गांड़ की छेद को चाटना शुरु कर दिया। दोनों आपसे में खिलखिला कर बाते कर रही थीं जबकि दोनों लडके लगातार उनकी गाँड़ से खेल रहे थे। मैं समझने लगा कि दोनों आज इन लड़कियों की गाँड मारेंगे। मैंने विभा के यह बात कहा तो वो भी देखने लगी। उस समय विभा मेरे ऊपर चढी हुई थी और मेरे लंड को खुब मजे से अपनी चुत में घुसा कर मजा दे रही थी। हम दोनों अब अपनी चुदाई का खेल रोक कर अब उन दोनों को देख रहे थे। हमलोग को ऐसे देखते हुए देख कर एक लडके ने हमें देखते हुए ऊड़िया में कुछ कहा तो मैंने कहा कि हमें यह भाषा नहीं आती, हम बाहर से आए हैं। अब एक हिन्दी में बोला, “ब्रदर ऐसे क्या देख रहे हो? अपनी वाली से मजा लो न”। मैंने भी हाँ कहा और फ़िर विभा को अब नीचे लिटा कर उसके ऊपर चढ़ गया और फ़िर उसकी चूत में लंड डाल कर चोदने लगा। विभा की मुँह से सिसकी निकलने लगी थी। मैं अब विभा को चोदते हुए अपनी नजर उन लोगों पर भी गराए हुए थे। अचानक बैग से क्रीम निकाल कर दोनों लडकों ने अपनी-अपनी लड़कियों की गाँड में लगाते हुए अपना बीच वाला ऊंगली घुसा दिया। लडकियाँ चिहुँक रही थी, पर दोनों आराम से अपनी ऊँगलियों से उनकी गाँड़ की छेद को खोल रहे थे। थोड़ा क्रीम, फ़िर ऊँगली… थोडा क्रीम, फ़िर ऊँगली… करते हुए अब तक दोनों लड़कियों की गाँड़ अब तक दो ऊँगली घुसवा ली थी।

अब दोनों लडकों ने अपने कपड़े खोलने शुरु किए जबकि दोनों लडकियाँ एक-दूसरे की गाँड़ को खोले हुए थी। दोनों लड़कों ने फ़िर अपने-अपने लंड पर क्रीम चुपड़ा और फ़िर उन लडकियों को घोडी बना कर पीछे से चढ गए। दोनों लड़कियाँ अब गाँड़ में घुसते लंड के दर्द को बर्दास्त करते हुए हल्के-हल्के चीख रही थी। पर दो मिनट में सब ठीक हो गया और अब दोनों मजे से अपनी हथेलियों पर सर टिका कर अपना गाँड़ हवा में ऊठाए उन दोनों लड़कों से गाँड़ मरवा रही थी। करीब १२-१४ मिनट की गाँड़ मराई के बाद जब लडके झड़े तो दोनों बालू पर अपना माल गिराए और फ़िर दोनों लडकियों ने उनके लन्ड पोछते हुए हमारी तरफ़ देखा, और मैं तब विभा की मुँह में अपना माल निकाल रहा था। जब लडकों ने विभा कि ऐसे मुँह में गिरवाते और निगलते देखा तो वो भी अपनी लड़कियों को ऐसा करने को बोले, तो दोनों ना करने लगी। यह सब देख कर एक लड़के ने मुझे कहा, “तुम लकी हो ब्रदर…”। मैंने भी हँसते हुए कहा, “लकी तो तुम लोग हो यार, यह तो अपनी गाँड़ छुने भी नहीं देती।” तब एक लडकी ने विभा को कहा, “क्यों सिस्टर…, जब सेक्स करना ही है, तो पूरा मजा लो न। अभी तो ये लोग प्यार से करेंगे, शादी के बाद तो पूरे अधिकार से बिना कुछ सोचे और चिन्ता किए पूरे जोर-जबर्दस्ती से करेंगे, तो पहले से करवाते रहने से खुला रहेगा तो परेशानी कम होगी।” मैंने अब उससे कहा, “बात तो तुम बिल्कुल सही कह रही हो बहन, पर यह माने तब न…”। तभी एक लड़के ने कहा, “बहन…. हा हा हा… क्या किस्मत है तुम्हारी कनक, दो भाई के रहते तुम गाँड मरवा रही हो”। अब कनक नाम की लडकी बोली, “और दीक्षा भी तो, उसे भी तो अपने भाई के सामने गाँड मराना पर रहा है”, और उसने बगल में बैठ कर लन्ड साफ़ कर रही लडकी के गाल पर चिकोटी लेते हुए बोली। अब वो लडका हमारी तरफ़ आया और फ़िर मुझसे हाथ मिलाते हुए बोला, “मेरा नाम राजन है, और यह कनक है, मेरी गर्ल-फ़्रेन्ड और मेरे दोस्त विजय की बहन (उसने उस दूसरे लडके की तरफ़ इशारा किया, और विजय ने हाथ हिला कर मेरा अभिवादन किया)… और वो जो विजय के साथ लड़की है वो मेरी बहन पूजा है (पूजा ने अपने हाथ जोड कर मुझे नमस्ते कही)। हम दोनों दोस्तों ने एक-दूसरे की बहन को गर्ल-फ़्रेन्ड बनाया हुआ है”।

वो अब पास में थोड़ा सिकुड कर नंगी बैठी विभा को देख रहा था। मैंने अब उससे अपना परिचय दिया, मेरा नाम गुड्डू है और मैं बिजनेस-मैन हूँ। यह विभा है मेरी छोटी बहन… हम बिहार से यहाँ घुमने आए हैं। मैं इससे शादी तो कर नहीं सकता, तो इसको गर्ल-फ़्रेन्ड भी नहीं कहूँगा, पर जो है तुम सब देखे ही…”। राजन ने अब जोर का ठहाका लगाया और फ़िर उसने अपनी टीम को हमारे पास ही बुला लिया और फ़िर उन लोगों ने बैग से बीयर निकाल कर बाँट लिया। मुझे और विभा को भी दिया, और थोड़ा हिचकते हुए विभा ने कैन पकड़ लिया तो मैं खुश हुआ। विजय अब चीयर्स किया, “हमारे नए दोस्तों के नाम”। हम सब अब बीयर पीते हुए बात करने लगे। विजय बोला, “यार ७ महिना से हमलोग का ऐसा संबंध है, पर अभी तक हमलोगों ने अपनी-अपनी बह्न नहीं चोदी कभी। बल्कि सच तो यह है कि अभी तक हमने कभी और किसी के साथ सेक्स नहीं किया है और हम लोग जब सेक्स करते है साथ में करते हैं”। मैंने अब चुटकी ली, “मतलब अभी तक ब्रह्मचारी ही हो”। अब पूजा बोली, “क्या मतलब?” अब मैंने मजाक करते हुए कहा, “जब तक एक लडकी से संबंध है तब तक तो ब्रह्मचारी ही कहलाओगे”। अब राजन बोला, “कोई बात नहीं, हम लोग को अपना ब्रह्मचर्य खोलने के लिए कुछ करना थोडे है, बस लडकी को पलट लेना है, यह तो कभी भी हो जाएगा”। कनक अब बोली, “और फ़िर भैया से रिश्ता बदल जाएगा…” मैंने बात काटते हुए कहा, “हाँ, बहनचोद… बन जाओ तो तुरंत ब्रह्मचर्य खत्म…”। हम सब हँसने लगे। विभा की चिकनी चूत देख कर राजन बोला, “कनक, देखो विभा का… कैसा साफ़ चमकदार है, तुम हो कि हमेशा कैंची से ही काट लेती हो”। मैंने अब गौर किया कि दोनों लडकियों की चूत पर खुब बाल थे, करीब आधा इंच के और दोनों लडके अब मेरी बहन विभा की चिकनी चूत को देख रहे थे। विभा उन दोनों को ऐसे अपनी चूत निहारते देख कर अपने पैरों को और ज्यादा सिकोड रही थी। मुझे यह सब देख कर मजा आ रहा था सो मैंने और मजा लेने का सोच कर विभा की जाँघ पर अपना हाथ रखते हुए विभा से कहा, “विभा, दिखाओ न आराम से खोल कर… तुम्हारे चूत की अभी बडाई ही हो रही है और मैंने थोडा ताकत लगा कर विभा की जाँघों को खोल दिया और उसकी चिकनी चूत अब चाँदनी में चमक उठी।

राजन से रहा न गया और उसने कह ही दिया, “क्या मक्खन चूत है तुम्हारी बहन के पास दोस्त, जी कर रहा है कि चूम लूँ”। मैंने विभा के अकबकाहट की परवाह किये बिना कह दिया, “अरे यार तो चूम लो न, विभा को भी नया मजा मिलेगा”। मेरी तरफ़ से हरा सिग्नल मिलते ही राजन चट से आगे बढा और नीचे झुकते हुए विभा की चूत से अपना मुँह सटा दिया। मैंने विभा को हल्के से इशारा किया और वो थोड़ा हिचकते हुए पीछे झुकती हुई सीधा लेट गई और अपने घुटने मोड कर अपनी जाँघों को खोल दिया। राजन अब आराम से उसकी चूत चाटने लगा। विभा अब अपने पेट को हल्के से कभी-कभी सिकोड रही थी, मतलब उसको अब मजा आ रहा था। राजन ने तब अपना चेहरा उठाया और कहा, “यार चिकनी चूत का स्वाद ही अलग होता है” और विभा की चूत में ऊँगली घुसा कर उसके चूत के रस से सराबोर ऊँगली को चाटने लगा। उसके दोस्त विजय ने अब उसको हटाते हुए कहा, “हटो जरा, अब मुझे स्वाद ले कर देखने दो” और अब विजय मेरी बहन विभा की चूत में अपनी जीभ घुसा कर उसके रस को जोर-जोर से चूसने लगा। विभा के मुँह से सिसकी निकल ही रही थी, साथ में विजय के जोर-जोर से चूसने से विभा की चूत के पास से भी किस्म-किस्म की आवाज हो रही थी। राजन की बहन पूजा, जो विजय की गर्लफ़्रेन्ड थी, ने कहा, “अगर आपको इसका स्वाद इतना अच्छा लगता है तो मैं कल पक्का अपना पूरा साफ़ कर दूँगी, फ़िर उसने अपने भाई राजन से पूछा, “भैया, आपके पास नया रेजर है न?” राजन ने कहा, ’मैं क्यों दूँ, तुम विजय से लो रेजर… स्वाद उसको लेना है न”। विजय अब विभा की चूची सहलाते हुए कहा, “यार दे देना उसको, मैं कनक को दे दूँगा अपने पास से, तो तुम भी चिकनी का स्वाद ले लेना अगली बार…”। कनक ने विभा की चूत पर अपना हाथ फ़ेरा और उससे पूछा, “रेजर से साफ़ करने में कटेगा तो नहीं न?” विभा अब तक मस्त हो चूकी थी, वो बोली, “मैं तो कभी साफ़ की नहीं, हमेशा भैया ही मेरी साफ़ कर देते हैं… तुम भी अपने भैया को बोल देना साफ़ करने के लिए, उनको रेजर चलाने का अभ्यास होगा, नहीं कटेगा”।

राजन अब बोला, “असल में हम दोनों ने कभी अपनी-अपनी बहन की चूत छुई भी नही है, अभी यह कमीनापन किया नही है आज तक”। मैंने हँसते हुए कहा, “तो कर लो ना यह कमीनापन भी… बहन को गाँड मराते देखते ही हो”। राजन ने जवाब दिया, “अरे तो जब वह पूजा की गाँड मारता है तब बदले में मैं भी तो उसकी बहन कनक की गाँड़ मार देता हूँ ना। जब वो मेरी बहन चोदता है तब मैं उसकी बहन चोद देता हूँ। हिसाब बराबर…”। मैंने अब हँसते हुए कहा, “कैसे बेवकूफ़ हो यार तुम दोनों, तुम्हारी बहनों को मस्ती है बिना हिचक चुदा रही है और तुम लोग हिसाब बराबर करने में लगे हो। तुम्हारी बहन दूसरे से चोदे और तुमलोग खुद सिर्फ़ देखो, अजब मुर्ख हो यार तुम दोनों भी”। इस बार सब लड़कियाँ खिल्खिलाकर हँस पडी और अचानक विभा बोली, “अगर आप लोग अभी मेरे सामने अपनी-अपनी बहन को चोद लेंगे तो मैं कल आप दोनों से चुदा लूँगी, मुझे भी अब किसी अलग टाईप के लन्ड की चाह होने लगी है”। मुझे इस बात की उम्मीद नहीं थी कि विभा ऐसा गन्दा भी बात सोच सकती है। मैं देख रहा था कि पिछले दो-चार दिनों में ही साली छुईमुई लड़की से रंडी बन गई थी। विजय ने अब अपनी बहन कनक से पूछा, “क्या बोलती हो कनक तुम अब…? कनक ने मुस्कुराते हुए कहा, “मतलब, अब आपका भी मन हो रहा है…मुझे तो इसका पहले से आशंका लग रहा था, पर आज तो बहुत देर हो गया है”। राजन भी बोला, “हाँ, आज तो अब कुछ नहीं हो पाएगा… कल का रक्खें प्रोग्राम?’ वो अब विभा से यह बात पूछ रहा था। वो अब थोड़ा असमंजस में थी, तो मैंने अपनी तरफ़ से कह दिया, “कल आप सब आओ न हमारे होटल के कमरे में। वहीं हम सब करेंगे आराम से”। पूजा इस सब में थोड़ा हिचक रही थी, सो अभी की बात को टलते देख चट बोली, हाँ यही ठीक रहेगा। कल तक हम सब आराम से सोच भी लेंगे, इसके बारे में”। राजन ने अपनी बहन पूजा को देखते हुए कहा, “अब क्या सोचना है इस बारे में… अब तो मुझे यही सोचना है कि कल लगातार दो-दो बार अलग-अलग चूत को चोदने की ताकत कैसे बचाई जाए, आज रात केसर वाला दूध पीना होगा”। हम सो उसकी बात सुनकर हँसने लगे, और फ़िर कपडे पहने लग गए। फ़िर मैंने उन सब को अपने होटल का पता दिया, आपस में नंबरों का आदान-प्रदान किया और फ़िर कल चार बजे का टाईम तय कर अपने-अपने रास्ते निकल गए।

अगले सुबह हम दोनों नास्ता करके टीवी खोल कर टाईम-पास करने लगे। विभा अचानक से बोल पडी, “आप भैया बहुत गन्दे हैं, और मुझे भी अपने जैसा बना दिए”। यह बोलते हुए वो मुस्कुरा रही थी तो मैंने बुरा नहीं माना और पूछा, “क्यों, क्या तुमको यह सब करते हुए मजा नहीं आता है… अगर ऐसा है तो फ़िर हम नहीं करेंगे”। विभा बोली, “नहीं यह बात नहीं है, पर कभी-कभी लगता है कि आखिर हैं तो आप मेरे भैया… और यह सब आपस में… सब लोग तो ऐसा नहीं करते”। मैंने बात को हल्के से लेते हुए कहा, “क्यों सब नहीं करते यह बात ठीक है, पर हम अजूबा भी नहीं हैं। बाप-बेटी, माँ-बेटा… और बाकी के रिश्तेदार भी… सब आपस में सेक्स करते रहते हैं। कल देखी न राजन-पूजा और विजय-कनक को… वो लोग भी तो भाई-बह्न ही हैं”। मेरी बात को लगभग काटते हुए विभा बोली, “हाँ, पर वो लोग आपस में नहीं यह सब करते हैं, दोनों की बहनें भाई के साथ नहीं दोस्त के साथ करती हैं, जबकि हमदोनों सगे भाई-बहन हैं”। मैंने कह दिया, “अरे तो क्या हुआ, उनकी इच्छा शुरु से थी, बस हिम्मत नहीं थी। तुम देखी कल, जरा सी हिम्मत दी मैंने तो दोनों चट अपनी-अपनी बहन को चोदने के लिए तैयार हो गए, वो भी यहाँ हमारे सामने। तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि तुम उन लोगों के लिए उदाहरण हो कि सगी बहन भी अपने भाई से चुदा सकती है”। एक तरह से मैं विभा की बड़ाई कर रहा था, तो वो थोडा खुश होते हुए बोली, “मतलब, अब आप अपने जैसे लोगों की संख्या बढाने में लग गए हैं”। मैंने उसको बाहों में भर कर चुम्बन लेते हुए कहा, “हाँ, बहनचोद युनियन का प्रेसीडेन्ट जो बनना है मुझे।” विभा ने मुझे अपने से दूर करते हुए कहा, “हटो भी अब, आज चार बजे अगर वो दोनों अपनी-अपनी बहन को चोदने के बाद कहीं मुझे पूछे तो फ़िर उन दोनों से मुझे भी चुदाना पडेगा। लगातार दो बार के लिए ताकत भी तो बचा कर रखना है। आपको तो कई लडकी का स्वाद मिला हुआ है, मेरे लिए यह पहला मौका है कि किसी दूसरे के साथ यह सब करुँगी”। मैंने उसके उत्साह को बढाते हुए कहा, “हाँ… सो तो है। वैसे टेस्ट बदल कर तुम्हें अच्छा ही लगेगा। सब लन्ड अलग किस्म के होते है, और सब लडकों के धक्का का तरीका भी अलग-अलग होता है तो तुम्हें भी मजा आएगा। वैसे आज मुझे भी अपना ताकत बनाए रखना है”। दोपहर में खाने के बाद हम करीब दो घन्टे सो गए और करीब साढे तीन में जगने के बाद हम दोनों ने चाय रूम में मँगवा कर पी और फ़िर उन सब का इंतजार करने लगे।

करीब ४:१० पर वो लोग आ गए। विभा ने हल्के पीले रंग का सलवार-सूट पहना हुआ था। संयोग ऐसा था कि वो दोनों लडकियाँ भी सलवार-सूट में ही थी। कनक का सफ़ेद पर लाल प्रिन्टेड था जबकि पूजा ने हल्के हरे रंग का प्लेन सूट पहना हुआ था। राजन ने कहा, “अब क्या?” तो मैंने कहा, “कुछ नहीं, अगर लडकियों को आपत्ति न हो तो, हम जिस काम के लिए यहाँ जमा हुए हैं वो तो होना ही चाहिए। एक घन्टा के करीब लगेगा, फ़िर हम साथ में घुमने निकलेंगे और साथ में डिनर करेंगे, और क्या?” फ़िर मैंने रूम-सर्विस को आर्डर किया कि वो १० बीयर के कैन और कुछ स्नैक्स कमरे में भेज दे। राजन ने पूजा की तरफ़ देखते हुए कहा, “पूजा बीयर नहीं पीती है…”। तब विजय बोला, “यार… अज पी लेगी, तुम फ़िक्र ना करो। आज स्पेशल डे है…”। उसकी बात का मतलब समझ कर हम सब हँस पडे। तब तक बीयर और काजू रूम में आ गया। मैंने तीन कैन खोले और फ़िर एक-एक तीनों लडकियों को देते हुए कहा, “अब इसी से सब अपने-अपने भाई के साथ पीओ, झूठा पीने से प्यार बढता है।” मैंने पूजा और कनक को गौर से घुरते हुए कहा, “आज तो वैसे भी तुम दोनों को विशेष प्यार मिलेगा अपने भाई का”। दोनों मेरी बात का मतलब समझते हुए मुस्कुराई, और एक-एक सिप बीयर के ले कर कैन अपने-अपने भाई को दे दी। दोनों लड़कों ने दो-तीन घुँट पी कर फ़िर से अपने बहनों को दे दिया। अब वो दोनों भी सही घुँट भर ली, मैंने और विभा ने अब तक अपना कैन खाली भी कर दिया। तभी विभा बोली, “अच्छा है, अब कौन पहले शुरु करेगा?” पूजा को बीयर पसंद नहीं आ रहा था शायद सो वो अपना कैन अपने भाई राजन को देते हुए बोली, “सब को तो करना ही है, चलो भैया हमलोग ही पहले कर लेते हैं, फ़िर आराम से देखेंगे इन लोगों को”, कहते हुए उसने अपने बदन से अपना सफ़ेद दुपट्टा हटा कर कुर्सी पर रखते हुए उठी और बिस्तर पर बैठ गई। राजन ने भी आराम से अपने बीयर को खत्म करके अपने शर्ट खोलते हुए बिस्तर की तरफ़ बढा। दोनों अगले की पल एक-दूसरे को बाहोँ में कस कर एक-दूसरे को चूमने लगे थे। थोडी देर के बाद राजन ने खुद को अलग किया और फ़िर अपने कपडे खोलने लगा। एक मिनट भी नहीं लगा होगा कि वो पूरा नंगा हो गया। उसका ६” का लन्ड अपने पूरे शबाब पर था।

उधर विजय भी अब अपनी बहन कनक को पीछे घुमा कर उसकी कुर्ती की जिप खोलने लगा था। मेरी नजर कनक की नंगी हो रही पीठ से लगी थी। कल जब मैंने उसको देखा था तो रात था, पर आज पूरी रोशनी में नजारा देखने क मजा ही कुछ और था। बिना किसी हिचक के कनक ने अपने पीठ पर से अपने बालों को एक तरफ़ कर दिया जिससे विजय को उसकी ब्रा खोलने में सहुलियत हो। कनक अब खुद खड़ी हो गई और अपने सलवार को अपने पैरों से नीचे कर दिया। उसकी चूत चमक ऊठी। उसने पैन्टी नहीं पहनी थी और आज उसकी चूत बिल्कुल साफ़ थी। वो अब अपने चूत को सहला रही थी। तभी विभा बोली, “वाह आज तो तुम भी साफ़ करके आई हो…”। कनक ने मुस्कुराते हुए कहा, “सब भैया की कृपा है”। राजन का ध्यान अब अपने प्रेमिका कनक पर गया। अभी तक वो अपनी बहन पूजा की चूचियों को कपडों के ऊपर से मसलने में लगा हुआ था। राजन ने कनक की चिकनी चूत को देख कर कहा, “वाह… कितनी सुन्दर दिख रही है, बिल्कुल नई सी” और वो चट से आया और कनक की चूत को झुक कर चूम लिया। विभा तुम्रंत बोली, “नहीं – नहीं, कोई गडबड नहीं, आज आप दोनों अपने बहन को चोदेंगे पहले तब मैं आप दोनों से चुदाऊँगी।” हम लोग हँसने लगे और तब राजन ने पूजा को कहा, “चल पूजा, जल्दी से तैयार हो”। कमरे के महौल ने सब पर असर डाला था सो पूजा भी गीली हो गई चूत को चट से सलवार और पैन्टी खोल कर चमकाने लगी। उसकी चूत पर कल की तरह ही बाल थे। मैंने उसके बदन को घुरते हुए कहा, “पूरा बदन दिखाओ ना जान…”। पूजा मेरी बेसब्री देख कर खुश हुई और फ़िर चट से अपने बाकी कपडे उतार कर नंगी हो गई। अगले २ मिनट के अंदर दोनों दोस्त अपनी-अपनी बहन की चूत में अपना लन्ड घुसा चुके थे और उनकी बहन आज पहली बार अपने भाईयों के लन्ड का स्वाद अपने निचले होठ से लेने में मशगुल थी। दोनों की आँखें बन्द थी और जब उनके भाई अपने लन्ड का धक्का उनकी चूत में लगाते थी तो हल्की सी कराह उनके मुँह से निकल रही थी जो बताती थी कि दोनों मस्त हैं। करीब ३-४ मिनट चोदने के बाद दोनों ने अपनी बहनों के चूत से लन्ड बाहर निकाल कर उनको पलटने का इशारा किया और फ़िर अपनी-अपनी बहनों को घोडी बना कर पीछे से उनकी चुदाई करने लगे। विभा ने एक नजर मुझ पर डाली, और फ़िर धीमे से बोली, “आपके टीम में लोग अब बढ़ने लगे हैं”। मैंने भी तपाक से उत्तर दिया, “क्यों, तुम्हारी टीम में भी तो… तुम भी तो सगे भाई से चुदाने वाली टीम की लीड़र हो”। हम दोनों भाई-बहन अब हँसते हुए सामने चल रही चुदाई के दृश्य का मजा लेने लगे। करीब २ मिनट की चुदाई के बाद विजय ने पहले हाँफ़ते हुए कनक की चूत से अपना लन्ड बाहर निकाला और फ़िर अपनी बहन कनक की गाँड के पास लन्ड सटा कर झड गया। कनक भी अब तक थक चुकी थी। इसके बाद, राजन ने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ाई और फ़िर एक जोर के आह के साथ अपना लन्ड अपनी बहन पूजा के चूत से बाहर खींचा और लन्ड भी बाहर निकलते हुए ही पिचकारी छोडने लगा। चारों बिस्तर पर थक कर निढ़ाल हो कर पड़ गए।

हाँफ़ते हुए राजन ने अब विभा से कहा, “अब तुम तैयार हो जाओ… अब तो तुमको भी शर्त के मुताबिक हम दोनों से चुदाना होगा”। विभा मुस्कुराते हुए बोली, ’हाँ याद है शर्त… पर पहले तुम में से कोई सही तरीके से टाईट तो हो ले, मैं भाग थोडे ना रही हूँ कहीं”। मैंने आज विभा का मूड देख कर समझ लिया कि अब विभा एक दम से सही वाली चुदक्कड माल बन गई है। मुझे विभा के इस तरह से ऐसे चट-पट बदल जाने की उम्मीद नहीं थी, पर विभा का यह रूप मुझे बहुत पसन्द आया। राजन अब अपनी प्रेमिका कनक के पीठ पर से उसके भाई विजय का वीर्य साफ़ करने लगा। विजय का लन्ड अभी भी उसकी बहन कनक सहला रही थी सो विजय का अब कडा होने लगा था। पूजा अब बिस्तर से उठ कर पानी पीने लगी तो मैंने उसको अपनी तरफ़ खींच लिया और वो धम्म से मेरी गोदी में नंगी ही बैठ कर पानी पीने लगी। विजय अब मेरी बहन विभा की तरफ़ बढ़ा और बोला, “लो अब तुम इसको थोड़ा सा और कड़ा कर दो कि यह फ़िर से लडकी चोद सके। विभा ने चट उसके लन्ड को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। विजय का लन्ड कभी चूसा नहीं गया था, सो वो तो मजा से भर गया। मैं देख रहा था कि विभा खुब प्यार से उसके लन्ड को चूस-चाट रही थी। मैंने अब पूजा से कहा, “तुम भी चूस के देखो मेरा लन्ड”, पर उसने साफ़ मना कर दिया कि उसको यह चूसना बहुत गन्दा लगता है। मैंने उसको विजय और विभा को दिखाते हुए कहा, “देखो कैसे विजय को खुशी मिली है जब उसका लन्ड चूसा जा रहा है, इसमें गन्दा जैसा कुछ नहीं है। लड़की को लन्ड चूसने जरूर आना चाहिए”। पर पूजा अब भी नहीं मानी तो मैंने उसको सामने खड़ा कर लिया और उसकी गीली चूत चाटने लगा। लग रहा था कि जैसे ये लोग मुख-मैथुन कभी नहीं करते थे, सो पूजा पहली बार अपने चूत की चुसाई से हद तरीके से गीली हो गई थी। वैसे भी उसको अभी-अभी उसका भाई राजन चोदा था सो उसकी चूत खुब गीली हुई थी और मैं उसकी फ़िलसन वाली चूत के नमकीन स्वाद का मजा ले रहा था। अब तक राजन भी बिस्तर से उठ कर विभा से लिपट कर उसके कपडे उतारने लगा था। उन दोनों लड़कों ने जल्द ही मेरी बहन विभा को पूरा नंगा कर दिया तो वो अब बिस्तर की तरफ़ बढ गई और उसके पीछे राजन और विजय भी अपना लन्ड फ़नफ़नाए चल दिये। उन सब को बिस्तर पर आया देख कर कनक बिस्तर के एक तरह हो गई और उन तीनों को देखने लगी।

मैं अब विभा को उसके हाल पर छोड़ कर अपना ध्यान पूजा पर लगाया। मुझे पूजा को चोदने के बाद कनक को भी चोदना था। मैंने पूजा को कुर्सी के सहारे झुकने को कहा तो वो मेरा इशारा समझ कर झुक गई और तब मैंने चट से अपना लन्ड पीछे से उसकी चूत में पेल दिया। हल्के से कराह के साथ पूजा मेरा लन्ड अपने चूत में घुसवा ली और मैं अब आराम से उसकी चुदाई करने लगा। मैंने एक बार पीछे मुड़ कर बिस्तर की तरफ़ देखा कि विभा विजय को नीचे लिटा कर उसके लंड पर खुद सवार हो गई है और उसके ऊपर लेट कर हल्के-हल्के अपने कमर को हिला-हिला कर चुद रही है। मैंने अब पूजा को जोर-जोर से चोदना शुरु किया तो वो अब मजे से अपने मुँह से तरह-तरह की आवाज निकालने लगी। थोड़ी देर ऐसे चोदने के बाद मैंने अपना लन्ड बाहर निकाल कर पूजा को सीधा सोफ़े पर लिटा दिया और उसके जाँघों को खोल कर उसके ऊपर चढ कर उसको चोदने लगा और तब मैंने देखा कि मेरी बहन विभा अब कुतिया बनी हुई है और विजय उसको चोद रहा है जबकि राजन उसकी मुँह में लंड डाले हुए है। आज पहली बार मेरी बहन के ऊपर और नीचे के दोनों होंठ में मर्दाना लन्ड घुसा हुआ था। मैं पूजा के चोदते समय विभा को ऐसे देख कर जल्द ही झड़ गया और अपना सारा माल पूजा की चूत में निकाल दिया। जैसे ही उसको यह महसूस हुआ, वो जोर से बिदकी और बोली, “ओह… भीतर क्यों यह सब निकाल दिये। मैं भीतर नहीं निकलवाती यह सब”। मैंने उसको सौरी कहा, और वो अब चट से उठ कर जल्दी-जल्दी अपना चूत तौलिये से साफ़ करने लगी। मेरा धयान अब बिस्तर पर गया तो देखा कि राजन आराम से विभा की गाँड़ में अपना दो ऊँगली चला रहा है। मुझे पता भी नहीं चला कि जब मैं पूजा को चोद रहा था, तब कब और कैसे राजन और विजय ने विभा को गाँड़ मराने के लिए तैयार कर लिया और विजय के झड़ने के बाद राजन ने उसकी गाँड़ को क्रीम के सहारे ढ़ीला करने में कामयाब हो गया। विजय कनक के साथ साईड में बैठ कर राजन की कला को देख रहा था। तभी मेरे मन में आया कि विभा को आज एक साथ तीन लण्ड का मजा दिया जाए, सो मैंने कहा, “विजय और राजन, तुम दोनों यार विभा की दोनों छेदों में पेलो और विभा से मैं अपना लण्ड चुसवा कर कड़ा करता हूँ, कनक के लिए। विभा को भी आज एक साथ तीन लण्ड अपने तीनों लन्डों में लेने का मजा मिल ही जाए”। मेरी बात सुन कर पूजा बोली, “यह तो हम दोनों को भी कभी नसीब नहीं हुआ।” कनक बोली, “चलो, आज के बाद कम से कम दो का मजा तो हम जब चाहेंगे मिल जाएगा… आज के लिए यह भी कम नहीं है”।

तय हुआ कि राजन नीचे सीधा लेटेगा और उसके ऊपर विभा अपने चूत में राजन का लन्ड घुसा कर लेटेगी और उसके ऊपर से विजय उसकी गाँड़ में अपना लंड पेलेगा। जब दोनों अच्छे से विभा की चूत और गाँड़ मारने की पोजिशन ले लेंगे तब विभा मेरा लन्ड अपने मुँह में ले कर चूसेगी और अपने तीनों छेद में एक साथ तीन लन्ड घुसवा कर अपना जन्म धन्य करेगी। थोडी कोशिश के बाद विभा की गाँड़ ने विजय का लंड अपने भीतर ले लिया। उसकी चूत तो अब तक लन्ड लीलने में विशेषज्ञ हो गई थी। जब विभा सब ठीक से ले ली तो मुझे आने का इशारा किया। मैंने अपना लन्ड, अब तक अपनी बहन को इस दशा में देख कर खुद टनटना गया था, उसके मुँह में घुसा दिया। अब हम सब मिल कर विभा की तीनों छेद को चोदने लगे। बेचारी कभी-कभी कराह दे रही थी पर हिम्मत के साथ हमारे लन्ड को अपने बदन में घुसने दे रही थी। जल्दी ही हम तीनों जोश से भर कर एक साथ हुमच-हुमच कर बेचारी की मुँह, चूत और गाँड मारने लगे। वो अब हमारी पकड़ से आजाद होना चाही पर अब कोई रुकने के चक्कर में नहीं था। मुझे अपने बहन की ऐसी दशा देख कर दया आ गई तो मैंने अपने लन्ड को उसके मुँह से निकाल लिया जिससे अब विभा कम से कम जोर-जोर से साँस ले सकती थी, पर उन दोनों लडकों ने उसको बूरी तरह से अपनी जकड़ में ले लिया था और जबर्दस्त तरीके से उसको चोद रहे थे। बेचारी अब करीब-करीब चीख रही थी, मुझे पता नहीं चल रहा था कि उसकी यह चीख मजा वाली चीख है कि दर्द वाली। करीब ३-४ मिनट के धक्कम-पेल चुदाई और गाँड़ मराई के बाद दोनों ने अपना-अपना माल उसकी चूत और गाँड में निकाल दिया और उसको आजाद कर दिया। पसीने से लथपथ बेचारी विभा गहरी-गहरी साँस लेते हुए बिस्तर पर हाथ-पैर फ़ैला कर निढाल सी फ़ैल गई। विजय और राजन का लन्ड तो झडने के बाद अब सिकुडने की तरफ़ चल दिया था, पर मेरा अभी भी टनटनाया हुआ था। मैंने कनक को इशारा किया तो वो बिस्तर के एक साईड में सीधा लेट गई और अपना जाँघ फ़ैला दी। विजय और राजन भी समझ गई कि अब मैं कनक को चोदना चाहता हूँ तो वो बिस्तर से उतर कर सामने के सोफ़े पर बैठ कर आराम करने लगे, जहाँ पूजा पहले से नंगी बैठी हुई थी। मैं अब आराम से कनक की खुली हुई जाँघों के बीच आ कर घुटनों के बल बैठ गया। कनक ने अपने दोनों हाथों की मदद से अपने चूत के होठ खोल दिये जिससे भीतर का गुलाब कमरे की तेज रोशनी में चमक उठा। मैं अब अपने लन्ड को उसकी खुली चूत के मुँह से सटा कर धीरे-धीरे उसके ऊपर लेटता चला गया, जिससे मेरा लन्ड भी धीरे-धीरे उसके चूत में समाता चला गया। मैं अब आराम से धीरे-धीरे उसको चोदने लगा। वो भी अपनी आँखें बन्द कर के अपनी चुदाई का मजा लेने लगी। बीच-बीच में उसकी सिसकी उसके मजे की गवाही दे देती थी। करीब पाँच मिनट बीतने के बाद वो बोली, “अब जल्दी-जल्दी करो न…, ऐसे पैर फ़ैला कर रहने से तकलीग होती है”। मैंने भी अब अपने को थोड़ा पीछे किया और फ़िर उसकी दोनों टाँगों को उठा कर अपने कंधों पर रख लिया और फ़िर जोर-जोर से उसकी चूत में लन्ड घुसाने लगा। वो अब अपने जाँघों को थोड़ा और फ़ैलाना चाही, पर मैंने उसकी जाँघों को जोर से पकड कर भींच दिया जिससे उसकी छेद थोड़ा सिकुड़ गई और मेरा मोटा लन्ड जब भीतर-बाहर करता तो वो अपने चूत के दीवारों पर मेरे लन्ड का घर्षण महसूस करती। मेरे लन्ड पर उगे कुछ झाँट उसकी चूत की कोमल चमड़ी को अब रगड़ रहे थे और इस रगड़ से होने वाली जलन अब वो भी महसूस कर रही थी। वो मुझे हटने को बोली, पर मैं अब कहाँ रुकने वाला था। मैं अब और अच्छी तरह से उसको जकड़ कर अपने लन्ड से घपा-घप उसको चोदने लगा। वो अब कराह उठी थी मेरे रफ़तार की वजह से। करीब ५ मिनट की तेज चुदाई के बाद मेरा लन्ड पिचकारी छोडने को हुआ तो मुझे पूजा की बात याद आई, पर मेरी नजर बगल में निढाल लेटी हुई विभा पर गई, जिसकी चूत और गाँड़ से अभी भी उन दोनों का वीर्य के बहने का निशान था। मैंने बिना अब आगे कुछ सोचे कनक की चूत को अपने लन्ड की पिचकारी से पूरी तरह भर दिया और इसके बाद भी उसको चोदते रहा। मेरा वीर्य मेरे ही लन्ड की ठोकर से जितना बाहर निकलता उताना ही भीतर ठेल दिया जाता। कनक पूरा ताकत लगा रही थी छुटने के लिए पर जब तक मेरा लन्ड सिकुडन की वजह से बाहर नहीं फ़िसला, मैंने उसकी चुदाई नहीं रोकी। फ़िर मैं उसके ऊपर से हट गया तो वो भी पूजा कि तरह सी बैचैन सी हडबडा कर उठी और अपने चूत से बह रहे मेरे वीर्य को पोछने लगी। मुझे खुशी हुई कि आज पहली बार उन दोनों लड़कियों की चूत को वीर्य से भरने का सौभाग्य मुझे मिला।

अब विभा उठी और नंगे ही हम सब को कोल्ड-ड्रिंक सर्व की, फ़िर बाथरूम में जा कर नहा कर नंगी ही आई और हम सव के सामने ही कपड़े पहने। हम सब भी बारी-बारी से नहाए और अपने-अपने कपडे पहने और फ़िर सब साथ में करीब ५.३० बजे बाहर घुमने निकल पड़े। इसके बाद हमने ६-९ के शो में फ़िल्म देखी और फ़िर एक होटल में खाना खाया और एक-दूसरे को अपना-अपना नम्बर दिया। इसके बाद मैं और विभा अपने कमरे में आ गये। अगले दिन शाम में हमारी वापसी की टिकट थी, और हम थक भी गए थे सो बिना सेक्स की बात भी किये हम सो गए। सुबह करीब ७ बजे हम दोनों सो कर उठे और आरम से नहा-धोकर करीब ९ बजे नाश्ता करके शाम को लौटने से पहले बाजर से कुछ ऐसे ही सामान वगैरह खरीदने का प्लान करने लगे। बाजार वैसे भी ११ बजे के पहले खुलने वाला नहीं था तो कमरे में ही टीवी चला कर हम दोनों लेट गए। तभी मेरे किरायेदार अंकल का फ़ोन आया। वो जानना चाह रहे थे कि मेरा आज वापस जाना हो रहा है कि नहीं। अगले दिन रविवार था सो छुट्टी के दिन वो हमें खाने पर बुलाने के लिए फ़ोन किए थे। मुझे यहाँ आए आज एक सप्ताह हो गया था और अब मेरा वापस जाना जरूरी हो गया था, बिजनेस को ऐसे बहुत दिन नहीं छोडा जा सकता है। मैंने उन्हें मना कर दिया। मुझे उनके बात से लगा कि वो थोडा निराश हो गए हैं। उन्होंने कहा, “वोह… कोई बात नहीं… मुझे लगा शायद इस बार विभा बेटा से मिलूँ तो कुछ और चीज मिल जाए। पिछली बार रुमाल मिला था। आज तक वैसे हीं है, बिना धुले… मेरे कपड़ों की आलमारी में सबसे नीचे”। मैं उनके इस ठरकीपने को समझ सकता था। करीब ६० साल की उम्र थी, सो साठा तो पाठा वाली बात थी उनके साथ। अचानक मुझे जाने क्या सुझा तो मैं कहा, “आज तो अंकल दिन में बाजार से कुछ ऐसे भी सामान खरीदने का प्रोग्राम है, बाकि कुछ खास नहीं। आप अगर आज अपनी छुट्टी कर सकें तो होटल ही आ जाईए, हम सब साथ में बाजार चल चलेंगे और आपको भी विभा का साथ कुछ घंटों के लिए मिल जाएगा। अगर आपलोग का मन गप्पे मारने का होगा तो आप दोनों यहीं रुक जाना और मैं बाजार से दो घंटे में घुम आउँगा”। मेरी बात सुन कर अंकल खुश हो गए और बोले, “ठीक है, मैं करीब ११ बजे तक आता हूँ, एक बार औफ़िस जाकर सब को काम समझाने के बाद। हम सब साथ में बाजार चलेंगे, मेरी गाड़ी है हीं, परेशानी नहीं होगी”।

विभा पास बैठी हम दोनों की बातें सुन रही थी। वो बोली, “अब जब अंकल गाड़ी ले कर आ रहे हैं तो आराम से दोपहर में निकलेंगे, बाजार में भीड़ कम मिलेगा दोपहर में”। मैंने उसको बताया कि अंकल यहाँ उससे मिलने हीं आ रहे हैं, उनको उस दिन का रुमाल आज तक मस्त किए हुए हैं, तो विभा हँस पड़ी, “अजीब हाल है मर्द सब का, अब इस उम्र में भी उनका यह हाल है तो मैं समझ सकती हूँ कि आप क्यों ऐसे सेक्स के लिए बेचैन रहते हैं”। मैंने अब उसको बताया कि मर्द कभी बुढा नहीं होता, और अगर वो अपना फ़िटनेस ठीक रखे तो किसी भी उम्र में लडकी चोद सकता है। वो बोली, “हाँ, दिख रहा है मुझे… आपका बस चले तो आप आज मुझे अंकल से भी चुदवा दीजिए, राजन और विजय से तो चुदा ही दिए यहाँ ला कर”। मैंने उसकी बात पकड़ ली, “क्यों नहीं… बहुत मजा आएगा, तुम एक बार कोशिश कर ही लो, अगर अंकल चाहे तो कर लेना उनके साथ सेक्स”। वो मुझे झिडकते हुए बोली, “हट्ट… आप भी न, अंकल बेचारे इतने बुजुर्ग आदमी… वो यह सब क्यों करेंगे… ऐसे बात कर लेना, मजाक कर लेना अलग बात है और सेक्स करना अलग बात”। मैंने भी उसको उसकाया कि वो बस हल्के से थोडा अंग-प्रदर्शन करे और उनको थोड़ा उकसाये, जरा मैं भी तो देखूँ कि इस ठरकी में कितना जिगर है…वैसे भी तुम यहाँ पर अब तक सब कुछ मेरी मर्जी से की हो तो यह भी एक बार कर लो ना। विभा बोली, “ठीक है, अंग प्रदर्शन में क्या है… वो तो उस दिन भी उनके सामने ही पैन्टी पहनी ही थी तो मेरा असली अंग तो वो देखे हुए हैं, अब इसमें क्या लाज… अभी तक आपकी बात मानी हूँ से आज भी वही करुँगी जो आप कहेंगे”। मैंने उसको बाँहों में बह कर चुम लिया, “मेरी डार्लिंग विभा, तुम बहुत अच्छी हो”। वो मुझे जोर से अपने बाहों में भींचती हुई बोली, “चलिए न किशनगंज उसके बाद आपको बताती हूँ, यहाँ तो मैं आपकी बात मानने का कसम खाई हुई हूँ, पर एक बार किशनगंज पहुँची कि मैं आजाद हुई और तब आपसे सब बदला लुँगीं”। हम दोनों अब हँसने लगे। फ़िर विभा हटी और जल्दी से अपने कपडे उतारने लगी, “भैया, जल्दी से मेरा काँख और चूत पर का बाल साफ़ कर दीजिए न। जब अंकल को यह सब दिखाना ही है तो ठीक से साफ़ ही आज दिखाती हूँ, उस दिन तो सब कुछ बाल से भरा हुआ था।” मुझे भी उसका आइडिया पसंद आया सो मैं भी पानी और रेजर ले कर आ गया और फ़िर रेजर को सीधा और फ़िर उल्टा चला कर अपनी छोटी बहन विभा की काँख और चूत को एक दम चिकनी सफ़ाचट बना दिया। पिछले सप्ताह भर की लगातार चुदाई से उसकी चूत की फ़ाँक बहुत सुन्दर तरीके से खुल गई थी और भीतर के होठ अब थोडा सा बाहर लटक रहे थे, क्योंकि म्रेरे द्वारा उसके बदन को छुने से वो गर्म हो रही थी। वो अब एक सेक्सी वाली लाल माईक्रो-पैन्टी और गुलाबी ब्रा पहनने के बाद एक बिल्कुल शुद्ध देसी घरेलू लड़की की तरह सफ़ेद सलवार सूट पहन लिया और सज्जन की तरह एक दुपट्टा भी ले लिया। बाल वगैरह भी सेट करके हल्का सा काजल और लिपस्टिक लगा कर बहुर सुन्दर तरीके से सज गई। समय बीताने के लिए हमने चाय और पकौडे का आर्डर कर दिया और रूम सर्विस वाला वही लड़का यह सब लाया जो उस दिन लाया था जिस दिन मैंने विभा की झाँट पहली बार बनाई थी। वो कनखियों से विभा को बार-बार देख रहा था पर आज कि विभा एक दम घरेलू लड़की थी। वो बेचारा चला गया तो हम दोनों पिछली बार को याद करके जोर से हँस पडे। हम अब टीवी देखते हुए उस ठरकी किरायेदार का इंतजार करने लगे।

विभा अब आराम से बोली, “भैया, आप इस एक सप्ताह में मुझे क्या से क्या बना दिए, सोचने पर कैसा लगता है”। मैंने बात की गंभीरता को समझा पर बात को हल्का करते हुए बोला, “क्या बना दिए क्या… तुम लडकी थी, जवान हो गई थी तो औरत बना दिए। इसमें ऐसा-वैसा लगने वाली क्या बात है?” विभा बोली, “हाँ सो तो है, पर यहाँ पर मुझे आपके अलावे और भी उन दोनों लडकों के साथ सेक्स करना पड़ा सो… शुरु होने के एक सप्ताह के भीतर ऐसा नहीं होता है”, वो मुस्कुरा रही थी। मैंने भी कहा, “अरे तो तुम किस्मत वाली हो जो इतनी जल्दी अलग-अलग टाईप के लन्ड का स्वाद लेने को मिला… और अगर भगवान ने चाहा तो अब तुम्हें एक सिनियर सिटिजेन का भी स्वाद मिलेगा। देख लेना, वो ठरकी तुम्हें चोदे बिना रहेगा नहीं, अगर तुम ने जरा सा भी उसको ढ़ील दे दी”। वो मुझसे पूछी, “आप सलाह दीजिए न भैया, उसके साथ कर लूँ कि उसी दिन की तरफ़ सिर्फ़ बदन दिखा कर रह जाऊँ?” मैंने अब उसकी आँखों में झाँकते हुए पूछा, “तुम्हारा क्या मन है?” वो फ़िर बोली, “यह मैं आप पर छोडती हूँ…”। मैंने कहा, “मुझे तो तुम्हें चुदाते हुए देख कर बहुत मजा आता है। तुम्हारे चेहरे पर जो भाव आता है जब तुम चुद रही होती हो, वो देखने लायक होता है। मेरे से भी जब चुदाती हो तब भी… पर जब तुम दुसरे से चुदाते हुए मुझसे नजर मिलाती हो तो मेरा दिल धक्क से कर जाता है। एक भाई को अपनी सगी छोटी बहन को ऐसे दुसरे से चुदाते देखना नसीब नहीं होता।” विभा मुस्कुराई, “मतलब, उस बुढ़े से मैं अब चुदा हीं लूँ ताकि आपको मजा आए… ठीक है देख लीजिए आज, कैसे उस बुढे का मैं भुर्ता बनाती हूँ”। मैंने भी जोड दिया, “बुढे का नहीं, उसके लन्ड का भुर्ता बनाना वो भी अपनी चूत से, और देखना कहीं वो बुढ़ा ही तुम्हारी चूत का भोंसडा न बना दे”। विभा बोली, “चुप बहेनचोद…”, फ़िर उठी और कमरे के फ़्रीज में से एक सेव निकाल कर लाई और उसमें से दो पतली फ़ाँक काटी। फ़िर जल्दी से अपनी सलवार नीचे ससार कर चट पैन्टी भी नीचे की और मेरे सामने सोफ़े पर बैठ कर अपने जाँघ को खोल कर उन सेव के फ़ाँकों को अपने चूत में घुसा ली। मैं यह देख कर दंग था, और विभा आराम से तीनों टुकडों को चूत में डालने के बाद उठी और अपना पैन्टी और सलवार पहन ली। सेव की फ़ाँकें उसके चूत में चुभ रही थी सो थोड़ा कमर नचा कर और पैर को हिला-डुला कर उन फ़ाँकों को अपने चूत में आराम से सेट करके चल कर देखी और फ़िर आराम से बैठी, “हाँ अब ठीक से सेट हो गया है छेद में”। उसकी इस तैयारी को देख मेरा लन्ड फ़नफ़ना गया कि तभी रूम की कौलबेल बज गई।

मैंने उठ कर दरवाजा खोला तो जनाब हाजिर थे। नमस्कार के बाद मैंने बैठने को कहा, तो अंकल ने हाथ के पैकेट को टेबुल पर रखा, “यह पेस्ट्री है, लेता आया हूँ, डार्क-फ़ैरेस्ट…तुम लोग के लिए”। विभा ने उनको गले से लगाया और फ़िर उनके गालों को चुमती हुई बोली, “वाह अंकल, मुझे डार्क-फ़ैरेस्ट बहुत पसंद है, थैंक्यु”। अंकल ने कहा, “इसमें थैंक्स की क्या बात है, बल्कि तुम्हारा जो अहसान है इस बुढ्ढे पर उसके आगे तो यह कुछ भी नहीं है”। विभा ने सब समझते हुए भी अनजान की तरह पूछा, “अह्सान… कैसा अहसान, क्या बात कर रहे हैं आप अंकल?” वो बिना किसी लाग-लपेट के बोले, “उस दिन जो तुम मुझे अपना प्राईवेट अंग दिखाई थी और फ़िर मेरे रुमाल को जो इज्जत बख्शी… मैं उसकी बात कर रहा हूँ”। विभा मुस्कुराते हुए बोली, “ओह, तो वो बात है… अच्छा, आज मैं आपको अपनी पैन्टी ही दे दुँगी, आप चिन्ता मत कीजिए।” अंकल खुश हो गए, तब वो बोली, “लेकिन एक शर्त पर… आपको मेरे बदन से पैन्टी अपने हाथ से उतारनी होगी”। यह कहते हुए उसके एक पेस्ट्री निकाली और फ़िर अपने मुँह में एक बडा सा कौर ले कर अपना चेहरा मेरी तरफ़ कर दिया और मैंने उसके मुँह के बाहर के हिस्से की पैस्ट्री अपने मुँह से खाई और फ़िर विभा के अंदाज को देख कर गर्म हुआ मैं, उसके होठ चुसने लगा। वो पेस्ट्री खाना चाह रही थी पर मेरे चुम्मा की वजह से खा नहीं पा रही थी तो मुझे दूर करके वो पेस्ट्री खाई और बोली, “अभी तो अंकल को भी खिलाना है”। फ़िर उसने वैसे ही एक बडा टुकड़ा फ़िर से मुँह में लिया और फ़िर अंकल के पास जा कर उनके मुँह को खोलने का इशारा किया और जब अंकल ने मुँह खोला तो अपने मुँह की पेस्ट्री उनके मुँह में डाल दी और वो जब खाने लगे तो उनका होठों का चुम्बन ली। अंकल की हालत अब देखने लायक थी। हम सब के मुँह की पेस्ट्री जब खत्म हो गई तो विभा बोली, “आईए अंकल, आज आपको कुछ ज्यादा दे देती हूँ, और वो उनके गोदी में उनके चेहरे की तरफ़ अपना चेहरा करके अपने दोनों घुटनों के बल बैठ गई। सोफ़े पर बैठे अंकल के लन्ड के ठीक उपर अब विभा की चूत थी।

मैंने देखा कि मुझे वहाँ देख कर अंकल थोडा असहज हो रहे हैं तो मैंने कहा, “विभा मैं अब दो घन्टे सो लेता हूँ, तुम अंकल को बोर मत करना… ठीक है। हमलोग करीब दो बजे बाजार चलेंगे”। विभा नाजों के साथ बोली, “ठीक है बाबा, जब उठना तो अंकल से ही पूछ लेना कि वो बोर हुए कि खुश हुए मेरे साथ”, और यह कहते हुए वो अपने कमर को चलाते हुए अपना चूत उनके लंड पर रगड रही थी। मैं अब लेटने और आँख बन्द करने का नाटक करते हुए अपना ध्यान उनकी तरफ़ किये हुए था। विभा ने उनको फ़िर कहा, “लीजिए अंकल मैं अपना दुपट्टा खुद हटा देती हूँ, बाकी कपडा आप अपने हाथ से उतार कर मेरा बदन देखिए आज”, और वो अपना दुपट्टा अपने छाती से हटा कर सोफ़े पर डाल दी। वो अब अपने बदन को अंकल के बदन से रगड़ रही थी और अंकल बेचारा हक्का-बक्का इस जवान लौंडिया के जलवे से भौंचक हुआ बैठा कुछ सोच रहा था। अंकल जी थोडा मेरे सामने सकुचा रहे थे, सो मैंने अपने आँख को बन्द करने का नाटक किया। विभा भी उनका संकोच समझ गई और फ़िर हिम्मत बढ़ाने के लिए खुद अपने हाथ से उनके हाथों को पकड़ कर अपने चुचियों पर रख दी और दबाई। अंकल भी अब इशारा समझ कर विभा की चुचिओं से खेलते हुए उसको चुमने लगे, जबकि किसी पोर्न-स्टार की तरह अपने कमर को हिला-हिला कर अपने चूत से उनके लन्ड को रगड़ रही थी, हालाँकि उन दोनों के बदन पर अभी भी कपड़ा था। फ़िर विभा उठी और उनकी तरफ़ पीठ करके उनकी गोदी में बैठी और अपने बालों को अपने हाथों से सामने की तरफ़ करके इशारा किया कि वो उसके कुर्ते की चेन(जिप) खोलें। अंकल ने उसकी कुर्ती की चेन खोल दी तो विभा आराम से अपने बदन से कुर्ता उतार दी। अब सलवार और ब्रा में वो फ़िर से उनके सामने चेहरा करके गोदी में बैठ गई और दोनों पुनः चुम्मा-चाटी करने लगे। अब अंकल थोडा रस ले कर चुम्मी ले रहे थे और अपना हाथ विभा के बदन पर घुमाने लगे थे, कभी पीठ तो कभी पेट, तो कभी कमर…। जल्दी ही उनके हाथ नीचे खिसक कर सलवार पर से ही विभा की जाँघ और सामने से उसकी चूत को भी सहलाने लगे थे। विभा अब उनके हाथ को पकड कर अपने सलवार के गाँठ पर रख दी। यह इशारा था कि वो अब उसकी सलवार खोलें। अंकल ने भी बिना समय गवाँए उसके सलवार की डोरी खींच दी और तब विभा थोड़ा सा उठी तो वो सलवार को नीचे खिसकाए। विभा के उस सेक्सी माइक्रो-पैन्टी की झलक पा कर अंकल एक बारगी सन्न रह गए तो विभा खुद सामने खड़ा हो कर अपने सलवार को अपने बदन से अलग कर दी। अंकल की नजर उसकी पैन्टी पर से हट ही नहीं रही थी। बस इसी समय विभा ने कमाल कर दिया।

उसने अपने पैन्टी में हाथ डाला और फ़िर चूत में से सेव का एक टुकडा निकाला, जो उसकी चूत की रस से भींगा हुआ था, और अंकल के मुँह की तरफ़ बढ़ाया। अंकल ने एक बार विभा को देखा तो वो बोली, “खाइए न, आपके लिए ही इसको दो घन्टा से अपने चूत में डाल कर पका रही थी। खा कर बताइए कि सही से पका है कि नहीं”। अब तो अंकल जैसे ठरकी को खाना ही था, वो बिना देर किए सेव का वो टुकडा खा गए, और विभा को खींच कर अपने गोदी में गिरा पर बेतहाशा चुमने लगे। उस सेव ने तो जैसे कमाल कर दिया था। विभा किसी तरह हँसते हुए उनसे दूर हुई और फ़िर वैसे ही पन्टी में हाथ डाल कर सेव का दुसरा टुकडा निकाल कर खाने के लिए दिया। इस टुकडे को खाने के बाद वो उम्मीद में थे कि विभा उनको और सेव खिलाएगी, पर विभा बोली, “बहुत हो गया, अब दूध पी लीजिए”। अंकल ने उसका इशारा समझा और फ़िर उसकी ब्रा उतार कर उसकी चुचियों को मसलते हुए मुँह में ले कर चुसने लगे। विभा के मुँह से सिसकी निकलने लगी थी और वो अब उसने बाहों में मचल रही थी, पर अपने कमर को उनके लन्ड पर नचाना बन्द नहीं किया था। बेचैन हो कर विभा अब उठी और फ़िर अंकल को साईड में करके सोफ़े पर खुद लेट गई और फ़िर अंकल को कहा, “मेरी पैन्टी खोलिए न अपने हाथ से, और फ़िर मेरी चूत को चूसिए, खुब जोर से।” अंकल ने भी जैसा वो बोली वो करने लगे। विभा ने अपने कम ऊपर उठा दिया तो उनको उसके बदन से पैन्टी उतारने में जरा भी परेशानी नहीं हुई और फ़िर एकटक विभा की साफ़, चिकनी चूत को निहारने लगे। विभा बोली, “कैसा लगा, यह नया रूप, उस दिन तो खुब सारे बाल थे, आज सिर्फ़ आपके लिए इसको साफ़-सुथरा की हूँ…, अब जल्दी से इसको चुम्मी लीजिए और चुसिए”। अंकल ने जैसे ही विभा की चूत से अपना मुँह सटाया, विभा ने अपने चूत को सिकोड़-फ़ैला कर भीतर से सेव का अंतिम टुकड़ा बाहर धकेला, और जैसे ही, हल्का सा वो बाहर दिखा, अंकल ने अपने जीभ से उसको सहलाते हुए बाहर निकाला और सीधे अपने मुँह में ले कर खाने लगे। विभा पूछी, “ऐसा नास्ता कभी किए थे पहले?” बेचारा ठरकी बोले तो क्या बोले… वो तो विभा से यही कहता जा रहा था कि आज तो उसने उसको अपने एहसान से खरीद लिया है”। विभा बोली, “आइए अंकल अब चोदिए मुझे, अब मेरे से बर्दास्त नहीं हो रहा है”। वो चट से अपना पैन्ट खोला कि विभा अपना जाँघ फ़ैला दी और अंकल का ७” का लन्ड विभा की चूत में घुस कर कहीं मस्त हो किलकारी मारने लगा। अंकल अब किसी कुत्ते की तरह हाँफ़ते हुए उसको चोदे जा रहे थे। विभा भी आँख बन्द करके अब अपनी चुदाई का लुत्फ़ लेने में मगन थी। करीब दस मिनट के धक्कमपेल चुदाई के बाद अंकल जब खलास होने को आए तो बोले, “अब मेरा निकल जाएगा विभा बेटा…, अब और नहीं रुको निकालने दो बाहर”। विभा ने उनके कमर के गिर्द अपनी टांगे लपेट दी और कहा, “मेरी चूत में ही निकाल लीजिए अंकल, समझ लीजिए कि आज आपकी सुहागरात है”। अंकल बेचारा पूरी तरह से सुना भी नहीं और हाँफ़ते हुए उसके ऊपर औंधे मुँह गिर पडा, उसका लन्ड अब विभा की चूत में ठुनकी ले रहा था और अपना माल से उसकी चूत को भर रहा था। विभा भी अब शान्ति से नीचे लेट कर उसके लन्ड की टनक का मजा ले रही थी, जब लन्ड ने ठनकना बन्द कर दिया तब विभा अपने चूत को सिकोड़-सिकोड़ कर लन्ड का सारा रस निकाल ली। अंकल का लन्ड अब सिकुडने लगा था सो वो अब विभा की चूत से बाहर फ़िसल गया। अंकल अब विभा पर से हट गए और उसकी खुली हुई चूत में ने निकल रहे सफ़ेद वीर्य को देख रहे थे, जो अब विभा की गाँड़ की छेद की तरफ़ बह चला था। विभा ने हाथ बढ़ा कर अपनी माईक्रो-पैन्टी उठाई और फ़िर उससे अपना चूत पोछने के बाद उस नन्ही सी पैन्टी को अपनी ताजा चुदी चूत के भीतर पूरी तरह से घुसा दिया और फ़िर दो-तीन पर चूत को भींच कर फ़िर आराम से धीरे-धीरे अपनी पैन्टी को बाहर निकाली और फ़िर नंगे ही टहलते हुए बेड के नीचे से एक पौलिथीन निकाल कर उस पैन्टी को उसमें पैक करके अंकल को दी। अंकल तब तक अपना कपड़ा पैन्ट पहन चुके थे, वैसे भी उन्हेंने तो सिर्फ़ अपना नीचे का ही कपडा खोला था और विभा को चोदे थे। विभा अब ब्रा पहन रही थी तो वो बोले, “वो ब्रा भी दे दो न, आज मार्केट में तुमको दुसरा खरीद दूँगा, पर इस वाले में तो तुम्हारे बदन की खुश्बू बसी हुई है, अनमोल है”। विभा मुस्कुराई और फ़िर उस ब्रा को भी अंकल को दे दिया और नंगी ही मेरे पास आ कर मुझे उठाने का नाटक की। उसको पता था कि मैं सोया नहीं हूँ, बस एक्टिंग कर रहा हूँ। मैं भी अब उठा और फ़िर उसके तरफ़ अधखुली नजरों से देखा तो वो बोली, “पूछ लीजिए अंकल से कि उनको मजा आया कि नहीं”। मैंने भी अब पूरी तरह से जगने का नाटक करते हुए कहा, “तुम्हारी हालत से पता चल रहा है कि अंकल को आज क्या सब मिला है”, और मैंने अंकल की तरफ़ देखा जो कपड़े पहने हुए होने के बाद भी शर्म से लाल हुए जा रहे थे। विभा अब बोली, “मैं नहाने जा रही हूँ, अब तुम अंकल से बातें करो” और वो तौलिया ले कर नंगी ही बाथरूम में घुस गई।

मैंने अब अंकल को छेडते हुए कहा, “क्यों अंकल, कैसा रहा… मजा आया”? वो बेचारे शर्माए हुए से चुप-चाप बैठे थे तो मैंने फ़िर से छेडा, “अरे कुछ तो बोलिए न अंकल… कैसा लगा विभा को चोद कर?” अब बेचारे के मुँह से निकला, “हाँ, बहुत अच्छा लगा। ऐसा कुछ होगा, कभी सोचा ही नहीं था। विभा बहुत अच्छी लड़की है”। मैंने कहा, “वही तो…, अब समझ में आया, क्यों मैं उसपर जान छिडकता हूँ। आप उसको जब मन तब चोद सकते हैं, कभी ना नहीं कहेगी। बहुत बोल्ड और बिंदास किस्म की चीज है”। अंकल भी अब उसकी तारीफ़ करते हुए बोले, “हाँ बहुत अच्छी है, खुब मन से सेक्स करती है और पार्टनर को भी खुश करने का ख्याल रखती है…”। विभा अब नहा कर नंगी ही बाहर आ कर हम लोग के सामने कपडा पहनते हुए हमारी बात-चीत सुन रही थी और मुस्कुरा रही थी। मैंने कहा, “अरे पार्टनर की खुशी के लिए नहीं मेरी खुशी के लिए कहिए, मेरी प्यारी विभा कुछ भी कर लेती है। अभी आपने देखा कि कैसे बिंदास हो कर आपसे चुदा ली। ऐसे ही उस दिन पर बिना दुबारा सोचे कि आप भी घर पर हैं, आपने देखा कि कैसे आराम से बिना ना-नुकुर किए आपके घर पर चुदवा ली। फ़िर समुन्दर के किनारे भी कई लोगों के रहते सिर्फ़ मेरी खुशी के लिए चुदी, जबकि सब तरफ़ से लोग उसको ऐसे चुदाते हुए देख रहे थे।” विभा अब बोली, “चलिए अब देर मत कीजिए, उठिए… आपको तो केवल अपने मजे की पड़ी है, यहाँ मुझे अपनी टाँग को ऐसे फ़ैला कर लेटना पडता है और तब कितना दर्द होता है जाँघ में आपको थोडे ना पता चलेगा। बस पाँच-सात सेकेन्ड का आपके बदन के थरथराहट को अपने भीतर महसूस करने के लिए यह सब झेल लेती हूँ”। मैंने उठते हुए उसको अपने बाहों मे पकड़ लिया और फ़िर उसके होठ चुम लिए। अब उसने मुझे अपने से दूर करते हुए कहा, “हटिए अब और नहीं, देर हो जाएगा… वैसे भी, अंकल को मेरी चुदाई देख कर शर्म आ जाएगी। बेचारे भले आदमी को क्यों यह सब आप दिखा रहे हैं?” अकंल उसकी बात सुन कर झेंप गए फ़िर बोले, “विभा बेटी, असल में कभी मेरे कल्पना में भी नहीं था कि ऐसे कभी तुम जैसी किसी लडकी से यह स्ब करने का मौका मिलेगा”। मैंने अब अपने शर्ट का बटन लगाते हुए कहा, “मेरी वाली को तो चोद लिए… अब अपनी वाली को कब मेरे साथ सुला रहे हो?” अंकल भी अब अपनी बीवी के बारे में सोचते हुए ठरकी हो कर बोले, “वो बुढिया तो बीस साल से मेरे साथ नहीं सोई तो तुम्हारे साथ क्या सोएगी। अब तो कोई बेटी भी नहीं है मेरी कि तुम्हारा एहसान चुका सकूँ…”। विभा बीच में ही बोली, “वाह रे… मैंने आपको अपना बदन दिया चोदने के लिए और एहसान इस हरामी का हो गया आप पर… मेरा कोई एहसान नहीं हुआ? मेरा भी तो कर्ज आपको चुकाना है।” अंकल सकपकाते हुए बोले, “हाँ बेटा, यह बात तो है… बताओ कैसे चुकाउँ तुम्हारा एहसान…”। विभा अब मेरी तरफ़ देखी कि मैंने बिना कुछ सोचे कह दिया, “अरे अंकल होटल में रंडी चोदे हैं बस यही समझ कर कर दीजिए पेमेन्ट… क्यों विभा, रंडी के रूप में आज पहली बार क्या लोगी?” विभा मेरे इन शब्दों को सुन कर थोड़ा चौंकी पर फ़िर बोली, “रंडी तो आप लोग चोदते होंगे, मुझे क्या मालूम…”। अंकल बोले, “तुम तो अनमोल हो बेटी… फ़िर भी आज ग्यारह साल बाद किसी लडकी के बदन को भोगने के एवज में तुम्हें आज ११ हजार का शगुन दुँगा। पेमेन्ट नहीं शगुन… तुम जैसी अच्छी लड़की को भगवान कभी ऐसे रंडी न बनाए”, वो भावुक हो गए थे। इसके बाद मेरी छोटी बहन विभा पहली बार अपनी चुदाई के एवज में ११ हजार कमाई।

इसके बाद हमलोग बाजार की तरफ़ चल दिए। इधर-ऊधर कुछ-कुछ खरीदने के बाद बाहर ही लंच किया गया और करीब दो घन्टे के बाद ६ के करीब अंकल हमें हमारे होटल ड्रौप करके चले गए। हमने अब जल्दी-जल्दी अपना सामान पैक किया और वापसी के लिए तैयार हो गए।

अपने दो बहनों को इस तरह से अब तक मैं चोद चुका था, और विभा को तो दुसरों से चुदा भी चुका था। फ़िर अब मुझे ख्याल आ रहा था कि काश प्रभा की शादी न हुई होती तो मैं उसकी भी कुँवारी चूत की सील तोडने का मजा लेता। अब मेरे दिमाग में हमेशा घुमता रहता कि अब कैसे प्रभा को चोदूँ। विभा से इस विषय में बात भी नहीं कर पाता क्योंकि उसको तो यही पता था कि मैंने प्रभा को भी चोदा है। हमें किशनगंज आए चार महिने हो गए थे और अब विभा और मैं फ़िर से अपने शहर में एक अच्छे भाई- बहन की तरह रहने लगे थे, क्योंकि विभा की यही शर्त थी कि वो घर पर मुझसे नहीं चुदाएगी। मेरे पास भी उसकी बात मानने के आलावा कोई चारा नहीं था। एक अच्छी बात यह हुई थी कि स्वीटी का टर्म ब्रेक होने वाला था १५ दिन का और वो कुछ दिन के लिए घर आ रही थी। मैंने स्वीटी को बता दिया था कि विभा भी अब चालू हो गई है। मेरी बात सुन कर स्वीटी के आश्चर्य का ठिकाना न था, जिस तरह की विभा को स्वीटी देख कर गई थी वो सोच भी नहीं सकती थी कि वो विभा अब तक मुझसे और दूसरों से चुदवा रही है। मैंने उसकी बात विभा से करवाई और उसने उसको बधाई दी कि उसको कई प्यार करने वाले मिले, जबकि यहाँ कौलेज में बदनामी न हो के डर से स्वीटी को एक छुईमुई लडकी की तरह रहना पड़ रहा है। बस जब बहुत गर्मी चढ़ जाती है तो गुड्डी के साथ चुम्मा-चाटी और फ़िर एक-दूसरे के साथ ऊँगली से संतुष्ट होना पडता है। विभा ने उसको पहले ही बता दिया था कि वो घर जा कर फ़िर यह सब नहीं करेगी और किशनगंज में जैसे वो पहले रहती थी वैसे ही रहेगी। स्वीटी कई बार उसको मेरा खयाल करने को बोली पर विभा टस से मस न हुई। खैर स्वीटी ने मुझे भरोसा दिया था कि वो घर पर मेरे से खुब चुदाएगी और मेरी सब तमन्ना पूरी कर देगी जो अब किशनगंज में विभा पूरी नहीं कर रही है। मैं अब बेसब्री से स्वीटी के आने के दिन गिनने लगा था। इसी बीच में प्रभा के पति का फ़ोन आया कि उसको उसकी कंपनी औस्ट्रैलिया भेज रही है एक साल के लिए और वो अगले सप्ताह प्रभा को हमारे घर छोड कर औस्टैलिया जाएगा और फ़िर वहाँ घर वगैर का इंतजाम करके प्रभा को भी साथ ले जायेगा। इस सब के बीच करीब १५ दिन वो हमलोगों के साथ रह लेगी। अब मेरी इच्छा पूरी होने का समय आ रहा था, अब देखना था कि प्रभा का क्या रूख रहता है। अगले सप्ताह स्वीटी पहले आई और बिना नहाए धोये मेरे साथ कमरे में बन्द हो गई। करीब एक घन्टे बाद जब मैं बाहर आया तो विभा मुझे देख कर मुस्कुराई, “अब ठीक है न, मजे कीजिए उसी के साथ और अब मुझे परेशान मत कीजिएगा इस सब के लिए”। पीछे से स्वीटी भी कमरे से निकली और बोली, ’अरे दीदी, तुम क्या जानो कि किसी मर्द के लिए कितना तडपी हूँ मैं कौलेज में। अभी तो रात में भी भैया के साथ हीं सोना है। तुम तो खुब अलग-अलग टाईप का ले ली हो इसी से ऐसे शान्त हो। अभी तो जीजू आएँगे तो उनके साथ भी सोना है। वो हमेशा मुझसे बोलते हैं, “साली आधी घरवाली होती है…” अब उनको भी घरवाली का मजा दे दुँगी। उस रात स्वीटी मेरे साथ सोई और रात में दो बार चुदाई। यह रोज का नियम सा हो गया था।

स्वीटी के आने के तीन दिन बाद प्रभा भी अपने पति के साथ आ गई। उसके पति प्रभात और प्रभा के चेहरे से खुशी चमक रही थी। बात ही ऐसी थी कि अब दोनों साल भर के लिए विदेश जा रहे थे वो भी प्रोमोशन के साथ। प्रभा ने मेरे पैर छुए और फ़िर अपनी बहनों से गले मिली। स्वीटी को देख कर प्रभात ने फ़िर कहा, “और मेरी आधी घरवाली, कैसा चल रहा है सब?’ तब उसने तो प्रभात को जोर से पकड़ कर उसको चुम लिया और कहा, “अब समझ में आया?” जवाब में प्रभात ने भी उसको पकड कर खुब प्यार से चुमा और बोला, “वाह… आज तो तुम्हारा होठ मेरी पूरी घरवाली के होठ से मीठा लग रहा है।” प्रभा उनको ऐसे देख कर बोली, “चल हट स्वीटी अब उसके पास से, नहीं यह और ज्यादा बदमाशी करेगा… पता नहीं वहाँ जा कर य्ह कैसे रहेगा अभी से इतना जोश में है।” दोनों हँसते हुए अलग हुए और प्रभात बोला, “अरे खुले समाज में जीने का मौका मिलेगा तो मर्दाना मजा तो लूँगा, तुम्हें भी तो छुट दे रहा हूँ अगले साल भर तक मजा लो फ़िर बच्चे पैदा कर लेना और बीजी रहना दिन भर उसकी देख भाल में…”। उसकी बात सुन कर हम सब हँस पड़े। मेरी नजर लगातार प्रभा को घुर रही थी। शादी के बाद के छः महिने में उसका सारा रंग ढंग ही बदल गया था। लडकियाँ जब चुदाने लगती है तो मस्त हो जाती हैं, यह मुझे पता था और प्रभात उसे रोज दो बार चोदता था, यह बात मुझे प्रभात ने ही बताई थी। प्रभात मेरा बचपन का दोस्त था और अक्सर मेरी बहनों के बारे में चुटकी लेता रहता था। वो अक्सर मुझसे कहता था कि यार तुम्हारी एक बहन से मैं शादी करुँगा, कम-से-कम बाकी दोनों मेरी साली तो बनेगी न। उसको स्वीटी विशेष पसन्द थी पर उसकी शादी की उसके माँ-बाप को जल्दी थी तो उसको प्रभा से शादी करनी पडी। उसने तो मुझे सुहागरात के पूरे वर्णन को सुनाया था और तब न चाहते हुए भी मैं अपने दोस्त की बात सुनता रहा था। उसने हीं मुझे बताया कि प्रभा बहुत ही मस्त हो कर चुदवाती है और वो उसको दो बार जरुर चोदता है, एक बार रात में सोने के पहले और फ़िर दुबारा सुबह में जागने के बाद उसको चोदने के बाद ही वो बिस्तर से निकलता है। वो कभी-कभी प्रभा के सहारे बात को मेरी बाकी बहनों की तरफ़ ले जाता और उनके बारे में भी खुब सारी गंदी बातें कहता पूछता। उसके साथ के बातों का ही असर था कि मैंने खुब आराम से अपनी दोनों बहनों को चोदा बिना दो बार यह सोचे कि वो मेरी सगी बहने हैं। वो मुझसे अक्सर कहता था कि कभी मौका देख कर अपनी बहनों को चोदो, सब की सब बहुत मस्त माल हो गईं हैं।

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