चौकीदार की बीवी, मेरी हम बिस्तर

मै एक मास्टर हु और एक छोटे से और पिछड़े गावं के सरकारी स्कूल मे काम करता हु | मेरा घर स्कूल के कैम्पस मे ही दूसरी तरफ है | मेरी शादी नहीं हुई है और मे अकेला रहता हु | स्कूल खत्म होने के बाद मे काफी वक़्त स्कूल मे बिताता हु और फिर घर चले जाता हु | स्कूल के कैम्पस मे ही स्कूल के चौकीदार का घर है | चौकीदार एक जवान लड़का और उसकी शादी को ज्यादा वक़्त नहीं हुआ है | चौकीदार का घर स्कूल के पीछे की तरफ है और मेरा घर भी उधर थोडा हटकर है | चौकीदार, मेरा खाना भी बनाता है

एक दिन सुबह-सुबह चाय की पत्ती खत्म हो गयी और मैने चौकीदार को दुकान पर पत्ती लाने भेजा और खुद छत पर चला गया | चौकीदार का बाथरूम मेरे घर के पीछे था और ऊपर से छत नहीं थी | उधर कोई आता-जाता नहीं था; तो, किसी ने बाथरूम की छत के बारे मे नहीं सोचा | जब मै छत पर घूम रहा था; तो, देखा चौकीदार की बीवी नहा रही थी | उसके बदन पर कुछ नहीं था और वो मजे से नहा रही थी | उसका मस्त बदन देखकर मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया | उसके बदन पर पानी की बुँदे उसको और कामुक बना रही थी | उसके चुचे और उसकी भरी टाँगे मुझे मदमस्त कर रही थी | मैने अपना लंड निकला और वही मुठ मारना शुरू कर दिया | मुझे पता नहीं लगा, कि चौकीदार की बीवी ने मुझे देख लिया है और भाग कर घर चली गयी |
मैने चौकीदार को कुछ नही बोला; पर अब ये मेरी रोज़ की आदत बन गयी | किसी ना किसी बहाने से, मै चौकीदार को कही भेज देता और उसकी बीवी के शरीर का रसपान करता | एक दिन मैने चौकीदार को बुलाकर शहर भेजा और कुछ काम करने को कहा और कुछ ज्यादा पैसे दिये; ताकि वो अपनी बीवी के लिए कुछ ला सके | उस दिन स्कूल की छुट्टी थी | चौकीदार ने अपनी बीवी को मेरी चाय और खाना बनाने को बोला और शहर चला गया | उसकी बीवी दुपहर मे घर आयी और मेरा खाना बनाने लगी |

मैने उससे से इधर-उधर की बात करनी शुरू कर दी | उसने सारी बातो के बाद बोला, बाबु जी एक बात पूछे | मैने कहा, बोलो | उसने बोला, आप हमें रोज़ छिप-छिप कर क्यों देखते है ? मुझे एक दम झटका लगा और मै मिमयाने लगा | फिर, उसने बोला, बाबूजी हमें तो पहले दिन ही पता लगा गया था और आपका औजार भी देखा था | उसी के चक्कर मे रोज़ आपको को दर्शन करवा रही थी | मुझे लगा, लोहा गरम है, हथौड़ा मर देना चाहिए | मै रसोई मे गया और उसको पीछे से पकड़ लिया | वो घूमी और मेरे होटो पे अपने होट रख दिये और मुझे धक्का देकर मेरे ऊपर चढ़ गयी | मैने जल्दी-जल्दी अपना पयजामे का नाड़ा खोला और नंगा हो गया | उसने भी अपनी साड़ी खोल दी और हम दोनों नंगे हो गये |
मैने उसको जमीन पर गिरा दिया और और उसके पेरो को खोल दिया और उसकी चूत मे अपना मुह घुसा दिया और ६९ की मुद्रा मे अपना लंड उसके मुह मे घुसा दिया | अब हम दोनों एक दुसरे के लंड और चूत को चूस रहे थे और कामुक आवाजो से मेरा कमरा गूंज रहा था | मेरे चाटते-चाटते, वो साली झड गयी और मेरा लंड मुह से निकालने लगी | मैने उसको नहीं छोड़ा और चुकी चूत के उपरी भाग को चूसने लगा | अगले ५ मिनट मे वो फिर से गरम हो गयी और एक करवट मारी और मेरा लंड उसके मुह से निकल गया | फिर, मैने उसके दोनों पैर खोलके उसकी चूत को अपने सामने किया और अपने लंड को को चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया | वो मस्ती मे अपनी गांड हिलाने लगी |

मुझे समझ आ गया; कि, वो अपने पति से खुश नहीं है और मेरी किस्मत खुलने वाली है | मैने उसकी चूत पर थूका और अपने लंड को अपनी थूक से गीला किया | फिर, मैने लंड को उसकी चूत पर रखकर धक्का मारा और लंड चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया | मेरा लंड थोडा बड़ा था, तो सीधे अंदर जाकर टकराया | उसकी चीख निकल पड़ी और उसने मस्ती मे अपनी गांड हिलानी शुरू कर दी | मैने उसकी गांड को पकड़ा और लंड को जितना अन्दर घुसा सकता था, घुसा दिया | वो चीख रही थी, लेकिन, आज मुझ पे सेक्स की प्यास सवार थी; तो, मे उसको चोदे जा रहा था | थोड़ी देर मे मैने अपना पानी उसकी चूत मे छोड़ दिया और उसके ऊपर गिर गया | वो ३-४ बार झड चुकी थी और बोली बाबूजी आज आपने मेरी प्यास बुझा दी | आपने इनको जानबूझ के बाहर भेजा है, ये मुझे मालूम है | आगे भी मेरी प्यास बुझाना |
फिर, उसने मुझे मस्त खाना बनाकर खिलाया और अपने घर चली गयी |

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