छत पर भाभी की चुदाई

हेलो दोस्तों, मेरा नाम रोहित शर्मा है, मै इंदौर का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 28 साल है। मै आप लोगो को अपनी सेक्स लाइफ की एक घटना बताना चाहता हूँ शायद आपको पसंद आये…..

ये कहानी मेरी और ३२ साल की एक भाभी की है, जिसको मै रोज छत पर कपडे धोते देखता हु।

दोस्तों तो अब मै कहानी सुरु करता हु – मेरे कमरे के सामने खुली छत है या यू कहो की मेरा कमरा छत पर है। उस छत पर निचे वाले फ्लोर पर रहने वाली भाभी रोज कपडे धोती है, और दोस्तों तुम तो जानते ही हो की जब कोई महिला कपडे धोती है तो किस तरह से अपने कपडे उठा के बैठती है। मै रोज ही उसके बड़े-बड़े बूब्स, घुटनो तक उसकी गोरी टाँगे और बड़ी गांड देखता हु क्युकी वो किसी दिन मेरे साइड मुह करके तो किसी दिन मेरे साइड गांड करके बैठती है और उसको देख-देख के मेरा लंड खड़ा हो जाता है

भाभी को भी पता था की मै उसे चुपके-चुपके खिड़की से देखता हु , पर कभी हिम्मत नही हुई की मै उसे अपना खड़ा लंड दिखाऊ।

अरे दोस्तों मेने भाभी के फिगर और मेरे लंड के बारे में तो बताया ही नही चलो बता देता हु – भाभी ३२ साल की मस्त चोदने लायक माल है मेरा मतलब उसका फिगर ३४-३०-३८ का होगा, अब आप ही सोचो की ऐसी बड़ी गांड और बूब्स वाली को देख के कैसे न लौड़ा खड़ा हो, रंग गेरुवा, हाइट ५.५ होगी, अब मेरे लोडे के बारे में सुनो- करीब ८.३ इंच लम्बा और ३ इंच मोटा, थोड़ा टेड़ा है जो की अब-तक ४ भाभियों और १ कॉल गर्ल, १ गर्लफ्रेंड , २ गे को पसंद आ चूका है और उनको मेरे लंड का दीवाना बना चूका हूँ, पर यहाँ मै बताना चाहूंगा की १ भाभी को मेरा लंड पसंद नही आया था उसे टेड़ा नही सीधा लंड पसंद है।

इन सभी की चुदाई कहानी मै आपको बताऊंगा पर पहले मेरी ४थ भाभी की चुदाई सुनो— मुझे उसे देखते हुए करीब १ महीना हो गया था और मै उसे चोदने के लिए तरस रहा था। कभी-कभी सोचता था की उसे खिड़की से ही लंड दिखा-दिखा के हिलाउ और चोदने के इशारे करू पर ये हरकत तो मेरी पिटाई करा सकती है

इसलिए मेने सोचा की पहले जान-पहचान बड़ाई जाये फिर कुछ किया जायेगा। अब मै जब वो कभी-कभी शाम को छत पर टहलने आती थी तब थोड़ी-थोड़ी बात कर लेता था, मतलब हई-हेलो, कैसी हो, दिन केसा रहा टाइप की बात, फिर कुछ दिनों से वो रोज शाम को छत पर आने लगी तो हमारी बात-चीत भी अब ज्यादा होने लग गई और कुछ 10-15 दिनों में हम अच्छे दोस्त बन गए।

अब तो हम रोज शाम को देर-देर तक बाते करने लगे, कभी-कभी भैया (भाभी के हस्बैंड) भी आ जाते जब उन्हें ऑफिस का काम ज्यादा ना हो तो और हम तीनो खूब बाते करते है, यहाँ मै बताना चाहूंगा की भाभी के हस्बैंड और मेरी पहले से जान-पहचान है जबसे मै इस रूम में रहने आया तब से।

अब मुझे लगने लग गया था कि चुदाई अब ज्यादा दूर नही क्योकि अब हमारे बीच हसी-मज़ाक और सेक्स की बाते भी होने लगी थी, अब तो मै भाभी की कमर को भी पकड़ लेता था और अपने लंड को थोड़ा सा उसकी गांड का अहसास करा देता था।

भाभी कभी-कभी मुझसे पूछती थी की तुम्हारी गर्लफ्रेंड क्यों नही है? तो मै मज़ाक में कह देता था की बहुत जल्दी मै आपको गर्लफ्रेंड बनाने वाला हु, तब फिर मेरे पास भी गर्लफ्रेंड होगी। जब मै ये कहता था तो वो बहुत खुस होते हुवे इतरा कर कहती थी की सपने देख ले मेरी जैसी गर्लफ्रेंड के। मै कहता था देख ही रहा हुँ।

अब मुझे पक्का यकीन हो गया था की भाभी की चूत मिल ही जाएगी। उस दिन मेने हिम्मत कर के भाभी से पूछ ही लिया की सचमे मेरी गर्लफ्रेंड बन जाओ? तो भाभी पहले तो हँसी फिर हसंते हुए बोली की मुझे बॉयफ्रेंड की क्या जरुरत ? मेरे पास तो है। मेने कहा पर मुझे तो चाहिए न कहते हुए भाभी से थोड़ा चिपक के खड़ा हो।

गया उस टाइम हम छत के किनारे बानी कमर तक उँची दिवार के टेके ले के रोड साइड मुह करके थोड़ा झुक के खड़े थे। अँधेरा होने लगा था और मेरा लंड खड़ा होने लगा था क्योकि एक तो भाभी की बाते मुझे उत्तेजित कर रही थी और दूसरी जब मै भाभी से थोड़ा चिपका तो उसके बदन की गर्मी का एहसास हो रहा था।

अब मै भाभी का हाथ पकड़ कर बात करने लगा और साइड से उसकी गांड से थोड़ा और चिपक गया अब मेरा लंड भाभी की गांड पर टच होने लगा। लंड के खड़े होने का एहसास भाभी को भी हो गया था इसलिए वो मेरे बातों का जवाब नही दे रही थी और चुप-चाप निचे सिर झुकाये बिना हिले वैसे की वैसे खड़ी थी।

भाभी को चुप देख कर मेने थोडासा और लंड का दबाव भाभी की गांड पर बढ़ाया। तो भाभी ने अचानक से मेरी तरफ देखा, उसका चैहरा देख के तो मै हैरान रह गया, आँखे बिल्कुल लाल-लाल, चैहरा तमतमाया हुआ और तेज होती उसकी सासे। वासना भरी आँखो से मुझे देख रही थी मानो कह रही हो की चोद दे मुझे। मेरा लौड़ा तो लोहे की रॉड हो गया था। मेने लंड को उसकी गांड पे घिसते हुए चूतड़ों की दरार में डाल दिया।

जैसे ही मैंने लंड को चूतड़ों की दरार में डाला भाभी आअह करते हुए आगे की ओर झुक गई और अपनी गांड को पीछे कर दिया। मै तो कुत्ते की तरह पीछे से चिपक गया और पीछे से हाथ डाल कर भाभी के बूब्स पकड़ लिया और जोर-जोर से कुत्ते की तरह अपनी कमर चलने लगा और बड़े-बड़े बूब्स को दबाने लगा और उसके गले पर किश करने लगा।

भाभी तो मुह खोल के आअह आअहाअ आआह्ह्ह करते हुए तेज-तेज सास ले रही थी, में बहुत जोश में आ गया और भाभी आय लव यू , आय लव यू, कब से तुम्हे चोदने को तड़प रहा था कहते हुए उसका मुह मेरी तरफ घुमाकर किश करने गाला और एक हाथ से बूब्स दबा रहा था और एक हाथ से उसकी चूत को कपड़ो के ऊपर से ही मसलने लगा।

भाभी अब बहुत गरम हो गई थी और अपनी गांड को मेरे लंड पर दबाने लगी, मुझे भी रहा नही जा रहा था इसलिए मेने लौड़ा अंडरवियर से निकला और भाभी की साडी को पीछे से उठा कर पीछे से ही चूत में डाल दिया।

2-३ झटको में पूरा लौड़ा चूत में उतार दिया और कुत्ते की तरह चुदाई करने लगा। करीब ५ मिनट ऐसे ही चोदने के बाद भाभी को वही छत पे लेटा दिया और उसके पैरों को अपने कंधे पर रख कर जो तूफानी चुदाई की भाभी तो सिर्फ आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आअह आअह्हह्हह चोद चोद आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह फ़क फ़क आह्ह्ह आह्ह्ह्हह्ह के सिवाय कुछ नही बोल पा रही थी। बस मुह खोल के आआआह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह आह आआह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह किये जा रही थी।

१५ मिनट की चुदाई के बाद भाभी की चूत को लंड के माल से भर दिया। थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद उठे और कपडे ठीक करके बिना कुछ बोले अपने-अपने घर में आ गए।

सुबह जब भाभी कपडे धोने छत पर आई तो मेरे पास आई और मुझसे लिपट गई, मेने भी अपनी बाहो में कस के जकड रखा थोड़ी देर और फिर मेरे हाथ भाभी के बदन पर चलने लगे हाथ निचे ले जा कर उसकी गांड को जोर से दबा दिया तो वो आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह बदमास कहते हुए दूर हट गई।

फिर उसकी नज़र मेरे खड़े लोडे पर पड़ी तो लंड को घूर के देखने लगी। मेने कहा देख क्या रही है पकड़ ले कहते हुए उसका हाथ में लंड पकड़ा दिया।

लंड को देख के बोली हे भगवान इतना बड़ा कल शाम को पूरा चूत में ले लिया था क्या मेने ? तो मेने कहा हां पूरा की पूरा तेरी चूत में घुसा दिया था।

थोड़ी देर तक लोडे से खेलती रही फिर फ़ट से निचे बैठ गई और मुह में ले के चूसने लगी और चूस-चूस कर हिला-हिला कर माल निकाल दिया और फिर वो कपडे धोने चली गई, मै भी नहाने चला गया क्योकि मुझे बाहर जाना था और मै लेट हो गया था।

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