चाची की चुदाई से शुभारम्भ part 4

सुबह नींद खुली तो पुरे बदन में मीठा मीठा दर्द था.

उठते ही रात की बातें मेरी आँखों के सामने घूम गयी, मैं सोच में पड़ गया की वो सपना था की हकीकत.
तभी मेरी नज़र सामने पड़े कागज़ पर पड़ी और मुझे याद आया की मैंने रात को अपना मुन्ना इसी से साफ़ किया था.

तभी दरवाज़ा खुला और चाची हाथ में झाड़ू लिए रूम में आई, चाची और मेरी नज़रे मिली. चाची ने बहुत ही कमीनी स्माइल दी और मैं समझ गया की रात को हुयी बात सपना नहीं हकीकत थी.

मेरा बाबुराव जो सुबह होने से आधा तैयार था ही , ये सोचते ही उसने अपना सर सिपाही की तरह शान से उठा लिया.
चाची मेरे बेड के पास ही झाड़ू निकलने लगी, वो झुकी हुयी थी और उनका विशाल गोल पिछवाडा मेरी नज़रों के सामने था.

कीड़ा कुलबुलाने लगा……..

मैंने अपने हाथ बड़ा कर चाची की नितम्बो पर रख दिया,

जिस तरह “हम आपके हैं कौन” में जैसे माधुरी सलमान की गुलेल की मार खा कर पीछे देखती है वैसे ही चाची ने पलट कर मुझे देखा. हैरत से उनकी ऑंखें बड़ी बड़ी हो गयी थी.

मैंने चाची को एक कमीनी मुस्कान मारी. चाची का चेहरा एक दम लाल हो गया और उन्होंने जोर से मेरा हाथ झटका और रूम के बाहर चली गयी.

गांड की फटफटी चल निकली.

मैंने सोचा बॉस…..कल रात की बात से चाची नाराज़ है ?? , अब जा कर अगर घरवालो को बता दिया तो अपनी इस दुनिया से विदाई पक्की.
बाप गोटों में रस्सी बांध कर छत से लटका देगा. मैंने तुरंत टी शर्ट डाला और बाहर गया. पापा और चाचा दोनों डाइनिंग टेबल पर बैठे नाश्ता कर रहे थे.

मैं भी जाकर बैठ गया. दोनों ने नाश्ता निपटाया और दुकान जाने लगे…..मेरा चाचा रहता तो गाँव में था मगर बेचारे को टु व्हीलर भी चलाना नहीं आता था. इसीलिए पापा से साथ स्कूटर पर बैठ कर जाता था. चाचा बाहर से अंदर आया और चाची को आवाज़ लगाई, “अरे नीलू……वो…….दवाई……..लानी है ना ?”

मैं एक पल में समझ गया कोनसी दवाई. “खुजली वाली”……चाची ने अन्दर से बोला, “नहीं…..अब मेरे सर में दर्द नहीं है……मत लाना”

चाचा को कुछ समझ नहीं आया…..फिर वो समझ गया की चाची सब के सामने कोड वर्ड में बोल रही है……….उसने बैल जैसे सर हिलाया और चला गया. चाची ने मुझे चाय लाके दी ….तभी मोंम ने किचन से पूछा…… “अरे नीलू…..तेरा सर दुख रहा है ????? दवाई क्यों मंगा रही है …….क्रोसीन पड़ी है खा ले……..”

चाची ने बोला, “अरे नहीं भाभी ….अब ठीक है…….”

चाची की दवाई तो मेरे पजामे में छुपी थी. मेरी और चाची की नज़रे मिली और चाची मुस्कुरा दी……धीरे से बोली …
“अब दवाई की ज़रूरत नहीं है…….”

मुझे समझ नहीं आ रहा था की साली अभी तो अन्दर गुस्सा दिखा रही थी और अभी फिर से उंगली शुरू कर दी. फिर उसने बड़ी अदा से अपना पल्लू ठीक किया…… साड़ी सही करने के बहाने से मुझे अपनी चिकनी कमर दिखाई और नितम्ब मटकाती हुयी किचन में चली गयी.

साला…….ये चल क्या रहा है ??????

कॉलेज में मन ही नहीं लग रहा था…….इच्छा हो रही थी की दौड़ के घर पर जाओ और चाची की पकड़ के……..पकड़ के………ठोक दू बस……मगर चाची गुस्सा क्यों हुयी ?

खैर… ….क्लास में तो मन लगा नहीं……बाहर निकला और नवजोत मिल गया…….आज का साला दिन ही ख़राब था.

“न न न नमस्ते माट साब……….क क क कैसे है आप……”, मेरी नक़ल निकालते हुए नवजोत ने कहा.

” ठ ठीक हूँ”, मैंने अपने हक्लेपन को कंट्रोल किया.

“आज आप पढ़ाने नहीं आयेंगे ?”, नवजोत ने फिर मसखरी की.

अब मैंने सोच लिया की इस भेन्चोद को औकात दिखानी ही पड़ेगी. मैंने बूंद बूंद करके हिम्मत बटोरी और कहा, “देखो……पिया…..मेरा मतलब है की आपकी सिस्टर अकाउंट में बहुत ही कमज़ोर है……..मुझे फीस से कोई मतलब नहीं है…मैं उसकी मदद सर के कहने पर कर रहा था…..अगर आपको प्रोब्लम है तो ठीक है….. आप देख लो….”

मैंने मेरे जीवन में नवजोत से इतनी बात नहीं की थी…..उसका मुंह खुला का खुला ही रह गया……मगर मेरी बात उसके मोटे भेजे में आ गयी थी. उसने बड़ी मुश्किल से अपने मुंह बंद किया और धीरे से बोला…. “आय एम् सोरी……देखना यार……वो फेल नहीं हो जाए…..पापा बहुत गुस्सा होंगे….”

ये बोल कर वो खिसक लिया……और मेरी तो खुद की फटी पड़ी थी…..मुझे तो लगा था की आज यह सूअर मुझ पर ही हमला ना कर दे.

तभी मेरा मोबाइल बजा……पिया का फोन था……”कहाँ हो तुम…..?”

मैंने कहा, “पार्किंग में…..”, वो बोली, “चलो मैं वही आ रही हूँ……” और फोन काट दिया.

मैं अपने मोबाइल में SMS पढ़ रहा था. नज़रे उठाई तो सामने से पिया आती दिखी, मेरी साँसे सीने में ही रुक गयी. उसने ब्लू कलर की लो वेस्ट जींस पहनी थी, उसके ऊपर एक ब्लेक टॉप था जो उसने जींस में इन किया हुआ था, जींस ठीक उसकी कमर के घुमाव पर टिकी थी और उसका टॉप बड़े गले का था जिससे उसका एक कन्धा पूरा पूरा बाहर आ रहा था. चिकना चिकना कन्धा धुप में ऐसे चमक रहा था मानों संगमरमर हो…….उसने ब्लैक गोगल लगा रखा था. उसके गोरे बदन पर ब्लैक टॉप क़यामत लग रहा था. साली बहुत ही कटीली दिख रही थी.

वो सीधी मेरे पास आई और बोली, “क्या यार तुमको क्लास में भी आवाज़ लगाई, सुनते ही नहीं हो ? कहा रहतो हो ? सची सची बताओ GF के बारे में सोच रहे थे न ?”

अब मैं उसको क्या बोलता की मैं GF के बारे में नहीं, चाची की मटकती गांड के बारे में सोच रहा था. मैंने कहा, “न न नहीं यार…..व व वो …रात को नींद नहीं आई थी इसलिए…….”. उसने ऑंखें गोल गोल नचा के कहा, “ओ हो……मिस्टर……क्या बात है ? अब तो बता दो की कोन है वो ?”

साला…….मुझे ये समझ नहीं आ रहा था की चाची को गुस्सा क्यों आया…..और इधर इस बात की दुकान का मुंह बंद नहीं हो रहा था……भेन्चोद पटर पटर बोले ही जा रही थी……ठीक है …..सुंदर है……सेक्सी है………मगर मेरा दिमाग चाची में इतना उलझा था कि मैं पिया की बात ही नहीं समझ पा रहा था. और वो बोले ही जा रही थी…

“अरे मिस्टर…..नाम तो बता दो…”, उसने फिर उंगली की.

मेरा ध्यान था नहीं. मैंने उस को चुप रहने के लिया कहा, “पिया………”.

मैं आगे कुछ बोलता इस के पहले उसने एक दम अपने मुंह पर हाथ रख लिया….और उसका मुंह शर्म से लाल हो गया……

उसने धीरे से कहा, “क्या…ये……सच….है……शील”

अब मुझे समझ में आया की यह क्या हुआ. मेरी गांड की फटफटी का इंजन ही फेल हो गया. मैंने उसको चुप करने के लिया उसका नाम लिया था और वो समझी मैं उस के बारे में सोच रहा था. मैंने बात सँभालने की कोशिश की, “अ अ अ अरे…..न न न नहीं…..व. व.वव.वो…..म म म मैं तो तुम को……”

मेरी बात कट के वो धीरे से बोली, “अब कुछ मत कहो…..मैं तुम्हारी बात समझ गयी……”

इसकी माँ की ……..हम हकले बिचारे जितनी देर में एक शब्द कहते है जमाना उतनी देर में महाभारत दो बार पढ़ लेता है.

साली मुझे बोलने ही नहीं दे रही थी. मगर ये तो था की वो बहुत खुश हो गयी थी. उसने मुझे धीरे से कहा, “मुझे चोकलेट खाना है”

मैंने उसको घुरा और पूछा, “म म म मतलब ?? ”

उसने बड़ी अदा से मुझे देखा और बोली, “अरे बुद्धू मुझे डेरी मिल्क नहीं खिलाओगे क्या ? आज शुभारम्भ है ना ……”

अब मैं उसको क्या कहता की मेरा शुभारम्भ तो कल रात को ही हो गया.

कॉलेज की कैंटीन से उसको डेरी मिल्क दिलवाई. साली……हाथ पकड़ के चल रही थी और मेरी गांड फटे जा रही थी की कही इसका वो सांड भाई मिल गया तो ये शुभारम्भ सीधा THE – END में बदल जायेगा. खैर गांडफटो की किस्मत जोरदार होती है ये तो आप जानते ही है…….वो तो नहीं मिला मगर इसको इसकी दो तीन फ्रेंड्स मिल गयी.

लड़कियां यूँ तो इतना बोलती हैं मगर वक़्त आने पर इशारो में ही बात कर लेती है, पिया ने सबको नज़र नज़र में ही बता दिया. मेरी गांड फटे ही जा रही थी.

बड़ी इज्ज़त और प्यार से उसने डेरी मिल्क मेरे साथ शेयर की. अपुन तो बिलकुल सुन्न हो गए थे. हां….हुन्न….में ही टाइम निकल गया. वो बोली, “चलो मुझे घर छोड़ दो”

मैंने हकलाते हुए कहा, “त त तुम्हारी गाड़ी क क को क्या ह ह हुआ ”

“अरे वो अभी तक पंचर है”

मैं अपने बाप का स्कूटर लाया था. उसी पर हम दोनों निकले, बार बार “रब ने बना दी जोड़ी” याद आ रही थी. फर्क ये था की उसने पीछे से मेरे जांघ पर हाथ रखा हुआ था. बाबुराव में दिमाग तो होता नहीं……उसने तुरंत सर उठा कर सलाम दे दी………..एक दो स्पीड ब्रेकर कूदे तो उसके सोफ्ट सोफ्ट मम्मे भी मेरी पीठ पर आ धमके.

भले ही नवजोत की बहन थी….मगर थी तो पटाका……धीरे धीरे मैं भी रिलेक्स हो गया और जान बुझ कर एक दो बार जोर से ब्रेक मार दिया. वो तो जैसे ब्रेक लगने का ही इंतज़ार कर रही थी, मैं ब्रेक लगाता और वो अपना जोबन सीधे मेरी पीठ पर चिपका देती. उसके घर पहुँचते पहुँचते तो बाबुराव बगावत पर उतारू था. बड़ी मुश्किल से पेंट में बने तम्बू को सेट किया. वो उतरी और बोली, “जा रहे हो…..यार…….टाइम का पता ही नहीं चला…..भाई आनेवाला है ……मुझे फ़ोन लगाना…..प्लीज़ ??? बाय ”

मैं बड़ी शान से “तुझ में रब दीखता है” गुनगुनाते हुए अपने स्कूटर से घर आ गया. पूरा घर अँधेरे में डूबा था. मुझे समझ नहीं आया की क्या हुआ ?

अपनी चाबी से मैंने दरवाजा खोला, अन्दर गया तो देखा डायनिंग टेबल पर एक मोम बत्ती रखी है और चाची वहीँ पर बैठी थी. मैंने पूछा, “क्या हुआ चाची ?”

चाची से लम्बी सांस ली और बोली, “राम…गाँव में बिजली नहीं रहती समझ आता है, यहाँ तो इतने बड़े शहर में भी डब्बा गोल है. कुछ ट्रांसफार्मर ख़राब हो गया है. अब तो कल सुबह ही बिजली आएगी.”

मैंने इधर उधर देखा और पूछा, “सब लोग कहाँ है ? ”

चाची बोली, “राम राम लल्ला……इस उम्र में ही तेरी तो याददाश्त ख़तम हो गयी, अरे पड़ोस वाले सक्सेना जी के यहाँ शादी नहीं है क्या ? मरा तेरे चाचा का एक ही तो दोस्त है……विनोद सक्सेना……उसी के भाई की शादी है…….होटल राज विलास में है……..ठाठ है ……….बिजली नहीं थी तो भाभी ने मुझे बोल दिया की जमाना ख़राब है, चोरी चकारी का डर है……..और तू भी नहीं आया तो तुझे खाना भी खिलाना था……इसीलिए भई मैं तो नहीं गयी………गए भी इतनी दूर है……….एक डेड़ घंटा तो आने जाने में ही लग जाता है……”

चाची का मुंह भी फुल स्पीड में ही चलता है. १ मिनट का न्यूज़ अपडेट चाची से अच्छा तो स्टार न्यूज़ भी नहीं दे सकता. मुझे हंसी आ गयी…….

चाची बोली, ” हें लल्ला…..इस में हंसने की क्या बात हुयी ? ”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “नहीं चाची आज ऐसे ही हंसी आ रही है”

मोमबत्ती की टिमटिमाती हुयी रोशनी में चाची का चेहरा किसी कमसिन लड़की के जैसा मासूम लग रहा था. वो मेरे लिया खाना लेन उठी तो रौशनी से उनकी कमर चमकने लगी और धीरे धीरे मेरे अन्दर का शैतान जागने लगा………….

चाची ने खाना दिया और मेरे सामने अपने हाथो पर अपनी मुंह टिका कर बैठ गयी. मैंने देखा की रोटियों पर आज भी घी बहुत था. मैंने सोचा थोडा छेड़ लू……

मैंने कहा, “चाची क्या सच में घी खाने से सेहत ठीक रहती है…..?

चाची बोली, ” लो……तो फिर ? अरे लल्ला….घी तो अमृत है अमृत…….खाओ तो तो शरीर मजबूत……आँखों पर लगाओ तो आंखे साफ़……बालों पर लगाओ तो बाल काले और घने……गाँव में तो घी बहुत काम में आता है……तू तो घी खाया कर…..”

मैंने कहा, ” क्या होगा इतना घी खाने से……?”

चाची टेडी मुस्कान के साथ बोली, “तेरी लुगाई खुश रहेगी और क्या……..मैंने भी तुझे घी खिला खिला के सांड न बनाया तो बोलना…. ”

मैंने भी जवाब फेंका, ” कोनसा सांड, वो चाचा वाला…….जो दिन भर में 4 -5 गायों को ठोक देता था ? ”

चाची ने जोर से मेरे कंधे पर हाथ मारा और बेशर्मो की तरह हंसने लगी.

मैंने सोचा चाची से पूछ लूँ की सुबह किस बात पर नाराज़ हो गयी थी.

मैंने कहा, “चाची……व व व वो……स स सुबह……..आप गुस्सा हो गयी थी …….क्या हुआ ….?

चाची ने एक प् मुझे निहारा और फिर धीरे से बोली, “लल्ला……कल जो हो गया वो तो ठीक पर आज सुबह मैं तेरे कमरे में थी ये सब को पता था…..भाभी जी बाहर ही थी……कहीं अन्दर आ जाती तो……तू तो पूरा नादान ही है….मजाक हमेशा अच्छे नहीं लगते….”

साला……इसको कल रात की बात से दिक्कत नहीं……कहीं मेरी माँ हम दोनों को न पकड़ ले……इस डर से सुबह चाची गुस्सा हुयी………चलो…मैंने भी ठंडी सांस ली.

मैंने सोचा की चाची से पूछ ही लूँ……..की आखिर उनकी जांघ पर बने “बलमा” गोदने (tatoo) ..का क्या सीन है.

मैंने कहा, “चाची…..ए ए एक बात पुछु…..?”

चाची ने ऑंखें सिकोड़ कर मुझे देखा और बोली, “हम्म्म……पूछ ….”

“अ अ आप न न नाराज़ तो नहीं हो जाओगी ?

चाची ने मुझे टेडी नज़र से देखा और बोली, “नाराज़ होने की बात हुयी तो हो भी सकती हूँ…….बोल क्या बात है ?”

मेरी गांड फटी……..मैंने कहा, “न न नहीं…..व व वो…..ऐसे ही……कुछ नहीं ……”

चाची ने अपनी आखें तरेरी और थोड़ी कड़क आवाज़ में बोली…..” बता क्या बात है……? की करू तेरी शिकायत की तू हर रात जो कागज़ गंदे करता है…..”

भेन्चोद यह कहाँ फंस गया………

मैंने हिम्मत बटोरी, “व व व्वो…….आप नाराज़ मत होना…..प्लीज़…”

चाची ने गर्दन हिलाई……मैंने धीरे से कहा, “अ अ अ आपकी ज ज जांघ पर क्या लिखा है…….”

अब तीर कमान से निकल गया था. मैं अपने गांड की फटफटी पर ब्रेक लगाये बैठा था……फट तो रही थी मगर मैं कंट्रोल कर रहा था.

चाची की आंखे फ़ैल गयी. बोली, “राम…..कितना बेशरम है रे लल्ला…….बेशरम भी है और हिरसु भी…..ताका झांकी करने से बाज़ नहीं आया न तू……..”

गांड की फटफटी फुल स्पीड में निकल ली………

मैं सकपकाया….. “न न नहीं….चाची…….म म म मैं……नहीं करता …….ताक झांक……व व वो तो …..म म मुझे ……दिखा था……क क कुछ लिखा……था……इ इसलिए पूछ लिया………….प्लीज़…….पापा से मत बोल देना………प्लीज़….”

चाची ने फिर कातिल मुस्कान मारी…..”अरे मैं नाराज़ नहीं हुयी……मगर मुझे लगा की तू कहीं बिगड़ तो नहीं रहा…इस लिए तुझे डांट देती हूँ……बेकार चीजों में दिमाग लगाएगा तो फिर अपनी लुगाई का ध्यान कैसे रखेगा…..”

मेरी जान में जान आ गयी……मैंने कहा, “आप सिखाओगी तो सीख लूँगा की किस तरह ध्यान रखते है……..”

चाची ने मेरी नाक पकड़ कर कहा, ” समय आने पर सब सिखा दूंगी”

फिर वो उठी और बोली, “……चल मोमबत्ती अन्दर मेरे वाले कमरे में ले चल…….मुझे कपडे समेटने है. वहीँ मेरे पास बैठ कर बाते करना…मेरा काम भी हो जायेगा और मन भी बहलता रहेगा……”

बहुत शानी है…….पूरी बात ही गोल कर गयी…….मेरे दिमाग में कीड़ा कुलबुलाये जा रहा था की साला….यह जांघ पर लिखे बलमा का सीन क्या है…………

मैंने मोमबत्ती उठाई और चाची के रूम में चला गया, मोमबत्ती बेड के पास वाली टेबल पर रखी और बेड पर बेठ गया. चाची हाथ में धोये हुए कपडे लिए अन्दर आई और बेड के पास पटक कर निचे ही बैठ गयी. मोमबत्ती की टिमटिम रोशनी से पुरे रूम में अलग ही नज़ारा बन रहा था. अब मुझे समझ मे आया की केंडल लाइट डीनर इतना रोमांटिक क्यों होता है. मोमबत्ती की लो धीरे धीरे हिल रही थी और पुरे रूम में परछाईया बना रही थी. चाची का चेहरा भी मोमबती की टिमटिमाती रोशनी में बहुत ही मादक और सेक्सी लग रहा था.

कीड़ा कुलबुलाने लगा…….

मैंने पूछा, “चाची…….सब लोग कब तक आयेंगे….?”

चाची ने ठंडी सांस ली, “राम जाने लल्ला……भाभी कह रही थी की संगीत और नाच गाना है……अभी आधे घंटे पहले तो गए ही है…….अभी तो पहुंचे ही नहीं होगे…….12 -1 तो बज ही जाएगी……राम….अँधेरे में 4 घंटे क्या करेंगे……मरी इस गर्मी में तो नींद भी नहीं आएगी…..गाँव होता तो साड़ी खोल कर छत पर जाके लेट जाती…..यहाँ तो…. ”

मैंने सोचा चाची आप तो बस साड़ी खोल दो…..बाकि मैं संभाल लूँगा…..ये सोच कर मुझे हंसी आ गयी…..

“क्यों रे……आज बहुत हंसी छुट रही है…….क्या हुआ ?”, चाची ने मुस्कुराते हुए पूछा.

मेरी चोरी पकड़ी गयी, “न न नहीं……म म..मैं ….वो……कुछ नहीं चाची…..”

अचानक चाची की नज़र मेरी शर्ट के पॉकेट पर पड़ी. “यह क्या लल्ला……तेरी जेब में क्या है…..?”

मैंने नज़र झुका कर देखा. पिया ने जाते जाते मुझे “डेरी मिल्क सिल्क” दी थी. मैंने जेब में रख ली थी…..मोमबती की रोशनी में नीले रंग का रेपर चमक रहा था.
मैंने उसे बाहर निकला, पूरी नरम हो गयी थी……मैं समझ गया की यह तो पिघल गयी……

चाची बोली, “वाह रे लल्ला…..बचपना अभी तक गया नहीं तेरा…….टॉफी चोकलेट लिए घूमता है……राम….कोनसी चोकलेट है”

मैंने कहा, “डेरी मिल्क सिल्क”. चाची उछली, “अरे वोही जो चाट चाट कर खाते है……..टीवी पर दिखाते हैं न……..ला मुझे भी चखा न…….”

नेकी और पूछ पूछ……..चाची चाटने चाहे तो मैं कैसे मना कर सकता हूँ.

चाची ने रेपर खोला……चोकलेट सच में पिघल चुकी थी…….जैसे ही अन्दर का रेपर खोला……..चोकलेट का एक कतरा उसमे से निकल कर निचे गिरने लगा……चाची ने झट अपने मुंह खोला और टप से अपने मुंह में ले लिया……थोड़ी चोकलेट उनके होटों पर भी लग गयी.

एक और कतरा गिरा सीधा उनके सीने पर……जहाँ ब्लाउस शुरू होता है बस उसके १ इंच ऊपर………चाची ने अपने होटों पर लगी चोकलेट जुबान फेर कर साफ़ की.
अब “डेरी मिल्क सिल्क” तो “डेरी मिल्क सिल्क” है. पिघल तो चुकी ही थी ………जो रेले निकलना शुरू हुए…….चाची चाटे जा रही थी मगर चोकलेट भी टपके ही जा रही थी. दो तिन बार उनकी साड़ी पर गिर गयी………..चाची ने लालच छोड़ा और पास में पड़ी प्लेट में चोकलेट रख दी……

देखने लायक सीन हो गया था, चाची अपने दोनों हाथ फैलाये बैठी थी…..दोनों हाथों में चोकलेट लगी थी…..थोड़ी सी चाची के होटों पर और होटों के किनारे लगी थी और एक बेशरम चोकलेट की बूंद उनके उभारो के सल से 1 इंच ऊपर पड़ी इठला रही थी.

जिस तरह औरते मुंह सिकोड़ कर नीचे देखते हुए अपने ब्लाउस के हुक लगाती है वैसे ही चाची ने निचे देखा. मम्मो के थोडा सा ऊपर पड़ी चोकलेट उन्हें मुंह चिड़ा रही थी.
उन्होंने दोनों हाथ ऊपर उठा कर फैला लिए थे ताकि हाथों से चोकलेट कपड़ो और साड़ी पर न गिर जाये…..मगर इस चक्कर में उनका आंचल पूरा ढल गया था………….

मोमबत्ती की टिमटिमाती रोशनी में ब्लाउस में कसे दोनो मम्मे बाहर आने की जिद कर रहे थे. शायद उनको भी चोकलेट खानी थी. मैं तो बिंदास चाची के मम्मे निहार रहा था. चाची ने इधर उधर करके अपने दोनों हाथो को देखा और फिर अपने सीने पर पड़ी चोकलेट की बूंद को देखा…….

चाची के बदन की गर्मी से वो पिघल कर धीरे धीरे चाची के मम्मो के बिच की गली में जाने लगी थी…….

चाची ने कहा, “हाय राम……ये मरी सिल्क…….ऊई…..लल्ला…….अरे ये चोकलेट साफ़ कर दे…….नहीं तो अभी नहाना ही पड़ेगा……”

कुत्तो के दिन बदलते देर नहीं लगती……..

मैं थोडा आगे सरका……चोकलेट पिघल के करीब एक इंच नीचे आ गयी थी…….बस चाची के मम्मो के सल पर अटकी थी……मनो इज़ाज़त का इंतज़ार कर रही हो. मैं तो उपरवाले से प्रार्थना कर रहा था की साली चोकलेट घुस जाये चाची के सलों में. फिर मैं आराम से साफ़ कर दूंगा…….

नंगो के नौ ग्रह बलवान……….चोकलेट को मानो उपरवाले का आदेश हुआ. वो बड़े शान से चाची के मम्मो की घाटी में घुस गयी.

चाची जोर से चिल्लाई…”अरे गयी वो ….लल्ला देखता नहीं मेरे हाथों में चोकलेट लगी है…साफ़ कर न….”

मैं जैसे नींद से जगा, अपने सूखे होटों पर जुबान फेरते हुए मैंने कांपता हुआ अपना हाथ बढाया और जिस तरह तिलक लगाते है वैसे उल्टा किया……

पहले अंगूठा जहाँ बूंद गिरी थी वहां रखा और धीरे से निचे ले गया. चाची बोली, “हें लल्ला….साफ़ कर रहा है की फैला रहा है……”
मैंने चाची की बात अनसुनी कर दी और अपना अंगूठा उनके मम्मो के सल के बिच फसा दिया…..फिर मैंने धीरे से अपना पूरा हाथ उनके गले और मम्मो के बिच रख दिया. मैंने कहा, “चाची……ब ब बहुत स स सारी ….चोकलेट गिरी है…….” चाची ने बड़े आराम से कहा, “हाँ रे…..तू तो कर दे साफ़…..

अपनी ट्रेन को खुद रेल मंत्री से ग्रीन सिग्नल दे दिया तो फिर कहा रुकने वाले थे…….अपने हाथ से पहले चाची के गले के निचले हिस्से को सहलाया…..जो की औरतों का वीक स्पोट होता है…….शाहरुख़ खान भी तो काजोल की गर्दन पर ही किस करता है…….चाची की आंखे हलकी सी बंद हो गयी…..मोमबत्ती की लो फड़फडा रही थी और मेरी गांड और बाबुराव के बीच जंग हो रही थी. फटती हुयी गांड कह रही थी कि मत कर….मरेगा……और खड़ा हुआ बाबुराव कह रहा था कि चूतिये निशाना मत चुक.

जैस कि दुनिया जानती है कि चूल…यानि…..ठरक……का कोई इलाज नहीं है…….तो अपनी चूल जीत गयी और अपुन ने चाची के गले को सहलाते सहलाते धीरे से उनके मम्मे पर हाथ रख ही दिया…….

चाची ने एक दम से झटका खाया, मेरी तरफ देख कर बोली, “क्या कर रहा है लल्ला…..” . मैंने भी चाची कि आँखों में देखते हुए उनके ब्लाउस में हाथ डाला और उनके मम्मे को सहलाते हुए कहा. “चोकलेट साफ़ कर रहा हूँ चाची…….आप भी बच्चो जैसे चोकलेट खाती हो……” मेरे हाथ फेरने से चोकलेट पूरी तरह से चाची के मम्मे पर लग गयी थी. चाची की ऑंखें धीरे धीरे नशीली हो गयी……..वो धीरे से बोली, “ब ब बस लल्ला…….हो गयी साफ़…….” मगर उनकी आवाज़ में ताक़त नहीं थी……चाची का सोफ्ट सोफ्ट मम्मा मेरे हाथ में था और मैं चोकलेट से उसकी मालिश कर रहा था…….मेरी हथेली बार बार चाची के निप्पल से रगड़ खाती थी और उनके मुंह से आह निकल जाती थी……..मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने चाची की चूची जोर से दबा ली…….चाची की जैसे नींद खुली और वो जोर से बोली, “क्या कर रहा है हरामी…….हाथ बाहर निकाल….”

फटती हुयी गांड ने चिल्ला चिल्ला कर मना किया था की मत कर……….मगर बाबुराव के कहने पर ये सब हुआ……और अब जब चोरी पकड़ा गयी तो बाबुराव चुपचाप सिमट गया और उसने मुंह लटका लिया……..

चाची जोर से बोली, ” राम….बहुत ही बिगड़ गया है रे छोरे…..कोई शर्म लिहाज है की नहीं ?”

मैंने कहा, “च च च चाची…..आ आ आप ही ने तो क क क कहा था…….स स स साफ करने को……..”

चाची ने ऑंखें तरेरी, “साले हरामी……साफ़ करने को कहा था…….तू तो दबाने लगा……पुरे पर चोकलेट लगा दी…..अब नहाना ही पड़ेगा…..”

मैं तो कुछ बोलने की हालत में ही नहीं था…….चाची उठी और बाथरूम में गयी……मैं वहीँ उनके बेड पर बैठा रहा……१-२ मिनट बाद पानी की आवाज़ आई और चाची अन्दर से चिल्लाई…..”हे राम….कितना अँधेरा है…..कुछ भी नहीं दीखता……मरी ये बिजली भी आज ही जानी थी…….लल्ला…..अरे ओ….लल्ला….”

मैं फिर हकलाया…..”ह ह ह हाँ चाची……”

“अरे वो मोमबत्ती तो ला इधर……..”, चाची अन्दर से बोली.

मैंने कांपते हाथों से मोमबत्ती उठाई और बाथरूम की तरफ बड़ा. बाथरूम का डोर खुला था, और चाची मेरी ओर पीठ करके खड़ी थी. उन्होंने साडी उतार दी थी और सिर्फ ब्लाउस और पेटीकोट में खड़ी थी. मोमबत्ती की टिमटिमाती रोशनी में उनकी पेटीकोट में छुपे नितम्ब बहुत ही मारू लग रहे थे. उनका पेटीकोट उनके कमर के कटाव के सबसे बड़े हिस्से पर टिका था. ऐसा लग रहा था मानो पेटीकोट बस उनकी गांड की गोलों के दम पर ही टिका था वर्ना कब का गिर जाता. चाची अपना ब्लाउस खोल रही थी. मेरी तरफ पीठ होने से मुझे दिख तो कुछ भी नहीं रहा था मगर उनके हाथ चलने से उनकी विशाल गांड थरथरा रही थी. और उसको ऐसे हिलते देख मेरा मुंह खुला का खुला ही रह गया.

चाची बोली, “हाय राम….तू अन्दर क्यों आया ?”
मैं बोला, “च च च चाची…….आ आ आपने ही तो मोमबत्ती मांगी थी……..”

चाची बोली, ” हें….हाँ रे…..वो वहां पर रख दे…….हाँ…….अरे वो जहाँ शेम्पू रखा है……बस उसके पास…….हाय राम इधर मत देख बेशरम”

मैंने बहुत कोशिश की मगर पापी मन नहीं मान रहा था……. बार बार मेरी नज़र चाची की तरफ ही जा रही थी.

चाची का ब्लाउस आधा खुल चूका था…….जैसे ही वो यह सब बोलने के लिए मुड़ी मेरी नज़र सीधे चुम्बक के जैसे उनके आधे खुले ब्लाउस में से झांकते मम्मो पर जा चिपकी.

किसी ने सत्य ही कहा है की औरत के बदन की असकी कामुकता आधे ढके होने में है…..

पूरी नग्न औरत से तो आधी ढकी औरत ही ज्यादा सेक्सी लगती है……

चाची के ब्लाउस को सिर्फ दो हुक पूरी हिम्मत और ताकत के साथ संभाले हुए थे वर्ना वो तो फटने के लिए बेताब था. हमेशा की तरह चाची ने आज भी ब्रा नहीं पहनी थी, जो नज़ारा उभर के आया था वो किसी मरते आदमी की साँसें चालू कर देता और जिन्दा इंसान की साँसे बंद, मम्मे ब्लाउस में कसे इस कदर कसमसा रहे थे मनो हुको को तोड़ डालेंगे.

मोमबत्ती मेरे हाथ में थी और मेरा मुंह खुला का खुला ही था. चाची अब पूरी पलट के खड़ी हो गयी. उनका तराशा हुआ बदन सिर्फ ब्लाउस और पेटीकोट में मेरे सामने था. ब्लाउस के तो हाल आप जानते ही हो…..पेटीकोट चाची ने काफी नीचे बांधा था…उनकी मद मस्त नाभि मोमबत्ती की रौशनी में कुए जैसी दिख रही थी. चाची ने अपने हाथ अपने मम्मो के ऊपर रख लिए और चिल्लाई….”अरे हरामी……बाहर क्यों नहीं जाता……निकल बाहर…..” और पलट के अपने ब्लाउस के बचे खुचे हुक खोलने लगी.

मैं सकपकाते हुए बाहर जाने लगा तो वो फिर चिल्लाई “अरे ये मरी मोमबत्ती तो रखता जा….”

मैंने कांपते हुए हाथों से मोमबत्ती को ग्लास की रेक पर रखा और पलट के जाने लगा. मोमबत्ती ढंग से टिकी नहीं थी.
जैसे ही मैं मुड़ा. मोमबत्ती नीचे गिरी और बुझ गयी.

पूरा बाथरूम घुप्प अँधेरे में हो गया. कुछ भी नहीं दिख रहा था.

चाची जोर से चिल्लाई. ” हाय राम……जान नहीं है क्या हाथों में……जा माचिस ला…..कहा गयी मोमबत्ती….”

मैं माचिस लेन की बजाये फर्श पर टटोल टटोल के मोमबत्ती ढूंढ़ने लगा……तभी मेरा हाथ चाची के हाथ से टकराया…चाची भी मोमबत्ती ढूंढ़ रही थी.

कीड़ा कुलबुलाने लगा…..

मैंने थोडा हाथ आगे बढाया और चाची की तरह आगे बड़ा…….अचानक मेरे हाथ से कुछ कड़क सा टकराया…..मुझे समझ नहीं आया की ये क्या है…..मैं बैठा था और मेरे हाथ चाची के सीने की ओर थे…….मुझे लगा शायद चाची का मंगल सूत्र है…..मैंने फिर हाथ बढाया और अब की बार मेरे हाथ से कुछ नरम नरम सा टकराया…….

मैं वहीं पर रुक गया…….मेरी नसे सनसनाने लगी…….जो मेरे हाथ से टकराया था वो चाची का खड़ा हुआ निप्पल था.
चाची ने अपना ब्लाउस पूरा खोल लिया था.

मैंने हिम्मत की और फिर से अपने हाथ बढाया……मेरा हाथ सीधे लेजर बोम्ब की तरह निशाने पर गया और चाची के मम्मे से जा टकराया…..मैंने अपने हाथ वही पर रख दिया और चुतिया बनाने के लिए कहने लगा…..
“अरे च च चाची……आ आ आप हो क्या…”

चाची दबी हुयी जुबान से बोली, “ओर क्या हरामी यहाँ पे माधुरी दीक्षीत थोड़ी बैठी है. हाथ हटा……”
मैंने हाथ नहीं हटाया और चाची के मम्मे को हाथ में ले लिया और धीर धीर दबाते हुए बोला, “न न नहीं च च चाची आप थोड़ी हो……ये तो शायद नहाने का स्पंज है……” मैंने दबाना बंद नहीं किया…….

मेरी गांड फटे जा रही थी मगर खुदा की कसम क्या मज़ा आ रहा था…..चाची का मम्मा मेरे हाथो में तो समां नहीं पा रहा था मगर इतना सोफ्ट था की सचमुच का स्पंज हो.

चाची जोर से बोली, ” हरामी छोड़…..”
मैंने भी हिम्मत पकड़ी, “क्या छोडू च च चाची…….”

चाची ने अब आवाज़ धीरे की और बोली, “मेरा बोबा……..छोड़ हरामी………मेरा मम्मा …..छोड़ कमीने….”

मैंने समझ लिया की चाची को गुस्सा आ गया है……..मैंने बहुत मुश्किल से चाची के मम्मो को छोड़ दिया.

चाची बोली, “लल्ला……बहुत ही बेशरम हो गया है रे……..कुछ लाज शरम है की नहीं……..”

पूरा घुप्प अँधेरा था. मुझे लगा की चाची मुस्कुरा रही है मगर साला कन्फर्म नहीं था………अगर सच में गुस्सा हुयी तो…..ये सोच कर मेरी गांड फटने लगी.

मैंने कहा, “च च च चाची म म मैं माचिस ले आता हूँ……..”

चाची बोली, “नहीं…..तू यहीं पर रुक……अँधेरे में न जाने क्या गिराएगा क्या तोड़ेगा…….मुझे पता है माचिस कहाँ है…….यहीं रुक जा…..”

मैं कुछ बोलता उसके पहले चाची के आगे बड़ने की आवाज़ आई और वो अँधेरे में टटोलते टटोलते बाथरूम से बहार जाने लगी. बहुत ही हलकी सी रोशनी रोशनदान से आ रही थी. मुझे सिर्फ चाची कहाँ है ये दिखाई दे रहा था मगर उनके नंगे मम्मे और चिकनी कमर अँधेरे में छुपे बैठे थे. चाची ने अपने दोनों हाथ आगे बढाकर चलना शुरू किया और उनका हाथ मेरे बेल्ट के बक्कल से जा टकराया. वो बोली, ” हें ये मरा नल यहाँ कहाँ से आ गया” और उन्होंने अपने हाथ सीधा मेरे जींस की चेन पर रख दिया. जी हाँ…..सीधा मेरे मासूम बाबुराव पर…….मैंने और बाबुराव दोनों ने झटका खाया……..तभी चाची ने जोर से मेरा बाबुराव जींस के ऊपर से ही दबा दिया, मेरे मुंह से आह निकल गयी, चाची बोली, ” हाय राम…….ये तू है क्या लल्ला ? मुझे लगा की नल है और उसपे कपडा पड़ा है……..परे हट…….”

साली चाची मेरे साथ मेरा ही गेम खेल गयी. मुझे तो ये ही समझ नहीं आ रहा था की वो चाहती क्या है ? उनकी बातों से कभी लगता की ठुकवाने को बेकरार है और कभी एकदम सती सावित्री बन जाती.

चाची बाथरूम से बाहर निकल गयी और मैं गंगू गमने जैसा बाथरूम में ही खड़ा रहा.

सच में त्रिया चरित्र किसी के बाप के समझ में नहीं आया होगा. साली….चाची की सारे हाव भाव येही बताते है की उनकी क्या इच्छा है…….मैं उनकी आँखों के वो गुलाबी डोरे और उनकी वो टेडी मुस्कान नहीं भूल पा रहा था जब उन्होंने मेरा लंड हिला हिला कर मेरा पानी निकाल दिया था. मगर वो नाराज़ होती तो मेरी गांड की फटफटी स्टार्ट हो जाती………

बाहर रूम से बर्तन गिरने की आवाज़ आई. अँधेरे में उस आवाज़ से मानो पूरा घर कांप गया. मैंने पूछा, “चाची……क .क…क्या हुआ……”

कोई जवाब नहीं आया……मैं धीरे धीरे बाथरूम से निकला और चाची के बेड के पास से टटोलता टटोलता आगे गया तभी चाची बोली, “लल्ला……दूध का ग्लास गिर गया” मैंने कहाँ, “चाची आ आ आपको लगी तो नहीं……….”.

चाची बोली, ” नहीं रे…….मरा मेरा पेटीकोट मेरे पाँव में उलझा और मेरा बेलेंस बिगड़ गया……..पूरा पेटीकोट दूध में हो गया…….हाय राम यह मरी बिजली भी……”

तभी कपडा सरकने की आवाज़ आई. मैं समझ गया की चाची ने अपना गीला पेटीकोट भी उतार दिया था.

इसका मतलब चाची सिर्फ पेंटी में थी. सिर्फ पेंटी में…….और मैं उनसे कुछ कदम की दुरी पर था. बाबुराव ऐसा उफान पर आया जैसे सुनामी हो……मुझे लगा की मेरी जींस ही फटेगी आज तो….

ये तो पक्का था की मेरी किस्मत भले ही गधे के लंड से लिखी है मगर वो गधा जरुर बड़े लंड वाला था .

मैंने पूछा, “च च चाची…..मा मा माचिस मिली क्या ?”

चाची की आवाज़ ठीक मेरे सामने से ही आई. “नहीं रे लल्ला…….नहीं मिली……तेरे चाचा भी तो रात में बीडी पीते है…..कहीं रख दी होगी……..”

मुझे एहसास हुआ की चाची ठीक मेरे सामने से निकली, बहुत ही हलकी सी रौशनी थी……मैं उनके पीछे पीछे गया.

मुझे बहुत ही हल्का सा दिख रहा था मैं चाची के ठीक पीछे था. अचानक चाची रुक गयी और मैं उनके पिछवाड़े से जा टकराया. मेरा भी बेलेंस बिगड़ा और सँभालने के लिया मैंने चाची को पकड़ा. चाची ने सिवाय पेंटी के कुछ भी नहीं पहना था. मेरा हाथ सीधे उनके कंधे पर पड़ा और मैंने उनका कन्धा पकड़ लिया. इस कशमकश में चाची का भी बेलेंस बिगड़ा और हम दोनों निचे आ गिरे.

पहले मैं गिरा और चाची मेरे ऊपर. चाची मुझे पर इस तरह से गिरी की उनके मम्मे सीधे मेरे हाथो पर फिट हो गए.

चाची जोर से चिल्लाई, “हाय राम……….”

मैं भी जोर से चिल्लाया, “आ आ आ आह….”

चाची मुझ पर से उठने लगी और मैं भी उन्हें उठाने लगा. चाची ने पूछा, “क्या हुआ लल्ला…….गिरा कैसे…”

मैं न तो चाची तो जवाब दे पा रहा था और न ही उनके नमकीन बदन का आनंद ले पा रहा था. मैंने अपने निचे टटोल कर देखा, दूध का ग्लास था.
भेनचोद…….मैं सीधा दूध के ग्लास पर गिरा था. ग्लास तो चकनाचूर हो गया था मगर मेरी गांड पर बहुत जोर से लगी थी. मैं फिर से चिल्लाया,
“चाची पीछे हटो……..ग्लास फुट गया है……आपको कांच चुभ जायेगा”

चाची बोली, “हाय राम लल्ला……तुझे लगी तो नहीं…….तू ग्लास पर ही गिरा क्या ? रुक हिलना मत मैं माचिस लायी….”

ऐसे अँधेरे में हिल कर भी क्या करता. मेरी गांड फट रही थी की मैं टूटे कांच पर बैठा हूँ कहीं इधर उधर घुस गया तो…………??

अबकी बार चाची को माचिस मिल गयी. चाची ने झट से माचिस जलाई और रूम में हलकी हलकी रौशनी हो गयी. भले ही मेरी गांड जोर से दुःख रही थी मगर जो नज़ारा दिखा उसको देख के तो इंसान बिना बेहोशी की दवा के भी ओपरेशन करा ले…….अभी तक तो मैं गेस कर रहा था की चाची ने ब्लाउस और पेटीकोट खोल लिया है और उन्होंने ब्रा नहीं पहनी है सिर्फ पेंटी में है. मगर रोशनी आने के बाद तो मेरे सिस्टम ही हेंग हो गया.

चाची के मम्मे रोशनी में मुस्कुरा उठे……उनकी कमर पर थोड़ी ही रौशनी और थोडा सा अँधेरा था. अजंता की मूरत लग रही थी. मेरी नज़र निचे और निचे गयी.

चाची ने सिर्फ पेंटी पहनी हुयी थी. मगर वो फूल पत्तो की प्रिंट वाली नहीं बल्कि लेस वाली थी. काफी छोटी और घुमाव वाली. सामान्य कोटन पेंटी तो काफी बड़ी होती है मगर ये ब्लेक कलर की पेंटी तो बड़ी मुश्किल से चाची की मुनिया को छुपाये थी. चाची की मुनिया……..यानि चिकनी चमेली…….वो जिसको चाची ने थोड़े समय पहले ही साफ़ किया था…….

सन सनन साय साय फिर से होने लगी. मेरी नज़र उनके बदन को सहलाने लगी. तभी मेरी गांड में शीशे का टुकड़ा चुभ गया और मेरे मुंह से फिर से आह निकल गयी.

चाची के चेहरे कर चिंता के भाव आ गए. वो बोली, “लल्ला…….बिलकुल मत हिलना रे………कांच है……..घुस गए तो मुसीबत हो जाएगी……रुक जा मैं मोम्बाती लाती हूँ.”

ये कहकर चाची बाथरूम की ओर गयी और मेरा तो बी पी बढ़ गया. उस कसी पेंटी में चाची के कुल्हे ऐसे मटक रहे थे जैसे जेली हो. पेंटी ने चाची के कुलहो को छुपाया नहीं बल्की और उभार दिया था. मेरे जैसे गोल गांड के रसिया के लिए तो ये नज़ारा फ्रेम करा के रखने वाला था. उनके हर कदम पर उनके नितम्ब भी थाप दे रहे थे.

चाची ने मोमबत्ती जलाई और मेरे पास आई उन्होंने फिर से टॉवेल लपेट लिया था, मगर उस उफनती हुयी जवानी को वो बेचारा कहाँ छुपा पाता. चाची के मम्मे भी उछल उछल कर बाहर आ रहे थे. चाची मेरे पास आकर खड़ी हुयी और मोमबत्ती टेबल पर रख दी. मोमबत्ती की टिमटिमाती रौशनी चाची के बदन से खेलने लगी.

चाची ने कहा, “धीरे से उठना लल्ला…….देख कहीं कांच न चुभ जाए……”

मैं उठने लगा और जैसे ही खड़ा हुआ मेरे कुलहो में जोर से दर्द हुआ, मेरी आह निकल गयी और चाची ने पुछा, “हाय राम क्या हुआ लल्ला……हड्डी तो नहीं खिसक गयी”

चाची ने मुझे पलटाया और उनके मुंह से सिसकारी निकल गयी, “हाय राम लल्ला……तेरे पुठ्ठो पर तो कांच लग गया है…….”

मेरी गांड पर कांच……? हे भगवान …….

मैं धीरे धीरे खड़ा हुआ और मेरी गांड का हालचाल देखने लगा, मगर कुछ नहीं दिख रहा था. चाची बोली, “लल्ला…..रुक जा……अरे राम……मुझे देखने दे….”

मैं बेबस लचर होकर चुपचाप खड़ा हो गया और चाची मेरी घायल गांड का मुआयना करने लगी. उन्होंने कुछ कांच के टुकड़े मेरी जींस के ऊपर से हटाये और बोली,

“लल्ला…….खून आ गया है रे…….और कांच के बारीक़ टुकड़े जींस के अन्दर तक घुस गए है. तू एक काम कर …….तू जींस उतार दे……..”

मैंने जींस धीरे से उतारी. मेरे पुट्ठो में जलन मची हुयी थी. मैं जींस साइड में रख कर चाची की तरफ गांड करके खड़ा हो गया, चाची बेड पर बैठ गयी और मेरी गांड पर से कांच के टुकड़े हटाने लगी. वो बोली, “राम राम……..बच गया रे……कोई बड़ा टुकड़ा नहीं घुसा नहीं तो न बैठने का रहता न लेटने का……..” यह कहकर वो धीमे धीमे से हंसने लगी. मुझे गुस्सा आया कि साला यहाँ पर मेरी गांड का भुरता बन गया और चाची को हंसी आ रही है…….इस चाची को तो मैं बताऊंगा.

तभी मुझे कुछ चुभा. मैंने कहा, “च च चाची……अभी भी कांच लगा है क्या ? म म मुझे चुभ रहा है…..”

चाची ने मेरी गांड को पास में से घुरा और बोली, “नहीं रे लल्ला……अब तो कुछ नहीं दीखता……मगर हो सके है की कुछ बारीक़ टुकड़े रह गए हो…..तू एक काम कर…
यह अंडरवियर भी उतार……एक तो यह मरी मोमबत्ती में यूँही नहीं दिख रहा…..”

मेरी गांड फट रही थी की कहीं कांच वांच रह गया तो ……..

मैंने तुरंत अंडरवियर उतारी और अपने प्रिय बाबुराव को अपने हाथों से छुपाकर खड़ा हो गया. अभी भी मेरी गांड चाची की तरफ थी मगर अब पासा बदल गया था.
कहाँ तो मैं चाची को नंगा देखना चाह रहा था और कहाँ मैं खुद नंगा खड़ा था…..किस्मत है.

चाची बोली, “शुक्र है राम जी का……..खून तो छिलने से आया है……कांच तो नहीं घुसा और बस थोड़े से टुकड़े चिपके है…….हटाये देती हूँ ”

चाची ने हलके हलके हाथों से मेरी गांड पर चिपके कांच के टुकड़े साफ़ किये. किसी भी मर्द के नितम्ब उसके गोटों जैसे ही संवेदनशील होते है. चाची के हलके हाथ और टुकड़े हटाने की हलकी हलकी थाप से मुझे अजीब से गुदगुदी हो रही थी. धीरे धीरे मुझे मज़ा आने लगा और बाबुराव ने भी सर उठा लिया. मैंने उसको अपने हाथों में छुपाये रखा. मगर चाची इतने प्यार से हौले हौले सहला रही थी की कमीना बार बार सर उठा कर देख रहा था.

चाची बोली, “लल्ला……कांच तो अब नहीं है…..मगर ये मरी मोमबत्ती में कुछ दिख नहीं रहा……तू बिस्तर पर लेट जा……..एक बार ढंग से देख लूँ….हें……?

मैं चुप चाप बिस्तर पर पेट के बल लेट गया. चाची ने मोम्बाती बेड के कोर्नर पर रखी और मेरे बिलकुल पास पालथी मार कर बैठ गयी. उनके इस तरह से बैठने से उनका बंधा हुआ टोवल थोडा सा खुल गया और उनकी चिकनी जांघें दिखाई देने लगी……उनका पूरा ध्यान मेरी घायल गांड पर था और मेरा पूरा ध्यान उनके जांघ पर लिखे “बलमा” पर था. न जाने क्यों मैं जब भी चाची की जांघ का टेटू देखता मेरा बाबुराव सनक जाता…..पहले से ही कंट्रोल में नहीं था मगर अब तो उसने बगावत ही कर दी. मैं पेट के बल लेटा था इस तरह मैंने बाबुराव को अपने पेट से चिपका कर फंसा लिया था ताकि वो सर न उठा सके. मगर अब वो कुलबुलाने लगा और मेरी हालत ख़राब होने लगी.

इधर चाची मेरी गांड का मुआयना ऐसे कर रही थी जैसे रोड के उद्घाटन से पहले इंजिनियर साहब करते है. वो मेरी गांड पर मस्ती से हाथ फेर रही थी और उनके एक एक स्पर्श से मेरी नसे सनसना रही थी. उन्होंने उनके हाथ से मेरी टांगो को खोलने की कोशिश की. मैंने नहीं खोली क्यूँ की मुझे डर था की कहीं उन्हें मेरी गुस्से में फुफकारता शेषनाग दिख गया तो. चाची बोली, “लल्ला……जरा इधर भी देखने दे बेटा……..कहीं इधर उधर कांच चुभ गया तो बाद में दिक्कत ना हो,,,”

भेनचोद….दिक्कत तो अभी हो रही थी…….मेरा बाबुराव अब दुखने लगा था. मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी टंगे चौड़ी की…….और बाबुराव को और जोर से दबा लिया.
चाची ने धीरे से मेरे गोटों को सहलाया मानो सच में चेक कर रही हो की कांच तो नहीं चुभा. मेरी सांसें बंद होने लगी……..तभी चाची ने नाखुनो से मेरे गोटों को रगड़ दिया. मेरे मुंह से आह निकल गयी. चाची बोली, “हाय राम……दुःख रहा है क्या लल्ला…….

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